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मणिपुर: मदरसे में प्रशिक्षण पाने वाले 6 रोहिंग्याओं को पुलिस ने किया गिरफ़्तार

इम्फाल के तुलीहाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शनिवार (10 अगस्त) को रोहिंग्या समुदाय के छ: लोगों की गिरफ़्तारी पर मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने जानकारी दी कि यह लोग फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के ज़रिए नई दिल्ली से यहाँ पहुँचे थे। मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि उन लोगों की पहचान की जानी चाहिए जो रोहिंग्याओं को राज्य में प्रवेश करने में उनकी मदद कर रहे हैं और उन्हें आश्रय दे रहे हैं।

यह जानकारी उन्होंने ‘देशभक्ति दिवस’ पर लोगों को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा, ‘‘यह संकेत है कि उनमें से बहुत से लोग राज्य में पनाह ले रहे हैं और हमें उन लोगों की पहचान करनी होगी जो विभिन्न जगहों से रोहिंग्याओं के अवैध प्रवेश में मदद कर रहे हैं।’’

मुख्यमंत्री ने लोगों से रोहिंग्याओं का पता लगाने और उन्हें मणिपुर लाने वाले एजेंटों की पहचान करने की अपील करते हुए कहा कि अगर उन्होंने पहल नहीं की तो पहले से ही कम मणिपुर की आबादी आने वाले समय में गायब हो जाएगी।

ग़ौरतलब है कि डीआईजी टी नगासंगवा ने रविवार (11 अगस्त) को संवाददाताओं से बातचीत में बताया था कि पुलिस जाँच से पता चला है कि छ: रोहिंग्याओं को दिल्ली में एक मदरसे में प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें दिल्ली तथा मणिपुर के कुछ एजेंटों की मदद से यहाँ लाया गया था।

उन्होंने बताया कि रोहिंग्याओं ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि वे म्यांमार के यांगून और मांडले के रहने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि भारतीय एजेंटों ने उनके लिए फ़र्ज़ी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ों की व्यवस्था की थी।

दरअसल, मणिपुर पुलिस को एक इनपुट मिला था कि इंडिगो की फ्लाइट से कुछ अवैध अप्रवासी इम्फाल आ रहे हैं। इसके तुरंत बाद, फॉरेन चेक पोस्ट (FCP) और इम्फाल पश्चिम ज़िले की पुलिस टीम को सतर्क कर दिया गया, जिसने हवाई अड्डे पर छ: संदिग्ध यात्रियों को हिरासत में लिया। गिरफ़्तार किए गए छ: आरोपितों में से तीन के आधार कार्ड पर मणिपुर का पता था, जबकि बाक़ी तीन में हैदरबाद का पता था। इनमें से कोई भी मणिपुरी नहीं बोल सकता, केवल एक हिंदी बोलने में सक्षम है। पुलिस ने उनके पास से म्यांमार बैंक का ATM कार्ड भी बरामद किया है।

बाली के हिन्दू मंदिर पहुँचकर विदेशी जोड़े ने पवित्र जल से की शर्मनाक हरकत,Video वायरल

इंडोनेशिया के बाली में ऊबुद स्थित बेजी मंदिर में पवित्र जल के साथ अभद्र हरकत करने पर चेक रिपब्लिक के एक जोड़े की वीडियो गुरुवार (अगस्त 15, 2019) से इंस्टाग्राम पर खूब वायरल हो रही है। जिस कारण इस जोड़े को सोशल मीडिया पर काफ़ी ट्रोल किया जा रहा है। साथ ही लोग इस कपल पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं और तरह-तरह की बातें बोल रहे हैं।

इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि किस तरह ये जोड़ा मंदिर परिसर में मस्ती कर रहा है और इनके सामने फाउंटेन से पवित्र जल निकल रहा है। लेकिन थोड़ी देर बाद वीडियो में लड़की यानी सबीना पीछे की ओर से अपनी स्कर्ट उठाती दिखती है और उसका ब्वॉयफ्रेंड उसके बट पर पानी मारता है। इसके बाद ऐसा करके दोनों बहुत खुश होते हैं।

बता दें कि इस जोड़े ने 9 अगस्त को इस वीडियो को अपने 85 हजार फॉलोवर्स के साथ शेयर किया था। लेकिन अचानक बाली के सीनेटर (Bali senetar) डॉक्टर आर्य वेदकर्ण उनकी इस वीडियो को देखकर उनपर भड़क उठे। वेदकर्ण ने इंस्टाग्राम के इस जोड़े की हरकत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हुए उनकी इस हरकत को बाली के ‘बेजी मंदिर का शोषण’ करने वाल बताया। जिसके बाद कई लोगों ने इस जोड़े की हरकत को शर्मनाक करार देते हुए इन्हें खरी-खोटी सुनाई।

सोशल मीडिया पर 85000 फॉलोवर्स के बीच ट्रोल होते इस जोड़े ने बाद में एक वीडियो जारी करके माफ़ी माँगी। उन्होंने कहा, “हम कल की वीडियो के लिए माफी माँगते हैं। हमने ऊबुद के पवित्र मंदिर और पवित्र जल का अनादर किया, जिसके बारे में हमें पता नहीं था। इसलिए हम शर्मिंदा हैं और आपसे माफ़ी माँगते हैं।”

जबकि सबीना ने कहा, “हमें इस बारे में बिलकुल नहीं पता था कि वो पवित्र जल है या वो जगह पवित्र स्थल है, अगर मालूम होता तो हम ऐसा कुछ भी गलत नहीं करते। हम माफी माँगते हैं और उम्मीद करते हैं कि आप हमें माफ़ कर देंगे।”

सोशल मीडिया पर लोग इसे बेहूदी हरकत कह रहे हैं और चाहते हैं कि इन दोनों को बाली से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए। जबकि वेदकर्ण को तो यूजर्स इन्हें दंड देने के लिए भी उकसा रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर एक महिला ने इसे इंडोनेशिया की बेइज्जती बताया है। साथ ही कहा है कि वह भले ही बाली की रहने वाली नहीं है और न ही वह हिंदू हैं लेकिन इनकी इस बेवकूफ़ी से वे बहुत शर्मिंदा हैं। जबकि दूसरे यूजर का कहना है कि बतौर पर्यटक तुम्हें किसी देश में जाने से पहले उस जगह की स्थानीय परंपरा, धर्म के साथ इस बात का पता होना चाहिए कि वहाँ तुम क्या कर सकते हो और क्या नहीं।

ज़रूरत पड़ी तो परमाणु हथियारों के प्रयोग की नीति बदल भी सकती है: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

पाकिस्तान लगातार युद्ध से जुड़े या परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी भारत को देता रहा। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद बदले माहौल में पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार(अगस्त 16, 2019) को संकेत दिए कि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल न करने से जुड़ी अपनी नीति को बदल भी सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पोखरण में अपने एक बयान में कहा, “यह बात सच है जहाँ तक हमारी परमाणु हथियारों को लेकर नीति का सवाल है उसमें आज तक ‘नो फर्स्ट यूज़’ की रही है। लेकिन अब भविष्य में क्या होता है, यह उस वक्त के हालात पर निर्भर करता है।”

राजनाथ सिंह के इस बयान को मौजूदा हालात में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही पाकिस्तान को परोक्ष रूप से संकेत भी कि परमाणु हथियारों की रट वह छोड़ दे। वर्ना आज का भारत पहले वाला भारत नहीं है अब देश एक ऐसे मजबूत नेतृत्व के हाथों में है जो ज़रूरत पड़ने पर किसी भी तरह के निर्णय से हिचकेगा नहीं।

इससे पहले, पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद के संयुक्‍त सत्र में अनुच्छेद-370 के विषय पर धमकी देते हुए कहा था कि जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 (Article-370) हटाने के कारण भारत में पुलवामा जैसी घटनाएँ होंगी। उन्‍होंने कहा कि वो इस मामले को संयुक्त राष्‍ट्र लेकर जाएँगे। इमरान खान का कहना है कि पाकिस्तान अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को बताएगा कि बीजेपी की नस्‍लवादी विचारधारा के कारण भारत में अल्‍पसंख्‍यकों के साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है।

शारदा घोटाला: CBI ने ममता सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी को किया तलब

शारदा चिटफंड घोटाले की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच अन्वेषण (CBI) ने पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को नोटिस भेजा है। उन्हें सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘जागो बांग्ला’ के संदर्भ में तलब किया गया है। पार्थ चटर्जी ‘जागो बांग्ला’ के संपादक हैं और सीबीआई उनसे ‘जागो बांग्ला’ के बैंक खातों के कुछ वित्तीय लेन-देन के बारे में पूछताछ करने वाली है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चटर्जी को शहर में स्थित सीबीआई के कार्यालय में शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) दोपहर को जाँच अधिकारियों के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।

पिछले महीने सीबीआई ने शारदा पोंजी घोटाला मामले में जाँच में शामिल होने के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन को तलब किया था। अधिकारियों ने बताया कि उनसे भी जागो बांग्ला के बैंक खातों से संबंधित वित्तीय लेन- देन के बारे में पूछताछ हो सकती है। डेरेक ओब्रायन पार्टी के जागो बांग्ला के प्रकाशक हैं।

शारदा घोटाले में टीएमसी के कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं और कई नेता इस मामले में फँस भी चुके हैं। पहले इस मामले में कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ की जानी थी, लेकिन राजीव कुमार ने अपनी चिट्ठी के साथ एक सीआईडी अधिकारी को सीबीआई के दफ्तर भेजकर राजीव कुमार ने पूछताछ के लिए समय माँगा है। फिलहाल, राजीव कुमार बंगाल के एडीजी सीआईडी पद पर तैनात हैं।

गौरतलब है कि, शारदा घोटाले में गिरफ्तार होने वाले टीएमसी के राज्यसभा सांसद कुणाल घोष पहले टीएमसी नेता थे, जिन्हें नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया। कुणाल घोष चिटफंड घोटाले वाली कंपनी शारदा ग्रुप की मीडिया यूनिट के ग्रुप सीईओ थे। इस केस में गिरफ्तार होने वाले दूसरे नेता श्रींजॉय बोस थे। टीएमसी के राज्यसभा सांसद श्रींजॉय बोस को 21 नवंबर 2014 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उन पर घोटाले के मास्टरमाइंड और शारदा ग्रुप के सीएमडी सुदीप्तो सेन से घोटाले की रकम में हिस्सा लेने का आरोप है।

राम मंदिर मामला: ‘जहाँ-जहाँ नमाज़ पढ़ी गई, वे सब इलाके मुस्लिमों को नहीं दिए जा सकते’

अयोध्या विवाद में श्री राम लला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि खाली नमाज़ पढ़ लेने से किसी जगह का मालिकाना हक़ मुस्लिमों का नहीं हो जाता, खासकर कि तब जब उस जगह का ढाँचा, स्तम्भ, शिलालेख आदि हिन्दू हों। “खाली सड़क पर नमाज पढ़े जाने से उस पर मालिकाना हक़ का दावा नहीं ठोंका जा सकता।” पाँच जजों की संवैधानिक पीठ के सामने वैद्यनाथन ने तर्क दिया।

ढाँचा तो कभी मस्जिद था ही नहीं

सीएस वैद्यनाथन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि वह ढाँचा सही मायनों में कभी मस्जिद कहलाने की अर्हता पूरी नहीं करता था। उस स्थान की सजावट में चित्र प्रयुक्त थे, और इस्लामी आस्था के अनुसार इंसानों या जानवरों के चित्र उपासना स्थल पर नहीं हो सकते। वरिष्ठ वकील ने 1990 में ली गई तसवीरें भी अदालत के आगे रखीं।

वैद्यनाथन ने हिन्दू पक्ष की मुख्य दलील फिर से दोहराई कि बाबरी ढाँचा मंदिर के भग्नावशेषों पर बनाया गया था, अतः यह कहना गलत होगा कि वह ज़मीन उस ढाँचे के बनने के पहले किसी की थी ही नहीं। “अगर वह मंदिर के भग्नावशेषों पर बना ढाँचा है, तो शरीयत के ही मुताबिक वह मस्जिद हो ही नहीं सकता।” उन्होंने 1950 की फैज़ाबाद कमिश्नर की रिपोर्ट को भी उद्धृत किया, जिसमें विवादित स्थल के 14 स्तम्भों पर हिन्दू देवी-देवताओं और प्रतीक चिह्नों के चित्र उकेरे हुए थे। “और किसी मस्जिद में तो हिन्दू देवताओं के चित्र वाले स्तम्भ हो नहीं सकते।”

किसने तोड़ा, यह सवाल नहीं है

सीएस वैद्यनाथन ने यह भी दलील दी कि हालाँकि यह सत्य है कि मंदिर तोड़कर वह ढाँचा किसने बनवाया, इस पर विवाद है (एक विवरण इसकी ज़िम्मेदारी मुगलों के पहले शहंशाह बाबर पर डालता है, दूसरा औरंगज़ेब पर) लेकिन वह इस मुद्दे के हल में अनौचित्यपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि चाहे मंदिर बाबर ने तोड़ा हो या औरंगज़ेब ने, तथ्य यही है कि हिन्दुओं का मंदिर तोड़कर ही कथित ‘मस्जिद’ बनाई ई।

राहुल गॉंधी वो बच्चा हैं जिसे स्कूल नहीं जाना पर क्लासरूम में सीट सबसे आगे चाहिए

इसे सत्ता से दूरी की छटपटाहट कहें, या फिर मोदी से घृणा, या यह कुछ और जिसके कारण कॉन्ग्रेस का शीर्ष परिवार अब लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान से भी पीछे हटने लगा है। 2014 के चुनावी हार के बाद कॉन्ग्रेस ने हरेक लोकतांत्रिक संस्था को निशाना बनाया। चुनाव आयोग से लेकर न्यायपालिका तक की निष्पक्षता पर सवाल उठाए ताकि मोदी सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप मढ़ सके।

2019 के आम चुनावों में यह रणनीति औंधे मुॅंह गिरी और अब लोकतांत्रिक परम्पराएँ कॉन्ग्रेस के निशाने पर हैं। बेटे की जिद की वजह से हाल ही में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा बनीं सोनिया गॉंधी और उनके सांसद बेटे राहुल गॉंधी इस बार लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के जश्न से गायब रहे। ज्यादा दिन नहीं बीते, माँ-बेटे की इस जोड़ी ने प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजे जाने के मौके पर पहुॅंचना जरूरी नहीं समझा था।

यह समझना मुश्किल है कि सोनिया और राहुल लाल किला क्यों नहीं पहुॅंच पाएँ? जबकि, लाल किला से करीब छह किलोमीटर दूर कॉन्ग्रेस मुख्यालय में इस मौके पर दोनों ही मौजूद थे। इसी तरह कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जिन्होंने गॉंधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम किया है, के लिए मॉं-बेटे के पास समय नहीं होना भी समझ में नहीं आता।

लेकिन, यही कॉन्ग्रेस लोकतांत्रिक परंपराओं की दुहाई देकर राहुल गॉंधी के लिए पहली कतार में सीट मॉंगने का कोई मौका जाया नहीं करती। पार्टी ने हाल ही में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर सदन की पहली कतार में राहुल के लिए सीट का जुगाड़ करने को कहा था। हालॉंकि स्पीकर ने नियमों का हवाला देकर उसकी मॉंग ठुकरा दी थी।

इन्हीं राहुल गॉंधी को वर्ष 2018 में जब राजपथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में पहली कतार में बैठने की जगह नहीं मिली थी तो सोशल मीडिया में लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं किए जाने की दुहाई देते हुए लिबरलों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई थी। कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया था, “मोदी सरकार की ओछी राजनीति जग ज़ाहिर! कॉन्ग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गॉंधी को गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर अंहकारी शासकों ने सारी परंपराओं को दरकिनार करके पहले चौथी पंक्ति और फिर छठी पंक्ति में जानबूझकर बिठाया। हमारे लिए संविधान का उत्सव ही सर्व प्रथम है।”

लगता है कि आम चुनावों में करारी शिकस्त के बाद गॉंधी परिवार ने सुरजेवाला की ओछी राजनीति वाली टिप्पणी को सच साबित करने की ठान ली है। इसलिए, भारत से जुड़ी हर परंपराओं से वह दूरी बना रहे हैं। मानों इस देश की जनता को कहना चाहते हों, “मूर्खों वोट तुमने मोदी को दिया तो परंपराओं के सम्मान का ठेका हम क्यों ले। तुमने फिर से भाजपा को चुना। राफेल के नाम पर हमने इतना झूठ गढ़ा फिर भी मोदी को चुना। तो हम भी नहीं मानेंगे लोकतांत्रिक मूल्यों को। उड़ाएँगे इसकी धज्जियॉं। तुम निरीह जनता क्या कर लोगे। आखिर हम नेहरू-गॉंधी नाम वाले जो ठहरें।”

यकीन न हो तो सोनिया के शब्दों पर ही गौर कर लें, जो 15 अगस्त के मौके पर कॉन्ग्रेस मुख्यालय में उनके मुख से निकले, “हमें अन्याय, असहिष्णुता और भेदभाव के हर कृत्य के खिलाफ एक राष्ट्र के रूप में खड़ा होना होगा ताकि सही मायनों में हम आजादी को संजोए रख सकें।”

असल में, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के जश्न के मौकों से देश की मुख्य विपक्षी पार्टी और सबसे पुरानी पार्टी के नेताओं की बेरुखी उस हताशा से उपजी जान पड़ती है जो उनमें उस नेता को देख पैदा होती है जिसे कुछ महीने पहले तक लिबरल देश का अगला प्रधानमंत्री बता रहे थे। राहुल गॉंधी की हरकत उस लाडले जैसी लगती है जो स्कूल तो नहीं जाना चाहता पर चाहता है कि क्लासरूम की अगली सीट उसे ही मिले। उसकी जब मर्जी हो उस सीट पर जाकर बैठ जाए। भले ही परीक्षा में नंबर दूसरे बच्चों के ज्यादा आते हों पर गॉंधी सरनेम तो केवल राहुल का ही है!

भू माफिया आजम खान मुसिबत में: लग्जरी ‘हमसफर’ रिजॉर्ट पर बुलडोजर, मुलायम सिंह ने किया था लोकार्पण

भू माफिया आजम खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही है। जौहर यूनिवर्सिटी के नाम जमीन हड़पने के आरोपों का सामना कर रहे आजम खान के साथ ही अब उनके बेटे और सपा विधायक अब्‍दुल्‍ला आजम खान पर भी जमीन पर कब्‍जा करने का आरोप लगा है। अवैध कब्जों पर चलाए जा रहे मुहिम में रामपुर पुलिस प्रशासन का बुलडोजर उनके लग्जरी रिजार्ट हमसफर पर चला। प्रशासन ने उनके रिजार्ट के अवैध हिस्से को गिरा दिया। इस रिजार्ट के मालिक आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम हैं।

बता दें कि इस लग्जरी हमसफर रिजॉर्ट का निर्माण समाजवादी पार्टी के शासनकाल में करवाया गया था। करोड़ों की लागत से बने इस रिजॉर्ट का लोकार्पण पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था। सिंचाई विभाग का आरोप है कि बरकुसिया नाले की करीब एक हजार वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जा करके रिजॉर्ट बनाया गया था। शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए रिजॉर्ट के अवैध हिस्से को जमींदोज कर दिया। सुबह सिंचाई विभाग की टीम पुलिस फोर्स को लेकर मौके पर पहुँची और रिजॉर्ट के दीवार को तोड़ दिया।

प्रशासन ने विरोध की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स तैनात किया था। इस मामले में सिंचाई विभाग की तरफ से अब्‍दुल्‍ला को नोटिस जारी किया जा चुका है। फिलहाल, इस कार्रवाई के संबंध में आजम खान के परिवार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि आजम खान पर किसानों की जमीन पर अवैध कब्जा करके विश्वविद्यालय बनाने का भी आरोप है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले तीन महीनों में उनके खिलाफ दर्जनों मामले दायर किए हैं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आजम खान पर कार्रवाई की है। ईडी ने आजम खान पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया है। जमीनों पर अवैध कब्जा करने के मामलों के बाद राज्य प्रशासन ने उन्हें भू माफिया घोषित कर दिया है।

दलित युवक के नेत्रहीन पिता ने की आत्महत्या, बेटे की हत्या की जाँच में लापरवाही का लगाया आरोप

राजस्थान पुलिस द्वारा बेटे की हत्या मामले में संवेदनहीनता दिखाने से परेशान दलित युवक के नेत्रहीन पिता ने गुरुवार (15 अगस्त) को ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली। दरअसल, पिछले महीने फसला गाँव में एक मुस्लिम महिला को बाइक से चोट लगने के बाद भीड़ द्वारा बाइक सवार युवक की लोगों ने बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

रिश्तेदारों के अनुसार, रतिराम जाटव (मृतक) पुलिस से परेशान था क्योंकि वो उसके बेटे हरीश जाटव की मौत की जाँच को दबाने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने आगे कहा कि अपने अंतिम क्षणों में भी पुलिस पर आरोप लगाया कि वो उसके बेटे की हत्या के आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि अलवर पुलिस ने दावा किया है कि रतिराम को मृत अवस्था में अस्पताल लाया और उन्होंने मामले में जाँच शुरू कर दी है।

पिछले महीने, रतिराम का बेटा हरीश जाटव राजस्थान के अलवर में चोपांकी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले फसला गाँव के बाज़ार से गुजर रहा था, तभी एक मुस्लिम हकीम (पारंपरिक मुस्लिम महिला चिकित्सक) उसकी बाइक से टकरा गई। हादसे के बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने हरीश की जमकर पिटाई कर दी। इसके दो दिन बाद ही उसने दम तोड़ दिया। 

हरीश के परिवार ने आरोप लगाया कि उसकी बाइक से महिला को टक्कर लगने के बाद, हरीश को उमर शेर और उसके साथियों द्वारा बेरहमी से पीटा गया था। परिवार ने आईपीसी की धारा-323, 343 और एससी/ एसटी (अत्याचारों की रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करवाई है।

सब्जी वाले का वेश बनाकर NIA ने पकड़ा आतंकी, मजदूर बनकर रच रहा था हमले की साजिश

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले एक आतंकी को गिरफ्तार किया। आतंकी का नाम जाहिरुल शेख है। वह साल 2014 में पश्चिम बंगाल के वर्धमान में हुए बम विस्फोट का आरोपित है।

साल 2014 में वर्धमान में हुए धमाकों के बाद एनआईए जाहिरुल की तलाश कर रही थी, लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी वह पकड़ नहीं आ रहा था। ऐसे में कुछ दिन पहले जाँच एजेंसी को शेख के इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र के कोहिनूर कालोनी में होने की खबर मिली। जब जाँच की गई तो पता चला आतंकी वहाँ रहकर पेंटर का काम करता है और साथ में मजदूरी करता है।

प्राप्त जानकारी के आधार पर एनआईए के अधिकारियों का दस्ता इंदौर पहुँचा और वहाँ की पुलिस को भी अपने प्लॉन के बारे में कुछ नहीं बताया। इंदौर में एनआईए ने अपने स्तर पर आतंकी के लिए जाल बिछाया और जिस इलाके में शेख रहता था वहाँ उन्होंने सब्जी बेचनी शुरू कर दी। सब्जी बेचने के बहाने एनआईए के अधिकारियों ने शेख के सही ठिकाने का पता लगाया। जब सारी जानकारियाँ एकत्रित हो गई तो उन्होंने पुलिस की मदद ली और जाहिरुल को धर पकड़ा।

खबरों के मुताबिक एडीजी वरुण कपूर ने बताया कि जिस मकान में शेख किराए पर रहता था उसके मकान मालिक शाकिर खान ने अपने किराएदार का वेरिफिकेशन नहीं करवाया था। शेख लगभग 2 सालों से उसी ठिकाने पर रह रहा था। वह अलग-अलग शहरों में मजदूर बनके काम करता था।

बता दें कि जाहिरुल उर्फ जाकिर पश्चिम बंगाल के नादिया का रहने वाला है और वह आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद का सक्रिय सदस्य है। उसने आतंकी विस्फोट और हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी हासिल की हुई हैं। बताया जा रहा है कि इस बार भी वह किसी खूँखार आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में इंदौर में रुका हुआ था। लेकिन एनआईए की सूझ-बूझ ने उसे धर दबोचा। अब वह एजेंसी के शिकंजे में और उससे पूछताछ चल रही है।

‘जानवरों की तरह कैद करके रखा है’: हमेशा ऐशो-आराम भोगने वाली CM-पुत्री ने रोया दुखड़ा

पीडीपी प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा जावेद ने एक वॉयस नोट जारी करते हुए लिखा कि उनकी माँ महबूबा मुफ्ती की गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें भी अपने ही घर में नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने इस बारे में गृहमंत्री अमित शाह को कहा, “आज जब बाकी देश भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है, कश्मीरियों को जानवरों की तरह कैद करके रखा गया है और उन्हें बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित किया गया है।” उन्होंने अमित शाह को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें घर में नजरबंद करके धमकी दी गई है कि अगर उन्होंने दोबारा मीडिया से बात की, तो इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

इल्तिजा का कहना है कि जब कोई उनसे मिलने के लिए आता है, तो उन्हें इसकी सूचना नहीं दी जाती है और उन्हें अपने घर से बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में एक नागरिक को बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अपराधी की तरह बर्ताव किया जा रहा है। इल्तिजा ने कहा कि जिन कश्मीरियों ने आवाज उठाई है, उनके साथ वो भी जान का खतरा महसूस कर रही हैं।

इससे पहले भी इल्तिजा ने वॉयस नोट जारी करते हुए अपनी माँ की गिरफ्तारी और प्रदेश में संचार सुविधा पर विराम लगाने को लेकर सवाल किया था। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के पर कतरने के बाद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला सहित जम्मू-कश्मीर के कई राजनेताओं को हिरासत में रखा गया है।

लेकिन जरा सोचिए! आज जबकि राज्य में महबूबा मुफ्ती की सरकार नहीं है और केंद्र सरकार प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तौर पर अपना काम कर रही है, तो उनकी बेटी इल्तिजा जावेद को काफी परेशानी हो रही है। मगर जब महबूबा मुफ्ती 3 बार मुख्यमंत्री रहीं, तब तो इनको कोई दिक्कत नहीं हो रही थी, क्योंकि उस समय परेशानियों का सामना इन्हें नहीं, बल्कि जनता को करना पड़ता था। मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुँचाने के लिए पत्र, ईमेल, हेल्पलाइअन नंबर का सहारा लेना पड़ता था। तब कश्मीरी जनता सीधे तौर पर तो मुख्यमंत्री से बात नहीं कर सकते थे, क्योंकि तब उनकी सुरक्षा का सवाल था!

आम कश्मीरी जनता का भाँति आज महबूबा मुफ्ती की बेटी भी पत्र और वॉयस मैसेज के जरिए अपनी आवाज सरकार (केंद्र सरकार क्योंकि अब जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है) तक पहुँचा रही हैं, क्योंकि आज देश की सुरक्षा का सवाल है। इसलिए इल्तिजा जावेद या किसी को भी इससे कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होनी चाहिए। और वैसे भी ये हमेशा के लिए तो नहीं किया गया है। जब सरकार को लगेगा कि स्थिति सामान्य हो गई है, और देश की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है, तो फिर सब कुछ सुचारू रूप से चालू कर दिया जाएगा।

इल्तिजा जावेद को सिर्फ मुख्यमंत्री की बेटी के तौर पर नहीं सोचना चाहिए बल्कि एक आम कश्मीरी नागरिक के तौर पर सोचना चाहिए। हर नागरिक को समान अधिकार मिले हैं, जिस दिन नेता-पुत्रों-पुत्रियों को यह बात समझ में आ जाएगी, हर बात पर अधिकारों का रोना रोने वाली इनकी हेकड़ी खत्म हो जाएगी।