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‘मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है BJP सरकार, हम क्यों बने सेकुलरिज्म के कुली?’

विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले हैदराबाद के सांसद और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर से भाजपा पर निशाना साधा है। इस कार्यक्रम में उन्होंने मुस्लिम समुदाय को कई तरह की हिदायतें दी हैं।

उन्होंने कहा, “बीजेपी की सरकार भारत के मुस्लिमों को सेकंड क्लास नागरिक बनाना चाहती है और भारत के मुस्लिम इस बात का एहसास नहीं करते। भारत के मुस्लिमों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि हम बहुत समय तक सेकुलरिज्म के कुली नहीं बन सकते तो हमारा वोट सेक्युलर पार्टियों के पास क्यों जाना चाहिए? मुस्लिमों को अपने समुदाय में राजनीतिक नेतृत्व खोजना चाहिए। यह इकलौता ऐसा रास्ता है जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमें संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं।”

ओवैसी ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार भारत के मुस्लिमों को सेकंड क्लास सीटिजन्स बनाना चाहती है और मुस्लिम समुदाय यह बात समझ नहीं रहा है।

मुस्लिम समुदाय को चेताते हुए ओवैसी ने कहा कि वो अपना नेतृत्व बनाएँ, अपने आपको बदलें, क्योंकि ऐसा करने के लिए कोई आसमान से नीचे नहीं उतरेगा जो आपको जन्नत ले जाएगा। मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि सभी को मेहनत करनी होगी और इस बात को अच्छे से समझना होगा कि लोकतंत्र में वोट का काफ़ी महत्व है।

भारत की लोकतंत्र व्यवस्था का संदर्भ लेते हुए ओवैसी ने मुस्लिमों को चेताया कि लोकतंत्र में केवल वोट देने का ही नहीं बल्कि चुनाव में खड़े होने का भी अधिकार है। ओवैसी ने ज़ोर देते हुए कहा कि चुनाव भले ही कोई भी हो, उसमें भागीदारी ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वह आज हारे हैं या कल हारेंगे लेकिन मुस्लिमों को अपने संवैधानिक अधिकारों का आक्रामक तरीके से प्रयोग करना आना चाहिए।”

अशफ़ाक ने काट खाई सास की नाक, उसके पिता ने काट डाले कान: दहेज़ न मिलने से बौखलाए थे पिता-पुत्र

उत्तर प्रदेश के बरेली से रविवार (25 अगस्त) को एक चौंका देने वाली ख़बर सामने आई है। इस ख़बर के अनुसार दहेज न दिए जाने पर अशफ़ाक ने अपनी सास की नाक काट खाई और अशफ़ाक के पिता ने उनका कान काट दिया। आरोपित के ख़िलाफ़ बरेली छावनी पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा-323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 326 (स्वेच्छा से किसी ख़तरनाक हथियार से चोट पहुँचाना) और 504 (जानबूझकर विश्वास भंग करने के इरादे से अपमान करना) के तहत FIR दर्ज की गई है।

गंभीर रूप से घायल महिला को ज़िला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उसे सर्जरी के लिए दिल्ली रेफर कर दिया गया। ख़बर के मुताबिक़, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, गन्था रहमान ने अपनी बेटी चाँद बी का निक़ाह लगभग एक साल पहले बरेली के एक प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद अशफ़ाक से करवाया था।

दूल्हे के परिवार ने रुपए की माँग की थी। निक़ाह के समय दहेज के रूप में 10 लाख रुपए दहेज के तौर पर दिए गए थे। लेकिन, चाँद बी द्वारा एक बेटी को जन्म दिए जाने के बाद ससुराल वालों ने उसके घर से अतिरिक्त 5 लाख रुपए की माँग की। रहमान ने इस राशि के भुगतान से इनकार कर दिया। इसके बाद उसकी बेटी के साथ ससुराल वालों ने मार-पिटाई शुरू कर दी।

इस बारे में जब पिता को पता चला तो वो अपनी बीवी गुलशन के साथ बेटी के ससुराल पहुँचे। लेकिन जल्द ही आपसी बातचीत मारपीट में तब्दील हो गई। अशफ़ाक ने अपनी सास की नाक काट खाई, जबकि अशफ़ाक के पिता इज़हार ने चाकू से उसका कान काट दिया। पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद, बाप-बेटे की यह जोड़ी गुलशन को बेहोश हालात में छोड़कर फ़रार हो गई। बाद में पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया।

स्टेशन हाउस अधिकारी अवनीश सिंह यादव ने कहा, “घटना की जानकारी मिलने पर, हम पीड़िता को अस्पताल ले गए और उन्हें प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाई। पाँच परिचितों और एक अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई है और जल्द ही आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।”

मलेशिया में 519 आतंकी गिरफ़्तार: भगोड़े जाकिर नाइक के बोलने पर पहले ही लगा चुका है पाबन्दी

आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला जाकिर नाइक जहाँ मलेशिया में शरण लिए हुए है। ऐसे में मलेशिया के गृह मंत्री ने बयान दिया है कि 519 लोगों को जुलाई तक आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया है। इनमें मलेशियाई नागरिक भी शामिल हैं और विदेशी नागरिक भी, लेकिन सोमवार (26 जुलाई) को यह बयान देते हुए हालाँकि गृह मंत्री मुहयिद्दीन यासीन ने विदेशियों और मलेशियाईयों की संख्या अलग-अलग नहीं बताई

बता दें कि आतंकी गतिविधियों के आरोप में भारत में वांछित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक के बारे में भी मलेशिया के गृहमंत्री एम. यासीन ने कहा है कि वह कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, डॉ. जाकिर नाइक भी नहीं।  इससे पहले मलेशिया की सरकार ने जाकिर नाइक के भाषण देने पर रोक लगा दी थी। जाकिर भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोपित है, और काफी लम्बे समय से फरार होकर मलेशिया में शरण लिए हुए है।

“इन्हें स्थापित कानूनों के अंतर्गत ही हिरासत में लिया गया है, चाहे वह Prevention of Terrorism Act 2015 (POTA) हो या फिर Security Offences (Special Measures) Act 2012 (SOSMA) हो।” यासीन कुआलालम्पुर में एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। “इन लोगों को ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है जिन्हें हम कानूनी रूप से आतंकी मानते हैं, और इन गतिविधियों का प्रभाव (आतंकवाद का ) खतरा बढ़ाने वाला होता है।” यासीन ने इनमें से कुछ लोगों के पहले भी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विभिन्न अपराधों के दोषी करार दिए जाने का दावा भी किया।

चैनल न्यूज़ एशिया के अनुसार मलेशियाई पुलिस के इंस्पेक्टर-जनरल अब्दुल हमीद बडोर ने आतंकरोधी छापों के दौरान बरामद पिस्तौलों और कुछ अन्य हथियारों और आतंकी सामग्रियों का प्रदर्शन भी किया। इस साल मई में मलेशिया पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के विघटन के बाद अलग हुए तीन ‘लोन वुल्फ़’ जिहादियों को गिरफ़्तार कर लिया है, जो एक बड़े ‘लोन वुल्फ़’ जिहादी गुट का हिस्सा थे। मलेशिया पुलिस के अनुसार इस गुट के बाकी जिहादियों को उन्होंने पहले ही धर-दबोचा था, और केवल यही तीनों मई तक उनसे बचते फिर रहे थे। उनके अनुसार यह गुट मलेशिया की राजधानी कुआलालाम्पुर स्थित क्लांग घाटी में बड़े पैमाने पर हिंसा और राजीनीतिक हत्याएँ करने की योजना बना रहा था।

मालूम हो कि आईएस का केंद्रीय संगठन इराक-सीरिया में नाटो, रूस, सीरिया सरकार, यज़ीदी विद्रोहियों आदि के हमले में ध्वस्त होने के बाद जो जिहादी मारे जाने या पकड़े जाने से बच निकले, वे अपने-अपने देशों को लौट गए हैं, जिहाद फ़ैलाने के आईएस और उसके सरगना बगदादी के संदेश के साथ। केवल मुशरिकों, काफिरों आदि को मारने की हिंसक विचारधारा ही इनका एक मात्र समान-सूत्र (common thread) है; इसके अलावा इनका न कोई आका या स्थानीय नेटवर्क है, न एक-दूसरे से जान-पहचान या सम्पर्क। इसलिए कोई अनहोनी होने से पहले इनकी पहचान करना, उन्हें पकड़ना या मार गिराना बेहद मुश्किल है।

मई के ही आखिर में मलेशियाई अधिकारियों ने तीन और आतंक के संदिग्धों को पकड़ने की घोषणा की थी, जिनमें से एक मलेशियाई ठेकेदार था, जिसे कुआलालाम्पुर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिस्र के रास्ते सीरिया जाने की फ़िराक में पकड़ लिया गया।

वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया के एक दूसरे पोर्टल नाम न्यूज़ नेटवर्क (NNN) ने मलेशियाई गृह मंत्री मुहयिद्दीन के ही हवाले से यह दावा भी किया है कि एक ऐसे बच्चे और उसके माता-पिता के देश और घर लौटने का प्रार्थनापत्र उन्हें मिला है, जो सीरिया में आईएस के जिहाद में हिस्सा लेने के शक में गिरफ़्तार हैं।

#Metoo में फँसा इस्लामिक स्कॉलर तारिक रमादान अब महिला पत्रकार के साथ गैंगरेप में घिरा

इस्लामिक स्कॉलर तारिक रमादान पर अब एक महिला पत्रकार के साथ गैंगरेप में शामिल होने का आरोप लगा है। दो महिलाओं के साथ बलात्कार को लेकर उन पर पहले से ही फ्रांस में मुकदमे चल रहे हैं। फ्रांस की न्यायिक सेवा से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई है।

अरब न्यूज के मुताबिक सूत्रों ने यूरोप 1 रेडियो और ला जर्नल डे डिमांशे की उस खबर की पुष्टि की है जिसमें एक 50 वर्षीय महिला पत्रकार ने 56 साल के रमादान पर अपने स्टाफ के साथ मिलकर गैंगरेप का आरोप लगाया है। यह घटना तब हुई जब महिला पत्रकार रमादान का इंटरव्यू लेने मई 2014 में लियोन के एक होटल में गई थी।

महिला पत्रकार का कहना है कि रमादान ने पुलिस में रिपोर्ट नहीं दर्ज कराने की धमकी भी दी थी। महिला के अनुसार तारिक ने जनवरी में मेसेंजर के जरिए उससे संपर्क किया था और कहा था, “तुम जानती नहीं हो मैं कितना पॉवरफुल हूँ।”

रमादान एक शादीशुदा आदमी है और उसके चार बच्चे भी हैं। साल 2017 तक वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हुआ करता था। लेकिन मीटू मूवमेंट के दौरान 2 महिलाओं ने उस पर रेप का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसे वहाँ से निकाल दिया गया।

उल्लेखनीय है कि इस दौरान तारिक पर 2009 में एक दिव्यांग महिला और 2012 में एक फेमिनिस्ट कार्यकर्ता से रेप का आरोप लगा था। 2018 में बेल न मिलने के कारण 9 महीने उसे कस्टडी में रखा गया था।

तेलंगाना: महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर कालिख पोती, पाक समर्थित नारों की माला पहनाई

तेलंगाना के निज़ामाबाद जिले में रविवार (अगस्त 25, 2019) को कुछ अज्ञात लोगों ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा कालिख पोत दी। साथ ही पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हुए गाँधी प्रतिमा को पाकिस्तान के जयकारे वाले नारों से लिखे पेपर की माला पहना दी।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना निज़ामाबाद जिले के गुंडाराम गाँव की है। इस घटना के बाद से इलाके में सनसनी फैल गई है। जानकारी के अनुसार, पुलिस को संदेह है कि यह एक विशेष समुदाय से संबंधित एक नए उभरे हुए संगठन की करतूत हो सकती है। इस संगठन ने जिले के कुछ अल्पसंख्यक क्षेत्रों में गरीब बच्चों को शिक्षित करने और फिटनेस पर जागरूकता प्रदान करने के नाम पर गतिविधियाँ शुरू की थी।

हाल ही में पुलिस ने इस समूह से जुड़े 3 लोगों को नगरपालिका अधिकारियों की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। शिकायत में कहा गया था कि उन्होंने अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अवैध शेड का निर्माण किया था।

पुलिस मुख्यालय के सर्किल इंस्पेक्टर आर रघु ने कहा कि पुलिस जिला मुख्यालय निज़ामाबाद से कुछ किलोमीटर दूर स्थित गाँव में पहुँचकर अपराधियों की पहचान करने के लिए जाँच शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि वो इस बात की जाँच कर रहे हैं कि जिस आउटफिट के बारे में पहले मेंशन किया गया था, उसका गाँधी की प्रतिमा के साथ की गई अपमानजनक कृत्य से कोई संबंध है या नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि चूँकि यह एक गंभीर मुद्दा है, इसलिए सभी एंगल से इसकी पूछताछ की जा रही है।

ऑपइंडिया ने निज़ामाबाद पुलिस स्टेशन में बात की। लेकिन पुलिस अधिकारी इस शर्मनाक कृत्य के आरोपितों के बारे में किसी तरह की जानकारी देने से बचते रहे।

सिंधु को बधाई ट्वीट में लिखा ‘अपने देश को गौरवान्वित किया’, यूजर्स ने पूछा- कॉन्ग्रेस इटली से है क्या?

स्टार शटलर पीवी सिंधु ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप जीत अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया है। उनकी इस सफलता का पूरा देश जश्न मना रहा है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से लेकर तमाम लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। लेकिन, उन्हें बधाई देने की जल्दी में कॉन्ग्रेस ने एक ऐसी भूल कर दी कि उसकी सोशल मीडिया में क्लास लग गई। बधाई ट्वीट के बाद यूजर्स ने ‘कॉन्ग्रेस किस देश से’, पूछने में देरी नहीं की।

सिंधु ने स्विट्जरलैंड के बासेल में आयोजित 2019 बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर जीता। कॉन्ग्रेस ने उन्हें बधाई देते हुए ट्वीट किया, “वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर पीवी सिंधु को बधाई। आपने अपने देश को गौरवान्वित किया।”

ट्वीट में कॉन्ग्रेस का ‘अपने देश’ लिखना लोगों को रास नहीं आया। वैसे भी इस वक़्त अपने बयानों से जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रोपगेंडा को हवा देने का कारण कॉन्ग्रेस और उसके नेता पहले से ही निशाने पर हैं।

सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने कॉन्ग्रेस से तुरंत सवाल करने शुरू कर दिए। पूछा कि कॉन्ग्रेस किस देश से है। यूज़र्स को इस बात ने काफ़ी अश्चर्यचकित कर दिया कि कॉन्ग्रेस ने पी वी सिंधु को बधाई देने के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, उससे यह झलकता है कि शायद वो भारत को अपना राष्ट्र नहीं मानते।

ट्विटर पर कई यूज़र्स ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी पाकिस्तान या इटली को ही अपना राष्ट्र मानती है, भारत को नहीं।


10 साल बाद संजय दत्त की राजनीति में वापसी, BJP की सहयोगी पार्टी में हो सकते हैं शामिल

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त लगभग 10 साल बाद राजनीति में फिर से आने के लिए तैयार हैं। ऐसी ख़बर सामने आई है कि वे अब महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी राष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) में शामिल होंगे।

ख़बर के अनुसार, संजय दत्त, जो कभी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे, महाराष्ट्र के एक मंत्री के अनुसार, राजनीति में फिर से प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। पार्टी के संस्थापक और कैबिनेट मंत्री, महादेव जानकर ने रविवार (25 अगस्त) को कहा, 60 वर्षीय संजय दत्त आगामी 25 सितंबर तक RSP में शामिल हो सकते हैं। RSP महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ बीजेपी का एक सहयोगी दल है।

महादेव जानकर ने कहा कि RSP अपनी पार्टी का विस्तार करने के लिए फ़िल्म उद्योग की हस्तियों को पार्टी में शामिल कर रही है। बता दें कि RSP पार्टी मुख्य रूप से ‘धनगर’ या ‘चरवाहा’ समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है।

महाराष्ट्र सरकार में पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री महादेव जानकर ने कहा, “हमने अपनी पार्टी का विस्तार करने के लिए फिल्म क्षेत्र में काम करना शुरू कर दिया है। 25 सितंबर को अभिनेता संजय दत्त भी राष्ट्रीय समाज पार्टी में शामिल हो रहे हैं।”

इस कार्यक्रम के दौरान एक पहले का रिकॉर्ड किया हुआ वीडियो दिखाया गया, इसमें अभिनेता संजय दत्त RSP और जानकर का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘भाई’ कहकर संबोधित किया था।

ख़बर के मुताबिक़, संजय दत्त आगामी महाराष्ट्र चुनावों में केवल RSP के लिए प्रचार करेंगे। फ़िलहाल, संजय दत्त की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि उन्होंने अभी तक इस संदर्भ में कोई बयान जारी नहीं किया है।

ग़ौरतलब है कि संजय दत्त के स्वर्गीय पिता सुनील दत्त ने पाँच बार कॉन्ग्रेस पार्टी से मुंबई उत्तर-पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले मई 2004-2005 के दौरान यूपीए-1 सरकार में युवा मामलों और खेल मंत्री के रूप में भी कार्य किया था। संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त मुंबई से कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद हैं।

मीका को मिली पाक में गाना गाने की सजा, सलमान खान ने साथ में परफॉर्म करने से किया मना

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनावों के बावजूद कराची में जाकर परफॉर्म करने वाले भारतीय गायक मीका सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। पिछले दिनों उनकी हरकत पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए FWICE ने उन्हें बैन किया था और अब खबर है कि सलमान खान ने भी अपने ईवेंट से उनका नाम हटा दिया है।

दरअसल, जानकारी के अनुसार अमेरिका में 25 अगस्त से शुरू होने वाले सलमान खान के कॉन्सर्ट में मीका परफॉर्म करने वाले थे लेकिन अब उनकी परफॉर्मेंस को पोस्टपोन कर दिया गया है।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट की मानें तो सलमान खान की कई फिल्मों में हिट गाने गा चुके मीका सिंह के साथ सलमान ने इस इवेंट में परफॉर्म नहीं करने का फैसला किया है।

सलमान के इस फैसले पर उनके एक करीबी दोस्त ने बताया है कि सलमान के लिए उन तत्वों से खुद को दूर रखना जरूरी है जिनके देशप्रेम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसलिए वह मीका के साथ परफॉर्म नहीं करेंगे।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देकर कहा गया है, “आज के वक्त में आप बिना ‘पॉलिटिकली करेक्ट’ हुए कोई स्टार या सेलिब्रिटी नहीं बन सकते हैं। मीका ने भले ही पाकिस्तान में परफॉर्म करने पर माफी माँग ली है, लेकिन वह भीतरी तौर पर वैसे ही हैं। क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान में जाकर परफॉर्म किया और देश की भावनाओं को आहत किया।”

गौरतलब है कि सलमान खान हमेशा से उन विवादों से कटते नजर आए हैं जिसके कारण उनके देशप्रेम पर सवाल उठे। मीका की तरह जब सिद्धू के मामले ने भी तूल पकड़ा था तब भी उनके प्रोडक्शन हाउस में बन रहे द कपिल शर्मा शो से जज नवजोत सिंह सिद्धू को हटा दिया गया था।

कॉन्ग्रेस को दफन करने वाले के ज्ञान पर क्या बोलूॅं : अधीर रंजन चौधरी पर J&K के राज्यपाल का तंज

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान पर पलटवार किया है। राज्यपाल ने कहा है कि अपनी पार्टी को दफन कर देने वाले नेता के ज्ञान पर वे क्या कह सकते हैं। चौधरी ने कहा था कि सत्यपाल मलिक जिस तरह की बातें कर रहे हैं उसे देखकर तो यही लगता है कि उन्हें जम्मू-कश्मीर बीजेपी का अध्यक्ष बना देना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा, “उन्होंने संसद में बोल कर अपनी पार्टी को दफन कर दिया। मैं उनके ज्ञान पर क्या कह सकता हूं? मैं पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहा हूॅं। इस तरह के आरोपों की मैं परवाह नहीं करता।”

राज्यपाल का संदर्भ लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता चौधरी के उस बयान को लेकर था जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बता दिया था। लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पर सरकार की ओर से लाए गए बिल पर बहस के दौरान चौधरी ने यह बात कही थी। उनके इस बयान ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को भी असहज कर दिया था।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा था, “जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल को राज्य बीजेपी इकाई का अध्यक्ष बना देना चाहिए। उनकी टिप्पणी और बयान बिलकुल बीजेपी नेताओं की तरह होते हैं। जिस तरह से वह बात करते हैं वह राज्यपाल के संवैधानिक कार्यालय की सत्यनिष्ठा को बरक़रार नहीं रखते ।”

इसके आगे उन्होंने कहा, “जम्मू और कश्मीर के स्कूल और कॉलेज बंद हैं। लोगों को बोलने की अनुमति नहीं है। जो लोग जम्मू-कश्मीर जाना चाहते हैं उन्हें अनुमति नहीं दी जा रही है।” बता दें कि शनिवार (24 अगस्त) को कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को श्रीनगर एयरपोर्ट से प्रशासन ने लौटा दिया था।

रविवार (25 अगस्त) को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बताया था कि अनुच्छेद-370 निरस्त किए जाने और लद्दाख व जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के 20 दिनों बाद कोई जानलेवा हिंसात्मक घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा था कि अगर संचार संबंधी सुविधाएँ बंद हैं और इससे लोगों की जान बच सकती है तो इसमें किसी को क्या दिक्कत हो सकती है।

इसके अलावा, राज्यपाल मलिक ने इस बात से भी अवगत करायाथा कि जम्मू-कश्मीर में दवाइयों और आवश्यक चीज़ों की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि ईद के ख़ास मौक़े पर सब्ज़ियाँ और मीट लोगों के घरों तक पहुँचाए गए। पिछले 20 दिनों में 23.31 करोड़ रुपए की दवाइयाँ रिटेल दुकानों तक पहुँचाई गईं, जो आम दिनों की तुलना में अधिक हैं।

370 पर सरकार के फैसले का समर्थन न करने पर AIATF के चेयरमैन ने TOI के पत्रकार को फटकारा

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के फैसले को अधिकांश कॉन्ग्रेस नेताओं ने गलत बताते हुए इस पर अपनी असहमति व्यक्त की है। इस बीच, अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा (एआईएटीएफ) के अध्यक्ष और भारतीय यूथ कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रमुख मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने अपने फेसबुक होमपेज पर एक वीडियो शेयर करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार को लताड़ लगाई है। उन्होंने जम्मू कश्मीर से 370 को निष्प्रभावी करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के मोदी सरकार के कदम का समर्थन न करने के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार की कड़ी आलोचना की है।

एमएस बिट्टा ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा है कि अभी भी देश में बहुत देशद्रोही हैं, जिनको अनुच्छेद 370 हटाने से परेशानी है। इस वीडियो में एमएस बिट्टा को पीएम मोदी के इस निर्णय को साहसिक बताते हुए उनकी प्रशंसा करते हुए देखा जा सकता है। एमएस बिट्टा टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार को धिक्कारते हुए कहते हैं, “आप काहे के पत्रकार हैं? पीएम मोदी ने इतना बड़ा काम कर दिया, आप लोगों पर असर नहीं है क्या? आप हिन्दुस्तानी हैं? क्या आप एक भारतीय हैं? भारतीय होने पर गर्व है? तो जो नरेंद्र मोदी ने किया है, उसको सैल्यूट करो न। पत्रकारिता की बात मत करो। राष्ट्र की बात करो। अगर आपको नरेंद्र मोदी का काम नज़र नहीं आता तो आप हिन्दुस्तानी हैं ही नहीं।”

एम एस बिट्टा ने इससे पहले अनुच्छेद 35 ए और 370 को खत्म करने के लिए संसद में वोट देने का आह्वान करते हुए कहा था, “संसद का सत्र चल रहा है और सरकार को यह जानने के लिए मतदान कराना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A को कौन-कौन रद्द कराना चाहते हैं। इससे राष्ट्र को राष्ट्रवादियों और गद्दारों के बारे में पता चल जाएगा।”

बिट्टा ने पीएम मोदी पर विश्वास जताते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री जल्द ही कश्मीर से आतंकवाद को समाप्त कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि विदेश में बैठे मुट्ठी भर लोग, पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई द्वारा वित्त पोषित हैं, जो कश्मीर को बदनाम कर रहे हैं और स्थानीय व्यवसायों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

बता दें कि, 7 जुलाई 1992 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुए एक बम धमाके में बिट्टा ने अपने एक पैर गँवा दिए थे। इस धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा, भारतीय यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहने के दौरान 11 सितंबर, 1993 में ऑफिस के परिसर में हुए घातक हमले का शिकार होने से बचे थे। जिसमें 9 लोग मारे गए और 36 अन्य घायल हो गए। एम एस बिट्टा ने 2013 में दिल्ली में कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर अपनी सुरक्षा वापस लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था आतंकवादियों की हिट लिस्ट में होने के बावजूद उनकी पार्टी ने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया।