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J&K में पाबंदी राष्ट्रहित में: कश्मीर टाइम्स की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहुॅंचा PCI

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से जारी संचार पाबंदियों का प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने समर्थन किया। पीसीआई ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। राज्य में संचार व्यवस्थाओं पर रोक को ‘राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता’ के हित में बताते हुए कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका में हस्तक्षेप की मॉंग की गई है।

भसीन ने पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। उनका कहना है कि सूचनाओं के आदान-प्रदान पर व्यापक रोक बोलने और और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाओं सहित संचार के सभी तरीकों को तुरंत बहाल करने के लिए केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

लाइव लॉ के अनुसार 16 अगस्त को CJI की अगुवाई वाली पीठ ने भसीन की याचिका पर सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टाल दिया था और कहा था कि सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए।

उनकी याचिका में हस्तक्षेप की माँग करने वाला PCI प्रेस काउंसिल अधिनियम 1978 के तहत ‘प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने और भारत में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखने और सुधारने’ के उद्देश्य से बनाया गया वैधानिक निकाय है। याचिका में PCI ने कहा है कि उसका काम न केवल प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है बल्कि वो ‘नागरिकता के अधिकारों और जिम्मेदारियों दोनों की भावना को बढ़ावा’ और किसी भी विकास की समीक्षा करने व संभावनाओं के लिए जनहित और महत्व के समाचारों के प्रसार को प्रतिबंधित करने के लिए बाध्य है।

याचिका में कहा गया है, “संविधान के सबसे विवादास्पद प्रावधान को हटाने, जिसमें राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता के हित में संचार और अन्य सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, वो भसीन के अधिकारों का हनन नहीं करता है।”

UAE ने अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से PM मोदी को नवाजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शनिवार (अगस्त 24, 2019) को अबू धाबी में यूएई (UAE) के सर्वोच्च नागरिक सम्‍मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से नवाजा गया। क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रधानमंत्री को इस सम्मान से सम्मानित किया। बता दें कि, पीएम मोदी अपना दो दिवसीय फ्रांस दौरा खत्म कर अबू धाबी पहुँचे हैं। अबू धाबी पहुँचने पर पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

मोदी और क्राउन प्रिंस के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा भी हुई। इस साल अप्रैल में यूएई ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने की घोषणा की थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस से रवाना होने के बाद ट्वीट करके बताया कि उनका फ्रांस दौरा काफी सफल रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनो देशों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई। यह बातचीत आपसी सहयोग को बढ़ाएगी और नए मौके देगी। साथ ही उन्होंने फ्रांस की जनता और सरकार को मेहमानवाजी के लिए शुक्रिया भी कहा।


बैरंग वापस: J&K गए राहुल गाँधी समेत सभी विपक्षी नेताओं को एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेजा गया

जम्मू-कश्मीर के हालात जानने के लिए राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी नेता श्रीनगर पहुँचे थे। न्यूज़ एजेंसी ANI के अनुसार, राहुल गाँधी समेत सभी विपक्षी राजनेताओं को एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। इनमें गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन और अन्य नेता शामिल थे।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार (अगस्त 23, 2019) की रात बयान जारी कर विपक्षी राजनेताओं को घाटी की यात्रा करने से मना किया था। प्रशासन का कहना था कि उनके घाटी में आने से शांति-व्यवस्था और आम जनजीवन बहाल करने में बाधा पहुँचेगी। इसके बावजूद, पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी शनिवार (अगस्त 24, 2019) को 8 दलों के 11 विपक्षी नेताओं के साथ श्रीनगर पहुँच गए थे।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अपने बयान में कहा था कि ऐसे वक्त में जब सरकार राज्य के लोगों को सीमा पार आतंकवाद के खतरे और आतंकवादियों तथा अलगाववादियों के हमलों से बचाने की कोशिश कर रही है और उपद्रवियों तथा शरारती तत्वों को नियंत्रित कर लोक-व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रही है, तब वरिष्ठ राजनेताओं की ओर से आम जनजीवन को धीरे-धीरे पटरी पर लाने में बाधा डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अगर वो इलाके का दौरा करेंगे, तो उन पाबंदियों का भी उल्लंघन करेंगे, जो अब भी कई इलाकों में लागू है। वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति-व्यवस्था और जानहानि को रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

नोटबंदी में गड़बड़ी पर पहली सजा: PNB के 3 कर्मचारियों को 4 साल की जेल, 4-4 लाख रुपए का जुर्माना

नोटबंदी के बाद अवैध तरीके से धन के लेन-देन के मामले में CBI की विशेष अदालत ने शुक्रवार (23 अगस्त) को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के तीन कर्मचारियों को चार साल जेल की सज़ा सुनाई। नोटबंदी के दौरान गड़बड़ी करने के मामले में संभवत: यह सजा सुनाए जाने का पहला मामला है। अदालत ने कहा कि बैंक कर्मचारियों ने अपने कृत्यों से ‘उस संस्थान पर धब्बा‘ लगाया, जिसमें काम करते हुए वे आगे बढ़े।

विशेष न्यायाधीश राजकुमार चौहान ने पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों रामानंद गुप्ता, भुवनेश कुमार जुल्का और जितेन्दर वीर अरोड़ा को 10.51 लाख रुपए की वैध राशि को ग़लत तरीके से नोटबंदी की राशि के रूप में दिखाने और इसे ‘अनधिकृत और अवैध’ रूप से बदलने के लिए दोषी ठहराया।

अदालत ने कहा,

“दोषी के बैंक अधिकारी होने के कारण उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वे ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पालन करें। दोषियों के कृत्य ने संस्थान पर धब्बा लगा दिया जिसमें काम करते हुए वे वरिष्ठ अधिकारी के पद तक पहुँचे…यह नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों द्वारा शक्ति के दुरूपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रतीत होता है।”

अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ धारा 409 (आपराधिक विश्वासभंजन), धारा 471 (फ़र्ज़ी दस्तावेज़ो को मूल दस्तावेज़ के तौर पर इस्तेमाल करना), 477 ए (खाते में धोखाधड़ी) के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2), धारा 13(1) (डी) (नौकरशा द्वारा आपराधिक आचरण) के तहत दोषी ठहराया। साथ ही अदालत ने हर दोषी पर चार- चार लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

ग़ौरतलब है कि तीनों बैंक कर्मचारियों के ख़िलाफ़ PNB की एक शाखा के उप सर्कल प्रमुख ने पांच अप्रैल 2017 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि आरोपियों ने PNB की सिविल लाइन ब्रांच में दो बार ग़लत रिकॉर्ड बनाया है, जो कि डिपॉजिटर द्वारा भरे गए असली वाउचर से मेल नहीं खा रहा था। डिपॉजिटर ने लीगल टेंडर के रूप में कैश जमा कराया था। इनमें, 100, 50, 20, 05, 02 और 1 रुपए के नोट और सिक्के थे।

तीनों बैंक कर्मचारियों ने साज़िश रचते हुए डिपॉजिट को चलन से बाहर हो गए 500 और 1000 के नोट के रूप में दिखाया। CBI के आरोप के मुताबिक़, बैंक कर्मचारियों ने 10.51 लाख रुपए को अवैध तरीके से एक्सचेंज किया। CBI ने 6 अप्रैल, 2017 को FIR दर्ज की थी। ट्रांजेक्शन की जाँच से पता चला कि कैश लेने के बाद कर्मचारियों ने अपनी आईडी से CBS सिस्टम में फीड किया था। बैंक के वाउचर में दर्ज डिनॉमिनेशन बैंक सिस्टम में अलग थे।

राहुल गाँधी संग विपक्षी डेलीगेशन पहुँचा श्रीनगर, एयरपोर्ट से बाहर निकलने की इजाजत नहीं

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार (अगस्त 23, 2019) की रात बयान जारी कर विपक्षी राजनेताओं को घाटी की यात्रा करने से मना किया था। प्रशासन का कहना था कि उनके घाटी में आने से शांति-व्यवस्था और आम जनजीवन बहाल करने में बाधा पहुँचेगी। इसके बावजूद, पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी शनिवार (अगस्त 24, 2019) को 8 दलों के 11 विपक्षी नेताओं के साथ श्रीनगर पहुँच गए।

विपक्षी डेलीगेशन के एयरपोर्ट पर पहुँचते ही हंगामा शुरू हो गया। सुरक्षा-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें एयरपोर्ट से बाहर नहीं जाने दिया गया। राहुल के साथ मौजूद नेताओं में गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता माजिद मेमन, सीपीआई लीडर डी. राजा के अलावा शरद यादव समेत कई दिग्गज नेता हैं। श्रीनगर एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी कर दिया है। 

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अपने बयान में कहा था कि ऐसे वक्त में जब सरकार राज्य के लोगों को सीमा पार आतंकवाद के खतरे और आतंकवादियों तथा अलगाववादियों के हमलों से बचाने की कोशिश कर रही है और उपद्रवियों तथा शरारती तत्वों को नियंत्रित कर लोक-व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रही है, तब वरिष्ठ राजनेताओं की ओर से आम जनजीवन को धीरे-धीरे पटरी पर लाने में बाधा डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अगर वो इलाके का दौरा करेंगे, तो उन पाबंदियों का भी उल्लंघन करेंगे, जो अब भी कई इलाकों में लागू है। वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति-व्यवस्था और जानहानि को रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

जाते-जाते जेटली गिना गए नेहरू और अब्दुल्ला की करतूतें, लिखा- ‘यह नया भारत है, बदला हुआ भारत है’

विचारों के प्रति प्रतिबद्ध, कानून के जानकार, हाजिरजवाब, दोस्तों के दोस्त… अरुण जेटली को आप जैसे चाहें याद कर सकते हैं। जेटली हर मसले का बारीक और विस्तृत विश्लेषण करने वाले नेताओं में से थे। किस विषय पर कब और कैसे अपनी बात रखनी है यह उनसे सीखा जा सकता है। यही कारण है कि उनका ब्लॉग भी काफी चर्चित रहा।

अपना आखिरी ब्लॉग में उन्होंने 6 अगस्त को लिखा था। इसमें संसद के सफल और ऐतिहासिक सत्र के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को विशेष तौर पर धन्यवाद देते हुए उन्होंने अपनी बात शुरू की है। तीन तलाक और जम्मू-कश्मीर पर सरकार के फैसले की तारीफ करते हुए विस्तार से बताया है कि कैसे आर्टिकल 370 की वजह से चीजें बिगड़ी। कैसे नेहरू और शेख अब्दुल्ला के प्रयोगों की प्रयोगशाला बन गया जम्मू-कश्मीर।

ब्लॉग की शुरुआत करते हुए उन्होंने लिखा है, “संसद का वर्तमान सत्र सबसे अधिक सफल रहा है। इस सत्र में ऐतिहासिक बिल पारित किए गए हैं। ट्रिपल तलाक कानून, भारत के आतंकवाद विरोधी कानूनों को मजबूत करना और अनुच्छेद 370 पर निर्णय सभी अभूतपूर्व हैं। सरकार की नई कश्मीर नीति के समर्थन में जनता का मूड इतना मजबूत है कि कई विपक्षी दलों ने जनता की राय के आगे घुटने टेक दिए। राज्यसभा के लिए दो-तिहाई बहुमत से इस फैसले को मंजूरी देना किसी की भी कल्पना से परे है।”

फिर उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर विफल प्रयासों का सिलसिलेवार तरीके से विवरण दिया है। उन्होंने लिखा है कि विभाजन के बाद पश्चिम पाकिस्तान से लाखों शरणार्थी भारत आए। पंडित नेहरू की सरकार ने उन्हें जम्मू-कश्मीर में बसने नहीं ​दिया। पंडित नेहरू ने शेख अब्दुल्ला पर भरोसा किया जिसने राज्य को अपने ‘पर्सनल किंगडम’ में बदल दिया।

उन्होंने लिखा है, “कश्मीर पर पंडित नेहरू ने हालात का आकलन करने में भारी भूल की थी। उन्होंने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला पर भरोसा करके उन्हें राज्य की बागडोर सौंपने का फैसला किया। 1953 में उनका विश्वास शेख से उठ गया और उन्हें जेल में बंद कर दिया।”

जेटली ने फिर बताया है कि कैसे इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी ने कश्मीर में प्रयोग किए। उन्होंने बताया है कि बाद में शेख अब्दुल्ला को रिहा करने और बाहर से कॉन्ग्रेस का समर्थन सुनिश्चित कर इंदिरा गाँधी ने उनकी सरकार बनवाई। कुछ महीने के भीतर ही शेख अब्दुल्ला के सुर बदल गए और इंदिरा गाँधी को छले जाने का अहसास हो गया। 1987 में राजीव गाँधी ने एक बार फिर से नीतियों को बदला। शेख अब्दुल्ला के बेटे फारूख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। चुनाव में धांधली हुई। कुछ उम्मीदवार जिन्हें जोड़-तोड़ कर हराया गया, वे बाद में अलगाववादी और आतंकवादी तक बन गए।

जेटली ने लिखा है, “जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने की ऐतिहासिक भूल से देश को राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी। आज, जबकि इतिहास को नए सिरे से लिखा जा रहा है, उसने ये फैसला सुनाया है कि कश्मीर के बारे में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दृष्टि सही थी और पंडित नेहरू जी के सपनों का समाधान विफल साबित हुआ है।”

उन्होंने लिखा है, “1989-90 तक हालात काबू से बाहर हो गए। अलगाववाद के साथ आतंकवाद की भावना जोर पकड़ने लगी। कश्मीरी पंडितों को वैसे अत्याचार बर्दाश्त करने पड़े, जैसे अत्याचार केवल नाजियों ने ही किए थे। पंडितों को घाटी से खदेड़ दिया गया।”

ब्लॉग में जेटली ने आगे बताया है कि अलगाववाद के जोर पकड़ने पर विभिन्न राजनीतिक दलों की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार ने तीन नए प्रयास किए। अलगाववादियों के साथ बातचीत की कोशिश की, जो व्यर्थ साबित हुई। द्विपक्षीय मामले के रूप में पाक के साथ बातचीत की कोशिश की गई। जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों पर भरोसा कर उन्हें सत्ता में बिठाया। लेकिन यह भी असफल रहा।

कॉन्ग्रेस के लिए जेटली ने लिखा है, “कॉन्ग्रेस पार्टी की विरासत ने इस समस्या का सृजन किया और उसे बढ़ाया। अब कॉन्ग्रेस के लोग व्यापक तौर पर सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। नया भारत बदला हुआ भारत है। केवल कॉन्ग्रेस इसे महसूस नहीं करती है। कॉन्ग्रेस नेतृत्व पतन की ओर अग्रसर है।”

जन्माष्टमी की झाँकी पर पथराव, फरसा व अन्य हथियारों का इस्तेमाल भी: UP के बरेली में तनाव, देखें Video

बरेली (उत्तर प्रदेश) में बहेड़ी के गाँव मकरी नवादा में जन्माष्टमी के अवसर पर झाँकी निकालने को लेकर दो सम्प्रदायों के बीच झड़प हो गई। जन्माष्टमी की झाँकी के दौरान समुदाय विशेष के लोगों ने झाँकी निकालने वालों पर पथराव कर बवाल को जन्म दिया।

दो संप्रदायों के बीच हुए इस तनाव में फरसा समेत अन्य हथियारों का इस्तेमाल भी किया गया। इस दौरान हवा में बंदूकें भी लहराई गईं। इस तनाव में क़रीब 10 लोगों के घायल होने की ख़बर है। घटना की जानकारी मिलते ही तहसील के चार थानों की पुलिस घटना-स्थल पर पहुँच गई।

भारी तनाव के चलते की गई पीएसी की तैनाती (तस्वीर सौजन्य: देनिक जागरण)

मौक़े पर पहुँची पुलिस ने उपद्रवियों को धमका कर उन्हें अपने-अपने घर जाने को कहा, जब जाकर हालात पर क़ाबू पाया जा सका। सभी घायलों को एम्बूलेंस से अस्पताल भेजा गया। फ़िलहाल, एसपी ग्रामीण, सीओ और एसडीएम ने भी गाँव में डेरा डाल दिया है। साथ ही क्षेत्र में भारी तनाव को देखते हुआ पीएसी की तैनाती भी कर दी गई है।

दरअसल, थाना देवरनिया क्षेत्र का गाँव मकरी नवादा में दूसरे सम्प्रदाय के लोगों की आबादी अधिक है। शुक्रवार (23 अगस्त) को लोग कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मना रहे थे। परंपरा स्वरूप दोपहर के समय कृष्ण की झाँकी (शोभायात्रा) निकाले जाने की तैयारी थी, लेकिन जुमे की नमाज़ के चलते झाँकी का समय दोपहर 3 बजे रखा गया। ख़बर के अनुसार, दोपहर 3 बजे जैसे ही शोभायात्रा में शामिल ट्रैक्टर ट्रॉली अपने अंतिम पड़ाव के तहत गाँव के होली चौराहै पर पहुँची, तो समुदाय विशेष ने उस शोभायात्रा को वहीं रोक दिया, और उन्हें वापस जाने को कहा।

इस बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि दूसरे समुदाय के लोगों ने शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पथराव कर दिया। शोभायात्रा में शामिल लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

भगदड़ भरे माहौल में दोनों समुदायों के बीच पथराव हुआ (तस्वीर सौजन्य: हिंदुस्तान)

पुलिस अधीक्षक (देहात) संसार सिंह ने घटना-स्थल का मुआयना किया। वहाँ मौजूद लोगों से पूछताछ की। दो समुदायों के बीच इस विवाद को देखते हुए गाँव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। इस मामले पर एसपी (देहात) ने बताया कि जल्द ही दोषियों की पहचान कर उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।

PM मोदी पर कॉन्ग्रेस दो फाड़: जयराम, थरूर, सिंघवी के खिलाफ कई नेताओं ने खोला मोर्चा

आर्टिकल 370 को लेकर पहले ही दो धड़ों में बॅंटी कॉन्ग्रेस की गुटबाजी और गहरा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेवजह निशाने पर लेने की पार्टी की नीति की आलोचना करने वाले नेताओं के खिलाफ लोकसभा में पार्टी संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, अभिषेक मनु सिंघवी और शशि थरूर ने हाल ही में कहा था कि हर मसले पर मोदी का विरोध उनकी लोकप्रियता को बढ़ावा देता है। इन नेताओं का कहना था कि मोदी सरकार के अच्छे काम की तारीफ होनी चाहिए। इसी बयान को लेकर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने नाराजगी जताई है।

थरूर, जयराम और सिंघवी को बातों कॉन्ग्रेस ने आधिकारिक तौर पर न तो समर्थन किया है और न ही आलोचना। लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इस पर आपत्ति जताई है। राज्यसभा में कॉन्ग्रेस उप नेता आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री और सरकार के कामों की आलोचना करना विपक्ष का कर्तव्य है। इसे खलनायक की तरह पेश करना नहीं कहा जा सकता है। विपक्ष से यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए की वह सरकार जो भी करेगी, उसकी तारीफ करेगा। विपक्ष को यदि लगता है कि सरकार गलत कर रही है तो उसे सवाल करने, आलोचना करने और विरोध करने की उम्मीद की जाती है। उनका कहना है कि बिना आलोचना के लोकतंत्र नहीं हो सकता है।

कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की सदस्य पूर्व मंत्री कुमारी शैलजा ने कहा कि वो ये नहीं समझ पा रही हैं कि ऐसी क्या बात है, जिसकी वजह से जयराम रमेश पीएम मोदी की तारीफों के पुल बाँध रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो पार्टी हर चीज के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहरा रही है, जयराम रमेश उस पार्टी की प्रशंसा कैसे कर सकते हैं।

वहीं, अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “आलोचना और प्रदर्शन के बीच किसी को भ्रमित नहीं करना चाहिए। अगर हम किसी बात से सहमत नहीं हैं तो हम आलोचना करेंगे। अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखें। हम क्या कहेंगे? मोदी अच्छा काम कर रहे हैं? इसलिए हमें आलोचना करनी पड़ेगी। एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में आलोचना करना हमारा काम है। आलोचना और प्रदर्शन करने में अंतर है। हम किसी का प्रदर्शन नहीं करते हैं। यह हमारी संस्कृति के खिलाफ है।” अधीर रंजन वही नेता हैं जो लोकसभा में जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बता कर कॉन्ग्रेस को असहज कर चुके हैं।

पार्टी ने भले ही आधिकारिक तौर पर कुछ न कहा हो, मगर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच के इस बयानबाजी को सुन यह अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विचारों का विरोधाभास साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। बीते दिनों पी चिदंबरम ने भी पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस वाले भाषण की प्रशंसा की थी।

गौरतलब है कि, पिछले दिनों जयराम रमेश ने एक बुक लॉन्चिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा था कि पीएम मोदी के शासन का मॉडल पूरी तरह नकारात्मक गाथा नहीं है और उनके काम के महत्व को स्वीकार नहीं करना तथा हर समय खलनायक की तरह पेश करके कुछ हासिल नहीं होने वाला है। इसके बाद कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीएम की तारीफ करते हुए कहा कि एक व्यक्ति का मूल्यांकन हमेशा उसके कार्यों से करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के उज्जवला योजना की प्रशंसा की।

इन नेताओं के बयान का समर्थन करते हुए शशि थरूर ने कहा कि वो तो पिछले 6 साल से कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के अच्छे कामों की तारीफ करनी चाहिए।

रेपिस्ट पादरी के खिलाफ आवाज उठाने वाली नन पर शिकायत वापस लेने का दवाब

केरल में बलात्कार के आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने वाली नन लूसी कलपूरा को
कैथोलिक क्रिश्चन सोसायटी फ्रांसिस्कन क्लेरिस्ट कॉन्ग्रिगेशन (FCC) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे पुलिस से की गई शिकायत वापस लेने और माफ़ी माँगने को कहा गया है।

मामला सिस्टर लूसी को कॉन्वेंट में बंधक बनाने और प्रार्थना से रोके जाने से जुड़ा है। इस हफ्ते की शुरुआत में उन्होंने पुलिस से इस मामले में शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि सोमवार (अगस्त 19, 2019) की सुबह जब प्रार्थना के लिए तैयार हुई तो कॉन्वेंट से निकल नहीं पाई, क्योंकि उन्हें बाहर से बंद कर दिया गया था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच उन्हें बाहर निकाला था।

लूसी की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 342 के तहत केस दर्ज किया। अब एफसीसी लूसी कलपूरा पर केस वापस लेने और माफी माँगने का दवाब बना रहा है।

गौरतलब है कि दुष्कर्म में आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ पिछले साल सितंबर में हुए विरोध-प्रदर्शन में शामिल 5 ननों में से एक लूसी कलपूरा हैं। इसके कारण FCC ने उन्हें बर्खास्त कर 17 अगस्त तक कॉन्वेंट छोड़ने को कहा था। इसके खिलाफ उन्होंने वेटिकन में अपील कर रखी है। पिछले दिनों नन लूसी कलपूरा ने एक पादरी पर सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो फैलाकर खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस से शिकायत के बाद उनकी छवि खराब करने के लिए चर्च फर्जी वीडियो फैला रहा है।

बिकिनी के साथ बुरका पहन फोटोशूट करवाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस ने 6 महीने में ही छोड़ दी कॉन्ग्रेस

कलर्स टीवी के रियलिटी शो बिग बॉस फेम अर्शी ख़ान छह महीने पहले ही कॉन्ग्रेस पार्टी जॉइन कर राजनीति में आईं थीं। और अब उन्‍होंने कॉन्ग्रेस से इस्‍तीफ़ा देकर फैंस को हैरान कर द‍िया है। अर्शी ख़ान ने न सिर्फ़ कॉन्ग्रेस से इस्‍तीफ़ा दिया है बल्कि राजनीति से ही संन्‍यास ले लिया है। उन्‍होंने सोशल मीडिया पर अपने संन्‍यास की घोषणा की है।

अर्शी ख़ान ने ट्वीट करते हुए लिखा, “इंडस्‍ट्री में बढ़ते हुए मेरे काम की वजह से राजनीति में योगदान देना बहुत मुश्किल हो गया है। इसलिए मैं भारतीय नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा देती हूँ। मुझ पर भरोसा करने और समाज की देखभाल करने का अवसर देने के लिए शुक्रिया। मैं एक ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर अपने इस कर्तव्य को निभाती रहूँगी।”

अर्शी ख़ान ने यह बात भी स्पष्ट की कि वो किसी और वजह से नहीं सिर्फ़ इंडस्ट्री में बढ़ते काम की वजह से पार्टी छोड़ रही हैं। उन्होंने लिखा,

“मेरे इस्तीफ़े का कोई और कारण नहीं है बल्कि फिल्मों, वेबसीरीज, म्यूजिक और वीडियो प्रोडक्शन को लेकर मेरे प्रोफेशनल कमिटमेंट्स हैं। मैं एक्ट्रेस, एंटरटेनर और एक ज़िम्मेदार इंसान के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहती हूँ। सभी के प्यार और सपोर्ट के लिए धन्यवाद।”

ग़ौरतलब है कि अर्शी ख़ान ने इस साल की शुरुआत में ही कॉन्ग्रेस का हाथ थामा था। पार्टी में उन्‍हें एक बड़ा पद भी दिया गया था। उन्‍होंने तब ये भी कहा था कि वो लोकसभा चुनाव में भाग लेंगी। पार्टी ने उन्‍हें मुंबई प्रदेश माइनॉरिटी वेलफेयर कमिटी का वाइस प्रेसिडेंट बनाया था, लेकिन अब अचानक अर्शी ने कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है।

अर्शी ख़ान ने बिग बॉस 11 में आने के बाद काफ़ी लोकप्रियता प्राप्त की थी। इसके अलावा उन्हें बिग बॉस 11 की कॉन्ट्रोवर्सी क्वीन भी कहा जाता था। 2016 में उन्होंने बिकिनी के साथ बुरका पहन कर फोटोशूट करवाया था, जिसके लिए उन्हें धमकी भी मिली थी और उनके फेसबुक पेज को ब्लॉक भी किया गया था।