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लुका-छिपी का खेल अब और नहीं, जरूरत पड़ी तो फिर पार करेंगे LOC: आर्मी चीफ की PAK को दो-टूक

भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नियंत्रण रेखा पर आए दिन हो रही गोलीबारी के बीच पाकिस्तान को चेताया है। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान पाकिस्तान को प्रॉक्सी वॉर पर लताड़ लगाई है, परमाणु बम के मायने समझाए हैं और साथ में ये भी कहा है कि वह पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के माहौल का दुरुपयोग नहीं करने देंगे। इसके लिए अगर एलओसी पार करने की जरूरत पड़ी तो वे वह भी जरूर करेंगे।

अपने साक्षात्कार में उन्होंने बालाकोट में जैश के सक्रिय होने पर और सर्जिकल स्ट्राइक से दिए गए संदेश पर जवाब देते हुए कहा कि पिछली दो स्ट्राइक ने यह संदेश दिया है कि जब तक दूसरी ओर शांति है वह एलओसी पार नहीं करेंगे, लेकिन अगर पाकिस्तान माहौल बिगाड़ने का प्रयास करता है या फिर उन आतंकियों को नियंत्रित करता है, जो उसके लिए प्रॉक्सी का काम करते हैं तो ज्यादा समय तक लुका-छिपी का खेल नहीं चलेगा, सेना को अगर सीमा पार जाना पड़ा, चाहे हवाई मार्ग से हो या थल मार्ग से तो सेना जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अब लुका-छिपी का खेल नहीं चलेगा। अब अगर भारत एलओसी पार करेगा, तो वायु, जमीन या दोनों के रास्ते करेगा।”

जनरल रावत ने अपने इस साक्षात्कार के जरिए पाकिस्तान को आतंकियों का समर्थन करने के लिए फटकार भी लगाई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद की स्थिति पर बात की और कहा कि जब से ऐसा हुआ है तब से पड़ोसी मुल्क खुलेआम जिहाद की बात कर रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान मेंं आतंकी शिविर रहे हैं, जिन्हें उनका मुल्क हमेशा से एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करता रहता है।

आर्मी चीफ ने परमाणु हथियार के मायनों पर बात करते हुए कहा कि परमाणु हथियार निवारण का हथियार हैं। वे युद्ध में लड़ने वाले हथियार नहीं हैं। जनरल रावत कहते हैं, “मुझे यह समझ में नहीं आता कि जब कोई यह दावा करता है कि वह उसका इस्तेमाल पारंपरिक युद्ध में करेगा या उस पर हमले की स्थिति में करेगा। क्या कभी विश्व समुदाय आपको इस तरह से परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने देगा? पाकिस्तान का बयान रणनीतिक हथियारों के इस्तेमाल की अनुचित समझ को दर्शाता है।”

उन्होंने सेना की कार्रवाई पर बात करते हुए कहा कि पाकिस्तान फिर से हिंसा पैदा करने की दिशा में युवाओं को भड़काने के लिए कुछ लोगों को सीमा पार भेजने के लिए परेशान है। इसलिए, वे (सेना) यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी आतंकी सीमा में न घुस पाए, जिसके चलते वह आतंकी गतिविधियों पर भी निशाना साध रहे हैं। सेना का मकसद घुसपैठ को रोकते हुए कश्मीर में शांति को सुनिश्चित करना है।

सेना चीफ ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से कहा है कि वहाँ व्यापक स्तर पर लोगों को यह समझना चाहिए कि जो हो रहा है, वह सही के लिए हैं। उन्होंने प्रॉपगेंडा फैलाने वालों को घेरते हुए कहा कि एक बड़ा धड़ा ये अफवाह फैला रहा है कि कश्मीरियों के अधिकार उनसे छीने जा रहे हैं, लेकिन अगर लोग स्वयं इसका विश्लेषण करेंगें तो वह इसके गुण दोष समझ पाएँगे। वे समझ जाएँगे कि उन्हें ज्यादा मिला है और बहुत ही कम खोना पड़ा है।

इस साक्षात्कार के जरिए सेना प्रमुख ने कश्मीरियों को समझाने का भी प्रयास किया कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हो जाने से उन्हें क्या-क्या लाभ है? उन्होंने हिरासत में लिए युवाओं की स्थिति भी स्पष्ट करते हुए बताया कि सिर्फ़ आर्टिकल 144 का उल्लंघन करने वालों को हिरासत में लिया गया है, क्योंकि वह माहौल को बिगाड़ने का और सरकार की कोशिशों को बाधित करने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हकीकत में देखा जाए तो प्रतिबंध दूसरी ओर से लागू हो रहे हैं, न की सुरक्षा बलों के द्वारा। उनकी मानें तो सुरक्षा बल सिर्फ़ यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लोग बाहर आकर आगजनी, लूटपाट और हिंसा न करें।

INX मीडिया स्कैम: केंद्र ने दी IAS प्रबोध सक्सेना पर केस चलाने अनुमति

INX मीडिया मामले में केद्र सरकार ने IAS अधिकारी प्रबोध सक्सेना के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाने की अनुमति दे दी है। बता दें कि प्रबोध कुमार ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के पद पर हैं।

इस मामले में हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है कि उन्हें इस संदर्भ में सूचना तो मिली है, लेकिन आधिकारिक तौर पर सरकार से अब तक कोई पत्राचार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यह मामला केंद्र सरकार का है, इसलिए सभी क़ानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगामी कार्रवाई की जाएगी।  

ख़बर के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से प्रबोध सक्सेना समेत चार बड़े अधिकारियों को आरोपित बनाया गया है, इन चारों के ख़िलाफ़ प्रोसिक्यूशन की मंज़ूरी दी गई है। CBI इस मामले में इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोर्ट में चालान पेश करेगी। इसके साथ ही प्रबोध सक्सेना का नाम ऑफ़िसर ऑन डाउटफुल इंटेग्रिटी की लिस्ट में आ जाएगा। 1990 बैच के IAS अधिकारी प्रबोध सक्सेना के ख़िलाफ़ INX मीडिया मामले में सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) ने केस चलाने की सिफ़ारिश की थी।

ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शनिवार (28 सितंबर) को INX मीडिया मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को चार अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति दे दी थी। इनमें नीति आयोग की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सिंधुश्री खुल्लर शामिल थीं। अन्य अधिकारयों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के पूर्व सचिव अनूप के पुजारी, वित्त मंत्रालय में निदेशक रहे प्रबोध सक्सेना और आर्थिक मामले विभाग के पूर्व अवर सचिव रबींद्र प्रसाद शामिल थे। ये सभी कथित रूप से INX मीडिया के विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड मंज़ूरी की प्रक्रिया में शामिल थे।

बता दें कि इस मामले में वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम आरोपित हैं। CBI ने 22 जनवरी को चार अधिकारियों के ख़िलाफ़ फ़ौजदारी का मुक़दमा दर्ज कराने की माँग की थी। पिछले दिनों सुनवाई के दौरान पी चिदंबरम को कोर्ट से बड़ा झटका लगा था। कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत को 3 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता पाँच सितंबर से न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं।

इमरान ने कश्मीर के आतंक को बताया जिहाद, कहा- हम ऐसा अल्लाह को खुश करने के लिए कर रहे हैं

अमेरिका से लौटकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर को लेकर फिर आग उगली है। हर मंच पर नाकाम हो चुके इमरान खान ने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद को जिहाद बताते हुए कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों का समर्थन जारी रखेगा, भले ही दुनिया में कोई उनका समर्थन करे या न करे।

इमरान खान ने कहा कि जो लोग कश्मीरियों के साथ खड़े हैं, वे जिहाद कर रहे हैं। एयरपोर्ट पर पहुँचने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं से इमरान ने कहा, “अगर दुनिया कश्मीरियों के साथ नहीं है तो कोई बात नहीं। हम हमेशा उनका साथ देंगे। ऐसा करना जिहाद है। हम ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम अल्लाह को खुश करना चाहते हैं। जब वक्त साथ नहीं देता तो उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। निराश न हों क्योंकि कश्मीरियों को हमसे काफी उम्मीदें हैं, वो हमारी तरफ देख रहे हैं। अगर पाकिस्तानी लोग कश्मीर के साथ हैं, तो वो जरूर जीतेंगे।”

गौरतलब है कि इमरान खान ने शुक्रवार (सितंबर 27, 2019) को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा उठाया था और माँग की थी कि भारत कश्मीर से “अमानवीय कर्फ्यू” हटाए तथा सभी “राजनीतिक कैदियों” को रिहा करे। हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इमरान खान के कश्मीर मुद्दे पर की गई बात को गंभीरता से नहीं लिया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 15 मिनट की तय समय सीमा की अनदेखी कर 50 मिनट तक बोलने वाले इमरान ने अपना भाषण कश्मीर पर ही केंद्रित रखा और भारत पर परमाणु बम के हमले की भी धमकी दे डाली। इमरान खान का युद्ध राग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उसी मंच से कुछ समय पहले दिए गए शांति संदेश के ठीक उलट था। पीएम मोदी ने कहा था कि भारत एक ऐसा देश है जिसने विश्व को ‘युद्ध नहीं बुद्ध’ दिए।

अरे ‘रवीश बुद्धि’ यह डूबे शहर की जिंदादिली है, कुत्ते-गाय में हिन्दू-मुस्लिम ‘एंगल’ गढ़ना नहीं

त्रासदी में डूबा एक शहर। घरों में लबालब पानी। हर ओर हहाकार। चीत्कार के बीच एक लड़की बाहर निकलती है। पानी में डूब चुके सड़क पर फोटोशूट कराती है। तस्वीरें सोशल मीडिया में पोस्ट होती है। वायरल होकर मुसीबतों में घिरे एक शहर के वाशिंदों की जिंदादिली का प्रतीक बन जाती है।

यह तस्वीर पटना की है। नजर आ रही लड़की हैं, अदिति सिंह। निफ्ट पटना में पढ़ती हैं और मॉडलिंग भी करती हैं। यूॅं तो इस फोटोशूट में ऐसा कुछ नहीं है जो अनर्गल हो। अमूमन, त्रासदी में फँसे हर शहर से जिंदादिली की ऐसी तस्वीरें आ ही जाती हैं।

लेकिन दिल्ली में बैठे एक पत्रकार ने इस तस्वीर में कमीनापन देखा। बेशर्मी देखी। क्रिएटिविटी के नाम पर इतने आहत हुए कि फेसबुक पर लिखा, “अगर यह कला है तो इस कला को पटना की बारिश में सबसे पहले डूब जानी चाहिए और कला मुक्त समाज हो।”

कायदे से तो यह त्रासदी व्यवस्था का कमीनापन है। गड्ढे-तालाब भर कर कोठी बनाने की बेशर्मी है। शहर को स्मार्ट बनाने के नाम पर डूबोने की क्रिएटिविटी है। पानी की जमीन सोखने की कलाबाजी है। पहली बारिश में इन सबको डूबना चाहिए ताकि समाज त्रासदी मुक्त हो।

पर पत्रकारिता में गहराते ‘रवीश बुद्धि’ का नमूना ही है कि नवभारत टाइम्स के पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा को जिंदादिली में कमीनापन, बेशर्मी और प्रचार की भूख, सब एक साथ दिखे। रवीश बुद्धि पत्रकारिता के चोले में वही असर छोड़ते हैं, जैसा समाज में जड़ बुद्धि। यही कारण है कि ये खुद से असहमति रखने वाले पाठकों की नहीं सुनते। सोशल मीडिया के अपने उन दोस्तों की भी नहीं सुनते जो इनके पेशे (हर आवाज को सम्मान देना) के कारण इनसे जुड़े।

नरेंद्र नाथ मिश्रा के पोस्ट पर अभिजीत भारद्वाज कमेंट करते हैं, “यही अगर फोटो मुम्बई की बाढ़ की रहती तो आप की कलम कहती ‘Sprit of Mumbai’ और बिहार का है तो आप कटाक्ष कर रहे हैं।” अवनीश कुमार लिखते हैं, “क्यों मातम करें, यह बताइए? पटना को बर्बाद सबने किया है। अवैध अतिक्रमण, बिना व्यवस्थित तरीके से मकान बनाना, नाले पर कोचिंग की पार्किंग और नाले से भी नीचे सड़क।”

नरेंद्र नाथ मिश्रा वही पत्रकार हैं जिन्होंने इस साल जुलाई में एक फेक न्यूज को हवा दी थी। दावा किया था कि “मुस्लिम के कुत्ते” की अफ़वाह सुनकर हिन्दू बवाल काटने लगे और बाद में कुत्ते का मालिक हिन्दू निकलने पर शांत हो गए। पटना की इस घटना को लेकर अखबार की जिस खबर को उन्होंने अपने ट्वीट के साथ लिंक किया था, उसमें ऐसा कुछ नहीं था। दावा गलत साबित होने पर भी उन्होंने अपने एंगल के पक्ष में न कोई सबूत पेश किया और न ही अपनी गलती मानी।

वैसे, रवीश बुद्धि ग्रसितों से ऐसी उम्मीद की भी नहीं जा सकती, क्योंकि इससे उनका ‘सारी बातें सही, पर खूॅंटा यहीं गाड़ूँगा’ का दंभ टूटता है। लेकिन, मिश्रा जी बिहार से आते हैं, जहॉं बाढ़ स्थायी समस्या है। संभव है उन्होंने इस दुख को भोगा भी हो। सो, उम्मीद की जानी चाहिए कि अगली बार जब भी जिंदादिली की तस्वीर पर उनकी नजर पड़ेगी तो उन्हें एक लड़की की अदाओं में कमीनापन नहीं दिखेगा। उसके कपड़ों में झॉंक वे बेशर्मी नहीं तलाशेंगे। और न ही उसकी प्रचार की भूख से उनके पेट में मरोड़ उठेगा। वे कमीनेपन, बेशर्मी में डूबी उस व्यवस्था को देख पाएँगे, जो ऐसी हरेक त्रासदी को आमंत्रित कर फिर अगले के इंतजार में बैठ जाती है और बीच के वक्त में अपने आपदा प्रबंधन का प्रचार करती है।

पता है मिश्रा जी इस लेख से आपका प्रचार होगा। लेकिन चाहता हूॅं कि आपको यह लाभ हो। आपकी तरह उम्मीद भी नहीं करता कि ‘यह आखिरी लाभ हो’, जैसा आपने अदिति के लिए ट्वीट करते हुए किया है।

चुनावी समर में उतरे आदित्य, महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में ठाकरे परिवार के पहले प्रत्याशी

आख़िरकार शिवसेना परिवार ने चुनाव में ख़ुद उतरने की घोषणा कर ही दी। कभी बाल ठाकरे ने ऐलान किया था वह व्यक्तिगत तौर पर जीवन में कभी भी किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। बाल ठाकरे ने जीत के बाद अपनी पार्टी के मनोहर जोशी और फिर नारायण राणे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया लेकिन ख़ुद न तो सांसद का चुनाव लड़े और न ही विधायक का। इसके बाद से ही यह अघोषित तौर पर माना जाता था कि ठाकरे परिवार का कोई भी सदस्य व्यक्तिगत रूप से चुनावों में हिस्सा नहीं लेगा बल्कि अपने उम्मीदवार उतारेगा।

उद्धव ठाकरे ने भी जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। अब ठाकरे परिवार ने इस क्रम को तोड़ते हुए आदित्य ठाकरे को वर्ली से प्रत्याशी के रूप में उतारा है। आदित्य ठाकरे काफ़ी दिनों से राजनीति में सक्रिय हैं और फिलहाल शिवसेना के युथ विंग ‘युवा सेना’ के अध्यक्ष हैं। वर्ली सीट अपने-आप में काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से शिवसेना के दिवंगत वरिष्ठ नेता दत्ताजी नलावड़े ने 4 बार जीत दर्ज की थी। मुंबई के मेयर से लेकर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर तक का सफर तय करने वाले नलावड़े ने यह सीट 1990, 1995, 1999 और 2004 में जीती थी।

वर्ली को शिवसेना के लिए सुरक्षित सीट इसीलिए भी माना जा रहा है क्योंकि अभी भी शिवसेना के सुशील शिंदे ही यहाँ से विधायक हैं। हाल ही में आदित्य ठाकरे को लेकर विवाद भी उपजा था, जब आजतक की पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने उन्हें ‘शिवसेना का पप्पू’ बताते हुए उनकी तुलना राहुल गाँधी से कर दी थी। हालाँकि, बाद में उन्होंने अपने उस बयान के लिए माफ़ी माँग ली थी। अब देखना यह है कि कमज़ोर होती एनसीपी और जूझती कॉन्ग्रेस के बीच आदित्य ठाकरे को उतारने के पीछे शिवसेना की क्या रणनीति है?

अगर थोड़ा और पीछे जाएँ तो इसी वर्ष मार्च में शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने ऐसी किसी भी सम्भावना से इनकार कर दिया था। उस समय भी कयास लगाए जा रहे थे कि आदित्य ख़ुद चुनावी राजनीति में उतर सकते हैं। अब जब वो समय आ गया है, उद्धव ठाकरे के कुछ दिन पहले के दिए गए बयान की भी चर्चा हो रही है। उद्धव ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने अपने पिता बाल ठाकरे के सामने यह प्रतिज्ञा ली थी कि वह एक शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाएँगे।

उद्धव ने कहा था कि शिवसेना का भगवा ध्वज महाराष्ट्र विधानसभा के ऊपर लहराना चाहिए। पार्टी ने आदित्य सहित 11 उम्मीदवारों की सूची फाइनल कर दी है और उन्हें नामांकन भरने के लिए अधिकृत कर दिया है। हालाँकि, उद्धव यह भी कहते रहे हैं कि वह कभी भी पीठ में चाकू मारने का काम नहीं करेंगे क्योंकि वो खुले तौर पर विरोध करने में विश्वास रखते हैं। सीट शेयरिंग में भाजपा को दबाव में लाने के लिए शिवसेना ऐसे पैंतरे पहले भी आजमाती रही है। हाल ही में ठाकरे परिवार के विश्वस्त संजय राउत ने एनसीपी के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार से भी मुलाक़ात की थी। आदित्य के चुनावी समर में उतरने से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव कुछ ज्यादा ही दिलचस्प होने वाला है।

दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है… J&K पर तुर्की के जहर को ‘साइप्रस के रास्ते’ ऐसे काट रहे PM मोदी

हाल ही में तुर्की ने जम्मू कश्मीर पर भारत विरोधी रुख अपनाया था। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब इरदुगान ने संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया था। भारत पहले ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह कर चुका है कि जम्मू कश्मीर देश का आंतरिक मसला है और इस पर किसी भी प्रकार की मध्यस्तथा स्वीकार नहीं की जाएगी। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि अगर पाकिस्तान से बातचीत होगी भी तो सिर्फ़ पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर ही होगी।

ऐसे में तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा था कि दक्षिण भारत की स्थिरता और समृद्धि जम्मू कश्मीर समस्या से जुड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया था कि यूएन रेजोल्यूशन के बावजूद राज्य में 80 लाख लोग ‘फँसे हुए हैं’। साथ ही उन्होंने इस मसले को संघर्ष के बजाय बातचीत से सुलझाने की सलाह दी थी। 72 वर्षीय रजब तैयब ने न्याय और निष्पक्षता का रोना रोते हुए जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया था। पाक पीएम इमरान ख़ान ने भी तुर्की के राष्ट्रपति से मुलाक़ात के दौरान उन्हें अनुच्छेद 370 पर भारत के निर्णय के बारे में बताया था।

अब भारत ने तुर्की की पैंतरेबाजी को देखते हुए उसे सबक सिखाने के लिए साइप्रस का खुला समर्थन किया है। बता दें कि 1974 में तुर्की की सेना ने साइप्रस पर हमला किया था और द्वीपीय देश के 36% भू-भाग पर कब्ज़ा कर लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस की स्वतन्त्रता, सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए तुर्की को दबाव में डाल दिया। तुर्की अभी भी साइप्रस के भू-भाग पर कब्ज़ा कर के बैठा हुआ है और इसीलिए दोनों ही देशों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हैं।

हाल ही में तुर्की ने धमकी दी थी कि वह साइप्रस के ‘एक्सक्लूसिव इकनोमिक जोन’ में घुस जाएगा। साइप्रस के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में तुर्की की हरकतों का ब्यौरा देते हुए अंतरराष्ट्रीयता समुदाय को बताया कि तुर्की ने धमकी दी है कि अगर साइप्रस अपने एनर्जी प्रोजेक्ट को लेकर आगे बढ़ा तो उसे उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि तुर्की पड़ोसी राज्यों और एनर्जी कंपनियों को धमका रहा है।

तुर्की ने साइप्रस के एक हिस्से पर कब्ज़ा कर के उसे ‘उत्तरी साइप्रस’ घोषित कर रखा है। हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय तुर्की की इस हरकत का समर्थन नहीं करता। कहा जाता है कि यूरोप में साइप्रस अंतिम देश है, जिसका विभाजन हुआ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी तुर्की की हरकतों के लिए उसकी आलोचना कर चुका है। अब चूँकि तुर्की ने जम्मू कश्मीर पर टेढ़ा बयान दे दिया है, तो स्पष्ट है कि भारत भी उसे माइंड गेम से ही मारेगा। साइप्रस के समर्थन में और ज्यादा खुल कर आने और पीएम मोदी का वहाँ के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात तुर्की को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झुकाने की भारतीय कूटनीति ही है। आने वाले दिनों में तुर्की को यह बात और भी अच्छे से समझ में आ जाएगी और तब वो शायद जम्मू-कश्मीर पर राग अलागना बंद कर देगा।

कौन हैं ‘प्लॉगर’ रिपुदमन बेल्वी और सिस्टर थ्रेसिया? PM मोदी ने ‘मन की बात’ में की जिनकी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (सितम्बर 29, 2019) को मन की बात में दो लोगों का जिक्र किया। इनमें एक रिपुदमन बेल्वी और दूसरी सिस्टर मरियम थ्रेसिया हैं। बेल्वी ‘प्लॉगर’ हैं जबकि सिस्टर मरियम थ्रेसिया को अगले महीने वेटिकन संत घोषित करने जा रहा है। यह शब्द क्या है और इसके क्या मायने हैं, हम आपको आगे बताते हैं।

रिपुदमन बेल्वी देश के पहले प्लॉगर बताए जाते हैं। दरअसल, सुबह की सैर (जॉगिंग) के दौरान कूड़ा उठाने को ‘प्लॉगिंग’ कहते हैं। जहाँ तक इसके बारे में जानकारी उपलब्ध है, इसकी शुरुआत 2016 में स्वीडन से हुई थी। पीएम मोदी ने 2 अक्टूबर से महात्मा गाँधी के जन्मदिवस के अवसर पर प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने को लेकर शुरू हो रहे अभियान का जिक्र करते हुए बेल्वी की तारीफ की। उन्होंने कहा,

“हमारे ही देश के एक नौजवान ने एक बड़ा ही अनोखा अभियान चलाया है। उनके इस काम पर मेरा ध्यान गया तो मैंने उनसे फ़ोन पर बात करके उनके इस नए प्रयोग को जानने समझने की कोशिश की। हो सकता है, उनकी ये बातें देश के और लोगों को भी काम आए। रिपुदमन बेल्वी एक अनोखा प्रयास कर रहें हैं। वे ‘Plogging’ करते हैं। जब पहली बार मैंने ‘प्लॉगिंग’ शब्द सुना तो मेरे लिए भी नया था। विदेशों में तो शायद ये शब्द कुछ मात्रा में उपयोग हुआ है। लेकिन, भारत में रिपुदमन बेल्वी जी ने इसको बहुत ही प्रचारित किया है।”

उन्होंने कहा कि ‘प्लॉगिंग’ का इस्तेमाल विदेशों में होता था, जबकि भारत में बेल्वी ने इसको काफी हद तक बढ़ावा दिया है। बेल्वी से फोन पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल मंत्रालय भी 2 अक्टूबर को ‘फिट इंडिया प्लॉगिंग रन’ का आयोजन करेगा। इसके तहत दो किलोमीटर तक जॉगिंग के साथ कूड़ा उठाया जाएगा। सुनिए पीएम मोदी और बेल्वी की बातचीत:

‘मन की बात’ के दौरान सिस्टर मरियम थ्रेसिया का भी पीएम ने जिक्र किया। पोप फ्रांसिस 13 अक्टूबर को वेटिकन सिटी में सिस्टर थ्रेसिया को संत घोषित करेंगे। मोदी ने इसे हर भारतीय के लिए गर्व का विषय बताया। पीएम मोदी ने उनके बारे में बात करते हुए कहा:

“एक महान विभूति को 13 अक्टूबर को वेटिकन सिटी में सम्मानित किया जा रहा है। यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है कि पोप फ्रांसिस आने वाले 13 अक्टूबर को मरियम थ्रेसिया को संत घोषित करेंगे। सिस्टर मरियम थ्रेसिया ने 50 साल के अपने छोटे से जीवनकाल में ही मानवता की भलाई के लिए जो कार्य किए, वो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र से उनका अद्भुत लगाव था। उन्होंने, कई स्कूल, हॉस्टल और अनाथालय बनवाए और जीवनपर्यन्त इस मिशन में लगी रहीं।”

पीएम मोदी ने कहा कि सिस्टर थ्रेसिया ने जो भी कार्य किया, उसे निष्ठा और लगन के साथ और पूरे समर्पण भाव से पूरा किया | सिस्टर थ्रेसिया ने ‘Congregation of the Sisters of the Holy Family’ की स्थापना की थी। पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईसाईयों को भी बधाई दी।

‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने सिस्टर थ्रेसिया को किया याद (साभार: AIR)

सिस्टर थ्रेसिया ने समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए थे। उन्होंने कॉन्ग्रेगेशन ऑफ सिस्टर्स ऑफ द होली फैमिली की स्थापना की थी, जो आज भी उनके मिशन को आगे बढ़ा रहा है।

पत्रकारिता छोड़ ब्याह कराने वाले बिचौलिए की भूमिका में आ गए हैं रवीश बाबू…

रवीश कुमार पत्रकारिता का एक जाना-माना नाम है। मैग्सेसे भी जीत चुके हैं। लेकिन अब वे इस प्रोफ़ेशन को छोड़ने का मन बना चुके हैं। कैसे, क्यों और काहे? क्योंकि रवीश कुमार ने जयपुर में आयोजित टॉक जर्नलिज़्म कार्यक्रम में कुछ ऐसी बातें कही, जो एक पत्रकार नहीं कह सकता, कभी नहीं कह सकता। इस कार्यक्रम में उन्होंने कई मुद्दों पर बातें की और नसीहतों का अंबार लगा दिया। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने इस कार्यक्रम के 6 मिनट का एक वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया। इस वीडियो को देखने के बाद, एक नहीं बल्कि कई सवाल मन में घर कर जाते हैं, जिनके जवाब शायद ही कभी रवीश कुमार भी दे पाएँ।

मैग्सेसे पुरस्कार विजेता पत्रकार रवीश कुमार ने वर्तमान सरकार को घेरते हुए आज की पत्रकारिता के संदर्भ में कहा कि आज का मीडिया आपको अपने पड़ोस के समुदाय विशेष को एक दुश्मन के तौर पर दिखा रहा है। रवीश कुमार, कथित अल्पसंख्यक समुदाय की जो दयनीय छवि गढ़ने की कोशिश करते दिखे उसकी असलियत जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें, और जानें कि क्या वाकई हिन्दुस्तान में ‘शांतिप्रिय’ डरे हुए हैं।

समुदाय विशेष के प्रति अपनी वफ़ादारी निभाते हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से हिन्दू समाज पर हमला किया और लड़कियों को नसीहत दी कि उन्हें किस तरह के लड़के से शादी नहीं करनी चाहिए। शायद एक पत्रकार की भूमिका से अब वो उक्ता गए हैं, इसीलिए उन्होंने लव-गुरू बनने का रुख़ किया है।

इस कार्यक्रम में उन्होंने लड़कियों को संबोधित करते हुए कहा कि जो लड़का किसी समाज से नफ़रत करता हो, वो न तो एक अच्छा पति बन सकता है, न अच्छा प्रेमी बन सकता है और न एक अच्छा भाई बन सकता है, ऐसे किसी ‘आईटी सेल’ वाले से शादी न कर लेना। पता चले कि शादी किसी ऐसे से हो जाए जो नफ़रत करता हो तो वो प्रेमी नहीं हो सकता! ये किस लाइन में आ गए आप रवीश भाई साब! पत्रकार से पंडित बन गए आप तो!

रवीश कुमार, लड़कियों को यह बताना भूल गए कि मदरसे में शिक्षा के नाम पर बच्चियों के साथ रेप करने वाले मौलवी कितने ख़तरनाक होते हैं, उनसे बचना चाहिए। उन्होंने यह नहीं बताया कि मदरसे में दवा देने के नाम पर हथियार सप्लाई किए जाते हैं।

अच्छे भाई का हवाला देने वाले रवीश कुमार को कौशांबी की उस घटना के बारे में बताना चाहिए था जिसमें एक 15 साल की बच्ची का गैंगरेप हो जाता है, और वो बच्ची अल्लाह का वास्ता देती दया की भीख़ माँगती है। वो बच्ची गिड़गिड़ाते हुए कहती है कि भैया आप तो मुझे जानते हैं, अल्लाह के लिए मुझे छोड़ दो। बता दूँ कि उस मासूम बच्ची को नाजिक और आदिल ने बहन तो नहीं माना, लेकिन हाँ उन्होंने अपने एक और दोस्त के साथ मिलकर न सिर्फ़ उस बच्ची का सामूहिक बलात्कार किया बल्कि उस दरिंदगी का वीडियो भी बनाया, उसे अपलोड कर वायरल भी किया।

रवीश कुमार, ऐसे भाईयों के बारे में क्या कहेंगे, क्योंकि उनका तो मानना है कि आज का मीडिया पड़ोस में रह रहे मजहब विशेष वाले को दुश्मन बता रहा है? जबकि सच्चाई यह है कि आज का मीडिया आपको सतर्क कर रहा है कि अपने पड़ोस में रहने वाले शख़्स को भाई कह देने भर से वो आपका भाई नहीं बन जाता बल्कि हो सकता है कि वो आपके ऊपर नज़रे गड़ाए हुए हो और मौक़े की तलाश में हो कि कब वो आपको हानि पहुँचा दे। 

लड़कियों से एक अच्छे पति के बारे में रवीश कुमार ने ज़्यादा कुछ तो नहीं कहा, लेकिन इतना ज़रूर कहा कि वो इस बात का ध्यान रखें कि कहीं वो ‘आईटी सेल’ का न हो। उनके शब्दों को मैं जितना समझ पाई हूँ उसके अनुसार, आईटी सेल से उनका सीधा मतलब दक्षिणपंथी और बीजेपी की विचारधारा को फॉलो करने वाले लड़कों से था।

मेरा सवाल यह है कि क्या ऐसे लड़के अच्छे पति इसलिए साबित नहीं हो सकते क्योंकि वो समाज में धर्म के नाम पर फैली बुराई को देख नहीं पाते और उसे दूर करना अपना धर्म समझते हैं? ऐसे लड़के अत्याचार पर चुप बैठना नहीं जानते और इस बुराई का बीज बोने वालों से सख़्त नफ़रत करते हैं, इसलिए वो अच्छे पति नहीं बन सकते? ऐसे लड़के जो देश को विकास की राह पर देखना चाहते हों और इसके आड़े आने वालों से नफ़रत करते हों, वो अच्छे पति बनने के लायक नहीं, इस पर मुझे यक़ीन नहीं।

शायद रवीश कुमार को पता भी नहीं कि महिलाओं को कितनी छोटी-छोटी बातों के लिए तलाक़ दे दिया जाता है। सब्ज़ी में नमक-मिर्च कम था, तो दे दिया तलाक़; रिक्शा ख़रीदने के लिए ससुराल से पैसा नहीं मिला तो दे दिया तलाक़; बेटी पैदा करने पर घर से निकाला और दे दिया तलाक़; गुल मंजन से दाँत साफ़ करने पर दे दिया तलाक़; शौहर को पतली गर्लफ्रेंड मिल गई तो दे दिया तलाक़; शौहर से सब्ज़ी लाने के लिए 30 रुपए माँगे तो दे दिया तलाक़… उदाहरण कम पड़ जाएँगे रवीश ‘पत्रकार’ बाबू! लेकिन आपको सुनने वाली लड़कियों को आप एक भी ऐसे उदाहरण नहीं गिनाएँगे, यह बात भी पक्की है। क्योंकि आप प से पत्रकार थे, प से पंडित बनने चले लेकिन रहेंगे आप प से प्रोपेगेंडाकार ही!

तलाक देने वाले ऐसे शौहरों के लिए रवीश कुमार के पास है कोई जवाब? अपने कार्यक्रम में लड़कियों को आईटी सेल के लड़कों से बचने की सलाह देने वाले रवीश कुमार को यह भी बताना चाहिए था कि आपके पड़ोस में अगर ऐसा कोई सौदे विशेष का लड़का हो तो उससे भी बचकर रहना चाहिए। लेकिन उन्होंने नहीं बताया क्योंकि उन्हें तो केवल दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लड़कों से परहेज है।

अब बात प्रेमी की, जिसके बारे में रवीश जी अच्छी तरह से बता नहीं पाए। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ प्यार के नाम पर लड़कियों का धर्म परिवर्तन करा पहले तो उनसे जबरन शादी की जाती है और फिर तलाक़ देकर उसे छोड़ दिया जाता है, दर-दर भटकने के लिए। अपने कार्यक्रम में रवीश जी ने ऐसे स्वार्थी प्रेमी से बचने की सलाह लड़कियों को नहीं दी, क्योंकि उन्होंने तो ये तय कर रखा है कि आईटी सेल के लड़कों को मोहब्बत करनी आती ही नहीं, जबकि सच्चाई से वो ख़ुद मुँह मोड़े हुए हैं। मैं तो यही कहूँगी की ऐसे सिरफ़िरे आशिक़/ प्रेमी से भी लड़कियों को बचकर रहना चाहिए जिनका मक़सद केवल आपकी मासूमियत को छलना भर रहता है।

आज के मीडिया को भर-भर कर गाली देने में जुटे रवीश कुमार शायद यह भूल बैठे हैं कि आज वो जो कुछ भी हैं वो इसी मीडिया के दम पर हैं। समाज में लोग उन्हें जानते हैं तो इसी मीडिया की वजह से। आज जिस मीडिया को वो कोसते नहीं थकते, कभी उसी मीडिया के वो भी मुरीद हुआ करते थे और लोगों को ज्ञान बघारने के लिए उसी माध्यम का सहारा लेते थे। अफसोस कि अब तक ले रहे हैं!

रवीश कुमार ने स्वामी चिन्मयानंद मामले का ज़िक्र किया और कहा कि सरकार इस मामले पर चुप है, जबकि सच्चाई यह है कि यह मुद्दा सभी जगह छाया हुआ है और इस पर जितनी तेज़ी के साथ कार्रवाई होनी चाहिए थी, वो हो रही है। लेकिन रवीश का असली दर्द आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ बकरी चोरी के आरोप को लेकर है। उन्हें कष्ट है तो इस बात का कि भूमाफ़िया, भैंस-बकरी चोर, किताबों की चोरी करने वाले, महिला वार्ड में जबरन घुसकर महिला के साथ दुर्व्यवहार करने वाले और सदन की अध्यक्षता करने वाली रमा देवी पर भद्दा कॉमेंट और जया प्रदा के अंतर्वस्त्रों पर अभद्र टिप्पणी करने वाले आज़म ख़ान के कारनामों पर घंटो बहस क्यों की जाती है?

ज़ाहिर सी बात है जब यह बातें सामने आती हैं तो उनके चहेते नेताओं की शर्मनाक़ हरक़ते भी सामने आती हैं, ऐसे में वो लोगों को अख़बार पढ़ने और टीवी न देखने की सलाह नहीं देंगे तो और क्या करेंगे। इस पर सवाल उठता है कि आख़िर, रवीश कुमार को आज़म ख़ान से ऐसा भी क्या लगाव है जो वो उनके कारनामों पर होने वाली बहसों से इतने नाराज़ हैं?  

जयपुर में आयोजित टॉक जर्नलिज़्म कार्यक्रम में रवीश कुमार ने जिन भी मुद्दों पर चर्चा की उसका न तो कोई आधार था और न ही सच्चाई से उसका कोई लेना-देना था। चूँकि मीडिया की बदौलत पत्रकारिता जगत में वो एक नामी चेहरा हैं, इसलिए उन्हें सुनने और देखने के लिए लोग इकट्ठा हो जाते हैं। लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि उनकी कही हर बात पर आँख मूँदकर भरोसा कर लेना चाहिए।

फ़िलहाल, वो वर्तमान सरकार से ख़ासे नाराज़ हैं इसलिए उनका यह दर्द अक्सर ऐसे मौक़ों पर छलक ही जाता है। मेरी सलाह है कि उनकी फ़िजूल की बातों को गंभीरता से लेने की बजाए, हमें अपने आँख-कान खुले रखने होंगे, जिससे ऐसी मानसिकता के भ्रमजाल में फँसने से बचा जा सके।

इमरान खान की तीसरी बीवी नहीं है किच्चिन/भूतनी… दिखता है आईने में चेहरा: Pak मीडिया

पाकिस्तानी मीडिया ने स्पष्ट किया है कि इमरान ख़ान की तीसरी और वर्तमान बीवी बुशरा का अक्स आईने में दिखता है। इससे पहले ख़बर आई थी कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा मानेका का अक्स आईने में नहीं दिखता है। एएनआई ने लिखा था कि प्रधानमंत्री आवास में तैनात एक कर्मचारी ने यह दावा किया था। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पाकिस्तान के कैपिटल टीवी पर खातून-ए-अव्वल (प्रथम महिला) को लेकर इस सनसनीखेज़ दावे का खुलासा किया गया था।

कैपिटल टीवी ने इसे फेक न्यूज़ करार दिया है। उसने कहा है कि चैनल ने इस प्रकार की कोई भी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है या ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया है। आपको बता दें कि इस ख़बर को एएनआई (समाचार एजेंसी) ने प्रकाशित किया था, जिसके आधार पर सभी इंडियन मीडिया (हमने भी) ने इस खबर को दिखाया। अब कैपिटल टीवी ने कहा है कि एएनआई ने जो टेम्प्लेट का प्रयोग किया, वह एक फेक इमेज है, जो 2018 में ही वायरल हुआ था। कैपिटल टीवी ने कहा कि उसने 2018 में भी किसी अधिकारी के हवाले से इमरान ख़ान की पत्नी को लेकर ऐसा कुछ दावा नहीं किया था।

एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया था कि इमरान खान की तीसरी पत्नी बुशरा की छवि एक तंत्र-मंत्र और जादू टोना करने वाली शख्सियत के रूप में है। दावा तो ये भी किया जाता है कि बुशरा ने दो जिन्न भी पाल रखे हैं और वह उन्हें पका हुआ गोश्त परोसती हैं। बुशरा प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चीफ इमरान खान की तीसरी पत्नी हैं। कहा जाता है कि बुशरा तंत्र विद्याओं को बखूबी जानती हैं और उनके पास बहुत सी शक्तियाँ हैं। लोगों का मानना है कि बुशरा के पास जो दो जिन्न हैं, उसका इस्तेमाल वह कई अलग-अलग कामों के लिए करती हैं।

हालाँकि, अब एएनआई ने अपनी वेबसाइट से इस रिपोर्ट को हटा दिया है। वैनिटी फेयर की रिपोर्ट बताती है कि एक बार बुशरा बीबी ने भविष्यवाणी थी कि जिन्नों को पका हुआ माँस खिलाना इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उन्हें उपयुक्त महिला से शादी करनी होगी। फिर प्रधानमंत्री का पद संभालने के 6 महीने पहले इमरान खान ने बुशरा बीबी के साथ एक निजी समारोह में निकाह कर लिया था।

अगर BJP का उम्मीदवार जीता तो बनेगा पहला हिन्दू MLA: रामपुर में 17 चुनाव, हर बार मुस्लिम विधायक

बहुचर्चित रामपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने आज़म ख़ान की पत्नी डॉक्टर तंजीन फातिमा को अपना उम्मीदवार बनाया है। फातिमा फ़िलहाल राज्यसभा सांसद हैं। 53% मुस्लिम जनसंख्या वाला रामपुर विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले से ही चर्चित रहा है क्योंकि विवादित नेता आज़म ख़ान यहाँ से 9 बार विधायक रह चुके हैं। वह 1980-1995 और 2002-2019 तक रामपुर के विधायक रहे हैं। इसी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए वह कई बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे और सरकार में अक्सर उन्हें मुलायम परिवार के बाद दूसरा सबसे प्रभावी नेता माना गया।

उधर भाजपा ने भारत भूषण गुप्ता को रामपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है। उनका सामना 3 प्रमुख दलों के मुस्लिम उम्मीदवारों से होगा। कॉन्ग्रेस ने अरशद अली ख़ान गुड्डू और बसपा ने जुबैर मसूद ख़ान को टिकट दिया है। रामपुर विधानसभा के लिए 21 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और 24 अक्टूबर को मतगणना होगी। इस विधानसभा क्षेत्र की एक ख़ास बात यह है कि यहाँ हुए अब तक के 17 चुनावों में हरेक बार मुस्लिम उम्मीदवारों की ही जीत होती आई है। अगर भाजपा के उम्मीदवार इस बार जीतते हैं तो वह इस क्षेत्र के पहले हिन्दू विधायक होंगे।

उत्तर प्रदेश में एक चुनाव में बुरी हार के बाद अब महागठबंधन बिखर गया है क्योंकि सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस- तीनों ही अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। लोकसभा चुनाव में आज़म ख़ान से पराजित हो चुकीं जया प्रदा विधानसभा उपचुनाव में भी उनके ख़िलाफ़ प्रचार कर रही हैं। महिलाओं की एक सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने गाने भी सुनाए।

आज़म ख़ान ने 2019 लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली हुई थी। आज़म पहली बार संसद बने हैं। आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला आज़म ख़ान भी विधायक हैं। उधर ख़बर आई है कि आज़म खान के वकील ने कहा है कि वह बीमार हैं और रामपुर से बाहर जाकर इलाज कराना चाहते हैं। वकील ने कहा है कि आज़म की सेहत ख़राब हो गई है और वह इस वक़्त रामपुर में नहीं हैं। उन्होंने थाने में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए 15 दिनों की मोहलत माँगी है। उनके ख़िलाफ़ अब तक 80 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।