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मुस्लिम युवक ने नौकरी दिलाने के बहाने दिल्ली में किया युवती का रेप, फिर जबरन कराया धर्मान्तरण

मुरादाबाद में युवती का धर्म परिवर्तन और बलात्कार का मामला सामने आया है। युवती ने दिल्ली के एक युवक पर आरोप लगाया कि उसने पहले उसका रेप किया और उसके बाद जबरन धर्म परिवर्तन कराया। सोमवार (सितम्बर 16, 2019) को एसएसपी के पास पीड़िता ने शिकायत की, जिसके बाद महिला थाना जाँच में जुट गई है। आरोपित युवक मुस्लिम समुदाय का है, जिसने पीड़िता को नौकरी दिलाने का झाँसा दिया और फिर उसे दिल्ली लेकर गया। वह 19 जनवरी 2019 को पीड़िता को दिल्ली लेकर गया था।

युवती ने कहा कि दिल्ली जाने के बाद आरोपित युवक ने उसके साथ रेप किया। इसके बाद जबरन उसका धर्म परिवर्तन करा दिया। युवती ने यह भी आरोप लगाया कि युवक के परिवार वालों ने पीड़िता से कुछ कागजातों पर भी हस्ताक्षर करा लिए। 13 अगस्त को मौक़ा मिलते ही वह वहाँ से भाग खड़ी हुई और मुरादाबाद पहुँची। उसने कहा कि युवक के परिवार वाले अभी भी उसके पीछे पड़े हैं।

पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि हाल ही में उक्त युवक को उत्तराखंड पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में गिरफ़्तार किया है। आरोपित के पिता का कहना है कि पीड़िता ने उनके बेटे के साथ निकाह भी कर लिया है लेकिन पीड़िता इससे साफ़ इनकार कर रही है। दोनों पक्षों को महिला थाना में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है।

पुलिस ने आरोपित युवक के परिवार से कहा है कि अगर दोनों का निकाह हुआ है तो वे उससे सम्बंधित दस्तावेज पेश करें। आरोपित मुस्लिम युवक दिल्ली के सिकंदरपुर क्षेत्र का निवासी है।

‘₹500 में बिक गईं कॉन्ग्रेस नेता’: तजिंदर बग्गा ने खोली रिया (असली नाम एंड्रिया डिसूजा) की पोल

दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सस्ते लिबरल ट्रोल रिया को ट्रोल करके उनकी पोल खोल दी है। दरअसल, तेजिंदर पाल ने सोशल मीडिया एक्टीविस्ट, एआईपीसी (All India Professionals’ Congress) की फेलोशिप मेंबर और कॉन्ग्रेस नेता रिया को एक मैसेज किया। बग्गा ने रिया को व्हाट्सएप मैसेज किया और कहा कि वो उनसे एक प्रमोशनल ट्वीट करवाना चाहते हैं। रिया ने इसके लिए हामी भर दी और इसकी कीमत पूछी। बग्गा ने रिया को प्रत्येक ट्वीट के लिए 500 रुपए देने की बात कही।

रिया इसके लिए भी तैयार हो गई और फिर उन्होंने वो ट्वीट भी कर दिया। बता दें कि बग्गा ने रिया को फ्लिटकार्ट सेल के बारे में ट्वीट करने के लिए कहा था। इसमें कहा गया था कि 24 सितंबर को फ्लिपकार्ट का स्थापना दिवस है और इस दिन से सेल शुरू हो रहा है। जबकि सच्चाई ये थी कि 24 सितंबर को फ्लिपकार्ट का स्थापना दिवस नहीं, बल्कि बग्गा का जन्मदिन था। रिया के ट्वीट करने के बाद बग्गा ने इसका खुलासा किया। जिसके बाद वो जमकर ट्रोल होने लगी। हालाँकि, रिया के इस ट्वीट से ये पता चल गया कि आजकल कॉन्ग्रेस की क्या स्थिति है? कितने सस्ते हो गए हैं लिबरल्स!

बाद में, रिया ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। फिल्ममेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने तंज कसते हुए कहा कि फिर तो रिया उन्हें ट्रोल करने के लिए लाखों रूपए लेती होंगी। बीजेपी नेता पुनीत अग्रवाल ने भी ट्वीट करने के लिए महज 500 रूपए में तैयार होने को लेकर खिल्ली उड़ाई।

वहीं एंकर और सिविल राइट एक्टिविस्ट शहजाद ने तजिंदर पाल सिंह बग्गा का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इससे कुछ लोगों की असली कीमत के बारे में पता चला गया। अभिषेक सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “दूसरों के ट्वीट को पेड ट्वीट कहने वाली पप्पू प्रोफेशनल कॉन्ग्रेस।” नीरज श्रीवास्तव ने लिखा, “अरबियन प्रिंसेस के ये दिन आ गए हैं कि 500 रुपए प्रति ट्वीट… तेजिंदर पाल बग्गा जी पैसा जरूर दे देना बेचारी को, नहीं तो भूखे-‘नंगों’ की आह लगेगी आपको।”

एक ने लिखा कि इसे 50 रुपए काट के देना तो वहीं, एक ने लिखा कि 500 रुपए में कॉन्ग्रेस की मीडिया पर्सन बिक गई। एक यूजर ने लिखा कि पैसे मिलने से पहले ही रिया ने ट्वीट डिलीट कर दिया। लगता है दीदी नाराज हो गई ज्यादा बेइज्जती होने से। एक अन्य ट्वीटर यूजर ने रिया को मजाक उड़ाते हुए लिखा, “बस 500…इससे ज्यादा तो मुझे मिल जाते हैं।”

बता दें कि रिया का असली नाम एंड्रिया डिसूजा है और इन्होंने एडल्ट फिल्म (‘कामसूत्र 3D’ और ‘फॉर एडल्ट्स ऑनली’) में भी काम किया है। इसके अलावा उन्होंने एक पाकिस्तानी सीरियल ‘माटी’ में भी काम किया है। वैसे, ये पहला मौका नहीं है, जब एंड्रिया ने अपना ट्वीट डिलीट किया है। एंड्रिया ने इससे पहले अपना ट्वीट तब डिलीट किया था, जब उन्होंने पाकिस्तान में दंगा भड़काने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया था।

Pak के ‘बिजली झटका’ मंत्री को कॉलर पकड़ शख्स ने माँगे अपने 22 लाख: देखें Video

गीदड़ भभकियाँ देकर भारत को डराने वाला पाकिस्तान इन दिनों किसी न किसी कारण से अपनी फजीहत करवाता ही रहता है। अभी कुछ समय पहले वहाँ की संसद में लात-घूँसे चलने की खबर आई थी, जिसने पाकिस्तान को सोशल मीडिया पर हँसी का पात्र बना दिया था और अब खबर है कि वहाँ के रेल मंत्री राशिद खान को एक व्यक्ति ने उसके पैसा न चुकाने पर संसद में घुसकर खरी खोटी सुनाई। जिसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख्स राशिद खान से बहस कर रहा है और उनसे बार-बार अपने पैसे माँग रहा है। जानकारी के मुताबिक इस शख्स का नाम नूर रहमान है। जो जापान से पाकिस्तान सिर्फ़ अपने 22 लाख रुपए लेने आया है। नूर का दावा है कि 15 साल पहले राशिद खान ने उनसे 22 लाख की गाड़ी खरीदी थी, जिसे जहाज की मदद से पाकिस्तान भी भिजवा दिया गया था। लेकिन, तब से लेकर अब तक आवामी लीग के नेता राशिद खान ने वो रकम नहीं लौटाई। अब वो इसे लेने ही वापस आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियो पाकिस्तान के पार्लियमेंट हाउस की है, जहाँ पर पाक मंत्री एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, कि तभी वहाँ नूर नाम के शख्स ने पहुँचकर राशिद खान का कॉलर पकड़ लिया और अपने बकाया पैसे देने की बात उठाई, लेकिन पाक मंत्री कैमरे के आगे नूर से बात करने से बचते नजर आए।

इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स पाकिस्तान का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं। साथ ही भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी इस पर चुटकी ली है। उन्होंने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा, “ये है पाकिस्तान की हालत! पाकिस्तान के रेल मंत्री (शेख़ राशिद अहमद)… जिनको कुछ दिनों पहले करंट लगा था। उन्होंने अपने कार का पैसा नहीं चुकाया है। जिससे पैसे लिए थे वो पाकिस्तान के संसद में आ कर मंत्री जी को घेर लेता है। हम्म… और ये चले थे पाउ, सवा पाउ के nuclear वॉर करने।”

गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है जब पाक मंत्री राशिद खान को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी वो एक रैली में भारत के खिलाफ़ उलटा-सीधा बोल रहे थे कि तभी उन्हें करंट ने जोरदार झटका मारा था। उस समय उन्होंने खुद को हँसी का पात्र बनता देख बोला था कि मोदी करंट लगवाकर मुझे बोलने से नहीं रोक सकते हैं।

इसके अलावा इससे पहले राशिद खान भारत पर पाव, सवा पाव वजनी परमाणु बमों से हमला करने की बात कही थी। जिसकी वजह से भी उनका पूरी दूनिया में मजाक उड़ा था।

सभी 6 बसपा विधायक कॉन्ग्रेस में: राजस्थान में इतिहास ने 10 साल बाद ख़ुद को दोहराया

राजस्थान में मायावती की बहुजन समाज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सभी 6 विधायकों ने कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया है। सोमवार (सितम्बर 16, 2019) देर रात राजस्थान के राजनीतिक पटल पर काफ़ी उठापटक हुई और विधानसभा में बसपा 6 से सीधा शून्य पर आ गई। इससे पहले राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार को बसपा बाहर से समर्थन दे रही थी। इससे पहले मार्च में भी 12 निर्दलीय विधायक कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। इस घटनाक्रम से राज्य में कॉन्ग्रेस नंबर गेम में मजबूत हुई है।

बसपा विधयकों ने सोमवार की रात 9.30 बजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाक़ात की। इसके बाद उन्होंने विधानसभाध्यक्ष सीपी जोशी को विलय से सम्बंधित पत्र सौंपा। जोशी की मंजूरी मिलते ही सभी बसपा विधायक राजस्थान यूनिवर्सिटी स्थित गेस्ट हाउस पहुँचे और उन्होंने विलय का औपचारिक ऐलान किया। हालाँकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट नहीं देखे गए। पायलट राजस्थान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं।

बसपा विधायकों ने कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए ऐसा किया है। उन्होंने पार्टी सुप्रीमो मायावती के फ़ैसले ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि एक तरफ़ तो बसपा ने कॉन्ग्रेस सरकार को समर्थन दिया हुआ है और लोकसभा में हमने उनके ख़िलाफ़ ही लड़ा। उन्होंने मायावती के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कॉन्ग्रेस में शामिल होने की घोषणा की।

सीएम गहलोत ने कहा: “स्थायी सरकार के लिए राज्यहित में बसपा विधायकों का यह फ़ैसला स्वागत योग्य है। उनकी भावनाएँ अच्छी हैं। हम सब मिलकर राजस्थान को विकास के नए पथ पर ले जाएँगे।” एक तरह से राजस्थान में इतिहास ने एक दशक बाद अपनेआप को दोहराया क्योंकि 2009 में भी अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री थे और तब भी उन्होंने बसपा के 6 विधायकों को कॉन्ग्रेस के पाले में लाया था। तब भी बसपा के खाते में 6 सीटें ही थीं।

विधायक राजेसंदर सिंह गुढ़ा ने कहा कि 10 साल पहले भी वे बसपा विधायक दल के नेता थे और तब भी उन्होंने राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाने के लिए क़दम उठाया था। उन्होंने कहा कि आज फिर हालात ऐसे ही हैं और इसीलिए फिर से वैसा क़दम उठाना पड़ा। एक अन्य बसपा विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना ने कहा कि लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ कर कॉन्ग्रेस और बसपा, दोनों दलों को हार मिली। उन्होंने आगामी पंचायत चुनाव का हवाला देते हुए वे बिना शर्त कॉन्ग्रेस में शामिल हुए हैं।

वहीं बसपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य प्रभारी को इस सम्बन्ध में कोई सूचना नहीं थी। दोनों ने कहा कि अगर उन्हें पता होता तो वे इसे रोकने की कोशिश करते। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि बसपा के बाद कॉन्ग्रेस की नज़र एकलौते रालोद विधायक पर है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि बसपा विधायकों को कॉन्ग्रेस में लाने में रालोद विधायक डॉक्टर सुभाष गर्ग की भी भूमिका रही है।

हिंदी बने पूरे देश की भाषा: जब गृहमंत्री रहते पी चिदंबरम ने की थी पैरवी, DMK भी थी साथ

भ्रष्टाचार के आरोपों में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम सोमवार को 74 वर्ष के हो गए। आज भले चिदंबरम हर बात पर मोदी सरकार को कोसते हों पर किसी वक्त हिंदी को लेकर उन्होंने ठीक वैसी ही लाइन ली थी, जैसा इस बार हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा था। दिलचस्प यह है कि जब चिदंबरम ने हिंदी की पैरवी की थी, तब वे भी केन्द्र में गृह मंत्री ही हुआ करते थे। अभी शाह के बयान से बिफरी डीएमके भी तब उनके साथ सरकार में शामिल थी।

शनिवार (सितम्बर 14, 2019) को हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा था कि देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा होने के कारण हिंदी राष्ट्र की एकता बनाने रखने में अहम योगदान दे सकती है। हालाँकि, शाह ने कहा कि भारत में बोली जाने वाली सभी भाषाओं का अपना अलग ही महत्व है, लेकिन हिंदी के रूप में एक ऐसी भाषा की ज़रूरत है जो वैश्विक स्तर पर देश की पहचान बने। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल करें, लेकिन हिंदी का इस्तेमाल कर सरदार और बापू के सपने को भी साकार करें।

अब आते हैं कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम के करीब 9 साल पहले हिंदी को लेकर दिए बयान पर। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। यूपीए सरकार में गृह मंत्री रहते चिदंबरम ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए हिंदी में भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि वो राजभाषा हिंदी को पूरे देश की भाषण बनाने की आशा रखते हैं। साथ ही उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को सम्बोधित करते हुए कहा था कि हिंदी को पूरे देश की भाषा के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। देखें वीडियो:

अब उन्हीं पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ‘हिंदी थोपे जाने’ की बात करते हैं और उनकी पार्टी के गठबंधन साथी स्टालिन हिंदी के ख़िलाफ़ बयान देते हैं। स्टालिन की डीएमके भी उस समय कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन में थी, जब चिदंबरम ने 2010 में हिंदी को पूरे देश की भाषा के रूप में विकसित करने की बात कही थी। तमिल अभिनेता कमल हासन कहते हैं कि कोई भी ‘शाह, सुल्तान या सम्राट’ हिंदी को पूरे देश की भाषा नहीं बना सकता। चिदंबरम की ही पार्टी के नेता सिद्दारमैया हिंदी के अमित शाह के बयान को एकता तोड़ने वाला बताते हैं।

चिदंबरम ने तब सरकारी दफ़्तरों में अधिकारियों के बीच पत्र-व्यवहार व अन्य संचार माध्यमों में भी हिंदी का इस्तेमाल किए जाने की पैरवी की थी। आज उनके बटे, उनकी पार्टी और उनके गठबंधन साथी शाह के बयान के ख़िलाफ़ ज़हर उगल रहे हैं। इससे तो यही माना जा सकता है कि सत्ता में रहने और न रहने पर कॉन्ग्रेस नेताओं की सोच समान विषय को लेकर भिन्न रहती है। या फिर यह भी हो सकता है कि अंधविरोध के इस दौर में वह ये नहीं देखना चाहते कि मोदी-शाह सही बोल रहे या ग़लत, सिर्फ़ विरोध करना जानते हैं।

अयोध्या मामला: ‘जब जन्मस्थान ही देवता तो फिर किसी का दावा नहीं बन सकता’

उच्चतम न्यायालय में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सोमवार को 24वें दिन की सुनवाई हुई। इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि पूरे जन्मस्थान को पूजा की जगह बताकर मुस्लिम पक्ष के दावे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ के समक्ष अपनी जिरह आगे बढ़ाते हुए कहा, “पूजा के अधिकार पर जो दलीलें रखी गई हैं, उससे लगता है कि वेटिकन पर केवल ईसाइयों का और मक्का पर केवल मुस्लिमों का हक है। पूरे जन्मस्थान को पूजा की जगह बताकर मुस्लिम पक्ष के दावे को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।”

धवन ने अपनी दलील रखते हुए कहा, “हिंदू पक्षकारों ने पूरे इलाके पर दावा कर दिया है। मेरी दलील है कि जन्मस्थान कानूनी व्यक्ति नहीं हैं। दुर्भाग्य से हाई कोर्ट जन्मस्थान वाली दलील में कूद पड़ा था। यहाँ भी जन्मस्थान वाली दलील में सुप्रीम कोर्ट पड़ गया है।”

इस मामले में हिंदू पक्षकार (रामलला विराजमान) की तरफ से आस्था व विश्वास के साथ-साथ जन्मस्थान और जन्मभूमि को लेकर दलील दी गई है। अगर हम इसे मूर्ति मानते हैं तो केस को आसानी से निपटाया जा सकता है। लेकिन अगर इसे जन्मभूमि माना जाता है तो फिर कोई कानूनी उपचार ही नहीं बच पाएगा।

मुस्लिम पक्षकार ने ‘जन्मस्थान’ की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जन्मस्थान ‘ज्यूरिस्ट पर्सन’ यानी न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता। राजीव धवन ने कहा कि जब जमीन यानी जन्मस्थान ही देवता हो गई, तो फिर किसी और का दावा ही नहीं बन सकता, इसलिए जन्मस्थान को इस उद्देश्य से पार्टी बनाया गया है।

उन्होंने दलील में यह भी कहा कि ‘जन्मस्थान’ को सदियों से विवादित स्थान पर होने की दलील देकर यह कोशिश की गई है कि उस पर न तो कानून के सिद्धांत ‘लॉ ऑफ लिमिटेशन’ लागू हो और न ही ‘एडवर्स पोजेशन।’ लॉ ऑफ लिमिटेशन के तहत किसी दीवानी मुकदमे में वाद दायर करने की समय सीमा तय होती है, जबकि ‘एडवर्स पोजेशन’ का मतलब होता है प्रतिकूल कब्जा।

मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से राजीव धवन ने संवैधानिक बेंच के सामने दलील पेश की। अगली सुनवाई कल यानी मंगलवार को होगी। वहीं अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अब्दुल नजीर की बेंच के सामने अयोध्या मामले की लाइव स्ट्रीमिंग का मुद्दा उठाया गया।

इस बीच फिर से मध्यस्थता की पहल शुरू करने की कोशिश भी शुरू हो गई है। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों की तरफ से पत्र लिखकर अपील की गई है कि वे कोर्ट के बाहर बातचीत के जरिए मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पहल भी की थी पर 155 दिनों की कोशिश असफल रही और अब मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

पिछले महीने 6 अगस्त से इस केस की रोजाना सुनवाई जारी है। 23 दिन की सुनवाई में हिन्दू पक्ष की दलील पूरी हो गई है। इस समय मुस्लिम पक्ष अपना दलील रख रहा है।

PM मोदी के जन्मदिन पर ‘बाहुबली’ प्रभास जारी करेंगे ‘मन बैरागी’ का पोस्टर, भंसाली हैं निर्माता

बाहुबली फ़िल्म सीरीज के मुख्य अभिनेता प्रभास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मंगलवार को संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ‘मन बैरागी’ का पोस्टर लॉन्च करेंगे। 1 घंटे की इस फ़िल्म को संजय लीला भंसाली ने स्पेशल फ़िल्म बताया है। वह इसके निर्माता हैं। प्रभास की बात करें तो अभी उनकी फ़िल्म साहो रिलीज के 10 दिनों के भीतर वर्ल्डवाइड 400 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर चुकी है। इस फ़िल्म में उनके अपोजिट श्रद्धा कपूर हैं। हालाँकि, फ़िल्म को समीक्षकों से नेगेटिव रिव्यूज मिले।

पीएम मोदी पर बन रही फ़िल्म ‘मन बैरागी’ की बात करें तो इसे बनाने को लेकर काफ़ी रिसर्च किया गया है। निर्माता संजय लीला भंसाली का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का जीवन सार्वभौमिक अपील रखता है और यह इस फ़िल्म को बनाने के पीछे का कारण था। भंसाली ‘देवदास’, ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘रामलीला’, ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ जैसी सुपरहिट फ़िल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। उनकी फ़िल्म गुजारिश बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने के बावजूद क्लासिक मानी गई थी।

हालाँकि, पीएम मोदी के जीवन पर विवेक ओबेरॉय अभिनीत फ़िल्म भी आई थी, लेकिन उसे दर्शकों एवं समीक्षकों ने पसंद नहीं किया था। प्रधानमंत्री मोदी पर बन रही नई फ़िल्म का पोस्टर ‘बाहुबली’ प्रभास 17 सितम्बर को जारी करेंगे। इसी दिन पीएम मोदी का 69वाँ जन्मदिवस भी है। भाजपा पीएम मोदी के जन्मदिन को ‘सेवा सप्ताह’ के रूप में मना रही है। भंसाली का कहना है कि इस फ़िल्म की यूनिवर्सल अपील होगी। भंसाली का कहना है कि पीएम मोदी के युवावस्था में कई ऐसे मोड़ आए, जिनसे वह प्रभावित हैं और उसे परदे पर उतारा जाएगा।

भंसाली ने कहा कि पीएम मोदी के बारे में जो कहानियाँ नहीं पता है, उसे जनता को बताना ज़रूरी है। फ़िल्म के सह निर्माता महावीर जैन ने कहा कि इसके जरिए पीएम मोदी के जीवन के उन हिस्सों को उकेरा जाएगा, जो अभी तक सार्वजनिक रूप से लोगों को नहीं पता है। उन्होंने कहा कि इससे आज के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी और यही फ़िल्म बनाने के पीछे का उद्देश्य भी है। हालाँकि, अभी फ़िल्म का रिलीज डेट तय नहीं किया गया है लेकिन कल मंगलवार (सितम्बर 17, 2019) को प्रभास इसका पोस्टर ऑनलाइन जारी करेंगे।

अपने फैंस के बीच ‘डार्लिंग’ और ‘रिबेल स्टार’ के नाम से लोकप्रिय तेलुगू अभिनेता प्रभास द्वारा पूरे भारत में लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बन रही फ़िल्म का पोस्टर जारी करना सिनेप्रेमियों के लिए एक बड़ा लम्हा होगा। पीएम मोदी दूसरी बार और अधिक बहुमत लेकर जीते हैं और इससे पता चलता है कि उनकी लोकप्रियता में और बढ़ोतरी हुई है।

₹20,000 में लोगों को बुड्ढा बनाकर विदेश भेजने वाला बिल्लू बार्बर गिरफ्तार

बीते दिनों दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से जयेश पटेल नाम का एक युवक पकड़ा गया। 32 साल का जयेश 81 साल के बुजुर्ग के गेटअप में था। वह बुजुर्ग का वेश बनाकर देश से अमेरिका भागने की फिराक में था। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शमशेर सिंह उर्फ बिल्लू बार्बर को पकड़ा है।

शमशेर ने ही जयेश का हुलिया बदला था। डीसीपी संजय भाटिया के अनुसार शमशेर रोहिणी में सैलून चलाता है। उसने एक एजेंट के कहने पर जयेश का लुक बदला था। जयेश के दाढ़ी और सिर के बाल बढ़वाए और उनमें सफेद रंग कर पगड़ी पहना दी। जीरो पावर का मोटे फ्रेम का चश्मा पहने जयेश को सफेद कपड़ों में ​व्हीलचेयर पर बैठकर एयरपोर्ट जाने को कहा था, जहॉं से वह पकड़ा गया।

पुलिस के मुताबिक शमशेर ने 10-12 लोगों का गेटअप बदलने की बात कबूली है। इसके बदले में वह हर व्यक्ति से 20 हजार रुपए लेता था। उसे कोर्ट के सामने पेश कर पुलिस ने एक दिन के रिमांड पर लिया है। इस गोरखधंधे में शामिल ट्रेवल एजेंट्स की भी तलाश की जा रही है। साथ ही उन लोगों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है जो इस तरीके से विदेश जा चुके हैं।

गौरतलब है कि जयेश ने बुज़ुर्ग के गेटअप में ही अपना पासपोर्ट बनवा रखा था। उसी पासपोर्ट से अमेरिका जाने की फिराक में था लेकिन 10 सितंबर को एयरपोर्ट पर पकड़ा गया। बोलने के लहजे और त्वचा देखकर सुरक्षा में लगे सीआईएसएफ अधिकारियों को उस पर शक हुआ था।

मोदी के ख़िलाफ़ बयानबाजी बंद करें इमरान ख़ान: मुस्लिम मुल्कों की पाकिस्तान को 2 टूक

कुछ प्रभावशाली मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान से कहा है कि वह भारत के साथ अनौपचारिक बातचीत का प्रयास करे। इन देशों ने प्रधानमंत्री इमरान खान से साफ़-साफ़ कहा कि कश्मीर मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए वह अपने भारतीय समकक्ष के खिलाफ अपनी भाषा में तल्खी को भी कम करे।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की ख़बर के अनुसार, 3 सितंबर को सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री आदिल अल जुबैर और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन अल नाहयान इस्लामाबाद दौरे पर अपने नेतृत्व और कुछ अन्य शक्तिशाली मुस्लिम मुल्कों की ओर से संदेश लेकर आए थे।

इन नेताओं ने पाकिस्तान से कहा कि वह भारत के साथ अनौपचारिक बातचीत करे। एकदिवसीय यात्रा पर उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से मुलाकात की। यह बातचीत बेहद गोपनीय थी और विदेश मंत्रालय के केवल शीर्ष अधिकारियों को ही उन बैठकों में जाने दिया गया।

सऊदी अरब और यूएई के राजनयिकों ने यह इच्छा जताई है कि पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव कम करने के लिए वे भूमिका निभाना चाहते हैं। इनमें से एक प्रस्ताव दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे से बातचीत का भी था।कथित मध्यस्थों ने यह इच्छा जताई कि कश्मीर में कुछ पाबंदियों में ढील देने के लिए वह भारत को राजी करना चाहते हैं, साथ ही पाकिस्तान से अनुरोध किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले बंद करे।

प्रधानमंत्री इमरान खान से कहा गया कि वह अपने भारतीय समकक्ष मोदी के खिलाफ जुबानी हमले कम करें। हालाँकि, पाकिस्तान ने उनके अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया और साफ किया कि वह भारत के साथ पारंपरिक कूटनीति तभी करेगा जब नई दिल्ली कुछ शर्तों पर राजी हो जाए। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने और संविधान के अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को खत्म करने के बाद से पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने राजनयिक संबंध सीमित कर दिए है।

उसके बाद से पाक पीएम ख़ान लगातार नरेंद्र मोदी पर हमलावर हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हालात को सामान्य करने की खातिर भारत के साथ पर्दे के पीछे से कोई कूटनीतिक बातचीत नहीं की जा रही है। ख़ान 19 सितंबर को दो दिवसीय दौरे पर सऊदी अरब जाएँगे, इस दौरान भी कश्मीर मुद्दा हावी रह सकता है।

शेख अब्दुल्ला ने लकड़ी तस्करों के लिए बनाया कानून, फॅंस गए बेटे फारूक अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को सोमवार को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शेख अब्दुल्ला को उनके आवास पर ही हिरासत में रखा गया है और उसे ही अस्थायी जेल बना दिया गया है। पीएसए के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।

दिलचस्प यह है कि पीएसए फारूक के पिता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने ही लागू किया था। लागू होने के बाद से ही यह कानून विवादों में रहा है। बताया जाता है कि यह कानून 1978 में शेख अब्दुल्ला ने लकड़ी तस्करों पर नकेल कसने के लिए बनाया था। आतंकवाद के दौर में कश्मीर में इस कानून का जमकर इस्तेमाल किया गया।

शेख अब्दुल्ला राजनीतिक पार्टी ‘ऑल जम्मू एन्ड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के संस्थापक थे। इस पार्टी को अब ‘जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC)’ के नाम से जाना जाता है। शेख अब्दुल्ला के बेटे फ़ारूक़ अब्दुल्ला और पोते उमर अब्दुल्ला भी राज्य के मुख्यमंत्री रहे।

वैसे, श्रीनगर से लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला 5 अगस्त से घर में नजरबंद हैं। उनके बेटे उमर भी उसी समय से हिरासत में हैं। इसी दिन कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले संविधान का अनुच्छेद 370 निरस्त किया गया था। हाल में, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों को फारूक और उमर अब्दुल्ला से मिलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस प्रतिबंध के साथ कि वे मुलाकात के बाद मीडिया के साथ बातचीत नहीं कर सकते।

अब फारूक अब्दुल्ला को जिस पीएसए एक्ट तहत हिरासत में लिया गया है उसमें किसी व्यक्ति को बिना मुक़दमा चलाए 2 वर्षों तक हिरासत में रखा जा सकता है। अप्रैल 8, 1978 को जम्मू कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट को राज्यपाल की मंजूरी मिली थी। इन क़ानून को मुख्यतः जम्मू-कश्मीर में लकड़ी तस्करी रोकने के लिए लाया गया था। उस दौरान शेख अब्दुल्ला राज्य के मुख्यमंत्री थे। इसके तहत 2 साल तक के लिए 16 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को बिना ट्रायल गिरफ़्तार किया जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा कई बार अलगाववादियों के ख़िलाफ़ पीएसए का इस्तेमाल किया गया। जुलाई 2016 में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कई लोगों ने घाटी में हिंसा भड़काने की कोशिश की थी। उस दौरान ऐसे लोगों को पीएसए एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया गया था। अगस्त 2018 में इस एक्ट में संशोधन कर के राज्य के बाहर के नागरिकों को भी इसके दायरे में लाया गया। इसके तहत ऐसे लोगों को गिरफ़्तार किया जाता है जो राज्य की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कार्य कर रहे हैं या फिर सार्वजनिक शांति को भंग करते हैं।

पीएसए के तहत हिरासत में लेने का आदेश डिविजनल कमिश्नर या डीएम दे सकते हैं। उन्हें इसके लिए सार्वजनिक रूप से कारण बताने की भी ज़रूरत नहीं है। शेख अब्दुल्ला सरकार द्वारा बनाए गए इस क़ानून की जद में आज उनके बेटे ही आ गए हैं।

मई 1946 में शेख अब्दुल्ला कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह के ख़िलाफ़ ‘क्विट कश्मीर’ आंदोलन भी चला चुके हैं। उन पर ‘संविधान सभा’ के चुनाव में धाँधली करने का भी आरोप है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी कह चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के लिए नेताओं को गिरफ़्तार पहले भी किया जाता रहा है। उन्होंने शेख अब्दुल्ला का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी 1953 में कई सालों के लिए गिरफ़्तार किया गया था।