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हलाला जायज, एक्टिंग हराम, क्या ऐसे तरक्की करेगा हिंदुस्तान का मुसलमान: जायरा पर कॉन्ग्रेसी सिंघवी

जायरा वसीम के बॉलीवुड छोड़ने के फैसले के बहाने कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस्लामी कट्टरपंथियों को निशाने पर लिया है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘हलाला जायज, एक्टिंग हराम, क्या ऐसे तरक्की करेगा हिंदुस्तान का मुसलमान।’ इस मामले पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा ​है कि यदि हर भारतीय मुसलमान इसी आधार पर फैसला लेने लगे तो क्या होगा। सिंघवी का यह रुख चौंकाने वाला है।

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शरीयत के अनुसार निकाह-हलाला की परंपरा में तीन तलाक पाने वाली महिला हलाला के बाद फिर से पुराने पति से निकाह कर सकती है। इसके तहत महिला किसी गैर पुरुष से शादी से कर संबंध बनाती है और फिर उससे तीन तलाक लेकर दोबारा पहले पति से निकाह करती है। अमूमन, इस तरह की शादियाँ पति के परिवार के किसी पुरुष सदस्य के साथ ही होती है। इनमें पति का पिता और भाई भी शामिल रहते हैं।

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जायरा वसीम ने चंद दिनों पहले फिल्मों से तौबा करने की घोषणा करते हुए कहा था कि बॉलीवुड उन्हें इस्लाम से दूर ले जा रहा था। छह पन्नों के पत्र में उन्होंने अपने फैसले के पीछे की वजहों का जिक्र करते हुए कुरान का भी उल्लेख किया था। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया में बहस छिड़ी हुई है और कई लोगों ने उनके फैसले की आलोचना की है।

2019 के आम चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस ने तीन तलाक विरोधी बिल को खत्म करने का वादा किया था। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने “क्या बर्बर ‘निकाह-हलाला’ आपकी आत्मा को नहीं झकझोरता?” शीर्षक से एक ब्लॉग लिखा था।

हालाँकि, जायरा के ऐलान के बाद ऐसी खबरें आईं थी कि उनका अकाउंट हैक कर लिया गया है। लेकिन, बाद में खुद जायरा ने इसका खंडन किया। इससे साफ है कि धर्म में अपनी आस्था और गहरी करने के लिए उन्होंने पूरी तरह सोच-समझकर यह फैसला लिया है।

‘भारत में अकल्पनीय हिंसा और पीड़ा होने वाली है’: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल का इस्तीफा

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सार्वजानिक तौर पर अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी व देश की जनता को धन्यवाद देते हुए इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से अपना बयान जारी किया। उस बयान के मुख्य अंश को हम आपके सामने रख रहे हैं:

“कॉन्ग्रेस पार्टी की सेवा करना एक अच्छा अनुभव रहा। इतना प्यार देने के लिए संगठन और जनता के प्रति मैं कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते मैं 2019 लोकसभा चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेता हूँ और जवाबदेही तय करना पार्टी के आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है। पार्टी की हार के लिए सभी ज़िम्मेदार लोगों पर जवाबदेही तय होगी और मेरे लिए यह सही नहीं होगा कि ख़ुद पद पर बना रहूँ और दूसरों की जवाबदेही तय करूँ। मेरे कई साथियों ने मुझसे कहा है कि आप नए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को नामित करें। हालाँकि, मेरे द्वारा नया कॉन्ग्रेस अध्यक्ष चुना जाना ग़लत होगा। एक नए अध्यक्ष की ज़रूरत है और मुझे पता है कि पार्टी सही निर्णय लेगी।”

“इस्तीफा देने के तुरंत बाद मैंने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी से कहा कि कुछ लोगों की एक टीम बनाई जाए, जो नए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की तलाश करे। मैंने उन्हें सारी शक्ति दे दी है और उनके इस कार्य में पूरा सहयोग भी कर रहा हूँ। मेरी लड़ाई किसी राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं है और न ही भाजपा से मैं घृणा करता हूँ, मेरे शरीर का कण-कण भारत की समरसता को समर्पित है। भाजपा से भारत के विचार को ख़तरा है और इसीलिए मैं उनसे असहमत रहता हूँ। भारत के संविधान पर आक्रमण हो रहा है और यह देश की मूलभूत संरचना के ख़िलाफ़ है।”

“मैं लड़ाई से हट नहीं रहा हूँ। कॉन्ग्रेस के एक सिपाही और देश के बेटे के रूप में मैं अंतिम साँस तक लड़ता रहूँगा। हमारा चुनाव प्रचार अभियान सभी धर्मों एवं सम्प्रदायों बीच भाईचारा, सहिष्णुता और सम्मान का प्रतीक रहा। मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री व आरएसएस के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी। मैं समय-समय पर अकेला भी पड़ गया लेकिन लड़ता रहा क्योंकि मैं भारत से प्यार करता हूँ। अगर वित्तीय संसाधनों पर किसी पार्टी विशेष का एकछत्र कब्ज़ा हो तो कोई चुनाव निष्पक्ष हो ही नहीं सकता। अब भारत में सभी सरकारी संगठन न्यूट्रल नहीं रहे हैं और हमारी लड़ाई सबके ख़िलाफ़ थी।”

“संघ भारत के सभी संवैधानिक संगठनों की संरचना में अपने हिसाब से बदलाव करने में सफल हो गया है। लोकतंत्र ख़तरे में है। सत्ता पर इस तरह से कब्ज़ा अकल्पनीय हिंसा और दर्द को जन्म देगा। किसानों और युवाओं को सबसे ज्यादा दिक्कतें आएँगी। प्रधानमंत्री के जीत जाने से उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप हट नहीं जाते। कॉन्ग्रेस पार्टी को अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए बदलाव से गुज़रना ज़रूरी है। मैं पार्टी के लिए हमेशा उपस्थित रहूँगा, अपनी सलाह और सेवाओं के साथ।”

ग्राउंड रिपोर्ट हौज़ काज़ी: एक तोड़ा गया मंदिर, एक गायब हिन्दू लड़का, एक समुदाय की बिखरी आस्था

चाँदनी चौक की गलियों से जब मेरा रिक्शा गुजर रहा था, तो मैं सोच रही थी कि दुर्गा मंदिर में तोड़-फोड़ वाली घटना को कहीं ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर तो नहीं पेश किया गया! क्योंकि गलियाँ खामोश नहीं थीं, दुकानें और बिजनेस ऐसे चल रहे थे जैसे कुछ हुआ ही न हो। जो लोग आवाजाही करते दिख रहे थे, वो अन्य दिन की भाँति ही थे। केवल एक चीज, जिसने यह संकेत दिया कि कुछ दिन पहले यहाँ कुछ न कुछ तो हुआ है, वह थी- सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों की उपस्थिति।

मैंने अपने रिक्शावाले से पूछा कि यहाँ क्या हुआ था। उसने पहली बार में, धीरे से, केवल इतना कहा कि मोहम्मडन और हिंदुओं के बीच कुछ लड़ाई हुई थी। मैंने उससे पूछा कि लड़ाई किस बारे में थी? “मुझे नहीं पता,” उन्होंने कहा। फिर भी “कई अफवाहें हैं कि कैसे हिंदुओं ने एक मुस्लिम व्यक्ति को मार डाला।”

साइकिल रिक्शा हमें वहाँ तक ले गया जहाँ तक बैरिकेड्स लगे थे। इसके बाद, हमें लगभग 1 किलोमीटर तक पैदल चलना था। जब तक कि मैं उस संकरी गली तक नहीं पहुँच गई, जिसे ‘गली दुर्गा मंदिर वाली’ कहा जाता है। मैं ऐसी जगह खड़ी थी जिसे ‘लाल कुआँ’ कहा जाता था। जब मैंने ‘गली दुर्गा मंदिर वाली’ की ओर चलना शुरू किया, तो माहौल बदलता गया। मैं अपनी पीठ के पीछे घूरती निगाहों को महसूस कर सकती थी। गलियाँ इस्लामी भीड़ से भरी हुई थीं और चारों ओर खड़े लोग आपस में फुसफुसा कर बात कर रहे थे, तनाव कम था।

क्या कहते हैं इलाके के मुस्लिम

इस पूरे घटनाक्रम में दूसरे मजहब द्वारा बताई गई कहानी हिन्दुओं के बयानों से बिलकुल ही अलग है। दूसरे मजहब ने एक ‘हिन्दू हलवाई’ को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इनकी कहानी में समुदाय विशेष के लोगों ने न तो मंदिर तोड़ा, न मूर्तियाँ और ये पूरी लड़ाई, जो कि एक पार्किंग को लेकर शुरु हुई थी, वो लड़ाई उस हलवाई के कारण बढ़ी जो इलाके में तनाव पैदा करना चाहता था।

इलाके के समुदाय विशेष के लोग कहते हैं कि हिन्दुओं ने स्वयं ही दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ मचाई ताकि इलाके के बहुसंख्यक मुस्लिमों को फँसाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दुओं और दूसरे मजहब के बीच किसी भी प्रकार का तनाव नहीं था और ये पूरी घटना जबरदस्ती बनाई गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर पर कोई पत्थरबाजी भी नहीं हुई और हिन्दुओं ने दूसरे समुदाय को फँसाने को लिए मंदिर के पास पत्थर रख दिए ताकि लगे कि मुस्लिमों ने पत्थर फेंके हैं।

थोड़ी दूर और चलने पर पुलिस द्वारा लगाया गया दूसरा बैरिकेड नजर आता है जिसके पीछे इलाके के हिन्दू विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दुर्गा मंदिर वाली गली के बाहर ही इलाके के बड़े-बुजुर्ग आगे की योजना पर बात कर रहे थे।

हिन्दुओं का क्या कहना है

उस गली में, जिसमें यह हमला किया गया और मुस्लिम भीड़ द्वारा मंदिर तोड़ा गया, रहने वाले लोगों ने मुस्लिम लोगों द्वारा किए जा रहे दावे को नकारा है। वे एक सीसीटीवी कैमरे की ओर इशारा करते हैं और कहते हैं कि पथराव और मंदिर पर हुए हमले के पर्याप्त वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

उनमें से एक ने जले हुए पर्दे और देवताओं के मूर्तियों को दिखाया जो टूटे और बिखड़े पड़े थे। ध्वस्त किए गए पूजा स्थल दिखाते हुए उन्होंने एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा भी किया। निवासियों ने आरोप लगाया कि पुलिस दुर्गा मंदिर में हुई तोड़फोड़ को दबाने के लिए तोड़ी गई मूर्तियों को नई मूर्तियों से बदलने के लिए प्रयासरत है।

दिल्ली पुलिस द्वारा बदलने के लिए लाई गई नई मूर्तियाँ

निवासियों ने यह भी दावा किया कि मुस्लिम भीड़ ने न केवल दुर्गा मंदिर की मूर्तियों को तोड़ा, बल्कि दुर्गा मंदिर में पेशाब भी किया। उन्होंने बताया कि गली के मुहाने पर कई सौ लोगों की भीड़ जमा थी और अगर वे शटर को नीचे नहीं खींचते तो इलाके के हिंदू जरूर मारे जाते। यहाँ तक कि गली की दोनों तरफ खड़ी इमारतों की छतों से भी पथराव हुआ। साथ ही, भीड़ ने न केवल पथराव किया बल्कि उन पर हमले के लिए तलवारों से भी लैस थे।

लोगों का कहना है कि उस रात तनाव कम नहीं हुआ था। वास्तव में, इसके बाद भी भीड़ गली का चक्कर लगा रही थी और कई बार हमला करने के लिए तैयार थी, लेकिन हिन्दुओं ने अपने बचाव के लिए क्रिकेट बैट और ऐसे ही अन्य साधन लिए ताकि हमले की स्थिति में वो अपना बचाव तलवारों से लैस मुस्लिम भीड़ से कर सकें।

लोगों का कहना है कि पुलिस ने हिन्दुओं को चुप रहने और प्रतिक्रिया ना करने को कहा। दुर्गा मंदिर गली में रहने वाले एक निवासी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब मुस्लिमों ने हिन्दुओं पर अटैक किया हो। कुछ महीने पहले भी कुछ मुस्लिम लोगों ने मिलकर हिन्दू लड़कों के साथ हिंसक घटना को अंजाम दिया था, उस समय भी मुस्लिम भीड़ ने उन पर पथराव किया था।

जबकि कई लोग यह दावा भी कर रहे हैं कि बहुत पहले से ही चाँदनी चौक के हिन्दू और मुस्लिम शांतिपूर्वक तरीके से रहते आए हैं। हालाँकि, कई अन्य लोगों का कहना है कि आपस में मनमुटाव और रंजिश की घटनाएँ समय के साथ बढ़ी हैं। वे कहते हैं, इसका कारण यह है कि पहले इस इलाके में हिंदू संख्या में अधिक थे और अब, उनकी संख्या घट गई है। एक निवासी ने यह भी दावा किया है कि ‘उनका’ उद्देश्य उस पूरी गली को अपने कब्जे और नियंत्रित में लेना है, जहाँ हिंदू निवास करते हैं।

हमले की रात

हमले की जगह से पुलिस स्टेशन महज चंद मिनटों की दूरी पर है। लेकिन, स्थानीय लोगों के मुताबिक हमले की रात पीसीआर वैन को मौके पर पहुँचने में घंटा भर लग गया। जब कुछ पत्रकार मौके पर जाने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें चाँदनी चौक के कुछ लोगों ने बताया कि वह गली बेवड़ों का अड्डा है और वहाँ किसी तरह का तनाव नहीं है।

घटना के बाद से हिंदू गली से महज कुछ दूर स्थित लाल कुँआ की तरफ लोगों को नहीं जाने दिया जा रहा। वहाँ रह रहे दूसरे मजहब वालों का आरोप है कि हिंदुओं ने मस्जिद के पास बाइक रैली निकाली और उकसाने के लिए ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। हिंदू इन आरोपों को नकार रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया है कि इसल्मी भीड़ को इकट्ठा करने के लिए ह्वाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड किए गए।

हिंदुओं का कहना है कि इस घटना के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उनकी खबर नहीं ली। केवल हर्षवर्धन ही उनका हाल जानने पहुँचे (जब तक यह संवाददाता मौके पर था)। उनका कहना है कि यदि मुस्लिमों की पिटाई हुई होती तो केजरीवाल उनके पास जरूर जाते।

हिंदू युवक गायब

गली के लोगों से बात करने के दौरान मुझे अचानक ही ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘जय श्री राम’ के नारे सुनाई पड़े। हालात को काबू में रखने के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात थे।

घटना के बाद से 17 साल के एक हिंदू युवा के गायब होने की बात सामने आने के बाद से फिर से तनाव बढ़ने का अंदेशा है। गायब युवक की माँ मुझे एफआईआर की कॉपी के साथ मिली।

मैंने उनसे बात करने की कोशिश की और उन्हें भरोसा दिलाया की उनकी बात सामने रखूँगी। उन्होंने कहा, ‘हमारी बात कोई नहीं बता रहा।’ मोना ने मुझे बताया उसका 17 साल का बेटा घटना वाले दिन से गायब है। उसने बताया, ‘मुस्लिमों की भीड़ उसे अगवा कर ले गई।’ जब मैं इलाके में पहुँची तो इस घटना के तीन दिन बीत चुके थे और अभी तक इस लड़के का कोई सुराग नहीं मिला था।

FIR की कॉपी

एफआईआर के मुताबिक, दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ और गली में रहने वाले हिंदुओं की पिटाई करने के बाद मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ मोना के घर में घुस गई और उसके बेटे को पीटने लगी। जब मुस्लिमों की भीड़ घर में घुसी और उसके बेटे को अगवा किया तब मोना आराम कर रही थी। केशव सक्सेना नामक इस युवा की बाद में कोई खबर नहीं लगी। इस नाबालिग के माता-पिता मोना और देवेंद्र गुस्से और सदमे में हैं।

‘अल्लाहु अकबर’ के नारों की शोर मंद पड़ने और तनाव घटने के बाद देवेंद्र की चिंताएँ बढ़ने लगी है। वे कहते हैं, “**, मैं अपनी जान दे दूँगा। मेरा बेटा चला गया, अब मैं और मेरी पत्नी जी कर क्या करेंगे।” भीड़ में से एक आदमी कहता है, “तुम्हारे और तुम्हारी पत्नी के जान देने से तुम्हारे बेटे का क्या भला होगा।” देवेंद्र के साथ खड़े एक अन्य व्यक्ति का कहना है, “आखिर! हम कर भी क्या सकते हैं। हम हिंदू होने की सजा भुगत रहे हैं।” लोग इस कदर नाराज हैं कि उनकी भावनाएँ आसानी से भड़काई जा सकती है।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया “कोई हमें दबा नहीं सकता। यदि तुम जान दोगे तो हम भी मरेंगे और उन सब को साथ लेकर भी जाएँगे।”

अचानक गायब युवक की माँ खड़ी होती हैं और उसकी सूनी आँखे शोला उगलने लगती हैं। वह कहती हैं, “कोई मुझे बताएगा मेरा बेटा कहाँ है। उसने कुछ खाया-पीया नहीं और न ही सोया है। मैंने एफआईआर भी दर्ज करवाई है। अब मैं किससे फरियाद करूँ। उन्होंने मंदिर को तोड़ा और मेरे बेटे को अगवा कर ले गए।”

पिता दोबारा दहाड़ते हुए कहते हैं, “मेरे हवाले उन चार लोगों को कर दो जो उस रात गली में आए थे और मैं उनसे सच्चाई उगलवा लूँगा।”

जब माँ ने 2 पुलिस अधिकारियों से, जो कि वहाँ पर मौजूद थे, तो उनमें से एक पुलिसवाले का कहना था, “आपका बेटा सुरक्षित है।”

पुलिसवाले के इस चिंतित माँ ने कहा, “तुम्हें कैसे पता कि वह ठीक है? क्या वो आपके पास है? क्या आप जानते हैं कि वह कहाँ है?” पुलिसवाले ने कहा कि अगर उन्हें पता होता तो वे पहले ही लड़के को बरामद कर लेते। किसी को भी वास्तव में समझ नहीं आया कि पुलिसवाले ने क्यों कहा कि वह ठीक है, या अब तक क्या जाँच की गई है?

हिन्दू, पुलिस के बर्ताव से खुश नहीं थे। वहीं, जब इससे पहले समुदाय विशेष के पास पहुँचे, तो वो दिल्ली पुलिस की जमकर तारीफ कर रहे थे।

हिन्दू: एक परेशान अल्पसंख्यक

संवाददाताओं के नजर आते ही मुस्लिम भीड़ ने वो तख्तियों लहरानी शुरू कर दीं, जिन पर लिखा था कि मुस्लिम शांति और अमन चाहते हैं। हालाँकि, यह वही भीड़ थी, जो बाद में हिंदुओं के साथ ‘अल्लाहू-अकबर’ के नारों से सामना कर रही थी।

इलाके के हिंदुओं से बात करते हुए, उनकी दुर्दशा का वर्णन करते हुए, उन्होंने बार-बार जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में, अधिकांश दुकानें मुस्लिमों की थीं और कुछ ही हिंदुओं की थीं। हिंदू बार-बार जोर देकर कहते हैं कि मुस्लिम चाहते हैं कि हिंदू इस इलाके को छोड़ दें और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि छोटी गली में भी समुदाय विशेष का कब्जा हो। यहाँ तक किसमुदाय विशेष वाले अब उस हलवाई का भी आर्थिक रूप से बहिष्कार कर रहे हैं, जो पार्किंग वाले विवाद में शामिल था।

वह हलवाई जिसका मुस्लिम बहिष्कार कर रहे हैं (तस्वीर -एक वहीं के एक व्यक्ति द्वारा व्हाट्स अप किया गया )

चुप्पी साधे, संवेदनहीन मीडिया

इस तनाव भरे माहौल के बीच, जब मैं वहाँ मौजूद थी, और गायब बच्चे के माता-पिता रो रहे थे, एक टीवी चैनल का पत्रकार भी वहाँ उपस्थित था। यह देखना विचित्र था कि जब माँ-बाप अपने बच्चे के किडनैप होने की बात पर रो रहे थे, वो टीवी रिपोर्टर वहाँ से चलता बना। उसका वहाँ से जाना इस रोते माता-पिता के उन आरोपों की पुष्टि करता है जहाँ वो बताते हैं कि इन सब बातों के बीच उनके बेटे के गायब होने की बात पूरी तरह से उपेक्षित रही।

मीडिया अक्सर अपने चमकीले टावरों के आरामदेह स्टूडियो से रिपोर्टिंग करने में व्यस्त रहता है। उनकी यही अभिजात्यता उन्हें ऐसे मामलों की गंभीरता समझने से रोकती है जहाँ एक रोते माता-पिता के गायब बच्चे की खबर सामने देखकर भी रिपोर्टर अपने कैमरामैन के साथ निकल जाता है। दुखी पिता जिस भाषा और शैली में सच्चाई बोल रहे थे वो शब्द शायद कई टीवी एंकरों को परेशान कर सकते हैं। उस पिता की बातों को सुनने और समझने के लिए इन अभिजात्य पत्रकारों को अपने चमकीले टावरों से कई सौ सीढ़ियाँ उतरनी होंगी, जो शायद संभव नहीं।

शायद यही कारण है हिन्दू खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं। शायद इसीलिए वो कहते हैं कि उनके साथ ऐसे मौकों पर VHP और बजरंग दल के वही कार्यकर्ता खड़े रहे जिन्हें ‘छुटभैया’ कहकर नकार दिया जाता है। शायद यही वो कारण है कि चमकीले टावरों में बैठा पत्रकार ट्विटर पर ही सारा ज्ञान दे देता है कि ये तो बस ‘एक मामूली विवाद’ है। एक मामूली विवाद जहाँ हिन्दुओं का कहना है कि उस हलवाई को पीटा गया और उसके घर की स्त्रियों के साथ बदसलूकी की गई।

खबरों के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से बात की है और कमिश्नर ने बताया है कि अब स्थिति सामान्य है। उन्होंने बताया कि चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। लेकिन उस 17 साल के लड़के के गायब होने पर कहीं भी, कुछ भी नहीं कहा जा रहा।

इस अनुभव ने मुझे अंदर तक झकझोड़ दिया है। मेरे पास कहने को कुछ बचा नहीं है कि किन विशेषणों से ऐसी घटनाओं की बात करूँ। मीडिया पूरी तरह से नाकाम रहा है। जिन लोगों ने अपना बच्चा खो दिया उन्हीं पर लांछन लगाए जा रहे हैं। जिस हिंसक भीड़ ने मंदिर को तोड़ा वही ऐसे दिखाए जा रहे हैं जैसे वो कितने समझदार हैं जो मामला सुलझाना चाहते हैं। इस बच्चे के गायब होने की खबर किसी मीडिया में नहीं है। मीडिया के एक हिस्से ने यह तय कर लिया है कि हिन्दू तो कभी पीड़ित हो ही नहीं सकता और दूसरा समुदाय तो वो समुदाय है जो शांतिपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाना चाहता है। सच्चाई अक्सर अनवरत बहते आँसुओं और चिल्लाती हुई उन आवाज़ों में खो जाती है जो टीवी स्टूडियो के ऊँचे टावरों तक कभी पहुँच नहीं पाते।

मर चुकी माँ को जगाने की कोशिश, दूध पीने की कोशिश: नन्हे गैंडे का Video Viral

मारी गई माँ को जगाने की कोशिश करते बच्चे को देखने से ज्यादा हृदयविदारक क्या हो सकता है! चाहे वह बच्चा गैंडे का ही क्यों न हो। शिकारियों के हाथों मारे गए अपनी माँ की देह में जान फूँकने की कोशिश करते नन्हें गैंडे के इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर दिया है। हजारों बार यह वीडियो देखा चा जुका है और सैकड़ों बार रिट्वीट किया गया है।

भारतीय वन सेवा के अधिकारी प्रवीण कासवान ने मंगलवार को ट्विटर पर यह वीडियो पोस्ट किया और देखते ही देखते सोशल मीडिया में यह वायरल हो गया। अधिकारी ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “शिकार! सींग के लिए शिकारियों के हाथों मारी गई अपनी माँ को जगाने की कोशिश करता नन्हा गैंडा। खौफनाक और आँख खोलने वाला।”

बेहद भावुक कर देने वाले इस वीडियो में देखा जा सकता है कि नन्हा गैंडा जमीन पर मृत पड़ी माँ को जगाने की लगातार कोशिश कर रहा है। उसे समझ में नहीं आ रहा कि उसकी माँ के शरीर में कोई हरकत हो क्यों नहीं रही है। वह माँ का दूध पीने की कोशिश करता भी नजर आता है। सींग के लिए उसकी माँ की हत्या कर शिकारियों ने इस नन्हे से बच्चे को बेसहारा कर दिया है।

वीडियो में एक व्यक्ति की आवाज भी सुनाई पड़ रही है। वह कहता है, “यह क्या है। यह देखना बेहद खौफनाक है। कोई नहीं चाहता कि ऐसा फिर हो।”

सुसाइड नोट में IIT छात्र ने लिखा- ‘एक ही जिंदगी मिली है, जीना मत भूल जाना’

तेलंगाना के संगारेड्डी में इंजीनियरिंग के छात्र ने पंखे से लटककर जान दे दी। इसमें पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। आईआईटी हैदराबाद में फाइनल इयर के एक स्‍टूडेंट ने मंगलवार (जुलाई 02, 2019) को अपने हॉस्टल के कमरे में फाँसी लगाकर आत्‍महत्‍या कर ली। मार्क एंड्रयू चार्ल्‍स नाम का यह छात्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला था। आत्‍महत्‍या से पहले मार्क 8 पन्‍नों का एक सुसाइड नोट छोड़ गए हैं, जिसे पढ़कर लगता है कि शायद खराब नंबरों और अच्‍छी नौकरी न मिल पाने की आशंका की वजह से मार्क ने यह कदम उठाया है।

आत्महत्या से पहले मार्क ने जो ‘सुसाइड नोट‘ छोड़ा है, उसमें लिखा है, “मेरे पास नौकरी नहीं है, शायद मिलेगी भी नहीं। कोई भी किसी लूजर को नौकरी नहीं देता। अपनी ग्रेड शीट देखकर हैरान हूँ। हर किसी की तरह मेरे भी सपने थे। लेकिन अब सब खत्‍म है। ये सारी पॉजिटिव बातें, हमेशा मुस्‍कुराना, लोगों से कहना कि मैं ठीक हूँ, जबकि मैं ठीक नहीं हूँ।”

संगारेड्डी के पुलिस उपाधीक्षक पी श्रीधर रेड्डी ने बताया कि छात्र मार्क एंड्रयू चार्ल्स (20 साल) सोमवार रात करीब 11 बजे हॉस्टल के अपने कमरे में गए। उन्होंने बताया कि मार्क के नहीं दिखने पर मंगलवार दोपहर उनके मित्रों ने जब उनके कमरे का दरवाजा तोड़ा तो वह पँखे से लटके मिले। डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे मार्क ने कुछ दिन पहले ही अंतिम वर्ष की परीक्षा दी थी और अंतिम प्रजेन्टेशन की तैयारी कर रहे थे, जो 5 जुलाई को होने वाली थी।

संगारेड्डी के डीएसपी श्रीधर रेड्डी के मुताबिक, “आमतौर पर दोपहर 12 बजे तक सभी स्‍टूडेंट अपने कमरों से निकल आते हैं। लेकिन जब मार्क मंगलवार 2 बजे तक नहीं निकले, तो उनके दोस्‍तों को शक हुआ और वे उन्‍हें आवाज लगाने लगे। जब कोई जवाब नहीं मिला तो दरवाजा तोड़ दिया गया, अंदर उन्‍हें छत से लटके हुए मार्क दिखाई दिए।”

पुलिस को मार्क एंड्रयू चार्ल्स की डायरी में एक सुसाइड नोट लिखा मिला है, जिसमें छात्र ने लिखा है कि शायद उसे अच्छे अंक न मिलें और दुनिया में असफलता का कोई भविष्य नहीं है। पुलिस का कहना है कि संभवत: अवसाद के कारण उन्होंने यह कदम उठाया हो। इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 31 जनवरी को मकैनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र एम अनिरुद्ध ने भी छात्रावास भवन से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस प्रकार यह इस संस्थान में इस साल की दूसरी ऐसी घटना है।

‘सोचा नहीं था कि ऐसे निराश करूँगा’

अपने सुसाइड नोट में मार्क ने अपने परिवार और दोस्‍तों से माफी माँगते हुए लिखा है, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस तरह आपको निराश करूँगा। मैं इस काबिल नहीं हूँ कि आप लोग मुझे याद करें।”

मेडिकल कॉलेज को दान किया शरीर

मार्क ने इस नोट में आगे लिखा है, “घर से दूर दो साल, सबसे अच्‍छे इंस्टिट्यूट में, मेरे चारों तरफ बेहतरीन लोग थे, लेकिन मैंने सब बर्बाद कर दिया।” मार्क ने अपने परिवार से अनुरोध किया है कि उनके शरीर को दफनाने की जगह किसी मेडिकल कॉलेज को दान कर दें। साथ ही यह भी लिखा है कि उनकी लाश देश के भावी डॉक्‍टरों के किसी काम तो आएगी।

‘हर एक पल को जीना, एक ही जिंदगी मिली है’

अपने जीवन के आखिरी दो महीनों को जीवन का सबसे अच्‍छा समय बताते हुए मार्क ने दोस्‍तों से माफी माँगी है। वहीं, दोस्‍तों से अपील की है, ‘आईटी इंडस्‍ट्री में जिंदगी बर्बाद न करें‘, “अंकित, रज्‍जो, आईटी में काम करते-करते अपनी लाइफ मत भूल जाना। हर एक पल को जीना। एक ही जिंदगी मिली है।”

‘तुम्हारी साँस बदबूदार है, इसलिए गले नहीं लगाऊँगा’ – इस बात पर नबी ने शोएब को मारा चाकू

बात-बात पर मामला झगड़े, मारपीट और यहाँ तक कि हत्या तक पहुँच जाना आम हो चला है। ताजा मामला तमिलनाडु का है और कहानी दो दोस्त, शोएब पाशा और नबी की है। दोनों किसी जगह मिलते हैं लेकिन एक दोस्त का दूसरे को गले लगाने से इनकार करना इतनी बड़ी वजह बन गई कि दो को छुरा घोंप दिया गया। घटना बेंगलुरु के मावली इलाके में एलबीएफ रोड की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला कुछ यूँ है कि जब नबी ने शोएब को गले लगाने की कोशिश की, तो शोएब ने नबी की बदबूदार साँसों के कारण उसे धक्का दे दिया। यह बात नबी के दिल पर लग गई। फिर क्या था, नबी ने शोएब को गाली देना शुरू कर दिया जिसके कारण दोनों के बीच झगड़ा होने लगा जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। टकराव बढ़ने पर नबी ने चाकू निकाला और सीधा शोएब के पेट में घोंप दिया।

मामला यहीं शांत नहीं हुआ। जब घायल शोएब ने अपने भाई शाहिद को मदद के लिए बुलाया, तो नबी ने भागने से पहले ही उसे भी चाकू मार दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत नबी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

फिलहाल, ऑटोमोबाइल के सामान की दुकान पर काम करने वाले नबी को मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इस बीच, खबर यह है कि शोएब और उसके भाई शाहिद का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है और वो खतरे से बाहर है। सोचिए, साँसों की महक भी कितना बवाल कर सकती है। चाकूबाजी से हवालात तक का सफर तय हो गया इस छोटी सी वजह से।

व्यंग्य: राहुल गाँधी के इस्तीफे से भाजपा में शोक की लहर: अजीत भारती का वीडियो। Ajeet Bharti on Rahul’s Resign

इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस्तीफा दे दिया, जो कि बीजेपी के स्टार प्रचारक भी कहे जाते हैं। इस्तीफे की उन्होंने काफी वजहें बताई हैं। हालाँकि राहुल गाँधी के इस्तीफ़े से भाजपा में शोक की लहर दौड़ गई है। मोदी जी ने कहा- नहीं कर सकूँगा कभी मन से माफ।

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धोखाधड़ी कर कब्जाए 40000 शेयर्स: अभिनेता और TV9 के CEO ने मिल कर रची थी साज़िश

हैदराबाद के राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टॉलीवुड अभिनेता शिवाजी को हिरासत में ले लिया गया। शिवजी पर TV9 के सीईओ के साथ मिल कर वित्तीय धोखाधड़ी करने का आरोप है। उन पर आरोप है कि उन्होंने TV9 के तत्कालीन सीईओ रवि प्रकाश के साथ मिल कर बोगस डॉक्यूमेंट्स बनाए और फिर उसके आधार पर शेयर्स की ख़रीद-बेच में गड़बड़ियाँ की। जब गिरफ्तारी हुई, उस वक्त अभिनेता शिवाजी एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अमेरिका जा रहे थे।

हालाँकि, उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी होने के कारण एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया और बाद में उन्हें साइबराबाद पुलिस को सौंप दिया गया। साइबर क्राइम पुलिस ने उन्हें छोड़ने से पहले 2 घंटे तक पूछताछ की। इस मामले में आगे की जाँच के लिए अभिनेता शिवाजी को 11 जुलाई को फिर से पुलिस के समक्ष पेश होने को कहा गया है।

अभिनेता शिवाजी और TV9 के तत्कालीन सीईओ रवि प्रकाश धोखाधड़ी के इस मामले में मुख्य साज़िशकर्ता हैं और उन पर आरोप है कि दोनों ने फ़र्ज़ी काग़ज़ातों के आधार पर TV9 के 40,000 शेयर्स पर कब्ज़ा कर लिया। अलांदा मीडिया एंटरटेनमेंट ग्रुप ने दोनों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया है, जिसमें उन पर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। अलांदा ही TV9 की संचालक कम्पनी है। अभिनेता शिवाजी को पिछले कुछ महीनों में 3 बार पुलिस ने समन किया लेकिन वह एक बार भी पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुए थे।

इसके बाद उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी किया गया। हाल ही में उन्होंने अपने ऊपर लगे एफआईआर को रद्द करने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था। शिवाजी ने अदालत को बताया कि उन्होंने TV9 के सीईओ रहे रवि प्रकाश को 40,000 कम्पनी के शेयर्स ख़रीदने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे। पुलिस का मानना है कि शिवाजी को रवि प्रकाश द्वारा ही खड़ा किया गया था ताकि वे कम्पनी के मैनेजमेंट में मनमाफिक बदलाव कर सकें।

इसके बाद रवि प्रकाश को TV9 के सीईओ पद से हटा दिया गया। अदालत उन्हें गिरफ़्तारी से राहत प्रदान कर चुकी है और 9 जुलाई से पहले उनके ख़िलाफ़ किसी प्रकार की कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी।

200 अधिकारी जबरन रिटायर, 600 पर कार्रवाई, 100 रडार पर: भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ योगी की स्ट्राइक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्यूरोक्रेसी को साफ़ करने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल करते हुए यूपी सरकार ने भ्रष्ट अधिकारीयों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा क़दम उठाया। कुल मिला कर देखा जाए तो पिछले 2 वर्षों में 600 अधिकारियों पर गाज गिराई जा चुकी है। इनमें से 200 ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें योगी सरकार ने जबरन रिटायर कर दिया। बाकि के 400 अधिकारियों पर अन्य कार्रवाई भी की गई है। यूपी सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा विशेष जानकारी देते हुए बताया:

“योगी सरकार ने पिछले 2 साल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जो कार्रवाई की है, वह देश में अब तक किसी भी प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए क़दम से बहुत बड़ी है। यूपी सरकार ने 200 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट दिया है। 100 से अधिक अधिकारी अभी भी सरकार के रडार पर हैं। यह पहली सरकार होगी जिसने 600 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में कार्रवाई कर एक नजीर पेश की है।”

योगी सरकार लगातार भ्रष्ट व अक्षम अधिकारियों को चिह्नित करने में लगी हुई है। सभी विभागों में भ्रष्ट, सुस्त व काम न करने वाले अफसरों की सूची तैयार की जा रही है और उन पर सिलसिलेवार तरीके से कार्रवाई की जा रही है। जो भी दोषी पाए जा रहे हैं, उन्हें सीधा सेवा से बाहर कर दिया जा रहा है। जिन 400 अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, उनका प्रमोशन रोक दिया गया है। अर्थात अब उन्हें सेवा में प्रोन्नति नहीं मिलेगी।

जानने लायक बात यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बावजूद अभी 100 से भी अधिक ऐसे अधिकारी हैं, जिन पर सरकार की नज़र है। इन सुस्त अधिकारियों को सरकार ने अभी अपने राडार पर रखा है और इन पर कार्रवाई की गाज कभी भी गिर सकती है। इनमें से अधिकतर आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं। इसीलिए, इस पर निर्णय केंद्र सरकार को लेना है। योगी सरकार ने ऐसे अधिकारियों की सूची बना कर मोदी सरकार के पास भेज दी है।

योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में ही यह साफ़ कर दिया था कि विभागीय रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाए जाएँगे, उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपनी कार्य पद्धति सुधारने की नसीहत देते हुए पूछा कि ई-ऑफिस के मामले में 2 साल बीत जाने के बावजूद शत-प्रतिशत कार्य क्यों नहीं हो पा रहा है? उन्होंने अधिकारियों को सही समय पर निर्णय लेने व जहाँ भी ज़रूरत पड़े, सख़्त कार्रवाई करने की सलाह दी।

कोई मर गया तो ₹200, घर बनाना है तो ₹25000: पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं के ‘कट मनी’ की पूरी कहानी

  • घर में कोई मर गया है, आपको अंतिम संस्कार के लिए राज्य सरकार से मिलने वाली 2000 रुपए की वित्तीय सहायता चाहिए, मिल जाएगी – बस 200 रुपए निकालिए।
  • उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन चाहिए, लग जाएगी – बस 500 से 600 रुपए निकालिए।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाना है, 1.20-1.35 लाख रुपए की सहायता राशि चाहिए, मिल जाएगी – बस 10000 से 25000 तक निकालिए।
  • स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर में शौचालय बनवाना है, उसके लिए 12000 रुपए की सहायता राशि चाहिए, मिल जाएगी – बस 900 से 2000 तक रुपए निकालिए।
  • MGNREGS मतलब ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करना है, हर दिन कमाना है, हो जाएगा – बस हर दिन 20 से 40 रुपए देना होगा।

ये बस कुछ उदाहरण हैं। पश्चिम बंगाल के लोग (खासकर गाँवों के) अब तक इन ‘दरों’ को सरकारी दर समझते थे। आदत हो गई थी। इंडियन एक्सप्रेस के रविक भट्टाचार्य और शांतनु चौधरी की ग्राउंड रिपोर्ट में इस ‘आदत’ या ‘सरकारी दर’ का खुलासा इस कदर हुआ है कि न सिर्फ ग्रामीण बल्कि तृणमूल के कुछ नेताओं ने भी इन विभिन्न योजनाओं के लिए अलग-अलग ‘दर’ की बात स्वीकारी है।

इंडियन एक्सप्रेस ने पश्चिम बंगाल में ‘कट मनी’ कल्चर के खुलासे के लिए कुल 12 गाँवों के लोगों से बातचीत की। ये 12 गाँव हुगली, वर्धमान और बीरभूम में हैं। इन गाँव के लोगों और तृणमूल के स्थानीय नेतों ने यह माना कि राज्य या केंद्र सरकार की किसी भी योजना का लाभ उठाने के लिए उन्हें ‘निर्धारित दर’ चुकाना ही होता है। यह ‘दर’ 200 रुपए से लेकर 25000 रुपए तक फिक्स है।

MGNREGS के तहत कट मनी का खेल

पश्चिम बंगाल में साल 2011 में जब तृणमूल सत्ता में आई उसके बाद ‘कट मनी’ का प्रचलन आम हो गया। यह इस तरीके से माँगा जाना शुरू हुआ कि ग्रामीणों को पता ही नहीं चला कि यह घूस है बल्कि इसे वे हाल के दिनों तक ‘सरकारी दर’ ही समझते रहे। उन्हें अपने ठगे जाने की बात तब समझ आई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले महीने अपने नेताओं से ‘कट मनी’ लौटाने को कहा। और वो भी क्यों! इसलिए नहीं कि उन्हें जनता से प्यार है, बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी पार्टी की छवि को धूमिल हो चुकी है और राज्य में भाजपा से उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है।

शौचालय में भी कट मनी की सोच

जब राज्य की मुख्यमंत्री खुद अपने नेताओं से गैर-कानूनी तरीके से लिए गए पैसों को लौटाने की बात कहती हैं तो जिनके हक के पैसे लिए गए, जो ठगे गए, उनका गुस्सा होना लाजिमी है। यह गुस्सा वैसे तो पूरे बंगाल में है लेकिन वर्धमान, बीरभूम, हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर जिलों में यह ज्यादा है। क्योंकि ये जिले आर्थिक रूप से पिछड़े हैं और शायद यहाँ इस तरीके की पार्टी के स्तर वाली ठगी बड़े स्तर पर हुई होगी।

सर के ऊपर छत चाहिए तो कट मनी

जहाँ तृणमूल के कुछ नेता नाम न छापने की शर्त पर यह स्वीकार कर रहे हैं कि ‘कट मनी’ राज्य भर में एक सच्चाई बन चुकी है, वहीं कुछ इसे भाजपा की साजिश बता रहे हैं। वर्धमान के वरिष्ठ टीएमसी नेता स्वपन देबनाथ की मानें तो भाजपा ही उनके ‘ईमानदार’ नेताओं के घरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करवा रही है।

स्वपन देबनाथ की राय से उलट जमीनी सच्चाई हालाँकि कुछ और ही कहानी बयाँ कर रही है। नाम न छापने की शर्त पर हुगली के एक स्थानीय अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हर एक योजना के लिए एक तय दर है। इस सिस्टम में स्थानीय नेताओं से लेकर पंचायत सदस्यों तक का नेटवर्क है। यह सिस्टम छिटपुट शुरू तो हुई थी लेफ्ट वालों की सरकार में लेकिन अब यह पूरी तरह से एक हो गई है।”