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बुद्ध-महावीर के स्थल से उस लड़की के गिड़गिड़ाने की आवाज़… आपके कानों तक पहुँची क्या?

“भैया, मुझे अपनी छोटी बहन समझ कर माफ़ कर दीजिए। छोड़ दीजिए।”
“बहुत बदनामी हो जाएगी। छोड़ दीजिए भैया।”

इंसानी खाल में छिपे भेड़ियों से घिरी एक बच्ची बस इतना ही बोलती रही। उस पर टूटने वाले दरिंदे मंगल ग्रह से नहीं आए थे। वे भी उसी समाज से हैं, जिससे हम और आप आते हैं। वे भी उसी जमीन पर पले-बढ़े हैं, जहॉं उनकी दरिंदगी की शिकार हुई पीड़िता का पालन-पोषण हुआ है।

घटना बिहार के राजगीर की है। राजगीर गौतम बुद्ध और महावीर की स्थली रही है। उसी राजगीर के विपुलांचगिरि पर्वत पर 16 सितम्बर 2019 को मानवता को शर्मसार करने वाली यह घटना हुई। प्रशासन की नींद तो तब टूटी जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।

राजगीर को बिहार सरकार वैश्विक स्तर का पर्यटन स्थल बनाने की कोशिशें कर रही हैं। यहाँ महात्मा गाँधी के 150वें जन्म दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे में इस घटना ने इतिहास में 8 वर्ष पीछे जाने को मजबूर कर दिया, जब राजगीर में घूमने विदेशी पर्यटक आए हुए थे। इसी दौरान विपुलांचगिरि पर्वत पर 22 सितंबर 2011 को एक अमेरिकी लड़की घूम रही थी, तभी कुछ लड़के आ गए और उसके साथ दुर्व्यवहार किया। वह भारत की कैसी छवि लेकर अपने देश गई होगी?

हम इस घटना की चर्चा इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि ताज़ा घटना इसी विपुलांचगिरि पर्वत की है। एक सजग नागरिक के रूप में आप सरकार को दोष दे सकते हैं कि जब यह पर्यटन स्थल है और पूर्व में भी ऐसी घटनाएँ हो चुकी है, तो यहाँ उस तरह से सुरक्षा-व्यवस्था क्यों नहीं लगाई गई? लेकिन, एक समाज के रूप में आप या हम केवल दूसरों से प्रश्न पूछ कर भाग नहीं सकते। हम ख़ुद के अंदर, ख़ुद के घर में और ख़ुद के समाज में झाँक कर देख सकते हैं कि गड़बड़ी कहाँ है? सबसे पहले जानते हैं कि ताज़ा घटना है क्या और इसका जिक्र हम क्यों कर रहे हैं?

बिहार के नालंदा में एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। आरोपितों ने घटना का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया। बिहार में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं। ताज़ा घटना का वीडियो दिल दहला देने वाला है। इसे शेयर नहीं किया जा सकता। किसी व्यक्ति ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा को टैग कर के इस वीडियो को ट्वीट कर दिया। शर्मा ने आग्रह किया कि चूँकि इस वीडियो में पीड़िता का चेहरा दिख रहा है, इसीलिए इसे शेयर न किया जाए। महिला आयोग की अध्यक्ष को सारे विवरण जानने के बाद यह कहने को विवश होना पड़ा कि इन सभी आरोपितों को एक साथ फाँसी पर लटका देना चाहिए।

आख़िर उस वीडियो में ऐसा क्या था? यह वीडियो बिहार के नालंदा जिला स्थित राजगीर का है। नालंदा, जहाँ तब शिक्षा का विशाल दीप जला था, जब यूरोप में एक भी विश्वविद्यालय नहीं था। नालंदा, बिहार के मुख्यमंत्री और पिछले डेढ़ दशक से राज्य में सत्ता के सिरमौर नीतीश कुमार का गृह जिला है। राजगीर, उन दुर्लभतम स्थलों में एक है, जहाँ बुद्ध और महावीर- दोनों ने ही कई दिनों तक रुक कर शिक्षाएँ दीं। शायद अब वहाँ का समाज उन्हें भूल चुका है। उक्त वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पीड़िता अपने मित्र के साथ पहाड़ के पास बैठी हुई है। तभी 10 के क़रीब बदमाश वहाँ पर आ धमके।

उनके पास हथियार था, पिस्तौल था, चाकू था। जब लड़की के दोस्त ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने दोस्त की भी पिटाई की। विरोध करने पर पीड़िता को भी पीटा। साथ ही गैंगरेप करने वाले बदमाशों ने पीड़िता को धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर उसने मुँह खोला तो पूरे परिवार को जान से मार डाला जाएगा। हथियार के बल पर घेर कर 10 में से 6 लड़कों ने गैंगरेप किया। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक असहाय लड़की 10 हथियारबंद लोगों के बीच विवश होकर क्या सब सोच रही होगी और उसके मन में क्या सब चल रहा होगा? ऐसा लगता है जैसे वह कोई लड़की नहीं बल्कि कोई निर्जीव वस्तु हो, जो सोच सकता हो और जिसे दर्द की अनुभूति होती हो। लेकिन, वह कर कुछ नहीं सकता।

दरिंदों ने अपनी घटिया नीयत का परिचय देते हुए लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया। नाबालिग पीड़िता 9वीं की छात्रा है। उसके पिता एक ग़रीब मजदूर हैं। ऐसे में सवाल है कि इतनी संख्या में आरोपितों के ख़िलाफ़ न्याय की इस लड़ाई में वह कहाँ तक पहुँचेगी? ऐसा नहीं है कि जब दरिंदे वहाँ पर पहुँचे, तब लड़की ने बचने की कोशिश नहीं की। उसने खूब कोशिश की। गिड़गिड़ाई, रोई, मिन्नतें की लेकिन सब बेकार। हवस के भूखों ने उसकी एक न सुनी। आप इसी बात से प्रशासन की सक्रियता का अंदाजा लगा लीजिए कि सोमवार (सितम्बर 16, 2019) को हुई इस घटना का वीडियो उसके 9 दिन बाद सोशल मीडिया पर आया और तब प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की।

बिहार में ऐसी घटनाओं की बाढ़ आ गई है

यह सब क्यों हो रहा है? इस साल अप्रैल में बिहार के जहानाबाद में एक नाबालिग लड़की का गैंगरेप हुआ और इसका वीडियो बना लिया गया। इस मामले में 14 आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया। मई में पटना के नौबतपुर में ऐसा ही वाकया हुआ, जिसमें 2 लोग गिरफ़्तार हुए। वजीरगंज में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें 3 लोगों ने आत्म-समर्पण किया। ये सभी बिहार की वारदातें हैं। ऐसा नहीं है कि दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं होता लेकिन सवाल यह उठता है कि दोष किसका है? जब कोई लड़की कहीं एकांत में बैठी हुई है और 6 लोग उसका गैंगरेप करते हैं तो क्या इसमें हमारे समाज का दोष नहीं?

पुलिस ने इस मामले में 7 आरोपितों को गिरफ़्तार किया है: ‘दैनिक जागरण’के बिहारशरीफ संस्करण में छपी ख़बर

ऐसे लड़कों को आख़िर किस परिवेश में पाला जाता है कि जब वे कहीं एकांत में मौक़ा पाकर किसी लड़की को देखते हैं तो उन्हें बस एक ही चीज सूझता है। ऐसे युवाओं को आख़िर किस समाज से यह शिक्षा मिलती है कि वे ऐसे घृणित अपराध को करते समय न सिर्फ़ पीड़िता के दुःख और दर्द को बल्कि अपने अंजाम को भी भूल जाते हैं? आख़िर हवस की कौन सी पट्टी उनके आँखों पर बंधी होती है कि उन्हें इस अपराध की सज़ा का भान होता है, फिर भी वे क्षणिक सुख के लिए रेप, गैंगरेप और फिर उसका वीडियो बनाने जैसी घिनौनी हरकतें कर के किसी की ज़िंदगी एक झटके में बर्बाद कर देते हैं?

एक लड़की के साथ कुछ भी बुरा होता है तो अकेले वह लड़की नहीं बल्कि उसके माता-पिता का सिर झुक जाता है, यह सच्चाई है। सिर झुकना चाहिए इस अपराध को अंजाम देने वाले दोषियों का, उनका पालन-पोषण करने वाले समाज का, उसके परिवार का और उनको शिक्षा देने वाले परिवेश का क्योंकि अगर दर्जन भर की संख्या में झुण्ड में निकल कर लोग इस तरह का बर्ताव कर रहे हैं तो समाज यह कह कर बच नहीं सकता कि वे अपवाद हैं। वे अपवाद नहीं हैं, समाज की सच्चाई हैं। एक ऐसे समाज की, जो युवाओं और वयस्क हो रहे बच्चों को इस बात की शिक्षा देना भूल जाता है कि महिलाओं की इज्जत कैसे करनी है?

शक्ति पूजा के अवसर पर हम यह सब देखने को मजबूर क्यों?

रविवार (सितम्बर 29, 2019) से शक्ति की आराधना का सबसे बड़ा पर्व शुरू हो रहा है। वह पर्व, जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सिलिकॉन वैली में फेसबुक के दफ्तर में भारत के आलोचकों को चुप कराया था, जो यह कह रहे थे कि भारत में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ बढ़ रही हैं। जिस देश में, जिस समाज में, जिस धरती पर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की ऊर्जा अर्थात शक्ति की परिकल्पना एक महिला के रूप में की गई है, उसकी यह कैसी पूजा कर रहे हैं हम? शक्ति पूजा के अवसर पर हम ऐसी ख़बरें पढ़ने को विवश हो रहे हैं, जिसमें शक्ति का रूप मानी जाने वाली महिलाओं में वयस्क को तो छोड़िए, नाबालिगों को भी हवस का शिकार बनाया जा रहा है।

किसी युवती या नाबालिग लड़की के साथ यौन दुर्व्यवहार करते समय उसका वीडियो बनाने से कैसा सुख मिलता है कि थोक में इसी समाज के युवा सड़कों पर निकल आते हैं और दरिंदगी करते हैं। ख़ुद के द्वारा की गई दरिंदगी का वीडियो ख़ुद बना लेने में कैसा मज़ा मिलता है? आरोपितों में से एक के पिता फुटपाथ दुकानदार हैं तो एक के पिता टोंगा (घोड़ागाड़ी) चलाते हैं। इन आरोपितों ने अपने परिवार को, माता-पिता को दिन-रात संघर्ष करते देखा होगा, देखते होंगे। लेकिन, क्या ऐसी अक्षम्य हरकतें करते समय इनके मन में अपने परिवार का चेहरा नहीं कौंधा होगा? क्या उन्हें इस बात का डर नहीं सताया होगा कि अगर उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई दरिंदा ऐसा करता तो उन पर और पूरे परिवार पर क्या बीतेगी?

सबकी एक ही माँग – फाँसी हो

अधिकतर मामलों में पीड़िता दोषियों को फाँसी देने की माँग करती हैं। राजगीर वाली घटना इतनी वीभत्स है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष तक को कहना पड़ा की वह ‘कार्रवाई करने के लिए मरी जा रही हैं’ और दोषियों को एक साथ फाँसी पर लटका देना चाहिए। ग्रामीणों ने पूरे इलाक़े में विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों को फाँसी देने की माँग की। यह घटना किसी महानगर की नहीं थी, इसीलिए इसे लेकर उतना आउटरेज नहीं हुआ, कैंडल मार्च नहीं निकले और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया गया। दूर दिल्ली और पटना में बैठी सरकारें और मुंबई और बंगलौर में अपना रूटीन वर्क कर रहे लोगों तक ये ख़बर तो पहुँची ही नहीं।

पूर्व सांसद पप्पू यादव ने पीड़िता के परिवार से मिलने के बाद क्या कहा?

ताज़ा घटना में ग्रामीणों का क्या कहना था? ग्रामीणों का कहना था कि सारे आरोपितों को उन्हें सौंप दिया जाए जाए, वही न्याय करेंगे। अगर ग्रामीणों ने उन आरोपितों को रंगे हाथों पकड़ लिया होता तो वह सच में अपने हिसाब से ‘न्याय’ कर देते। और इससे कोई मॉब लिंचिंग की घटना निकल कर आती तो वह गैंगरेप से ज्यादा सनसनीखेज ख़बर बनती। यही आज के राजनीतिक परिदृश्य और मीडिया की सच्चाई है। यही आज के ‘प्रोपेगंडा ड्रिवेन नैरेटिव’ का बैकग्राउंड है। समाज के लोगों को आगे आकर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बीच ऐसे लोग तो नहीं पल रहे, जो किसी लड़की को देखते ही अपनी हवस मिटाने के लिए मचल उठते हैं।

बिहार में क्या है महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की स्थिति?

अकेले जनवरी से मई तक बिहार में रेप के 605 मामले सामने आए हैं। इसमें से अधिकतर राज्य सरकार की नाक के नीचे हुए हैं। जी हाँ, 41 घटनाएँ तो अकेले राजधानी पटना की है। सुशासन के नाम पर सत्ता में आए नीतीश कुमार ने 2005 चुनावों में क़ानून व्यवस्था को ही मुद्दा बनाया था और सरकार में आते-आते उन्होंने कुछ अहम बदलाव किए थे। लेकिन, अब स्थिति वैसी नहीं है। राजगीर का वीडियो सोचने को विवश कर देता है। बिहार महिला आयोग ने नालंदा पुलिस से इस सम्बन्ध में जानकारी माँगी, जिसे देने में भी देर की गई।

‘आपने शेख अब्दुल्ला को 11 साल जेल में रखा, हमारा तो अभी जुमा-जुमा 2 महीना ही हुआ है, चिल्ला काहे रहे’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बद्ध संगठन ‘संकल्प’ के एक कार्यक्रम के दौरान जम्मू कश्मीर और अनुच्छेद 370 को लेकर कई अफवाहों का जवाब दिया और लोगों को सच्चाई से वाकिफ कराया। शाह ने आतंकियों के बारे में बड़ा बयान देते हुए कहा कि आतंकवादी कही भी हों, उन पर गोली चलेगी ही। उन्होंने सरदार पटेल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने आज़ादी के बाद 600 से भी अधिक रियासतों को एक किया। शाह ने कहा कि उस समय कुछ लोगों ने बहुत कोशिश की कि भारत बिखर जाए लेकिन सरदार पटेल ने उन सबको भारत के साथ जोड़ा।

शाह ने कहा कि 630 रियासतों को एक करने का काम पटेल देख रहे थे जबकि 1 रियासत यानी जम्मू कश्मीर का कार्य प्रधानमंत्री कार्यालय देख रहा था। उन्होंने कहा कि 630 रियासतों को मिलाने में कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन जम्मू कश्मीर पर मामला फँस गया। उन्होंने नेहरू की आलोचना करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र में लेकर जाना हिमालयन मिस्टेक (बहुत बड़ी गलती) था, यह हिमालय से भी बड़ी ग़लती थी। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में ऐसा नहीं होगा कि 2 झंडे, 2 संविधान और 2 प्रधानमंत्री हों।

शाह ने बताया कि अनुच्छेद 370 के प्रभाव में आने से लेकर निरस्त होने तक, कुल 12 जन-आंदोलन हुए और भाजपा तथा जनसंघ ने अपने सहयोगी संगठनों के साथ मिल कर इन सभी आन्दोलनों में महत्वपूर्व भूमिका निभाई। अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 के लिए पहले सिविलियन बलिदानी जनसंघ के संस्थापक-अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह शेख अब्दुल्ला को कॉन्ग्रेस की सरकार ने 11 सालों के लिए जेल में डाला है। उन्होंने कहा, “अभी तो हमारा जुमा-जुमा 2 महीना नहीं हुआ और आप चिल्ला रहे हो लेकिन आपने तो शेख अब्दुल्ला को 11 साल जेल में डाला था।“

इस दौरान अमित शाह ने मानवाधिकार का रोना रोने वालों से पूछा कि जम्मू कश्मीर में वीरगति को प्राप्त जवानों और उनके परिवारों का कोई ह्यूमन राइट नहीं है क्या? उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में आज़ादी के बाद से अब तक आतंकवाद के कारण 41,000 लोग मारे गए। शाह ने पूछा कि जब कश्मीर में सूफी संतों की परंपरा को उखाड़ फेंका गया, तब ह्यूमन राइट्स के चैंपियन कहाँ थे? उन्होंने पूछा कि जब कश्मीरी पंडितों को अपनी मातृभूमि से निकाल बाहर किया गया, तब मानवाधिकार के चैंपियन कहाँ थे?

‘संकल्प’ के कार्यक्रम में वर्तमान व पूर्व अधिकारियों को सम्बोधित करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

उन्होंने ‘कश्मीरियत’ का नाम लेकर भाजपा और केंद्र सरकार की आलोचना करने वालों को करारा जवाब देते हुए बताया कि पूरे विश्व में सबसे ज्यादा भाषाएँ और बोलियाँ हमारे देश में हैं। उन्होंने पूछा कि गुजरात में अनुच्छेद 370 न होने से गुजराती समाप्त हो गई है क्या? उन्होंने आगे पूछा कि गुजरात का गरबा समाप्त हो गया क्या? बंगाल में अनुच्छेद 370 नहीं है तो दुर्गा पूजा और रविंद्र संगीत ख़त्म हो गया क्या? उन्होंने कहा कि जब बगैर अनुच्छेद 370 के देश की बाकी सारी संस्कृतियाँ फल-फूल रही हैं तो कश्मीर को इसकी क्या ज़रुरत है? अमित शाह ने कहा:

“मैंने जब संसद में पूछा कि अनुच्छेद 370 से जम्मू कश्मीर को क्या मिला, तो कोई भी नेता संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाया। जम्मू कश्मीर में दलितों को आरक्षण नहीं मिलता था। दिव्यांगों और महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया था। बच्चों को शिक्षा का अधिकार पूरे देश में तो था लेकिन जम्मू कश्मीर में यह नहीं था। यह सब अनुच्छेद 370 ने रोक कर रखा था। यह सब ह्यूमन राइट्स का उल्लंघन नहीं है क्या? अब तक अन्याय होता आया था, जिसे 5 अगस्त को नरेंद्र मोदी ने समाप्त कर दिया। अनुच्छेद 370 से सबसे बड़ा नुकसान था- भ्रष्टाचार। सारे राज्यों में एंटी-करप्शन ब्यूरो है लेकिन जम्मू कश्मीर में यह नहीं था।”

अमित शाह ने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से भारत सरकार की ओर से अब तक जम्मू कश्मीर को 2,77,000 करोड़ रुपए भेजा जा चुका है। उन्होंने पूछा कि आखिर यह रुपया कहाँ गया, कौन खा गया? अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में पर्यटन की संभावनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि यह एक विकसित राज्य बनेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में अच्छे होटल नहीं थे क्योंकि कौन जाता बनाने? उन्होंने कहा कि गलतियाँ सबसे होती हैं लेकिन गलतियों को स्वीकार करने का सहस सार्वजनिक जीवन में होना चाहिए। इसी कार्यक्रम में अमित शाह ने इतिहास दोबारा से लिख कर सच्चाई सामने लाने की बात भी कही।

इस कार्यक्रम में आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉक्टर कृष्ण गोपाल शर्मा भी मंच पर उपस्थित थे। ‘संकल्प’ यूपीएससी की कोचिंग देता है और साथ ही छात्रों को राष्ट्रीयता का पाठ भी पढ़ाता है। इससे जुड़े कई छात्र सरकारी सेवाओं में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं और कार्यरत हैं।

दादी के साथ खेत गई थी 15 साल की किशोरी: चॉंद, उस्मान, अजहर और शाहिब ने किया रेप

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक नाबालिग के साथ गैंग रेप का मामला सामने आया है। जिले के थाना भावनपुर क्षेत्र की 15 साल की पीड़िता अपनी दादी के साथ मिट्टी लाने खेत गई थी। इसी दौरान चार युवक उसे खींच कर खेत में ले गए और दुष्कर्म किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आरोपितों की पहचान चॉंद, उस्मान, अजहर और शाहिब उर्फ बुडला के तौर पर हुई। चारों पीड़िता के गॉंव के ही रहने वाले हैं। अजहर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी अखिलेश भदौरिया के हवाले से खबरों में बताया गया है कि पीड़िता का मेडिकल करवा कर आरोपितों को पॉक्सो एक्ट के तहत नामजद किया गया है। बताया जाता है कि लड़की जिस जगह मिट्टी लेने गई थी वह उसके घर से महज तीन सौ मीटर दूर है। लौटते वक्त वह दादी के पीछे-पीछे चल रही थी। इसी दौरान आरोपितों ने अचानक उसका मुॅंह कपड़े से दबा दिया और उसे गन्ने के खेत में खींच कर ले गए।

कुछ दूर चलने के बाद जब दादी को एहसास हुआ कि पोती साथ में नहीं है तो उसने घर आकर लोगों को इसकी जानकारी दी। काफी तलाश के बाद किशोरी गन्ने के खेत में बदहवास हालत में मिली। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस गॉंव पहुॅंची और किशोरी मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा।

किशोरी के साथ गैंगरेप: ‘दैनिक जागरण’ के मेरठ संस्करण में छपी ख़बर

गौरतलब है कि बीते दिनों इसी तरह यूपी के कौशांबी में घास लेकर लौट रही दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप को अंजाम दिया गया था।

शाहरुख की बेटी सुहाना की फिल्म The Grey Part Of Blue का टीजर आउट, देखें Video

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान की पहली फिल्म ‘द ग्रे पार्ट ऑफ ब्लू’ का टीजर आउट हो गया है। टीजर में सुहाना काफी इंप्रेसिव नजर आ रही हैं। यह टीजर जैसे ही सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे जम कर देखा। सुहाना खान के एक फैन पेज ने इंस्टाग्राम पर इस फिल्म के टीजर को शेयर किया है। बता दें कि ‘द ग्रे पार्ट ऑफ ब्लू’ एक शॉर्ट फिल्म है।

सुहाना खान की फिल्म के टीजर को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। हालाँकि, ‘द ग्रे पार्ट ऑफ ब्लू’ एक शॉर्ट फिल्म है। लेकिन इसका क्रेज दर्शकों पर देखने को मिल रहा है। सुहाना की इस शॉर्ट फिल्‍म के लेखक-निर्देशक ‌थिओडोर जिमेनो हैं। जबकि सुहाना के अपोजिट फिल्म में काम करने वाले अभिनेता का नाम ऑस्कर है।

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कुछ दिन पहले ही एक्टिंग के प्रति अपने प्यार के बारे में बात करते हुए सुहाना ने कहा था, “द टेमपेस्ट के स्कूल परफॉर्मेस में मैं मिरांडा का किरदार निभा चुकी हूँ।” तब शाहरुख की बेटी का अभिनय पहली बार दुनिया के सामने आया था।

सुहाना के फैन पेज द्वारा शेयर किए गए इस टीजर में सिर्फ म्यूजिक है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि सुहाना खुद जल्द ही इस टीजर को अपने फैंस के साथ शेयर करेंगी। कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में शाहरुख खान ने कहा था कि उनकी बेटी जल्‍द ही फिल्म जगत में कदम रखने वाली है। तब उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया था कि उनका पहला प्रोजेक्ट क्या होगा, मगर अब इसका जवाब सामने आ गया है।

एक पुरुष उत्सुक नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह: पटना जलमग्न, 24 घंटे में 25 मौतें

बिहार की राजधानी पटना जलमग्न है। दुकानों से लेकर लोगों के घरों तक, पूरा शहर जैसे एक जलाशय में तब्दील हो गया है। राजेंद्र नगर इलाक़ा सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहाँ तो सभी मकानों के ग्राउंड फ्लोर जलमग्न हो गए हैं। बिना बिजली के लोग घरों में कैद हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की आपदा प्रबंधन टीमें 16 नावों के साथ लोगों को पीने का पानी और भोजन उपलब्ध कराने में लगी हुई है। लेकिन, स्थिति इतनी विकराल है कि यह ऊँट के मुँह में जीरा ही साबित हो रहा है। जब राजधानी की यह स्थिति है तो बाकी इलाक़ों के बारे में आप कल्पना कर लीजिए।

कंकड़बाग, गर्दनीबाग, डाकबंगला और एसके पुरी जैसे इलाक़े बाढ़ से काफ़ी प्रभावित हुए हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया में लोगों का गुस्सा बरपा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक फोटो भी वायरल हुआ, जिसमें वह छत पर खड़े होकर हाथ में छाता लिए बारिश का मुआयना कर रहे हैं। लोगों ने इस फोटो को लेकर उन पर सवाल दागे। कई लोगों ने कहा कि आखिरकार बिहार सरकार ‘नल-जल योजना’ को घर-घर तक पहुँचाने में कामयाब रही, क्योंकि अब घर से निकलते ही लोगों को जल ही जल दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी तक बाढ़ से पिछले 24 घंटे में 25 लोगों के मरने की ख़बर है। भागलपुर और गया सहित कई जिलों में लोगों की जान बाढ़ के कारण गई है। पटरियाँ जलमग्न होने के कारण रेल सेवाएँ प्रभावित हुई हैं और कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। सवाल यह भी है कि लोगों का इलाज हो भी तो कहाँ, क्योंकि अस्पतालों में भी पानी भर चुका है। शहर के सबसे बड़े नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में मरीजों की स्थिति ख़राब हो चली है, क्योंकि पानी अस्पताल के भीतर तक घुस गया है।

मौसम विभाग का कहना है कि सोमवार (सितम्बर 30, 2019) तक राज्य में भारी बारिश जारी रहेगी। पटना जिले के सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। वहीं प्रशासन से नाराज़ लोगों ने सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधने के लिए जयशंकर प्रसाद की कविता ‘कामायनी’ की पंक्तियों को कुछ इस तरह से नया रूप दिया:

पाटलिपुत्र के उत्तुंग शिखर पर,
बैठ शिला की शीतल छाँह
एक पुरुष, उत्सुक नयनों से
देख रहा था प्रलय प्रवाह

(नोट- असली कविता में ‘पाटलिपुत्र’ की जगह ‘हिमगिरि’ है और ‘उत्सुक’ की जगह ‘भीगे’ है)

ये था सोशल मीडिया का रिएक्शन। अगर राज्य सरकार की बात करें तो वरिष्ठ अधिकारियों का यही कहना है कि सभी जिलों के प्रशासन को ‘किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने’ का निर्देश दे दिया गया है। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी के घर में भी पानी घुस चुका है। नीचे आप एक रिक्शे वाले का वीडियो देख सकते हैं, जो बाढ़ के कारण अपने जीवन-यापन का एकमात्र साधन यानी अपने रिक्शे को खींचने में असमर्थ होने के कारण रोने लगता है:

मुख्यमंत्री नीतीश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद कहा कि गंगा का जल-स्तर बढ़ रहा है और इसे रोकना किसी के भी हाथ में नहीं है, यह प्राकृतिक है। उन्होंने कहा कि लोगों को पीने का साफ़ पानी मुहैया कराने के लिए व्यवस्थाएँ की जा रही हैं।

मंसूर ने चचेरे भाई अमिनूल की हत्या कर लाश को टंकी में डाला, 3 साल बाद मिला कंकाल: हुआ गिरफ़्तार

महाराष्ट्र के पालघर ज़िले के वाडा थाना क्षेत्र में एक शख़्स ने अपने ही भाई की बेरहमी से हत्या कर दी और फिर उसकी लाश को शौचालय की टंकी में डाल दिया। तीन साल बाद उसी टंकी से उसका कंकाल मिलने से हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। जानकारी के अनुसार, आरोपित को पुलिस ने केरल से गिरफ़्तार कर लिया है। पता चला है कि दोनों भाई नौकरी के सिलसिले में असम से महाराष्ट्र गए थे।

ख़बर के अनुसार, वाडा थाने के उसर इलाक़े में फकरुद्दीन ख़ान चितवाला का एक फॉर्म हाउस है, जहाँ अमिनूल हक मोहम्मद मुनताज अली वॉचमैन के तौर पर नौकरी करता था। उसी फॉर्म हाउस के बगल में एक और फॉर्म हाउस है जहाँ उसका चचेरा भाई सुई मंसूर मोहम्मद अकबर अली काम करता था। 

दोनों भाई साथ में ही रहते थे, खाना-पीना भी साथ ही था। एक दिन अचानक किसी बात को लेकर उनके बीच आपसी झगड़ा हो गया। विवाद इस हद तक बढ़ गया कि मंसूर ने गुस्से में अपने ही भाई की हत्या कर दी। हत्या की बात छिपाने और सज़ा के डर से उसने अमिनूल की लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचा। 

ख़ुद को बचाने के लिए उसने भाई की लाश को शौचालय की टंकी में डाल दिया। अमिनूल के लापता होने पर उसके चाचा ने 28 दिसंबर 2016 को वाडा पुलिस स्टेशन में शिक़ायत दर्ज कराई। इस मामले की सूचना मिलने के बाद से ही पुलिस को मंसूर पर शक़ था। अपनी जाँच को उसने मंसूर पर ही केंद्रित कर रखा था। पुलिस को जाँच के दौरान यह भी पता चला कि मृतक की उम्र 17 साल थी। पुलिस ने 17 मार्च 2017 को अमिनूल के लापता होने के बजाए अपहरण का मामला दर्ज किया और केस पालघर के एटीएस को सौंप दिया।

ख़बर के अनुसार, पालघर के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने आतंकवाद और नक्सली दस्ते के प्रभारी मानसिंह पाटिल को जाँच के लिए निर्देशित किया था। आख़िरकार, हत्या की इस गुत्थी को सुलझा लिया गया। 

पादरी गिरफ़्तार, इलाज के नाम पर 21 साल की युवती को ‘सम्मोहित’ कर 1 साल तक करता रहा बलात्कार

मुंबई के वसाई क्षेत्र में एक पादरी को बलात्कार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। उसने 21 साल की एक युवती के इलाज के नाम पर पहले तो उसे ‘सम्मोहित’ किया और फिर उसका बलात्कार किया। युवती डिप्रेशन की समस्या से जूझ रही थी। ये मामला तब प्रकाश में आया, जब पीड़िता के एक रिश्तेदार ने आरोपित पादरी को युवती के साथ एक रिसोर्ट से निकलते हुए देखा। आरोपित पादरी को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

उक्त पादरी वसई में एक प्रार्थना सेंटर चलाता है और तरह-तरह के रोगों को ठीक करने के दावे करता रहा है। वह इसके एवज में रुपए लिया करता था। लोग उसके प्रेयर सेंटर में आकर प्रार्थना करते थे और फिर वहाँ उनका ‘उपचार’ किया जाता था। पीड़िता ने अगस्त 2018 से इस प्रेयर सेंटर में आना-जाना शुरू किया। तब उसके माता-पिता भी साथ में होते थे। पादरी युवती के माता-पिता को घर भेज दिया करता था और युवती को इलाज के बहाने अपने पास रख लेता था।

इसके बाद वह तरह-तरह के क्रियाकलापों द्वारा युवती को ‘सम्मोहित’ करता था और फिर उसका रेप करता था। कई मौक़ों पर वह युवती को लेकर अलग-अलग रिसॉर्ट्स में जाता था और वहाँ उसका यौन शोषण करता था। युवती जब घर लौटती थी तो अपने अभिभावकों को पादरी की हरकतों के बारे में नहीं बताती थी। जब युवती के एक रिश्तेदार ने दोनों को एक रिसोर्ट में साथ देखा, तब उसने इसकी सूचना पीड़िता के माता-पिता को दी। माता-पिता यह सब जान कर हैरान रह गए।

जब माता-पिता ने युवती से इस बारे में पूछताछ की, तब उसने पादरी की हरकतों के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने थाने में उक्त पादरी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। वसई कोर्ट ने आरोपित पादरी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आक्रोशित लोगों ने इस घटना की सूचना मिलते ही पादरी के प्रेयर सेंटर में तोड़फोड़ मचाया। फ़िलहाल 45 वर्षीय आरोपित पादरी के ख़िलाफ़ पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

यूपी, बिहार में इमरान खान पर मुकदमा, अक्टूबर में सुनवाई: दी थी J&K में खून-खराबे की धमकी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश और बिहार में मुकदमा दायर किया गया है। इन पर सुनवाई अक्टूबर में होगी। इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें सत्र में कश्मीर पर भड़काऊ बयानबाजी कर खून-खराबे की धमकी दी थी। मुकदमा इसी के बाबत दायर किया गया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सूर्यकांत तिवारी की अदालत में शनिवार (सितंबर 28, 2019) को वकील सुधीर कुमार ओझा ने इमरान के खिलाफ मुकदमा दायर। इसका आधार लोगों की भावनाएँ भड़काने को बनाया गया है। अदालत ने इसे मंजूर कर लिया है और सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की है। ओझा ने बताया कि मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (ए), 125 और 505 के तहत दायर की गई है।

वहीं, यूपी के महराजगंज सिविल कोर्ट के अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने 156(3) के तहत प्रार्थना-पत्र देकर मुकदमा दर्ज कराया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 9 अक्टूबर तय की है।

अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने बताया कि यह मुकदमा राष्ट्रद्रोह और दो वर्गों के बीच वैमनस्यता फैलाने के तहत दाखिल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने बयानों से भारत में हमेशा राष्ट्रद्रोह और दो वर्गों के बीच वैमनस्यता फैलाने का काम करते हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने शुक्रवार (सितंबर 27, 2019) को कहा था कि प्रतिबंध हटते ही जम्मू-कश्मीर में खूनखराबा होगा, खून की नदियाँ बहेंगी। प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि नस्लीय श्रेष्ठता की भावना और घमंड की वजह से आदमी गलतियाँ करता है और गलत निर्णय लेता है। इमरान ने वैश्विक मंच से खुलेआम कहा कि एक बार फिर भारत में पुलवामा जैसा हमला होगा। उन्होंने कहा कि एक और पुलवामा होगा और तब भारत पाकिस्तान पर आरोप लगाएगा।

जो कर्म से बड़े होते हैं, उनका आशीर्वाद ज़रूरी होता है: लता मंगेशकर ने PM मोदी से क्यों कहा ऐसा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार द्वारा ई-सिगरेट को प्रतिबधित किए जाने वाले निर्णय के बारे में समझाया। पीएम ने कहा कि भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध लगाया गया है ताकि नशे का यह नया तरीका हमारे युवा देश को तबाह न कर दे। उन्होंने देश की जनता से तम्बाकू का व्यसन छोड़ने और ई-सिगरेट के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की ग़लतफहमी न पालने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने आह्वान किया कि सभी को आगे आकर एक स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के बारे में भी बात की। उन्होंने लोगों से कहा कि वे वहाँ खुशियाँ बाँटें, जहाँ लोग हैं। पीएम मोदी ने ‘चिराग तले अंधेरा’ मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा कि हमारे आस-पास भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो त्योहारों की खुशियों से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने सक्षम लोगों से अपील करते हुए कहा कि उनके घर में जो भी चीज बहुतायत में हों, उन्हें जरूरतमंदों को दे दें। पीएम ने कहा कि हमारा स्वभाव इसी प्रकार का होना चाहिए।

पीएम मोदी शनिवार (सितम्बर 29, 2019) को अमेरिका दौरे से लौटे। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। लौटने के बाद उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल सैनिकों को सलाम किया क्योंकि उस दिन सर्जिकल स्ट्राइक के 3 साल पूरे हुए थे। आज रविवार को पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल के ‘मन की बात’ के तीसरे एपिसोड का प्रसारण हुए। शनिवार को ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर का भी जन्मदिन था। उन्होंने उनसे जुड़ा वाकया सुनाया।

दरअसल, पीएम मोदी ने अमेरिका दौरे पर जाने से पहले ही लता मंगेशकर को आगामी जन्मदिन की बधाई दे दी थी क्योंकि उस शनिवार को वह फ्लाइट में होते। जब लता मांगशकार ने फोन कॉल पर पीएम मोदी से कहा, “मैं यह जान कर काफ़ी ख़ुश हो गई थी कि आपका फोन आने वाला है। बस आपका आशीर्वाद चाहिए।” पीएम मोदी ने लता मंगेशकर को याद दिलाया कि वह बड़ी हैं, और आशीर्वाद देने का फ़र्ज़ उनका बनता है। इसके जवाब में वयोवृद्ध गायिका ने कहा, “उम्र में तो बहुत लोग बड़े होते हैं लेकिन जो कर्म से बड़े होते हैं, उनका आशीर्वाद मिलना ज़रूरी होता है।“

पीएम मोदी ने ‘Travel & Tourism Competitive Index’ की बात करते हुए कहा कि भारत ने अपनी स्थिति में बहुत सुधार किया है। उन्होंने बताया कि आज हमारी रैंक 34 है, जो 5 साल पहले 65 थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर और कोशिश की गई तो आजादी के 75 साल आते-आते भारत पर्यटन में दुनिया के प्रमुख स्थानों में अपनी जगह बना लेगा।


अब नहीं रुलाएगा प्याज: निर्यात पर रोक, केंद्र ने राज्यों से कहा- जितनी जरूरत हो ले जाएँ

प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केन्द्र सरकार ने बड़ा फ़ैसला लिया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने प्याज की निर्यात नीति में अगले आदेश तक संशोधन किया है। सरकार ने प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा था कि सरकार प्याज की क़ीमतों में कमी लाने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया था कि केंद्र ने अभी तक त्रिपुरा को 1,850 टन, हरियाणा को 2,000 टन और आंध्र प्रदेश को 960 टन प्याज तत्काल 15.59 रुपए/ किलो की दर से मुहैया करा दिया है। ये अधिकतम 23.90 रुपए/किलो की दर से उपभोक्ता को मुहैया कराएंगे। पासवान ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने 28 सितंबर से 5 दिनों के लिए प्रतिदिन 100 टन प्याज की माँग की है, जो पूरी की जाएगी। इसके अलावा, भी जिस राज्य को जितनी जरूरत होगी उतना प्याज मुहैया कराया जाएगा।

उन्होंने जानकारी दी थी कि 50 हज़ार टन का बफर स्टॉक उपलब्ध है, इससे मंडियों में आवक को बढ़ाया जा रहा है। देश के कई शहरों में प्याज का फुटकर दाम 70 से 80 रुपए प्रति किलो पहुँच गया है। इस बात को ध्यान में रख कर केंद्र सरकार प्याज व्यापारियों के भंडारण की सीमा तय करने पर विचार में है।

बुधवार (25 सितंबर) को जारी किए उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे शहरों में खुदरा प्याज का मूल्य 60 रुपए किलो है। वहीं, मुंबई में 58 रुपए किलो, चेन्नई में 42 रुपए किलो और कानपुर में 70 से 80 रुपए किलो में प्याज का मूल्य है।

प्याज की आसमान छूती क़ीमतों के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने शनिवार (28 सितंबर) को प्रदेश में प्याज की कीमत में हो रहे इजाफे को रोकने लिए विशेष प्रयास करने को कहा था। उन्होंने कहा था कि बिचौलिए किसी भी तरह से प्याज को अनाधिकृत रूप से स्टोर न करने पाएँ।

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र जैसे प्याज उत्पादक राज्यों के बाढ़ से प्रभावित होने के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। इसकी वजह से पिछले एक महीने से प्याज की क़ीमत में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है।