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पाकिस्तानी सेना ने की 370 पर LOC तक मार्च की अपील: भारतीय सेना हाई अलर्ट, देगी मुँहतोड़ जवाब

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्क्रिय हुए लगभग 60 दिन हो चुके हैं मगर पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे पर अपनी खिसियाहट सीमा और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर निकाल रहा है। पाकिस्तान की ओर से इस साल जहाँ 2000 से अधिक बार सीजफायर उल्लंघन किया गया है, वहीं लगातार भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए आतंकी एलओसी पर फिराक में बैठे हैं। एक बार फिर शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को अनुच्छेद 370 को लेकर प्रदर्शन के लिए लोगों को तैयार कर रहा है। इस बार पाकिस्तान एलओसी तक कश्मीरी लोगों से मार्च करने की अपील की है। 

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने अनुच्छेद 370 पर कश्मीर में अशांति फैलाने के मकसद से यह तैयारी की है। इसके लिए पूरे गुलाम कश्मीर में पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों पर नारा लिखा है, ‘एलओसी तोड़ दो, बिखरा कश्मीर जोड़ दो।’ गुलाम कश्मीर के लोगों को आगे कर सीमा पर बड़े पैमाने पर हिंसा की रची गई साजिश को देखते हुए भारत ने सीमा पर सुरक्षा के काफी पुख्ता प्रबंध किए हैं। भारतीय सेना भी हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना द्वारा प्रचारित किए जा रहे इस मार्च को असफल करने के लिए कमर कस ली है।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठा रहा है, लेकिन हर जगह से उसके हाथ असफलता लग रही है। इसके साथ पाकिस्तान सीमा पर भारत में अशांति पैदा करने के लिए घुसपैठ कराने की कोशिश में लगा हुआ है। लेकिन यहाँ भी भारत के सुरक्षाबल पटखनी दे रहे हैं।

उन्नाव रेप मामला: कुलदीप सिंह सेंगर के बाद 3 और लोग दुष्कर्म के आरोपित, CBI ने दाखिल की चार्जशीट

उन्नाव रेप केस मामले में आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ना तय मानी जा रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गैंगरेप के एक दूसरे मामले में एक और चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में कुलदीप सिंह सेंगर की क़रीबी शशि सिंह के बेटे शुभम सिंह का भी नाम शामिल है। 

CBI ने पीड़िता से गैंगरेप मामले में तीस हज़ारी कोर्ट में एक और चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट 11 जून 2017 को हुए गैंगरेप की घटना की जाँच को लेकर दाखिल की गई है। उस समय पीड़िता नाबालिग थी। CBI ने दाखिल की गई चार्जशीट में नरेश तिवारी, ब्रजेश यादव और शुभम सिंह का नाम बतौर आरोपित शामिल किया है। बता दें कि फ़िलहाल, ये तीनों आरोपित ज़मानत पर बाहर हैं। 

चार्जशीट के मुताबिक़, तीनों आरोपितों ने 4 जून की घटना के एक सप्ताह बाद कथित रूप से पीड़िता का अपहरण और सामूहिक बलात्कार किया था। तीस हज़ारी कोर्ट 10 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई करेगा। इससे पहले जाँच एजेंसी ने अतिरिक्त दस्तावेज़ दाखिल करने और अभियोजन पक्ष के समर्थन में बयान देने वाले गवाहों की सूची जमा करने के लिए समय माँगा था।

मीडिया में आई ख़बर के अनुसार, शुभम सिंह की माँ शशि सिंह कथित तौर पर पीड़िता को बहला-फुसलाकर 4 जून को विधायक के आवास पर ले गई थी।

ख़बर के अनुसार, दिल्ली की अदालत ने गुरुवार (3 अक्टूबर) को उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हुई कथित हत्या मामले में उसकी माँ का बयान दर्ज किया। इस मामले से जुड़े वकील ने बताया कि ज़िला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा के सामने दुष्कर्म पीड़िता की माँ और बहन ने बंद कमरे में अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (4 अक्टूबर) को भी आगे की कार्यवाही जारी रहेगी। वकील ने बताया कि अदालत के समक्ष बयान दर्ज कराते समय दुष्कर्म पीड़िता की माँ मृत पति के कपड़ों को देखकर भावुक हो गईं और रो पड़ीं जिसे देखते हुए अदालत ने शांत होने के लिए उन्हें कुछ समय दिया।

ग़ौरतलब है कि 4 जून 2017 को आरोपित कुलदीप सिंह सेंगर पर एक नाबालिग ने रेप का आरोप लगाया था और 11 जून को पीड़िता अचानक गायब हो गई। पुलिस ने नाबालिग को 20 जून को ओरैया से बरामद किया और अगले दिन उसे उन्नाव लाया गया। इस मामले की पूरी A से Z तक की कहानी जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

बहन राहिल ने की थी सपा के पूर्व मंत्री से लव मैरिज, भाई राहत ने बेरहमी से गला रेतकर मार डाला, फरार

यूपी के मेरठ में आन की खातिर एक भाई ने अपनी बहन की गला रेतकर हत्या कर दी। बहन का कसूर यह था कि उसने सपा सरकार में हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के उपाध्यक्ष रह चुके फारुख हसन से परिवार के विरोध के बावजूद कोर्ट मैरिज कर ली थी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित फरार हो गया।

घटना लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र के श्यामनगर की है। लिसाड़ीगेट के श्यामनगर गली नंबर छह निवासी मोहम्मद सईद अहमद की बेटी राहिल जहां (25) पेशे से नर्स थी। 7 साल पहले उसकी शादी अलीगढ़ में खुर्शीद नाम के शख्स से हुई थी। शादी के 5 साल बाद ही पति से विवाद हो गया था। जिसके बाद राहिल जहां ने पति से तलाक लेकर अपने दो बच्चों सहित मेरठ मे अपने मायके में रहने लगी थी। यहाँ उसने लिसाड़ी रोड पर एक क्लीनिक भी खोल लिया था। इसी बीच राहिल की मुलाकात सपा नेता फारुक हसन से हुई और दोनों के बीच प्यार हो गया। 

इसके बाद फारूक हसन ने राहिल जहां से कोर्ट मैरेज कर ली और मेरठ में ही किराए पर मकान लेकर रहने लगे। बता दें कि फारूक की ये तीसरी शादी थी। चार दिन पहले राहिल जहां का भाई राहत उसके घर पहुँचा और परिवार वालों की नाराजगी दूर कराने के लिए उसे मायके ले आया। राहत ने बुधवार (अक्टूबर 2, 2019) रात में राहिल को लस्सी में नशे की गोली मिलाकर पिला दी और फिर राहिल के हाथ पैर बाँधकर गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) सुबह तीन बजे धारदार हथियार से बहन राहिल का गला रेत डाला।

बहन का गला रेतने के बाद आरोपित भाई राहत उसकी मौत का इंतजार करता रहा। गला रेतने के बाद लहूलुहान बहन तड़पती रही, लेकिन भाई को जरा भी तरस नहीं आया। बहन की आखिरी साँस टूटने तक वह वहीं बैठा रहा। जब उसे बहन की मौत का यकीन हो गया तब वह कमरे से बाहर निकला। आँगन में चारपाई पर सो रही माँ को बताया कि बहन की तबीयत खराब हो गई है। माँ जैसे ही कमरे में गई तो राहत भाग निकला।

मृतका की माँ ने राहत के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया है। एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि राहत की गिरफ्तारी को पुलिस की दो टीम लगाई हैं। फारुक हसन से पूछताछ के लिए भी एक टीम सरूरपुर भेजी गई थी। वह भी फरार है।

दिल्ली सहित कई शहरों को दहलाने की फ़िराक में जैश आतंकी, सेब के बाग में ऐसे बनाई गई तबाही की योजना

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म होने के बाद से ही पाकिस्तान बुरी तरह से बौखलाया हुआ है। इसी के मद्देनज़र वो भारत में किसी आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की फ़िराक में है। नवभारत टाइम्स ने बेहद विश्वसनीय सूत्रों का हवाला देकर अपनी ख़बर में लिखा है कि क़रीब एक दर्जन आतंकी राजधानी दिल्ली में मौजूद हैं। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में बैठे आतंकी सरगनाओं ने जैश के तीन-चार प्रशिक्षित ग्रुप को बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए ‘करो या मरो’ का टास्क देकर दिल्ली, कश्मीर और पंजाब भेजा है।

ख़बर के अनुसार, ख़ुफ़िया एजेंसियों ने आतंकवादियों की बातचीत के जो कोड इंटरसेप्ट किए हैं, उनमें ‘दिवाली के पटाखे’, ‘कश्मीरी सेबों की दिल्ली में सप्लाई’ जैसी बातें शामिल थीं। गृह मंत्रालय में उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि दिल्ली और मुंबई में सभी प्रमुख एयरपोर्ट, बंदरगाह, प्रमुख प्रतिष्ठानों एवं सरकारी कार्यालयों पर सुरक्षा सख़्त कर दी गई है। ख़बर है कि पंजाब में सितंबर के महीने में ड्रोन के ज़रिए हथियार गिराए जाने के बाद पंजाब और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही सतर्क किया जा चुका है।

दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने के लिए गुप्त योजना पाँच दिन पहले क़रीब 900 किलोमीटर दूर कश्मीर में सेब के बाग में तैयार हुई। इसका खाका आतंकी संगठन जैश के जम्मू-कश्मीर कमांडर अबु उस्मान ने तैयार किया और इस गुप्त योजना को नाम दिया ‘डी’। कश्मीर के बांदीपुरा ज़िले में सेब के बाग में पाँच दिन पहले पाकिस्तान के प्रशिक्षित आतंकवादियों की सीक्रेट मीटिंग हुई। 

इस मीटिंग में अबु उस्मान ने दावा किया कि हमारे भाई इन जगहों पर पहले ही पहुँच चुके हैं। इस मीटिंग में एक पाकिस्तानी और दो कश्मीरी आतंकी मौजूद थे। अबु उस्मान के पास एक स्नाइपर राइफल थी, जबकि बाकी तीन आतंकियों के पास एके-47, पिस्टल और हैंड ग्रेनेड मौजूद थे। इस इनपुट को जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और दिल्ली पुलिस के साथ शेयर किया गया है।

अलर्ट मिलने के बाद सुरक्षा बढ़ाने के आदेश जारी किए गए हैं और खुफ़िया जानकारी जुटाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। अलर्ट मिलने के बाद स्पेशल सेल ने दिल्ली में कई इलाक़ों में सर्च अभियान चलाया था। सभी ज़िला डीसीपी, एसपी, एसएचओ को आगाह किया गया। इसके अलावा, उत्तर भारत के सभी एयरपोर्ट पर हाईअलर्ट कर दिया गया है। 

ग़ौरतलब है कि दिल्ली में जैश के 4 आतंकी मौजूद होने की ख़बर सामने आई थी। ख़ुफ़िया एजेंसी ने ख़ुद इसके बारे ख़ुलासा किया था। यह भी पता चला था कि इन आतंकवादियों के पास आधुनिक हथियार हैं और ये किसी बड़े हमले को अंजाम देने की फ़िराक में हैं।

पेरिस में चार पुलिसकर्मियों की चाकू घोंपकर हत्या, हमलावर ने हाल ही में अपनाया था इस्लाम: रिपोर्ट्स

फ्रांस की राजधानी पेरिस में पुलिस मुख्यालय में एक व्यक्ति ने गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को चार अधिकारियों की चाकू से गोदकर हत्या कर दी। बता दें कि हमलावर पुलिस मुख्यालय में ही कार्यरत था और बताया जा रहा है कि हमलावर ने हाल ही में इस्लाम धर्म अपनाया था। फ़िलहाल, हमलावर को पुलिस ने गोली मारकर ढेर कर दिया।

यूनियन के अधिकारी यवेस लेफेबव्रे ने कहा कि हमला गुरुवार दोपहर 1 बजे के आसपास नोट्रेडम कैथेड्रल के पास स्थित मुख्यालय में हुआ। घटना के बाद पूरे पुलिस मुख्यालय की घेराबंदी कर दी गई। बीएफएम रिपोर्ट के मुताबिक हमलावर ने 18 महीने पहले ही इस्लाम धर्म अपनाया था। हालाँकि, फिलहाल इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पेरिस के प्रोसीक्यूटर रेमी हेटिज ने बताया कि हमलावर पुलिस खुफिया इकाई के सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) विभाग में कार्यरत था। उन्होंने बताया कि मारे गए लोगों में तीन पुरूष और एक महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक हमलावर 20 वर्षों से पुलिस मुख्यालय में काम कर रहा था। इस दौरान उसके बर्ताव में कभी कोई समस्या दिखाई नहीं दी।

इस हमले के बाद आंतरिक मंत्री कास्टानेर ने ग्रीस और तुर्की की अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। पेरिस के परिवहन विभाग ने कहा है कि पुलिस मुख्यालय के निकटतम मेट्रो स्टेशन को सुरक्षा कारणों के चलते बंद कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक पेरिस पुलिस मुख्यालय के आसपास की जगह को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। हालाँकि, अब तक हमलावर के उद्देश्यों के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन बताया जा रहा है कि उसके और उसके सुपरवाइजर के बीच कथित तौर पर ‘तनाव’ थे।

कपिल सिब्बल और ‘पत्रकारों को Bitch कहने वाली’ उनकी पत्नी से बरखा दत्त ने मॉंगे सूद समेत ₹74 लाख

लोक सभा चुनाव हारने के 6 महीने के भीतर ही पत्रकारिता के समुदाय विशेष में दरारें पड़नी शुरू हो गईं हैं। हालिया मामले में एनडीटीवी की एंकर रहीं बरखा दत्त ने अपने पिछले चैनल के प्रमोटर और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रमिला सिब्बल से ₹74 लाख सूद समेत लेने के लिए अदालत में मुकदमा दायर किया है। मामले के लिए 9 जनवरी को सुनवाई की तारीख मिली है।

NDTV के अपने कार्यकाल में राडिया कांड और उसके बाद वाशिंगटन पोस्ट में भारत और हिन्दुओं को कोसने के लिए जानी जाने वालीं बरखा दत्त ने लोक सभा चुनावों में कॉन्ग्रेस व वामपंथी मीडिया की शिकस्त के कुछ ही समय बाद ट्वीट किया था कि तिरंगा टीवी के कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना तथा मुआवजे के निकाला जा रहा है। उन्होंने प्रमिला सिब्बल पर चैनल की महिला कर्मचारियों को “कुतिया” कह कर अपमानित करने का आरोप भी लगाया था

बरखा के आरोपों में इसके अतिरिक्त खुद को और चैनल के अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों को एक साल से अधिक समय से वेतन न दिए जाने का भी आरोप था। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि बिना कर्मचारियों को वेतन दिए सिब्बल दम्पति का लंदन में ऐश करना विजय माल्या जैसा कृत्य है। इसके लिए उन्होंने खुद को सिब्बल द्वारा मानहानि के मुकदमे से धमकाए जाने की बात भी ट्विटर पर कही थी।

उनके आरोपों के जवाब में सिब्बल ने दावा किया था कि यह सब ट्वीट करने के पहले ही बरखा दत्त को चैनल से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके पीछे उन्होंने कारण अनुशासनहीनता बताया था। इसके अलावा उन्होंने दत्त को एक भी पैसा देने से साफ़ इनकार कर दिया था।

JNU में भिड़े लेफ्ट-ABVP, केन्द्रीय मंत्री के भाषण को लेकर कटा बवाल

प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री (MoS-PMO) डॉ. जितेन्द्र सिंह के भाषण के बाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के दक्षिणपंथी और वामपंथी गुटों के छात्र आपस में भिड़ गए। दोनों तरफ़ से जमकर हुई नारेबाजी से शुरू हुआ बवाल हाथापाई तक जा पहुँचा। आलम यह था कि देखने वालों को हाल ही में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ जाधवपुर विश्वविद्यालय में हुई बदसलूकी के दोहराए जाने की आशंका लगने लगी।

मीडिया की खबरों में बताया जा रहा है कि डॉ. जितेन्द्र सिंह JNU में जम्मू-कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 पर आयोजित एक सेमिनार में वक्तव्य देने पहुँचे थे। वहाँ उनके भाषण के पहले वामपंथी छात्र संगठनों ने जम कर नारेबाजी की और बवाल काटा। उल्लेखनीय है कि JNU वामपंथी विचारधारा और राजनीति का गढ़ माना जाता है। विरोध-प्रदर्शन स्थल पर सरकार के विरोध के अलावा “आरएसएस मुर्दाबाद” और “ABVP हो बर्बाद” के भी नारे लगे। जवाब में कुछ छात्रों को “भारत माता की जय” का घोष करते हुए भी सुना जा सकता है।

यह बवाल बाबुल सुप्रियो के साथ हुई हिंसा की याद दिलाने वाला था। पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ भी वामपंथी छात्रों ने जाधवपुर विश्वविद्यालय में बदसलूकी हुई थी, जो आगे बढ़कर हाथापाई तक पहुँच गई थी। इसके बाद ABVP वालों ने भी जाधवपुर में जमकर तोड़फोड़ की थी

आज तक की खबर के अनुसार जब वामपंथी संगठन AISA के छात्रों ने जितेन्द्र सिंह के भाषण के बीच में टोकाटाकी और नारेबाजी की, तो जवाब में ABVP वालों ने भी “कश्मीर से कन्याकुमारी, भारत माँ एक हमारी” का नारा लगाना शुरू कर दिया। गौरतलब है कि गत 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा राज्य का पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र-शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।

‘Halal only’ बना McDonald’s के गले की हड्डी, दूसरा क़ानूनी नोटिस जारी

फ़ास्ट फ़ूड चेन McDonald’s के लिए ‘केवल हलाल’ मांस परोसने की नीति गले की हड्डी बनती जा रही है। इसके खिलाफ उन्हें जारी हुए पहले क़ानूनी नोटिस का जवाब देने में ज़रूरत से ज्यादा समझदार बनने के चक्कर में दूसरी नोटिस उनके दरवाज़े पहुँच गई है। अधिवक्ता ईशकरण सिंह भंडारी ने यह नोटिस अपने ट्विटर हैंडल पर साझा की है।

पहली नोटिस हरीश शर्मा ने अधिवक्ता ईशकरण सिंह भंडारी के ज़रिए McDonald’s India और इसके एमडी अमित जटिया और विक्रम बक्शी को 26 अगस्त को भेजा था, जब McDonald’s ने यह स्वीकार किया था कि वह केवल हलाल मांस ही अपने रेस्तरां में परोसता है। चूँकि हलाल मांस के कारोबार में कोई गैर-मुस्लिम शामिल नहीं हो सकता, इसलिए यह गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव था। यही नहीं, जानवरों की हत्या का ‘हलाल’ तरीका ‘झटका’ के मुकाबले कहीं अधिक ‘क्रूर’ होता है- अतः केवल और केवल वही मांस परोसने और झटका का विकल्प न रखने से McDonald’s  ‘हलाल’ में निहित क्रूरता को न पसंद करने वालों की मज़हबी/आस्था से जुड़ी भावनाओं का भी असम्मान कर रहा था।

पहली नोटिस में McDonald’s के उस ट्वीट का हवाला दिया गया था, जिसमें वह अपने प्रतिष्ठानों में मौजूद सारे मांस के हलाल होने का दावा करता है। नोटिस में उससे झटका मांस को लेकर के उसकी नीति और हलाल मांस के साथ जुड़ी उपर्युक्त समस्याओं के बारे में स्पष्टीकरण की माँग की गई थी। इसके अतिरिक्त ‘केवल हलाल’ की नीति से SC/ST के विरुद्ध भी भेदभाव और ‘अस्पृश्यता’ सदृश व्यवहार का मामला बन सकता है, क्योंकि हिन्दू कसाई आम तौर पर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के बीच से ही आते हैं।

इन्हीं सवालों का जवाब जब McDonald’s से माँगा गया तो उसने बेहद ‘लटकाने वाला’ जवाब भेजा कि उसे नोटिस का अध्ययन करने के लिए और समय चाहिए। पहली नोटिस में उन्हें 15 दिन का समय दिया गया था।

McDonald’s को क्या कहें, सरकार भी हलाल-सर्टिफाइड’

McDonald’s तो एक निजी प्रतिष्ठान है। हलाल को विशेष तरजीह और झटका मांस के साथ भेदभाव तो खुद सरकार भी करती है- राष्ट्रपति भवन, भारतीय संसद तक सभी जगह केवल हलाल मांस ही परोसा जाता है। यही नहीं, जब कोई हलाल से अलग झटका मांस बेचने या उसका उत्पादन करने की कोशिश करता है तो और लोगों की बात तो अलग, सरकारी अमला भी उसे गैर-क़ानूनी रूप से हतोत्साहित करने में जुट जाता है। (इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए झटका सर्टिफिकेशन अथाॅरिटी के चेयरमैन रवि रंजन सिंह से ऑपइंडिया की विशेष बातचीत यहाँ पढ़ें।)

गौरतलब है कि जब हमने रेलवे से इस संदर्भ में बात की तो रेलवे के एक अधिकारी ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि IRCTC खुद से झटका या हलाल में कोई अंतर नहीं करता। वह अंतरराष्ट्रीय मानककीकरण संस्था (International Organization for Standardization, ISO) और HACCP (Hazard Analysis and Critical Control Point, भोजन सामग्री में निहित जोखिमों को कम करने की प्रणाली) के मानकों के अनुसार फ्रोज़ेन चिकन के सप्लायर्स की छँटाई (shortisting) करती है। वह माँस के झटका या हलाल ही होने की शर्त अपने टेंडर दस्तावेज़ों में नहीं लिखती। भारत के भोज्य पदार्थ नियामक FS&SAI (Food Safety and Standards Authority of India) के मानकों में भी झटका या हलाल का ज़िक्र नहीं है।

अपडेट: अक्टूबर 4, 2019, 08:00 PM

झटका मांस के साथ भेदभाव- सरकार भी शामिल, सरकारी अमला भी

राहुल के खास बने सोनिया की फॉंस: हरियाणा में तंवर का इस्तीफा, महाराष्ट्र में निरुपम ने हड़काया

राहुल गॉंधी के इस्तीफे के बाद भले सोनिया गॉंधी ने बतौर अंतरिम अध्यक्ष कॉन्ग्रेस की कमान भले सॅंभाल ली हो, लेकिन बगावत पर उतारू नेता मानने के मूड में नहीं दिख रहे। हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने चुनाव समितियों से इस्तीफा दे दिया है। महाराष्ट्र में मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी पार्टी छोड़ने की धमकी दी है।

दोनों राज्यों में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। निरुपम और तंवर दोनों टिकट बॅंटवारे में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। उल्लेखनीय है कि तंवर राहुल के काफी करीबी माने जाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चेतावनियों के बावजूद राहुल ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से नहीं हटाया था। सोनिया के कमान सॅंभालने के बाद ​हरियाणा में पार्टी की कमान कुमारी शैलजा को सौंप दी गई थी। साथ ही तंवर की अनदेखी कर हुड्डा को आगे किया गया।

तंवर ने गुरुवार को सोनिया को अपना इस्तीफा भेजा। तीन पन्ने के इस्तीफे में उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों के चयन में धांधली का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि उनकी अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि पांच साल आठ माह तक हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को मजबूत किया। इसके कारण लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट छह फीसदी बढ़ा। उनके नेतृत्व में पार्टी ने प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाई, लेकिन चुनाव के समय उन्हें किनारे लगा दिया गया।

इससे पहले बुधवार को तंवर ने अपने समर्थकों के साथ कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्होंने सोहना विधानसभा सीट का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।

दूसरी ओर, निरुपम ने अपने द्वारा सुझाए गए नाम को खारिज किए जाने के बाद गुरुवार को घोषणा की कि वह
कॉन्ग्रेस के प्रचार अभियान में शामिल नहीं होंगे। पूर्व सांसद ने कहा कि पार्टी नेतृत्व उनसे जिस तरह का व्यवहार कर रहा है, उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब वह पार्टी को अलविदा कह देंगे।

गौरतलब है कि निरूपम को इस साल लोकसभा चुनाव से पहले मार्च में मुंबई कॉन्ग्रेस प्रमुख के पद से हटा दिया गया था। उन पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप था। उनकी जगह मिलिंद देवड़ा को मुंबई कॉन्ग्रेस का प्रमुख बनाया गया था। आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद देवड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल मुंबई
कॉन्ग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ हैं।

कॉन्ग्रेस में टिकट पर कलह: अब संजय निरुपम ने नेतृत्व को हड़काया, कहा- प्रचार नहीं करूॅंगा

महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। दोनों ही राज्यों में कॉन्ग्रेस पहले से कई चुनौतियों से जूझ रही है। गुटबाजी चरम पर है और कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। अब टिकट बॅंटवारे ने दोनों राज्यों में पार्टी की भीतरी लड़ाई सार्वजनिक कर दी है।

टिकट बॅंटवारे के बाद हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर और मुंबई के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। निरुपम ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी है। एक के बाद एक दो ट्वीट कर उन्होंने कहा कि शायद पार्टी को अब उनकी जरूरत नहीं रही।

उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि पार्टी को अब मेरी सेवाओं की जरूरत नहीं है। मुंबई में मैंने विधानसभा चुनाव के लिए सिर्फ एक नाम की सिफारिश की थी। मुझे पता चला है कि उसे भी खारिज कर दिया गया। मैंने नेतृत्व को पहले ही बताया था कि ऐसी स्थिति में मैं चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लूॅंगा। यह मेरा आखिरी फैसला है।” एक और ट्वीट कर उन्होंने लिखा, “मुझे उम्मीद है कि पार्टी को गुड बाय कहने का वक्त नहीं आएगा। लेकिन, लीडरशिप जिस तरह से मेरे साथ बर्ताव कर रही है, उससे लगता है कि अब वह दिन दूर नहीं है।”

इससे पहले बुधवार को हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने विधानसभा चुनाव के टिकटों के बॅंटवारे में धांधली का आरोप लगाते हुए कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्होंने सोहना विधानसभा सीट का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।