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बॉम्बे हाईकोर्ट ने NGO पर विकास कार्य रोकने की मंशा के कारण लगाया ₹1 लाख का जुर्माना

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (16 सितंबर) को एक ग़ैर-सरकारी संगठन (NGO) की निरर्थक याचिका को ख़ारिज करते हुए एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माने राशि को दो सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधि सहायता सेवा में जमा करने का निर्देश दिया है।

ख़बर के अनुसार, NGO ‘अभिव्यक्ति’ का मुख्य कार्यालय रायगढ़ ज़िले में है। NGO ने पिछले साल अपने वकील सुभाष झा के मार्फत जनहित याचिका दायर की थी और यह दावा किया था कि नवी मुंबई का नियोजन निकाय शहर एवं औद्योगिक विकास निगम (CIDCO) आर्द्र भूमि में निर्माण का मलबा डाल रहा है। इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि खारघर के सेक्टर-18 और 19 में छ: हेक्टेयर के एक क्षेत्र में निर्माण मलबे और कूड़ा डाला जा रहा है, जहाँ तालाब और आर्द्रभूमि है।

इस पर निगम ने मुख्य न्यायमूर्ति नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ को बताया कि संबंधित क्षेत्र न तो आर्द्र ज़मीन है और न ही वहाँ कोई तालाब है। वह एक निजी ज़मीन थी जिसे राज्य प्रशासन ने निर्माण कार्य के लिए क़ानूनी रूप से ख़रीदी। वहाँ जो पानी है वह भारी बारिश के दौरान गड्ढों में एकत्रित पानी है।

इस पर पीठ ने कहा कि NGO ने शुरू में दावा किया था कि संबंधित क्षेत्र संरक्षित आर्द्रभूमि है और फिर उसने बताया कि यह प्राकृतिक जलाशय है। आख़िरकार उसने पीठ से कहा कि वह वर्षा जल से बना तालाब है। हालाँकि, सरकारी दस्तावेज़ो से साबित होता है कि वह इनमें से कुछ भी नहीं है। कोर्ट ने कहा, “हम मानते हैं कि जनहित याचिका निरर्थक है और हम जुर्माना लगाते हुए उसे ख़ारिज करते हैं।”

PAK सेना बलूचिस्तान में दुष्कर्म और निर्दोषों की हत्या के लिए कुख्यात: बलूच नेता

वैश्विक पटल पर मानवाधिकारों का हनन करने की घटनाओं के लिए पाकिस्तान लगातार घेरा जा रहा है। अभी कुछ दिन पहले धार्मिक स्वतंत्रता भंग करने के इल्जाम में UNPO के महासचिव ने उसके ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ में आवाज उठाई थी और अब बलूच नेता ने पाकिस्तानी फौज द्वारा बलूचिस्तान में किए जा रहे बर्बर अत्याचारों की पोल खोली है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मंगलवार (सितंबर 17, 2019) को बलूच नेता मेहरान मारी ने लंदन में पाकिस्तान के खिलाफ़ बयान देते हुए पाकिस्तानी फौजियों पर आरोप लगाया कि वो बलूचिस्तान में महिलाओं के साथ दुष्कर्म करते हैं और सरेआम बेगुनाह लोगों को गोलियों से छलनी कर देते हैं।

उनकी मानें तो पाकिस्तान फौज बलूचिस्तान में उसी नीति पर अमल कर रही है जैसे कि उसने बांग्लादेश में अपने ऑपरेशन के दौरान किया था।

अपने बयान में बलूच नेता ने बताया कि पाकिस्तानी फौज के सिपाहियों ने एक महीने के अंतराल में मरदान की एक महिला और ग्वादर की एक महिला के साथ दुष्कर्म किया है। और इसके लिए सिर्फ़ पाक सेना को दोषी ठहराया जाना चाहिए। चाहे पाकिस्‍तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा हों, परवेज़ मुशर्रफ हों अथवा पाकिस्तानी सेना का कोई दूसरा अधिकारी हो, सभी ने इंसानियत के खिलाफ अपराध किया है। इन सबके नेतृत्‍व में बेगुनाहों की जानें गई हैं।

उल्लेखनीय है कि ये पहला मौक़ा नहीं है जब मेहरान मारी ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बयानबाजी की हो, या फिर पाकिस्तान फौज के अत्याचार इस तरह उजागर किए गए हों। इससे पहले बलूच नेता कह चुके हैं कि पाकिस्तान, बलूचिस्तान में लगातार नरसंहार कर रहा है और मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति अशरफ गनी की चुनावी सभा में बम धमाका, 24 की मौत, दर्जनों घायल

अफ़ग़ानिस्तान में आतंकियों ने एक बार फिर से कहर बरपाया। राष्ट्रपति अशरफ गनी की रैली में हुए धमाके में 24 लोगों की जान चली गई और 30 से अधिक अभी भी घायल बताए जा रहे हैं। हालाँकि, अशरफ गनी सुरक्षित हैं और उन्हें किसी प्रकार की चोट नहीं पहुँची है। ये धमाका परवान प्रान्त की राजधानी चारिकार में हुए। तालिबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है। तालिबान ने कहा है कि उसने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। हालाँकि, घायलों में कई बच्चे भी शामिल हैं, जिससे आशंका है कि पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।

धमाके के समय अफ़ग़ान राष्ट्रपति घटनास्थल पर ही मौजूद थे। धमाका रैली स्थल के प्रवेश द्वार पर हुआ। अफ़ग़ानिस्तान में 28 सितम्बर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और अधिकतर रैलियों में अशरफ गनी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही जनसभाओं को सम्बोधित किया है। लेकिन, इस बार उन्होंने ख़ुद रैली में उपस्थिति दर्ज कराने का निर्णय लिया था और वे चारिकार पहुँचे थे। बताया जा रहा है कि बम को एक मोटरसाइकिल में रखा गया था।

धमाके के समय अशरफ गनी वहीं पर एक बिल्डिंग के भीतर मौजूद थे। मृतकों में अधिकतर आम नागरिक हैं। तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत ठप्प होने के कारण अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव पर तालिबानी ख़तरा मँडरा रहा है।

उधर काबुल के ग्रीन जोन में भी एक धमाका हुआ। यह धमाका नाटो मुख्यालय के क़रीब हुआ। तालिबान ने साफ़ कर दिया है कि वो जनता को राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डालने के लिए कहेगा। अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए देश भर में 70,000 से भी अधिक सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। कहा जा रहा है कि चुनाव के लिए 5000 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।

आपके पैदा होने पर कंडोम बनाने वालों ने आपके अम्मी-अब्बू से माँगी होगी माफी, Pak मंत्री को ऐसे पड़ी लताड़

बेहूदगी की हर पराकाष्ठा पार करते हुए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पाक मंत्री फवाद चौधरी ने एक बहुत ही बेहूदा ट्वीट किया। इस ट्वीट के साथ ही उन्होंने पूरे सोशल मीडिया पर अपनी किरकिरी करवा ली और उनके ख़ुद के मुल्क के लोग ही उनकी आलोचना करने लगे।

दरअसल, उन्होंने ट्विटर पर modibirthday के साथ लिखा कि आज का दिन हमें गर्भनिरोधक की इम्पोर्टेंस बताता है। जाहिर है उनका इशारा किस तरफ था। अब इससे पहले फवाद हुसैन को उनकी इस घटिया हरकत के लिए भारतीय आड़े हाथों लेते, खुद उनके मुल्क के लोगों ने ही उन्हें सुनाना शुरू कर दिया

किसी ने उन्हें कहा कि क्या तुम्हें दूसरा काम नहीं है, तो किसी ने उन्हें उनकी इस हरकत के लिए धिक्कारा भी। उनके पोस्ट पर तरह-तरह के मीम्स भी शेयर हुए। एक आयशा अहमद नाम की लड़की ने लिखा, “जहालत है, एक मिनिस्टर की सीट पर पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधि एक स्वतंत्र देश के प्रधानमंत्री को क्या कमेंट कर रहे हैं। इतनी दुश्मनी दिखानी है तो तकनीक में, लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा करो। बुरे अल्फाज में स्पर्धा करके विनर होना कोई सम्मान नहीं है मिस्टर मिनिस्टर।”

इसके अलावा तब्बस्सुम हयात के ट्विटर हैंडल से भी लिखा आया कि आपको कोई काम नहीं दिए हैं खान साहब (पाक पीएम इमरान खान) ने, जो सुबह-सुबह जाहिलों से ट्वीट स्टार्ट कर दिए काम पर जाओ…।

इस ट्वीट पर भारतीयों द्वारा भी उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई गई। उन्हें कहा गया कि उनके पास दिमाग बच्चों वाला है और पाकिस्तान ने उन्हें विज्ञान और तकनीक मंत्री बनाया हुआ है।

पत्रकार स्मिता शर्मा ने उनके इस बयान को घटिया करार देते हुए नसीहत दी कि कम से कम वो अपने मंत्री होने के पद का तो सम्मान करें।

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वहीं एक यूजर ने लिखा फवाद हुसैन साहब, मुझे यकीन है कि जब आप पैदा हुए होंगे, गर्भ निरोधक बनाने वालों की ओर से आपके अभिभावकों को माफीनामा मिला होगा। कृपया एक मंत्री की तरह बर्ताव करें, ये जरूरी नहीं कि आप हर रोज साबित करें कि आप एक पाकिस्तानी हैं।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है, फवाद इससे पहले चंद्रयान-2 को आधार बनाकर भी भारत पर निशाना साध चुके हैं। जिसके कारण उन्हें पाकिस्तान समेत पूरे विश्व से थू-थू मिली थी।

भगवा वस्त्र पहनकर लोग चूरन बेच रहे हैं, मंदिरों में बलात्कार कर रहे हैं: दिग्विजय सिंह

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह गाहे-बगाहे अपनी अभद्र टीका-टिप्पणियों के चलते आए दिन विवादों में घिरे रहते हैं। इसी कड़ी में एक बार फिर उनके बोल बिगड़ गए, जब उन्होंने भगवा वस्त्र पर निशाना साधते हुए यह तक कह डाला कि भगवा वस्त्र पहनकर लोग मंदिरों के अंदर बलात्कार कर रहे हैं।

दरअसल, मंगलवार (17 सितंबर) को भोपाल में संत समागम को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म सबसे पुराना धर्म है, इसके अलावा जितने भी धर्म हैं वो अलग-अलग विचारधारा के ज़रिए उत्पन्न हुए हैं। विश्व का सबसे प्राचीनतम धर्म सनातन धर्म है, जिसका कभी अंत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “आज भगवा वस्त्र पहनकर लोग चूरन बेच रहे हैं, भगवा वस्त्र पहनकर बलात्कार हो रहे हैं, मंदिरों में बलात्कार हो रहे हैं। क्या यही हमारा धर्म है? हमारे सनातन धर्म को जिन लोगों ने बदनाम किया है, उन्हें ईश्वर माफ़ नहीं करेगा।”

दिग्विजय सिंह ने इस कार्यक्रम की शुरुआत ‘जय सियाराम’ के नारे के साथ की थी, और भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि ‘जय श्रीराम’ का नारा कुछ राजनीतिक पार्टियों का है, इसलिए ‘जय श्रीराम’ के नारे की बजाए ‘जय सियाराम’ का नारा लगाना चाहिए।

वहीं, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि दिग्विजय सिंह कौन-सी मिशनरीज़ के एजेंडे पर खेल-खेल रहे हैं? हिन्दुओं और हिन्दुओं के संतो को अपमानित कर रहे हैं। अगर कोई अपराधी है या अपराध का आरोपी है तो उससे पूरा भगवाधारी संदिग्ध नहीं हो जाते। उन्होंने सवालिया होते हुए पूछा कि क्या मौलवियों और पादरियों की वेशभूषा पर भी दिग्विजय सिंह अपना कोई विचार प्रकट करेंगे?

इससे पहले भी दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि बीजेपी और बजरंग दल के लोग पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से पैसा लेते हैं। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने दिग्विजय सिंह के इस बयान से पल्ला झाड़ लिया था। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीएल पूनिया ने कहा था कि इस तरह के विवादित बयान दिग्विजय सिंह के व्यक्तिगत हो सकते हैं, इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। और अगर उन्हें ऐसा लगता है तो इस सन्दर्भ में सबूत पेश करें।

पुलवामा सरगना के सहयोगी जैश आतंकी सज्जाद, मुजफ्फर के खिलाफ NIA ने फाइल की चार्जशीट

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य सज्जाद अहमद खान समेत चार के खिलाफ चार्जशीट दायर किया है। एनआईए ने सोमवार (सितंबर 16, 2019) को दिल्ली की अदालत में चार्जशीट दायर कर उसमें दावा किया है कि गिरफ्तार आतंकी भारत के अलग-अलग शहरों में आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। इन शहरों में देश की राजधानी दिल्ली का नाम भी शामिल था।

इस चार्जशीट में सज्जाद अहमद खान के अलावा तनवीर अहमद गनी, बिलाल अहमद मीर और मुजफ्फर अहमद भट का नाम शामिल है। सभी पुलवामा के रहने वाले हैं। एनआईए का कहना है कि सज्जाद और मुजफ्फर अहमद भट जम्मू-कश्मीर में 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के सरगना मुदस्सिर अहमद खान का करीबी सहयोगी है। सज्जाद पर आरोप है कि पुलवामा अटैक में इसका बड़ा हाथ था। सज्जाद को दिल्ली की लाजपत राय मार्केट से पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

एनआईए ने जैश के चारों सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B और 121A और अनलॉफुल एक्टीविटीज(प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया है। जाँच एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि मुदस्सिर खान पुलवामा आतंकी हमले के पीछे का मास्टरमाइंड था, जो कि मार्च में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

एनआईए ने बताया कि तनवीर अहमद गनी और बिलाल अहमद मीर पुलवामा हमले के समान ही फिदायीन हमलों को अंजाम देना चाहते थे। सज्जाद अहमद खान के दो बड़े भाई भी जैश के आतंकवादी थे, जो सुरक्षा बलों के साथ दो अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे। दोनों भाईयों की मौत के बाद सज्जाद जैश ए मोहम्मद में शामिल हो गया और फिर दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में जैश के सदस्यों को प्रशिक्षित करने लगा। जाँच एजेंसी ने कहा कि तीनों भाई पहले पत्थरबाजी करने में शामिल थे।

बिरयानी बैन, सख्त लौंडे बनेंगे अब PAK खिलाड़ी: कोहली के चिप्स से आया मिस्बाह को आइ़डिया

वर्ल्ड कप को बीते महीनों हो चुके हैं, लेकिन पाक टीम के कप्तान सरफराज अहमद की वो उबासी और अन्य ख़िलाड़ियों की खराब फिल्डिंग अब तक पाकिस्तान के सीने में दुख का कोलेस्ट्रोल बढ़ा रही है। हर ओर से मिली निंदा और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को जिस तरह जख्मी किया था, उससे ही कयास लगाए जा रहे थे कि अब वो सख्त लौंडे की पॉलिसी अपनाकर खुद को दोबारा खड़ा करेंगे। लेकिन इसके लिए जरूरी था कि वो रात को बर्गर पार्टी करने से बचें और खुद की टीशर्ट के साइज को कम करने पर ध्यान लगाएँ।

हालाँकि, इस असंभव कार्य को संभव बनाने के लिए टीम के पूर्व कोच मिकी आर्थर ने अथाह कोशिशें कीं, लेकिन अफसोस वो नाकाम रहे। सूत्रों की मानें तो मिकी ने पहले बहुत सोचा कि वो इस टीम को सही दिशा पर कैसे लाएँ और कैसे एक मजबूत टीम बनाएँ। तभी उन्हें अचानक महसूस हुआ कि जिस टीम में वो संभावनाएँ तलाश रहे हैं उनके बड़े बुजुर्ग तो इमरान खान जैसे राजनेता, शाहिद अफरीदी जैसे लेखक और जावेद मियानंद जैसे पूर्व क्रिकेटर हैं, जो भारत को बल्ले से उड़ाने की बात करते हैं। जिसका मतलब है…??? इनका कुछ नहीं हो सकता, इनमें वो जीन्स ही नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इसी ख्याल के बाद उन्होंने तुरंत टीम को अलविदा कह दिया और एक गहरी साँस ली।

अब टीम की जिम्मेदारी आई नए हेड कोच मिस्बाह-उल-हक पर। पहले तो मिस्बाह इस बात पर उलझे रहे कि उन्हें पूर्व कोच मिकी आर्थर जितनी सैलरी ही चाहिए, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने मुल्क में नान-टिमाटर पर हुई बैठक के बारे में सुना, उन्होंने खुद की इच्छाओं को एक पल के लिए समझाते हुए पीसीबी से सहमति बना ली। इधर पीसीबी ने भी अपनी चालाकी दिखाते हुए मिस्बाह के आगे शर्त रख दी कि पहले वो पाकिस्तान को भारतीय टीम जैसा मजबूत बनाएँ तो वो इस माँग पर विचार करेंगे, जिसके बाद तय हो गया कि मिस्बाह की माँग अनिश्चितकाल तक के लिए इंतजार के झोले में टँग गई है।

अब यहाँ, मिकी आर्थर जितनी सैलरी पाने के लिए मिस्बाह दिन रात अपने प्रयासों में जुट गए। वो हर लाइन और हर प्वाइंट पर अपनी गणित लगाते रहे, लेकिन उन्हें कोई हल नहीं मिला। 10 दिन के अंदर टीम की हालत देखकर उनकी हालत इतनी पस्त हो गई कि उन्हें अवसाद घेरने लगा, तभी उन्हें यूट्यूब स्क्रॉल करते-करते विराट कोहली की एक चिप्स खाती वीडियो दिखाई दी, इस वीडियो में विराट अपने नाराज प्रशंसकों को बताते नजर आ रहे थे कि वो जो चिप्स खाते हैं, वो सिर्फ़ चिप्स नहीं है बल्कि मल्टीग्रेन चिप्स है, जो बेक्ड होती, तली हुई नहीं। इसलिए इससे उनकी फिटनेस पर कोई नुकसान नहीं पड़ेगा, उनके फैन बेफिक्र रहें।

विराट की ये वीडियो भले ही उनके प्रंशसकों को समझाने के काम आई हो या न आई हो, लेकिन इस वीडियो ने मिस्बाह को एक मूलमंत्र दे दिया कि तेल को कहकर ‘नो’ पाक टीम को कहें ‘गेट सेट गो’।

उन्हें सरफराज की रनिंग से लेकर उनकी कीपिंग तक का एक-एक क्षण याद आने लगा, उन्हें अहसास हो गया गलती कहाँ हो रही है। जीत की छिपी नस को उभारने की आड़ में अपनी सैलरी मिकी आर्थर जितनी करवाने के लिए उन्होंने एक कड़ा फैसला लिया और घोषणा कर दी कि वो अपने कप्तान को ही नहीं पूरी टीम को विराट जैसा बनाएँगे। लेकिन इसके लिए टीम को अब कोई तेल वाला खाना नहीं मिलेगा। इस सूची में भी बिरयानी भी शामिल होगी।

मिस्बाह के इस फैसले के बाद पाकिस्तान टीम में हलचल की खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि टीम के होश गुम हैं और उन्हें अपने पूर्व कप्तान और वर्तमान कोच में एक साथ मोहम्मद शाह तुगलक नजर आ रहा है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर मिस्बाह के इरादे क्या हैं, वो ये सब क्यों कर रहे हैं और उन्हें इसके लिए किससे प्रेरणा मिली है? बताया जा रहा है कि भले ही टीम इस फैसले का खुलकर विरोध नहीं कर पा रही है, लेकिन उनके भीतर के स्वर मिस्बाह के ख़िलाफ़ ठीक वैसे ही आग बबूला हो रहे हैं, जैसे आर्टिकल 370 पर उनके मुल्क के नेताओं के स्वर!

सूत्रों की मानें तो सभी पाक ख़िलाड़ी यूट्यूब पर इस समय विराट का वो ऐड अलग-अलग कीवर्ड्स डालकर खोजने में लगे हुए हैं, जिसमें मैच जीतने के लिए वो अपनी टीम को जोमेटो से बिरयानी मँगाकर ख़िलाते नजर आ रहे हैं और खुद भी एक वीडियो में चाव से कुरकुरे आदि खा रहे हैं। क्योंकि इन वीडियोज के मिलने के बाद उम्मीद है कि पाकिस्तान टीम को राहत आएगी, और हो सकता है विराट को देखते हुए मिस्बाह बिरयानी के लिए नरमी दिखाएँगे और टीम को सख्त बनाने के प्रयासों में वो कोई नया रास्ता खोजेंगे।


धर्मांतरण पर सख़्त हुई मोदी सरकार, NGO को विदेशी चंदा सबंधी नियमों में की गई कड़ाई

मोदी सरकार ने धर्मान्तरण के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाते हुए सभी ग़ैर-सरकारी संगठनों के लिए ‘विदेशी योगदान विनियम अधिनयम (FCRA)’ के नियमों को कड़ा कर दिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि एफसीआरए रेजिस्ट्रेशन की चाह रखने वाले ग़ैर-सरकारी संगठनों के सभी कार्यकर्ताओं व सदस्यों को एक एफिडेविट दायर कर इस बात की पुष्टि करनी होगी कि वे किसी भी प्रकार के धर्मान्तरण के कार्यों में लिप्त नहीं हैं और उनके ख़िलाफ़ सांप्रदायिक तनाव सम्बन्धी कोई मामला दर्ज नहीं है।

इससे धर्मान्तरण में लिप्त एनजीओ व उनके कार्यकर्ताओं को तगड़ा झटका लगा है। साथ ही सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाले एनजीओ व उनके सदस्यों को भी एफआरसीए रजिस्ट्रेशन नहीं प्राप्त होगा। इससे उन्हें विदेश से फंड या चंदा नहीं मिल सकेगा। 2011 के नियमों के मुताबिक़, सिर्फ़ एनजीओ के शीर्ष पदाधिकारियों को ही ऐसा एफिडेविट दायर करना होता था लेकिन 2019 में हुए दूसरे संशोधन के बाद अब सभी कार्यकर्ताओं व सदस्यों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया गया है।

एफसीआरए के लिए गृह मंत्रालय से अनुमति की ज़रूरत होती है। नए नियमों के अनुसार, अब एक लाख रुपए तक के निजी उपहार प्राप्त करने वालों के लिए सरकार को लिखित जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके पहले ये राशि 25 हजार रुपए थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है। एनजीओ के कार्यकर्ताओं को हलफनामा दायर कर इसकी भी पुष्टि करनी होगी वे विदेशी चंदे का उपयोग राष्ट्रद्रोह वाले कार्यों के लिए नहीं करेंगे।

इसके अलावा अब विदेश में इलाज कराने के लिए भी हलफनामा दायर करना पड़ेगा। अगर कोई व्यक्ति विदेशी यात्रा पर है और उसे इस दौरान इमरजेंसी में विदेशी इलाज की ज़रूरत पड़ती है या फिर उसे विदेशी मदद मिलती है तो उसे एक महीने के भीतर सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। सरकार को दी गई सूचना में उसे स्पष्ट करना पड़ेगा कि इस फंडिंग का सोर्स क्या है, भारतीय मुद्रा में उसकी वैल्यू क्या है और इसका इस्तेमाल कहाँ-कहाँ और किन-किन कार्यों में किया गया?

अभी तक कुल 18,000 ऐसे एनजीओ हैं, जिनका विदेशी चन्दा प्राप्त करने का अधिकार ख़त्म कर दिया गया है। धर्म परिवर्तन कराने वाले और राष्ट्रद्रोही गतिविधियों में शामिल रहने वाले एनजीओ पर शिकंजा कस्ते हुए सरकार एक के बाद एक क़दम उठा रही है।

पाकिस्‍तान में खौफ के साए में हिंदू: मंदिर में जमकर तोड़फोड़ के बाद अब हिंदुओं के घरों पर हमला, आगजनी

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यक ख़ौफ़ के साये में जीने को मजबूर हैं। वजह यह है कि एक बड़ी संख्या में गुस्साए लोगों ने सड़क पर उतरकर न सिर्फ़ हिन्दू मंदिरों में तोड़फोड़ की बल्कि हिन्दुओं के घरों में भी घुसकर तोड़फोड़ की। इस मामले में सिंध प्रांत में पुलिस ने सोमवार (16 सितंबर) को 218 दंगाइयों के ख़िलाफ़ मंदिर सहित सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाने को लेकर मामले दर्ज किए हैं।

दरअसल, सिंध पब्लिक स्कूल के हिन्दू प्रिंसिपल नूतन माल के ख़िलाफ़ एक नाबालिग छात्र ने ईश-निंदा का आरोप लगाया था। स्कूल के छात्र राणा मुहम्मद इब्तिसाम का कहना था कि उर्दू की क्लास के दौरान प्रिंसिपल ने शिक्षक को रोककर पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के बारे में अपमानजनक तरीके से बातें की थी। इसके बाद ही इस साम्प्रदायिक हिंसा का जन्म हुआ।

ख़बर के अनुसार, छात्र के पिता अब्दुल अजीज ने स्कूल के प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि स्कूल के प्रिंसिपल ने इस्लाम विरोधी टिप्पणी करके ईश-निंदा का अपराध किया है। इसके बाद रविवार (15 सितंबर) को बड़े स्तर पर प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक घोटकी फारुख लंजार ने कहा कि पुलिस इलाक़े में क़ानून व्यवस्था को नियंत्रित कर रही है। नेशनल असेंबली के सदस्य रमेश कुमार वंकवानी, जो पाकिस्तान हिंदू परिषद (PHC) के प्रमुख हैं, उन्होंने बताया कि सिंध पब्लिक स्कूल के हिन्दू प्रिंसिपल को एक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के बाद यह केस उप निरीक्षक नईम शेख को सौंप दिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने तीन मंदिर, एक निजी स्कूल और हिन्दू समुदाय से जुड़े कई घरों में तोड़फोड़ की थी। फ़िलहाल, घोटकी में इस घटना से हिन्दुओं में भारी दहशत का माहौल है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी इस इस मुद्दे को उठाते हुए बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

घोटकी पुलिस ने ईश-निंदा की कथित घटना के विरोध में सड़कों पर उतरने वाले दंगाइयों के ख़िलाफ़ तीन मामले दर्ज किए। पाकिस्तान दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत 45 लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई थी। सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए 150 लोगों के ख़िलाफ़ एक और FIR दर्ज की गई। 23 लोगों के ख़िलाफ़ दंगा और चोरी से संबंधित एक तीसरी FIR भी दर्ज की गई थी।

ग़ौरतलब है कि इस हमले में कट्टरपंथी नेता मियाँ मिट्ठू का हाथ सामने आया था। उसने न सिर्फ़ मंदिर बल्कि स्कूल को भी नुक़सान पहुँचाया। मियाँ मिट्ठू के नेतृत्व में भीड़ ने पुलिस के सामने शिक्षक की पिटाई की, मंदिर में तोड़फोड़ की और स्कूल को नुक़सान पहुँचाया।

आश्चर्य की बात यह है कि ये सबकुछ पुलिस के सामने ही हुआ। जब मजहबी भीड़ शिक्षक की पिटाई कर रही थी और मंदिर में तोड़फोड़ कर रही थी, तब पुलिस भी वहाँ पर मौजूद थी। पुलिस तमाशबीन बन कर यह सब देखते रही। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और उनकी धार्मिक आस्था पर लगातार हो रहे हमलों के बीच वहाँ के प्रधानमंत्री ख़ुद को दुनिया भर में रह रहे इस्लाम के समर्थकों का नुमाइंदा बताते हैं। वह भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होने का झूठा आरोप भी लगाते हैं।

अब चुनाव में गठबंधन करने की गलती नहीं करूँगा: एच डी देवगौड़ा ने तोड़ा कॉन्ग्रेस से नाता

कर्नाटक की सत्ता से बाहर होने के बाद अब पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस ने कॉन्ग्रेस से नाता तोड़ लिया है। देवगौड़ा ने सोमवार (सितंबर 16, 2019) को कर्नाटक में मध्यावधि चुनाव की भविष्यवाणी करते हुए अकेले चुनाव लड़ने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘अब यह गलती नहीं करूँगा। अब अकेले ही चुनाव लड़ा जाए।’’

कुछ दिन पहले देवगौड़ा ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन को जारी रखने को लेकर पार्टी की राहें खुली रखने का संकेत दिया था। लेकिन अब देवगौड़ा के हवाले से उनके कार्यालय ने बयान जारी कर कहा गया है, ‘‘राज्य में मध्यावधि चुनाव की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो भी गठबंधन में जाए बगैर किसी के साथ के बिना अकेले चुनाव लड़ा जाए।’’

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरने के बाद देवगौड़ा और कॉन्ग्रेस के सिद्धारमैया ने हाल ही में जुलाई में एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के गिरने के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया था। हालाँकि, देवगौड़ा ने गुरुवार (सितंबर 12, 2019) को भी संकेत दिया था कि उनकी पार्टी के दरवाजे कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन जारी रखने के लिए अभी भी खुले हैं। उन्होंने इस तरफ इशारा किया था कि वह 17 विधानसभा क्षेत्रों में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार थे, जहाँ बागी विधायकों की अयोग्यता के बाद उपचुनाव होने हैं। उनका कहना था कि यह सब कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के निर्णय पर निर्भर करता है।

कॉन्ग्रेस के विधायक दल के नेता दिनेश गुंडू राव और सिद्धारमैया सहित राज्य के कॉन्ग्रेस नेता इस बात पर कायम है कि महागठबंधन को आगे बढ़ाने का फैसला आलाकमान करेगा। हालाँकि, पार्टी के कई शीर्ष नेताओं ने हाल ही में कहा था कि पार्टी के अधिकतर बड़े नेता जेडीएस के साथ साझेदारी को समाप्त करने को लेकर खुश थी।

जेडीएस के कई विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच एच डी देवगौड़ा ने कहा कि वह इससे चिंतित नहीं हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि पार्टी को कैसे संगठित करना है। गौड़ा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से पिछली गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री के रूप में एच डी कुमारस्वामी द्वारा किए गए ‘अच्छे काम’ के संदेश को हर घर तक ले जाने को कहा है।

गौरतलब है कि, कॉन्ग्रेस-जेडीएस मई 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के ठीक बाद गठबंधन में आई थी। बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए कॉन्ग्रेस ने जेडीएस से अधिक सीट जीतने के बावजूद जेडीएस को मुख्यमंत्री सीट का ऑफर किया था। जेडीएस इस प्रस्ताव पर सहमत हो गई थी। जिसके बाद एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। लेकिन इसी साल अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। 28 सीटों में कॉन्ग्रेस और जेडीएस मात्र एक-एक सीट जीती।

इसके बाद कॉन्ग्रेस-जेडीएस के एक दर्जन से अधिक विधायकों ने कुमारस्वामी सरकार का साथ छोड़ दिया। विधानसभा में सरकार अल्पमत में आ गई और कुमारस्वामी को इस्तीफा देना पड़ा। एक बार फिर से बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में बीजेपी ने सत्ता में वापसी की।