मध्य प्रदेश के असलम ने समीर खान के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में एक की जान ले लेता है और दो को घायल कर देता है, वो भी बकरे हलाल करने वाले हथियारों से, और पत्रकारिता के समुदाय विशेष द्वारा इसमें ज़बरदस्ती ‘मॉब-लिंचिंग’ का एंगल निकाल लिया जाता है।
मध्य प्रदेश के चंदेरी थाना क्षेत्र के डुंगासरा गाँव में राखी वाले दिन शाम को चार युवक गोविंद कुशवाह, जानू उर्फ प्रमोद, नंदलाल कोली और संजू परमार सोनाई गाँव जा रहे थे। अधिकाँश मीडिया आउटलेट्स के अनुसार डुंगासरा गाँव के पास सड़क किनारे स्थित दुकान पर पर वे जब गुटखा लेने के लिए रुके तो वहीं पर मुंगावली निवासी असलम और पुरा निवासी समीर खान भी खड़े थे जिन्होंने इन चारों पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। एक की मौके पर मौत हो गई, दो को अस्पताल में पहुँचाया गया, और एक गोविन्द किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा। हमले का कारण लल्लनटॉप जैसे बड़े समाचार पोर्टलों, पत्रिका और भास्कर जैसे बड़े समाचारपत्रों से लेकर स्थानीय मीडिया तक निजी रंजिश ही बता रहे हैं।
लेकिन इस बीच उर्दू मॉनिटर नामक (नाम से ही झुकाव समझा जा सकता है) अख़बार और कारवाँ डेली नामक पोर्टल (जिसका कारवाँ मैगज़ीन से कोई सरोकार नहीं है) मामले को नया ‘एंगल’ देने के लिए ज़बरदस्ती मारे गए युवकों पर ही पकड़े गए आरोपित असलम और फ़रार समीर पर हमला करने का आरोप लगा रहे हैं। उनके अनुसार जिन युवकों की हत्या हुई, उनमें से एक ने असलम की बहनों को छेड़ा था, जिसके चलते कहासुनी हुई, और उसका बदला बाद में लेने के लिए तीनों पीड़ितों और गोविन्द ने असलम पर टेम्पो में हमला कर दिया। ‘सेल्फ़-डिफेंस’ में असलम को उन्हें मारना और घायल करना पड़ा, और ग्रामीणों ने पहले तो असलम की मॉब-लिंचिंग की कोशिश की और बाद में उसे हत्या के झूठे आरोप में पुलिस के सामने फँसा दिया।
फेक न्यूज़ फ़ैलाने में एक हो चुका है गिरफ़्तार
निजी रंजिश के इस मामले को मॉब-लिंचिंग और हिन्दू-मुस्लिम एंगल से प्रस्तुत करना साफ़ तौर पर साम्प्रदायिक तनाव फ़ैलाने का प्रयास है। और इसमें गुना निवासी अंसार मिर्ज़ा को आईपीसी की धारा 550(2) के तहत गिरफ्तार भी किया गया 17 अगस्त को। इसके बावजूद इसी महीने की 21 तारीख को कारवाँ डेली में उर्दू मॉनिटर के हवाले से यही चीज़ प्रकाशित की गई है।
‘निजी रंजिश; बेवजह फैलाई जा रही कम्युनल एंगल की बात’
ऑपइंडिया ने इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस में इस मामले की जाँच कर रहे इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर से बात की है। उन्होंने ऑपइंडिया से यह साफ कहा कि मामला किसी प्रकार की साम्प्रदायिकता या भीड़-हत्या का नहीं है, और यह बातें ज़बरदस्ती फैलाई जा रहीं हैं। मामला निजी रंजिश का है, जिसमें मृतक प्रमोद रायकवार और आरोपित के घर आगे-पीछे ही हैं। यही नहीं, डेली कारवाँ की मृतकों की संख्या भी गलत है। उन्होंने तीन मृतक बताए थे, जबकि पुलिस ने जो ऑपइंडिया को बताया, उसके अनुसार मृतक फ़िलहाल केवल प्रमोद है। बाकी दोनों में एक ठीक हो गया है और उसे अस्पताल से भी छुट्टी मिल गई है, और एक अभी भी अस्पताल में है।
नोट- स्टोरी पुलिस के जाँच अधिकारी से बात करने के बाद अपडेट की गई है।
लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ का टाइटल किरदार निभा चुकीं शिल्पा शिंदे ने गायक मीका सिंह का खुल कर समर्थन किया है। बता दें कि पाकिस्तान में परफॉर्म करने को लेकर मीका सिंह पहले से ही सवालों के घेरे में हैं। उन्हें ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एम्प्लॉयीज (FWICE) ने प्रतिबंधित भी कर दिया है। शिल्पा शिंदे ने इन दोनों ही संस्थाओं को खरी-खोटी सुनाई। बिग बॉस 11 की विजेता रह चुकीं शिल्पा के इस बयान को लेकर लोगों से उनसे नाराज़गी जताई।
शिल्पा शिंदे ने कहा कि अगर पाकिस्तान उन्हें परफॉर्म करने के लिए बुलाता है और वहाँ उनका स्वागत किया जाता है तो वह वहाँ ज़रूर जाएँगी। शिंदे ने चुनौती देते हुए कहा, “मैं पाकिस्तान जाऊँगी। रोक सको तो रोक लो।” शिंदे ने कहा कि पाकिस्तान में इतने अच्छे गायक होने के बावजूद मीका को वहाँ परफॉर्म करने के लिए बुलाया गया, यही बड़ी बात है।
मीका सिंह द्वारा पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के सम्बन्धी के कार्यक्रम में परफॉर्म करने के बाद उपजे विवाद पर अपनी राय रखते हुए शिल्पा शिंदे ने कहा:
“मैं सभी देशभक्तों से पूछना चाहती हूँ कि क्या आपने नुसरत फ़तेह अली ख़ान को सुनना बंद कर दिया है? वे एक लीजेंड थे। क्या आप भारत-पाक क्रिकेट मैच का लुत्फ़ नहीं उठाते? कला की कोई सीमा नहीं होती है इसे राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए कला एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है। मैं अभी भी अपने पाकिस्तानी दोस्तों से बातें करती हूँ और वे मेरे जन्मदिन पर मुझे कढ़ाईदार सूट गिफ्ट के रूप में देते हैं। “
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में शिल्पा शिंदे ने कहा कि पाकिस्तान भी कभी भारत का ही हिस्सा हुआ करता था और वहाँ की जनता भी शांति चाहती है। उन्होंने इंग्लैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारतीयों के साथ नौकरों जैसा व्यवहार किया लेकिन फिर भी वहाँ जाकर अच्छा करने वालों को गर्व की नज़र से देखा जाता है।
कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीम ने बिहार के गया शहर से बांग्लादेश के आंतकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन (JMB) के एक कुख्यात आतंकी को गिरफ़्तार किया है। उसका नाम एजाज़ अहमद है। पुलिस ने उसके पास से भारी मात्रा में जिहादी दस्तावेज़ ज़ब्त किए हैं। STF की टीम को लम्बे समय से उसकी तलाश थी।
West Bengal: Kolkata Special Task Force (STF) today arrested a suspected Jamaat-ul-Mujahideen Bangladesh (JMB) terrorist from Gaya, Bihar.
ख़बर के अनुसार, आतंकी अहमद लम्बे समय से बिहार के गया में अपना वेश और नाम बदलकर रह रहा था। STF सूत्रों के अनुसार गया में बैठ कर वह किसी बड़े हमले का षणयंत्र रच रहा था। विश्वसनीय सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर छापेमारी कर रविवार (25 अगस्त) की रात उसे गिरफ़्तार किया गया। STF की टीम एजाज़ को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बता दें कि एजाज़ अहमद पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के पारुई इलाक़े का निवासी है। उसके बारे में पता चला है कि वो काफ़ी समय से आतंकवादी संगठन JMB के लिए काम कर रहा था। संगठन के आला नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहा था। उसका मुख्य कार्य इस आतंकी संगठन से युवाओं को जोड़ना था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो लगातार JMB के आतंकवादियों के संपर्क में था। उन्होंने जानकारी दी कि अहमद पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इससे पहले, 12 अगस्त को बर्दवान धमाके के मुख्य आरोपी जहीरुल शेख़ को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है। समाचार एजेंसी UNI के मुताबिक मंगलवार (13 अगस्त) को एक आधिकारिक कथन इस आशय से जारी किया गया था। कोलकाता स्थित NIA स्पेशल कोर्ट में उसे प्रस्तुत करने के लिए NIA ने इंदौर के न्यायिक मजिस्ट्रेट से उसकी ट्रांज़िट रिमांड हासिल की थी।
सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की कस्टडी 4 दिनों के लिए बढ़ा दी है। वे 30 अगस्त तक कस्टडी में रहेंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से चिदंबरम की कस्टडी 5 दिन बढ़ाने की माँग की थी। मेहता ने अदालत को बताया कि पूछताछ अभी अधूरी है और इसीलिए उनका कुछ और दिन कस्टडी में रहना ज़रूरी है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय ईडी के धन शोधन मामले में चिदंबरम की गिरफ्तारी से संरक्षण की अवधि मंगलवार तक के लिए बढ़ा दी। कल फिर से इस मामले की सुनवाई होगी।
सीबीआई कोर्ट को मेहता ने बताया कि आईएनएक्स मीडिया से जुड़े इस केस में ईडी की जाँच से भी कुछ नए सवाल उभरे हैं, जिनका जवाब ज़रूरी है। इस मामले में किसी बड़ी साज़िश की ओर इशारा करते हुए मेहता ने कहा कि सीबीआई ने 7 देशों को पत्र लिख कर अहम जानकारियाँ माँगी है। हालाँकि, चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि पूछताछ बकवास के सिवा कुछ और नहीं है।
सिब्बल ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि सीबीआई कोई डॉक्यूमेंट नहीं दिखा रही है और बिना सबूत पूछताछ कर रही है। मेहता ने सिब्बल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पूछताछ के दौरान चिदंबरम डॉक्युमेंट्स को पढ़ने में ही एक घंटा लगा देते हैं। चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया से रिश्वत लेकर उसे एफआईपीबी अप्रूवल देने का आरोप है।
Need further custody to reveal the larger conspiracy, Mehta.
ED investigation is also going on. We have received inputs from ED, Mehta
पी चिदंबरम को बुधवार (अगस्त 21, 2019) को उनके जोरबाग़ स्थित आवास से गिरफ़्तार किया गया था। चिदंबरम द्वारा घर का दरवाजा बंद कर लेने के कारण सीबीआई को दीवार फाँद कर उन्हें गिरफ़्तार करने जाना पड़ा था। उसके बाद उन्हें अदालत द्वारा कस्टडी में भेज दिया गया था। अब सीबीआई उन्हें इस मामले के अन्य आरोपितों के साथ बिठा कर पूछताछ करेगी।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नकली नोटों के कारोबार से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने आलम अंसारी को गिरफ्तार कर 5.50 लाख रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। पाकिस्तान में छपे नोट नेपाल के रास्ते देश में लाए गए थे।
अंसारी नेपाली नागरिक है। एनसीआर, बिहार और देश के अन्य हिस्सों में नकली नोट खपाए जा रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आलम ने स्पेशल सेल को बताया है कि उसे नकली नोटों की खेप नेपाल में अब्दुल रहमान, सज्जाद और शेर मोहम्मद ने दी थी। उन्होंने कहा था कि नोट पाकिस्तान से दाऊद इब्राहिम ने भेजी है।
Delhi Police: Special Cell busted an international syndicate of fake currency and arrested Alam Ansari, a Nepali national, today. Fake Indian Currency Notes (FICN) with face value of Rs 5.50 lakhs in Rs 2,000 denomination notes were recovered from his possession. pic.twitter.com/m5As53ana2
बिहार के रक्सौल में एक सिंडिकेट इसी काम में लगा था। आलम 5 साल से इस धंधे में लगा है। 2016 में नोटबंदी के बाद जाली नोटों के कारोबार पर रोक लगी थी। लेकिन, बीते एक साल में फिर से इस धंधे में तेजी दिख रही है।
गौरतलब है कि, सरहद पार पाकिस्तान और बांग्लादेश से नकली नोट आने के मामले में पुलिस ने इससे पहले चार आरोपितों मोहम्मद जसीम अंसारी, मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद सोहेल आलम और समरेज आलम को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से 2-2 हजार रुपए के कुल 84 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए गए थे। पूछताछ में सामने आया था कि चारों युवक 2000 रुपए का नोट देकर दुकानदारों से कम कीमत का सामान लेते थे और बदले में असली रकम जमा कर रहे थे।
जिहादियों की कमर पर 370 हटा कर सीधी चोट करने के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह की नज़र नक्सलियों पर जा टिकी है। लोक सभा में गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी द्वारा नक्सलियों के बच्चों की भर्ती स्वीकारने के बाद शाह ने अपने कार्यकाल की पहली अंतरराज्यीय नक्सल-रोधी काउन्सिल की बैठक की अध्यक्षता की है। इसमें नक्सल-प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष नागरिक और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया था।
अखरी नामौजूदगी
370 पर अपने असहयोगात्मक रुख के विपरीत कॉन्ग्रेस-शासित मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों (क्रमशः कमलनाथ और भूपेश बघेल) की मौजूदगी ने जहाँ इस मुद्दे पर पार्टी की गंभीरता और इसपर राजनीति न करने की लाइन पर बल दिया, वहीं नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से लगभग हर मुद्दे पर टकराव का रुख अख्तियार कर रहीं ममता बनर्जी इस गंभीर समस्या पर भी केंद्र के साथ खड़ीं नज़र नहीं आईं। उन्होंने इस बैठक में अपनी जगह राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को भेजा। इसके अतिरिक्त तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी अपने निजी दौरे का हवाला देकर दूर रहे।
मीडिया में इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गायब रहने को लेकर भी चर्चाएँ हो रहीं हैं, जिनके राज्य का गढ़चिरौली आज भी नक्सली हिंसा के गढ़ों में से एक माना जाता है। बताया जा रहा है कि फडणवीस आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ‘महाजनादेश यात्रा’ में व्यस्त होने के चलते बैठक में शामिल होने में असमर्थ रहे। उनका भी प्रतिनिधित्व उनके राज्य के डीजीपी ने ही किया।
मौतें 60% घटीं, लेकिन 10 जिले अब भी दो-तिहाई हिंसा कर रहे
गृह मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक 2009-13 के मुकाबले 2014-18 में नक्सली हिंसा में हुई मौतों का आँकड़ा 60.4% गिरकर 3,326 से 1,321 पर आ चुका है। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी के लोकसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक सरकार के सतत प्रयास से नक्सली हिंसा का दायरा अब सिकुड़ने लगा है और यह केवल 60 जिलों में ही बचा है। लेकिन उन्होंने एक चिंताजनक बात यह भी बताई कि 60 में से 10 जिलों में दो-तिहाई हिंसा होती है।
गृह मंत्री ने सोमवार (26 अगस्त) को हुई इस बैठक में चल रहे नक्सली अभियानों का जायज़ा लेने के साथ-साथ नक्सल-प्रभावित इलाकों में विकास योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उनके साथ बैठक में यूपी, ओडिशा, बिहार, एमपी, छत्तीसगढ़, झारखण्ड के मुख्यमंत्री शामिल हुए। 2015 में स्वीकृत किए गए National Policy and Action Plan में वामपंथी आतंक से लड़ने के लिए एक साथ सामाजिक-आर्थिक-कानूनी आदि कई मोर्चों पर काम करने की रणनीति तैयार हुई थी।
कश्मीर मुद्दे पर बौखलाया पाकिस्तान अब नीचता पर उतर आया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉक्टर आरिफ अल्वी घाटी का माहौल बिगाड़ने के लिए जम्मू कश्मीर के हालातों पर फेक वीडियो ट्वीट किया है। मगर इस ट्वीट को करके वो खुद फँस गए हैं। इस फेक वीडियो के लिए आरिफ अल्वी को ट्विटर की तरफ से नोटिस भेजा गया है।
इस नोटिस के बाद पाकिस्तान के मंत्री कह रहे हैं कि ट्विटर भी अब भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। बता दें कि 5 अगस्त को जब भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने का फैसला किया था, उसके बाद भी ट्विटर ने फेक ट्वीट करने वालों पर एक्शन लिया था और अब इसमें पाकिस्तानी राष्ट्रपति का नाम भी जुड़ गया है। पाकिस्तानी मीडिया की तरफ से इसकी जानकारी दी गई।
Twitter has really gone too far in becoming mouthpiece of the Rogue Modi govt! They sent a notice to our President! In bad taste and simply ridiculous. pic.twitter.com/9jxhmVKaL9
पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन माजरी ने इस पूरे मसले पर ट्वीट किया है। माजरी ने ट्विटर द्वारा भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है, “ट्विटर वाकई में मोदी सरकार का मुखपत्र बन गया है। उन्होंने हमारे राष्ट्रपति को नोटिस भेजा है। यह बहुत ही बुरा और बेतुका है।”
This is Srinagar yesterday despite curfews, bans, blackouts, teargas & firing. No amount of oppression & brutality can suppress the resentment of the Kashmiris against India. They want freedom at all costs. Please retweet and let the world know. pic.twitter.com/2OqueQmJpY
बता दें कि, 24 अगस्त को अल्वी ने एक वीडियो शेयर किया था जो विदेशी मीडिया की तरफ से जारी किया गया था। इस वीडियो को अल्वी ने श्रीनगर में जारी विरोध प्रदर्शन के जरिए कश्मीर के हालात दिखाने की कोशिश की थी। अल्वी ने भारत को जम्मू कश्मीर पर अप्रत्यक्ष पर धमकी भी दी है। राष्ट्रपति अल्वी ने कहा है कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर और राज्य के विशेष दर्जे को खत्म करके भारत आग से खेल रहा है। डॉक्टर अल्वी का कहना है कि यह एक ऐसी आग है जो भारत में धर्मनिरपेक्षता को जलाकर खाक कर देगी। अल्वी ने कहा कि भारत की सरकार को अगर यह लगता है कि आर्टिकल 370 को हटाकर वह यहाँ के हालात सुधार सकती है, तो वह जिंदगी भर मूर्ख बने रहना चाहते हैं।
रविवार (अगस्त 25, 2019) को इमरान सरकार में दूरसंचार मंत्री मुराद सईद ने भी कहा था कि उन्हें ट्विटर की ओर से एक नोटिस भेजा गया है, जिसमें भारतीय कानूनों के उल्लंघन का हवाला दिया गया है। गौरतलब है कि, कश्मीर को लेकर फेक न्यूज़ शेयर करने की वजह से पाकिस्तान में कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद किया गया है। ट्विटर की तरफ से 5 अगस्त के बाद से 200 पाकिस्तानी अकाउंट्स को सस्पेंड किया जा चुका है। पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर के मेजर जनरल आसिफ गफूर इस पूरे विवाद के पीछे भारत का हाथ बताया था।
सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह युद्धनीति में भी पारंगत थे और उनका मानना था कि कला-संस्कृति के साथ-साथ लोगों को युद्धकला का भी प्रशिक्षण मिलना चाहिए। वे खालसा के लिए ऐसे लोग चाहते थे, जो अपना जीवन क़ुर्बान करने में भी नहीं हिचकें। सिखों के पवित्र पुस्तकों में से एक ‘दशम ग्रन्थ’ के रचयिता भी गुरु गोविन्द सिंह को माना गया है। ‘चरित्रोपाख्यान’ इसी दशम ग्रन्थ का एक भाग है, जिसमें कई ऐतिहासिक और पौराणिक कहानियाँ हैं। इन कहानियों में एक ऐसी कहानी है, जो 16वीं सदी में हिंदुस्तान पर राज़ करने वाले अकबर से जुड़ी है।
इन कहानियों से सीख मिलती है। सिख धर्म-ग्रंथों के ज्ञाता प्रीतपाल सिंह बिंद्रा ने ‘चरित्रोपाख्यान’ को अंग्रेजी में अनुवादित किया था। भारत और लंदन के स्कूलों में पढ़ाने वाले बिंद्रा ने पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया था। पुरानी पवित्र पुस्तकों को पढ़ने में उनकी इतनी रूचि थी कि उन्होंने अपने व्यापार को बेच कर इन पुस्तकों का अध्ययन और अनुवाद को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
अब बात ‘शहंशाह’ अकबर की। नरमुंडों का पहाड़ खड़ा कर के दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाले अकबर को सेक्युलर इंडिया का नायक बताया जाता है। हमें पढ़ाया गया है कि कैसे अकबर के दरबार में कई हिन्दू विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काबिज थे। अब यह सच में अकबर की विचारधारा थी या फिर चतुर नीति, इस पर बहस होती रही है। लेकिन, अकबर से जुड़ी कई बातें छिपाई भी गई हैं। चित्तौड़ पर अकबर के आक्रमण से लेकर महिलाओं के प्रति उसके रवैये तक, कई बातें आज भी छिपा कर रखी गई हैं।
सिख ग्रन्थ ‘श्री चरित्रोपाख्यान’ में ऐसी-ऐसी कहानियाँ हैं, जिसे पढ़ने के बाद व्यक्ति दूसरों की ग़लतियों से सीख सकता है। 404 कहानियों के इस सेट की सिख धर्म में काफ़ी मान्यता है। इसमें अकबर से जुड़ी जो कहानी है उससे अकबर के ठरकपन और चरित्र के बारे में पता चलता है। अब चूँकि आपको इस बारे में न के बराबर पता होगा, हम आपके लिए इस कहानी को पेश कर रहे हैं। यह ‘चरित्रोपाख्यान’ की 185वीं कहानी है।
चरित्रोपाख्यान: अकबर और रंग कुमारी की कहानी
आगरा स्थित अकबराबाद में एक साहूकार रहा करता था। रंग कुमारी उसी की बेटी थी। कहते हैं उसका सौंदर्य ऐसा था कि जो भी एक बार देख ले मोहित हो जाता। उस समय आगरा अकबर की राजधानी थी और वह वहीं से शासन चलाया करता था। वह फतेहपुर सीकरी में अपना दरबार लगाया करता था। अकबर को शिकार का शौक था और वह अक्सर शिकार खेलने जाया करता था।
एक बार शिकार खेलने के दौरान ही अकबर की नज़र रंग कुमारी पर पड़ी और वह तुरंत ही उस पर मोहित हो गया। अकबर उसे हर हाल में पाना चाहता था। अकबर के बारे में पुस्तक लिख चुके डर्क कोलियर कहते हैं कि अकबर के महल में कम से कम 5000 महिलाएँ होती ही होती थीं। बेल्जियम के लेखक के अनुसार, अकबर अनगिनत महिलाओं के साथ सो चुका था और यह सब तभी शुरू हो गया था जब वह काफ़ी कम उम्र का था। इतिहासकारों की मानें तो अकबर की 300 के क़रीब पत्नियाँ थीं।
अकबर ने कई राजपूत राजघरानों की लड़कियों से शादी कर रखी थी। ख़ैर, वापस रंग कुमारी की कहानी पर आएँ तो अकबर ने अपनी एक दासी को उसके पास भेजा। वह दासी अकबर का सन्देश लेकर रंग कुमार के पास गई। सन्देश यही था कि अकबर ने रंग कुमारी को अपने महल में बुलाया है। रंग कुमारी चालाक महिला थीं। उन्होंने अकबर के पास जाना स्वीकार नहीं किया, लेकिन वह जानती थीं कि वह एक शक्तिशाली बादशाह है। इसीलिए, रंग कुमारी ने अकबर को अपने घर पर बुलाया।
दासी ने अकबर को जाकर रंग कुमारी का सन्देश कहा। जब अकबर रंग कुमारी के पास पहुँचा तो वह बिस्तर लगा रही थी। फिर क्या था, अकबर की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। उसे लगा कि वह अपने उद्देश्य में सफल हो रहा है। लेकिन, रंग कुमारी भी पतिव्रता हिन्दू महिला थीं। रंग कुमारी ने अकबर को काफ़ी इज्जत दी। बिस्तर लगाने के बाद अकबर से कहा कि वह शौचालय से निपट कर आना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्दी ही आ जाएँगी।
‘चरित्रोपाख्यान’ के अंग्रेजी अनुवाद का अंश (अनुवादक: प्रीतपाल सिंह बिंद्रा )
शौचालय जाने के बहाने निकली रंगा कुमारी ने दरवाजा तेज़ी से बंद कर दिया और इस तरह से अकबर अंदर कमरे में ही क़ैद हो गया। इसके बाद कुमारी अपने पति को लेकर उस कमरे में आ गईं। अपनी पत्नी के साथ छेड़छाड़ से क्रुद्ध रंग कुमारी के पति ने गुस्से में न सिर्फ़ अकबर के ताज को ज़मीन पर पटक कर अपने पैरों तले रौंद डाला बल्कि अपना जूता निकाल कर अकबर को कई जूते लगाए भी।
बादशाह अकबर अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा के डर से यह सब बर्दाश्त करता रहा। कहीं न कहीं उसके मन में यह एहसास भी हो गया कि उसने ग़लत किया है। लज्जा के मारे वह चुपचाप खड़ा रहा। इसके बाद रंग कुमारी और उसके पति ने मिल कर अकबर को एक भू-गर्भित कालकोठरी में क़ैद कर दिया। हिंदुस्तान का बादशाह होकर औरतों पर ग़लत नज़र डालने वाले अकबर की ये कहानी शायद ही कहीं और पढ़ी-पढ़ाई गई हो।
अगले दिन की सुबह होते ही पति-पत्नी अकबर को लेकर शहर के क़ाज़ी के पास पहुँचे। न्यायालय में रंग कुमारी और उसके पति ने अकबर के कुकृत्यों को बताने के बाद कहा, “यह एक संत है, चोर है, साहूकार है या फिर बादशाह है, आप ख़ुद पता कर लीजिए।” इतना कह कर निकल गए। लज्जा के मारे अकबर का सिर ऊपर उठ ही नहीं रहा था। पूरे प्रकरण के दौरान वह सिर झुकाए खड़ा रहा।
‘चरित्रोपाख्यान’ में पूछा गया है कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह से पराई स्त्री पर नज़र डालता है और उसके घर में घुस जाता है, क्या उसे दण्डित नहीं किया जाना चाहिए? बादशाह अकबर को इस घटना के बाद अच्छी सीख मिली और उसके बाद उसने किसी पराई स्त्री के घर में घुसना बंद कर दिया। उपर्युक्त कहानी सिख ग्रन्थ ‘चरित्रोपाख्यान’ में वर्णित है, जिसके रचयिता गुरु गोविन्द सिंह माने गए हैं।
Rang Kumari’s husband had no idea the intruder pursuing his wife was Emperor Akbar. He thrashed Akbar with shoes and locked him inside the room.
The next day he informed the civil judge (Qazi) and handed over the intruder. Akbar was totally humiliated and couldn’t speak a word. pic.twitter.com/1H9MHSZHdn
अब सवाल यह उठता है कि प्राचीन पुस्तकों में जब अकबर के बारे में ऐसा वर्णित है तो इस बारे में कोई चर्चा क्यों नहीं करता? अकबर ‘महान’ के कथित सेक्युलर चरित्र का गुणगान करते हुए उसे भारत का नायक के रूप में पेश करने वाले वामपंथी इतिहासकारों ने अकबर के नेगेटिव पक्ष को इस तरह से छिपाया, जैसे उसे सीधा मर्यादा पुरुषोत्तम राम के समकक्ष खड़ा करने की कोशिश की जा रही हो। ऐसे गिरोह विशेष के इतिहासकारों को ‘दीन-ए-इलाही’ मज़हब अपनाकर फतेहपुर सिकरी में नंगा नाचना चाहिए, शायद अकबर उन्हें भी अपने पास बुला ले।
हाल ही में अमेज़न जंगल में लगी आग को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने पर्यावरण को लेकर चिंता जताई। कई सेलेब्रिटीज ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक से एक फोटो शेयर कर बताया कि अमेज़न दुनिया की 20% ऑक्सीजन की सप्लाई करता है और वहाँ आग लगना दुःखद है। सेलेब्रिटीज के कूदने से उन फोटोज को लोगों ने भी हाथोंहाथ शेयर किया। टाइम्स पत्रिका ने साफ़-साफ़ कहा है कि हालिया आग का कारण क्लाइमेट चेंज नहीं है।
वैज्ञानिक डेनियल नैप्स्टड (Daniel Nepstad) ने अमेज़न के जंगलों पर ख़ासा अध्ययन किया है। वे अमेज़न द्वारा दुनिया की 20% ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली बात को बेहूदगी बताते हैं। डेनियल नैप्स्टड के अनुसार, ये पेड़ जितनी मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई करते हैं, रेस्पिरेशन के तहत उतनी ही मात्रा में ऑक्सीजन का प्रयोग भी कर लेते हैं। रेस्पिरेशन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत पेड़-पौधे मिटटी में स्थित नुट्रिएंट्स को ऊर्जा में बदलते हैं। फोटोसिंथेसिस के बारे में भी पढ़ा है, जिसके तहत पेड़-पौधे सूर्यकिरण को केमिकल एनर्जी में बदलते हैं।
अगर हम अमेज़न में आग लगने की बात करें तो यह हर साल होता रहा है। इस बार लगे आग की बात करें तो सैटेलाइट द्वारा प्राप्त आँकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि यह राष्ट्रीय औसत से 7% ही ज्यादा है। नीचे संलग्न किए गए ग्राफ में आप देख सकते हैं कि 2005 और 2010 में स्थिति कही गुना ज्यादा भयावह थी:
सैटेलाइट द्वारा प्राप्त आँकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि विश्व ने तब ध्यान नहीं दिया, जब स्थिति सही में भयावह थी
अब आते हैं उन सेलेब्रिटीज पर, जिन्होंने ग़लत फोटो शेयर किया। महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक क्रिस्टिआनो रोनाल्डो ने अमेज़न जंगल में लगी आग के बारे में ट्वीट करते हुए जो फोटो शेयर किया, वो काफ़ी पुरानी है। वो फोटो दक्षिण ब्राजील के टैम इकोलॉजिकल गार्डन में लगी आज की फोटो है जिसे 2013 में ही क्लिक किया गया था। यह इलाक़ा भी अमेज़न जंगल से बहुत दूर है।
The Amazon Rainforest produces more than 20% of the world’s oxygen and its been burning for the past 3 weeks. It’s our responsibility to help to save our planet. #prayforamazoniapic.twitter.com/83bNL5a37Q
इसी तरह ऑस्कर विजेता अभिनेता लियोनार्डो डी कैप्रियो ने जो फोटो शेयर की, वह 20 वर्ष पुरानी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुअल मैक्रॉन ने भी इसी फोटो को शेयर किया। जबकि, इस फोटो को क्लिक करने वाले फोटोग्राफर की 2003 में ही मृत्यु हो चुकी है। स्टॉकफोटो वेबसाइट के अनुसार, उस फोटोजर्नलिस्ट ने इस फोटो को काफ़ी पहले क्लिक किया था। अब जाहिर है उन्होंने मृत्यु के बाद लौट कर 2019 में तो या फोटो नहीं ही क्लिक की।
ऑस्कर विजेता अभिनेता ने शेयर की 20 वर्ष पुरानी तस्वीर
इसी तरह गायिका मैडोना ने भी काफ़ी पुरानी तस्वीर शेयर की
मैडोना ने भी शेयर की पुरानी तस्वीर
मैडोना ने जिस तस्वीर को 2019 में अमेज़न के जंगल में लगी आग की बता कर शेयर किया, वह तीन दशक पुरानी है। इसी तरह कई अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज व नेताओं ने अमेज़न जंगल में लगी आग को लेकर पुरानी तस्वीरों को शेयर किया।
अलग-अलग मुल्कों में पाकिस्तान किस तरह पैसे खर्च कर भारत विरोधी प्रदर्शन करवा रहा है इसकी पोल दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा ने खोल दी है। उन्होंने सोशल मीडिया में एक ऑडियो पोस्ट किया है जिसमें पेरिस में भारत विरोधी प्रदर्शन के नाम पर एक पाकिस्तानी महिला पैसे देने की बात कबूल कर रही है।
ऑडियो में आप सुन सकते हैं कि बग्गा अब्दुल बनकर फ्रांस की एक महिला को फोन करते हैं जो भारत विरोधी प्रदर्शन की आयोजक है। मोदी इस समय जी7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पेरिस में ही हैं।
ऑडियो में बग्गा लाहौर का अब्दुल बनकर बात करते हैं। महिला भी खुद को पाकिस्तानी बताती है। अब्दुल कहता है कि उसे पता चला है कि महिला मोदी विरोधी प्रदर्शन निकालने वाली है और वह उसमें शामिल होना चाहता है। जवाब में महिला कहती है कि वह चाहती है कि अधिक से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हों। इसके बाद अब्दुल पूछता है कि क्या उसे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पैसा मिलेगा।
शुरुआत में तो महिला पैसे देने से इनकार करती है। आने पर खाना देने की बात कहती है। लेकिन जब अब्दुल कहता है कि उसके एक पाकिस्तानी दोस्त ने बताया कि इस तरह के प्रदर्शन में भाग लेने के लिए पैसे मिलते हैं तो महिला उसे 2 डॉलर देने को राजी हो जाती है। अब्दुल इसके बाद पैसा बढ़ाने के लिए जोर डालता है और महिला 5 डॉलर तक देने को तैयार हो जाती है।
बग्गा इससे पहले भी पाकिस्तान परस्त लोगों को अपने अनोखे अंदाज में बेनकाब करते रहे हैं। ताजा ऑडियो से साफ़ है कि अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद भारत-विरोधी और मोदी-विरोधी प्रदर्शनों को कैसे अंजाम दिया जा रहा है। भारत को वैश्विक मंच पर शर्मिंदा करने के लिए पाकिस्तान इसे प्रायोजित तरीके से अंजाम दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अलग-थलग किए जाने के बावजूद वो अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा।