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अमित शाह ने ट्वीट कर दिया है, हरियाणा में सरकार तो भाजपा की ही बनेगी

यूँ तो हरियाणा चुनावों में आज अभी तक किसी को पूर्ण बहुमत मिलने के आसार नहीं दिख रहे लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री और ‘आधुनिक चाणक्य’ कहे जाने वाले अमित शाह ने ट्वीट करके कहा है कि हरियाणा में भाजपा की सरकार बनेगी।

उन्होंने लोगों को धन्यवाद देते हुए ट्वीट में लिखा, “गत 5 वर्षों में मोदी जी के केंद्रीय नेतृत्व में खट्टर सरकार ने हरियाणा की जनता के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास किये। भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर पुनः सेवा का मौका देने के लिए जनता का अभिनंदन करता हूँ। मुख्यमंत्री श्री @mlkhattar, श्री @subhashbrala व सभी कार्यकर्ताओं को बधाई।”

अमित शाह के बारे में कहा जाता है कि वो हवा-हवाई बातें नहीं करते और जब वो बोलते हैं तो ज़िम्मेदारी से बोलते हैं। जहाँ JJP के दुष्यंत चौटाला स्वयं को किंगमेकर घोषित किए घूम रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि निर्दलीय विधायक निर्णायक हो सकते हैं।

एक तरफ लंबे-चौड़े डील-डौल वाले जेजेपी के दुष्यंत चौटाला बड़े चौड़े होकर घूम रहे हैं। जीत की खुमारी के बाद यह स्वभाविक भी है। देश के उप-प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक की राजनीतिक विरासत जिसे मिली हो, जिसके पास सबसे युवा सांसद का तमगा रहा हो, उसके लिए यह जीत तब और ज्यादा मायने रखती है, जब पिता और दादा जेल में हों। खुद की बनाई पार्टी नई हो। लेकिन 10 सीटों पर जीत लगभग पक्की कर चुके दुष्यंत राजनीति की सबसे पुरानी लाइन भूल जाते हैं – कुछ भी संभव है यहाँ।

हरियाणा चुनाव के परिणाम लगभग स्पष्ट हो चुके हैं। BJP 46 के मैजिक आँकड़े से पीछे रह गई है। पीछे तो कॉन्ग्रेस भी रह गई है। लेकिन मामला अंतर का है, मामला गणित का है। अभी तक का गणित BJP को 40 जबकि कॉन्ग्रेस को 30 सीट दे रहा है। मतलब मैजिक आँकड़े तक पहुँचने के लिए BJP को चाहिए 6 विधायक जबकि कॉन्ग्रेस को चाहिए 16 विधायक।

वहीं एक दूसरे दिलचस्प समीकरण में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ शोर शराबा सबसे अधिक करने वाली आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियाँ ‘NOTA’ (None Of The Above, इनमें से कोई भी नहीं) से भी पीछे दिख रहीं हैं। यानि दिल्ली के मुख्यमंत्री के ‘घर’ में ही उनकी पार्टी की पूछ नोटा से भी कम हो गई है। गौरतलब है कि दिल्ली के बगल में ही स्थित हरियाणा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का गृह राज्य है। इसी तरह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद आँकड़ों के हिसाब से कम्युनिस्टों को भी NOTA से कम ही वोट मिले हैं।

चुनाव आयोग का डाटा बताता है कि NOTA का मत प्रतिशत (वोट शेयर) इन चुनावों के कुल मतों का 0.55% रहा। वहीं आम आदमी पार्टी को केवल 0.45% वोट ही मिले। कम्युनिस्टों की बदहाली का तो ये आलम है कि CPI और CPI(M) को महज़ 0.03% और 0.09% वोट ही मिले।

दुष्यंत चौटाला हरियाणा में नहीं बन पाएँगे किंग मेकर, ये 3 राजनीतिक समीकरण हैं उनके खिलाफ

लंबे-चौड़े डील-डौल वाले जेजेपी के दुष्यंत चौटाला बड़े चौड़े होकर घूम रहे हैं। जीत की खुमारी के बाद यह स्वभाविक भी है। देश के उप-प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक की राजनीतिक विरासत जिसे मिली हो, जिसके पास सबसे युवा सांसद का तमगा रहा हो, उसके लिए यह जीत तब और ज्यादा मायने रखती है, जब पिता और दादा जेल में हों। खुद की बनाई पार्टी नई हो। लेकिन 10 सीटों पर जीत लगभग पक्की कर चुके दुष्यंत राजनीति की सबसे पुरानी लाइन भूल जाते हैं – कुछ भी संभव है यहाँ।

हरियाणा चुनाव के परिणाम लगभग स्पष्ट हो चुके हैं। BJP 46 के मैजिक आँकड़े से पीछे रह गई है। पीछे तो कॉन्ग्रेस भी रह गई है। लेकिन मामला अंतर का है, मामला गणित का है। अभी तक का गणित BJP को 40 जबकि कॉन्ग्रेस को 30 सीट दे रहा है। मतलब मैजिक आँकड़े तक पहुँचने के लिए BJP को चाहिए 6 विधायक जबकि कॉन्ग्रेस को चाहिए 16 विधायक।

अब बात दुष्यंत चौटाला के किंग मेकर बनने की। और उस गणित की, जो उनके सपने पर पानी फेर सकता है। अभी तक जेजेपी के 10 विधायक बनते दिख रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि दुष्यंत चौटाला पूरी पार्टी के साथ कॉन्ग्रेस से गठजोड़ कर भी लेते हैं तो भी मैजिक नंबर से 6 पीछे ही रह जाएँगे। फिर इस 6 की जुगाड़ उन्हीं 9 अन्य विधायकों (अगर अभी के आँकड़े देखते हुए ये सभी बन जाते हैं तो, जिनमें 6 निर्दलीय भी हैं) में से करनी होगी, जिन पर BJP की भी निगाहें होंगी।

ग्राफिक्स साभार: Times of India

किंग मेकर दुष्यंत चौटाला वाली बात स्पष्ट रूप से खारिज तब हो जाती, जब वो कॉन्ग्रेस से हाथ मिलाते हैं। इस समीकरण में किंग मेकर दुष्यंत नहीं बल्कि निर्दलीय होंगे।

बीजेपी के साथ जाने का मन बना लिया तो… तो क्या BJP भी आपके साथ सत्ता में रहने का मन बना सकती है? शायद हाँ, शायद ना! लेकिन आँकड़े और राजनीतिक गणित ‘ना’ की ओर इशारा कर रहे हैं। कैसे? वो ऐसे क्योंकि राज्य में राजनीतिक वर्चस्व वाली पार्टी के साथ (जिसके विधायकों की संख्या 10 हो) सबसे बड़ी पार्टी तब तक समझौता करने से बचेगी, जब तक कोई और विकल्प उपलब्ध न हो। क्योंकि बड़ी और नामी पार्टी के अपने नखरे होंगे, पद की लालसा होगी, चुनाव बाद जनता के सामने मुद्दे उठाने का प्रेशर होगा… आदि-इत्यादि।

लेकिन मैजिक आँकड़ों तक पहुँचने के लिए अगर निर्दलीय या अन्य छोटे-मोटे दलों के विधायक मौजूद हों (जिसकी संख्या फिलहाल 9 दिख रही है) तो सबसे बड़ी पार्टी क्या करेगी? क्या अगले 5 साल तक वो बड़े दल के नखरे झेलेगी? या फिर निर्दलीय विधायकों को सत्ता में रखने की लॉलीपॉप दिखा उनके दम पर सरकार चलाएगी? ऐसा नहीं है कि इसमें रिस्क नहीं है, क्योंकि निर्दलीय बिना पेंदी के लोटे की तरह होते हैं, कभी भी, किसी के भी साथ पासा पलट लेते हैं। लेकिन यह समस्या आजकल हर दल के साथ हो गई है। इसलिए वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ा दल निर्दलीय विधायकों पर ही दाँव खेलेगा।

दिग्विजय सिंह ने फिर सावरकर पर की विवादित टिप्पणी: BJP नेता ने दिया करारा जवाब

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को फिर से सावरकर को लेकर विवादित टिप्पणी की। एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे दिग्विजय ने कहा कि जिस दिन भी सावरकर को भारत रत्न दिया जाएगा, वो दिन देश के इतिहास का काला दिन होगा।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों का साथ दिया था और ये भी वादा किया था कि वे साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ किसी आंदोलन में भाग नहीं लेंगे। वे गाँधीजी की हत्या के षडयंत्र में शामिल थे। लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से उन्हें मुक्ति मिली। यहाँ बता दें कि दिग्विजय सिंह इस दौरान राष्ट्रीय सेकुलर मंच द्वारा गाँधीजी और धर्म निरपेक्षता विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रहे थे।

इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने सावरकर को लेकर आज 2 ट्वीट भी किए। पहले ट्वीट में उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि देखें सावरकर को भारत रत्न देने से क्यों बदले वाजपेयी…।

वहीं, दूसरे ट्वीट में उन्होंने एक आर्टिकल शेयर किया। जिसका शीर्षक था ‘सावरकर से नहीं हट सकता गाँधी की हत्या और अंग्रेजों से माफी माँगने का दाग।’ उन्होंने इस ट्वीट को करते हुए पूछा कि क्या सावरकर को भारत रत्न मिलना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इस टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह पर पलटवार किया है। भाजपा के नेता व पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने महाराष्ट्र चुनाव के परिणाम साफ होने के बाद कहा है कि महाराष्ट्र की जनता ने बता दिया कि सावरकर भारत रत्न के हकदार है। महाराष्ट्र और हरियाणा की जनता ने सावरकर जी को भारत रत्न मिले इसपर मोहर लगाई है। चुनाव देखकर लग रहा है कि अब दिग्विजय सिंह चेहरा दिखाने के काबिल नहीं बचे।

योगी सरकार का दिवाली तोहफ़ा: राममंदिर पर आने वाले फैसले के कारण ड्यूटी जारी रखेंगे 25000 होमगार्ड

दिवाली के ख़ास मौक़े पर उत्तर प्रदेश सरकार ने होमगार्डों की ख़ुशियाँ फ़ीकी नहीं पड़नी दीं। सरकार ने 25 हज़ार होमगार्डों की ड्यूटी जारी रखने के निर्देश जारी रखने का आदेश दिया है। गुरुवार (24 अक्टूबर) को अपर प्रमुख सचिव गृह ने त्योहार को बजट के हिसाब से गार्डों की ड्यूटी लगाए जाने का आदेश जारी कर दिया है। दरअसल, अब दिवाली और राम मंदिर पर आने वाले फ़ैसले को देखते हुए क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होमगार्डों की ज़रूरत भी बढ़ गई है। इसलिए, होमगार्डों की ड्यूटी बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस ने 12 अक्टूबर को प्रदेश में तैनात होमगार्ड के 25 हज़ार जवानों को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटाने का निर्णल लिया था। उस समय यूपी पुलिस मुख्यालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि 25 हज़ार होमगार्डों को ड्यूटी से हटाने का निर्णय अगस्त-2019 में चीफ़ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया था।

ख़बर के अनुसार, प्रदेश के होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान भी सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ होमगार्ड के साथ खड़े थे। जबकि 12 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था क़ायम करने के लिए पुलिस विभाग के बजट से लगाए गए 25 हज़ार होमगार्ड की सेवाएँ लेने से पुलिस विभाग ने मना कर दिया था। इस संबंध में एडीजी पुलिस मुख्यालय बीपी जोगदंड ने आदेश जारी किया था, उसके बाद से ही प्रदेश में खलबली मच गई थी।

इस विवाद को शांत करने में होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान ने मोर्चा संभाला था। आदेश पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता करने के साथ भरोसा दिलाया था कि होमगार्ड पुलिस विभाग में अपनी सेवाएँ देते रहेंगे। डीजीपी से बातचीत करके सीमित बजट में ड्यूटी देने का सुझाव दिया गया है।

दरअसल, होमगार्ड को पहले 500 रुपए का रोज़ाना भत्ता मिलता था, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 672 रुपए कर दिया गया था। इससे उत्तर प्रदेश पुलिस के बजट पर असर पड़ रहा था। बता दें कि होमगार्ड्स का कोई मासिक वेतन नहीं होता, उन्हे ड्यूटी के आधार पर मानदेय दिया जाता है। होमगार्ड मंत्री चौहान का कहना है कि 31 मार्च के बाद सभी होमगार्ड को नए मानदेय के साथ ड्यूटी मिलेगी। उन्होंने कहा कि नए बजट में होमगार्ड और पुलिस का बजट बढ़ेगा।

हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: कॉन्ग्रेस, भाजपा की जीत से ज्यादा Exit Polls की हुई हार

हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। जहाँ महाराष्ट्र के नतीजों में भाजपा के लिए चैन की साँस का स्थान बिल्कुल है और वे सत्ता में वापसी के बेहद करीब दिख रहे हैं वहीं हरियाणा में पार्टी कर्नाटक जैसी स्थिति में फँसी लग रही है और विधानसभा त्रिशंकु होने की पूरी संभावना है। हरियाणा की जननायक जनता पार्टी और उसके अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं और अगर कर्नाटक वाला ही फार्मूला दोबारा इस्तेमाल हुआ तो वे ‘किंग’ भी बन सकते हैं।

ऐसे में उन एग्जिट पोलों पर उँगली उठना तय है जिन्होंने भाजपा की जीत की गलत घोषणा से हवाई आशा का माहौल बाँध दिया था।

लगभग सारे एग्जिट पोलों ने भारतीय जनता पार्टी और उसके गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दोनों राज्यों में सत्ता में धमाकेदार वापसी की घोषणा की थी। राज्यवार बात करें तो टाइम्स नाउ के सर्वे ने भाजपा और शिवसेना की युति को 288 में 230 सीटें दी थीं, इंडिया टुडे और एक्सिस के पोल ने 181 क्षेत्रों में जीत की घोषणा की थी, न्यूज़ 18-इप्सोस ने चौंकाने वाला 243 सीटों का आँकड़ा मोदी-शाह की पार्टी को दिया था। एबीपी न्यूज़ के पोल में 204 सीटें मिलीं थीं, टीवी 9 मराठी ने 197 का अनुमान किया था और रिपब्लिक जन की बात ने भगवा गठबंधन को 223 सीटें दी थीं।

Maharashtra 2019 exit polls
इनसे कौन लेगा जवाब?

वहीं इन चुनावी पंडितों ने कॉन्ग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के गठबंधन के महज़ क्रमशः 81, 41, 69, 48 और 55 सीटों पर ही सिमट जाने का ऐलान किया था। और अब चुनावी नतीजों को देख कर लग रहा है कि स्टूडियो मठाधीशों ने भाजपा और राजग को कुछ अधिक ही अहमियत दे दी, और कॉन्ग्रेस व यूपीए को हल्के में ले लिया। लेकिन इतने के बाद भी राजग महाराष्ट्र में सत्ता में लौटता दिख रहा है।

अब अगर हरियाणा की बात करें तो हवाई सर्वे और सच्चाई एक दूसरे के बिलकुल उलटे दिख रहे हैं। जहाँ सभी चुनावी सर्वे भाजपा के भारी बहुमत का दावा कर रहे थे, वहीं हकीकत इससे दूर दिख रही है। टाइम्स नाउ ने भाजपा को 90 में 71 सीटें दी थीं, इप्सोस ने 75, एबीपी न्यूज़ ने 72, और न्यूज़ एक्स ने तो भाजपा की गिनती 75 से 80 के बीच रहने की भविष्यवाणी कर दी थी। यहाँ तक कि भाजपा को इन सबसे कुछ कम देने वाले टीवी 9 भारतवर्ष और जन की बात ने भी क्रमशः 47 और 52-63 सीटों की बात की थी।

Haryana exit poll 2019

केवल इंडिया टुडे और माय एक्सिस का सर्वे त्रिशंकु विधानसभा की ओर इशारा कर रहा था। उन्होंने भाजपा को 32-44 और कॉन्ग्रेस को 30-42 सीटें दी थीं। हालाँकि, राष्ट्रीय स्तर पर विकल्पहीनता का माहौल ज़रूर है, लेकिन राज्य चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के सामने स्थानीय मुद्दों की वजह से विपक्ष आज भी ताकतवर है।

18 वर्षीय नुसरत को जिंदा जलाने वाले मदरसे के मौलवी समेत 16 दोषियों को कोर्ट ने सुनाई सजा-ए-मौत

बांग्लादेश की अदालत ने गुरुवार (अक्टूबर 24, 2019) को एक 18 वर्षीय लड़की को जिंदा जलाकर मारने के आरोप में 16 लोगों को मौत की सजा सुनाई

कोर्ट के इस फैसले के बाद न्याय की गुहार लगाने वालों में संतुष्टि दिखी। लड़की का केस लड़ रहे वकील हाफिज अहमद ने इस फैसले को न्यायपालिका की उपलब्धि बताई। वहीं लड़की के भाई (महमुदूल हसन नोमन) ने भी इस फैसले पर अपनी खुशी जताई।

जानकारी के अनुसार, नुसरत जहां रफी नाम की 18 वर्षीय लड़की को इन 16 लोगों ने कीरोसीन में भिगाकर जिंदा जलाया था। मामला इसी साल अप्रैल का है। लड़की की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने मदरसे के हेड मास्टर के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसके बाद उसपर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा। लेकिन जब उसने ऐसा करने से मना कर दिया तो हेडमास्टर के कहने पर उसको जिंदा आग में झोंक दिया गया।

80 प्रतिशत जला शरीर होने के बावजूद भी रफी ने आरोपितों के ख़िलाफ़ लड़ने का फैसला किया था, लेकिन अफसोस शरीर इतना जल चुका था कि 5 दिन में ही उसने दम तोड़ दिया। नुसरत की मौत ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया और आरोपितों के ख़िलाफ सजा की माँग देश के कोने-कोने में उठने लगी।

तस्वीर साभार: REUTERS

इस घिनौने अपराध को अंजाम देने के पीछे मदरसे के हेडमास्टर सिराज-उद-दौला समेत 3 आलिम और उनके समुदाय के कुछ ताकतवर लोग भी शामिल थे। इनमें वहाँ की आवामी लीग पार्टी के रुहुल अमिन और मकसद आलम जैसे स्थानीय नेता भी शामिल थे। जिन्हें गुरुवार को अदालत ने दोषी करार दिया।

हालाँकि, बता दें हेडमास्टर ने अपने ऊपर लगे सभी इल्जामों से मना किया है। लेकिन कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए 16 लोगों में से 12 लोगों ने अपने अपराध को स्वीकारा है।

वहीं, नुसरत के भाई का कहना है कि दोषियों को सजा मुकर्रर होने के बाद भी उसकी जान को खतरा है। मीडिया से बातचीत में उसने बताया, “आप लोग पहले ही जानते हैं, उन लोगों ने मुझे सबसे सामने कोर्टरूम में धमकाया। मैं बहुत डरा हुआ हैं। मैं प्रधानमंत्री से हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग उठाता हूँ।”

इमरान ख़ान के ऑफ़िस में घुसकर TikTok गर्ल ने बनाया वीडियो, लोगों ने कहा- ये देखो हो रही है गुफ़्तगू

पाकिस्तान की पॉपुलर टिकटॉक गर्ल हरीम शाह एक बार फिर से सुर्ख़ियों में हैं। दरअसल, हरीम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वो पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के कॉन्फ्रेन्स रूम में शूट किया गया है। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर पहुँचते ही पाकिस्तान सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है।  

आप इस वीडियो में देख सकते हैं TikTok गर्ल हरीम शाह हाई-सिक्योरिटी वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के कॉन्फ्रेन्स रूम में मस्ती में घूमती-फिरती नज़र आ रही हैं। इस दौरान वो मुस्कुराते हुए अपनी अदाओं का जलवा भी बिखेरती दिखती हैं। 

ग़ौर करने वाली बात यह है कि TikTok गर्ल वीडियो शूट करके समय ज़रा भी नहीं हिचकिचाईं कि आख़िर वो किस जगह पर हैं। हिन्दी-पंजाबी गीत का लुत्फ़ उठाते हुए उन्होंने बिना किसी बात के परवाह किए वीडियो न सिर्फ़ शूट किया बल्कि सोशल मीडिया के ज़रिए यूज़र्स तक भी पहुँचाया। भले ही हरीम को इस वीडियो शूट पर बड़ा नाज़ हो, लेकिन सच्चाई यह है कि सोशल मीडिया पर इस वीडियो पर कई तीख़ी प्रतिक्रियाएँ आई हैं जो न TikTok गर्ल के लिए ठीक है और न ही पाकिस्तान सरकार के लिए।

पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने ट्वीट किया कि पाकिस्तान विदेश कार्यालय में होने वाली बातें…

अदील राजा ने ट्वीट किया कि पीएमओ ऑफ़िस में हरीम शाह, यह कैसे हो गया?

डॉ अर्सलान ख़ालिद नाम के ट्विटर यूज़र ने अपने ट्वीट में लिखा कि यह प्रधानमंत्री कार्यालय नहीं हैं बल्कि विदेश मंत्रालय का कक्ष है। TikTok स्टार यहाँ कैसे पहुँची, इस बात की जाँच हो रही है।

फ़िलहाल, इस वीडियो को देखकर पाकिस्तान के अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया और जाँच शुरू कर दी। वहीं, TikTok गर्ल हरीम शाह ने कहा, “मैं नेशनल असेंबली भी गई थी, वहाँ मैंने अपना पास वापस लिया और सही से तरीक़े से वहाँ दाख़िल हुई। मैंने इसके लिए जो भी प्रोसेस है, उसे पूरा किया है। मुझे वहाँ किसी सिक्योरिटी ने रोका-टोका नहीं था। किसी ने मेरी मदद नहीं की और मैं ख़ुद वहाँ गई थी।” शाह ने कहा कि अगर वहाँ वीडियो बनाना नियमों के ख़िलाफ़ था, तो अधिकारियों को उन्हें वीडियो बनाने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए थी।

करतारपुर कॉरिडोर समझौता: लंगर और प्रसाद मिलेगा पाकिस्तान में, लेकिन देने होंगे 20 डॉलर

भारत और पाकिस्तान के बीच आज (अक्टूबर 24, 2019) करतारपुर कॉरिडोर को लेकर फैसला हो गया। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज यानी गुरुवार को इस मामले के मद्देनजर सहमति पत्र पर अपने-अपने हस्ताक्षर किए। भारत की ओर से इस मौक़े पर गृह मंत्रालय के अधिकारी एससीएल दास उपस्थित रहे, जबकि पाकिस्तान की ओर से विदेश मंत्रालय के अधिकारी मोहम्मद फैसल।

दोनों देशों के बीच पहले ये समझौता 23 अक्टूबर को साइन किया जाना था, लेकिन आखिरी मौक़े पर इसकी तिथि एक दिन आगे बढ़ा दी गई। लंबे इंतजार के बाद दोनों देशों के बीच ये समझौता हुआ।

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एससीएल दास ने इसपर हस्तात्क्षर करने के बाद जानकारी दी कि आज से पोर्टल पर करतारपुर कॉरिडोर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कॉरिडोर सुबह से शाम तक खुला रहेगा, लेकिन सुबह यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन लौटना होगा।

इस दौरान गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि पाकिस्तान इस समझौते में गुरुद्वारे के परिसर में लंगर और प्रसाद वितरण के लिए महत्तवपूर्ण प्रावधान बनाने को राजी हो गया है।

लेकिन, बता दें भारत के विरोध के बावजूद भी वह यात्रियों से 20 डॉलर फीस लेने पर अड़ा है। जिसे भारत ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। भारत ने कहा है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने तीर्थ यात्रियों से चार्ज वसूलने के फैसले को नहीं बदला। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भारत ने पाकिस्तान को यात्रियों से 20 डॉलर चार्ज वसूलने वाले फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था, लेकिन पाकिस्तान इसपर राजी नहीं हुआ।

गौरतलब है कि इस समझौते के बाद पाकिस्तान ने करतारपुर का गलियारा तीर्थयात्रियों के लिए 9 नवंबर से खोलने का ऐलान किया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा किया जाएगा। ये कॉरिडोर करतारपुर के दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर जिला के डेरा बाबा नानक धर्मस्थल से जोड़ेगा। जिससे भारतीय तीर्थयात्री वहाँ केवल वैध पासपोर्ट की मदद से बिना वीजा जा पाएँगे।

हुड्डा की अपील: इनेलो, जेजेपी, बसपा साथ आएँ, हम पूरा मान-सम्मान देंगे, चौटाला को भी निमंत्रण

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर दावा किया है कि हरियाणा में अगली सरकार कॉन्ग्रेस पार्टी बनाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में मज़बूत सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस, जननायक जनता पार्टी, बसपा, इनेलो और निर्दलीय के साथ आने का समय आ गया है। हुड्डा ने विपक्षी नेताओं से अपील की कि इनेलो, जेजेपी, बसपा हमारे साथ आएँ क्योंकि सब भाजपा के ख़िलाफ़ लड़े थे। पूरा मान-सम्मान देंगे हम। मिलजुल कर सरकार बनाएँगे। भाजपा के अधिकतर मंत्री चुनाव हार गए हैं। अभी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ये भी कहा जा रहा है कि हुड्डा ने दुष्यंत चौटाला को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।

भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में जनादेश खो दिया है और राज्य में मनोहर लाल खट्टर सरकार को हार स्वीकार करके इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। हुड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि स्वतंत्र उम्मीदवार जो चुनाव परिणामों में अग्रणी हैं, उन्हें सरकारी कर्मचारी रोक रहे हैं, चुनाव आयोग इस ओर ध्यान दे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को किसी भी विधायक या उम्मीदवार को ब्लॉक नहीं करने की चेतावनी दी और कहा कि इस संदर्भ में वो चुनाव आयोग को एक लिखित शिक़ायत भेजेंगे।

उन्होंने कहा, “राज्य अपनी जनता को पिछले पाँच साल हुए नुक़सान को पीछे छोड़, कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में न्याय और समानता की नई सुबह को गले लगाने के लिए तैयार है।”

हालाँकि, विधानसभा चुनाव के अंतिम परिणाम अभी घोषित नहीं किए गए हैं, लेकिन रुझान त्रिशंकु विधानसभा का संकेत दे रहे हैं जिसमें कोई भी पार्टी पूर्ण बहुमत प्राप्त करती नहीं दिख रही है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिखाए गए नवीनतम रुझानों के अनुसार, भाजपा 36 और कॉन्ग्रेस 34 सीटों पर आगे चल रहे थे, जबकि जेजेपी 6 सीटों पर आगे चल रही है। ग़ौरतलब है कि 5 निर्दलीय भी आगे चल रहे हैं, जिनमें से 4 बागी भाजपा नेता हैं जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया था।

जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला हरियाणा में किंगमेकर के रूप में उभर रहे हैं, जिसमें कॉन्ग्रेस या बीजेपी के साथ सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है।

महाराष्ट्र: बहन के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले NCP नेता ने परली से जीता चुनाव

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज्य की परली सीट पर हो रही भाई-बहन की सियासी लड़ाई में बहन (पंकजा मुंडे) के हिस्से में हार आई। गौरतलब है कि बहन को ये हार अपने उसी भाई (धनंजय मुंडे) से मिली जिसने अपनी बहन पंकजा पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बता दें कि पंकजा मुंडे महाराष्ट्र सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री का पदभार संभाल चुकी हैं। वहीं रिश्ते में उनके भाई और एनसीपी से महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव मैदान में उतरे धनजंय मुंडे महाराष्ट्र की विधान परिषद में सदस्य रहे हैं।

भाजपा और एनसीपी का दामन थाम सियासी मैदान में उतरे दोनों भाई-बहन के बीच यह मुकाबला परली विधानसभा सीट के लिए था। बता दें कि दोनों भाई-बहन के बीच रिश्ते शुरू से ही कड़वाहट भरे रहे हैं। एक चुनावी रैली में अपनी ही बहन पर निशाना साधते हुए धनंजय मुंडे ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसको लेकर धनंजय पर पुलिस में मामला भी दर्ज कराया गया था।

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बता दें कि बहन और भाई दोनों ही नेता महाराष्ट्र के बड़े सियासी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पंकजा मुंडे महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। पंकजा ने अपने पिता के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पंकजा मुंडे के नामांकन भरने के बाद से ही कार्यकर्ताओं में गर्मजोशी और उत्साह का माहौल था, यही वजह है कि पंकजा का चुनाव प्रचार करने खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह महाराष्ट्र आए थे।

वहीं महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन अपनी वापसी की ओर बढ़ता दिख रहा है। शुरुआती रुझानों से दोनों दलों के बीच गठबंधन की मजबूती की तस्वीर साफ़ होती दिख रही है लेकिन अभी सीटों के आँकड़ें में फिलहाल एनसीपी-कॉन्ग्रेस बढ़त बनाए हुए है। बता दें कि पाँच साल तक महाराष्ट्र पर राज करने वाली भाजपा के मुख्यमंत्री इस बार नागपुर से इस चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।