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बंगाल के मालदा में सड़क किनारे गाय बाँधने पर पीट-पीट कर भीड़ ने की अजय की हत्या, 3 गिरफ्तार, मुख्य आरोपित फरार

पश्चिम बंगाल के मालदा में गाय बाँधने की बात पर भीड़ ने एक आदमी को पीट-पीट कर मार डाला। बता दें कि सड़क किनारे अपनी गाय बाँध रहे अजय कुमार दास को नशे में धुत कुछ हथियारबंद लोगों ने लाठी-डंडों से मारना चालू कर दिया। शनिवार रात को हुई इस घटना के सम्बन्ध में पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है हालाँकि इस घटना का मुख्य-आरोपित अभी भी फरार है।

पुलिस के मुताबिक अजय ने गाय पाल रखी थी, जिसे सड़क किनारे बाँधने के चलते रोड पर वाहनों को आवाजाही में दिक्कत का सामना करना पड़ता था। शनिवार रात चिरंजीत मंडल की अगुवाई में कुछ लोगों की भीड़ ने अजय दास पर हमला बोल दिया। घटना मालदा के गोलोकटोला गाँव की है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब अजय को उन लोगों ने अपने बाँधे हुए जानवर हटाने के लिए कहा तो उसने इससे साफ़ इनकार कर दिया, इसीके बाद दोनों पक्षों के बीच शुरू कहासुनी ज़ोरों पर पहुँच गई।

देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में तब्दील हो गई और नशे में धुत लोगों ने अजय दास पर अपनी लाठी और डंडों से हमला बोलकर उसे बुरी तरह ज़ख़्मी कर दिया और लहू-लुहान हालत में छोड़कर भाग गए। इस घटना के बाद 42 वर्षीय अजय को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया मगर शरीर पर आई गंभीर चोटों की वजह से अगले ही दिन रविवार को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अजय के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

मृतक अजय की माँ ने छः लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है इनमें से तीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है जिनका नाम बासुदेब मंडल, भूदेब मंडल और काजल मंडल है। सोमवार को इन तीनों को अदालत में पेश किया गया हालाँकि इस घटना का मुख्य आरोपित अभी फरार है। मामले पर जानकारी देते हुए मोथाबरी थाने के सोम्जित मालिक ने बताया अजय एक बीमारी से जूझ रहा था जिसके चलते वह यह बर्दाश्त न कर सका और उसकी मौत हो गई।

गूगल बढ़ावा दे रहा गज़वा-ए-हिन्द को: ऍप और किताब डाउनलोड के लिए उपलब्ध?, सोशल मीडिया पर दिखा गुस्सा

भारतीय खिलाड़ी, स्पेशल फोर्सेज़ के रिटायर्ड सैनिक और भाजपा सदस्य मेजर सुरेंद्र पूनिया ने ट्विटर पर हैरतंगेज़ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इसमें गूगल के ऍप स्टोर पर ‘गज़वा ए हिन्द’ के नाम से एक ऍप और एक किताब डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध दिखाए जा रहे हैं। इस ट्वीट में उन्होंने एनआईए, गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए उनका ध्यान दिलाया है। साथ ही अपने फॉलोवर्स से इस ऍप को गूगल को रिपोर्ट करने के लिए भी कहा है।

बता दें कि गज़वा ए हिन्द का मतलब हिंदुस्तान पर हमला और उसे दार उल इस्लाम बनाने की लड़ाई होता है। आठवीं सदी में सिंध और मुल्तान को खलीफा के लिए जीतने वाले मुहम्मद बिन खलीफा से लेकर आज पाकिस्तान और अन्य कट्टरपंथियों को भारत से दुश्मनी इसी के चलते है।

मेजर पूनिया के ट्वीट को ट्विटर पर तेज़ी से रीट्वीट भी किया जा रहा है। एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थक प्रशांत ने कहा कि अगर गूगल इस पर कार्रवाई न करे तो गूगल पर कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंशुल सक्सेना ने भी रीट्वीट करते हुए संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद को टैग किया। उन्होंने पूछा कि गूगल अपने प्लेटफोर्म पर कट्टरपंथ को जड़ें कैसे जमाने दे सकता है। साथ ही ऍप और किताब की लिंक भी डालते हुए इन्हें रिपोर्ट करने की अपील की।

कुछ सोशल मीडिया यूज़रों ने रिपोर्ट करने की प्रक्रिया भी स्टेप बाई स्टेप बतानी शुरू कर दी है। सलाह दी है कि रिपोर्ट करते समय कैटेगरी में ‘अब्यूसिव ऑर हार्मफुल कंटेंट’ रखा जाए।

पुलिस कर्मियों की माँगें मानी गईं, धरना ख़त्म: वकीलों के समर्थन में AAP, कहा- दिल्ली पुलिस BJP की सशस्त्र सेना

दिल्ली में चला आ रहा पुलिस बनाम वकीलों का टकराव खत्म होता दिख रहा है। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार धरना, प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे पुलिस वालों की सभी माँगें मान ली गईं हैं, और 11 घंटे तक चली हड़ताल फ़िलहाल खत्म हो गई है। इसके पहले इस बारे में गृह मंत्री अमित शाह के घर बैठक भी हुई। बकौल न्यूज़ 18, उनकी माँगें थीं:

1. निलंबित पुलिस अधिकारी को बहाल करना,
2. घायल पुलिस अधिकारी को मुआवजा,
3. अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई,
4. सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील,
5. पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने वाले व्यक्तियों का सत्यापन,
6. निचले अधिकारियों के लिए पुलिस एसोसिएशन की माँग।

जॉइंट कमिश्नर देवेश श्रीवास्तव ने पुलिस वालों को आज शाम (5 नवंबर, 2019 को) उनकी सभी माँगें मान लेने का आश्वासन उनसे मुलाकात करके दिया है। इसके पहले दिल्ली पुलिस के कमिश्ननर अमूल्य पटनायक की अपील का पुलिस वालों पर कोई असर नहीं पड़ा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस जहाँ एक तरफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी वहीं सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर हमला बोला है। ‘आम आदमी पार्टी’ ने कहा कि दिल्ली पुलिस ‘राजनीतिक इकाई’ में तब्दील हो गई है। यह बीजेपी की सशस्त्र शाखा की तरह काम कर रही है, जबकि इसका काम कानून-व्यवस्था बनाए रखने का है। वकीलों के समर्थन में आई आप ने दिल्ली पुलिस पर कई सवाल खड़े किए हैं।

पिछले हफ्ते के शनिवार (2 नवंबर, 2019 को) पार्किंग विवाद को लेकर दिल्ली के तीस हज़ारी कोर्ट के बाहर वकीलों और पुलिस के बीच हिंसा हुई थी। एक पुलिस कार और 20 अन्य वाहनों को आग लगा दी गई थी। 2 पुलिस वालों को दिल्ली हाई कोर्ट ने सस्पेंड कर दिया था और न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए थे।

इस मामले के खिलाफ आज दिल्ली के हज़ारों पुलिस वाले वर्दी उतार कर सादे कपड़ों में विरोध प्रदर्शन और हड़ताल करने लगे थे। इसके अलावा कई वर्तमान और भूतपूर्व अफसरों ने भी इसके खिलाफ ट्विटर पर आवाज़ उठाई। जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने लिखा कि उन पुलिस वालों की हालत देखना दुखद है जो अपनी पूरी ज़िंदगी कानून व्यवस्था बनाए रखने में बिताते हैं।

कर्नाटक की सेवारत आईपीएस डी रूपा ने लिखा कि अगर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस वालों का मनोबल गिरेगा।

वे उस ट्वीट को रीट्वीट कर रहीं थीं, जिसमें कल (4 नवंबर, 2019 को) एक पुलिस वाले के साथ वकीली कपड़े पहने लोगों द्वारा हाथापाई का वीडियो था। वीडियो में बताया गया था कि यह साकेत कोर्ट का दृश्य है।

अंडमान और निकोबार के डीजीपी दीपेंद्र पाठक ने भी कहा कि काले कोट की आड़ में सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बने लोगों में डर बैठाना ज़रूरी है।

आईपीएस एसोसिएशन ने भी घटना की निंदा में ट्वीट करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कानून तोड़ने वाले सभी लोगों की कड़ी निंदा करते हुए सभी पुलिस वालों को हमले के शिकार पुलिस वालों के साथ खड़ा बताया।

शिवसेना का भाजपा को अल्टीमेटम, 48 घंटे में बता दो, वरना NCP के साथ बनाएँगे सरकार: रिपोर्ट्स

महाराष्ट्र में सत्ता को लेकर खींचतान और बढ़ गई है। सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबरें आ रहीं हैं कि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद की माँग और 50-50 फॉर्मूले को लेकर अडिग रहने पर शिव सेना अपने मुख्यमंत्री की सरकार बनाने के लिए शारद पवार की नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सहायता भी ले सकती है।

डीएनए में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए इस संभावित सरकार को कॉन्ग्रेस का अभी समर्थन बाहर से प्राप्त होगा। डीएनए के शिव सेना सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के साथ सभी तरह की बातचीत अब बंद हो चुकी है और पार्टी अब प्लान बी की तरफ चल रही है।

कॉन्ग्रेस का सहयोग इस प्लान के लिए इसलिए ज़रूरी है कि सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत (145) शिव सेना और एनसीपी को मिलाकर भी नहीं बनेगा। शिव सेना के जहाँ 56 विधायक जीते हैं वहीं 54 विधायक एनसीपी के इस लोकसभा चुनाव में विजयी हुए हैं। भाजपा 105 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और कॉन्ग्रेस के 44 विधायक सदन में होंगे। यानि कॉन्ग्रेस+एनसीपी+शिव सेना का कुल आँकड़ा 153 का बनेगा।

इसके लिए अगर यह गठबंधन बनता है तो शिव सेना अपने केंद्रीय मंत्रियों को भी मोदी सरकार से इस्तीफ़ा देने के लिए कहेगी। डीएनए की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस सरकार की राह प्रशस्त करने के लिए शरद पवार सोनिया गाँधी से मिले थे। कथित तौर पर यह मुलाकात कल (सोमवार, 5 नवंबर, 2019 को) हुई थी।

इससे पहले शिव सेना नेता और पार्टी के मुखपत्र सामना के कार्यकारी सम्पादक संजय राउत ने शनिवार (2 नवंबर, 2019 को) को कहा था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी पार्टी की माँग उचित है और भाजपा से साथ सत्ता साझा करने का आधार जीती गई सीटों की संख्या नहीं, बल्कि चुनाव से पहले हुआ समझौता होना चाहिए।

राउत ने एक समाचार चैनल से कहा कि सरकार का गठन (चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना के बीच) पहले बनी सहमति के आधार पर होना चाहिए न कि इस आधार पर कि सबसे बड़ा एकल दल कौन-सा है।

उसके बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी के पास 170 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होने का दावा कर दिया। उनके मुताबिक ‘महाराष्ट्र के हित में’ शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस और एनसीपी आने को तैयार थे।

अशोक लवासा पर ‘कुछ को’ अनुचित लाभ पहुँचाने का आरोप: केंद्र ने कंपनियों को लिखा पत्र, माँगी जानकारी

केंद्र सरकार ने कथित तौर पर 11 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, पीएसयू) को गोपनीय पत्र लिखकर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के खिलाफ जानकारी माँगी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोदी सरकार ने पत्र में इन कंपनियों को लिखा है कि वे अपने रिकॉर्डों में चेक करें कि 2009 से 2013 के बीच अशोक लवासा ने उन कंपनियों में ‘गैर वाजिब प्रभाव’ का इस्तेमाल तो नहीं किया था। गौरतलब है कि 2009 से 2013 के बीच अशोक लवासा को कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार में ऊर्जा मंत्रालय में तैनाती मिली हुई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर में दावा किया गया है कि यह गोपनीय पत्र मौजूदा ऊर्जा सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की सहमति से लिखा गया है। पत्र की तारीख इस साल के अगस्त के अंत (29 अगस्त, 2019) की बताई जा रही है। पत्र में लिखा है, “यह आरोप लगाया गया है कि श्री अशोक लवासा, आईएएस ने ऊर्जा मंत्रालय में सितंबर 2009 से दिसंबर 2013 के बीच के अपने कार्यकाल में, जॉइंट सेक्रेटरी/एडिशनल सेक्रेटरी/स्पेशल सेक्रेटरी के तौर पर अपनी आधिकारिक स्थिति का इस्तेमाल कुछ कंपनियों/एसोसिएट कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए किया।”

इंडियन एक्सप्रेस ने यह भी दावा किया है कि उसने जब इस आरोप के बारे में लवासा से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है, और वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। लवासा मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के बाद वरिष्ठता में दूसरे सबसे वरिष्ठ आयुक्त हैं।

जिन कंपनियों को लवासा मामले में खोजबीन करने के लिए कहा गया है, उनमें एनटीपीसी, एनएचपीसी लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड और आरईसी लिमिटेड (पूर्व में रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन) शामिल हैं। इस पत्र के साथ ऊर्जा मंत्रालय ने एक सूची भी नत्थी की है, जिसमें उन 14 कंपनियों के नाम हैं जिनमें अशोक लवासा की पत्नी नावेल लवासा डायरेक्टर के पद पर तैनात रह चुकीं हैं। इसके अलावा लवासा दम्पति की भागीदारी वाले प्रोजेक्टों की भी सूची मंत्रालय ने अटैच की है।

इसके पहले सितंबर में नावेल लवासा को इनकम टैक्स विभाग की ओर से क़ानूनी नोटिस भी जारी हुआ था। इसमें उन पर अपनी आय का खुलासा न करने और आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप लगाए गए थे। नावेल एक पूर्व बैंकर हैं, जिन्होंने 2005 में एसबीआई से इस्तीफ़ा दे दिया था।

KRK के बाद एक और भारतीय का ट्विटर को लीगल नोटिस: अकाउंट किया था सस्पेंड

साल 2017 में बॉलीवुड प्रोड्यूसर, सोशल मीडिया पर फिल्म क्रिटिक और ‘देशद्रोही’ फिल्म के लीड अभिनेता कमाल आर खान, जिन्हें केआरके के नाम से भी जाना जाता है, ने ट्विटर को क़ानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी। उन्होंने यह चेतावनी तब दी जब माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ने उनका ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया था। कारण क्या था? कि उन्होंने अभिनेता अजय देवगन की उस समय रिलीज़ हुई फिल्म ‘शिवाय’ को खराब रिव्यु दिया था।

और केआरके केवल चेतवानी भर दे कर रुक गए हों, ऐसा भी नहीं हुआ। एक बॉलीवुड न्यूज़ कवर करने वाले पोर्टल ने उस समय ट्वीट किया कि केआरके ने सच में ट्विटर, ट्विटर इंडिया और ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी को अदालती नोटिस भेज भी दिया। उस ट्वीट में नोटिस की फोटो भी थी।

उस नोटिस में केआरके ने लिखा था कि उनका ट्विटर अकाउंट इस तरह से सस्पेंड किए जाने ने उन्हें काफी मानसिक पीड़ा पहुँचाई है। उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि उन्होंने इस अकाउंट सस्पेंशन को लेकर आत्महत्या की भी धमकी दी थी। ट्विटर ने उनका अकाउंट 1 महीने बाद लौटाया था।

और इस घटना के लगभग दो साल बाद फिर से एक भारतीय नागरिक ट्विटर को अदालत में घसीटने के लिए कमर कस कर तैयार खड़ा है। कारण यही है- अकाउंट गलत तरीके से सस्पेंड कर देना। द प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर को अदालत के चक्कर लगवाने का निर्णय लिया है। हेगड़े ट्विटर से इतने ज़्यादा ख़फ़ा हैं कि अगर ज़रूरत पड़े तो वे ट्विटर को अंतरराष्ट्रीय अदालत में भी घसीटने के लिए तैयार हैं।

हेगड़े का अकाउंट पिछले हफ्ते (27 अक्टूबर, 2019 से 2 नवंबर, 2019) सस्पेंड कर दिया गया था। इसके पीछे कारण बताया गया कि उन्होंने ट्विटर के नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन किया है। उन्होंने ट्विटर से अपना अकाउंट फिर से चालू करने (रिस्टोर करने) की अपील भी की। लेकिन आज ही सुबह (5 नवंबर, 2019 को) ट्विटर ने उनका अकाउंट रिस्टोर करने से साफ़ इंकार कर दिया।

इस जवाब में कहा गया है कि उनकी प्रोफाइल में ट्विटर को ‘नफरत से भरा’ (हेटफुल) और संवेदनशील (सेंसिटिव) कंटेंट मिला है। यह ट्विटर को इस प्लेटफार्म पर मौजूद लोगों को ‘सुरक्षित’ महसूस कराने में आड़े आता है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े को ट्विटर से मिला यह जवाब (The Print से साभार)

हेगड़े ने प्रिंट को बताया कि अब उनके पास किसी दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जाने के अलावा और कोई चारा नहीं है, और वे ट्विटर को अदालत ले जाएँगे। उनका अकाउंट एक नहीं, कई-कई बार सस्पेंड हो चुका है। अक्टूबर में उन पर नाज़ी विरोध की तस्वीर अपने हेडर पर होने का आरोप लगाया ट्विटर ने और अकाउंट तब तक के लिए सस्पेंड रखा, जब तक वे उसे हटा न लें। उसके अगले ही दिन उन्हें 2017 की एक कविता शेयर करने के लिए फिर से सस्पेंड कर दिया गया।

साइंस में Failure नहीं होते, सिर्फ Efforts, Experiments होते हैं और होती है Success: PM मोदी

कोलकाता में मंगलवार को विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाँचवें भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का उदघाटन किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि यह कार्यक्रम ऐसी जगह हो रहा है जहाँ मानवता की सेवा करने वाली विभूतियों ने जन्म लिया है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम ऐसे वक़्त में हो रहा है कि जब 7 नवम्बर को सीवी रमण और 30 नवम्बर जगदीश चन्द्र बोस की जयंती है।

‘RISEN-रिसर्च इनोवेशन एंड साइंस इम्पावरिंग दा नेशन’ को कार्यक्रम का थीम रखने के लिए पीएम मोदी ने आयोजकों का आभार प्रकट किया और कहा कि देश में साइंस और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बड़ा मज़बूत होना चाहिए। इसपर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इकोसिस्टम ऐसा होना चाहिए जो प्रभावी हो और प्रेरणादाई भी।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को भी संबोधित किया और कहा कि वे चुनौतियों को अपनी अपनी तरह से हल करें। उन्होंने कहा कि नीतियों और आर्थिक मदद के ज़रिए हजारों स्टार्टअप को सपोर्ट किया। देश में फैले साइंटिफिक टेम्परामेन्ट पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि आज यह देश में एक अलग ही स्तर पर है। उन्होंने चंद्रयान का उदहारण देते हुए बताया कि कैसे भारत के वैज्ञानिकों ने उस मिशन में पूरी मेहनत की थी, बहुत उम्मीदें बंध जाने के बाद भी वह योजना के अनुसार नहीं हुआ मगर अंततः इस मिशन में भारत के वैज्ञानिकों को सफलता हाथ लगी।

विज्ञान के प्रति युवाओं में बढती रूचि को लेकर मोदी ने कहा कि यह हमारा दायित्व है कि विद्यार्थियों की शक्ति को 21वीं सदी के साइंटिफिक एनवायरनमेंट में सही माहौल में लेकर जाएँ, एक अच्छा प्लेटफोर्म दें। इस दौरान उन्होंने संस्कृत के ही एक श्लोक का भी ज़िक्र किया “तत् रूपं यत् गुणाः। तत् विज्ञानं यत् धर्मः” यानि आपका बाहरी व्यक्तित्व तभी सार्थक है जब आप गुणवान भी हों, इसी तरह विज्ञान उपयोगी वही है जो समाज के लिए हितकारी हो।

उन्होंने साइंस फॉर सोसाइटी के महत्त्व पर बात करते हुए बताया कि कैसे विज्ञान के इस्तेमाल से जीवन सुगम बनाया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि “विज्ञान में फेलियर कुछ नहीं होता, सब कुछ प्रयत्न या प्रयोग होते हैं और फिर कामयाबी होती है। इसीलिए लम्बे मुनाफे का सोचना चाहिए।

शिवसेना टूटेगी और फडणवीस बनेंगे मुख्यमंत्री, 25 विधायक BJP के संपर्क में: महाराष्ट्र के MLA का दावा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बावजूद सरकार कौन बनाएगा इसकी तस्वीर अब तक साफ़ नहीं हो पाई है। सभी राजनीतिक दल महाराष्ट्र की सत्ता तक पहुँचने के लिए जरुरी अंक जुटाने में लगे हैं वहीं इस बीच एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीतकर आए निर्दलीय विधायक रवि राणा ने बयान दिया है कि शिवसेना के पच्चीस विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। बता दें कि राणा ने भाजपा को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। सोमवार को अपनी पत्नी और सांसद नवनीत कौर राणा के साथ उन्होंने मुंबई में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी मुलाक़ात की।

भाजपा और शिवसेना के बीच चल रही तकरार को लेकर उन्होंने शिवसेना के नेताओं को भी नसीहत दी और कहा कि संजय राउत के मुँह पर लगाम लगनी चाहिए। दोनों राजनीतिक दलों के बीच चल रही तकरार में शिवसेना की ओर से बयानबाज़ी करने में संजय राउत सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को राउत पर नियंत्रण रखना चाहिए। रवि ने राउत को शिवसेना का ‘तोता’ बताया है।

उन्होंने कहा कि वे खुद शिवसेना के करीब 25 विधायकों के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि अगर फडणवीस मुख्यमंत्री बनते हैं तो शिवसेना में टूट संभव है। राणा ने शिवसेना पर हद से ज्यादा अहंकारी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि फडणवीस को शिवसेना पर लगाम लगानी चाहिए। रवि ने कहा कि 21 अक्टूबर को लोगों ने किसी एक पार्टी के लिए नहीं बल्कि लोगों ने इस युति (गठबंधन) के लिए वोट दिया है। बता दें कि इस चुनाव परिणाम में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला सका था वहीं भाजपा अभी 105 सीट जीतने के साथ सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 145 सीटों के अंक से दूर है।

मेरी अम्मी बीमार पड़ जाएँगी, कश्मीर में बहुत सर्दी पड़ती है: महबूबा की बेटी की ‘इल्तजा’

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ़्ती की बेटी ने सर्दियों में उन्हें उनकी नज़रबंदी के वर्तमान स्थान से कहीं और शिफ्ट किए जाने की माँग की है। बकौल इल्तजा मुफ़्ती, महबूबा का वर्तमान निवास कश्मीर घाटी की कड़ी ठंड के हिसाब से अनुकूल नहीं है।

इल्तजा ने ट्विटर पर महबूबा मुफ़्ती के अकाउंट से यह भी लिखा कि उन्होंने एक महीने पहले ही श्रीनगर के जिला कलेक्टर को इस बारे में पत्र लिखा था। “अगर उन्हें कुछ हो गया तो भारत सरकार ज़िम्मेदार होगी।”

उन्होंने साथ में अंग्रेजी में हाथ से लिखे गए एक पत्र की कॉपी भी ट्वीट की है। इसमें लिखा है कि महबूबा को मेडिकल जाँच में विटामिन डी, हीमोग्लोबिन और कैल्शियम की कमी पाई गई है। उनका निवास (जहाँ वे नज़रबंद हैं) कश्मीर की कड़ाके की सर्दी से बचाव नहीं कर सकता है। इल्तजा ने इन बिंदुओं के आधार पर उन्हें किसी दूसरे, उचित स्थान पर तत्कालिक रूप से शिफ्ट किए जाने की माँग की है।

लेकिन ट्विटर पर लोगों को इल्तजा की यह गुज़ारिश और ट्वीट रास नहीं आए, और उनकी जम कर ट्रोलिंग शुरू हो गई है। एक व्यक्ति ने लिखा कि अगर यह एक महीने पुराना पत्र है तो इसमें जिला कलक्टर की रिसीविंग और स्टाम्प कहाँ है।

इसके अलावा कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यह लो कैल्शियम लेवल आदि केवल मुफ़्ती की समस्याएँ नहीं हैं। विकाशील देशों की कई महिलाएँ इनसे ग्रस्त हैं। महबूबा को कुछ नहीं होने वाला।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने के पहले से ही महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्ला, फारूख अब्दुल्ला समेत घाटी के तमाम नेताओं को केंद्र सरकार ने एहतियातन नज़रबंद कर दिया था।

घाटी में इन्टरनेट सेवाएँ बंद कर दिए जाने और खुद की नज़रबंदी के चलते 370 हटने के तुरंत बाद महबूबा मुफ़्ती अन्य नेताओं की तरह सोशल मीडिया पर अनुपलब्ध रहीं। लेकिन विगत 20 सितंबर से उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट को इस्तेमाल करने का अधिकार बेटी इल्तजा मुफ़्ती को दे रखा है। 

अबसार ख़ान ने भगवान राम और सीता को कहे अश्लील अपशब्द: महिला को भेजे प्राइवेट पार्ट्स के फोटो

पुलिस सोशल मीडिया पर घृणा फैला रहे असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने के लाख दावे करे लेकिन ऐसे लोग अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं। इस सूची में ताज़ा नाम मोहम्मद अबसार का जुड़ा है। मोहम्मद अबसार ने न सिर्फ़ गलती की बल्कि बड़े गर्व से अपना नाम-पता भी बताया। यह दिखाता है कि न तो उसे समाज का कोई भय है, और न ही क़ानून का कोई डर। एक महिला के साथ सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार करने के बाद उसने लोगों को धमकी भी दी। अभिषेक आनंद नामक व्यक्ति ने अपने ट्विटर हैंडल से अबसार ख़ान के करतूतों के बारे में जानकारी दी।

दरअसल, अबसार ख़ान एक महिला को अपने प्राइवेट पार्ट्स की फोटो भेज रहा था। वह महिला अभिषेक की दोस्त थीं। अभिषेक ने अबसार को फेसबुक पर मैसेज कर के डाँटा और पूछा कि उसे अपने प्राइवेट पार्ट्स की फोटो दिखाने का शौक क्यों है? इसके बाद अबसार ख़ान ने जिन शब्दों का प्रयोग किया, उसे आप भी देखिए:

  • तू लेगा #$% में?
  • या %*# में डलवाएगा?
  • *#डी की औलाद
  • *#&%की की नस्ल
  • बहन के *#%

इसका बाद अबसार ख़ान ने अपने मजहब को लेकर बातें करनी शुरू कर दी और हिन्दुओं के प्रति अपनी घृणा को प्रदर्शित किया। उसने कहा:

“अभी तो हम सिर्फ़ 18% हैं तो तेरे जैसों की फटी पड़ी है। सोच जिस दिन हम 50% हो गए, उस दिन क्या होगा? भगा-भगा के मारेंगे। माध#चो* के बच्चों न तो राम की #**# मिलेगी और न ही सीता मैया की *#*$।”

इसके बाद अबसार ने फिर से अपने प्राइवेट पार्ट्स का वीडियो भेजा और कहा, “ले #$%ले, आराम आ जाएगा।” इसके बाद उसने अभिषेक की महिला मित्र के लिए ‘*#डी’ शब्द का प्रयोग करते हुए अपना पता बता दिया। उसने अभिषेक को ‘बन्दर की औलाद’ बताया। उसने कहा कि उसका पता जानकार वो महिला ‘%#*#’ उखाड़ लेगी। उसने अपना पता और नंबर ये दिया:

जे-$#%, न्यू सीलमपुर, दिल्ली, पिन- 1100053, फोन- 9810%$#*#$

मोहम्मद अबसार के फेसबुक अकाउंट की बात करें तो वो गाँधी है स्कूल से पढ़ा हुआ है। उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर भी बताया है कि वो दिल्ली का निवासी है। भगवान राम और माँ सीता के लिए अश्लील अपशब्दों का प्रयोग करने वाला अबसार इतना ढीठ है कि उसने महिला के साथ दुर्व्यवहार करने और इतनी गालियाँ बकने के बाद अपना नंबर और पता भी दे दिया। उसने अभिषेक को हत्या की धमकी दी। अभिषेक ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से गुहार लगाई है कि अबसार को सबक सिखाया जाए और उसपर कार्रवाई की जाए।

अभिषेक ने लिखा कि वो अबसार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने जा रहे हैं क्योंकि वह लगातार हत्या की धमकी दे रहा है। उन्होंने ऑपइंडिया से निवेदन किया कि अबसार की इस करतूत को प्रशासन तक पहुँचाने में मदद करें। अभिषेक ने ट्विटर पर अबसार का फोटो भी शेयर किया। अभिषेक दिल्ली पुलिस से भी नाराज़ दिखे और उन्होंने कोई कार्रवाई न होने के कारण अंदेशा जताया कि कहीं दिल्ली पुलिस उन्हें ही गिरफ़्तार कर के उन पर ही केस दायर न कर दे। उन्होंने पूछा कि भगवान राम और माँ सीता को खुलेआम गाली देने वाले को गिरफ़्तार करने से दिल्ली पुलिस हिचक क्यों रही है?