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तबरेज की मौत तनाव और हृदयाघात से, 11 आरोपितों पर नहीं चलेगा हत्या का मामला: झारखंड पुलिस

झारखंड पुलिस ने तबरेज अंसारी की मौत के मामले में दायर आरोप-पत्र से हत्या की धारा को हटा दिया है। पुलिस ने डॉक्टरों की रिपोर्ट (पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट) का हवाला देते हुए कहा है कि तबरेज की मौत तनाव और कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) की वजह से हुई थी। इसलिए अब वह इसी तथ्य के आधार पर चार्जशीट दाखिल करेंगे। झारखंड पुलिस के इस फैसले के बाद सभी 11 आरोपितों के ऊपर से हत्या संबंधी IPC की धारा (धारा 302) हटा ली गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो उनसे बातचीत में सरायकेला-खरसावां के एसपी कार्तिक एस ने बताया है कि उन्होंने इस मामले को आईपीसी की धारा 304 के तहत जो चार्जशीट दाखिल किया है, उसकी 2 वजहें हैं – पहला यह कि तबरेज अंसारी की मौत घटनास्थल पर नहीं हुई थी, और ग्रामीणों का भी अंसारी को मारने का कोई इरादा नहीं था। दूसरा, मेडिकल रिपोर्ट में भी हत्या के आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी ये बात सामने आई कि उसकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई है और सिर पर लगी चोट गहरी नहीं थी।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले पुलिस ने अंसारी की पत्नी की शिकायत के आधार पर आरोपितों पर हत्या के आरोप में 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया था। जिसके बाद उन पर लगे आरोपों की जाँच की जा रही थी। जबकि दूसरी ओर विसरा रिपोर्ट में भी इस बात का खुलासा हो चुका था कि तबरेज की मौत जहर देने या फिर ब्रेन हैमरेज जैसे कारणों से नहीं हुई है बल्कि उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई। लेकिन फिर भी उस समय पुलिस ने आश्वासन दिया था जाँच पूरी होने पर इस मामले में दोषियों के खिलाफ़ उचित कार्यवाई होगी।

इस मामले के संबंध में पुलिस ने 11 लोगो को गिरफ्तार किया था। जिनमें कमल महतो, सुमंत महतो, नामो प्रधान, भीमसेन मंडल, प्रकाश मंडल, कुशल महली, प्रेमचंद महली, महेश महली, सत्यनारायण नायक व चामू नायक समेत 11 आरोपितों का नाम शामिल था।

तमिलनाडु: मंदिरों के 25,868 एकड़ से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा, कीमत ₹10,000 करोड़

तमिलनाडु में हिदू मंदिरों के तकरीबन 25,868 एकड़ भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया गया है, जिसकी कीमत लगभग 10,000 करोड़ रुपए होगी। जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (HR & CE) विभाग के नियंत्रण में मंदिरों के सभी भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू करने वाली राज्य सरकार ने पाया विभिन्न हिंदू मंदिरों से संबंधित लगभग 10,000 करोड़ रुपए की कीमत वाली 25,868 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इन जमीनों को अवैध रूप से विभिन्न लोगों को हस्तांतरित कर दिया गया है।

वैसे मंदिर की भूमि का अतिक्रमण कोई नई बात नहीं है। 2018 में मंदिर की 9000 एकड़ भूमि पर विभिन्न लोगों द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया था। लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा तमिलनाडु सरकार ने पाया कि लगभग 10,000 करोड़ रुपए की कम से कम 25,868 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, कुछ वर्षों पहले शुरू हुए 38,000 से अधिक मंदिरों और मठों के भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का काम पूरा हो गया है। जमीनी विवरण को डिजिटलीकरण करने के लिए अपडेटिंग रजिस्ट्री स्कीम (URS) के तहत दो जिला राजस्व अधिकारियों को नियुक्त किया गया था। 

मार्च 2019 में, ऑर्गेनाइजर में बताया गया था कि कांचीपुरम में तिरुपुर के प्राचीन मुरुगन मंदिर से संबंधित 76 एकड़ भूमि पर कब्जा कर एक आवास परिसर में बदल दिया गया था। इस जमीन की कीमत 750 करोड़ रुपए से अधिक थी। बाद में जाँच से पता चला था कि इस तरह से मंदिरों की जमीन का अतिक्रमण कर 10 से अधिक स्थानों पर इमारतों और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया था। इन स्थानों पर मंदिर से संबंधित सबूत मिले थे।

इस साल जुलाई में, थिरुथोंडार्गल सबाई के संस्थापक और अध्यक्ष ए राधाकृष्णन ने दावा किया था कि राज्य भर के मंदिरों की 70% भूमि का अतिक्रमण किया गया है। इनमें से अधिकांश भूमि सदियों से मंदिरों के हितकरों, जमींदारों और भक्तों द्वारा दान की गई थी। अब भू-माफियाओं द्वारा उन पर हमला किया जा रहा है। सरकार भी इसे नजरअंदाज कर रही है।

कॉन्ग्रेसियों द्वारा सोनभद्र में जब्त की गई 1 लाख बीघा जमीन जल्द ही आदिवासियों को दी जाएगी: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जल्द ही सोनभद्र में एक लाख बीघा जमीन खाली कराने जा रही है, जिसका अधिकांश हिस्सा कॉन्ग्रेस नेताओं ने कब्जा किया हुआ है। सीएम योगी ने कहा कि वो कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा जब्त की गई जमीन को जल्द ही खाली कराएँगे और फिर ये जमीनें नियमानुसार आदिवासियों में बाँटी जाएगी।

सीएम ने सोनभद्र मामले पर बात करते हुए कहा कि उम्भा का विवादित जमीन कॉन्ग्रेसी नेता के नाम पर था। जमींदारी खत्म होने के बाद इन्होंने कई सोसायटी बनाई और बड़े पैमाने पर जमीनों के ट्रांसफर किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की जाँच करने के लिए उन्होंने एक कमिटी बनाई है, जिसकी रिपोर्ट 3 महीने में आ जाएगी। इस रिपोर्ट के आने के बाद इसमें शामिल सभी कॉन्ग्रेसी नेताओं की पोल खुल जाएगी, वो बेनकाब हो जाएँगे। उन्होंने बताया कि मिर्जापुर में एक कॉन्ग्रेस नेता के पास एक फर्जी सोसायटी के नाम पर 6,000 एकड़ जमीन है।

इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा द्वारा बनाई गई एक कमिटी की रिपोर्ट के बारे में बात करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट के आधार पर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि वो इसी महीने उम्भा गाँव जा रहे हैं और उनकी कोशिश होगी कि कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा अवैध तरीके से जब्त की गई जमीन को खाली करवाकर उन आदिवासियों, वन विभाग और ग्राम सभा को दे दी जाए, जिनकी ये जमीनें हैं। सीएम योगी ने ये सारी बातें नवभारत टाइम्स के साथ हुए इंटरव्यू में कही।

समाजवादी सांसद और भू-माफिया आजम खान के समर्थन में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का दौरा रद्द करने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम के रूप में अखिलेश यादव को राज्य में कहीं भी जाने का पूरा अधिकार है। लेकिन सरकार मुहर्रम या किसी भी त्योहार के दैरान किसी को भी दंगा या हिंसा भड़काने नहीं देगी। प्रदेश में शांति बनाए रखने के लिए कानून के तहत जो भी संभव होगा, सरकार वह करेगी। समाजवादी पार्टी के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो-ढाई साल में एक भी ऐसा मामला नहीं दिखा सकता है, जहाँ सरकार ने किसी के खिलाफ कानून का पालन किए बिना ही कार्रवाई की हो।

मुहर्रम की जुलूस में फँसी रवि की कार, भीड़ ने रॉड और डंडे से तोड़ डाला: अब तक 9 गिरफ्तार

प्रयागराज के मुट्ठीगंज इलाके में आर्यकन्या चौराहे के पास मुहर्रम के जुलूस के दौरान व्यापारी रवि केसरवानी की गाड़ी में हुई तोड़फोड़ मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना रविवार (सितंबर 8,2019) देर रात 10 बजे की है। लेकिन गिरफ्तारी सोमवार (सितंबर 9, 2019) को हुई है। आरोपितों की पहचान मोहम्मद सलीम, फहाद उस्मान, फैजान, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद कलीम, असद अलियास नबी, गुलाब बाबू, मोहम्मद वकील और मोहम्मद अनस के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक रविवार को कीडगंज थाने वाली सड़क से जुलूस निकाला गया। इस जुलूस को सीमेट्री रोड से मुड़कर बीच वाली सड़क, मुट्ठीगंज, हटिया, सुलाकी चौराहर, बजाजा पट्टी होते हुए वापस कीडगंज आना था। लेकिन करीब 9: 15 बजे जब ये जुलूस बरगद वाली गली के पास के होकर गुजर रहा था तब रवि की गाड़ी इनके जुलूस के बीच में आ गई और जुलूस में शामिल लोगों ने गुस्से में रवि की कार पर हमला कर दिया। लोहे की रॉड और डंडे की मदद से रवि की कार के शीशे तोड़े गए।

बवाल बढ़ता देख वहाँ कुछ लोग जमा हुए तो शीशे तोड़ने वाली भीड़ वहाँ से चली गई। रवि को भी उनके घर भेज दिया गया। लेकिन घटना से गुस्साए लोगों ने इसके बाद मुठ्ठीगंज और फिर आर्यकन्या चौराहे पर जाम लगा दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस भी मौक़े पर पहुँची और लोगों को हटाने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शन कर रहे लोगों में गुस्सा इतना था कि वो सड़क से नहीं हटे। इस दौरान यहाँ हिंदू संगठन के लोग भी पहुँचे। बाद में भारी फोर्स बुलाई गई और डीआईजी एवं एसएसपी की मौजूदगी में लोगों को समझाकर मामला शांत कराया गया।

हालाँकि मामले के संबंध में उस समय कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन अगले दिन पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर इन 9 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। डीआईजी केपी सिंह के मुताबिक, “कार मालिक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामले को आईपीसी धारा 147, 148, 427 और 504 के तहत दर्ज कर लिया गया है और 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।”

डीआईजी की मानें तो इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई अवांछित पोस्ट अपलोड किए जा रहे हैं, जिसमें गलत जानकारी फैलाकर घटना को साम्प्रादायिक रूप देने की कोशिश हो रही है। इसलिए इलाहाबाद पुलिस की साइबर सेल कोशिश में जुटी हैं कि इस घटना से संबंधित तस्वीरों को डिलीट किया जा सके और ऐसे पोस्ट करने वालों पर एक्शन हो सके। इसके लिए उन्होंने फर्जी खबर फैलाने वालों को चेतावनी भी दी है, कि अगर ऐसी अफवाहें फैलाने से बाज नहीं आए तो उनके ख़िलाफ़ लीगल नोटिस जारी होगा।

हस्तमैथुन रूम में करो, बाथरूम में नहीं: IIT रुड़की हॉस्टल के नोटिस की सच्चाई

2017 में एक फिल्म आई थी – अनारकली ऑफ आरा। इस फिल्म को लिखा और डायरेक्ट किया था अविनाश दास ने। फिल्म लाइन में आने से पहले अविनाश दास एक पत्रकार हुआ करते थे। पत्रकारिता वाला कीड़ा शायद आज भी इनके अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ है। तभी महाशय ने आज एक खबर शेयर की – IIT रुड़की में हस्तमैथुन संबंधी नोटिस के बारे में।

वामपंथी विचारधारा (हम जो कह दें, वही सत्य है) वाले अविनाश दास ने एक फर्जी नोटिस को ट्विटर पर टाँग तो दिया लेकिन फैक्ट चेक के जमाने में बेचारे खुद टँग गए। 2-4 की-वर्ड अगर गूगल कर लेते तो शायद छीछालेदर से बच जाते। लेकिन ऐसा करते तो फिर वामपंथी कैसे कहलाते! या फिर IIT रुड़की में कॉल कर लेते। आज कल तो साइट पर नंबर तक मौजूद रहते हैं, तुरंत पता चल जाता। क्योंकि वहीं के होस्टल ऐडमिन ने ऐसे किसी भी नोटिस लगाने की खबर को गलत बता दिया है।

मुंबई में रहने वाले अविनाश को कम से कम मराठी साइट ही पढ़ लेना था, सच्चाई का पता तो चल ही जाता

ऐसा नहीं है कि इस तरह का फैक्ट चेक करना रॉकेट साइंस वाला काम है। ऐसा भी नहीं है कि इस तरह के जल्दी से वायरल होने वाले फर्जी नोटिस पहली बार देखने को आए हैं। यह 2014 से ही घूम रहा है। पहले विदेश की यूनिवर्सिटी में यह नोटिस (फर्जी) लगाया गया। वहाँ भी लोगों ने इस पर खूब मजे लिए।

फिर यह 2016 में अपने देश आया – मणिपाल यूनिवर्सिटी के नाम पर। तब scoopwhoop ने इस पर आर्टिकल भी लिखा था और हेडलाइन में स्पष्ट किया था कि यह फेक नोटिस है। लेकिन पत्रकार अविनाश ने शायद अब खबरें पढ़ना बिल्कुल ही छोड़ दिया है, ऐसा मालूम होता है।

अब इसे IIT रुड़की के नाम पर फैलाया जा रहा है। और यह किया जा रहा है उसके द्वारा जिसका काम है दिन-रात मोदी सरकार को गरियाना। ऐसे में बेचारे के वॉट्सऐप बॉक्स में जैसे ही यह इमेज गिरी होगी, और इसके हस्तमैथुन शब्द पर इनकी नजर पड़ी होगी, इन्होंने उसे ट्विटर पर डाल दिया।

वामपंथी विचारधारा के नाम पर राजनीति चल नहीं रही, मोदी से नफरत के नाम पर भी फुस्स हो गए… अब फेक न्यूज और हस्तमैथुन के नाम पर दुकान चलाने को आतुर हैं ये शायद!

1984 दंगे, FIR संख्या 601/84: कमलनाथ से जुड़ा है यह केस, SIT ने दोबारा खोली फाइल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की मुश्किलें अब बढ़ती नजर आ रही हैं। दरअसल, गृह मंत्रालय द्वारा गठित विशेष जाँच दल (SIT) ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े 7 मामलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। जिसमें मुख्यमंत्री कमलनाथ की भूमिका की भी जाँच की जाएगी। इस संबंध में जानकारी साझा करने के लिए SIT द्वारा उन सभी लोगों, समूहों और संस्थाओं को बुलाया जा रहा है, जिन्हें इस विषय में कुछ भी मालूम है।

उल्लेखनीय है कि कमलनाथ से जुड़ा ये केस FIR संख्या 601/84 पर आधारित है। यह उन 7 मामलों में से एक है, जिन्हें फिर से खोला जाएगा। ये मामला उन बयानों और संजय सूरी (क्राइम पत्रकार) जैसे गवाहों पर आधारित हैं जो दावा करते हैं कि कमलनाथ उन सिख विरोधी भीड़ में शामिल थे और जिन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज को ही सीज कर लिया था। हालाँकि उस समय इस मामले में हुई FIR में कमलनाथ का नाम नहीं था और ट्रॉयल रूम ने ये केस बंद कर दिया था, लेकिन अब जैसे ही ये मामला खुला है, लोगों की नजरे फिर से कमलनाथ पर अटक गईं हैं।

सोमवार को दिल्ली में अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी दावा किया है कि जिन मामलों को दोबारा से खोला जा रहा है उनमें से एक केस में कमलनाथ पर भी आरोप लगे हैं। उनका कहना है कि कमलनाथ ने कथित तौर पर इन 7 मामलों में से एक में आरोपी 5 लोगों को कथित तौर पर शरण दी थी।

जानकारी के लिए बता दें कि मनजिंदर सिंह सिरसा ने ही पिछले साल इस मामले के संबंध में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर 1984 में हुए दंगों की दोबारा जाँच करने की आवाज उठाई थी। उनका कहना है कि नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने में दर्ज प्राथमिकी में कमलनाथ का नाम कभी नहीं आया। जबकि उन पर आरोप है कि सिख दंगों के 5 आरोपितों को उन्होंने अपने घर में आश्रय दिया था। जो सबूतों के अभाव में ट्रॉयल कोर्ट ने बरी कर दिए थे। इन सिख विरोधी दंगों से जुड़े 7 मामले 1984 में वसंत विहार, सन लाइट कालोनी, कल्याणपुरी, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, पटेल नगर और शाहदरा पुलिस थानों में दर्ज किए गए थे।

सिरसा की मानें तो उन्होंने इस मामले से संबंधित दो गवाहों से बात कर ली है, जो एसआईटी की जाँच में सहयोग करेंगे। पहले संजय सूरी, जो फिलहाल इंग्लैंड में रहते हैं और दूसरे मुख्तियार सिंह जो पटना के रहने वाले हैं। ये दोनों गवाह एसआईटी को दंगों में कमलनाथ की भूमिका के बारे में बताएँगें।

इसके अलावा सिरसा ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी कमलनाथ के इस्तीफ़े की माँग की है। उन्होंने कहा है कि सोनिया गाँधी कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहें। ताकि सिखों को इससे न्याय मिल सके।

इमरान के पूर्व MLA जान बचाकर भारत आए, पाक वापस नहीं भेजने के लिए PM मोदी से माँगी मदद

कश्‍मीर में मानवाधिकारों के उल्‍लंघन का आरोप लगाने वाले पाकिस्‍तान में खुद अल्‍पसंख्‍यकों के अधिकारों का किस कदर हनन हो रहा है, इसका खुलासा खुद पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के एक पूर्व विधायक ने किया है। इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के पूर्व विधायक बलदेव कुमार ने पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों पर हो रहे अत्‍याचारों से त्रस्त होकर भारत में शरण माँगी है। वह इस वक्‍त अपने परिवार के साथ पंजाब में हैं और आगे भी वो भारत में ही रहना चाहते हैं।

बता दें कि बलदेव कुमार पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वां प्रांत के बारीकोट आरक्षित सीट से विधायक रहे हैं। 43 वर्षीय पूर्व विधायक अब अपने परिवार के साथ पाकिस्‍तान नहीं लौटना चाहते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्‍तान में हिंदू-सिख महफूज नहीं हैं। वहाँ उन पर अत्‍याचार होते हैं। उनकी हत्‍याएँ हो रही हैं। उन्होंने कहा कि वो किसी तरह वहाँ से जान बचाकर अपने परिवार के साथ भारत आए हैं। वो जल्द ही भारत में शरण के लिए आवेदन करेंगे। पीटीआई नेता ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने कहा कि वहाँ पर हिंदू और सिखों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनके साथ गलत व्यवहार किया जा रहा और उनको जबरन परेशान किया जाता है।

भारत के खिलाफ लगातार आग उगल रहे पाकिस्तान को अब वहाँ के लोग ही आईना दिखाने लगे हैं। बलदेव कुमार का यह भी कहना है कि इमरान के पीएम बनने के बाद अल्‍पसंख्‍यकों पर जुल्‍म बढ़ा है। पाकिस्तान को इमरान खान से उम्मीदें थीं कि वह एक नया पाकिस्तान बनाएँगे, लेकिन वह अपनी जनता की सुरक्षा करने में नाकाम रहे हैं। सेना और आइएसआइ उन पर हावी है।

वहीं, बलदेव की पत्नी भावना ने कहा कि पाकिस्तान में महिलाओं की हालत बदतर है। वह अपनी मर्जी से घरों से बाहर भी नहीं जा सकती। नौकरी करना तो बहुत दूर की बात है। भावना ने कहा कि वहाँ के हालात देखकर ही शादी के बाद भी उन्होंने भारतीय नागरिकता नहीं छोड़ी थी। बता दें कि बलदेव कुमार की शादी 2007 में पंजाब के खन्ना की रहने वाली भावना से हुई थी। शादी के समय वो पाकिस्तान में पार्षद थे और बाद में विधायक बने। भावना अभी भी भारतीय नागरिक हैं।

बलदेव कुमार ने कुछ महीने पहले परिवार को पंजाब के लुधियाना में अपने रिश्तेदारों के पास खन्ना शहर भेज दिया था। 12 अगस्त को तीन महीने के वीजा पर खुद बलदेव भी यहाँ आ गए थे, लेकिन अब वे वापस नहीं लौटना चाहते। बलदेव ने बताया कि साल 2016 में उनके विधानसभा क्षेत्र के एक विधायक की हत्या हो गई थी। इस मामले में उन पर झूठे आरोप लगाए गए और उन्हें 2 साल तक जेल में रखा गया था। जब विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में मात्र दो दिन बाकी रह गया था, तब उन्हें बरी किया गया और उन्होंने विधायक की शपथ ली। इस तरह बलदेव सिर्फ 36 घंटे के लिए ही विधायक रहे।

‘तुम्हारी माँ के साथ…’ – फर्जी मिथोलॉजिस्ट देवदत्त पटनायक को इस अश्लील जवाब पर लोगों ने जमकर लताड़ा

सोशल मीडिया पर खुद को सभ्य दिखाते हुए इतिहास के तथ्यों के साथ छेड़-छाड़ करना एक चलन हो चुका है। इस चलन की खास बात ये है कि इसे आगे बढ़ाने वाले लोग कोई और नहीं, बल्कि फेसबुक-ट्विटर पर फैले वो तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग हैं, जिन्हें खुद के अर्जित ज्ञान का स्रोत तक नहीं मालूम। ऐसे में यदि कोई इन्हें सही करने या फिर दूसरा पक्ष दिखाने का प्रयास करे, तो ये उसे या तो असहिष्णु करार दे देते हैं या फिर खुद अभद्रता की पराकाष्ठा पार कर देते हैं।

अभी हालिया उदाहरण देखिए देवदत्त पटनायक का। देवदत्त खुद को एक मिथोलॉजिस्ट (पौराणिक कथाकार) मानते हैं, वही जिनके बारे में धर्म संबंधित ज्ञान को मॉडर्न तरीके से पेश करने वाला कहा जाता है। उन्होंने कल (9 सितंबर 2019) एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में इन्होंने कहा, “हड़प्पा वैदिक नहीं था, जबकि वैदिक जो थे वो हड़प्पन ही थे। क्योंकि हड़प्पा सभ्यता पुरानी और वेद बाद में आया। हड़प्पा में दफनाने को प्राथमिकता दी जाती थी जबकि वेद में दाह संस्कार। हड़प्पा सिंधु-सरस्वती के किनारे समृद्ध हुई है जबकि वेद गंगा-यमुना के किनारे। दोनों का हिदू धर्म में योगदान हैं। स्पष्ट!”

अब उनके इस ट्वीट पर लोगों ने उनको खूब लताड़ लगाई। किसी ने उनके ज्ञान का मजाक उड़ाया तो किसी ने उनसे वेदों को लेकर सवाल किए। लेकिन किसी मोहंती नाम के यूजर ने उनसे इसी बीच बागपत की खुदाई का जिक्र कर दिया और कहा कि वो वैदिक थी या फिर हड़प्पन?

अब ऐसे में यदि कोई शख्स वाकई पढ़-लिखकर सोशल मीडिया पर लोगों को ये ज्ञान दे रहा होता तो वो इस बात का निश्चित जवाब देता, लेकिन देवदत्त पटनायक ने मोहंती की इस बात पर अभद्रता के साथ जवाब दिया और उससे कहा, “I will check with . your mother ” यानी वो (देवदत्त) इस बात का पता उसकी माँ (मोहंती, यूजर) के साथ लगाएँगे। देवदत्त सिर्फ यहीं तक नहीं रुके। पूरे थ्रेड को देखेंगे तो आप पाएँगे कि उन्होंने लोगों के माँ-बाप से लेकर हर दूसरे विचार रखने वालों को मूर्ख तक की संज्ञा दे डाली। देवदत्त ने किसी के माँ-बाप को कोसा तो किसी की पैदाइश तक पर शक कर डाला।

तमामों विषयों पर अपनी किताब लिखकर उसे सोशल मीडिया पर कवर फोटो बनाने वाले देवदत्त सिर्फ़ इतने ही सहनशील रह पाए कि अपने बात को स्पष्ट करने की बजाए वो किसी की माँ तक पहुँचने से भी नहीं चूके।

हालाँकि, इसके बाद यूजर ने जितना देवदत्त को इनके पोस्ट के लिए दुत्कारा, उससे ज्यादा फजीहत लोगों ने इस ट्वीट पर रिप्लाई दे देकर कर दी। लोगों ने कहा कि सिर्फ़ ये एक जवाब काफ़ी है देवदत्त तुम्हारी धूर्तता दर्शाने के लिए। ये जो अहंकारी और अपमानजनक शब्द तुमने बोले हैं ये तुम्हारे ज्ञान और शिक्षा की कमी को दर्शाता है।

एक यूजर ने देवदत्त के उद्देश्य को ही इतिहास से तरोड़-मरोड़ करना बताया, जबकि दूसरे यूजर ने कहा कि ऐसे इतिहासकार सिर्फ़ हिंदू सभ्यता को अंधेरे में दिखाना चाहते हैं। प्रशांत पटेल उमराव जो खुद एक लेखक हैं और इंटरनेशनल जर्नल के अध्यक्ष भी, वो इस रिप्लाई को देखकर देवदत्त की ‘मानसिकता की कल्पना’ करने की बात उठाते हैं ।

कुछ कहते हैं कि उन्हें अच्छा लगा ये देवदत्त की असलियत जानकर तो कुछ कहते हैं कि इस शख्स को ये तक नहीं मालूम की आखिर बागपत और हिसार हैं कहाँ पर? ये महाभारत और हस्तिनापुर जानता है लेकिन मेरठ, बागपत के बारे में इसे कुछ नहीं मालूम।

गौरतलब है कि इसके अलावा देवदत्त के मूल ट्वीट पर भी लोगों ने कई आपत्ति जताई है। एक-एक शब्द पर लोगों ने देवदत्त को घेरा है। और बताया है कि वेद गंगा यमुना के आसपास नहीं पनपे, बल्कि वेद गंगा यमुना में विकृत हुए हैं।

केजरीवाल सरकार का ’10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट’ अभियान फेल: 143 जगहों पर मिला डेंगू का लार्वा

राजधानी दिल्ली में डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और अरविंद केजरीवाल सरकार के बीच फिर से घमासान जारी है। दरअसल, एमसीडी द्वारा जारी किए गए आँकड़े के अनुसार, डेंगू और चिकनगुनिया के खिलाफ केजरीवाल सरकार का “10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट” अभियान फेल हो गया है।

बता दें कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने जाँच के दौरान केजरीवाल के सरकारी विभागों के कार्यालयों में डेंगू का लार्वा पाया है। इसकी रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार के विभागों में लगभग 143 स्थान ऐसे हैं, जहाँ डेंगू का लार्वा पाया गया है। एमसीडी ने इन 143 स्थानों की एक सूची जारी की है, जिसमें 50 सीनियर सेकेंड्री स्कूल, 1 प्राइमरी स्कूल, 17 सरकारी दफ्तर, 13 डीजेबी ऑफिस, 10 डीटीसी डिपो, 7 बीएसईबी ऑफिस, 7 पीडब्लूडी ऑफिस के साथ ही 5 शौचालय, 5 पुलिस स्टेशन, 1 सरकारी अस्पताल और 3 दवाखाना शामिल है। डेंगू का लार्वा मिलने पर एमसीडी ने दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले इन संस्थाओं के चालान काट दिए हैं।

शिक्षा और सफाई के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाले केजरीवाल सरकार में इस तरह का आँकड़ा चौंकाने वाला है। केजरीवाल सबसे ज्यादा शिक्षा और छात्रों के मुद्दे पर ही राजनीति करते हैं, लेकिन हैरानी की बात है, डेंगू का सबसे अधिक लार्वा दिल्ली के स्कूल में ही पाया गया है।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सासंद संजय सिंह ने एमसीडी द्वारा जारी कए गए आँकड़ों को गलत बताते हुए कहा कि केजरीवाल सरकार डेंगू के मच्छरों को मारना चाहती है, लेकिन बीजेपी वाले खुद डेंगू बनकर इस अभियान को मारना चाहते हैं। इसी नीयत से भाजपा शासित एमसीडी ने एक डाटा जारी कर बताया है कि डेंगू के लार्वा दिल्ली सरकार के स्कूलों और दफ्तरों में मिले हैं। हमारी रिपोर्ट एमसीडी के दफ्तरों और स्कूलों को इससे मुक्त बता रही है। इस पर विश्वास करना मुश्किल है कि दिल्ली के नगर निगम स्कूलों, निगम दफ्तरों में डेंगू का लार्वा नहीं मिला, लेकिन दिल्ली सरकार के स्कूल में लार्वा मिल गया। ये आँकड़े सवालों के घेरे में आते हैं।

उन्होंने एमसीडी द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट को बीजेपी की राजनीति करार दिया और कहा कि भाजपा को घटिया राजनीति के लिए शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब डेंगू का मच्छर काटने आएगा तो बीजेपी, आम आदमी पार्टी या कॉन्ग्रेस नहीं देखेगा। हालाँकि, उन्होंने कहा है कि एमसीडी की रिपोर्ट में जिस क्षेत्र में लार्वा का जिक्र किया गया है, वहाँ जाकर निरीक्षण किया जाएगा।

गौरतलब है कि सीएम केजरीवाल ने 3 सितंबर को डेंगू मच्छर के खिलाफ 10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट अभियान शुरू किया था। इस दिल्ली सरकार ने बड़े पैमाने पर लोगों से 10 हफ्ते तक हर रविवार को घर के परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पानी के जमा होने से रोकने से कहा था। इसका उद्देश्य डेंगू मच्छरों के पनपने से रोकना था। मगर, एमसीडी के आँकड़े दिल्ली सरकार की अभियान की असफलता की ओर इशारा कर रही है।

NRC लागू करने के पक्ष में मणिपुर, केंद्र से करेंगे संपर्क: CM बीरेन सिंह

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार NRC के कार्यान्वयन के पक्ष में है और वह इसके लिए केंद्र सरकार से संपर्क करेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, NEDA सम्मेलन के समापन के मौके पर उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि NRC के लिए राज्य ने पहले ही एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा- “हमें और उत्तर पूर्व के कई राज्यों को NRC की आवश्यकता है। मणिपुर सरकार ने पहले ही कैबिनेट में NRC के लिए फैसला कर लिया है।”

केंद्र सरकार का नजरिया पूरी तरह से साफ है कि अवैध घुसपैठियों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है। खुद, गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार सितंबर 09, 2019 को NEDA की चौथी बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र की मंशा सिर्फ असम से ही नहीं बल्कि पूरे देश से सभी घुसपैठिये को बाहर निकालने की है।

बिरेन सिंह ने NEDA सम्मेलन के बाद संवाददाताओं से कहा कि राज्य ने पहले ही प्रदेश में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के लिए एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

यह पूछे जाने पर कि राज्य इस योजना को लागू कैसे करेगा, तो उन्होंने कहा- “यह केंद्र सरकार के माध्यम से किया जाएगा। असम यह उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कर रहा है। इसलिए हम केंद्र सरकार से इसे करने के लिए अनुरोध कर रहे हैं।”