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पुलिस से बचने के लिए राहगीरों से फोन माँगकर इस्तेमाल कर रहे कमलेश के हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन

कमलेश तिवारी हत्‍याकांड के दोनों संदिग्ध हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन की लोकेशन लगातार चेंज हो रही है। रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को पुलिस को पता चला कि उनकी लोकेशन अम्‍बाला में है। इसके बाद पुलिस को उनकी तलाश में लगाया गया। रात होते-होते उनके शाहजहाँपुर में होने की ख़बर मिली। शाहजहाँपुर रेलवे स्‍टेशन के पास एक होटल के सीसीटीवी में आरोपितों को देखा गया।

जब तक पुलिस शाहजहाँपुर में आरोपितों को लोकेट कर पाती, उनकी लोकेशन फिर बदल गई। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपित अपने फोन की बजाय राहगीरों से मोबाइल माँगकर इस्‍तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों की तलाश में यूपी के शाहजहॉंपुर में मुसाफिरखानों और मदरसों पर छापेमारी की है। ये आरोपित शाहजहाँपुर में रुके थे लेकिन एसटीएफ के पहुँचने के भनक मिलते ही लापता हो गए। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने दोनों पर ढाई-ढाई लाख रुपए के ईनाम का ऐलान किया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में संदिग्ध हत्यारों के नेपाल भाग जाने की भी आशंका जताई गई है।

दोनों लगातार अपना भेष बदलकर छिप रहे हैं। वो अपना मोबाइल भी सात-आठ घंटे बाद ऑन कर रहे हैं और उसके बाद स्विच ऑफ कर दे रहे हैं। वहीं गुजरात एटीएस द्वारा सूरत से गिरफ्तार तीनों आरोपितों मौलाना मोहसिन शेख, फैजान और राशिद अहमद पठान को हवाई मार्ग से गुजरात के अहमदाबाद से लखनऊ लाया गया। फिलहाल गुजरात से लखनऊ लाए गए तीनों आरोपितों से पूछताछ कर बाकी दोनों आरोपितों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में खुलासा हुआ कि कमलेश तिवारी की नृशंस हत्‍या को मौलाना मोहसिन ने शरियत कानून के कत्‍ल ए वाजिब के सिद्धांत के तहत जायज ठहराया था। उसने राशिद के भाई  मोईनुद्दीन और अशफाक को इसके लिए तैयार किया। इस मामले में राशिद की माँ और अशफाक की बीबी से भी पूछताछ की गई।

दिवाली से पहले दिल्ली दहलाने की साजिश, बढ़ाई गई सुरक्षा: PMO, संसद भवन समेत 400 संवेदनशील इमारतें

आतंकी हमले की धमकी की सूचना के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) दिवाली से पहले राष्ट्रीय राजधानी में 400 से अधिक संवेदनशील इमारतों और बाज़ारों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है।

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने IANS को बताया, “रोहिणी, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, उत्तर, पूर्व, मध्य, नई दिल्ली और द्वारका – दिल्ली के 15 ज़िलों में से आठ संवेदनशील माने जाते हैं।” इन ज़िलों में सबसे अधिक संवेदनशील इमारतें हैं। अकेले नई दिल्ली में संवेदनशील 200 इमारतों की पहचान की गई है और कुल मिलाकर 425 इमारतें हैं जिन्हें संवेदनशील माना जा रहा है।

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेना भवन, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन जैसी इमारतों को हमेशा संवेदनशील माना जाता है। इसके अलावा अब कनॉट पैलेस और ख़ान मार्केट जैसे बाज़ारों को भी संवेदनशील क्षेत्रों में सूची में जोड़ दिया गया है। सेंट्रल दिल्ली में जामा मस्जिद, दिल्ली पुलिस मुख्यालय, राउज़ एवेन्यू कोर्ट, लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार, आनंद विहार जैसे कुछ अन्य स्थान हैं जिन्हें आतंकवादी निशाना बना सकते हैं।

नई दिल्ली ज़िला पुलिस उपायुक्त ईश सिंघल ने आतंकी धमकी के संबंध में IANS को बताया,

“हमारे पास किसी भी तरह के ख़तरे का कोई ख़ुफ़िया जानकारी (इनपुट) नहीं है, लेकिन हमने दिवाली से पहले शहर में सुरक्षा बढ़ा दी है।”

केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा दिल्ली पुलिस को फ़टकार लगाने के बाद पुलिस स्टेशनों पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। दिल्ली के पुलिस स्टेशन्स और पुलिस कॉलोनियों को आतंकवादियों द्वारा आत्मघाती या सीधे हमलों के माध्यम से निशाना बनाया जा सकता है। इन इनपुट्स के अनुसार, आतंकवादी विस्फोटक से भरे वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर पैदल ही थानों में प्रवेश कर सकते हैं।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: सोशल मीडिया पर भड़काऊ टिप्पणी करने पर 14 के ख़िलाफ़ FIR, 67 अकाउंट ब्लॉक

हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष और हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या पर सोशल मीडिया पर भद्दे कमेंट करने वालों के ख़िलाफ़ यूपी पुलिस सख़्ती से पेश आ रही है। साम्प्रदायिक सद्भाव भंग करने की कोशिश करने वाले लोगों की पहचान कर पुलिस ने अब तक 14 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है। इनमें, हरदोई, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, देवरिया, सहारनपुर, हमीरपुर में एक-एक और प्रयागराज, औरैया में दो-दो मुक़दमे शामिल हैं। इसके अलावा साइबर यूनिट ने लखनऊ में चार मामले दर्ज किए हैं।

ख़बर के अनुसार, डीजीपी ओपी सिंह ने रविवार (20 अक्टूबर) को जानकारी दी कि सोशल मीडिया पर अगर कोई साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करेगा तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने अलग-अलग ज़िलों में कुल 14 मुक़दमें दर्ज किए हैं। सिंह ने उनके ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाने निर्देश दे दिए हैं।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया सेल और साइबर क्राइम यूनिट ने कमलेश तिवारी की हत्या की वारदात के बाद सोशल मीडिया पर अभद्र कमेंट करके साम्प्रदायिक सद्भावना को हानि पहुँचाने वाले लोगों को गंभीरता से लिया गया है। इसके चलते अब तक 67 सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लाक कर दिया गया है, जिन्होंने आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी।

एडीजी कानून व्यवस्था पीवी रामाशास्त्री ने बताया कि ऐसे लोग जो सोशल मीडिया पर सुनियोजित रूप से नफ़रत फैलाने वाले पोस्ट कर रहे हैं उनकी पहचान की जा रही है और उनके ख़िलाफ़ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साक्ष्यों के आधार पर रासुका के तहत भी कार्रवाई करने पर भी विचार किया जाएगा।

एक तरफ़ तो इस हत्याकांड की देशभर में कड़ी निंदा हो रही है, वहीं कुछ अराजक तत्व अपनी विकृत मानसिकता के चलते भद्दे कमेंट करने से बाज नहीं आते। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर से सामने आया था, जहाँ कमलेश तिवारी की हत्या को लेकर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने दानिश नवाब और मोहम्मद इमरान अंसारी को गिरफ़्तार कर लिया था। दोनों आरोपितोंं ने कमलेश तिवारी की मौत का मज़ाक उड़ाते हुए उनकी हत्या करने वालों को 72 तोपों की सलामी दिए जाने की बात कही थी।

इसके अलावा, कुछ कट्टरपंथियों ने अपनी नीचता दिखाते हुए तिवारी की हत्या पर सोशल मीडिया पर “हा-हा” रिएक्शन दिए थे, इनमें फ़हीम रहमान, नदीम अख़्तर, मोहम्मद इमरान जैसे विकृत मानसिकता वाले लोग भी शामिल हैं, वहीं “लव” रिएक्ट करने वालों में सलाउद्दीन अंसारी और मुहम्मद समीउल्लाह के नाम सामने आए थे।

‘पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को हम बिल्कुल बर्बाद कर देंगे, अगर ये बाज नहीं आए तो हम…’

भारतीय सेना द्वारा रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकाने को तोप से निशाना बनाने और उसे नष्ट करने को लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर के राज्‍यपाल सत्यपाल मलिक ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “आतंकी ठिकानों को हम बिल्कुल बर्बाद कर देंगे और अगर ये नहीं बाज आए तो हम अंदर जाएँगे।”

बता दें कि रविवार को गुलाम कश्मीर में सेना ने चार आतंकी लॉन्च पैड को निशाना बनाकर तबाह कर दिया था। यही नहीं जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा किए गए संघर्ष विराम उल्लंघन के बाद भारत की ओर से की गई इस जवाबी कार्रवाई में कई आतंकवादी मारे गए। इसी के बाद सत्यपाल मलिक ने यह बयान दिया।

राज्‍यपाल मलिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जंग बुरी चीज है और पाकिस्‍तान को यह जान लेना चाहिए कि उसे कैसा व्‍यवहार करना है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान अपने तरीके से नहीं सुधरा तो कल जो भी हुआ, वो उससे और आगे जाएँगे।

साथ ही उन्‍होंने कहा कि वो राज्‍य के लोगों से कहना चाहते हैं कि 1 तारीख से नया कश्‍मीर होगा। उसमें ये अपनी हिस्‍सेदारी देकर अपने स्‍टेट को आगे बढ़ाएँ। सत्‍यपाल मलिक ने कहा कि वो युवा पीढ़ी से अपील करना चाहता हैं कि वे अपने राज्य की प्रगति के लिए काम करें।

वहीं आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने जानकारी देते हुए कहा था, “हमें सूचना मिली थी कि केरन, तंगधार व नौगाम सेक्टरों के विपरीत पीओके इलाके में आतंकवादी शिविर चल रहे हैं। इन्हें निशाना बनाया गया और उनका समर्थन करने वाले लोग, पाकिस्तानी चौकियाँ भी हमारी जवाबी कार्रवाई की जद में आए।” उन्होंने बताया कि  इस हमले में 6 से 10 पाकिस्तानी जवान और आतंकवादी भी मारे गए हैं। राज्यपाल ने कहा कि हमले में कम से कम तीन आतंकी शिविरों के नष्ट हुए, जबकि चौथे शिविर को भी नुकसान हुआ है।

सेना प्रमुख ने कहा कि शनिवार (अक्टूबर 19, 2019) शाम को आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ की कोशिश की गई थी। हालाँकि, तंगधार और भारतीय सेना ने तोपखाने की गोलीबारी के माध्यम से जवाबी कार्रवाई की और आतंकवादियों के ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुँचाया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी घुसपैठ की कोशिश में थे। लेकिन इससे पहले कि वे घुसपैठ की कोशिश करते भारतीय सेना ने कार्रवाई करते हुए मुँहतोड़ जवाब दिया।

यूपी पुलिस ने पकड़े आज़म की बीवी तंजीम फ़ातिमा के लिए काम करने वाले 7 फर्जी पोलिंग एजेंट

यूपी पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में सात ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जोकि पोलिंग एजेंट के रूप में फर्जी तरीके से काम कर रहे थे। बता दें कि ये सात फर्जी एजेंट आज़म खान की पत्नी तन्ज़ीम फातिमा को गैर-कानूनी तरीके से मदद करने में जुटे हुए थे। पोलिंग एजेंट के वेश में फर्जी तरीके से काम कर रहे इन सात आदमियों को पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया।

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट से बतौर विधायक इस्तीफ़ा देकर आज़म खान लोकसभा के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे। आज़म के बाद जो रामपुर सीट खाली हुई उस सीट पर चुनाव आयोग ने उप-चुनाव की घोषणा कर दी। समाजवादी पार्टी ने इसके लिए आज़म की पत्नी तंज़ीम फ़ातिमा को चुनाव के मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि तंज़ीम फ़ातिमा वर्तमान समय में समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सदस्य हैं।

तंज़ीम उस रामपुर के विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरी हैं जो उनके शौहर और विवादित नेता आज़म खान का किला माना जाता हैं। तकरीबन नौ-बार रामपुर की सीट से विधायक रह चुके आज़म खान अब पत्नी को जिताने के लिए हर संभव प्रयास करने में जुटे हैं। इस सीट के लिए सपा कितना हाथ-पाँव मार रही है यह इसी से समझा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस सीट पर आज़म की पत्नी के लिए प्रचार करने आए थे।

कई मामलों में आरोपित सपा नेता आज़म खान को फिलहाल जिला प्रशासन ने गिरफ्तार नहीं किया है क्योंकि उस से मिलने वाली सहानुभूति का फायदा आज़म चुनाव में वोट जुटाने के रूप में ले सकते हैं। बता दें कि आज़म परसरकारी ज़मीन हड़पने से लेकर बकरी चुराने तक के आरोप में केस दर्ज हैं।

आज़म खान ज़मीन हड़पने, शेर की मूर्तियाँ, किताबें और मूल्यवान पांडुलिपियाँ तथा भैंस चुराने जैसे कई आरोपों से घिरे हुए हैं। बता दें कि रामपुर के सांसद आज़म पर बिजली की धोखाधड़ी करने के भी आरोप हैं। इसी सिलसिले में आज़म के रेज़ोर्ट ‘हमसफ़र’ में बिजली विभाग की टीम की छापेमारी के बाद की बिजली काट दी गई। इस उप-चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुविकरण के इस खुले खेल से निपटने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने भारत भूषण गुप्ता को मैदान में उतारा है।

राम मंदिर पर सुनवाई जल्दी पूरी होने से ख़फ़ा राजदीप: अपने ही बयान से पलटे, जजों पर ही बिफर पड़े

राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में 6 अगस्त को शुरू हुई नियमित सुनवाई 16 अक्टूबर को ख़त्म होने के साथ ही 5 जजों की पीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि सुनवाई ख़त्म होने के 23 दिनों के भीतर फ़ैसला सुना दिया जाएगा। हिन्दू पक्ष की मजबूत दलीलों को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आएगा। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष ने एक तरफ से धमकी भरे अंदाज़ में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला सुनाते समय भविष्य को भी ध्यान में रखे। इसी बीच कई वामपंथी और लिबरल पत्रकारों की भी बेचैनी बढ़ गई है। ताज़ा उदाहरण राजदीप सरदेसाई का है।

राजदीप सरदेसाई को पहले इस बात से गुस्सा आता था कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ‘तारीख पर तारीख’ क्यों दे रही है? अब वो इस बात से आक्रोशित हो उठे हैं कि फ़ैसला सुनाने की ‘इतनी जल्दी भी क्या थी?’ राजदीप सरदेसाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उनके दोनों बयानों की तुलना की जा रही है और दिखाया जा रहा है कि कैसे उन्होंने गिरगिट की तरह रंग बदला है। सुनवाई ख़त्म होने से पहले राजदीप सरदेसाई ने कहा था कि चूँकि यह मामला धर्म और आस्था से जुड़ा हुआ है, सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे जल्दी सुलझाने की पहल करना अच्छी बात है।

वहीं अब राजदीप के सुर बदल गए हैं। अब उन्होंने जजों पर बिफरते हुए पूछा है कि अन्य मामलों में कोर्ट तारीख पर तारीख क्यों देती है और नियमित सुनवाई क्यों नहीं करती? जहाँ पहले सुनवाई जल्दी ख़त्म होने को उन्होंने अच्छी बात बताई थी, अब उन्होंने कहा,

“मैं आज जजों से पूछता हूँ। क्या उन्हें आम आदमी की परेशानी नज़र नहीं आती? वो तारीख पर तारीख क्यों देते हैं? कई लोगों के मामले सालों से चलते आ रहे हैं। उन मामलों में फ़ास्ट ट्रैक सुनवाई या डे टू डे सुनवाई क्यों नहीं की जाती? जज अपना आखिरी फ़ैसला मंदिर-मस्जिद वाला इसीलिए करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे इतिहास में उनका नाम दर्ज हो जाएगा।”

राजदीप सरदेसाई के इस बदले सुर से सभी हैरान हैं। अपनी ही बात से पलट गए हैं। पहले उन्होंने जल्दी सुनवाई ख़त्म करने का स्वागत किया था, अब वह पूछ रहे हैं कि इतनी जल्दी भी क्या है? राजदीप सरदेसाई अक्सर अपने शो में लोगों से पूछते रहते हैं कि वहाँ मंदिर और मस्जिद की जगह हॉस्पिटल या अस्पताल क्यों नहीं बनाया जाए? वह अपनी इस सोच को समय-समय पर प्रोग्रेसिव भी घोषित करते रहे हैं।

सेक्स सीडी कांड: कॉन्ग्रेस नेता CM भूपेश बघेल को SC से राहत, CBI ने की थी केस दिल्ली ट्रांसफर करने की अपील

कथित सेक्स सीडी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस नेता सीएम भूपेश बघेल को सवालों के साथ राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है। CBI ने याचिका दायर करते हुए केस को दिल्ली ट्रांसफर करने की माँग की थी। इस पर कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सीएम भूपेश बघेल और उनके सलाहकार से जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगाने का आदेश तो दे दिया है वो बताएँ कि उनके केस की सुनवाई को छत्तीसगढ़ से बाहर क्यों नहीं स्थांतरित किया जाना चाहिए। इस मामले की जाँच कर रही CBI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने पक्ष को रखते हुए कहा कि इस मामले में गवाहों को धमकाने के साथ झूठे केसों में फँसाने की धमकी दी जा रही है। बता दें कि कथित सीडी कांड में रिंकू खनूजा की ख़ुदकुशी के बाद CBI ने अप्रत्यक्ष रूप से जाँच में तेज़ी नहीं दिखाई। इस याचिका में CBI ने कैलाश मुरारका और चार अन्य को पक्षकार बनाया गया था।

बता दें कि साल 2017 में अक्टूबर के महीने में कथित सेक्स टेप वायरल हुआ था, जिसमें छत्तीसगढ़ के एक मंत्री का नाम सामने आया था। बाद में इस मामले में एक की गिरफ़्तारी भी हुई थी। मामले ने जब तूल पकड़ता देख राज्य सरकार ने यह मामला CBI को सौंप दिया था। इस बीच सेक्स सीडी कांड से जुड़े रिंकू खनूजा के बाद से इस मामले ने तूल पकड़ लिया था।

ग़ौरतलब है कि कथित सेक्स सीडी कांड में भूपेश बघेल को अलग-अलग धाराओं के तहत आरोपित बनाया गया था। उनके ख़िलाफ़ 120बी, 469, 471 आईटी एक्ट 67ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसकी जाँच का ज़िम्मा CBI को दिया गया। CBI की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, हालाँकि भूपेश बघेल ने ज़मानत लेने से इनकार कर दिया था।

हरियाणा: नसीम अहमद और मामन ख़ान के समर्थकों के बीच हिंसक संघर्ष, पत्थरबाजी और फायरिंग

फिरोजपुर झिरका विधानसभा के मलहाका गाँव में सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) को मतदान के दौरान दो गुट आपस में भिड़ गए। भाजपा उम्मीदवार नसीम अहमद के समर्थक एवं कॉन्ग्रेस उम्मीदवार मामन खान के समर्थक आपस में उलझ गए। झगड़े के दौरान न केवल लाठी और डंडे चले बल्कि जमकर पथराव भी हुआ। कुछ लोगों ने तो झगड़े के दौरान फायरिंग होने की बात भी कही। हालात को देखते हुए पुलिस कुछ देर बाद दल-बल के साथ मल्हाका गाँव के पोलिंग बूथ 128 पर पहुँची और उस बूथ पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। झगड़े में मामन खान के समर्थक शब्बीर, रसमीना, पप्पू, मुस्ती जाहिदा, बिलाल, साहबदीन, शेरू इत्यादि को चोटें आई हैं।

इसके अलावा भाजपा समर्थक के भी घायल होने की खबर मिल रही है। पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए पुनहाना सीएचसी भिजवा दिया है। कुछ घायलों की स्थिति ज्यादा खराब होने के चलते उनको अल-आफिया अस्पताल मांडीखेड़ा रेफर किया गया है। एसपी संगीता कालिया ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि नूह जिले में भी छिटपुट घटनाएँ हुई हैं। पुलिस ने सख्ती बरतते हुए एफआईआर दर्ज की है। शांतिपूर्ण मतदान के लिए न केवल एसपी केवल खुद बूथों पर जायजा ले रही हैं, बल्कि जिले के कई डीएसपी अलग-अलग इलाकों में बूथों पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।

एसपी ने कहा छिटपुट झड़पों के बाद तनाव नहीं है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। 10 अतिरिक्त कम्पनियाँ वहाँ सुरक्षा में लगाई गई हैं, जहाँ पर छिटपुट घटनाओं की शिकायत मिल रही है। एसपी ने बताया कि या तो वो ख़ुद वहाँ पहुँच रही हैं या फिर पुलिस के अन्य अधिकारी व कर्मचारी वहाँ जाकर हालात को सामान्य कर रहे हैं। कुल मिलाकर नूह जिले के तीनों ही विधानसभा क्षेत्रों में लगातार बूथों पर कार्यकर्ताओं के उलझने और घायल होने की खबरें मिल रही हैं।

दोपहर तक नूह विधानसभा के सलम्बा, फिरोजपुर झिरका विधानसभा के डूंगेजा और मल्हाका, पुन्हाना विधानसभा के पापड़ा, सिंगार, लहरवाड़ी इत्यादि गाँवों में कार्यकर्ताओं में झगड़े की खबरें मिली हैं। गनीमत यह रही झगड़ों में अभी तक किसी की जान जाने की खबर नहीं मिली है। दूसरी तरफ अगर हम बात करें तो कई गाँवों में ईवीएम की खराबी की वजह से कुछ घंटे मतदान बाधित हुआ है, लेकिन इतनी झड़प होने के बावजूद भी लोकतंत्र के पर्व में मतदाता उत्साह के साथ मतदान करने में लगे हुए हैं।

खास बात तो यह है कि मल्हाका गाँव में खूनी संघर्ष के बाद भी मतदाताओं ने वोट डालने का सिलसिला जारी रखा। लूहिंगाकलाँ गाँव में बीएसएफ की तैनाती से शांतिपूर्ण मतदान चलता हुआ इस बार दिखाई दिया तो पापड़ा गाँव में कहासुनी के बाद बूथ सुनसान रहा।

अयोध्या: मुस्लिम पक्षकार का ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ मीडिया में लीक होने पर नाराज हुए CJI, पूछा ये सवाल

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने पक्ष में झुकाने की कोशिशों में सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ पर हलफनामा दायर किया। इस हलफनामे में अपील की गई कि न्यायालय इस मुद्दे पर अपना फैसला सुनाते समय इस बात को ध्यान में रखे कि इससे आने वाली पीढ़ियाँ काफी प्रभावित होंगी। साथ ही इस फैसले से राज्यव्यवस्था पर भी फर्क़ पड़ेगा।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट को ये हलफनामा एक बंद लिफाफे में दिया गया, लेकिन जब तक ये सीजेआई की टेबल पर पहुँचा, तब तक मीडिया में इसकी एक कॉपी पहुँच चुकी थी। दायर याचिका में मौजूद हर बिंदु मीडिया हाउस के पास था। जिसपर सफाई देते हुए मुस्लिम पार्टियों ने बताया कि उन्होंने पहले इस नोट को बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को दिया, लेकिन बाद में इसे हर पार्टी में बाँट दिया।

हालाँकि, इस दाखिले से पहले मीडिया में लीक जानकारी पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई नाखुश दिखे। उन्होंने पूरे हलफनामे के मीडिया में लीक होने पर कहा, “ये हलफनामा मेरे टेबल पर बंद लिफाफे में हैं और यही इंडियन एक्स्प्रेस के मुख्य पेज पर भी। इसलिए इसे वहीं रहने दीजिए।”

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने इस दौरान मुस्लिम पक्षकारों से पूछा कि क्या उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को इसकी हलफनामे की कॉपी दी है? जिसपर उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले इस संबंध में अदालत में नोट जमा करवाया था, लेकिन बाद में इसकी एक कॉपी याचिकाकर्ताओं को दी गई।

यहाँ उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने हर पार्टी को तीन दिन का वक्त दिया था कि वे सील बंद लिफाफे में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर अपना पक्ष दायर करवा सकते हैं। जिसके मद्देनजर निर्मोही अखाड़े ने नोट दाखिल कर मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर आपत्ति जताई थी। इसी के बाद मुस्लिम पक्ष ने रविवार को अपनी याचिका सार्वजनिक कर दी।

यहाँ बता दें कि मोल्डिंग ऑफ रिलीफ का मतलब एक प्रकार का सांत्वना पुरस्कार होता है। इस मामले में इस हलफनामे का मतलब है कि याचिकाकर्ता ने जो माँग कोर्ट से की है अगर वो नहीं मिलती तो विकल्प क्या हो जो उसे दिया जा सके।

दिवाली के दिन कश्मीर पर भारत विरोधी मार्च निकालने की तैयारी: खुद पाक मूल के मेयर ने जताई आपत्ति

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में पाकिस्तान समर्थित समूहों और कुछ पाकिस्तानी नेताओं ने कश्मीर मुद्दे पर अगले रविवार (अक्टूबर 27, 2019) यानी दिवाली के दिन भारत विरोधी मार्च निकाले जाने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक ये विरोध मार्च 27 अक्टूबर को ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आवास डाउनिंग स्ट्रीट के पास रिचमंड टेरेस से शुरू होकर भारतीय उच्चायोग भवन के बाहर इकट्ठा होना है।

कथित तौर पर बर्टन क्षेत्र में पाकिस्तान समर्थित समूहों और मस्जिदों ने मार्च में भाग लेने वाले लोगों को मुफ्त में मार्च स्थल तक ले जाने के लिए कोचों को किराए पर लिया है। उन्होंने जानबूझकर 27 अक्टूबर को हिन्दुओं द्वारा मनाए जाने वाले पर्व दिवाली को ‘कश्मीरियों के लिए काला दिवस’ बताने के लिए यह योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विरोध मार्च के दौरान भारतीय उच्चायोग के बाहर 5000 से 10000 लोगों के इकट्ठा होने की उम्मीद है, जहाँ भारतीय प्रवासी दल के सदस्य रोशनी का पर्व दिवाली मनाने के लिए एकजुट होंगे।

ब्रेंट के भारतीय मूल के सांसद नवीन शाह ने इस विरोध प्रदर्शन को लेकर संभावित हिंसक स्थितियों को लेकर लंदन के मेयर सादिक खान के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त की थी। जिसके बाद 18 अक्टूबर को मेयर सादिक खान ने पत्र लिखकर कहा कि वो दिवाली के अवसर पर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के विरोध से ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बँटवारा और तेज होगा। इसके साथ उन्होंने आयोजकों और इसमें शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों से विरोध मार्च रद्द करने की अपील की है।

लंदन के मेयर सादिक खान का पत्र

सादिक खान ने लिखा है, “मैं पूरी तरह से लंदन में भारतीय उच्चायोग के आसपास के क्षेत्र में दिवाली के शुभ दिन पर विरोध मार्च की योजना की निंदा करता हूँ।” खान ने आगे कहा कि मार्च के दौरान किसी तरह की हिंसा को रोकने के लिए उनका कार्यालय पुलिस के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस पत्र में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस और उसके बाद भी कई बार विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का भी उल्लेख किया है।

हालाँकि, खान ने विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने में असमर्थता जताई है। उन्होंने कहा कि केवल गृह सचिव ही विरोध पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। इसलिए उन्होंने पत्र की एक प्रति गृह सचिव प्रीति पटेल और मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नर क्रेसिडा डिक को भेज दी है। बताया जा रहा है कि इस भारत विरोधी मार्च में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कथित राष्ट्रपति सरदार मसूद खान और प्रधानमंत्री राजा मुहम्मद फारूक हैदर खान भी शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद पाक समर्थकों ने कई बार विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटना को अंजाम दिया है।