Home Blog Page 5393

हरियाणा में खट्टर खड़ी करेंगे कॉन्ग्रेस की खटिया, 71-75 सीटों से सत्ता में लौटेगी भाजपा: Exit Polls

लोकसभा चुनाव के बाद देश दो राज्यों के चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। इसमें हरियाणा और महाराष्ट्र राज्य के विधानसभा चुनाव शामिल हैं जहाँ की जनता ने आज अपने-अपने राज्य के अगले पाँच साल के शासन का भविष्य तय कर दिया। हरियाणा में कुल 90 सीटें हैं जिनपर करीब 1169 उम्मीदवारों ने मैदान में बाज़ी लगाई। इन सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस बिना किसी चुनाव पूर्व गठबंधन के साथ लड़ने के लिए मैदान में उतरी हैं। बता दें कि इस राज्य में करीब 1 करोड़ 82 लाख 82 हज़ार 570 वोट हैं। वहीं सरकार बनाने के लिए बहुमत का ज़रूरी आँकड़ा 46 है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस एग्जिट पोल में तो कॉन्ग्रेस पार्टी को महज़ 15 से 19 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं दुष्यंत चौटाला की जेजेपी पार्टी और आईएनएलडी की स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है, विश्लेषकों का मानना है कि उसके खाते में 0 से 1 सीट आ रही है।

रिपब्लिक के अनुसार बीजेपी को 52, कॉन्ग्रेस पार्टी को 15 से 19 सीटें मिल सकती हैं। वहीं इसी सर्वे में दुष्यंत चौटाला की पार्टी को 5-9 सीटें मिल सकती हैं साथ ही अन्य के खाते में 10 सीटों का अनुमान लगाया गया है।

सीएनएन-न्यूज 18 द्वारा किए गए एग्जिट पोल के मुताबिक, हरियाणा में बीजेपी कुल 90 विधानसभा सीटों में 75 तक जीत सकती है। कॉन्ग्रेस के खाते में 15 और आईएनएलडी को शून्य सीट मिलने का अनुमान है।

एबीपी के सर्वे के मुताबिक एग्जिट पोल में हरियाणा में बीजेपी 72 और कॉन्ग्रेस 8 सीटें जीत सकती है। वहीं बताया यह भी जा रहा है कि अन्य के खाते में 10 सीटें जाने का अनुमान है।

टाइम्स नाऊ ने अपने एग्जिट पोल में बीजेपी को 71 और कॉन्ग्रेस को 11 सीटें दी हैं वहीं अन्य के खाते में 8 सीटें जाती दिख रही हैं। इसी तरह TV9 भारतवर्ष-सिसेरो के एग्जिट पोल में बीजेपी को 69 और कॉन्ग्रेस को 11 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि अन्य के खाते में 10 सीटें जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। बता दें कि हरियाणा के चुनाव के लिए आज यानी सोमवार (21 अक्टूबर) को मतदान किया गया। इस चुनावी मैदान में दो राष्ट्रीय पार्टियाँ भाजपा और कॉन्ग्रेस को जाट-बहुल सीटों पर राज्य की स्थानीय पार्टियों से सीढ़ी टक्कर का सामना करना है।

प्रिय हिन्दुओ! कमलेश तिवारी की हत्या को ऐसे ही जाने मत दो, ये रहे दो विकल्प

कमलेश तिवारी की हत्या से क्या संकेत देने की कोशिश की गई है? साफ़ है, हत्यारे यह जताना चाहते थे कि भले ही पंचायत से लेकर केंद्र तक भाजपा सत्ता पर काबिज हो जाए, इस्लाम हमेशा प्रभावी रहेगा और हिन्दुओं पर हावी रहेगा। सोशल मीडिया पर समर्थकों ने भी अपनी पार्टी से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं कि आख़िर वो इस्लामिक कट्टरवाद से जूझने के लिए क्या क़दम उठा रही है? वो कट्टरपंथ, जो अपने मूल रूप में, ख़ूनी अंदाज़ में, हिन्दुओं के दरवाजों पर दस्तक दे रहा है। उससे बचाव के लिए क्या किया जाए?

यह सवाल नया नहीं है। इस वर्ष कई बार उठाया जा चुका है। दिल्ली के हौज़ काजी स्थित दुर्गा मंदिर में मुस्लिमों ने तबाही मचाई और प्रतिमाएँ विखंडित कर डाली, तब भी यह सवाल उठा। दशहरा और दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं के जुलूसों पर ‘मुस्लिम बहुल इलाक़ों’ से गुजरने के दौरान न जाने कितने हमले हुए, तब-तब ये सवाल उठा। देश के विभिन्न भागों, ख़ासकर पश्चिम बंगाल में हिन्दू कार्यकर्ताओं, नेताओं या हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को मारा गया, तब भी लोगों ने ये सवाल उठाया। अब कमलेश तिवारी की हत्या हुई है तो अब इस सवाल का उठना एक बार फिर लाजिमी है क्योंकि न सिर्फ़ सामान्य मुस्लिम बल्कि कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं कि ‘मुस्लिम बुद्धिजीवी’ भी कमलेश तिवारी की लाश पर ख़ुशी मनाने में लगे हुए हैं

भाजपा ने अभी तक आधिकारिक रूप से तो इसपर कुछ नहीं कहा है लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं व पदाधिकारियों ने ज़रूर अपना पक्ष रखने की कोशिश की है। आख़िर लोगों की क्या माँगें हैं? कुछ लोगों ने क़ानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की थी। इसपर पार्टी नेताओं ने असमर्थता जताई। कमलेश तिवारी मामले में त्वरित कार्रवाई और 24 घंटे के भीतर साज़िशकर्ताओं को धर-दबोचना भाजपा वाले अपने पक्ष में गिनाते हैं। यह गौर करने वाली बात है कि 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद से अब तक कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो आतंकी किसी सार्वजनिक स्थल पर हमला करने में नाकाम रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक भी मानते हैं कि यूपीए काल के मुक़ाबले सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी पुख्ता हुई है। अगर कहीं चूक हुई भी है तो उस पर हम बात भी करते हैं। ताज़ा उदाहरण देखिए। कमलेश तिवारी की हत्या हुई तो ये चर्चा का विषय बना की किस तरह उन्हें पूर्णरूपेण सुरक्षा मुहैया कराने में गलतियाँ हुईं। लेकिन, इसकी भी कोई गिनती नहीं है कि ऐसी कितनी ही घटनाओं को समय रहते टाला जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियाँ ऐसी सभी घटनाओं को सार्वजनिक नहीं करतीं। याद कीजिए, महाराष्ट्र के मुंब्रेश्वर मंदिर के प्रसाद में जहर मिला कर बिना किसी बम ब्लास्ट के ही कितने ही हिन्दुओं को मारे जाने की साज़िश रची जा रही थी, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार जिहादियों के ऐसे न जाने कितने ही मंसूबों और प्रयासों पर पानी फेर दिया।

ऐसी किसी घटना के बाद लोगों का गुस्सा होना और अपनी भावनाओं को जाहिर करना लाजिमी है, वाजिब है। आम जनता सारे तकनिकी पहलुओं का विश्लेषण करने के बाद टिप्पणी नहीं करती। जनता जो देखती-सुनती है, उसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करती है। जैसा कि ऊपर हमने चर्चाएँ की, आप आम जनता से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वो एक-एक ट्वीट या फेसबुक पोस्ट करने से पहले उतना सोच-विचार करे। आप मेरी ही ट्विटर टाइमलाइन देख लीजिए। मेरा गुस्सा आपको प्रत्यक्ष दिखेगा, मेरी भावनाएँ आपको ज़रूर महसूस होंगी और आपको पता चलेगा कि कमलेश तिवारी की हत्या के बाद मेरी प्रतिक्रिया वही थी, जो हर हिन्दू की है। गुस्सा तो इतना था कि मैंने कुछ ट्वीट्स लिख कर डिलीट भी कर दिया था।

जैसे-जैसे किसी घटना के बाद समय बीतता है, लोगों का गुस्सा ठंडा होता चला जाता है और उस घटना को लेकर चर्चाएँ कम होती जाती हैं। मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि समय बीतने के साथ सबकुछ ठीक हो जाएगा। हालाँकि, ऐसी सम्भावना है। लेकिन इससे क्या हो जाएगा? क्या कुछ दिनों के लिए ‘सब ठीक-ठाक है’ वाला माहौल आ भी जाए तो इससे सबकुछ तो ठीक नहीं हो जाएगा। यह अस्थायी होगा। लिबरल और वामपंथी फिर से ‘डरा हुआ मुसलमान’ वाले नैरेटिव पर लौट आएँगे। जैसा कि ट्रेंड चलता आया है, फिर कोई जिहादी ‘गजवा-ए-हिन्द‘ के लक्ष्य को मन में बिठाए कमलेश तिवारी जैसी वारदात को अंजाम देकर लिबरलों और वामपंथियों के बने-बनाए नैरेटिव को धराशायी कर देगा।

न सिर्फ़ भारतीय जनता पार्टी बल्कि आज अपना गुस्सा व्यक्त कर रहे हिन्दुओं को भी इसका समाधान निकालने की ज़रूरत है। भाजपा को क्या करना चाहिए? चूँकि काफ़ी सारे ऐसे लोग हैं जो पार्टी को पहले से ही बता रहे हैं कि उसे क्या कदम उठाने चाहिए और क्या करना चाहिए, मैं उसपर चर्चा नहीं करूँगा। हाँ, लेकिन मैं भाजपा को एक सलाह ज़रूर दूँगा। आज जो गुस्सा हिन्दुओं का दिख रहा है, भले ही यह सोशल मीडिया तक ही सीमित नज़र आ रहा हो, लेकिन इसे भाजपा गंभीरता से ले। भले ही कुछ दिनों में सबकुछ सामान्य होने के साथ भाजपा राहत की साँस लेने लगे लेकिन आगे जाकर यह पार्टी को नुकसान पहुँचा सकता है।

मैं गुस्साए हिन्दुओं से भी कुछ बातें कहना चाहूँगा। कुछ सलाह देना चाहूँगा। मैं ये जानता हूँ कि मैं एक ऐसे समूह को सलाह दे रहा हूँ जो असंगठित है और इसके एकता की कोई रूप-रेखा नहीं है। यह अजीब है न, क्योंकि मैं एक ऐसे समूह को सलाह दे रहा हूँ, जिसके पास किसी निर्णय को लागू करने और उसका क्रियान्वयन करने के लिए कोई संरचना या ढाँचा नहीं है, सिवाय भाजपा को सलाह देने के। हालाँकि, इसका एक दूसरा पक्ष भी है। एक विशाल संगठन ब्यूरोक्रेसी की जड़ता से जूझता रहता है, वहीं इसके मुक़ाबले किसी स्टार्ट-अप के पास नए फ़ैसले लेने और उसका क्रियान्वयन के लिए ज्यादा स्वतंत्रता होती है।

मेरे पास हिन्दुओं के लिए दो सलाह हैं। पहले कंस्ट्रक्टिव है, जिसे अमल में लाना तुलनात्मक रूप से आसान हो सकता हैं। वहीं मेरी दूसरी सलाह कुछ लोगों को उग्र प्रतीत हो सकता है और वो इसे विनाशकारी भी घोषित कर सकते हैं।

इस्लामिक कट्टरवादी विचारधारा के ख़ात्मे के लिए ‘कमलेश तिवारी एक्ट’

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान पैगम्बर मुहम्मद पर विवादित टिप्पणी के आरोप में एक व्यक्ति की हत्या की गई और इसके बाद अंग्रेजों ने ईशनिंदा क़ानून की रूपरेखा तैयार की। जैसा कि अपेक्षित है, जिस आदमी ने इस हत्या को अंजाम दिया, उसे पाकिस्तान में महिमामंडित किया जाता है। आखिर ऐसा हो भी क्यों न? जिन्ना और अल्लामा इक़बाल जैसी हस्तियों ने भी तो उस हत्यारे की प्रशंसा की थी

कमलेश तिवारी की हत्या यह बताती है कि दशकों पहले जिस विचारधारा ने पाकिस्तान को जन्म दिया, वह भारत में अभी भी जीवित है और फल-फूल रही है। मैं ऐसा इसीलिए कह रहा हूँ क्योंकि सामान्य मुस्लिमों से लेकर ‘बुद्धिजीवी’ मुस्लिमों तक, इस वर्ग के कई लोग इस हत्या का जश्न मनाते हुए देखे गए हैं और ऐसा वे छिप कर नहीं कर रहे। इसीलिए, वो विचारधारा आज भी जीवित है, पोषित हो रही है।

काफ़ी लोगों का मानना है कि अगर ऐसी ही एक हत्या के कारण ब्रिटिश इंडिया में ईशनिंदा क़ानून लाया गया था, अब उसी प्रकार की घटना हुई है तो उस क़ानून को कचड़े के डब्बे में फेंके जाने का समय भी आ गया है। मुझे लगता है कि ऐसी माँग करना थोड़ा सा भटकने के बराबर है। मुद्दा ईशनिंदा नहीं है, मुद्दा वो विचारधारा है- जो पाकिस्तान को जन्म देती है। पाकिस्तान को जन्म देने वाली वो इस्लामिक विचारधारा, वो कट्टरपंथी भावना- जिसे तथाकथित बुद्धिजीवियों का समर्थन और पोषण प्राप्त होता है।

तो फिर कमलेश तिवारी को असली श्रद्धांजलि क्या होगी? एक ऐसे क़ानून को लाया जाए, जो उस विचारधारा को सिरे से ख़त्म कर दे, जिसनें पाकिस्तान को जन्म दिया। एक ऐसा क़ानून, जो इस्लामी विचारधारा और गतिविधियों से जूझे, उनके ख़िलाफ़ काम करे।

हमें याद होने चाहिए कैसे कॉन्ग्रेस और वामपंथियों के बनाए वातावरण में कथित एंटी-लिंचिंग क़ानून (राजस्थान में) बनाया गया और कम्युनल वायलेंस बिल लाया गया। अब समय आ गया है कि जब वामपंथ विरोधी ताक़तें इस्लामिक विचारधारा विरोधी क़ानून लेकर आएँ। इस क़ानून के पक्ष में जितनी भी दलीलें दी जाएँ, कम ही होंगी। यह क़ानून ज़रूरी है भारत की भौगोलिक अखंडता बनाए रखने के लिए। यह क़ानून आवश्यक है भारत को एक और बँटवारे से बचाने के लिए।

जो लोग पब्लिक पॉलिसी और क़ानून बनाने के दाँव-पेंच को समझते हैं, ऐसे लोगों को लाकर इस क़ानून को ड्राफ्ट किया जाना चाहिए। हमने देखा था कि किस तरह कमलेश तिवारी पर पैगम्बर मुहम्मद पर टिप्पणी करने का आरोप लगा तो लाखों मुस्लिमों ने सड़क पर निकल कर उन्हें मृत्यदंड देने की बात की, खुलेआम धमकी दी। उनका क्या बिगड़ जाता? अगर किसी ने आगे आकर एक एफआईआर दायर भी कर दी तो उनपर ज्यादा से ज्यादा धारा 506 (धमकी देना) लगाया जाता। वो लाखों की संख्या में सड़कों पर निकले क्योंकि इस्लामिक विचारधारा के ख़िलाफ़ आज ऐसा कोई क़ानून नहीं है। उन्होंने लाखों की संख्या में निकल कर कमलेश तिवारी को फाँसी देने की माँग की, क्योंकि शासन-सत्ता ने उन्हें रोकने की चेष्टा नहीं की। या वे डर गए?

क़ानून तो ऐसा होना चाहिए कि अगर कोई भी मुस्लिम भीड़ की शक्ल में या अकेले सड़क पर निकल कर इस तरह की हरकतें करे या फिर जबरन शरीयत थोपने की कोशिश करे तो पुलिस को यह अधिकार होना चाहिए कि वह उसके ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई करे और ऐसे लोगों को कठोर से कठोर सज़ा दी जाए। ऐसा तब होगा, तब सज़ा का प्रावधान किया जाएगा। भारत के हर हिस्से में ऐसा होना चाहिए।

ये तो बस सिक्के का एक पहलु है। जहाँ तक पैटर्न देख कर साफ़ झलकता है, मुस्लिमों का लक्ष्य सिर्फ़ पूरे भारत में शरीयत क़ानून चलाना ही नहीं बल्कि उनके कुछ और भी बड़े खतरनाक इरादे हैं। उन इरादों की पहचान होनी चाहिए, उन्हें नए क़ानून में शामिल करते हुए उसके लिए कठोर सज़ा का प्रावधान भी होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर कई बार ईशनिंदा को लेकर ग़लत आरोप लगाए जाते हैं। ऐसा करने वालों को कड़ी सज़ा मिलती है क्या? एक और खतरनाक चलन है मजहबी नियम-क़ायदों का जिक्र करते हुए स्थानीय क़ानून को धता बताने वाला। उन्माद को बढ़ावा देने सहित ऐसी कई चीजें है, जिनकी पहचान होनी चाहिए। उनपर चर्चा होना चाहिए, उनके ख़ात्मे पर विचार होना चाहिए और उनके लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान होना चाहिए।

इससे पहले कि एक दूसरा पाकिस्तान पैदा हो जाए या फिर हम लंदनिस्तान बन जाएँ, ऐसे क़ानून की हमें सख़्त ज़रूरत है। अगर सरकार ने ऐसा कर दिया या फिर लोगों ने इसके लिए पहल की, तो हिन्दुओं का गुस्सा थम सकता है। मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि ये विकल्प आसान है क्योंकि इसके लिए आंदोलन करना पड़ेगा, माहौल बनाना पड़ेगा और सरकार को बताना पड़ेगा। लेकिन, आप जैसे ही मेरे दूसरे सुझाव को पढ़ेंगे- आपको ये आसान लगने लगेगा।

एक होइए, संगठित होइए, दबाव बनाइए और अपनी एकता प्रदर्शित कीजिए

इससे पहले कि मैं अपने दूसरे सुझाव पर आऊँ, आपको मैं अपने एक लेख की याद दिलाना चाहूँगा। उस लेख को मैंने तब लिखा था, जब 2019 लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी दोबारा चुन कर सत्ता में आए थे और उन्हें 2014 से भी बड़ा बहुमत मिला था। उसमें मैंने यह बताने की कोशिश की थी कि राइट विंग को भी नरेंद्र मोदी को ठीक से समझने की ज़रूरत है। आपको बता दूँ कि मेरा दूसरा विचार क्रियान्वयन के तौर पर कठिन है और इसे कुछ लोग तबाही वाला भी बता सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी चुप्पी के लिए निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें निशाना बनाने वाले वही लोग हैं, जिन्हें ‘भक्त’ कहा जाता है। और हाँ, उन्हें ‘भक्त’ उन्हीं लोगों ने नाम दिया है, जो दशकों से एक परिवार विशेष की गुलामी करते आ रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि आखिर ‘मोदी पर कमलेश तिवारी की हत्या से कोई फ़र्क़ क्यों नहीं पड़ रहा?’ इसी बीच पीएम मोदी के एक कार्यक्रम की तस्वीरें आईं, जिसमें वह आमिर ख़ान और शाहरुख़ ख़ान जैसे सितारों के साथ दिख रहे हैं। लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।

ध्यान रखिए, मैं मोदी की तरफ़ से आपलोगों को जवाब नहीं दे रहा हूँ। इस परिस्थिति में ऐसा करना ग़ैरज़रूरी होगा। हालाँकि, मैं भले ही उस आदमी पर लगातार हो रहे जुबानी हमलों से सहमत न रहूँ जिसने पिछले एक दशक से हिन्दू पुनरुत्थान को एक नई ऊर्जा और दिशा दी है, मैं लोगों के गुस्से को समझता हूँ और उनकी संवेदनाओं की कद्र करता हूँ।

मैंने अपने लेख में सुझाव दिया था कि आपको एक ऐसी संगठित ताक़त बननी पड़ेगी कि पीएम मोदी को आपको सुनने के लिए मजबूर होना पड़े। आपको एक ऐसे समूह की शक्ल लेनी होगी, जो एक हो और एक सुर में आवाज़ उठाए।

अब मेरे दूसरे सुझाव का वक़्त आ गया है। ये मेरे पिछले सुझावों से कई क़दम आगे निकल जाता है। एक तरह से देखा जाए तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी लड़ाई है। वो लड़ाई, जिसके ख़िलाफ़ मैंने ख़ुद सलाह दी थी। लेकिन हाँ, ये मोदी से कोई युद्ध नहीं है बल्कि अपनेआप को साबित करने की लड़ाई है। ये बात बहुतों को चुभ सकती है लेकिन कुछ लोगों का तो ये भी मानना है कि कमलेश तिवारी की हत्या जैसे मुद्दे सिर्फ़ सोशल मीडिया पर शोर फैलाते हैं। जवाब में कुछ लोग ये भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर शोर फैलाने वाले ऐसे मुद्दे वास्तविकता में गौण रहते हैं।

हालाँकि, मुझे नहीं लगता कि ऐसा है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयानों से साफ़ है कि वास्तविक धरातल पर भी इस मुद्दे ने जगह बनाई है- यूपी में भी और राज्य से बाहर भी। भाजपा से जुड़े कई लोगों ने कमलेश तिवारी के परिजनों की मदद के लिए अभियान चला रखा है। उनके परिवार के लिए फण्ड जुटाने और उन्हें न्याय दिलाने सहित कई सारे अभियान चल रहे हैं।

लेकिन फिर भी काफ़ी सारे लोग ऐसे हैं जो मानते हैं कि सचमुच वास्तविकता में भाजपा नेताओं ने कमलेश तिवारी की हत्या के बाद कुछ नहीं किया। भाजपा और सरकार का इस तरफ़ ध्यान दिलाने, उन्हें इस मुद्दे की गंभीरता से अवगत कराने का एकमात्र माध्यम है उन्हें इस बात का एहसास दिलाना कि ऐसे मुद्दों का वास्तविकता में, ज़मीनी स्तर पर भी बहुत असर होता है। स्थानीय स्तर पर क्या हम हर एक क्षेत्र में किसी एक ऐसे व्यक्ति को चुन सकते हैं जो हमारा प्रतिनिधित्व करे और इन मुद्दों पर भाजपा के सामने सीना ठोक कर खड़े होकर उन्हें हमारी संगठनात्मक ताक़त से अवगत कराए?

दिल्ली में चुनाव आने वाले हैं। चाँदनी चौक विधानसभा क्षेत्र, जहाँ हौज़ काजी में मंदिर में तोड़फोड़ मचाई गई और प्रतिमाएँ विखंडित की गईं- वहाँ हम एक ऐसा उम्मीदवार उतार सकते हैं जो इन मुद्दों पर हमारा प्रतिनिधित्व करे? इससे हम ख़ुद को साबित कर पाएँगे। इसके बाद या तो भाजपा हमारी बात सुनने को मजबूर हो जाएगी या फिर हम उस दिशा में चल निकलेंगे, जहाँ हमें और भी काफ़ी कुछ करने की ज़रूरत है।

आप मेरे इस सुझाव को किसी व्यक्तिगत चुनौती की तरह मत लीजिए क्योंकि मैं भी आपकी तरह, एक आम हिन्दू की तरह आक्रोशित हूँ। लेकिन हाँ, मैं चाहता हूँ कि इस गुस्से का कुछ सकारात्मक नतीजा निकले जिससे हम हिन्दुओं को फायदा हो। मैं समाधान की दिशा में प्रयास करना चाहता हूँ, समस्या की जड़ तक पहुँच कर उसे खोदने के तरीकों पर विचार-विमर्श करता हूँ। मेरे इन प्रयासों का ही नतीजा है कि आप ऑपइंडिया से रूबरू हैं। ये भी मेरी उन्हीं कोशिशों का एक हिस्सा है।

288 में 243: महाराष्ट्र चुनाव के सारे Exit Polls में देवेंद्र और नरेंद्र का करिश्मा, पवार-कॉन्ग्रेस होंगे साफ़

महाराष्ट्र में आज विधासनभा चुनाव संपन्न होने के साथ ही मीडिया संस्थानों और सर्वेज एजेंसियों ने अपना-अपना एग्जिट पोल जारी कर दिया है। महाराष्ट्र में 55.3% वोटिंग की ख़बर है। शाहरुख़ ख़ान, मोहन भागवत, सचिन तेंदुलकर और नितिन गडकरी सहित अलग-अलग क्षेत्रों के कई बड़ी हस्तियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जहाँ भाजपा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ रही है, वहीं पार्टी का शिवसेना से गठबंधन होने के बाद उसे और मजबूती मिली है। वहीं दूसरी तरफ एनसीपी है, जहाँ शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेता ईडी के रडार पर हैं। एनसीपी के साथ कॉन्ग्रेस का गठबंधन है।

ताज़ा एग्जिट पोल्स की बात करें तो टीवी-9 भारतवर्ष के एग्जिट पोल में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 197 सीटें मिलती दिख रही हैं। साथ ही 52% वोट शेयर मिलता दिखाया गया है। इससे साफ़ हो जाता है कि 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन प्रचंड बहुमत की ओर है। अगर टीवी-9 के एग्जिट पोल की मानें तो कॉन्ग्रेस सिर्फ़ 40 सीटों पर सिमट जाएगी और एनसीपी को मात्र 35 सीटें ही मिलेंगी। दोनों पार्टियों का वोट शेयर क्रमशः 17% और 16% रहेगा। अर्थात, देवेंद्र फडणवीस का करिश्मा और ज्यादा बढ़ा ही है।

उधर न्यूज़ 18 बात करें तो भाजपा और शिवसेना का गठबंधन और भी प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ता दिख रहा है और कॉन्ग्रेस-एनसीपी का एक तरह से सफाया हो जाएगा। इसमें भाजपा को 141 सीटें दी गई हैं वहीं शिवसेना 102 सीटें जीतती दिख रही हैं। इस हिसाब से राजग गठबंधन को 288 सदस्यीय विधानसभा में 243 सीटें मिलती दिख रही हैं। कुल मिला कर देखें तो सभी एग्जिट पोल में भाजपा-शिवसेना की प्रचंड बहुमत से सरकार बनती दिख रही है। महाराष्ट्र में एक बार फिर से कमल खिलने जा रहा है, ऐसा एग्जिट पोल्स का कहना है।

वहीं अगर एबीपी न्यूज़ के एग्जिट पोल की बात करें तो भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 204 सीट मिलती दिख रही हैं। यहाँ कॉन्ग्रेस-एनसीपी को सिर्फ़ 69 सीटें दी गई हैं। रिपब्लिक टीवी के एग्जिट पोल में भाजपा को जहाँ 135-142 सीटें मिल रही हैं, वहीं शिवसेना को 81-88 सीटें मिलती दिख रही हैं। रिपब्लिक टीवी के एग्जिट पोल में भी कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन महज 50-59 सीटों पर सिमट रहा है। अन्य एग्जिट पोल्स में भी महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस का ही सिक्का चलता दिख रहा है।

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना साथ-साथ गठबंधन बना कर लड़ रहे हैं। दोनों दलों ने इसे हिंदुत्व से जुड़ा गठबंधन ‘महायुति’ करार दिया था। शिवसेना को इस गठबंधन में 124 सीटें दी गई थीं, वहीं 14 सीटें अन्य छोटी पार्टियों को दी गई थीं। बाकी सीटों पर भाजपा ने अपने उम्मीदवार उतारे।

भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद अमेरिका के पास पहुँचा घबराया Pak, कहा- भारत को रोक लो

भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तानी आतंकी कैम्पों को तबाह किए जाने के बाद घबराए पाकिस्तान ने अमेरिका से गुहार लगाई है। भारतीय सेना की कार्रवाई में लगभग 10 आतंकी और इतनी ही संख्या में पाकिस्तानी फौजी भी मारे गए। कई आतंकी कैम्पों को तबाह कर दिया गया। घबराया पाकिस्तान अब सीधा अमेरिका के पास जा पहुँचा है। पाकिस्तान ने अमेरिका से गुहार लगाई है कि वो भारत को किसी भी तरह रोके। दरअसल, यह सब शुरू हुआ था पाकिस्तानी फ़ौज की फायरिंग से। उन्होंने फायरिंग इसीलिए शुरू की ताकि सरहद पार से आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराई जा सके।

लेकिन, पाकिस्तान को अंदाज़ा नहीं था कि भारत इस फायरिंग का ऐसा जवाब देगा कि पाकिस्तानी फ़ौज फिर से ऐसी हिमाकत करने से पहले कई बार सोचेगी। पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा है कि भारत दक्षिण एशिया को एक खतरनाक युद्ध की ओर ढकेल रहा है। आतंकियों की घुसपैठ कराने में नाकाम साबित हुए पाकिस्तान ने अपनी बौखलाहट जाहिर करते हुए अमेरिका से गुहार लगाई है कि कुछ भी कर के भारत को रोका जाए। पाकिस्तानी मीडिया में भी ख़बरें आई हैं कि पाकिस्तान अमेरिका के पास पहुँचा है।

सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने कहा कि लगभग 6 से 10 पाकिस्तानी आतंकियों के मारे जाने की सूचना है और इतनी ही संख्या में पाकिस्तानी फौजी भी मारे गए हैं। जनरल रावत ने बताया कि मारे गए आतंकियों की संख्या और अधिक भी हो सकती है, जिस सम्बन्ध में सूचना मिलते ही जानकारी साझा की जाएगी। जनरल रावत ने बताया कि 3 आतंकी कैम्पों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है, वहीं 1 अन्य आतंकी कैम्प को ख़ासा नुकसान पहुँचा है। उन्होंने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसका रवैया यही रहा तो भारतीय सेना आगे भी इस तरह की कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। जनरल रावत ने बताया कि जब भी ऐसी कुछ कार्रवाई होती है तो राजनीतिक नेतृत्व को इससे अवगत कराया जाता है।

अब पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा है कि इससे पहले कि हालात काबू से बाहर हो जाएँ और काफ़ी देर हो जाए, भारत को रोका जाए। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत उसे लगातार उकसा रहा है और साथ ही दावा किया कि वह किसी भी हालत में नहीं झुकेगा। पाकिस्तान कई देशों के राजनयिकों को भी उस जगह का दौरा कराने वाला है, जहाँ भारतीय सेना ने आतंकी कैम्पों को तबाह किया। पाकिस्तान मारे गए आतंकियों को आम नागरिक बता कर पेश कर रहा है।

‘इमरान खान नहीं पूरा कर पाएँगे अपना कार्यकाल, तंग आ गए हैं पाकिस्तानी इस कठपुतली सरकार से’

पाकिस्तान में छपे डॉन अखबर के मुताबिक विपक्ष के नेता बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान के कार्यकाल के सम्बन्ध में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए घटक दलों के सरकार चला रही पार्टी से भी नाखुश होने के भी संकेत दिए।

बता दें कि रविवार को पाकिस्तान के विपक्षी नेता और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने जिन्ना स्नातकोत्तर चिकित्सा केंद्र का दौरा किया था उस दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए भुट्टो ने कहा था कि संघीय सरकार देश को सही दिशा में ले जाने के लिए सक्षम होती है।

डॉन अख़बार की खबर के मुताबिक बिलावल ने कहा कि देश को चलाने के लिए संघीय सरकार को सर्वोत्तम व्यवस्था बताया है। उन्होंने विस्तार से बात करते हुए बताया कि कैसे इमरान की तहरीक ए इंसाफ की सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। राजनीतिक दलों और जनता के नाखुश रवैये पर प्रकाश डालते हुए भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान में यहाँ-वहाँ सभी जगह प्रदर्शन ही प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति सरकार से किसी न किसी रूप में परेशान है, प्रताड़ित किया जा रहा है और पूर्णतः सरकार से नाराज़ है। बिलावल ने कहा कि हम कठपुतली सरकार से परेशान आ चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बिलावल के हवाले से कहा गया है, “प्रत्येक राजनीतिक दल और व्यापारी, शिक्षक, डॉक्टर तथा मजदूर सहित सभी तबकों के लोग, सरकार की नीतियों से नाखुश हैं। इससे मुझे लगता है कि इमरान खान अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएँगे।”

बता दें कि इमरान खान ने 17 अगस्त 2018 को पाकिस्तान के 22वें प्रधानमन्त्री के रूप में शपथ ली थी। 176 वोटों के साथ उन्होंने इस पद पर अपनी दावेदारी को जीत में तब्दील किया था मगर अब विपक्ष के बयान, जनता की हाय-हाय और सरकार में साथ दे रहे दलों से बढ़ते अविश्वास के बीच इमरान खान को अपनी सत्ता की कुर्सी हिलती दिख रही है। यही वजह हो कि पीओके से लेकर भारत के सम्बन्ध में इमरान आजकल खूब ऊट-पटांग बोल रहे हैं।

आकाश मिसाइल से होगी चीन-पाकिस्तान सीमा की रखवाली, 10000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव

चीन और पाकिस्तान के पर्वतीय क्षेत्रों के जरिए भारत में होने वाली किसी भी तरह के अतिक्रमण को रोकने के लिए रक्षा मंत्रालय आकाश प्राइम मिसाइल की दो रेजीमेंट का अधिग्रहण करने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हो गया है। इन मिसाइलों को 15,000 फीट की ऊँचाई पर तैनात किया जाएगा। नई आकाश मिसाइलों की परफॉर्मेंस पूर्ववर्ती मिसाइलों की तुलना में बेहतर होगी। इन्हें ऊंचे स्थानों जैसे कि लद्दाख पर तैनात किया जाएगा क्योंकि इसकी सीमा पाकिस्तान और चीन दोनों से लगती हैं।

न्यूज़ एजेंसी ANI ने एक सरकारी सूत्र के हवाले से लिखा,

“रक्षा मंत्रालय सेना के 10,000 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हो गई है जिसके तहत आकाश प्राइम या बेहतर प्रदर्शन वाली आकाश मिसाइल की दो रेजीमेंट का अधिग्रहण किया जाएगा। आकाश प्राइम मिसाइल सेना के पास मौजूद मिसाइल सिस्टम का अपग्रेडिड वर्जन होगी।”

सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लद्दाख से वापस आने पर सोमवार को रक्षा अधिग्रहण परिषद की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। रक्षा मंत्री पूर्वी लद्दाख में दुरबुक और दौलत बेग ओल्डी के बीच बने कर्नल चेवांग रिंचेन पुल का उद्घाटन करेंगे। आकाश मिसाइल का निर्माण भारत में रक्षा अनुसंधान विकास परिषद (DRDO) ने किया था और रक्षा बलों ने इसे काफी सफल माना है।

ग़ौरतलब है कि सेना के पास पहले से ही आकाश मिसाइल की दो रेजीमेंट हैं और वह दो अन्य चाहता है जिन्हें कि पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात किया जा सके। सेना को मिसाइल सिस्टम की सर्विस को लेकर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इसका उत्पादन दो कंपनियाँ- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनामिक्स लिमिटेड करती हैं। इसके बावजूद वह मिसाइल की परफॉर्मेंस से काफी ख़ुश है।

पहले आकाश मिसाइल की दो रेजीमेंट के ऑर्डर को विदेशी विक्रेताओं को दिया जाना था लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने रक्षा में ‘मेक इन इंडिया’ के पक्ष में फ़ैसला किया। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति ने वायुसेना के लिए सतह से हवा में मिसाइल के सात स्क्वाड्रन ख़रीदने की परियोजना को मंज़ूरी दी थी।

पुरानी जगह पर ही बनेगा संत रविदास मंदिर, सुप्रीम कोर्ट ने दी केंद्र के प्रस्ताव को मंजूरी

संत रविदास का मंदिर तुगलकाबाद में उसी जगह बनेगा जहाँ पर वह पहले था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) को अपनी मुहर लगा दी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसमें उसी जगह पर मंदिर बनाने के लिए जमीन देने की बात कही गई है। 

बता दें कि कुछ महीने पहले ही प्रशासन ने दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित संत रविदास के मंदिर को गिरा दिया था। इसे लेकर जमकर बवाल भी हुआ और बाद में इस फैसले के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। अब केंद्र सरकार द्वारा इस मंदिर के निर्माण के लिए 400 गज जमीन दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ संत रविदास मंदिर की 400 वर्गगज जमीन सरकार की ओर से बनाई जाने वाली समिति को सौंपने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यहाँ कोई भी व्यापारिक गतिविधि स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मंदिर के मैनेजमेंट के लिए एक समिति का गठन करें। कोर्ट ने केंद्र सरकार को छ: सप्ताह के भीतर मंदिर निर्माण की देख-रेख के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समिति के सदस्य के तौर पर पूर्व सदस्य और अन्य केंद्र सरकार को आवेदन दे सकते हैं।

बता दें कि पहले केंद्र ने 200 स्कॉयर मीटर जगह देने की बात कही थी, जिस पर सहमति नहीं बन पाई थी। गौरतलब है कि यह मंदिर दक्षिण दिल्ली में स्थित है, जिसको हटाने पर दिल्ली-एनसीआर में काफी विरोध हुआ था। तब दलितों द्वारा जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन भी किया गया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि मंदिर ध्वस्त करने पर जिन्होंने प्रदर्शन किया था उन सभी को निजी मुचलके पर छोड़ दिया जाए।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: नागपुर से एक और संदिग्ध आरोपित सैयद आसिम अली गिरफ़्तार

हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष और हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस को एक और बड़ी क़ामयाबी मिली है। नागपुर एटीसी ने एक संदिग्ध को गिरफ़्तार किया है। पकड़े गए आरोपित की पहचान सैय्यद आसिम अली के रूप में हुई। पुलिस का कहना है कि सैय्यद दूसरे हत्यारों के साथ लगातार सम्पर्क में था। पुलिस ने यह भी बताया कि कमलेश तिवारी की हत्या में पकड़े गए सैय्यद अली की मुख्य भूमिका थी।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने आज आरोपित को नागपुर कोर्ट में पेश किया और उसकी ट्रांजिट रिमांड हासिल की। 

इससे पहले यह पता चला था कि इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले संदिग्ध हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन की लोकेशन लगातार चेंज हो रही है। रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को पुलिस को पता चला कि उनकी लोकेशन अम्‍बाला में है। इसके बाद पुलिस को उनकी तलाश में लगाया गया। रात होते-होते उनके शाहजहाँपुर में होने की ख़बर मिली। शाहजहाँपुर रेलवे स्‍टेशन के पास एक होटल के सीसीटीवी में आरोपितों को देखा गया।

जब तक पुलिस शाहजहाँपुर में आरोपितों को लोकेट कर पाती, उनकी लोकेशन फिर बदल गई। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपित अपने फोन की बजाय राहगीरों से मोबाइल माँगकर इस्‍तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों की तलाश में यूपी के शाहजहॉंपुर में मुसाफिरखानों और मदरसों पर छापेमारी की है। ये आरोपित शाहजहाँपुर में रुके थे लेकिन एसटीएफ के पहुँचने के भनक मिलते ही लापता हो गए। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने दोनों पर ढाई-ढाई लाख रुपए के ईनाम का ऐलान किया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में संदिग्ध हत्यारों के नेपाल भाग जाने की भी आशंका जताई गई है।

गौरतलब है कि कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में ख़ुलासा हुआ कि कमलेश तिवारी की नृशंस हत्‍या को मौलाना मोहसिन ने शरियत कानून के कत्‍ल-ए-वाजिब के सिद्धांत के तहत जायज़ ठहराया था। उसने राशिद के भाई  मोईनुद्दीन और अशफाक को इसके लिए तैयार किया। इस मामले में राशिद की माँ और अशफ़ाक की बीबी से भी पूछताछ की गई।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ने खुलकर की सावरकर की तारीफ, PM मोदी की प्रशंसा से भी नहीं चूके

महाराष्ट्र चुनाव के मद्देनजर जब से भाजपा द्वारा अपने घोषणा पत्र में कहा गया है कि वे दोबारा सत्ता आने पर वीर सावरकर का नाम भारत रत्न के लिए भेजेंगे, तब से राजनैतिक गलियारों में उनपर बहस छिड़ गई है। विपक्ष तरह-तरह के तर्क पेश करके भाजपा के इस वादे को गैर जरूरी ठहराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इसी बीच कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने वीर सावरकर की तारीफ कर दी है।

अभिषेक मनु सिंघवी ट्वीट कर स्वीकार किया कि सावरकर ने न केवल आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी बल्कि वे देश के लिए जेल भी गए थे।

उन्होंने लिखा, “निजी तौर पर मैं सावरकर की विचारधारा से सहमत नहीं हूँ। लेकिन इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वे एक काबिल व्यक्ति थे जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों के अधिकार की लड़ाई लड़ी और देश के लिए जेल गए।”

इसके बाद सिंघवी ने स्वच्छता अभियान के प्रसार के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई कोशिशों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा, “जहाँ हकदार हों, वहाँ प्रशंसा की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाँधी जी के स्वच्छता के संदेशों को प्रसारित करने के लिए बॉलीवुड की मदद ली। इससे अधिकतर लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर जाएगा।”

वहीं, सावरकर के मुद्दे पर बता दें कि कुछ दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी साफ बोल चुके हैं कि कॉन्ग्रेस ने इंदिरा गाँधी के प्रधानमंत्री रहते हुए सावरकर की याद में डाक टिकेट जारी की थी। इस दौरान उन्होंने साफ किया था कि वे सावरकर के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन उनकी विचारधारा के ख़िलाफ़ हैं। इसके अलावा इस सियासी बहस में एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें खुद पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी ने सावरकर की तारीफ की थी।

Pok में भारत की कार्रवाई के बाद इमरान खान सरकार मुश्किल में, 27 को 10 लाख लोग करेंगे घेराव

भारत द्वारा Pok में पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद इमरान सरकार को उनके मुल्क में विपक्ष द्वारा दोबारा बड़े पैमाने पर घेरे जाने की आशंका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 27 अक्टूबर को विपक्षी दल 10 लाख लोगों के साथ इस्लामाबाद में इमरान सरकार का घेराव करने वाले हैं। कहा जा रहा है कि अगर इमरान के ख़िलाफ़ विपक्ष इस बड़ी संख्या में घेराबंदी करता है तो ये इमरान के ख़िलाफ़ अब तक का सबसे बड़ा विरोध होगा।

इस विरोध में नवाज शरीफ की पीएमएल एन, जरदारी की पीपीपी और मौलाना फजलू रहमान की जमीयत उलेमा इस्लाम जैसे दल शामिल हो सकते हैं। जिनका मानना है कि इमरान ने खुफिया तंत्र की मदद से वोट चुराए और सरकार बनाने में कामयाब रहे।

दैनिक भास्कर और न्यूज 18 में प्रकाशित खबरों के अनुसार इस बात की जानकारी पाक प्रशासन के विश्वस्त सूत्रों ने उनका नाम न छापने की शर्त पर दी है। इन सूत्रों ने बताया है कि इमरान सरकार और उनका मंत्रिमंडल 27 तारीख को होने वाले इस प्रदर्शन से काफी डरे हुए हैं। इसके कारण वह विपक्ष के नेताओं को मनाने का भी प्रयास कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक बता दें कि खैबर पख्तूनख्वाह के सूचना और प्रसारण मंत्री शौकत युसूफजई ने इस जुलूस में शामिल होने वाली पार्टियों और कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इमरान के ख़िलाफ इस जुलूस में शामिल होने वाले सब लोग भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। इसलिए विपक्ष को तत्काल मार्च रोक देना चाहिए, क्योंकि सीमा पर दुश्मन हावी है।

उल्लेखनीय है कि रविवार को भारतीय जवानों की कार्रवाई के बाद PoK में चल रहे तीन आतंकी कैंपों को आर्टिलरी गन से तबाह किया गया। जिसमें पाक के लगभग 10 सैनिक मारे गए, जबकि कई आतंकियों के भी इसमें मारे जाने की खबर हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि अगर पाकिस्तान आगे अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो सेना आगे भी उनको जवाब देने से नहीं चुकेंगीं।