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323053 करोड़ रुपए रक्षा बजट के लिए, डिफेंस पेंशन के लिए 1.37 लाख करोड़ रुपए अलग से

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार (फरवरी 01, 2020) को अपना दूसरा और मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट पेश किया। उन्होंने अपने शुरुआती भाषण में ही जिक्र किया कि देश का सुरक्षा मुद्दा हमारी सरकार के लिए सबसे जरूरी है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह स्वाभाविक सी बात है कि किसी भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा होती है और देश की रक्षा में ही हम सब की सुरक्षा है।

2020-21 के लिए रक्षा बजट में 3,23,053 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। पिछले बजट 2019-20 में रक्षा क्षेत्र के लिए 3.18 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। इस प्रकार इस वर्ष के बजट में पिछले की तुलना में लगभग 1.5% की बढ़ोतरी की गई है। रक्षा पेंशन के बजट को गत बजट के 1.17 लाख करोड़ से बढ़ाकर 1.37 लाख करोड़ किया गया है। ज्ञात हो कि इस बजट में रक्षा पेंशन बजट में की गई बढ़ोत्तरी रक्षा राजस्व व्यय और रक्षा सेवाओं पर पूँजी परिव्यय से अधिक है।

पिछले वर्ष जारी अंतरिम बजट में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय सेना के लिए 35,000 करोड़ रुपए देकर वन रेंक वन पेंशन को लागू किया था। हालाँकि, इस बार पहले से ही उम्मीद है कि सरकार पहली बार में ही 3 लाख करोड़ के आस-पास रक्षा का बजट पेश करेगी।

अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए ₹85 हजार करोड़

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण पढ़ते हुए साल 2020-21 के लिए अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 85 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव की घोषणा की। अनुसूचित जनजाति के लिए 53 हजार 700 करोड़ रुपए का बजट प्रस्ताव किया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट पेश कर रही हैं। बजट की शुरुआत में निर्मला सीतारमण ने सरकार की उपब्धियां गिनाईं। इसके बाद किसानों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए 16 सूत्रीय फॉर्मूला पेश किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की ओर से किसानों के लिए बड़ी योजनाओं को लागू किया गया है। सरकार की ओर से कृषि विकास योजना को लागू किया गया है, पीएम फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों किसानों को फायदा पहुँचाया गया। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय को दोगुना करना है।

₹5 लाख की आय वालों के लिए कोई टैक्स नहीं, मिडिल क्लास के लिए बचत का शानदार बजट

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार (फरवरी 1, 2020) को अपना दूसरा पूर्ण बजट पेश किया। इनकम टैक्स का क्षेत्र ऐसा है, जिससे मध्यम वर्ग सीधे तौर पर प्रभावित होता है और नौकरीपेशा लोग भी बजट के इसी भाग का सबसे ज्यादा इन्तजार कर रहे थे। जब अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है, ऐसे में कॉर्पोरेट टैक्स के साथसाथ इनकम टैक्स में भी बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही थी। सरकार के पास उद्योग जगत और आम नौकरीपेशा लोग, दोनों को ही ख़ुश करने की जिम्मेदारी थी।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार घोषणा करते हुए कहा कि आज के दौर में व्यापार के लिए सभी देशों में बड़ी प्रतिस्पर्द्धा चल रही है, ऐसे में कॉर्पोरेट टैक्स रेट को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नई कंपनियों के लिए 15% घटाया गया है जबकि पहले से मौजूद कंपनियों के लिए इसे 22% घटाया गया। वित्तमंत्री ने बताया कि ये ऐतेहासिक निर्णय है, जिससे कॉर्पोरेट टैक्स भारत में दुनिया में सबसे कम हो गया है। इस दौरान वित्तमंत्री ने महाकवि कालिदास के रघुवंशम की पंक्तियाँ भी पढ़ीं।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स कलेक्शन जनता के लिए ही होता है और इसे विभिन्न रूपों में जनता के लिए ख़र्च किया जाता है। नए टैक्स स्लैब:
5 से 7.5 लाख की कमाई पर 10% टैक्स
7.5 से 10 लाख तक कमाई पर 15% टैक्स
10-12.5 लाख कमाई पर 20% टैक्स
12.5-15 लाख की कमाई पर 25% टैक्स
15 लाख से ऊपर वाले को 30% टैक्स

आईटी टैक्स को सिम्प्लीफाई करने और जनता पर बोझ घटाने के लिए वित्तमंत्री ने ये घोषणाएँ की। हालाँकि, 15 लाख रुपए से ऊपर तक की आय वालों के लिए 30% टैक्स रेट जारी रहेगा। इसके साथ ही करदाताओं को भारी राहत दी गई है। सरकार करदाताओं को और राहत देते हुए ‘टैक्स एक्सेम्पशन’ के 100 तरीकों में से 70 को हटा देगी, इससे टैक्स व्यवस्था का सरलीकरण होगा।

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले पेश किए गए अंतरिम बजट में इनकम टैक्स में मिली छूट से मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिली थी। मोदी सरकार की दोबारा प्रचंड जीत के पीछे इसे भी बड़ा फैक्टर माना गया था। तत्कालीन कार्यकारी केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष तक की आय वालों के लिए फुल टैक्स रिबेट की घोषणा की थी। इससे फायदा ये हुआ था कि 6.5 लाख रुपए तक की ग्रॉस वार्षिक आय वालों को प्रोविडेंट फंड या इक्विटीज में निवेश करने पर इनकम टैक्स भरने से राहत मिल गई थी। इस निर्णय से 3 करोड़ करदाताओं को सीधा लाभ पहुँचा था।

5 साल में 100 नए एयरपोर्ट, 1 लाख गाँवों को इंटरनेट: प्रदूषण से लड़ने के लिए दिल्ली को ₹4400 करोड़

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 में कुछ ऐसी अहम घोषणाएँ भी की, जिन पर सबका उतना ध्यान नहीं गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर के अतिरिक्त विज्ञान एवं तकनीक और संस्कृति एवं पर्यटन के लिए भी बजट में ख़ास व्यवस्था की गई है। राखीगढ़ी (हरियाणा), हस्तिनापुर (यूपी), शिवसागर (असम), धोलावीरा (गुजरात) और आदिचनल्लूर (तमिलनाडु)- इन 5 प्राचीन पर्यटन स्थलों पर ऑन-साइट म्यूजियम के निर्माण की घोषण की गई है। वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांग जनों के लिए बजट में 9500 करोड़ रुपए की घोषणा की गई है। इसके अलावा इंटेरनेट कनेक्टिविटी के लिए 6000 करोड़ रुपए का निर्धारित किया गया है।

1 लाख ग्राम पंचायतों में ‘होम टू फाइबर नेट’ भारतनेट कनेक्शन पहुँचाए जाएँगे। वित्त मंत्री ने बताया कि 6 लाख आंगनबाड़ी सेंटरों को मोबाइल फोन की सुविधा उपलब्ध करा कर 10 करोड़ परिवारों को विभिन्न फायदे पहुँचाने की व्यवस्था की गई है। बिजली के मामले में पुराने मीटरों को आधुनिक स्मार्ट मीटरों से रिप्लेस किया जाएगा। 2025 तक 100 नए एयरपोर्ट का निर्माण किया जाएगा। एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए ‘सिंगल इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस विंडो’ की व्यवस्था की जाएगी। वित्तमंत्री ने दावा किया कि बड़े व्यवसायियों का सम्मान किया जाएगा।

इसके अलावा जॉब सृजन के लिए भी सरकार विशेष व्यवस्था करेगी। नॉन-गैजेटेड पोस्ट के लिए ‘नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी’ का गठन किया जाएगा। उन्होंने ‘टैक्स हरैसमेंट’ को रोकने का करदाताओं को आश्वासन दिया। पर्यटन क्षेत्र के लिए 2500 करोड़ रुपए जारी किए गए। दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए 4400 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। एक्सपोर्टर्स के लिए ‘निर्विक’ योजना की घोषणा की गई, जिसके तहत उन्हें बीमा कवर मिलेगा। निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा मोदी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।

जम्मू-कश्मीर के लिए 30,757 करोड़ रुपए और लद्दाख के लिए 5958 करोड़ रुपए की व्यवस्था इस बजट में की गई है। भारत में नए एयरपोर्ट्स की संख्या बढ़ेगी और ‘तेजस’ जैसी ट्रेनों की भी संख्या बढ़ाई जाएगी। गैस ग्रिड में 11000 किलोमीटर का विस्तार किया जाएगा। भारत 2022 में जी-20 का वार्षिक सम्मलेन होगा, जिसके लिए 100 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाएँगे। एसटी वर्ग के लोगों के सामाजिक उत्थान व विकास के लिए 53,700 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इंश्योरेंस कवर को बढ़ाते हुए 5 लाख रुपए प्रति डिपॉजिटर कर दिया गया है।

रिजर्व बैंक द्वारा क़र्ज़ सम्बन्धी नियमों में बदलाव के बाद 5 लाख छोटे व मध्यम उद्योगों को सीधा फायदा होगा, ऐसा वित्तमंत्री ने अपने बजट अभिभाषण के दौरान बताया। सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंकों में ‘वर्क एथिक्स’ को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। वित्त मंत्री ने बीमाधारकों को आश्वासन दिया कि उनके द्वारा जमा कराए गए रुपए सुरक्षित हैं।

लद्दाख के लिए पहला बजट: क्षेत्र के विकास के लिए 5958 करोड़ रुपए आवंटित

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र के लिए 5958 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। नवगठित संघ राज्यों के लिए 2020-21 में 30,757 करोड़ रुपए के आवंटन का प्रस्ताव है। इसमें से लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र के लिए 5958 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा गया है।

ज्ञात हो कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खंड(1) और साथ ही 35ए को हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर को मिला विशेष दर्जा छिन गया है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग कर के इन दोनों को अलग-अलग केंद्र शासित राज्य बनाया गया है।

मध्य प्रदेश: नमाज के बाद नहीं करने दी माँ सरस्वती की पूजा, महिलाएँ बोलीं- चूड़ी पहन लो कमलनाथ!

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति एक बार फिर से सामने आई है। बीते दिन धार जिले के भोजशाला में मुस्लिमों द्वारा नमाज पढ़े जाने के बाद माँ सरस्वती की पूजा करने पहुँची महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया। इसके बाद गुस्साई महिलाएँ वहीं मंदिर के गेट पर धरने पर बैठ गईं और कमलनाथ सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

मध्य प्रदेश के धार ज़िले में स्थित भोजशाला में शुक्रवार को हुई नमाज के बाद महिलाएँ माँ वाग्देवी की तस्वीर रखने के लिए मंदिर पर पहुँची, लेकिन वहाँ सुरक्षा में तैनात पुलिस प्रशासन इससे पहले ही दरवाजे को बंद कर दिया और महिलाओं को पूजा करने के लिए मंदिर के अंदर प्रवेश करने से मना तक दिया। इससे पूजा के लिए पहुँची महिलाएँ नाराज हो गईं और वहीं पर खड़े होकर प्रशासन के ख़िलाफ नारेबाजी करने लगीं। इतना ही नहीं गुस्साई महिलाओं ने अपने हाथों की चूड़ी उतारकर राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा, “ये लो, चूड़ी पहन लो कमलनाथ।”

इसके बाद घबराए पुलिस प्रशासन ने महौल शांत करने का हवाला देते हुए गेट के बाहर ही तस्वीर रख माँ सरस्वती की पूजा कराकर महिलाओं को वापस कर दिया और इस विवाद के साथ ही परिसर में आयोजित मातृशक्ति सम्मेलन और बसंत उत्सव का समापन हो गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौके पर पुलिस फोर्स तैनात रही। दरअसल भोजशाला में पिछले चार दिनों से मातृशक्ति सम्मेलन और बसंत उत्सव समारोह का आयोजन किया जा रहा था, जिसका शुक्रवार को समापन होना था और वहीं शुक्रवार होने के कारण मुस्लिमों को जुमे की नमाज भी अदा करनी थी। यही कारण था कि परिसर के मुख्य गेट पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात किया गया था।

वहीं, मातृशक्ति सम्मेलन में मुख्य अतिथि रहीं महू विधायक उषा ठाकुर समय से एक घंटे पहले ही कार्यक्रम स्थल पहुँच गईं। विधायक ने महिलाओं के साथ ज्याेति मंदिर में बैठकर भजन भी गाए। इसके बाद जब प्रशासन द्वारा भाेजशाला का द्वार नहीं खाेलने की खबर उन तक पहुँची ताे उन्हाेंने भाेजशाला आने से मना कर दिया। विधायक ने संकल्प लिया कि जब तक वे भाेजशाला के अंदर पूजन नहीं करेगी तब तक वे भाेजशाला नहीं आएँगी। विधायक का संकल्प भाेजशाला के बाहर हिंदूवादी संगठन के नेता ने सार्वजनिक रूप से भी सुनाया। इससे पहले विधायक ने ज्याेति मंदिर में कार्यक्रम काे संबाेधित करते हुए कहा– लंबे समय से यह सत्याग्रह चल रहा है और इससे ज्यादा से ज्यादा लाेगाें काे सत्याग्रह से जाेड़ना पड़ेगा।

आपको बता दें कि धार स्थित भोजशाला मंदिर का विवाद कोई नया विवाद नहीं हैं, यह विवाद हिंदू और मुस्लिमों के बीच पूजा को लेकर लंबे अरसे से चला आ रहा है। यह पूरा विवाद मंदिर की जगह को लेकर है, जहाँ मुस्लिम समुदाय के लोग इसे मस्जिद का स्थान मानते हैं और वहीं हिंदू धर्म के लोग इसे सरस्वती माता का मंदिर का स्थान मानते हैं।

550 रेलवे स्टेशनों पर Wi-Fi, 100 से ज्यादा नए एयरपोर्ट, तेजस ट्रेनों की संख्या बढ़कर होगी 150: बजट 2020

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार (फरवरी 1, 2020) को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा अपना दूसरा बजट पेश किया। 2016 तक रेल बजट रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया था, लेकिन मोदी सरकार द्वारा इसे समाप्त कर दिया गया और सुरेश प्रभु 2016 में रेल बजट पेश करने वाले अंतिम रेल मंत्री बने। इसके बाद से रेल बजट को भी आम बजट में ही पेश किया जाता है।

निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश करते हुए बताया कि रेलवे ट्रैक्स के साथ-साथ बड़े सोलर पॉवर कैपेसिटी का सेट-अप किया जाएगा। 6000 किलोमीटर के 12 हाइवे बण्डल के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जो 2024 तक पूरा होगा। 2023 तक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे सहित 2 अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा कर लिया जाएगा। वित्तमंत्री ने बताया कि राजमार्गों के विकास पर ख़ास जोर होगा और उनके निर्माण की गति में तेज़ी लाई जाएगी। साथ ही इंडस्ट्री और कॉमर्स 27,300 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। वित्तमंत्री ने जानकारी दी कि मोबाइल फोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के निर्माण भारत में बहुतायत में हों, इसके लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 550 रेलवे स्टेशनों पर वाई फाई सुविधा दी गई है। 27 हजार किलोमटीर ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन होगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि इसके लिए नए उपाय किए जाएँगे।

1. सोलर पावर ग्रिड रेल पटरी के किनारे बनेगा।

2. 150 ट्रेन पीपीपी मोड में चलाने का फैसला।

3. तेजस जैसे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी।

4. 148 किलोमीटर बेंगलूरू ऊपनगरीय ट्रेन सिस्टम बनेगा। केंद्र सरकार 25% पैसा देगी। इस पर 18 हजार 600 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

आगे कहा गया कि बिजली के मीटर प्री पेड होंगे। धीरे-धीरे पुराने मीटर हटाने का लक्ष्य है। स्मार्ट मीटर से सप्लायर और रेट चुनने का विकल्प होगा। 22 हजार करोड़ रुपए पावर सेक्टर के लिए प्रस्तावित है। 100 से ज्यादा नए एयरपोर्ट बनेंगे। 2020-21 में 1.7 लाख करोड़ रुपए ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे।

निजी क्षेत्र को देशभर में डाटा सेंटर पार्क स्थापित करने में सक्षम बनाने के लिए नीति लाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही राष्ट्रीय गैस ग्रिड को मौजूदा 16,200 किलोमीटर से बढ़ाकर 27 हजार किलोमीटर तक पहुँचाने का प्रस्ताव लाया गया है।

बजट में आगे कहा गया कि अगले पाँच साल में 8 हजार करोड़ रुपए क्वांटम एप्लीकेशन पर खर्च किया जाएगा। भारत तीसरा सबसे बड़ा देश होगा जो बड़े लेवल पर इसका इस्तेमाल करेगा। भारतनेट कार्यक्रम को 6 हजार करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव लाया गया है।

बजट में जलजीवन अभियान के लिए 11,500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जबकि स्वच्छ भारत के लिए 12,300 करोड़ का आवंटन किया गया है। इसके साथ ही भारत को तकनीकी वस्त्रों में अग्रणी बनाने के लिए राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन का प्रस्ताव है और मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सेमी कंडक्टर पैकेजिंग के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए योजना है।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि पाँच पुरातात्विक जगहों पर म्यूजियम बनेंगें- जिसमें हस्तिनापुर, शिवसागर, डोलावीरा, आदिचेल्लनूर, राखीगढी का नाम शामिल है। इसके अलावा राँची में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा।

इसके साथ ही बड़े नगरों में स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए 4400 करोड़ का आवंटन किया गया है। वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगों के लिए लगभग 9,500 करोड़ का आवंटन किया गया है। और 6 लाख से अधिक आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समार्टफोन दिए गए हैं। 2020-21 के पोषण संबंधी कार्यक्रमों के लिए 35,600 करोड़ का प्रस्ताव है। महिला विशिष्ट कार्यक्रमों को 28,600 करोड़ रुपए का प्रावधान है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2500 करोड़ आवंटन करने का प्रस्ताव है। संस्कृति मंत्रालय के लिए 3,150 करोड़ रुपए की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

गौरतलब है कि पिछले साल आम बजट में निर्णय लिया गया था कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को 2018 से 2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होगी। वित्त मंत्री ने कहा था कि तेजी से विकास और यात्री माल ढुलाई सेवाओं के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) का उपयोग प्रभावी रूप से किया जाएगा। साथ ही बजट में यह भी कहा गया था कि सरकार माल वहन के लिए नदी मार्ग का उपयोग करने की परिकल्पना भी कर रही है, ताकि सड़क एवं रेल मार्ग पर भीड़भाड़ के कारण रूकावटें कम हो सकें। वित्तमंत्री ने कहा था कि भारतीय रेल और मेट्रो प्रोजेक्ट में पीपीपी मॉडल के जरिए निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही इस बजट में 657 किलोमीटर मेट्रो को चालू किया गया है, जबकि 300 किलोमीटर नए मेट्रो प्रोजेक्ट को मंज़ूरी मिली थी।

6000 KM हाई-वे, 5 साल में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100 लाख करोड़ रुपए लगाएगी सरकार: बजट 2020

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट पेश कर रही हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर पर वित्त मंत्री ने कहा- “पीएम कह चुके हैं कि इन्फास्ट्रक्चर पर अगले पाँच साल में 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा। हाउसिंग, स्वच्छ पानी, हेल्थकेयर, शिक्षण संस्थान, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, वेयरहाउसिंग, सिंचाई जैसे क्षेत्रों में निवेश होगा।”

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार अगले 5 साल में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100 लाख करोड़ रुपए लगाएगी।

बुनियादी संरचना में कही गई प्रमुख बातें-

  1. 2500 किलोमीटर एक्सप्रेस हाईवे, 9000 किलोमीटर इकॉनमिक कॉरिडोर, 2000 किलोमीटर स्ट्रेटेजिक हाईवे बनेगा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे, चेन्नई-बेंगलुरू एक्सप्रेस जल्दी बन कर तैयार होगा।
  2. 6000 किलोमीटर हाई वे 2024 तक बनेंगे।
  3. रोजगार के भारी अवसर कंस्ट्रक्शन, ऑपरेशन और नई योजनाओं के परिचालन से पैदा होगा।
  4. सभी इन्फ्रा एजेंसियां स्टार्टअप में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगी।

बजट की शुरुआत में निर्मला सीतारमण ने सरकार की उपब्धियां गिनाईं। ये वित्तमंत्री सीतारमण का दूसरा बजट है। इसके पहले भी वित्त मंत्री सीतारमण ने मोदी सरकार 2.0 के बनते ही सरकार का बजट पेश किया था। वित्त मंत्री के मुताबिक यह बजट एक आदर्श बजट है, जिसमें सोसाइटी के सभी तबके के लोगों के प्रावधान हैं।

बजट पेश करने के दौरान निर्मला सीतारमण ने कश्मीरी भाषा में एक कविता कही-
“हमारा वतन खिलते हुए शालीमार बाग जैसे
हमारा वतन डल झील में खिलते हुए कमल जैसा
नव-जवानों के गर्म खून जैसा
मेरा वतन, तेरा वतन
हमारा वतन दुनिया का सबसे प्यारा वतन।”

₹1 लाख करोड़ के क़रीब पहुँचा शिक्षा बजट, हर घर स्वच्छ पानी के लिए ₹3.6 लाख करोड़ की घोषणा

बजट 2020 अभिभाषण के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर अहम घोषणाएँ की। स्वास्थ्य सेक्टर के लिए अतिरिक्त 69,000 करोड़ रुपए की घोषणा की गई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के लिए 12,300 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। ग्रामिक क्षेत्रों में साफ़ पानी की व्यवस्था पर जोर देते हुए इस बार के बजट में ‘जल जीवन मिशन’ के लिए 3.6 लाख करोड़ रुपए की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि 2030 तक भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा ‘वर्किंग एज पॉपुलेशन’ होगा।

2025 तक टीबी की बीमारी को पूर्णरूपेण खत्म करने के लिए ‘एंटी-टीबी कैम्पेन’ शुरू किया जाएगा। ‘जन औषधि केंद्रों’ की संख्या में अभूतपूर्ण बढ़ोतरी की जाएगी। अब देश के हर जिले में ऐसे केंद्र होंगे, जहाँ लोगों को कम दाम में दवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। ‘मिशन इंद्रधनुष’ को और मजबूत किया जाएगा। इसका अर्थ है कि ‘आयुष्मान भारत’ के अंतर्गत हॉस्पिटलों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों पर जोर दिया जा रहा है। भारत के टॉप-100 बड़े शैक्षिक संस्थान अब डिग्री लेवल पर ऑनलाइन कोर्स की सुविधा उपलब्ध कराएँगे। बजट 2020-21 में शिक्षा क्षेत्र के लिए 99,300 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इसके अलावा स्किल डेवलपमेंट के लिए 3000 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। भारत को उच्च-शिक्षा का हब बनाने की दिशा में एशियन और अफ्रीकन देशों के लिए ‘Ind-SAT’ परीक्षा आयोजित की जाएगी।

सरकार ‘स्टडी इन इंडिया’ इनिशिएटिव की शुरुआत करेगी। सरकार का जोर है कि बाहर के छात्र भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए भारत आएँ। वित्तमंत्री ने ये भी बताया कि फिट इंडिया मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार बड़े कदम उठा रही है।

बजट 2020: किसानों के लिए 16 फायदे – सोलर पंप से लेकर स्पेशल रेलगाड़ी तक

आज शनिवार यानी, फरवरी 01, 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2020-21 का आम बजट पेश किया। इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया था। ऐसे में अब सबकी आज के आम बजट पर टिकी हुई हैं।

किसानों के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा ऐलान करते हुए 16 सूत्रीय फॉर्मूला पेश किया। अपने संबोधन में निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार की ओर से किसानों के लिए बड़ी योजनाओं को लागू किया गया है। सरकार की ओर से कृषि विकास योजना को लागू किया गया है, पीएम फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों किसानों को फायदा पहुँचाया गया। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय दोगुना करना है।

उन्होंने कहा कि किसानों की मार्केट को खोलने की जरूरत है, ताकि उनकी आय को बढ़ाया जाएगा। किसानों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार किसानों के लिए 16 सूत्रीय फॉर्मूले (16 एक्शन प्वाइंट) का ऐलान करती है, जिससे किसानों को फायदा पहुँचाएगा। जैसे-

  1. उन राज्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा जो केंद्र के मॉडल लॉ को मानेंगे।
  2. अन्नदाता ऊर्जादाता भी है। पीएमकुसुम स्कीम से फायदा हुआ है। अब हम 20 लाख किसानों को सोलर पंप देंगे।
  3. किसानों के लिए स्पेशल रेल।
  4. 15 लाख किसानों को ग्रिड कनेक्टेड पंपसेट से जोड़ा जाएगा।
  5. 162 मिलियन टन के भंडारण की क्षमता है। नाबार्ड इसे जीयोटैग करेगा। नए बनाए जाएँगे। ब्लॉक और ताल्लुक के स्तर पर बनेंगे। राज्य सरकार जमीन देसकती है। एफसीआई अपनी जमीन पर भी बना सकती है।
  6. विलेज स्टोरेज स्कीम – सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए
  7. मिल्क, मीट, फिश को प्रीजर्व के लिए किसान रेल बनेगा
  8. किसानों के लिए भंडार स्कीम
  9. 311 मिलियन टन के साथ ये अन्न उत्पादन के आगे निकल चुका है। हम राज्यों को मदद करेंगे। वन प्रॉडक्ट वन डिस्ट्रिक्ट का स्कीम बनाएँगे।
  10. इंटिग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम – संचयित इलाकों में नेचुरल फार्मिंग- जैविक खेती के लिए पोर्टल, ऑनलाइन मार्केट मजबूत बनाया जाएगा
  11. फिनांसिंग ऑन निगोशिएबल वेयर हाउसिंग स्कीम
  12. नॉन बैंकिंग फाइनान्स कंपनियों को उत्साहित किया जाएगा। 15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज किसानों को देने का लक्ष्य है।
  13. फुट एंड माउथ बीमारी, पीपीआर की बीमारी 2025 तक खत्म हो जाएगी
  14. मिल्क प्रोसेंसिंग क्षमता 108 मिलियन टन करने का लक्ष्य
  15. समुद्री इलाकों के किसानों के लिए, फिश उत्पादन का लक्ष्य 208 मिलियन टन, 3077 सागर मित्र बनाए जाएँगे जिससे तटवर्ती इलाकों के युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  16. दीनदयाल अंत्योदय योजना – 58 लाख एसएचजी बने हैं। इन्हें मजबूत बनाएंगे। इन 16 स्कीम के लिए फंड 2.83 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बजट भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण द्वारा कही गई कुछ प्रमुख बातें-

  1. हमारी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  2. कृषि को प्रतिस्पर्धात्मक बनाकर किसानों की उन्नति सुनिश्चित की जा सकती है।
  3. मॉर्डन एग्रीकल्चर लैंड एक्ट को राज्य सरकारों द्वारा लागू करवाना।
  4. 100 जिलों में पानी की व्यवस्था के लिए बड़ी योजना चलाई जाएगी, ताकि किसानों को पानी की दिक्कत ना आए।
  5. पीएम कुसूम स्कीम के जरिए किसानों के पंप को सोलर पंप से जोड़ा जाएगा। इसमें 20 लाख किसानों को योजना से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा 15 लाख किसानों के ग्रिड पंप को भी सोलर से जोड़ा जाएगा।

हर वर्ष बजट में किसानों के लिए कुछ विशेष उम्मीदें लगी होती हैं। पिछले साल के बजट 2019-20 में कृषि एवं किसान मंत्रालय को ऐतिहासिक आवंटन मिला था, जिसमें मंत्रालय को 1,20,485 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। यह कृषि मंत्रालय को किया गया अब तक का सबसे बड़ा आवंटन था। ऐसे में इस साल सरकार अपने पिटारे में कृषि सेक्टर के लिए क्या लेकर आती है, ये देखना दिलचस्प होगा।

सरकार से कृषि निर्यात बढ़ाने और किसानों की मजदूरी बढ़ाने की उम्मीदें जताई गईं थीं। बजट में अधिकांश प्रावधान उसी की ओर निर्देशित हैं।

सरकार ने फरवरी, 2019 में पेश अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरूआत की थी। इसमें 2 हेक्टेअर से कम भूमि वाले किसानों को प्रति वर्ष तीन किश्तों में 6,000 रुपए देने की घोषणा की गई थी।

यह स्कीम दिसंबर 01, 2019 से प्रभावी कर दी गई थी और सरकार ने इस योजना के लिए बजट में 75,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया था।

गत वर्ष के बजट में सरकार ने गोवंश के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए ‘राष्ट्रीय कामधेनु आयोग’ के गठन के प्रस्ताव की मंजूरी दी थी। उस समय कार्यवाहक वित्त मंत्री पियूष गोयल ने कहा था- “ये सरकार कभी गौमाता के सम्मान में पीछे नहीं हटेगी।”