Home Blog Page 5395

‘बीजेपी सीएम की कुर्सी तो देगी नहीं, 5 साल के लिए बेटे को डिप्टी सीएम बनवा लें उद्धव ठाकरे’

महाराष्ट्र में भाजपा से 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी मॉंग रही शिवसेना को रामदास रामदास आठवले ने खरी-खरी सुनाई है। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के प्रमुख अठावले ने कहा है कि ​​भाजपा मुख्यमंत्री का पद अपने सहयोगी को देगी नहीं, इसलिए शिवसेना को डिप्टी सीएम का पद स्वीकार लेना चाहिए। आरपीआई एनडीए का घटक है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है। हालॉंकि अपने दम पर वह बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। नतीजों के बाद से ही उसकी सहयोगी शिवसेना 2.5 साल के लिए सीएम पद मॉंग रही है। वह इस मसले पर बकायदा लिखित आश्वासन चाहती है।

आठवले ने कहा, “बीजेपी रोटेशन आधारित सीएम पद के लिए सहमत नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिया जा सकता है। आदित्य ठाकरे के लिए उपमुख्यमंत्री पद पर शिवसेना को मान जाना चाहिए। फडणवीस मुख्यमंत्री का पद सँभाले।”

आठवले ने कहा कि उनका कहना यह है कि भाजपा और शिवसेना को साथ आना चाहिए, क्योंकि जनता का जनादेश उनके साथ है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि निश्चित रूप से एनडीए (NDA) को उतनी सीटें नहीं मिलीं, जितनी अपेक्षित थीं, लेकिन फिर भी बहुमत है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर निश्चित रूप से भाजपा का दावा बनता है। आठवले ने कहा कि वह दोनों पार्टियों से बात करेंगे और बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने के लिए कहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले चार-पाँच दिनों में दोनों पार्टी उचित निर्णय पर पहुँच जाएगी।

इस बीच, बरसी निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय विधायक राजेंद्र राउत ने फडणवीस से मुलाकात की और भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन दिया। बीजेपी की बागी विधायक गीता जैन ने भी फडणवीस को अपना समर्थन दिया है। बता दें कि गीता ने ठाणे में भयंदर निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार नरेंद्र मेहता के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।

इसके साथ ही युवा स्वाभिमान पार्टी ने भी फडणवीस को खत लिखकर अपना समर्थन देने की बात कही है। रवि राणा अमरावती के बडनेरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इस चुनाव में उन्होंने शिवसेना के प्रीति संजय को 15 हजार से अधिक वोटों से हराया है।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत है। 288 सीटों पर हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी की 105 और शिवसेना 56 सीटें आई हैं, जबकि कॉन्ग्रेस ने 44 और एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत दर्ज की।

हिन्दू परिवार को दिवाली मनाने से रोका: प्रताड़ित किया, घर की लाइट्स तोड़ीं, FIR दर्ज

एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म उद्योग से जुड़े मुंबई के मलाड पश्चिम के रहने वाले विश्व भानू ने फेसबुक पर अपने पड़ोसियों, जो कि दूसरे मजहब से हैं, की असहिष्णुता के बारे में लिखा। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि दिवाली के मौक़े पर सोसायटी के लोग उन्हें और उनकी पत्नी को घर में दीये जलाकर रोशनी करने और रंगोली बनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। भानू ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी सोसायटी के लोगों ने न सिर्फ उनके घर की लाइट्स को नष्ट किया बल्कि बाक़ी लगी लाइट्स को हटाने के लिए मजबूर भी किया।

इस मामले में मालवानी पुलिस स्टेशन में एक शिक़ायत दर्ज की गई है जिसे OpIndia.com द्वारा एक्सेस किया गया है।

विश्व भानु द्वारा दर्ज कराई गई शिक़ायत

OpIndia.com ने भानु से संपर्क किया और मामले की पूरी जानकारी जुटाई। भानु ने OpIndia.com को बताया कि वह मलाड पश्चिम की सोसायटी में रहते हैं, जो मालवानी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। जिस सोसायटी में वो रहते हैं वो कथित अल्पसंख्यक बहुल इलाका है वहाँ सिर्फ़ उसी का एकमात्र हिन्दू परिवार रहता है।

कट्टरपंथियों के अत्याचार का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब भानु की पत्नी दिवाली के त्योहार पर घर सजाने के लिए नई लाइट्स ख़रीद कर लाईं। लेकिन जैसे ही उन्होंने घर सजाने के लिए लाइट्स लगाईं, वैसे ही इलाक़े के कट्टरपंथी उसी जगह पर आ गए और जलती हुई इलेक्ट्रिक लाइट्स हटा दीं। भानु की पत्नी ने दावा किया कि जिस समय लाइट्स हटाई गईं उस समय वहाँ आसपास कुछ बच्चे भी खेल रहे थे, उन्हें करंट लग सकता था।

मजहबी भीड़ लाइट्स को हटाने के लिए आगे बढ़ी और तारों को खोल दिया। ऐसा करते समय लोगों को करंट भी लग सकता था। इस दौरान महिलाओं और बच्चों ने भी भानु के परिवार को प्रताड़ित किया, उन्हें तरह-तरह के ताने और अभद्र अपशब्द भी कहे। आक्रामक हुई भीड़ ने दावा किया कि हिन्दू हर चीज में मूत्र मिलाते हैं और उनके स्थान पर भोजन नहीं करना चाहिए। हिन्दू दंपत्ति को इस मामलों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें मजबूर किया गया कि वो अपने घर से लाइट्स को हटाएँ।


विश्व भानु द्वारा दर्ज कराई गई शिक़ायत

अपनी शिक़ायत में, विश्व भानु ने लिखा:

“हर साल की तरह, मेरी पत्नी प्रियंका शर्मा को मोमबत्ती जलाने और दिवाली पर अपनी रंगोली बनाने से रोका गया है। असामाजिक तत्व जो सोसायटी में रहते हैं, जहाँ रेहान पेटीवाला, सलीम और मुस्तफा ने लाइट्स तोड़ दीं। हर साल वे ऐसा करते हैं और यहाँ तक कि हमारे भगवान और देवी-देवताओं का भी मजाक उड़ाते हैं। बकरा ईद पर, वे हमें अपना दरवाज़ा खुला रखने के लिए मजबूर करते हैं और वे हमारे घर के सामने बकरियों का वध करते हैं जबकि वो यह काम कहीं और भी जाकर कर सकते हैं। लेकिन, मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्योंकि यह उनका त्योहार है। क्योंकि हम हिन्दू हैं, हमारा मज़ाक उड़ाया जाता है, दबाव डाला जाता है और ऐसी स्थिति बनाई जाती है कि हम जल्द ही इस क्षेत्र को छोड़ दें। छोटी-छोटी बातों के लिए, वे हमसे लड़ने आते हैं। मैं ज़्यादातर शूटिंग के लिए घर से बाहर रहता हूँ, लेकिन मैं अपनी पत्नी को लेकर काफ़ी चिंतित हूँ।”

इसी तरह की घटना का सामना उन्होंने पिछले साल भी किया था। उन्होंने एक रंगोली बनाई थी और उसे आस-पड़ोस के लोगों ने अपने पैरों से ख़राब कर दिया था। भानु ने बताया कि सिर्फ़ दिवाली ही नहीं बल्कि होली के दौरान भी वे त्योहार को ठीक से नहीं मना सकते। यही हाल दशहरा और शिवरात्रि का भी है। भानु ने ऑपइंडिया को बताया कि वे हमेशा ईद जैसे त्योहारों के दौरान अपने पड़ोसियों के साथ समझौता करते हैं, लेकिन वो हिन्दू त्योहारों के दौरान कभी अच्छा व्यवहार नहीं करते।

अपडेट: ऑपइंडिया ने मुंबई पुलिस से संपर्क साधने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद हमने फिर से विश्व भानू से संपर्क कर यह जानना चाहा कि इस मामले में पुलिस ने अब तक क्या किया है। भानू ने बताया कि पुलिस आई तो जरूर थी लेकिन पूरे घटनाक्रम को उन्होंने अपनी ओर से झूठलाने की कोशिश की। फोन पर बात करते समय भानू पुलिस स्टेशन में ही थे लेकिन आश्चर्यजनक बात यह रही कि वहाँ भी घटनाक्रम से संबंधित आरोपित पड़ोसी आकर उन्हें धमकी दे रहा था कि वो भविष्य में उनका अहित करेगा।

पुलिस स्टेशन में भानू, आरोपित और बिल्डिंग का सेक्रटरी मौजूद था। बिल्डिंग के सेक्रटरी ने भी घटना को दबाने की कोशिश की। उसका कहना था कि यह दो पड़ोसियों में बहस के कारण हुआ। सेक्रटरी ने बताया कि आरोपित का कहना था कि दिवाली में लगने वाले लाइट से इलेक्ट्रिक शॉक लगने के डर के कारण उसे लगाने से मना किया गया था। भानू ने बताया कि बिल्डिंग सेक्रटरी भला इंसान है और वह सांप्रदायिक तनाव को कम करने के लिए मामले को शांत करना चाह रहा था। भानू ने यह भी बताया कि उस पर फेसबुक पोस्ट डिलीट करने का भी दबाव बनाया जा रहा है। फोन के आखिरी में भानू ने आशंका जाहिर की कि वो शायद डर के कारण फेसबुक पोस्ट डिलीट भी कर देगा और वह व्यक्तिगत मजबूरी में उस बिल्डिंग में रहने को मजबूर है।


अयोध्या मामले पर दो धड़ों में बँटी कॉन्ग्रेस: वरिष्ठ नेताओं ने कहा- हमारी इच्छा है कि अयोध्या में राम मंदिर बने

अयोध्या विवाद पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाला है। कॉन्ग्रेस के नेता अभी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और संभलकर बयान दे रहे हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा के राजनीति विचारों और सिद्धांतों से सुर मिलाना शुरू कर दिया है। 

कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि अयोध्या में राम मंदिर बने। उन्होंने कहा कि वे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होते देखना चाहते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही सर्वोपरि है और वह सब के लिए मान्य होगा।

दिलचस्प बात यह है कि शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को दिल्ली में पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की बैठक हुई थी। बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि एनआरसी, अनुच्छेद 370 और अयोध्या रामजन्म भूमि मसले पर पार्टी की राय एकमत हो। लेकिन लगता है कि पार्टी नेता अब कॉन्ग्रेस के पॉलिटिकल लाइन से अलग जा कर निजी विचारों को प्राथमिकता देने का फैसला कर बैठे हैं।

हालाँकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब नेताओं के विचार अपनी ही पार्टी के मूल विचारों से इतर हो। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस नेता व असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने अयोध्या विवाद को लेकर अलग सुर में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि इसमें कोई संशय नहीं कि अयोध्या विवाद का मामला वाकई बहुत संवेदनशील है जिस पर किसी भी फैसले पर पहुँचने से पहले एक स्वस्थ बातचीत की जरूरत है।

कॉन्ग्रेस के बदले तेवर लोकसभा चुनाव के बाद से ही लगातार देखे जा रहे हैं। पार्टी अनुच्छेद 370 को और एनआरसी जैसे विषयों को लेकर यू टर्न लेने से भी नहीं चुकी है। अब अयोध्या मामले पर पार्टी के नेताओं के सुर बदले-बदले दिखाई दे रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता जतिन प्रसाद ने द संडे एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि एक हिंदू होने के नाते, वह चाहते हैं कि वहाँ मंदिर बने। लेकिन उस भूमि पर कोई भी फैसला तो कानूनी तौर पर ही निकलेगा। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह सभी के लिए मान्य होगा। इस पर फैसला जितनी जल्दी संभव हो सके, आ जाए ताकि सभी वाद-विवाद और बातों पर विराम लग जाए। उन्होंने कहा कि यह समय है कि सभी समुदाय एक साथ शांति से रहें।

वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी जितिन प्रसाद के बयान से इतेफाक रखते हुए सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का पक्ष बिल्कुल साफ है। यह एक भूमि विवाद से जुड़ा मसला है और इस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही अंतिम फैसला मानना होगा। इस पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खड़ी रहे। 

मगर जब उनसे उनके निजी विचार के बारे में पूछा गया तो रावत ने कहा कि सभी भारतीय चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप किसी मुस्लिम भाई से भी पूछेंगे तो वह भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर कहेगा कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहाँ बनेगा?

बगदादी पर अमेरिकी हमले का वीडियो आया सामने: जमीन में बड़ा गड्ढा, खून से सने मांस के चीथड़े…

इराकी स्टेट टीवी ने एक फुटेज जारी किया है जिसमे दावा किया जा रहा है कि इस्लाममिक स्टेट के सरगना अबू-बकर-अल बगदादी को अमेरिका ने मार गिराया है। बता दें कि आज सुबह ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प ने अपने ट्वीट के ज़रिए कहा था कि आज कुछ बड़ा होने वाला है। इसके बाद समाचार एजेंसियों के हवाले से खबर आई थी कि आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के सरगना बगदादी पर अमेरिका ने कार्रवाई की है। बता दें कि आतंकवाद से निपटने के लिए अमेरिका लम्बे समय से कार्रवाई करता आ रहा है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय भी इस्लामिक आतंकवाद को रोकने के ड्रोन हमले तेज़ हुए थे।

ऐसी ही एक कार्रवाई को आज अमेरिका ने अंजाम दिया है जिसका प्रसारण इराक के एक सरकारी मीडिया ने किया। इस वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि खून से सने माँस के चीथड़े-कपड़े यहाँ वहाँ पड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी संगठन आईएस के सरगना बगदादी की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि यह फुटेज उसी जगह की है जहाँ अमेरिकी सेना ने रात में बम गिराए थे।

फगवाड़ा से नवनिर्वाचित कॉन्ग्रेस MLA के ख़िलाफ़ FIR दर्ज: आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन का मामला

आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में पंजाब के फगवाड़ा से नवनिर्वाचित विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। नवनिर्वाचित कॉन्ग्रेस विधायक के ख़िलाफ़ शिक़ायत चुनाव जीतने के दो दिन बाद सामने आई।

ख़बर के मुताबिक़, कॉन्ग्रेस विधायक धालीवाल ने कथित तौर पर पोलिंग बूथ 184 के अंदर अपनी गर्दन के चारों ओर पार्टी के प्रतीक के साथ एक दुपट्टा लपेटा हुआ था। यहीं पर उन्होंने वोट भी डाला था। नौकरशाह से राजनेता बने धालीवाल को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-130 (मतदान केंद्रों में या उसके निकट मतदान केंद्रों में निषेध) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े तेज़ी से वायरल हो रहा था। भाजपा प्रत्याशी राजेश बाघा की शिक़ायत के आधार पर चुनाव आयोग ने धालीवाल को नोटिस जारी किया और रिटर्निंग ऑफिसर को जाँच करने और रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया था।

अहमद द्वारा सौंपी गई जाँच रिपोर्ट के आधार पर, पुलिस ने अब धालीवाल के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है। फगवाड़ा के एसपी मनविंदर सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है।

हाल ही में हुए फगवाड़ा उपचुनाव में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार बलविंदर सिंह धालीवाल ने भाजपा प्रत्याशी बाघा को 26,116 मतों के अंतर से हराया था। मई में, होशियारपुर से विधायक सोम प्रकाश के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद यह सीट अब खाली हो गई।

हाल ही में संपन्न चार विधानसभा सीटों- पंजाब में दखा, फगवाड़ा, जलालाबाद और मुकेरियन में हुए उपचुनाव में, कॉन्ग्रेस ने तीन जबकि भाजपा ने दखा सीट जीती।

कॉन्ग्रेस मजबूर थी मजबूत नहीं, हम उनके खिलाफ जीतकर आएँ हैं: दिग्विजय चौटाला

हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर ने रविवार (अक्टूबर 27, 2019) हरियाणा के सीएम पद की दूसरी बार शपथ ली। वहीं जेजेपी के नेता दुष्यंत चौटाला ने राज्य के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान जननायक जनता पार्टी (JJP) के चीफ दुष्यंत चौटाला के भाई दिग्विजय चौटाला ने मीडिया से बात करते हुए कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कल तक वे (कॉन्ग्रेस) कह रही थी कि यह (BJP-JJP गठबंधन) लोगों के जनादेश के खिलाफ है। हम उनके खिलाफ भी जीतकर आए हैं। कॉन्ग्रेस संख्या नहीं जुटा सकी।” उन्होंने कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वो ‘मज़बूर थी मज़बूत नहीं।’

हरियाणा राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में दुष्यंत चौटाला अपने परिवार के साथ पहुँचे। रविवार सुबह तिहाड़ जेल से फरलो पर रिहा हुए दुष्यंत के पिता अजय चौटाला भी इस समारोह में हिस्सा लेने पहुँचे। इसके अलावा दुष्यंत की माँ नैना चौटाला, भाई दिग्विजय चौटाला ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया। राजभवन पहुँचने पर दुष्यंत ने यहाँ तमाम नेताओं से मुलाकात की, वहीं पंजाब के पूर्व सीएम और अकाली दल नेता प्रकाश सिंह बादल ने दुष्यंत को गले लगाकर अपना आशीर्वाद दिया। इसके बाद मंच पर पहुँचे दुष्यंत ने मनोहर लाल खट्टर और राज्यपाल का अभिवादन किया।

वहीं दुष्यंत के पिता अजय चौटाला ने कहा कि दुष्यंत ने सिर्फ 11 महीनों में संगठन की स्थापना की है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “एक पिता के लिए इससे बेहतर अवसर और क्या हो सकता है? कॉन्ग्रेस जो चाहे कह सकती है, लेकिन यह सरकार 5 साल तक चलेगी और हरियाणा के विकास के लिए काम करेगी। इससे बेहतर दिवाली नहीं हो सकती थी।”

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हरियाणा में सत्ता के कई बड़े चेहरे एक साथ राजभवन में दिखाई दिए। समारोह के दौरान राज्य के पूर्व सीएम भूपेंदर सिंह हुड्डा, बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, अकाली दल नेता प्रकाश सिंह बादल, पंजाब के पूर्व डेप्युटी सीएम सुखबीर सिंह बादल समेत कई बड़े राजनेता राजभवन में मौजूद रहे।

केरल में वामपंथी और मुस्लिम आपस में भिड़े: मलप्पुरम में हुई मुस्लिम लीग कार्यकर्ता की हत्या

केरल के मलप्पुरम ज़िले के तनूर में गुरुवार (24 अक्टूबर) की रात कम्युनिस्ट और मुस्लिमों के बीच झड़पें हुईं, एक मुस्लिम लीग पार्टी के कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। ख़बर के अनुसार, 36 वर्षीय एम इशाक़ नमाज़ के बाद एक स्थानीय मस्जिद से लौट रहा था, तभी उसका पीछा करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI-M) के हुड़दंगियों ने उस पर हमला कर दिया। इसके बाद इशाक़ को एक अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

मुस्लिम लीग ने CPI-M के एक वरिष्ठ नेता पी जयराजन को हत्या का दोषी ठहराते हुए उनके ख़िलाफ़ जाँच की माँग उठाई है। यहाँ यह बात ग़ौर करने वाली है कि जयराजन कई हत्या के मामलों में आरोपित हैं। उनके ख़िलाफ़ हत्या की जाँच की माँग उठाते हुए, मुस्लिम लीग ने मलप्पुरम में बंद का आह्वान किया था।

यह हिंसा क्षेत्रीय हैवीवेट CPI-M और मुस्लिम लीग के बीच चल रही अशांति का परिणाम था, जो भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का दूसरा सबसे बड़ा साझेदार है।

हत्या की यह घटना गुरुवार तड़के करीब 7:30 बजे की है। प्रारंभिक जाँच से पता चला है कि हमले में तलवार और चाकू का इस्तेमाल किया गया था। पार्टी ने माकपा के 4 कार्यकर्ताओं पर इशाक़ पर हमला करने और हत्या करने का आरोप लगाया है।

तनुर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने The News Minute को बताया, “हमने माकपा के 4 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। हम अभी भी मामले में अन्य विवरणों की जाँच कर रहे हैं।” जानकारी के अनुसार, मुस्लिम लीग के स्थानीय नेतृत्व ने आरोप लगाया है कि यह हमला बिना किसी उकसावे के हुआ और पुलिस की एक टीम जो उस समय बाहर डेरा डाले हुए थी, हमले को रोक नहीं सकी।

हालाँकि, हमले के बाद इशाक़ को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई और शव का पोस्टमार्टम कोझीकोड मेडिकल कॉलेज में अस्पताल में किया गया। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़, मलप्पुरम ज़िले की CPI (M) समिति ने इस हमले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है।

एक ने बेटी की ख़ातिर तो दूसरे ने पति के लिए लाँघी चौखट: स्वाति सिंह, किरण तिवारी जैसों से रोशन हौसले का दीया

जिस देश में आत्महत्या करने वाली महिलाओं में से करीब 37 फीसदी हालात से टूट कर मौत के गली लगती हों, उस समाज में स्वाति सिंह और किरण तिवारी जैसों का हौसला उम्मीद जगाता है। एक ने 12 साल की बेटी की सम्मान की ख़ातिर तो दूसरे ने पति को इंसाफ़ दिलाने के लिए घर की चौखट लॉंघी। मुसीबतों के पहाड़ से डरी नहींं, जबकि एक के सामने जाति की चादर ओढ़े प्रभावशाली राजनीतिक ​बिरादरी थी, तो दूसरे के सामने धर्म की खाल में लिपटे दरिंदे हैं।

18 अक्टूबर को कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या से पहले आपने शायद ही उनकी पत्नी किरण तिवारी का नाम सुना हो। उनके बारे में तब भी आपने सुना नहीं होगा जब कमलेश तिवारी सींखचों के पीछे धकेल दिए गए थे। यकीनन उस मुश्किल खड़ी में भी किरण परिवार को सॅंभालने में लगी रही होंगी। लेकिन, तक भी वे पारिवारिक दायरे से बाहर निकल पति के लिए सार्वजनिक तौर पर खड़ी नजर नहीं आईं। मुश्किलों से मोर्चा लेने का उन्होंने फैसला तब किया जब उन पर सबसे बड़ा पहाड़ टूटा। एक महिला के लिए पति की मौत से बड़ा दर्द भला क्या हो सकता है। और जिसके पति की इतने निर्मम तरीके से हत्या की जाए तो उसके मन-मस्तिष्क पर क्या चल रहा होगा, कल्पना से परे है।

दिवंगत पति की ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए पार्टी की कमान सँभाली

लेकिन, किरण टूटी नहीं। पहले पति के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए आगे आईं। फिर हत्या के हफ्ते भर बाद ही पति की जगह हिंदू समाज पार्टी की कमान सॅंभाल ली। किरण बखूबी जानती होंगी कि उनके पति की हत्या हिंदुत्ववादी तेवरों के कारण ही गई है। उनके खिलाफ जो लोग हैं उनमें यूपी का मंत्री रहा एक मुस्लिम नेता है, जिसके विवादित बयान की प्रतिक्रिया में कमलेश तिवारी ने विवादित टिप्पणी की थी।

विवादित टिप्पणी के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। वे मौलाना हैं जिन्होंने समुदाय विशेष के लोगों को कमलेश की हत्या के लिए उकसाया। उसकी हत्या को जायज ठ​हराया और फिर हत्यारों को छिपाने का भरसक प्रयास किया। उस धर्मांध पत्नी से है जो हत्यारे पति से कहती है कि अल्लाह तेरा भला करेगा। उस पिता से है जो हत्यारे बेटे से कहता है कि घर आ जा सब ठीक हो जाएगा। उन शांति दूतों से है जो कमलेश की हत्या के बाद सोशल मीडिया में हा हा कर रहे ​थे। यह ऐसा कॉकस है जिससे समुदाय विशेष के लोग धर्म के नाम पर जुड़े हैं, काफिरों के खिलाफ। ऐसे लोगों के खिलाफ खड़ा होना एक महि​ला और खासकर जिसके पति की इतने निर्मम तरीके से हत्या की गई हो, आसान नहीं होता।

12 साल की बेटी के सम्मान में चुनावी मैदान में उतरीं स्वाति सिंह

आसान तो स्वाति सिंह के लिए भी कुछ नहीं था। वह 2016 का साल था। स्वाति के पति बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर एक विवादित टिप्पणी की। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने थे। सो, दयाशंकर के बयान का मायावती ने राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की। उनके कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और दयाशंकर के परिवार की महिलाओं को सरेआम गाली दी गई।

स्वाति की 12 साल की बेटी के लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। ऐसे वक्त में जब दयाशंकर भूमिगत हो गए थे, घरेलू महिला रहीं स्वाति सिंह परिवार के लिए सामने आईं। पति का बचाव नहीं किया। कहा अपने पति और मायावती के लिए समान कार्रवाई चाहती हूॅं। उनके हौसले ने बसपा को बैकफुट पर धकेल दिया। मायावती को यहॉं तक कहना पड़ा कि वे अपने कार्यकर्ताओं की भाषा का समर्थन नहीं करतीं। अगले साल जब विधानसभा चुनाव हुए तो स्वाति के इस हौसले को जनता का समर्थन भी मिला। वे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई को हरा विधानसभा पहुॅंची। आज वे योगी कैबिनेट की सदस्य हैं।

असल में, स्वाति और किरण जैसी महिलाओं से ही महिला सशक्तिकरण का दीया रोशन होता है। इन गैर राजनीतिक महिलाओं का जज्बा हर उस महिला को हौसला देता है, जिन्हें मुसीबतें अकेला कर देती हैं। तोड़ने की हर कोशिश करती है। वरना विरासत के नाम पर तो यूपी में ही नहीं देश के हर हिस्से में आप अक्सर महि​लाओं को ऊपर चढ़ते देखते ही रहते हैं। यह दूसरी बात है कि उनके सफर को ही हमारे सामने महिला सशक्तिकरण का मुलम्मा चढ़ाकर पेश किया जाता है।

लगातार दूसरी बार हरियाणा के CM बने मनोहर लाल खट्टर: दुष्यंत चौटाला ने ली डिप्टी सीएम की शपथ

हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर ने रविवार (अक्टूबर 27, 2019) हरियाणा के सीएम पद की दूसरी बार शपथ ली। वहीं जेजेपी के नेता दुष्यंत चौटाला ने राज्य के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह चंडीगढ़ स्थित राजभवन में आयोजित किया गया। आज के शपथ ग्रहण में सिर्फ सीएम और डिप्टी सीएम ने ही शपथ ली है। हालाँकि, पहले कैबिनेट मंत्रियों के भी शपथ-ग्रहण की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गौरतलब है हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने शनिवार (अक्टूबर 26, 2019) को मनोहर लाल खट्टर को प्रदेश में अगली सरकार बनाने का न्यौता दिया था। जिसके बाद भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद खट्टर ने जजपा और सात निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ प्रदेश में सरकार गठन का दावा पेश किया था। खट्टर ने बताया कि 57 विधायकों, जिनमें भाजपा के 40, जजपा के 10 और सात निर्दलीय विधायक शामिल हैं, के समर्थन के साथ सरकार गठन के लिए राज्यपाल के समक्ष दावा पेश किया।

विधानसभा चुनाव में हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी 50 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं कॉन्ग्रेस ने 31, दुष्यंत चौटाला की जेजेपी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की है।

RBI ने सोने की बिक्री की ख़बर का किया खंडन: फर्जी साबित हुई ET और ‘मीडिया गिरोह’ की रिपोर्ट

हाल ही में, ऐसी ख़बरें सामने आई थीं कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लंबे समय में पहली बार अपने भंडार से सोना बेच रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक़, जुलाई की शुरुआत से RBI ने 5.1 बिलियन डॉलर का सोना ख़रीदा और करीब 1.15 बिलियन डॉलर येलो मेटल (सेना) की बिक्री हुई। हालाँकि, अपनी हेडलाइन को थोड़ा मोड़ते हुए, ET ने बताया कि RBI ने अपने कुछ सोने को फिर से बेचना शुरू कर दिया है, बावजूद इसके कि उनकी रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि RBI ने अपने भंडार से बेचने के बजाय अधिक सोना ख़रीदा है।

वहीं, रविवार (27 अक्टूबर) को भारतीय रिज़र्व बैंक ने सोने की ब्रिकी को लेकर स्पष्ट किया कि वह न तो सोना बेचते हैं और न ही इसमें व्यापार करते हैं। बता दें कि मीडिया में कुछ ऐसी ख़बरें थीं जिनमें कहा जा रहा था कि RBI सोने की बिक्री कर रहा है। 

केंद्रीय बैंक ने आगे कहा, “साप्ताहिक सांख्यिकीय अनुपूरक (WSS) में दर्शाए गए मूल्य में उतार-चढ़ाव मासिक से साप्ताहिक आधार पर पुनर्मूल्यांकन की आवृत्ति में परिवर्तन के कारण होता है और यह सोने और विनिमय दरों के अंतरराष्ट्रीय मूल्यों पर आधारित है।”

RBI की यह प्रतिक्रिया ET की उस ख़बर के बाद सामने आई है जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय बैंक ने बिमल जालान की रिपोर्ट को अपनाने के बाद से सोने में अधिक सक्रिय रूप से कारोबार करना शुरू कर दिया है। जालान समिति की स्थापना पिछले साल RBI की अधिशेष आय को सरकार के साथ साझा करने की बहस के मद्देनज़र की गई थी ताकि इसकी कमी को पूरा किया जा सके।

भारतीय रिज़र्व बैंक और मोदी सरकार को एक तरफ़ ले जाने की जल्दबाजी में, मीडिया के कुछ वर्गों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इस ख़बर का ग़लत इस्तेमाल कर यह भ्रम फैलाने की कोशिश की कि देश आर्थिक संकट से गुज़र रहा है और इसलिए RBI को अपने भंडार से सोना बेचना पड़ रहा है।

तथाकथित ‘अर्थशास्त्री’ और ‘पत्रकारों’ ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत इतनी ख़राब है कि भारतीय रिज़र्व बैंक मंदी से लड़ने के लिए अन्य संसाधनों का मुद्रीकरण करने के लिए देश के सोने के भंडार को बेचने पर नज़र गड़ाए हुए है।

एक पत्रकार से ट्रोल होने बनी स्वाति चतुर्वेदी ने ज़ोर देकर कहा कि RBI अपने भंडार को बेचने का सहारा ले रही है, जो स्वाति के अनुसार ख़राब आर्थिक स्थिति का संकेत है।

विवादास्पद वामपंथी वकील, प्रशांत भूषण, जो कि अक्सर फ़र्ज़ी ख़बरों के लिए भी जाने जाते हैं, ने भी कहा कि सरकार RBI के भंडार से 1.76 लाख करोड़ रुपए लेने के बाद RBI अपने स्वर्ण भंडार को बेच रही है।

अब, भारतीय रिज़र्व बैंक ने ET की ख़बर का खंडन कर दिया है, इसी के साथ यह देखना अभी बाक़ी है कि आख़िर जिन-जिन पत्रकारों ने फ़र्ज़ी ख़बरों से जनता को भ्रमित करने की कोशिश की थी। क्या वे माफ़ी माँगते हैं।