Home Blog Page 5370

दिल्ली, लुटियंस जोन और प्रदूषण… लेकिन इसी भारत में गाजियाबाद और झरिया भी है, धुएँ-धूल में दम तोड़ता!

दिल्ली-एनसीआर के गैस चैंबर में तब्दील होने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकारों को कड़ी फटकार लगाई। देश की सर्वोच्च अदालत ने इसे जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर तुरंत रोक लगाने के लिए कहा है। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार (नवंबर 5, 2019) को यूपी, पंजाब और हरियाणा सरकार को आदेश जारी करते हुए कहा कि अगर उनके राज्य में एक भी ऐसी घटना घटती है तो पूरे प्रशासन के साथ-साथ राज्य के मुख्य सचिव से लेकर ग्राम प्रधान तक जिम्मेदार होंगे।

कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्यों के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी, तहसीलदार, संबंधित थाना, एसपी, आइजी और पूरी पुलिस व प्रशासनिक मशीनरी सुनिश्चित करे कि उनके यहाँ बिल्कुल पराली न जले। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसान अपनी आजीविका के लिए दूसरे लोगों को मौत के मुँह में नहीं धकेल सकते। कोर्ट ने कहा, “अगर वे (किसान) पराली जलाना जारी रखेंगे तो उनके प्रति हमारी कोई सहानुभूति नहीं रहेगी। किसान यह नहीं कह सकते कि उन्हें दूसरी फसल लगानी है इसलिए पराली जलाना उनका अधिकार है।”

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा

“प्रदूषण की वजह से दिल्ली में लोगों का दम घुट रहा है, लोग घरों के अंदर भी प्रदूषण से सुरक्षित नहीं हैं। बेडरुम और लुटियंस जोन में भी एक्यूआइ का स्तर 500 से ऊपर पहुँच गया है। कोई भी दिल्ली नहीं आना चाहता। हर साल यही होता है। किसी सभ्य समाज में ऐसा नहीं होता।”

प्रदूषण को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण इसलिए क्योंकि यह आम जीवन को प्रभावित करता है, लोगों की जिंदगियाँ छीन रहा है। लेकिन क्या यह मसला सिर्फ दिल्ली तक सीमित है? पराली जलाने की जिस समस्या से दिल्ली और आस-पास के इलाके में बसे लोग प्रभावित हो रहे हैं, क्या प्रदूषण की यह समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित है? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दिल्ली और इसके दिल में स्थित लुटियंस जोन से कहीं ज्यादा प्रदूषण देश के दूसरे शहरों में है। हाँ, यह सच है कि वहाँ का शोर हमें सुनाई नहीं देता। या शायद वहाँ के लोग इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा मान बैठे हैं और खुश हैं, जी रहे हैं।

अगर सिर्फ पराली ही प्रदूषण का एकमात्र कारण होता तो नीचे दिया हुआ ग्राफ कभी भी बन नहीं पाता। ग्राफ से स्पष्ट है कि गैस चेंबर बने दिल्ली की जहरीली हवा का जिम्मेदार सिर्फ पराली जलाना नहीं बल्कि इसके अन्य कारक भी ही हैं। और यही अन्य कारक भारत के उन शहरों को प्रदूषण से जकड़े हुए हैं, जहाँ दूर-दूर तक पराली जलाने की परंपरा भी नहीं है।

टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रदूषण संबंधित दिया हुआ डेटा

माननीय सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली में प्रदूषण की वजह पराली नहीं, बल्कि सड़कों पर धुआँ उड़ाती हुई गाड़ियाँ, धूल-कण और शहर में चलने वाले औद्योगिक संस्थाएँ हैं, जो काफी हद तक प्रदूषण फैलाते हैं। अगर दिल्ली-एनसीआर में 2018 में फैले प्रदूषण की बात करें, तो तकरीबन 41 फीसदी प्रदूषण गाड़ियों से, 21.5 फीसदी हवा में समाहित धूल-कणों से, 22.3 फीसदी औद्योगिक क्षेत्रों से और इसके अलावा अन्य कई वजहों से है।

नासा द्वारा जारी किए गए आँकड़े

बात करते हैं गाजियाबाद की। यह शहर रिकॉर्डधारी शहर है – अच्छे कामों के लिए नहीं बल्कि प्रदूषण रैंकिंग में लगातार देश के अग्रणी शहरों की सूची में बने रहने के लिए। हालात यह है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भी यहाँ की स्थिति पर चिंता जताई है। दिलचस्प बात यह है कि यहाँ आस-पास पराली भी नहीं जलाई जाती (है भी तो बहुत ही छिटपुट) है, फिर भी प्रदूषण की स्थिति सालों से बनी हुई है। लोग रह भी रहे हैं। और ‘जीने का अधिकार’ जितना लुटियंस जोन वालों को संविधान ने प्रदान किया है, उतना ही यहाँ के लोगों के पास भी है, ऐसा मेरा मानना है।

अब चलते हैं गाजियाबाद से 1200-1300 किलोमीटर दूर झारखंड का वो शहर, जो झरिया के नाम से मशहूर है। कहते हैं कि लोग यहाँ चाहे जिस भी रंग का शर्ट पहन सुबह घर से निकलें, शाम को लौटते सभी एक ही रंग का शर्ट पहन कर – काला! गाजियाबाद की ही तरह देश का सबसे अधिक प्रदूषित शहर का तमगा लिए यह शहर भी जी रहा है, शहर के लोग भी जी रहे हैं। झरिया में प्रदूषण का कारण कोयला है। कोयला वो जो यहाँ की जमीन के नीचे जल रहा है, साल-दर-साल से जलता ही जा रहा है। इस कारण कोयले का कण, धूआँ हवा में मिश्रित होकर प्रदूषण के स्तर को बढ़ाते हैं। ऐसा सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। ऐसे में यहाँ प्रदूषणजनित बीमारियाँ आम हैं। और उसी प्रदूषण का शिकार होकर कम होती जिंदगी एक दिन दम तोड़ देती है। लेकिन क्या लुटियंस जोन के निवासियों से यहाँ के वोटर को ‘जीने का अधिकार’ कम है, संवैधानिक स्तर पर तो नहीं ही।

प्रदूषण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागतयोग्य है। प्रदूषण वाकई में आज के समय में जानलेवा बीमारी है और लोग इससे काफी परेशान हैं। इसका निवारण करना अति आवश्यक है। लेकिन यह फैसला दिल्ली-NCR के हित में है, जबकि समस्या से ग्रसित भारत का लगभग-लगभग हर शहर है। माननीय न्यायालय का ध्यान उस ओर भी जाना चाहिए, जहाँ से या तो शोर उठता ही नहीं (शायद नियति मान बैठे हैं) है या उठने वाला शोर ट्विटर के माध्यम से दिल्ली पहुँच ही नहीं पाता।

स्वच्छता आंदोलन देश का आंदोलन है। यह दिल्ली-NCR की सड़कों तक जगमग करता न रह जाए, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन हो और कोर्ट भी वहाँ तक पहुँचे, जहाँ के लोग कोर्ट तक पहुँचने में सक्षम नहीं हैं – और शायद यही हमारे बापू गाँधी के सपनों का भारत होगा!

₹7000 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI ने की 169 स्थानों पर छापेमारी, दर्ज किए 35 FIR

7 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI ने मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात समेत देश के 15 राज्यों में 169 स्थानों पर छापेमारी की। इस मामले में सीबीआई ने 35 मामले भी दर्ज किए हैं।

ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार, देशभर में 169 स्थानों पर छापे मारे गए। यह छापे दिल्ली, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, गुजरात, हरियाणा, कनार्टक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दादरा एवं नगर हवेली में यह छापेमारी की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक सोमवार को हुई थी और मंगलवार को सुबह ही देश के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी करके ऑपरेशन शुरू किया गया।

बता दें पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और नीरव मोदी-मेहुल चौकसी के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने सीबीआई को बैंक धोखाधड़ी करने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

कहा जा रहा है कि सीबीआई द्वारा दर्ज की गई अधिकतर एफआईआर में डिफॉल्टर्स हैं। जिन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर अपनी कंपनियों के नाम पर लोन लिया था। जिसे इन्होंने वापस नहीं किया। इनमें कुछ मामलों में बैंक से धोखाधड़ी करने के मामले में क्रेडिट सुविधा का इस्तेमाल किया गया था।

इसके अलावा इस मामले में सीबीआई ने करोड़ों रुपए के रोजवैली घोटाले की जाँच सिलसिले में उपायुक्त (बंदरगाह संभाग) वकार रजा से भी पूछताछ की थी। हालाँकि सूत्रों ने बताया कि आईपीएस अधिकारी रजा आरोपित नहीं हैं लेकिन रोजवैली समूह ने कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएँ की थी, तब उनकी बतौर सीआईडी अधिकारी क्या भूमिका थी, उसका पता लगाने के लिए उन्हें यहाँ सीबीआई के सीजीओ परिसर कार्यालय में तलब किया गया था। ईडी के अनुसार इस समूह ने निवेशकों को 15,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया था, जिसमें ब्याज और जुर्माने की राशि भी शामिल है।

Video: स्टार बनते ही रानू मंडल के बदल गए तेवर, फैन ने लेनी चाही सेल्फी तो बरस पड़ी, कहा…

कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक चेहरा काफी लोकप्रिय हुआ था और रातों रात स्टार बन गया था। वह चेहरा था- रेलवे स्टेशन पर गाना गाने वाली रानू मंडल का। इन दिनों सोशल मीडिया पर रानू मंडल का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें रानू मंडल का अलग ही रूप नज़र आ रहा है।

इसे देखकर लग रहा है कि रेलवे स्‍टेशन से उठकर सोशल मीडिया पर रातों रात स्‍टार बनीं रानू मंडल के पाँव अब जमीन पर नहीं हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में सीधी और शांत दिखने वाली रानू ने अपने प्रशंसक को एक सेल्फी खिंचवाने के लिए कहा तो वह भड़क उठीं।

दरअसल सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में रानू एक शॉप में कुछ खरीदारी कर रही थी, तभी रानू की एक फीमेल फैन उनसे सेल्फी के लिए पूछती है। उस फीमेल फैन ने एक हाथ में फोन ले रखा था और दूसरे हाथ से रानू के हाथ को टच करके सेल्फी के लिए बोला। फैन रानू को देखकर इतनी एक्साइटेड थी कि उसका अपने हाथ पर काबू नहीं था और सामान्य तरीके से छूकर पलटने का कहते हुए सेल्फी की गुजारिश की थी।

लेकिन फैन के सेल्फी देने की बजाए रानू गुस्सा हो गई और उस पर भड़क गईं कि छूकर उसने बात क्यों की। फैन से रानू रूखा व्यवहार कर रही थी लेकिन फिर भी फैन कुछ न बोली और बस मुस्कुराती रही।

इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और रानू के फैंस भी भड़क गए और वीडियो पर कमेंट्स करना शुरू कर दिए। किसी ने कहा, “शेम शेम”, तो किसी ने कहा, “कोई मायने नहीं रखता कि आप जिंदगी में कहाँ जाते हैं… हमें अपनी जमीन कभी नहीं भूलना चाहिए।” किसी ने कहा कि अब रानू मंडल को घमंड आ गया है, तो किसी ने कहा, “बाप रे ऐसा एटिट्यूड।” वहीं एक यूजर ने लिखा, “भैया अब बदल गए मैडम के तेवर।”

बता दें कि हिमेश रेशमिया के जरिए बॉलीवुड में डेब्यू करने के बाद रानू के हर वीडियो और गाने को लोगों का जबरदस्त सपोर्ट और प्यार मिला। रानू मंडल की लोकप्रियता को लेकर लता जी से जब सवाल किया गया था तो उन्होंने खुशी जाहिर की थी। लेकिन उसके साथ ही यह भी बात कही थी कि नकल करना कला नहीं है। 

लता मंगेश्कर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, “अगर मेरे नाम और काम से किसी का भला होता है तो मैं अपने आप को खुश किस्मत समझती हूँ। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि नकल, सफलता के लिए एक विश्वसनीय और टिकाऊ साथी नहीं है। मेरे, किशोर दा, रफी साहब, मुकेश भैया या आशा के गानों को गाकर आकांक्षी गायकों को कुछ समय के लिए तो अटैंशन मिल सकता है, लेकिन यह लंबा नहीं चलेगा।”

कराची: कब्र खोद कर निकाल ली महिला की लाश और किया गैंगरेप, आरोपित फरार

पाकिस्तान के कराची में अज्ञात लोगों ने एक महिला की लाश के साथ बलात्कार किया। आरोपितों ने कब्र में दफनाई हुई महिला की लाश निकालने के लिए पहले तो कब्र को खोदा और फिर उसके साथ बलात्कार किया। ये घटना कराची के लाँधि क्षेत्र की है। महिला के परिजनों को भी इस घटना के बारे में पता चला लेकिन वो इतने व्यथित थे कि उन्होंने इस सम्बन्ध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इस्लामिल गोठ कब्रगाह के पास ये घटना हुई। वहाँ भारी संख्या में मृत महिला के रिश्तेदार व पड़ोसी जमा हो गए।

महिला के सभी रिश्तेदार व पड़ोसी इस घटना से दुःखी थे और उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्हें कुछ स्थानीय लोगों ने सूचना दी गई थी कि दफनाई गई महिला की लाश को कब्रगाह से निकालने के लिए कुछ लोग कब्र खोद रहे हैं। पाक मीडिया के अनुसार, बाद में पता चला कि न सिर्फ़ मृत महिला को कब्र से निकाला गया बल्कि उसके साथ गैंगरेप भी किया गया।

अभी तक साफ़ नहीं हो सका है कि इस घटना में कितने लोग शामिल थे? महिला को हाल ही में वहाँ पर दफनाया गया था। कब्रगाह की देखभाल करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि एक कुत्ते ने कब्र खोद कर महिला की लाश बाहर निकाल ली। हालाँकि, महिला के परिजनों ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि कब्र के ऊपर रखा स्लैब बहुत भारी था और इसे किसी कुत्ते द्वारा हटाने की बातें निराधार हैं।

घटनास्थल पर पहुँच कर पुलिस ने भी कुछ सबूत जुटाए लेकिन कब्र खोदने वालों का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। पुलिस ने बताया कि आरोपितों की धर-पकड़ के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। महिला के परिजनों ने कहा कि वो किसी प्रकार का लीगल एक्शन नहीं लेना चाहते लेकिन भविष्य में किसी के साथ ऐसी दरिंदगी न हो, पुलिस को इसका ध्यान रखना चाहिए।

निर्भया केस: राष्ट्रपति को नहीं भेजी दोषियों ने दया याचिका, जल्द जारी हो सकता है डेथ वारंट

दिल्ली के निर्भया गैंग रेप मामले में जेल अधीक्षक द्वारा फाँसी का नोटिस दिए जाने के बाद दोषियों ने राष्ट्रपति के पास अपनी दया याचिका भेजने से इंकार कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार नहीं लगाई है, जिस कारण निचली अदालत द्वारा उन्हें फाँसी देने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के आसार हैं।

बता दें इस मामले के चारों आरोपित तिहाड़ जेल और मंडोली जेल में बंद हैं। इनको ट्रायल कोर्ट से मिली सजा-ए-मौत पर हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी मुहर लगा जा चुके हैं। जिसके बाद जेल अधीक्षक ने अपनी ओर से इन्हें फाँसी का नोटिस 29 अक्टूबर को दे दिया था। इस नोटिस के ज़रिए इन्हें बताया गया था कि फाँसी की सज़ा के खिलाफ राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए उनके पास सात दिन का वक़्त है।

लेकिन, अब ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक दोषियों का राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का समय पूरा हो गया है। जिसके बाद मीडिया अपने सूत्रों का हवाला देकर बता रही हैं कि अब जेल प्रशासन निचली अदालत को अर्जी भेजकर दोषियों को फाँसी देने की तैयारी शुरू कर देगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने इस मामले पर बयान देते हुए बताया ,
“जेल में बंद चारों ही मुजरिमों ने खुद की सजा कम करने के लिए किसी भी कानूनी लाभ लेने संबंधी कोई कदम नहीं उठाया है। ऐसे में जेल की जिम्मेदारी बनती थी कि उन्हें दो टूक आगाह कर दिया जाए।”

उल्लेखनीय है कि चारों मुजरिमों द्वारा किसी तरह की याचिका दायर न करवाने के बाद अब तिहाड़
जेल प्रशासन इस तथ्य को ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखेगा। उसके बाद ट्रायल कोर्ट कानूनन कभी भी मुजरिमों का डेथ-वारंट जारी कर सकता है। कानून के जानकारों के अनुसार डेथ-वारंट जारी होने का मतलब मुजरिमों का फाँसी के फंदे पर लटकना तय है।

मुलायम-अखिलेश के करीबी UPPCL के पूर्व MD एपी मिश्रा PF घोटाले में गिरफ्तार: अखिलेश यादव पर लिखी है किताब

उत्तर प्रदेश में भविष्य निधि घोटाले (PF Scam) में आर्थिक अपराध शाखा  (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यूपी पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के पूर्व एमडी एपी मिश्रा को मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को गिरफ्तार कर लिया। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के कर्मचारियों की भविष्य निधि के 2268 करोड़ रुपए का अनियमित तरीके से निजी संस्था डीएचएफएल में कथित निवेश किए जाने के खुलासे के बाद सरकार हरकत में आ गई है।

इसके अलावा शासन ने सोमवार (नवंबर 4, 2019) को सख्त कदम उठाते हुए देर रात यूपी पावर कारपोरेशन की मौजूदा एमडी और सचिव ऊर्जा अपर्णा को उनके पद से हटा दिया और उनकी जगह पर वरिष्ठ अधिकारी एम देवराज को कमान सौंपी गई है।

बता दें कि एपी मिश्रा को सोमवार देर रात से ही हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा था। मामले में यह तीसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले शनिवार (नवंबर 2, 2019) को सीपीएफ ट्रस्ट और जीपीएफ ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव पीके गुप्ता और तत्कालीन निदेशक (वित्त) एवं सह ट्रस्टी सुधांशु द्विवेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार किया गया था। मामले में यूपी सरकार सीबीआई जाँच की भी सिफारिश कर चुकी है।

ईओडब्ल्यू की टीम ने सोमवार को जेल भेजे गए यूपीपीसीएल के पूर्व निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी और यूपीपीसीएल ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव पीके गुप्ता से जेल में पूछताछ की थी। इसके बाद शक्ति भवन से ईओडब्ल्यू की टीम ने कई दस्तावेज जब्त किए। कहा जा रहा है कि डीएचएफएल में निवेश को मंजूरी देने में जो भी जिम्मेदार हैं उन पर शिकंजा कसने की तैयारी है। अब एपी मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद कई अन्य अधिकारियों पर भी जाँच की आँच पहुँच सकती है।

उल्लेखनीय है कि एपी मिश्रा यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी रहे हैं और इन्हें मुलायम सिंह और अखिलेश यादव का करीबी बताया जाता है। अखिलेश यादव से बेहद प्रभावित एपी मिश्रा ने अखिलेश यादव पर किताब भी लिखी थी।

2012 में अखिलेश सरकार बनते ही किसी आईएएस की जगह एक इंजीनियर एपी मिश्रा को यूपीपीसीएल का प्रबंध निदेशक बनाया गया था। इतना ही नहीं सपा सरकार के दौरान मिश्रा को रिटायर होने के बाद भी नियम के विरुद्ध जाकर तीन बार सेवा विस्तार मिला था। एपी मिश्रा पूर्वाचल व मध्यांचल के भी एमडी रह चुके हैं। 

लेकिन योगी सरकार बनने के बाद 24 नवंबर 2017 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। आरोप है कि 17 मार्च 2017 में जब योगी सरकार का शपथ ग्रहण नहीं हुआ था तभी आनन-फानन में एपी मिश्र के कहने पर ही डीएचएफएल में निवेश की पहली क़िस्त जारी कर दी गई थी।

देखें Video: IED बम धमाके से दहली इम्फाल, 5 पुलिस कर्मियों सहित 6 घायल

उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर की राजधानी इम्फाल में बम धमाके में 5 पुलिस कर्मियों सहित 6 लोग घायल हो गए हैं। इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) से हुए इस बम धमाके को आज (5 नवंबर, 2019 को) इम्फाल के थांगल बाज़ार में सुबह 9.30 के आस पास अंजाम दिया गया।

समाचार एजेंसी एएनआई ने इस हमले की सीसीटीवी फुटेज ट्विटर पर जारी की है। धमाके के घंटे भर के भीतर मौके पर पहुँचे मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने इसे कायरतापूर्ण कृत्य बताते हुए दोषियों को दंडित किए जाने का वादा किया।

इसके अलावा इंडिया टुडे ने भी धमाके के बाद की तस्वीरें और फुटेज जारी किए हैं। पुलिस धमाके के तुरंत बाद इलाके को सील कर दिया। घायल पुलिस वालों के नाम हैं: लम्बम अमरजीत, थोंगम देवन, निंगथौजम इबोतोम्बा सिंह, सिंगजमई चिंगमाथक के रहने वाले खुराइजम बोनी, हुइरोंगबम बोबोय। इसके अलावा एक नागरिक कृष्णा गुरुंग को भी धमाके में चोटें आईं हैं।

धमाके की रेडियस छोटी थी लेकिन धमाका फिर भी शक्तिशाली था। अतः सभी घायलों के धमाके के वक्त आसपास ही रहे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है और फ़िलहाल धमाके में किसी संदिग्ध व्यक्ति या संगठन का हाथ प्रकाश में नहीं आया है। घायल व्यक्तियों के अलावा आसपास के कई वाहनों को भी गंभीर नुकसान धमाके में हुआ तस्वीरों में दिख रहा है।

पुलिस वालों की मौजूदगी के बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई ने दावा किया है कि वे वहाँ बम की उपस्थिति को पहले से जानकर ही वहाँ मौजूद थे। वे बम डिस्पोजल स्क्वाड का इंतज़ार कर ही रहे थे जब आतंकियों ने बम को डेटोनेट कर दिया।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने घायल पुलिस अफसरों की रैंक एक अनाम पुलिस अधिकारी के हवाले से इस प्रकार रिपोर्ट की है: एक एडिशनल सुपरिन्टेन्डेन्ट ऑफ़ पुलिस (ऑपरेशन्स), एक सब इंस्पेक्टर, दो असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और एक राइफलमैन।

मणिपुर में यह दूसरा बम धमाका है। इसके पहले 3 दिन पूर्व (2 नवंबर, 2019 को) भी अज्ञात आतंकियों ने पूर्वी इम्फाल के तेलीपटी इलाके में धमाका कर 3 बीएसएफ़ जवानों को घायल कर दिया था।

अमिट रहेंगे पूर्वराष्ट्रपति अब्दुल कलाम: किरकिरी के बाद CM जगन रेड्डी ने वापस लिया अपना पुराना आदेश

आन्ध्र-प्रदेश सरकार ने अपने उस फैसले को बदलकर वापस पुराने नियम को लागू करने का निश्चय किया है जिसके तहत मेधावी छात्रों को दिए जाने वाले पुरस्कार का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर ही रहेगा। दरअसल आंध्र-प्रदेश के मौजूदा मुख्यमन्त्री जगन मोहन रेड्डी ने इस सम्मान को अपने पिता वाईएसआर रेड्डी के नाम पर करने का फैसला किया था। मगर उनके इस फैसले की काफी आलोचना हुई जिसके बाद उनकी सरकार अपने फैसले से पलट गई और इस सम्बन्ध में अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया।

मुख्यमंत्री के इसी फैसले के बाद राज्य सरकार ने 4 नवम्बर को एक नोटिस जारी किया था जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर मेधावी छात्रों को दिए जाने वाले सम्मान अब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्रतिभा पुरस्कार की बजाय वाईएसआर विद्या पुरस्कार नाम से जाने जाएँगे। बता दें कि 11 नवम्बर को भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती पर राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। पूर्व राष्ट्रपति कलाम को भी शिक्षा और छात्रों से जुड़ाव के लिए जाना जाता है इसीलिए शिक्षा दिवस पर दिए जाने वाले सम्मान का नाम कलम पर रखा गया था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक यह पुरस्कार एमएससी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को दिए जाते हैं। पूर्व राष्ट्रपति कलाम से जुड़े इस अवार्ड का नाम बदलकर अपने पिता वाईएसआर का नाम देने पर मुख्यमंत्री को आलोचना का शिकार होना पड़ा। काफी आलोचना के बाद अपने फैसले को वापस लेते हुए आंध्र-प्रदेश सरकार ने ‘डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्रतिभा पुरस्कार’ के नाम को वापस बहाल कर दिया। बता दें कि जब से आंध्र प्रदेश में जबसे वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्ववाली सरकार बनी है उसके बाद से ही प्रदेश सरकार पर सरकारी योजनाओं के नाम बदलने के आरोप लगते आ रहे हैं। प्रदेश में सरकार बनाने के बाद उन्होंने एनटीआर भरोसा का नाम बदलकर वाईएसआर पेंशन, अन्ना कैंटीन को राजन्ना कैंटीन और मध्याह्न भोजन योजना का नाम वाईएसआर अक्षय पात्र कर दिया। 

सुषमा की मृत्यु के बाद अब खुला यह राज: उन्होंने कहा था- उनकी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी अगर विदेश में हुई तो…

हाल ही में दिवंगत हुईं भूतपूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल ने उनकी सर्जरी के बारे में महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि सुषमा स्वराज ने डॉक्टरों की सलाह के बावजूद अपना इलाज विदेश में कराने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उनकी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी अगर विदेश में हुई तो यह देश के सम्मान पर सवाल बन जाएगा। अपने डॉक्टर डॉ. मुकुट मिंज से उन्होंने कहा था, “डॉक्टर साहब, आप सिर्फ़ इंस्ट्रूमेंट (सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण) पकड़िए, कृष्णा मेरी सर्जरी आप करेंगे।”

सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल पेशे से वकील हैं और महज़ 37 साल की उम्र में मिज़ोरम के गवर्नर का पद भी संभाल चुके हैं। उन्होंने यह बातें अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखीं।

उन्होंने आगे लिखा कि देश के बाहर सर्जरी के नाम पर सुषमा ने कहा, “अगर हम विदेश गए, तो लोग हमारे डॉक्टरों और अस्पतालों पर विश्वास खो देंगे।” कौशल ने यह भी बताया कि सर्जरी के एक ही दिन बाद आराम कुर्सी पर मुस्कुराते हुए उन्होंने यह बात कही थी। उन्होंने अपनी सर्जरी को बहुत छोटी बताया, और उसका पूरा क्रेडिट एम्स के डॉक्टरों, नर्सों और समर्पित स्टाफ़ को दिया।

स्वराज कौशल ने सुषमा की सर्जरी और स्वास्थ्य लाभ में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि मोदी हमेशा स्वराज को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए कहते थे, और उन्होंने पीएम के लिए हमेशा रिज़र्व रहने वाला एम्स का विंग भी स्वराज के इलाज के लिए दे दिया।

BBC ने फिर परोसा झूठ: RSS को बदनाम करने के लिए खबर में डाला फर्जी एंगल… लेकिन पकड़े गए

RSS और भाजपा की छवि धूमिल करने के प्रयासों में एक बार फिर से बीबीसी के झूठ का पर्दाफाश हुआ है। बीबीसी ने एक बार फिर अपनी खबर को एंगल देने के लिए आरएसएस को बदनाम करने की कोशिश की है। अब ये चाहे उसने अपने अजेंडे के तहत किया हो या फिर अज्ञातनावश, लेकिन एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि बीबीसी अपनी रिपोर्टों के जरिए हिंदूवादी संगठनों को बदनाम करने के लिए इतना आतुर है कि वो भूल चुका है, खबर में किसी तथ्य की पुष्टि करने से पहले उसके बारे में खँगालना पत्रकारिता का मूल धर्म है।

दरअसल, कुछ समय पहले एक खबर आई कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर चिंता जाहिर की। साथ ही इस संबंध में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को फटकार भी लगाई गई। जिसपर भारतीय किसान यूनियन की ओर से प्रतिक्रिया दी गई है। उनकी ओर से पंजाब के महासचिव हरिंदर लाखोवाल ने अपने बयान में कहा कि हम प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अपने लिए सब्सिडी माँग रहे हैं जब तक किसानों के खाते में सब्सिडी नहीं आएगी तब तक हम ऐसे ही पराली जलाते रहेंगे।

अब चूँकि प्रदूषण मुद्दे पर इतना गैर-जिम्मेदाराना बयान आया तो इस पर हर मीडिया हाउस में रिपोर्ट की जानी आम बात है। लेकिन बीबीसी ने इस पूरी रिपोर्ट को करके आखिर में अपनी अजेंडापरस्त पत्रकारिता का फिर उदाहरण दे दिया। दरअसल, रिपोर्ट के अंत में लिखा गया कि ‘भारतीय किसान यूनियन’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन है। जबकि वास्तविकता में ये संगठन आरएसएस से जुड़ा हुआ ही नहीं है।

बीबीसी में परोसा गया अजेंडा

हालाँकि, ये बात सच है कि आरएसएस से किसानों का बहुत बड़ा संगठन जुड़ा हुआ है, लेकिन उसका नाम भारतीय किसान यूनियन नहीं है, बल्कि भारतीय किसान संघ है। जिसकी स्थापना श्री दत्तोपंथ जी थेंगड़ी द्वारा 4 मार्च 1979 में की गई थी।

भारतीय किसान संघ की वेबसाइट पर मौजूद परिचय

जबकि भारतीय किसान यूनियन की स्थापना चौधरी महेंद्र सिंह टिकैट द्वारा की गई थी। जिसकी पुष्टि स्वयं भारतीय किसान संघ ने पिछले साल अपने एक बयान में की थी और बताया था कि दोनों संगठन अलग-अलग हैं।

अब ये कहा जा सकता है कि प्रथम दृष्टया, इन दोनों संगठनों के नाम में समानता के कारण इनमें फर्क़ समझना थोड़ा कठिन है क्योंकि ‘यूनियन’ का हिंदी पर्याय ‘संघ’ ही होता है। इसके अलावा इंटरनेट पर भारतीय किसान यूनियन डालने पर भी आरएसएस से जुड़े संगठन यानी भारतीय किसान संघ का ही पेज खुलता है। जिसका तकनीकी कारण, दोनों शब्दों का लगभग एक जैसा मिलना या फिर आरएसएस से जुड़े इस संघ का गूगल पर ज्यादा सर्च किया जाना हो सकता है। इसलिए, मुमकिन है कि ये गलती किसी पत्रकार से अज्ञानतवश या हड़बड़ी में हुई हो।

लेकिन, ऐसी स्थिति में भी बीबीसी को ये समझने की जरूरत है कि जब आप किसी मामूली खबर में जबरन अपने संस्थान के अजेंडे को परोसने की कोशिश करते हैं, तब ये गलती भूल नहीं, उतावलापन कहलाती है। उस समय साफ पता चलता है कि ये जल्दबाजी में किसी की छवि धूमिल करने का एक प्रयास है। इसके लिए जरूरी है कि रिपोर्ट में झूठी पुष्टि करने से पहले तथ्यों की छानबीन की जाए। ताकि पाठक और विरोधी आप पर, आपकी पत्रकारिता पर, आपके संस्थान की नीतियों पर सवाल न उठा पाएँ?

बता दें कि बीबीसी की भाँति ही हिंदी मीडिया के जाने-माने संस्थान जनसत्ता ने भी इस खबर को इसी एँगल से पेश किया है।

अब जब सारा सच सामने है तो यह कहा जा सकता है कि एजेंडाबाजी की आड़ में बीबीसी जैसे बड़े संस्थान फेक न्यूज़ या मनचाहा ट्वीस्ट देने के अड्डे बनते जा रहे हैं। उस पर मजेदार बात यह है कि पकड़े जाने पर भी न माफ़ी माँगते हैं और न ही जल्दी भूल-सुधार करते हैं।