उत्तर प्रदेश की पुलिस को अंग्रेजी सीखनी होगी! बलरामपुर के एसपी देन रंजन वर्मा का तो यही ख्याल है। उन्होंने पुलिस विभाग (अपने जिले में) में एक नई कवायद शुरू की है। दरअसल देन रंजन वर्मा ने पुलिसकर्मियों को अंग्रेजी अखबार पढ़ने और छुट्टियों के लिए आवेदन अंग्रेजी भाषा में ही करने के लिए कहा है।
एसपी वर्मा ने पिछले सप्ताह कई पुलिस स्टेशनों, जिला मुख्यालय और पुलिस लाइन में कक्षाएँ और कार्यशालाएँ आयोजित करने के बाद यह आदेश जारी किया है। निर्देश जारी होने के बाद जिले के पुलिस कर्मियों ने अंग्रेजी सीखने के लिए पुस्तकें व डिक्शनरी खरीदना शुरू कर दिया है।
हालाँकि, राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने इस आदेश के बारे में पूरी तरह से अनभिज्ञता व्यक्त की है। जानकारी के मुताबिक, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) पीवी रामाशास्त्री ने कहा कि उन्हें इस आदेश के बारे में कोई जानकारी नहीं है और यह निर्णय जिला स्तर पर लिया गया है।
वहीं, देवीपाटन मंडल के डीआईजी (DIG) राकेश सिंह ने कहा कि उन्हें भी फैसले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “उच्च स्तर से ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। अंग्रेजी का उपयोग महत्वपूर्ण है या नहीं, यह एक नीतिगत निर्णय है। पुलिस भर्ती बोर्ड, डीजीपी और अन्य यह आकलन करते हैं कि हमारे कर्मियों को किन कौशल की आवश्यकता है। मैं इसके बारे में और कुछ नहीं कह सकता।”
एसपी वर्मा ने अपने इस निर्णय को सही ठहराते हुए कहा, “इस पहल के पीछे का कारण यह है कि सभी साइबर-अपराध और निगरानी की जानकारी अंग्रेजी में मिलती है और हमारे पुलिस को भाषा का बुनियादी ज्ञान होना आवश्यक है। मैंने पुलिसकर्मियों को अंग्रेजी में कोर्ट के फैसलों को समझने में बड़ी गलतियाँ करते हुए देखा है। इसके बाद मैंने पुलिसकर्मियों को कम से कम बुनियादी अंग्रेजी सीखने के लिए पहल करने का फैसला किया।”
उनका कहना है कि पुलिस कॉन्स्टेबलों ने अब छुट्टी के आवेदन लिखने के लिए गूगल से मदद लेनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “मैं आवेदनों की जाँच करता हूँ और वर्तनी की गलतियों को सुधारता हूँ। मैं चाहता हूँ कि वे अंग्रेजी अखबार पढ़ें और डिक्शनरी खरीदें। मैं इसे सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पुलिस स्टेशनों में जाऊँगा।”
लखनऊ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो इस फैसले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “एसपी ने अपने दम पर ऐसा किया है और जब तक हमें मुख्यमंत्री की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, हम न तो इस पहल को मंजूरी देंगे और न ही इसे अस्वीकार करेंगे।”
कोलकाता के दक्षिण-मध्य में स्थित है बेलियाघाट। पूरे बंगाल की भाँति यहाँ के 33 पाली (Beliaghata 33 Pally) में भी दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन पूजा के नाम पर इनका (आयोजक का) मकसद कुछ और है। यहाँ के पूजा पंडाल से शांति-सद्भाव फैलाने के नाम पर अजान बजाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार घटना के संबंध में शांतनु सिंघ नामक एक वकील ने पुलिस को ईमेल भेजकर शिकायत भी की है। शांतनु ने अपनी शिकायत को धारा 295, 295 ए और 298 के तहत दर्ज कर जरूरी कार्रवाई करने की माँग उठाई है।
अपनी शिकायत में शांतनु ने पूजा पंडाल के क्लब सेक्रेट्री समेत 10 पर शिकायत दर्ज करवाई है। इनमें टीएमसी विधायक परेश पॉल का भी नाम शामिल हैं, क्योंकि यहाँ की पूजा के मुख्य आयोजक वही हैं। शांतनु का आरोप है कि पंडाल के आयोजक जानबूझकर ऐसी चीजें करके शहर की शांति को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।
कोलकाता हाईकोर्ट के वकील शांतनु का कहना है कि उन्हें इस आयोजन का वीडियो विश्व हिंदू परिषद द्वारा भेजी गई है। उनको मिले वीडियो के अनुसार दु्र्गा पूजा पंडाल में अजान बजाया जा रहा है, जो कि हिंदू धर्म की भावनाओं के विरुद्ध है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने अभी तक इस मामले पर चुप्पी साधी हुई है, लेकिन साइबर सेल पंडाल द्वारा शेयर किए जा रहे हर पोस्ट पर अपनी नजर बनाए हुए है।
पूजा आयोजकों का दावा है कि “आम्रा एक, एका नोय” उनके इस साल की थीम है। जिसका अर्थ “हम सब एक हैं, अकेले नहीं” है। इसका उद्देश्य हर धर्म में शांति फैलाना है।
पंडाल में लगा एक बैनर, फोटो साभार: swarajyamag
बेलियाघाटा के 33 पाली के क्लब सेक्रेटरी परिमल डे का पूरे मामले पर कहना है कि मामले का बेवजह राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम सब जानते हैं कि कोलकाता में दुर्गा पंडाल इस प्रकार बनाए जाते हैं कि वो समाज को एक अच्छा संदेश दें। हमारी थीम – ‘आम्रा एक, एका नोय’ है। इसे दर्शाने के लिए हमने चर्च, मंदिर, मस्जिद के प्रतीकों वाले मॉडल्स का इस्तेमाल किया। हमारा मकसद सिर्फ़ ये दिखाना है कि इंसानियनत सभी धर्मों से सर्वोपरि है।”
परिमल ने बताया कि इस थीम में तीनों धर्मों के बारे में बताने के लिए आयोजकों द्वारा ऑडियो-वीडियो का प्रयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ लोग कार्यक्रम में हिंदू और ईसाई धर्म से जुड़े संदेशों को नजरअंदाज करके सिर्फ़ ऊर्दू में दिए संदेश पर बवाल बना रहे हैं। उनके मुताबिक ये बिलकुल फर्जी बात है कि माँ दुर्गा की पूजा के दौरान अजान बजाई गई हो।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने शनिवार (6 अक्टूबर) को कहा कि इस बार दीपावली पर देशभर में कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन क्रैकर्स उपलब्ध रहेंगे, जो पर्यावारण के अनूकल होंगे। डॉ हर्षवर्धन ने अनुसंधान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंन्स में कहा कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद इस तरह के पटाखों को बनाने के बारे में सोचा गया और इसी दिशा में काम करते हुए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ग्रीन क्रैकर्स के विकास में अहम भूमिका निभाई। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में CSIR की आठ सहयोगी प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग दिया।
“मुझे बहुत ख़ुशी है कि एक तरफ, हम इस दिवाली पर पर्यावरण के अनुकूल पटाखे का इस्तेमाल करेंगे और दूसरी तरफ, रोशनी और पटाखों के साथ हमारे पारंपरिक त्योहार का उत्सव बरकरार रहेगा। लाखों घर जो आतिशबाज़ी की बिक्री और निर्माण पर निर्भर हैं, वे भी इस त्योहार का आनंद लेंगे। हमारे वैज्ञानिकों को धन्यवाद!”
उन्होंने कहा कि CSIR के पटाखों के बारे में फॉर्मूलेशन के बाद पटाखा उत्पादकों ने इसी आधार पर पटाखे बनाए हैं और पटाखा उत्पादकों के साथ लगभग 230 आपसी सहमति पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स (NDA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने पटाखा उत्पादकों से CSIR की तरफ से सुझाए गए फॉर्मुलेशन के आधार पर पटाखे बनाने और बाजार में उतारे जाने से पहले इनकी जाँच तथा उत्सर्जन का आग्रह भी किया। CSIR द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं पर्यावरण शोध संस्थान (NEERI) तथा राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) की प्रयोगशालाओं में इनकी जाँच की जा सकेगी। इन पटाखों में अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम आदि शामिल हैं।
इस अवसर पर CSIR के महानिदेशक डॉ शेखर सी मांदे ने बताया कि CSIR के लिए ग्रीन क्रैकर्स के बारे में फॉर्मूलेशन तैयार करना और इस तरह के पटाखों की परिभाषा को तैयार करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा है ताकि ऐसे पटाखों से कम से कम उत्सर्जक तत्व वातावरण में छूटें। CSIR ने ग्रीन क्रैकर्स के लिए बेंचमार्क के लिए तकनीकी कानूनी और नीतिगत हस्तक्षेप में अपनी तरफ से योगदान दिया और पारंपरिक पटाखों तथा ग्रीन क्रैकर्स में बेरियम के स्तर की जाँच की।
इस मौके पर NEERI के निदेशक डॉ राकेश कुमार ने बताया कि ग्रीन क्रैकर्स के विकास में द्विस्तरीय प्रकिया अपनाई गई और CSIR के साथ मिलकर उनके संस्थान ने पांरपारिक पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम नाईट्रेट के स्तर की जाँच कर ग्रीन क्रैकर्स के लिए एक नया मानक अपनाया। इस विधि से ग्रीन क्रैकर्स में 30 से लेकर 90 प्रतिशत बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कम किया गया और कईं पटाखों में यह बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया। इन पटाखों में ऑक्सीडेंट के तौर पर पोटेशियम नाईट्रेट का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने बताया कि ग्रीन क्रैकर्स बनाने वाली इकाइयों को नई एवं संशोधित विधियों को पूरा कर एक निश्चित बेंचमार्क तक पटाखे बनाने के लिए 530 उत्सर्जन प्रमाणपत्र दिए गए हैं।
ग्रीन क्रैकर्स के बारे में CSIR की मुख्य वैज्ञानिक डॉ साधना रायालु और उनकी टीम का कहना है कि इन पर NEERI का ग्रीन ‘Logo’ और एक QR कोड है जो इनकी पहचान हैं। इस कोड की जाँच करके इनकी असलियत का पता लगाया जा सकता है।
ग्रीन क्रैकर्स के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर सम्पर्क किया जा सकता है। इसकी इमेल आईडी [email protected] और हेल्पलाइन नंबर +918617770964 और +919049598046 है।
दशहरे के शुभ अवसर पर इस बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय मूल्यों को बरकरार रखते हुए पेरिस में शस्त्र पूजन करेंगे। 8 अक्टूबर को वह पेरिस में पहले राफेल फाइटर जेट को प्राप्त करके शस्त्र पूजन करेंगे और फिर उसी दिन वे उसमें उड़ान भी भरेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गृह मंत्री अपनी फ्रांस की तीन दिवसीय यात्रा के लिए 7 अक्टूबर को रवाना होंगे। यहाँ उन्हें 8 तारीख को भारतीय वायुसेना के स्थापना दिवस पर पहला लड़ाकू विमान राफेल सौंपा जाएगा। उसी दिन राजनाथ सिंह बोर्डिओक्स के पास मेरिनैक में राफेल जेट रिसीव करेंगे।
Defence Minister Rajnath Singh to perform ‘Shastra Pooja’ (worship of weapons) in Paris on #Dussehra. He is going to France to receive the #Rafale aircraft, on October 8. (file pics) pic.twitter.com/bKRGQL0ldI
यहाँ बता दें कि शस्त्र पूजन हिंदुओं की एक बहुत पुरानी परंपरा हैं। इसमें योद्धा अपने हथियारों और शस्त्रों की पूजा करते हैं। अमर उजाला की खबर के अनुसार रक्षा अधिकारियों ने इस संबंध में बताया, “अपने गृह मंत्री कार्यकाल के दौरान से ही राजनाथ सिंह हर दशहरे पर शस्त्र पूजन करते रहे हैं। अब रक्षा मंत्री होने के नाते भी वह अपनी इसी परंपरा को जारी रखेंगे।“
उल्लेखनीय है कि इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान फ्रांस में होने वाले कार्यक्रम में शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ राफेल के निर्माण कंपनी दसॉ एविएशन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद होंगे। गृह मंत्री 9 अक्टूबर को फ्रांस के शीर्ष रक्षा अधिकारियों के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के उपायों पर व्यापक चर्चा करेंगे। उनके साथ वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शन एचएस अरोड़ा भी होंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राफेल फाइटर जेट को भारतीय जरूरतों के अनुसार बदला गया है। इस विमान को उड़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के कुछ पायलटों की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। अब ये सभी प्रशिक्षित पायलट वायुसेना के 24 और पायलटों को 3 अलग अलग हिस्सों में भारतीय राफेल फाइटर जेट की ट्रेनिंग देंगे। इन पायलटों की ट्रेनिंग 2020 मई तक चलेगी।
बताते चलें कि जिस राफेल को लेने रक्षामंत्री फ्रांस जा रहे हैं, उसके लिए नए एयर चीफ मार्शन आरकेएस भदौरिया ने कहा कि राफेल का शामिल होना देश और वायुसेना के लिए बहुत महत्तवपूर्ण है। इसकी तकनीक हमारे लिए गेमचेंजर साबित होगी।
राजस्थान के बारां जिला में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। एक तहसीलदार का एक ही तारीख में 3 बार ट्रांसफर कर दिया गया। उसका गुनाह बस इतना था कि उसने अवैध अतिक्रमण में लिप्त नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी। अवैध अतिक्रमण हटाने के एवज में एक ही तारीख में उसका 3 बार तबादला किया गया। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही है। हाल ही में बसपा के सभी विधायक कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे, जिससे अशोक गहलोत सरकार की स्थिति और मजबूत हो गई है।
अगर बारां की घटना की बात करें तो यहाँ तहसीलदार फूलचंद कश्यप नाहरगढ़ उप-तहसील में भूअभिलेख निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। उनका तबदला कार्यवाहक नायब तहसीलदार के रूप में रविवार (सितम्बर 29, 2019) की तारीख में अटरू तहसील मुख्यालय में कर दिया गया। इसके बाद गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को एक नया संशोधित आदेश आया। इसमें उनका ट्रांसफर 29 सितम्बर की ही तारीख में उपतहसील केलवाड़ा में कर दिया गया। शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को फूलचंद का तबादला वापस अटरू तहसील में करने का आदेश आया। इस आदेश में भी तारीख 29 सितम्बर ही बताई गई।
‘दैनिक भास्कर’ के बारां संस्करण में छपी ख़बर
एक ही तारीख में 3 ट्रांसफर ऑर्डर की वजह से जिला कलेक्ट्रट लोगों के निशाने पर है। प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फूलचंद ने बताया है कि भँवरगढ़ में अतिक्रमण हटाने के कारण वे नेताओं के निशाने पर आ गए हैं।
लोग इस बात को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं कि जब तहसीलदार ने कुछ ग़लत किया ही नहीं तो कार्रवाई किस बात के लिए की गई? उसने तो बस क़ानून के तहत अवैध अतिक्रमण करने वालों के ख़िलाफ़ एक्शन लिया था। अभी तक जिला प्रशासन ने इस सम्बन्ध में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
बांग्ला एक्ट्रेस से तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) सांसद बनीं नुसरत जहां अपने राजनीतिक और फिल्मी करियर से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। शादी के बाद नुसरत जहां पहली बार नवरात्र के आठवें दिन दुर्गा पूजा में पहुँचीं। नुसरत कोलकाता के सुरुचि संघ पंडाल में पति के साथ माँ दुर्गा के दर्शन के लिए पहुँची थी। सामने आई तस्वीरों में नसुरत और उनके पति निखिल माँ दुर्गा की हाथ जोड़कर आराधना करते नजर आए। हालाँकि नुसरत की ये तस्वीरें कुछ ट्रोलर्स को पसंद नहीं आई और उन्होंने धर्म पर बहस शुरू कर दी।
दरअसल नुसरत दुर्गा पंडाल में भारतीय परिधान में पहुँचीं। तस्वीरों में नुसरत लाल और पीले रंग की साड़ी में नजर आ रही हैं। साथ ही गोल्डन ज्वेलरी के साथ सिंदूर लगाया हुआ है। नुसरत की इस तस्वीर पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हो गई हैं। कई लोगों ने इस तस्वीर पर कमेंट किया कि जल्द ही कट्टरपंथियों की तरफ से नुसरत के खिलाफ फतवा जारी हो सकता है।
Madam @nusratchirps ji, Beware, you will soon face a fatwa by the islamic bigots.
Btw happy Navratri, May Mata “Mahagauri” bless you with her choicest blessings.?#durgaashtami
एक यूजर ने लिखा, “अच्छा हो अगर इन्होंने अपना धर्म बदल लिया हो।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “सावधान रहिए। जल्द ही आपको फतवा जारी हो जाएगा। वैसे नवरात्रि की शुभकामनाएँ। माता महागौरी आप पर अपना आर्शीवाद बनाए रखें।”
मेमून अहमद नाम के एक यूजर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “ये न तो हिंदू का सम्मान करती है और न ही मु###न का। ये सिर्फ दोनों धर्मों का अनादर कर रही है। जब आप अपने धर्म में विश्वास रखती हैं तो आप किसी अन्य धर्म का पालन नहीं कर सकते।”
She respect Hindu nor Muslim. She just disrespecting both of religions. When you are a muslim and you believe in your religion. You just cannot follow any other religions. @nusratchirps
वहीं कुछ यूजर्स ने इसे पॉलीटिकल स्टंट बताया है। हालाँकि सासंद बनने के बाद से ही नुसरत को कभी उनके कपड़ों के लिए तो कभी दूसरे मजहब के लड़के से शादी करने के लिए लगातार ट्रोल किया जा रहा है। खैर नुसरत को इन ट्रोलर्स को हैंडल करना आता है। उन्हें किसी की बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। नुसरत कई मौकों पर कह भी चुकी हैं कि वो सोशल मीडिया पर आए कमेंट्स को इग्नोर करती हैं।
वैसे ये पहला मामला नहीं है जब उन्हें किसी वजह से ट्रोल किया जा रहा हो। अपनी शादी के बाद 25 जून को नुसरत पहली बार संसद पहुँचीं और शपथ ली। इस दौरान उनके गले का मंगलसूत्र और माँग का सिंदूर चर्चा का विषय बना। इसी के चलते नुसरत जहां के खिलाफ देवबंद के धर्मगुरुओं ने फतवा जारी कर दिया। उनका कहना है कि मजहब लड़कियों को सिर्फ मजहब लड़कों से ही निकाह करना चाहिए। उनका कहना था कि नुसरत सिंदूर कैसे लगा सकती हैं। माँग में सिंदूर देख नुसरत से ये सवाल किया जा रहा था कि क्या उन्होंने अपना धर्म बदल लिया है।
उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले में तीन लोगों द्वारा एक बंदर की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद से इलाक़े में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल बन गया है। इसकी जानकारी ख़ुद पुलिस ने दी। दरअसल, हिंदू मान्यता के अनुसार बंदर को भगवान हनुमान का रूप माना जाता है और इसे चोट पहुँचाना पाप माना जाता है।
“तीन भाइयों- आसिफ़, हाफिज़ और अनीस के ख़िलाफ़ एक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जो शनिवार को कथित रूप से बंदर के इर्द- गिर्द घूम रहे थे और उनमें से एक ने परिवार के चार लाइसेंसी हथियारों में से एक से बंदर को गोली मार दी।”
पुलिस के अनुसार, बंदर की पीठ पर गोली लगी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे और बंदर के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया, जिसके बाद उसे दफ़ना दिया गया। वन विभाग ने वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम-1972 की धाराओं में मामला दर्ज किया है, जिसके अंतर्गत छ: महीने की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। हालाँकि, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।
घटना के बाद बजरंग दल के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन किया और ख़बर फैलते ही उनके साथ ग्रामीण भी जुड़ गए। बजरंग दल की युवा इकाई के जिला अध्यक्ष सन्नी सरोहा ने कहा, “अल्पसंख्यक समुदाय के तीन युवकों ने बंदर को गोली मार दी। उन्होंने कुछ आपत्तिजनक बयान भी दिए हैं। हम उन्हें तत्काल गिरफ़्तार किए जाने और उनके हथियारों के लाइसेंस रद्द करने की माँग करते हैं।” स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है।
ख़बर के अनुसार, आरोपित का कहना है कि इलाक़े में बंदरों ने काफी परेशान किया हुआ है। यह काफ़ी नुकसान कर चुके हैं और परिवार के सदस्यों को भी चोट पहुँचा चुके हैं। फ़िलहाल, पुलिस ने आरोपित युवक और उसके भाई के नाम जारी लाइसेंसी हथियार समेत कारतूस ज़ब्त कर लिए हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एक बार फिर से झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र में इमरान खान के रवैये और उनके भाषण को लेकर आलोचनाएँ हो रही हैं। यूपोरियन थिंक टैंक ने पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिए गए भाषण को लेकर कहा कि पाकिस्तान के पिछले रवैये की तरह ही पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के सच्चे दोस्त नहीं हैं। वे बस उनके लिए धोखा करते हुए विरोध और गुस्से का दिखावा कर रहे हैं।
एम्सटर्डम स्थित यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशिया स्टडीज ने कहा है कि यूएनजीसी के भाषण में इमरान खान ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद, कश्मीरी जैसे शब्दों का सबसे ज्यादा बार इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इमरान खान ने बड़़ी ही चालाकी से अपने भाषण के जरिए कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम किया है। इतना ही नहीं उन्होंने बड़ी चालाकी से परमाणु युद्ध की धमकी भी दे दी।
आगे उन्होंने कहा कि एक महत्वपूर्ण पक्ष जो कि इमरान खान ने फिर भी नहीं खोला, वह यह है कि आखिर किसने उन्हें कश्मीरियों को खून बहने के लिए डराने और उनकी जिंदगियों को खत्म किए जाने का डर दिखाने का अधिकार दिया?
European think-tank calls Imran Khan’s speech at UNGA ‘unmistakable bluster’
थिंक टैंक ने कहा अगर इस सवाल को लेकर इमरान खान का जवाब पाकिस्तानी सेना है, तो इस मामले में लगभग-लगभग सच्चाई है। यह उनके लिए मान लेने का वक्त है कि पाकिस्तानी जनता की आँखों पर कश्मीर का पर्दा डालकर उन्हें मजबूती का दिखावा करने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि ये बीते जमाने की बात है।
गौरतलब है कि 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली के 74वें अधिवेशन में अपने भाषण के दौरान इमरान खान ने 15 मिनट के बजाए करीब 50 मिनट तक भाषण दिया। उन्होंने अपने भाषण में भारत के खिलाफ काफी जहर उगला, परमाणु हमले की बात कही। कश्मीरी युवाओं को भड़काने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने दुनिया के दूसरे बोलने वाले वक्ताओं का भी ख्याल नहीं रखा।
थिंक टैंक ने कहा कि खान ने अपने भाषण के दौरान अच्छा खासा समय इस्लामोफोबिया के लिए पश्चिमी देशों पर आरोप लगाने में खर्च किया था। और लोगों को इस्लाम और उसके मानने वालों के बारे में समझाने की बात कही थी।
जम्मू कश्मीर में सब कुछ कैसा चल रहा है? मीडिया के एक वर्ग की मानें तो सरकार वहाँ के लोगों की आवाज़ दबा रही है क्योंकि सब कुछ शांत सा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मानें तो लोग भारतीय सेना से ही सहमे हुए हैं। सरकार बार-बार स्पष्ट कर चुकी है कि पाबंदियाँ हटाई जा चुकी हैं और जनजीवन सामान्य है। रवीश कुमार की मानें तो इंटरनेट पर प्रतिबन्ध से छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म नहीं भर पा रहे। वामपंथी गिरोह की मानें तो जम्मू कश्मीर में वहाँ की जनता पर अत्याचार किया जा रहा है। पाकिस्तान झूठा दावा करता रहा है कि कर्फ्यू लगा कर वहाँ के नागरिकों का दमन किया जा रहा है। आख़िर में फिर वही सवाल। सच क्या है?
यही जानने के प्रयासों के क्रम में हमारी बात डीएमसीएच (दरभंगा मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल) में कार्यरत एक डॉक्टर से हुई, जो हाल ही में जम्मू कश्मीर से लौटे हैं। डॉक्टर प्रशांत वत्स हाल ही में ‘नेशनल मेडिकोज आर्गेनाईजेशन’ संगठन के बैनर तले कश्मीर गए थे। वह वहाँ सामाजिक कार्यों से गए थे, नागरिकों को मेडिकल सुविधाएँ मुहैया कराने। एक आम भारतीय की तरह अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने वाले फ़ैसले को लेकर उनके मन में भी उत्सुकता थी। कुछ सवाल थे। हालाँकि, उनके मन में कुछ आशंकाएँ भी थीं लेकिन ये भाव भी था कि आख़िर कश्मीरी भी तो अपने हैं, भारतीय हैं। ऐसे में वह देश-सेवा का भाव लिए निकल पड़े।
जब उनकी फ्लाइट राजधानी श्रीनगर में लैंड हुई, तब शाम के 4.30 बज चुके थे। आपको पता ही है कि राज्य में अभी इंटरनेट पर प्रतिबन्ध है और मोबाइल सेवाओं पर भी फ़िलहाल रोक लगाई गई है। हाँ, संपर्क के लिए लैंडलाइन की व्यवस्था है। इसीलिए कॉल करने के लिए डॉक्टर प्रशांत ने टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर पर उपलब्ध लैंडलाइन सेवा का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने हालात के बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए वहाँ उपस्थित सुरक्षा बलों के अधिकारियों से बातचीत भी की। इसके बाद जम्मू कश्मीर में पर्यटन घटने का रोना रोने वालों की पोल खुल गई।
जवानों ने बताया कि टूरिस्ट सेवाओं में कोई रुकावट नहीं आई है और पर्यटक भले ही कम आ रहे हों लेकिन उन पर कोई पाबंदियाँ नहीं लगाई गई हैं। हाँ, टूरिज्म कम होने से स्थानीय लोगों पर ज़रूर असर पड़ा है। मीडिया का गिरोह विशेष लगातार ये चला रहा था कि बाहर से आए लोगों को जम्मू कश्मीर में फटकने भी नहीं दिया जा रहा और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस कर दिया गया। जबकि, वहाँ दिन-रात स्थिति पर नज़र रख रहे जवानों ने बताया कि पर्यटकों के घूमने-फिरने पर कोई पाबन्दी नहीं है। दूसरा मिथक यह भी फैलाया गया था कि राज्य में परिवहन व्यवस्था ठप्प हो गई है और लोगों को कहीं भी आने-जाने में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया गिरोह ने ख़बरें चलाई थीं कि आवागमन ठप्प हो गया है।
डॉक्टर प्रशांत जब एयरपोर्ट से बाहर निकले तो गिरोह विशेष द्वारा फैलाया गया ये झूठ भी बेनक़ाब हो गया। उन्होंने देखा कि टैक्सी सेवाएँ पूरी तरह से चालू थी। हाँ, टैक्सियों की संख्या थोड़ी कम ज़रूर थी लेकिन इतनी भी नहीं कि लोगों को कहीं आने-जाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़े। एयरपोर्ट पर डॉक्टर प्रशांत और उनकी टीम को रिसीव करने लोग आए हुए थे। आवागमन की सुविधाओं के बारे में बात करते हुए डॉक्टर प्रशांत ने बताया कि अगर रिसीव करने के लिए लोग नहीं भी आते तो भी वे सही गंतव्य तक पहुँच जाते क्योंकि टैक्सियाँ चल रही थीं।
डॉक्टर प्रशांत ने अपने अनुभव साझा करते हुए ऑपइंडिया को बताया कि मीडिया के एक गिरोह विशेष की पूरी रोजी-रोटी ही जम्मू कश्मीर को लेकर झूठा प्रोपेगंडा फैलाने से चलती है। एयरपोर्ट से आगे बढ़ते ही उन्हें एक पार्क में तिरंगा झंडा लहराता दिखा- पूरे शान के साथ। गर्व से भरे डॉक्टर प्रशांत पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्वप्न ‘एक देश, एक निशान’ को याद कर अभिभूत हो उठे। वो बताते हैं कि कश्मीर में तिरंगे को यूँ लहराते देख उनका मन गाड़ी से उतर कर झंडे को सलामी देने के लिए मचल उठा। हाँ, उन्होंने ये ज़रूर देखा कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और सुरक्षा बल एहतियातन काफ़ी सावधानी बरत रहे हैं।
श्रीनगर के एक पार्क में लहराते तिरंगे को देख कर डॉक्टर वत्स को बरबस ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ‘एक देश, एक निशान’ याद आ गया
डॉक्टर प्रशांत ने जम्मू कश्मीर में लगभग 5 दिन गुजारे और उन्हें कहीं कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई। वह 27 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक वहाँ रहे। उन्होंने बताया कि मीडिया के लोग केवल श्रीनगर के पॉश इलाक़ों से रिपोर्टिंग करते हैं और इसे ही पूरे कश्मीर के सन्दर्भ में पेश करते हैं। डॉक्टर प्रशांत और उनकी टीम ने जगह-जगह कैम्प लगाए, लोगों को ज़रूरी बातें बताईं और मुफ्त मेडिकल सुविधाएँ दी। इस दौरान उनकी टीम ने श्रीनगर, बडगाम और बारामूला में कैम्प लगाया। उन्होंने कुंजर में भी कैम्प लगाया, जो संवेदनशील इलाक़ों में से एक है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों और अलगाववादियों तक से बातें की।
डॉक्टर प्रशांत ने बताया कि श्रीनगर में कट्टरपंथियों की धमकी के कारण व्यापारियों के काम में बाधा आ रही है। वे स्थानीय दुकानदारों को दुकानें न खोलने को कहते हैं, जिससे बाजार पर असर पड़ा है। इन धमकियों के कारण दुकानदार कभी-कभार शाम के समय दुकानें खोलते हैं। स्थानीय इस्लामिक कट्टरपंथियों के डर से व्यापारियों को घाटा हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई बड़े मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अलगाववादी नेताओं के स्वामित्व वाले ही हैं। अब जाहिर सी बात है अलगाववादी अपनी बाजार व दुकानें नहीं ही खोलेंगे ताकि मीडिया में न्यूज़ जाए कि सब कुछ ठप्प पड़ा हुआ है और इससे सरकार पर ही दबाव बनेगा। ख़ुद अलगाववादी नेता गिलानी का भी एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स है।
श्रीनगर का लाल चौक: मीडिया के एक बड़े वर्ग के लिए पूरा कश्मीर यही है
डॉक्टर प्रशांत ने अपने कश्मीर के हालिया अनुभवों के आधार पर इस नैरेटिव को नकार दिया कि ‘कश्मीर में सुरक्षा बलों के कारण दुकानें नहीं खुल रहीं।’ स्थानीय नागरिकों की बात करते हुए डॉक्टर प्रशांत ने बताया कि राज्य में अधिकतर नागरिकों को अनुच्छेद 370 के बारे में कुछ मालूम भी नहीं है और वे बस इस बात से चिंतित हैं कि पर्यटन कब सामान्य होगा। उन्होंने बताया कि डल झील और गुलमर्ग में पर्यटन काफ़ी कम हो गया है। उन्होंने बताया कि अलगाववादी हवाला से रुपए लेकर दुकानदारों व रेहड़ी वालों को बाँटते हैं और बदले में उन्हें दुकानें बंद रखने को कहते हैं। अलगाववादी दुकानें बंद रखने वाले लोगों के घाटे की भारपाई करते हैं।
कई कश्मीरी लोगों ने डॉक्टर प्रशांत से कहा कि वे अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने का स्वागत करते हैं। जबकि कई लोगों में ऐसी भावना है कि वे कश्मीर को समुदाय विशेष बहुल बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन इसके उलट, जो लोग भारत के अन्य हिस्सों में पढ़ाई करके आए हैं, वे चाहते हैं कि कश्मीर भी भारत के बाकि राज्यों की तरह बने। उन्होंने बताया कि उन्हें टैक्सी में जो ड्राइवर मिला, वो भी पत्थरबाजी किया करता था। कश्मीर में यूपी-बिहार से लाखों लोग काम करने जाते हैं और उनकी कमाई भी अच्छी होती है। राज्य में मिस्त्री, कचड़ा उठाने और मोची वगैरह जैसे काम में अधिकार बिहारी लोग ही हैं।
डॉक्टर प्रशांत कहते हैं कि जम्मू कश्मीर में हिन्दुओं का बसना अत्यावश्यक है क्योंकि इससे वहाँ की डेमोग्राफी में बदलाव आएगा। राज्य अगर ऐसी व्यवस्था कर पाए तो हिंदू और दूसरे मजहब वाले एक-दूसरे को जान-समझ पाएँगे, आपसी द्वैष और टकराव की स्थिति को खुद ही नकार पाएँगे। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना पत्थरबाजों की पहचान कर के उन्हें राज्य से बाहर भेज रही है ताकि शांति-व्यवस्था बहाल की जा सके। डॉक्टर प्रशांत वत्स इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि कश्मीर के लोग कुछ दिनों बाद ख़ुद अलगाववादियों के चंगुल से बाहर निकलेंगे और रुपए ख़त्म होने के साथ ही दुकानें खोलने लगेंगे। उनका आकलन है कि कश्मीर के लोग जब भारत के अन्य हिस्सों को देखेंगे-समझेंगे और वहाँ के लोगों के रहन-सहन को जानेंगे, तब वे भी अलगाववादियों की करतूतों का विरोध करने लगेंगे।
उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में सरकारी दुकानें खुली हुई हैं। फ्लाइट के टिकट की बुकिंग के लिए श्रीनगर में 5 काउंटर्स बने हुए हैं और इंटरनेट बंद रहने के कारण लोग वहीं जाकर बुकिंग करते हैं। डॉक्टर वत्स का मानना है कि जम्मू कश्मीर के सामान्य नागरिक अच्छे हैं। हर 50-100 मीटर की दूरी पर सेना और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। उन्होंने बताया कि कई दुकानदारों ने पिछले दरवाजें से दुकानें खोल रखी थीं। सुबह 7 बजे दुकानें खुलने के बाद लोग 10 बजे तक रोजमर्रा की ज़रूरत की चीजें ख़रीद कर घर में रख लेते हैं। फिर शाम को कुछ देर के लिए दुकानें खुलती हैं।
पर्यटन में कमी आई है लेकिन पर्यटकों पर कोई पाबंदियाँ नहीं हैं (चित्र: डॉक्टर प्रशांत वत्स गुलमर्ग के पास)
अगर सरकार की बात करें तो डॉक्टर प्रशांत वत्स मानते हैं कि सरकार जम्मू कश्मीर के लोगों की तमाम दिक्कतों से निपटने में काफ़ी मदद कर रही है। उन्होंने रास्ते पर आलू और प्याज से लदे कई ट्रक देखे, जो प्रशासन ने नागरिकों के लिए मँगाए थे। इससे पता चलता है कि सरकार महँगाई को लेकर भी गंभीर है और लगातार इस प्रयास में लगी है कि लोगों को रोजमर्रा की ज़रूरत की चीजें मुहैया कराने में दिक्कतें न आएँ। डॉक्टर प्रशांत वत्स के ग्राउंड पर के अनुभवों से न सिर्फ़ मीडिया के गिरोह विशेष की पोल खुलती है, बल्कि वामपंथियों व विपक्षियों के एक धड़े के झूठे दावे भी बेनक़ाब हो जाते हैं।
(यह लेख DMCH में कार्यरत डॉक्टर प्रशांत वत्स से ऑपइंडिया की बातचीत के आधार पर तैयार की गई है। डॉक्टर वत्स MBBS की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और ‘दरभंगा मेडिकल कॉलेज एन्ड हॉस्पिटल’ में कार्यरत हैं। वह कश्मीर दौरे से वापस बिहार लौट आए हैं।)
राजस्थान के करौली से 14 साल की दलित बच्ची का उसके भाई के सामने यौन उत्पीड़न करते हुए वीडियो बनाकर वायरल करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। कहा जा रहा है मामला 10 दिन पुराना है लेकिन शनिवार को घटना का वीडियो वायरल होने के बाद इस पर संज्ञान लिया गया।
मीडिया में आई खबरों के अनुसार दलित बच्ची अपने रिश्ते में भाई के साथ पहाड़ों पर स्थित मंदिर जा रही थी, जब उसे वहाँ 4-5 अज्ञात लोग मिले। इन लोगों ने पहले लड़की के भाई को पकड़ा और फिर लड़की से छेड़खानी करने लगे। लड़की ने उन युवकों से उन दोनों को छोड़ने की विनती की। लेकिन, आरोपित युवकों में से एक उनकी सुननी के बजाए अपना मोबाइल फोन निकालकर पूरी घटना की रिकॉर्डिंग करने लगा। वहीं, दूसरा युवक लड़की का दुपट्टा खींचते हुए उसे उसके कपड़े हटाने को बोलने लगा।
वायरल हुए इस वीडियो में देखा गया कि ये युवक दोनों भाई-बहन के साथ बदसलूकी, गाली-गलौच एवं मारपीट कर रहे हैं और दोनों पीड़ित सिर्फ़ उनके पाँव पकड़कर उनसे उन्हें छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं।
Yet another horror story, this time from Rajasthan. 14-year old Dalit girl sexually harassed, video-filmed, three accused arrested https://t.co/xGvDUDNTts
वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भरतपुर संभाग के आईजी लक्ष्मण गौड़ ने जिला एसपी सहित सभी थाना अधिकारियों को वीडियो में दिखाई दे रहे आरोपित युवकों की फोटो के आधार पर तलाश करने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस ने लगातार अलग-अलग स्थानों पर छानबीन की। जाँच में मालूम हुआ कि वायरल वीडियो करौली के कोटे गाँव स्थित कुंडा वाले बालाजी के पास की पहाड़ी का है और तीनों आरोपित भी वहीं कोटे गाँव के निवासी हैं।
पहाड़ी स्थान पर युवक-युवती से मारपीट और बदतमीजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हरकत में आई पुलिस ने घटनास्थल का पता लगाकर 3 आरोपियों को हिरासत में लिया है. https://t.co/2i1ASUTyNm
भरतपुर डीआईजी लक्ष्मण गौड़ ने मामले के संबंध में बताया है कि लड़की का बयान लेकर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और वीडियो में नजर आने वाले युवकों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
यहाँ बता दें कि पुलिस ने आरोपितों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 354, 506, 354बी, आईटी एक्ट, एसएसी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि वीडियो इंटरनेट पर डाले जाने के डर से पीड़ित बच्ची ने इस बारे में किसी को नहीं बताया कि उसके साथ क्या हुआ।
उल्लेखनीय है कि करौली का ये मामला बिलकुल यूपी के कौशांबी जैसा ही मालूम पड़ रहा है। जहाँ दलित लड़की का बलात्कार करते हुए उसका वीडियो बनाया गया था। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला संज्ञान में आया था। जिसमें पुलिस ने मोहम्मद आदिल, मोहम्मद आदिक और मोहम्मद नाजिम को गिरफ्तार किया गया। उस घटना के वायरल वीडियो में साफ़ सुना जा सकता था कि बच्ची उन युवकों से रो रोकर कह रही थी, “अल्लाह की कसम, मेरे साथ ऐसा मत करो।”