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चांदनी चौक मंदिर तोड़फोड़: मोहम्मद ज़ुबैर और अनस गिरफ़्तार, एक का पहले से है आपराधिक रिकॉर्ड

दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाक़े में मंदिर में तोड़फोड़ मचाने के मामले में पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ़्तार किया है, उनमें से एक ऐसा आरोपित भी है, जिस पर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरफ़्तार आरोपितों में से मोहम्मद ज़ुबैर और मोहम्मद अनस में से एक ऐसा है, जो पहले भी चोरी-चकारी के आरोप में गिरफ़्तार हो चुका है। ख़बर के अनुसार मंदिर में अब पहले की भाँति पूजा-अर्चना शुरू हो चुकी है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को किले में तब्दील कर दिया है और सादे ड्रेस में भी निगरानी के लिए जवानों को तैनात किया गया है। गिरफ़्तार आरोपितों में एक नाबालिग भी शामिल है।

दरअसल, रविवार (जून 30, 2019) की रात समुदाय विशेष के कुछ लोग घुस आए और उन्होंने तोड़-फोड़ मचाई। उन्होंने भगवान शिव, भगवान गणेश व अन्य देवताओं की प्रतिमाओं को विखंडित कर दिया। यह घटना हौज़ काजी की है। यह घटना का वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें देखा जा सकता है कि मंदिर में प्रतिमाओं के आगे लगे ग्लास तक को नहीं बख़्शा गया और उसे भी तोड़ डाला गया। इसके बाद समुदाय के लोगों ने भड़काऊ एवं उत्तेजक नारे लगाए। उन्होंने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए सड़कों पर भी आतंक पैदा किया।

कल मंगलवार को हालात को सामान्य करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने अमन कमिटी की बैठक बुलाई, जिसमें समाज के कई प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए। इस बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समुदाय विशेष के प्रतिनिधि ने मंदिर को दोबारा बनवाए जाने की बात कही। हिन्दू समाज के प्रतिनिधि ने पुलिस को सकारात्मक रोल निभाने के लिए धन्यवाद अदा किया। भाजपा नेता विजय गोयल और आम आदमी पार्टी नेता इमरान हुसैन ने भी बैठक में हिस्सा लिया। पुलिस ने बाकियों की भी गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है।

हालाँकि, दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित हौजकाजी के एक मंदिर में पत्थर बरसाने और तोड़ फोड़ करने वाले समुदाय विशेष के लोगों को आम आदमी पार्टी के विधायक इमरान हुसैन का समर्थन होने की बात सामने आई है। एक चश्मदीद ने बताया कि नशे में धुत कुछ दूसरे समुदाय के युवक उनके घर के नीचे इकट्ठा हो गए थे और जब आस-पास के लोगों ने उन्हें मंदिर के अंदर जाने से रोकने की कोशिश की तो उन्होंने करीब 400 लोगों को हमला करने के लिए बुला लिया। चश्मदीद का कहना है कि इस दौरान आप विधायक इमरान हुसैन भी वहाँ आए और उन्होंने इस्लामी भीड़ का समर्थन किया।

केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल वोट बैंक की राजनीति के कारण इस घटना को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।

₹200 करोड़ से सीधा ₹6 करोड़: कमलनाथ ने शिवराज की ‘तीर्थ दर्शन योजना’ पर लगाई ब्रेक

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना पर कैंची चलाई है। दरअसल, शिवराज सिंह चौहान ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सरकारी ख़र्चे पर बुज़ुर्गों को तीर्थ यात्रा कराने की योजना तैयार की थी। इस योजना के अमल में आने के बाद से अभी तक क़रीब सवा सात लाख लोग इसका लाभ उठा चुके हैं। अब कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने इस योजना के पर कतर डाले हैं। मध्य प्रदेश सरकार की ‘तीर्थ दर्शन योजना’ अब एक तरह से अधर में लटक गई है। इसी योजना ने वरिष्ठ नागरिकों के बीच शिवराज सिंह चौहान की छवि मजबूत की थी।

इसके लिए 2018 और 2019 के बजट की तुलना करते हैं। 2018 में भाजपा सरकार ने इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। जबकि 2019 के बजट में इस योजना के बजट को 30 गुना कम कर दिया गया। इस वर्ष इस योजना के लिए सिर्फ़ 6 करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए हैं। कमलनाथ सरकार का यह निर्णय आश्चर्यजनक है क्योंकि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एक बड़ी और महत्वकांक्षी योजना के लिए इतना कम बजट आवंटित करना नई राज्य सरकार की ‘बदले की भावना’ को दिखाती है।

हाँ, जब उत्तर प्रदेश में कुम्भ का आयोजन हुआ था, तब कमलनाथ सरकार ने मध्य प्रदेश के 4 अलग-अलग शहरों से तीर्थ-दर्शन ट्रेनों की व्यवस्था की थी, लेकिन उसके बाद से ऐसी कोई ट्रेन नहीं चलाई गई। आर्थिक तंगी और किसानों की क़र्ज़माफ़ी का हवाला देते हुए सरकार ने तीर्थ दर्शन से जुड़ी योजना के बजट में भारी कटौती की है। शिवराज सरकार की यह योजना 60 वर्ष से ऊपर की आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए थी। 2012 में शुरू की गई इस योजना का लाभ उन लोगों को मिला, जो करदाता नहीं थे। यह योजना इतनी लोकप्रिय हुई कि पड़ोस की छत्तीसगढ़ सरकार ने भी ‘तीरथ बरत’ योजना की शुरुआत की।

अब केंद्र सरकार ने भी ‘प्रवासी भारतीय तीर्थदर्शन योजना’ की शुरुआत की है, जिसकी रूपरेखा शिवराज सरकार की योजना से मिलती-जुलती है। शिवराज सरकार ने जगन्नाथपुरी, द्वारका, रामेश्वरम और बद्रीनाथ जैसे तीर्थ स्थानों की यात्रा सरकारी ख़र्च पर कराने की व्यवस्था की थी, जो अब मध्य प्रदेश में शायद संभव नहीं हो पाएगा। पिछले 8 वर्षों में इस योजना पर 700 करोड़ से भी अधिक की राशि ख़र्च की गई थी। इस योजना को धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग द्वारा चलाया जाता था। तीर्थ यात्रा के लिए सरकार स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था करती थी।

अब तक हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिर्डी, गया, काशी, अमृतसर, तिरुपति, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला वेलगणि चर्च (नागपट्टम), गंगासागर कामाख्या देवी, गिरनारजी, पटना साहिब, उज्जैन, चित्रकूट, महेश्वरुर और अजमेर शरीफ के लिए लोगों को तीर्थ यात्रा का लाभ सरकार दिला चुकी है। यात्रियों को ट्रेन में भोजन, बीमा और उपचार सहित सभी बेसिक सुविधाएँ भी सरकार ही मुहैया कराती थी। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस सम्बन्ध में चुप्पी साध रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स का यह भी मानना है कि सरकार खानापूर्ति के लिए जुलाई में एक ट्रेन चला सकती है।

J&K: छात्र को बुरी तरह पीटा, फिर शिक्षक ने कुल्हाड़ी उठा कर दी काट डालने की धमकी, Video वायरल

जम्मू कश्मीर के हंदवारा में एक शिक्षक द्वारा छात्र को कुल्हाड़ी से काट डालने की धमकी दी गई। इस मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई कर दोषियों को सज़ा दिलाने की बात कही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि शिक्षक हाथ में कुल्हाड़ी लिए हुए है और छात्र को काट डालने की धमकी दे रहा है। गुरु-शिष्य के रिश्ते को बदनाम करने वाली इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने आक्रोश जताया। शिक्षक ने धमकी देने से पहले छात्र की बुरी तरह पिटाई भी की।

ये घटना उत्तरी कश्मीर के हंदवारा स्थित वागत गाँव की है। शिक्षक ने बच्चे की इतनी पिटाई की कि वह ज़मीन पर लेट गया। इसके बाद उसने कुल्हाड़ी हाथ में लेकर उसे मारने की धमकी दी और डराया भी। अभी तक इसके पीछे के कारणों का पता नहीं चला है। इस घटना के बारे में अधिक जानकारी देते हुए एक कश्मीर पुलिस अधिकारी ने कहा:

“हमने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है और जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। आज एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें एक बच्चे को एक पुरुष जमीन पर लिटाए हुआ दिख रहा है, और दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी पकड़े हुए है, उसे धमकी दे रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना फ्यूचर एजुकेशन इंस्टिट्यूट वगत मगाम में हुई है।”

घटना का वायरल वीडियो, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग आक्रोशित हो गए

इस घटना का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है और मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई है। आगे की क़ानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस तैयारी में जुटी है। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की है। लोगों का कहना है कि शिक्षकों द्वारा इस तरह का व्यवहार करने से बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

हिन्दू मंगरू की लिंचिंग पत्रकारिता के समुदाय विशेष के लिए उतनी ‘सेक्सी’ नहीं है

दो मॉब लिंचिंग, दो हत्याएँ, दोनों में हत्यारों के झुण्ड पर आरोप- लेकिन दोनों पर मीडिया गिरोह की अलग-अलग कवरेज। तबरेज़ अंसारी की मौत पर रुदाली करने वाले सभी मीडिया गिरोहों में मंगरू की वैसी ही मौत पर सन्नाटा है। क्योंकि मंगरू की मौत में ‘एंगल’ नहीं है। वह मजहब विशेष का नहीं था, जनजातीय था- और न ही उसे मारने वाले तथाकथित ‘अपर कास्ट’ वाले। बल्कि मारने वाले तो पत्रकारिता के समुदाय विशेष के प्रिय समुदाय विशेष के थे- नाम था साजिद, आज़म और रमज़ान।

शायद इसीलिए ‘tabrez’ या ‘tabrez ansari’ के नाम से सर्च करने पर खबरों का अंबार लग जा रहा है, और वहीं ‘mangru’, ‘mangru lynching’, ‘magru’ आदि कुछ भी लिख कर देख लीजिए- खबर या ‘न्यूज़’ ढूँढ़ने को आप तरस जाएँगे। तबरेज़ पर चार-चार एंगल से लिखवाने वालों ने या तो मंगरू की मौत को कवर करना ही ज़रूरी नहीं समझा, और अगर लिखा भी गूगल की ‘सर्च अल्गोरिथम’ और ‘न्यूज़ अल्गोरिदम’ को ‘गेम’ कर अपने ही कोरम पूरा करने वाले लेखों को ‘दफ़ना’ दिया।

एक-एक इमेज को देखिए। ध्यान से। क्लिक करके देखिए। केवल एक ऑपइंडिया के अलावा किसी भी और की मंगरू खान की कवरेज नहीं मिलेगी आपको। टेलीग्राफ़ का एक लेख भूले-भटके आया भी तो उसकी भाषा देखिए। ‘duo’, ‘two youths’। और अब इसे अख़लाक़ से लेकर तबरेज़ तक हर उस मॉब लिंचिंग से तुलना कीजिए, जिसमें हिन्दुओं के हाथों दूसरे मजहब की, या कथित अपर कास्ट हिन्दुओं के हाथों दलित हिन्दुओं की पिटाई हुई है।

चूँकि वह ‘नैरेटिव’ में फिट हो सकने वाली घटना नहीं थी, यह ‘डरा हुआ शांतिप्रिय’ के फर्जीवाड़े का समर्थन नहीं करती, इसलिए पत्रकारिता का समुदाय विशेष मंगरू की हत्या पर चुप है।

यह चुप्पी तब भी थी जब…

यह चुप्पी केवल आज की नहीं है, केवल मंगरू के मामले में नहीं है। यह हर उस मामले में ओढ़ा गया सन्नाटा है, जब ‘डरा हुआ शांतिप्रिय’ कोई अपराध करता है, और भुक्तभोगी कोई हिन्दू होता है।

कालीचक याद है, जब करीब तीन लाख कट्टरपंथियों ने ऐसी आगजनी की कि दंगे जैसे हालात हो गए थे? तब किसी मीडिया गिरोह के न्यूज़रूम ने ‘क्या समुदाय विशेष वाले कट्टर हो रहे हैं?’ का सवाल नहीं पूछा। उसी साल (2016) में बंगाल के कुछ समुदाय विशेष वालों ने ईद से एक दिन पहले ही ईद का जुलूस निकालना शुरू कर दिया, ताकि हिन्दुओं को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाने से रोका जा सके। आपत्ति जताने पर हिन्दुओं के घर जला डाले गए और ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगे। वायर ने कितने लेख छापे इस पर?

बाड़मेर के कट्टरपंथियों ने एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति को, एक दलित को केवल इसलिए मौत के घाट उतार दिया कि उसने हिन्दू होकर एक दूसरे मजहब की लड़की से प्रेम करने की जुर्रत की थी। कहाँ था तब पत्रकारिता का समुदाय विशेष? तमिलनाडु के कुम्भकोणम में रामालिंगम की हत्या कर दी गई। इस बर्बरतापूर्ण हत्या में रामलिंगम के रात में घर लौटते वक़्त कुछ अज्ञात लोगों ने उसके हाथ काट दिए जिससे अत्यधिक रक्स्राव से रामालिंगम की मृत्यु हो गई। एक गर्भवती महिला को केवल इसलिए उसके परिवार ने (जिसमें उसकी माँ भी थी) ज़िंदा जला दिया क्योंकि वह हिन्दू लड़के से शादी कर उसके बच्चे की मॉं बनने वाली थी।

ऐसी घटनाएँ दर्जनों हैं– मैं गिना-गिना कर थक जाऊँगा, आप लिंक खोलकर पढ़ते-पढ़ते। इन सब घटनाओं में लेकिन जो चीज़ समान है, वह है मीडिया का सन्नाटा। कहीं मजहब विशेष में फैले कट्टरपंथ पर चर्चा करना तो दूर, कभी इन घटनाओं के अस्तित्व पर ही मौन साध लिया जाता है, कभी इनमें ‘कम्यूनल एंगल’ का होना नकारा जाता है, कभी यह ज्ञान दिया जाता है कि कुछ लोगों की करनी से करोड़ों लोगों को नहीं तौलना चाहिए। लेकिन जहाँ कहीं मामला ‘पलटने’ की ‘महक’ भर आ जाए, भूखे लकड़बग्घे की तरह झपटते हुए पत्रकारिता का समुदाय विशेष अपना ही ज्ञान बिसरा जाता है।

‘आआआह… हिन्दू फ़ासीवाद’

चाहे मेरठ के एक कॉलेज की मजहब विशेष की छात्रा मज़हबी उत्पीड़न का संदेहास्पद दावा करे, घटना रोड रेज में हुई मारपीट की हो (जो दिल्ली-एनसीआर का एक कुरूप और निंदनीय पर बिलकुल ‘सेक्युलर’ सच है), या एक ‘शांतिप्रिय’ ने ही दूसरे ‘शांतिप्रिय’ को भूमि-विवाद में मार दिया हो- मीडिया गिरोह ने हर उस घटना में हिन्दुओं को बदनाम करने का भरसक प्रयास किया है, जहाँ समुदाय विशेष ‘विक्टिम’ हो। न उस समय न्याय का सिद्धांत ज़रूरी रहा, न ये याद रखना ज़रूरी समझा कि मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए। यहाँ तक कि घटनाओं के फ़र्ज़ी निकलने पर भी प्रपंच बंद नहीं हुआ।

हत्या हत्या होती है, निंदनीय और दंडनीय होती है

कानून का फैसला आने के पहले तक कोई भी यकीन के साथ नहीं कह सकता कि तबरेज़ अंसारी को चोर होने के कारण मार डाला गया या उसके मजहब के कारण- जुनैद के मामले में आखिर यही हुआ था; सीट-विवाद में हुई हत्या को बेवजह साम्प्रदायिक ‘एंगल’ दे दिया गया था। और मीडिया गिरोह ने ‘अलिखित’ नियम स्थापित कर दिया था कि समुदाय विशेष की तो जान इतनी कीमती है कि उसमें ‘रिलिजियस एंगल’ ज़मीन खोद कर लाया जाए, अगर मामले को खोदने भर से न मिले; लेकिन एक हिन्दू की जान की इतनी कीमत नहीं है कि मज़हबी कारण से भी उसका क़त्ल होने पर मज़हबी कारण को उजागर किया जाए।

हर इंसान की जान इस देश के संविधान में बराबर आँकी गई है। बेहतर होगा कि मीडिया गिरोह दोगलापन बंद कर उस संविधान की कम-से-कम इस एक बात को खुद मानना शुरू कर दे, जिस संविधान का हवाला दे वह हर समय हर असहमति का गला ‘आप तो संविधान के ख़िलाफ़ हैं मतलब’ कह कर दबाता रहता है।

फैक्ट चेक: ‘कैसे बढ़ेगी GDP’ पर सलाह लेने PM मोदी गए थे मनमोहन सिंह के घर?

TV9 भारतवर्ष नाम का एक न्यूज़ चैनल अपने फेक और फर्जी मीडिया रिपोर्ट्स के कारण हर दिन नए अध्याय जोड़ रहा है। हाल ही में TV9 भारतवर्ष द्वारा एक वीडियो दिखाया गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की अर्थव्यवस्था पर बातचीत करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गए थे।

TV9 भारतवर्ष द्वारा ‘कॉन्ग्रेस-वादी’ पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज की एक ऐसी रिपोर्ट शेयर की गई जिसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह से मिलने उनके निवास पर गए थे। इस रिपोर्ट में इस मीटिंग की ‘एक्सक्लूसिव’ रिपोर्टिंग का भी दावा किया गया था।

यह न्यूज़ रिपोर्ट कल ही सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनल पर जारी की गई। इसमें पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज ने दावा किया है कि पीएम मोदी और मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था पर चर्चा की। हालाँकि, दुखद घटना यह है कि अब यह वीडियो डिलीट कर दिया गया है।

क्या है सच्चाई?

ट्विटर यूज़र अंकुर सिंह ने इस वीडियो की सच्चाई सामने लाते हुए बताया कि TV9 भारतवर्ष ने यह निहायत ही झूठा दावा 2014 के एक पुराने वीडियो के द्वारा किया है। इसके साथ ही अपने ट्वीट में अंकित ने यह भी लिखा है कि राहुल गाँधी की चहेती पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज 2014 के एक पुराने वीडियो क्लिप को एक्सक्लूसिव बताकर फेक न्यूज़ चलाने का काम कर रही हैं।

पीएम मोदी भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कई बार मिलते रहे हैं। मई 2015 में मनमोहन सिंह भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने 7 RCR गए थे। हालाँकि, TV9 भारतवर्ष द्वारा शेयर की गई वीडियो क्लिप मई 2014 की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण के अगले दिन मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी से मिलने उनके उनके आवास पर गए थे। यह मात्र एक शिष्टाचार भेंट थी। यह वीडियो क्लिप उसी दिन की थी, जो कि पीएम मोदी के ही यूट्यूब चैनल पर शेयर की गई थी।

सिर्फ TV9 भारतवर्ष ही नहीं, कॉन्ग्रेस के ही एक एडवोकेट और सचिव जीतेन्द्र बघेल द्वारा भी 2014 का यही वीडियो ये कहते हुए शेयर किया गया कि पीएम मोदी मनमोहन सिंह के घर उनसे यह पूछने गए थे कि “भारत की GDP कैसे बढ़ाई जाए?”

जीतेन्द्र बघेल के इस झूठे दावे की पोल @pokershash नाम के ट्विटर यूज़र ने खोली-

यह हास्यास्पद है कि अपने फेक नैरेटिव को दिशा देने के लिए हर समय लालायित रहने वाले मीडिया गिरोहों की तरह ही TV9 भारतवर्ष न्यूज़ चैनल एक 5 साल पुराने वीडियो को ताजा और एक्सक्लूसिव बताकर आज शेयर करता है। शायद यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा हो कि मनमोहन सिंह एक विशेषज्ञ हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था को अन्य किसी भी अर्थशास्त्री से ज्यादा जानते हों। लेकिन इसके लिए एक शिष्टाचार भेंट के वीडियो का सहारा लेना मीडिया की विश्वसनीयता को ही दर्शाता है।

‘द वायर’ वालो, ‘मोदी-विरोधी’ होने से गबन और क़त्ल करने का लाइसेंस नहीं मिलता

द वायर वालों को विचारों की कितनी कमी पड़ रही है, यह उनके लेखों को देखकर साफ हो रहा है। जनेऊ को हौव्वा बनाने से शुरू हुआ इनका मानसिक स्खलन इतना नीचे जा पहुँचा है कि अब ये कातिलों से लेकर गबन के आरोपियों का बचाव केवल इस आधार पर करना चाहते हैं कि फलाना मोदी के खिलाफ बोला था, ‘एंटी-RSS’ था, तो अगर इसे जेल भेजा गया तो सरकार के खिलाफ बोलने वालों में ‘डर का माहौल’ बन जाएगा।

चोरकटई से इंकार नहीं कर पा रहे अपने साथियों की 

सबसे महत्वपूर्ण और गौरतलब बात यह है कि पत्रकारिता का समुदाय विशेष अपने संगी-साथियों के कुकर्मों से ना नहीं कर पा रहा है। इसे उस समय से तो ‘इम्प्रूवमेंट’ मान ही सकते हैं जब मोदी के दानवीकरण की ‘चीफ आर्किटेक्ट’ तीस्ता सीतलवाड़ को निर्दोष साबित करने के लिए मीडिया गिरोह पन्ने-पर-पन्ना काला करने में लगे रहते थे। लेकिन दोगलई और मोदी से नफरत इनकी नसों में शायद खून की जगह बह रहे हैं। वो भी इतने ‘ब्लड प्रेशर’ से कि वायर के संस्थापक-सम्पादक सिद्धार्थ भाटिया लिखते हैं कि हालाँकि सीबीआई (‘मानवाधिकार’ गिरोह के वकील आनंद ग्रोवर के खिलाफ विदेश से नियम तोड़कर पैसा लेने का केस दर्ज किया), सेबी (प्रणय रॉय को जालसाजी के आरोप में दो साल आर्थिक बाजार से तड़ीपार किया), प्रवर्तन निदेशालय (राघव बहल के खिलाफ आर्थिक अनियमितता का केस दर्ज किया) और कोर्ट (संजीव भट्ट को हत्या के मामले में उम्र-भर के लिए जेल भेजा) मोदी सरकार के अंतर्गत काम नहीं करते, “लेकिन” यह भी सच है कि बहल, भट्ट और प्रणय रॉय (और उनकी पत्नी राधिका रॉय) मोदी के खिलाफ काम करते थे।

यहीं इनकी असली नीयत, असली चेहरा इसी “लेकिन” में दिख जाता है। बिना कुछ कहे न केवल आरोपित-चूँकि-मोदी-विरोधी-हैं-इसलिए-गबन-से-लेकर-क़त्ल-तक-माफ़-है का संदेश आपके दिमाग में बैठा देते हैं, बल्कि उसके बाद नीचे खुद ही ऊपर जिन प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई वगैरह को ‘क्लीन चिट’ देते हैं, बमुश्किल दस वाक्यों के भीतर-भीतर उन पर भी फिर से हमला शुरू कर देते हैं। हमें यह बताने के बहाने कि सेबी और ईडी ने ‘आश्चर्यजनक तेज़ी से’ रॉय दम्पति और राघव बहल पर कार्रवाई की, अप्रत्यक्ष रूप से पाठक के कान में ‘ये मोदी के इशारे पर हो रहा है’ का मंत्र फूँका जाता है।

राघव बहल का मामला दबाने की कोशिश

वायर के ‘पप्पा’ सिद्धार्थ भाटिया ‘समुदाय विशेष’ के अपने सहोदर राघव बहल के मामले को हल्का करने की भरसक कोशिश करते हैं। बताते हैं कि “महज़ दो करोड़ के लिए ईडी पूरे दल-बल के साथ राघव बहल के पीछे लग गया है, जबकि यह एक ‘रूटीन’ टैक्स इंक्वायरी हो सकती थी।”

‘महज़’ दो करोड़? महज़? दो करोड़ महज़ होते हैं? वो भी उस विचारधारा (शैम्पेन सोशलिज़म) के अलमबरदारों के लिए, जो दिन-रात इस देश के अमीरों के पैसे से डाह पालते नहीं थकते? जिन्होंने हर समय दूसरों की समृद्धि के लिए उन्हें शर्मसार करने में, ‘गैर-बराबरी’ के नाम पर सबके हाथ में कटोरा दे देने की वकालत की हो, वह पत्रकारिता का समुदाय विशेष अपनी काली कमाई के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर उस धनराशि को ‘महज़’ बता रहा है? और चाहता है कि अफसर और जाँच करने वाला विभाग भी उनके हिसाब से तय हों?

यही काम सिद्धार्थ भाटिया सेबी और रॉय दम्पति के मामले में करते हैं। पता है कि सेबी के फैसले में कोई नुक्ता-चीनी हो नहीं सकती, क्योंकि सेबी ने तसल्लीबख्श सबूत अपने फैसले के समर्थन में रख ही दिए हैं। तो अब सेबी के उनका मामला हाथ में लेने पर ही सवाल उठाया जा रहा है। सवाल पूछा जा रहा है कि क्या सेबी के पास और मामले नहीं थे लंबित, जो प्रणय रॉय के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाया गया? केवल इसलिए कि वह एंटी-मोदी हैं? क्या एंटी-मोदी लोगों के मामले अदालतें, पुलिस, जाँच एजेंसियाँ तभी उठाएँ जब बाकी सारे मामले खतम हो जाएँ? ऐसा क्यों? क्या मोदी के खिलाफ हो जाना कोई लाइसेंस है अपराध करने का?

हार्ड कौर पर देशद्रोह योगी नहीं, 26/11 के कारण है

आगे भाटिया बताते हैं कि गालीबाज गायिका हार्ड कौर पर योगी को गाली देने के कारण देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह सीधे-सीधे झूठ है। हार्ड कौर को देशद्रोह मामले में नामजद इसलिए किया गया कि उन्होंने कथित तौर आरएसएस को हेमंत करकरे का हत्यारा कहा- जिसका मतलब यह था कि उन्होंने देश के दुश्मन हाफिज़ सईद को, फाँसी पर लटकाए गए जिहादी कसाब को 26/11 का दोषी होने से मुक्त करने की कोशिश की। अगर यह देशद्रोह नहीं है कि इस देश के ऊपर हुए इतिहास के भीषणतम जिहाद के घोषित और साबित मुजरिमों को कोई नागरिक बेगुनाह साबित करने का दुष्कृत्य करे, तो और क्या हो सकता है देशद्रोह?

हिरेन गोहैन पर वही मामला है, जो कन्हैया कुमार पर है

आगे भाटिया हिरेन गोहैन के मामले का ज़िक्र करते हैं कि उन पर भी देशद्रोह का मामला चल रहा है। इसे वह मोदी के देशद्रोह कानून के दुरुपयोग का सबूत दिखाते हैं। अगर इस मामले में वायर के ही लिंक पर क्लिक करिए तो साफ़ पता चलेगा कि उन पर मामला इसीलिए चल रहा है कि उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक में असम को भारत से अलग करने के नारे लगे थे। ठीक यही मामला कन्हैया कुमार पर चल रहा है। ऐसे में सरकार अगर गोहैन पर मामला न चलाती तो क्या यह कन्हैया कुमार के साथ नाइंसाफी न होती?

सलाह

पत्रकारिता के समुदाय विशेष को सुधरना तो इन्हें तब तक नहीं है, जब तक भगवन खुद उन्हें सद्बुद्धि देने अवतरित न हो जाएँ। केवल एक सलाह दी जा सकती है- मोदी से नफरत करिए, खुल के करिए (क्योंकि अब जब वही खून की जगह आपकी रगों में बह रहा है, तो क्या किया जा सकता है?), पेट भर के करिए। लेकिन नफरत में इतने अंधे मत हो जाइए कि आज गबन वालों के पक्ष में आप खड़े हैं, कल संजीव भट्ट पर आरोपित हत्या का कोई औचित्य निकाल लाइए, और परसों 26/11 या पठानकोट या पुलवामा हमले के पक्ष में खड़े हो जाइएगा। नफरत को दिमाग पर हावी होने से रोकिए। उसे दिल के अजीर्ण तक सीमित करिए।

बंगाल के मदरसों में आतंकी गतिविधियाँ चला रहे हैं बांग्लादेश के संगठन: केंद्रीय गृह मंत्रालय

बांग्लादेश का आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) पश्चिम बंगाल में अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी खुफिया जानकारी के आधार पर कहा है कि जेएमबी पश्चिम बंगाल के बर्दवान और मुर्शिदाबाद जिलों में अपनी जिहादी गतिविधियों और आतंकी भर्तियों का काम कर रहा है। गृहराज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस संबंध में इनपुट्स पर कार्रवाई करने की सलाह के साथ पश्चिम बंगाल सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ जानकारी नियमित रूप से साझा की जा रही है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, उनके पास खुफिया रिपोर्ट है कि बर्दवान और मुर्शिदाबाद में मदरसों का उपयोग करके जमात मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) आतंकियों की भर्ती कर रहा है। केंद्र ने इसी साल मई में ‘जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश’, ‘जमात-उल-मुजाहिदीन भारत’ और ‘जमात-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ तथा इसके सभी स्वरूपों को आतंकवादी संगठन की लिस्ट में शामिल किया है। ये मदरसों के माध्यम से दहशतगर्दी फैलाने का काम करती है।

मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को लोकसभा में भाजपा के सांसद खगेन मुर्मु तथा डॉ सुकांत मजूमदार के सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के पहले, लोकसभा चुनाव के दौरान तथा उसके बाद भी हिंसा की कई घटनाओं की सूचना मिली। जिसमें कई लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए थे।

वहीं, कोलकाता एसटीएफ ने सोमवार (जुलाई 1, 2019) को अब्दुल जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) और जेएमबी धूलियन मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य अब्दुल रहीम को गिरफ्तार किया है। अब्दुल रहीम मॉड्यूल 2018 बिहार के बोधगया में हुए विस्फोट के लिए जिम्मेदार है। ये पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला है।

कब्र खोदते ही दफनाए जाने से ठीक पहले खड़ा हो गया ‘मुर्दा’ मुहम्मद फुरकान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक युवक को किसी निजी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था, उसकी कब्र खोद दी गई थी, लेकिन दफनाए जाने से ठीक पहले वो जिन्दा हो गया। मुहम्मद फुरकान नाम के इस युवक की कब्र खोद ली गई थी और जब उसे दफनाया जाने वाला था, तभी परिवार के कुछ सदस्यों ने उसके शरीर में हरकत देखी। इसके बाद रोना-धोना बंद हो गया और हैरान परिजन मुहम्मद फुरकान को अस्पताल ले गए जहाँ उसे वेंटीलेटर पर रखा गया है। यदि थोड़ी देर तक और उसके शरीर में हरकत न दिखाई देती तो उसे जीवित ही दफन कर दिया जाता।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ में मृत घोषित किया जा चुका एक व्यक्ति दफनाए जाने से ठीक पहले जिंदा हो उठा। 20 वर्षीय फुरकान को एक दुर्घटना के बाद 21 जून को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार (जुलाई 01, 2019) को उसे मृत घोषित कर दिया गया और उसके शव को एंबुलेंस से उसके घर पहुँचा दिया गया।

फुरकान के बड़े भाई मोहम्मद इरफान ने कहा, “फुरकान की मौत से बेहद दुखी हम लोग उसे दफनाने की तैयारी कर रहे थे, तभी किसी ने उसके शरीर में हरकत देखी। हम फौरन फुरकान को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने कहा कि वह जिंदा है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया।”

इरफान ने कहा, “इससे पहले हम निजी अस्पताल को 07 लाख रुपए का भुगतान कर चुके थे और जब हमने उन्हें बताया कि अब हमारे पास पैसे नहीं हैं तो उन्होंने सोमवार को फुरकान को मृत घोषित कर दिया।” लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, “हमने मामले का संज्ञान लिया है और इसकी पूरी जाँच की जाएगी।”

फुरकान का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कहा, “मरीज की हालत गंभीर है लेकिन वह निश्चित रूप से ब्रेन डेड नहीं है। उसकी नाड़ी, ब्लड प्रेशर और दिमाग काम कर रहा है। उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।”

1 महीने की सैलरी देकर नौकरी से निकाला, कपिल सिब्बल वाली तिरंगा TV के ‘कर्मचारियों’ ने लगाई गुहार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर खुद को तिरंगा टीवी का कर्मचारी बताने वाले कुछ लोगों ने दावा किया है कि उन्हें चैनल ने बिना किसी स्पष्ट कारण बताए बर्खास्त कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर तिरंगा टीवी के ये पूर्व कर्मचारी अपनी बात कपिल सिब्बल तक पहुँचाने के लिए एक ही संदेश को अपने-अपने ट्विटर अकॉउंट से शेयर कर रहे हैं।

इस संदेश में कर्मचारियों ने कपिल सिब्बल से गुहार लगाते हुए लिखा है, “तिरंगा टीवी के हम जैसे कर्मचारियों को बिना किसी स्पष्ट कारण के सिर्फ़ एक महीने की सैलरी देकर बर्खास्त कर दिया गया है। हम आपसे मिलना चाहते हैं, क्योकि प्रबंधन में से कोई भी हमें कुछ नहीं बता रहा है।”

कपिल सिब्बल के लिए लिखे गए इस संदेश में कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी, प्रकाश जावडेकर, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, शेखर गुप्ता और भाजपा को भी टैग किया गया है।

प्रकाश नाम के युवक द्वारा शेयर किए गए इस संदेश को 3 घंटों में 88 लाइक के साथ 105 बार रिट्वीट किया जा चुका है। जबकि सुशील इम्मैनुअल कोटियान नामक पत्रकार के ट्विटर अकाउंट से इस संदेश को 2 घंटे के भीतर 343 लाइक मिले हैं और 301 बार इसे रिट्वीट किया जा चुका है।

कोटियान के ट्वीट पर कुछ लोगों ने उनसे सवाल भी किया है कि आखिर उन्होंने तिरंगा टीवी ज्वॉइन ही क्यों किया था, जिस पर ‘fired employee tiranga tv’ नाम के ट्विटर अकॉउंट ने जवाब देते हुए कहा है कि कपिल सिब्बल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि चैनल दो साल के लिए चलेगा, तो वह यहाँ आ गए। लेकिन अब करोड़ों कमाने के बावजूद चैलन उन्हें नियमानुसार तीन महीने की सैलरी देने से मना कर रहा है।

कपिल सिब्बल दरअसल तिरंगा TV में कथित तौर पर मालिकाना हक रखते हैं। साथ में वो वकील भी हैं। और कॉन्ग्रेस के नेता तो खैर हैं ही। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को जब कोई उम्मीद नहीं दिखी तो उन्होंने ‘मालिक’ सिब्बल को ही टैग करके अपनी समस्या से अवगत कराया। देखना दिलचस्प होगा कि सिब्बल अपने इस कर्मचारी को मालिक जैसा जवाब देते हैं या वकील बन इनकी समस्या को सुलझाते हैं!

मंदिर के नाम पर इस छोटे से वाकये की अफवाह नहीं फैलानी चाहिए: फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम

दिल्ली के चाँदनी चौक पर हिंसक मजहबी भीड़ ने एक दुर्गा मंदिर पर हमला किया और तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद लोग अधिकारियों से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस बीच, दिल्ली के फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम का एक वीडियो सामने आया है। 4 मिनट के इस वीडियो में, इमाम ने मंदिर में की गई तोड़फोड़ की घटना का उल्लेख करते हुए इसे ‘छोटा सा वाकया’ (छोटी सी घटना) बताया है। उनका कहना है कि इस छोटे से वाकये पर सियासत नहीं करनी चाहिए। इमाम ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि कुछ लोग मंदिर के नाम पर अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुफ्ती अपने इस बयान में कह रहे हैं कि मंदिर किसने तोड़ा, इसमें कितना नुकसान हुआ, इसके बारे में तो विस्तृत जाँच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। साथ ही, शाही इमाम ने यह भी कहा कि वो अपने मजहब के स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए के सदस्यों से नुकसान की भरपाई करने की अपील करते हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि बेहतर तो ये होगा कि आरडब्ल्यूए के सदस्य और स्थानीय प्रभावशाली लोग संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करके मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करें।

इमाम ने पूर्व भाजपा प्रमुख लालकृष्ण आडवाणी द्वारा रथ यात्रा का भी जिक्र किया। इमाम ने दावा किया कि जब आडवाणी की रथ यात्रा फतेहपुर मस्जिद के पास से गुजर रही थी, तब कुछ लोगों द्वारा मस्जिद पर पथराव किया गया था और नायब इमाम पर त्रिशूल से हमला किया गया था। इमाम का कहना है कि इस तरह के हमलों के बावजूद, उनके समुदाय ने शांति बनाए रखी थी और कभी प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि समुदाय विशेष ने शांतिपूर्ण बातचीत करके मुद्दों को हल किया था।