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‘भारत हिन्दू राष्ट्र है’ कहने पर मंजूनाथ की पिटाई: एक नाबालिग समेत मोइद्दीन और अब्दुल रहीम गिरफ़्तार

कर्नाटक के मंगलुरु में एक मॉल में युवक मंजूनाथ शिनॉय को पीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में युवक कथित तौर पर यह कहता नज़र आ रहा है कि ‘भारत एक हिन्दू राष्ट्र’ है। पुलिस ने इस मामले में मोइद्दीन सफ़वान, अब्दुल रहीम साद और एक नाबालिग के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है।

यह घटना शहर के फोरम फिज़ा मॉल की है। ऑपइंडिया ने स्थानीय पांडेश्वर पुलिस थाने में सम्पर्क कर इस पूरी घटना की जानकारी जुटाई। जानकारी के अनुसार यह घटना बुधवार सुबह की है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मॉल के फूड कोर्ट में दूसरे मजहब के युवकों का एक समूह बातचीत कर रहा था। उस समय, मंजूनाथ शेनॉय भी एक ग्राहक से मिलने के लिए मॉल में मौजूद थे और फिर वो बाद में फूड कोर्ट गए।

पुलिस ने आगे बताया कि मंजूनाथ ने उन युवकों के बीच चल रही चर्चा में की गई कुछ टिप्पणियों को सुना। इसके बाद वो प्रतिक्रियावश अपनी राय साझा करने के लिए आगे बढ़ा और कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र था। बस इसी बात पर दूसरे मजहब के युवकों का वह समूह नाराज़ हो गया और मंजूनाथ को चर्चा से दूर रहने के लिए कहा। लेकिन अचानक इनके बीच बहस छिड़ गई और मंजूनाथ पर गुस्साए छात्रों ने हमला कर दिया। घटना के बाद मंजूनाथ ने पांडेश्वर पुलिस स्टेशन में शिक़ायत दर्ज कराई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो को गंभीरता से लिया गया है और घटना की जानकारी देते हुए मंगलुरु पुलिस कमिश्नर ने बताया कि तीन आरोपितों की गिरफ़्तारी हो गई है। उन्होंने जानकारी दी कि नाबालिग आरोपित पर जुवेनाइल नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि उनके पास घटना से संबंधित पुख़्ता सबूत हैं।

ग़ौरतलब है कि दक्षिण कन्नड़ ज़िला, जिसका मुख्यालय मंगलुरु में है, वो साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, जहाँ अक्सर इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं। 2018 में विधानसभा चुनाव से पहले ज़िले में कई राजनीतिक हत्याएँ हुई थीं, जिनमें हिन्दू और दूसरे मजहब के लोग एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर हेट स्पीच को प्रसारित करने के आरोप में एक सितंबर को शहर में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार भी किया गया था। तब पुलिस ने ज़ाकिर उल्लाल को हिरासत में ले लिया था, जिसके मोबाइल फोन से सबूतों की बरामदगी भी हुई थी।

1.74 लाख ESIC में जबकि 86000 EPFO से जुड़े: जुलाई 2019 (सिर्फ 1 महीने) में रोजगार का आँकड़ा

देश में रोजगार नहीं है, आर्थिक मंदी से अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है… प्रोपेगेंडा के इन सब बातों के बीच एक आँकड़ा आया है। और ऐसा कहा गया है कि आँकड़े झूठ नहीं बोलते! तो आँकड़ा यह है कि देश में जुलाई महीने में कुल 1,74,831 नई नौकरियों के मौके पैदा हुए। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के ताजा आँकड़ों में यह जानकारी दी गई है। ईएसआईसी ने ये प्रेस रिलीज 20 सितंबर 2019 को जारी किया है।

ईएसआईसी के आँकड़ों के अनुसार, जून 2019 में कुल 12,49,394 लोग रजिस्टर्ड थे। जबकि जुलाई 2019 में यह आँकड़ा बढ़कर 14,24,225 हो गया। यानी जून की अपेक्षा जुलाई में 1,74,831 नई नौकरियों के अवसर पैदा हुए।

वहीं अगर अप्रैल 2018 से जुलाई 2019 तक की बात करें, तो कुल 1.49 करोड़ लोगों ने ईएसआईसी के साथ खुद को रजिस्टर किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2017 से मार्च 2018 के दौरान ईएसआईसी से 83.34 लाख नए सब्सक्राइबर्स जुड़े थे।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा जारी किए गए आँकड़े

ईएसआईसी के आँकड़ों के अलावा जुलाई 2019 में ईपीएफओ के साथ 11.61 लाख नौकरीपेशा लोग रजिस्टर्ड थे। जबकि जून में यही आँकड़ा 10.75 लाख लोगों का था। मतलब कुल 86,000 नौकरीपेशा लोगों ने सिर्फ जुलाई में खुद को ईपीएफओ के साथ रजिस्टर किया।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में करोड़ों कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया था। सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कर्मचारी राज्य बीमा निगम स्कीम में अंशदान की दर को 6.5% से घटाकर 4% कर दिया था। इसमें नियोक्ता का अंशदान 4.75 फीसदी से घटाकर 3.25 कर दिया गया था। वहीं कर्मचारियों के योगदान को 1.75 फीसदी से घटाकर 0.75 फीसदी कर दिया गया था। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी थी।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) पर जारी आँकड़ों की पूरी लिस्टआप यहाँ पर पढ़ सकते हैं।

5 सीट की लड़ाई में टूट गया महागठबंधन! कॉन्ग्रेस, RJD की बैठक तक नहीं, छोटे दल भी उतार रहे उम्मीदवार

बिहार में पाँच विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनावों में सीट के बँटवारे के कारण महागठबंधन खतरे में आ गया है। जानकारी के मुताबिक एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस चुनाव समिति ने विधानसभा की सभी सीटों पर खुद चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। वहीं, महागठबंधन की एक पार्टी वीआइपी ने सिमरी बख्तियारपुर की सीट से अपना उम्मीदवार उतारने की बात कर दी है और दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माँझी ने बुधवार को राजद पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए नाथनगर की सीट पर अपने उम्मीदवार अजय राय को लड़ाने का ऐलान किया है। जबकि रालोसपा इस जंग में पहले ही अलग रहने की जानकारी दे चुकी है, लेकिन किशनगंज की एक सीट कॉन्ग्रेस के लिए छोड़कर बाकी चारों सीटों पर राजद ने भी दावेदारी ठोंक दी है।

अब ऐसी उलझी राजनीति में राज्य के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ट्वीट करके गठबंधन पर चुटकी लेते हुए सभी पार्टियों को खरी खरी सुनाई है। उन्होंने ट्वीट करके कहा है कि महागठबंधन को बाँधने वाली गाँठे कितनी मजबूत हैं, इसका अंदाजा इसी से लग रहा है कि उपचुनाव की पाँच सीट आपस में बाँटने में ही टूट गई। ये 2020 में 243 सीटों पर कैसे फैसला कर पाएँगे? राजद पर निशाना साधते हुए सुशील मोदी ने कहा कि बड़े भाई बनने वाले दल ने सभी चार सीटें अपने नाम कर लीं और सहयोगी दलों को ठेंगा दिखा दिया, वहीं कॉन्ग्रेस है जो अपमान के घूँट पीकर भी लालू प्रसाद की बंधुआ मजदूर बनी हुई है।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को सदाकत आश्रम में कॉन्ग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह की अध्यक्षता में हुई चुनाव समिति की मैराथन बैठक में विधानसभा की सभी पाँच सीटों को तीन-तीन उम्मीदवारों के नामों का पैनल तैयार करके केंद्रीय चुनाव समिति को भेजने का फैसला लिया गया।

वहीं महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद पर आरोप लग रहा है कि उसने महागठबंधन के नेताओं के साथ औपचारिक बैठक और विमर्श किए बिना ही 5 में 4 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। जानकारी के मुताबिक राजद ने सिर्फ किशनगंज विधानसभा और समस्तीपुर लोकसभा सीट कॉन्ग्रेस के लिए छोड़ा है, बाकी और गठबंधन के किसी दल के लिए कोई सीट नहीं छोड़ी गई है।

अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर राजद का दावा है कि औपचारिक बैठक भले ही न हुई हो लेकिन सभी नेताओं से राय लेकर ही टिकट का बँटवारा हुआ है। यहाँ बता दें कि राजद ने जिन चार सीटों के लिए नाम तय किए हैं, उनमें नाथनगर सीट से रबिया खातून को उम्मीदवार बनाया गया है। सिमरी बख्तियारपुर से जफर आलम को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। दरौंदा विधानसभा की टिकट के लिए उमेश सिंह के नाम पर मुहर लगी है और बेलहर से रामदेव राय को पार्टी का टिकट दिया गया है।
 

2 महिला जज के साथ 3 जजों ने ट्रेनिंग के दौरान किया गलत व्यवहार, HC ने तीनों को किया निलंबित

झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राँची फैमिली कोर्ट के जज समेत 3 जिला जजों को निलंबित कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट ने इन तीनों जजों के खिलाफ गोपनीय रिपोर्ट मिलने के बाद निलंबित करने की कार्रवाई की है। निलंबित होने वाले जजों में हजारीबाग के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह, गुमला के जिला जज संदीप श्रीवास्तव और राँची फैमिली कोर्ट के जिला जज नलिन कुमार शामिल हैं।

राज्य में जिला जज रैंक के तीन अधिकारियों को एक साथ निलंबित किए जाने की यह पहली घटना है। बता दें कि, इन तीनों जजों के खिलाफ हाईकोर्ट में शिकायत की गई थी। हाईकोर्ट को तीनों जजों के खिलाफ अलग अलग रिपोर्ट सौंपी गई थी।

इन गोपनीय रिपोर्ट की शुरुआती जाँच के बाद इन पर लगे आरोपों को सही पाया गया और तीनों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के साथ ही तीनों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इसका जवाब मिलने के बाद हाईकोर्ट आगे की कार्यवाही करेगा।

दरअसल, राँची के ज्यूडिशियल एकेडमी में 21 व 22 सितंबर को रीजनल ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया था। इस प्रोग्राम में सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ ही कई राज्यों के जजों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान कार्यक्रम में पटना से भी दो महिला जज पहुँची थीं। 

इन दोनों महिला जजों ने झारखंड के तीन जिला के जजों पर गलत व्यवहार करने का आरोप लगाया और हाइकोर्ट से इसकी शिकायत की। जिसके बाद हाईकोर्ट ने जाँच करवाई। सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए। जाँच के दौरान आरोप सही पाए और तीनों जजों को निलंबित कर दिया गया।

कॉन्ग्रेस को लगा झटका, NRC के मुद्दे पर 10 नेताओं ने कर दी पार्टी छोड़ने की घोषणा

कॉन्ग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है। एक के बाद एक कई नेताओं ने पार्टी का हाथ छोड़ दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया है। इसी कड़ी में त्रिपुरा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत किशोर देबबर्मन के इस्तीफ़ा देने के बाद बुधवार (25 सितंबर) को 10 और नेताओं ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने यहाँ तक चेताया है कि वो जल्द ही एक नया राजनीतिक दल बना सकते हैं। यह नया राजनीतिक दल आदिवासी और ग़ैर-आदिवासियों के मुद्दों पर ध्यान देगा। 

नए राजनीतिक दल की संभावनाओं के विषय पर श्रीदाम देबबर्मन ने बताया कि अंतिम फ़ैसला प्रद्योत किशोर की सलाह के बाद लिया जाएगा। उन्होंने संभावना जताई कि अगर नई पार्टी अस्तित्व में आई तो अगले साल होने वाले एडीसी चुनाव में वो हिस्सा लेगी।

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के महासचिव दिनेश देबबर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

“हमने कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव लुइजिन्हो फ्लेरियो को त्रिपुरा में पार्टी की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया था। ऐसे हालातों में महाराज प्रद्योत किशोर के पास इस्तीफ़ा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।”

इस्तीफ़ा देने वाले नेताओं ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने फ्लेरियो के ख़िलाफ़ बातें लिखी थी। इस पत्र में नेताओं ने फ्लोरियो पर ग़ैर ज़रूरी हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया, इसी वजह से 2013 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम ने बड़े अंतर के साथ जीत हासिल की थी।

वहीं, प्रद्योत देबबर्मन का कहना था, “आलाकमान ने मुझे NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) के लिए त्रिपुरा में दायर एक याचिका वापस लेने के लिए कहा था, लेकिन मैं राज़ी नहीं हुआ।” पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का दावा था कि महाराज प्रद्योत को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि उन्होंने NRC लागू करने का माँग की थी और भ्रष्ट नेताओं के साथ किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया था।

दरअसल, त्रिपुरा के माणिक्य राजपरिवार से संबंध रखने वाले प्रद्योत देबबर्मन ने त्रिपुरा में NRC की समीक्षा की पैरवी की थी। उन्होंने इस संबंध में 22 अक्टूबर 2018 को शीर्ष अदालत में एक याचिका भी दायर की थी।

‘जो पति न हुआ, वह पिता कैसे होगा’ – अलका लांबा ने PM मोदी के ख़िलाफ़ उगला जहर

आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व नेता अलका लांबा ने मंगलवार (24 सितंबर) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का पिता’ कहा था।

दिल्ली के चांदनी चौक की पूर्व AAP विधायक लांबा ने ट्रम्प की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “जो पति न हुआ, वह पिता कैसे होगा?”

इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जो लोग अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को ‘भारत का पिता’ कहने में गर्व का अनुभव नहीं करते हैं, उन्हें ख़ुद को भारतीय नहीं मानना चाहिए।

उन्होंने कहा,

“जो लोग विदेश में रहते हैं, वे भारतीय होने पर गर्व करते हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और व्यक्तिगत आउटरीच के कारण हो रहा है… अगर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक स्पष्ट और निष्पक्ष दृष्टिकोण निकलकर बाहर आता है, तो मुझे लगता है कि अपने राजनीतिक संबद्धता के बावजूद, सभी भारतीय नागरिकों को इस पर गर्व महसूस करना चाहिए।”

इसके आगे उन्होंने कहा, “पहली बार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी प्रधानमंत्री की प्रशंसा के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। अगर किसी को इस पर गर्व नहीं है, तो शायद वह व्यक्ति ख़ुद को भारतीय नहीं मानता है।”

ग़ौरतलब है कि मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुआ उन्हें ‘भारत का पिता’ कहा था।

ट्रम्प ने कहा था कि वो निजी तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और वास्तव में उन्हें बहुत पसंद करते हैं। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी एक सज्जन और महान नेता हैं। उन्हें आज भी वो भारत याद है जो काफ़ी अस्थिर था, वहाँ काफ़ी मतभेद, लड़ाई थी, लेकिन वो (पीएम मोदी) सबको साथ लेकर आए। जैसे एक पिता सबको साथ लाता है, वो भारत के पिता हैं। इसलिए उन्हें हम ‘फ़ादर ऑफ़ इंडिया’ बुलाएँगे।

इससे पहले, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए उन्हें उन्हें ‘जहिल’ (अनपढ़) कहा था। ओवैसी ने यह भी कहा कि ट्रम्प ने इस तरह का बयान देकर महात्मा गाँधी की विरासत का अपमान किया और उन्हें भारतीय इतिहास के स्वतंत्रता संग्राम का कोई ज्ञान नहीं।

औवैसी ने कहा था, “मोदी राष्ट्र के पिता नहीं हो सकते क्योंकि आप उनकी तुलना महात्मा गाँधी से नहीं कर सकते। यहाँ तक ​​कि जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे दिग्गजों को इस तरह का ख़िताब नहीं दिया गया।”

‘ईसाई लड़कियों का धर्म परिवर्तन इस्लाम में नहीं बल्कि इस्लामी आतंक में शामिल करने के लिए’

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने ईसाई लड़कियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने गृहमंत्री का ध्यान ईसाई लड़कियों के साथ हो रही लव जिहाद की घटनाओं पर दिलाया है। कुरियन ने पत्र में लिखा है कि ऐसा लगता है कि ईसाई समुदाय की लड़कियाँ इस्लामी कट्टरपंथियों का सॉफ्ट टारगेट हैं। जिससे उन्हें लव जिहाद का शिकार बनाकर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए वह इस मामले में एनआईए जाँच का आदेश चाहते हैं।

इस मामले के संबंध में इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कुरियन ने बताया कि बहुत से ऐसे सुनियोजित मामले हैं, जहाँ ईसाई महिलाओं का धर्म परिवर्तन इस्लाम में या इस्लाम के लिए नहीं बल्कि इस्लामी आतंक में शामिल करने के लिए करवाया गया। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को आतंकी क्रियाकलापों के लिए वाहक की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिसका मुस्लिम समुदाय भी विरोध कर चुका है।

अमित शाह को लिखे अपने एक पेज के पत्र में कुरियन ने आगाह करते हुए बताया कि ये बहुत महत्तवपूर्व मुद्दा है, इसलिए गृह मंत्रालय इस खतरनाक प्रवृति पर ध्यान दे और इस मामले के संबंध में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को जाँच के आदेश दे। साथ ही कट्टरपंथी तत्वों की ऐसी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावी कानून लाए।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ने अमित शाह से ये गुहार 2 ईसाई परिवारों की शिकायत मिलने के बाद लगाई है। उन्होंने अपने पत्र में दो घटनाओं का हवाला भी दिया है।

पहली घटना दिल्ली की मलयाली ईसाई लड़की की है, जिसका कुछ समय पहले पश्चिम एशियाई देश में अपहरण हुआ था। इसमें लड़की के माता पिता का कहना है कि उन्हें डर है कहीं उनकी लड़की को गुमराह और दिमागी तौर पर परेशान किया गया हो।

वहीं, दूसरा मामला कोझिकोड का है। इस मामले में ईसाई कॉलेज की छात्रा के साथ पहले वीडियो बनाते हुए बलात्कार किया गया, और फिर बाद में धमकी देकर पीड़ित को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में पुलिस आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी है।

बता दें कि इन दो ईसाई परिवारों की शिकायत के बाद अमित शाह को लिखे गए पत्र में उपाध्यक्ष ने अमित शाह से कहा कि पिछले 7 साल (2005 से 2012) में 4 हजार ईसाई लड़कियाँ लव जिहाद का शिकार हुई हैं। इन सभी मामलों में पहले लड़की को प्यार के जाल में फँसाया गया और फिर जबरन उनका धर्मांतरण करवाया गया। अधिकतर मामलों में लड़की का ब्रेन वॉश हुआ।

उल्लेखनीय है कि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने पहले लव जिहाद के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है। लेकिन पहली बार है जब अल्पसंख्यक आयोग जैसे संस्था के उपाध्यक्ष ने लव जिहाद शब्द का इस्तेमाल किया है। उनके मुताबिक अल्पसंख्यक समुदाय मुस्लिमों के निशाने पर हैं।

कुरियन के अनुसार शिकायतकर्ताओं की आशंकाएँ गलत नहीं हैं, क्योंकि पूर्व में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें बताया गया था कि केरल से आईएस में शामिल होने वाले 21 लोगों में से 5 ईसाई धर्म से परिवर्तित किए गए थे।

धोखेबाज है मेहुल चोकसी, पूछताछ के लिए भारत स्वतंत्र: घोटाला के बाद जहाँ भागा, वहीं के PM ने ‘लतियाया’

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में आरोपित मेहुल चोकसी को लेकर एंटिगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने बड़ा बयान दिया है। गैस्टन ब्राउन ने मेहुल चोकसी को धोखेबाज करार देते हुए कहा है कि भारतीय जाँच एजेंसियाँ एंटीगुआ आकर मेहुल चोकसी से पूछताछ करने के लिए स्वतंत्र हैं।  

संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भाग लेने अमेरिका के न्यू यॉर्क पहुँचे गैस्टन ने कहा कि उन्हें चोकसी की करतूतों के बारे में पर्याप्त जानकारी मिली है। एंटिगुआ के प्रधानमंत्री ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “हमें बाद में जानकारी मिली कि मेहुल चोकसी एक धोखेबाज है, वह हमारे देश की बेहतरी के लिए कतई उपयोगी नहीं है। उसकी अपील समाप्त होने के तुरंत बाद उसे निर्वासित कर दिया जाएगा, भारतीय अधिकारी जाँच करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

बता दें कि मेहुल चोकसी ने एंटीगुआ के सिटिजनशिप बाय इनवेस्टमेंट प्रोग्राम का इस्तेमाल करते हुए एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी। पीएम ब्राउन ने ये भी बताया कि मेहुल चोकसी की वजह से कैसे उनके सिटिजनशिप बाय इनवेस्टमेंट प्रोग्राम को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी उनकी सरकार कुछ नहीं कर सकती है, क्योंकि मामला अदालत में चल रहा है। उन्होंने कहा, “एंटिगुआ में एक स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था है और मामला अदालत में चल रहा है, इसलिए हमारे पास कोई अधिकार नहीं है। हालाँकि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हम उसे भारत को जरूर प्रत्यर्पित करेंगे।”

गौरतलब है कि मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी ने फर्जी लेटर ऑफ अंडस्टैंडिंग्स के जरिए पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित बार्डी हाउस शाखा से करीब 14 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है। इस घोटाले का पर्दाफाश होने के तुरंत बाद मामा-भांजा देश छोड़कर भाग निकले। इसी दौरान चोकसी ने एंटिगुआ और बरबूडा की नागरिकता ले ली। इसी साल जून में उसने बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि वह एंटीगुआ में है और घोटाले से संबंधित जाँच में सहयोग करना चाहता है। हाल ही में गैस्टन ब्राउन ने मेहुल चोकसी की नागरिकता को रद्द करने का ऐलान किया था।

रतलाम में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर नाबालिग छात्रा से गैंगरेप, आरोपित फरार

14 वर्षीया नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार मामले में रतलाम की सैकड़ों किशोरियाँ उसे न्याय दिलाने सड़क पर उतर आईं। पीड़िता के समर्थन और आरोपितों की तुरंत गिरफ़्तारी के लिए हुए मार्च में लड़कियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए डीएम से मिलने की माँग की। बाद में एएसपी इंद्रजीत आर्य के समझाने पर ही मार्च का अंत हुआ। पीड़िता और आरोपित मध्य प्रदेश के St. Joseph’s Convent School के बताए जा रहे हैं।

वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बार-बार हुआ बलात्कार

बताया जा रहा है कि आरोपितों ने लड़की को धमकी दी कि उसके फ़ोटो और वीडियो वायरल कर दिए जाएँगे। इसी धमकी के बल पर उससे कई बार पैसे लिए जाने की भी बात सामने आ रही है। बताते हैं कि डरी हुई छात्रा उनका मुँह बंद रखने के लिए उनकी माँगें पूरी करने लगी।

उसके बाद आरोपितों में से एक ने 9 सितंबर 2019 को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे घर पर अकेली पीड़िता को कथित तौर पर फ़ोन कर उसके घर आने की बात कही। उसके बाद उसने और उसके दोस्त ने पीड़िता के घर में ही उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद उसे होटल बुलाकर भी वही घटना दोहराई गई।

जब पीड़िता की तबियत खराब होने लगी तो उसने अपने माता-पिता को बताया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिन्होंने आरोपितों के विरुद्ध बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत आपराधिक मामला औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाने में दर्ज कर लिया। दोनों आरोपितों की तलाश जारी है।

तेज बारिश में चलता रहा प्रदर्शन, स्कूल से निकाले जाएँगे दोनों छात्र

आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए विरोध प्रदर्शन करती छात्राएँ (तस्वीर साभार- पत्रिका )

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विरोध प्रदर्शन तेज़ बारिश के बावजूद जारी रहा। इस बीच स्कूल प्रबंधन का कहना है कि दोनों आरोपित छात्र कुछ दिनों से स्कूल से नदारद हैं। स्कूल ने उन्हें निष्कासित करने का निर्णय ले लिया है।

महबूबा मुफ़्ती का अजीत डोभाल के कश्मीर दौरे पर कटाक्ष: पिछली बार बिरयानी, क्या इस बार हलीम?

पीडीपी की मुखिया और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल के जम्मू-कश्मीर दौरे पर तंज कसते हुए पूछा है कि पिछली बार उन्होंने ‘बेचारे नादान’ कश्मीरियों के साथ बिरयानी खाते हुए फ़ोटो खिंचाई थी, तो क्या इस बार हलीम का इरादा है। वह 370 हटने के बाद वाले डोवाल के कश्मीर दौरे का ज़िक्र कर रहीं थीं। उस समय कश्मीर में स्थिति का जायज़ा लेने पहुँचे डोवाल ने स्थिति की सहजता का अंदाज़ा लगाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बातचीत की थी और खाना खाया था।

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NSA डोवाल सूबे के मौजूदा हालात का जायजा लेने और घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पर विचार-विमर्श के लिए जम्मू-कश्मीर पहुँच रहे हैं। इसके अलावा वे विभिन्न सरकारी योजनाओं को अमली जमा पहनाने की रणनीति भी तय करेंगे।

11 दिन का था पहला दौरा, जिहाद के गढ़ों में घूमे थे

अपने पिछले दौरे पर डोवाल घाटी में जिहाद के गढ़ों में ही मुख्यतः केंद्रित रहे थे। उन्होंने अनंतनाग, श्रीनगर, शोपियाँ जैसे अशांत रहने वाले इलाकों का दौरा किया था। बकरीद के मौके पर वह श्रीनगर में थे। NSA ने शहर के सभी महत्वपूर्ण इलाकों के अलावा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण जिलों पांपोर, बड़गाम, और दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और अवंतीपोरा का भी दौरा किया था।

उस दौरान 370 निष्प्रभावी होने और राज्य के दो केंद-शासित प्रदेशों में तब्दील होने के बाद से घाटी में हिंसक विरोध की आशंका बनी हुई थी । इसी के चलते सरकार ने इंटरनेट और फ़ोन लाइनों समेत नागरिक संचार के लगभग सभी माध्यमों को निलंबित कर रखा था और घाटी, जम्मू और लद्दाख में हज़ारों की संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल को तैनात कर दिया गया था। लेकिन अब धीरे-धीरे स्थितियाँ सामान्य होने की तरफ़ लौटने लगीं हैं।