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तुम्हारे बाप का ऑफिस है क्या?: मायावती के गठबंधन साथी ने डिप्टी कमिश्नर को धमकाया

पंजाब में लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस द्वारा डिप्टी कमिश्नर के साथ बदतमीजी करने का मामला सामने आया है। मामला गुरदासपुर का है। दोनों की कहासुनी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में विधायक बैंस अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं। ये झड़प डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में ही हुई। विधायक के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया गया है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि विधायक ने डिप्टी कमिश्नर से कहा- “ये तेरे बाप का ऑफिस है क्या?” इस पर डिप्टी कमिश्नर ने उन्हें टोकते हुए कहा कि ये जो आप बाप-बाप की रट लगाए बैठे हैं, यह सही भाषा नहीं है। सिमरजीत सिंह के भाई भी विधायक हैं और लुधियाना की राजनीति में बैंस बंधुओं का ख़ासा दबदबा है। एसडीएम की शिकायत के बाद सिमरजीत बैंस के ख़िलाफ़ बदसलूकी का मामला दर्ज हुआ है।

सिमरजीत सिंह बैंस लोक इंसाफ पार्टी के संस्थापक हैं। वह 2017 पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन में रह चुके हैं। फिलहाल उनकी पार्टी पंजाब डेमोक्रेटिक अलायन्स का हिस्सा है, जिसमें मायावती की बसपा, वामपंथी सीपीआई और अन्य पार्टियाँ शामिल हैं। इस गठबन्धन ने मायावती को प्रधानमंत्री चेहरा घोषित कर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था।

‘हम दुनिया के बेस्ट सुसाइड बम बनाते हैं’ – पाकिस्‍तान के विज्ञान और टेक्‍नॉलजी मंत्री फवाद चौधरी

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद से बौखलाया पाकिस्तान सोशल मीडिया पर ट्रोल आर्मी बनकर रह गई है। इस काम में पाकिस्तान के बच्चे से लेकर वहाँ की सरकार के मंत्री तक शामिल हैं। हालाँकि पाकिस्तान में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो पाकिस्तान के मंत्रियों की बेवकूफी पर शर्मिंदा हैं।

इस बार भारत के मिशन चंद्रयान पर हुए ‘ट्वीट वॉर’ की शुरुआत पाकिस्‍तान के विज्ञान और टेक्‍नॉलजी मंत्री फवाद चौधरी ने की है। लेकिन उनका दाँव उल्टा पड़ गया। न सिर्फ चंद्रयान पर उन्हें जम कर गालियाँ पड़ीं बल्कि उनका 2013 का एक ऐसा ट्वीट ढूँढ लाया गया, जिससे वो पूरी दुनिया के लिए मनोरंजन का जरिया बन गए हैं।

पाकिस्‍तान के विज्ञान और टेक्‍नॉलजी मंत्री फवाद चौधरी ने नवंबर 06, 2013 को एक ट्वीट में लिखा था- “We make world’s best suicide bombers” यानी, “हम दुनिया के सबसे बेहतरीन आत्मघाती बम बनाते हैं।”

फवाद खान के इस ट्वीट के सामने आते ही ट्विटर यूजर्स ने उनका जमकर मजाक बनाया और फवाद खान ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। इसके बाद ट्विटर यूज़र्स ने फवाद खान की जमकर क्लास लगाई और अपनी प्रतिक्रियाएँ कुछ इस तरह से दी-

ट्विटर यूजर @rose_k01 ने इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए फवाद खान के लिए लिखा- “क्या हुआ ट्वीट क्यों डिलीट कर दिया मियाँ? आपने सुसाइड बम बनाने के पाकिस्तान के मुख्य पेशे के बारे में बताने वाला ट्वीट डिलीट क्यों किया?”

ऑपइंडिया CEO राहुल रौशन ने भी इसका मजाक बनाते हुए ट्वीट में लिखा- “Endians ने पाकिस्तान की विज्ञान और तकनीकी में हासिल की हुई उपलब्धियों को बताने वाले ट्वीट को डिलीट करने के लिए उसे मजबूर किया।”

जम्‍मू-कश्‍मीर पर भारत के फैसले से बौखलाए पाकिस्‍तान के नेता और मंत्री लगातार अपनी इन्हीं हरकतों की वजह से हास्य का विषय बन चुके हैं। इसी क्रम में कुछ समय पहले ही पाकिस्‍तानी सेना के प्रवक्‍ता आसिफ गफूर ने भी भारत पर निशाना साधने की कोशिश की थी लेकिन खुद ही मजाक बन गए। गफूर ने भारत के चंद्रयान-2 पर 900 करोड़ रुपए के खर्च को 900 अरब बता दिया।

इससे पहले भी चंद्रमा की सतह से ठीक पहले ‘विक्रम’ के खो जाने के एक ट्वीट पर फवाद चौधरी ने लिखा- “जो काम आता नहीं, पंगा नहीं लेते ना….डियर इंडिया।”

फवाद चौधरी ने एक भारतीय ट्वीट पर रिप्‍लाई करते हुए लिखा- “सो जा भाई, चंद्रमा की बजाय मुंबई में उतर गया खिलौना।” पाकिस्‍तानी मंत्री फवाद चौधरी के इस ट्वीट के बाद ट्विटर पर कॉमेंट की बाढ़ सी आ गई।

एक यूजर ‘बाला’ ने लिखा- “तुम पाकिस्‍तानी लोग केवल बकरियों और टमाटर के सपने देखो। जाओ और दुनिया के हरेक राजधानी में भीख माँगने का काम जारी रखो।”

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फेक न्यूज़ फ़ैलाने में फँसे ‘पत्तलकार’, दलितों पर अत्याचार की खबर निकली प्रोपगेंडा

उत्तर प्रदेश में पुलिस ने फेक न्यूज़ फ़ैलाने में दो पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज की है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने बिजनौर के तीतरवाला बासी गाँव के दलित परिवारों के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई थी कि वे अत्याचारों से आजिज़ आ गाँव छोड़ने की धमकी दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनमें से एक स्थानीय अख़बार के साथ काम करता है और दूसरा स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल का रिपोर्टर है।

विशाल और राशिद नामक इन पत्रकारों ने दावा किया था कि गाँव के हैंडपंप से पानी निकालने से रोके जाने पर तीतरवाला बासी गाँव का एक दलित परिवार गाँव छोड़ने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने दलितों को पानी लेने से रोकने का आरोप दलित समुदाय के ही एक प्रभावशाली परिवार पर लगाया था।

बिजनौर के एसपी (शहर) लक्ष्मी निवास मिश्रा के मुताबिक विशाल और राशिद द्वारा चलाई गई खबरों की तफ्तीश करने पर पुलिस ने पाया कि कोई भी दलित परिवार गाँव नहीं छोड़ रहा है। पुलिस के दावे के मुताबिक पत्रकारों ने रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि दलितों ने अपने घर के आगे ‘घर बिकाऊ है’ का बोर्ड पत्रकारों की सलाह पर ही लगाया था। पत्रकारों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है।

इसके अलावा आजमगढ़ में भी एक पत्रकार को प्राइमरी स्कूल टीचर को धमकाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जनसंदेश टाइम्स के लिए स्ट्रिंगर (फ्रीलांस पत्रकार) के तौर पर काम करने वाले संतोष कुमार जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल प्रशासन को धमकी दे छात्रों और शिक्षकों की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल किया। सरकारी स्कूल शिक्षकों से वसूली की।

आजमगढ़ के फूलपुर स्थित एक स्कूल के प्रिंसिपल राधेश्याम यादव ने जायसवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यादव के मुताबिक जायसवाल ने छात्रों के हाथ में झाड़ू पकड़ाकर फोटो खींची थी। जायसवाल को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

Breaking: विक्रम लैंडर की मिली लोकेशन, ऑर्बिटर से मिली थर्मल इमेज – इसरो प्रमुख

इसरो प्रमुख के शिवन ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए बताया कि इसरो ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की स्थिति का पता लगा लिया है। चाँद की सतह पर विक्रम लैंडर की थर्मल इमेज ऑर्बिटर से मिल गई है। लेकिन उससे (विक्रम लैंडर से) सम्पर्क अभी भी स्थापित नहीं हो पा रहा है। शिवन ने कहा कि सम्पर्क स्थापित होने पर मीडिया को सूचित कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि, भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर अपनी मंजिल से महज 2.1 किलोमीटर पहले थम गया था। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी से पहले कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। 

(यह डेवलपिंग स्टोरी है। और जानकारी मिलने पर इसे अपडेट किया जाएगा। )

₹14,500 करोड़ के बैंक लोन फ्रॉड मामले में अहमद पटेल के बेटे को ED ने फिर किया तलब

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के करीबी और राज्यसभा सांसद अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलब किया है। ईडी ने फैसल पटेल को गुरुवार (सितंबर 12, 2019) को पूछताछ के लिए पेश होने का आदेश दिया है।

ईडी गुजरात की कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक के संचालक संदेसरा बंधुओं के साथ अहमद पटेल के बेटे और दामाद के संबंधों और लेनदेन की जाँच कर रही है। बता दें कि, गुजरात में फॉर्मा क्षेत्र की इस कंपनी का संचालन वडोदरा का संदेसरा परिवार करता है। आरोप है कि 14,500 करोड़ रुपए के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में दवा कंपनी और उसके प्रमुख प्रवर्तक नीतिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा आरोपित हैं। फिलहाल, ये सभी फरार हैं। संदेसरा परिवार की प्रमुख राजनीतिज्ञों के साथ नजदीकी की भी प्रवर्तन निदेशालय जाँच कर रहा है। सीबीआई और आयकर विभाग भी इनके खिलाफ भ्रष्टाचार और कर चोरी के मामले में जाँच कर रहा है।

संदेसरा बंधुओं ने कारोबार बढ़ाने की बात कहकर स्टर्लिंग बायोटेक के नाम पर आंध्रा बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह से 5,383 करोड़ रुपए का लोन लिया था। मगर उन्होंने वापस नहीं किया। बैंकों की शिकायत पर सीबीआई ने अक्टूबर 2017 में स्टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटर नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था।

ईडी ने जुलाई में अहमद पटेल के दामाद इरफान सिद्दीकी का बयान भी रिकॉर्ड किया था। फिर इसके बाद संदेसरा समूह के कर्मचारी सुनील यादव से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी। बताया जाता है कि सुनील यादव ने ही
फैसल पटेल और संदेसरा बंधुओं के बारे में बताया था। स्टर्लिंग बायोटेक से जुड़ी लोन की धोखाधड़ी की कीमत करीब 14 हजार 500 करोड़ रुपए है और इस मामले में ईडी फैसल पटेल से पहले भी पूछताछ कर चुकी है।

‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ गाने वाले ‘ढोंगाचार्य’ को चाहिए चंद्रयान-2 की ‘असफलता’ का सबूत

कॉन्ग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन को चंद्रयान-2 की ‘असफलता’ के सबूत चाहिए। साथ ही वह विपक्ष से भी नाराज़ हैं, क्योंकि वह चंद्रयान-2 की नाकामी पर सरकार से सबूत की माँग नहीं कर रहा। 2014 में संभल और 2019 में लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ कर जमानत जब्त करा चुके प्रमोद कृष्णन इससे पहले भी विवादित बयान देते रहे हैं। अपने आप को संत बताने वाले प्रमोद कृष्णन ने ट्विटर पर लिखा:

“सर्जिकल ‘स्ट्राइक्स’ और बालाकोट हमले के ‘सबूत’ माँगने से हुए भयंकर नुक़सान की वजह से विपक्ष इतना ‘भयभीत’ है कि चंद्रयान-2 की ‘असफलता’ पर भी कोई ‘सवाल’ नहीं उठा रहा।”

संभल स्थित कल्कि धाम के पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णन कॉन्ग्रेस की सभाओं में भी काफ़ी सक्रिय रहते हैं और यूपी में उन्हें पार्टी का आध्यात्मिक चेहरा माना जाता है। प्रमोद कृष्णन द्वारा यह कहना ग़लत है कि चंद्रयान-2 असफल हुआ, क्योंकि लैंडर विक्रम का चाँद की सतह पर उतरना इस मिशन का एक हिस्सा मात्र था, पूरा चन्द्रयान-2 मिशन की व्यापकता और उद्देश्य इससे कहीं बहुत बड़ा है।

इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 अपने लक्ष्य का 95% प्राप्त करने में सफल रहा है। पूरे देश ने वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाते हुए उन्हें आगे के मिशन और प्रोजेक्ट्स के लिए शुभकामनाएँ दी। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने भी इसरो वैज्ञानिकों की तारीफ करते हुए बयान दिया। ऐसे में, प्रमोद कृष्णन का ऐसा बोलना ख़ुद उन्हीं की पार्टी लाइन से अलग है।

प्रमोद कृष्णन लोगों के बीच अपने उस वीडियो की वजह से भी जाने जाते हैं, जिसमें उन्होंने उदित नारायण के गाने ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ को गाया था। मंच पर गायकों के साथ स्टेज साझा करते हुए उन्होंने झूमते हुए यह गाना गया था। आप भी उनकी इस परफॉरमेंस का आनंद उठा सकते हैं:

तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त: प्रमोद कृष्णन की आवाज़ में

प्रमोद कृष्णन कॉन्ग्रेस के टिकट पर संभल और लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें दोनों बार बुरी हार का सामना करना पड़ा था। जब भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी एक बड़े और महत्वपूर्ण मिशन को 95% सफल बता रही है, तब किसी नेता का इस तरह से बयान देना कहाँ तक उचित है? प्रमोद कृष्णन हमेशा साधु के वेश में रहते हैं और सफ़ेद वस्त्र पहनते हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्र उन्हें ‘ढोंगाचार्य’ कहते हैं।

वैसे, प्रमोद कृष्णन ने यह साफ़ नहीं किया कि उन्हें किस प्रकार का सबूत चाहिए? अभी इसरो अगले 14 दिनों तक लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करने की कोशिश करेगा। अभी तक इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है कि विक्रम ने क्रैश लैंडिंग की। ऐसे में प्रमोद कृष्णन सबूत के रूप में क्या चाहते हैं, यह सोचने लायक बात है।

भारत को गाली देना छोड़ अपने बारे में सोचें पाकिस्तानी: USA में पाक के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने अपने देश के लोगों को नसीहत दी है। वह 2008-11 तक अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे थे। इसके अलावा वह कई पुस्तकें भी लिख चुके हैं। अभी वह वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में ‘दक्षिण एवं मध्य एशिया’ के डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। हुसैन ने पाकिस्तानियों को सलाह दी कि वे भारत के बजाय खुद की चिंता करें।

हुसैन हक्कानी ने ट्विटर पर लिखा कि पाकिस्तानियों को भारत या भारतीयों से प्रतिस्पर्धा करने, उनका मजाक उड़ाने, उनके साथ अपनी तुलना करने की बजाय अपने राष्ट्रीय हितों पर विचार करना चाहिए। हक्कानी ने कहा कि भारत या भारतीयों की खिल्ली उड़ाने, उन्हें गालियाँ देने, उनका अपमान करने या फिर उन्हें बदनाम करने की जगह पर पाकिस्तानियों को अपने देश के बारे में सोचना चाहिए।

हुसैन ने अपनी नई पुस्तक ‘Reimagining Pakistan: Transforming a Dysfunctional Nuclear State’ का नाम टैग करते हुए अपने विचार रखे। हुसैन हक्कानी की इस ट्वीट पर कई पाकिस्तानियों ने भी इस बात पर नाराज़गी जाहिर की कि पाकिस्तानी नेता और कुछ लोग भारत के चंद्रयान-2 मिशन का भी मज़ाक उड़ा रहे हैं।

हुसैन हक्कानी ‘Pakistan Between Mosque & Military’ और ‘Magnificent Delusions’ नामक पुस्तकों के लेखक भी रह चुके हैं। बता दें कि हाल ही में पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी ने चंद्रयान-2 का मजाक बनाया था, जिसके बाद न सिर्फ़ भारत बल्कि पाकिस्तानियों से भी उन्हें लताड़ मिली थी।

J&K पर दुष्प्रचार को लेकर अमेरिका में ही घिरा वाशिंगटन पोस्ट, कश्मीरी पंडितों ने किया प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर को लेकर विदेश मीडिया की भ्रामक रिपोर्टिंग को सरकार कई बार खारिज कर चुकी है। अब इस कारण से अमेरिका में वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ आवाज उठने लगी है। कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने अमेरिकी दैनिक द वाशिंगटन पोस्ट में पिछले कुछ दिनों से प्रकाशित होने वाली खबरों का विरोध किया है। दुनियाभर में समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा (जीकेपीडी) ने इसके विरोध में आमेरिका में द वाशिंगटन पोस्ट के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।

उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के निष्क्रिय हो जाने के बाद से अखबार लगातार एकतरफा और भेदभावपूर्ण खबरें प्रकाशित कर रहा है। उन्होंने अखबार पर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाते हुए कहा, “वाशिंगटन पोस्ट मीडिया की खबरों में कहीं यह जिक्र नहीं है कि इस अराजक राज्य में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ सबसे जघन्य नरसंहार हुआ जिससे उन्हें निर्वासित होना पड़ा।”

कश्मीरी पंडितों ने वाशिंगटन पोस्ट को दिए एक ज्ञापन में कहा कि उनकी खबरों में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए से हुई कानूनी अराजकता का कोई जिक्र नहीं किया गया है। अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से वाशिंगटन में एकत्रित हुए कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए फैसले को साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाए और प्रदर्शन के आयोजक ने अखबार पर आरोप लगाया कि वाशिंगटन पोस्ट मीडिया की खबरों में कहीं इसकी बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि इस राज्य में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ सबसे जघन्य नरसंहार हुआ था, जिसकी वजह से उन्हें निर्वासित होना पड़ा था।

रैली के मुख्य संयोजक मोहन सप्रू ने कहा, “वॉशिंगटन पोस्ट की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग में इस सच को नजरअंदाज किया गया कि अनुच्छेद 370 और 35ए के कारण अल्पसंख्यक, महिलाएँ और समाज के कमजोर वर्ग के लोग लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रहे जबकि कश्मीर घाटी काबू से बाहर भ्रष्टाचार, अलगावववाद की जमीन बन गई।”

वहीं, वाशिंगटन पोस्ट की खबरों को न्यायसंगत ठहराते हुए विदेशी खबरों के संपादक डगलस जेह्ल ने कश्मीर पर फैसले के बाद अखबार में छपी खबरों को निष्पक्ष, सटीक और व्यापक बताया। बता दें कि, कश्मीरी पंडित के प्रदर्शन के विरोध और वाशिंगटन पोस्ट के समर्थन में पाकिस्तानी अमेरिकियों, अलगाववादी कश्मीरियों और अलगाववादी खालिस्तानियों के एक समूह ने मूक प्रदर्शन किया। कुछ पाकिस्तानी समर्थक प्रदर्शनकारियों ने भारतीय पत्रकारों को उनके प्रदर्शन को कवर करने से भी रोका। साथ ही अमेरिकी मुस्लिमों के एक समूह ने वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने प्रदर्शन किए। 

स्टालिन ने फ़र्ज़ी प्रश्न-पत्र के आधार पर CBSE और केंद्रीय विद्यालय पर लगाया दलितों के अपमान का आरोप

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने एक प्रश्न-पत्र को लेकर न सिर्फ़ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय बल्कि सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालयों पर भी निशाना साधा। एमके स्टालिन ने एक प्रश्न-पत्र का फोटो ट्वीट किया। उन्होंने बताया कि यह प्रश्न-पत्र केंद्रीय विद्यालय की छठी कक्षा की परीक्षा का है। इसमें पूछा गया था कि दलित का अर्थ क्या है? इस प्रश्न के उत्तर में 4 विकल्प इस प्रकार दिए गए थे- विदेशी, अछूत, मिडिल क्लास, अपर क्लास। स्टालिन ने आरोप लगाया कि यह प्रश्न-पत्र साम्प्रदायिकता और भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है।

अब सीबीएसई ने इस सम्बन्ध में स्पष्टीकरण जारी किया है। बोर्ड की प्रवक्ता रमा शर्मा ने साफ़ कर दिया कि स्टालिन ने जिस प्रश्न-पत्र का फोटो ट्वीट किया है, उसे बोर्ड द्वारा नहीं सेट किया गया है। सीबीएसई ने कहा कि वह निचली कक्षा की परीक्षाओं के लिए प्रश्न-पत्र नहीं तैयार करता है और यह पूरी तरह से स्कूल की ही ज़िम्मेदारी होती है। डीएमके प्रमुख ने दावा किया कि इस प्रश्न-पत्र में मुस्लिमों के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने भी स्टालिन के दावों की पोल खोल दी है। केवीएस ने कहा कि स्टालिन ने जिस प्रश्न-पत्र को केंद्रीय विद्यालय का बता कर ट्वीट किया, वह फ़र्ज़ी है। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने लोगों से आग्रह किया कि वे इस फ़र्ज़ी प्रश्न-पत्र को शेयर कर के आगे न बढ़ाएँ। सीबीएसई और केवीएस के बयान के बाद लगता है कि स्टालिन ने किसी छोटे-मोटे स्कूल का प्रश्न-पत्र ट्वीट किया या फिर इसे जान-बूझकर किसी शरारती तत्व ने फैलाया था।

केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा जारी किया गया स्पष्टीकरण: फ़र्ज़ी है स्टालिन द्वारा ट्वीट किया गया प्रश्नपत्र

केंद्रीय विद्यालय संगठन ने कहा कि अभी तक किसी भी प्रकार का ऐसा सबूत भी नहीं पेश किया गया है, जिससे पता चले कि यह प्रश्न-पत्र केंद्रीय विद्यालय का है। तमिलनाडु के विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि यह तमिलनाडु या पुडुचेरी के किसी केंद्रीय विद्यालय का है। केंद्रीय विद्यालय ने चेन्नई क्षेत्र के अपने सभी 49 स्कूलों में पता किया लेकिन यह प्रश्न-पत्र उनमें से कहीं का नहीं है।

लालू के लाल से टूटी आस तो राजद नेता ने भी कहा- एनडीए छोड़े तो ठीके हैं नीतीश कुमार

बिहार में चल रहे पोस्टर वार के बीच जदयू और राजद का नया स्लोगन आया है। ‘क्यूॅं करे विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार’ को आगे बढ़ाते हुए जदयू ने ‘क्यूॅं करे विचार, जब है ही नीतीश कुमार’ के नारे से नया पोस्टर जारी किया है। मुख्य विपक्षी दल राजद ने भी जवाब में ‘क्यों न करें विचार, बिहार जो है बीमार’ को विस्तार देते हुए ‘क्यूॅं न करे विचार’ के नाम से आरोपों की झड़ी लगा दी है।

लेकिन, इस बीच राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के एक बयान से जाहिर होता है कि अपने इस कैंपेन से कमाल होने की उम्मीद राजद को भी नहीं है। तिवारी का कहना है कि यदि बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार एनडीए छोड़ देते हैं तो उन्हें नेता के रूप में स्वीकार करने में महागठबंधन को कोई समस्या नहीं होगी।

उन्होंने कहा, “अगर नीतीश कुमार साम्प्रदायिकता के खिलाफ कोई भी कदम उठाते हैं और यदि हम उसका समर्थन नहीं करते हैं तो हम खत्म हो जाएँगे।” तिवारी ने कहा कि नीतीश के एनडीए छोड़ने पर राजद ने साथ नहीं दिया तो वह बीजेपी के एजेंट की तरह दिखेगी। नीतीश को साथ लाने को राजद कितनी उत्सुक है इसका पता इस बात से भी चलता है कि बकौल तिवारी राजद 2015 की शर्तों पर ही इस बार भी विधानसभा चुनाव में उतरने को तैयार है।

उल्लेखनीय है कि 2015 का विधानसभा चुनाव जदयू और राजद ने मिलकर लड़ा था और जीत हासिल की थी। यह बात दूसरी है कि नतीजों के बाद राजद नेता यह दावा करने से नहीं चूके कि ऐसा लालू के करिश्मे का कारण हो पाया। बाद में राजद की शर्तों के सामने घुटने टेकने से इनकार करते हुए नीतीश एनडीए में लौट आए थे।

अब राजद अपने कैंपेन में जो आरोप नीतीश पर लगा रही है वह पुराने ही हैं। पिछले चुनावों में ये बेअसर साबित हुए हैं। यही कारण है कि कल तक लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव के कसीदे पढ़ने में नहीं अघाने वाले नेता भी अब जमीनी हकीकत भॉंप ऐसे चेहरे की तलाश कर रहे हैं जो चुनावी नैया पार लगा सके। विपक्षी गठबंधन के हिस्सा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी तो हाल में कई बार तेजस्वी के नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं। मांझी के बयान का राजद के अलावा गठबंधन के अन्य दल ने अब तक विरोध भी नहीं किया। यह बताता है कि तेजस्वी की क्षमता को लेकर महागठबंधन के दल कितने असमंजस में हैं। ऐसे में तिवारी के बयान ने जाहिर कर दिया है कि यह बेचैनी राजद के भीतर भी है।

यही कारण है कि तिवारी के प्रस्ताव को जदयू भाव नहीं दे रही। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी का कहना है कि उनकी पार्टी एनडीए में बहुत सहज है। उन्होंने कहा कि राजद नेता इसलिए इस तरह की बातें कर रहे हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में लोगों ने जाति और गोत्र की उनकी राजनीति को ठुकरा दिया था।