केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार पर बड़ा कदम उठाते हुए 15 इनकम टैक्स अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है। बता दें कि इस साल जून महीने में भी ऐसा ही एक फैसला लिया गया था। उसमें हाई रैंक वाले भारतीय राजस्व सेवा के 27 अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया गया था। इनमें केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के 12 अधिकारी भी शामिल थे।
Central Board of Direct Taxes: CBDT compulsorily retired yet another 15 very senior officers of rank of Prinicipal Commissioner of Income Tax (CIT), CIT, Junior CIT, Addl. CIT, Assistant CIT, today, due to corruption and other charges and CBI traps. pic.twitter.com/N8Ik3pVAND
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन टैक्स अधिकारियों के खिलाफ अनियमितता के आरोप हैं, उनके खिलाफ यह कड़ी कार्रवाई की है। बता दें कि सेंट्रल सिविल सर्विसेज 1972 के नियम 56(J) के तहत 30 साल तक सेवा पूरी कर चुके या 50 साल की उम्र पर पहुँच चुके अधिकारियों की सर्विस सरकार समाप्त कर सकती है। सीबीआई ने यह कार्रवाई जनहित में सीआईटी, सीआईटी, जेसीआईटी, एडल सीट, एसीआईटी के मौलिक नियम 56 (J) के तहत की है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेन्स की बात करते प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को दिए अपने संबोधन में भी कही थी और एक प्रमुख आर्थिक दैनिक को दिए अपने इंटरव्यू में भी कहा था कि “कुछ काले भेड़ कर प्रशासन में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और करदाताओं को परेशान किया जाता रहा है ऐसे अधिकारियों पर हम कार्रवाई कर उन्हें दंडित करेंगे।”
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय संस्थानों से इस बारे में मासिक रिपोर्ट मँगाना शुरू कर दिया है। क्योंकि सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दिया जा सकता है। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर कर प्रशासन में पारदर्शिता और फुर्ती लाना है।
परसों (25 सितंबर, 2019) को ऑपइंडिया पर एक दलित बच्ची के सामूहिक बलात्कार की खबर आई थी, जिसे फेसबुक पेज के माध्यम से शेयर किया गया। थोड़ी देर में फेसबुक ने ‘कम्यूनिटी गाइडलाइन्स’ का हवाला देते हुए उसे पेज से हटा दिया। हमें अगले दो दिन तक यह भी नहीं बताया गया कि कारण क्या था। हमने फेसबुक से बातचीत करने की कोशिश की तो बताया गया कि हमारे द्वारा शेयर की गई तस्वीर में समस्या है।
यूँ तो तस्वीर को आप देखें तो उससे किसी भी तरह की समस्या नहीं दिखती। फेसबुक का मानना है कि उसकी नीति के हिसाब से अगर कोई नाबालिग किसी भी यौनहिंसा का शिकार हुई है, तो उसकी तस्वीर हम धुँधली कर के भी नहीं दिखा सकते। ये नीति आपको सतही तौर पर सही लगेगी कि पीड़िता बच्ची है, उसे हमें सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखाना चाहिए।
लेकिन, इस नीति की वजह क्या रही होगी? वजह यह होती है कि पीड़िता के साथ अन्याय न हो, लोग उसकी पहचान के कारण उसे परेशान न करें, उसकी निजता का हनन न हो, उसे किसी भी तरह से नीचा न दिखाया जाए। अब आप ये तस्वीर देखिए, और सोचिए कि इस तस्वीर से क्या पीड़िता की पीली ड्रेस के सिवाय किसी भी और बात का पता चलता है? क्या यह तस्वीर पीड़िता को नकारात्मक रूप में दिखा रहा है?
ख़ैर, अगर फेसबुक यहाँ अपना दोगलापन त्याग कर बात कर रहा होता तो हम मान लेते कि सच में ये लोग इस बात को लेकर संवेदनशील हैं, और इनकी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), मशीन लर्निंग तकनीकों से ऐसी तस्वीरों को फैलने से रोका जा सकता है। लेकिन ऐसी बात नहीं है। यही तस्वीर, और यही खबर दूसरे वेबसाइट के फेसबुक पेज पर देखी जा सकती है। वहाँ इन्होंने दो अलग-अलग खबरों में इस्तेमाल हुई तस्वीरों को रहने दिया, वो पोस्ट फेसबुक द्वारा डिलीट नहीं किए गए।
SwarajyaMag पोर्टल के फेसबुक पेज के तीन स्क्रीनशॉट
इसका अर्थ यह हुआ कि किसी खास संस्था पर इनका काँटा ज्यादा संवेदनशील हो जाता है, और वो भी शायद तब जब किसी खास पहचान वाले लोग एक साथ ऐसी खबरों को रिपोर्ट करते हैं। क्योंकि, अगर एक फेसबुक पेज पर उसी तस्वीर पर आप एक चेतावनी लगाते हैं कि ‘ये तस्वीर हिंसा या अप्रिय जानकारी के साथ है’, लेकिन दूसरे पेज को आप कोई चेतावनी नहीं देते, उस पोस्ट को डिलीट कर देते हैं। उसके बाद भी आपका दिल नहीं भरता तो उसके संपादक की निजी प्रोफाइल को 24 घंटे के लिए ब्लॉक कर देते हैं।
फेसबुक हिन्दुओं को मामले में कुछ ज्यादा ही संवेदनशील हो जाता है
जब मैंने इसके बारे में फेसबुक पर लिखा तो पता चला कि कई लोगों को ‘सूअर’ लिखने से लेकर ‘जय श्री राम’ को अभिवादन स्वरूप लिखने तक के लिए ब्लॉक किया गया है। एक यूजर ने बताया कि आप अगर संस्कृत में कोई मंत्र लिखते हैं, और कोई उसे ‘हेट स्पीच’ कह कर रिपोर्ट कर दे, तो फेसबुक त्वरित कार्रवाई करते हुए आपका अकाउंट सस्पेंड कर देगा। (हर यूजर का स्क्रीनशॉट पोस्ट के अंत में है।)
एक यूजर तरुण कुमार ने अल्लामा इकबाल और ‘सारे जहाँ से अच्छा’ गीत के बारे में कुछ लिखा था जिसमें बताया गया था कि इकबाल जैसे लोगों को दार्शनिक कहा गया जबकि उसका पूरा दर्शन दूसरे धर्म के खिलाफ घृणा फैलाने पर आधारित था। इसके साथ ही इस्लामी जिहाद और कट्टरपंथ की बात की गई थी। ये आज के दौर की सच्चाई है। पोस्ट में सच लिखा गया था और कहीं से भी किसी को भड़काने की बात नहीं थी, लेकिन फेसबुक ने उसे हटावाया और प्रतिबंध लगा दिया।
एक यूजर सुमित ने किसी को ‘सूअर’ कह कर गाली दी। वो व्यक्ति समुदाय विशेष से नहीं था जिससे लगे कि उसके मजहब को निशाना बनाया जा रहा है। फेसबुक ने उसे भी सस्पेंड कर दिया। मैं गाली को डिफेंड नहीं कर रहा, लेकिन मुझे नहीं लगता फेसबुक के पास इतनी शक्ति है कि वो गालियों को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दे। गाली देना बहुत आम बात है, और अधिकांश लोग देते हैं। फेसबुक बेशक, अगर उसे पादरीगीरी करनी है, तो हर ‘फक’ और ‘शिट’ को हटा दे, और पोप के प्रवचन चलाया करे, लेकिन इसके लिए अकाउंट सस्पेंड करना, समझ से बाहर है।
एक अन्य यूजर राजन धर्मेश बताते हैं कि जब ‘सूअर’ लिखने पर अकाउंट ब्लॉक हो सकता है तो किसी दूसरे यूजर ने राम मंदिर के संदर्भ में ‘चूतिया’ शब्द का प्रयोग किया, तो उसे क्यों नहीं हटाया गया? जबकि अगर आपके कम्यूनिटी स्टैंडर्ड के हिसाब से ‘सूअर’, जो कि एक जानवर का नाम है, और गाली के रूप में प्रयुक्त होता है, वो हटाने योग्य है, तो फिर ‘चूतिया’ तो गाली के रूप में ही प्रयोग में आता है, वो कैसे किसी भी नीति को वायलेट नहीं करता?
अभिनव बताते हैं कि उन्होंने किसी बच्ची के बलात्कार और हत्या के संदर्भ में एक पोस्ट लिखा था और उसके लिए न्याय की गुहार लगा रहे थे। उस पोस्ट में उस घटना की विस्तृत जानकारी थी कि लाश कैसे मिली, दरिंदों ने क्या किया था, लेकिन किसी ने रिपोर्ट कर दिया और अकाउंट सस्पेंड हो गया। उसमें भी पीड़िता बच्ची थी और आरोपित खास मजहब से ताल्लुक रखते थे।
सुदर्शन ने ‘पुरबा’ और ‘पछुआ’ हवाओं के बारे में कुछ लिखा, जिसका और कोई संदर्भ नहीं, लेकिन उसके पोस्ट को हटा दिया गया। सबसे मजेदार बात तो यह है कि अंकुर त्रिपाठी ने कहीं ‘जय श्री राम’ और ‘श्री अंजनेयम’ लिखा तो उसे कम्यूनिटी स्टैंडर्ड के खिलाफ बता हटा दिया गया। गुलशन पाहूजा की बात करें तो उन्होंने अनुच्छेद 370 हटने पर कश्मीर की स्थिति पर कुछ लिखा था और उनका अकाउंट तीन दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया।
यानी, फेसबुक में बैठा आदमी जो चाहे कर सकता है
ये तो बस चंद उदाहरण हैं जहाँ फेसबुक की फर्जी बातें फट कर फ्लावर हो जाती हैं कि वो रिपोर्ट हुए पोस्ट को जाँचते हैं, उसके बाद कार्रवाई करते हैं। अगर ये इन्हें जाँचते हैं, तो मेरी समझ में यही बात आती है कि इनकी टीम में नकारे लोग बैठे हुए हैं। अगर ये लोग नकारे और निकम्मे नहीं हैं, जिन्हें अपना काम ठीक से नहीं आता, तो फिर ये लोग धूर्त और पूर्वग्रहों से ग्रस्त कर्मचारी हैं।
दिखाने के लिए बिलकुल इनकी एक पॉलिसी है, उसकी टीम है, उस टीम का मुखिया भारत आता है तो मंत्री जी से मिलता है, बताता है कि वो ऐसा कुछ नहीं होने देंगे जिससे वैचारिक विविधता खतरे में पड़े, लेकिन भीतर में ये बहुत ही शातिर लोग हैं जो जानते हैं कि एक यूजर उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आप अपील कर सकते हैं, लेकिन अपील पर भी अगर यह कहा जाए कि आपने जो कहा वो तो ठीक है, और फलाँ पोस्ट हमारी गाइडलाइन्स के खिलाफ हैं लेकिन हम उसे नहीं हटाएँगे।
या, यह कह दें कि आपने जो ‘जय श्री राम’ लिखा है उससे किसी दूसरे की भावनाएँ आहत हो गई हैं, इसलिए हम पोस्ट तो हटाएँगे ही, आपको ब्लॉक भी करेंगे एक दिन के लिए। यही हो रहा है। ऐसा बार-बार सुनने में आया है कि फेसबुक पर आप हिन्दू देवताओं को अपमान की बात, उनके धार्मिक प्रतीकों को अश्लील तरीके से दिखाने की बात करें, तस्वीरें लगाएँ, आपको कुछ नहीं होगा। वो पोस्ट वहीं रहेगा।
लेकिन, आप ने किसी ‘मजहबी’ नाम वाले बलात्कारी का नाम लिख दिया, किसी ‘मजहबी’ बलात्कारी के कुकृत्यों को लिख कर पीड़िता के लिए न्याय की गुहार लगाई तो फेसबुक में बैठा कोई कर्मचारी आपको ब्लॉक कर देगा। उसे सिर्फ एक रिपोर्ट चाहिए किसी से भी, और आपको लम्बे-चौड़े कम्यूनिटी गाइडलाइन्स का हवाला दे कर ब्लॉक कर दिया जाएगा।
इसकी कोई सुनवाई नहीं होती
मैंने फेसबुक के आला अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो मुझे कहा गया कि पोस्ट हटा लीजिए। हमने हटा लिया। मेरा सवाल उनसे यह था कि अगर फेसबुक को लगा कि इस तस्वीर में दिक्कत है, तो एक बेहद अस्पष्ट भाषा में ‘कम्यूनिटी गाइडलाइन्स’ का हवाला देने की जगह, यह क्यों नहीं कहा कि तस्वीर में समस्या है। पहली ही बार की जा रही कथित गलती पर आपने अकाउंट सस्पेंड कर दिया और कारण तब बताया जब हमने आप पर दबाव बनाया।
दूसरी बात यह कि जब हमने पूछा कि आपका ‘अपील’ कर पाने का बटन क्यों नहीं काम कर रहा था, तो कहा गया कि वो पता करेंगे कि आखिर ऐसी क्या बात हुई कि उस दिन, उस पोस्ट पर ये बटन बंद हो गया! वो कहते रहे कि वो मेरी सारी बातों का जवाब दे देंगे और वो हर संभव कोशिश करते हैं कि हर तरह के विचारों का सम्मान हो, लेकिन फेसबुक के कृत्य तो ऐसे नहीं लगते।
राइट विंग के विचारों को, इनके फेसबुक पेजों को, इनके ट्विटर हैंडलों को, यूट्यूब वीडियो को हर तरह से ज्यादा लोगों तक पहुँचने से रोका जा रहा है। ये शिकायत सैकड़ों लोगों की है, जो सिर्फ मेरे सम्पर्क में हैं। जब आप इन्हें यह बात कहिए तो कहते हैं कि ये महज गलतफहमी है, कम्पनी तो हर तरह के विचारों का सम्मान करती है।
ये तो बस चंद उदाहरण हैं जो दो घंटे में फेसबुक पर मुझे कुछ लोगों ने भेज दिए, लेकिन यह सत्य है कि हर हिन्दू नाम वाला व्यक्ति, हर वो आईडी जिसने कश्मीर पर ये नहीं लिखा कि वहाँ मानवाधिकारो का हनन हो रहा है, जिन्होंने इस्लामी आतंक के ऊपर लिखा है, किसी को कमेंट में जवाब दे कर कुछ वैसा लिखा जो सच हो लेकिन पोलिटिकली करेक्ट न हो, कोई भी अदरक-लहसुन आपको रिपोर्ट कर देगा और आपका नाम, आपकी विचारधारा देखते ही फेसबुक में बैठे एक निठल्ले कर्मचारी की बाँछें खिल जाएँगी, और आपको बिना अपनी बात रखने का मौका दिए ब्लॉक कर दिया जाएगा।
मैं तो फेसबुक के अधिकारियों से बात कर सकता हूँ, लेकिन जिस लोकतांत्रिक प्लेटफॉर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दम्भ फेसबुक का मालिक अमेरिका की संसद में भरता है, और आम जनता की निजता, उसकी वैचारिक विविधता के सम्मान की बात उस संसद को मानने को कहता है, वो प्लेटफॉर्म भारत में हिन्दूफोबिया के समर्थन में और दक्षिणपंथी लोगों के विरोध में हमेशा खड़ा दिखता है।
आम आदमी के पास झुकने के अलावा, या यहाँ से जाने के अलावा कोई चारा नहीं। बात यह नहीं है कि कोई यहाँ है ही क्यों, बात यह है कि कोई अगर यहाँ है तो प्लेटफॉर्म अपनी ही नीतियों से कैसे मुकर सकता है? इस पर लगातार आवाज उठाने की ज़रूरत है क्योंकि वैचारिक विविधता के प्रति यह रवैया आज के दौर में अस्वीकार्य है।
पाकिस्तान पंजाब में आतंकी वारदात कराने के मंसूबे से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल, पंजाब पुलिस ने अटारी बॉर्डर पर पाकिस्तान से हथियारों की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक और ड्रोन बरामद किया है। इससे पहले पुलिस को सीमावर्ती इलाक़ों में चार और पाकिस्तानी ड्रोन के छिपे होने की सूचना मिली थी। दूसरी ओर, तरनतारन के बॉर्डर एरिया में आतंकियों द्वारा चार और ड्रोन छिपाए जाने का खुलासा हुआ है। पाकिस्तानी ड्रोन से भारतीय सीमा क्षेत्र में हथियार पहुँचाने की यह एक बड़ी साजिश है। रिपोर्ट्स के अनुसार, खेमकरण क्षेत्र में भी ड्रोन से हथियार भेजे जाने के लगातार खुलासे हो रहे हैं।
ख़बर के अनुसार, प्रदेश के तरनतारन के चोहला साहिब गाँव के पास चार दिन पहले गिरफ़्तार किए गए खालिस्तान ज़िंदाबाद फ़ोर्स के आतंकियों ने पूछताछ के दौरान कई ख़ुलासे किए थे। इस पूछताछ में पता चला था कि झब्बाल इलाक़े में ड्रोन छिपाए गए हैं। इसी इनपुट पर पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलीजेस की टीम ने शुक्रवार (27 सितंबर) की सुबह आतंकवादियों के साथी आकाशदीप को साथ लेकर अटारी इलाक़े में सर्च अभियान शुरू किया।
बता दें कि खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के आतंकियों की निशानदेही पर पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा ने अटारी के पास से जो ड्रोन बरामद किया है वह ड्रोन आतंकियों ने झाड़ियों में छुपा कर रखा था। पुलिस अटारी के पास केे नालों की भी जाँच कर रही है।
सर्च अभियान के दौरान अमृतसर के महाभा गाँव में एक ड्रोन के मिलने की सूचना मिली। फ़िलहाल, पुलिस इसकी जाँच-पड़ताल में जुट गई है और इसकी सूचना मिलते ही बीएसएफ़ के आला अधिकारियों ने भी आपात बैठक बुलाकर मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्च अभियान में तेज़ी ला दी है। इस तरह पुलिस और बीएसएफ़ दोनों मिलकर छिपे हुए चार ड्रोन को खोजने में जुट गए हैं।
पिछले दिनों पंजाब सरकार ने कहा था कि पाकिस्तान, ड्रोन के ज़रिए हथियार और विस्फोटक भेजने का काम कर रहा है। पंजाब पुलिस के सूत्रों के अनुसार, AK-47 राइफ़ल्स और ग्रेनेड की भारी मात्रा को ड्रोन के माध्यम से अमृतसर भेजा गया।
ग़ौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद पाकिस्तान, भारत में घुसपैठ की कोशिशें कर रहा है। लेकिन, भारतीय सेना की सतर्कता के चलते घुसपैठ की हर कोशिश को असफल कर दिया गया। इसलिए पाकिस्तान ने ड्रोन के ज़रिए हथियार और विस्फोटक भेजने का तरीका खोज निकाला है। निश्चित तौर पर पाकिस्तान की इस कोशिश को भी भारतीय सेना मुँहतोड़ जवाब देगी।
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदहा इलाके के नराइज ग्राम में निखत बानो नाम की महिला को गर्भपात का विरोध करने पर उसके पति सलमान और ससुर लाल खान ने बेहरमी से सड़क पर घसीट-घसीटकर पीटा। घटना गुरुवार की है।
न्यूज 18 की खबर की मुताबिक निखत के गर्भवती होने की सूचना मिलते ही उसके शौहर और ससुर उसपर गर्भपात करवाने का दबाव बनाने लगे। महिला ने इसका विरोध किया तो उसको सड़क पर घसीट-घसीट कर पीटा गया। जिसके बाद इस घटना की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
हमीरपुर: एबॉर्शन का विरोध करने पर ससुर ने बीच सड़क पर बहू को पीटा, वीडियो वायरल https://t.co/I8tnyWx6Zv
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि निखत पर उसका पति और ससुर लाठी-डंडे बरसा रहे हैं। बीच में उसकी सास उसको बचाने आती है, लेकिन ये दोनों उन्हें भी नहीं बख्शते और निखत की सास पर लाठी-डंडे चलाने लगते हैं।
हमीरपुर : एबॉर्शन का विरोध करने पर बीच सड़क पर बहू को ससुर ने पीटा, वीडियो वायरल – hamirpur man beats up daughter in law for opposing abortion video viral upat | uttar-pradesh – News in Hindi https://t.co/AVyrZotoqnpic.twitter.com/NaeaC4fi3E
— Hindi 2 News – Online Read Latest News (@hindi2news) September 27, 2019
जानकारी के मुताबिक इस घटना में महिला और उसकी सास को इतना पीटा गया कि दोनों औरतें लहू-लुहान हो गईं। इस कारण दोनों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।
न्यूज 18 पर घटना का वीडियो
हालाँकि, पुलिस ने इस मामले को सामान्य धाराओं में दर्ज किया है। लेकिन, निखत का कहना है कि उसके पति, ससुर ने उसपर पहले गर्भपात का दबाव बनाया और उसके गहने छीन लिए। जब उसने इनका विरोध किया तो उसे बेहरमी से पीटा गया।
खबर के अनुसार, एसएसपी संतोष सिंह ने बताया कि मौदहा कोतवाली क्षेत्र के नराइज गाँव का ये मामला है। यहाँ का निवासी सलमान रायपुर में काम करता था, उसने वहीं एक लड़की (निखत) से निकाह कर लिया। कुछ दिन बाद अनबन हुई तो लड़का अपने घर वापस लौट आया। महिला जब अपने भाई और परिजनों के साथ लड़के के घर में घुसने की कोशिश करने लगी, तो मारपीट हुई। पीड़ित पक्ष ने मामले को दर्ज करवाया है और गर्भपात के आरोप पर उन्होंने कहा है कि ये जाँच का विषय है। जाँच में जो तथ्य सामने आएँगे उसपर उसी अनुसार कार्रवाई होगी।
राजस्थान के पूर्व राज्यपाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष कोर्ट से जमानत मिल गई है। कल्याण सिंह को 2 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मिली। कल्याण सिंह शुक्रवार (सितंबर 27, 2019) को करीब 12:00 बजे कोर्ट में पेश हुए थे। कल्याण सिंह की तरफ से वकीलों ने कोर्ट में सरेंडर एप्लीकेशन दाखिल की थी। साथ ही कल्याण सिंह की तरफ से मामले में जमानत अर्जी भी दाखिल की गई थी। वकीलों ने उनकी खराब सेहत का हवाला देते हुए जमानत अर्जी दाखिल की थी।
Manish, BJP leader Kalyan Singh’s lawyer in Babri Masjid demolition case: Kalyan Singh ji has been granted bail by the court on a personal bond of Rs 2 lakhs. pic.twitter.com/4gOqF5XayV
साथ ही कोर्ट ने कल्याण सिंह पर आरोप तय कर दिए हैं। उन पर आईपीसी की धारा 153a, 153b और 295 समेत कई धाराओं में आरोप दर्ज किए गए हैं। पेशी के लिए जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कल्याण सिंह ने कहा था, “सीबीआई कोर्ट ने मुझे आज तलब किया था इसलिए मैं जा रहा हूँ। मैंने हमेशा न्यायालय का सम्मान किया है और करता रहूँगा।”
#Lucknow: BJP leader Kalyan Singh to appear before a Special CBI court in connection with the Babri Masjid demolition case, says, “The CBI court had summoned me today, so I am going there. I have always respected the court and will continue to do so.” pic.twitter.com/gqOQK34rX2
गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराया गया था। तब कल्याण सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को नुकसान न होने देने का वादा किया था, लेकिन इसके बाद भी मस्जिद को गिरा दिया गया था। घटना के बाद सिंह ने मामले की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
कल्याण सिंह को 3 सितंबर 2014 को राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया था। 5 साल तक संवैधानिक पद पर होने के कारण सिंह को अदालत की ओर से तलब नहीं किया गया। अनुच्छेद 361 के तहत पेशी से छूट मिली हुई थी। संवैधानिक पद पर होने के कारण न्यायालय ने उन पर बाद में आरोप तय करने को कहा था। अब कल्याण सिंह के राज्यपाल के पद से हटने के बाद सीबीआई कोर्ट ने उन्हें तलब किया है।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निष्क्रिय किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान पिछले दो महीने से कश्मीर में मजहब विशेष के मानवाधिकारों के उल्लंघन का रोना रो रहा है। इसके लिए वो ग़लत बयानबाज़ी का कुचक्र तक रच रहा है। इस पर दक्षिण और मध्य एशिया के अमेरिकी कार्यवाहक सहायक सचिव ऐलिस वेल्स ने फ़टकार लगाते हुए कहा कि वो कश्मीर से ध्यान हटाकर चीन में उइगरों पर इलाज के नाम पर हो रहे अत्याचार की चिंता करे। वहाँ उन्हें नज़रबंदी शिविरों में रखा जा रहा है। पाकिस्तान इस विषय पर कोई चिंता ज़ाहिर नहीं करता।
वेल्स ने कहा,
“ट्रम्प प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में चीन द्वारा उइगरों के नज़रबंदी शिविरों के भयानक हालात के मामलों को उठाया है। उइगरों के लिए ऐसे हालात पूरे चीन में हैं। हम आगे भी इस मसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना जारी रखेंगे।”
उन्होंने अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के मद्देनज़र परमाणु-हथियारबंद दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच बढ़े तनाव के मुद्दे को संबोधित करते हुए दोनों देशों से बयानबाज़ी को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर पर इमरान ख़ान की टिप्पणियाँ गैरजरूरी थीं।
चीन द्वारा 1 मिलियन से अधिक उइगरों की नज़रबंदी पर पाकिस्तान की चुप्पी पर निशाना साधते हुए वेल्स ने कहा, “मैं पश्चिमी चीन में हिरासत में लिए जा रहे उइगरों के विषय पर पाकिस्तान की ओर से वही प्रतिक्रिया देखना चाहूँगा। उनके मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा सिर्फ़ कश्मीर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से दुनिया भर में लागू है।”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान संयुक्त राष्ट्र महासभा के साथ-साथ अन्य कई मंचों से भी कश्मीर मुद्दा उठा चुके हैं। लेकिन उन्हें किसी भी कोशिश में सफलता नहीं मिली। हाल ही में यूएन महासभा में इमरान ने ख़ुद मान लिया कि वे कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में असफल रहे। इमरान ने कहा था कि वे मामले की गंभीरता न समझ पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से खफ़ा हैं।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब तक सिर्फ़ चीन ने ही पाक का समर्थन किया है। यूएन में बंद कमरे में कश्मीर समस्या पर बहस कराने के लिए चीन ने ही पाक का साथ दिया था। हालाँकि, उसकी कोशिशें असफल रहीं। 57 देशों के इस्लामिक कोऑपरेशन आर्गनाइजेशन (आईओसी) ने भी पाक का साथ नहीं दिया।
चीन में क़ैद उइगरों के विषय पर इमरान ख़ान पहले भी पर चुप्पी साध चुके हैं। अलजजीरा के एक साक्षात्कार के दौरान पत्रकार मोहम्मद जमजूम ने जब उसने सवाल किया, “पाकिस्तान चीन के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है, क्या आपने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कभी उइगरों के उत्पीड़न के मुद्दे पर चर्चा की है?”
When asked about China’s treatment of Uyghur Muslims, primer minister of Pakistan says, “frankly, we’ve been facing so many of our internal problems that I don’t know much about this problem.” pic.twitter.com/wLkfYZkq1Z
इस पर इमरान ने जवाब दिया था कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता इसलिए उन्होंने कोई बात नहीं की। आंतरिक समस्याओं से जूझने का हवाला देकर उन्होंने कहा था कि फ़िलहाल वो देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने में लगे हुए हैं, इसलिए चीन में नज़रबंद उइगरों के मुद्दे पर उन्हें वास्तव में कोई जानकारी नहीं है। इस साक्षात्कार में इमरान ख़ान ने इस बात को भी स्वीकारा था कि अगर भारत के साथ परंपरागत युद्ध हुआ तो उनके देश को मुँह की खानी पड़ेगी।
हाईकोर्ट से 29 मामलों में राहत मिलने के बावजूद भी सपा सांसद आजम खान की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। ताजा जानकारी के अनुसार आचार संहिता के कई अन्य मामलों में आजम खान के घर के दरवाजे पर पुलिस ने 15 नोटिस और कोर्ट के समन चस्पा किए हैं। इनमें आजम को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है, और जौहर यूनिवर्सिटी में किसानों की जमीन मामले में पुलिस के सामने पेश होने के आदेश दिए गए हैं।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट से जारी समन के मुताबिक सपा के सांसद को रामपुर की कोर्ट में पेश होना है। थाना गंज, थाना शाबाद, थाना स्वार के कई मामलों में विशेष अदालत ने आजम खान को 27 सितंबर और 3 अक्टूबर को पेश होने का आदेश दिया है। इसके अलावा जौहर यूनिवर्सिटी मामले में पुलिस ने उनको 30 सितंबर को बुलाया है।
इसके अलावा बता दें कि जौहर यूनिवर्सिटी मामले में किसानों की जमीनें कब्जाने के मामले में एसआईटी ने बयान दर्ज करके सांसद आजम खान को दोबारा नोटिस जारी किया है। उनसे कहा गया है कि वह 30 सितंबर को अपना पक्ष प्रस्तुत करें और एसआईटी की जाँच में सहयोग करें।
गौरतलब है कि बीते दिनों आजम खान की बढ़ी मुश्किलें किसी सिरे पर रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके ख़िलाफ़ एक के बाद एक इतने एफआईआर हो चुके हैं कि विभिन्न मामलों में नोटिसों के चस्पा होने से उनके घर की दीवार भर गई हैं। नोटिस बोर्ड पर भी नोटिस चिपकाने की जगह नहीं बची है। उनपर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किए जमीन अतिक्रमण से लेकर बकरी चोरी, भैंस चोरी और बिजली डकैती तक के मामले दर्ज हैं। हालात अब ये हो चुके हैं कि आजम घर के गेट के बाहर इन नोटिसों की तस्वीर आए दिन सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है।
आतंकवादियों की घुसपैठ की एक बड़ी साजिश का एक वीडियो रिलीज़ किया गया है। घुसपैठ की यह कोशिश 30 जुलाई को की गई थी। 370 हटाने के फैसले से ठीक 5 दिन पहले, एलओसी के पास कुपवाड़ा सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों की कोशिश को नाकाम करने का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में पाकिस्तानी घुसपैठियों को घुसपैठ की कोशिश करते हुए साफ देखा जा सकता है।
बता दें कि 30 जुलाई को पाकिस्तानी आतंकी कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर से सटी नियंत्रण रेखा के नजदीक भारतीय सेना ने घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे थे। भारतीय सेना ने आतंकवादियों के इस बड़े दल को देखा और उन पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसने आतंकवादियों को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। भारतीय सेना की फायरिंग और मुस्तैदी से सहमे आतंकवादी किसी तरह वहाँ से जान बचाकर अपने अपने क्षेत्र में भागे।
Indian Army detected Pakistani terrorists near LoC in Kashmir’s Kupwara sector on 30 Jul.Indian troops started firing at them as soon as terrorists were detected&forced them to return to their territory.They were attempting to infiltrate&carry out attacks on Indian positions. pic.twitter.com/WlKT9VF6Cd
रिपोर्ट्स के अनुसार, घुसपैठ की यह घटना जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से कुछ ही दिन पहले की है। 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर से 370 निष्क्रिय करके जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का निर्णय लिया गया था।
Indian Army foiled an infiltration attempt by a Pakistani BAT(Border Action Team) squad along the Line of Control in Keran Sector of Kupwara in the 1st week of August. #JammuAndKashmir (Video: Indian Army Sources) https://t.co/t4KjGepjWN
गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय सेना ने ये कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में एलओसी के पास पाकिस्तानी आतंकियों के घुसपैठ के प्रयास को नाकाम कर दिया था। भारतीय सेना द्वारा जारी की गई वीडियो में 5 बैट आतंकियों की लाशें और उनके हथियार दिख रहे हैं। पाकिस्तान का बैट दस्ता भारत में आतंकियों को घुसपैठ कराने के लिए कुख्यात है।
मध्य प्रदेश में हनी ट्रैप सेक्स स्कैंडल का भंडाफोड़ होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने इस पूरे कांड के लिए आरएसएस के लोगों को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने इस इल्जाम के पीछे बड़ा ही अजीब तर्क दिया है। उनका कहना है कि RSS के लोगों का शादी नहीं करना, इसका पूरे स्कैंडल का मुख्य कारण है।
उन्होंने कहा, “RSS के लोग शादी नहीं करते, यह हनीट्रैप का मुख्य कारण है। संघ के लोगों को शादी करनी चाहिए। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन भागवत को भी शादी करनी चाहिए।”
Manak Agarwal, Congress on honey trapping issue in Madhya Pradesh: One of the biggest reasons for this is that RSS people do not marry. RSS people should get married. Mohan Bhagwat should also get married. https://t.co/2akiq45P2x
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने आगे कहा, “मध्य प्रदेश में हनी ट्रैप का ये गैंग शिवराज सिंह चौहान के वक्त से चल रहा है। इस केस में कई भाजपा नेताओं के नाम सामने आएँगे। इस केस में कई भाजपा नेता शामिल हैं। ये गिरोह देश में 5 से 6 राज्यों में काम करता है।”
अब इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें काफी ट्रोल कर रहे हैं। उनके इस बयान को घटिया करार देते हुए यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि यदि संघ के लोगों को शादी करनी चाहिए तो फिर कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी कौन सी दुल्हनिया का इंतजार कर रहे हैं? ट्विटर पर लोग पूरे गाँधी परिवार को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इस बयान की आलोचना कर रहे हैं।
राहुल गांधी कौन से दुल्हनिया का इंतजार कर रहे है ?
गौरतलब है कि 19 सितंबर 2019 को इंदौर नगर निगम के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर इस पूरे गिरोह का आधिकारिक रूप से खुलासा हुआ था। जिसमें फिलहाल 6 आरोपित गिरफ्तार हैं, जिनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।
इस कांड को देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलिंग सेक्स स्कैंडल कहा जा रहा है। इस मामले में जाँच में जुटी एसआईटी की टीम अब तक 4 हजार से ज्यादा फाइलें जुटा चुकी हैं और बाकी के मिलने का सिलसिला जारी है। बताया जा रहा है गिरोह के शिकंजे में कई शीर्ष नेता, आईएस अधिकारी, इंजिनियर और बड़े व्यापारी फँस चुके हैं। इसके अलावा इस सेक्स रैकेट में कई मीडियाकर्मियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। लेकिन बता दें कि अन्य लोगों की तरह मीडियाकर्मी हनी ट्रैप रैकेट के शिकार नहीं थे, बल्कि दलाल थे।
साउथ फिल्मों के सुपरस्टार चिरंजीवी ने मेगास्टार से राजनेता बने रजनीकांत और कमल हासन को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी। तमिल मैग्जीन को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए दोनों स्टार नेताओं के लिए अपना संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “अगर इंसान सच्चा है और उसके अंदर कुछ करने की इच्छा शक्ति है, तो वह उसे (राजनीति में) नहीं कर पाएगा।” अपने अनुभवों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “जब मैं राजनीति से जुड़ा था, उस वक्त मैं नंबर-1 सुपरस्टार था, लेकिन राजनीति से जुड़ने के लिए मैंने सब छोड़ दिया, और चुनाव में मैं अपने क्षेत्र से ही हार गया, क्योंकि मेरे प्रतिद्वंदी ने करोड़ों रुपए खर्च किए, सिर्फ़ मुझे हराने के लिए। इसके बाद ऐसा ही पवन कल्याण के साथ हुआ।”
तमिल मैग्जीन ‘आनंद विकटन’ को दिए साक्षात्कार में साउथ सुपरस्टार ने इस बात का भी खुलासा किया कि इन चुनावों में उन्हें लगा था कि कमल हासन की पार्टी जीत जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए जो लोग संवेदनशील हैं, उनके लिए राजनीति नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूँ, कमल हासन और रजनीकांत के साथ ऐसा बिलकुल न हो, जैसा मेरे साथ हुआ, लेकिन मेरी सलाह दोनों को यही है कि राजनीति में न घुसें।”
चिरंजीवी के मुताबिक अगर आप हार और असफलताओं को संभालते हुए लोगों के लिए काम करने को, अच्छा काम करने को तैयार हैं, तो राजनीति में जाइए। हो सकता है चीजें एक दिन आपके लिए बदल जाएँ।
यहाँ बता दें कि मेगास्टार चिरंजीवी की नई फिल्म ‘सैरा नरसिम्हा रेड्डी’ विश्व भर में 2 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है, जिसका प्रमोशन करने के दौरान दिए इंटरव्यू में ही उन्होंने ये बयान दिया और जहाँ वो इस दौरान इस बात पर भी जोर डालते दिखे कि राजनीति सिर्फ़ पैसे का खेल है।