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पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, कई नेताओं की उपस्थिति में बेटे रोहन ने दी मुखाग्नि

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके बेटे रोहन जेटली ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। भाजपा के संकटमोचक रहे जेटली का अंतिम संस्कार रिंग रोड में यमुना किनारे स्थित निगमबोध घाट पर किया गया। इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहे।

दिल्ली पुलिस ने दिवंगत नेता के सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण अडवाणी भी अरुण जेटली की अंतिम क्रिया के दौरान उपस्थित रहे।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले अरुण जेटली उन गिने-चुने नेताओं में से थे, जिन्होंने मोदी और वाजपेयी- दोनों दिग्गज प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री की भूमिका निभाई। निगमबोध घाट पर उपस्थित अन्य नेताओं में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल थे। इससे पहले जेटली का पार्थिव शरीर भाजपा मुख्यालय में दर्शनार्थ रखा गया था। स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि अपने अंतिम दिनों में भी जेटली उनसे मुस्कुरा कर ही मिले थे।

बाबा रामदेव सहित अन्य हस्तियों ने भाजपा मुख्यालय पहुँच कर अरुण जेटली के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए।

जायद मेडल तो बहानेबाजी है, फ्यूल ख़त्म होने वाली ख़बर जो छिपानी है: पाक सांसदों ने रद्द किया UAE दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनियाभर में अवॉर्ड्स मिल रहे हैं। पाकिस्तान को अंतरिक्ष से भी लताड़ ही नसीब हो रहा है। मोदी कई देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं जबकि इमरान ख़ान ट्विटर पर आरएसएस को गाली देने में लगे हुए हैं। कभी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री आवास को शादी के मंडप में बदल दिया जाता है तो कभी पाकिस्तान का राजनयिक कुवैत के अधिकारी की घड़ी चोरी करते हुए पकड़ा जाता है। चोरी-चकारी में लगे पाकिस्तानियों की हालत यह है कि जब वो विदेश यात्रा पर भी जाते हैं तो उन्हें होटल के कर्मचारियों से मिल कर ही संतुष्ट होना पड़ता है।

पाकिस्तानी सीनेट के अध्यक्ष सादिक़ संजरानी एक संसदीय दल के साथ यूएई के दौरे पर जाने वाले थे। सभी पाकिस्तानी सांसदों ने कई दिनों से सिर्फ़ इसीलिए खाना नहीं खाया था ताकि वे यूएई पहुँच कर भर पेट खा सकें। कई सांसदों को तो यूएई के आलीशान होटलों के कमरों और उसमे परोसे जाने वाले व्यंजनों के सपने भी आ रहे थे। लेकिन हाय रे किस्मत! संजरानी ने अचानक से बम फोड़ दिया। उन्होंने यूएई का दौरा रद्द कर दिया और सभी सांसदों का सपना धरा का धरा रह गया। हालाँकि, दौरा रद्द होने की असली वजह उन्होंने छिपा ली।

हुआ यूँ कि शनिवार (अगस्त 24, 2019) को यूएई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सबसे बड़े सिविलियन अवॉर्ड जायद मैडल से सम्मानित किया। ख़ुद क्राउन प्रिंस ने मोदी के गले में ‘ऑर्डर ऑफ़ जायद’ नामक स्वर्ण मैडल पहनाया। अबुधाबी में हुई इस हलचल से इस्लामाबाद में भूकंप आ गया, जहाँ पाकिस्तानी मंत्रीगण इस बात पर बहस कर रहे थे कि संसदीय दल को यूएई जाने के लिए ख़र्चे का बंदोबस्त कैसे किया जाएगा? अब यूएई से ही रुपए माँग कर यूएई जाना संभव तो है नहीं क्योंकि यूएई चीन नहीं है।

इसी बैठक के दौरान इस्लामाबाद में झटके महसूस किए गए। बस पाकिस्तान ने इसी भूकंप का बहाना बना कर अपनी समस्या भी सुलझा ली। बात ये थी कि पाकिस्तान का संसदीय दल भी तैयार था और उनके यूएई जाने के लिए एक चीनी विमान का बंदोबस्त भी कर लिया गया था लेकिन उस विमान में फ्यूल नहीं था। ऑपइंडिया सटायर विभाग के ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सचिव के नौकर को फोन किया तो उसने फ्यूल देने के लिए एक बड़ी शर्त रख दी।

चीन की शर्त यह थी कि वह यूएई जाने और वहाँ से आने के लिए पाकिस्तानी सांसदों के विमान को फ्यूल तभी मुहैया कराएगा जब उसे तत्काल 10,000 गदहे मुहैया कराए जाएँगे। इमरान ख़ान ने बुझे मन से जनरल बाजवा को अपना दुखड़ा सुनाया। बाजवा ने साफ़-साफ़ कह दिया कि उनके पास थोड़ा-बहुत फ्यूल है तो लेकिन उसका उपयोग लश्कर और जमात के लोग करने वाले हैं। “नहीं, नहीं। घुसपैठ की कोशिशें और आतंकवादी प्रक्रियाओं में रुकावट नहीं आनी चाहिए।“- इमरान ख़ान ने ऐसा कह कर निकल लिया।

पाकिस्तान के कई अधिकारी और नेता मिल कर भी 100 से अधिक गदहे नहीं पकड़ पाए। अंत में पाकिस्तानी सीनेट के अध्यक्ष ने बुझे मन से अपना यूएई दौरा कैंसल करने की घोषणा की। अब मीडिया के सवालों का जवाब तो देना था। और आजकल इमरान ख़ान अपने घर के खाने में निकलने वाली खामी को भी कश्मीर से जोड़ते हैं। जब तक वह अपना घर-परिवार से लेकर पाकिस्तान के अन्य मुद्दों को कश्मीर से जोड़ कर उसके लिए पीएम मोदी और संघ को गालियाँ नहीं देते हैं, तब तक उन्हें खाना नहीं पचता है।

इसीलिए पाकिस्तानियों ने इस मुद्दे को भी मोदी से जोड़ा। पाकिस्तान ने यूएई से नाराज़गी जताई कि उसने पीएम मोदी को इतना बड़ा सम्मान क्यों दिया? बस इसी ख़बर का बहाना बना कर पाकिस्तानी सांसदों ने अपना यूएई दौरा रद्द कर दिया। इससे फ्यूल वाली बात भी छिप गई और गदहे वाली बात भी। दस किलो टमाटर की एवज में एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि फ्यूल ख़त्म होने और चीन द्वारा गदहों की माँग को छिपाने के लिए ये पूरी साज़िश रची गई। 5 किलो अतिरिक्त टमाटर देने पर उसने बताया कि यूएई द्वारा पीएम मोदी को मैडल दिए जाने के बाद पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान भी चीन से मैडल की माँग कर रहे हैं और इसके लिए वह कितने भी गदहे देने को तैयार हैं।

खैर, इमरान ने यूएई में कार्यरत सभी पाकिस्तानी राजनयिकों को बता दिया है कि इस बार चोरी ऐसी करनी है कि किसी को पता भी न चले। और हाँ, उन्हें आगाह कर दिया गया है कि पाकिस्तानी राजनयिक द्वारा कुवैती अधिकारी की घड़ी चोरी किए जाने का वीडियो वायरल हो चुका है, इसीलिए ये काम अब होशियारी से कैमरे से बचते हुए करना पड़ेगा। हो सकता है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अपनी चौथी शादी की भी घोषणा जल्द ही करें और इस बार उनकी पत्नी विदेशी होगी।

कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पीएम आवास को विवाह भवन बना देने वाले इमरान ख़ान किसी विदेशी लड़की से इसीलिए शादी करना चाहते हैं ताकि दहेज़ में कुछ रुपए और संपत्ति आए। इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में नई जान फूँकने में मदद मिलेगी। इमरान हर वो कोशिश करेंगे, जिससे पाकिस्तान में टमाटरों के दाम कम हों। वैसे, पाकिस्तान के सांसदों ने जब सुना कि यूएई दौरा रद्द हो गया है तो कइयों को हार्ट अटैक आते-आते बचा है। खैर, ऑपइंडिया के ख़ुफ़िया सूत्र ट्रक में टमाटर लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में हैं और जैसे ही कोई नई जानकारी मिलेगी, आप तक पहुँचाई जाएगी।

‘गालीबाज ट्रोल’ स्वाति चतुर्वेदी ने फिर फैलाई फेक न्यूज़, PM मोदी की तस्वीर को फोटोशॉप कर अरबी परिधान में दिखाया

फेक न्यूज़ फैलाने को लेकर हमेशा ट्रोल होने वाली पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी की काली करतूत एक बार फिर सामने आई है। इस बार स्वाति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोशाक को लेकर फर्जी खबर फैलाने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। बता दें कि, स्वाति ने शनिवार (अगस्त 24, 2019) को प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ करके उसे ट्विटर पर पोस्ट किया। जिसमें पीएम मोदी को यूएई की यात्रा के दौरान अरबी पोशाक ‘बिष्ट या घुटरा’ पहने दिखाया गया है।

स्वाति चतुर्वेदी द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट

स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री की छवि को खराब करने और उनका मजाक उड़ाने की नियत से इस तस्वीर को अपने ट्विटर हैंडल पर ‘offered without comments’ कैप्शन के साथ शेयर किया। तस्वीर में लाल रंग के घेरे में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने बिष्ट पहनी हुई है। हालाँकि, विदेश मंत्रालय द्वारा पोस्ट की गई मूल तस्वीर में आप देख सकते हैं कि पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान मोदी जैकेट के साथ अपने सामान्य परिधान पहने हैं। इस तस्वीर को देखने के बाद स्वाति के झूठे दावे बेबनियाद साबित हो जाते हैं।

दरअसल, स्वाति पीएम की तस्वीर को फोटोशॉप करके ये दिखाना चाहती थी कि वो अपने देश में तो हिन्दू विश्वास का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान उन्होंने खुशी-खुशी अरबी पोशाक को अपनाया।

मगर स्वाति की काली करतूत ज्यादा देर तक छुपी न रह सकी और काफी लोगों ने इनकी करतूत का पर्दाफाश कर दिया। जिसके बाद स्वाति चतुर्वेदी ने ये कहते हुए अपना पोस्ट हटा लिया कि वो तस्वीर फोटोशॉप थी।

स्वाति चतुर्वेदी, ने हमेशा ही प्रासंगिक बने रहने के लिए सरकार के खिलाफ झूठे प्रचार और फर्जी खबरों का सहारा लिया है। 2019 के लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद भी स्वाति चतुर्वेदी ने गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित फर्जी पोस्ट शेयर किया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह संसदीय सत्र में सो रहे थे। हालाँकि, बाद में यह खबर भी फर्जी साबित हुई।

सोशल मीडिया पर फर्जी खबर फैलाने के मामले में स्वाति चतुर्वेदी का पुराना इतिहास रहा है। इससे पहले, उन्होंने ठुकराए हुए प्रेमी के हाथों हिंसा की शिकार लड़की को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की हिंसा के रूप में दिखाया था और राष्ट्रीय स्तर के एक राजनेता के बयान को भी राष्ट्रीय चैनल पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया था।

इसके अलावा उन्होंने अमित शाह के भाषण को लेकर भी झूठ फैलाया था और कन्हैया कुमार पर हमले को लेकर बीजेपी के बारे में झूठी अफवाहें फैलाई थी। इतना ही नहीं, जब खुद की इन करतूतों की वजह से उनकी विश्वसनीयता कम होने लगी, उनके पाठकों का विश्वास उन पर से उठने लगा तो उन्होंने इसके लिए ऑपइंडिया को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि ऑपइंडिया ने उनके द्वारा वर्षों से फैलाए जा रहे फर्जी खबरों का पर्दाफाश कर दिया।  

कश्मीरी पंडितों ने अमेरिका में ​निकाली रैली, कहा- 370 जाने से खत्म हुआ अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव

भारत सरकार द्वारा आर्टिकल 370 पर लिए फैसले के बाद अमेरिका में रह रहे कश्मीरी पंडितों ने अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करने के फैसले का स्वागत करते हुए अमेरिका में रैली निकाली।

उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त को भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने का फैसला किया था। जिसके बाद अमेरिका में रह रहे कश्मीरी पंडितों द्वारा अटलांटा में सीएनएन मुख्यालय के समक्ष रैली निकाली गई।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कश्मीरी मूल के अटलांटा निवासी और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन एसोसिएशन (एनएफआईए) के पूर्व अध्यक्ष सुभाष राजदान ने बताया कि अनुच्छेद 370 में इन संशोधनों की आवश्यकता थी, क्योंकि इसके कारण लगभग सभी कश्मीरी अल्पसंख्यकों (जैसे शिया, दलित, गुर्जर, कश्मीरी पंडित, कश्मीरी सिखों) के साथ हद से ज्यादा भेदभाव हो रहा था। लेकिन अब उन्हें कानून के समक्ष बराबरी का अवसर मिलेगा।

गौरतलब है कि इस रैली के माध्यम से कश्मीरी पंडितों ने अपने पलायन और वापस अपनी मातृभूमि पर लौटने की तड़प को जगजाहिर किया। कभी उन्हें बढ़ते अतिवाद के कारण घाटी छोड़ना पड़ा था।

इस बीच, लैंसेट पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. रिचर्ड होर्टन को लिखे एक पत्र में कश्मीरी-मूल के प्रवासी चिकित्सकों ने कहा है कि 17 अगस्त को प्रकाशित उनकी हालिया राय में कई प्रासंगिक तथ्यों की अनदेखी की गई है।

Man Vs Wild: ख़ुद PM मोदी ने खोला राज़, कैसे उनकी हिंदी समझ रहे थे बेयर ग्रिल्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय शो ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ में नज़र आए थे। 12 अगस्त को प्रीमियर हुए इस एपिसोड में वे शो के होस्ट और विख्यात सर्वाइवल इंस्ट्रक्टर बेयर ग्रिल्स के साथ दिखे थे। इस एपिसोड की शूटिंग जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में हुई थी। पीएम मोदी शो में हिंदी में बात करते हुए दिखे थे, वहीं बेयर ग्रिल्स उनकी बातों का अंग्रेजी में जवाब दे रहे थे। इसी तरह ग्रिल्स द्वारा अंग्रेजी में पूछे गए सवालों का जवाब पीएम हिंदी में दे रहे थे और बेयर ग्रिल्स उसे समझ भी रहे थे।

इस एपिसोड के ऑन एयर होने के बाद ही सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या इसमें काफ़ी एडिटिंग की गई है ताकि ऐसा दिखे कि बेयर ग्रिल्स हिंदी समझ रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना था कि इस एपिसोड को कई फेज में शूट किया गया और हर सीन को एक से ज्यादा बार शूट किया गया ताकि दोनों के बीच हुई बातचीत बिना भाषा के बाधा के सही से सिखाई जा सके। एक ऐसा वर्ग भी था जिसका मानना था कि शो का स्क्रिप्ट पहले ही लिख लिया गया था, जिसमें पीएम को हिंदी बोलना था और बेयर ग्रिल्स को अंग्रेजी में बात करनी थी।

हालाँकि, अब इन सबसे पर्दा उठ गया है। ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका खुलासा किया है। पीएम से भी इस सम्बन्ध में सवाल पूछे गए कि उनके और बेयर ग्रिल्स के बीच 2 भाषाओं में धाराप्रवाह बातचीत कैसे संभव हुई? पीएम ने बताया कि शो के होस्ट बेयर ग्रिल्स के कान में एक कॉर्डलेस इंस्ट्रूमेंट लगा हुआ था, जिसकी मदद से वह पीएम मोदी द्वारा हिंदी में कही गई हर बात को अंग्रेजी में सुन रहे थे। आसान शब्दों में समझें तो एक छोटा सा बिना तार वाला उपकरण उनके कान में लगा हुआ था। यह उपकरण उसी समय पीएम मोदी द्वारा हिंदी में कही गई बातों को अंग्रेजी में अनुवाद कर रहा था।

यही कारण था कि बेयर ग्रिल्स पीएम मोदी की हर बात को समझ रहे थे और बातचीत की प्रक्रिया धाराप्रवाह चलती रही। इस शो ने दुनियाभर में रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की। 36.9 लाख इम्प्रेशन और 61 लाख ट्यून-इन के साथ रात 9 से 10 बजे की समयावधि में यह इन्फोटेन्मेंट जेनर का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो बन गया। पीएम मोदी ने भी स्वीकार किया कि इस शो के माध्यम से उन्हें दुनिया भर के युवाओं तक अपनी बात पहुँचाने में मदद मिली।

बहरीन में 200 साल पुराने कृष्ण मंदिर का होगा पुनर्निर्माण, 42 लाख डॉलर होंगे खर्च, PM मोदी ने किया शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित 200 साल पुराने कृष्ण मंदिर श्रीनाथ जी मंदिर के पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लेने के साथ ही मंदिर के पुनर्निर्माण परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना पर 42 लाख डॉलर की लागत आएगी। प्रधानमंत्री ने यहाँ पर भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। परियोजना का शुभारंभ करने के बाद पीएम मोदी फ्रांस में G-7 सम्मेंलन में भाग लेने के लिए रवाना हो गए।

बता दें कि, इस कृष्ण मंदिर का निर्माण 1817 में हुआ था। मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए उसके पुनर्निर्माण का फैसला किया गया है। 45 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में तीन मंजिला भवन के साथ मंदिर का नवीनीकरण किया जा रहा है। मंदिर से लगा एक नॉलेज सेंटर और संग्रहालय भी होगा। इस्लामिक देश बहरीन में बना यह कृष्ण मंदिर खाड़ी क्षेत्र का सबसे पुराना हिन्दू मंदिर है।

बहरीन में यह मंदिर भारतीयों सहित विदेशियों के भी आकर्षण का केंद्र है। भारतीय यहाँ भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए पहुँचते हैं, वहीं इसकी कलाकृति के भी काफी चर्चे हैं। पुनर्निर्माण के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं और सैलानियों की संख्या में भी वृद्धि की पूरी संभावना है। अब इस मंदिर में 80 फीसदी हिस्से में श्रद्धालु घूम सकेंगे और भगवान कृष्ण की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी की बहरीन की यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस देश की यात्रा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी को यूएई में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से सम्मानित किया गया था। प्रधानमंत्री ने यहाँ पर रुपे कार्ड भी लॉन्च किया था।

इस्लामिक बैंक घोटाला: मंसूर खान ने कहा- चुनाव से पहले कर्नाटक के पूर्व सीएम को भिजवाए थे 5 करोड़ रुपए

इस्लामिक बैंक के नाम पर हुए आईएमए पोंजी घोटाले से नौकरशाहों और राजनेताओं का रिश्ता गहराता ही जा रहा है। बताया जा रहा है कि घोटाले के मुख्य आरोपी मंसूर अली खान ने कर्नाटक के एक पूर्व मुख्यमंत्री को पैसा भिजवाने की बात कही है। 40 हजार से ज्यादा लोगों का इस घोटाले में पैसा डूबा है। सीबीआई मामले की पड़ताल कर रही है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एसआईटी को दिए बयान में खान ने कहा है कि उसने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक के पूर्व सीएम को पैसे भिजवाए थे। रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री का नाम नहीं बताया गया है। लेकिन, कयास लगाए जा रहे हैं कि मंसूर जिस पूर्व सीएम की बात कर रहा है वह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया हो सकते हैं। उनकी कैबिनेट में शामिल रहे रोशन बेग से इस मामले में पूछताछ भी हो चुकी है।

सीबीआई से पहले इस मामले में की SIT ही जाँच कर रही थी। सीबीआई अब इस मामले में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री, बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त समेत 13 ब्यूरोक्रेट्स और राजनेताओं से पूछताछ कर सकती है।

एसआईटी फिलहाल चश्मदीदों और आरोपियों के बयान संकलित कर रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में 15-20,000 पन्नों की चार्जशीट नौ सितंबर तक दाखिल हो सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य आरोपित और आईएमए के निदेशक मोहम्मद मंसूर अली खान ने एसआईटी को दिए बयान में दावा किया कि उसने 2018 के चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त को पैसे भिजवाए थे।

जाँच अधिकारी ने बताया है कि मंसूर के मुताबिक उसने पूर्व मुख्यमंत्री को तीन लोगों के जरिए 5 करोड़ रुपए भिजवाए थे। अधिकारी का कहना है कि मंसूर ने पूछताछ में कुछ और राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स का नाम भी लिए हैं। जिसपर जाँच होगी। बहरहाल, मंसूर के सभी दावों पर टिप्पणी करते हुए अधिकारी का कहना है कि खान एक आरोपित है और वह कुछ भी दावा कर सरते हैं, इसलिए उसके बयानों को सत्यापित करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा है कि मामले से संबंधित सभी सबूत और बयान सीबीआई को दिए जाएँगे, जिसके लिए फिलहाल एसआईटी की टीम उन्हें संकलित कर रही है। बयान और शिकायत मिलाकर पूरा मामला 20 हजार पन्नों के आसपास का है।

खान ने अपने बयानों में एक भाजपा नेता को पैसे देने का भी दावा किया हैं, हालाँकि, जिसपर सीबीआई द्वारा जाँच होना बाकी हैं। इसके अलावा आईएमए घोटाले के आरोपित मंसूर ने अपने देश से भागने पर सफाई दी है कि बेंगलुरु का एक आईपीएस ऑफिसर उनसे 25 करोड़ रुपए की माँग कर रहा था इसलिए वह यहाँ से भागे थे। खान का ये भी दावा है कि उसने कई टेलीवीजन चैनलों को करोड़ों रुपए दिए हैं।

370 हटाना सही, POK जाकर पॉलिटिक्स करें राहुल गॉंधी: अयोध्या मामले के दुसरे पक्ष के मुद्दई इकबाल अंसारी

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के जम्मू-कश्मीर दौरे को लेकर अयोध्या मामले के दूसरे समुदाय के पक्षकार इकबाल अंसारी ने सवाल उठाया है। इकबाल अंसारी ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस से पूछा है कि देश मे कई जगह मसले हैं, वहाँ उनके नेता कभी क्यों नहीं जाते हैं। अंसारी ने राहुल गाँधी से दो टूक पूछा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ जाकर राजनीति क्यों नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ही कश्मीर में धारा 370 लागू किया था और पार्टी के नेता 70 साल तक राजनीति कर अपना लाभ लेते रहे हैं।

इकबाल अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धारा 370 हटाकर देश में एक कानून का राज स्थापित किया है। धारा 370 के खत्म होने से कश्मीर के लोगों का भला हुआ है। राहुल और कॉन्ग्रेस को देश की चिंता है, तो पाकिस्तान जाकर मसले को हल करें या फिर अन्य जगहों पर जाकर मसले को हल करें, लेकिन कश्मीर पर कॉन्ग्रेस को राजनीति नहीं करनी चाहिए।

अंसारी ने भारतीय मुस्लिमों की तुलना वीर अब्दुल हमीद से करते हुए कहा कि देश के मुस्लिम वतन के लिए पाकिस्तान से लड़ने को तैयार है। पाकिस्तान हमेशा भारत से मुँह की खाता रहा है। वहीं, कॉन्ग्रेस कश्मीर पर राजनीति कर रही है। देश के हिन्दू-मुस्लिम सिख व ईसाई अमन चाहते हैं। कॉन्ग्रेस ने कश्मीर पर राजनीति कर हमेशा फायदा उठाया है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस अगर कश्मीर जाना चाहती है, तो जाए, लेकिन कश्मीर पर राजनीति न करे, क्योंकि कॉन्ग्रेसियों की राजनीति अब हिन्दुस्तान से खत्म होने वाली है और खत्म हो जाएगी।”

गौरतलब है कि, शनिवार (अगस्त 24, 2019) को राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी नेता श्रीनगर पहुँचे थे। हालाँकि, इन राजनेताओं को एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। इनमें गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन और अन्य नेता शामिल थे। 

J&K में तैनात जवान ने दी कमलनाथ सरकार को ‘पान सिंह तोमर’ बनने की धमकी, कहा- मेरे भाई के साथ न्याय करें

मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है कानून-व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। इससे आहत जम्मू-कश्मीर में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के एक जवान ने मध्यप्रदेश सरकार को पान सिंह तोमर बनने की धमकी दी है।

अमित सिंह नामक जवान ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा है, “मेरे साथ और मेरे भाई के साथ न्याय करें। नया पान सिंह तोमर बनने के लिए मुझे बंदूक चलाने की ट्रेनिंग लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।”

अमित सिंह के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

दरअसल, अमित सिंह का कहना है कि मध्यप्रदेश में रह रहे उनके परिवार के साथ कुछ दिन पहले मारपीट हुई थी। जिसमें उनके छोटे भाई ने अपनी आँख की 80 फीसद रोशनी गवां दी। लेकिन फिर भी प्रदेश के अधिकारियों ने इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया। इसलिए अब वह इस मामले में प्रशासन से फिर इंसाफ़ की गुहार लगा रहे हैं।

पूरा मामला

अमित सिंह की मानें तो 16 अगस्त को मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के इंदिरा सागर बाँध के पास उनका परिवार एमपी टूरिज्म के जल पर्यटन स्थल हनुवंतिया टापू पर पिकनिक मनाने गया था। जहाँ बच्चों की दूध की बोतलें और बिस्कुट अंदर ले जाने की बात पर उनके परिवार की निजी सुरक्षा गार्ड से झड़प हो गई। जिसके बाद बात बढ़ती गई और गार्ड ने उनके परिवार पर ईंट, लाठी और बियर की बोतल से हमला कर दिया। इसी हमले में उनके भाई अतुल की आँख की 80 फीसद रोशनी चली गई। साथ ही छोटे भाई विपुल के पैर में भी फ्रैक्चर हो गया। उनका दावा है कि ये घटना पर्यटन विभाग के कर्मचारियों के सामने हुई है।

मीडिया खबरों की मानें तो अमित सिंह के छोटे भाई विपुल ने बताया कि अतुल की आँख की रोशनी वापस लाने के लिए उन्हें चेन्नई ले जाकर इलाज कराने को कहा जा रहा है। उनका आरोप है कि हमले के बाद पुलिस ने उनकी मदद नहीं की बल्कि केवल 2 गार्ड्स, 15 अज्ञात गार्ड्स और नाविकों के ख़िलाफ़ सामान्य आईपीसी की धाराओं के अंतर्गत अपमानजनक व्यवहार, शारीरिक प्रताड़ना और आपराधिक धमकी के तहत मामला दर्ज किया। विपुल की मानें तो भाई की आँखों में गंभीर चोटें आने के बाद भी पुलिस ने उनकी शिकायत पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज नहीं किया।

पीड़ितों पर हमलावरों ने करवाई शिकायत दर्ज

बता दें कि हमले के बाद शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा, “सुरक्षा गार्ड एक सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस के नेता के करीबी रिश्तेदार द्वारा चलाए जा रहे सुरक्षा एजेंसी से था, इसलिए पुलिस ने भी हमारे खिलाफ हमला करने वालों और हमारी बहनों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों की शिकायत पर समान आईपीसी की धाराओं में हमारे खिलाफ मामला दर्ज किया।”

पुलिस का पक्ष

इस मामले की पुष्टि करते हुए मुंडी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अमित पवार ने बताया, “दोनों समूह एक-दूसरे के साथ भिड़ गए थे, इस दौरान परिवार के सदस्यों में से एक की आँख पर गंभीर घाव हो गए। चूंकि मुंडी (खंडवा) में सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में डॉक्टरों ने शुरू में इसे साधारण चोट माना, इसलिए इस मामले में हमने आईपीसी की सामान्य धाराएँ दर्ज की। एक बार जब हमें इंदौर में डॉक्टरों से नई मेडिको लीगल रिपोर्ट मिल जाती है, तो हम एफआईआर में और भी धाराएँ जोड़ देंगे”

J&K: मस्जिदों में जिहादी नारे बंद, कई पूर्व आतंकी मुख्यधारा में लौटने को तैयार

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद पूरी वादी में माहौल तेजी से बदला है। पाबंदियों में ढिलाई देने के बाद सामान्य जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। प्रदेश में बदलाव का बयार साफ तौर देखने को मिल रहा है। अब यहाँ के हालात बिल्कुल बदल गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अब कश्मीर की मस्जिदों में जिहादी नारे नहीं लगते। मस्जिदों में अब सिर्फ खुदा की इबादत होती है। अलगाववादियों की धमकियों और फतवों के खिलाफ भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। कल तक उनके इशारे पर सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ती थी, अब उनके फरमानों पर आम कश्मीरी कान ही नहीं दे रहे हैं। अब मस्जिदों से ने तो दुकानें बंद रखने का एलान हो रहा है, न ही पथराव का। हालाँकि, मस्जिद के लाउडस्पीकर से लोगों को भड़काने के एक-दो प्रयास हुए, लेकिन वहाँ मौजूद अन्य नमाजियों ने ऐसे तत्वों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

कश्मीर में पहले मस्जिदों का इस्तेमाल सियासत करने के लिए, राष्ट्रविरोधी भावनाओं को भड़काने के लिए और आतंकियों द्वारा जिहाद के प्रति उकसाने के लिए किया जाता था, लेकिन अब कश्मीर की जनता इनके खिलाफ मुखर होकर सामने आ रही है। कट्टरपंथी गिलानी हों, उदारवादी मीरवाइज मौलवी उमर फारूक हो, यासीन मलिक हो या फिर पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस, सभी ने मजहब का सहारा लेकर अपनी सियासत चमकाने की कोशिश की। कश्मीर रेंज के पूर्व आइजी के हवाले से दैनिक जागरण ने बताया है कि अब मस्जिदों के लाउडस्पीकर जहर फैलाने का काम नहीं कर रहे हैं। अख़बार में छपी खबर के अनुसार, बटमालू स्थित मस्जिद के बाहर खड़े मोहम्मद यूसुफ ने कहा, लोग पहले भी हिंसा की बातें पसंद नहीं करते थे। आजादी और जिहाद का नारा देने वालों ने लोगों को डराकर रखा था।

इसके साथ ही, जिहाद के नाम पर बंदूक उठाने वाले आतंकी भी अब मुख्यधारा में लौटने की ख्वाहिश रखते हैं। श्रीनगर के रहने वाले एक पूर्व आतंकी सैफुल्ला (कोड नाम) का कहना है कि जो हुआ, सही हुआ। अगर यह 1947 में हो गया होता तो आज शायद वो संसद या एसेंबली में होते। उन्होंने कहा कि ब्लैकमेल और मजहब की सियासत के कारण ही उनके  जैसे कई युवाओं ने राह भटक कर बंदूक उठा ली और कुछ अब भी उठा रहे हैं। बता दें कि, बाबर बदर (सईद फिरदौस), बिलाल लोधी, उसमान मजीद, इमरान राही, जफर अकबर फतेह आदि कई ऐसे पूर्व आतंकी हैं, जो मुख्यधारा में वापस आना चाहते हैं।

वहीं, केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में विकास को लेकर बैठक की और संबंधित मंत्रालय को इसकी जिम्मेदारी भी सौंप दी है। साथ ही, केंद्र सरकार ने राज्य के दो प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं से परदे के पीछे संवाद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ केंद्र के प्रतिनिधिमंडल ने अलग-अलग मुलाकात की है।