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Editors Guild के शेखर गुप्ता को नहीं पता तेलंगाना-आंध्र में अंतर, Times Of India ने भी चलाई वही खबर

अपने आप को देश में पत्रकारिता, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता से लेकर राजनीति और देश में पढ़ने-लिखने से जुड़ी हर चीज़ का चौधरी मानने वाले सम्पादकों के समूह एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने आंध्र सरकार की आलोचना करने में बहुत बड़ी बेवकूफ़ी कर दी- आंध्र प्रदेश को तेलंगाना और आंध्र के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी को तेलंगाना का मुख्यमंत्री बता दिया। यही नहीं, देश के सबसे ज़्यादा छपने और पढ़े जाने वाले अख़बारों में से एक होने का दम भरने वाले Times Of India ने भी वही गलत खबर आगे बढ़ा दी- यानि देश के सबसे बड़े तोपची सम्पादकों, और ‘सबसे बड़े’ अंग्रेजी समाचारपत्र को चलाने वालों को या तो देश के मुख्यमंत्रियों के बारे में भी ठीक से जानकारी नहीं है, और या फिर एडिटर्स गिल्ड ने गलती की तो की, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ‘मालिक साहब’ लोगों से आई खबर को छापने से पहले पढ़ने तक की ज़हमत नहीं उठाई।

दो टीवी चैनलों पर अघोषित प्रतिबंध का आरोप

एडिटर्स गिल्ड ने अपने पत्र/बयान में आंध्र के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी पर दो तेलुगुभाषी टीवी चैनलों TV5 और ABN पर अघोषित प्रतिबंध का आरोप लगाया था। माना जाता है कि दोनों चैनल राज्य सरकार सरकार की आलोचना करने वाले थे। एडिटर्स गिल्ड ने इसे प्रेस की आज़ादी के खिलाफ बताया और आंध्र प्रदेश सरकार से इस मामले पर स्पष्टीकरण की माँग की। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने इन दोनों चैनलों के प्रसारण को रोकने वाला कोई आदेश दिया था, और अगर दिया था तो गिल्ड ने उसे हटाने की माँग की।

यहाँ तक तो बात सही थी, लेकिन गिल्ड ने गड़बड़ यह कर दी कि मूल बयान में आंध्र की जगह तेलंगाना लिख दिया, और उसी का सीएम जगन को बनाकर आलोचना शुरू कर दी।

इस बयान को गिल्ड के अध्यक्ष और द प्रिंट के सम्पादक शेखर गुप्ता के नाम से जारी किया गया है।

Times Of India ने भी बिना पढ़े बढ़ाया आगे?

यह अपने आप में इतनी बड़ी कोई बात न होती, लेकिन इसके बाद Times Of India ने जब उसी, इतनी ‘basic सी’ गलती को जस-का-तस दोहरा दिया तो यही चीज़ एक बड़ी भूल बन गई।

‘ये भी ‘tyranny of distance’ है क्या?’

Editors Guild पर तंज़ कसते हुए रिपब्लिक टीवी की दक्षिण भारत ब्यूरो प्रमुख पूजा प्रसन्ना ने कहा कि आंध्र और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों का नाम न पता होना अक्षम्य है। उन्होंने साथ ही तन्ज़ कसा कि क्या यह भी ‘tyranny of distance’ के चलते हुए है। गौरतलब है कि जब लिबरल गैंग को इस बात पर घेरा गया था कि वह दादरी मॉब लिंचिंग को लेकर असहिष्णुता का पुलिंदा गढ़ने में जुटा है, जबकि बंगाल में बशीरहाट दंगों जैसी इस्लामी भीड़ की दर्जनों घटनाओं पर उसका ध्यान नहीं जाता, तो लिबरल गैंग के पत्रकारों ने इस ‘tyranny of distance’ के पीछे छिपने की कोशिश की थी। बहाना दिया था कि चूँकि बंगाल और अन्य कई राज्य उनके चैनलों के दिल्ली स्थित मुख्यालयों से दूर पड़ते हैं, इसलिए वहाँ की खबरें ठीक से कवर नहीं हो पातीं। यह मज़हबी भेदभाव या सेलेक्टिवनेस नहीं, दूरी की मजबूरी (‘tyranny of distance’) है।

भारत लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष देश, संसद का अधिनियम मानना अनिवार्य: 370 पर मुस्लिम संगठन ‘इंडिया फर्स्ट’ का पत्र

देश के मुस्लिम बुद्धिजीवियों का एक समूह, इंडिया फर्स्ट, बुधवार (सितंबर 25, 2019) को जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संसद के फैसले के समर्थन में आगे आया है।

इंडिया फर्स्ट ने अपने एक पत्र के माध्यम से कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में अपने संविधान द्वारा शासित है। बिना किसी अपवाद के संसद का प्रत्येक अधिनियम मानना हम सभी के लिए अनिवार्य है। जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पर कोई समझौता या आत्मसमर्पण नहीं हो सकता है।” साथ ही इसमें कहा गया कि आपसी तालमेल और अंतर-व्यक्तिगत बंधन के नए पुलों के पुनर्निर्माण करने की आवश्यकता थी।

मुस्लिम संगठन फर्स्ट इंडिया द्वारा लिखा गया खत (फोटो साभार: ANI)

पत्र में कश्मीर घाटी में मौजूदा स्थितियों और प्रस्तावों के कारण पीड़ितों पर भी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें कहा गया है कि राजनीतिक बंदियों की जल्द रिहाई और पूर्ण सामान्य स्थिति की बहाली राष्ट्रविरोधी, और भारत विरोधी ताकतों को हराने के लिए सबसे अच्छा निवारक हो सकती है। जो पड़ोसी देश के साथ ही हमारे देश में भी सक्रिय हैं।

इस पत्र में कहा गया, “इन्सानियत, कश्मीरियत और सभी हिंदुस्तानी से ऊपर हमें समझ और अंतर-व्यक्तिगत बांडों के नए पुलों के पुनर्निर्माण के लिए स्थान और अवसर प्रदान करते हैं।” पत्र में लिखा गया है, “राजनीतिक नेतृत्व के साथ जुड़ाव, बेहतर मीडिया पहुँच, सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि और सामाजिक पदाधिकारियों के साथ परामर्श पूर्ण रूप से सामान्य स्थिति को बहाल करने की प्रक्रिया में तेजी ला सकता है।”

साथ ही फर्स्ट इंडिया ने पत्र में लिखा है कि कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान के नापाक मंसूबे को समझना चाहिए। उन्होंने हर कश्मीरी से अपील की है कि वो देश के तिरंगे को राष्ट्रवादी भावना के साथ ऊपर उठाएँ, क्योंकि देश के हर हिस्से में हर कश्मीरी का खुले हाथों से स्वागत किया गया है।

‘पश्चिम बंगाल में लागू होगा NRC, किसी भी हिन्दू को नहीं छोड़ना पड़ेगा देश’

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार (सितंबर 25, 2019) को पश्चिम बंगाल के लोगों को आश्वासन देते हुए बयान दिया कि राज्य में एनआरसी लागू होगा, लेकिन एक भी हिंदू को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने इस दौरान टीएमसी का जिक्र किए बिना एनआरसी पर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी बात की। उन्होंने बताया कि कुछ राजनैतिक दल आमलोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान महासचिव ने बताया, “भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि NRC को लागू किया जाएगा, लेकिन किसी भी हिंदू को देश नहीं छोड़ना होगा। प्रत्येक हिंदू को नागरिकता दी जाएगी।”

विजयवर्गीय ने लोगोंं को संबोधित करते हुए बताया कि वे जल्द ही संसद में नागरिक संशोधन विधेयक पेश करेंगे और इसके आधार पर एनआरसी पर जाँच शुरू होगी। उन्होंने लोगों से कहा, पश्चिम बंगाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू रह सकेंगे और बाकी अवैध प्रवासियों को बाहर किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में बंगाल में टीएमसी सरकार है। जिसने लोगों को राज्य में एनआरसी लागू नहीं करने का विश्वास दिया हुआ है, लेकिन बावजूद इसके राज्य में एनआरसी लागू होने की अटकलों के बीच सैकड़ों लोग जन्म प्रमाण पत्र और सरकारी दस्तावेज लेने के लिए बंगाल के तमाम अन्य हिस्सों में सरकारी तथा नगर निगम कार्यालयों के बाहर कतार में खड़े देखे जा रहे हैं। जिससे स्पष्ट है कि वो कहीं न कहीं राज्य में एनआरसी लागू होने की तैयारी में पहले से ही जुटे हैं।

PM मोदी ने तमिल में पत्र भेजकर कहा- Happy Birthday, तिहाड़ में बंद चिदंबरम ने कहा- अभिभूत हूँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को तमिल भाषा में पत्र लिख कर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी हैं। पी चिदंबरम के कहने पर उनके परिवार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस पत्र को शेयर किया। पत्र के साथ चिदंबरम का मोदी को जवाब भी आया। पी चिदंबरम का जन्मदिन पिछले सोमवार (सितम्बर 16, 2019) को था। कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएँ दी थीं। कॉन्ग्रेस के उनके साथियों ने भाजपा पर चिदंबरम को फँसाने का आरोप लगाया था।

पी चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा कि वह अपने जन्मदिन पर पीएम मोदी द्वारा बधाई पत्र पाकर अभिभूत हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने लिखा कि वह पीएम मोदी की इच्छा के मुताबिक जनता की सेवा करना चाहते हैं लेकिन उनकी राह में मोदी सरकार की जाँच एजेंसियाँ आ रही हैं। देखिए चिदंबरम का ट्वीट और पीएम मोदी द्वारा भेजा गया पत्र:

पी चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में अभी तिहार जेल में बंद हैं। इससे पहले उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया था। चिदंबरम ने ख़ुद के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि वह जल्द लौटेंगे।

Extramarital Sex को गैर क़ानूनी बनाना चाहती है सरकार, विरोध में सड़कों पर हज़ारों छात्र

इंडोनेशिया में consensual extramarital sex (आपसी सहमति से बने विवाहेतर यौन संबंधों) को क़ानूनी अपराध बनाने के लिए लाया जा रहा अधिनियम छात्रों के बीच रोष और हिंसा का कारण बन गया है। हज़ारों युवा सड़कों पर उतर कर इसका विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा समलैंगिक सेक्स, महिला की गर्भपात में सहायता को अवैध घोषित करने, राष्ट्रपति का अपमान करने को जुर्म बनाने और भ्रष्टाचार-विरोधी कानूनों को कमज़ोर करने की कोशिश का भी छात्र पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं। CNN के मुताबिक विरोध प्रदर्शनकारी राजधानी जकार्ता में इतनी बड़ी तादाद में मौजूद हैं कि करीब 18,000 पुलिस वाले केवल राष्ट्रीय संसद की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इन कानूनों की वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार संगठनों द्वारा आलोचना हो रही है।

एक हफ़्ते टले विधेयक

इतने विरोध प्रदर्शनों का कुल असर इतना ही पड़ा है कि सरकार ने इन कानूनों को पास कराए जाने को अगले संसद सत्र तक के लिए टाल दिया है, जब नई संसद का गठन और शपथ-ग्रहण होगा। लेकिन यह कोई बहुत बड़ी राहत नहीं है। अक्टूबर के प्रारंभ में ही नई संसद को शपथ लेनी है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इस कानूनों पर मत-विभाजन को फ़िलहाल टाल दिया है। इसके साथ ही उन्होंने यह माना कि प्रस्तावित विधेयकों के कुछ हिस्सों का “और गहराई से अध्ययन किए जाने” की आवश्यकता है। उन्होंने अपने कानून और मानवाधिकार मंत्री यासोना लाओली से जनता के विचार जानने को कहा है।

‘उपनिवेशी हैं वर्तमान कानून, अभी वाले हमारी जीवनशैली पर आधारित’

वहीं कानून और मानवाधिकार मंत्री लाओली का कहना है कि वर्तमान कानून उन्हें गुलाम बनाने वाली औपनिवेशिक ताकत डचों द्वारा दिए गए हैं। उनके 100 साल पुराने दंड विधान की जगह पर आ रहे नए कानून इंडोनेशिया के लोगों की वर्तमान जीवन शैली के अधिक करीब होंगे। यह प्रस्तावित नई दंड संहिता दशकों से बनाई जा रही है।

SC का फैसला मानने से इनकार: चर्च पर नियंत्रण को लेकर भिड़े जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स ईसाई

केरल के एक चर्च पर नियंत्रण को लेकर ईसाई समुदायों की लड़ाई खत्म होती नहीं दिख रही। एर्नाकुलम ज़िले के पिरवोम स्थित सेंट मेरी चर्च का संचालन हाथ में लेने के लिए जैकोबाइट ईसाई और ऑर्थोडॉक्स ईसाई एक-दूसरे से लड़ रहे हैं।

चर्च फिलहाल जैकोबाइट ईसाइयों के नियंत्रण में है। 3 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने चर्च का प्रशासन ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों को देने का निर्देश दिया था। इस आदेश के कारण 1,100 चर्च का नियंत्रण ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के पास चला गया था।

बुधवार (सितम्बर 25, 2019) को जब ऑर्थोडॉक्स ईसाई चर्च में पहुँचे और उन्होंने प्रार्थना के बाद चर्च का नियंत्रण अपने हाथ में लिया तो जैकोबाइट ईसाई समूह के लोग वहाँ पर पहुँच गए। कुछ मेट्रोपोलिटन पादरी उनका नेतृत्व कर रहे थे। वे सभी नारे लगा रहे थे और प्रार्थनाएँ कर रहे । वे हंगामा करते हुए चर्च के अंदर दाखिल हुए और में गेट पर ताला जड़ दिया। उन्होंने चर्च का नियंत्रण ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों को देने से इनकार करते हुए कहा कि सुलह के लिए बातचीत होनी चाहिए।

तनाव को देखते हुए चर्च के सामने भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड को भी मुस्तैद रखा गया है। चर्च कंपाउंड के गेट के सामने ऑर्थोडॉक्स गुट के लोग टेंट लगा कर डट गए और कहा कि अगर उन्हें आधिकारिक रूप से चर्च का नियंत्रण हस्तांतरित नहीं किया गया तो वे प्रदर्शन करेंगे। जैकोबाइट ईसाईयों ने कहा कि चर्च के 2500 श्रद्धालु हैं, उन सभी का आधिकारिक कब्रगाह भी यही पर स्थित है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों से बातचीत किए ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों द्वारा बाहर से अपने लोग बुला कर जबरन चर्च पर कब्ज़ा करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के 4 पादरी ही यहाँ आकर प्रार्थना कर सकते हैं, लेकिन वो यहाँ मेट्रोपोलिटन पादरियों के साथ बाहर के लोग लेकर आ धमके हैं। जैकोबाइट समुदाय के मीडिया इंचार्ज डॉक्टर कुरियाशोके ने कहा कि चर्च के हज़ारों श्रद्धालुओं को अपना घर छोड़ने को मजबूर किया जा रहा है। वहीं ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1934 में बने चर्च के संविधान के अनुसार फ़ैसला लिया है।

केरल में इस तनाव को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। राज्य में उपचुनाव होने हैं और नेतागण दोनों ही समुदायों की जनसंख्या को देखते हुए उन्हें अपनी तरह लुभाने में लगे हैं। जैकोबाइट पादरियों ने आरोप लगाया है कि ऑर्थोडॉक्स ईसाई मानवाधिकार उल्लंघन कर रहे हैं। जैकोबाइट ईसाई ने विरोध में धरना दिया, जिसमें केरल सरकार और विपक्ष के कई नेता शामिल हुए। जैकोबाइट धड़े ने आरोप लगाया कि ऑर्थोडॉक्स उनके मृत रिश्तेदारों की अंतिम क्रिया में भी बाधा पहुँचा रहे हैं और यहाँ तक कि मरे हुए लोगों को भी शांति से नहीं रहने दे रहे।

इसी मामले में केरल हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाते हुए यथास्थिति बहाल रखने का निर्णय दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उच्च न्यायालय को उच्चतम न्यायालय के आदेश के साथ छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोड़ा था कि केरल के जजों को यह बताया जाना चाहिए कि वे भी भारत के ही अंग हैं। एक बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद चर्च के ऑर्थोडॉक्स गुट ने परिवार की बात न मानते हुए जैकोबाइट पादरी से अंतिम क्रिया-कर्म की प्रक्रिया संपन्न कराने से मना कर दिया था, जिसके बाद दोनों गुट भिड़ गए थे।

तेल संयंत्रों पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने कहा- आतंकवाद से मुकाबले के लिए बढ़ाएगा भारत के साथ सहयोग

सउदी अरब ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का सहयोग करने की बात कही है। सऊदी अरब ने ये बातें अपने तेल संयंत्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमले के करीब दो सप्ताह बाद कही है। जानकारी के मुताबिक, अब सऊदी अरब आतंकी नेटवर्क तक धन को पहुँचने से रोकने के साथ ही खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी रोक लगाने में मदद करेगा।

सऊदी राजदूत डॉक्टर सऊद बिन मोहम्मद अल सती ने कहा, “सऊदी अरब और भारत आतंकवाद से लड़ने में घनिष्ठ रूप से एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं, जिसमें सूचनाओं और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान शामिल है।” 

बता दें कि, पिछले दो वर्षों में दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि सहित सुरक्षा के क्षेत्र में कई समझौते किए हैं। सऊदी राजदूत ने कहा, “सऊदी अरब आतंकवाद, आतंक के वित्तपोषण और चरमपंथ के खिलाफ वैश्विक अभियान की अगुवाई कर रहा है। हम आईएसआईएस का मुकाबला करने के लिए 68 देशों के मजबूत वैश्विक गठजोड़ के संस्थापक सदस्य हैं।”

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, भारत को एक घनिष्ठ दोस्त और ‘रणनीतिक साझेदार’ के रूप में महत्व देता है। दोनों देशों के बीच रक्षा तथा सुरक्षा सहयोग को और अधिक बढ़ाया जाएगा।

गौरतलब है कि, 14 सितंबर को सऊदी अरब स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल संयंत्र पर ड्रोन और मिसाइलों से सिलसिलेवार तरीके से हमले किया गया था। वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका गंभीर असर पड़ा था। इस हमले की जिम्मेदारी यमन के हूती आतंकी समूह ने ली थी।

भारत ने सऊदी अरब में तेल संयंत्रों पर हुए हमलों की सोमवार (सितंबर 15, 2019) को निंदा की और हर तरह के आतंकवाद का विरोध करने के अपने संकल्प को दोहराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “हम सऊदी अरब के अबकैक तेल संयंत्र और खुरैस तेल क्षेत्र में 14 सितंबर 2019 को हुए हमलों की निंदा करते हैं।”

क्या एक फोन कॉल के लिए जाएगी ट्रंप की कुर्सी: महाभियोग की प्रक्रिया शुरू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को इसका ऐलान किया। ट्रंप पर आरोप है कि अपने राजनीति प्रतिद्वंदी को दबाने के लिए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने विदेशी समकक्ष से मदद हासिल करने की कोशिश की।

मीडिया खबरों की मानें तो पेलोसी ने कहा कि ट्रम्प ने अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन को नुकसान पहुँचाने के लिए विदेशी ताकतों का इस्तेमाल कर अपने पद की शपथ का उल्लंघन किया। उन्होंने ट्रंप के ख़िलाफ़ इस महाभियोग का ऐलान करने के दौरान बताया कि ट्रम्प के कार्यकाल में हुई कार्रवाइयाँ राष्ट्रपति के उनके पद की शपथ के प्रति बईमानी, हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन और चुनाव की अखंडता के साथ विश्वासघात को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा, “इसलिए मैं घोषणा करती हूँ कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स महाभियोग की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर रहा है।”

इस विवाद के जड़ में एक फोन कॉल है। बताया जाता है कि इसी साल जुलाई में ट्रंप ने अपने यूक्रेनी समकक्ष व्लोदीमीर जेलेंस्की से बात की और उन पर जो बाइडन के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की जाँच शुरू करने का दवाब डाला। बाइडन के आगामी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार होने की संभावना जताई जा रही है। ट्रंप ने आरोपों का खंडन किया है। हालाँकि यह माना है कि उन्होंने अपने राजनैतिक प्रतिद्वंदी के बारे में यूक्रेन के राष्ट्रपति से चर्चा की थी।

गौरतलब है कि अमेरिका में आज तक कोई राष्ट्रपति महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए नहीं हटाया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हो सकता है। लेकिन, सीनेट में इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जहाँ रिपब्लिकन का पलड़ा भारी है।

हम पाकिस्तान से तो बात कर सकते हैं, लेकिन ‘टेररिस्तान’ से नहीं, जिहाद नीति नहीं हो सकता: विदेश मंत्री

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान से वार्ता करने के बारे में कहा कि हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में वैसे तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से ‘टेररिस्तान’ बन चुका है। उन्होंने पाकिस्तान पर कश्मीर में जिहाद का बाकायदा ‘उद्योग’ स्थापित करने का आरोप भी लगाया। “हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमें ‘टेररिस्तान’ से बात करने में समस्या है। और उन्हें (बात करने के लिए) पाकिस्तान होना पड़ेगा, टेररिस्तान नहीं।”

‘आतंक की फैक्ट्री केवल कश्मीर नहीं, पूरे हिंदुस्तान के लिए’

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे पर न्यूयॉर्क में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की 370 के मुद्दे पर जो प्रतिक्रिया आई, वह इसीलिए थी कि उसने जिहाद का पूरा उद्योग खड़ा किया था कश्मीर मुद्दे के जवाब में। वह यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से तो इसका निशाना केवल कश्मीर ही नहीं, पूरा हिंदुस्तान है।

उन्होंने हर बात पर कश्मीर को घसीटने के लिए भी पाकिस्तान को लताड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है हिंदुस्तान-पाकिस्तान बाकी हर बात पर सहमत हैं, उनके बीच बाकी के रिश्ते बहुत अच्छे हैं, और केवल कश्मीर ही दोनों के अच्छे संबंधों के बीच आता है। “हमारे ऊपर मुंबई हमला हुआ। मुंबई कश्मीर का हिस्सा नहीं है। तो अगर पाकिस्तानी जिहादी उन राज्यों और क्षेत्रों पर हमला कर सकते हैं, जो कश्मीर से बहुत दूर हैं, तो हमें यह मानना होगा ही कि यह समस्या (महज़ कश्मीर से) ज़्यादा बड़ी है।”

‘जिहाद आपकी नीति नहीं हो सकता’

जयशंकर से पूछा गया कि पाकिस्तान की जिहाद से लड़ने की बातों के बारे में उनकी क्या प्रतिक्रिया है, तो उन्होंने दोटूक पाकिस्तान पर खुद ही जिहाद को अपनी सरकारी नीति बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुद्दा महज़ कश्मीर नहीं, उससे बड़ा है। “पाकिस्तान को यह मानना होगा कि उन्होंने जो मॉडल अपने लिए बनाया है (जिहाद का), वह काम नहीं कर रहा है। आज की तारीख में आप जिहाद को सरकारी तंत्र की वैधता-प्राप्त नीति नहीं बना सकते। यह मुद्दे की जड़ है।”

NRC लागू हुआ तो मनोज तिवारी को छोड़नी पड़ेगी दिल्ली: पूर्वांचल वासियों को भगाना चाहते हैं केजरीवाल

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी में ठन गई है। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में NRC लागू होने के बाद तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी। जवाब में तिवारी ने कहा कि केजरीवाल पूर्वांचल से आए लोगों को दिल्ली से भगाना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि तिवारी असम की तरह दिल्ली में भी एनआरसी लागू करने की बात कई मौकों पर कह चुके हैं। इस संबंध में वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी पिछले दिनों मिले थे। उनका कहना है कि राजधानी में बहुत से घुसपैठिए हैं, जिन्हें बाहर किया जाना चाहिए।

इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा, ‘अगर दिल्ली में एनआरसी लागू हुआ तो सबसे पहले मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी।’ जवाब में तिवारी ने उनसे पूछा क्या बाहरी राज्यों के लोगों को दिल्ली छोड़ देना चाहिए?

तिवारी ने सीएम के बयान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या केजरीवाल दिल्ली में रह रहे देश के अन्य हिस्से के लोगों को विदेशी मानते हैं? उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल दूसरे राज्यों से आए लोगों को भगाना चाहते हैं तो उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि वह भी उन्हीं में से एक हैं। तिवारी ने दावा किया कि अरविन्द केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने पूछा कि एक पूर्व आईआरएस अधिकारी को नहीं पता कि एनआरसी क्या है?

केजरीवाल को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का समर्थक करार देते हुए तिवारी ने कहा वे इतना भी नहीं जानते हैं कि एनआरसी में विदेशी घुसपैठियों को चिह्नित किया जाता है। तिवारी ने कहा कि इस तरह के बयान देने वाले केजरीवाल को शर्म आना चाहिए और उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई हक़ नहीं है। तिवारी ने केजरीवाल को समझाते हुए कहा कि एनआरसी विदेशियों के लिए है। उन्होंने पूछा कि आखिर केजरीवाल पूर्वांचल के लोगों को भगाना क्यों चाहते हैं?

आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यूपी, राजस्थान, बिहार और ओडिशा से लोग रोजगार के लिए दिल्ली आते हैं और मनोज तिवारी ने एनआरसी वाला बयान देकर दिखाया है कि वे इन लोगों के विरोध में हैं। भारद्वाज ने कहा कि ये लोग चोर नहीं हैं, बल्कि दिल्ली के विकास में बराबर के भगोदर हैं। भारद्वाज ने कहा कि अगर एनआरसी लागू होता है तो इन लोगों को दिल्ली छोड़ कर जाना पड़ेगा।