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‘विश्व में सबसे ज्यादा सुखी मुस्लिम भारत में मिलेगा, परसियन की पूजा-मूल धर्म केवल यहीं सुरक्षित, क्योंकि हम हिंदू हैं’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को भुवनेश्वर में बुद्धिजीवियों की एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ को किसी से नफरत नहीं है। आरएसएस का उद्देश्य भारत में परिवर्तन के लिए सभी समुदायों को संगठित करने का है, न कि सिर्फ हिंदू समुदाय को। भागवत ने कहा, “राष्ट्रवाद लोगों को डराता है क्योंकि वह तुरंत इसे हिटलर और मुसोलिनी से जोड़ देते हैं। लेकिन भारत में राष्ट्रवाद ऐसा नहीं है क्योंकि यह राष्ट्र अपनी सामान्य संस्कृति से बना है।”

भारत की विविधता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश एक सूत्र से बँधा हुआ है। यहाँ के लोग विविध संस्कृति, भाषा और भौगोलिक स्थानों के बावजूद खुद को भारतीय मानते हैं। इस अद्वितीय अहसास के कारण मुस्लिम, पारसी या अन्य मजहबों में विश्वास रखने वाले लोग खुद को यहाँ सुरक्षित समझते हैं। उन्होंने कहा, “यहूदी मारे-मारे फिरते थे अकेला भारत है, जहाँ उनको आश्रय मिला। परसियन (पारसी) की पूजा और मूल धर्म केवल भारत में सुरक्षित हैं। विश्व के सर्वाधिक सुखी मुस्लिम भारत में मिलेंगे। ये क्यों है? क्योंकि हम हिंदू हैं।”

संघ प्रमुख का कहना है कि समाज में बदलाव की दिशा में सही तरीका यह है कि ऐसे उत्कृष्ट इंसान तैयार किए जाएँ, जो समाज को बदलने के साथ ही देश की कायापलट में अहम भूमिका निभा सकें, क्योंकि 130 करोड़ लोगों को एक साथ बदलना मुमकिन नहीं है। भागवत ने कहा कि समाज में बदलाव लाना जरूरी है ताकि देश का भाग्य बदले। इसके लिए ऐसे लोगों को तैयार करना होगा, जिनका चरित्र साफ सुथरा हो, जो प्रत्येक सड़क, गाँव और शहर में नेतृत्व रखने की क्षमता रखें।

आगे उन्होंने कहा, “हमारी किसी के प्रति कोई घृणा नहीं है। एक बेहतर समाज बनाने के लिए हमें एक साथ आगे बढ़ना चाहिए जो देश में बदलाव ला सकें और उसे विकास में मदद दे सकें। यह हमारी इच्छा है कि आरएसएस ठप्पा हट जाए और आरएसएस और समाज मिलकर एक समूह के तौर पर काम करे और इसका श्रेय भी समाज को ही दिया जाए। हम कोई श्रेय नहीं लेना चाहते।”

उल्लेखनीय है कि संघ प्रमुख शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को नौ दिन के दौरे पर ओडिशा पहुँचे। यहाँ वो अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की पहली बैठक में शिरकत करेंगे। इस दौरान उनके साथ भैयाजी जोशी भी होंगे। उन्होंने बताया कि आरएसएस कार्यकारिणी समिति की बैठक एक निजी विश्वविद्यालय में 16 से 18 अक्टूबर तक होगी।

योगी आदित्यनाथ ने की शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड संपत्तियों में गड़बड़ियों की CBI जाँच की सिफारिश

योगी सरकार ने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में अनियमितता की जाँच सीबीआई (CBI) से कराने की सिफारिश की है। प्रयागराज और लखनऊ में दर्ज मुकदमों को इसका आधार बनाया गया है। यूपी के अपर मुख्य गृह सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) रात को इसकी सिफारिश की।

अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा अनियमित रूप से क्रय-विक्रय और स्थानांतरित की गई वक्फ संपत्तियों की जाँच और विवेचना सीबीआई से कराए जाने का फैसला किया गया है। इस संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा कोतवाली प्रयागराज और थाना हजरतगंज लखनऊ में मुकदमा दर्ज है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में सचिव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय भारत सरकार और निदेशक सीबीआई को पत्र भेज दिया गया है। पत्र में प्रयागराज के कोतवाली में 26 अगस्त 2016 को दर्ज शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड और 27 मार्च 2017 को हजरतगंज कोतवाली में दर्ज मुकदमों की जाँच सीबीआई से कराए जाने का अनुरोध किया गया है। बता दें कि 27 मार्च को दर्ज शिकायत में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों पर 27 लाख रुपए लेकर कानपुर में वक्फ की बेशकीमती संपत्ति का पंजीकरण निरस्त करने और पत्रावली से महत्वपूर्ण कागजात गायब करने का आरोप है।

इस मामले में पहली एफआईआर प्रयागराज के कोतवाली थाने में दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में इमामबाड़ा गुलाम हैदर त्रिपोलिया (पुरानी जीटी रोड) पर अवैध रूप से दुकानों का निर्माण शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के द्वारा शुरू कराया गया था। इसे क्षेत्रीय अवर अभियंता द्वारा निरीक्षण के बाद पुराने भवन को तोड़कर किए जा रहे अवैध निर्माण को बंद करा दिया था। बाद में फिर से निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। बता दें कि यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा गलत तरीके से तमाम जमीनों की खरीद और ट्रांसफर कराने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद सीबीआई जाँच कराने की सिफारिश की गई।

‘आजादी मार्च’ से डरे इमरान खान: सत्ता खोने की डर से बोले- बातचीत का रास्ता खोजो

कश्मीर के मुद्दे पर दुनियाभर में किरकिरी करा चुके पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अब अपने ही मुल्क में घिरते नजर आ रहे हैं। देश में उनकी सरकार के खिलाफ आवाजें बुलंद हो रही हैं। जिससे निपटने के लिए इमरान हर दाँव चलना चाहते हैं। कुछ दिनों पहले ही जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के नेता मौलाना फजलुर्रहमान ने इमरान सरकार को सत्ता से हटाने के लिए इस्लामाबाद तक ‘आजादी मार्च’ निकालने का ऐलान किया था अब इमरान सरकार उनके सामने घुटने टेकने को तैयार हैं।

इमरान खान ने अपने राजनीतिक सहयोगियों से मौलाना फजलुर्रहमान के साथ बातचीत करने के लिए रास्ता निकालने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि इमरान खान ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में सरकार के प्रवक्ताओं के साथ बैठक के दौरान यह निर्देश दिए। बता दें कि फजलुर्रहमान ने संघीय राजधानी में सरकार के खिलाफ 31 अक्टूबर को बैठक बुलाई है। मौलाना ने इमरान को चेतावनी दी है कि अगर उनकी सरकार ने आजादी मार्च रोकने की कोशिश की तो पूरे पाकिस्तान में चक्का जाम कर दिया जाएगा।

पीएमओ कार्यालय की बैठक में शामिल प्रधानमंत्री के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरान यह फैसला लिया गया है कि सरकार को उनकी पार्टी की माँगों का पता लगाने के लिए जेयूआई-एफ प्रमुख से पहुँच स्थापित करनी चाहिए और इस मुद्दे पर गतिरोध नहीं बढ़ाना चाहिए।

प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री का विचार है कि जेयूआई-एफ प्रमुख दो मुख्य विपक्षी दलों पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की कतार में हैं। बैठक में कहा गया कि पीपीपी और पीएमएल-एन दोनों, जो क्रमश: दो और तीन बार सत्ता में रहे, अब एक मंच पर पहुँच गए हैं और वह देश में छोटे दलों की मदद लेने के लिए मजबूर हैं।

वहीं, धार्मिक मामलों के संघीय मंत्री नूरुल हक कादरी ने स्पष्ट किया कि उन्हें मौलाना फजलुर रहमान के साथ बातचीत करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। एक बयान में मंत्री ने कहा कि मीडिया में चल रही उन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है कि प्रधानमंत्री ने उन्हें इस मामले को देखने के लिए एक समिति बनाने का काम सौंपा है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक मौलाना रहमान को संघीय राजधानी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उन्हें पंजाब या खैबर पख्तूनख्वा में गिरफ्तार किया जा सकता है।

छोटे कपड़े पहनकर नाइट पार्टी में जाने को कहता था इमरान, नूरी ने नहीं मानी बात तो दे दिया तीन तलाक!

देश में एक ओर जहाँ तीन तलाक पर कानून बनने के बाद भी उस पर बहस नहीं रुक रही, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े मामले भी कम होने का नाम नहीं ले रहे। हालिया मामला बिहार के पटना का है। जहाँ नूरी फातमा नाम की महिला को उसके पति ने सिर्फ़ इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि उसने मॉर्डन बनने और शराब पीने से मना कर दिया था। मिली जानकारी के अनुसार महिला ने इस संबंध में महिला आयोग को शिकायत की है और अपने पति को नोटिस भी भेजा।

नूरी फातमा के अनुसार उसका निकाह इमरान मुस्तफा से 2015 में हुआ था। इसके बाद दोनों दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। लेकिन यहाँ आने के कुछ दिन बाद उसने मुझसे मॉडर्न लड़कियों की तरह रहने को कहा, वो चाहता था कि नूरी छोटे कपड़े पहने, नाइट पार्टी में जाएँ, और शराब पिए। लेकिन जब उसने ऐसा करने से मना किया तो वो उसे हर रोज मारने लगा।

“मुस्‍तफा चाहता था कि मैं छोटे कपड़े पहनूँ, रात में पार्टी में चलूँ और शराब का सेवन करूँ। जब मैंने ऐसा करने से मना कर दिया तो उसने हर दिन मेरी पिटाई की।”

महिला ने आरोप लगाया, “कई सालों तक मुझपर अत्याचार करने के बाद, कुछ दिन पहले उसने मुझे उसका घर छोड़ने को कहा। लेकिन जब मैंने मना किया, तो उसने मुझे तीन तलाक दे दिया।”

इस मामले के संबंध में बिहार राज्य की महिला आयोग अध्यक्ष दिलमानी मिश्रा ने बताया कि महिला का पति उसे हमेशा परेशान करता था और वे उसका जबरन दो बार गर्भपात भी करवा चुका था। लेकिन अब आयोग ने इस मामले पर संज्ञान ले लिया है। उन्होंने बताया कि एक सितम्बर को तलाक दिया गया था और उन्होंने महिला के पति को नोटिस भेज दिया है।

गौरतलब है कि 1 अगस्त को राष्ट्रपति कोविंद ने तीन तलाक को अपराध करार देने वाले ऐतिहासिक विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। उनके हस्ताक्षर के साथ ही तीन तलाक कानून बन गया था। जिसको 19 सितंबर 2018 से लागू माना जाता है।

राफ़ेल होता तो एयर स्ट्राइक के लिए पाकिस्तान न जाना पड़ता, भारत से ही तबाह कर देते आतंकी कैंप’

हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार जोरों पर है। चुनाव प्रचार के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का ज़िक्र करते हुए कहा, “अगर हमारे पास राफ़ेल लड़ाकू विमान होते, तो हमें पाकिस्तान जाने की ज़रूरत नहीं होती। हम भारत में बैठकर भी वहाँ के आतंकी शिविरों को तबाह कर सकते थे।”

शस्त्र पूजा को लेकर कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया पर रक्षा मंत्री ने कहा, “मैंने राफ़ेल पर ओम लिखकर रक्षाबंधन बाँधा तो कॉन्ग्रेस ने इसका स्वागत करने की बजाय विवाद खड़ा कर दिया। कॉन्ग्रेस नेताओं के ऐसे बयान पाकिस्तान को मज़बूत करते हैं।” वे हरियाणा के करनाल में रैली को संबोधित कर रहे थे।

रैली को संबोधित करते हुए राजनाथ ने जनता से पूछा कि क्या उनके घरों में ‘ओम’ नहीं लिखा जाता? क्या सिख एक ओंकार नहीं कहते? क्या मुस्लिम आमीन नहीं कहते? इसमें ग़लत क्या है? लेकिन कॉन्ग्रेस के लोग इसे साम्प्रदायिक बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने शस्त्र पूजा की तो उस समय वहाँ सभी धर्मों के लोग उपस्थित थे। कॉन्ग्रेस को स्वागत इसका स्वागत करना चाहिए, लेकिन यह पार्टी बिना कुछ सोचे-समझे आलोचना कर रही है। इसके लिए जनता को कॉन्ग्रेस को मुँहतोड़ जवाब देना चाहिए।

खट्टर सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने हरियाणा की पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर भी निशाना साधा। राजनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जमीनी स्तर पर काम किया है। यहॉं के हिसाब से सरकार चलाई है। कॉन्ग्रेस और इनेलोद के मुख्यमंत्री तो दिल्ली के इशारों पर हरियाणा में सरकार चलाते थे।

PM मोदी की भतीजी का पर्स छीनने वाले झपटमार शिकंजे में, नबी करीम थाने की पुलिस ने किया गिरफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भतीजी दमयंती बेन मोदी का पर्स छीनकर भागने वाले दोनों झपटमारों को नबी करीम थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये गिरफ्तारी हरियाणा के सोनीपत स्थित एक गाँव से आज सुबह हुई। झपटमारों की पहचान बादल और नोनु के रूप में हुई है, जो कि सदर बाजार के मूल निवासी हैं।

दैनिक जागरण पर प्रकाशित खबर में से पता चला कि दोनों पेशे से झपटमार है और शादीशुदा हैं। इनके पास से पुलिस ने छीना हुआ सामान बरामद कर लिया है। कहा जा रहा है कि नबी करीम थाने के पुलिस ने इनमें से एक के साले को पकड़ लिया था, जिससे इन दोनों की जानकारी उन्हें मिलती रही।

उल्लेखनीय है कि पीएम की भतीजी होने के कारण पुलिस पर झपटमारों को जल्द से जल्द पकड़ने का दबाव बना हुआ था। जिसके चलते पुलिस अपनी ओर से हर मुमकिन कोशिश कर रही थी। पूरे मामले पर आला अधिकारियों की नजर थी और जिला पुलिस, स्पेशल सेल व क्राइम ब्रांच की 20 से ज्यादा टीमें इन्हें दबोचने के लिए प्रयासरत थी। लेकिन बावजूद इसके कहा जा रहा है कि जहाँ ये घटना घटी, वहाँ की उत्तरी जिला पुलिस को झपटमारों को पकड़ने में सफलता नहीं मिली, बल्कि मध्य जिला के नबी करीम थाना पुलिस के प्रयास सफल हुए और इन लूटेरों को गिरफ्तार किया गया।

इससे पहले बता दें कि इन झपटमारों को खोजने के प्रयास में इन युवकों की सीसीटीवी फुटेज सामने आई थी। जिसके बाद दोनों लुटेरों की पहचान हो गई थी और इन्हें ढूँढने के लिए हर अनुमानित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही थी।

इस घटना के संबंध में लोगों का कहना था कि राज निवास मार्ग पर आए दिन झपटमारी की वारदातें होती रहती हैं। यहाँ पुलिस की मुस्तैदी दस बजे के बाद बढ़ती है इसलिए झपटमार सुबह-सुबह ही वारदात को अंजाम देते हैं।

गौरतलब है कि ये घटना जहाँ हुई, वो दिल्ली का हाई प्रोफाइल पॉश इलाका माना जाता है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल का आधिकारिक निवास घटनास्थल से महज़ कुछ ही दूरी पर स्थित है।

सलमान खुर्शीद ने कॉन्ग्रेस नेताओं पर जमकर निकाली भड़ास, कहा- राजनीति का ककहरा न जानने वाले दे रहे ज्ञान

पूर्व विदेश मंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद एक बार फिर अपनी ही पार्टी के नेताओं पर जमकर बरसे हैं। उन्होंने फेसबुक पोस्ट लिखकर उन नेताओं को खूब खरी-खोटी सुनाई है, जिन्होंने इसी हफ्ते राहुल गाँधी पर खुर्शीद के बयान को लेकर उन्हें हिदायत दी थी। खुर्शीद ने अपनी ही पार्टी के नेताओं के नाम लिखी पोस्ट में राहुल गाँधी के दोबारा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की भी पैरवी की।

बता दें कि खुर्शीद ने इसी हफ्ते कहा था कि राहुल गाँधी के ‘छोड़कर जाने’ के कारण पार्टी लोकसभा चुनावों में हार के कारणों पर आत्मचिंतन भी नहीं कर पाई थी। खुर्शीद ने अपनी टिप्पणी पर हुए विवाद को लेकर बड़ी सी पोस्ट लिखी। इसमें उन्होंने लिखा, “व्यक्तिगत विश्वासपात्रता या सियासी रणनीति के बारे में जिन्हें कुछ नहीं पता है, वे मुझे ज्ञान देते हैं तो हैरानी होती है। इसलिए, मैं एक बार उनको बता देना चाहता हूँ कि मैं विश्वास और निष्ठा को भरोसा और व्यक्तिगत पसंद मानता हूँ। वास्तविक या काल्पनिक भय और मतभेद से निकलकर आगे बढ़ने का समय है।”

आगे उन्होंने लिखा, “मैं व्यक्तिगत कृतज्ञता और इतिहास तथा भारतीय लोकतंत्र की समझ के कारण गाँधी परिवार का समर्थन करता हूँ।” कॉन्ग्रेस में अपने साथियों और ‘सुनने वालों’ को लिखे पत्र के रूप में की गई इस पोस्ट में खुर्शीद ने कहा कि गंभीर क्षणों में रणनीतिक चुप्पी में समझदारी होती है, लेकिन साथ-साथ बोलना भी सामूहिक भविष्य के लिए जरूरी होता है।

खुर्शीद ने कहा कि सिर्फ मृत मछलियाँ हीं पानी के बहाव के साथ बहती हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस बीजेपी की तरह नहीं है और न उसे कभी होना चाहिए। उन्होंने लिखा, “जब हमारे प्रवक्ता बीजेपी को काउंटर करने के हमारे दायित्वों की तरफ इशारा करते हैं तो उन्हें यह जरूर याद रखना चाहिए कि यह तभी संभव है जब हम बहुआयामी वैश्विक नजरिए और भयहीन अभिव्यक्ति पेश करेंगे।”

उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, “आखिर में, हमारे विरोधी और मीडिया कुछ भी कहें, लेकिन मैं मानता हूँ कि राहुल गाँधी को इस विशाल पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर वापसी करनी चाहिए, जिसे सोनियाजी प्रेरित करती रहेंगी।” आगे खुर्शीद ने लिखा, “हमें झटका लगा है लेकिन हम अपने प्रिय लोगों के दिलों को जीतने में फिर से कामयाब होंगे। कॉन्ग्रेस भारत को आजाद और परिपूर्ण जिंदगी दे सकती है, जहाँ एक-एक सिर बिना किसी भय या पक्षपात के ऊँचा उठा रहे।”

ममता ने माकपा पर लगाया आरोप, कहा- इनके कैडर BJP के लिए काम कर रहे, तभी हुई भाजपा की अप्रत्याशित जीत

लोकसभा चुनाव नतीजे आने के करीब 5 महीने बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी की अप्रत्याशित जीत के पीछे मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) का हाथ बताया है। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में 18 संसदीय सीटों पर जीत के साथ भाजपा राज्य में उभरकर सामने आई थी। अब ममता बनर्जी ने इस उभार और जीत के पीछे लिए माकपा पर बीजेपी के साथ मिले होने का आरोप लगाया है।

पार्टी के मुखपत्र ‘जागो बांग्ला’ के ताजा संस्करण में ममता ने माकपा पर भाजपा के साथ हाथ मिलाने और राज्य में इसे मजबूत होने में मदद करने का आरोप लगाया। अपने लेख के माध्यम से ममता ने कहा है कि भाजपा त्रिपुरा में माकपा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार कर रही है, इसके बावजूद माकपा को बंगाल में बीजेपी का विरोध करने के बजाय उसका साथ दे रही है और तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार की छवि धूमिल करने पर उतारू रहती है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ने स्पष्ट रूप से कहा कि माकपा ने भाजपा को न केवल त्रिपुरा की सत्ता तश्तरी में रखकर तोहफा में दिया बल्कि लोकसभा चुनाव में इसने बंगाल में अपने वोट भी भाजपा की झोली में डाल दिए। फलस्वरूप पश्चिम बंगाल में भगवा पार्टी को अप्रत्याशित सफलता मिली। ममता ने कहा कि माकपा पर उन्हें हैरत हो रही है।

ममता बनर्जी का कहना है कि त्रिपुरा में भाजपा को सत्ता सौंपने के बाद से वह मौन बैठी हुई है। बंगाल में उनके पास भाजपा को मजबूत करने का काम बचा हुआ है। ममता के अनुसार माकपा कैडर अब भाजपा की सम्पत्ति बन गए हैं। अब, कुछ सीटें जीत रहे हैं। माकपा के वोटों से जीतने के बाद अब भाजपा बंगाल में आतंक फैलाने के फिराक में है। ममता ने कहा कि वामपंथी वास्तव में भाजपा की बढ़त रोकने को लेकर गंभीर होते, तो वे राज्य में तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन ना कर त्रिपुरा के मुद्दे पर कोलकाता की सड़कों पर उतरते।

इसके साथ ही ममता बनर्जी ने आगे कहा, “आज भी त्रिपुरा के लोग हमें चाहते हैं, लेकिन हम उनकी इच्छा को पूरा करने में असमर्थ रहे हैं क्योंकि कुछ नेताओं ने संकीर्ण व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम भविष्य में इस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे और राज्य से बीजेपी का सफाया हो जाएगा।”

गाँधी संकल्प यात्रा’ के दौरान मनोज तिवारी पर फेंका गया पटाखा, बाल-बाल बचें

दिल्ली भाजपा ने शुक्रवार (अक्टूबर 11, 2019) को ‘गाँधी संकल्प यात्रा’ के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी समेत उनके नेताओं पर करावल नगर में पटाखा फेंकने के आरोप में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार को उत्तर पूर्व जिला की ओर से करावल नगर वेस्ट के दस फुटा से तुर्कमीरपुर में शनिबाजार तक गाँधी संकल्प यात्रा निकाली गई थी। जहाँ मनोज तिवारी 8 बजे के करीब अन्य नेताओं को संबोधित कर रहे थे, लेकिन तभी किसी ने उनपर पटाखा फेंक दिया। जिसके बाद भाजपा सांसद तिवारी ने इसे भाजपा कार्यक्रम में खलल डालने के लिए कायराना हरकत करार दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मनोज तिवारी ने बताया, “पटाखा मुझ पर और हमारे पूर्व विधायक मोहन सिंह बिष्ट पर आकर गिरा। मैं बाल-बाल बच गया लेकिन बिष्ट की बाजू में जख्म हो गया। उनका कुर्ता जल गया। अब दिल्ली भाजपा के मीडिया सह प्रमुख आनंद त्रिवेदी ने खजूरी खास थाने में शुक्रवार की देर रात शिकायत दर्ज करवाई है।”

इस मामले के संबंध में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले के संबंध में आईपीसी की धारा 285 के तहत केस दर्ज कर लिया है और पुलिस सीसीटीवी फुटेज खँगाल रही हैं।

वहीं बता दें कि इस घटना के होने से पूर्व भाजपा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा भारत के लिए आजादी हासिल करना और रामराज्य स्थापित करना महात्मा गाँधी का सपना था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नेतृत्व में साकार कर दिखाया। उन्होंने इस दौरान दिल्ली की वर्तमान सरकार पर राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग करने और सत्ता में बने रहने तरीके ढूँढ़ने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। ज्ञात हो कि इस यात्रा से पहले वे प्रदूषण कम होने को लेकर केजरीवाल सरकार के दावे पर पलटवार करते हुए ट्वीट कर श्वेत पत्र जारी करने की माँग भी कर चुके थे।

स्वरा भास्कर जिसके चुनाव प्रचार में गईं वही हार गया: कई बड़े ब्रांड्स ने किया किनारा, छलका दर्द

हमेशा अपनी बयानबाज़ी को लेकर सुर्खियाँ बटोरने वाली अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने एक बार बयान देते हुए कहा है कि बॉलीवुड में मुख्यधारा के लोगों को किसी भी मुद्दे को लेकर बोलते हुए, अपनी राय रखते वक़्त उन्हें संवेदनशील होना चाहिए साथ ही उन्हें इसका भी ध्यान रखना चाहिए कि वे मुद्दे का प्रतिनिध्तिव कैसे करते हैं। भले यह अनुभव मेरा अपना नहीं भी हो तो इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा गलत है। यही हमारी धार्मिक, जातिगत और लैंगिक पहचान के लिए भी सही है।

कुछ समय बाद स्वरा की एक नई फिल्म आने वाली है जोकि समलैंगिकता पर आधारित है। इस फिल्म में स्वरा भास्कर एक समलैंगिक के रोल में नज़र आएँगी। इस फिल्म में शबाना आज़मी के होने की भी बात कही जा रही है। अपनी इस फिल्म से पहले सुर्खियाँ बटोरने के लिए स्वरा ने एक बार फिर से राग अलापना शुरू कर दिया है। मगर इस बार उनके राग में एक ऐसा दर्द भी शामिल है जिसे समझने के लिए लोकसभा चुनाव में भाजपा को उखाड़ फेंकने का सपना देखने वाली स्वरा के जीवन की एक झलक देखनी पड़ेगी।

इसमें कोई दो राय नहीं कि कई मुद्दों पर मुखर होकर बोलने वाली स्वरा कभी झुकती नहीं हों लेकिन इसके चलते उन्हें कितनी बार मुसीबत का सामना करना पड़ता है।

स्वरा यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने कहा कि एक सार्वजानिक जीवन में आपको इस बात का ख़याल रखना चाहिए कि आप जितना लोकप्रिय होते हैं उतना ही आप विनाशकारी नकारात्मकता का भी शिकार होते हैं, अगर हम चाहते हैं कि ऐसे लोग ज़िम्मेदारी से किसी भी मुद्दे पर अपनी बात मुखर होकर सबके बीच रखें तो यह ज़रूरी है कि उसे लोग भी सपोर्ट करें, इसके लिए ज़रूरी है कि हमें अपने समाज को ऐसा बनाना होगा जो किसी को जिम्मेवारी लेने के लिए कटघरे में खड़ा न करे।

अपना असल दुःख बयाँ करते हुए स्वरा ने कहा कि उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान बेगुसराय में कन्हैया कुमार, एमपी में दिग्विजय सिंह, दिल्ली में आम आदमी पार्टी के राघव चढ्ढा और आतिशी मार्लेना और सीपीएम के अम्र राम के लिए प्रचार करने पर चार नामी गिरामी ब्रांड्स ने स्वरा भास्कर से नाता तोड़ दिया। इसके चलते हुए नुकसान पर अपना दुःख बयाँ करते हुए कहा कि मैं खुद को महान नहीं कह रही लेकिन इस सब के दौरान से गुज़र कर मैं इतना ज़रूर कह सकती हूँ कभी कभी अगर आप बड़ा रिस्क लेने की हिम्मत करते हैं तो उसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ता है क्योंकि अपनी राय रखने की एवज में शूट के दौरान कार पथराव भी हो सकता है। शायद यही वजह है कि हम देखते हैं कि क्यों सार्वजानिक जीवन में कोई भी व्यक्ति खुलकर किसी भी मुद्दे पर बोलने से क्यों बचता है।

यह किसी से छुपा नहीं है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को हटाने के लिए स्वरा भास्कर ने सारी हदें पार कर दी थीं, ट्विटर पर लोगों ने स्वरा को टारगेट करके पनौती तक लिख दिया था।