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कहॉं गए पाकिस्तान के सिख: 15 साल में 40 हजार से 8 हजार हो गए

सिख लड़की को घर से उठाकर आतंकी से निकाह कराने की घटना ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार को फिर से बेनकाब कर दिया है। जिस पाकिस्तान में गुरु नानक देव का जन्मस्थान ननकाना साहिब है वहॉं सिखों के वजूद पर ही खतरा मॅंडरा रहा है।

15 साल में उनकी आबादी घटकर 40 हजार से 8 हजार पर सिमट गई है। सिखों का अस्तित्व खत्म करने के लिए कितनी बड़ी साजिश चल रही है इसे गुरुवार (29 अगस्त) को सामने आई घटना से भी समझा जा सकता है।
ननकाना साहिब गुरुद्वारा तंबी साहिब के एक ग्रन्थि (सिख पुजारी) की 19 साल की बेटी को घर से गुंडे घसीट कर ले गए। जबरन इस्लाम क़बूल करवाया और फिर हाफ़िज सईद के आतंकी संगठन के जमात-उद-दावा के मोहम्मद हसन से उसका निक़ाह करवा दिया गया।

मामले के तूल पकड़ने पर पहले पीड़ित लड़की का एक वीडियो सामने आया। इसमें बताया गया कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम क़बूल कर हसन से निक़ाह की है। फिर लड़की को डराने-धमकाने की बात सामने आई। इस्लाम क़बूल नहीं करने पर उसके पिता और भाई को गोली से मार देने की धमकी दी गई। अब भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने दबाव के कारण पीड़िता को सुरक्षित उसके घर पहुँचाने की बात सामने आई है।

लेकिन हर मामला न तो इतना तूल पकड़ पाता है और न ही उस तरह से पाकिस्तान पर दबाव बन पाता है। लिहाजा, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने का सिलसिला दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान में 2017 में हुई जनगणना में सिखों की आबादी 8 हजार है। 2002 में पाक में सिखों की आबादी 40 हज़ार होने का अनुमान लगाया गया था।

लाहौर के जीसी कॉलेज यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक और अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता प्रोफेसर कल्याण सिंह के अनुसार सिखों की आबादी घटने का एक बड़ा कारण जबरन धर्म परिवर्तन भी है। विश्व के समृद्ध सिख समुदाय की ओर से पाकिस्तान के सिखों की दशा की अनदेखी को भी वे इसके लिए ज़िम्मेदार मानते ।

उन्होंने कहा कि अफ़गानिस्तान और ईरान में भी सिखों की ऐसी ही हालत है। पाकिस्तान में सिखों या अल्पसंख्यकों के लिए अपना कोई फैमिली लॉ जैसा मज़बूत क़ानून नहीं है। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कोई ख़ास क़ानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं है। 

पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जाँचकर्ता से लेकर वकील और जज तक, अधिकतर बहुसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिम हैं। इसलिए सिख समुदाय से जुड़े मुद्दों का क़ानूनी तौर पर कोई समधान मौजूद ही नहीं होता। शेष बचे आठ हज़ार सिखों की सबसे बड़ी परेशानियों में शिक्षा, ग़रीबी और भेदभाव जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।

‘बाबरी मस्जिद शिया वक्फ की संपत्ति, हम उसे मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को देने को तैयार’

शिया वक्फ बोर्ड ने शुक्रवार (अगस्त 30, 2019) को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित जमीन का तिहाई हिस्सा मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को देने को तैयार है, जो इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुस्लिम संगठनों को आवंटित किया था। 

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वकील एमसी ढिंगरा ने शुक्रवार को अदालत में दलील देते हुए कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए 2010 के फैसले में, विवादित भूमि का एक तिहाई हिस्सा समुदाय विशेष को दिया गया था, न कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को। इसलिए वो अपना हिस्सा हिन्दुओं को देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसका एक आधार यह भी है कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ की संपत्ति है। उन्होंने बताया कि विवादित संपत्ति शियाओं को बिना नोटिस दिए सुन्नी वक्फ के तौर पर पंजीकृत कर दी गई और बाद में शिया बोर्ड 1946 में अदालत में इस आधार पर मामले को हार गया कि उसने एक सुन्नी इमाम नियुक्त कर लिया था।

ढिंगरा ने कहा कि हिंदुओं ने जो दलीलें दी हैं, उनसे पूर्वाग्रह रखे बिना, शिया उस संपत्ति पर अधिकार का दावा नहीं करते। 1936 तक इस पर शियाओं का कब्जा था और इसके पहले तथा अंतिम मुतवल्ली शिया थे और किसी सुन्नी को कभी मुतवल्ली नियुक्त नहीं किया गया।

इसके साथ ही, अखिल भारतीय श्री राम जन्म भूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से वरिष्ठ वकील पी एन मिश्रा ने अपनी संक्षिप्त दलीलें रखीं और विवादित स्थल के जमीन रिकॉर्ड में हस्तक्षेप किए जाने का आरोप लगाया। मिश्रा ने कहा कि जमीन पर दावे को लेकर दूसरे समुदाय के पास कोई ठोस पक्ष नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘वाकिफ (वक्फ करने वाला) को जमीन का मालिक होना चाहिए। यहाँ बाबर जमीन का मालिक नहीं था।’’ उन्होंने कहा कि इस्लामी कानून और परंपराओं के तहत जमीन को वैध तरीके से अल्लाह को सौंपा जाना चाहिए और बाबर यह काम मीर बकी के जरिए नहीं कर सकता था क्योंकि इस्लाम में एक एजेंसी के माध्यम से जमीन सौंपना निषिद्ध है। मिश्रा ने कहा कि मस्जिद होने के लिए दिन में दो बार अजान के बाद नमाज पढ़ी जानी चाहिए, जबकि विवादित स्थल के मामले में ऐसा नहीं था।

पी एन मिश्रा ने कहा कि एक मस्जिद में ‘वजू’ करने के लिए पानी की टंकी होनी चाहिए मगर यहाँ पर ऐसा कोई बंदोबस्त नहीं था। उन्होंने कहा कि मस्जिद में सजीवों की कोई तस्वीर, फूलों की डिजाइन आदि नहीं होनी चाहिए जबकि विवादित स्थल पर ये सारी चीजें थीं। अदालत आगे की सुनवाई 2 सितंबर को करेगी जब मुस्लिम पक्ष आगे की दलीलें रखेगा।

₹485 करोड़ का बिटकॉइन स्कैम: साथियों के हाथों मारा गया मास्टरमाइंड अब्दुल शकूर, 5 गिरफ़्तार

देहरादून पुलिस ने 485 करोड़ रुपए के बिटकॉइन स्कैम के ‘मास्टरमाइंड’ 24 वर्षीय अब्दुल शकूर की हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। अब्दुल की बुधवार देर रात हत्या कर लाश एक प्राइवेट हॉस्पिटल के इमरजेंसी वॉर्ड में छोड़कर हत्यारे फ़रार हो गए थे। पुलिस ने अब्दुल के 5 सहयोगियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने शुक्रवार (30 अगस्त) को केरल के रहने वाले फारिस ममनून, अरविंद सी, आसिफ अली, सुफ़ैल मुख़्तार और आफ़ताब मोहम्मद को गिरफ़्तार किया। ये सभी केरल के रहने वाले हैं। इस मामले से जुड़ी जानकारी देते हुए देहरादून के एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने बताया, “अब्दुल शकूर की हत्या की मुख्य वजह सैकड़ों करोड़ की क्रिप्टोकरंसी थी। सभी आरोपी शकूर की टीम के सदस्य थे। उन्होंने शकूर को मारने से पहले प्रेम नगर इलाके के एक घर में उसे यातनाएँ दी थीं।”

इसके आगे उन्होंने बताया कि पुलिस इन आरोपितों की तलाश कर रही थी। ये सभी केरल के मंजेरी कस्बे के रहने वाले हैं। शकूर ने कथित तौर पर मंजेरी के स्थानीय लोगों से बिटकॉइन में निवेश करने के लिए 485 करोड़ रुपए का इंतजाम किया था। पुलिस ने बताया कि बिटकॉइन में नुकसान होने के बाद शकूर और उसके साथी केरल से भाग आए। मगर केरल से कुछ लोग इनके पीछे लगे हुए थे जिसके चलते ये लोग बार-बार अपना स्थान बदल रहे थे।

एसएसपी जोशी ने बताया कि 12 अगस्त को अब्दुल शकूर के साथ आशिक देहरादून पहुँचा और किराए का घर तलाशने लगा। 20 अगस्त को उन्हें प्रेम नगर इलाक़े के सुधोवाला में एक घर किराए पर मिला, जहाँ 26 अगस्त को उनके कुछ अन्य साथी भी आए। जोशी के मुताबिक़, “अन्य सभी साथियों ने शकूर पर दबाव डाला कि वह अपने खाते का पासवर्ड शेयर करे, शकूर ऐसा करने को राज़ी नहीं था। इसके बाद में वे सभी उसे (शकूर) प्रताड़ित करने लगे, जिससे उसकी मौत हो गई। उसके शरीर पर चोट के निशान हैं।”

शकूर के बेहोश हो जाने के बाद उसके सहयोगियों उसे दो अस्पतालों में ले गए, पहले उसे बल्लूपुर चौक के पास एक अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिर वे उसे देहरादून-मसूरी मार्ग पर स्थित एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले गए। वहाँ भी डॉक्टरों ने बताया की वह मर चुका है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इसके बाद सारे आरोपित अपने वाहन अस्पताल में ही छोड़ भाग गए।

बुद्धिजीवी की बुद्धि की भुर्जी: जब अपशब्दों के बुलबुले उठने लगें, तेल निकल कर अलग होने लगे तो…

बुद्धिजीवी की बुद्धि का वैसे तो बहुत कुछ बनाया जा सकता है किन्तु आज हम भुर्जी बनाने की विधि देखेंगे। पहले एक बुद्धिजीवी लीजिए। सबसे पहले उसकी बुद्धिमत्ता नाप लीजिए। स्वयं को जितना ऊँचे स्तर का बुद्धिजीवी समझकर जितना अधिक मत्त हो, उसकी बुद्धि-मत्ता उतनी अधिक समझनी चाहिए। ऐसा बुद्धिजीवी भुर्जी बनाने के लिए उपयुक्त होता है।

यह आवश्यक है कि बुद्धिजीवी कम से कम राष्ट्रीय स्तर का हो। अंतरराष्ट्रीय स्तर का बुद्धिजीवी मिल जाए तो बहुत बढ़िया रहता है, और न ही मिले तो कोई लोटा बुद्धिजीवी भी ले सकते हैं। लोटा अर्थात ‘लोकल टाइप’ बुद्धिजीवी कच्चे होते हैं, दिमाग छोटा और बुद्धि काफी ठोस होती है। लेकिन इसमें कुछ घुसाना कठिन होता है। इसमें ‘टीआरपी के लिए कुछ भी करेगा’ स्तर के पत्रकार, बी-ग्रेड फ़िल्मों के कलाकार और उनके फैन होते हैं। ये कब, कहाँ, किस बात पर कैसे लुढ़क जाएँ किसी को पता नहीं होता। ये लोटे में रहते हैं और लोटे को ही अथाह संसार मानते हैं और लोटे से कभी बाहर निकल ही नहीं पाते।

राष्ट्रीय स्तर के बुद्धिजीवी का दिमाग बड़ा, तर्क पिलपिले और जीभ बड़ी होती है। इनमें बड़बोले नेता, पत्रकार, वकील और लेखक-कवि आदि शामिल होते हैं। चिंता में डूबे रहना इनका प्रमुख लक्षण है। इनको लगभग हर बात की चिंता होती है और मीडिया को इनकी चिंता की बहुत चिंता होती है। ऐसे लोग, सुबह-सुबह शीशे में अपना मुँह देख लेते हैं, फिर चिंता करते है, और अगले दिन अखबार में छापते हैं – देश में बढ़ते प्रदूषण और गंदगी पर बुद्धिजीवियों ने चिंता जताई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के बुद्धिजीवी का दिमाग और बुद्धि दोनों छोटे और पके हुए होते हैं, पर भुर्जी बनाने के लिए श्रेष्ठ होते हैं। इनमें अंग्रेजी कूट-कूट कर भरी होती है, लेकिन ‘घेरावइंग’ करने के लिए शब्द ऑक्सफ़ोर्ड शब्दकोष में भी नहीं ढूँढ पाते। ऑक्सफ़ोर्ड ब्रांड के छुट्टे सांड हों या टुच्चे इतिहासकार, जन्मभूमि के विवाद में जीसस को घसीटने वाले न्यायाधीश हों या नए नोट छापकर अर्थव्यवस्था को मजबूत कर देने वाले मैग्सेसे छाप पत्रकार। ये सब अंतरराष्ट्रीय स्तर के बुद्धिजीवी हैं। अपने दिमाग से बड़ी बात सोचकर फँसने की इनकी पुरानी आदत होती है।

आजकल बुद्धिजीवी जैसे दिखने वाले जीभी भी बहुतायत में पाए जाते हैं। इनके पास केवल जीभ होती है, दिमाग नहीं। क्या बोलते हैं, यह इनको भी पता नहीं होता। इनसे सावधान रहिए, इनका न दलिया बनता है न भुर्जी, इनका रायता ही बनता है।

चलिए हम भुर्जी बनाने की विधि पर वापस आते हैं। आप ऊपर बताए किसी एक बुद्धिजीवी को चुन लीजिए, यह ध्यान रहे बुद्धिजीवी की मात्रा बड़ी ई की हो, छोटी इ की मात्रा वाले बुद्धिजीवी की बुद्धि की भुर्जी नहीं बनती, दलिया बनता है।

भुर्जी बनाने के लिए पहले बुद्धिजीवी की किसी बात का एक छोर पकड़ लें। फिर उसको खींचना शुरू करें, उसे तब तक खींचें जब तक बात का बतंगड़ न बन जाए। बतंगड़ बन जाने पर उसे यथासंभव उछाल कर देखें, जब बतंगड़ के बीच बुद्धिजीवी के साथ उसके नाते-रिश्तेदार और खानदान भी उछलता दिखने लगे तब उसे एक तरफ सूखने, चटकने और सिकने के लिए रख दें। बीच बीच में एक दो ट्वीट छोड़ते हुए धीरे-धीरे बुद्धिजीवी को मद्धम आँच पर पकने दें, आप देखेंगे कि वह गर्म हो रहा है। उसकी बातों में आपको भाप उड़ती हुई साफ़ दिखने लगेगी।

हो सकता है कि वह कभी थोड़ा ज्यादा सुलग जाए और पलटकर उत्तर दे दे, तब उसे दंडवत कर आशीर्वाद माँग लें। उसके बाद उसे धीरे-धीरे सेंकते रहें। बुद्धिजीवी का धैर्य धीरे-धीरे सूखने लगेगा, उसके उत्तर अधिक रूखे होने लगेंगे। थोड़ी देर में उसकी बातों में अपशब्दों के बुलबुले उठने लगेंगे। ऐसे में बुलबुले बाहर भी उचट सकते हैं, आप चाहें तो कुछ देर के लिए ढक्कन लगा दें। जब बुलबुले फूटने बंद हो जाएँ, और बुद्धिजीवी की बुद्धि का तेल निकल कर अलग होने लगे तो आँच बढ़ा दें।

सभी मात्राओं का विशेष ध्यान रखें। मात्रा इधर-उधर होने पर आप भी जल सकते हैं। बुद्धिजीवी की बातों में जब धुआँ उठने लगे, तर्क और बात अलग-अलग दिखने लगे, कान लाल और मन काला दिखने लगे तो समझिए भुर्जी लगभग तैयार होने वाली है। जैसे ही आपको लगे कि अब आप ब्लॉक होने की कगार पर हैं, मुट्ठीभर चंद्रबिंदुओं से गार्निश कीजिए। बुद्धिजीवी के भेजे की भुर्जी तैयार है। ब्लॉक होने पर गर्मागर्म स्क्रीनशॉट के साथ पोस्ट करें।

हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन, निकाह, रेप की कोशिश और अंत में तीन तलाक: सास ने घर से निकाला

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन कराकर पहले उससे निक़ाह करने और फिर दो साल बाद दूसरी शादी कर फोन पर तलाक़ देने का मामला सामने आया है। दो साल पहले रेहरा बाज़ार थाना क्षेत्र के मसीहाबाद गाँव की 25 वर्षीय हिंदू युवती का प्रेम-प्रसंग गाँव के ही अब्दुल कुद्दूस से चल रहा था। अब्दुल युवती पर निक़ाह का लगातार दबाव बना रहा था, इसके लिए वो उसे आत्महत्या कर लेने की धमकी (इमोशनल ब्लैकमेल) भी दे रहा था।

काफ़ी दबाव के बाद युवती जब निक़ाह के लिए राज़ी हुई तो अब्दुल उसे दूसरी जगह ले गया, जहाँ उसने उसका धर्म परिवर्तन कराया और उसका नाम बदलकर निशा बानो रख दिया। इसके बाद 11 हज़ार रुपए मेहर की रक़म तय कर निक़ाह किया। निक़ाह के कुछ रोज बाद अब्दुल कुद्दूस काम करने सऊदी अरब चला गया। वहाँ वो क़रीब दो साल रहा, इस बीच निशा बानो बनी हिंदू युवती अपने ससुराल में रह रही थी।

पीड़िता ने आरोप लगाते हुए बताया कि जब अब्दुल सऊदी अरब में था तो उस दौरान उसके देवर और उसके पति के बहनोई ने उसके साथ रेप करने की कई बार कोशिश की। इसका विरोध करने पर पीड़िता को मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद पीड़िता अब्दुल की वापसी का इंतज़ार करने लगी और गाँव के आसपास मेहनत-मज़दूरी कर दिन गुज़ारने लगी।

दैनिक जागरण के बलराम संस्करण में छपी ख़बर

पीड़िता ने अपनी शिक़ायत में बताया कि तीन दिन पहले अब्दुल ने अपने दोस्त के मोबाइल पर उसे (पीड़िता) तीन तलाक़ दे दिया। तब पीड़िता को पता चला कि उसका पति सऊदी अरब से मुंबई आ गया है। साथ ही उसे यह भी पता चला कि अब्दुल ने दूसरा निक़ाह कर अपने परिवार को मुंबई बुला लिया है।

इस मामले में एसपी देवरंजन ने कहा कि ज़िले में धर्म परिवर्तन कराकर तीन तलाक़ मामला संज्ञान में आया है। स्थानीय थाने की पुलिस को जाँच के आदेश दे दिए गए हैं और जल्द ही पीड़िता को न्याय दिलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। 

31121004 Vs 1906657: असम में NRC की फाइनल ल‍िस्‍ट का आँकड़ा, संवेदनशील जिलों में धारा 144 लागू

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार (अगस्त 31, 2019) को एनआरसी (NRC) की अंतिम सूची प्रकाशित कर दी है। एनआरसी के स्टेट कॉर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने बताया कि इस लिस्ट में 3,11,21,004 (3 करोड़ 11 लाख 21 हजार चार) लोगों के नाम शामिल हैं, जबकि 19,06,657 (19 लाख 6 हजार 657) लोगों के नाम शामिल नहीं हैं। इनमें वह लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने दावे प्रस्तुत नहीं किए। उन्होंने कहा कि जो लोग इससे संतुष्ट नहीं है, वे फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर सकते हैं।

राज्य सरकार ने सूची में नाम नहीं आने पर लोगों को भयभीत न होने और हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया है। असम में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। हिंसा और सांप्रदायिक झड़पों की आशंकाओं को देखते हुए राज्य सरकार और गृह मंत्रालय ने लोगों से शांति की अपील की है। पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी में लोगों से अफवाहों, सुनी-सुनाई बातों, फेक न्यूज पर विश्वास न करने की अपील की गई है। गुवाहाटी समेत 14 संवेदनशील जिलों में धारा 144 लागू है। सुरक्षा-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 51 कंपनियाँ तैनात की गई हैं।

असम के सीएम सर्वानंद सोनेवाल ने एनआरसी की अंतिम सूची जारी होने से पहले यहाँ के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी से असम में शाँति और धीरज बनाए रखने की अपील करता हूँ। जब तक अपील करने का समय है, तब तक किसी को विदेशी नहीं माना जाएगा। राज्य सरकार कानूनी समर्थन का विस्तार करेगी। सरकार इन लोगों की परेशानियों पर ध्यान देगी और यह देखेगी कि उनका किसी तरह का उत्पीड़न न हो।” उन्होंने कहा कि जिनका नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं है, वो 120 दिनों के अंदर फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में अप्लाई कर सकते हैं।

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने साल 2013 में एनआरसी अपडेट करने का आदेश दिया था। जिससे कि बोनाफाइड नागरिकों की पहचान की जा सके और अवैध अप्रवासियों को बाहर निकाला जा सके। मगर इस पर असल काम फरवरी 2015 से शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्‍त तक एनआरसी की अंतिम सूची जारी करने की अंतिम समय सीमा तय की थी। सरकार ने तय समय के भीतर यह सूची जारी कर दी है।

कोई भी महिला सड़क पर नहीं दिखनी चाहिए, स्कूल-दुकानें खुलीं तो जला देंगे: J&K में आतंकी संगठन

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-A के निरस्त होने के बाद से ही घाटी में दहशत और आतंक फैलाने वाले आतंकी बौखला गए हैं। इसी बौखलाहट में आतंकियों ने जम्मू कश्मीर के लोगों को धमकी दी है। भारतीय सेना के अनुसार, आतंकवादी समूहों ने कश्मीर घाटी में दुकानें और स्कूल खोले जाने के विरोध में कई जगहों पर पोस्टर्स लगाकर स्थानीय लोगों को धमकी दी है। इन पोस्टर्स में महिलाओं को बाहर न निकलने की धमकी दी गई है और उन्हें घरों के भीतर रहने को कहा गया है।

ग़ौरतलब है कि अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर कड़े सुरक्षा घेरे में है। सुरक्षा के मद्देनज़र अभी भी घाटी के अधिकांश क्षेत्रों में संचार लाइन्स की बहाली नहीं की गई है।

सेना के अधिकारियों ने कहा कि आतंकी संगठनों हिज़बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा से संबंधित पोस्टर बरामद किए गए हैं। कुलगाम ज़िले से बरामद हिज़बुल मुजाहिदीन के एक पोस्टर में स्थानीय लोगों को अपने निजी वाहनों को चलाने से मना किया गया है, इसके उन्हें चेतावनी दी गई है।

इनमें से एक पोस्टर में लिखा था,

“हमारे पास कुछ निजी वाहनों के पंजीकरण नंबर हैं जो अभी भी सड़कों पर चल रहे हैं और हम उनके मालिकों को एक अंतिम चेतावनी जारी कर रहे हैं। कोई भी रास्ता नहीं खोला जाना चाहिए। कोई भी महिला सड़क पर नहीं दिखनी चाहिए। महिलाएँ अपने घर में रहें।” 

अधिकारियों के अनुसार, आतंकवादियों ने विशेष रूप से व्यापारियों को चेतावनी दी है कि वो अपनी दुकानें न खोलें, घाटी में बाज़ार बंद रहने चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि 21 अगस्त को तीन आतंकवादियों ने अनंतनाग के ऐशमुकम बाज़ार में व्यापारियों को अपनी दुकानें खोलने के ख़िलाफ़ धमकी दी थी। उसी दिन, चार आतंकवादियों ने पुलवामा ज़िले में व्यापारियों को धमकाया था कि वो कश्मीर के बाहर फल न भेजें।

इसके अलावा, आतंकवादियों ने 24 अगस्त को अनंतनाग में व्यापारियों को दुकानें खोलने से मना किया और अगले दिन, तीन आतंकवादियों ने नाशपाती बेचने वालों के बाग मालिकों को भी धमकी दी। 27 अगस्त को, आतंकवादियों ने व्यापारियों को धमकी दी थी कि अगर वे अपनी दुकानें खोलेंगे तो उनकी दुकानें जला दी जाएँगी।

श्रीनगर के परिमपोरा इलाके में शुक्रवार (30 अगस्त) को अज्ञात बाइक सवार आतंकवादियों ने एक दुकानदार पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चला दी थीं। इसके बाद, 65 वर्षीय पीड़ित, गुलाम मोहम्मद ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

‘मुझे सिर्फ चाकू चलाना आता है इसलिए… बम बनाना सिखा दो, तो उससे लोगों को मारूँगा’

वॉशिंगटन में इस्लामिक स्टेट (आईएस) से प्रेरित हमले की योजना बनाने के आरोप में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक अवैस चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यायिक विभाग ने शुक्रवार (अगस्त 30, 2019) को यह जानकारी दी। कोर्ट ने अवैस को आतंकी संगठन का समर्थन करने और हमले की योजना बनाने के आरोप में बिना जमानत के जेल भेजने का आदेश दिया है।

न्यू यॉर्क सिटी पुलिस कमिश्नर जेम्स ओ’नील ने कहा कि अवैस चौधरी शहर में कई लोगों की हत्या करने की योजना बना रहा था। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोषी पाए जाने पर 20 की सजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी से कई लोगों की जान बची है।

न्यूयॉर्क पुलिस विभाग ने बताया कि अवैस चौधरी वर्ल्ड फेयर मरीना और लागार्डिया हवाई अड्डे के पास फ्लशिंग बे प्रोमेनेड पर अकेले ही चाकू से हमले की योजना (Lone Wolf स्टाइल में) बना रहा था। लेकिन अवैस चौधरी ने एक गलती कर दी। उसने अपनी योजना अंडरकवर एजेंट को अपना साथी समझ बताना शुरू कर दिया। 23 अगस्त को उसने उस जगह के बारे में बताना शुरू किया, जहाँ वो हमला करने वाला था। फिर अगले दिन उसने जगह का मुआयना किया और वहाँ से भागने के संभावित मार्गों के बारे में पता लगाया। इसके बाद उसने रविवार (अगस्त 25, 2019) और सोमवार (अगस्त 26, 2019) को हमले से संबंधित चीजों (जिनकी मदद से वो हमले को अंजाम देता) का ऑर्डर दिया।

दिलचस्प बात ये है कि आरोपित अवैस ने अंडरकवर एजेंट को आईएस का आदमी का समझकर उसे अपने हमले की रणनीति के बारे में बताया। अवैसी ने कहा कि वो लोगों के ऊपर चाकू से हमला करने वाला है, क्योंकि उसे सिर्फ चाकू चलाना ही आता है। लेकिन यदि वो (अंडरकवर एजेंट) उसे बम बनाने का तरीका सिखा देंगे, तो वो बमबारी करके भी हमला कर सकता है। 

अभियोजन पक्ष ने बताया कि अवैस ने एक अन्य अंडरकवर एजेंट को “इस्लामिक स्टेट” शीर्षक के एक दस्तावेज़ का एक स्क्रीनशॉट दिखाया। जिसमें हमला करने की जगह और उसकी रुपरेखा के बारे में बताया गया था। उस दस्तावेज में बताया गया था कि लोगों के ऊपर चाकू से हमला किस तरह से करना है और इस दौरान खुद को कैसे चाकू से बचाना है।

फारुख ने खुद करवाई शेविंग लेकिन धर्म के डर से फैलाई अफवाह – मुझे ट्रेन में मारा, काट डाली दाढ़ी

उत्तर प्रदेश में झूठी कहानी बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला बागपत का है, जहाँ एक मुस्लिम युवक ने सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश की। मुस्लिम युवक ने उसके साथ ट्रेन में मारपीट करने और जबरदस्ती दाढ़ी को काटने की अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश की। जिसकी जाँच में जुटी पुलिस ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।

दरअसल, बागपत के मुगलपुरा मोहल्ले के रहने वाले मुस्लिम युवक फारुख ने जबरन दाढ़ी काटने की अफवाह फैलाने की कोशिश की। फारुख ने वीडियो बनाया और उसके एक दोस्त साजिद ने इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। उसने वीडिया के साथ लिखा कि फारुख को बागपत में ट्रेन में खींचकर पीटा गया और जबरन उसकी दाढ़ी काट दी गई। साजिद ने पीड़ित के लिए मदद माँगी थी। पोस्ट में यूजर ने यूपी पुलिस, बागपत पुलिस, रेल मंत्रालय, सीएम योगी आदित्यनाथ और अमित शाह को टैग किया था। इसके अलावा पोस्ट में एक फोन नंबर भी लिखा था, जो पीड़ित के भाई का बताया गया था।

दैनिक जागरण में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

जब पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की जाँच शुरू की तो मामला कुछ और ही निकला। बागपत के एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने बताया कि फारुख को विश्वास में लेकर जब पूछताछ की गई तो उसने झूठी अफवाह फैलाने की बात कबूल कर ली। उसने बताया कि वह कुछ साल पहले एक इज्तमा में शामिल हुआ था। इसमें तकरीर से प्रभावित होकर उसने दाढ़ी बढ़ा ली थी। अब कुछ दिन से गर्मी अधिक होने के कारण वह दाढ़ी से परेशान था और दाढ़ी कटवाना चाह रहा था। लेकिन, समाज व धर्म का भय था। इसलिए उसने जबरदस्ती दाढ़ी कटवाने की झूठी कहानी बनाई। फारुख ने बताया कि उसने लोनी में रहने वाले अपने एक दोस्त के पास पहुँचकर अपनी दाढ़ी कटवा ली और घर लौटते वक्त खुद ही अपने कपड़े फाड़कर ये अफवाह फैलाई कि ट्रेन में उसके साथ मारपीट की गई और दाढ़ी काट दी गई।

अगवा सिख लड़की पहुँची घर, हाफ़िज़ सईद के आतंकी संगठन के मो. हसन से करवाया गया था निकाह

पाकिस्तान में सिख समुदाय की लड़की को अगवा किए जाने के बाद जबरन इस्लाम क़बूल करवाने और निक़ाह करवाने के मामले में नया मोड़ आया है। भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर से पाकिस्तान पर बने दवाब के चलते पीड़िता को सुरक्षित उसके घर पहुँचा दिया गया है। वहीं, पंजाब प्रांत की ननकाना साहिब पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया है।

गुरुवार (29 अगस्त) को सामने आए इस मामले में भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की थी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार (30 अगस्त) को इस मामले में पाकिस्तान सरकार से बात कर तत्काल प्रभाव से ठोस क़दम उठाने की माँग की थी। ख़बर के अनुसार, अगवा की गई सिख लड़की का जबरन निक़ाह जिससे करवाया गया था, उसका नाम मोहम्मद हसन है और वो हाफ़िज़ सईद के आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा का सदस्य है।

दरअसल, पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारा तंबी साहिब के एक ग्रन्थि (सिख पुजारी) की बेटी पिछले चार दिनों से लापता थी। इसके बाद गुरुवार को लड़की के धर्मांतरण और निक़ाह की बात सामने आई। इस मामले में अगवा (लड़की के परिवार वालों द्वारा लगाए गए आरोप के अनुसार) की गई सिख लड़की के निक़ाह का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वो साफ़ तौर पर डरी-सहमी दिख रही थी। इस वीडियो में एक मौलवी उसे उसके इस्लामी नाम आइशा से बुलाता नज़र आया।

इस मामले पर शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो शेयर किए। इन वीडियो में लड़की के मजबूर परिजन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से मदद की गुहार लगाते दिखे। रहे हैं। इस वीडियो में लड़की एक भाई मनमोहन सिंह ने बताया कि उसकी बहन को धमकी दी गई थी कि अगर उसने इस्लाम क़बूल नहीं किया तो उसके भाई और पिता को गोली मार दी जाएगी।

इसके अलावा, अगवा लड़की के दूसरे भाई सुरेंद्र सिंह ने बताया कि रात के समय उनकी छोटी बहन को गुंडे घसीटकर ले गए, ज़बरदस्ती इस्लाम क़बूल करवाया। इस मामले को लेकर जब परिजन पुलिस स्टेशन गए तो वहाँ उनकी न तो किसी ने कोई बात ही सुनी और न ही किसी तरह की कोई मदद की। 

घर आने पर वही गुंडे वापस उनके घर आए और उन्हें डराया-धमकाया और उन्हें कोई कार्रवाई न करने के लिए कहा। ऐसा न करने पर सभी को इस्लाम क़बूल करवाने की धमकी दी गई। सुरेंद्र सिंह ने इमरान ख़ान और चीफ़ जस्टिस से इंसाफ़ की माँग करते हुए कहा था कि अगर उनकी छोटी बहन को सुरक्षित वापस नहीं लाया गया तो वो 31 अगस्त को गवर्नर हाउस के सामने पूरे परिवार के साथ आत्मदाह कर लेगा।