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हिन्दू होने की वजह से नीरज प्रजापति के परिजनों को प्रताड़ित कर रही हेमंत सरकार: BJP ने उठाया मामला

भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य सरकार पर सीएए समर्थन रैली पर मुस्लिमों के हमले में मारे गए नीरज प्रजापति के परिजनों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। ऑपइंडिया ने अपनी ख़बर में बताया था कि नीरज प्रजापति लोहरदगा में 23 जनवरी को सीएए समर्थन रैली पर मस्जिद व कॉन्ग्रेस दफ्तर से हुई पत्थरबाजी में घायल हो गए थे। इसके बाद उनका इलाज लोहरदगा सदर अस्पताल, राँची स्थित ऑर्किड हॉस्पिटल और रिम्स के ट्रामा सेंटर में चला। 5 दिनों तक ज़िंदगी और मौत से जूझने के बाद 28 जनवरी को उनकी मौत हो गई थी।

ऑपइंडिया ने अपनी ख़बर में दिवंगत नीरज के परिजनों के हवाले से बताया था कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पीड़ित परिवार पर लगातार दबाव बना रही है कि वो मीडिया व पुलिस में कहें कि नीरज प्रजापति की मौत बाथरूम में फिसलने के कारण हुई। पुलिस व प्रशासन के दबाव के बावजूद परिजनों ने हार नहीं मानी और पीड़ित की पत्नी दिव्या कुमारी ने एक पत्र लिख कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुआवजे की गुहार लगाई। हालाँकि, उन्हें मुआवजा तो नहीं मिला लेकिन जल्दी-जल्दी में प्रशासन ने टॉर्च की रौशनी में रात के समय नीरज का अंतिम संस्कार करा दिया।

अमित मालवीय ने परिजनों के इसी आरोप को आधार बनाते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने पूछा कि क्या सिर्फ़ हिन्दू होने की वजह से नीरज प्रजापति के परिजनों के साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि अभी तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब तक इस वारदात पर एक शब्द भी क्यों नहीं कहा है? भाजपा आईटी सेल प्रमुख के इस बयान के साथ ही नीरज प्रजापति की मौत का मामला दिल्ली पहुँच गया है। सांसद सुदर्शन भगत ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए दावा किया था कि वो इस मुद्दे को संसद में उठाएँगे।

बता दें कि तबरेज की मौत को बड़ा मुद्दा बना कर देश भर में ‘मॉब लिंचिंग’ का माहौल चलाने वाले मीडिया ने नीरज प्रजापति की मौत की ख़बर को दबा दिया। अमित मालवीय के बयान के बाद लोगों ने आशा जताई है कि भाजपा इस मुद्दे पर झामुमो व कॉन्ग्रेस की सरकार को घेरेगी। ऑपइंडिया ने दिवंगत नीरज की पत्नी दिव्या कुमारी की मदद के लिए क्राउडसोर्सिंग का सहारा लिया, जिसमें अब तक लोगों ने लगभग 25 लाख रुपए का सहयोग दिया है।

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क्रिकेट मैच के दौरान कहासुनी पर गोली मारकर हत्या: सलीम, अजहरुद्दीन और सरवर को उम्रकैद

उत्तर प्रदेश मजफ्फरनगर की एक अदालत ने 2009 में एक स्थानीय क्रिकेट मैच के दौरान विवाद के बाद एक युवक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश वीरनायक सिंह ने शुक्रवार (जनवरी 31, 2020) को दोषियों सलीम, अजहरुद्दीन और सरवर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया और उन पर पचास-पचास हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया

सरकारी अभियोजक जितेंद्र त्यागी ने बताया कि पाँच सितंबर 2009 को शामली जिले के गंगेरु गाँव में एक क्रिकेट मैच के दौरान शमशाद से तीनों की लड़ाई हो गई थी। इसके बाद शमशाद की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

जितेंद्र कुमार त्यागी ने कहा कि 5 सिंतबर 2009 को गंगेरू के रहने वाले बुंदा ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके भतीजे शमशाद और सलीम के बीच क्रिकेट मौच के दौरान कहासुनी हो गई। इसके बाद सलीम, सरवर एवं अजहरुद्दीन ने मिलकर शमशाद को घेर लिया। फिर अजहरुद्दीन और सरवर ने शमशाद को पकड़ा और सलीम ने तमंचे से गोली मार कर हत्या कर दी। सलीम इस घटना के बाद से ही जेल में बंद है। सरवर और अजहरुद्दीन जमानत पर बाहर थे। सजा सुनाए जाने के बाद इन दोनों को भी जेल भेज दिया गया।

वहीं एक अन्य घटना में शुक्रवार (जनवरी 31, 2020) को ही मुजफ्फरनगर जनपद में एक किशोर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक का शव शुक्रवार सुबह जंगल में पड़ा मिला। हत्या का कारण संपत्ति विवाद बताया गया है। सीओ ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। सीओ ने कहा कि मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और हत्यारोपी की तलाश में पुलिस लगी है।

सिंधिया ने उमा भारती से झुक कर लिया आशीर्वाद, विजयवर्गीय से मिले गले: MP में सियासी हलचल तेज़

मध्य प्रदेश की सियासी हलके में तब बड़ी हलचल देखने को मिली, जब कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के दो बड़े दिग्गजों से मिले। सिंधिया ने मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती से मुलाक़ात की। इस दौरान वहाँ भाजपा महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे। उनसे भी सिंधिया पूरे गर्मजोशी से मिले। कुछ दिनों पहले सिंधिया की कॉन्ग्रेस आलाकमान से नाराजगी की ख़बरें उड़ी थीं, जिन्हें बाद में नकार दिया गया था। सिंधिया ने अपने ट्विटर बायो से कॉन्ग्रेस का नाम हटा दिया था, जिसके बाद मीडिया में तरह-तरह की बातें चल निकली थीं।

अब सिंधिया की विजयवर्गीय व उमा भारती के साथ मुलाक़ात से कॉन्ग्रेस आलाकमान के कान फिर से खड़े हो गए हैं। दरअसल, ये मुलाक़ात ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर हुई। यहाँ तीनों नेताओं के समर्थकों की फ़ौज जुटी हुई थी। इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब उमा भारती को देखा तो उन्होंने झुक कर नमन किया। सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री से आशीर्वाद लिया। उमा भारती ने भी सिंधिया के सिर पर हाथ फेर कर आशीर्वाद दिया। दोनों में कुछ देर तक बातचीत भी हुई।

जब ये मुलाक़ात चल रही थी, तभी दिग्गज भाजपा नेता व मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे कैलाश विजयवर्गीय वहाँ पर आ पहुँचे। विजयवर्गीय को देख कर सिंधिया मुस्कुराए, जिसके बाद दोनों एक-दूसरे के साथ गले मिले। विजयवर्गीय और सिंधिया बातें कर रहे थे, तभी उमा भारती के पाँवों में कुछ तकलीफ हो गई। उनके लिए व्हीलचेयर मँगाया गया। उमा भारती को व्हीलचेयर पर बिठा कर सिंधिया ने उनसे विदा लिया। तीनों नेताओं की गर्मजोशी से हुई मुलाक़ात भोपाल के गलियारों में चर्चा बटोर रही है।

दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर से दिल्ली रवाना हो रहे थे, जबकि उमा भारती और कैलाश विजयवर्गीय एक शादी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए वहाँ पहुँचे थे। मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस पिछले 1 साल से भी अधिक समय से सत्ता में है और कमलनाथ ने सरकार और संगठन, दोनों के ही मुखिया का पद सँभाला हुआ है। ऐसे में, सिंधिया गुट के नेता लगातार नाराज़ बताए जाते हैं और उनमें से कुछ गाहे-बगाहे कॉन्ग्रेस आलाकमान को असहज करने वाला बयान भी देते रहते हैं।

शाहीन बाग से टेंशन में दिल्ली के इमाम, केजरीवाल के अरमानों पर झाड़ू फिरने की फिक्र में हुए दुबले

70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए आठ फरवरी को वोट डाले जाएँगे। नतीजे 11 फरवरी को आएँगे। राजनीतिक दल जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं। मुस्लिम मतदाताओं का मूड भॉंपने की कोशिश करते हुए दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसके जरिए दिल्ली के मुस्लिम मतदाताओं की नब्ज टटोलने की कोशिश की गई है। इस रिपोर्ट से अंदाजा लगाया जा सकता है क्यों शाहीन बाग आम आदमी पार्टी (आप) के लिए न उगला जा रहा और न निगला।

यह रिपोर्ट दिल्ली के नौ मस्जिदों के इमाम से बातचीत पर आधारित है। सभी से 4 मसलों पर सवाल सवाल किए गए। ये हैं,

  • दिल्ली की केजरीवाल सरकार का काम
  • भाजपा को वोट देंगे या नहीं
  • मुस्लिम वोटर किधर जाएंगे
  • शाहीन बाग प्रदर्शन

जिन इमामों से बात की गई वे हैं,

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस की मस्जिद के हबीबुर रहमान। यह मस्जिद तिमारपुर विधानसभा क्षेत्र में आता है।
  • एक मीनार मस्जिद के मुफ्ती अब्दुल वाहिद। यह लक्ष्मी नगर विधानसभा क्षेत्र में आता है।
  • चाँदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के मस्जिद तकिया मंडल शाह के मोहम्मद तैयब कासमी।
  • ओखला विधानसभा के हजरत अबु मस्जिद के नजीर अहमद।
  • जैतपुर पार्ट-2 स्थित जामा मस्जिद के जुबैर अहमद। यह बदरपुर विधानसभा में आता है।
  • त्रिलोकपुरी विधानसभा के मदीना मस्जिद के हाजी रियासत अली
  • मटियामहल विधानसभा के मस्जिद मुबारक बेगम के मोहम्मद अजमल कासमी।
  • बल्लीमारान विधानसभा के अनारवाली मस्जिद के जुबैर अहमद
  • कैलाशनगर के मस्जिद-मदरसा अंजुमन इस्लामिया के अताउल रहमान कासमी। यह गॉंधी नगर विधानसभा में पड़ता है।

इस रिपोर्ट से जो बात उभरकर आती है वह यह है कि दिल्ली के इमाम नहीं चाहते कि भाजपा सत्ता में आए। ज्यादातर इमाम का झुकाव आप की ओर है। कुछ की नजरें कॉन्ग्रेस पर भी टिकी है। लेकिन, उनकी असल चिंता यह है कि वोटों का बॅंटवारा न हो पाए। दिल्ली में 12 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। कई सीटों पर उनका प्रभाव है।

जब आप इन इमामों के जवाब पर गौर करेंगे तो आप के लिए उनकी बेचैनी समझ आ जाएगी। साथ ही यह भी साफ हो जाएगा कि शाहीन बाग के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानी अब कैसे उनकी पंसदीदा पार्टी के लिए समस्या खड़ी कर रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस की मस्जिद के इमाम हबीबुर रहमान के अनुसार केजरीवाल ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। वे भाजपा पर बार-बार कौम का मसला उठाने का आरोप भी लगते हैं। उन्होंने कहा कि वोटों का बँटवारा रोकने की कोशिश जारी है।

केजरीवाल सरकार के काम से एक मीनार मस्जिद के इमाम मुफ्ती अब्दुल वाहिद भी खुश हैं। उन्होंने बताया कि इस चुनाव में AAP और अगले लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को वोट दिए जाने की बात चल रही है। चाँदनी चौक विधानसभा के मस्जिद तकिया मंडल शाह के इमाम मोहम्मद तैयब कासमी के अनुसार उनका फोकस भाजपा को हराने पर है। हजरत अबु मस्जिद के इमाम नजीर अहमद ने शाहीन बाग का दोष भी बीजेपी के मत्थे मढ़ने की कोशिश की।

हालाँकि जैतपुर पार्ट-2 स्तिथ जामा मस्जिद के इमाम जुबैर अहमद केजरीवाल के काम से खुश नहीं हैं। फिर भी वे चाहते हैं कि मुस्लिम भाजपा को वोट नहीं दें। मदीना मस्जिद के इमाम हाजी रियासत अली ने बताया कि पहले भले 10-20 फीसदी मुस्लिम भाजपा को वोट दे देते थे। अब कोई मुस्लिम उन्हें वोट नहीं देगा। वैसे, मस्जिद मुबारक बेगम के इमाम मोहम्मद अजमल कासमी का मानना है कि वोटों का बँटवारा शायद ही रोकने में कामयाबी मिल पाए। अनारवाली मस्जिद के इमाम जुबैर अहमद ने शाहीन बाग के प्रदर्शन को गलत तरीके से पेश करने का आरोप भाजपा पर लगाया। मस्जिद-मदरसा अंजुमन इस्लामिया का कहना कि भाजपा के खिलाफ जो मजबूत उम्मीदवार हो मुस्लिमों को उसे वोट देना चाहिए।

अब सवाल उठता है कि ये इमाम क्यों नहीं चाहते कि मुस्लिम अपनी पसंद के हिसाब से वोट करें? वे वोटों के बॅंटवारे को लेकर क्यों​ चिंतित हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है उनकी सैलरी जो केजरीवाल सरकार ने बढ़ा दी थी। मस्जिद के इमामों की सैलरी 10,000 से बढ़ाकर 18,000 और मुअज्जिन की सैलरी 9,000 से बढ़ाकर 16 हजार कर दी गई थी। इसके अलावा दिल्ली में करीब 1500 मस्जिदें ऐसी हैं, जहाँ पर वक्फ बोर्ड का डायरेक्ट कंट्रोल नहीं है और इन मस्जिदों में वक्फ बोर्ड की कमिटी नहीं है। वक्फ बोर्ड ने यह भी फैसला लिया था कि इन 1500 मस्जिदों के इमामों को सैलरी के तौर पर 14,000 रुपए दिए जाएँगे, जबकि मोअज्जिन को 12,000 रुपए मिलेंगे।

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जिससे थी उम्मीदें, वो बेवफा निकला: ‘सरजी’ के गले का फाँस बना शाहीन बाग़, बिगड़ा चुनावी गणित

मैं शाहीन बाग वालों की मदद करता हूँ, वे रोज मुझे फोन करते हैं: कॉन्ग्रेस उम्मीदवार

शाहीन बाग़ में कपिल ने की हवाई फायरिंग: फिर से ‘हिन्दू आतंक’ की रोटी सेंकने में जुटे वामपंथी

शाहीन बाग़ में कई दिनों से दंगाई धरने पर बैठे हुए हैं। उपद्रवियों के कारण स्थानीय लोग परेशान हैं। लोगों को दफ्तर आने-जाने में परेशानी हो रही है और स्कूल जाने वाले बच्चों को दिक्कतों का सामना पड़ रहा है। इसी बीच एक व्यक्ति ने शाहीन बाग़ में बन्दूक से फायरिंग की। उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियों को आरोपित कहता दिख रहा है कि हमारे देश में किसी की नहीं चलेगी, सिर्फ़ हिन्दुओं की चलेगी। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है। कहा जा रहा है कि आरोपित ने शाहीन बाग़ के उपद्रवियों को वहाँ से जाने व विरोध प्रदर्शन स्थगित करने की चेतावनी दी थी

इससे पहले जामिया नगर में एक नाबालिग ने बन्दूक लहराई थी और गोली चलाई थी। वो फ़िलहाल 14 दिनों की पुलिस कस्टडी में पुलिस के शिकंजे में है। उसने ‘ये लो आज़ादी’ कहते हुए वहाँ उपस्थित प्रदर्शनकारियों को धमकाया था। जिस तरह जामिया नगर वाली घटना के बाद ‘भगवा आतंकवाद’ की बातें होने लगी थी, उससे कई लोगों के मन में उस घटना को लेकर कई सवाल उठे थे। फेसबुक पर आरोपित ने कुछ संदिग्ध वामपंथी पेज से ख़ुद को जोड़ रखा था, जिसके बारे में मीडिया ने नहीं बताया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में सीएए के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शन के नाम पर हुई हिंसा में 57 पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बावजूद वामपंथी मीडिया व कथित विशेषज्ञों ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ एक भी शब्द नहीं कहा। नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध के नाम पर मुर्शिदाबाद में हज़ारों मुस्लिमों ने ट्रेनों को बंधक बनाया और स्टेशनों में तोड़-फोड़ कर सैंकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया लेकिन उनके विरुद्ध वामपंथियों ने चूँ तक नहीं किया। यही लिबरल गिरोह तब ‘हिन्दू आतंकवाद’ की बातें करने लगा, जब एक भटके हुए बच्चे ने दंगाइयों और उपद्रवियों से परेशान होकर पिस्टल लहरा दी।

पुलिस का कहना है कि शाहीन बाग़ में आरोपित ने हवाई फायरिंग की लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। मौके पर दो कारतूस पड़े मिले हैं। ये फायरिंग उस स्टेज के पीछे हुई, जहाँ पूरे देश भर से कई कथित एक्टिविस्ट्स आकर मुस्लिमों को भड़काने में लगे हुए हैं। इसी स्टेज से देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम ने भी भाषण दिया था। यहाँ कन्हैया कुमार, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, योगेंद्र यादव और बरखा दत्त जैसे लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

शाहीन बाग़ में फायरिंग करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम कपिल गुर्जर बताया है। वो दिल्ली-नोएडा सीमा पर स्थित दल्लुपुरा गाँव का निवासी है। आरोपित ने ‘जय श्री राम’ कहा और भारत के ‘हिन्दू राष्ट्र’ होने की बात भी कही। जामिया नगर के नाबालिग के नाम पर हिन्दुओं को गाली देने वाले वामपंथियों ने कपिल के नाम पर अब अपनी रोटी सेंकनी शुरू कर दी है।

सिर्फ 3 मिनट और 25 पॉइंट्स में समझें पूरा बजट 2020-21: स्टूडेंट्स के लिए यह है सबसे जरूरी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वार्षिक बजट 2020-21 पेश किया। संसद में दिए गए बजट अभिभाषण के दौरान सीतारमण ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और पिछड़े वर्गों के अलावा कॉर्पोरेट सेक्योर और नौकरीपेशा लोगों के लिए भी बड़ी घोषणाएँ कीं। पर्यटन उद्योग को भी ख़ास तवज्जो दी गई है। वित्तमंत्री ने इस दौरान कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक की भाषाओं में कविताएँ पढ़ कर उत्तर से लेकर दक्षिण तक को साधने का प्रयास किया। उन्होंने कालिदास की ‘रघुवंशम’ से भी पंक्तियाँ उद्धृत की। यहाँ हम कुछ पॉइंट्स में पूरे बजट को कवर करने का प्रयास करेंगे। सबसे पहले जानते हैं कि किस मंत्रालय को कितना बजट आवंटित किया गया।

मंत्रालयबजट (करोड़ रुपए में)
शहरी विकास एवं हाउसिंग 50040
स्वास्थ्य 67112
रेलवे 72216
सड़क एवं परिवहन 91823
मानव संसाधन 99312
ग्रामीण विकास122398
उपभोक्ता मामले 124535
कृषि 142762
गृह167250
रक्षा471378

आइए, अब कुछ पॉइंट्स में पूरे बजट को समझने का प्रयास करते हैं:

  1. बजट में एस्पिरेशनल इंडिया (कृषि, स्वच्छता एवं शिक्षा), आर्थिक विकास (इंडस्ट्री, इंफ्रास्ट्रक्चर और नई इकॉनमी) और केयरिंग सोसाइटी (महिला एवं बाल विकास, पर्यटन एवं पर्यावरण) पर ख़ास ज़ोर दिया गया है।
  2. पिछले 2 वर्षों में 60 लाख नए करदाता जुड़े हैं।
  3. डिपॉजिट इन्सुरेंस कवर को 1 लाख रूपए प्रति व्यक्ति से बढ़ा कर 5 लाख रुपए प्रति व्यक्ति कर दिया गया।
  4. नए टैक्स स्लैब्स: ₹5 से ₹7.50 लाख तक की सालाना आय पर अब 10% की दर, ₹7.5 से ₹10 लाख की आय पर 15% टैक्स, ₹10 से ₹12.5 लाख की आय पर 20% टैक्स, ₹12.5-₹15 लाख तक की आय पर 25% टैक्स, ₹15 लाख से अधिक की आय पर 30% टैक्स लगेगा।
  5. खाद्य पदार्थों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सिविल एविएशन मंत्रालय और रेलवे द्वारा क्रमशः ‘कृषि उड़ान’ और ‘कृषि रेल’ योजना शुरू होगी।
  6. पीएम-कुसुम योजना के तहत 20 लाख किसानों को सौर ऊर्जा पम्प लगाने में मदद की जाएगी। 15 लाख किसानों के ग्रिड से जुड़े पम्पों को सोलर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा।
  7. दीनदयाल अंत्योदय योजना: गरीबी उन्मूलन योजना के तहत 50 लाख परिवारों को जोड़ा गया।
  8. जन औषधि केंद्र: 2024 तक देश के सभी जिलों में 2000 दवाओं व 300 शल्य चिकित्सा की पेशकश की जाएगी।
  9. स्वच्छ भारत मिशन को 12,300 करोड़ रुपए का आवंटन।
  10. विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय फॉरेंसिक ज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव।
  11. शीर्ष 100 शैक्षिक संस्थान पूर्णकालिक डिग्री के लिए ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध कराएँगे।
  12. पाँच नवीन ‘स्मार्ट सिटी’ बनाए जाएँगे। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पैकेजिंग और निर्माण में बढ़ावा दिया जाएगा।
  13. ज्यादा निर्यात ऋणों के लिए ‘निर्विक योजना’: ज्यादा बीमा कवरेज, दावों का तुरंत निपटारा और गवर्नमेंट इ-मार्केट प्लेस के कारोबार को बढ़ा कर 3 लाख करोड़ रुपए किया जाएगा।
  14. पहुँच नियंत्रण राजमार्ग: 2500 किलोमीटर, आर्थिक गलियारा: 9000 किलोमीटर, तटीय एवं भूमि पत्तन सड़कें: 2000 किलोमीटर और रणनीतिक राजमार्ग: 2000 किलोमीटर, का निर्माण किया जाएगा।
  15. रेल पटरियों को सौर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। बेंगलुरु उप-नगरीय परिवहन योजना के लिए 18,600 करोड़ रुपए। पीपीपी के माध्यम से 4 स्टेशनों व 150 ट्रेनों का संचालन।
  16. 2024 तक 100 हवाई अड्डों को पुनः विकसित किया जाएगा। हवाई जहाजों की संख्या वर्तमान के 600 से 1200 होने की उम्मीद जताई गई है।
  17. ऊर्जा क्षेत्र के लिए 21,000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव। राष्ट्रीय गैस ग्रिड का विस्तार किया जाएगा। वर्तमान के 16,200 किलोमीटर से 27,000 किलोमीटर करने का लक्ष्य।
  18. ‘फाइबर टू द होम’ योजना से 1 लाख ग्राम पंचायतों से जोड़ा जाएगा। भारतनेट कार्यक्रम के लिए 6000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव। क्वांटम तकनीक एवं रिसर्च के लिए अगले 5 वर्षों में 8000 करोड़ दिए जाएँगे।
  19. महिला विशेष कार्यक्रमों के लिए 28,600 करोड़ रुपए का प्रावधान। एससी व ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिए 85,000 करोड़ रुपए। एसटी वर्ग के लिए 53,700 करोड़ रुपए। वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों के लिए 9500 करोड़ रुपए का प्रावधान।
  20. पर्यटन संवर्द्धन के लिए 2500 करोड़ व संस्कृति मंत्रालय के लिए 3150 करोड़ रुपए का आवंटन। पाँच प्राचीन स्थलों के विकास का निर्णय: राखीगढ़ी (हरियाणा), हस्तिनापुर (यूपी), शिवसागर (असम), धोलावीरा (गुजरात) और आदिचनल्लूर (तमिलनाडु)।
  21. 2022 में भारत में होगा जी-20 का सम्मलेन। 100 करोड़ रुपए उसके लिए आवंटित।
  22. केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर के लिए 30,757 करोड़ रुपए व लद्दाख के लिए 5958 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया।
  23. 10 बैंकों को मर्ज कर के 4 बैंक बनाए गए। बैंकों को 3,50,000 करोड़ रुपए की पूँजी दी गई।
  24. फुटवियर (25% से 35%) और फर्नीचर वस्तुओं (20% से 25%) पर सीमा शुल्क दर बढ़ाई गई। न्यूज़ प्रिंट और कोटेड पेपर पर आयत शुल्क 10% से 5% किया गया।
  25. 100 करोड़ रुपए तक के कारोबार वाले स्टार्ट-अप्स को 3 वर्षों तक 100% छूट का लाभ।

इन सबके अलावा ऐसे भी कुछ आँकड़े हैं, जिन्हें गिनाना आवश्यक है। जैसे, 2006 से 2016 तक 27.1 करोड़ लोगों को ग़रीबी रेखा से निकाला गया। 2014-19 में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 284 अरब डॉलर तक पहुँचा, जो 2009-14 तक 190 अरब डॉलर था। डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भारत ने काफ़ी प्रगति की है। केंद्र सरकार का ऋण 2014 में 52.2% था, जो मार्च 2019 तक घट कर 48.7% पर आ गया। कर को सरल बनाने के लिए आधार के जरिए पैन का तुरन्त ऑनलाइन आवंटन की व्यवस्था की गई।

बारूद के ढेर पर खड़ी थी पर नहीं डरी 14 साल की बच्ची… ऐसे बची 24 बच्चों की जिंदगी

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से गुरुवार (जनवरी 30, 2019) को ऐसी खबर आई जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया। जिले के मोहम्मदाबाद के कठरिया गॉंव में एक सिरफिरे ने अपने घर में बच्चों को बंधक बना लिया। लोगों और पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो गोलियॉं चलाई। करीब 8 घंटे चला यह संकट तब खत्म हुआ जब देर रात सिरफिरा सुभाष बाथम मार गिराया गया। उसके मारे जाने के बाद बंधक बनाए गए सभी 24 बच्चे सकुशल मुक्त करा लिए गए थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बंधक बने बच्चों में 14 साल की अंजलि भी थी। उसकी समझदारी और बहादुरी से न केवल सभी बच्चों की जान बची, बल्कि सुभाष भी मजबूर हो गया था। असल में सुभाष ने बच्चों को अपने घर के तहखाने में बंद क​र दिया था। वहॉं विस्फोटक से भरी बोरी में बैट्री का तार डालकर विस्फोट करने की साजिश रची थी। अंजलि ने होशियारी दिखाते हुए तार को बारूद से अलग कर दिया और तहखाने के लोहे के दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया। इसके बाद सुभाष ने कई बार दरवाजा खुलवाने की कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया।

दैनिक जागरण के लखनऊ संस्करण में 1 फरवरी 2020 को प्रकाशित खबर

जब सभी बच्चे मुक्त कराए गए तो अंजलि के चेहरे पर भी दहशत साफ झलक रही थी। उसने बताया, “सुभाष चाचा कह रहे थे कि अगर मुॅंह से आवाज निकाली तो सबको विस्फोट से उड़ा देंगे। सभी बच्चे डर गए थे। वह बाहर निकले तो मैंने तार तोड़ दिया और तहखाने का लोहे का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया। उनके कहने पर भी गेट नहीं खोला।”


बकौल अंजलि सुभाष की पत्नी ने उनलोगों को दरवाजे के नीचे से बिस्कुट और खाना दिया था लेकिन किसी ने कुछ नहीं खाया। रात डेढ़ बजे के करीब जब पुलिस गेट तोड़ने लगी तो उन्होंने दरवाजा खोल दिया। उल्लेखनीय है कि इस घटना से नाराज लोगों ने सुभाष की पत्नी की पिटाई कर दी थी। बाद में उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। सुभाष ने सभी बच्चों को अपने बच्चे के जन्मदिन के बहाने घर बुलाया था।

अंजलि के पिता की दो साल पहले मौत हो चुकी है और मॉं मजदूरी करती हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार वह 9वीं कक्षा में पढ़ती है। अंजलि भाई-बहन हैं। वह सबसे बड़ी है। 12 और 10 साल के उसके भाई-बहन भी बंधक बने हुए थे। अंजलि के मुताबिक वे लोग दोपहर के करीब 2.30 बजे सुभाष के घर पहुँचे थे। पहुँचते ही सुभाष ने उन सभी को चॉकलेट और बिस्किट खाने को दिया। फिर जबरन तहखाने में ले जाकर बंद कर दिया।

14 साल की इस लड़की की बहादुरी की गाँव और आस-पास के लोग ही नहीं, बल्कि पुलिस भी तारीफ कर रही है। कुछ ग्रामीणों ने उसे इनाम भी दिया। बंधक बने बच्चों के अनुसार यदि अंजलि ने होशियारी नहीं दिखाई होती तो वे शायद ही बच पाते।

सभी बच्चे महफूज, मारा गया सिरफिरा, पत्नी की भी मौत: फर्रुखाबाद बंधक संकट की पूरी कहानी

ईसाई नहीं बनने की सजा… 34000 वैष्णव हिंदुओं को अपने ही देश में 23 साल रहना पड़ा शरणार्थी बन कर!

16 जनवरी, 2020 को नई दिल्ली में भारत सरकार, त्रिपुरा और मिज़ोरम सरकार तथा ब्रू-रियांग (Bru-Reang) प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ है। इस समझौते के अनुसार लगभग 34,000 ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही बसाया जाएगा। साथ ही उन्हें सीधे सरकारी तंत्र से जोड़कर राशन, यातायात, शिक्षा आदि की सुविधा प्रदान कर उनके पुनर्वास में सहायता प्रदान की जाएगी। अभी तक ब्रू नाम सुनते ही ब्रू (Bru) कॉफ़ी की एक ब्रैंड का ही चित्र सामने आता था परन्तु जानकार आश्चर्य हुआ कि ये एक जन-समुदाय है, जो अपने ही देश में गत 22-23 वर्षों से शरणार्थी के रूप में जीवन यापन कर रहे थे।

कैंपों के जीवन का अर्थ यह था कि उन्हें सभी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। 23 वर्षों तक उनके पास न घर था, न जमीन, अपने परिवारों के लिए न चिकित्सा मिलती थी, न उपचार होता था और उनके बच्चों को अभी तक कोई शैक्षिक सुविधा प्राप्त नहीं हुई। ये किसी दूसरे देश से नहीं आए थे बल्कि अपने ही देश के अपने ही लोग हैं, जिनको अपने ही राज्य मिज़ोरम को छोड़कर त्रिपुरा में बसना पड़ा। कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक कहानी है ब्रू लोगों की। जिनको अपनी आस्थाओं, मान्यताओं के साथ समझौता न करने की कसौटी पर हर क्षण डर, हिंसा, अमानवीयता, मौत और अंततः पलायन करना पड़ा।

आखिर कौन हैं ये ब्रू ? भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के मूल निवासी रिआंग (Bru or Reang) जन-समुदाय जो मुख्यतः त्रिपुरा, मिज़ोरम, असम तथा बांग्लादेश के चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र में रहते हैं। रियांग समाज वैष्णव हिन्दू हैं। मिजोरम में मिजो के बाद अल्पसंख्यक समुदायों में रिआंग-ब्रू लोगों की संख्या सबसे अधिक है। कृषि उनका मुख्य व्यवसाय है तथा अत्यन्त राष्ट्रवादी हैं, इनकी संस्कृति काफी उन्नत एवं परिष्कृत है। मिजोरम में मिज़ो बहुसंख्यक हैं अत: अपना सर्वाधिपत्य स्थापित करने के लिए सभी को मिजो/ईसाई बनाना चाहते हैं।

रियांग अपनी संस्कृति के उपासक तथा धर्म में अटूट विश्वास रखने वाले हैं, अतः वे इस मिजोकरण के लिए तैयार नहीं हुए। दोनों की संस्कृति, भाषा, वेशभूषा तथा धार्मिक मान्यताओं आदि में अंतर होने के कारण मिज़ो ने रियांग को “ब्रू” नाम दिया और यह जन-धारणा विकसित कि ब्रू यहाँ के मूल निवासी नहीं है। मिजोकरण, ईसाईकरण तथा चर्च प्रायोजित धर्म-परिवर्तन को स्वीकार न करने के कारण मिज़ो इनके खिलाफ रहते हैं। इसी कारण दोनों में तनाव बना रहता है।

सुनियोजित भेदभावपूर्ण नीति का प्रयोग कर उन्हें न केवल अलग-थलग कर दिया गया, बल्कि उन्हें जंगलों से जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने से भी रोका गया, उन्हें राशन से वंचित कर दिया और उनके बच्चों को स्कूलों से बाहर रखा। परिणाम यह है कि वे अपने मौलिक अधिकारों का प्रयोग करने से लगातार वंचित रहे हैं। राज्य प्रायोजित हिंसा का परिणाम यह रहा कि रिआंग को मिजोरम से विस्थापित होकर त्रिपुरा तथा अन्य राज्यों में अस्थायी शिविरों में शरण लेनी पड़ी।

ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच संघर्ष का पुराना इतिहास रहा है। 1990 के दशक में, रिआंग ने अपने ऐतिहासिक उत्पीड़न और राजनीतिक बहिष्कार को व्यक्त करते हुए, अपनी तीन मांगे रखीं- 1) ऑल इंडिया रेडियो, आइज़ॉल में रिआंग-ब्रू कार्यक्रम को शामिल करना 2) सरकारी सेवाओं में उनके लिए नौकरियों का आरक्षण 3) विधान सभा में उनके प्रतिनिधियों का नामांकन और रिआंग-ब्रू के लिए एक स्वायत्त जिला परिषद का निर्माण।

मजे की बात यह है कि हालांकि मिज़ोरम में रिआंग-ब्रू दूसरी सबसे बड़ी आबादी है, बावजूद इसके एडीसी के लिए उनकी माँग अनसुनी हो गई । वर्ष 1995 में ब्रू समुदाय द्वारा स्वायत्त ज़िला परिषद की माँग और चुनावों में भागीदारी के अन्य मुद्दों पर ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सितंबर 1997 में, बीएनयू ने मिज़ोरम के पश्चिमी बेल्ट में संविधान की छठी अनुसूची के अनुसार रिआंग के लिए उसी स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) की माँग करने के लिए एक प्रस्ताव अपनाया। इस माँग के खिलाफ मिजो की प्रतिक्रिया ने बड़े पैमाने पर हिंसा को भड़का दिया। उनकी माँग को न केवल मिज़ो समुदाय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने खारिज किया, बल्कि उनकी माँगों को दबाने के लिए उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की।

मिज़ो जन-समूह, नौकरशाही, पुलिस और अन्य शक्तिशाली समूह सभी रियांग समुदाय को स्थायी रूप से नष्ट करने को आतुर थे। आपसी झड़प के बाद ‘यंग मिज़ो एसोसिएशन’ (Young Mizo Association) तथा ‘मिज़ो स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (Mizo Students’ Association) ने यह माँग रखी कि ब्रू लोगों के नाम राज्य की मतदाता सूची से हटाए जाए क्योंकि उनके अनुसार वे मूल रूप से मिज़ोरम के निवासी नहीं हैं। इसके बाद ब्रू समुदाय द्वारा समर्थित समूह ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (Bru National Liberation Front-BNLF) तथा एक राजनीतिक संगठन (Bru National Union-BNU) के नेतृत्व में वर्ष 1997 में मिज़ो से हिंसक संघर्ष हुआ। परिणामत: वर्ष 1997 में नस्ली तनाव के कारण ब्रू-रियांग समाज को मिजोरम छोड़कर त्रिपुरा में शरण लेने पर मजबूर होना पड़ा। इन शरणार्थियों को उत्तरी त्रिपुरा के कंचनपुर में अस्थायी कैंपों में रखा गया था। उस समय लगभग 37,000 ब्रू लोगों को मिज़ोरम छोड़ना पड़ा।

इसके बाद मिजो के आतंक और ब्रू के पलायन की घटनाएँ समय-समय पर होती रही। ब्रू लोगों ने भी संगठनों का निर्माण कर अपने अधिकार तथा ससम्मान जीवन यापन के लिए संघर्ष करना शुरू कर दिया। सरकार भी उनकी शान्ति और ब्रू-पुनर्स्थापन के दिखावे के रूप में प्रयास करती दिखती भी रही। उसके लिए बहुत धन-खर्च भी किया 1997 के बाद से, केंद्र ने राहत और पुनर्वास के लिए त्रिपुरा को 348.97 करोड़ और मिजोरम को 68.90 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी। अप्रैल 2005 में, मिज़ोरम सरकार और बीएनएलएफ ने दशक के जातीय संकट को हल करने के लिए 13 दौर की वार्ता के बाद एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। एमओयू में हालाँकि, आंतरिक रूप से विस्थापित ब्रू की समस्याओं को संबोधित नहीं किया गया था। इसने केवल बीएनएलएफ कैडरों के पुनर्वास का प्रयास किया।

मिजोरम सरकार ने एक बार फिर त्रिपुरा में रहने वाले विस्थापित ब्रू के बीच गहरी नाराजगी पैदा करने वाले बुनियादी मतभेदों को संबोधित किए बिना 16 अक्टूबर 2009 को ब्रू के प्रत्यावर्तन के लिए एकतरफा घोषणा की। उनकी इन प्रयासों को देख कुछ ब्रू लोगों ने प्रत्यावर्तन शुरू भी किया परन्तु मिजोरम में अपने घरों में रिआंग का पुनर्विस्थापन मुश्किल था। जब तक कि उन्हें सुरक्षा और सुरक्षा की भावना से आश्वस्त नहीं किया जाता है क्योंकि बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा ने न केवल संरचनात्मक रूप से उनके आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि इसने उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से भी आहत और अविश्वस्त किया है।

वर्ष 1997 में मिज़ोरम से त्रिपुरा में विस्थापित होने के बाद से ही भारत सरकार ब्रू-रियांग परिवारों के स्थायी पुनर्वास के प्रयास करती रही है। इस बीच कई सरकारें आईं लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला और शरणार्थियों की पीड़ा समाप्त नहीं हुई। 3 जुलाई, 2018 को ब्रू-रियांग समुदाय के प्रतिनिधियों, त्रिपुरा और मिज़ोरम की राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार के बीच इस समुदाय के पुनर्वास के लिये एक समझौता किया गया था, जिसके बाद ब्रू-रियांग परिवारों को दी जाने वाली सहायता में बढ़ोतरी की गई। इस समझौते के तहत 5,260 ब्रू परिवारों के 32,876 लोगों के लिए 435 करोड़ रुपए का राहत पैकेज दिया गया। बच्चों की पढ़ाई के लिये एकलव्य स्कूल भी प्रस्तावित किये गए थे। इस समझौते में ब्रू परिवारों को मिज़ोरम में जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र के साथ वोट डालने का भी अधिकार दिया जाना था। इस समझौते के बाद वर्ष 2018-19 में 328 परिवारों के 1369 लोगों को त्रिपुरा से मिज़ोरम वापस लाया गया। परंतु यह समझौता पूर्ण रूप से लागू नहीं हो सका क्योंकि अधिकतर विस्थापित ब्रू परिवारों ने मिज़ोरम वापस जाने से इनकार कर दिया।

नए वर्ष और नए दशक की अपनी पहली मन की बात में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ब्रू-रियांग समझौते ने दो दशकों पुराने शरणार्थी संकट को समाप्त कर दिया है, जिसके कारण मिजोरम में 34000 से अधिक शरणार्थियों को मदद और राहत मिली है। उन्होंने कहा, “यह इस विश्वास का परिणाम है कि उनका जीवन आज एक नई सुबह की दहलीज पर खड़ा है। समझौते के अनुसार सम्मानित जीवन का रास्ता उनके लिए खुल गया है। आखिरकार 2020 का नया दशक ब्रू-रियांग समुदाय के जीवन में आशा की नई किरण लाया है।” अधिकांश ब्रू -रियांग परिवारों की यह माँग थी कि ब्रू समुदाय की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए त्रिपुरा में ही उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। यह समझौता बहुत विशिष्ट है और यह सहकारी संघवाद की भावना तथा भारतीय संस्कृति की निहित संवेदनशीलता और उदारता का परिचायक है।

मैं शाहीन बाग वालों की मदद करता हूँ, वे रोज मुझे फोन करते हैं: कॉन्ग्रेस उम्मीदवार

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ शाहीन बाग में करीब डेढ़ महीने से जो कुछ चल रहा है उसके पीछे विपक्षी दलों का हाथ होने का शुरू से ही अंदेशा जताया जा रहा था। जामिया में हुई हिंसा को लेकर कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आप के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान के भी ऐसे वीडियो सामने आए थे जिसमें वे हिंसा करने वाली भीड़ के साथ दिखे थे। अब कॉन्ग्रेस के एक नेता ने खुद कबूला है कि शाहीन बाग के ‘प्रदर्शनकारियों’ को उनका समर्थन हासिल है।

इस बात को कबूलने वाले कॉन्ग्रेसी नेता का नाम है मुकेश शर्मा। उन्हें पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए विकासपुरी से उम्मीदवार बनाया है। शर्मा की गिनती दिल्ली कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में होती है। वे पार्टी के प्रवक्ता भी हैं। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से लेकर कॉन्ग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा तक के करीबी बताए जाते हैं।

शर्मा ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “मैं गाँव का रहने वाला हूँ। मैं जब मदद करता हूँ तो मर्दानगी से करता हूँ। मैंने तो शाहीन बाग वालों की भी मदद कर रखी है। शाहीन बाग बाले मुझे रोज फोन करते हैं।” चुनावी मैदान में मुकेश शर्म का मुकाबला आम आदमी पार्टी के महेंद्र यादव और बीजेपी के संजय सिंह से है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात सामने आई थी। बता दें कि दिल्ली के शाहीन बाग में ‘जिन्ना वाली आज़ादी’ के नारे लगाए गए थे। ये नारे शाहीन बाग के विरोधियों की मंशा की तरफ इशारा करते हैं। शाहीन बाग को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी कहा था कि लोकसभा का चुनाव नहीं जीतने के कारण आप और कॉन्ग्रेस देश को तोड़ने की बातों का समर्थन कर रहे हैं।

वहीं हाल ही में कॉन्ग्रेस नेता अजय वर्मा ने जी न्यूज पर टेलीकास्ट होने वाले शो ‘ताल ठोक के’ में देश तोड़ने की बात करते हुए कहा था, ‘सीना दिखाइए, एक और बांग्लादेश की तरह जो देश में 20/25 करोड़ मुस्लिम आबादी हैं उनके लिए एक और पाकिस्तान बना दीजिए और हिन्दुस्तान को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दीजिए।”

पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस संबोधित करते हुए कहा था, “शाहीन बाग कोई इलाका नहीं रहा, बल्कि यह एक आइडिया है जहाँ पर भारतीय झंडे को कवर के तौर पर इस्तेमाल वे लोग कर रहे हैं जो भारत को बाँटना चाहते हैं। इसका टुकड़े-टुकड़े गैंग की तरफ से समर्थन किया जा रहा है।” कानून मंत्री ने ये भी कहा था कि राहुल गाँधी, केजरीवाल खामोश हैं, लेकिन उनके लोग खूब बोल रहे हैं। मनीष सिसोदिया बोलते हैं हम शाहीन बाग के साथ हैं। कॉन्ग्रेस के दिग्विजय सिंह और मणिशंकर अय्यर वहाँ जाकर क्या-क्या बोले हैं वो आप जानते हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कॉन्ग्रेस को चेताया था, “मैं कॉन्ग्रेस के लोगों को एक बात साफ-साफ कहना चाहता हूँ कि अब इस देश बँटवारा होने नहीं दिया जाएगा। अगर कोई ऐसा करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” मगर अब तो कॉन्ग्रेस के नेता खुलकर प्रदर्शनकारियों के साथ होने की बात कह रहे हैं।

शाहीन बाग के टुकड़े-टुकड़े! देर रात चला ड्रामा… मीडिया से बात करने पर बँटे प्रदर्शनकारी

शाहीन बाग में कहाँ से आ रहा है दाना-पानी: आसिफ तूफानी ने उगल दिए सारे राज

मिलिए शादाब से: जामिया का कश्मीरी छात्र जिसे गोली लगी, पढ़िए इसके जहरीले फेसबुक पोस्ट

गुरुवार (जनवरी 30, 2020) दोपहर को महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि पर जामिया से लेकर राजघाट तक CAA के खिलाफ विरोध मार्च निकालने के दौरान रामभक्त गुलशन (बदला हुआ नाम) नाम के शख्स ने अचानक से मीडिया कर्मियों के सामने आकर पिस्तौल से गोली चला दी थी। जिसमें मौजूद जामिया के छात्र शादाब नजर के हाथ में गोली लगी। गुलशन की गिरफ्तारी के बाद उसके फेसबुक अकाउंट के सामने आने के बाद लिबरल मीडिया और लिबरल गिरोह ने सोशल मीडिया पर गुलशन की गिरफ्तारी को हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों से जोड़ना शुरू कर दिया था।

शादाब के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

वहीं जब शादाब के फेसबुक पोस्ट को खँगाला गया तो वो बेहद ही जहरीले निकले। शादाब ने 22 जून 2017 को एक पोस्ट किया। इसमें उसने कश्मीर के चेनाब घाटी की बात करते हुए जहर उगला है। शादाब इस पोस्ट में जम्मू और कश्मीर में हिन्दू और मुस्लिमों के बाँटने की बात कहता है। उसका कहना है कि ईस्ट चेनाब में हिन्दू रहते हैं, जबकि पश्चिमी चेनाब मुस्लिम बहुल है।

पोस्ट का अगला हिस्सा

इसके साथ ही उसने अपने पोस्ट में लिखा कि जम्मू और कश्मीर को डोडा, रामबन और किश्तवाड़ को जम्मू और कश्मीर से अलग कर दिया गया और उसके अनुसार इसके पीछे का आधार दिया गया कि जम्मू के लोग राष्ट्रवादी हैं, जबकि कश्मीर के लोग देशद्रोही हैं। उसने तहरीक-ए-आजादी के पीछे चेनाब घाटी के लोगों का अभूतपूर्व योगदान बताया। पोस्ट में उसने सवाल किया है कि चेनाब घाटी के लोग कश्मीरियत हैं या फिर जम्मूरियत?

18 जून को उसने उमर खालिद नाम के यूजर का पोस्ट शेयर किया है, जिसमें वो भारत-पाकिस्तान की मैच में पाकिस्तान को सपोर्ट करने की बात कर रहा है और कहता है कि संघी लोगों का कहना है कि जो पाकिस्तान का सपोर्ट करेगा, उसे पाकिस्तान भेज दिया गया। इस पोस्ट में उसका कहना है कि यह खेल है और वह पाकिस्तान को सपोर्ट कर सकता है।

18 जून को ही शादाब ने एक और जहरीला पोस्ट किया था। इसमें उसने हिंदूओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। शादाब ने गौ-मूत्र का मजाक बनाया था। उसने वामपंथी वेबसाइट स्क्रॉल की एक लिंक शेयर किया था। जिसमें लिखा था कि कार्टून प्रोग्राम छोटा भीम के क्रिएटर अब गाय की जर्नी पर एक एनिमिटेड फिल्म बनाएँगे। इसको शेयर करते हुए शादाब ने लिखा, “डिसक्लेमर: इसका थीम सॉन्ग ये होगा- गौ-मूत्र धूम मचाए, सामने कोई टिक न पाए, गौ माँ, गौ माँ, लिंचिंग वाली गौ माँ।”

शादाब ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा आतंंकी हमले के बाद 16 फरवरी को एक पोस्ट करते हुए इसे चुनावी जुमला बताया। उसका कहना था कि ये कोई इस बात से कैसे 100% सहमत हो सकता है कि ये आतंकी हमला था। उसका कहना है कि ये संभव ही नहीं है। उसने लिखा कि वोट पाने के लिए ‘राष्ट्रभक्ति’ का ये पैंतरा आजमाया गया था।

इतना ही नहीं शादाब ने भारतीय सेना पर कश्मीरियों को मारने का भी आरोप लगाया। 

इसके अलावा उसने एक अन्य पोस्ट में एक लिंक शेयर किया जिसमें हिटलर को हिन्दुओं का प्रेरणास्रोत बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि हिटलर हिन्दू राष्ट्रवादी को मुस्लिमों को मारने के लिए प्रेरित करता है।

13 मई को वामपंथी वेबसाइट द क्विंट का एक लिंक शेयर करते हुए शादाब ने लिखा कि मणिपुर की महिलाएँ चिल्लाकर कह रही हैं कि इंडियन आर्मी ने उनका रेप किया है।

9 जुलाई 2017 के एक पोस्ट में वो बुरहान वानी के आतंकवादी घोषित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहता है कि अगर सिर्फ बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों को मार देना हिंसा है तो फिर पुलिस और भारतीय सेना, बुरहान वानी से कैसे अलग है? यानी कि इस पोस्ट में भी शादाब ने पुलिस और भारतीय सेना पर निर्दोषों को मारने का आरोप लगा रहा है और उनकी तुलना आतंकवादी से कर रहा है।