Home Blog Page 5491

ज्योतिरादित्य सिंधिया का कमलनाथ सरकार पर हमला: बाढ़ के सर्वे पर उठाए सवाल, कहा- मैं संतुष्ट नहीं

कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर से इशारों ही इशारों में कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को नीमच और मंदसौर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कराए जा रहे सर्वे पर भी सवाल उठाए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रदेश सरकार (कमलनाथ सरकार) द्वारा किसानों के फसल को हुए नुकसान को लेकर जो प्राथमिक सर्वे कराए गए हैं, वो उससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक-एक तहसीलदार, एक-एक पटवारी वापस से अपने क्षेत्र में जाए और फिर से सर्वे करवाए और उसका जो भी आकलन होगा, वो जिला कलेक्टर के पास ले जाए।

सिंधिया ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान नयागाँव में कहा, “मैंने नीमच जिले के खेतों में सीने तक पानी भरा देखा है। अन्नदाता की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। मैं यह विश्वास दिलाता हूँ कि शासन-प्रशासन को मेरे अन्नदाताओं के साथ खड़े रहना ही होगा। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है, मैं हमेशा किसानों के साथ खड़ा हूँ।”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा, “मैंने मंदसौर, नीमच के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है जहाँ फसलें पूर्णतया बर्बाद हो गई हैं। प्रदेश सरकार से मैंने सर्वे करवाकर शत-प्रतिशत मुआवजा, राशि और केन्द्र सरकार से विशेष मेगा राहत पैकेज की माँग की है।”

सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जल्द ही एक-एक प्रभावित किसान के खाते में पैसे पहुँचाने शुरू करना चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार को भी बाढ़ प्रभावित किसानों और लोगों के लिए जल्द ही राशि स्वीकृत कर उसे जारी कर देना चाहिए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “सिंधिया परिवार का सदैव इस मालवा और निमाड़ की माटी से जुड़ाव रहा है, और मैं आपके बीच किसी राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि आपके परिवार के सदस्य होने के नाते आया हूँ। मैं आपको पूर्ण विश्वास दिलाता हूँ, आपके हक और न्याय की लड़ाई ज्योतिरादित्य सिंधिया लड़ेगा। फसल हानि के साथ जनहानि हो, पशुधन हानि हो, या मकान की हानि हो। हर एक व्यक्ति को पूर्ण रूप से मुआवजा दिलाना ही मेरा लक्ष्य रहेगा।”

तीन तलाक पीड़िताओं को योगी सरकार देगी हर साल ₹6000, विवाहेत्तर संबंध रखने वाले हिंदुओं पर भी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (सितंबर 25, 2019) को प्रदेश की महिलाओं एवं तीन तलाक पीड़िताओं के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने ऐलान किया कि पति द्वारा छोड़ दी गई मुस्लिम एवं हिंदू महिलाओं को सालाना ₹6000 दिया जाएगा। ये राशि महिलाओं को न्याय मिलने तक दी जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा लखनऊ के इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में आय़ोजित तीन तलाक पीड़ित महिलाओं से संवाद कार्यक्रम के दौरान की। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन तलाक की पीड़ित राष्ट्रीय महिला ख़िलाड़ी सुमेरा जावेद को नौकरी देने की भी घोषणा की। साथ ही सुमेरा को केस लड़ने के लिए निशुल्क सुविधा देने की भी घोषणा की गई।

इस दौरान सीएम योगी ने हिन्दू महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि शादी के बाद किसी दूसरी महिला से संबंध रखने वाले हिंदू पुरुषों पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हिंदू परित्यक्ता महिलाओं को भी ऐसा ही न्याय दिलाया जाएगा।

सीएम ने कहा, “एक शादी करके दूसरी पत्नी को रखने वाले हिंदू पति पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई करेंगे। परित्यक्ता महिलाओं के लिए भी न्याय देने की प्रक्रिया को उसी के साथ हम जोड़ेंगे, जिसमें हमने कहा था कि यह नारी गरिमा और उनके सशक्तिकरण से जुड़ी लड़ाई है।”

कार्यक्रम में ट्रिपल तलाक से पीड़ित महिलाओं को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा, “समाज का कोई हिस्सा या कोई भी व्यक्ति खुद को उपेक्षित व अपमानित महसूस न करे, इसके लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाएगी।”

उन्होंने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि आजादी के तत्काल बाद ही इस लड़ाई को लड़ना चाहिए था, लेकिन निजी स्वार्थ के लिए पिछली सरकारों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही तीन तलाक से मुक्ति दिला सकते थे। ऐसा करके उन्होंने नारी शक्ति को सम्मान दिया है। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में इस बात पर भी जानकारी दी गई कि बीते एक साल में 273 मामले ट्रिपल तलाक के आए हैं।

विज्ञान नहीं है पुरातत्व, राम मंदिर पर ASI की रिपोर्ट महज एक त्रुटियुक्त विचार: SC में वरिष्ठ वकील

राम मंदिर पर आज सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार ज़फ़रयाब जिलानी ने ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ का पक्ष रखा और वरिष्ठ वकील मिनाक्षी अरोड़ा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए अपनी बात रखी। जिलानी ने अदालत को बताया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड राम चबूतरे को जन्मस्थान नहीं मानता है। जिलानी ने कहा कि ऐसा हिन्दुओं की ही ऐसी आस्था है कि राम चबूतरा जन्मस्थान है, हमनें इसे स्वीकार नहीं किया है। जिलानी ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट जज ने कहा था कि चबूतरा जन्मस्थान है, हमनें अपनी ओर से ऐसा कभी नहीं कहा।

जिलानी ने सन 1862 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राम जन्मस्थान विवादित स्थल पर नहीं बल्कि कहीं और है। उन्होंने कुछ कागज़ात दिखाते हुए दावा किया कि यहाँ हिन्दुओं द्वारा पूजा नहीं की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि रामकोट किले को राम का जन्मस्थान माना जाता है। जब जज ने पूछा कि क्या वह मानते हैं कि राम का जन्मस्थान राम चबूतरे को माना जाता था, तो जिलानी ने कहा कि ऐसा हिन्दुओं का मानना है। जिलानी ने कहा कि मुख्य गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने की बातें 1989 के बाद की जाने लगी।

जिलानी ने कहा कि 1950 से 1989 तक फाइल किए गए किसी भी सूट में मुख्य गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने के जिक्र नहीं है। जिलानी द्वारा अपनी दलीलें ख़त्म करने के बाद अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने एएसआई की रिपोर्ट्स को लेकर अपनी बात रखी। अरोड़ा ने कहा कि एक अदालत ने 1863 में मंदिर की माँग को ख़ारिज करते हुए कहा था कि जब 350 सालों के बाद यथास्थिति को बदलना सही निर्णय नहीं होगा। अरोड़ा ने पूछा कि क्या अब 500 सालों के बाद यथस्थिति को बदल देना एक सही फ़ैसला होगा?

मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पुरातत्व कोई फिजिक्स या केमिस्ट्री जैसा विज्ञान नहीं है, यह सामाजिक विज्ञान है। अरोड़ा ने कहा कि कार्बन डेटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। अरोड़ा ने कहा कि चूँकि, आर्कियोलॉजी एक नेचुरल साइंस नहीं है, इसके रिपोर्ट्स में यथार्थता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पुरातत्व ने अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया है, जिसे वेरीफाई किया जा सके।

मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि पुरातत्व विशेषज्ञ सिर्फ़ अनुमान लगाते हैं, यथार्थ नहीं बताते। मीनाक्षी ने कहा कि अगर पुरातात्विक रिपोर्ट को ‘एक्सपर्ट ओपिनियन’ भी माने तो इसे एविडेंस एक्ट के सेक्शन 45 के तहत जाँचना ज़रूरी है। अरोड़ा के अनुसार, एएसआई के रिपोर्ट्स में कई त्रुटियाँ हैं, विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा कि यह एक कमज़ोर सबूत है, जो सिर्फ़ आर्कियोलॉजिस्ट्स के विचार भर हैं।

कमलनाथ राज में शौच के लिए गए 2 दलित नाबालिगों की पंचायत बिल्डिंग के सामने लाठी से पीटकर हत्या

कमलनाथ सरकार के प्रदेश से आज इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश के शिवपुरी में आज पंचायत घर के सामने कुछ लोगों ने दो दलित बच्चों को इतना पीटा कि अस्पताल तक पहुँचते हुए उनकी मौत हो गई।

घटना भावखेड़ी गाँव में बुधवार (सितंबर 25, 2019) की सुबह घटी। बच्चों का नाम रौशनी और अविनाश है। पुलिस के मुताबिक पूरी घटना के दौरान बच्चों को काफ़ी गंभीर चोटें आईं थी। जिस कारण उन्हें जल्दबाजी में अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे दम तोड़ चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक आरोपितों ने उस वक्त पूरी घटना को अंजाम दिया जब दोनों मासूम सुबह शौच के लिए खेत में गए। इसी दौरान इन लोगों ने 12 साल की रौशनी और उसके 10 वर्षीय भतीजे को लाठियों से पीट-पीट कर मार दिया।

पुलिस ने हत्या के मामले में जाँच के दौरान दोनों आरोपितों को गिरफ्तार करके बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए शिवपुरी भेज दिया है। दोनों बच्चे रिश्ते में एक दूसरे के बुआ-भतीजा लगते थे।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद आरोपित से जब पूछताछ हुई तो वो पागल होने का ढोंग करने लगा। उसने अपनी दरिंदगी के पीछे सफाई देते हुए बताया कि उसे रात में सपना आया था, जिसमें भगवान ने उससे कहा था राक्षसों का संहार करो। जिसके कारण उसने ये अपराध किया। आरोपित का नाम हाकिम यादव है और उसके साथी का नाम रामेश्वर यादव बताया जा रहा है।

फिर पाक के काम आई कॉन्ग्रेस: UNGA में बोले इमरान- कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी कहा कि लोग 50 दिनों से घरों में कैद

कश्मीर मसले पर भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस को ढाल बनाया है। जम्मू-कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद से बौखलाया पाक पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के विपक्षी दल के बयानों का हवाला दे चुका है।

इमरान ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को न्यूयॉर्क में 74वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र के मौके पर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “कश्मीर में अभी तक कर्फ्यू नहीं हटा है। यहाँ तक ​​कि भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी टिप्पणी की है कि गरीब (असहाय) लोगों को 50 दिनों से घरों में बंद कर दिया गया है। यह कोई नहीं जानता कि राजनीतिक कैदियों के साथ क्या हो रहा है।”

इससे पहले, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में पत्र लिख कर कहा था कि भारत वहाँ ‘अत्याचार कर रहा है’ और अपनी इस बात को साबित करने के लिए उसने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के बयानों का सहारा लिया था। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को भेजे पत्र में लिखा था कि भारत की मुख्यधारा के राजनेताओं ने भी ‘कश्मीर में हो रही हिंसा’ को स्वीकार किया है।

पाकिस्तान ने राहुल गाँधी का हवाला देते हुए उनके उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था, “जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्वतंत्रता और नागरिक आजादी पर अंकुश लगाए हुए 20 दिन हो गए हैं। लेकिन विपक्ष के नेताओं और मीडिया को जम्मू-कश्मीर के लोगों पर किए जा रहे कठोर बल प्रयोग और प्रशासनिक क्रूरता का अहसास तब हुआ, जब हमने शनिवार को श्रीनगर का दौरा करने की कोशिश की।”

पाकिस्तान द्वारा अपने बयान का इस्तेमाल करने के बाद राहुल गाँधी ने सामने आकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहाँ हो रही हिंसा के लिए पाक ज़िम्मेदार है। राहुल गाँधी ने ट्विटर पर लिखा कि पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद का प्रमुख समर्थक के रूप में जाना जाता है। साथ ही राहुल ने यह भी लिखा कि जम्मू-कश्मीर में होने वाली हिंसा के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। राहुल गाँधी ने कहा था कि वे केंद्र सरकार से कई मसलों पर मतभेद रखते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मामले में पाकिस्तान या किसी अन्य तीसरे देश को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

इस बार पाकिस्तान द्वारा कॉन्ग्रेस के बयान का जिक्र करने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इमरान खान पर निशाना साधते हुए कहा, “इमरान खान की क्या हैसियत जो हमारे देश के आंतरिक मामलों में बोले? वो अपना देश सँभाले। हम अपने प्रधानमंत्री की नीतियों से सहमत-असहमत होंगे, चर्चा करेंगे, सवाल उठाएँगे, उनसे जवाब माँगेंगे। देश के बाहर प्रधानमंत्री का प्रत्येक कदम देश का कदम होता है और कॉन्ग्रेस पार्टी उसके साथ है।”

चिन्मयानंद से ₹5 करोड़ मॉंगने का मामला: ​रेप पीड़िता गिरफ्तार, 7 अक्टूबर तक जेल भेज गया

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता चिन्मयानंद पर बलात्कार और यौन शोषण का आरोप लगाने वाली 23 वर्षीय कानून की छात्रा को बुधवार (सितंबर 25, 2019) विशेष जाँच टीम (SIT) ने ब्लैकमेलिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद छात्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। एसआईटी ने छात्रा को उसके घर से गिरफ्तार किया।

पीड़िता पर अपने दो भाइयों और दोस्त के साथ मिलकर चिन्मयानंद से 5 करोड़ की फिरौती माँगने का आरोप है। उत्‍तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद पर बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले लॉ की छात्रा को एसआईटी ने कथित तौर पर रंगदारी माँगने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी ने पिछले हफ्ते इस मामले में पीड़ित छात्रा के दोस्त संजय सिंह, उसके चचेरे भाई विक्रम और मौसेरे भाई सचिन सेंगर को गिरफ्तार किया था।

मामले की जाँच कर रहे एसआईटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि चिन्मयानंद को ब्लैकमेल करने के मामले में पीड़ित छात्रा की भी संलिप्तता मिली है। सबूत मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। नवीन अरोड़ा ने बताया कि छात्रा से मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को पूछताछ की गई थी। पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर मेडिकल जाँच कराया जा रहा है। 

हालाँकि, पीड़िता के वकील ने छात्रा को हिरासत में लेने की खबर को गलत बताते हुए कहा था कि उन्हें इस बाबत कोई नोटिस नहीं प्राप्त हुआ है और न ही उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की गई। उन्होंने पीड़िता की गिरफ़्तारी की खबर को भी गलत बताया था। बता दें कि, सोमवार (सितम्बर 23, 2019) को इलाहबाद हाई कोर्ट ने पीड़िता के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। जिस पर 26 सितम्बर को सुनवाई होनी है।

मजार में छिपा था दलित नाबालिग से रेप करने वाला मोहम्मद आदिल, पुलिस ने मुठभेड़ के बाद धर-दबोचा

उत्तर प्रदेश की कौशाम्बी में मुस्लिम युवकों द्वारा दलित नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया है। एक अन्य आरोपित नाज़िम को पहले ही ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। मोहम्मद बड़का और मोहम्मद आदिल उर्फ़ छोटका नामक 2 अन्य आरोपित फरार चल रहे थे, जिनकी धर-पकड़ के लिए पुलिस ने पाँच टीमें गठित की थी। इन दोनों के सिर पर 25,000 रुपए का इनाम भी रखा गया था। ये घटना सरायअकिल थाना क्षेत्र की है।

दूसरे आरोपित छोटका की गिरफ़्तारी पिपरी थाना क्षेत्र से हुई। घेराबंदी के दौरान आरोपित ने पुलिस पर पाँच राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी। आरोपित के पैर में गोली लगने के बाद वह घायल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसे धर-दबोचा। फ़िलहाल उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी प्रदीप गुप्ता ने ख़ुद पहुँच कर आरोपित से पूछताछ की। बता दें कि घोसिया गाँव में घास काटने गई दलित नाबालिग लड़की के साथ नाज़िम, बड़का और छोटका ने बलात्कार किया था।

पुलिस को ख़बर मिली थी कि आरोपित छोटका रावतपुर गाँव में छिपा हुआ है। इसके बाद चार थानों की पुलिस वहाँ उसे गिरफ़्तार करने पहुँचीं। आरोपित छोटका जंगल में स्थित एक मजार में छिपा हुआ था। जैसे ही पुलिस ने उसकी घेराबंदी की, वह तमंचे से गोलीबारी करने लगा। पुलिस सादी वर्दी में हथियारों से लैस होकर पहुँची थी। पहले तो ग्रामीणों को लगा कि गैंगवार जैसी कोई स्थिति उत्पन्न हो गई है लेकिन जैसे ही उन्हें असलियत पता चली, वे सभी पुलिस की तारीफ करने लगे।

आरोपितों के सर्विलांस के लिए विशेषज्ञों को लगाया गया था। उसकी लोकेशन पर नज़र रखी जा रही थी। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें आरोपित की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी दी। घायल आरोपित को स्थानीय अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में भर्ती कराया गया है और हॉस्पिटल की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। पुलिस के अलावा किसी को भी उससे मिलने की इजाजत नहीं दी गई है। पुलिस को इस बात का शक था कि आरोपित को गोली लगने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग हंगामा कर सकते हैं और शांति-व्यवस्था भंग हो सकती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस लगातार गश्त लगाती रही।

रेप पीड़िता ने साफ़-साफ कहा है कि जब तक आरोपितों को फाँसी की सज़ा नहीं मिल जाती, तब तक उसे शांति नहीं मिल सकती है। पीड़िता ने मदद करने वाले नेताओं व संगठनों को धन्यवाद करते हुए लोगों से आगे आने की अपील की। पीड़िता ने कहा कि वह ख़ुद क़ानूनी लड़ाई लड़ेगी। आरोपित की गिरफ़्तारी करने वाली टीमों को 25 हज़ार रुपए का इनाम भी दिया जाएगा। वहीं पीड़िता का हालचाल जानने के लगातार नेताओं की लाइन लगी रही। दलित सेना संगठन ने एसपी से मुलाक़ात कर आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

तीनों मुस्लिम युवकों द्वारा दलित नाबालिग का रेप किए जाने का वीडियो सोशल पर वायरल होने से रोकने की भी कोशिश की जा रही है। एसपी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वीडियो वायरल न किया जाए। साइबर सेल ने फेसबुक और ट्विटर को ऐसे एकाउंट्स को बंद करने के लिए उनका विवरण भेज दिया है। पुलिस ने कहा कि आगे से ऐसा करने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि रविवार (22 सितंबर) को एक 15 वर्षीय दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप कर उसका अश्लील वीडियो बनाया गया था। तीनों आरोपित लड़की को पकड़ कर झाड़ियों में ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान लड़की बार-बार दया की भीख माँगती रही, लेकिन आरोपितों ने उसकी एक न सुनी और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया।

आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस से इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने की माँग की थी। तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उच्चाधिकारियों ने गाँव में पहुँच कर ग्रामीणों को समझाया। कोतवाल मनीष पांडेय, दरोगा दिलीप गुप्ता और हेड कॉन्स्टेबल रामनाथ को आरोपतों पर कार्रवाई में ढिलाई करने पर एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया है।

बीवी के पासपोर्ट पर उड़ने की फिराक में थे पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री, इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर रोके गए

भारत को एयरस्पेस बंद करने की धमकी देने वाले पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री खुद ही उड़ान नहीं भर पाए। गुलाम सरवर खान को पासपोर्ट नहीं होने के कारण अधिकारियों ने इस्लामाबाद के एयरपोर्ट पर रोक लिया। उन्हें तुर्की जाना था। घटना सोमवार (सितंबर 23, 2019) की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान खान ने अपनी पत्नी का पासपोर्ट दिखाकर अधिकारियों को मनाने की कोशिश की। उनकी इस हरकत से हास्यास्पद स्थिति पैदा हो गई।

हालाँकि, इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों को तुरंत आदेश देकर उनके घर भेजा गया और यात्रा को ध्यान में रखते हुए समय से उनका पासपोर्ट मँगवा लिया गया। लेकिन, मामला सामने आते ही सोशल मीडिया में पाकिस्तानी नेता एक बार फिर से मजाक का केंद्र बन गए।

भारतीयों ने इस मामले में वहाँ की पत्रकार नायला इनायत के ट्वीट पर मंत्री की खूब चुटकी ली। महिला ढिंगरा नाम की यूजर ने कहा कि पाकिस्तान को मनोरंजन इंडस्ट्री की जरूरत ही नहीं हैं, क्योंकि इनका पूरा मंत्रालय ही काफी मनोरंजन कर देता है, और ये ऐसा सिर्फ़ ये पाकिस्तान के लिए नहीं करते बल्कि भारत के लिए भी करते हैं।

वहीं अभिषेक नाम के दूसरे यूजर ने कहा कि उन्हें इस बात की बिलकुल हैरानी नहीं होगी अगर पाक मंत्री शेख रशीद कल को ये कह दें कि पासपोर्ट गलती से अभिनंदन के पास चला गया। इसके बाद एक यूजर ने चुटकी लेते हुए सरवर खान को सलाह दी कि अगर उनके पास पासपोर्ट नहीं था तो वह हिजाब पहनकर निकल सकते थे।

रोहिंग्या से नेहरू तक, Howdy Modi पर लोगों ने अर्बन नक्सलियों के कुतर्कों को एक-एक कर काटा

अनुकरणीय क्या होता है? कुछ भी अच्छा जो दिख गया हो, उसके जैसा किया जा सकता है। हाल में जब ‘Howdy Modi’ कार्यक्रम बीता तो जमकर कुहर्रम मचा। पहले तो शोर इस बात पर था कि भला विदेश में किसी आयोजन से भारत का कौन सा भला होगा? अब मुट्ठी भर अभिजात्यों के नियंत्रण वाली खरीद कर इस्तेमाल होने वाली मीडिया का दौर तो रहा नहीं, सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने के लिए लोग स्वतंत्र हैं। सवाल के उठने भर की देरी थी कि #अभिव्यक्तिकीस्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हुए लोगों ने बता दिया कि भारत-वंशियों से कितना रेवेन्यु, कितनी आय भारत को भी होती है।

मामला सिर्फ इतने पर कैसे रुकता? अर्बन नक्सल गिरोहों ने हमले की दिशा बदली और कहने लगे कि अगर अमेरिका में रहने वाले भारतीय लोगों को ‘भारत माता की जय‘ कहने की छूट है, तो वही तर्क रोहिंग्या पर भारत में भी लागू होगा क्या? अब फिर से आम लोग इस बचकाने तर्क को तोड़ गए। प्रवासी, शरणार्थी और घुसपैठिये में अंतर होता है, ये हिन्दी बेचकर खाने वालों को तो बताया ही गया, अंग्रेजी वालों को भी इमिग्रेंट, रिफ्यूजी और इन्ट्रूडर का अर्थ समझाया जाने लगा। समस्या ये थी कि थोड़ी सी फजीहत पर जो मान जाए वो लिबटार्ड कैसा? इसलिए इतनी बेइज्जती पर उनका मन नहीं भरा था।

अंत में नेहरू को महान बताने वाले उनकी पार्टी के कुछ अंग्रेजीदाँ दां अभिजात्य लोग मैदान में उतरे। वो 1955 की रूस की इन्दिरा-नेहरू की तस्वीर को 1954 की अमेरिका की तस्वीर बताने लगे! कुछ लोगों ने ये भी ध्यान दिलाया कि पुराने कॉन्ग्रेसी जुमले “इन्दिरा इज इंडिया, एंड इंडिया इज इन्दिरा” को वो भूले नहीं है, उन्होंने इन्दिरा की वर्तनी इंडिया कर डाली थी! कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अनैतिक मार्केटिंग (अनएथिकल मार्केटिंग) के तीन “सी” (कन्विंस, कंफ्यूज, कर्रप्ट) का इस्तेमाल करने की पुरजोर कोशिश की गई और किसी तरह से इससे कुछ अच्छा न निकल जाए ये प्रयास हुआ।

अब बात चूँकि “अनुकरणीय” से शुरू हुई थी तो वापस वहीं पर आते हैं। पटना शहर में भी दूसरे कई बड़े शहरों की तरह आयोजन होते रहते हैं। जैसा कि दूसरी सभी जगहों पर भी होता ही है, वैसे ही यहाँ भी आयोजनों में मुख्य अतिथि होते हैं। उन्हें मंच पर सम्मानित करने के लिए किसी न किसी को बुलाया जाता है और वो “पुष्प-गुच्छ” से अतिथि का स्वागत करता है। मंच पर कुछ कुर्सियाँ लगी होती हैं, जहाँ ये अभिजात्य अतिथि और मुख्य अतिथि पूरे समय बैठकर वक्ताओं को सुन रहे होते हैं। आम लोग (मामूली मैंगो पीपल) इन अभिजात्यों से अलग कहीं नीचे कुर्सियों पर बिठाए जाते हैं।

अब अमेरिका के इस आयोजन को दोबारा देखिए। यहाँ मंच पर कोई कुर्सी नजर नहीं आएगी। अपनी बात ख़त्म करने के बाद वक्ता वहीं नीचे जाकर आम लोगों (मामूली मैंगो पीपल) जितनी ऊँची कुर्सियों पर बैठे। ट्रम्प मोदी जी के भाषण के समय नीचे बैठे थे और मोदी जी भी ट्रम्प के भाषण के समय नीचे ही थे। कोई कुर्सी और ऊँची जगह की लूट-पाट नहीं थी। कोई महँगे पुष्प गुच्छ नहीं दिए जा रहे थे! जहाँ तक पुष्प-गुच्छ का सवाल है, काफी पहले मोदी जी एक बार कह चुके हैं कि ये पुष्प आयोजन के बाद बेकार ही चले जाते हैं। इनके बदले किताबें दे देना बेहतर विकल्प है।

ऐसा भी नहीं है कि जिस विषय पर आयोजन हो रहा हो उस विषय की किताबें मौजूद नहीं हैं। अगर पानी जैसे मुद्दों पर बात हो रही हो तो अनुपम मिश्र की “आज भी खरे हैं तालाब” है, स्वच्छता इत्यादि पर “जल, थल, मल” मौजूद है, बाढ़ जैसे विषय हों तो डॉ. दिनेश मिश्र ने ऐसे मुद्दों पर किताबें लिखी हैं। शिक्षा जैसे मुद्दों पर “तत्तोचन” अच्छी किताब है, जंगल पर “द मैन हु प्लांटेड ट्रीज” दी जा सकती है।

सिर्फ थोड़ी सी मेहनत से 500-1000 रुपये के गुलदस्ते से कहीं बेहतर और उपयोगी चीज़ दी जा सकती है। हाँ इरादा राजनैतिक हो या अख़बारों में नेताजी या किसी बड़े आदमी को गुलदस्ता देते फोटो छपवाने का शौक हो तो और बात है। लालची लोगों से मेहनत की हम अपेक्षा भी नहीं रखते। बाकी “अनुकरणीय” के साथ सबसे बड़ी समस्या ये भी है कि लोग देखते हैं, तालियाँ बजाते हैं और आगे निकल जाते हैं। “अनुकरणीय” का सचमुच अनुकरण करने लायक “दम” किसमें है, और किसमें नहीं है, ये भी एक बड़ा सवाल है।

Father Of India हैं मोदी, उन्होंने भारत को एक किया, वह इस्लामिक आतंकवाद से निपट लेंगे: ट्रम्प

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘Father Of India’ शब्द का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी एक पिता की तरह भारत के लिए कार्य कर रहे हैं। यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली की बैठक से इतर ट्रम्प और मोदी की मुलाक़ात हुई। ये 3 दिनों में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाक़ात है। डोनाल्ड ट्रम्प ने टेक्सस के ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में भी शिरकत की थी और उन्होंने ख़ुद को भारत का सच्चा दोस्त बताया था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।

इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प की पाक पीएम इमरान ख़ान से भी मुलाक़ात हुई थी, जहाँ एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अपने देश और प्रधानमंत्री की बेइज्जती करा दी। ट्रम्प ने इमरान से पूछा कि आप ऐसे रिपोर्टर्स को कहाँ से ढूँढ कर लाते हो? वहीं दूसरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ट्रम्प ने कहा:

“पूर्व में मैं भारत के बारे में जो कुछ भी जानता था, मुझे लगता था कि वहाँ स्थिति अच्छी नहीं है और सबकुछ अलग-थलग है। वहाँ काफ़ी अनबन और लड़ाइयाँ होती रहती थीं। पीएम मोदी एक पिता की तरह सभी को साथ लेकर आए। पीएम मोदी ने चीजों को ठीक कर के एक अच्छा कार्य किया है। इसीलिए, मैं उन्हें ‘फादर ऑफ इंडिया’ कहता हूँ। वह एल्विस प्रेस्ले का भारतीय वर्जन हैं। लोग उन्हें बहुत प्यार करते हैं।”

ट्रम्प ने कहा कि पीएम मोदी ने जिस तरह से भारत को एक किया है, उनकी पहचान ‘फादर ऑफ इंडिया’ के रूप में होनी चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने मोदी की तुलना दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले गायक एल्विस प्रेस्ले से भी की। उन्होंने कहा कि ह्यूस्टन में पीएम मोदी का लोगों ने ऐसे स्वागत किया, जैसे लगा कि एल्विस प्रेस्ले लौट आए हैं। अभिनेता और गायक प्रेस्ले का 1977 में निधन हो गया था। अमेरिका से लेकर यूरोप तक धूम मचाने वाले इस गायक-अभिनेता को ‘किंग ऑफ रॉक’ कहा जाता है।

ट्रम्प ने कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पीएम मोदी इन चीजों को ‘देख लेंगे’। हालाँकि, ट्रम्प ने मोदी और इमरान के बीच बातचीत की पैरवी भी की और कहा कि अगर ये दोनों नेता साथ बैठते हैं तो कुछ अच्छे परिणाम निकलेंगे। बता दें कि इमरान ख़ान ने स्वीकार किया है कि पाक फ़ौज और आईएसआई ने अलकायदा के आतंकियों को प्रशिक्षित किया। जब ट्रम्प से पूछा गया कि पाक पीएम की इस स्वीकारोक्ति के बाद वह उन्हें क्या सन्देश देना चाहते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पीएम मोदी सन्देश देंगे।

ट्रम्प ने कहा कि पीएम मोदी ने काफ़ी स्पष्ट और जोरदार शब्दों में सन्देश दे दिया है। ट्रम्प ने कहा कि मोदी इन परिस्थितियों से निपट लेंगे। 40 मिनट तक चली इस बैठक में आतंकवाद और भारत-अमेरिका व्यापार को लेकर बातें हुईं। विदेश सचिव विजय गोयनका ने कहा कि पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद सम्बन्धी उन चुनौतियों के बारे में बताया, जिनका सामना भारत कर रहा है।

उन्होंने ट्रम्प को बताया कि भारत कभी भी बातचीत से पीछे नहीं हटा है। साथ ही पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प को आँकड़ों के माध्यम से समझाया कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की वजह से अब तक 42,000 लोग मारे जा चुके हैं।