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Breaking: पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का निधन, AIIMS के ICU में थे भर्ती

भारत के पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का एम्स में निधन हो गया है। शनिवार (अगस्त 24, 2019) को 12 बजकर 7 मिनट पर उनका निधन हुआ।

यूपीए-2 के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे अरुण जेटली ने भाजपा के अच्छे-बुरे दौर में कई अहम पद संभाले। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद जब नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने, तब जेटली ने स्वास्थ्य कारणों से ख़ुद को मंत्रिमंडल में न शामिल करने का निर्णय लिया था।

अरुण जेटली को अगस्त 9, 2019 को साँस लेने में तकलीफ होने के कारण एम्स में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था और वह कुछ दिनों से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले जेटली जेपी आंदोलन के दौरान काफ़ी सक्रिय रहे थे। वह उन गिने-चुने नेताओं में से एक थे, जिन्होंने वाजपेयी और मोदी, दोनों के ही प्रधानमंत्रित्व काल में मंत्रीपद संभाला।

‘CBI ऑफिस में झुका कर चिदंबरम को पीटा जा रहा है’ – पाकिस्तानी सांसद ने बोला, भेज रहा हूँ UN को फोटो लेकिन…

पाकिस्तान की तरफ से भारत के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक़ न्यूज़ को देख कर लगता है जैसे उसने सोशल मीडिया पर ही कोई जंग छेड़ दी हो। लेकिन बेचारे पाकिस्तानी! इस जंग में भी वो फिसड्डी ही साबित हो रहे हैं। शुक्रवार (23 अगस्त) को एक ट्विटर यूज़र @being_humor ने कुछ ऐसे स्क्रीनशॉट्स पोस्ट किए, जिसमें पाकिस्तान के सांसद रहमान मलिक स्पष्ट तौर पर बेवकूफ़ बनते दिखे।

@Being_humor और @senrehmanmalik के बीच बातचीत का स्क्रीनशॉट (इमेज सौजन्य: @being_humor)

इस इमेज में, यह देखा जा सकता है कि रहमान मलिक के एक ट्वीट के जवाब में जहाँ उन्होंने दावा किया कि अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के विरोध में ‘पीएम मोदी के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाने’ के लिए पी चिदंबरम को CBI और ED ने गिरफ़्तार किया, @being_humor ने रहमान मलिक के इस ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि वो सही हैं। @being_humor ने इसके बाद सबूत के तौर पर CBI ऑफ़िस में उनके (चिदंबरम के साथ) साथ किए जा रहे बुरे व्यवहार को दर्शाने वाला एक फोटो भी भेजा। यूज़र ने लिखा कि उसके पास इसका सबूत है, लेकिन उसने अपनी पहचान उजागर न करने की बात भी लिखी। इसके जवाब में रहमान मलिक ने @being_humor से सबूत माँगा और उसे गुमनाम रखने का वादा भी किया।

@Being_humor और @senrehmanmalik के बीच बातचीत का स्क्रीनशॉट (इमेज सौजन्य: @being_humor)

अपनी तीव्र उत्सुकता के चलते रहमान मलिक ने यह तक पूछ डाला कि क्या यह CBI ऑफ़िस है और वो आदमी कौन है? इस पर @being_humor ने जवाब दिया कि वास्तव में वो CBI ऑफ़िस है और जो पिट रहा है वो चिदंबरम है। इसके बाद यूज़र ने अपने नाम को गुमनाम रखने का फिर से अनुरोध किया।

@Being_humor और @senrehmanmalik के बीच बातचीत का स्क्रीनशॉट (इमेज सौजन्य: @being_humor)

रहमान मलिक को इस बात का बिल्कुल भी अंदज़ा नहीं था कि @being_humor यूज़र उसे बेवकूफ़ बन रहा है। उसने ट्वीट कर यूज़र से प्रमाणिकता के लिए और तस्वीरें माँगी, जिसमें हिरासत में चिदंबरम की तस्वीर और स्पष्ट देखी जा सके। इसके अलावा रहमान ने यूज़र से पूछा कि क्या उसके पास चिदंबरम के परिवार या किसी संबंधित स्टाफ का व्हाट्सअप नंबर है?

@Being_humor और @senrehmanmalik के बीच बातचीत का स्क्रीनशॉट (इमेज सौजन्य: @being_humor)

इस पर @being_humor ने लिखा कि उनके पास चिदंबरम के परिवार से संपर्क करने का कोई ज़रिया नहीं है, लेकिन उसने उस इमेज को ट्वीट करने का आग्रह किया, जिससे चिदंबरम के परिचितों तक ये इमेज पहुँचेगी तो शायद कोई उन्हें नंबर उपलब्ध करा दे। यूज़र ने यह भी लिखा कि उपरोक्त इमेज पोस्ट करके वो चिदंबरम के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा किए ‘अत्याचार’ को बंद करवा सकते हैं। तब तक रहमान मलिक को पक्का विश्वास हो गया था कि भेजा इमेज पीट रहे चिदंबरम की ही है। और उसने लिख डाला – संयुक्त राष्ट्र के साथ इस इमेज को शेयर कर रहा हूँ।

@being_humor ने तब बहुत ही मसखरे अंदाज़ में ट्वीट किया कि रहमान मलिक ने ट्विटर पर उसे कैसे फॉलो किया। यूज़र ने यह भी लिखा कि संयुक्त राष्ट्र को रहमान मलिक द्वारा शेयर की जाने वाली चिदंबरम पर अत्याचार वाली इमेज को स्वीकर नहीं करना चाहिए, इसे बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह एक फ़िल्म (सिंघम) का सीन है।

जब से अनुच्छेद-370 को निरस्त किया गया है, तब से सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों की बिलबिलाहट स्पष्ट दिख रही है। अपना मुँह छिपाने के लिए वो जमकर फ़ेक न्यूज़ का सहारा ले रहा है। लेकिन, तमाम कोशिशों के बावजूद भी उसके हर झूठ का पर्दाफ़ाश हो रहा है।

कश्‍मीर में जो हालात बिगड़े हैं, उसमें मेरे खुद के देश पाकिस्‍तान का हाथ, भेजेगा और आतंकी: Pak नेता

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के एक नेता ने जम्मू कश्मीर में बिगड़े हालात के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि कश्मीर में जो भी हालात बिगड़े हैं, वो पाकिस्तान की वजह से हुआ है। दरअसल, जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता सरदार सागीर ने स्थानीय पत्रकार तनवीर अहमद से बात कहते हुए दावा किया कि पाकिस्तान ही घाटी में अशांति फैलाने के लिए आतंकवाद का साथ दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने एजेंडे के लिए दशकों से घाटी में आतंकवाद को साधन के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

सरदार सागीर ने कश्‍मीर में आतंकी घटनाओं के लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर जिम्‍मेदार ठहराते हुए कहा कि पाक की धरती पर सक्रिय लश्‍कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्‍मद जैसे आतंकी संगठनों ने कश्‍मीर में हिंसा फैलाई। सागीर ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के लिए पीओके को आतंकियों के लॉन्चपैड के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने भारतीय खुफ‍िया एजेंसियों के उस इनपुट पर भी मुहर लगाई, जिसमें कहा गया है कि पीओके स्थित लॉन्चिंग पैड में जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी बड़ी संख्‍या में घुसपैठ की ताक में बैठे हैं। सगीर ने कहा कि पीओके में बड़ी संख्‍या में आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। यही नहीं बड़ी संख्‍या में आतंकी भारत में घुसपैठ की ताक में बैठे हैं। ये आतंकी लगातार घुसपैठ की कोशिशें कर रहे हैं, मारे जा रहे हैं और मारे जाते रहेंगे।

सगीर ने बताया कि पाकिस्तान एक एजें‍डे के तहत जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकवादियों का इस्तेमाल कर रहा है। यही नहीं सन 1947 में भी पाकिस्‍तान ने कश्‍मीर को अस्थिर करने की बड़ी कोशिश की थी। सन 1980 से पाकिस्‍तान ने लगातार जम्‍मू-कश्‍मीर को अशांत करने की कोशिशें की हैं। साल 1989 में हिज्‍बुल मुजाहिद्दीन और जमात उल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों को खड़ा करने के पीछे पाकिस्‍तान की यही मंशा थी।

साथ ही उन्होंने बताया कि हाफ‍िज सईद द्वारा लश्‍कर-ए-तैयबा और जमात उद दावा का भी गठन कश्‍मीर में अशांति फैलाने के मकसद से किया गया था। इनका गठन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों द्वारा की गई थी, इन्होंने कश्मीर में हिंसा फैलाई। अब विश्‍व समुदाय पाकिस्‍तान के द्वारा की जाने वाली आतंकी गतिविधियों को देख रहा है। उन्होंने कहा कि गुलाम कश्‍मीर (POK) में हालात बहुत खराब हैं। वहाँ के लोग पाकिस्‍तानी उत्‍पीड़न और आतंकवाद से जूझ रहे हैं। 9/11 के आतंकी हमले के बाद आतंकवाद के मसले पर पाकिस्‍तान बेनकाब हो गया और गुलाम कश्‍मीर के लोगों का शांतिपूर्ण संघर्ष सामने आया।

जिन्हें बार-बार राज्यसभा भेजते हैं, कॉन्ग्रेस के वो मठाधीश भी चिदंबरम को बेल नहीं दिला पाए: वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद बयानबाजी का दौर तेजी से चल रहा है। एक तरफ जहाँ, पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी चिदंबरम के बचाव में उतरकर समर्थन दे रही है और मोदी सरकार पर हमला बोल रही है, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के चचौड़ा से विधायक और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी पर हमला बोला है। चिदंबरम को जमानत न दिला पाने को लेकर लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी के वकीलों पर बिना नाम लिए तंज कसते हुए उन्हें मठाधीश बताया।

लक्ष्मण सिंह अपनी ही पार्टी के वकीलों पर भड़क गए और ट्वीट करते हुए लिखा, “चिदंबरम जी निर्दोष सिद्ध हों, पार्टी की स्वच्छ छवि बने, यही कामना करते हैं, परंतु दुख इस बात का है कि हमारे सभी “मठाधीश “अधिवक्ता जिन्हें बार-बार राज्यसभा का सदस्य बनाया, उनकी जमानत नहीं करा पाए।”

बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा चिदंबरम के लिए जमानत की कोशिश करने वाले वकीलों में शामिल हैं। लक्ष्मण सिंह ने बिना इनका नाम लिए ही इन पर निशाना साधा। इससे पहले भी, लक्ष्मण सिंह ने लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार के बाद हार की समीक्षा के दौरान पार्टी के ऊपर निशाना साधते हुए ट्वीट किया था, “चुनाव में हार की समीक्षा करना आवश्यक है, परंतु दूसरों को दोष देने के पहले कबीर का दोहा भी पढ़ लेना चाहिए, “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलया कोई, जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा ना कोई।”

इसके साथ ही, पिछले साल अप्रैल में जब कॉन्ग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कमलनाथ का नाम तय कर रहा था, तब सिंह ने ट्वीट किया था, “ब्लूटूथ तकनीक के युग में कमलनाथ के नेतृत्व में चुनाव में जाना एचएमवी रिकॉर्ड चलाने की तरह है।”

गौरतलब है कि जज अजय कुमार कुल्हड़ की अदालत में सुनवाई के दौरान पी चिदंबरम के वकीलों ने तमाम दलीलें देते हुए उन्हें जमानत देने की माँग की, लेकिन कोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए उन्हें 26 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड पर भेजने का फैसला सुनाया है।

शाहरुख खान को भारत के ही खिलाफ भड़का रहा पाकिस्तान, Bard of Blood और J&K पर दिया ज्ञान

हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की पहली नेटफ्लिक्स सीरीज बार्ड ऑफ ब्लड का ट्रेलर रिलीज हुआ है। यह स्पाई थ्रिलर सीरीज, 2015 में बिलाल सिद्दीकी द्वारा लिखे गए इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। ट्रेलर की शुरुआत बलूचिस्तान में कुछ भारतीय जासूसों के पकड़ने से होती है। इसमें तीन भारतीय एजेंट की कहानी दिखाई जा रही है। तीनों एजेंट एक सीक्रेट मिशन या सुसाइड मिशन पर होते हैं। ट्रेलर के रिलीज होने पर पाकिस्तान ने एक बार फिर से अपनी मूर्खता का परिचय दिया है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने इसकी आलोचना करते हुए शाहरुख खान को बॉलीवुड सिंड्रोम में ही रहने की बात कही है। 

उन्होंने कहा कि अगर शाहरुख को हकीकत जानना है तो जासूस कुलभूषण जाधव, विंग कमांडर अभिनंदन और 27 फरवरी 2019 की घटनाओं पर गौर करें। आसिफ गफूर का कहना है कि शाहरुख खान ने आरएसएस के हिंदुत्ववादी नाजीवाद की पैरोकारी की है। गफूर ने ट्वीट किया कि शाहरुख खान इस तरह की सीरीज बनाने की बजाए IOK और जम्मू कश्मीर में अत्याचारों और आरएसएस के हिंदुत्ववादी नाजीवाद के खिलाफ बोलकर शांति को बढ़ावा दे सकते हैं।

हैरानी की बात है कि पूरे समय हिंसा की बात करने वाला देश आज शांति की बात कर रहा है। जिस देश के आतंकियों का समर्थन करने का पूरा विश्व साक्षी रहा है, टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और आंतकवादियों को वित्तपोषण से जुड़े 40 में से 32 मानकों को खड़ा न उतरने की वजह से देश को FATF की एशिया प्रशांत इकाई (APG) ने ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल दिया है, उस पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता भारत को शांति का पाठ पढ़ा रहे हैं।

आसिफ गफूर विंग कमांडर अभिनंदन की बात करते हुए ये भूल गए हैं कि दुश्मन देश में जाने के बाद भी विंग कमांडर ने अपनी हिम्मत नहीं छोड़ी थी और भारत के सामने पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े थे और फिर ससम्मान भारत को लौटाना पड़ा था। कुलभूषण जाधव भी जल्द ही बेगुनाह साबित होकर अपने देश लौटेंगे, तो बेहतर यही होगा कि पाकिस्तान इन सब चीजों अपना ज्ञान न देकर अपने देश की अर्थव्यवस्था और अंदरुनी उलझनों को सुलझाने की कोशिश करे।

370 हटने के बाद विपक्ष के 9 नेताओं के साथ कल कश्मीर जाएँगे राहुल गाँधी, बदले हालात का लेंगे जायजा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड सांसद राहुल गाँधी आख़िरकार जम्मू-कश्मीर के ज़मीनी हालत का जायज़ा लेने श्रीनगर पहुँच रहे हैं। इसके लिए उनके साथ 9 अन्य विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी होगा जिसमें कॉन्ग्रेस के गुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा, राजद के मनोज झा प्रमुख होंगे। अन्य नेताओं में माकपा के सीताराम येचुरी, द्रमुक के टी शिवा और भाकपा के डी राजा भी शामिल हैं।

राज्यपाल ने दिया था चैलेन्ज

राहुल गाँधी के इस दौरे के पीछे है कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक के और उनके बीच का वाक्-युद्ध, जिसमें मलिक ने उन्हें कश्मीर आकर खुद अनुच्छेद 370 हटने के बाद के शांतिपूर्ण माहौल का जायज़ा लेने का न्यौता और चुनौती दी थी। दरअसल जब कॉन्ग्रेस नेताओं के पाकिस्तान के साथ सुर मिलाकर कश्मीर में हो रहे कथित ‘मानवाधिकार हनन’ और अशांति के प्रोपेगंडा को ध्वस्त करने के लिए कश्मीर के राज्यपाल मलिक ने राहुल गाँधी को कश्मीर दौरे का न्यौता भेजा, तो मीडिया रिपोर्टों के मुताबक उन्होंने कहा था, “मैंने राहुल गाँधी को यहाँ (कश्मीर ) आने का निमंत्रण भेजा है। मैं आपके लिए हवाई जहाज भेजूँगा, ताकि आप यहाँ आकर (स्थिति को) देखें और फिर बोलें। आप एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं, और आपको ऐसे नहीं बोलना चाहिए।”

उस समय राहुल गाँधी ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा की रिपोर्टों पर टिप्पणी की थी, जिसका मलिक जवाब दे रहे थे।

‘आ तो जाऊँगा, लेकिन मेरी एक शर्त है’

सत्य पाल मलिक के बयान की एनडीटीवी रिपोर्ट को रीट्वीट करते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि वे राज्यपाल का निमंत्रण स्वीकार कर आने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्होंने इसमें अपनी शर्तें भी जोड़ दीं। वे अपने साथ विपक्ष के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल लेकर आना चाहते थे। उन्होंने चतुराई से सत्य पाल मलिक द्वारा मुहैया कराए जा रहे परिवहन को भी ठुकरा दिया, और बता दिया कि वे (राज्य में लागू सुरक्षा प्रतिबंधों के बावजूद) पूरी ‘आज़ादी’ के साथ राज्य का दौरा करना चाहते हैं। उन्होंने साथ ही आम लोगों, ‘मुख्यधारा’ के नेताओं और सैनिकों से मिलने की भी शर्त रख दी थी।

‘निमंत्रण कैंसल’

इसके बाद सत्य पाल मलिक ने मीडिया से बात करते हुए राहुल गाँधी की शर्तों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था। उनके मुताबिक निमंत्रण देते हुए उन्हें राहुल गाँधी की इतनी सारी ‘pre-conditions’ का कोई अंदेशा नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने साथ प्रतिनिधिमंडल लाकर राहुल गाँधी मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने इससे घाटी में उपद्रव फैलने और आम लोगों के लिए दिक्कतें खड़ी होने की आशंका भी जताई।

अब कोई शर्त नहीं, कश्मीर कब आ सकता हूँ

उसके बाद राहुल गाँधी ने कश्मीर दौरे की अपनी सारी शर्तें हटाते हुए कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक को उन्हें राज्य के दौरे पर आने देने की चुनौती दी। एक दिलचस्प चीज़ राहुल गाँधी के ट्वीट में यह थी कि उन्होंने मलिक को अंग्रेजी में ‘मालिक जी’ (‘Maalik ji’) से सम्बोधित किया है, जो टाइपिंग की गलती की बजाय सूबे के राज्यपाल पर तंज़ अधिक लगा था।


किताबों की चोरी, भूमाफिया घोषित होने के बाद अब कत्थे के पेड़ कटवाने में फँसे आज़म खान

यूनिवर्सिटी से किताबें चुराने, सिंचाई विभाग की ज़मीन हड़पने, शत्रु सम्पत्ति को फर्जीवाड़ा कर फ़र्ज़ी वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्ति घोषित किए जाने के बाद सपा नेता आज़म खान अब कत्थे के पेड़ कटवाने के मामले में फँसते नज़र आ रहे हैं। बिना अनुमति कोसी नदी के तट से 300 कत्थे (खैर) के पेड़ कटवाने के मामले में प्रशासन ने अपनी जाँच रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) को भेजे जाने की पुष्टि की है। इसके अलावा यही भूमि आज़म खान के जौहर विश्वविद्यालय को आवंटित हो कैसे गई, इसकी भी जाँच अलग से चल रही है।

‘नदी की ज़मीन कैसे गई लीज़ पर?’

कोसी नदी के पास की 12 एकड़ के करीब भूमि आज़म खान की जौहर यूनिवर्सिटी को सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान दी गई थी। बाद में पता चला कि लीज़ के प्रस्ताव में इस बात का ज़िक्र ही नहीं है कि प्रस्तावित भूमि नदी किनारे है। शासन ने भी भूमि पर ज़रूरी पड़ताल की अनदेखी की।

इसके बाद बात यह भी खुली कि गाटा संख्या 1252 और 1418 नंबर की जमीन पर फरवरी 2007 में खैर के पेड़ थे, जोकि अब गायब हैं। एसडीएम सदर ने जो जाँच रिपोर्ट प्रशासन को 4 जून को भेजी, उसमें पेड़ों के गायब होने और इस चीज़ के शासन के नियमों का उल्लंघन होने की बात कही गई है। एनजीटी को जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मामले की जाँच के बाद तैयार किया था। इस टीम को जाँच के निर्देश कमिश्नर यशवंत राव ने दिए थे, जिन्होंने जाँच रिपोर्ट एनजीटी को भेज दिए जाने की भी पुष्टि की है।

जुमे की नमाज़ के बाद कश्मीर में कई जगह प्रदर्शन, फिर से लगीं पाबंदियाँ

अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद से जारी पाबंदियाँ कश्मीर के कुछ इलाकों में अभी भी जारी हैं। शुक्रवार (अगस्त 23, 2019) के दिन होने वाली जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र ज्यादातर इलाकों में इन पाबंदियों में ढील दी गई थीं। जम्मू कश्मीर प्रशासन के अनुसार, जुमे की नमाज़ के बाद कश्मीर के कुछ इलाकों में प्रदर्शन हुए लेकिन घाटी के अधिकतर हिस्सों में शांति बनी रही। इन प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने फिर से पाबदियाँ लगा दी हैं।

अधिकारियों ने बताया कि लोगों को लाल चौक और सोनावर जाने से रोकने के लिए शहर में कई जगह अवरोधक और कंटीले तार लगाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कार्यालय इसी इलाके में है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर के बाहरी हिस्से में स्थित सौरा इलाके में जुमे की नमाज़ के बाद करीब 300 लोगों ने प्रदर्शन किया। हालाँकि, सुरक्षा बलों ने बार-बार उद्घोषणा करके और हल्के लाठी चार्ज से भीड़ को तितर-बितर कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि अलगाववादियों की ओर से पोस्टर जारी किए गए थे, जिनमें लोगों से संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) के स्थानीय कार्यालय तक मार्च की अपील की गई थी। इसके बाद श्रीनगर के कई इलाकों और घाटी के अन्य हिस्सों में फिर से पाबंदियाँ लगा दी गई हैं।

इस हफ्ते के शुरू में, कश्मीर के अधिकतर इलाकों में पाबंदियों में ढील की गई थी और अवरोधकों को हटाया जा रहा था। लोगों और यातायात की आवाजाही अहिस्ता-अहिस्ता बढ़ रही थी।

अलगाववादियों के समूह ‘ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप’ (जेआरएल) की ओर से पोस्टरों में लोगों से संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षक समूह के स्थानीय कार्यालय तक मार्च करने का आह्वान किया गया है। यह आह्वान जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के विरोध में किया गया। अलगाववादियों का दावा है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने का केंद्र का कदम राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव की कोशिश है।

तिरुपति बस की टिकट के पीछे दिखा हज-जेरुसलम यात्रा का सरकारी विज्ञापन, विरोध के बाद जाँच शुरू

तिरुपति से मंदिरों के शहर तिरुमाला जाने वाली आंध्र प्रदेश रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बस टिकट को लेकर विवाद पैदा हो गया है। बस टिकट के पीछे हज और जेरुसलम यात्रा के बारे में सरकारी विज्ञापन छपा हुआ था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बीजेपी ने इसे लेकर सीएम जगनमोहन रेड्डी पर हमला बोला। अब इस पूरे मामले पर आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जाँच से पता चला है कि टिकट के पीछे विज्ञापन देने का टेंडर TDP सरकार ने दिया था। उन्होंने कहा कि टीडीपी और बीजेपी के नेता हर छोटे मुद्दे के लिए सीएम पर बेबुनियाद आरोप लगाने की कोशिश कर रहे हैं और हम उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो इस तरह का प्रचार कर रहे हैं।

बुधवार (अगस्त 21, 2019) को बस में सवारी करने वाले यात्रियों की अचानक विज्ञापन पर नजर गई तो उन्होंने इस बारे में क्षेत्रीय प्रबंधक को सूचित किया।

आपत्ति पर उन्होंने जवाब दिया कि गैर-हिंदू तीर्थयात्रा के बारे में छपी हुई टिकट सामग्री के साथ एक बंडल गलत तरीके से तिरुपति में आ गया था। इस मामले में परिवहन निकाय के कार्यकारी निदेशक ने पुष्टि की कि यह मामला उनके संज्ञान में लाया जा चुका है और वह इसमें जाँच कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि यह अल्पसंख्यक विभाग द्वारा जारी सरकार का एक विज्ञापन है।

आंध्र प्रदेश के राजस्व मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास ने स्पष्ट किया है कि ये टिकट बंडल चुनाव से पहले तेलुगु देशम शासन के दौरान छापे गए थे और टिकट के बंडल नेल्लोर और कडप्पा के लिए थे। वे तिरुमाला-तिरुपति कैसे आए, इसकी अब जाँच की जाएगी।

मंत्री ने कहा, “तिरुमाला जैसे पवित्र स्थान पर किसी भी तरह के प्रोपोगेंडा की अनुमति नहीं है। हम इस बारे में बहुत गंभीर विचार कर रहे हैं और इस मामले में दोषियों को सजा भी देंगे।”

भाजपा नेताओं ने दावा किया कि वह गैर-हिंदू हैं और धर्म में विश्वास नहीं करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह अल्पसंख्यक धर्मों के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। हैदराबाद के विवादास्पद भाजपा विधायक राजा सिंह पहले ही इस मुद्दे को उठाते हुए वीडियो डाल चुके हैं।

गरीबों की दवाईयों का सवाल पूछने पर मुझे विधानसभा से निकाला: अलका लाम्बा

आम आदमी पार्टी की बागी विधायक अलका लाम्बा ने दावा किया है कि गरीबों की दवाईयों के बाबत सवाल पूछने पर उन्हें विधानसभा से मार्शलों द्वारा ज़बरदस्ती बाहर निकलवा दिया गया। लाम्बा दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके से आप की विधायक हैं, लेकिन फ़िलहाल पार्टी सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से नाराज़ चल रहीं हैं।

‘गरीबों पर दवाईयाँ बाहर से खरीदने का दबाव’

लाम्बा ने दावा किया कि गरीबों को दिल्ली में दिल्ली सरकार के अस्पतालों में बाहर से दवाईयाँ खरीदने की डॉक्टरी सलाह लिखी जा रही है। उन्होंने इसका सबूत भी सदन के पटल पर रखने का दावा किया। मालूम हो कि दिल्ली सरकार का दावा है कि उसके सरकारी अस्पतालों में गरीबों को मुफ़्त चिकत्सकीय जाँचे, मुफ़्त दवाईयाँ और मुफ़्त इलाज मिल रहा है। इसे आप सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं (welfare schemes) में से एक माना जाता है।

उन्होंने दो परिवारों का उदाहरण दिया जिन्हें दवाएँ सरकारी अस्पताल के बाहर निजी दुकानों से खरीदनी पड़ीं। उनके अनुसार यह मामला जवाहरलाल नेहरू रोड स्थित जीबी पंत अस्पताल का था।

विधानसभा से बाहर किए जाने के बाद प्रेस से बात करते हुए चाँदनी चौक की विधायक ने कहा कि वे केवल दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से आश्वासन चाहतीं थीं कि सरकार ही दवाईयों का खर्चा उठाएगी। लेकिन उन्हें विधानसभा से बाहर निकलवा दिया गया। गौरतलब है कि सत्येंद्र जैन ने उनके आरोप पर कहा था कि वे मामले की जाँच कराएँगे।