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UK की फ्लाइट पर ‘इक ओंकार’ की पेंटिंग, पहली बार हुआ ऐसा: सिखों ने PM मोदी को कहा- थैंक्यू

गुरू नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर सिखों के बीच उत्साह का माहौल है और करतारपुर कॉरिडोर खुलने से उनकी ख़ुशी दोगुनी हो गई है। इधर एयर इंडिया ने भी गुरूपर्व के सम्मान में अपनी फ्लाइट पर पवित्र ‘इक ओंकार’ का निशान बनाया। ये पहली बार है जब किसी भारतीय वायुयान कम्पनी ने सिखों के लिए इस तरह का कुछ किया हो। सिखों की धार्मिक विचारधारा का मूल तत्व ‘इक ओंकार’ को ही माना जाता है। बोइंग 787 फ्लाइट पर ये पवित्र प्रतीक बनाया गया।

ये एयरक्राफ्ट गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) को सुबह 3 बजे अमृतसर से यूनाइटेड किंगडम के स्टैंस्टेड के लिए उड़ान भरेगा। सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव की 550वीं जयंती के अवसर पर एयर इंडिया मुंबई-अमृतसर-स्टैंस्टेड रुट पर सप्ताह में 3 बार उड़ान भरेगा। ये उड़ान सेवा सोमवार, गुरुवार और शनिवार को उपलब्ध होगी।

अमृतसर-स्टैंस्टेड फ्लाइट से उन सिखों को सुविधा मिलेगी, जो गुरू नानक की जयंती के अवसर पर पंजाब आना चाहते हैं। फ्लाइट में सिखों के लिए स्पेशल पंजाबी खाने का भी बंदोबस्त किया गया है। 256 सीट वाले इस एयरक्राफ्ट में इन सुविधाओं को दिए जाने के बाद सिखों ने मोदी सरकार और एयर इंडिया को धन्यवाद दिया। तेजिंदर बग्गा और मनजिंदर सिरसा जैसे सिख नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। वहीं एयर इंडिया सिखों के लिए इस अवसर पर कई अन्य व्यवस्थाएँ भी कर रहा है।

बिहार की राजधानी में स्थित पटना साहिब गुरुद्वारा का भी अपना एक अलग महत्व है। सिखों के अंतिम गुरु व महान योद्धा गुरू गोविन्द सिंह की जन्मस्थली यहीं है। यही कारण है कि 27 अक्टूबर को एयर इंडिया ने अमृतसर और पटना के बीच डायरेक्ट उड़ान सेवा उब्लब्ध कराने का फ़ैसला लिया है। गुरुपर्व के अवसर पर पटना साहिब में भी काफ़ी तैयारियाँ की जा रही हैं और इसके लिए देश-विदेश से अतिथिगण बुलाए गए हैं।

3 महीने में ही कॉन्ग्रेस के लिए सांप्रदायिक हुए कुमारस्वामी, सिद्धारमैया ने कहा- पूर्व सीएम का असली रंग सामने आया

ज्यादा वक्त नहीं बीता है जब कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर भी जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक में अपनी सरकार नहीं बचा पाए थे। सरकार बचाने के लिए उस समय तमाम हथकंडे अपनाए गए थे। अब पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा है कि वे राज्य की भाजपा सरकार को गिरने नहीं देंगे। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई वाली सरकार को गिरने नहीं दूँगा। कॉन्ग्रेस की मध्यावधि चुनाव कराने की मंशा को पूरा नहीं होने दूँगा।”

पत्रकारों से बात करते कुमारस्वामी यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार का कार्यकाल मेरे हाथों में है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राज्य में बाढ़ के चलते हालत खराब है। राज्य सरकार जो धनराशि दे रही है उसका आवंटन बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास के लिए किया जाना चाहिए। जिन किसानों की फसल बाढ़ में तबाह हो गई है उन्हें मुआवजा दिया जाए और बेघरों को आवास मुहैया कराया जाए।

कुमारस्वामी ने कहा कि इस समय राज्य में मध्यावधि चुनाव कराने के लिए 250 करोड़ रुपए से अधिक की जरूरत होगी। इस पैसे के इस्तेमाल प्रभावित लोगों की मदद के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि राज्य में फिर से चुनाव कराए जाने का यह सही समय नहीं है। भाजपा सरकार कुछ माह पहले ही सत्ता में आई है, उसे काम करने के लिए थोड़ा समय देना चाहिए।

हालाँकि कुमारस्वामी का यह बयान कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को रास नहीं आया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के प्रति समर्पण का भाव दिखा कर जेडीएस नेता सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुमारस्वामी पहले भी सांप्रदायिक भाजपा के समर्थन से सरकार बना चुके हैं। इसलिए मुझे उनके बयान से कोई आश्चर्य नहीं हो रहा है। जेडीएस नेता का असली रंग फिर सामने आ गया।”

सिद्धारमैया ने कहा, “मैंने राज्य में भाजपा सरकार को गिराने की कसम नहीं खाई थी, बल्कि विधानसभा उपचुनावों में भगवा पार्टी की हार के साथ भाजपा सरकार के गिरने का अनुमान जताया था।” गौरतलब है कि मई 2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से दूर रह गई थी। उसे रोकने के लिए कॉन्ग्रेस ने जेडीएस से हाथ मिला लिया था। लेकिन जुलाई के अंत में दोनों दलों के विधायकों की बगावत के कारण यह सरकार गिर गई थी।

दिवाली के दिन पटाखे फोड़ने पर अमरेश की मॉब लिंचिंग, ओडिशा से 20 आरोपित फरार

ओडिशा से एक चौंकाने वाली ख़बर आई है, जहाँ दिवाली के दिन एक व्यक्ति को सिर्फ़ इसीलिए मार डाला गया क्योंकि उसने पटाखे उड़ाए थे। राजधानी भुवनेश्वर के सुंदरपाड़ा स्थित बीडीए कॉलोनी में अमरेश नायक नामक व्यक्ति की अज्ञात भीड़ ने मॉब लिंचिंग कर दी। अमरेश अपने दोस्तों के साथ रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को पटाखे जला रहे थे, तभी कुछ अज्ञात लोग पहुँचे और उन्हें मार डाला। पहले संदिग्ध लोगों ने अमरेश व उनके दोस्तों को पटाखे चलाने से मना किया और बाद में तलवार लेकर उन पर टूट पड़े।

भीड़ में क़रीब 20 सदिग्ध लोग शामिल थे, जिन्होंने पटाखे उड़ाने से मना किया। जवाब में अमरेश व उनके दोस्तों के साथ उनकी कहासुनी हो गई। इसके बाद भीड़ ने अमरेश पर तलवार से वार किया। उन्हें गंभीर रूप से घायल देख दोस्तों ने अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें मृत ही लाया गया है। डॉक्टरों द्वारा उन्हें मृत घोषित करने के बाद इलाक़े में तनाव पसर गया। अब तक सभी आरोपितों की पहचान नहीं हो सकी है।

पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है लेकिन आरोपित अभी भी क़ानून की पहुँच से बाहर हैं। अमरेश के दोस्तों ने बताया कि आरोपितों के पास बंदूकें व अन्य खतरनाक हथियार भी थे। उनमें से एक ने अमरेश के दोस्त की कनपट्टी पर बन्दूक रखा और अन्य ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया। दोस्तों ने अमरेश के घर में जाकर इसकी सूचना दी लेकिन तब तक देर हो चुकी है। यह भी पता चला है कि ये दोनों समूह एक-दूसरे के विरोधी थे।

तिलक लगाने पर शाहरुख खान को कट्टरपंथियों ने बताया ‘ग़लत मुस्लिम’

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख ख़ान ने सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों को परिवार समेत दिवाली की शुभकामनाएँ देते हुए ट्वीट किया, “सभी को हैप्पी दिवाली। आपका जीवन उज्ज्वल और खुशहाल रहे। दिवाली की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने अपने परिवार के साथ तिलक लगाए हुए एक तस्वीर भी शेयर की। इस तस्वीर में उनका बेटा अबराम और पत्नी गौरी की एक तस्वीर थी। लेकिन, यह तस्वीर कट्टर इस्लामियों को एक आँख ना भाई और उन्होंने तिलक लगी इस तस्वीर का मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया।

शाहरुख द्वारा शेयर की इस तस्वीर को अपलोड किए कुछ वक़्त ही गुज़रा था कि एक यूज़र ने उन्हें “झूठा मुस्लिम (मुनाफिक)” कहा और उन्हें ईद की शुभकामनाएँ दीं। हैरानी इस बात पर होती है कि हिन्दू त्यौहार के लिए नफ़रत इतनी प्रबल है कि दिवाली की शुभकामना देने वाले ने शाहरुख ख़ान को उस ट्विटर यूज़र ने एक झूठा मुस्लिम तक करार दिया।

एक अन्य ट्विटर यूज़र ने शाहरुख ख़ान के माथे पर तिलक लगी तस्वीर का उल्लेख करते हुए लिखा कि यह शर्म की बात है कि मुस्लिम होने के बावजूद, शाहरुख एक हिन्दू के कर्तव्यों को पूरा कर रहे हैं।

फेसबुक पर भी उनके पोस्ट पर इसी तरह की प्रतिक्रियाएँ मिलीं। एक फेसबुक यूजर फ़ैयाज़ अफ़रीदी ने SRK द्वारा पोस्ट की गई दिवाली की बधाई की निंदा करते हुए उन्हें मुस्लिम होने के कारण दिवाली मनाने पर शर्म करने के लिए कहा। 

एक अन्य फेसबुक यूजर ने SRK की आलोचना करते हुए कहा कि यह उनके लिए “½ किलोमुस्लिम” जैसी अभद्र टिप्पणी की।

ऐसा पहली बार नहीं है कि शाहरुख ख़ान इस्लामिक कट्टरपंथियों की के निशाने पर आए हों। एक महीने पहले, रबीद इस्लामी कट्टरपंथियों ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर शाहरुख ख़ान की मुस्लिम पहचान पर सवाल उठाया था। पिछले साल भी उन्हें इस्लामवादियों द्वारा निशाना बनाया गया था, जब उन्होंने अपने बेटे की गणेश पूजा मनाते हुए एक तस्वीर ट्वीट की थी, कट्टरपंथियों ने इसे ‘पाप’ कहा था और उनकी निंदा की थी।

मुंबई से भी एक ऐसी ही घटना सामने आई थी, जिसमें एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म उद्योग से जुड़े मुंबई के मलाड पश्चिम के रहने वाले विश्व भानू ने फेसबुक पर अपने मुस्लिम पड़ोसियों की असहिष्णुता के बारे में लिखा था। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि दिवाली के मौक़े पर सोसायटी के लोग (मुस्लिम) उन्हें और उनकी पत्नी को घर में दीये जलाकर रोशनी करने और रंगोली बनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। भानू ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी सोसायटी के लोगों ने न सिर्फ उनके घर की लाइट्स को नष्ट किया बल्कि बाक़ी लगी लाइट्स को हटाने के लिए मजबूर भी किया।

वाशिंगटन पोस्ट ने आतंक के सरगना बगदादी का किया गुणगान, लोगों का फूटा गुस्सा तो बदली हेडिंग

इस्लामिक स्टेट का खूॅंखार सरगना अबु बकर अल-बगदादी मारा गया तो पूरी दुनिया ने राहत की सॉंस ली। इसे
दुनिया भर के नेता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक मोड़ बता रहे। लेकिन, वाशिंगटन पोस्ट ने उसकी शान में कसीदें पढ़े। अपनी एक ख़बर की हेडलाइन में वाशिंगटन पोस्ट ने बगदादी को ‘धार्मिक विद्वान’ बताया। मानो बगदादी की पहचान आतंक के लिए न होकर धार्मिक स्कॉलर की रही हो।



खूंखार आतंंकवादी अबू बक्र अल-बगदादी के संदर्भ में वाशिंगटन पोस्ट की हेडलाइन

वाशिंगटन पोस्ट ने किस नीयत से हेडलाइन में यह खेल किया, यह वह ही जानें। लेकिन, लोगों को उसका ऐसा करना नहीं भाया। लोगों की नाराजगी को देख आनन-फानन में उसने हेडिंग बदली, जिसमें पहले बगदादी को आतंक का मुखिया और फिर आतंकी सरगना बताया गया।


खूंखार आतंंकवादी अबू बक्र अल-बगदादी के संदर्भ में वाशिंगटन पोस्ट ने बदली हेडलाइन

वाशिंगटन पोस्ट के वीपी कम्युनिकेशन्स, क्रिस्टीन कोरैटी केली ने ट्विटर कर कहा, “हमने समय रहते हेडलाइन बदल दी। इस तरह की हेडलाइन नहीं जानी चाहिए थी।” लेकिन, सोशल मीडिया में तब तक वाशिंगटन पोस्ट की धार्मिक स्कॉलर वाली हेडलाइन ट्रोल हो चुकी थी।

हेडलाइन को लेकर आपत्ति जताने में नेटिज़ेंस ने ज़रा भी देर नहीं लगाई। उन्होंने पूछा कि लाखों मासूमों की मौत के जिम्मेदार को वाशिंगटन पोस्ट ने कैसे पाक-साफ़ बताने की कोशिश की।

वाशिंगटन पोस्ट की ख़बर की हेडिंग का सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया और यूज़र्स ने इसका मज़ाक भी उड़ाना शुरू कर दिया। इसके लिए यूज़र्स ने हैशटैग #WaPoDeathNotices का उपयोग करना शुरू कर दिया।

बता दें कि आइएस सरगना से सहानुभूति दिखाने वाला वाशिंगटन पोस्ट अकेला नहीं है। ब्लूमबर्ग ने भी बगदादी का महिमामंडन किया है। उसके मुताबिक, “बगदादी छोटे से गॉंव से आया ऐसा शख्स था जिसने कई बाधाओं को पार कर मुकाम हासिल किया।”

गौरतलब है कि बगदादी की मौत की पुष्टि करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि वह कायर था और कुत्ते की मौत मारा गया। ट्रंप ने बताया कि शनिवार को स्पेशल फ़ोर्सेस के रेड (छापेमारी) के बाद बग़दादी ने पहले कायरों की तरह भागने की कोशिश की और आख़िर में एक सुरंग में जाकर ख़ुद को उड़ा लिया। धमाके में उसके तीन बच्चे भी मारे गए। धमाकों के बाद शरीर के चिथड़े उड़ गए। डीएनए टेस्ट से उसकी पहचान सुनिश्चित की गई।

कमलेश तिवारी मर्डर: रईस ने 72 कट्टरपंथियों का बनाया था ग्रुप, आसिम ने हत्यारे से पूछा था- तुमसे हो पाएगा?

कमलेश तिवारी हत्याकांड में हर रोज़ नए खुलासे हो रहे हैं। खबरों के मुताबिक अभी हाल ही में दोनों हत्यारों का आमना-सामना नागपुर से गिरफ्तार किए गए आसिम से करवाया गया। उसे देखते ही अशफाक ने ‘हमने कर दिखाया’ बोलकर प्रतिक्रिया दी। यह भी पता चला रईस नाम के जिस शख्स ने दोनों कातिलों को अपने करीबी के घर पनाह दिलवाई और नेपाल पहुँचाने तक मदद की, उसने एक व्हॉट्सअप ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप से 72 कट्टरपंथी जुड़े थे। रईस को गिरफ्तार कर पुलिस उसके साथियों की तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों हत्यारों की गिरफ्तारी के बाद जाँच एजेंसियों ने अशफाक का आमना-सामना आसिम से करवाया। जहाँ दोनों ने एक-दूसरे को देखते ही पहचान लिया। अशफाक ने आसिम से कहा, “ये काम मैंने कर दिखाया।” रिपोर्ट के अनुसार हत्या से पहले जब अशफाक ने आसिम से संपर्क किया था, तो उसने पूछा था कि इसमें बहुत रिस्क है क्या तुमसे हो पाएगा?

बता दें कि पूरे हत्याकांड में आसिम की भूमिका हत्यारों की मदद करने के अलावा उन्हें भड़काने की भी थी। अभी तक की जाँच से पता चलता है कि जब हत्यारों ने कमलेश तिवारी को मारने का इरादा कर लिया था, उस समय आसिम ही उन्हें भड़का रहा था। हत्या के बाद जब आसिम से संपर्क किया गया तो उसने हत्यारों को शाबाशी देते हुए कहा अब सूरत पहुँचकर अपने साथ और लड़कों को जोड़ना। कहा जा रहा है आसिम फोन पर बातचीत के दौरान सिर्फ एक बात दोहरा रहा था कि कमलेश तिवारी की हत्या कोई गुनाह नहीं है।

लेकिन, जब आमना-सामना हुआ तो वह चुपचाप दोनों हत्यारों को देखता रहा, जबकि अशफाक और मोइनुद्दीन उससे कहते नजर आए कि उन्होंने गलत कर दिया। आसिम ने इस दौरान एटीएस के किसी सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और न ही बताया कि उसने सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो क्यों अपलोड किए थे। अधिकारियों ने उससे पूछा कि क्या इन सबके पीछे कोई संगठन उसकी मदद कर रहा है, लेकिन वो फिर भी चुप रहा। उसने सिर्फ इतना कहा वीडियो में सारे विचार उसके निजी हैं और वह अपने साथ कई फॉलोवर्स जोड़ना चाहता था। हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके दफ्तर में हत्या कर दी गई थी।

फर्जी खबरें फैलाने की उस्ताद कॉन्ग्रेस नेता रम्या आ रहीं ‘दिल का राजा’ के साथ

फर्जी खबरें फैलाने की उस्ताद रहीं कॉन्ग्रेस नेता दिव्या स्पंदना उर्फ रम्या के सिल्वर स्क्रीन पर लौटने की खबर सामने आ रही है। एक्टर से नेता बनी स्पंदना की कन्नड़ फिल्म ‘दिल का राजा’ का टीजर शुक्रवार को रिलीज हुआ। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह सक्रिय राजनीति से तौबा कर वापस फिल्मी दुनिया में लौटने को तैयार हैं।

हालॉंकि पूरी तरह से उनके फिल्मी दुनिया में लौटने को लेकर यकीनी तौर से कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि वे गायब होने की कला के लिए जानी जाती हैं। वैसे, रम्या कई महीनों से कॉन्ग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में नजर नहीं आई हैं। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम की मुखिया के पद से इस्तीफा देने के बाद से सोशल मीडिया पर भी सक्रिय नहीं हैं।

बता दें कि पूर्व सांसद रम्या 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम की कमान सॅंभाल रही थी। लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद पार्टी ने गुजरात कॉन्ग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर रोहन गुप्ता को सोशल मीडिया डिपार्टमेंट का चेयरमैन बनाया है।

बता दें कि दिव्या स्पंदना गलत जानकारियाँ ट्वीट करने और भ्रामक अभियान चलाने के लिए कुख्यात रही हैं। भारत की सबसे तेज़ रफ़्तार ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ की सफलता को ख़ारिज करने के लिए दिव्या स्पंदना ने फर्जी ख़बरों का सहारा लेते हुए इसके बारे में झूठ फैलाने की कोशिश की।

कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद ने पुलवामा में आतंकी हमले के बाद असंवेदनशील बयानों को हवा देने की कोशिश की थी। हमले के मास्टरमाइंड आदिल डार के आतंकवादी बनने को शर्मनाक तरीके से सही ठहराया था। इसके अलावा दिव्या स्पंदना ने अल्ट्रा-लेफ्ट विंग वकील प्रशांत भूषण के एक ट्वीट को री-ट्वीट भी किया, जिसमें उन्होंने देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के लिए आतंकवाद में शामिल होने वाले कश्मीरी युवाओं को सही ठहराया था।

दिव्या ने इससे पहले अपने अकॉउंट पर ट्वीट करते हुए मीम शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि मोदी को वोट देने वाले तीन लोगों में एक आदमी बेवकूफ़ होता है, बिल्कुल बाक़ी दोनों की तरह।

दीवाली पर समर्थन की सौगात, राज्यपाल से मिले भाजपा-शिवसेना नेता, 30 को मुंबई जाएँगे अमित शाह

महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों की घोषणा के चार दिनों बाद भी अगली सरकार को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। हालाँकि विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला है। बावजूद इसके मुख्यमंत्री पद पर 2.5 साल के लिए शिवसेना की दावेदारी के कारण पेंच फॅंसा हुआ है। इसे देखते हुए भाजपा निर्दलीयों और छोटे दलों को साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

इस कड़ी में दिवाली के दिन (अक्टूबर 27, 2019) उसे महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई। निर्दलीय राजेंद्र राउत, बीजेपी की बागी गीता जैन और युवा स्वाभिमान पार्टी के रवि राणा ने भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया है।
30 अक्टूबर को बीजेपी विधायक दल के नेता का चुनाव होना है। खबर है कि इस बैठक में शामिल होने के लिए भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुंबई जाएँगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिल सकते हैं।

इस बीच, सोमवार (अक्टूबर 28, 2019) को बीजेपी और शिवसेना के नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से अलग-अलग मुलाकात की। शिवसेना नेता दिवाकर राउते ने गवर्नर से मुलाकात की और उनके जाने के कुछ समय बाद ही सीएम देवेंद्र फडणवीस भी गवर्नर हाउस पहुँचे।

बता दें कि शिवसेना, भाजपा से 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी की मॉंग कर रही है। मगर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा संभव नहीं हो पाएगा। बीजेपी इस शर्त पर अपनी सहमति नहीं देगी। महाराष्ट्र में एनडीए के घटक दल रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख रामदास अठावले ने भी इस तरफ इशारा किया और कहा कि बीजेपी तो मुख्यमंत्री का पद देने से रही। ऐसे में शिवसेना को आदित्य ठाकरे के लिए डिप्टी सीएम का पद स्वीकार कर लेना चाहिए। 

वहीं, शिवसेना को भी रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को दो विधायकों का समर्थन मिला। प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो विधायकों ने शिवसेना को समर्थन देने का पत्र उद्धव ठाकरे को सौंपा। अचलपुर विधानसभा क्षेत्र के बच्चू कडू और मेलघाट विधानसभा क्षेत्र के राजकुमार पटेल ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर समर्थन का ऐलान किया।

सीएम फडणवीस ने पहले ही कहा था कि 15 निर्दलीय विधायकों ने सरकार बनाने के लिए पार्टी को समर्थन देने का वादा किया है। दूसरी तरफ शिवसेना भी बीजेपी के सााथ मोलभाव करने की अपनी ताकत को बढ़ाने के क्रम में निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। हालाँकि अमित शाह के महाराष्ट्र जाने से इस पर जल्द ही तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

2 पुरुष और 2 महिलाओं को भीड़ ने घसीटा, 60 गोलियाँ मारी: 73 साल बाद फिर से मॉब लिंचिंग की सुनवाई

अमेरिका के अटलांटा में 25 जुलाई, 1946 को हत्या की एक ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम दिया गया था, जिसे याद करके आज भी रूह काँप उठती है। कार में दो अश्वेत किसान दंपत्ति पर श्वेत लोगों के एक समूह ने हमला कर दिया था। उनके साथ लूटपाट की गई। बंदूक की नोक पर उन्हें कार से बाहर खींचा गया, फिर क़रीब 60 गोलियाँ उनके जिस्म पर दाग कर बड़ी बेरहमी से चारों की हत्या कर दी गई। सात दशक से भी ज्यादा पुरानी इस घटना की फिर से सुनवाई होने जा रही है।

मारे गए लोगों में 24 साल के रॉजर मैलकम, उनकी पत्नी डॉरोथी मैलकम, जॉर्ज डॉर्सी और उनकी पत्नी मे मुर्रे डॉर्सी शामिल थे। दरअसल जुलाई 1946 में रॉजर मैलकम का एक दूसरे किसान से झगड़ा हुआ था, आपसी बहस हाथापाई तक पहुँच गई और रॉजर ने उस व्यक्ति को चाकू मार दिया। व्यक्ति बुरी तरह घायल हुआ और रॉजर को जेल जाना पड़ा। बाद में यह मामला दो किसानों का झगड़ा ना रह कर श्वेत और अश्वेत लोगों का विवाद बन गया। बावजूद इसके एक श्वेत किसान लॉय हैरिसन ने रॉजर को छुड़वाया और इसके लिए उस समय 600 डॉलर का जुर्माना भी भरा।

लॉय हैरिसन ही चारों लोगों को गाड़ी में ले जा रहे थे जब भीड़ ने गाड़ी को घेरा। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान लॉय को कोई चोट नहीं आई। बाद में लॉय ने एफबीआई से कहा कि वह भीड़ में किसी को भी नहीं पहचानता था। एफबीआई के रिकॉर्ड के अनुसार, लॉय अमेरिका के नस्ली संगठन केकेके (कू क्लक्स क्लेन्समैन) का सदस्य था और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों में शामिल रहा था। हालाँकि इस मामले में एफबीआई के पास लॉय के ख़िलाफ़ कोई सुबूत नहीं था।

इस मामले को मूर की फोर्ड लिंचिंग के रूप में जाना जाता है। अमेरिका के इतिहास  में इस मॉब लिंचिग के मामले को बड़े स्तर पर हुई घटना के रूप में याद किया जाता है। इस घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश के चलते राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन को इस मामले के लिए संघीय जाँच का आदेश देना पड़ा। इसके बाद यह यह मामला नागरिक अधिकारों के आंदोलन के रूप में उभर कर सामने आया।

इस मामले के लिए एक बड़ी जूरी का गठन किया गया और गवाही का दौर भी 16 दिनों तक चला, लेकिन किसी पर भी आरोप तय न हो पाने की स्थिति में यह मामला अनसुलझा ही रह गया। दिसंबर 1946 को इस मामले की फाइल बंद कर दी गई। अदालत को कोई भी दोषी नहीं मिला था, तब से ले कर अब तक इस फाइल को कई बार खोला और बंद किया जा चुका है। शोधकर्ताओं से लेकर एक्टिविस्ट तक सबकी इसमें रुचि रही है। इतिहासकार एंथनी पिच ने इन हत्याओं पर “द लास्ट लिंचिंग: हाउ अ ग्रूसम मास मर्डर रॉक्ड अ स्मॉल जॉर्जियन टाउन” नाम से किताब भी लिखी है।

पिच के अनुरोध पर 2017 में एक निचली अदालत ने इस मामले की फाइल खोलने का आदेश दिया। लेकिन, अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने इसके ख़िलाफ़ अपील की। मंत्रालय का कहना था कि अदालत के फ़ैसले सुरक्षित रखे जाते हैं। अमेरिका में अदालत में मामलों की सुनवाई किसी एक जज के सामने नहीं, बल्कि जूरी के सामने होती है और इसमें नागरिक भी शामिल होते हैं। जूरी सदस्यों के फ़ैसलों को गुप्त रखा जाता है। सभी सदस्य आपस में मिल कर जो फ़ैसला लेते हैं, केवल उसे ही सार्वजनिक किया जाता है।

इस साल फ़रवरी में अपील कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने निचली अदालत के फ़ैसले को क़ायम रखने का निर्णय लिया, यानी पुरानी फाइल को खोलने की अनुमति मिल गई। पर साथ ही यह भी कहा कि पूरे मामले की सुनावाई एक बार फिर होगी। इससे 70 वर्ष से अधिक समय हो जाने के बाद इस मामले एक नया मोड़ आया है, इसके मुताबिक़ केस से जुड़े गवाह सार्वजनिक रूप से सामने आ सकते हैं। 22 अक्टूबर से इस मामले की सुनवाई एक बार फिर से शुरू हो गई है। इतने पुराने मामले के गुनहगार शायद ही मिलें। लेकिन, इसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या इतने पुराने मामले दोबारा खोले जाने चाहिए?

बंगाल: BJP नेता शेख आमिर खान को TMC के गुंडों ने तलवार से काटा, 2 महिलाएँ गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के आरामबाग क्षेत्र में रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को एक भाजपा नेता शेख आमिर खान की नृशंस हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप भाजपा ने टीएमसी पर लगाया है। बताया जा रहा है कि मृतक पर पहले लाठी-डंडे से हमला किया गया। बाद में कथित तौर पर तलवार से उन्हें काट डाला गया। हमले में गंभीर रूप से घायल हुए बीजेपी कार्यकर्ता को अस्पताल ले जाया गया जहॉं उन्होंने दम तोड़ दिया।

गौरतलब है कि भाजपा और तृणमूल कॉन्ग्रेस के बीच लोकसभा चुनावों के बाद से ही रस्साकशी चल रही थी। जिसके चलते राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में तेजी देखी गई है। भाजपा के स्थानीय नेताओं का आरोप है, ” पश्चिम बंगाल में कानून का कोई राज नहीं हैं। हत्या के पीछे तृणमूल का ही हाथ है। जहाँ आमिर को मारा गया, वह जगह एसडीपीओ कार्यालय से ज्यादा दूर नहीं है।”

हालाँकि, तृणमूल के लोगों ने इन अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव के समय से ही भाजपा के लोग तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हमला कर रहे हैं। भाजपा ने राजमार्ग जाम कर शेख आमिर के हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार करने की माँग की। पुलिस ने इस मामले में अब तक दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है।