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शर्मिदा हूॅं, गंदी बात सहित हर आरोप कबूल: एसआईटी से चिन्मयानन्द

यौन उत्पीड़न और बलात्कार के मामलों में घिरे भाजपा नेता और पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानन्द ने लगभग सारे आरोप कुबूल कर लिए हैं। मामले की जाँच कर रही एसआईटी का दावा है कि अश्लील वार्तालाप और मसाज सहित लगभग सभी आरोपों को स्वीकारते हुए चिन्मयानन्द ने इनके बारे में विस्तार से बताने से मना किया है, क्योंकि उसे अपने किए पर शर्म आ रही है।

शाहजहांपुर की स्थानीय अदालत ने स्वामी चिन्मयानन्द को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उस पर अपने लॉ कॉलेज की छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। चिन्मयानन्द पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में गृह राज्यमंत्री था।

उत्तरा प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह के मुताबिक पुलिस द्वारा मामले में बिलकुल कोताही या देरी नहीं बरती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश होते ही एसआईटी का गठन हो गया और जाँच पूरी कर पुलिस ने स्वामी चिन्मयानन्द को उनके आश्रम से गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया। इसके अलावा उनके द्वारा लगाए गए धमकी और वसूली के मामले में भी पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है।

इसके अलावा मीडिया से बात करते हुए SIT के प्रमुख नवीन अरोड़ा ने दावा किया कि एसआईटी चिन्मयानन्द के इकबालनामे के बाद भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जाँच कर रही है।

PAK से जान बचा अमेरिका भागीं इस्माइल, रेप और लोगों को गायब कर रही सेना की खोली पोल

पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल जान बचाकर अमेरिका पहुॅंचने में कामयाब रही हैं। उनके पीछे पूरी पाकिस्तानी मशीनरी पड़ी थी। उन्होंने अमेरिका से शरण मॉंगी है। साथ ही पाकिस्तानी सेना की प्रताड़ना को जगजाहिर करते हुए कहा है कि सैनिक महिलाओं के साथ रेप और मर्दों को अगवा कर रहे हैं।

इस्माइल अगस्त में पाकिस्तान से भागी थीं, क्योंकि वहाँ के अधिकारियों ने उनका जीना दूभर कर दिया था। उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज हो गया था और पुलिस चप्पे-चप्पे पर उन्हें पकड़ने को खड़ी थी। उनके दोस्तों और करीबियों के घर छापे मारे जा रहे था, उन्हें तंग किया जा रहा था। ये सब सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को उजागर किया था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस्माइल फिलहाल अमेरिका में अपनी बहन के घर ब्रुकलीन में रह रहीं हैं। उन्होंने अभी तक इस बात का खुलासा नहीं किया है कि वो पाकिस्तानी अधिकारियों से बचकर अमेरिका आने में कैसे सफल हुईं। केवल इतना बताया है कि वो हवाई जहाज से अमेरिका नहीं पहुँचीं।

उनके मुताबिक, “पाकिस्तान से जान बचाकर यहॉं तक पहुॅंचने की अपनी यात्रा के बारे में मैं ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकती। इससे बहुत से लोगों की जान को खतरा हो सकता है।”

उन्होंने न्यूयॉर्क में मानवाधिकारों कार्यकर्ताओं और कॉन्ग्रेस के नेताओं से मुलाकात भी की है। डेमोक्रेट पार्टी के सदस्य सीनेटर चार्ल्स स्कूमर ने कहा है कि इस्माइल को शरण दिलाने के लिए वे हर मुमकिन कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान लौटने पर इस्माइल की जान को खतरा है।

पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि इस्माइल के देश से निकलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि सुरक्षा अधिकारी लगातार उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन फिर भी उन्हें ट्रेस नहीं किया जा सका।

उल्लेखनीय है कि इस्माइल पाकिस्तानी फौज द्वारा किए जा रहे महिलाओं पर अत्याचार के ख़िलाफ़, बलात्कारों के खिलाफ़, अपहरणों की घटनाओं पर और अन्य कृत्यों के विरोध में रोषपूर्ण प्रदर्शन कर चुकी हैं। 32 साल की यह महिला करीब 16 साल की उम्र से ही मानवाधिकारों का हनन करने वालों के खिलाफ़ आवाज उठाती रही हैं।

इस्माइल इस्लामाबाद में रह रहे अपने माता-पिता की खैरियत को लेकर भी चिंतित हैं। उनके माता-पिता को आतंकवाद बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए निगरानी में रखा गया है।

इस्माइल ने इस साल जनवरी में पाकिस्तान आर्मी पर कई महिलाओं के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। पश्तून में हुए प्रदर्शन में भी उन्होंने भाग लिया था, जिसे पाकिस्तान सेना ने दबाने की पूरी कोशिश की थी। इसके बाद पाकिस्तान की सेना ने उन पर राजद्रोह, राजद्रोह के लिए लोगों को उकसाने और राज्य संस्थानों को बदनाम करने का आरोप लगाया था।

Howdy Modi के लिए वित्त मंत्री ने 1.4 लाख करोड़ रुपए का डाल दिया बोझ: राहुल और येचुरी ने लगाया आरोप

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स घटाने के फ़ैसले के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। सीताराम येचुरी ने वित्त मंत्री की इन घोषणाओं को एक घोटाला और क्रोनी कैपिटल यानी पूँजीवाद का सबसे बद्तर नमूना बताया।

सोशल मीडिया पर एक के बाद एक ट्वीट के ज़रिए सीताराम येचुरी ने कहा कि आख़िर में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से छीने गए 1.76 लाख करोड़ रुपए में से 1.45 लाख करोड़ रुपए सरकार द्वारा कॉरपोरेट को दिए जा रहे हैं। यह एक घोटाला है।

इसके आगे उन्होंने कहा कि सरकार के इस क़दम से माँग में किसी तरह का कोई लाभ नहीं होगा। इससे सरकार के चहेते कॉरपोरेट को तो लाभ मिलेगा, लेकिन आम जनता के हाथ कुछ नहीं लगेगा। मनरेगा के तहत मिलने वाला भत्ता अभी भी जस का तस है और नया कोड मज़दूरों का और अधिक शोषण करना चाहता है।

सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी यहीं नहीं रुके। अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि जब माँग बढ़ाने के लिए आम लोगों के हाथों में पैसा देने की ज़रुरत थी, तो सरकार ने पैसा कॉरपोरेट के हाथ में दे दिया।

येचुरी ने लिखा कि अमेरिका में हाउडी मोदी कार्यक्रम से पहले ये ऐलान किए गए हैं, यानी सट्टेबाजों को छूट देने की तैयारी है। आज़ादी के बाद हिन्दुस्तान सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। हमारे पास संवेदनहीन सरकार और सर्कस देखने के अलावा और कुछ उपलब्ध नहीं है।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने वित्त मंत्री द्वारा आज किए गए ऐलान को पीएम मोदी के ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम से जोड़ते हुए निशाना साधा। राहुल ने आरोप लगाया कि ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के लिए पीएम मोदी ने सरकारी खजाने पर 1.4 लाख करोड़ रुपए का बोझ डाल दिया है।

ग़ौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से शुक्रवार को की गई घोषणाओं से बाजार (सेंसेक्स) झूम उठा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE के सेंसेक्स ने नया रिकॉर्ड बनाया। सेंसेक्स में एक दिन में 1921 से ज्यादा अंकों की उछाल देखी गई। ऐसा इससे पहले करीब 10 साल पहले देखा गया था।

चर्च आई 9 साल की 3 बच्चियों का 70 साल के पादरी ने किया यौन शोषण, फरार

धर्म की आड़ में यौन शोषण करने वाले एक 70 वर्षीय पादरी का घिनौना चेहरा सामने आया है। मामला केरल के एर्नाकुलम के चेंदामंगलम का है। यहाँ के सीरियन कैथलिक चर्च के पादरी जॉर्ज पदयट्टी ने आर्शीवाद लेने आई मासूम बच्‍च‍ियों का यौन शोषण किया।

घटना पिछले महीने की है। जानकारी के मुताबिक, 9 साल की तीनों बच्चियाँ चर्च में अपनी सेवाएँ देने के बाद चर्च स्थित दफ्तर में पादरी का आशीर्वाद लेने गई थीं। इस दौरान आशीर्वाद देने के बहाने पादरी ने तीनों नाबालिगों से बारी-बारी से यौन शोषण किया। पुलिस ने बताया कि यह घटना एक महीने पुरानी है और केस दर्ज होने के बाद से ही पादरी फरार चल रहा है।

आरोपित पादरी जॉर्ज पदयट्टी के खिलाफ वडक्केकरा थाने में पॉक्सो ऐक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। मामला दर्ज कर पुलिस पादरी को गिरफ्तार करने में जुटी है। इस संबंध में साइरो-मालाबार चर्च के एक सूत्र ने बताया कि पादरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के साथ ही पुलिस की जाँच में सहयोग करने का आदेश दिया गया है।

गौरतलब है कि इसी तरह की एक घटना में, थालास्सेरी पॉक्सो अदालत ने कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कमचेरी को नाबालिग लड़की के साथ रेप करने और उसे कैद रखने के आरोप में 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही उस पर 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

चिन्मयानंद, अश्लील वीडियो और ₹5 करोड़ की फिरौती: पीड़िता के 2 भाई और 1 साथी गिरफ्तार

लॉ की छात्रा के साथ रेप के आरोपित पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता स्वामी चिन्मयानंद जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं। स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) ने उन्हें गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसके अलावा, एसआईटी ने चिन्मयानंद के अश्लील वीडियो के बदले 5 करोड़ रुपए माँगने के आरोप में पीड़ित छात्रा के साथी संजय सिंह, उसके चचेरे भाई विक्रम और मौसेरे भाई सचिन सेंगर को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा तीनों का मेडिकल कराने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, वहाँ से तीनों को जेल भेज दिया जाएगा।

वहीं, गिरफ्तार स्वामी चिन्मयानंद ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। मामले की जाँच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का दावा है कि चिन्मयानंद ने पीड़ित लड़की को मसाज के लिए बुलाने की अपनी गलती स्वीकार की है।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन के प्रमुख नवीन अरोड़ा ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने अपने खिलाफ लगे लगभग सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, क्योंकि वह अपने इन कृत्यों से शर्मिंदा हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पर अपने ही कॉलेज की लॉ स्टूडेंट से रेप करने का आरोप है। पीड़िता की ओर से इस संबंध में लगातार कई विडियो जारी कर चिन्मयानंद पर आरोप लगाए गए थे। हालाँकि, चिन्मयानंद और उनके समर्थक लगातार कह रहे थे कि वह निर्दोष हैं और उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

स्कूली छात्राओं को बुर्का से आजादी: चिढ़े मंत्री और मौलवी, कहा- नकाब करो फिर से अनिवार्य

देश भर में भारी विरोध के बाद पाकिस्तान के शैक्षणिक प्राधिकरण ने स्कूली छात्राओं के लिए नकाब की अनिवार्यता का आदेश रद्द कर दिया है। लेकिन, नेताओं और मौलवियों को यह फैसला रद्द करना नागवार गुजर रहा है। उन्होंने इस फैसले को फिर से बहाल करने की माँग की है।

दरअसल, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर व हरिपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों ने पिछले सप्ताह एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि लड़कियों को किसी भी प्रकार की अनैतिक दुर्घटना से बचने के लिए खुद को पूरी तरह ढक कर आना होगा। इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया समेत पूरे देश में इसका विरोध शुरू हो गया।

बुर्का पहनकर स्‍कूल आने की अनिवार्यता के फैसले की पूरे पाकिस्‍तान में कड़ी निंदा हो रही थी। सोशल मीडिया यूजर्स और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे पुरुष प्रधान देश में महिलाओं के अधिकारों पर एक नया प्रतिबंध करार दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नए आदेश में कहा कि पिछले निर्देशों को वापस लिया जा रहा है। छात्राओं के लिए बुर्का पहनकर स्‍कूल आने की अनिवार्यता खत्‍म कर दी गई है। सरकार ने इस फैसले को आवश्यक न बताते हुए कहा कि इसे मुख्यमंत्री से पूछे बगैर लागू किया गया था।

हालाँकि, बुर्का पहनकर स्कूल आने की अनिवार्यता को रद्द करना पाकिस्तान के संसदीय कार्य राज्य मंत्री अली मोहम्मद खान को रास नहीं आया। वो इस फैसले को वापस लेने से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वो इसे फिर से बहाल करने के लिए देश के प्रधानमंत्री इमरान खान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री से बात करेंगे।

अली मोहम्मद खान ने इस बाबत एक ट्वीट करते हुए प्रांत में स्कूल की बच्चियों के लिए बुर्का को अनिवार्य करना एक अच्छा कदम बताते हुए उसे इस्लाम और मदीना के उसूलों के हिसाब से बताया। उन्होंने इस फैसले को फिर से लागू करने की बात कहते हुए कहा कि वो इसे जल्दबाजी में वापस लिए जाने के फैसले से सहमत नहीं हैं।

इसके अलावा, पाकिस्तान के मशहूर मुफ्ती तकी उस्मानी ने भी हिजाब को अनिवार्य करने के फैसले को वापस लेने का विरोध किया। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री इमरान खान खैबर पख्तूनख्वा सरकार के फैसले का संज्ञान लेंगे। उनका कहना है कि ‘इस्लामी ड्रेस कोड’ को अनिवार्य किया जाना इस्लामी शिक्षा के अनुरूप था। यह दुभार्ग्यपूर्ण है कि खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने इस अधिसूचना को बाद में वापस ले लिया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह आदेश पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के इस वादे के बावजूद वापस लिया कि वह देश को रियासत-ए-मदीना के उसूलों के हिसाब से चलाएँगे। मुफ्ती तकी उस्मानी ने पूछा कि क्या इमरान खान इस आदेश को वापस लिए जाने के फैसले का संज्ञान लेंगे?

इसके साथ ही प्रांत के एक विधायक सिराजुद्दीन खान ने चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी फैसला रद्द करने का विरोध करेगी और सरकार पर दबाव बनाएगी कि वह पूरे प्रांत में बुर्का पहनकर स्‍कूल आना अनिवार्य करे।

दोस्तों संग सेल्फी लेने के चक्कर में तोड़ दिए हम्पी के दो स्तंभ, पर्यटक गिरफ़्तार

एक पर्यटक को हम्पी पुलिस ने बुधवार को दो ऐतिहासिक स्तम्भों को नुकसान पहुँचाने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है। आरोप है कि उसने दोस्तों के साथ selfie लेने में उन्हें नीचे गिरा दिया। आरोपित नागराज बंगलुरु के अवलाहल्ली का निवासी बताया जा रहा है।

वैश्विक धरोहर है विजय विट्ठल मंदिर

बेल्लारी जिले स्थित विजय विट्ठल मंदिर को संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था UNESCO ने विश्व धरोहर घोषित किया हुए है। बुधवार (18 सितंबर) को उस स्थान पर घूमने पहुँचे नागराज ने दोस्तों के साथ selfie लेने के लिए मंदिर के सालु मंडप में मौजूद स्तम्भों को धक्का देना शरू कर दिया। वहां पर मौजूद पुरातत्व विभाग (Archeological Survey of India, ASI) के गार्डों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आकर नागराज को हिरासत में ले लिया। उसके दोस्तों को इसलिए छोड़ दिया गया, क्योंकि स्तम्भों को नुकसान पहुँचाने की हरकत अकेले नागराज की थी

‘कानून और धरोहर का सम्मान करना ही होगा’

हम्पी पुलिस ने नागराज के ख़िलाफ़ प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958) की धारा 30 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। बल्लारी के एसपी सीके बाबा ने The Hindu से बातचीत करते हुए बताया कि बीते कुछ दिनों में हुई बारिश के चलते स्तम्भों के आसपास की मिट्टी ढीली हो गई थी और जब नागराज ने धक्का दिया तो पहले एक स्तम्भ गिरा। बगल का दूसरा स्तम्भ भी उसकी चपेट में आ गया। हालाँकि यह जानबूझकर नहीं बल्कि दुर्घटनावश हुआ नुकसान दिख रहा है, लेकिन ASI की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हम सभी को धरोहर स्मारकों और उनके संरक्षण के लिए बने कानून की इज़्ज़त करनी चाहिए।

विशेष ‘कृपा’ वाला रहा है यह साल

हम्पी के लिए यह साल नुकसान पहुँचाने वालों की विशेष ‘कृपा’ के चलते सुर्ख़ियों में आने वाला रहा है। इसी साल फरवरी में कुछ असामाजिक तत्वों ने विष्णु मंदिर परिसर के स्तम्भों को जानबूझकर क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके लिए उन्हें ₹70,000 प्रति व्यक्ति का जुर्माना और उन स्तम्भों को फिर से स्थापित करने की सज़ा होस्पेट की अदालत ने सुनाई थी। इसके अलावा संत व्यासराजा स्वामी की पवित्र वृन्दावन समाधि को भी इसी साल जुलाई में अज्ञात हमलावरों ने रात में नुकसान पहुँचाया था, जिसके बाद स्थानीय हिन्दुओं ने श्रमदान और अंशदान से डेढ़ दिन के भीतर स्थल की मरम्मत पूरी कर दीथी।

अब फाँसी घर की जमीन कब्जाने में फॅंसे आजम खान, 32 रिश्तेदार-करीबियों पर होगा मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला कारागार की फाँसी घर की जमीन की खरीद-बिक्री करने के आरोप में लगभग 32 लोगों के खिलाफ नायब तहसीलदार कृष्ण गोपाल की तरफ से गंज थाने में तहरीर दी गई है। इनके ख़िलाफ़ जल्द केस दर्ज होने की उम्मीद है।

यहाँ उल्लेखनीय है कि अभी कुछ दिन पहले भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने इस फाँसी घर की जमीन पर कब्जे को लेकर जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह से शिकायत की थी और बताया था कि ये जमीन अब सांसद आजम खान के रिश्तेदारों और करीबियों के कब्जे में है। जिसके बाद डीएम ने जमीन की जाँच करवाई थी और मालूम चला था कि ये जमीन वाकई सरकारी है।

इस जाँच में खुलासा हुआ था कि ये जमीन किसी व्यक्ति के नाम कर चढ़ा दी गई थी, लेकिन कागजों में श्रेणी में सात (सरकारी) ही लिखा हुआ था। इस जमीन को 2 लोगों ने लगभग 30 लोगों को बेचा था। जिनमें आज़म खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बहन पर भी आरोप लगा है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक जिलाधिकारी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जिन लोगों को जमीनें बेची गई हैं उसमें रामपुर के सांसद आजम खान के रिश्तेदारों और करीबियों के नाम भी शामिल हैं।

साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि मामले में जमीन खरीदने और बेचने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए नायब तहसीलदार की ओर से गंज थाने में तहरीर दे दी गई है। इसके अलावा अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। ताकि पता चल सके कि जमीन किसके दबाव में खरीदी-बेची गई थी।

जाधवपुर के वामपंथी लम्पट अपने ही दॉंव से पिटे, कार्यालय में घुसकर ABVP और दुर्गा वाहिनी ने की तोड़फोड़

पश्चिम बंगाल के जाधवपुर यूनिवर्सिटी में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को नक्सल समर्थक छात्रों ने करीब 6 घंटे तक बंधक बनाए रखा। सुप्रियो के कहने के बावजूद वाइस चांसलर ने कैंपस में पुलिस बुलाने से इनकार किया। जब राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार को घटना के बारे में बताया और आवश्यक कदम उठाने को कहा तो वह भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इसके जवाब में एबीवीपी और दुर्गा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ताओं ने एसएफआई के कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की।

आखिर में राज्यपाल को खुद यूनिवर्सिटी पहुॅंचना पड़ा और बाबुल सुप्रियो को सुरक्षित निकाल कर बाहर लाना पड़ा। इस दौरान करीब एक घंटे तक ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के छात्रों ने राज्यपाल को भी करीब एक घंटे तक घेरकर रखा।

उपद्रवी छात्रों ने बाबुल सुप्रियो पर गुरुवार को हमला किया था। बकौल सुप्रियो, छात्रों ने उनके बाल खींचे और लात-घूँसे भी चलाए। उनपर बोतल भी फेंकी गई और चश्मे को भी नक्सल समर्थकों ने तोड़ दिया। जब यह सब सुप्रियो के साथ हो रहा था तो फैशन डिजाइनर और बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल भी उनके साथ थीं। बताया जा रहा है कि उपद्रवी छात्रों ने अग्निमित्रा की गाड़ी को भी रोका और उनकी साड़ी खींची।। सुप्रियो एबीवीपी के एक सेमिनार को संबोधित करने यूनिवर्सिटी पहुॅंचे थे।

इतना सब कुछ होने के बावजूद हरकत में नहीं आने को लेकर ममता सरकार की आलोचना हो रही है। हालॉंकि सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस ने एक बयान जारी कर कहा है कि राज्यपाल ने सरकार को सूचना नहीं दी और न ही यूनिवर्सिटी जाने की जानकारी दी। राज्यपाल धनखड़ ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि सरकार की विफलता छिपाने के लिए झूठ बोला जा रहा है।

हालॉंकि प्रशासन के हरकत में नहीं आने के बाद एबीवीपी और दुर्गा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने नक्सल समर्थकों को उनके ही तरीके से जवाब देने की कोशिश की। बताया जाता है कि जब वामपंथी छात्र संगठनों के लोगों ने सुप्रियो को घेर रखा था उस समय एबीवीपी और दुर्गावाहिनी के कुछ कार्यकर्ताओं ने एसएफआई के छात्र संघ कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की।

(नोट: ऑप इंडिया किसी भी तरह के हिंसक गतिविधि का समर्थन नहीं करती।)

जम्मू-कश्मीर पर प्रोपेगेंडा को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, J&K हाई कोर्ट ने भेजी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से रिपोर्ट मिल गई है। यह रिपोर्ट उस याचिका से संबंधित है, जिसमें हाईकोर्ट तक स्थानीय लोगों की पहुँच न होने का दावा किया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20-09-2019) को कहा कि जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि लोग उच्च न्यायालय तक अपनी शिकायत नहीं पहुँचा पा रहे हैं।

बाल अधिकार एक्टिविस्ट्स इनाक्षी गांगुली और शांता सिन्हा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि घाटी के लोग अपनी शिक़ायत दर्ज कराने हाईकोर्ट तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने कश्मीर में बच्चों को हिरासत में लिए जाने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट तलब की थी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसए बोबडे एवं जस्टिस एसए नज़ीर की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा, “हमें जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट मिली है और यह रिपोर्ट आपके दावे का समर्थन नहीं करती।” बता दें कि चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि कश्मीर में बच्चों को कथित रूप से हिरासत में लिए जाने के आरोप से संबंधित याचिका पर कोर्ट सुनवाई करेगा क्योंकि इसमें बच्चों के बारे में ‘गंभीर बातें’ कही गई हैं।

इसके साथ ही आर्टिकल 370 हटाने के बाद नाबालिगों को हिरासत में रखने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के जुवेनाइल जस्टिस पैनल को जाँच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि अनुच्छेद-370 निष्क्रिय किए जाने के बाद घाटी में बच्चों को हिरासत में लिया गया है और उन्हें उनके क़ानूनी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

आपको बता दें कि इस मामले की सुनवाई के दौरान ही सीजेआई गोगोई ने कहा था कि यदि जरूरी हुआ तो वह खुद जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे।