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नई दिल्ली-कटरा का सफर अब 8 घंटे में, गृहमंत्री अमित शाह ने वंदे भारत एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी

वैष्णो देवी कटरा के लिए चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का आज गुरुवार (3 अक्टूबर) को शुभारंभ हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। अमित शाह के साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल और अन्य मंत्री भी उपस्थित थे।

यह भारत की दूसरी वंदे भारत एक्सप्रेस है, जो बिना इंजन के स्व-चालित ट्रेन है। नई दिल्ली और वाराणसी के बीच पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को पीएम मोदी ने हरी झंडी दिखाई थी। हाई स्पीड ट्रेन चलने से दिल्ली और कटरा के बीच यात्रा का समय 12 घंटे से कम होकर अब आठ घंटे रह जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि आज हाईस्पीड वंदे भारत रेलगाड़ी माता वैष्णो देवी के दरबार जाएगी। इससे एक नई शुरूआत वैष्णो देवी जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए होने जा रही है। रेल अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन में 16 डिब्बे हैं, जिसमें 14 चेयर कार और 2 एग्ज़ीक्युटिव क्लास के हैं। प्रत्येक चेयर कार कोच में 78 कुर्सियाँ हैं। इस ट्रेन में 1100 यात्री सवार हो सकते हैं, इसकी बुकिंग शुरू कर दी गई है। 5 अक्टूबर से यह ट्रेन रोज़ाना नई दिल्ली-कटरा और कटरा-नई दिल्ली के लिए दौड़ेगी। टिकट के बारे में बता दें कि चेयर क्लास का टिकट 1630 रुपए का है और एग्ज़ीक्यूटिव चेयर कार का टिकट 3,015 रुपए का होगा। 

इस मौक़े पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्हें पूरी तरह भारत में बनी इस ट्रेन पर गर्व है। वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने से पहले अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने अनुच्छेद-370 पर बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 को हटाकर कश्मीर को हमेशा के लिए भारत से जोड़ने का काम किया है क्योंकि हर भारतीय के मन में एक कसक थी, इसका समाधान पीएम मोदी ने किया।

अमित शाह ने कहा, “मैं मानता हूँ कि 370 देश की एकता और अखंडता के लिए विघ्न था, 370 कश्मीर के विकास के बीच में सबसे बड़ा रोड़ा था। मुझे भरोसा है कि 370 हटने के बाद कश्मीर के अंदर आतंकवाद और आतंकवादियों की विचारधारा को संपूर्ण उन्मूलन करने में हमें सफलता मिलने वाली है।”

पाक ने फिर खाई मात: भारत के दबाव में फ्रांस ने POK के ‘राष्ट्रपति’ को नेशनल असेंबली में बोलने से रोका

भारत को फ्रांस में बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने फ्रांस के निचले सदन में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के राष्ट्रपति मसूद खान के कार्यक्रम को रद्द करवा दिया है। भारतीय मिशन ने फ्रांस के विदेश मंत्रालय को एक आपत्ति पत्र लिखा था जिसके बाद पीओके के राष्ट्रपति को कार्यकम में शामिल होने से रोक दिया गया।

दरअसल, फ्रांस की राजधानी पेरिस में पाकिस्तानी मिशन 24 सितंबर को नेशनल असेंबली में पीओके के राष्ट्रपति मसूद ख़ान की बैठक के लिए ज़ोर दे रहा था। इसके बारे में जैसे ही भारत को पता चला उसने कूटनीतिक क़दम उठाया। इस क़दम के तहत भारतीय मिशन ने फ्रांस के विदेश मंत्रालय को एक डेमार्श (आपत्ति पत्र) भेजते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से भारत की संप्रभुता का उल्लंघन होगा।

भारतीय समुदाय ने भी नेशनल असेंबली के स्पीकर और सांसदों को इस मामले के संबंध में मेल भेजे। ख़ान, फ्रांस के निचले सदन मे आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने वाले थे। जब उन्हें फ्रांस सरकार ने कार्यक्रम में जाने की अनुमति नहीं दी गई तो पाकिस्तान के राजदूत मोइन-उल-हक ने इसमें हिस्सा लिया और उनकी तरफ़ से संबोधित किया। कार्यक्रम पूरी तरह से फ्लॉप रहा और इसमें स्थानीय हस्तियों ने भी शिरक़त नहीं की।

इस पूरे घटनाक्रम के चश्मदीदों के अनुसार, फ्रांस के सांसदों के नहीं पहुँचने की आशंका की वजह से पाकिस्तानी राजदूत को मसूद ख़ान के सम्मान में आयोजित डिनर को भी रद्द करना पड़ा। ये डिनर नेशनल असेंबली के कार्यक्रम की पूर्वसंध्या यानी 23 सितंबर को आयोजित होना था। जानकारी के अनुसार, फ्रांस सरकार ने फ्रांस-पाकिस्तान फ्रेंडशिप ग्रुप को पहले ही स्पष्ट संदेश दे दिया था कि मसूद ख़ान और उनके कार्यक्रम से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखनी है। इस तरह, भारत अपने मंसूबे में क़ामयाब हो गया और फ्रांस में भी पाकिस्तान की चालबाज़ियों पर पानी फिर गया।

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान की उम्मीद के विपरीत कार्यक्रम ने किसी भी स्थानीय जनता का ध्यान अपनी ओर नहीं आकर्षित किया। कार्यक्रम में शिरक़त करने वाले अधिकतर लोग पाकिस्तानी कर्मचारी ही थे। बता दें कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। उसने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा की जाने आतंकी गतिविधियों के ख़िलाफ़ भारत का साथ दिया था। इसके अलावा, फ्रांस ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति में वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने पर भी भारत का साथ दिया था।

दिल्ली में घुसे जैश के 3-4 आत्मघाती आतंकवादी, खुफिया सूचना के बाद कई जगह छापेमारी, रेड अलर्ट

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में इस वक्त जैश-ए-मोहम्मद के 4 आतंकी मौजूद हैं। खूफिया एजेंसी ने खुद इसके बारे में खुलासा किया है। इन आतंकियों के पास आधुनिक हथियार हैं और ये किसी बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। इंटेलिजेंस को मिली सूचना के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कई इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। इन्हें ढूँढने के लिए पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है।

आतंकी हमले की आशंका के चलते दिल्ली में पुलिस ने अलर्ट जारी कर दिया है, साथ ही सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और मेट्रो स्टेशन पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार आतंकियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अब तक सीलमपुर और उत्तर पूर्वी दिल्ली के 2 स्थानों एवं जामिया नगर और सेंट्रल दिल्ली के पहाड़गंज स्थित 2 जगहों पर छापेमारी की है। इसके अलावा 2 लोगों को पूछताछ के लिए भी हिरासत में लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले यानी बुधवार को ही अभी पंजाब से एक आतंकी गिरफ्तार हुआ है और आज दिल्ली को लेकर ये खबर आ गई। फिदायीन हमले की आशंका के कारण श्रीनगर, अमृतसर, पठानकोट में सुरक्षा कड़ी कर दी गई और अन्य कई जगहों पर भी ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। इससे पहले एसआईटी ने अमृतसर से तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 5 AK–47, 2 राइफल और गोला बारूद बरामद हुआ है।

यहाँ बता दें कि आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने के बाद से ही आतंकी भारत में घुसपैठ करने की कोशिशों में जुटे हैं। बीते दिनों घुसपैठ के मनसूबों को नाकाम होता देख उन्होंने ड्रोन के जरिए भारत में आतंकियों तक हथियार भी पहुँचाएँ, जिनमें 2 ड्रोन पुलिस द्वारा जब्त कर लिए गए।

‘बापू-बापू’ कहकर फूट-फूटकर रोने लगे सपा नेता फिरोज खान, लोगों ने कहा- 50 रुपए काट लो ओवरएक्टिंग के

गाँधी जयन्ती के अवसर पर कल हर किसी ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को याद किया। आमजनों से लेकर हर राजनैतिक पार्टी से जुड़े शख्स ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसी बीच कल सोशल मीडिया पर संभल से सपा के कुछ नेताओं का वीडियो वायरल होने लगा। जिसमें दिखा कि वे बापू की प्रतिमा के आगे फूट-फूटकर रो रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक ये नेता महात्मा गाँधी की प्रतिमा के पास श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुँचे थे, लेकिन इसी बीच ये इतने भावुक हो गए कि बापू-बापू करते हुए प्रतिमा पकड़कर रोने लगे।

बताया जा रहा है कि ये मामला चंदौसी कोतवाली क्षेत्र के फव्वारा चौक का है। जहाँ सपा जिलाअध्यक्ष फिरोज खान और अन्य पदाधिकारी पहुँचे जरूर, लेकिन थोड़ी देर में बापू की याद में विलाप करने लगे। कई लोग इस दौरान जिलाध्यक्ष का ढांढस भी बँधाते नजर आए और फिरोज खान लगातार कहते रहे, “बापू आप कहाँ चले गए… आपने इतने बड़े देश को आजाद कराया और हमें आनाथ बनाकर चले गए।”

आजतक की खबर के मुताबिक बापू की प्रतिमा के आगे जिला अध्यक्ष करीब एक मिनट तक फफक-फफक के रोए और फिर अगला कार्यकर्म यानी सफाई का काम शुरू किया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने आस-पास से एक ठेले का इंतजाम किया, लेकिन खबर के अनुसार यहाँ सपा कार्यकर्ता सफाई कम और फोटो ज्यादा खिंचाते नजर आए।

इस कार्यक्रम के दौरान फिरोज खान ने प्रदेश सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “स्वच्छ भारत मिशन के तहत भाजपा लाखों रुपए डकार रही है। आज इस देश में लूट खसोट मची हुई हैं, इसलिए बापू को याद करके मेरी आँखें भर आईं। मैं बहुत रोया हूँ।”

हालाँकि, बता दें सपा नेता का ये वीडियो सोशल मीडिया पर जैसे ही वायरल हुआ, लोगों ने उनकी भावनाओं की कद्र न करते हुए उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। लोग उनके इस दुख को खराब एक्टिंग बताने लगे। बापू की तस्वीर के साथ तरह-तरह के मीम्स शेयर किए जाने लगे, ‘ओवरएक्टिंग के लिए 50 रुपए काट’ जैसी बात भी कई यूजर्स ने कही।

लोगों ने ये भी कहा कि ये सब ड्रामेबाजी है, अगर इनकी इनकी ठीक से जाँच की जाए तो देश के पैसे से चोरी की करोड़ों की संपत्ति और बैंक बैलेंस निकलेंगे, इनके बच्चे विदेशी शिक्षा प्राप्त करते मिलेंगे और ये यहाँ जनता को मूर्ख बनाकर फिर से सत्ता में आने और चोरी करने की रणनीति बना रहे है।

बिहार की बाढ़ में पूर्व केंद्रीय मंत्री डूबते-डूबते बचे, जुगाड़ू नाव में फोटो शूट कराते हुआ हादसा, देखें Video

बिहार में इन दिनों बाढ़ की वजह से जनजीवन बेहाल है। पटना के अधिकतर इलाके इस समय पूरी तरह बारिश में जल मग्न हैं। ऐसे में बुधवार (अक्टूबर 2, 2019) की शाम सांसद रामकृपाल यादव धनरूहा के चकियापर और रमनिबिहदा के बीच दरधा नदी पर टूटे तटबंध का दौरा करने निकले, लेकिन परिस्थियाँ ऐसी बनी कि वो वहाँ खुद डूबते-डूबते बचे।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जब भाजपा नेता दौरे पर गए तो वहाँ किसी कारण वश नाव की व्यवस्था नहीं हो पाई। जिसके बाद वे चचरी की बनी नाव पर चढ़कर वहाँ की स्थिति देखने लगे। इस दौरान उनके साथ कई लोग भी मौजूद थे। लेकिन, इलाके का जायजा लेने के दौरान उनका बैलेंस बिगड़ गया और वे चचरी की नाव पर सवार लोगों समेत पानी में गिर कर डूबने लगे। हालाँकि, इस घटना के बाद आनन-फानन वहाँ मौजूद स्थानीय लोगों ने उन्हें डूबने से बचा लिया एवं बाकी अन्य लोगों को भी पानी से बाहर निकाला। हादसे के शिकार सभी लोगों को मामूली चोटें आईं, जिसके ईलाज के लिए सभी को पटना भेज दिया गया।

बाद में रामकृपाल यादव ने फेसबुक पर घटना का वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “आज पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त इलाकों का सुबह से ही भ्रमण कर रहा हूँ। लोगों के दुःख दर्द को करीब से महसूस कर रहा हूँ और मदद की समुचित व्यवस्था के लिए निर्देश भी दे रहा हूँ। कई क्षेत्रों में स्थिति सच में काफी विकट है। लोग परेशान हैं। जल्द ही उनकी परेशानी दूर होगी। इस क्रम में आज मैं खुद दुर्घटनाग्रस्त हो गया।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री अपने फेसबुक पोस्ट में आगे लिखते हुए खुद बताया, “धनरुआ के रमणी बिगहा में एक जगह पानी की गहराई ज्यादा थी। कोई सही नौका की व्यवस्था नहीं हो पाई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह कुछ व्यवस्था की। चचरी वाली नौका लाई गई, इसपर सवार हो गहरे पानी को पार कर ही रहा था कि नौका डूब गई। लोगों ने तत्परता से मुझे निकाला। हल्की चोट आई। आप जनता जनार्दन की दुआ से सुरक्षित हूँ।”

गौरतलब है कि पाटलिपुत्र के सांसद रामकृपाल यादव ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा करने के बाद बाढ़ से धनरूआ और पुनपुन की स्थिति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ये इलाके जलमग्न हैं और यहाँ हाहाकार मचा हुआ है, किंतु इसकी चिंता न तो शासन को हैं और न ही प्रशासन को। रामकृपाल यादव ने कहा कि बाढ़ की विभिषिका से इलाके के लोगों की स्थिति नरक बन गई है, लेकिन प्रभावितों के बीच राहत तो दूर एक नाव की व्यवस्था नहीं हैं। उनकी मानें तो पूरा सरकारी तंत्र पटना के राजेंद्रनगर में लगा हुआ है।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का या भी कहना है कि जुगाड़ के नाव में फोटो शूट कराते हुए संतुलन बिगड़ जाने के कारण यह हादसा हुआ।

370 एक बड़ी ग़लती थी, एक झटके में हटाना ही सही, POK भी भारत का ही: वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के 2 महीने बाद भी इस पर होने वाली चर्चा पर विराम नहीं लगा है। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में कुलभूषण जाधव का केस लड़ने वाले भारत के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे का कहना है कि अनुच्छेद-370 एक ग़लती थी, जिससे निजात पाना बेहद ज़रूरी था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत  का हिस्सा है, न सिर्फ़ इधर वाला कश्मीर बल्कि POK भी भारत का ही है।

इंडिया टुडे से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं काफ़ी लंबे समय से अनुच्छेद-370 के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहा हूँ, ये एक बड़ी ग़लती थी।” उन्होंने कहा कि इसे एक झटके में हटाना ही सही फ़ैसला था, अब अगर यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो वो ही तय करेंगे। हरीश साल्वे ने बुधवार (2 अक्टूबर, 2019) को लंदन में इंडियन हाईकमीशन में बात की।

इसके अलावा, उन्होंने हैदराबाद के निज़ाम वाले मामले में ब्रिटेन कोर्ट के द्वारा भारत के पक्ष में सुनाए गए फ़ैसले की भी तारीफ़ की। उनका कहना था कि पाकिस्तान के द्वारा इस मामले पर अब तक जो दावा किया जा रहा था, वो पूरी तरह से ग़लत था। अब अगर पाकिस्तान इस पर फिर से अपील करना चाहता है तो वो कर सकता है।

ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन के एक हाई कोर्ट ने हैदराबाद के निजाम के 3.5 करोड़ पाउंड के फंड को लेकर दशकों से चल रहे मामले में बुधवार (2 अक्टूबर, 2019) को भारत के पक्ष में फ़ैसला सुनाया। देश के विभाजन के बाद हैदराबाद के निज़ाम उस्मान अली ख़ान ने 1948 में लंदन के नेशनल वेस्टमिंस्टर बैंक में 10 लाख पाउंड (क़रीब 8.87 करोड़ रुपए) जमा किए थे। इस पर दावे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले 70 सालों मुक़दमा चल रहा था। अब यह रक़म बढ़कर करीब 35 मिलियन पाउंड (करीब 306 करोड़ रुपए) हो चुकी है।

रुपए के मालिकाना हक को लेकर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ चल रही इस क़ानूनी लड़ाई में निज़ाम के वंशज प्रिंस मुकर्रम जाह और उनके छोटे भाई मुफ्फखम जाह भारत सरकार के साथ थे। हैदराबाद के तत्कालीन निज़ाम ने 1948 में ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को ये रक़म भेजी थी। फ़िलहाल, यह रक़म लंदन के नेशनल वेस्टमिंस्टर बैंक में जमा है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा गया कि यूके की अदालत ने पाकिस्तान के इस दावे को ख़ारिज कर दिया है कि इस रक़म का मक़सद हथियारों की शिपमेंट के लिए पाकिस्तान को भुगतान के रूप में किया गया था। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने कई बार यह कोशिश की थी कि यह मामला किसी तरह से बंद हो जाए, लेकिन उसके मंसूबे पर पानी फेरते हुए लंदन की अदालत ने उसके हर प्रयास को विफल कर दिया।

आज के गोडसे गाँधी के हिन्दुस्तान को ख़त्म कर रहे, गोडसे के बेटों को हराओ: ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी अपनी ग़लत बयानबाज़ी के कारण अक्सर विवादों में रहते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव-2019 के मद्देनज़र औरंगाबाद में गाँधी जयंती के मौक़े पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “गोडसे ने तो गाँधी को गोली मारी थी, मगर मौजूदा गोडसे गाँधी के हिन्दुस्तान को ख़त्म कर रहे हैं। जो गाँधी को मानने वाले हैं, उनसे कह रहा हूँ कि इस वतन-ए-अज़ीज़ को बचा लो।”

प्रचार करने पहुँचे ओवैसी ने अपने भाषण की शुरूआत, महाराष्ट्र को ख़्वाब देखने की सलाह देकर की। उन्होंने कहा, “यह वंचित और हाशिए में पड़े वर्ग के आकांक्षी होने का समय है न कि पिछले 70 वर्षों से झेल रहे दर्द को जारी रखने का।”

अपने भड़काऊ भाषण के लिए चर्चित ओवैसी ने इसके आगे कहा,

“मैं लोगों से अपील करता हूँ कि गोडसे के बेटों को हराओ और गाँधी के भारत और आंबेडकर के संविधान को बचाओ दिल में गोडसे की मोहब्बत और ज़ुबान पर गोडसे का नाम, यह नहीं चल सकता।”

इससे पहले विवादित बयान देते हुए उन्होंने कहा था, मुझे यकीन है कि एक दिन मुझे कोई गोली भी मार देगा। मुझे यकीन है कि गोडसे की जो औलाद है वो मुझे ऐसा कर सकते हैं। हमारे मुल्क में अभी भी गोडसे की औलाद हैं।”

दरअसल, ओवैसी ने नगा अलगाववादियों ज़िक्र करते हुए कहा था, “ये सरकार नगा अलगाववादियों से बात कर रही है, जिन्होंने अभी तक सरेंडर नहीं किया है।” उन्होंने कहा, “जब एक बड़े नगा नेता का निधन हुआ, तो तिरंगे के साथ वहाँ उनका अपना झंडा था, सरकार के लोग वहाँ गए, क्या तब उन्हें 2 झंडे की याद नहीं आई? आप किसे मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं?”

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर बयानबाज़ी को लेकर ओवैसी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को असम के शीर्ष मुस्लिम संगठन ने फ़टकार लगाई थी। संगठन ने ओवैसी से ग़लत सूचना देकर लोगों को भड़काने से बाज आने को कहा है। वहीं, इमरान खान को इस मसले पर अपना मुॅंह बंद रखने की नसीहत दी थी।

शीर्ष संस्था के अध्यक्ष सैयद मुमीन-उल-औवाल ने हैदराबाद के सांसद ओवैसी से भी कहा कि वे असम के लोगों को NRC के मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने की कोशिश न करें, जैसा उन्होंने शनिवार (31 अगस्त) को किया था।

दिग्विजय सिंह की नजर में पाक PM इमरान खान ‘जी’ ‘शांति-दूत’, मोदी ‘नफरत-साम्प्रदायिकता’ फैलाने वाले

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने इमरान खान के नाम के आगे ‘जी’ लगाकर उनके बयान का समर्थन किया है। गाँधी जयन्ती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ‘कट्टर हिंदुत्व’ के ख़िलाफ़ बात की और साथ ही उसे खतरनाक भी बताया। उन्होंने कहा जिस तरह से मुस्लिमों की कट्टरता खतरनाक है, उसी तरह हिंदुओं की भी कट्टरता खतरनाक है। ऐसे में अगर बहुसंख्यक आबादी का संप्रदायीकरण होता है तो देश के लिए बड़ी मुश्किल होगी।

बुधवार को इंदौर में बोलते हुए उन्होंने ये बयान दिए। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इमरान खान प्रधानमंत्री जी लगातार ‘रेडिकलाइजेशन ऑफ द मुस्लिम’ की बात करते हैं। वे इस्मालिक फोबिया को लेकर विचार रखते हैं। उसी का काउंटर है ‘रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज’, मतलब जिस प्रकार से इस्लाम की कट्टरता पाकिस्तान के लिए खतरनाक साबित हो रही है, ठीक उसी तरह से ‘रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज’ भी भारत के लिए खतरा है।

नेहरू को याद करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने उनकी बात दोहरई और कहा कि पं नेहरू ने कहा था कि अल्पसंख्कों की साम्प्रादायिकता के मुकाबले बहुसंख्यकों की साम्प्रादायिकता ज्यादा खतरनाक होती है। इसलिए उनकी मानें तो जो हाल पाकिस्तान का हुआ है, अगर ऐसा ही हाल भारत का हुआ तो उसे बचाना आसान नहीं होगा। इसलिए, इससे बचने की जरूरत है।

गाँधी जयन्ती पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने गाँधी पर भी बात की, लेकिन वर्तमान से गढ़ते हुए। उन्होंने कहा, “गाँधीजी ने भारत की सनातनी परंपरा और संस्कृति को समझा था। सनातन धर्म में सत्य अहिंसा की बात होती है। आज अहिंसा ही संकट में है। भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की परंपरा के साथ हमारा धर्म संकट में है।” इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर इन सबका (स्थिति) विरोध करना है तो अहिंसा का रास्ता चुनना होगा।

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता ने पाक के पीएम के बयान का समर्थन करते हुए इस दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उनके मुताबिक आज पीएम मोदी ने नफरत की बात हर घर पहुँचा दी है। उनका कहना है, “जब नारा लगता था हर-हर मोदी, घर-घर मोदी तो वाकई में नफरत की आग नरेंद्र मोदी जी और उस विचारधारा ने हर घर में पहुँचा दी है। मैं इस बात को मानता हूँ कि सांप्रदायिक्ता का भूत बोतल में जब तक बंद है तब तक बंद है। एक बार निकल गया तो इसको वापस बोतल में डालना आसान नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं, लेकिन गाँधी जयन्ती पर इस प्रकार भारतीय प्रधानमंत्री पर ऊँगली उठाते हुए इमरान खान के बयान के समर्थन ने उनके आगे नया विवाद लाकर खड़ा कर दिया हैं। सवाल बस यही उठ रहा है कि अगर भारत की वर्तमान स्थिति पर ही बात करनी थी तो पाक प्रधानमत्री के बयान का उदाहरण देने की क्या आवश्यकता थी?

क्या मर गया है बिहारियों का स्वाभिमान? क्या नीतीश कुमार को घेर कर नहीं पूछ सकते सवाल?

बिहार का हूँ, बिहारी हूँ और पाटलिपुत्र एवम् पटना का फर्क जानता हूँ। कई बिहारी इन दोनों जगहों का फर्क नहीं समझते। अभी भी बिहारियों को डिबेट में जीतना हो तो वो भगवान बुद्ध से शुरु करते हैं और चाणक्य, चंद्रगुप्त, अशोक, पतंजलि और पता नहीं कहाँ-कहाँ पहुँच जाते हैं। जबकि बिहार की सच्चाई यह है कि हम भारत के सबसे बेकार राज्य में से एक हैं। सबसे ज्यादा गरीबी, अशिक्षा, और बीमारी यहीं है।

पटना को पाँचवाँ मेट्रो बताने वाले बिहारी ये कभी नहीं बताते कि पटना से घटिया, सड़ाँध मारती सड़कें, कुव्यवस्था और अराजक जगह बहुत कम होगी इस देश में। हाँ, भारत में मिलती जुलती जगहें हैं, लेकिन वो राज्य की राजधानी नहीं है, और न ही वहाँ के लोग ये दावा करते हैं कि हम तब से बसे हुए हैं, जब से गंगा के किनारे लोगों ने बसना शुरु किया था।

लेकिन ऐसे तथ्यों का अचार भी नहीं डाला जा सकता। इतिहास की बातें करके खुश होने का हक सिर्फ उसे है जिसने उस महान विरासत को संग्रहालयों से बाहर सड़कों पर भी बचा कर रखा है। बिहार ने पहले लालू के हाथों बर्बादी झेली, फिर नीतीश आए। पहले पाँच सालों में लगा कि ये आदमी कुछ करना चाह रहा है, और सच कहूँ तो कुछ काम भी किया। लेकिन फिर इस नीतीश कुमार को कटकाहा कुत्ता काट लिया। ये आदमी तब से बस ‘गरीब-गुरबा’ और अदरक-लहसुन कह कर बहाने मारता फिरता है।

समस्या कई तरह की हो सकती है। बर्बादी कई तरह से आ सकती है। इसलिए आप ये नहीं कह सकते कि लालू ने बर्बाद किया, तो नीतीश कैसे करेगा। लालू की बर्बादी अलग तरह की थी, नीतीश वाली अलग तरह की है। इसका प्राप्य लेकिन एक ही है: तबाह बिहार। बिहार बस वही है, जिस पर पुती कालिख को पोछते हुए बिहारियों के चेहरे की खाल उतर गई लेकिन इन नेताओं की करतूतों ने खाल से रिसने वाले रक्त तक को स्याह करना नहीं छोड़ा है।

बाढ़ आपदा है, क्योंकि नदियों में पानी बढ़ता है और वो हर तरफ फैलता है। लेकिन 15 साल के शासन के बाद भी बाढ़ आपदा ही है और निर्लज्जता, बेहयाई और बेहूदगी से सने आप यह बता रहे हैं कि अमरीका में पानी नहीं आता क्या, तो आपको कुर्सी की आदत तो हो गई है, लेकिन उसकी जिम्मेदारी का अहसास नहीं है। बाढ़ जब हर साल आती है, और हर साल राहत पैकेज के लिए मुँह बाए, आप खड़े रहते हैं तो आदमी सोचने लगता है कि क्या इस सत्ताधीश को बाढ़ से कोई मतलब भी है, या इसको उस राहत पैकेज से मतलब है जिसका हिसाब नहीं किया जाता? क्या आपको पता है कि राहत पैकेज कितना बड़ा धंधा बन चुका है?

बिहार में कोसी क्षेत्र और गंगा के किनारे के दियारा क्षेत्रों में हर साल बाढ़ आती है। कभी ज्यादा, कभी कम। लेकिन सिवाय बयानबाजी के, इसको लेकर किसी ने कुछ नहीं किया है। लेकिन ये लेख उस संदर्भ में नहीं है। बाढ़ से पटना को बहुत ज्यादा तबाही नहीं झेलनी पड़ती, खास कर उन विधायकों और मंत्रियों को बिलकुल नहीं जो उस पानी से दूर हैं।

पटना का पानी

सितम्बर में बाढ़ नहीं आया, बारिश हुई और जम कर हुई। पटना में गंगा का पानी नहीं घुसा, बल्कि बारिश का पानी बाहर जा ही नहीं पाया। बाहर इसलिए नहीं जा पाया क्योंकि बारिश लगातार होती रही, नाले कागजों में बने रहे, और जो धरती के नीचे थे, वो सौ साल पुराने हैं। उन नालों में गाद, कीचड़, कचरा और हर तरह की चीजें हैं जिससे वो अपनी दुर्गंध के कारण नाला कहा जाता है, न कि पानी को कहीं ले जाने के लिए।

एक जगह जहाँ पानी जमा था, उसका कारण 2006 में बनना शुरु हुआ वो नाला था, जो 2019 में भी बन नहीं पाया। हो सकता है नीतीश ने सोचा होगा कि नाला स्टेम सेल तकनीक से बन रहा है जो स्वयं ही तय आकार ले लेगा। इसलिए बारिश थम गई, फिर भी पानी घटा नहीं। अगस्त 2014 में भी यही खबर आई थी, उससे कई साल पहले भी। कारण हमेशा अंग्रेजों के जमाने की नालियों का होना रहा।

ऐसा नहीं है कि इस बात पर चर्चा नहीं होती। 2013 में NIT पटना के रिटायर्ड प्रोफेसर संतोष कुमार ने कहा कि पटना में सीवेज और बारिश के पानी के बाहर जाने की नालियाँ अलग-अलग हैं। बारिश के पानी को निकालने वाले नाले कीचड़, गाद और कचरे से बंद पड़े हैं, इसलिए एक बारिश में भी घुटने भर पानी भर आता है। पम्पिंग स्टेशन काम नहीं करते। क्यों? क्योंकि कहीं बिजली की दिक्कत है, कहीं पम्प नहीं है, और कहीं है तो वो इतनी पुरानी है कि चलती नहीं।

पटना के लोगों का रोष, बिहारियों की जिजीविषा

रंजीत कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट में फोटो लगा कर दिखाया कि हालत क्या है। घर में पानी जमा हुआ है, वो सड़ रहा है। पम्प हाउस का बोर्ड चकाचक है, लेकिन वहाँ पम्प नहीं है क्योंकि नगर निगम ने पम्प नहीं दिया। पम्प हाउस में ही पानी घुसा हुआ है, और चिराग चले अंधेरा की जगह पम्प हाउस बिना पम्प के पानी में कहना उचित रहेगा।

लोग जी रहे हैं क्योंकि लोग जी लेते हैं। जब आदमी भूख से मरने लगता है तो शरीर जीवित रहने के लिए मांसपेशियों को ही ऊर्जा के लिए तोड़ना शुरु कर देता है। जब हमारा शरीर इस तरह से बना हुआ है, और जब हमने लालू जैसे राज को झेल लिया है तो प्रशासन की अकर्मण्यता, उपेक्षा और मानव जीवन के लिए उदासीनता तो हमारे गुणसूत्रों तक पहुँच चुकी होगी! इसलिए बिहारी शिकायत नहीं करता, वो अमूमन जिंदा बच जाता है।

जो ज़िंदगियाँ बचाई जा सकती थीं, वो सौ के हिसाब से जन्म के कुछ महीनों में ‘चमकी बुखार’ के ग्लैमरस नाम की भेंट चढ़ जाते हैं। कुछ लोग बारिश के कारण जम गए पानी के कारण मर जाते हैं। और नीतीश कुमार क्या करते हैं? छत पर चढ़ कर छाता लगा कर बारिश का जायजा लेते हैं, कोई कभी हेलिकॉप्टर से दौरा कर लेता है। याद आता है पुराना समय जब सुशील मोदी ने इसी कारण अनशन किया था और अब हालत यह है कि उन्हें भी उनके घर से बाहर निकाल कर बचाया जा रहा है।

ये न देखने में अच्छा लगता है, न ही सांकेतिक तौर पर सही है। मुझे हॉलीवुड फिल्मों का कप्तान याद आता है जो जहाज के साथ डूबना पसंद करता है। लेकिन ऐसी उम्मीद, सांकेतिक तौर पर भी, उस व्यक्ति से करना मूर्खता है जो अपने बारे में छपी खबरों को ट्विटर पर शेयर करके बताता है कि उसका नाम अखबारों में आया है! सुशील मोदी भूल जाते हैं कि वो प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं, और कायदे से, प्रतीक के तौर पर ही उसी पानी में, गाँधी के जन्मदिन पर झाड़ू पकड़ने की तरह, लोगों को पानी और दूध की थैलियाँ देते नजर आते, तो लगता कि थोड़ी चिंता है बिहारियों की।

वो क्षुब्ध नवयुवक जो हर बिहारी है

‘हम बिहारी चू@# हैं जो ऐसे नेता चुनते हैं,’ कहता है वो लड़का। वो बार-बार कहता है कि बिहारियों को भीख नहीं चाहिए, दया नहीं चाहिए, वो बीमार नहीं हैं बल्कि वो नेता बीमार हैं जिन्हें हम बिहारी ही वोट देते हैं और वो इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर कुछ नहीं बनाते। वो कहता है कि जिम्मेदार भी वही हैं जो वोट देते हैं, और यही समस्या हर साल आती है।

सही बात यही है कि ‘नीतीश का विकल्प कौन’ की समस्या बिहार को सालों से परेशान कर रही है। नीतीश कुमार भी शायद इस बात को समझते हैं कि भाजपा थक-हार के आएगी तो उनके पास ही, और इसी का फायदा उन्हें मिलता है कि भाजपा-जदयू गठबंधन को लगभग सारी लोकसभा सीटें देने वाले भाजपाई भी बिहार की स्थिति पर सरकार को कोस नहीं पा रहे।

पिछले तीन दशक में बिहार के पास ऐसा कुछ नहीं है कहने को कि उसने यहाँ के लोगों की बेहतरी को लिए कोई कदम उठाया हो। केन्द्र की नीतियों से फायदा हुआ हो तो अलग बात है, लेकिन शिक्षा की बर्बादी जैसी लालू के समय थी, वही आज भी है। सरकारी अस्पतालों की हालत में बहुत ज्यादा सुधार नहीं है। अपराध वापस पुराने दिनों की तरह लय पकड़ चुका है।

दुर्भाग्य यह है कि बिहार में शायद कुछ भी सही नहीं है। इसलिए हमें बुद्ध और चाणक्य की शरण में जाना पड़ता है। लेकिन अशोक स्तम्भ और गरुड़ध्वज की छाया क्षीण हो चुकी है। हम चर्चा में बेहतर शब्दों से किसी का मुँह ज़रूर बंद कर सकते हैं लेकिन नीतीश और लालू जैसे नेता यह बताते हैं कि हम चुनने में भी गलती करते हैं, और उसके बाद काम करवाने के लिए प्रयास भी नहीं करते।

वो वही बिहारी थे जिन्होंने गाँधी मैदान को पाट दिया था और छात्रों के आंदोलन ने पहले बिहार सरकार को हिलाया और बाद में इंदिरा गाँधी की सरकार चली गई थी। इस सौभाग्य का तिलक बिहारी कपाल पर मल सकते हैं, लेकिन उसी आंदोलन से निकले लालू और नीतीश ने जो कालिमा बिहार के नक्शे पर मली है, वो दुर्भाग्य के सिवा और कुछ रही ही नहीं।

एक बारिश ने घेरा है, अब लोग भी घेरें तो शायद सुनेंगे

अहिंसक आंदोलनों का इतिहास है हमारे देश और राज्य में। इस साल ज्यादा बारिश हुई तो बाढ़ के अलावा, एक अलग महीने में बिहार पर बात हुई। हो सकता है ऐसी बारिश दस साल बाद आए, तब तक फिर से जोश ठंढा पड़ जाएगा। चुनाव में तो जो होगा, सो होगा लेकिन, अभी क्या किया जाए?

जेपी वाले आंदोलन में बस एक लाख लोग थे, और सरकार घुटने पर आ गई थी। अगर नीतीश कुमार के आवास के बाहर एक लाख लोग जमा हो जाएँ, तो क्या बिहार पुलिस इस स्थिति में होगी कि उसे हटा सके? नीतीश कुमार को यह बताना जरूरी है कि जब समस्या किसी की अकर्मण्यता के कारण ‘आपदा’ बन जाए, तो उसके पीड़ितों को कैसा महसूस होता है। इन नेताओं को बताना आवश्यक है कि घर के भीतर जब किचन का सामान खत्म हो जाए, बाथरूम में पानी घुस जाए, पीने का पानी न आए, सोते वक्त दिमाग में पानी में न गिरने की बात चलती रहे, तब कैसा महसूस होता है।

सेलिब्रिटी से, मीडिया से कोई आशा क्यों करना? मुंबई की बाढ़ से मुंबई बंद होती है, और पटना तो मुंबई है नहीं, फिर कोई क्यों करेगा ट्वीट आपके लिए? बिहार की स्थिति को लेकर मीडिया में भी अजीब स्थिति बनी होती है कि भाजपा समर्थित सरकार होने के बावजूद नीतीश को कोसना, थर्ड फ्रंट के नेता को नीचा दिखाने जैसा है, क्योंकि कल को वो नेता चोरों के गठबंधन का नेता बन सकता है जिसकी चरणवंदना इनके पास हमेशा तैयार रहती है। इसलिए, मशाल लेकर कहीं भी नैरेटिव की आग लगा देने वाले पत्रकार बिहार की बारिश को छोड़ देते हैं।

सड़क पर निकलिए, इन भयावह रातों को याद कीजिए, याद कीजिए कि आपको सड़कों पर पानी के लिए हाथ फैलाना पड़ा था, दूध की थैलियाँ डीएसपी ने अपने परिवार वाले को दे दी थी, याद कीजिए आपको दैनिक कार्यों को लिए कठिनाई का सामना करना पड़ा था, याद कीजिए कि दर्जनों लोग मर गए, या बीमार पड़े हैं इसी पानी के जमने से। इस बात को याद करके सड़क पर निकलिए कि 2006 में शुरु हुआ नाला, आज भी क्यों नहीं बना? इस बात को ध्यान में रख कर नितीश जैसे नेताओं के घरों को घेरिए कि ये लोग नाले बनाने की तो छोड़िए, उन्हें साफ तक नहीं कर पाते। ये सोच कर सड़क पर आइए कि 2200 करोड़ रुपए की योजना का नितीश ने क्या किया। यह याद करके नीतीश कुमार को घेरिए कि सीवेज सिस्टम में गाद, कीचड़ और कचरा क्यों है जो बारिश होते ही आपके घरों में घुस जाता है।

आप सड़क पर नहीं आएँगे तो ये लोग आपकी छाती पर रैलियों के टेंट गाड़ेंगे और आपको बताएँगे कि बिहार में बहार है। बिहार में बारिश का पानी जम जाता है, पम्प हाउस में पम्प नहीं है, नीतीश कुमार पूछते हैं कि अमेरिका में पानी नहीं जमता है क्या? उनके घर को घेरिए और लाउडस्पीकर लगा कर कहिए कि वहाँ पानी नहीं जमता है। ये लड़ाई आपकी ही है, कोई और नहीं लड़ेगा क्योंकि नेता न सिर्फ पतितखंती होते हैं बल्कि उच्च कोटि के थेथर भी होते हैं। उनको फर्क नहीं पड़ता। उनको फर्क पड़वाइए।

धार्मिक जलसे सा संसद, सिर शर्म से झुक गया: हीरोइनों को तवायफ बताने वाले सपा सांसद हसन

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद एसटी हसन ने संसद को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिस पर विवाद होना तय है। उन्होंने देश की संसद की तुलना धार्मिक जलसे से कर डाली है। वे मुरादाबाद सदर तहसील के सामने हो रहे एक धरना-प्रदर्शन को सम्बोधित करने पहुँचे थे। उन्होंने कहा, “मैं पार्लियामेंट के अंदर होकर आया हूँ और वहाँ पर जो मैंने माहौल देखा है, संसद में मेरा सिर शर्म से झुक गया।”

सांसद हसन ने कहा कि वो कई बार संसद गए हैं, जहाँ उन्हें एक बार नहीं बल्कि अनेकों बार ऐसा लगा कि जैसे वो किसी धार्मिक जलसे में उपस्थित हों। उन्होंने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि आज वहाँ जो हालात हैं, वो हालात पहले कभी नहीं बने। उन्हें इस बात पर गहरी आपत्ति है कि आज की तारीख़ में रोज़ नए क़ानून बनाए जा रहे हैं।

बड़े सुधार लाने के लिए मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए, मुरादाबाद के सांसद ने पूछा कि अनुच्छेद-370 के कमजोर पड़ने और ट्रिपल तालक़ के अपराधीकरण से हिन्दुओं को क्या हासिल हुआ? उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर हमेशा हमारा था और हमेशा हमारा रहेगा, लेकिन इसके विशेष दर्जे को छीनने से आम आदमी को कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

राष्ट्रीय जाँच एजंसी (NIA) के ख़िलाफ़ ग़लत सूचना और भय फैलाते हुए उन्होंने कहा कि संसद में पारित नए बिल ने NIA को ऐसी शक्तियाँ दी हैं कि अब यह किसी को भी आतंकवादी कह सकते हैं और संदेह के आधार पर उसे जेल में डाल सकते हैं। हसन ने पिछले साल अमरोहा में एक आतंकी मॉड्यूल के खुलासे को भी फ़र्ज़ी बताया था और दावा किया कि NIA ने गैराज उपकरणों को रॉकेट लॉन्चर बताया।

ट्रिपल तालाक़ बिल को लोकसभा में पारित कराने के विषय में, एसटी हसन ने एक चौंकाने वाला बयान दिया, जिसमें कहा गया कि यदि किसी की बीवी का संबंध दूसरे आदमी के साथ हो, तो उस शौहर को अपनी बीवी की हत्या या जलाकर मारने की बजाए उसे ट्रिपल तालक़ देना बेहतर है। इससे पहले, समाजवादी सांसद एसटी हसन, अभिनेत्रियों की तुलना ‘तवायफ’ से करने पर घिर चुके हैं। उन्होंने ज़ायरा वसीम के फिल्मों को छोड़ने के फैसले का भी समर्थन किया था। वसीम के फ़ैसले का समर्थन किया था क्योंकि यह उनके विश्वास में हस्तक्षेप से संबंधित था।