पाकिस्तान का एक मंत्री है। नाम है – फवाद चौधरी। इमरान खान की सरकार ने उसे विज्ञान और टेक्नॉलजी मंत्रालय का भार उठाने को दिया है। लेकिन बेचारे को विषय की समझ भी नहीं है और पाकिस्तान जैसे नान-टिमाटर वाले देश में उसे समझाने लायक कोई ब्यूरोक्रेट भी नहीं है शायद। ऐसे में वो सारा दिन खाली बैठा रहता है और भारत की ओर देख कर ट्वीट करता रहता है।
ट्विटर की दुनिया में घुसा हुआ फवाद चौधरी चंद्रयान-2 पर ट्वीट कर फँस गया। उसे नहीं पता था कि इंटरनेट की दुनिया में उस पर पलटवार भी हो सकता है। और वही हुआ भी। लोग उसकी कुंडली निकाल लाए। वो कितना बड़ा ठरकी (पॉर्न मामलों को लेकर) है, यह तक पता कर लिया।
Marriage at the right age & a gd wife saves 40 GB of space on your computer..
2012 में फवाद चौधरी ने एक ट्वीट किया था। लिखा था – सही समय पर शादी और अच्छी बीवी हो तो कंप्यूटर में 40 GB स्पेस बच जाता है। स्मार्टफोन के युग में अब यह बताने के लिए किसी को कंप्यूटर साइंस करने की जरुरत नहीं है कि बीवी और शादी के बाद 40 GB का स्पेस कैसे बच जाता है। तो जिस भी लोग तक फवाद का यह ट्वीट पहुँचा, उसने अपने-अपने ढंग से उसे ट्रोल किया। नीचे के ट्वीट देखिए और मजे लीजिए।
What the heck..! He is a minister for science & technology of Pakistan.. Wonder why pakistan is ranked No.1 in watching Porn….
इस्लामिक आतंकवादी संगठन ISIS इराक़ में गायों पर बम-विस्फोटक लादकर हमला और युद्ध के लिए इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इराक़ के दियाला नामक जगह पर विस्फोटक से लदी दो गायें मिलिट्री चेक पॉइंट की तरफ बढ़ रही थीं, और चेकिंग के दौरान इस विस्फोटक से धमाका हो गया।
एक रिपोर्ट के अनुसार इस असफल बम धमाके में एक व्यक्ति घायल हुआ। किसी आतंकवादी संगठन द्वारा किसी गाय को बम धमाकों और लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की यह पहली घटना है। हालाँकि किसी जानवर को हथियार बनाकर वह पहले भी इस तरह के आतंकी हमलों को अंजाम दे चुके हैं।
2010 के बाद से इस तरह की 6 अलग-अलग घटनाओं में जिहादियों द्वारा गधों पर IED और विस्फोटक लगाकर हमले किए गए थे जिनमें से एक यमन की घटना भी शामिल है। आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमले के लिए कुत्तों को भी आतंकी हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है।
इराक़ के दियाला प्रांत के स्थानीय अफसर साक़ीद हुसैनी का कहना है कि आतंकी अब नए आत्मघाती बम नहीं जोड़ पा रहे हैं, जिसके कारण वो इस तरह की तरकीबें अपना रहे हैं। दियाला बग़दाद का पड़ोसी प्रांत है। इसमें सांप्रदायिक व जातीय विविधता पायी जाती है इसलिए इस प्रांत को पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों के मुख्य ठिकाने रूप में देखा जाता रहा है।
पाकिस्तान में टैलेंट की कमी नहीं है। यहाँ के लोगों ने ऐसे-ऐसे आविष्कार किए हैं कि वैज्ञानिक भी इनके सामने हतप्रभ होकर नतमस्तक हो जाएँगे। दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के वैज्ञानिक ही नहीं, राजनेता भी वैज्ञानिक का काम करते हैं। यानी कि राजनेता ही वैज्ञानिक और वैज्ञानिक ही राजनेता!
जी हाँ, पाकिस्तान के नौसीखिए वैज्ञानिक और राजनेता मुअज्जम खान नियाजी ने अपने आविष्कार से संपूर्ण विश्व को चौंका दिया। दरअसल, नियाजी ने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसा आविष्कार किया है, जिसमें उन्होंने पानी से पेट्रोल बनाने की बात कही है। नियाजी ने कहा कि वो पानी और सौर ऊर्जा से पेट्रोल बनाने में सफल रहे। अब जल्द ही लोगों को मुफ्त में पेट्रोल दिया जाएगा।
इतना ही नहीं, नियाजी की काबिलियत यहीं तक सीमित नहीं है। वो तो इतने काबिल और सफल ‘वैज्ञानिक’ हैं कि आप उन्हें कोई भी फल दे दो, वो उससे चीनी बना देंगे। उनका कहना है कि वो किसी भी फल से चीनी बना सकते हैं और उनके द्वारा इस विधि से बनाई गई चीनी मधुमेह पीड़ित (diabetic patients) के लिए भी लाभदायक होगा।
नियाजी सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के जरिए लगातार अपने ‘ज्ञान की मोती’ का प्रसार करते हैं। पूरी दुनिया पर पाकिस्तानी हुकूमत का सपना देखने वाले नियाजी का कहना है कि उनकी विधि का उपयोग करने वाले पेट्रोल का उत्पादन करने पर लगभग 950 मिलियन रुपए के प्रारंभिक निवेश का खर्च आएगा।
उन्होंने पूरी आवाम को मुफ्त पेट्रोल प्रदान करने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि अगर उन्हें भरपूर पानी मुहैया कराया जाए तो वह देश भर में मुफ्त पेट्रोल बाँटेंगे और ये उनकी दिली ख्वाहिश है।
पाकिस्तान में इस तरह की बयानबाजी और अधारहीन, बेतुकी बातें करना कोई नई बात नहीं है। इनके देश में ऐसा चलता रहता है। क्योंकि हकीकत में तो नमक-रोटी के लिए भी तरस रहे हैं और कर्ज के लिए अमेरिका के आगे हाथ फैला रहे हैं। इसलिए ये लोग बड़ी-बड़ी बातें करके ही मन बहला लेते हैं। इनकी बातें मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह होती हैं, जिसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं होता है। पाकिस्तान में ऐसे ‘विद्वान वैज्ञानिकों’ की कमी नहीं है।
सोशल मीडिया ने राजनीति को एक अध्याय और प्रयोग से उठाकर सड़क पर ला पटका है। अब इसका कोई नीयत सिलेबस नहीं है ना ही यह कुछ गिने-चुने लोगों की चर्चा तक सीमित रह गया है। बीते समय के राजनीति के महान चिंतक अगर आज होते तो राजनीति को सोशल ट्रेंड्स का हिस्सा बनता देख जरूर अपने हाथ पीछे खींच लेते।
यह बुरा भी नहीं है कि लोग पिछली लोकसभा चुनाव के बाद से राजनीतिक रूप से खूब सक्रिय हुए हैं। इंटरनेट और तकनीक ने हर व्यक्ति को यह अधिकार उपलब्ध करवाया है कि वह समसामयिकी से सिर्फ प्रभावित ही न हो बल्कि उस पर अपनी राय भी रख सके। लेकिन यह सब बहुत आपा-धापी में हुआ है।
राजनीति में पक्ष और विपक्ष अब आम आदमी का भी व्यक्तिगत मुद्दा बन गया है। यह हास्यास्पद तब हो जाता है जब दूसरे पक्ष को भक्त, मूर्ख और बेहूदा साबित करने वाले खुद किसी दिन उसी विषय को भुनाता हुआ नजर आता है।
देखा जाए तो प्रोपेगेंडा का मुख्य उद्देश्य दूसरे विचार को निर्जीव साबित करना ही होता है। लेकिन इस उद्देश्य की सबसे बड़ी बेईमानी इसमें किसी से भी किसी तरह की शालीनता और राहत की उम्मीद करना होता है। इस खेल में पक्षधर कभी शिकार होते हैं तो कभी शिकारी होते हैं।
हाल ही में NDTV के प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा था। इस वीडियो में एक ही रवीश कुमार एक ही GDP के आँकड़ों पर दो तरह के बयान देते हुए नजर आ रहे थे। इस वीडियो पर लोगों ने रवीश कुमार के लिए अल्ताफ राजा के वो गाने भी याद दिलाए जिसमें पिछले दशक के मशहूर गायक गाते थे- “वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है।” रवीश के इस वीडियो से लोगों के कॉन्सेप्ट जीडीपी पर तो गड़बड़ा गए लेकिन रवीश को लेकर एकदम स्पष्ट होने लगे।
यह सब अपनी आँखों के सामने घटित होता देखकर रवीश-भगत मंडली ने तुरंत अपनी-अपनी पोजीशन ली और सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कुमार का साल 2013 का पूरा वीडियो पोस्ट करने की माँग की। जीडीपी वाले इस वीडियो को बिना डेंगू के इतना वायरल होता देख रवीश-भगत फूट-फूटकर रोए। और आखिर में कुछ सच्चे कर्तव्यनिष्ट सेवक उस पूरे वीडियो को लाकर उसकी समीक्षा करते हुए नजर आने लगे तब जाकर कहीं रवीश-भगत मण्डली की जान में जान आई। हालाँकि यह ‘पूरा वीडियो’ तब भी रवीश की एक ही जीडीपी की दो परिभाषों के बेच तालमेल बैठाने में असफल ही रहा।
अलग-अलग सालों में GDP पर अलग-अलग ज्ञान देते हुए सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कुमार
समय करवट बदलता है और कुछ दिन बाद चंद्रयान 2 राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है। अब सोशल मीडिया पर हम देखते हैं कि वही आदर्श लिबरल, जो रवीश का पूरा वीडियो किसी भी हाल में ढूँढकर लाना चाहते थे, ताकि ‘आधी सच्चाई’ की जगह ‘पूरी सच्चाई’ सामने लाई जा सके, पीएम मोदी को उनकी इसरो (ISRO) वैज्ञानिकों से मुलाक़ात के वीडियो का एक संस्करण लेकर मैदान में उतरते हैं।
चंद्रयान-2 की लैंडिंग से सम्बंधित कुछ निराशाजनक ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसरो वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाने वाला वीडियो लोकप्रिय होने लगा। चंद्रयान-2 की ‘विफलता’ की खबरों से उत्साहित लेफ्ट-लिबरल वर्ग की खुशियाँ ज्यादा देर तक नहीं बनी रह सकीं। इसके बाद शुरू हुआ इस देश के लेफ्ट लिबरल्स का प्रलाप और प्रपंच।
पीएम मोदी द्वारा इसरो वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाने और उनका हौंसला बढ़ाने वाले वीडियो की काट के लिए मीडिया गिरोह और उनके अनुयायियों ने इस वीडियो के अलग-अलग चरण सोशल मीडिया पर पूरी सामर्थ्य के साथ पोस्ट करने शुरू कर दिए।
आज मीडिया गिरोह का मुद्दा चंद्रयान से ज्यादा मोदी की छवि को ख़राब करना था। इनके अन्नदाता राहुल गाँधी चुनावों से पहले कुछ इसी तरह की कसम खाते नजर आए थे कि उनकी जिंदगी का मात्र एक ही मकसद है- नरेंद्र मोदी की छवि खराब करना। और सबसे बड़ी बात ये कि यही मीडिया गिरोह अक्सर शिकायत करता नजर आता है कि देश में घटने वाली किसी भी घटना में नरेंद्र मोदी आखिर कैसे सबसे मुख्य चेहरा बन जाते हैं?
इन अलग-अलग वीडियो के जरिए यह साबित करने का प्रयास सोशल मीडिया पर तेजी से किया जा रहा है कि पीएम मोदी कैमरा के सामने वैज्ञानिकों से अलग तरह से बर्ताव करते हैं और कैमरा हटने के बाद दूसरी तरह से। यहाँ पर यही लेफ्ट-लिबरल विचारक वर्ग चाहता है कि मोदी इसरो वैज्ञानिकों को गले लगाएँ और फिर कभी छोड़ें ही नहीं। लेफ्ट-लिबरल विचारक वर्ग यहाँ तक कहते देखा जा रहा है कि आखिर वैज्ञानिक रो कैसे सकता है या फिर भावुक कैसे हो सकता है?
अब विषय पर वापस आकर हमें पता चलता है कि मोदी की छवि को खराब करने की कोशिश करने वाले वही लोग हैं जो रवीश कुमार की जीडीपी वाली क्लिप से परेशान और बदहवास नजर आ रहे थे। ये वही लोग हैं जो ऑड दिवस पर ‘मीडिया की पारदर्शिता’, ‘फेक न्यूज़’ जैसे मुहावरे उछालते हैं और इवन दिवस पर खुद इन्हीं हथकंडों को अपना रहे होते हैं।
चंद्रयान मिशन के ‘फेल’ होने पर वैज्ञानिकों के भावुक होने पर प्रश्न करने वाले लोगों की राय में भावुक होने का अधिकार सिर्फ दैनिक सस्ते इंटरनेट से विज्ञान के ही आविष्कार मोबाइल-इंटरनेट द्वारा देश की हर दूसरी घटना पर अपनी विचारधारा और प्रोपेगेंडा का जहर उगलने वालों तक ही सीमित होना चाहिए।
दरअसल, इन लोगों की कोई विचारधारा नहीं है। इनका मुद्दा पीएम मोदी की छवि से ही घृणा होना बन चुका है। इस घृणा में ये लोग इतने आगे निकल चुके हैं कि अब ये मीडिया गिरोह हर उस आदमी से नफरत करता है जो नरेंद्र मोदी से जुड़ा हुआ है या फिर मोदी का समर्थन करता है। लोगों का यही समूह हर उस संस्थान, व्यक्ति, घटना से नफरत करते हुए नजर आता है जो किसी भी तरह से मोदी के समर्थन में नजर आता है। यह मात्र कहने की बात नहीं बल्कि यही लोग इस तथ्य को खुद साबित करते आए हैं।
इस प्रगतिशील लेफ्ट-लिबरल विचारक वर्ग ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर डिस्कवरी चैनल तक से नफरत जाहिर की है और कारण स्पष्ट है कि किसलिए! इन लोगों ने भारतीय सेना की कर्तव्यनिष्ठा और क्षमता तक पर सवाल करने शुरू किए जब यह पीएम मोदी के साथ खड़े नजर आई। यह वर्ग हर उस मीडिया और विचार से नफरत करता है, जो मोदी को एक अच्छी छवि में दिखाता है।
विरोध को ही अपना स्वर बताने वाला यह पक्ष हमेशा एक समानांतर निंदा में सिमट कर रह गया है और यही वजह है कि यह देशवासियों के निशाने पर आ गया है। बदले में यह वर्ग अपनी कुंठा निकालत हुए उसे ‘ट्रोल’ और ‘भक्त’ होने की गालियाँ देता है। असल में यह प्रगतिशील लेफ्ट-लिबरल वर्ग का कभी भी सकारात्मक विचार था ही नहीं। यह वर्ग मात्र निंदा और घृणा से पैदा हुआ कुंठित लोगों का एक समूह है। अब विचार करने की जरूरत यह है कि आखिर इस वर्ग का यह नकाब कब तक इन्हें सच्चाई से दूर रख पाता है।
हाल ही में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम नरेश और शशि थरूर ने यही बात रखी थी कि हर मामले में नरेंद्र मोदी को खलनायक बना देने वाले लोगों को आत्मचिंतन की जरूरत है। अब ‘पूरी सच्चाई’ माँगने वाले ‘आधी सच्चाई’ शेयर करते हुए जब भी देखे जाएँ तो जरूर स्मरण करें कि क्या ऐसा करने से पहले उन्होंने आत्मचिन्तन किया है? वह यह भी खुद फैसला करें कि कहीं भक्त, ट्रोल और गोदी मीडिया, इन सभी विशेषणों के पहले हकदार वो खुद ही तो नहीं?
नरेंद्र मोदी और इसरो वैज्ञानिकों से मुलाक़ात का वह वीडियो, जिसके जरिए सत्यान्वेषी विचारक अपना ध्येय सिद्ध करते हुए अपनी नंगई का उदहारण पेश करते नजर आ रहे हैं –
अरसे बाद दिल्ली की सड़कों पर गैंगवार देखने को मिला। बदमाशों ने बसपा नेता को गोलियों से भून डाला। एक-एक कर के 26 बुलेट बसपा नेता के शरीर में धँस गए, जिससे उसकी मौत हो गई। इस हत्याकांड में 40 राउंड गोलियाँ चलीं और 200 मीटर की दूरी से फायरिंग की गई। घटना रविवार (सितम्बर 8, 2019) सुबह 11 बजे की है।
मारे गए बसपा नेता का नाम वीरेंदर मान उर्फ़ काले है। पुलिस के मुताबिक़, काले भी बदमाश था और उसके ख़िलाफ़ विभिन्न थानों में क़रीब 14 मामले दर्ज थे। वह 2013 में मायावती की बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर नरेला क्षेत्र से नगरपालिका का चुनाव भी लड़ चुका था। गोलियाँ लगने के बाद उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।
वीरेंदर उर्फ़ काले को मार गिराने की इस वारदात में 10 से अधिक अपराधी शामिल थे। पुलिस का कहना है कि व्यक्तिगत रंजिश के तहत मामले को अंजाम दिया गया है। हत्या करने के बाद सभी अपराधी भाग निकले। पुलिस को भी हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खँगाला जा रहा है।
विश्व आज तरक्की के नित नए कीर्तिमान गढ़ने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। आज के युग में प्रत्येक देश विकास की बयार पर सवार होकर नए-नए आयामों को खोजने की राह पर चल रहा है। लेकिन कुछ जगह ऐसी भी है, जहाँ विकास और तरक्की केवल शब्द मात्र ही हैं इससे अधिक और कुछ नहीं। इसकी वजह यह है कि यहाँ का समाज आज भी विकास के इस नए दौर में अपने क़दम रखने में सक्षम नहीं है। आज के तकनीकी युग में एक ऐसा तबका भी मौजूद है, जो अपनी उल-जलूल हरक़तों और क्रूरता से चर्चा का विषय बन जाता है।
ऐसा ही एक देश है पाकिस्तान। अफसोस कि हमारा पड़ोसी है! यहाँ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पठानी कुर्ता-पजामा में एक व्यक्ति लेटा हुआ है और दूसरा व्यक्ति प्रैक्टिकल कर के बता रहा है कि कैसे कबूतर अपने गुदाद्वार का प्रयोग करते हुए उक्त व्यक्ति की नाभि से हेपेटायटिस के कीड़े को खींच लेता है। आश्चर्य की बात यह है कि पाकिस्तान में अभी भी लोग ऐसी अजीबोगरीब चीजों पर भरोसा रखते हैं:
MashAllah, Doctor in Pakistan just made brilliant discovery of sucking out germs of Hepatitis C by using pigeon.
Apart from Imran khan this Karachi doctor too deserve Nobel Prize.
इसमें बीमारी के इलाज के लिए कबूतर का इस्तेमाल किया जाता है और इस इलाज प्रक्रिया में उस बेज़ुबान पक्षी को बेरहमी से गर्दन दबाकर मार दिया जाता है। इस क्रूरता का संबंध पाकिस्तान से है, जहाँ कराची का एक डॉक्टर हेपेटाइटिस-सी बीमारी का इलाज कबूतर के माध्यम से करता है। फ़र्ज़ी इलाज के नाम पर एक तरफ तो वो रोगियों का इलाज करने का ढोंग रचकर उन्हें ठगता है और दूसरी तरफ एक निर्दोष पक्षी की निर्मम हत्या कर देता है।
आपको बता दें कि इलाज के लिए कबूतरों का इस्तेमाल केवल पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि येरूशलम और इज़राइल में भी होता है। यहाँ हेपेटाइटिस के इलाज के लिए यह एक पारम्परिक तरीका है। इज़राइल में जब हेपेटाइटस का प्रकोप था तब उसके इलाज के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद रोगी की हालत में सुधार हो जाता था। हालाँकि, इस इलाज से ठीक होने का कोई वैज्ञानिक पहलू नहीं है, न ही कहीं पर इसे वैज्ञानिक या चिकित्सक समुदाय द्वारा मान्यता मिली है।
https://youtu.be/gD2L6Rg4T-8
पाकिस्तान में कबूतरों के गुदाद्वार से बीमारी का इलाज
आज के समय में इलाज की कई तकनीकें विकसित हो चुकी हैं लेकिन इलाज की इस तरह की वाहियात और मूर्खतापूर्ण तकनीक पर प्रश्नचिह्न लगना या लगाना स्वाभाविक ही है। बड़े आश्चर्य की बात है कि आज के दौर में भी इस तरह के तरीकों का चलन अस्तित्व में है। अब इसे अज्ञानता न कहें तो भला और क्या कहें, जहाँ दुनिया तरक्की के नए रास्तों का रुख़ कर रही है वहाँ इस तरह के परम्परागत तरीके सोचने पर मजबूर करते हैं कि समाज का यह तबका बौद्धिक स्तर पर कब परिपक्व होगा?
शायद कभी नहीं। या सदियों बाद। क्योंकि इस देश का विज्ञान और टेक्नॉलजी मंत्री का नाम फवाद चौधरी है। यह बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि जिस देश का विज्ञान और टेक्नॉलजी मंत्री ही यह कहता हो कि “हम दुनिया के बेस्ट सुसाइड बम बनाते हैं”, उस देश में वैज्ञानिक तरक्की किस आधार पर होगी, यह सोचना ही दुखद है… क्योंकि यह देश हमारा पड़ोसी है।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के माणिकतला में एक कार्यक्रम में परफॉर्म कर रही महिला गायक के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की गई। पीड़ित गायिका ने शुक्रवार (सितंबर 6, 2019) को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता भानु पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
घटना गुरूवार (सितंबर 5, 2019) रात की है। महिला सिंगर माणिकतला के मुरारीपुकुर क्लब में आयोजित प्रोग्राम में बैंड के साथ परफॉर्म करने पहुँची थी। आधी रात में ब्रेक लेने के लिए वह स्टेज से सटे ग्रीन रूम में गई। इसी दौरान भानु के साथ ही क्लब के कुछ मेंबर भी अंदर घुस आए और गायिका से बातचीत करने की कोशिश की।
पीड़िता ने बताया कि पहले उनलोगों ने किडनी की बीमारी से जूझ रहे उसके पिता के इलाज के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही। फिर उनलोगों ने ग्रीन रूम से सभी कालाकारों को बाहर निकाल दिया। एक कलाकार को तो धक्का भी दे दिया। इसके बाद बंदूक की नोंक पर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
पीड़ित महिला सिंगर का आरोप है कि आरोपित ने उसे तकरीबन आधे घंटे तक टॉर्चर किया। उसने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर काफी संख्या में लोग मौजूद थे, जिसमें महिलाएँ भी थीं। लेकिन, उसके चिल्लाने पर भी कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच जारी है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
फ़िल्म अभिनेत्री ज़ायरा वसीम की नई मूवी आ रही है। ज़ायरा वसीम ने जून 2019 में यह कह कर फ़िल्म इंडस्ट्री छोड़ने की घोषणा की थी कि अभिनय उन्हें अल्लाह और मज़हब से दूर कर रहा है। अब उनकी नई फ़िल्म आ रही है, जिसमें प्रियंका चोपड़ा और फरहान अख्तर भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फ़िल्म 11 अक्टूबर को रिलीज होगी। ज़ायरा वसीम की एक पुरानी फोटो भी वायरल हुई है, जिसमें वह प्रियंका और फरहान के साथ किसी बीच पर दिख रही हैं।
प्रियंका चोपड़ा ने इंस्टाग्राम पर इस फोटो को पोस्ट किया, जिसमें ज़ायरा वसीम भी दिख रही हैं और वह काफ़ी ख़ुश नज़र आ रही हैं:
जब ज़ायरा ने लम्बा-चौड़ा पोस्ट लिख कर अभिनय से दूरी बनाने का ऐलान किया था, तब कई लोगों ने अंदेशा जताया था कि वह अपनी अगली फ़िल्म के प्रमोशन के लिए जानबूझ कर कंट्रोवर्सी क्रिएट कर रही हैं। ज़ायरा की नई फ़िल्म ‘The Sky Is Pink’ का प्रमोशन चालू हो चुका है और इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई कुछ तस्वीरों में वह अपने को-स्टार्स के साथ दिखाई दी हैं। इस फोटो को ज़ायरा के सह-अभिनेता रोहित सुरेश सर्राफ ने इंस्टाग्राम पर डाला:
ट्विटर पर एक यूजर ने पूछा कि क्या ज़ायरा वसीम के लुन्गी पहनने से इस्लाम ख़तरे में नहीं आता? बॉलीवुड छोड़ने की घोषणा करते समय ज़ायरा ने कई जगह पाक किताब कुरान को उद्धृत करते हुए बताया था कि कैसे बॉलीवुड उन्हें कुरान के इल्म और सच के मार्ग से भटका रहा था। उन्होंने कबूल किया था कि अपने पेशे से वह खुश नहीं हैं।
Ye tou zaira wasim hai lungi pehen ke ???..Islam khatre mei nahi kya ab bibi?
एक अन्य यूजर ने पूछा कि क्या इस पहनावे से उनकी मज़हबी मान्यताएँ प्रभावित्र नहीं हो रही हैं? उसे जवाब देते हुए एक अन्य यूजर ने एक ‘विक्टिम कार्ड’ का फोटो ट्वीट किया। ज़ायरा के अभिनय छोड़ने की घोषणा के बाद जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने संभावना जताई थी कि उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के कहने पर ऐसा किया होगा।
लोगों ने पूछा कि जब ज़ायरा वसीम ने बॉलीवुड छोड़ दी है तो वह इन सेलेब्स के साथ क्या कर रही हैं? लोग अभी भी इस बात को लेकर कन्फ्यूजन में हैं कि ज़ायरा की बॉलीवुड छोड़ने की घोषणा कब से लागू होगी और कब तक चलेगी? कुछ लोगों ने तो यहाँ तक दावा किया कि वह आध्यात्मिक शांति के लिए बीच (समुद्र के किनारे) पर गई हैं।
महाभारत युद्ध में वर्णित घटोत्कच और बभ्रुवाहन को केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर-पूर्व से संबंधित बताया है। गुवाहाटी में नॉर्थ ईस्ट काउंसिल (एनईसी) के 68वें पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। केंद्रीय गृह मंत्री बनने के बाद शाह का नॉर्थ-ईस्ट का यह पहला दौरा है। वे ऐसे वक्त में असम पहुॅंचे हैं जब 31 अगस्त को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की रिपोर्ट जारी की गई है।
एनईसी को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने भगवान श्री कृष्ण और पांडव अर्जुन का संबंध भी उत्तर-पूर्व से जोड़ा। कहा कि अर्जुन की शादी भी यही मणिपुर में हुई थी। श्री कृष्ण के पोते का विवाह भी नॉर्थ ईस्ट मे हुआ था। साथ ही शाह ने उत्तर-पूर्व के लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी विशिष्ट संस्कृति के संरक्षण के लिए बने संविधान के अनुच्छेद 371 का भाजपा सरकार सम्मान करती है और उसके साथ वह छेड़छाड़ नहीं करेगी।
Union Home Min Amit Shah at 68th Plenary Session of North Eastern Council, in Guwahati: Mahabharat ke yudh ke andar, Babruvahan ho ya Ghatotkach ho,dono Northeast ke the. Arjun ki shadi bhi yahin Manipur mein hui thi.Sri Krishna ke pote ka vyaah bhi Northeast mein hua tha.#Assampic.twitter.com/7KnGPYhthV
महाभारत और स्कन्द पुराण के अनुसार पांडव भीम के बेटे घटोत्कच का विवाह भगवान श्री कृष्ण ने अपने हाथों मारे गए प्राज्ञज्योतिषपुर (महाभारत काल में असम का नाम) के राजा नरकासुर की बेटी मौरवी/अहिलावती के साथ तय किया था। इसी तरह महाभारत में अर्जुन के पांडवों को मिले वनवास के समय मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा से विवाह करने का भी ज़िक्र है। शाह इन्हीं का उल्लेख कर रहे थे। इसके अलावा भगवान श्री कृष्ण के पोते प्रद्युम्न ने भी असम के शासक बाणासुर की बेटी उषा से विवाह किया था।
‘371 का करते हैं हम सम्मान’
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से उत्तर-पूर्व की विशिष्ट संस्कृति के संरक्षण के लिए बने संविधान के अनुच्छेद 371 के भविष्य पर भी कुछ लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया था। यह अनुच्छेद भी उत्तर-पूर्व के राज्यों की विधानसभाओं को राष्ट्रीय संविधान में हुए संशोधनों को लागू करने के बारे में विवेकाधिकार देता है, लेकिन अधिकांश मामलों में यह 370 की तरह व्यापक नहीं, बल्कि केवल स्थानीय संस्कृति को सीधे-सीधे प्रभावित करने वाले विषयों तक ही सीमित है। इसलिए शाह ने भरोसा दिलाया कि इन प्रावधानों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
Union Home Minister Amit Shah at the 68th Plenary Session of North Eastern Council, in Guwahati: Article 371 of the Indian Constitution is a special provision. BJP government respects Article 371 & will not alter it in any way. #Assampic.twitter.com/Bkbn6824Wf
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह राजपूत ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने बीजेपी की तुलना महमूद गजनवी से की है। उन्होंने कहा कि गजनवी ने देश को लूटा और बीजेपी वाले पूरा खजाना लूटकर ले गए।
राजपूत रविवार (सितंबर 8, 2019) को ग्वालियर में थे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि महमूद गजनवी जब हिंदुस्तान लूटने के लिए आया तो सोमनाथ मंदिर को लूटा था। उसने रहम करके कुछ छोड़ दिया था, लेकिन भाजपा तो गजनवी की भी ग्रैंडफादर निकली। उसने तो प्रदेश में कहीं कुछ नहीं छोड़ा। शिवराज के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पिछले 15 सालों में ऐसा कोई विभाग नहीं छोड़ा जहाँ लूट नहीं की गई हो। पूरा प्रदेश खोखला हो गया है। इसी समस्या से सीएम कमलनाथ को जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश कर्ज के गर्त में है, पूरा प्रदेश खोखला है। जिसकी वजह से कमलनाथ सरकार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
“The BJP did not leave anything. It has proved to be the grandfather of Gaznavi,” Govind Singh said while addressing a press conference in Gwalior.https://t.co/RAHUN7zQq2
हालाँकि इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कैबिनेट मंत्री उमंग सिंघार के बीच जारी सियासी घमासान पर प्रतिक्रिया देने से वे बचते दिखे। राजपूत ने कहा, “दिग्विजय सिंह देश के बड़े नेता हैं और उमंग सिंघार भी प्रदेश के बड़े नेताओं में से एक हैं। ऐसे में इसको लेकर मैं कोई ज्यादा टिप्पणी नहीं करूँगा, ये कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के अधिकार क्षेत्र की बात है।”
प्रदेश के बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस के मंत्री भाजपा नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इसलिए इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि उनकी सरकार की 9 महीने की विफलताओं पर किसी का ध्यान न जाए।