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खालिस्तानी आतंकियों को हथियार देने वाला आसिफ़ साथी के साथ पकड़ा गया, यूपी ATS ने शामली में दबोचा

उत्तर प्रदेश एटीएस (आतंक-रोधी दस्ता) ने शनिवार (23 नवंबर) देर शाम शामली से खालिस्तानी आतंकवादियों के मॉड्यूल को हथियार सप्लाई करने वाले आरोपितों को गिरफ़्तार किया है। इनके पास से .32 बोर की पिस्टल, कारतूस और मैगजीन के अलावा तमंचा भी बरामद हुआ है। पकड़े गए हथियार सप्लायर राज सिंह और आसिफ़ निवासी गाँव जलालपुर, थाना बाबरी, शामली से हैं। यूपी एटीएस की टीम दोनों आरोपितों से पूछताछ में जुट गई है।

ख़बर के अनुसार, पंजाब पुलिस ने जब इस मॉड्यूल को चला रहे लखविंदर सिंह और उसके अन्य साथियों से पूछताछ की तो यह पता चला कि उन लोगों को शामली ज़िले का राज सिंह नामक व्यक्ति हथियारों के साथ दस हैंड ग्रेनेड, 1 पिस्टल और 20 कारतूस की सप्लाई देने वाला था।

एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक़, राज सिंह पंजाब पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा वांछित था। जाँच एजेंसी उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि वह ग्रेनेड कहाँ से लाता था। हालाँकि, दोनों ख़ुद को मज़दूर बता रहे हैं। फ़िलहाल, यूपी एटीएस और खुफिया एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

एटीएस ने एक विज्ञप्ति में बताया कि उसे सूचना मिली थी कि शामली ज़िले के जलालपुर का रहने वाला राज सिंह नामक व्यक्ति खालिस्तानी आतंकवादियों को विस्फोटक सप्लाई कर रहा था। उसे और उसके साथी आसिफ़ को शामली में गुरुद्वारा तिराहे के पास से गिरफ़्तार किया गया। विज्ञप्ति में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि आदर्श मंडी थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है।

ख़बर के अनुसार, आसिफ़ और उसके साथी के तार खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह उर्फ़ पम्मा से जुड़े हैं।
पम्मा, 2016 में पंजाब में हुई आठ हिन्दू-सिख नेताओं की हत्या का मुख्य साज़िशकर्ता है। पंजाब में उसके ख़िलाफ़ तीन वारंट जारी हैं।

बता दें कि 2016 में ही पंजाब और राजस्थान की एटीएस टीम पम्मा को पकड़ने के लिए पुर्तगाल जा चुकी है। हालाँकि, वो कोशिश नाक़ामयाब रही, जिसकी वजह से अब उसके प्रत्यर्पण की कोशिशें चल रही हैं। इससे पहले पम्मा ने 2009 में ISI से सम्पर्क करके पंजाब में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बॉर्डर पार से 9 किलो आरडीएक्स, 8 पिस्टल, 400 कारतूस व डोटोनेटर का ज़ख़ीरा भारत भिजवाया था।

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महाराष्ट्र की सियासत में अब सक्रिय हुआ भाजपा का संजय, 45 शिवसेना विधायकों के संपर्क में होने का कर चुके हैं दावा

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से संजय नाम काफी चर्चा में रहा है। शिवसेना सांसद संजय राउत लगातार शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के दावों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। दूसरी ओर, मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम हैं, जो लगातार शिवसेना के साथ जाने को लेकर अपनी पार्टी को चेता रहे हैं। अब इस सियासी पटकथा में भाजपा सांसद संजय काकड़े की भी एंट्री हो गई है।

काकड़े आज (नवंबर 24, 2019) एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर उनसे मिलने पहुँचे। काकड़े राज्यसभा में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए चुने गए थे, लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। बीते दिनों उन्होंने शिवसेना के 45 विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने का दावा किया था।

बता दें कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ ग्रहण के विरोध में शिवसेना, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस तीनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। तीन सदस्यीय पीठ इस मामले पर आज सुनवाई करेगी।

भाजपा नेता आशीष शेलार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्देश देगा, हम उसका पालन करेंगे। लेकिन राज्यपाल ने हमें 30 नवंबर तक का समय दिया है, हम 170 विधायकों या उससे अधिक के साथ बहुमत साबित करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, “वे कहते हैं कि रात के अंधेरे में शपथग्रहण हो गया। हम लोग सुबह जल्दी उठकर ‘शाखा’ में जाते हैं। इसे ‘राम प्रहार’ का समय कहते हैं। जो लोग भगवान राम को भूल गए वे राम प्रहार का मतलब कैसे समझ सकते हैं?”

इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट करके देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण को एक्सीडेंटल शपथ ग्रहण बताया है। इसके साथ ही संजय राउत ने कहा कि शरद पवार एक राष्ट्रीय नेता हैं। अगर भाजपा सरकार बनाने की कोशिश कर रही है, तो ऐसा नहीं होगा। यह भाजपा और अजित पवार द्वारा उठाया गया एक गलत कदम है। उनका कहना है कि 165 विधायक शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ हैं।

बता दें कि एक दिन पहले शनिवार को महाराष्ट्र में भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर हुआ। शनिवार सुबह बीजेपी ने एनसीपी नेता अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेंद्र फड़णवीस को दोबारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। 

हालाँकि शाम होते-होते काफी कुछ बदल गया। एनसीपी मुखिया शरद पवार ने अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया और नए नेता के चुनाव तक एनसीपी नेता जयंत पाटिल को विधायक दल की जिम्मेदारी सौंपी गई। शाम तक एनसीपी के 54 में से 49 विधायक मुंबई के होटल में शिफ्ट कर दिए गए। 

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‘रोमियो’ बन मेरठ की युवती को दुबई बुलाने वाला नदीम इकबाल भागा पाकिस्तान

हाल ही में उत्तरप्रदेश के मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी कपिल गुप्ता ने अपनी बेटी को पाकिस्तानी युवक के चंगुल से छुड़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय और प्रदेश के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई थी। उन्होंने ट्वीट किया था, “मैं एक 18 वर्षीय बेटी का लाचार पिता हूँ। मेरी मासूम बेटी को लव जिहाद के जाल में फँसा लिया गया है। वह लड़का पाकिस्तान से है, जो मेरी बेटी से पिछले कुछ समय से रोमियो बनकर बात कर रहा था। मेरी बेटी को बहला-फुसलाकर दुबई ले गया है। न जाने मेरी बेटी किस हाल में होगी।”

सोशल मीडिया एक्सपर्ट ने नदीम इकबाल नामक इस पाकिस्तानी युवक का पता लगा लिया है। हालाँकि, अभी उसके ठिकाने की जानकारी गुप्त रखी गई है। लेकिन जाँच एजेंसियों को नदीम के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इस बात की जानकारी परिजनों को भी दे दी गई है।

ख़बर के अनुसार, युवती को दुबई बुलाने के बाद नदीम खुद पाकिस्तान भाग गया। दुबई स्थित भारतीय दूतावास अधिकारियों द्वारा लगातार फोन किए जाने से वो बुरी तरह घबरा गया, जिसके चलते वो शुक्रवार (22 नवंबर) की रात को पाकिस्तान चला गया। एक सोशल मीडिया यूजर ने जब फोन पर नदीम से बातचीत की तो उसने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकार दिया और युवती के लापता होने के प्रकरण से भी अनभिज्ञता जताई।

कपिल गुप्ता ने 17 नवंबर को अपनी पीड़ा बयान करते हुए ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने गृह मंत्रालय, दुबई पुलिस, प्रधानमंत्री मोदी आदि से मदद माँगी थी। उन्होंने बताया था कि वे इस संबंध में एसएसपी के दफ्तर कंकरखेड़ा में रिपोर्ट करवा चुके हैं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी का पासपोर्ट नंबर और लड़के की फोटो भी शेयर की थी।

पिता की मदद की गुहार पर दुबई स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने युवती के पिता को कॉल करके पूरे प्रकरण की जानकारी माँगी थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जैसे ही उन्हें भारत से रिपोर्ट मिलेगी, वे आगे की प्रक्रिया के लिए त्वरित कार्रवाई करेंगे।

इस सन्दर्भ में, 18 नवंबर की रात को कांसुलेट जनरल ऑफ़ इंडिया (सीजीआई) दुबई की तरफ से युवती के पिता को ट्वीट कर कहा गया, “आपकी बेटी को ढूँढने के लिए हमने दुबई की एजेंसियों से बात की है। लेकिन किसी सम्पर्क नंबर या पते के बगैर सूचना मिलना काफ़ी कठिन रहेगा। हम हर संभव प्रयास करेंगे।”

ख़बर के अनुसार, बृहस्पतिवार को मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने मामले को संसद में उठाया था। उन्होंने सरकार से युवती की बरामद कराने की माँग की थी। बता दें कि कपिल गुप्ता की बेटी फेसबुक और इंस्टाग्राम के ज़रिए पाकिस्तानी युवक नदीम से मिली थी और 4 नवंबर को उसका पासपोर्ट बना था। इसके बाद 8 नवंबर की सुबह लड़की पासपोर्ट, शैक्षिक प्रमाण-पत्र और सात हज़ार रुपए के साथ घर से गायब हो गई। खोजबीन शुरू हुई तो 10 नवंबर को लड़की के पिता ने सांसद राजेंद्र अग्रवाल से मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई। जिससे मेरठ पुलिस सक्रिय हुई और विदेशी क्षेत्रीय पंजीयन कार्यालय (एफआरआरओ) दिल्ली से संपर्क किया।

इसके बाद, 15 नवंबर को FRRO ने अपनी रिपोर्ट दी कि 8 नवंबर की रात युवती दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई गई। जिसके बाद परिवार ने कयास लगाया कि इसके पीछे नदीम ही है, जो पाक के एक पाँच सितारा होटल का मैनेजर है। उसने अपने प्रोफाइल में आई लव पाकिस्तान लिख रखा था।

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महाराष्ट्र: 145 ही नहीं 29 और 36 का भी मोल बढ़ा, किधर जाएँगे ओवैसी के 2 MLA

288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत का आँकड़ा 145 है। लेकिन, तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम ने दो और आँकड़ों को बेहद अहम बना दिया है। बीजेपी को समर्थन देकर उपमुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले एनसीपी नेता अजित पवार को दल-बदल कानून से बचे रहने के लिए पार्टी के 36 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। भाजपा 170 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है तो शिवसेना सांसद संजय राउत ने 165 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है। ऐसे में संख्या बल किस तरफ है यह विधानसभा में ही पता चलेगा। इस दौरान छोटी पार्टियों और निर्दलीय 29 विधायकों का समर्थन किसी के भी पक्ष में पलड़ा झुकाने में बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।

यही कारण है कि दोनों तरफ से छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों को साधने की कोशिश हो रही है। बहुमत के खेल में ये विधायक अहम कड़ी बन गए हैं। देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शनिवार सुबह शपथ ली थी। 105 विधायकों वाली बीजेपी को चुनाव के बाद कई निर्दलीयों ने सार्वजनिक तौर पर समर्थन दिया था। पिछले दिनों पार्टी ने 119 विधायक का समर्थन होने की बात कही थी। अजित पवार के साथ आने से यह संख्या बढ़ गई है। लेकिन, अजित के साथ एनसीपी के कितने विधायक हैं यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

शिवसेना भी छोटे दलों और निर्दलीय साथ विधायकों का समर्थन होने का दावा कर रही है। छोटे दलों और निर्दलीयों को लेकर कोई भी दल पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। मसलन, भारतीय शेतकारी कामगार पार्टी ने चुनाव कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ लड़ा था। लेकिन, उसके इकलौते विधायक श्यामसुंदर शिंदे बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं।

बीजेपी की बागी नेता गीता जैन, जिन्होंने टिकट न मिलने पर मीरा-भाईंदर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, उनका कहना है कि वह बीजेपी को ही समर्थन देंगी। गीता जैन ने कहा, “मैंने पहले ही बीजेपी को समर्थन दे दिया है और मैं अपना रुख कभी नहीं बदलूँगी क्योंकि मैं दिल से एक बीजेपी कार्यकर्ता हूँ।” वहीं, प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक बाचू कुडू ने कहा है कि वह शिवसेना के साथ हैं और रहेंगे। वह शिवसेना के विधायकों के साथ ही ललित होटल में ठहरे हुए भी हैं। उनकी पार्टी के विदर्भ से दो विधायक हैं।

इस सब के बीच एक पार्टी है जो इस रस्साकशी से एकदम दूर है। वह है असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी। ओवैसी की पार्टी के दो विधायक हैं और दोनों विधायक विपक्ष में ही बैठने वाले हैं। वे न ही कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ जाएँगे और न ही बीजेपी के साथ। पार्टी के पूर्व विधायक वारिस पठान का कहना है, “हमारे अध्यक्ष (ओवैसी) ने साफ कर दिया है कि हम विपक्ष में ही बैठेंगे। हमारा पक्ष वही है।”

बीजेपी का दावा है कि उसे एनसीपी के पूरे 54 विधायकों का समर्थन है तो है ही, साथ ही 11 निर्दलीय विधायक भी उसके पाले में हैं। यानी कुल 170 विधायकों पर उसका दावा है। उधर, एनसीपी ने शनिवार को दावा किया है कि 49 विधायक अभी भी उसके साथ हैं।

गौरतलब है कि बीजेपी को अजित पवार का समर्थन न मिलने और सरकार बनाने से पहले भी बीजेपी ने 119 विधायकों के समर्थन का दावा किया था। महाराष्ट्र भाजपा के प्रमुख चन्द्रकांत पाटिल ने दावा किया था कि भाजपा को 119 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वह जल्दी ही राज्य में सरकार का गठन करेगी। उन्होंने कहा था, “भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से हमारी संख्या 119 पहुँच रही है। भाजपा इस संख्या के साथ सरकार बनाएगी।”

वैसे देखा जाए तो एनसीपी के संख्याबल पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है क्योंकि कुल 54 विधायक दो खेमों में बँट चुके हैं। राज्य में कुल मिलाकर बड़े दलों के पास 259 विधायक हैं, जबकि 29 विधायकों में कई निर्दलीय और छोटे दलों के विधायक हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इन 29 निर्दलीय और छोटे दलों का समर्थन किस पार्टी को प्राप्त होता है।

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फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेते ही बीमार पड़े प्रोफेसर ज़हीर सैयद, माँगी छुट्टी

महाराष्ट्र में चल रहे पॉलिटिकल ड्रामे ने शनिवार (नवंबर 23, 2019) को कई लोगों को चौंकाया, लेकिन राज्य के एक प्रोफेसर इस पूरे घटनाक्रम के चलते बीमार ही पड़ गए। जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के चंद्रपुर से करीब 43 किलोमीटर दूर गढ़चंदूर स्थित महाविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर ज़हीर सैयद ने दावा किया है कि राज्य में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से वह ‘सदमे’ में हैं और बीमार पड़ गए हैं। जहीर ने कहा कि उन्होंने महाविद्यालय में छुट्टी की अर्जी दी थी लेकिन महाविद्यालय ने उसे नामंजूर कर दिया। अब उनके द्वारा छुट्टी के लिए किया गया आवेदन और उसके लिए बताई गई वजह वायरल हो रही है।

तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एनसीपी नेता अजित पवार के सहयोग से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा के देवेंद्र फड़णवीस की शनिवार की सुबह शपथ ली थी। इसके खिलाफ शिवसेना, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस तीनों ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की और इसमें केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार, फडणवीस एवं एनसीपी नेता अजित पवार को प्रतिवादी बनाया है। इस मामले की सुनवाई आज 11:30 बजे होगी।

इससे एक दिन पहले यानी शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) की रात तक उद्धव ठाकरे की ताजपोशी की खबरें तैर रही थीं, लेकिन सुबह होते ही पासा पूरी तरह पलट गया और सूबे की सियासत ने ऐसी करवट ली जिसका शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा।

राज्यपाल द्वारा राजभवन में शनिवार सुबह 8 बजे आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में फडणवीस और अजित पवार को शपथ दिलाए जाने के बाद NCP में दरार दिखाई देने लगी। पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने भतीजे अजित पवार के कदम से दूरी बनाते हुए कहा कि फडणवीस का समर्थन करना उनका निजी फैसला है। बाद में NCP ने अजित पवार को पार्टी विधायक दल के नेता पद से हटाते हुए कहा कि उनका कदम पार्टी की नीतियों के अनुरूप नहीं है।

शरद पवार ने शनिवार को एनसीपी विधायकों की बैठक बुलाई। बताया गया कि इस बैठक में एनसीपी के 50 विधायक मौजूद थे। एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने बताया कि पार्टी के पॉंच विधायक नेतृत्व के संपर्क में नहीं हैं। साथ ही उन्होंने फिर से सरकार बनाने का दावा करते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के लिए होने वाले चुनाव में ही बीजेपी और अजित पवार वाले धड़े की हार तय है। इसके बाद शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस का राज्य में सरकार बनाना तय है।

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सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय पीठ पर टिकी नजरें, शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस की याचिका पर 11:30 बजे सुनवाई

महाराष्ट्र में शनिवार (नवंबर 23, 2019) का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा। बीजेपी ने शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए अजित पवार के समर्थन के साथ सरकार बना ली। महाराष्ट्र का ये सियासी घमासान अब भी जारी है। मामला सर्वोच्च अदालत में पहुँच गया है। राज्यपाल के फैसले के खिलाफ शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर आज यानी रविवार (नवंबर 24, 2019) को सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट के दूसरे नंबर के वरिष्ठतम न्यायाधीश एनवी रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार गठन के खिलाफ शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की याचिका पर सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर सुनवाई करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति भूषण 2018 में कर्नाटक राजनीतिक संकट के दौरान फ्लोर टेस्ट का आदेश देने वाली तीन-सदस्यीय पीठ के भी सदस्य रहे हैं।

एनसीपी-शिवसेना-कॉन्ग्रेस की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पक्ष रखेंगे। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में शनिवार की सुबह देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाए जाने के बाद शिवसेना, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस तीनों ने देर शाम संयुक्त रूप से शीर्ष अदालत में याचिका दायर की और इसमें केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार, फडणवीस एवं एनसीपी नेता अजित पवार को प्रतिवादी बनाया है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से मामले की त्वरित सुनवाई की माँग की।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मामले की विशेष सुनवाई रविवार सुबह 11:30 बजे का समय निर्धारित किया है। इस तरह एक बार फिर शीर्ष अदालत छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा देवेंद्र फडणवीस को सरकार गठन के लिए आमंत्रित किए जाने को असंवैधानिक, निरंकुश, गैर-कानूनी एवं संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करार देने का शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया है।

इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने शिवसेना- एनसीपी और कॉन्ग्रेस गठबंधन ‘महा विकास अघाड़ी’ को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का राज्यपाल को निर्देश देने की भी माँग की है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी’ की पर्याप्त विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि देवेंद्र फडणवीस सरकार बहुमत के आँकड़े से काफी पीछे है।

शनिवार को एनसीपी विधायकों की बैठक में अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया। पार्टी प्रवक्ता नवाब मलिक ने बताया कि सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाया गया और कहा गया कि पार्टी उनके फैसले का समर्थन नहीं करती। उन्होंने बताया कि नए नेता के चुनाव तक जयंत पाटिल को विधायक दल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गौरतलब है कि एनसीपी नेता अजित पवार के सहयोग से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा के देवेंद्र फड़णवीस की शनिवार की सुबह शपथ ली। अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजभवन में तड़के हुए शपथ ग्रहण समारोह के बारे में लोगों को भनक तक नहीं लगी। राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाने के तुरंत बाद शपथ ग्रहण समारोह हुआ। महाराष्ट्र में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्र का शासन हटाने के लिए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और इस संबंध में एक गजट अधिसूचना शनिवार तड़के 5 बजकर 47 मिनट पर जारी की गई।

यह शपथ ग्रहण ऐसे समय में हुआ जब एक दिन पहले शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी। शपथ ग्रहण के बाद एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने दावा किया कि भाजपा के साथ जाने का फैसला अजित का व्यक्तिगत निर्णय है न कि पार्टी का। वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने के फैसला को लेकर अजित पवार पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने अजित पवार के लौट आने का भी दावा किया। ऐसे में अब सबकी नजरें रविवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिक गई है।

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अयोध्या में राम मंदिर: ‘शरीयत के ख़िलाफ़ है सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम समर्थन भी करें तो फर्क़ नहीं पड़ता’

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का पक्ष रखने वाले ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा है कि राम मंदिर मामले में शीर्ष अदालत का फ़ैसला शरीयत के ख़िलाफ़ है। जिलानी ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने जो फ़ैसला दिया, वो अंतिम नहीं है। जिलानी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट अब तक एक दर्जनों ऐसे फ़ैसलों को पलट चुका है, जो 5 सदस्यीय पीठ ने दिया हो। उन्होंने दावा किया कि क़ानून के जानकर इस बात को जानते हैं कि 5 सदस्यीय पीठ द्वारा दिया गया फ़ैसला अंतिम नहीं है।

बकौल ज़फ़रयाब जिलानी, सुप्रीम कोर्ट ने कभी नहीं कहा है कि 5 सदस्यीय पीठ का फ़ैसला अंतिम है और उसे स्वीकार करना ही करना है। बता दें कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड बार-बार कहता रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फ़ैसले को स्वीकार करेगा। जब इस सम्बन्ध में जिलानी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कहा कि ये फ़ैसला अंतिम है ही नहीं। उन्होंने अनुच्छेद 137 का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें समीक्षा याचिका दायर करने का पूरा अधिकार है। जिलानी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव भी हैं। बोर्ड ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही थी।

मामले के अन्य मुस्लिम पक्षों के बारे में बात करते हुए जिलानी ने कहा कि उन्हें सभी के विचारों पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के लिए कहीं अन्यत्र 5 एकड़ की ज़मीन देना शरीयत क़ानून के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक शरिया इस बात की अनुमति नहीं देता। ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष इस फ़ैसले को स्वीकार नहीं कर सकता। ज़फ़रयाब जिलानी को पत्रकारों ने याद दिलाया कि सोशल मीडिया पर अधिकतर मुस्लिमों ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को स्वागत किया है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिलानी ने कहा कि देश में 20 करोड़ मुस्लिम हैं, अगर 2 लाख भी इस फ़ैसले का समर्थन करते हैं तो फ़र्क़ नहीं पड़ता।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड समीक्षा याचिका दायर करने के पक्ष में नहीं हैं। इस पर जिलानी ने कहा कि लोकतंत्र में सबके अलग-अलग विचार हो सकते हैं। कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा था कि अगर मुस्लिम पक्ष चाहता तो काफ़ी पहले ही इस मामले को सुलझाया जा सकता है। मुस्लिम बुद्धिजीवियों के बयानों का जवाब देते हुए ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि ऐसे लोग अपने ड्राइंग रूम में बैठ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। उन्होंने दावा किया कि वो इस लड़ाई को 1986 से ही लड़ रहे हैं और वो भी पूरे ईमानदारी से।

ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी के अब्बा ने बाबरी मस्जिद का समर्थन किया था। उन्होंने बताया कि 9 दिसंबर से पहले समीक्षा याचिका दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी वैधानिक विकल्प हैं, उन्हें आजमाया जाएगा। बता दें कि राम मंदिर मामले में में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फ़ैसला सुनाया और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए कहीं और 5 एकड़ ज़मीन देने का आदेश केंद्र सरकार को दिया था।

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फडणवीस-पवार जुगलबंदी पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, NCP का दावा- केवल 5 विधायक ही नहीं साथ

महाराष्ट्र का सियासी घटनाक्रम शनिवार को पल-पल बदलता रहा। शाम होते होते मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुॅंच गया। शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस ने गवर्नर की ओर से बीजेपी और अजित पवार को सरकार बनाने को न्यौता दिए जाने को असंवैधानिक बताते हुए शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। तीनों दलों ने इस शपथ को रद्द किए जाने की भी मॉंग की है। याचिका पर रविवार सुबह साढ़े 11 बजे सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

इससे पहले शरद पवार ने एनसीपी विधायकों की बैठक बुलाई। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैठक में एनसीपी के 50 विधायक मौजूद थे। एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने बताया कि पार्टी के पॉंच विधायक नेतृत्व के संपर्क में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के लिए होने वाले चुनाव में ही बीजेपी और अजित पवार वाले धड़े की हार तय है। इसके बाद शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस का राज्य में सरकार बनाना तय है।

पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने कहा ​है कि देवेंद्र फडणवीस ने गवर्नर को गुमराह कर शपथ लिया है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। चव्हाण ने कहा कि एनसीपी के पास संख्याबल मौजूद है। केवल चार से पॉंच विधायक पार्टी के संपर्क में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अजित पवार को भी लौट जाना चाहिए।

हालॉंकि, एनसीपी विधायकों की बैठक में अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया। नवाब मलिक ने बताया कि सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाया गया और कहा गया कि पार्टी उनके फैसले का समर्थन नहीं करती। उन्होंने बताया कि नए नेता के चुनाव तक जयंत पाटिल को विधायक दल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गौरतलब है कि एनसीपी नेता अजित पवार के सहयोग से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा के देवेंद्र फड़णवीस की शनिवार की सुबह शपथ ली। अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजभवन में तड़के हुए शपथ ग्रहण समारोह के बारे में लोगों को भनक तक नहीं लगी। राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाने के तुरंत बाद शपथ ग्रहण समारोह हुआ। महाराष्ट्र में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्र का शासन हटाने के लिए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और इस संबंध में एक गजट अधिसूचना तड़के 5 बजकर 47 मिनट पर जारी की गई।

यह शपथ ग्रहण ऐसे समय में हुआ जब एक दिन पहले शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी। शपथ ग्रहण के बाद एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने दावा किया कि भाजपा के साथ जाने का फैसला अजित का व्यक्तिगत निर्णय है न कि पार्टी का। वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने के फैसला को लेकर अजित पवार पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने अजित पवार के लौट आने का भी दावा किया। ऐसे में अब सबकी नजरें रविवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिक गई है।

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महाराष्ट्र में घटनाक्रम और नाटकीय होता जा रहा है। शनिवार (नवंबर 23, 2019) को अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से बगावत कर भाजपा का समर्थन कर दिया और देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अजित उप-मुख्यमंत्री बने। अब सभी दल अपने-अपने विधायकों को सुरक्षित ठिकाने पर पहुँचाने में लगे हुए हैं। कॉन्ग्रेस ने अपने विधयकों को जयपुर पहुँचा दिया है, जहाँ उसकी ही सरकार है। वहीं शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे भी विधायकों ने मिल कर उन्हें ढाँढस बंधा रहे हैं। उद्धव ने ललिता होटल में विधायकों को आश्वासन दिया कि सरकार शिवसेना की ही बनेगी।

सबसे ज्यादा खलबली एनसीपी के कैम्प में मची हुई है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि एनसीपी के 54 में से 50 विधायक मुंबई में शरद पवार की बैठक में शामिल हुए। ये बैठक वाईबी सेंटर में हुई। 2 शिवसेना विधायक मुंबई एयरपोर्ट से लाए गए। शिवसेना के नेताओं मिलिंद नार्वेकर और एकनाथ शिंदे दो एनसीपी विधायकों संजय बंसोड और बालासाहब पाटिल को मुंबई एयरपोर्ट से लेकर आए। कहा जा रहा है कि ये दोनों अजित पवार गुट के विधायक हैं। शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फ़ैसले ख़िलाफ़ याचिका दायर की है। इसमें राज्यपाल के क़दम को मनमाना और त्रुटिपूर्ण बताया है। तीनों दलों ने मिल कर एक रिट पेटिशन भी दायर की है।

शिवसेना ने इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उसने कहा था कि राज्यपाल ने उसे सरकार गठन के लिए उचित मौक़ा नहीं दिया। उस याचिका के बारे में अब शिवसेना ने कुछ स्पष्ट नहीं किया है। कॉन्ग्रेस नेताओं की कोशिश है कि शनिवार रात को ही इस मामले की सुनवाई हो।

अगर ऐसा होता है तो रात भर ये नाटकीय ड्रामा चलता रहेगा। शिवसेना की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे। शिवसेना की माँग है कि विधायकों की ख़रीद-फरोख्त रोकने के लिए 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट कराया जाए। पार्टी का कहना है कि ये अल्पमत की सरकार है।

एनसीपी ने दावा किया है कि देवेंद्र फडणवीस के शपथग्रहण समहोह में शामिल होने वाले पार्टी के 8 विधायकों में से 7 वापस आ चुके हैं और उन सभी ने शरद पवार के प्रति आस्था जताई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुंगंतीवार ने दावा किया है कि भाजपा के पास 170 विधायकों का समर्थन है। विधायकों को जमा करने में मची आपाधापी के बीच राजस्थान में 2 बार पूरे के पूरे बसपा विधायक दल को तोड़ने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि उनकी सरकार जयपुर आने वाले सभी विधायकों को सुरक्षा देगी, चाहे वो किसी भी पार्टी के हों।

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जिस दाँव से ‘दादा’ को चित कर CM बने थे शरद पवार, उसी से अजित ने चाचा को दी पटखनी

अजित पवार की चाल ने लोगों को 41 साल पुरानी एक सियासी कहानी याद दिला दी है। यह कहानी भी महाराष्ट्र की है। उस कहानी के केंद्र में शरद पवार थे। ठीक वैसे ही जैसे आज उनके भतीजे अजित हैं। तब पवार कॉन्ग्रेस को तोड़ मुख्यमंत्री बने थे। उस समय अंगूर की खेती करने वाले पवार केवल 37 साल के थे। अपने दॉंव से वे राज्य के सबसे युवा सीएम बन गए। लेकिन, पवार ने कल्पना नहीं की होगी कि एक वक्त ऐसा भी आएगा जब यही दॉंव उन पर आजमाया जाएगा। उन्हें इस दॉंव से पटखनी देने वाला खुद उनका ही भतीजा होगा। वो भतीजा जिसे राजनीति के तमाम दॉंव-पेंच उन्होंने खुद सिखाए हैं।

फर्क केवल यह है कि इस दॉंव का इस्तेमाल करना वे 37 साल में सीख गए थे। बदले में मुख्यमंत्री का पद हासिल किया। भतीजे ने इस दॉंव को 60 साल की उम्र में आजमाया और डिप्टी सीएम का पद पाया। दरअसल, आपातकाल हटने के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनावों के बाद कॉन्ग्रेस टूट गई थी। एक धड़े को कॉन्ग्रेस (यू) और दूसरे को कॉन्ग्रेस (आई) के नाम से जाना गया। लोकसभा चुनाव के दौरान कई राज्यों में पार्टी की हार हई थी। महाराष्ट्र भी अपवाद नहीं रहा। हार के बाद तब मुख्यमंत्री रहे शंकर राव चव्हाण ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।

शरद पवार के गुरु यशवंत राव चव्हाण कॉन्ग्रेस (यू) का हिस्सा बने। पवार भी गुरु के धड़े में गए। इसके बाद 1978 में कॉन्ग्रेस के दोनों धड़ों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। बाद में जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए कॉन्ग्रेस के दोनों गुट मिल गए और उन्होंने वसंतदादा के नेतृत्व में सरकार बनाई। शरद पवार को वसंतदादा की सरकार में श्रम एवं उद्योग मंत्री बनाया गया। कहा जाता है कि अपने गुरु यशवंत राव के इशारे पर शरद पवार ने ‘दादा’ की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 12 जुलाई 1978 को कैबिनेट से अचानक इस्तीफा दिया और महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल मच गया।

उस समय वाईबी चव्हाण कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अध्यक्ष स्वर्ण सिंह विदेश दौरे पर थे। वो उस समय धर्मसंकट में फँस गए कि पवार वाले मुद्दे को कैसे हैंडल करना है। चव्हाण ने पवार के इस क़दम को धोखा बताते हुए इसका विरोध तो किया, लेकिन पवार के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया। जब कॉन्ग्रेस में कई बड़े नेता पवार के विरोधी हो उठे थे, चव्हाण ने नरम रुख अपनाया। कहा जाता है कि चव्हाण ने ही अपने चेले शरद पवार को ऐसा करने के लिए उकसाया था। दोनों के बीच एक बैठक भी हुई थी। कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी की बातों को न मानने वाले पवार के रुख से चव्हाण ख़ुश थे।

शरद पवार के नेतृत्व में ‘प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट’ बना और जनता पार्टी के समर्थन से सरकार बनी। उनके फ्रंट के अलावा उस गठबंधन में जनता पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया और सीपीएम के विधायक शामिल थे। पवार कॉन्ग्रेस के 40 विधायकों को लेकर निकले थे और बाकी अन्य पार्टियों के थे। रिपब्लिकन पार्टी रामदास आठवले की पार्टी है। पवार ने 288 सदस्यीय विधानसभा में 180 विधायकों का समर्थन जुटाया था। शरद पवार वसंतदादा कैबिनेट में इंदिरा गाँधी गुट के बढ़ते प्रभाव से नाराज़ थे और उनके व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा तो थी ही। शरद पवार काफ़ी दिनों से जनता पार्टी से संपर्क में थे।

इस बार भी अजित पवार ने किसी को भी इस बात की भनक नहीं लगने दी कि वो क्या करने वाले हैं। अजित शुक्रवार रात तक अपनी पार्टी की तरफ़ से शिवसेना और कॉन्ग्रेस की बैठकों में शामिल हो रहे थे। उसी बैठक में मुख्यमंत्री के रूप में उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बन गई थी। शाम को उस बैठक में शामिल रहे अजित ने रात के 12 बजे राज्यपाल से मुलाक़ात कर भाजपा को समर्थन वला पत्र सौंप दिया। लगभग 6 घंटे के अंतराल में अजित पवार शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की बैठक से निकल कर फडणवीस को समर्थन दे आए। शरद पवार को उनके ही दाँव से भतीजे ने उन्हें चित कर दिया।

वैसे, एनसीपी में ताज़ा फूट की पटकथा सितम्बर 2019 से ही लिखी जानी शुरू हो गई थी। सितम्बर के आखिरी हफ्ते में अजित पवार ने अचानक से राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया था। शरद पवार ने कहा था कि 25,000 करोड़ रुपए के को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में उनका नाम आने से वो दुखी थे। ख़ुद शरद पवार ने स्वीकारा था कि भतीजे ने उनकी राय लिए बिना इस्तीफा दिया है। यहाँ तक कि इस्तीफा देने के बाद भी उन्होंने अपने चाचा से बात नहीं की थी। अजित के बेटे पार्थ ने उस समय कहा था कि अजित मानते हैं कि राजनीति से
संन्यास लेने का ये सही वक़्त है। कहा तो ये भी गया था कि शरद पवार द्वारा अपनी बेटी सुप्रिया सुले को आगे करने के फ़ैसले से अजित पवार नाराज़ थे।

1978 में जो हुआ था, वो पारिवारिक लड़ाई तो नहीं थी लेकिन वो भी चौंकाने वाली घटना ज़रूर थी। पूरे देश में यह चर्चा चल निकली थी कि चव्हाण के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस का जनता पार्टी के साथ गठबंधन हो सकता है। महाराष्ट्र को उदाहरण मान कर राजनीतिक विश्लेषक इन संभावनाओं पर चर्चा करने लगे थे कि इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस का एक धड़ा जनता पार्टी के साथ जाकर महाराष्ट्र की तर्ज पर काम कर सकता है। जनता पार्टी में कई ऐसे लोग थे, जो कॉन्ग्रेस से आए थे। कई सोशलिस्ट थे। ऐसे में, उनका चव्हाण के नेतृत्व में एक नई पार्टी के गठन की सम्भावना जताई गई थी।

उस दौरान शरद पवार के शपथग्रहण के दौरान चंद्रशेखर और मधु लिमये सहित जनता पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। जनता पार्टी ने पवार से ज्यादा संख्याबल होने के बावजूद उन्हें समर्थन दिया था, क्योंकि वो चाहते थे कि बाद में पवार को हटा कर वो ख़ुद के सीएम को बिठा सकते हैं। ताज़ा घटना में अजित पवार अगर एनसीपी के 36 विधायकों को तोड़ लेते हैं तो भाजपा और एनसीपी के अजित गुट की सरकार पूरे 5 साल चल सकती है। अब देखना यह है कि विधानसभा में फडणवीस और अजित बहुमत कैसे साबित करते हैं। अब तो एनसीपी द्वारा अजित को मनाने की कोशिशें भी असफल हो चुकी हैं।

कहा जाता है कि पवार ने 41 साल पहले जो कुछ किया था वो अपने राजनीतिक गुरु यशवंत राव चव्हाण के इशारे पर किया था। अजित ने अपने राजनीतिक गुरु शरद पवार की मिलीभगत से ही कदम उठाया है, ऐसा दावा करने वाले भी बहुत हैं। हालॉंकि अब तक शरद पवार के रुख से ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा। लेकिन, यह नहीं भूलना चाहिए कि पवार और उनकी बेटी को मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाने की संभावना उसी रामदास आठवले ने जताई है जिन्होंने कुछ दिन पहले दावा किया था कि उनसे अमित शाह ने कहा है कि जल्दी ही सब कुछ ठीक हो जाएगा और महाराष्ट्र में भाजपा की ही सरकार बनेगी।

…अगर 36 का आँकड़ा पार नहीं कर पाए अजित पवार, तो महाराष्ट्र में गिर जाएगी फडणवीस की सरकार!

NCP ने अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाया, शरद पवार ने कहा- एक्शन लेगी पार्टी

हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे, लेंगे अजित पर फैसला: शरद पवार