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6 महीने बाद रिहा हुए सज्जाद लोन, PDP नेता वाहीन: उमर-महबूबा-फारुक अब भी हिरासत में

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 निष्क्रिय होने के बाद एहतियातन हिरासत में रखे गए नेताओं को अब धीरे-धीरे रिहा किया जा रहा है। इसी क्रम में आज यानी बुधवार को पिपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और पीडीपी नेता वाहीन पारा को पूरे 6 महीने बाद एमएलए हॉस्टल से मुक्त कर दिया गया। दोनों नेताओं को अब हाउस अरेस्ट में रखा जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि लोन और पारा की रिहाई के बाद अब कुल 13 नेता एहतियातन हिरासत में एमएलए हॉस्टल में बंद हैं। हॉस्टल को फिलहाल अस्थाई उप-कारागार में तब्दील कर दिया गया है।

इससे पहले मंगलवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर में वाची से पीडीपी के पूर्व विधायक एजाज अहमद मीर और व्यापारियों के नेता शकील अहमद कलंदर को रिहा किया था। कलंदर फेडरेशन चेम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज, कश्मीर के अध्यक्ष थे। इसके अलावा इससे पहले चार अन्य नेता भी रिहा हुए थे।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त किए जाने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख’ में बाँटे जाने के बाद यहाँ के तमाम नेताओं, कार्यकर्ताओं और व्यापारी नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इनमें से समय के साथ कईयों को रिहा कर दिया गया था और बाकियों को रिहा करने की प्रक्रिया जारी है। यहाँ बता दें, कई नेताओं की रिहाई के बाद भी, अभी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला तथा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती हिरासत में ही हैं।

राजनीतिक विश्लेषक गुंजा कपूर के साथ शाहीन बाग में बदसलूकी, Video वायरल

शाहीन बाग में बुधवार (फरवरी 5, 2020) को सीएए के विरोध में बैठी महिला प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार गुंजा कपूर को बुर्का पहनकर प्रदर्शनस्थल का वीडियो बनाने पर घेर लिया और उनसे बदसलूकी की। इन महिलाओं ने गुंजा को पकड़कर सवाल उठाया कि आखिर वो इस प्रदर्शन में बुर्का पहनकर क्यों आईं?

इस वाकये के वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस गुंजा को वहाँ मौजूद महिलाओं से बचाकर प्रदर्शन से बाहर ले जा रही है। लेकिन महिलाएँ लगातार उनके साथ खींचतान कर रही हैं। इसके अलावा, एक अन्य वीडियो में भी देखा जा सकता है कि किस तरह वहाँ मौजूद महिला प्रदर्शनकारी गुंजा पर नाराज हो रही हैं और बार-बार सवाल कर रही हैं कि आखिर वो बुर्का पहनकर उनके प्रदर्शन में क्यों आई और उन्हें बुर्का किसने दिया। वीडियो में सुना जा सकता है कि एक महिला लीगल नोटिस और वकील बुलाने की बात भी कह रही है।

ताजा जानकारी के अनुसार, एक ओर जहाँ, दिल्ली पुलिस गुंजा को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर रही हैं, वहीं, दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी गुंजा कपूर को लेकर बहुत से सवाल उठ रहे हैं। उनकी वीडियो शेयर करके-करके पूछा जा रहा है कि आखिर उन्होंने बुर्का क्यों पहना? वो वहाँ क्या रिकॉर्ड कर रही थीं? या वो वहाँ क्यों गई थीं?

मगर, यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि पिछले 2 महीनों में इन प्रदर्शनों में दूसरे धर्म की कई ऐसी महिलाएँ शामिल हुई हैं, जिन्होंने इन महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए बुर्का और हिजाब पहना।

अभी पिछले महीने जनवरी में ही इन प्रदर्शनों में से कुछ फोटो वायरल हुई थी। जिसमें जंतर मंतर पर ‘आजाद वुमेन फॉर आजादी’ प्रोटेस्ट में इंदुलेखा नाम की महिला ने प्रदर्शन में शामिल होने के दौरान हिजाब पहना था और एक पट्टी लेकर फोटो खिंचवाई थी। जिस पर लिखा था, “श्रीमान मोदी। मैं इंदुलेखा हूँ। मुझे मेरी ड्रेस से पहचानो।”

इसके अलावा कई और भी महिलाएँ थी, जिन्होंने अपना धर्म अलग होने के बावजूद इन महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाई थी। इसलिए, सवाल उठता है कि जब उन महिलाओं पर उंगली नहीं उठी, तो गुंजा से सवाल क्यों? जाहिर है, उनकी राजनीतिक विचारधारा के कारण। दरअसल, इन महिलाओं को डर है कि इनके प्रदर्शन पर गुंजा प्रदर्शन स्थल से कई ऐसी चीजों को रिकॉर्ड करके दुनिया के सामने पेश कर देंगी, जिससे उनकी फजीहत होगी, जैसे अब तक होती रही है।

सोशल मीडिया पर सीएए के ख़िलाफ़ मत रखने वाले कई समुदाय विशेष और वामपंथी गिरोह के लोग गुंजा को भाजपा का सदस्य बता रहे हैं। साथ ही उन पर जासूसी का आरोप लगा रहे हैं।

गौरतलब है कि इन दिनों शाहीन बाग पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने कई कड़े नियम बनाए हुए हैं। वे केवल चुनिंदा मीडिया हाउस के लोगों को वहाँ वीडियो बनाने की इजाजत देते हैं। क्योंकि उन पर प्रदर्शनकारियों को यकीन होता है कि वे उनके ख़िलाफ़ मीडिया में कुछ नहीं चलाएँगे। इसके अलावा कुछ मीडिया हाउस को वहाँ केवल लाइव करने की इजाजत हैं। एंट्री प्वाइट पर वहाँ Voluteers खड़े हुए हैं। जो किसी को भी संदिग्ध पाने पर उनका बैग चेक करते हैं और आईडी प्रूफ देखते हैं। अगर फिर भी उन्हें किसी चीज पर शक होता है, या उन्हें लगता है कि कोई ऐसी वीडियो बना रहा हैं या फोटो खींच रहा है, जिससे मामला उनके ख़िलाफ़ चला जाएगा, वो तुरंत उस वीडियो को डिलीट करवा देते हैं।

ऐसे में गुंजा कपूर के साथ उनका ये बर्ताव शर्मनाक जरूर है, लेकिन हैरान करने वाला नहीं। क्योंकि वहाँ पिछले कई दिनों से दूसरी विचारधारा के लोगों के साथ यही सब हो रहा है। आपको बता दें कि ऑपइंडिया ने गुंजा से बात करने का प्रयास किया लेकिन इस समय उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। जैसे ही उनसे बात होगी, हम अपनी रिपोर्ट को उनके बयान के साथ अपडेट करेंगे।

मैं हूँ आम आदमी: AAP का नेता निकला शाहीन बाग में गोली चलाने वाला कपिल गुर्जर

शाहीन बाग़ में भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाले पोस्टर: नक्शों में उत्तर-पूर्व को देश से कटा हुआ दिखाया

UP: गौ-हत्या मामले में दो गिरफ्तार, इमरान का लाइसेंस होगा रद्द

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बुधवार (फरवरी 05, 2020) को कार में गौमांस (बीफ़) ले जाते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह घटना यूपी के मुजफ्फरनगर में स्थित शामली जिले के कंधला शहर की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, थाना प्रभारी सुशील कुमार दुबे ने बताया कि पुलिस ने गंगेरू रोड पर जब एक ऐसी कार को रोका, जिसमें गौमांस को मीट की दुकान ले जाया जा रहा था। जिसके बाद कार सवार दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान आरोपितों ने दुकान के मालिक इमरान के लावारिस पशुओं की हत्या में शामिल होने का खुलासा किया। इसके बाद पुलिस ने कानून का उल्लंघन करने के मामले में इमरान का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश में गोमांस की तस्करी की ऐसी ही घटनाएँ सामने आती रही हैं। यहाँ तक कि अपराधी तस्करी करने के लिए नए-नए तरीके भी इस्तेमाल करते नजर आते हैं। विगत वर्ष अक्टूबर माह में यूपी के सीतापुर में पुलिस ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का स्टीकर लगाकर गौमांस की तस्करी करने वाले 5 शातिरों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 24 क्विंटल प्रतिबंधित मांस के अलावा 4 गाड़ियाँ और एक बाइक बरामद की गई थी। पकड़े गए आरोपित इस गौमांस की सप्लाई लखनऊ करते थे।

10 बच्चों पर एक नर्स: कोटा के उस अस्पताल की हकीकत, जहाँ मर गए 100 से ज्यादा नवजात

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार (फरवरी 04, 2020) को बताया कि कोटा के जिस अस्पताल में पिछले साल 100 से अधिक नवजातों की जान गई, उस अस्पताल का दौरा करने पर केंद्रीय दल ने पाया कि वहाँ रोगियों के लिए न ही पर्याप्त संख्या में बिस्तर थे और न ही अस्पताल में कई आवश्यक उपकरण काम कर रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य सभा को दी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर में कोटा के जेके लोन अस्पताल में सौ बच्चों की मौत से खासा बवाल मचा था और इसके चलते राजस्थान सरकार की काफी फजीहत हुई थी। विपक्ष ही नहीं बल्कि खुद राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी।

राज्य सभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि केंद्रीय दल द्वारा पेश रिपोर्ट के अनुसार, कोटा के जेके लोन अस्पताल में 70 नवजातों की मौत नवजात आईसीयू (Neonatal Intensive Care Unit) में और 30 की मौत बाल चिकित्सा आईसीयू (Paediatric Intensive Care Unit) में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, जान गँवाने वाले ज्यादातर नवजातों का वजन जन्म के समय कम था। इनमें से 63% मौत अस्पताल में भर्ती किए जाने के 24 घंटे से भी कम समय में हुई।

तय मानकों के अनुसार नहीं थी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएँ

अश्विनी चौबे ने कहा कि केंद्रीय दल की रिपोर्ट के अनुसार, मौत के ज्यादातर मामले बूंदी के जिला अस्पताल तथा बरन के जिला अस्पताल से रेफर किए गए थे। राज्य सभा में उन्होंने बताया कि केंद्रीय दल की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में नवजात आईसीयू तथा बाल चिकित्सा आईसीयू में बिस्तर तथा नर्स का अनुपात 2:1 के मानक अनुपात की तुलना में क्रमश: 10:1 और 6:1 का पाया गया था। साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्रीय दल की रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि अस्पताल में कई उपकरण काम नहीं कर रहे थे तथा उपकरणों के रख-रखाव संबंधी कोई नीति भी नहीं थी।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने बताया कि इस मामले में केंद्रीय दल ने उप जिला स्तर पर प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मजबूत बनाने के अलावा, बुनियादी अवसंरचना को मजबूत करने, पर्याप्त कार्यबल ओर मानक क्लीनिकल प्रोटोकॉल का उपयोग करने की सिफारिश की है।

कपिल गुर्जर को पार्टी में लाने वाले आप नेताओं पर हो देशद्रोह का मुकदमा, हम नहीं देंगे साथ: दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष

दिल्ली शाहीन बाग धरने के करीब हवाई फायरिंग करने वाले कपिल गुर्जर को लेकर दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ही छात्रों पर हमला करवा रही है। अब यह साफ़ हो गया है कि शाहीन बाग में फायरिंग किसने करवाई थी और कपिल गुर्जर को कौन लेकर आया था? अब जरूरत पड़ने पर कॉन्ग्रेस सरकार बनाने के लिए आम आदमी को अपना समर्थन नहीं देगी।

सुभाष चोपड़ा ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि, केजरीवाल जो पहले एक कमरे में रहने की बात करते थे, आज वह 4 एकड़ में बने आलीशान मकान में रह रहे हैं। इतना ही नहीं वह पिछले करीब डेढ़ महीने से घर में बैठकर तमाशा देख रहे हैं। दिल्ली में छात्रों पर हमला हो रहे हैं, अगर बच्चे ही दिल्ली में सुरक्षित नहीं हैं, तो कौन सुरक्षित है? लेकिन अब साफ़ हो गया है कि इन हमलों के पीछे किसका हाथ है और दिल्ली में कपिल गुर्जर को कौन लेकर आया था।

ऐसे में कपिल गुर्जर को पार्टी में शामिल करने वाले आप नेता संजय सिंह और आतिशी के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करना चाहिए, क्योंकि दोनों ने एक समुदाय के ख़िलाफ़ साजिश रची है।

कॉन्ग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने दिल्ली चुनाव परिणामों से पहले यह भी साफ़ कर दिया कि अग़र दिल्ली में आप सरकार की सीटें पूर्ण बहुमत से कम रह जाती हैं तो कॉन्ग्रेस पार्टी आप का समर्थन नहीं करेगी।

आपको बता दें कि बीते दिनों दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के ख़िलाफ़ धरने के करीब पहुँचकर कपिल गुर्जर ने अचानक से तीन राउंड हवाई फायरिंग कर दी थी। हालाँकि, तत्काल मौके पर तैनान पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया था। हिरासत में लेने के बाद कपिल ने कहा था कि यह हिंदुस्तान है, यहाँ केवल हिंदुओं की ही चलेगी। वहीं क्राइम ब्रांच ने जाँच में पाया कि नोएडा निवासी कपिल गुर्जर आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, जिसने अपने पिता के साथ 2019 में ही आप की सदस्यता ले ली थी। वहीं इस खुलासे के बाद बीजेपी और कॉन्ग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा है।

श्रीनगर में चेक पोस्ट पर आतंकी हमला: 2 आतंकी मारे गए, एक गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर में बुधवार (फरवरी 05, 2020) को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में भारतीय सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया है। बुधवार सुबह श्रीनगर में आतंकियों ने श्रीनगर के पारिम पोरा चेक पोस्ट पर हमला कर दिया। हालाँकि इस दौरान सीआरपीएफ के एक जवान वीरगति को प्राप्त हुए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया है कि आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियाँ चलाईं थी। जवाबी कार्रवाई के बाद मुठभेड़ शुरू हुई। सुरक्षाबलों ने इस हमले का मुँह तोड़ जवाब देते हुए दो आतंकवादी मार गिराए। साथ ही, सुरक्षाबलों ने एक घायल आतंकवादी को गिरफ्तार भी कर लिया है। गिरफ्तार किए गए इस आतंकवादी से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं।


बेटी के प्रेमी को अब्बा आशिक ने अशरफ संग मिलकर मार डाला, नाटक रचा ट्रेन से एक्सिडेंट का

मध्य प्रदेश के सागर जिले में अपने ही गाँव की एक लड़की से प्रेम करना युवक को महँगा पड़ गया। जहाँ, दोनों के रिश्ते के बारे में मालूम पड़ते ही लड़की के अब्बा आशिक और उसके ममेरे भाई अशरफ ने मिलकर उसे पहले मौत के घाट उतारा और बाद में उसकी मौत को दुर्घटना में बदलने के लिए उसका शव और उसकी मोटरसाइकल को रेलवे पटरी पर जाकर फेंक दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को खुरई ग्रामीण थाना क्षेत्र के बरोदिया निवासी दानिश कुरैशी नामक मुस्लिम युवक का शव 31 जनवरी 2020 को रेलवे पटरी से मिला था। जहाँ उसकी माशूका के पिता और भाई ने पूरी घटना को दूसरा एंगल देने का पूरा प्रयास किया। मगर घटनास्थल के पास मिले बाइक के पुर्जों ने पूरा मामले को तह तक खोल दिया।

दरअसल, दानिश के शव के पोस्टमॉर्टम में उसके गले पर रस्सी के निशान मिले। जिससे साफ हो गया कि ये मामला दुर्घटना का नहीं है। इसके बाद पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की। पड़ताल में पुलिस को रेलवे ट्रैक से बाइक के पुर्जे मिले। इन्हें पुलिस ने जमा किया और इंजन नंबर से उस बाइक के मालिक का पता लगाया।

पुलिस के मुताबिक लड़की के पिता ने पहले दानिश को समझाने की बहुत कोशिश की। लेकिन जब वह नहीं माना तो उससे बात करने के बहाने बुलाकर उसकी हत्या कर दी। इस मामले के संबंध में साहर के एसपी अमित सांघी ने मुख्य आरोपित आशिक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अशरफ नाम का दूसरा आरोपित फरार है, इसलिए उसकी तलाश जारी है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार इस तरह के मामले आए हैं। जहाँ पिता ने अपनी इज्जत की खातिर या तो अपनी बेटी को मार दिया या फिर उसके प्रेमी को। अभी पिछले साल अक्टूबर का ही मामला है जब राजस्थान के सीकर जिले में कथित तौर पर अहम की खातिर एक पिता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर अपनी बेटी और उसके प्रेमी की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी और बाद में उनका शव पहाड़ी इलाके में फेंक दिया था। इसके अलावा यूपी के बरेली से भी ऐसा मामला आया जब बेटी के प्रेम संबंध से नाराज होकर उसके पिता ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर उसके प्रेमी को मौत के घाट उतारा था और बाद में शव को जंगल में फेंक दिया था।

मेरा ‘हिंदुत्व’ भाजपा के ‘हिंदुत्व’ से अलग, मुझे ये सब नहीं सिखाया गया: उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र की सत्ता पर आसित होने के लिए अपनी कट्टर हिंदुत्व की छवि से समझौता कर कॉन्ग्रेस, एनसीपी के साथ गठबंधन करने वाले शिवसेना प्रमुख और वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधने के लिए अपने हिंदुत्व को भाजपा के हिंदुत्व से अलग बताया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि धर्म का इस्तेमाल करके सत्ता कब्जाना उनके हिंदुत्व का हिस्सा नहीं है।

सीएम उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी की तुलना भाजपा से करते हुए कहा, “हमारे सोचने का तरीका एक सा नहीं है। मैं एक अशांत हिंदू राष्ट्र नहीं चाहता। धर्म को इस्तेमाल करके सत्ता हासिल करना मेरे हिंदुत्व का हिस्सा नहीं है। मैं ऐसे हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना नहीं करता।”

इसके बाद वे मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि ऐसा हिन्दू राष्ट्र वे स्वीकार नहीं करेंगे। क्योंकि उनके लिए हिन्दू राष्ट्र की व्याख्या अलग है। उनका कहना है, “यह हिन्दुत्व मेरे पिता द्वारा सिखाया गया नहीं है। हिन्दुत्व के संदर्भ में गलतफहमी फैलाकर अथवा दुरुपयोग करके सत्ता हासिल करना मेरा हिन्दुत्व नहीं है।”

भाजपा के साथ एक लंबे वक्त तक गठबंधन में रहने वाले शिवसेना दल के प्रमुख ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर समय कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र होना चाहिए, लेकिन आज लोग एक दूसरे को मार रहे हैं और देश में अशांति का माहौल है। ये उनका हिंदुत्व नहीं है। यह वह नहीं है, जो सिखाया गया है। उनके मुताबिक जिन लोगों ने सत्ता हथियाने के लिए हिंदुत्व की गलत व्याख्या की, वे हिंदुत्व के हिमायती नहीं हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले एनआरसी का पुरजोर विरोध कर उद्धव ठाकरे ने इस मामले पर अपना पक्ष साफ किया था। मगर, अब एक बार फिर उन्होंने ‘सामना’ को दिए साक्षात्कार में इस मुद्दे पर अपना बयान दिया है। उनका कहना है कि कि वो प्रदेश में किसी कीमत पर एनआरसी लागू नहीं होने देंगे। क्योंकि इसमें मुस्लिमों के साथ हिंदू भी पीसे जाएँगे।

इसके बाद उन्होंने इस साक्षात्कार में सीएए को लेकर अपना पक्ष साफ किया है। यहाँ सीएए का बचाव करते हुए कहा कि सीएए लोगों से उनके नागरिक अधिकारों को नहीं छीनता हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून में नागरिका छीनने की बात नहीं है, बल्कि दूसरे मुल्कों से सताए गए अल्पसंख्यकों नागरिकता देने का प्रावधान है।

ठाकरे सरकार लाएगी मुस्लिमों के लिए आरक्षण, MVA के न्यूनतम कार्यक्रम का हिस्सा: कॉन्ग्रेस नेता असलम शेख

JNU हमला 26/11 की तरह, गुंडों को आतंकवादी बोला जाए: ठाकरे पिता-पुत्र ने चली कॉन्ग्रेस की चाल

‘आज़ादी के लिए शहीद हुआ मेरा बेटा, 2 और बच्चों को भी बलिदान करने के लिए हूँ तैयार’

दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे धरना-प्रदर्शन में जाने से एक बच्चे की मौत हो चुकी है। लेकिन मृत बच्चे की माँ ने कहा कि वो अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है और उनका बच्चा भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ना चाहता था लेकिन वह इससे पहले ही देश के लिए कुर्बान हो गया। इतना ही नहीं, मृत बच्चे की माँ ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो वो अपने दोनों बच्चों और खुद को इस लड़ाई में देश के लिए कुर्बान कर देंगी।

30 जनवरी, 2020 को नाजिया के बच्चे की ठंड लगने से मौत हो जाती है, लेकिन इस पर पत्रकार बरखा दत्त अपने मोजो पर एक वीडियो शेयर करते हुए, उसमें कहती हैं कि 29 जनवरी तक नाजिया अपने बच्चे को विरोध प्रदर्शन में ले गई। वहीं मृत बच्चे की माँ नाजिया अपने बयान में कहती है कि वह 18 दिसंबर से ही शाहीन बाग और जामिया में अपने बच्चे के साथ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रही हैं। “मैं हर रोज़ बच्चे को अपने साथ विरोध प्रदर्शन में लेकर आई, एक भी दिन मैंने बच्चे को घर पर नहीं छोड़ा और इसी बीच बच्चे को ठंड लग गई और इसके चलते उसकी मौत हो गई।”

मोजो पर शेयर किए वीडियो में बरखा कहती है कि नाजिया यह कहते हुए अपने बच्चे को शाहीन बाग में लाने का बचाव करती है, कि यहाँ जो भी हो रहा है वह हम सभी के भविष्य के लिए है। वह कहती है, “हमें अपने अधिकारों के लिए भी लड़ना पड़ रहा है, हमें आज़ादी भी चाहिए, इसलिए हम बच्चे को धरने में लेकर आते थे।” नाजिया ने आगे कहा कि उनका बच्चा देश के लिए लड़ते हुए मर गया, लेकिन हम अब भी NRC के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

आगे जब मोजो पत्रकार ने नाजिया से पूछा कि क्या वह अपने अन्य दो बच्चों को धरने में लाने से डरती है तो, तो नाजिया ने कहा “नहीं, हम डरते नहीं हैं। हम उन्हें लाएँगे और जरूरत पड़ी तो उनका बलिदान भी करेंगे। हम इस लड़ाई में देश के लिए मरने को तैयार हैं, लेकिन मोदी और अमित शाह से अनुरोध है कि वह इस काले कानून को वापस ले लें।”

गौरतलब है कि चार महीने के मोहम्मद जहान के बच्चे की 30 जनवरी को ठंड लगने से मौत हो गई थी। दरअसल कड़ाके की ठंड में CAA और NRC के विरोध में शाहीन बाग में चल रहे धरने में उनके माता-पिता हर रोज अपने बच्चे को साथ ले जाते थे। नाजिया NRC को वापस लाने की माँग कर रही है, लेकिन इसे अभी तक लागू भी नहीं किया गया है। बता दें कि मोहम्मद आरिफ और नाज़िया अपने बच्चों के साथ बटला हाउस क्षेत्र में प्लास्टिक की चादरों और कपड़े से बनी एक झोपड़ी में रहते हैं, जिनके पास एक पाँच साल की बेटी और एक साल का बेटा है।

वहीं इससे पहले टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में बाल अधिकारों के लिए लड़ने वाली दो कथित कार्यकर्ताओं के कुतर्कों का हवाला देकर यह लिखा था कि भगवान कृष्ण जब साँप से लड़ रहे थे और जब भगवान राम-लक्ष्मण राक्षसों से लड़ रहे थे, तब वे सब टीनेजर थे। टेलीग्राफ ने इनाक्षी गांगुली और शंथा सिन्हा के हवाले से एनसीपीसीआर के निर्देशों पर सवाल उठाए हैं। दरअसल राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार ने एंटी सीएए प्रोटेस्ट में बच्चों के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया था।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र: राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान, PM मोदी की घोषणा और लोकसभा में गूँजे ‘जय श्री राम’ के नारे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में मतदान से ठीक 3 दिन पहले यानी आज संसद (लोकसभा बजट सत्र 2020) में बोलते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट बनाने का ऐलान कर दिया। उनके इस ऐलान के साथ ही पूरी संसद ‘जय श्री राम’ के नारों से गूँज गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि रामजन्मभूमि से जुड़ा मुद्दा उनके दिल के बहुत करीब है।

पीएम मोदी ने कहा कि ट्रस्ट का नाम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र होगा। उन्होंने आह्वान किया कि पूरा देश भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए एक स्वर में समर्थन दे। यह ट्रस्ट मंदिर निर्माण पर सभी फैसले लेगा। उन्होंने बताया कि 67.03 एकड़ भूमि इस ट्रस्ट को दे दी जाएगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में राम मंदिर का निर्माण होगा।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा, “मुझे आज इस सदन को, देश को बताते हुए यह खुशी हो रही है कि आज कैबिनेट की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए कई अहम फैसले लिए गए हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए हमने एक वृहद योजना तैयार की है।”

उन्होंने कहा, “सरकार ने श्री रामजन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट गठन का प्रस्ताव किया है। यह ट्रस्ट अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण बनाने के लिए उत्तरदायी होगा। हमने 5 एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के लिए अनुरोध किया था, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने मान लिया है।”

बता दें कि पिछले साल तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने 9 नवंबर को सदियों पुराने मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जिसमें उन्होंने अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। इसके अलावा कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में ही मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाने की बात कही थी। अदालत ने कहा था कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन अब केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगी, जो इसे सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपेंगे। पीठ ने केंद्र सरकार से कहा था कि मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए।