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भारत ही नहीं पूरे विश्व से बाबा रामदेव के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट हटाए फेसबुक और गूगल: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फेसबुक, गूगल, यूट्यूब और ट्विटर को योग गुरु रामदेव के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक विषयवस्तु वाले एक वीडियो के लिंक को वैश्विक स्तर पर ब्लॉक या निष्क्रिय करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि सिर्फ़ भारत के यूज़र्स के लिए आपत्तिजनक विषयवस्तु को निष्क्रिय या ब्लॉक करना काफ़ी नहीं होगा क्योंकि यहाँ रह रहा यूज़र उस विषयवस्तु को किसी अन्य माध्यम से भी देख सकता है। इसलिए वैश्विक स्तर पर आपत्तिजनक पोस्ट से संबंधित वीडियो लिंक्स को निष्क्रिय किया जाए।

अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की यह ज़िम्मेदारी है कि वह इस विषयवस्तु तक लोगों की पहुँच आंशिक नहीं बल्कि पूरी तरह रोके। अदालत ने साफ़ कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में अपलोड की गई आहत करने वाली सारी सामग्री को पूरी दुनिया में रोकनी होगी।

इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने अदालत से कहा था कि उन्हें इस सामग्री के URL को भारत में बंद करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वह वैश्विक आधार पर इस सामग्री को हटाने के ख़िलाफ़ है। अदालत ने पिछले साल सितंबर में आदेश दिया था कि रामदेव पर लिखी गई पुस्तक के मानहानिकारक अंशों को हटाया जाए।

ख़बर के अनुसार, बाबा रामदेव ने फेसबुक, गूगल, इसकी सहायक यूट्यूब और ट्विटर के ख़िलाफ़ स्थायी निषेधाज्ञा की माँग करते हुए अदालत का रुख़ किया था। अपनी शिक़ायत में उन्होंने एक वीडियो आधारित किताब ‘Godman to Tycoon’-अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ बाबा रामदेव का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया गया था कि इसमें मानहानि संबंधी टिप्पणी और जानकारी शामिल हैं, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से प्रचारित-प्रसारित हो रही हैं।

अदालत के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए Google ने कहा, “हमारी टीम अदालत के आदेश की समीक्षा कर रही है।” जबकि ट्विटर ने इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

अदालत ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून के प्रावधानों की व्याख्या इस तरह से की जानी चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि न्यायिक आदेश खोखले नहीं बल्कि प्रभावी हैं।

कॉन्ग्रेस महिला मोर्चा महानगर अध्यक्ष ने लक्की ड्रॉ का लालच देकर लूटे लाखों रुपए, FIR दर्ज

गाजियाबाद में कॉन्ग्रेस महिला मोर्चा की महानगर अध्यक्ष पूजा चड्ढा पर लकी ड्रॉ के नाम पर लोगों से लाखों रुपए की ठगी करने का आरोप लगा है। इस मामले के संबंध में 7 महिलाओं ने एसएसपी को शिकायत दर्ज करवाकर उचित कार्रवाई की माँग की है। महिलाओं का कहना है कि पूजा चड्ढा ने पहले उन्हें लक्की ड्रॉ स्कीम का लालच देकर फँसाया, फिर पैसे माँगने पर उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन 7 महिलाओं में से एक महिला ने तो एसएसपी के सामने एक्शन न लेने पर उन्हें आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी है। जिसके बाद एसएसपी ने सभी को पूरे मामले की जाँच करके कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित संबंधित खबर

इन महिलाओं के नाम सोनिया पंवार, प्रीति पंवार, मंजू, छवि, नेहा राठी, सरिता सिंह, बोबी देवी हैं। इनका आरोप है कि पूजा चड्ढा ने करीब ढाई साल पहले 20 माह की कमिटी के तौर पर उनसे कमिटी जमा करवाई थी। इस दौरान पूजा ने सभी को लक्की ड्रॉ निकलने पर लाभ देने का झांसा दिया।

महिलाओं के अनुसार पूजा चड्ढा ने कहा था कि यदि उनमें से किसी का भी नाम लक्की ड्रॉ में नहीं आता तो उन्हें 20 माह के बाद 21 हजार रुपए दिए जाएँगे। इस स्कीम के अंतर्गत एक हजार रुपए हर महीना जमा करना था।

पूजा की बातों में आकर ये महिलाए स्कीम से जुड़ गईं और अपनी जिम्मेदारी पर अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ दिया। लेकिन जब 20 माह की अवधि पूरी हुई तो इनके हाथ में चेक थमा दिए गए। साथ ही कहा गया कि वो अभी बैंक में चेक न जमा करें। एक महिला ने बिना बताए चेक जमा भी करवाया तो वह बाउंस हो गया। इस तरह किसी महिला को उसकी रकम वापस नहीं मिली।

बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष ने काफी संख्या में महिलाओं से ठगी की है। करीब एक साल से महिलाएँ उससे अपने पैसे माँग रही हैं। लेकिन अब उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने लगी है, जिस कारण उन्होंने पुलिस का रुख किया।

वहीं, इस मामले में कॉन्ग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष का कहना है कि उनके ऊपर लगे सभी आरोप पूर्ण रूप से बेबुनियाद हैं। उनके अनुसार उनके एनजीओ में एक महिला काम करती थी, जिसे कोषाध्यक्ष बनाया गया था। उसी ने संस्था के नाम पर कमिटी की शुरुआत की थी, लेकिन कमिटी की अवधि पूरी होने से पहले ही उसने एनजीओ में आना बंद कर दिया। उनकी मानें तो उस महिला के घर जाकर जब महिलाओं को पैसे देने के लिए कहा गया तो उसने उन्हें भी धमकाना शुरू कर दिया। जिसके बाद उनकी ओर से उस पर अदालत में मुकदमा दर्ज करवाया गया।

मोदी-शाह की जोड़ी की मारी नहीं, कॉन्ग्रेस तो सोनिया-राहुल-प्रियंका की तिकड़ी के बोझ तले दबी है

कॉन्ग्रेसियों के लिए नेहरू-गॉंधी परिवार की चौखट इबादतगाह है। उनका कहा किसी आसमानी किताब जैसा पाक। उनका मानना है कि यह परिवार वह फेविकोल है जो उन्हें जोड़ कर रखता है। इसलिए, परिवार में ही वे भारत की खोज करते हैं। जमीन से कटे-कटे रहते हैं।

पर ये आज का भारत है। टिकटॉक करता। सूचनाओं के सागर में गोते लगाता। सो, जब-जब चुनाव के नतीजे आते हैं कॉन्ग्रेस जमीन में पहले से ज्यादा धॅंस जाती है। उम्मीद थी कि कॉन्ग्रेसी आम चुनाव के नतीजों से सबक लेंगे। लक बाय चॉंस उनके पास मौका भी था। नया नेतृत्व चुनने का। परिवार से पीछा छुड़ाने का। पर वफादार ओल्ड गार्ड ने ऐसा होने न दिया और इसके नतीजे महाराष्ट्र और हरियाणा में लगे हाथ कॉन्ग्रेस को मिल भी गए।

महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 तो हरियाणा में 90 सीटें हैं। लेकिन, इन चुनावों में गॉंधी परिवार ने प्रचार से दूरी बना रखी थी। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी और महासचिव प्रियंका गॉंधी ने दोनों राज्यों में एक भी रैली नहीं की। पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी ने महाराष्ट्र में पॉंच तो हरियाणा में दो रैली की। जबकि स्टार प्रचारकों की लिस्ट में तीनों थे।

पढ़ें: मुक्ति मार्ग पर 2 कदम और… कॉन्ग्रेस वह ‘बैल’ है जिसे अब गॉंधी भी हाँकना नहीं चाहते

दूसरी तरफ भाजपा थी। दोनों राज्यों में पॉंच साल के एंटी इंकबेंसी फैक्टर की काट के लिए नेतृत्व ने पूरा दमखम झोंका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र और हरियाणा में 50 के करीब रैलियॉं की। विकास के साथ-साथ हर उस मुद्दे को उभारा, जिसके आधार पर वोटरों को गोलबंद किया जा सकता था।

फिर भी महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा की सीटें 2014 के मुकाबले कम हो गई। जाहिर है, गॉंधी परिवार की प्रचार से दूरी कॉन्ग्रेस के लिए काम कर गई और राहुल गॉंधी का कम बोलना भाजपा को नुकसान कर गया। याद करिए आम चुनावों में राहुल और प्रियंका की सक्रियता और कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन को। तस्वीर तरह साफ हो जाएगी।सो, इस जनादेश में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अप्रत्याशित हो।

कॉन्ग्रेसी परिवार परिक्रमा से तौबा कर चाहें तो अब भी अपनी नियति बदल सकते हैं। घोर विरोधी राम मनोहर ​लोहिया के कहे में अपनी मुक्ति का मार्ग तलाश सकते हैं। समाजवादियों के लिए लोहिया के दो रेडिमेड फॉर्मूले थे। पहला, कॉन्ग्रेस से लड़ने के लिए शैतान से भी हाथ मिलाओ। दूसरा, सुधरो या टूटो। गॉंधी परिवार ने कॉन्ग्रेस की वो औकात रहने नहीं दी कि अब पहले फॉर्मूले की जरूरत पड़े। कॉन्ग्रेसी चाहे तो दूसरे पर अमल कर सकते हैं।

कहते हैं कि आदमी को आगे से और बैल को पीछे से हॉंकते हैं। जीते-जागते ऊर्जावान लोगों के संगठन को गॉंधी परिवार ने पहले तो बैल बनाया। फिर उसे ऐसे बैल में बदल दिया जिसे उसका मालिक भी पीछे से हॉंकने को तैयार नहीं। महाराष्ट्र और हरियाणा में यह दिखा भी। कॉन्ग्रेस मुक्त भारत के सपने को साकार करने की जिस हड़बड़ाहट में गॉंधी परिवार है उसमें कॉन्ग्रेसियों के पास ज्यादा वक्त नहीं है। अब वे जल्दी न सुधरे, न टूटे तो दफन होना ही उनकी नियति है। वैसे भी वे मोदी-शाह की जोड़ी के कम मारे हैं। सोनिया-राहुल-प्रियंका की तिकड़ी का बोझ ही कुछ ज्यादा है।

बरेली में मौलाना के घर, फिर मदरसे में रुकने की व्यवस्था: कमलेश हत्याकांड में बीवी-अब्बू सब ने दिया साथ!

कमलेश तिवारी हत्याकांड के आरोपित अशफाक और मोइनुद्दीन के पकड़ में आने के बाद हत्या की साजिश से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। कल तक जहाँ पूछताछ में ये मालूम चला था कि दोनों को अपने किए जुर्म का कोई पछतावा नहीं है। वहीं आज पता चला है कि दोनों हत्यारे हत्या करने के बाद पुलिस को आत्मसमर्पण करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसके निर्देश नहीं दिए गए, इसलिए वो दोनों दोबारा गुजरात के लिए रवाना हो गए।

हत्याकांड की जाँच से जुड़े पुलिस अधिकारी ने बताया,” इनके प्लान के अनुसार, नागपुर से गिरफ्तार हुआ सैयद आसिम अली इनको आत्मसमर्पण के लिए निर्देश देने वाला था, लेकिन अली की गिरफ्तारी के बाद इन्हें कोई निर्देश नहीं मिला, इसलिए इन्होंने दोबारा गुजरात जाने का फैसला किया।”

गौरतलब है कि अशफाक और मोइनुद्दीन की गिरफ्तारी गुजरात-राजस्थान के बॉर्डर के पास मंगलवार की रात हुई थी। जिसके बाद इन्हें गुजरात एटीएस ने मामले की जाँच में जुटी यूपी पुलिस को सौंप दिया था।

गुजरात एटीएस के डीआईजी हिमांशु शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में बुधवार (अक्टूबर 23, 2019) को बताया कि तिवारी को गोली मारने के दौरान अशफाक का निशाना चूक गया था, जिस कारण गोली मोइनुद्दीन के हाथ में जा लगी थी। लेकिन मोइनुद्दीन ने अपने हाथ में रुमाल बाँधी और बाद में तिवारी का गला काट दिया। इस दौरान अशफाक के हाथ में भी चाकू लगा। हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों वहाँ से फरार हो गए। इसके बाद अशफाक जो कि एक निजी कंपनी में मेडिकल रिप्रेसेंटेटिव है, उसने मेडिकल स्टोर से मरहम पट्टी खरीदी और लखनऊ के होटल पहुँचकर अपना और मोइनुद्दीन का इलाज किया।

दैनिक जागरण के बरेली संस्करण में प्रकाशित खबर

यहाँ बता दें कि दोनों हत्यारों की गिरफ्तारी के बाद अब गुजरात एटीएस उन लोगों की तलाश में है, जिन्होंने उसे बंदूक मुहैया करवाई। गुजरात एटीएस के डिप्यूटी एसपी केके पटेल के अनुसार, “हमें उस शख्स का नाम पता चल चुका है, जिसने अशफाक को पिस्टल दी। हमारी टीम उसे पकड़ने उसे उसके घर भी गई, लेकिन वो वहाँ से गायब हो चुका था। हम उसे जल्द गिरफ्तार कर लेंगे।”

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार जाँच में जुटे अधिकारियों ने बताया कि हत्या करने के बाद दोनों आरोपित खुद को बचाने के लिए तीन राज्यों में भटके- यूपी, दिल्ली और राजस्थान। उन्होंने बरेली के रेलवे स्टेशन पर भी एक रात गुजारी और नेपाल तक भी गए। लेकिन खुद को बचा नहीं पाए। जाँच अधिकारी के अनुसार गुजरात के शामलाजी के नजदीक से गिरफ्तार होने से पहले ये दोनों ट्रेन, बस, टैक्सी और ट्रक की मदद से 2000 किमी का सफर तय कर चुके थे।

दैनिक जागरण के बरेली संस्करण में प्रकाशित डिटेल्ड खबर

उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी के अनुसार, “हत्या करने के बाद ये दोनों बरेली गए, वहाँ इन्होंने रेलवे स्टेशन पर रात गुजारी। फिर ये लखीमपुर खेरी आए और वहाँ से नेपाल गए। नेपाल से लौटे तो दोनों दोबारा लखीमपुर खेरी गए और वहाँ से शाहजहाँपुर की ओर रवाना हुए। कुछ समय बाद ये दिल्ली आए और यहाँ से अजमेर चले गए। अजमेर से ही ये दोनों शामलाजी गए, जहाँ गुजरात-राजस्थान बॉर्डर के पास से इन्हें गिरफ्तार किया गया।

अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार बता दें कि अशफाक और मोइनुद्दीन पैसे की कमी होने के कारण पकड़ में आ पाए। जाँच अधिकारियों ने बताया है कि जब ये दोनों अपने घर से निकले, उस समय इनके पास 20 हजार रुपए थे। लेकिन 4 दिन इधर-उधर भटकने के बाद इनके पास से सारे पैसे खत्म हो गए और इन्होंने अपनी परिवार को मदद के लिए फोन किया।

इधर, गुजरात एटीएस ने अशफाक की पत्नी का नंबर सर्विलांस पर लेने की अनुमति ली हुई थी, वे लगातार उसकी पत्नी के फोन पर आने वाली हर कॉल और डिटेल पर नजर बनाए हुए थे। ऐसे में जैसे ही उसने अलग नंबर से अपनी पत्नी को फोन किया, एटीएस को इसकी जानकारी मिल गई। उन्होंने दोनों आरोपितों को पकड़ने के लिए जाल बिछाना शुरू किया और इनकी गिरफ्तारी मुमकिन हुई। इस बीच अशफाक, उसकी पत्नी और उसके पिता में हुई बातचीत की एक ऑडियो भी वायरल हुई। जिसे सुनकर पता लगाया जा सकता है कि अशफाक के गुनाहों का पता होने पर भी उसका परिवार उसका साथ देने को तैयार था।

अशफाक, उसकी बीवी और उसके अब्बू के बीच हुई बातचीत का ऑडियो वायरल (ऑपइंडिया इसकी सत्यता की पुष्टि अभी तक नहीं कर पाया है)

यहाँ उल्लेखनीय है कि दोनों आरोपित तिवारी की हत्या करके लखनऊ के होटल से बरेली के लिए रवाना हुए थे। वहाँ उन्होंने प्रेमनगर निवासी मौलाना कैफी अली से संपर्क किया था और तीन घंटे तक वह उसी मौलाना के घर में रुके थे। बाद में कैफी ने ही दोनों हत्यारों के रुकने की व्यवस्था बरेली के किला क्षेत्र स्थित मदरसे में करवाई थी। हालाँकि इस मामले में अभी कैफी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों की मानें तो वे मौलाना कैफी को आरोपितों के सामने लाएँगे, तभी सारी स्थिति साफ होगी। इस हत्या के मामले में अभी तक 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिसमें राशिद पठान, फैजान शेख, मौलाना मोहसिन शेख सूरत से धरे गए हैं, और बाकी दोनो हत्यारे गुजरात-राजस्थान बॉर्डर से।

वर्ल्ड बैंक से भारत के लिए खुशखबरी: अब बिजनस करना हुआ आसान, लगाई 14 रैंकिंग की छलांग

वर्ल्ड बैंक की ईज़ ऑफ़़ डुईंग बिज़नेस में 14 रैंकिंग की सुधार के साथ भारत अब 63वें नंबर पर पहुँच गया है। इसका मतलब है कि भारत में अब कारोबार करना और भी आसान हो गया है। इससे पहले 2018-19 की लिस्ट में भारत की 77वीं रैंक थी। ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस यानी कारोबार करने की सुगमता की रैंकिंग उस समय में आई है, जब देश में कथित तौर पर आर्थिक सुस्ती है।

वर्ष 2014 के दौरान जब केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व में NDA सरकार बनी थी, तो उस समय भारत की रैंकिंग 190 देशों में से 142वें स्थान पर थी। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद कारोबार के क्षेत्र पर लगातार ध्यान दिया गया। चार साल तक जारी सुधार के बाद साल 2017 में भारत की रैंकिंग सुधरकर 100 हो गई थी। इसके बाद, 2018 में भारत की स्थिति फिर सुधरी और ईज़ ऑफ़ डुईंग लिस्ट में 77वाँ स्थान बनाने में क़ामयाब रहा।

किसी भी बिज़नेस को शुरू करने संबंधी क़ानूनों को सरल बनाया गया और बैंकों से लोन लेने की व्यवस्था में सुधार लाया गया। इसी का परिमाम रहा है कि भारत इस रैंकिंग में बीते पाँच वर्षों में क़रीब 50 फ़ीसदी सुधार के साथ आगे बढ़ता रहा।  

भारत इस सूची में लगातार तीसरे साल शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देश में भी शामिल है। यह रैंकिंग ऐसे समय में आई है, जब भारतीय रिज़र्व बैंक, वर्ल्ड बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और मूडीज सहित कई एजेंसियों ने कथित आर्थ‍िक सुस्ती को देखते हुए जीडीपी में बढ़त के अनुमान को घटा दिया है।

ख़बर के अनुसार, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में भारत के अलावा टॉप-10 सुधारक देशों में सऊदी अरब (62), जॉर्डन (75), टोगो (97), बहरीन (43), ताज़िकिस्तान (106), पाकिस्तान (108), कुवैत (83), चीन (31) और नाइजीरिया (131) शामिल हैं।

ईज़ ऑफ़़ डूइंग बिज़नेस होता क्या है? 

अगर ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग’ बिज़नेस में सुधार होता है तो विश्व की प्रमुख रेटिंग एजेंसियाँ भारत को बेहतर रेटिंग दे सकती है और भारत में FDI में भी वृद्धि हो सकती है। ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ का रिपोर्ट विश्व बैंक द्वारा जारी की जाती है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से दस मानदंड हैं, जिनके आधार पर तय किया जाता है कि कौन-सा देश कारोबार की सुगमता के लिहाज़ से पहले स्थान पर है और कौन निचले पायदान पर है। कारोबार करने के लिए कंस्ट्रक्शन परमिट, रजिस्ट्रेशन, लोन और टैक्स पेमेंट की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाता है।

प्रधानाध्यापक फ़ुरक़ान अली के पीलीभीत स्कूल में छात्रों ने कभी नहीं गाया राष्ट्रगान, जाँच में हुआ ख़ुलासा

पीलीभीत ज़िले की बेसिक शिक्षा अभियान (BSA) द्वारा ‘मानवीय आधार’ पर बीसलपुर के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक फ़ुरक़ान अली के निलंबन को अस्थायी रूप से रद्द करने के कुछ दिनों बाद, ज़िला प्रशासन द्वारा की गई जाँच में पाया गया कि स्कूल में छात्रों से कभी राष्ट्रगान नहीं गवाया गया।

इस मामले की जाँच ज़िला मजिस्ट्रेट वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर, 21 अक्टूबर को सिटी मजिस्ट्रेट रितु पुनिया, अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (नगर) वंदना त्रिवेदी और बीएसए देवेंद्र स्वरूप सहित तीन सदस्यीय टीम ने की थी।

14 अक्टूबर को प्रशासन ने विश्व हिन्दू परिषद् (वीएचपी) के सदस्य की शिक़ायत के आधार पर स्कूल के प्रधानाचार्य फ़ुरकान अली को सस्पेंड कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने छात्रों से प्रार्थना सभा में धार्मिक प्रार्थना कराई थी। वीएचपी सदस्य ने आरोप लगाया था कि यह प्रार्थना मदरसे में कराई जाने वाली प्रार्थना है।

वहीं, बीसलपुर के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) उपेंद्र कुमार की एक जाँच में पाया गया कि अली ने छात्रों को 1902 में कवि मुहम्मद इक़बाल द्वारा लिखी गई कविता ‘लब पे आती है दुआ’ को गवाया था। बता दें कि इक़बाल ने ‘सारे जहाँ से अच्छा’ गीत भी लिखा था।

ज़िला प्रशासन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों के साथ बातचीत के दौरान, यह पाया गया कि स्कूल में बच्चों ने न तो कभी ‘राष्ट्रगान’ गाया और न ही आधिकारिक रूप से स्वीकृत प्रार्थना ‘वह शक्ति हमें दो दयानिधे’ गाई। बच्चों ने बताया कि उन्होंने हमेशा ‘लब पे आती है दुआ’ का ही पाठ किया है। नए शिक्षक पिछले दो या तीन दिनों से बच्चों को राष्ट्रगान और दूसरी प्रार्थना करवा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस दिन जाँच हुई, उस दिन कुल 267 में से 53 छात्र उपस्थित थे।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता ‘असंतोषजनक’ पाई गई है। जब पाँचवी कक्षा के छात्रों को कुछ सरल इंग्लिश और हिन्दी शब्द लिखने के लिए कहा गया, तो वे नहीं लिख सके। छात्रों ने बताया कि उन्हें केवल मौखिक रूप से शिक्षा दी जाती है। कोई भी छात्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का नाम नहीं बता सका। पाँचवी कक्षा के छात्र ‘ज्ञान प्रकाश’ और ‘हिन्दुस्तान’ जैसे शब्द नहीं लिख सके। छात्रों में अनुशासन की भी कमी देखी गई।

फिर से खिलेगा कमल! महाराष्ट्र में भाजपा बहुमत की ओर, हरियाणा में भी जीत के आसार

हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के नतीजे कुछ ही देर में साफ हो जाएँगे। वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है और जिस तरह की तस्वीर मीडिया चैनल्स पर देखने को मिल रहे हैं, उससे साफ है कि भाजपा ने इस बार भी दोनों प्रदेशों में अपनी बढ़त बनाई हुई है।

ताजा जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र की 288 सीटों पर भाजपा इस समय 192 सीटों से आगे होकर पूरे चुनाव को एकतरफा करती दिखाई दे रही है। जबकि कॉन्ग्रेस 86 सीटों पर आगे चल रही है। MNS और AIMIM अभी तक राज्य में अपना खाता (बढ़त के मामले में) नहीं खोल पाए हैं। वहीं अन्य 10 सीटों पर आगे चल रह हैं।

इसी तरह हरियाणा की 90 सीटों पर भाजपा 43 सीटों के साथ बढ़त बनाए हुए है, जबकि हुड्डा के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस प्रदेश में कांटे की टक्कर देते हुए 36 सीटों पर आगे है। INLD किसी भी सीट पर फिलहाल आगे नहीं है जबकि जेजेपी 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

रिपब्लिक टीवी इलेक्शन अपडेट

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले एक्जिट पोल में आए रुझानों में भी अधिकतर परिणाम भाजपा के पक्ष में आए थे। वहीं IANS-CVoter की तरफ से 16 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच किया गया सर्वे भी इस बात को दर्शा रहा था कि दोनों राज्यों में भाजपा की वापसी होने वाली है। सर्वे में था की 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा नीत एनडीए को 182-206 सीट और कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 72-98 सीटें मिल सकती है। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में भाजपा को 79-87 और कॉन्ग्रेस को एक से 7 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया था।

गला रेतकर BJP नेता की हत्या, झारखंड के गढ़वा में पुलिस कर रही हत्यारों की तलाश

झारखंड के गढ़वा जिले के रमकंडा में बुधवार (अक्टूबर 23, 2019) को भाजपा नेता गोपाल चौरसिया की गला रेतकर हत्या कर दी गई। घटना प्रखंड मुख्यालय के साप्ताहिक हाट में शाम के वक्त घटी। कहा जा रहा है जिस समय बदमाशों ने धारधार हथियार से भाजपा नेता पर हमला किया, उस वक्त वे बाइक से अपने घर लौट रहे थे।

हत्या की सूचना मिलते ही रमकंडा पुलिस मौक़े पर पहुँची और मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया। पोस्टमॉर्टम होने के बाद पुलिस भाजपा नेता का शव परिजनों को सौंप देगी।

मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता बुधवार की देर शाम अपनी मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। तभी कुछ अज्ञात लोगों ने उनकी गर्दन पर बेरहमी से वार कर दिया। जख्म इतना गहरा था कि चौरसिया की मौक़े पर ही मौत हो गई।

हालाँकि अभी हत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन इस तरह की घटना सुनकर इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस पूरे मामले की जाँच में जुटी है।

जी न्यूज के अनुसार पुलिस उपाधीक्षक मनोज मेहता ने मामले में जानकारी देते हुए बताया है कि घटना रमकंडा थाना क्षेत्र के बाजार की है। जहाँ हत्या के बाद सनसनी फैल गई है

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से भाजपा नेताओं पर होते हमले की घटना लगातार बढ़ रही है। लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर शुरू हुआ हिंसा का दौर अभी तक थमा नहीं है। मुर्शिदाबाद की घटना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वहीं, उत्तर प्रदेश में भी आए दिन भाजपा नेताओं की मौत की खबरें हमें लगातार सुनने को मिल रही है। अब झारखंड में भी ऐसी खबर झकझोर देने वाली है।

दो बार UP के कार्यवाहक CM रहे कॉन्ग्रेसी नेता रिज़वी BJP में शामिल, PM मोदी की कार्यशैली से हैं प्रभावित

कॉन्ग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश में दो बार कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके डॉ अम्मार रिज़वी ने बुधवार (23 अक्टूबर) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का हाथ थाम लिया। उन्होंने बीजेपी महासचिव अरुण सिंह की मौजूदगी में दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में सदस्यता ग्रहण की। बीजेपी में शामिल होते ही रिजवी ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली से काफी प्रभावित रहे हैं। अपना अनुभव साझा करते हुए रिजवी ने कहा कि जब वो हज यात्रा पर जा रहे थे, तब सऊदी अरब में लोग पीएम मोदी की ख़ूब तारीफ़ कर रहे थे।

बीजेपी पार्टी की सदस्यता प्राप्त करने के दौरान उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यकों में बीजेपी के बारे में एक प्रकार की ग़लतफ़हमी और भ्रम पैदा करने का काम किया जा रहा है। हमें बीजेपी को लेकर इस प्रकार के भ्रम को दूर करना है।” उन्होंने याद दिलाया कि उनके ऑल इंडिया माइनोरिटी फॉर डेमोक्रेसी ने लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि वो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के कार्यकारी उपाध्यक्ष जेपी नड्डा के मार्गदर्शन में काम करेंगे।

बता दें कि मूल रूप से सीतापुर के रहने वाले डॉ अम्मार रिज़वी यूपी में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और यूपी में दो बार कार्यवाहक मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने इस साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर दल-बदलुओं को तरजीह और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रांतीय संगठनों के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था। हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या की भरसक निंदा करते हुए रिजवी ने कहा था कि हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है। कमलेश तिवारी के परिवार के प्रति उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त की थी।

ग़ौरतलब है कि बुधवार को झारखंड में विपक्ष के 6 विधायक भी बीजेपी में शामिल हुए थे। इनमें से तीन विधायक झामुमो के और दो कॉन्ग्रेस के हैं। एक अन्य विधायक नौजवान संघर्ष मोर्चा के भानु प्रताप शाही हैं। झामुमो छोड़ने वाले विधायक में कुणाल षाड़ंगी, जेपी पटेल और चमारा लिंडा थे। वहीं, कॉन्ग्रेस से सुखदेव भगत और मनोज भगत ने भाजपा का दामन थामा। इनके अलावा पूर्व डीजीपी डीके पांडेय और पूर्व आईएएस सुचित्रा सिन्हा ने भी भाजपा की सदस्यता ली।

राँची में महामिलन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास की मौजूदगी में सभी छ: विपक्षी विधायकों ने बीजेपी की औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान मुख्यमंत्री के अलावा नंद किशोर यादव, लक्ष्मण गिलुवा के साथ तमाम दिग्गज नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

सुभाष चोपड़ा दिल्ली कॉन्ग्रेस के नए अध्यक्ष, कीर्ति आजाद को कैंपेन कमेटी की कमान

दिल्ली कॉन्ग्रेस प्रदेश कमिटी को नए अध्यक्ष के रूप में सुभाष चोपड़ा को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। 72 वर्षीय सुभाष चोपड़ा को यह पद मिलने से पहले अस्थायी तौर पर भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में आए कीर्ति आज़ाद को दिया गया था। बता दें कि 20 जुलाई 2019 को दिल्ली की पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस पार्टी की कद्दावर महिला नेता शीला दीक्षित के निधन के बाद यह पद खाली था। हालाँकि, अब कीर्ति आज़ाद महज़ चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख बनकर ही काम करेंगे। बुधवार को पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बयान के मुताबिक कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने ही सुभाष चोपड़ा और कीर्ति आज़ाद की नियुक्ति की है।

बता दें कि सुभाष चोपड़ा 1968 में छात्र राजनीति से शुरुआत करने के बाद कॉन्ग्रेस की ओर झुकाव लेकर सक्रिय राजनीति में आए। 1970-71 में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए। इसके बाद सुभाष दिल्ली कॉन्ग्रेस के सचिव, खजांची और महासचिव के अलावा उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। साथ ही सुभाष 16.6.2003 तक दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। सुभाष चोपड़ा 1968 में चौथे मेट्रोपोलिटन काउंसिल के सदस्य और 1998 व 2003 में विधायक बने। जून 2003 से दिसंबर 2003 तक विधानसभा के स्पीकर रहे। 2008 में वे फिर विधायक बने।

बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी में फ़िलहाल तीन कार्यकारी अध्यक्ष पद सम्भाले हुए हैं। इनमें हारुन युसूफ, देवेन्द्र यादव और राजेश लिलोठिया शामिल हैं। दिल्ली में अगले वर्ष अगस्त की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने को हैं। बता दें कि दिल्ली में तकरीबन 70 विधानसभा सीटे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 सीटों में से 67 पर जीत दर्ज की थी। इसी के बाद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। बता दें कि इसी चुनाव में 15 साल दिल्ली पर राज करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया था। हालाँकि दिल्ली की जनता का ऐसा मानना है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव को जीतने के लिए कुछ ज्यादा ही वादे कर डाले। इन्हें असल रूप में निभा पाना और अपने किए हुए वादों पर खरा उतरने का तो संभव नहीं लेकिन आने वाले वक़्त में यह जनता की जेब के लिए टैक्स के रूप में नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।