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राजनाथ सिंह ने तेजस में उड़ान भरकर रचा इतिहास, ऐसा करने वाले पहले रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु में गुरुवार (19 सितंबर) की सुबह स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान में सफल उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। वो देश के पहले रक्षा मंत्री बन गए, जिन्होंने तेजस में उड़ान भरी। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि तेजस विमान भारतीय वायु सेना की 45वीं स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग ड्रैगर्स’ का हिस्सा है। इस लड़ाकू विमान को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने डिज़ाइन और विकसित किया है।

तेजस में उड़ान भरने से पहले राजनाथ सिंह ने पायलट की यूनिफॉर्म पहनकर एक फ़ोटो ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा, “सारी तैयारी हो चुकी है।”

ग़ौरतलब है कि वायु सेना तेजस विमानों की एक खेप अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है। शुरुआती दौर में HAL को 40 तेजस विमानों के लिए ऑर्डर दिया गया था। साल 2018 में वायु सेना ने 50,000 करोड़ रुपए में 83 और तेजस विमानों की ख़रीद के लिए HAL को अनुरोध प्रस्ताव दिया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजस में उड़ान भर कर स्वदेशी विमानों पर भरोसा जताया और उन्हें प्रमोट करने का संदेश देने के लिए उन्होंने इसमें उड़ान का फ़ैसला लिया।

इससे पहले, पूर्व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लड़ाकू विमान सुखोई में उड़ान भर कर इतिहास रचा था। सुखोई के बारे में बता दें कि वो दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है जबकि तेजस एक इंजान वाला लड़ाकू विमान है।

स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की विशेषताएँ

  • तेजस एयरक्राफ्ट की सर्वाधिक स्पीड 1.6 मैक है। 2000 किमी की रेंज को कवर करने वाले तेजस का अधिकतम थ्रस्ट 9163 केजीएफ है। 
  • इसमें ग्लास कॉकपिट, हैलमेट माउंटेड डिस्प्ले, मल्टी मोड रडार, कम्पोजिट स्ट्रक्चर और फ्लाई बाई वायर डिजिटल सिस्टम जैसे आधुनिक फीचर हैं। 
  • इस जेट पर दो आर-73 एयर-टू-एयर मिसाइल, दो 1000 एलबीएस क्षमता के बम, एक लेज़र डेजिग्नेशन पॉड और दो ड्रॉप टैंक्स हैं।
  • एक तेजस को बनाने में क़रीब 300 करोड़ रुपए का ख़र्च आता है। इसे बनाने में भारत निर्मित कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया गया है। इसी वजह से इसका वज़न 12 टन है और लंबाई 13.2 मीटर है, जो बेहद मज़बूत भी है।
  • तेजस के पंखों का फैलाव 8.2 मीटर है और ऊँचाई 4.4. मीटर है। रफ़्तार की बात की जाए तो 1350 किमी प्रति घंटा है।
  • दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए इस विमान में आर-73 एयर टू एयर मिसाइल, लेज़र गाइडेड मिसाइल और बियांड विजुएल रेंज अस्त्र मिसाइल लगाई जा सकती है।


18 अक्टूबर तक सुनवाई, 17 नवंबर से पहले फैसला: सब कुछ ठीक रहा तो राम जन्मभूमि पर यह है SC का विचार

अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के स्वामित्व के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्षों द्वारा 70 साल की मुक़दमेबाजी बुधवार (18 सितंबर) को अपने अंतिम पड़ाव के क़रीब पहुँच गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि इस केस का फ़ैसला 17 नवंबर को या उससे पहले सुनाया जाएगा। दरअसल, चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है। यही कारण है कि वो इससे पहले मामले की सुनवाई और फैसला कर लेना चाहते हैं।

इस मामले में हिंदू और मुस्लिम पक्षों के सलाह-मशवरे के बाद, के परासरन, सीएस वैद्यनाथन और राजीव धवन ने दलीलें ख़त्म करने के लिए अनुमानित समय का ज़िक्र किया। पाँच जजों वाली संविधान पीठ जिसमें CJI गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, डी वाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नाज़ेर ने एक संक्षिप्त परामर्श दिया और कहा, “हमें उम्मीद है कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई समाप्त हो जाएगी, इससे हमें निर्णय लिखने के लिए चार सप्ताह का समय मिलेगा।”

पीठ ने यह भी कहा कि अगर सुनवाई के लिए अतिरिक्त दिनों की आवश्यकता पड़ती है, तो शनिवार को कोर्ट के बैठने पर विचार किया जाएगा। इससे पक्षकारों को दलीलें पूरी करने के लिए 15 दिन और सुनवाई के मिल जाएँगे क्योंकि 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती और दशहरे की छुट्टियों की वजह से अदालत 6 दिनों के लिए बंद रहेगी।

मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि वे 27 अक्टूबर तक बहस पूरी कर लेंगे, जबकि हिंदू पक्षकारों का कहना है कि उन्हें दो या तीन दिनों की आवश्यकता पड़ेगी, जिसमें मुस्लिम पक्ष एक या दो दिन अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे।

पीठ ने पक्षकारों से यह सुझाव देने के लिए भी कहा कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फ़ैसले पर किस तरह की राहत की उम्मीद करते हैं, जिसने विवादित भूमि को देवता, सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के बीच समान रूप से विभाजित किया था। इस पर बहस की जानी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कैसे राहत दे सकता है।

ग़ौरतलब है कि यह मामला दोनों पक्षों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि सुनवाई बिना किसी ठोस तथ्यों के समाप्त हो रही है। यदि सुनवाई समाप्त नहीं हुई और न्यायाधीशों को निर्णय लेने से पहले अपनी राय लिखने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला और CJI गोगोई सेवानिवृत्त हो गए, तो नए सिरे से सुनवाई के लिए पीठ का पुनर्गठन करना होगा।

बता दें कि 1989 में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या मामले में फ़ैज़ाबाद ज़़िला अदालत के समक्ष लंबित मुक़दमे को वापस ले लिया था। पहला मुक़दमा 1950 में गोपाल सिंह विशारद द्वारा दायर किया गया था। जबकि दूसरा मुक़दमा एक अन्य हिंदू भक्त द्वारा दायर किया गया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था। तीसरा मुक़दमा निर्मोही अखाड़े ने 1959 में दायर किया था, और चौथा, दो साल बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा दायर किया गया था। अंतिम मुक़दमा 1989 में देवकी नंदन अग्रवाल के माध्यम से दायर किया गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अपना फ़ैसला सुनाने से पहले लगभग 100 दिनों तक पक्षकारों से बहस सुनी और सबूतों की जाँच की थी।

तब इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस एस यू ख़ान, सुधीर अग्रवाल और डी वी शर्मा की तीन-न्यायाधीशों की बेंच ने 2-1 के बहुमत से विवादित भूमि को तीन समान भागों में विभाजित किया था। फैसले में राम लला विराजमान वाला हिस्सा हिंदू महासभा को दिया गया था, दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था। उसके बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ तुरंत अपील दायर की थी।

इस देश में हिंदू कब तक उठाएँगे लाशें और कब तक जलते रहेंगे मंदिर: सांसद ने पूछा सवाल

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। भारत से लेकर UNPO (Unrepresented Nations and Peoples Organization, गैर-प्रतिनिधि राष्ट्र एवं मानव संगठन) तक इस मुद्दे को सबके समक्ष उठाकर वैश्विक रूप दे चुके हैं, लेकिन फिर भी वहाँ के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। अब ऐसे में आखिरकार पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अत्याचार (अपहरण, हत्या, दुष्कर्म और जबरन धर्मांतरण) का मुद्दा पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठा है।

दरअसल, पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के सांसद खील दास कोहिस्तानी ने मंगलवार (सितंबर 18, 2019) को नेशनल असेंबली में इमरान सरकार के सेकुलरिज्म की पोल खोलते हुए उनसे सवाल पूछा, “बीते चार महीने में 25 से 30 हिंदू लड़कियों का अपहरण हुआ और वे कभी वापस नहीं लौटीं। ये अत्याचार कब तक जारी रहने वाले हैं? हिंदू लोग कब तक लाशें उठाते रहेंगे? कब तक हमारे मंदिर जलाए जाते रहेंगे?”

सांसद और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के सिंध की अल्पसंख्यक शाखा के प्रमुख ने भरी सभा में पूछा कि सिंध के घोटकी और उमरकोट में ही ये घटनाएँ क्यों हो रही हैं? उन्होंने कहा कि यह आग पूरे सिंध में फैल जाएगी, इसलिए इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने सिंध में कुछ लोगों की गिरफ्तारी की भी बात की और कहा कि उनकी शक्ति पर अंकुश लगाना सरकार की जिम्मेदारी है।

उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे के असेंबली में उठने से एक दिन पहले ही सिंध प्रांत में डेंटल की पढ़ाई कर रही हिंदू छात्रा नमृता की हत्या की खबर सोशल मीडिया पर फैली थी। जिसके बाद विश्वविद्यालय उसकी मौत को खुदकुशी करार देने पर तुला हुआ था, लेकिन परिवारजनों का आरोप था कि उनकी लड़की की हत्या हुई है, जिसकी पुष्टि खुद सबूत कर रहे हैं।

इसके अलावा बता दें कि पाकिस्तान में एक हिंदू प्रिंसिपल पर ईश निंदा के आरोप लगाकर मंदिर और हिंदू घरों में तोड़फोड़ की खबर, सिंध से एक बीबीए की छात्रा को अगवा करने की खबर, और सिख लड़की के धर्मपरिवर्तन की घटना भी ज्यादा पुरानी नहीं है।

चीन के लिए ‘चांगथांग प्रहार’: लद्दाख में आर्मी का एक्सरसाइज़, अरुणाचल में IAF ने खोला रनवे

सर्दियों की आहट और चीन की आक्रामकता को ध्यान में रखते हुए सैन्य बलों ने खुद को चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है। थल सेना ने जहाँ लद्दाख में सैन्य एक्सरसाइज़ शुरू की है, वहीं वायुसेना ने भारत की पूर्वी सीमा के सबसे आखिरी छोर पर बसे गाँव की अपनी हवाई पट्टी फिर से चालू कर दी है- मकसद है चीनी सेना की किसी घुसपैठ या अन्य आक्रामकता का समय रहते मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहना। गौरतलब है कि 1962 का भारत-चीन युद्ध भी शीत ऋतु की शुरुआत में ही (20 अक्टूबर-21 नवंबर) लड़ा गया था।

“चांगथांग प्रहार” के लिए कस रहे कमर

पूर्वी लद्दाख के चुशुल के पास चल रही “all-arms integrated” exercise के लिए अति-ऊँचाई वाली जगह को चुनकर सैन्य एक्सरसाइज़ हो रही है, जिसमें टैंकों, तोपों, हेलीकॉप्टरों और सैनिकों के अलावा ड्रोनों और वायु सेना द्वारा पैरा-ड्रॉप (योद्धाओं को हवा से पैराशूट के ज़रिए युद्धभूमि में ड्रॉप करना) भी शामिल है। इसका नाम दक्षिण-पूर्व लद्दाख से पश्चिमी और उत्तरी तिब्बत तक फैले चांगथांग पठार (plateau) नाम पर “चांगथांग प्रहार” रखा गया है।

उत्तरी कमांड के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने खुद लद्दाख में पहुँच कर तैयारियों का जायज़ा लिया। उत्तरी कमांड के ट्विटर हैंडल के अनुसार उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितयों में युद्ध क्षमता के प्रदर्शन की तारीफ़ की।

जोरहाट की मदद से खोली जा रही विजयनगर की हवाई पट्टी

अरुणाचल के चांगलांग जिले स्थित विजयनगर की 4,000 फ़ीट लंबी हवाई पट्टी की मरम्मत का काम वायु सेना ने शुरू कर दिया है। इसके लिए वायु सेना के जोरहाट स्टेशन के साथ समन्वय स्थापित कर काम हो रहा है। फ़िलहाल यह हवाई पट्टी खाली AN-32 विमानों की उड़ान के लिए सुरक्षित है। चूँकि वहाँ सड़क मार्ग से जुड़ने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसलिए मरम्मत का साज़ो-सामान भी हवाई मार्ग से हेलीकॉप्टरों द्वारा पहुँचाया जा रहा है। विजयनगर के तीन ओर म्याँमार और एक तरफ नामदाफा नेशनल पार्क है।

‘सिर्फ असम नहीं बल्कि पूरे देश में लागू होगा NRC, बाहर भेजे जाएँगे सारे अवैध प्रवासी’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (सितंबर 18, 2019) को पूरे देश भर से अवैध प्रवासियों को बाहर का रास्ता दिखाने की हुंकार भरी। उन्होंने राँची में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनता को आश्वासन दिलाया कि पूरे भारत में NRC लाया जाएगा और सभी अवैध प्रवासियों को वैध तरीकों से देश से बाहर किया जाएगा।

अपने चुनाव घोषणा पत्र में जनता से किए वादे को दोहराते हुए अमित शाह ने इस दौरान कहा, “हमने अपने चुनाव घोषणापत्र में देश की जनता से वादा किया था कि केवल असम में नहीं बल्कि पूरे देश में एनआरसी लाएँगे और देश की जनता का एक रजिस्टर बनाएँगे तथा बाकी (अवैध प्रवासियों) लोगों पर कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी।”

अमित शाह ने इस दौरान जनता के बीच स्पष्ट कहा कि NRC का पूरा नाम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर है, न कि असम नागरिक रजिस्टर। इसलिए ये पूरे देश में लागू होना चाहिए, और देश की जनता की एक सूची होनी चाहिए।

हिंदुस्तान अखबार द्वारा आयोजित कार्यक्रम (हिन्दुस्तान पूर्वोदय 2019) में बोलते हुए अमित शाह ने असम के उन लोगों की स्थिति के बारे में भी बात की, जिनका नाम किसी कारणवश NRC में नहीं आया है।

हिन्दुस्तान पूर्वोदय 2019 में प्रधान संपादक शशिशेखर से बातचीत करते हुए गृहमंत्री अमित शाह।

उन्होंने बताया कि असम में जिन लोगों के नाम NRC में नहीं आए हैं, उन्हें विदेशी न्यायाधिकरणों के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। साथ ही असम सरकार ने ऐसे लोगों के लिए वकील मुहैया कराने की भी व्यवस्था की है, जो अपना पक्ष रखने के लिए वकीलों का शुल्क नहीं वहन कर सकते।

गृहमंत्री ने अन्य देशों का हवाला देते हुए भी NRC की जरूरत को समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि दुनिया में एक भी ऐसा देश नहीं हैं, जहाँ जाकर कोई बस सके। तो भारत में आकर कैसे कोई बस सकता है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा, “आप इंग्लैंड, नीदरलैंड, अमेरिका जाके बस जाएँ, कोई नहीं घुसने देगा आपको। तो फ़िर भारत में आकर कोई कैसे बस सकता है? यहाँ कोई भी आकर बस सकता है क्या? देश ऐसे नहीं चलता। देश के नागरिकों का रजिस्टर होना, ये समय की जरूरत है। और हमने चुनावी घोषणा पत्र में देश की जनता से वादा किया था कि केवल असम में नहीं पूरे देश भर में हम NRC लेकर आएँगे। और देश के नागरिकों का रजिस्टर बनेगा। इसके अलावे… और आगे कानूनी प्रक्रिया में कार्रवाई करेंगे।”

यहाँ उल्लेखनीय है कि असम में एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट 31 अगस्त को जारी किया गया था, जिसमें 19 लाख निवासियों के नाम एनआरसी सूची में नहीं थे। इस संबंध में भी अमित शाह ने इस कार्यक्रम में बात की।

जानिए क्या हुआ जब बिना जाँचे ही नितिन गडकरी की कार का बना दिया पॉल्यूशन सर्टिफिकेट

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की कार का पुणे में बिना प्रदूषण जाँचे ही पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसा करना अब पीयूसी सेंटर की परेशानी का कारण बन गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, डेक्कन पुलिस स्टेशन में PUC सेंटर के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह काम किसी एक व्यक्ति ने किया है। हालाँकि उसके नाम का अभी खुलासा नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, गडकरी की कार की कोई भी, किसी भी तरह की जाँच नहीं की गई थी और न तो कार से होने वाले पॉल्यूशन के स्तर को देखा गया, न ही सिलेंडर को चैक किया गया। इन सभी प्रक्रियाओं को बाईपास करते हुए पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। जिस कारण FIR दर्ज किया गया है। वैसे यह कोई नई बात नहीं है अक्सर तमाम गाड़ियों के प्रदूषण सर्टिफिकेट ऐसे ही जारी होते हैं लेकिन चूँकि इस बार गाड़ी स्वयं परिवहन मंत्री की थी इसलिए मामला उल्टा पड़ गया।

आपको बता दें कि नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद केंद्रीय सड़क और परिवहन राज्यमंत्री वीके सिंह की गाड़ी का भी चालान कट चुका है। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद दी थी। इधर बिहार में नए मोटर व्हिकल एक्ट की जद में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे की गाड़ी भी आ गई थी। अश्विनी चौबे की गाड़ी पर 2500 रुपए का चालान काटा गया था।

भू-माफिया आजम खान पर अब सरकारी बिल्डिंग कब्जाने के आरोप में FIR दर्ज

समाजवादी पार्टी सांसद भूमाफिया आजम खान की मुश्किलें और मुकदमें कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन पर अब तक 82 केस पहले से ही दर्ज है लेकिन अब आजम खान पर एक और मुकदमा दर्ज हो चुका है। इस बार आजम खान पर एक और सरकारी बिल्डिंग पर कब्जा करने के आरोप में उनके 3 सहयोगी समेत चार लोगों पर FIR दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीओ सिटी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि कोतवाली सिविल लाइंस का ये मामला है। इसमें पीड़ित गगन लाल ने एक मामला 4 लोगों के खिलाफ दर्ज कराया है। इसमें पूर्व सीओ आले हसन, पूर्व मंत्री आजम खान, जिला सहकारी संघ के सचिव कामिल खान, जिला सहकारी संघ के चेयरमैन मास्टर जाफर आरोपित हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार यह कहा जा रहा है कि पीड़ित के मुताबिक उसके क्वालिटी बार पर सन 2013 में यह लोग लूटपाट और तोड़फोड़ किए थे। उनके मुताबिक जो उनकी जगह थी उसको पूर्व मंत्री आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा के नाम आवंटित कर दिया गया था। उन पर 16500 रुपए लूटने का भी आरोप है।

बता दें एक तरफ जहाँ लगातार आज़म खान पर एक के बाद एक मुकदमें दर्ज हो रहे हैं वहीं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आजम खान के समर्थन में दो दिवसीय दौरे पर रामपुर पहुँचे थे, लेकिन उनके समर्थन का भी कोई असर नहीं दिख रहा है। अखिलेश यादव ने आजम खान पर दर्ज हुए सभी मुकदमों की फाइल लेकर राज्यपाल से मिलने का भी भरोसा दिलाया था। इसके बावजूद भी आजम खान पर मुकदमे दर्ज होने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। यहाँ तक कि उन पर बकरी चोरी से लेकर बिजली चोरी के मामले में भी FIR दर्ज है।

महाराष्ट्र निवासी अब्दुल वहाब तमिलनाडु में भगवा लिबास में पकड़ा गया, दरगाह पर सोने से हुआ शक

महाराष्ट्र के संगली जिले के रहने वाले मुस्लिम युवक को तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले से गिरफ्तार कर लिया गया है। अब्दुल वहाब नाम के बताए जा रहे इस युवक पर पुलिस को शक इसके भगवा पहनावे से हुआ है, जोकि अमूमन हिन्दू साधुओं का पहनावा माना जाता है।

दरगाह पर सोने से हुआ शक

वहाब ने न केवल गेरुए वस्त्र धारण किए हुए थे, बल्कि साधुओं जैसी बढ़ी हुई दाढ़ी, मूँछ के अलावा हिन्दू साधुओं द्वारा इस्तेमाल होने वाली कई अन्य चीज़ें भी उसके पास से बरामद हुईं हैं। वह 8 महीने से जिले के चक्कर काट रहा था, और उस पर किसी को शक न होता अगर उसने एक गलती न की होती- उसने सोने की जगह गलत चुनी। वहाब सोने के लिए हिन्दू साधु के भेष में ही रामनाथपुरम जिले से 25 किलोमीटर दूर एरवाडी गाँव में स्थित पुरानी दरगाह पर जाता था। यह दरगाह पूरे राज्य में प्रसिद्ध है, और दूर-दूर से लोग इस पर आते हैं। माना जाता है कि यह दरगाह मानसिक रोग दूर कर सकती है।

स्थानीय लोगों का ध्यान जब अब्दुल वहाब की इस अजीब दिनचर्या पर गया तो उन्हें शक हुआ, और उन्होंने पुलिस को इत्तला की। उसके बाद पुलिस ने वहाब को गिरफ़्तार कर लिया।

मंदिरों पर हमला तो नहीं हो जाएगा?

एक ट्विटर यूज़र ने अब्दुल वहाब की भगवा चोले में और उसकी असली, सादे कपड़ों में तस्वीरें जारी करते हुए तमिलनाडु के प्राचीन मंदिरों पर जिहादी हमले का शक जताया है। साथ ही राज्य में और सुरक्षा की माँग की है।

हिंदी भाषा विवाद: अमित शाह के ‘कभी नहीं कही हिंदी थोपने की बात’ पर स्टालिन ने आंदोलन लिया वापस

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी भाषा को लेकर उत्पन्न हुए विवाद पर बुधवार को अपने एक बयान में कहा, “मैंने क्षेत्रीय भाषाओं पर हिंदी भाषा को थोपने की बात कभी नहीं कही। मैंने सिर्फ इतनी अपील की थी कि मातृभाषा के बाद दूसरी भाषा के रूप में हिंदी को सीखना चाहिए। मैं खुद गैर हिंदी भाषी राज्य गुजरात से आता हूँ। अगर कुछ लोग इस पर राजनीति करना चाहते हैं, तो यह उनकी च्वॉइस है।”

खासतौर से दक्षिण भारत में हो रहे बवाल के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि उन्होंने कभी भी हिंदी को क्षेत्रीय भाषाओं पर थोपने की बात नहीं कही है। हिंदी को केवल दूसरी भाषा के तौर पर सीखने की बात की थी। इसपर अगर किसी को राजनीति करनी है तो वह करता रहे।

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने हिंदी विवाद पर कहा कि हम तमिलनाडु में कभी भी हिंदी को जबरदस्ती थोपना स्वीकार नहीं करेंगे। हिंदी इस देश की एकजुट ताकत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम 20 सितंबर को डीएमके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिंदी के मुखर रूप से लागू होने का विरोध करेंगे।

उधर अब नए समीकरण के तहत डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने हिंदी थोपने को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन को खत्म कर दिया है। स्टालिन ने आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मामले पर सफाई दे दी है। जिससे बात यहीं ख़त्म होती है लेकिन साथ ही स्टालिन ने कहा कि हिंदी थोपने के खिलाफ डीएमके की लड़ाई जारी रहेगी।

आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा था कि देश को एकजुट करने का काम अगर कोई भाषा कर सकती है, तो वह हिंदी ही है। वैसे भारत कई भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना अलग महत्व है। हालाँकि, पूरे देश में एक भाषा का होना बेहद जरूरी है, जो दुनिया में उसकी पहचान बन सके। उनके इस वक्तव्य के बाद से ही हिंदी भाषा की लेकर राजनीति शुरू हो गई थी।

ट्रेन में हुई आपसी लड़ाई को AMU के छात्र ने दिया साम्प्रदायिक रंग

अलीगढ़ में एक समुदाय विशेष के परिवार की पिटाई का मामला तूल और राजनीतिक रंग पकड़ने लगा है। दो दिन पहले रेलवे स्टेशन पर हुए इस वाकये में पीड़ित परिवार ने समुदाय विशेष से होने के नाते पीटे जाने का दावा किया है, वहीं पुलिस ने दावा किया है कि ट्रेन से उतरने को लेकर हुए विवाद में झड़प हुई है। वहीं मामले में कूदते हुए AMU छात्रसंघ के अध्यक्ष ने विवादास्पद बयान दिया है कि जैसे आज अलीगढ़ में हुआ है, आने वाले समय में वैसी ही घटनाओं से पूरा भारत जलेगा। इंडिया टुडे ने इस झड़प के पीछे समुदाय विशेष के परिवार के ट्रेन से उतरने और हमलावरों की पहले चढ़ने की ज़िद को कारण बताया है, वहीं कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में इसे सीट को लेकर हुआ विवाद बताया जा रहा है।

25 आदमी गमछाधारी, पुलिस बना रही थी वीडियो

पीड़ितों का आरोप है कि उनके स्टेशन पर उतरते ही करीब 25 गमछा पहने हुए लोगों ने उन्हें घेर कर उनके साथ मार-पीट शुरू कर दी। उनका कहना है कि वे सभी हमलावर एक जैसा गमछा ही पहने थे, और एक ही जैसे पहचानपत्र लिए हुए थे, अतः सम्भव है कि वे सभी एक ही संगठन के हों। इसके अलावा घायलों का दावा है कि वहाँ मौजूद पुलिसवाला अपने मोबाइल से घटना का वीडियो बनाने में व्यस्त था, और उसने कोई सहायता नहीं की। उन लोगों के चले जाने के बाद घायलों को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

‘ट्रेन से उतरने को लेकर हुआ झगड़ा’

वहीं जीआरपी के इंस्पेक्टर ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया है कि मामला मज़हबी हिंसा का नहीं, आपसी विवाद का है। घायलों और कुछ सहयात्रियों के बीच ट्रेन से उतरने को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद वह हिंसा में बदल गया। घायलों और परिवारजनों के बयानों को रिकॉर्ड करने के बाद आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा डिप्टी एसपी ने भी इसे अभी तक भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) का मामला मानने से इंकार कर दिया है।

AMU छात्र संघ, AIMIM कूदे मैदान में

मामले में AMU का छात्र संघ और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भी कूद पड़े हैं। AMU छात्र संघ के अध्यक्ष सलमान इम्तियाज़ ने कहा, “आज यह घटना अलीगढ़ में हुई है, लेकिन कल इस तरह की घटनाओं से पूरा देश जलेगा। इस देश के कुछ लोग हिटलर के नक्शेकदम पर चल रहे हैं और वे देश की वैसी ही हालत करना चाहते हैं, जैसा हिटलर के कार्यकाल के दौरान जर्मनी हो गया था।”

इसके अलावा खुद को AIMIM की उत्तर प्रदेश युवा विंग का अध्यक्ष बताने वाले सैयद नाज़िम अली ने भी मामले में मीडिया से बात करते हुए इसे मज़हबी घटना करार दिया है। अपनी फेसबुक वॉल पर भी उन्होंने इस घटना को “अलीगढ़ स्टेशन पे भगवाई गुंडों के द्वारा मज़लूमों की पिटाई” करार दिया है।