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घरों की छत पर जमा कर रखे थे पत्थर, हनुमान मूर्ति स्थापित करने जा रहे भक्तों पर पथराव

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के विश्नोईवाला गॉंव से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करने के लिए मंदिर जा रहे लोगों पर मजहबी भीड़ में जमकर पथराव किया। घटना मंगलवार (1 अक्टूबर) की है। बताया जाता है कि लोगों ने घरों की छत पर पहले से ही पत्थर जमा कर रखे थे।

ख़बर के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले गॉंव के वर्षों पुराने हनुमान मंदिर की मूर्ति को कुछ असामाजिक तत्वों ने खंडित कर दिया था। हालाँकि, ग्रामीणों ने इस घटना के बारे में कोई शिक़ायत नहीं की थी। मंगलवार को, ग्रामीणों ने मंदिर में हनुमान जी की नई मूर्ति स्थापित करने के लिए जुलूस निकाली।

इसी दौरान शकील, सलीम, ताहिर और कई अन्य लोगों के नेतृत्व में एक मजहबी भीड़ ने कथित रूप से हिंदू भक्तों को रोक दिया और नई मूर्ति की स्थापना पर आपत्ति जताई। हालाँकि, हिंदू भक्त उन्हें समझाने के बाद आगे बढ़ गए। इसके बाद मजहबी भीड़ ने कथित रूप से जुलूस पर पथराव किया। इसमें कम से कम सात लोग घायल हो गए। हनुमान जी की मूर्ति भी क्षतिग्रस्त हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने 18 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है और तीन लोगों सहित 10 लोगों को हिरासत में भी लिया है।

पथराव मामले में गिरफ़्तार सगीर अहमद, नईम, सद्दीक अहमद, रियाज़ अहमद, इरफ़ान अहमद, असगर, शबाना, नईमा और शमा को हिरासत में लिया गया है।

जागरण की ख़बर के अनुसार चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस जाँच में पाया गया है कि पथराव की योजना पहले से बनाई गई थी। पत्थर और ईंटों के ढेर क्षेत्र के लोगों की छतों में इकट्ठे पाए गए। तलाशी के दौरान घरों की छत में ईंट-पत्थर के ढेर मिले।

इससे पहले, बिजनौर के राम चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की कमिटी ने 31 जुलाई 2019 को समुदाय विशेष के दो युवकों को उस समय रंगे हाथों पकड़ लिया था, जब दोनों माथे पर टीका लगा मंदिर में घुस गए और वहाँ की मूर्तियों को तोड़ने लगे। इस दौरान मूर्तियों के टूटने की आवाज़ें बाहर आ रही थीं। तभी लोगों ने मौक़े पर पहुँचकर दोनों युवकों को रंगे हाथों पकड़ लिया। लोगों का कहना है कि समुदाय के दोनों युवकों ने माथे पर टीका लगा रखा था, जिससे उन पर कोई शक़ न करे कि वो हिन्दू नहीं हैं।

INX मीडिया मामला: 17 अक्टूबर तक तिहाड़ में रहेंगे चिदंबरम, घर का खाना खाएँगे

INX मीडिया मामले में पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही। सीबीआई अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 17 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। हालॉंकि अदालत ने तिहाड़ जेल में बंद चिदंबरम को घर का खाना लाने की अनुमति दे दी है।

कोर्ट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल में बंद चिदंबरम हर रोज दिन में एकबार घर का खाना खा सकते हैं। INX मीडिया मामले में चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ़्तार किया था।

इस मामले में जमानत के लिए गुरुवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस एनवी रमण की अगुवाई वाली पीठ के सामने तत्काल सूचीबद्ध किए जाने के लिए मामले का उल्लेख किया। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस कृष्णा मुरारी भी इस पीठ में शामिल हैं।

ख़बर के अनुसार, पीठ ने कहा कि मामला सूचीबद्ध करने के संबंध में फैसला लेने के लिए चिदंबरम की याचिका
CJI रंजन गोगोई के पास भेजी जाएगी। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने माना था कि वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

ग़ौरतलब है कि INX मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी के बयानों के आधार पर सीबीआई और ईडी ने इस मामले में चिदंबरम पर शिकंजा कसा है। आरोप है कि INX मीडिया ग्रुप को 2007 में 305 करोड़ रुपए का विदेशी धन हासिल करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी में अनियमितता बरती गई थी। उस दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री थे।

‘मैंने मुश्किल वक्त में इंदिरा गॉंधी का साथ दिया, पर मुस्लिमों को गुलाम न समझे कॉन्ग्रेस’

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने पार्टी नेतृत्व को जमकर सुनाया है। मध्य प्रदेश के झाबुआ उपचुनाव के लिए पार्टी ने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। इसमें एक भी मुस्लिम नहीं है। कुरैशी ने इस पर गहरी नाराजगी जताई है।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित खबर

उन्होंने इस सूची का हवाला देते हुए पार्टी में मुस्लिमों को नजरअंदाज करने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का प्रदेश और केंद्रीय ईकाई इस बात को समझ ले कि मुस्लिम उनका गुलाम नहीं है।

उन्होंने स्टार प्रचारकों की सूची आने के बाद बुधवार को मीडिया से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया दी। कुरैशी ने कहा, “कुछ नेता नेहरू-गाँधी खानदान को गुमराह कर रहे हैं और वहीं लोग पार्टी के इस बिखराव के लिए जिम्मेदार हैं।”

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मिजोरम के राज्यपाल रहे कुरैशी ने कहा कि मध्यप्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को यह बात अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि मुस्लिम उनका गुलाम नहीं है और न ही दिहाड़ी मजदूर। उन्होंने कहा है कि अब और अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस नेता ने स्टार प्रचारकों की सूची को आधार बनाकर कहा कि उन्हें ये देखकर 1977 की याद आ गई, जब इंदिरा गाँधी ने कॉन्ग्रेस (आई) की स्थापना की थी और सभी कॉन्ग्रेसियों से साथ देने की अपील की थी।

कुरैशी ने कहा उस समय डीपी मिश्रा, डॉ. शंकरदयाल शर्मा, प्रकाश चंद सेठी, श्यामचरण शुक्ल और गोविंद नारायण सिंह जैसे नेताओं ने उनका विरोध किया था। इस मुश्किल वक़्त में सिर्फ़ वही इंदिरा गाँधी के साथ खड़े थे। उनके अनुसार उन्होंने ही जेल भरो आंदोलन की शुरुआत करके गिरफ्तारी भी दी थी।

कुरैशी ने पार्टी नेतृत्व को पिछले चुनावों की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मुस्लिम ही कॉन्ग्रेस का साथ देते हैं। लेकिन नेतृत्व यह भूल गया है। आज वह भाजपा के हिंदुत्व विचाराधारा के समर्थकों को खुश करने में जुटी है। इसके लिए मुस्लिमों को नजरंदाज किया जा रहा है।

आतंकियों का प्लान A और B नाकाम, BSF ने अखनूर सेक्टर से पकड़ा घुसपैठिया

अंतराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के समीप जम्मू के अखनूर सेक्टर से सीमा सुरक्षाबल ने गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को एक संदिग्ध घुसपैठिए को पकड़ा। भारतीय सीमा क्षेत्र में घुसने की कोशिश करने के दौरान बीएसएफ जवानों ने उसे दबोचा। बाद में उसे पुलिस को सौंप दिया गया।

आतंकी मनसूबों को अंजाम देने के लिए आए दिन घुसपैठिए भारत में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू संभाग के ऊधमपुर जिला के कुद क्षेत्र में भी संदिग्ध दिखने की सूचना पर पुलिस व सुरक्षाबलों ने 8 घंटे तक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। जिसमें ड्रोन की भी मदद ली गई।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार उधमपुर के एसएसपी राजीव पांडेय ने बताया कि थाने में एक व्यक्ति अपने पास काम करने वाले नेपाली किशोर को लेकर पहुँचा था। उस किशोर ने बताया कि सुबह कुद के टमाटर मोड़ इलाके में मवेशी चराने गया था, जहाँ उसे 3 व्यक्तियों ने रोका।

नेपाली किशोर के अनुसार तीनों संदिग्धों के पास सुरक्षाबल की ड्रेस थी। उन्होंने किशोर को रोककर कुछ पूछा और उसकी पिटाई की। किशोर भागकर अपने मालिक के पास आया और घटना के बारे में बताया। दोनों ने आकर इसकी सूचना थाने में दी।

पुलिस ने किशोर से पूछताछ के बाद करीब 11 बजे सुरक्षाबल के साथ मिलकर तलाशी अभियान शुरू किया। उन्होंने चिनैनी से लेकर कुद एवं आसपास के इलाकों को अच्छे से खंगाला लेकिन उन्हें वहाँ कोई संदिग्ध नहीं मिला।

इसके अलावा सांबा के पुलपुर बसंतपुर में भी सेना की 25 पंजाब रेजीमेंट के जवानों ने तड़के करीब 4 बजे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलते ही सर्च ऑपरेशन चलाया। हालाँकि यहाँ भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ, लेकिन सांबा और रामगढ़ बसंतर क्षेत्र के साथ सटे इलाकों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। कहा जाता है बसंतर इलाका हमेशा से आतंकियों के घुसपैठ का रास्ता रहा है।

बता दें कि आर्टिकल 370 निष्प्रभावी होने के बाद से सीमा पार बैठ आतंकी बौखलाए बैठे हैं। उनके पास प्लॉन ‘ए’, प्लॉन ‘बी’, प्लॉन ‘सी’ बना हुआ है। प्लान ‘ए’ के तहत आतंकवादी कश्मीर में व्यापक स्तर पर खून खराबा कराना चाहते हैं। प्लान ‘बी’ में वे बार्डर से घुसपैठ कर हमला करना चाहते हैं और प्लॉन ‘सी’ से वह साम्प्रादायिक दंगे भड़काना चाहते हैं। खबर है कि सीमा पर सुरक्षा बल की तैनाती से आतंकियों का प्लॉन ए और बी में नाकामयाब हो गया है, इसलिए अब वह नवरात्रि में धार्मिक स्थल पर दंगे करवाकर माहौल खराब करने की कोशिश में है। साथ ही घुसपैठ के जरिए प्लॉन बी को भी कामयाब करने की कोशिशों में हैं।

गॉंधी परिवार को 31 साल की MLA की चुनौती: कॉन्ग्रेस के मना करने पर भी सदन में पहुँचीं अदिति सिंह

उत्तर प्रदेश का रायबरेली कॉन्ग्रेस परिवार का गढ़ माना जाता है। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी खुद यहॉं से सांसद हैं। लेकिन, अब देश की सबसे पुरानी पार्टी का यह गढ़ भी दरकता दिख रहा है। रायबरेली सदर से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने एक बार फिर पार्टी के निर्देशों को अनसुना कर शीर्ष नेतृत्व को चुनौती दी है।

31 साल की अदिति पार्टी की पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी और महासचिव प्रियंका गॉंधी की बेहद करीबी बताई जाती रही हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय से वो पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर काम कर रही हैं। आर्टिकल 370 को हटाने का समर्थन करने वाली अदिति ने गॉंधी जयंती के मौके पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में हिस्सा लिया। कॉन्ग्रेस ने इसके बहिष्कार का निर्देश दिया था।

विशेष सत्र का एसपी और बीएसपी ने भी विरोध किया था। लेकिन कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात कर और सत्र में शामिल होकर सभी को चौंका दिया। वो न सिर्फ़ सत्र में शामिल हुईं बल्कि उन्होंने स्वच्छता व पानी जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात भी रखी। बता दें कि अदिति सिंह रायबरेली के बाहुबली नेता अखिलेश सिंह की बेटी हैं। उनके पिता भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं।

ख़बर के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की भाजपा सरकार ने महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती को यादगार बनाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित ‘सस्टेनेबल डिवेलपमेंट गोल्स’ पर चर्चा करने के मक़सद से यूपी विधानसभा का 48 घंटे का विशेष सत्र बुलाया था। जहाँ इस सत्र का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया, वहीं अदिति सिंह ने शामिल होकर कॉन्ग्रेस को करारा झटका दिया है।

अदिति सिंह ने न्यूज़ 18 को बताया,

“आज गाँधी जयंती है और मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के बारे में बात की। इस दौरान पीने के पानी व बिजली की समस्या पर भी चर्चा की। मुझे लगता है कि अपने क्षेत्र की समस्याएँ उठाने का यह अच्छा मौक़ा था। मैंने आर्टिकल-370 पर अपने मन की बात कही। मुझे जो सही लगा, मैंने आज वही कहा। लोगों ने विकास के लिए मुझे वोट दिया। पार्टी मेरे बारे में जो फ़ैसला लेगी, मुझे मंज़ूर है, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने जो किया, सही किया”

इससे पहले अदिति सिंह ने पार्टी लाइन के़ ख़िलाफ़ जाकर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को ख़त्म करने का समर्थन किया था। केंद्र सरकार के इस क़दम का स्वागत करते हुए उन्होंने ट्वीट कर अपना समर्थन दिया था।

जब किसी ने उनसे पूछा, “आप तो कॉन्ग्रेसी हो?” तो, इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि वो एक हिन्दुस्तानी हैं।

बता दें कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने महात्मा गाँधी की जयंती पर लखनऊ में ‘शांति मार्च’ निकाला था, जिससे अदिति सिंह ने दूरी बनाए रखी। ऐसे में अदिति के कॉन्ग्रेस छोड़ने के कयास तेज हो गए हैं। रायबरेली में कॉन्ग्रेस के एक और प्रमुख चेहरा रहे दिनेश प्रताप सिंह पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

‘अच्छे दिन’ के इंतजार में सिद्धू: कॉन्ग्रेस नेता भी जोड़ रहे प्रचार कराने से हाथ

क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू कभी भाजपा के स्टार प्रचारक हुआ करते थे। हाल तक कॉन्ग्रेस में भी सितारे बुलंद थे। लेकिन, आम चुनावों के बाद किस्मत ने ऐसी पलटी खाई कि इस पूर्व सांसद और पंजाब के मौजूदा विधायक को उनकी पार्टी के नेता ही नहीं पूछ रहे।

कॉन्ग्रेस नेता आलाकमान से गुहार लगा रहे हैं कि उनके क्षेत्र में सिद्धू को प्रचार के लिए न भेजा जाए। पंजाब का पड़ोसी प्रदेश हरियाणा इसमें प्रमुख है, जहॉं इसी महीने विधानसभा के चुनाव होने हैं। हरियाणा में सिद्धू की एक जनसभा में न केवल उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई, बल्कि उन पर चप्पल फेंकने की भी कोशिश हुई। उल्लेखनीय है कि सिद्धू का नाम पार्टी के स्टार-प्रचारकों की सूची में है।

बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस नेताओं को डर है सिद्धू के आने से भाजपा को बैठे-बिठाए राष्ट्रवाद का मुद्दा मिल जाएगा, क्योंकि इस ‘पिच’ पर सिद्धू का ‘फॉर्म’ हालिया समय में कतई अच्छा नहीं रहा है। वे न केवल तालिबान-समर्थक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ अपनी क्रिकेट के दिनों की दोस्ती को खुल कर ‘फ्रंट-फुट’ पर खेलते हैं, बल्कि वे पाकिस्तानी आर्मी के प्रमुख जनरल बाजवा से गले भी मिल आए थे। पुलवामा हमले पर उनका बयान इतना आपत्तिजनक था कि उनके ‘बॉस’, पंजाब के मुख्यमंत्री और पूर्व सैनिक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनकी निंदा की थी। लोक सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उनसे ‘मलाईदार’ मंत्रालय छीन कर हाशिए वाले मंत्रालय थमा दिए गए तो उन्होंने प्रभार ही ग्रहण नहीं किया और मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया।

ऐसे में हरियाणा कॉन्ग्रेस के नेताओं को डर है कि सिद्धू के आते ही भाजपा राष्ट्रवाद को सबसे बड़ा मुद्दा बना देगी और वे स्थानीय मुद्दे जिन पर कॉन्ग्रेस नेता खट्टर सरकार को घेरना चाहते हैं, गौण हो जाएँगे। हरियाणा के लोक सभा चुनाव में भी सिद्धू आए थे और नतीजा यह हुआ कि 2014 की मोदी लहर में 7 सीटें जीतने वाली भाजपा ने इस बार पूरी 10 सीटें निकाल ली। हरियाणा के बड़े नेताओं की मानें तो सिद्धू जहाँ-जहाँ गए, पार्टी को वहाँ-वहाँ हार का सामना करना पड़ा था। पंजाब में भी लोक सभा हार का ठीकरा कई नेताओं ने सिद्धू के ही सर फोड़ा था। हरियाणा में 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं।

एकेडमी लड़कियों के लिए नहीं थी, महिला क्रिकेट की नई सनसनी शैफाली वर्मा ने ‘लड़का’ बन ली थी ट्रेनिंग

बॉलीवुड की फ़िल्म ‘दिल बोले हड़िप्पा’ की रानी मुखर्जी याद है आपको! इस फ़िल्म में वीर कौर (रानी मुखर्जी) को लड़की होने की वजह से जब क्रिकेट की ट्रेनिंग नहीं मिल पाती, तो वो वीर प्रताप सिंह यानी लड़का बनकर क्रिकेट टीम में शामिल हो जाती है। इस दौरान वो न सिर्फ़ भारतीय टीम का हिस्सा बनती है बल्कि पाकिस्तान के साथ होने वाले एक स्थानीय मैच में नया इतिहास भी रचती है।

ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हरियाणा के रोहतक ज़िले की रहने वाली शैफाली वर्मा ने। दरअसल, उनके होम टाउन में लड़कियों के लिए कोई एकेडमी नहीं थी और हरियाणा के रोहतक ज़िला के सभी क्रिकेट एकेडमी ने उन्हें एडमिशन देने से साफ़ इनकार कर दिया था।

दक्षिण अफ्रीका महिला क्रिकेट टीम के ख़िलाफ़ सूरत में मंगलवार (1 अक्टूबर) को खेले गए मुक़ाबले में भारतीय महिला टीम को जीत दिलाने में शैफाली वर्मा ने अहम योगदान दिया था। इस युवा खिलाड़ी के बारे में बता दें कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम में सबसे कम उम्र में टी-20 इंटरनेशनल में डेब्यू करने वाली 15 साल की बैट्समैन शैफाली ने क्रिकेट के लिए जुनूनी पिता संजीव वर्मा के निर्देश पर अपने बाल कटवा दिए थे।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से हुई बातचीत में शैफाली के पिता संजीव ने बताया,  “कोई मेरी बेटी को लेना नहीं चाहता था क्योंकि रोहतक में लड़कियों के लिए एक भी अकैडमी नहीं थी। मैंने उनसे भीख माँगी कि उसे एडमिशन दे दें, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।”

उन्होंने बताया, “मैंने कई क्रिकेट एकेडमी का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन हर जगह रिजेक्शन मिला। तब मैंने अपनी बेटी के बाल कटवा कर उसे एक अकैडमी ले गया और लड़के की तरह उसका एडमिशन कराया।”

लड़का बन कर शैफाली जब लड़कों की टीम के साथ क्रिकेट खेलती, तो उन्हें कई बार गंभीर चोटें भी आईं, लेकिन उनकी परवाह किए बिना वो लगातार आगे बढ़ती गईं। शैफाली के पिता के अनुसार,

“लड़कों के ख़िलाफ़ खेलना आसान नहीं था क्योंकि अक्सर उसकी हेलमेट में चोट लगती थी। कुछ मौक़ों पर बॉल उसके हेलमेट ग्रिल पर लगती थी, मैं डर जाता था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।”

शुरूआती दौर में शैफाली के पिता को पड़ोसियों और रिश्तेदारों के तमाम ताने सुनने पड़े। उन दिनों को याद करते हुए वो कहते हैं, “पड़ोसी और रिश्तेदारों ने ताने मारने शुरू कर दिए थे। तुम्हारी लड़की लड़कों के साथ खेलती है, लड़कियों का क्रिकेट में कोई भविष्य नहीं है।” उन्होंने कहा, “मुझे और मेरी बेटी को इतना सुनना पड़ा कि कोई भी परेशान हो जाए, लेकिन शैफाली ने एक दिन मुझसे कहा- ये लोग किसी दिन मेरे नाम के नारे लगाएँगे।” इसके बाद परिस्थितियाँ तब बदलीं जब उनके स्कूल ने लड़कियों के लिए क्रिकेट टीम बनाने का फ़ैसला लिया।

शैफाली में क्रिकेट का पैशन उस वक़्त शुरू हुआ जब सचिन तेंदुलकर 2013 में अपना अंतिम रणजी मैच खेलने आए थे। उस समय शैफाली महज़ 9 साल की थी, जो सचिन के समर्थन में नारे लगा रही थी। वहीं से शैफाली के मन में क्रिकेट के लिए एक अलग जगह बन गई। शैफाली को भारतीय टीम में खेलने का मौका तब मिला जब उन्होंने घरेलू सीजन में 1923 रन बनाए, जिसमें छह शतक और तीन अर्ध शतक शामिल हैं। उस समय शैफाली 10वीं कक्षा की छात्रा थीं, शैफाली का कहना है कि उनका लक्ष्य भारत के लिए अधिक से अधिक मैच खेलना है और देश के लिए मैच जीतना है।

बिहार बाढ़ पर घिरे नीतीश ने मीडिया की भाषा पर कसा तंज, कहा- समाज को कहाँ ले जाना है, क्या लैंग्वेज है भाई

बिहार की स्थिति पर मीडिया के उठाए सवालों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को नाराज दिखे। उन्होंने मीडिया को अपनी भाषा पर लगाम लगाने की सलाह दी। उन्होंने मंगलवार की शाम को कुछ मीडिया चैनलों द्वारा उनके ख़िलाफ़ अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर मीडिया वालों से कहा कि आप समाज को कहाँ ले जाना चाहते हैं, आप किस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा, गजब का हिसाब हो गया है…हमारे मीडिया वाले… हम सबको प्रणाम करते हैं। इनकी क्या-क्या लैंग्वेज है भाई।

गौरतलब है कि बिहार सीएम नीतीश कुमार पटना के ज्ञानभवन में महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती के अवसर पर गाँधी विचार समागम को संबोधित कर रहे थे। जहाँ उन्होंने मीडिया चैनल द्वारा उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल होती भाषा पर कहा कि उन्हें प्रचार पर भरोसा नहीं, वे काम करते हैं। लेकिन जो लोग काम नहीं करते, वे अपना प्रचार खूब करते हैं।

उन्होंने बताया कि वे मीडिया वालों से प्रेम करते हैं, लेकिन मंगलवार शाम को जब श्रद्धांजलि के कार्यक्रम में भाग लेने गए तो कुछ मीडिया वाले उनपर चिल्लाने लगे और पता नहीं कैसी-कैसी भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को उनकी आलोचना का अधिकार हैं और वे इसका स्वागत भी करते हैं। लेकिन थोड़ा समाज का भी ख्याल किया जाए।

बिहार मुख्यमंत्री ने बताया मंगलवार को पटना में हुए जल जमाव को लेकर पम्पिंग हाउस का निरीक्षण कर जब वो एक कार्यक्रम में पहुँचे तो कुछ पत्रकार उनसे चिल्ला-चिल्लाकर सवाल पूछने लगे। नीतीश ने कहा, “तो भाई आखिर इसका क्या अर्थ होने वाला है। कहाँ ले जाना चाहते हैं समाज को, किस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं? आपको कोई भ्रम है क्या कि आपकी भाषा के प्रयोग करने से कुछ होता है? कुछ नहीं होता है। जनहित में जनता के हित में जो काम किया जाता है हम उसके लिए पूरे तौर पर समर्पित हैं। हम प्रचार के लिए समर्पित नहीं हैं और आज के युग में जो काम नहीं करता है, वो अपना प्रचार खुद करवाता है।”

इस दौरान नीतीश कुमार ने मीडिया से ये भी अपील की कि उनके ख़िलाफ़ या उन जैसे व्यक्ति को डुबाने के लिए जो कहना है, वो कहें। लेकिन समाज में कडुआहट नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने पूछा कि क्या जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, क्या उससे समाज सुधर जाएगा? या समाज आगे बढ़ पाएगा?, उनका कहना है कि बेशक उनकी कमियों को उजागर किया जाए, लेकिन समाज में सौहार्द भी बनाना चाहिए।

मीडिया को समझाते हुए उन्होंने कहा कि आजतक उन्होंने किसी की मर्यादा पर असर डालने की कोशिश नहीं की है। वे यही कोशिश करते हैं कि सब लोगों की मर्यादा रहे।” उनके अनुसार किसी के विचारों से असहमत होना, सबका अपना अधिकार है। लेकिन विचार से असहमत होने का मतलब यह नहीं है कि ऐसा वातावरण बनाया जाए और व्यवहार किया जाए कि दोनों के बीच झगड़ा हो। उनका कहना है लोग अपने विचारों को जरूर रखें, लेकिन असहमत हैं तो झगड़ा न करें।

पाकिस्तानी सेना के ‘टॉर्चर सेलों’ की पोल खोलने वाली गुलालाई इस्माइल के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट

पाकिस्तानी महिला अधिकार कार्यकर्ता गुलालाई  इस्माइल के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय संस्थानों को ख़राब करने से संबंधित मामले में बुधवार (2 अक्टूबर, 2019) को ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, यदि वो 21 अक्टूबर तक कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होती हैं तो उन्हें ‘घोषित अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

कोर्ट के इस आदेश पर पाकिस्तान के एक पत्रकार ने ट्वीट किया कि कोर्ट ने कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया है। यह कोर्ट ने नहीं किया है। पाक सेना चाहती है और हम सब जानते हैं कि न्याय व्यवस्था कितनी स्वतंत्र है। इस ट्वीट के जवाब में इस्माइल ने लिखा, “ISI को ख़ुश करने के लिए पाकिस्तान की अदालतें यही सब करती हैं।”

दरअसल, गुलालाई इस्माइल को पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसलिए निशाने पर लिया है क्योंकि उन्होंने पाक सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को उजागर किया था। इसलिए पाकिस्तान ने उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया था, इसके बाद वो अमेरिका पहुँच गई थीं। फ़िलहाल, वो इस समय अपनी बहन के साथ ब्रूकलिन में रह रही हैं।

बता दें कि गुलालाई, पाकिस्तान के पश्तून समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती रही हैं। उन्होंने ‘अवेयर्स गर्ल्स’ नाम का एनजीओ बनाया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उनका संबंध पश्तून तहफ्फुज आंदोलन से है, जिसके ज़रिए वो देश की संस्थाओं के ख़िलाफ़ बातें करती हैं। पाकिस्तान के इस दावे का गुलालाई पूरी तरह से खंडन करती हैं और कहती हैं कि वो सिर्फ़ लोगों के मानवाधिकारों का मुद्दा उठाती हैं।

ग़ौरतलब है कि मीडिया से बातचीत करते हुए गुलालाई इस्माइल ने बताया था कि जिहादी आतंकवाद से निबटने, उसे मिटाने के नाम पर पाकिस्तान (यानी पाकिस्तानी पंजाबी मुस्लिम) अल्पसंख्यक पश्तूनों की सामूहिक हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं। गुलालाई इस्माइल का कहना है कि आतंकवाद मिटाने के नाम पर पाकिस्तानी सेना बेगुनाह पश्तूनियों का क़त्ल कर रही है। पाकिस्तानी सेना के टॉर्चर सेलों और नज़रबंदी कैम्पों में हज़ारों लोग बंदी हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकारों (“इंसानी हुकूक”) का हनन तुरंत बंद करने और बंदियों को रिहा करने की माँग की। साथ आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना और अन्य उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को ही दहशतगर्दी का ख़िताब दे दिया जाता है। पाकिस्तानी सेना की खैबर पख्तूनख्वा में तानाशाही चलती है।

सलमान खान को जान से मारने की धमकी, आरोपित ने कहा- कोर्ट नहीं, उसकी जान लेकर मैं दूँगा उसे सजा

बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान को जान से मारने की धमकी मिली है। ये धमकी सोशल मीडिया के जरिए दी गई है। जानकारी के अनुसार पोस्ट के वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया, लेकिन गिरफ्तारी उस समय हुई जब राजस्थान पुलिस ने आरोपित को गाड़ी चुराने के आरोप में पकड़ा। बाद में खुलासा हुआ है कि ये वही शख्स है, जो सलमान खान को मारने की धमकी भी दे चुका है। आरोपित का नाम जैकी बिश्नोई (कुछ खबरों के मुताबिक लॉरेंज बिश्नोई) है और वह सोपू गैंग का सदस्य है।

बता दें कि जैकी ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी। उसमें उसने सलमान खान को धमकी देते हुए कहा था कि सलमान को उनके गुनाहों की सजा कोर्ट नहीं बल्कि वो देगा। उसने लिखा था, “सोच ले सलमान तू भारत के कानून से बच सकता है, लेकिन बिश्नोई समाज और सोपू पार्टी के कानून ने तुझे मौत की सजा सुना दी है। सोपू की अदालत में तू दोषी है।”

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अब जैसे ही जैकी ने ये पोस्ट डाला, देखते ही देखते ये सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पहले लगा काला हिरण शिकार कांड को लेकर आरोपित ने ये पोस्ट डाला था, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि जैकी ने वास्तविकता में ये पोस्ट पब्लिसिटी के लिए डाला था।

जोधपुर चोपसानी के सीआई प्रवीण आचार्य ने सलमान खान को दी धमकी वाले मामले में सूचना देते हुए बताया कि 2 लोग गिरफ्तार हुए हैं। जाँच में पता चला है कि इन्होंने ये काम सिर्फ़ पब्लिसिटी पाने के लिए किया था।

पुलिस के अनुसार उन्होंने संदिग्ध मानते हुए कुछ दिनों पहले इन्हें चेकिंग के दौरान रोका था। दोनों लग्जरी कार में थे। जाँच में पता चला गाड़ी चोरी की हैं और दोनों मादक पदार्थों की तस्करी करते हैं, जिसके लिए वे गाड़ियों की चोरियाँ भी करते हैं। मामले में जाँच आगे बढ़ी तो पता चला कि इनमें से एक आरोपित जैकी बिश्नोई तो वही शख्स है जिसने सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी थी।

पूछताछ में आरोपित ने अपने इस अपराध को स्वीकार लिया। उसने बताया कि उसने सलमान खान को फेसबुक पोस्ट के जरिए 16 सितंबर को जान से मारने की धमकी दी थी, लेकिन ऐसा सिर्फ़ सोशल मीडिया पर पॉपुलर होने के लिहाज से किया था।