भारत सहित पूरी दुनिया में ट्विटर और ट्वीटडेक के ठप्प होने से लोग परेशान हैं। आज गाँधी जयंती होने के कारण सरकारी महकमों से लेकर मीडिया जगत तक, सभी ट्वीटर पर सक्रिय थे लेकिन ट्विटर ठप्प होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि माइक्रो ब्लॉगिंग साइट मंगलवार (अक्टूबर 1, 2019) से ही ठप्प है। हज़ारों यूजर्स ने इस सम्बन्ध में ट्विटर को रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद कम्पनी ने रिप्लाई करते हुए इस बात की पुष्टि की। इससे मीडिया जगत भी परेशान है।
ट्विटर ने बताया है कि ट्विटर और ट्वीटडेक पर लोगों को ट्वीट करने, ट्वीट शेड्यूल करने और नोटिफिकेशन एवं ट्रेंड्स वगैरह देखने में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कम्पनी ने यूजर्स को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इन खामियों को दूर कर लिया जाएगा। बता दें कि ट्वीटडेक का प्रयोग किसी ट्वीट को किसी निश्चित समय पर शेड्यूल करने के लिए किया जाता है। अधिकतर न्यूज़ पोर्टल्स भी समय-समय पर ट्वीट शेड्यूल कर लोगों तक ख़बरें पहुँचाते हैं।
We’ve been experiencing outages across Twitter and TweetDeck. You might have had trouble Tweeting, getting notifications, or viewing DMs. We’re currently working on a fix, and should be back to normal soon.
ट्विटर व ट्वीटडेक के ठप्प होने से यह सब बंद पड़ा हुआ है। दोपहर के समय ख़बर आई थी कि दोनों ही वेबसाइट्स ने फिर से काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन, कुछ ही मिनटों बाद यह फिर से ठप्प हो गया। बता दें कि जब फेसबुक, व्हाट्सप्प और इंस्टाग्राम जैसे ऐप्स काम करना बंद कर देते हैं, तब ट्विटर ट्रेंड्स के माध्यम से लोगों को पता चलता है कि ये काम नहीं कर रहे। अब जब ख़ुद ट्विटर ही ठप्प है, तो लोगों के पास कुछ खास विकल्प ही नहीं बचा है।
ज्ञात हो कि ट्वीटडेक किसी निश्चित कीवर्ड्स के आधार पर फिल्टर लगाकर ट्वीट्स को आपके सामने प्रस्तुत करता है। ट्वीटडेक क्रोम, फायरफॉक्स, इंटरनेट एक्स्प्लोरर और सफारी ब्राउजर्स पर काम करता है। यह विंडोज और मैक कमप्यूटर्ज दोनों पर ही काम करता है।
80 से अधिक मामलों में आरोपित उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और सपा सांसद आज़म खान से कल (मंगलवार, 1 अक्टूबर) निगम भर्ती घोटाले की जाँच कर रही एसआईटी (SIT) ने पूछताछ की। 122 सहायक अभियंताओं की बर्खास्तगी का कारण बन चुके इस मामले में रिटायर्ड आइएएस अफसर एसपी सिंह तथा तीन अन्य अधिकारियों पर भी जाँच का शिकंजा कसा हुआ है।
SIT जाँच के बाद निकलते हुए आजम खान का ‘दर्द’ मीडिया से बात करते हुए छलक आया। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसा हो सकता है कि चार बार मंत्री और 9 बार विधायक रह चुका इंसान बकरी चुराता फिरे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ऊपर यह दर्जनों मुकदमे पिछला लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही लादे जा रहे हैं, जबकि योगी सरकार तो ढाई साल से है।
जलनिगम में भर्ती 122 सहायक अभियंताओं की नियुक्तियॉं अगस्त 2017 में रद्द कर दी गई थीं। वहीं 1178 अवर अभियंता और लिपिक अभी भी पूर्ण वैतनिक रूप से कार्यरत हैं। योगी की पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में 1300 पदों पर हुई भर्तियों में अनियमितता की बात निकल कर सामने आई थी। इसके बाद योगी सरकार आई तो उसने मामले की जाँच SIT से कराने का निश्चय किया, जिसने 22 सितंबर, 2017 को जल निगम मुख्यालय में छापा मारा। तत्कालीन नगर विकास विभाग के सचिव और मामले के आरोपित एसपी सिंह पर नियमों को ताक पर रख कर 1300 लोगों की भर्तियाँ करने का आरोप है।
उस समय आजम खान नगर विकास मंत्री होने के अलावा जल निगम के अध्यक्ष भी थे। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में कई तरह की घपलेबाजी और अनियमितताओं के आरोप लगाए थे, जिनमें गलत मूल्यांकन का आरोप भी शामिल था। इसके उलट जल निगम के अधिकारियों का कहना था कि भर्तियाँ विभागीय परम्परा के ढर्रे पर ही की गईं थीं।
हरियाणा विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। भाजपा ने राज्य की ज्यादातर सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। इसमें एक नाम नौक्षम चौधरी का भी है। नौक्षम को पुन्हाना विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है। जिसके बाद उन्हें भाजपा की पोस्टर गर्ल कहकर बुलाया जा रहा है। बीजेपी ने मौजूदा विधायक रहीश खान का टिकट काटकर उन्हें उम्मीदवार बनाया है।
करीब एक माह पूर्व उन्होंने अपने गाँव पैमाखेड़ा में एक कार्यक्रम में भाजपा की ओर से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। लोगों का साथ मिला तो भाजपा ने उन्हें अपनी ओर से उम्मीदवार भी बना दिया।
नौक्षम लंदन में करोड़ों का पैकेज वाली नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ने आई हैं। उनके पिता रिटायर्ड जज और माता आइएस हैं। उन्होंने तीन विषयों में एमए किया हुआ हैं। पहले उनकी स्नातकोत्तर दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से हुई और बाद में लंदन में रहने के दौरान उन्हें वहाँ काम करने और करियर बनाने के कई मौक़े मिले।
दस भाषाओं की ज्ञाता अपनी पढ़ाई के दौरान राजनीति में भी सक्रिय थी। जानकारी के मुताबिक वह छात्र संघ नेता भी रह चुकी हैं। शायद यही कारण हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान कम समय में अच्छी-खासी भीड़ जुटाकर सबको हैरान कर दिया।
जानकारी के अनुसार 26 वर्षीय नौक्षम को लंदन में 3 वर्ष तक काम करने के बाद अपने देश की याद आई और उन्हें महसूस हुआ कि उनके घर, परिवार, राज्य को उन जैसे लोगों की जरूरत हैं। जिसके बाद उन्होंने भारत का रुख कर लिया। उन्होंने एक महीने पहले अगस्त के अंतिम सप्ताह में भाजपा की सदस्यता ली थी।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नौक्षम का कहना है कि वे मेवात की बेटी हैं और उन्हें किसी भी गीदड़भभकी से डर नहीं लगता। उनकी मानें तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से काफी प्रभावित हैं।
बिहार में आई बाढ़ प्रशासनिक अकर्मण्यता का नया उदाहरण पेश कर रही है। न प्रशासन दिख रहा है और न ही उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य। दिख रही है तो बस एनडीआरएफ की टीमें, जिनके जिम्मे पटना को छोड़ कर सरकार लाचार बनी हुई है और प्रशासन सो रहा है। जिस तरह से अपने घर में फँसे उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी को रेस्क्यू कर के सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया, उसे देख कर तो यही लगा कि ख़ुद राज्य सरकार ही सड़क पर आ गई है। नीतीश कुमार पजामा उठा कर जलजमाव का जायजा ले रहे हैं।
कुछ दिनों पहले बिहार के मुख्यमंत्री हाथ में छाता लिए अपनी अटारी से मंद-मंद मुस्कुराते हुए पाए गए थे। लोगों ने भी कहा कि जहाँ पूरा पटना डूब रहा है, सीएम बारिश का आनंद ले रहे हैं। खैर, पहले तो उन्होंने इसे प्राकृतिक आपदा बता दिया। लेकिन, वह ये नहीं बता पाए कि जो प्राकृतिक आपदा प्रत्येक वर्ष आती है, उससे निपटने की तैयारी करना और उसके लिए उचित इंफ़्रास्ट्रक्चर तैयार करना सरकार की ही ज़िम्मेदारी होती है। नीतीश यह भी नहीं बता पाए कि प्राकृतिक आपदा आने के बाद राहत के लिए क्या इंतजाम थे?
अब नीतीश कुमार सीधा अमेरिका पहुँच गए हैं। बाढ़ कवर करने गए पत्रकारों को डपटते हुए उन्होंने पूछा कि क्या पटना में बाढ़ ही एकमात्र समस्या है? उन्होंने पूछा कि अमेरिका में क्या हो रहा है? वह बार-बार कहते रहते हैं कि ‘हरसंभव उपाय किया जा रहा है।’ नीतीश कुमार के अनुसार, मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में भी बारिश होती है और पानी लगता है, पटना ही एकमात्र समस्या नहीं है। नीतीश ने क्लाइमेट चेंज का रोना रोते हुए अतिवृष्टि और अनावृष्टि की बात की। देखें वीडियो:
Bihar flood fury: 49 dead already, but CM @NitishKumar evades responsibility.
नीतीश कुमार शायद भूल गए हैं कि जलजमाव भले ही देश के अन्य हिस्सों में भी होता हो या फिर बाढ़ भले मुंबई में भी आती हो, लेकिन बिहार के लिए तो उनकी जिम्मेदारी बनती है और सवाल उन्हीं से पूछे जाएँगे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बीते दिनों अपने संसदीय क्षेत्र बेगूसराय में भ्रमण कर रहे थे। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही लापरवाही व भेदभाव से अवगत कराया। गिरिराज बिफर पड़े और उन्होंने अधिकारियों को ठीक से राहत कार्य न करने के लिए फटकार लगाई। नौबत यह आ गई है कि एक केंद्रीय मंत्री भी बिहार में असहाय नज़र आने लगा।
नीतीश सरकार की लापरवाही का आलम यह है कि सहयोगी भाजपा भी उनकी आलोचना करने से ख़ुद को नहीं रोक पा रही। हालाँकि, बिहार सरकार में कई मंत्री भाजपा के भी हैं लेकिन पार्टी तब भी सरकार की अकर्मण्यता पर सवाल उठा रही। ताज़ा बयान आया है बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल का। पश्चिम चम्पारण के सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जायसवाल ने कहा है कि बारिश रुके 24 घंटे होने के बाद भी परिस्थिति का इतना विकट बने रहना प्रशासनिक लापरवाही की निशानी है।
बिहार भाजपा के अध्यक्ष ने माना कि लापरवाही हुई है
जायसवाल राहत कार्य के लिए जनता, कार्यकर्ताओं और आरएसएस को धन्यवाद देते हैं। यह दिखाता है कि सरकार में शामिल लोगों का ही प्रशासनिक अधिकारियों व मंत्रियों से भरोसा उठ गया है। हालाँकि, जायसवाल अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग तो करते हैं, लेकिन मंत्रियों व सरकार के नेताओं की ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए या नहीं, इस पर वह चुप्पी साध जाते हैं। अगर सिर्फ़ अधिकारी ही दोषी हैं तो मंत्रियों का क्या? नीतीश कुमार की ही पार्टी के एक नेता ने अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर निशाना साधा। मटिहानी के विधायक नरेंद्र सिंह उर्फ़ बोगो बाबू का गिरिराज ने भी समर्थन किया।
बोगो बाबू ने कहा कि बड़े नेता सिर्फ़ लक्ज़री गाड़ियों में पूरे सुख-सुविधा के साथ घूम रहे हैं और समीक्षा के नाम पर ख़ुद आनंद ले रहे। राहत कार्य से लेकर कई योजनाओं में घोटाला हुआ है, ऐसा विधायक बोगो बाबू का मानना है। उन्होंने यह भी कहा कि मवेशियों तक को मरने के लिए छोड़ दिया गया है और राहत सामग्री भी घटिया क्वालिटी की है। उन्होंने सरकार को संवेदनहीन करार दिया, जिसके बाद गिरिराज सिंह ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि अगर सच बोलना बगावत है तो वह बागी हैं। अब सवाल यह है कि आख़िर नीतीश के ख़ुद की ही पार्टी व गठबंधन के नेता सरकार से क्यों नाराज़ हैं?
बाढ़ को लेकर एक बिहारी व्यक्ति ने वीडियो बनाया, जिसमें उसने देश के बुद्धिजीवियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि केरल व मुंबई में थोड़ी बारिश से उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं, लेकिन बिहार डूब रहा है पर उन लोगों की तरफ से एक ट्वीट तक नहीं आया। उसका दर्द इस बात को लेकर था कि जो बिहार की जनता त्रासदी झेलती है, वही जनता चुनाव के समय ऐसे नेताओं को जातिवाद के कारण जीता देती है, जो कुछ भी काम नहीं करते। तो क्या सच में राष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार के साथ पक्षपात होता है?
अंत में बात बिहार के उप-मुख्यमंत्री और बिहार भाजपा संगठन में पार्टी के सर्वेसर्वा माने जाने वाले सुशील कुमार मोदी की कर लेते हैं। अर्थव्यवस्था व जीएसटी से लेकर विभिन्न विषयों पर लम्बे-चौड़े भाषण देने वाले मोदी, जिन्हें उनके घर से रेस्क्यू कर के निकाला गया, वो कहते हैं कि ‘अचानक हुई बारिश’ से ऐसे हालात उत्पन्न हो गए। यह बयान उस व्यक्ति के मुँह से निकल रहा है, जिसके हाथों में पिछले 14 में से 10 वर्ष पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था और वित्त की जिम्मेदारी रही है।
सितंबर के शुरू में जदयू ने कैंपेन शुरू किया और महीने के अंत में डूब गई राजधानी
फिर अगले वर्ष यही होगा। इस बार तो पटना में बाढ़ आई तो यह राष्ट्रीय मुद्दा बन बन भी गया वरना यह दंश तो बिहार की करोड़ों जनता प्रत्येक साल झेलती है। कई इलाक़े महीनों तक जलमग्न रहते हैं और उन्हें कोई पूछने वाला तक नहीं होता। अगले वर्ष ऐसा फिर होगा। पटना में हुआ तो यह न्यूज़ बन भी जाएगी, लेकिन अन्य क्षेत्रों में ऐसा हुआ तो किसी को कानोंकान ख़बर तक नहीं लगेगी और सरकार की निष्क्रियता, अकर्मण्यता और लापरवाही छिप जाएगी। इन्तजार कीजिए। पटना के पास न राहत कार्य के लिए नाव है और न ही जल निकासी के लिए मशीन। सबकुछ बाहर से मँगाया जा रहा है।
जम्मू कश्मीर पुलिस ने किश्तवाड़ा जिले में खूंखार आतंकियों को पनाह देने के मामले में एक दर्जन लोगों पर केस दर्ज किया है। इसमें वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री जीएम सरूरी के भाई का नाम भी शामिल हैं। ये केस कॉन्ग्रेसी नेता के भाई शफी सरूरी के अलावा मसूद मट्टू, मोहम्मद मुजफ्फर शाह, ग़ुलाम मोहम्मद कमल, तौसीफ गुंडना और सैय्यद अहमद पर दर्ज हुआ है। इस केस में 6 और अन्य लोगों के नाम हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है।
कॉन्ग्रेस नेता सरूरी ने बताया, “मुझे इसके बारे (एफआईआर में शफी का नाम) में पता चला तो मैं हैरान था। हमारे लोग ऐसी बात कभी नहीं कर सकते। कल मैं यह पता लगाने की कोशिश करूँगा कि क्या मामला है।”
बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता के छोटे भाई शफी सरूरी समेत सभी आरोपितों पर हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़े होने का एवं आतंकियों को संसाधन मुहैया कराने और पनाह देने का आरोप है। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने जिन आतंकियों को पनाह दी हैं, उसमें हिजबुल आतंकी जहाँगीर सरूरी और ओसामा भी शामिल हैं। सभी के ख़िलाफ़ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हिजबुल के आतंकवादियों की मदद, कांग्रेस नेता के भाई समेत 12 के खिलाफ मामला दर्जhttps://t.co/08PhGJ9d1D
अधिकारियों की मानें तो कि शफी और 5 अन्य लोग मसूद अहमद मट्टू, मोहम्मद मुजफ्फर शाह, गुलाम मोहम्मद, तौसीफ अहमद गंडना और सैयद अहमद का नाम एफआईआर (संख्या: 229/2019) में शामिल है और उन पर हिजबुल मुजाहिदीन के सक्रिय आतंकवादियों को शरण देने और उनकी आवाजाही की व्यवस्था को अंजाम देने का आरोप है।
पुलिस का कहना है कि जहाँगीर सरूरी और ओसामा ने कुछ दूसरे आतंकियों के साथ मिलकर चिनाब घाटी इलाके में आतंकवाद को दोबारा से कायम करने की साजिश रची थी। जिनमें ओसामा को सुरक्षाबलों ने शनिवार को रामबन जिले में हुए ऑपरेशन के दौरान 3 आतंकियों के साथ मार गिराया था।
जानकारी के अनुसार मारे गए सभी आतंकी वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल परिहार और आरएसएस पदाधिकारी चंद्रकांत शर्मा की हत्या के जिम्मेदार थे। इस पूरे मामले में कॉन्ग्रेस नेता के भाई का कहना है कि जिस घर में आतंकी ठहरे हुए थे, उसे उन्होंने ही किराए पर दिया था और इस बारे में उन्होंने पुलिस को भी बताया। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जाँच जारी हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ‘अमर रहें’ के नारे तो हम हमेशा लगाते हैं लेकिन बहुत कम ही लोग ऐसे हैं जो गाँधी को रोज याद करते होंगे। महात्मा गाँधी को किसी न किसी बहाने हम याद करते रहें, इसमें सोशल मीडिया सहायक सिद्ध हुआ है। फेसबुक से लेकर ट्विटर तक, हर जगह गाँधी को लेकर तरह-तरह की मीम्स बनती रहती हैं, जो काफ़ी मजेदार होती हैं। इन मीम्स को कोई कमेंट्स में डालता है तो कभी-कभी किसी पोस्ट के हिसाब से मीम बना कर डाला जाता है।
ऐसे ही गाँधी के कई नकली बयान आ गए हैं। ये हँसी-मज़ाक के लिए होते हैं। ये गाँधी के असली वक्तव्य नहीं होते। अब ये तो पता ही है कि जीवनपर्यन्त शाकाहारी रहे बापू आपको बटर-चिकन खाने की सलाह तो देंगे नहीं। लेकिन, मीम्स के द्वारा सब संभव है। वह आपकी फोटो पर ‘नाइस पिक डिअर’ भी लिख सकते हैं, वह डीजे बजाते हुए भी दिख सकते हैं और जावेद हबीब द्वारा बनाए गए बालों के डिजाइन के साथ भी नज़र आ सकते हैं। गाँधी चरखे की कसम खाते हुए भी नज़र आ सकते हैं।
वैसे तो नोटों पर गाँधी की फोटो हम रोज देखते हैं लेकिन किसी को याद रखने के लिए कभी-कभी थोड़ा हँसी-मजाक ज़रूरी हो जाता है वरना रुपए पर गाँधी के दिखने से उन्हें लोग नोटिस भी नहीं करते। लेकिन, मीम्स में आपकी नज़र सीधा बापू पर ही जाती है। इसी बहाने आप उन्हें याद करते हैं। कई मीमर्स भी कहते हैं कि वो ये सब कर के गाँधी को लोगों के मन में बसाए रखना चाहते हैं, बिना किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाए हुए।
गाँधी जयंती के अवसर पर आइए हम भी कुछ मजेदार मीम्स पर नज़र डालते हैं, जिसे महात्मा गाँधी से जोड़ कर बनाया गया है:
आज के जमाने की शायरी करते हुए गाँधी
फेसबुक पोस्ट की प्रशंसा करते हुए बापू
डीजे वाले बापू मेरा गाना बजा दे
इंजीनियरिंग हॉस्टल के छात्रों की समस्या समझते हैं राष्ट्रपिता
ये पबजी वाला है क्या?
शाकाहारी बापू के मांसाहारी विचार
बापू आपके फोटो की प्रशंसा भी करते हैं
ये देखिए: शराबबंदी के समर्थन रहे गाँधी क्या कह रहे हैं
अक्षय कुमार आजकल कुछ ज्यादा ही देशभक्ति वाली फ़िल्में कर रहे हैं
नकली गाँधी सलाह दे रहे हैं कि नकली गाँधियों से बचो
भारत-पाकिस्तान मैच के लिए गाँधीजी भी Excited रहते हैं
महात्मा गाँधी पर ये सारे मीम्स देख कर आपके मन की क्रिएटिविटी भी जाग जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ुद एक बार कहा था कि वह अपने बारे में बने मीम्स को देखते हैं तो उसमें बसी क्रिएटिविटी को सबसे ज्यादा नोटिस करते हैं। ठीक इसी तरह, ये मजेदार मीम्स गाँधी को एक अलग अंदाज में याद रखने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
नोट: यह पोस्ट हास्य के उद्देश्य से लिखी गई है, इसका लक्ष्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना या राष्ट्रपिता का उपहास करना नहीं है।
बीते दिनों खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के आतंकियों की निशानदेही पर ड्रोन बरामद करने के बाद पंजाब पुलिस को एक बार फिर बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुलिस ने अमृतसर से साजन प्रीत नामक एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। कहा जा रहा है कि साजन प्रीत किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहा था।
साजन प्रीत को पंजाब पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन सेल द्वारा गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इसे अमृतसर के खालसा कॉलेज वाले इलाके से पकड़ा है। इसपर आरोप है कि इसने हाल ही में पाकिस्तान से आए ड्रोन को नष्ट किया और उन पिस्टल को भी बेचा जिन्हें ड्रोन के जरिए गिराया गया था।
Khalistan Zindabad Force terrorist Sajan Preet has been arrested by a state special operation cell of Punjab Police. (@manjeet_sehgal)https://t.co/u6oYgJ8SZP
पिछले हफ्ते इसी संबंध में पंजाब सरकार बता चुकी है कि उन्होंने अब तक 2 ड्रोन बरामद किए हैं, जिन्हें पाकिस्तान, सीमा पर हथियार भेजने के लिए इस्तेमाल कर रहा था। एक अधिकारी के मुताबिक इनमें से एक ड्रोन को उन्होंने पिछले महीने पकड़ा था, जबकि दूसरा उन्हें पंजाब के तरनतारन से जली हालत में मिला था। इसे देखकर पुलिस का दावा था कि वो एक ड्रोन ही है।
पंजाब पुलिस ने मंगलवार को अमृतसर में मुठभेड़ के बाद तीन बदमाशों को भी गिरफ्तार किया था। जिनसे पूछताछ करने के बाद उनकी निशानदेही पर पुलिस ने 5 AK 47 राइफल, 3 पिस्तौल और 5 किलो हेरोइन भी बरामद की थी। इससे पहले पंजाब पुलिस ने राज्य में पुनर्जीवित हुए खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए भारी मात्रा में हथियार गोला-बारूद के साथ 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया था।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में होती इन अनर्गल गतिविधियों पर राज्य सरकार काफी चिंता व्यक्त कर चुकी है। वे केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसपर संज्ञान लेने को भी कह चुके हैं। राज्य सरकार ने पिछले दिनों कहा था कि पाकिस्तान, ड्रोन के ज़रिए हथियार और विस्फोटक भेजने का काम कर रहा है। पंजाब पुलिस के सूत्रों के अनुसार, AK-47 राइफ़ल्स और ग्रेनेड की भारी मात्रा को ड्रोन के माध्यम से अमृतसर भेजा गया है।
केंद्रीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी अजेंडे को धराशायी करने की बात कही है। जयशंकर ने कहा कि जम्मू कश्मीर में विकास की गति जैसे ही तेज़ होगी, पाकिस्तान का सारा एजेंडा अपनेआप समाप्त हो जाएगा। वाशिंगटन में एक अमेरिकी थिंक टैंक में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान पिछले 70 वर्षों से जम्मू कश्मीर को लेकर ग़लत योजनाएँ चला रहा है, जो अब ख़त्म हो जाएगा। जयशंकर ने इस दौरान लोगों को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने वाले फ़ैसले के बारे में समझाया।
जयशंकर ने एक शीर्ष अमेरिकी थिंक-टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में अपनी प्रमुख विदेश नीति के भाषण के बाद एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने बताया कि पिछले 70 सालों से राज्य में स्थिति बिगाड़ने का काम चल रहा है। जयशंकर ने कहा कि भारत विरोधी ताक़तों द्वारा जम्मू कश्मीर के स्थानीय लोगों को स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर वास्तव में राज्य में प्रगति होती है तो पाकिस्तान का सारा एजेंडा धरा का धरा रह जाएगा। इससे पहले जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था:
“अगर हम जम्मू-कश्मीर को विकास के रास्ते पर ले जाने में सक्षम हो जाते है, तो वह बहुत संभव हो जाएगा कि एक दिन पीओके के निवासी भी (जो पाकिस्तान के कब्जे में सबसे खराब स्थिति का सामना कर रहे हैं) हमारी ओर दौड़ेंगे।”
Once growth starts in Jammu and Kashmir, Pak’s 70 year’s plans will collapse: S Jaishankarhttps://t.co/GX5v8KP4b2
वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जो प्रतिक्रियाएँ हुई हैं, वह 70 साल से अधिक समय के निहित स्वार्थ के कारण हुई हैं। उन्होंने बताया कि यह स्थानीय और सीमा पार के निहित स्वार्थ हैं, लेकिन सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास का प्रबंध कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे कोई अनभिज्ञ नहीं है कि पाकिस्तान ने पिछले 70 सालों से इसे बबार्द करने की योजनाएँ बनाई हैं।
पाकिस्तान के जुल्मों सितम से परेशान होकर भारत की शरण में आने वाला एक पाकिस्तानी हिन्दू परिवार दिल्ली में दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। इसी साल 14 मई को पाक से भागकर भारत आए गुलशेर अपने 3 बच्चों को तालीम दिलवाने के लिए यहाँ के स्कूल प्रशासन, क्षेत्र विधायक एवं वरिष्ठ अधिकारियों तक के पास जाकर मदद की गुहार लगा चुके हैं, किंतु उनकी फरियाद अब भी अनसुनी ही है। ताजा जानकारी के अनुसार थक हारकर उन्होंने अब दिल्ली के हाई कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील अशोक अग्रवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पूरे मामले से अवगत करवाते हुए पत्र लिख चुके हैं।
बता दें कि गुलशेर, दिल्ली के भाटी माइन्स में अपने तीनों बच्चों के साथ रहते हैं। यहाँ के एक सरकारी स्कूल ने उनके 3 बच्चों को कुछ समय पहले ये कह कर निकाल दिया कि वह उम्र में बड़े हैं। बच्चों के नाम मूना कुमारी (18 वर्ष), संजिना बाई (16 वर्ष), और रवि कुमार (17 वर्ष) है। इन्हें कक्षा नौवीं और दसवीं में दाखिला लेने की दरकार है, लेकिन स्कूल के मुताबिक तय उम्र से अधिक होने के कारण इन्हें एडमिशन नहीं दिया जा सकता। बच्चों के पास पाकिस्तान से स्कूल छोड़ने के प्रमाण-पत्र और एनरोलमेंट कार्ड भी हैं।
A Pakistani national who had legally migrated to India in May this year, has approached Delhi High Court seeking admission of his 3 siblings in a Delhi School. Petition contends that the Delhi Government had denied admission to his siblings due to upper age limit. pic.twitter.com/HTUNDU7lgJ
प्राप्त जानकारी के मुताबिक 14 मई 2019 को तीनों बच्चे अपने पिता के साथ पाकिस्तान से भारत आए थे। यहाँ इन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए 5 जुलाई को सफलतापूर्वक अपने नाम पंजीकृत करवाया और 8 जुलाई से इन बच्चों को क्लास अटेंड करने की भी अनुमति दे दी गई। लेकिन अचानक 14 सितंबर 2019 को बड़ी उम्र का हवाला देकर इन्हें स्कूल से निकाल दिया गया।
24 सितम्बर को ऑपइंडिया ने इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट की थी। जिसमें हमने बच्चों के पिता गुलशेर से बात करके जाना कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पहले उनसे कहा कि बच्चों का दाखिला होगा। लेकिन, एक महीने बाद उम्र ज्यादा बताकर एडमिशन देने से मना कर दिया। बच्चों के पिता की मानें तो वे पाकिस्तान के स्कूल से मिले दस्तावेज भी यहाँ के स्कूल को दे चुके हैं और पूर्व में स्कूल द्वारा मिले आश्वाशन पर बच्चों को किताब-कॉपियाँ और ड्रेस-जूते सब दिलवा चुके हैं। अब सिर्फ घर में बैठे-बैठे उनके बच्चों का कीमती वक़्त बर्बाद हो रहा है। जिससे न केवल उनके बच्चे बल्कि वे खुद भी मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।
हैदराबाद में इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर से जुड़े एक वैज्ञानिक की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई है। भारतीय स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिक की लाश उनके आवास से मिली। हैदराबाद के अमीरपेट कॉलोनी स्थित अन्नपूर्णा अपार्टमेंट के एक फ्लैट में 56 वर्षीय वैज्ञानिक की हत्या कर दी गई। मूल रूप से केरल के रहने वाले सुरेश अपने फ्लैट में अकेले थे। मंगलवार (अक्टूबर 1, 2019) को जब वह दफ्तर नहीं पहुँचे, तब उनके सहकर्मियों ने उनके मोबाइल फोन पर कॉल किया।
जब बार-बार कॉल करने पर भी उन्होंने फोन नहीं उठाया, तब लोगों ने चेन्नई के एक बैंक में नौकरी करने वाली उनकी पत्नी इंदिरा को इस बात की सूचना दी। इसके बाद वैज्ञानिक सुरेश की पत्नी व परिवार के अन्य सदस्यों ने हैदराबाद पहुँच कर पुलिस को इस सम्बन्ध में सूचित किया। जब फ्लैट का ताला तोड़ कर गेट खोला गया तो सुरेश की लाश दिखी।
“While the police are yet to establish a motive for the crime, media reports stated that a preliminary probe pointed to personal reasons, and nothing to do with his official work.”https://t.co/ocU1UaRX4h
पुलिस को संदेह है कि उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। फ़िलहाल डेड बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुँच कर सबूत जुटाए। अपार्टमेंट व आवासीय परिसर के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि दोषियों की पहचान हो सके। सुरेश पिछले 2 दशक से हैदराबाद में रह रहे थे। पहले उनकी पत्नी भी वहीं रहती थीं लेकिन 2005 में उनका तबादला चेन्नई हो गया।
Hyderabad Police: SR Suresh Kumar, who was working as a scientist at National Remote Sensing Centre (NRSC) of ISRO, found dead at his residence in Ameerpet. Body shifted to Osmania hospital for post mortem. Investigation is underway pic.twitter.com/EZFvSHM8JR
मृत इसरो वैज्ञानिक सुरेश का बेटा चेन्नई में रहता है जबकि बेटी दिल्ली में रहती है। पुलिस इस बात की तहकीकात में जुटी है कि सुरेश की हत्या करने वाला कोई परिचित था या फिर किसी ने जबरन फ्लैट में घुस कर उनकी हत्या कर दी?