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अवॉर्ड वापसी गैंग है कि मानता नहीं: जनादेश पर उठाए सवाल, चुनाव आयोग को बताया पक्षपाती

अवॉर्ड वापसी गैंग जिसमें ‘प्रबुद्ध नागरिक’, शिक्षाविद् और सेना तथा प्रशासनिक सेवाओं से रिटायर हुए नौकरशाह शामिल हैं वापस लौट आया है। अबकी बार उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग पर पक्षपाती होने का आरोप मढ़ा है। मुख्य चुनाव आयोग को लिखे इस पत्र पर गैंग के 147 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। इसमें 2019 के जनादेश को ‘बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा गया है कि कई मसले अभी भी अस्पष्ट हैं।’

पत्र में उन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया गया है जिनमें चुनाव प्रक्रियाओं में ‘गड़बड़ी’ का दावा किया गया था। कहा गया है कि 2019 का लोकसभा चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के मामले में बीते तीन दशकों में सबसे निचले स्तर पर नजर आता है। ‘प्रबुद्धजनों’ ने इस बात पर जोर दिया है कि जब लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा था तो चुनाव आयोग मूकदर्शक बना हुआ था और यह अब भी जारी है।

https://drive.google.com/file/d/1y4yKGwoxi_BndxAsQzV5CF3KJcbWbkQK/view

पत्र में चुनाव आयोग पर ‘एक विशेष दल’ के प्रति वफादार होने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि नरेंद्र मोदी और भाजपा को फायदा पहुँचाने के लिए कायदों से समझौता किया गया। इसके समर्थन में उन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया गया है जिनमें दावा किया गया था कि ‘कुछ खास अल्पसंख्यक समुदाय’ के मतदाताओं को अलग-थलग छोड़ दिया गया है। दिलचस्प है कि कॉन्ग्रेस ने भी मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। आयोग ने जाँच के बाद कॉन्ग्रेस के दावों को सत्यता से परे बताया था।

दिलचस्प संयोग यह भी है यह पत्र राहुल गाँधी की उसी भावना को परिलक्षित करता है जो उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा देते हुए सोशल मीडिया में शेयर किया था। इसमें उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह जताया था।

राहुल गाँधी ने कहा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस का मुकाबला एक राजनीतिक दल से नहीं था, बल्कि वह पूरी सरकारी मशीनरी से लड़ रही थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सभी सरकारी संस्थानों को विपक्षी दलों की घेरेबंदी में लगा दिया गया था। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि संवैधानिक संस्थाएं अब तटस्थ नहीं हैं।

शौहर ने दिया तीन तलाक़, ससुर ने हलाला के नाम पर की बहू से ज़बरदस्ती, न्याय की गुहार

तीन तलाक को लेकर सरकार भले ही लाख बाते कर रही हो लेकिन इस तीन तलाक के चलते मुस्लिम महिलाओं का जीवन नारकीय हो चुका है। ताजा मामला, यमुनानगर में ट्रिपल तलाक के बाद हलाला के नाम पर एक ससुर पर अपनी बहू से जबरदस्ती करने कोशिश का है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि सास की मौत के बाद ससुर की बहू पर गन्दी नियत और बढ़ गई। यहाँ तक कि एक दिन वह बहू के कमरे में भी घुस गया और उससे जबरदस्ती करने लगा। वह जबरन बहू को संबंध बनाने के लिए कहने लगा। महिला ने जब यह बात पति को बताई तो उसने तीन तलाक बोलकर उसे घर से निकाल दिया।

मामला शहर थाना जगाधरी एरिया की कॉलोनी का है। पीड़ित महिला अपनी शिकायत लेकर जब थाने पहुँची तो स्थानीय पुलिस ने महिला की सुनवाई नहीं की। बाद में उसने एसपी कुलदीप यादव से गुहार लगाई।  

दैनिक जागरण के अनुसार, एसपी को दी शिकायत में यमुनानगर निवासी पीड़िता ने कहा, “15 जनवरी 2005 को उसका निकाह जगाधरी के युवक से हुआ। अब्बू ने हैसियत से बढ़कर दहेज दिया। उसकी एक बेटी और बेटा है। निकाह के करीब दो साल बाद उसके ससुर ने उस पर गलत नीयत रखते हुए जोर-जबरदस्ती शुरू कर दी। जब इस बारे में शौहर को बताया, तो उसने उसका ही कसूर निकल दिया।”

पीड़ित महिला का आरोप है कि उसके शौहर ने कुछ समय पहले उसे तीन तलाक दे दिया था। लेकिन उसके ससुर ने बहू के मायके में जाकर इस तलाक के न होने की बात कह डाली। हालाँकि, शरीयत के हिसाब से तलाक के बाद हलाला भी होता है और ऐसे में आरोप है कि ससुर की गंदी नजर बहू पर पहले से ही थी और उसने घर में ही उसका हलाला करने की बात कह कर उसे वापस ले गए।

गौरतलब है कि, उस समय तो बहू ने ससुर के साथ किसी भी प्रकार के संबंध रखने से साफ मना कर दिया। लेकिन कुछ दिन पहले ही सुसर ने बहू के साथ जबरदस्ती कर दी और ऐसे में उसने विरोध भी किया। लेकिन ससुर ने बहू की एक नहीं सुनी और उसके साथ जोर-जबरदस्ती करने के बाद उसे मुँह बंद रखने की हिदायत दी और लालच देकर यहाँ तक कह दिया कि अगर वह चुप रहेगी तो वह उसके नाम पचास गज का प्लाट भी लिख देगा और उसका सारा खर्च भी वही उठाएगा।

फिलहाल, पीड़िता अपनी माँ के पास आ गई है और उसने एसपी यमुनानगर को लिखित में शिकायत देकर इंसाफ की गुहार लगाई है।

यह मामला पहला नहीं है और न ही आखिरी, जिस तरह से मुस्लिम महिलाओं को लगातार तीन तलाक़ और हलाला के नाम पर शोषण और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। वह बहुत ज़्यादा भयावह है। तीन तलाक़ बिल प्रक्रिया में है। जल्द ही ऐसे शख्त कानून को अमल में लाने की ज़रूरत है ताकि तमाम पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिल सके।

तीन तलाक के बाद बड़े भाइयों के साथ मिलकर शौहर ने किया गैंगरेप

उत्तरप्रदेश से तीन तलाक का एक और मामला सामने आया है। पीड़िता के मुताबिक मामूली पारिवारिक विवाद की वजह से पति ने पहले उसे तीन तलाक दे दिया और बाद में अपने बड़े भाइयों के साथ मिलकर उसके साथ रेप किया। बुलंदशहर के पुलिस अधीक्षक से मिलकर पीड़िता ने मामले की शिकायत करते हुए इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला जिले के गुलावठी कोतवाली क्षेत्र का है। पीड़िता की शादी तीन महीने पहले ही मेरठ के इंचाली के सलमान के साथ हुई थी। पीड़िता के अनुसार मामूली विवाद की वजह से सलमान ने उसे तीन तलाक दे दिया। इसके बाद सलमान ने अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर उसका रेप किया।

पुलिस अधीक्षक से ​महिला के गुहार लगाने के बाद बुलंदशहर को गुलावठी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मेरठ के एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि मामले की पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिला ने अपने पति पर तीन तलाक देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पति और जेठों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म भी किया। उन्होंने आरोप सही जाने पर कड़ी कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिलाया है।

गौरतलब है कि तीन तलाक को लेकर केंद्र सरकार काफी सख्त है। फिर भी तीन तलाक रुकने का नाम नहीं ले रहा। हाल में तीन तलाक का एक मामला यूपी के सीतापुर से सामने आया था। इस मामले में शराब पीने से मना करने पर नाराज होकर पति ने पत्नी को तीन तलाक दे दिया। इसके बाद पत्नी की बेरहमी से पिटाई की और उसे घर से निकाल दिया।

सोनिया जी, दो-चार प्रचलित शब्दों का हौआ बना कर देश की जनता को डराने की कोशिश बेकार है

कॉन्ग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्षा और कॉन्ग्रेस संसदीय पार्टी की अभी भी अध्यक्षा सोनिया गाँधी के रेलवे के ‘खतरे में होने’ के आरोपों से साफ है कि न केवल राहुल गाँधी ने यह सबक नहीं सीखा कि चौकीदार चोर नहीं है, बल्कि समूची कॉन्ग्रेस को अभी कई, कई सबक सीखने बाकी हैं। इन्हीं में से एक सबक अर्थशास्त्र की बदली हुई राजनीति का है- कि न ही अब लोगों को ‘निजीकरण’ का हौव्वा खड़ा कर के और ठगा जा सकता है, और न ही ‘निजी’ या ‘कॉर्पोरेट’ ऐसे कोई काला भूत है भी, जिससे आम जनता को नफरत होती हो।

बंद हो ‘निजीकरण’ का दानवीकरण

लोक सभा में मंगलवार को सोनिया गाँधी ने दावा किया था कि मॉडर्न कोच फैक्ट्री का ‘निजीकरण’ (जब कि प्रस्ताव केवल उसे एक सार्वजनिक उपक्रम में परिवर्तित कर कॉर्पोरटीकरण करने का था) कई कामगारों को बेरोजगार कर देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘कॉर्पोरेटीकरण निजीकरण की ही दिशा में पहला कदम है।’ यह कुछ-कुछ वैसा ही हौआ खड़ा करने वाली बात हो गई, जैसे ‘राष्ट्रवाद फासीवाद की तरफ पहला कदम है’ या ‘भगवाकरण हिन्दू पाकिस्तान की तरफ पहला कदम है’।

अंतर केवल इतना है कि देश में अगर ‘फासीवाद’ बढ़ने लगे, या हिंदुस्तान सही में पाकिस्तान का हिन्दू समकक्ष बनने लगे तो यह बेशक बुरी बात है, लेकिन ‘कॉर्पोरेटीकरण’ या ‘निजीकरण’ कोई बुरी बात नहीं, बल्कि देश की प्रगति और विकास की तरफ एक सराहनीय कदम है। जो देश अपने नाकारा और सुस्त सरकारी तंत्र को लेकर निर्विवादित रूप से बदनाम हो, जहाँ फ़ाइलें इतना धीमें चलें कि नेहरू द्वारा उद्घाटित सरदार सरोवर बाँध का लोकार्पण मोदी के हाथों हो, उस देश में सरकारी काम में तेजी के लिए ‘कॉर्पोरेटीकरण’ या ‘निजीकरण’ को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए या उसका दानवीकरण होना चाहिए?

‘इसलिए नहीं लगाई थी संप्रग ने फैक्ट्री’ 

सोनिया गाँधी के अनुसार ‘हमने इसलिए संप्रग काल में यहाँ फैक्ट्री नहीं लगाई थी’। अगर ऐसा है तो सोनिया गाँधी को ज़रा संसद को यह भी समझाना चाहिए कि आखिर उन्होंने वह फैक्ट्री किस लिए लगाई थी, अगर कुशलतापूर्वक कार्य करना मकसद नहीं था?

डीएनए ने रेलवे के ही एक अनाम कर्मचारी के हवाले से सोनिया गाँधी के आरोप के जवाब में जो आँकड़े गिनाए, वह खुद ही इसका जवाब देंगे कि आखिर ‘कॉर्पोरेटीकरण’ से लेकर ‘निजीकरण’ क्यों निकम्मे सरकारी तंत्र से निजात पाने के लिए समय की माँग है। फरवरी 2007 में जिस फैक्ट्री के शिलान्यास का पत्थर संप्रग-1 के कार्यकाल में रखा गया, उस फैक्ट्री में नहीं, फैक्ट्री का ही निर्माण मई, 2010 में शुरू हुआ- जब 2-जी से लेकर सीडब्लूजी तक का घोटाला सामने आने से कॉन्ग्रेस की इज़्ज़त तार-तार हो रही थी, देश दुनिया के 2008 के आर्थिक संकट से उबार जाने के बाद भी कराह रहा था और शायद इस फैक्ट्री की शुरुआत कर ध्यान भटकाया जा सकता था। 1,000 कोचों का निर्माण करने की क्षमता के साथ बनी इस फैक्ट्री ने 2011-14 तक केवल कपूरथला से निर्मित होकर आने वाले कोचों में ‘कुछ’ काम हुआ- वह भी केवल 375 कोचों पर। 1,000 कोचों का निर्माण करने की क्षमता के साथ बनी फैक्ट्री में 375 कोचों पर रंग-रोगन या छोटा-मोटा काम। मोदी ने क्या गलत कहा था जब उन्होंने आरोप लगाया था कि यह फैक्ट्री केवल स्क्रू टाइट करने का काम करती है, उक्त अधिकारी पूछता है।

मोदी राज में फैक्ट्री के ‘अच्छे दिन’

यह अधिकारी यह भी गिनाता है कि कैसे मोदी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से इस फैक्ट्री की कायापलट की। जुलाई 2014 में रेलवे की निर्माण इकाई घोषित होने के महीने भर के भीतर इस फैक्ट्री ने पूरे कोचों का निर्माण शुरू कर दिया। 140 कोच 2014-15 में, 576 कोच 2016-17 में, 711 डिब्बे 2017-18 में, और जब बीते वित्त वर्ष 2018-19 के जब आँकड़े आएँगे, तो उम्मीद है 1,400 के करीब कोचों के निर्माण का आँकड़ा आने की। इस साल का भी लक्ष्य 2,158 कोचों के निर्माण का है। ₹667 करोड़ की खरीद इस दौरान MSME उद्योगों से की गई, और रायबरेली की स्थानीय इकाईयों खरीद 2013-14 के बमुश्किल ₹1 करोड़ से बढ़कर बीते वित्त वर्ष में ₹124 करोड़ पहुँच गई।

और जिस दौरान यह सब हो रहा था, सोनिया गाँधी की कॉन्ग्रेस यही ‘सॉफ़्ट कॉर्पोरेटीकरण- सॉफ़्ट कॉर्पोरेटीकरण’ का हौव्वा खड़ा कर रही थी। अब ज़रा सोचिए कि अगर सॉफ़्ट कॉर्पोरटीकरण से यह इकाई इतना सुधार कर ले गई तो ‘हार्डकोर कॉर्पोरेटीकरण’ के बाद इस फैक्ट्री की क्या तस्वीर होगी! क्या सोनिया गाँधी देश की जनता को, रायबरेली की जनता को अकुशल, भ्रष्ट और सुस्त सरकारी फैक्ट्री के युग में दोबारा धकेल देना चाहतीं हैं?

नौकरियाँ निजी क्षेत्र में ही हैं

यह दीवार पर लिखी इबारत है कि हिंदुस्तान की अंधाधुंध बढ़ती आबादी, और नेहरूवियन, समाजवादी अर्थशास्त्र के युग से बाहर आ जाने- दोनों ही कारणों से अब नौकरियों का भविष्य, देश की अर्थव्यवस्था का भविष्य निजी क्षेत्र में ही है। कायदे से कॉर्पोरेटीकरण उसी दिशा में आहिस्ता बढ़ाया हुआ कदम है जिसका स्वागत होना चाहिए कि सीधे निजीकरण कर प्रतिस्पर्धा के अनभ्यस्त ‘सरकारी’ नवाबों को निजी क्षेत्र के साथ टकराव में अपने हाल पर छोड़ देने की बजाय (जोकि मुक्त बाजार का असली मॉडल है) सरकार पहले यूनिट को भारतीय रेलवे के अंदर ही एक कॉर्पोरेट तरीके से चलने वाली कम्पनी बना रही है। इससे कर्मचारियों को वह सब कौशल विकसित करने का मौका मिलेगा जो किसी भी रेलवे कोच बनाने वाली आधुनिक कॉर्पोरेट कम्पनी के संचालन में आवश्यक हैं।

मोदी और कॉन्ग्रेस दोनों के लिए राह सुधारने की ज़रूरत

मोदी सरकार 2014 में ‘Government has no business of being in business’ और ‘Minimum government, maximum governance’ के वादे कर के आई थी। लेकिन बहुत हद तक उन वादों पर अमल बाकी है। बहुत सारे बीमारू या ख़राब प्रदर्शन कर रहे सार्वजनिक उपक्रमों को सुधारा ज़रूर गया है, लेकिन एयर इंडिया या बीएसएनएल जैसे न सुधर रहे पीएसयू का क्या होगा, यह साफ़ नहीं हो रहा है। बीते वित्त वर्ष में बीएसएनएल का घाटा तकरीबन 7,000 करोड़ रुपए के करीब रहने का अनुमान है। ऐसे में मोदी भले ही सार्वजनिक उपक्रम पूरी तरह बंद न भी करें, तो भी उनमें से जो नहीं चलने हैं, उनमें टैक्स धन की बर्बादी रोकने का तरीका उन्हें सोचना ही होगा।

कॉन्ग्रेस के लिए तो यही कहा जा सकता है कि उसे अपने दर्शन, राजनीति, अर्थशास्त्र सबमें आमूलचूल बदलाव की तत्काल आवश्यकता है। कुछ चीज़ें समय के साथ घूम-फिरकर वापिस वहीं आ जातीं हैं, लेकिन कुछ चीज़ें समय के साथ सीधी लकीर पर ही चलतीं हैं। जनता अब एक बार ‘कुशल, कॉर्पोरेटीकृत’ सरकार को चखने के बाद वापिस कॉन्ग्रेस के ‘माई-बाप समाजवाद’ के उस युग में नहीं जाना चाहेगी, जहाँ उसके (पूर्व??) अध्यक्ष राहुल गाँधी ₹72,000 और 22 लाख सरकारी नौकरियाँ देकर जनता को आर्थिक रूप से सरकार पर निर्भर रखना चाहते थे। कॉन्ग्रेस को ही आगे आकर जनता की इच्छा के साथ कदम-से-कदम मिलाना होगा।

बंगाल : सार्वजनिक जगहों पर नमाज के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ताओं का सड़क पर हनुमान चालीसा पाठ

सड़कों पर नमाज अता किए जाने पर पाबंदी लगाने की माँग को लेकर पश्चिम बंगाल में बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं का विरोध जारी है। मंगलवार को एक बार फिर युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अपनी माँग के समर्थन में हावड़ा की एक सड़क पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। हावड़ा के एसी मार्केट स्थित हनुमान मंदिर के करीब हुए इस पाठ के कारण सड़क पर करीब एक घंटे तक आवागमन बंद रहा। पाठ में अबकी बार महिलाओं और बच्चों ने भी शिरकत की।

युवा मोर्चा के प्रदेश इकाई के अध्यक्ष ओम प्रकाश और पार्टी की युवा नेत्री प्रियंका शर्मा की अगुआई में पाठ किया गया। सड़कों पर जुमे की नमाज पर रोक लगाने को लेकर बीते सप्ताह भी युवा मोर्चा के कार्यर्ताओं ने इसी तरह पाठ किया था।

मोर्चा के अध्यक्ष ओम प्रकाश का कहना है कि जब दूसरे मजहब वाले हर शुक्रवार को नमाज के नाम पर सड़क बंद कर सकते हैं और प्रशासन उन्हें नहीं रोकता तो हम हनुमान चालीसा का पाठ सड़क पर क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि जब तक उनकी माँग नहीं मानी जाती युवा मोर्चा के कार्यकर्ता हर मंगलवार को हावड़ा के विभिन्न मार्गों पर स्थित हनुमान मंदिर के करीब पाठ करेंगे। बीते सप्ताह हावड़ा जिले के बाली खाल इलाके में पाठ किया गया था।

ओम प्रकाश ने बताया कि सड़क पर जुमे की नमाज अता किए जाने के कारण हावड़ा का जीटी रोड बंद हो जाता है। इसके कारण होने वाली अव्यवस्था और ट्रैफिक जाम की वजह से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। खासकर, मरीजों को अस्पताल और कामकाजी लोगों को दफ्तर पहुँचने में।

उन्होंने बताया, “ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद से जुमे की नमाज के कारण जीटी रोड और अन्य मुख्य सड़कें बंद हो जाती है। इसके कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं और लोग समय से दफ्तर नहीं पहुँच पाते। जब तक इस पर पाबंदी नहीं लगती, हम सभी मुख्य मार्गों पर स्थित हनुमान मंदिर के करीब हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।”

सड़क पर नमाज से न केवल आम लोगों को परेशानी होती है, बल्कि यह प्रशासन के लिए भी बड़ा सिरदर्द है। यही कारण है कि हरियाणा में हिंदू संगठन सार्वजनिक जगहों पर नमाज अता किए जाने पर प्रतिबंध लगाने की माँग कर रहे हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी इसकी आलोचना करते हुए कह चुके हैं कि नमाज मस्जिदों में अता की जानी चाहिए न कि सार्वजनिक जगहों पर। बीते साल मद्रास हाईकोर्ट ने भी कहा था कि प्रार्थना के लिए सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

बीते साल दिसंबर में नोएडा पुलिस ने सेक्टर 58 में स्थित कंपनियों को एक एडवाइजरी नोटिस जारी करते हुए कहा था कि वे अपने कर्मचारियों को नजदीक के पार्कों में नमाज अता करने से रोकें। पुलिस ने इस बात पर जोर दिया था कि कंपनी के कर्मचारी अपने दफ्तर या मस्जिद में नमाज अता करें न कि सार्वजनिक जगहों पर।

मुझसे पूछा ‘हिन्दू हो?’ फिर उठा ले गई मंदिर तोड़ने वाली भीड़ – 17 वर्षीय केशव लौटा घर

चाँदनी चौक में मुस्लिम भीड़ द्वारा दुर्गा मंदिर तोडने, मंदिर में पेशाब करने जैसी घटनाओं के कई रहस्यमयी पहलू एक-एक कर जब सामने आए तो पता चला कि घटना के बाद से 17 साल का एक हिंदू किशोर केशव गायब हो गया था।

सुदर्शन न्यूज़ के अनुसार केशव घर पहुँच चुका है। सुदर्शन न्यूज़ से बात करते हुए केशव ने बताया कि घटना की रात वो दुर्गा मंदिर गली में खड़ा था, जहाँ 4-5 युवकों ने उसे आकर पूछा कि क्या वो हिन्दू है? अपनी पहचान हिन्दू बताने के बाद उन लड़कों ने केशव को थप्पड़ मारे और उसके साथ बदतमीजी की।

हालाँकि, ये देखकर एक मुल्ला जी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन लड़कों ने उन्हें भी वहाँ से चले जाने को कहा। केशव रात 10 बजे के लगभग गली में खड़ा था जब उसको वहाँ से खींचकर ले जा रहे थे। इसके बाद केशव वहाँ से अपनी पहचान छुपाने के लिए चेहरे पर कपड़ा लपेटकर भाग निकला।

चाँदनी चौक में दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ करने वाली रात ही केशव अपने घर वापस लौटकर नहीं आया था जिससे उसकी माँ चिंतित थी। मंदिर से गायब केशव की माँ ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी।

एफआईआर के मुताबिक, दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ और गली में रहने वाले हिंदुओं की पिटाई करने के बाद मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ मोना के घर में घुस गई और उसके बेटे को पीटने लगी। जब मुस्लिमों की भीड़ घर में घुसी और उसके बेटे को अगवा किया तब मोना आराम कर रही थी। केशव सक्सेना नामक इस युवा की बाद में कोई खबर नहीं लगी। इस नाबालिग के माता-पिता मोना और देवेंद्र गुस्से और सदमे में हैं।

कल ही केशव की माँ ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “मैंने पुलिस से बात करने की कोशिश की और उन्हें भरोसा दिलाया की उनकी बात सामने रखूँगी।” उन्होंने कहा, “हमारी बात कोई नहीं बता रहा। मेरा 17 साल का बेटा घटना वाले दिन से गायब है। मुस्लिमों की भीड़ उसे अगवा कर ले गई।” जब ऑपइंडिया एडिटर घटनास्थल पर पहुँचे तो इस घटना के तीन दिन बीत चुके थे और अभी तक भी केशव का कोई सुराग नहीं मिला था। जिससे एक बार सर सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की भी आशंका थी।

राहुल गाँधी ने दिया इस्तीफ़ा, मोदी जी ने कहा- नहीं कर सकूँगा कभी मन से माफ़

पूरा देश को इस्तीफे का इन्तजार था धोनी का, लेकिन इस्तीफ़ा आया है कॉन्ग्रेस के राजपरिवार से। एक बार फिर राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और साबित कर दिया है कि वो वाकई में जिम्मेदारियों से और पार्टी अध्यक्ष पद की एक्टिंग करते हुए दुखी हो चुके हैं। जिस तरह से साबू को जब गुस्सा आता है, तब किसी ग्रह पर ज्वालामुखी फूटता है, ठीक उसी तरह से जब राहुल गाँधी को जब इस्तीफ़ा आता है, तब किसी ना किसी ग्रह पर ज्वालामुखी फूटता है।

राहुल गाँधी का यह इस्तीफ़ा तब सामान्य घटना होती अगर इस से सिर्फ राहुल गाँधी अकेले प्रभावित हो रहे होते। जबकि उनके एक इस्तीफे पर कई ऐसे लोगों का भविष्य टिका है, जो राहुल गाँधी के दम पर विश्वविजय के अभियान का सपना देख रहे थे।

प्रसिद्ध इतिहासकार (कम कहानीकार ज़्यादा) नामचन्द्र गुहा ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी अगले चुनाव से पहले-पहले ब्रेग्जिट से बागी राष्ट्रों के शीर्ष नेतृत्व से भी लगातार सम्पर्क बनाकर चल रहे हैं और सम्भावनाएँ हैं कि ‘पतंजलि यूरोपियन संघ’ की स्थापना कर के कम से कम 4 महाद्वीपों को इसकी सदस्यता की शपथ दिलवाकर वहाँ भी अपनी सरकार बनाने का दावा करने वाले हैं। लेकिन यह सब तभी संभव हो पाता अगर कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में राहुल गाँधी एक अमर ज्योति की तरह डटकर खड़े रहते और कॉन्ग्रेस की नाव डुबोने में भाजपा की कंधे से कन्धा मिलाकर मदद करते।

इस बार जिस दृढ़निश्चय के साथ राहुल गाँधी अपने इस्तीफे के फैसले पर अड़े हुए हैं, उससे भाजपा और तमाम गाँधी परिवारविरोधी शक्तियों में निराशा की लहर छाई हुई है। राहुल गाँधी का आज का इस्तीफे वाला ट्वीट पढ़ने के बाद से भाजपा कार्यकर्ता एक दूसरे से खुलकर बात नहीं कर रहे हैं और किसी भी सवाल का जवाब सिर्फ ‘जय श्री राम’ कहकर ही दे रहे हैं।

कुछ कार्यकर्ताओं का तो यहाँ तक भी कहना है कि अब वो केदारनाथ की ध्यान गुफा जाकर ही जीवनयापन करेंगे क्योंकि राहुल गाँधी के इस्तीफे के बाद से अब राजनीति में ‘फन’ गायब हो जाएगा। उन्हें आज भी राहुल गाँधी की वो प्रतिज्ञा याद है, जिसमें उन्होंने वायदा किया था- “मैं ये मजा पूरे देशवासियों को देना चाहता हूँ।”

कुछ गुप्त सूत्रों का तो यह भी कहना है कि इस इस्तीफे के पीछे जो कारण है वह असल में यह है कि राहुल गाँधी अब उस BHEL के मोबाइल की तलाश में जा रहे हैं, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी चुनावी रैलियों में किया था।

शेयर मार्केट में गिरे आलू से सोना बनाने वाली मशीन के भाव

राहुल गाँधी के इस इस्तीफे का प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि इसका असर सिर्फ भाजपा कार्यालय तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर मार्केट में भी इसके हलके झटके महसूस किए गए। टीशर्ट और बनियान बेचकर पत्रकारिता में अपनी जड़ें स्थापित करने वाली वेबसाइट ‘दी झोलाटॉप’ के मशहूर व्यर्थशास्त्री ने इस मामले की पड़ताल करते हुए पाया कि उन लोगों ने अब ‘आलू से सोना मशीन मेकर्स-ब्रदर्स’ वाली कम्पनी से हाथ खींच लिए हैं, जिन्हें यकीन था कि आज नहीं तो कल, यह मशीन राहुल गाँधी जी के नेतृत्व में जनता को सौंप दी जाएगी। लेकिन गरीब आदमी के लिए यह स्वप्न देखने वाले युगपुरुष के इस्तीफे के बाद यह कम्पनी डूबने के कगार पर है और शेयर मार्किट से भी समाचार ठीक नहीं आ रहे हैं।

मोदी जी नहीं कर पाएँगे कभी दिल से माफ़

राहुल गाँधी के इस्तीफे देने की घटना से पीएम मोदी विशेष तौर पर दुखी हैं। जब राहुल गाँधी के इस्तीफे पर उनकी क्या जानने के लिए मीडियाकर्मी उनके आवास पर पहुँचे, तो मोदी जी ने कहा- “हालाँकि, यह राहुल गाँधी जी का व्यक्तिगत मसला है। फिर भी, देशहित के ऊपर उन्होंने अपना व्यक्तिगत हित रखा है, जिसके लिए मैं उन्हें दिल से कभी माफ़ नहीं कर पाउँगा।”

यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी जी जब भी किसी को दिल से माफ़ नहीं कर पाते हैं तो कुछ समय बाद ही वह व्यक्ति संसद में शपथ लेते हुए देखा जाता है। हो सकता है कि राहुल गाँधी पर भी इसी तरह से कोई कृपा बरसे और वो आजीवन नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देते नजर आएँ।

अमित शाह ने बुलाई उच्चस्तरीय आपात बैठक

राहुल गाँधी के इस्तीफे की खबर से कार्यकर्ताओं के गिरे हुए मनोबल को देखकर अमित शाह ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए विशेष मोटिवेशनल सेशन चलाए जाएँगे। साथ ही कुछ ऐसे मोटिवेशनल गुरुओं के द्वारा भाषण दिलवाए जाएँगे, जो हाईस्कूल में छात्रों के फेल होने पर उन्हें ‘चिल’ करने की नसीहत देते हैं।

कॉन्ग्रेस के नए पार्टी अध्यक्ष को देखकर फूट-फूटकर रोए आडवाणी जी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कॉन्ग्रेस ने युवा की जगह अब महा-वरिष्ठ अध्यक्ष को नेतृत्व देने का फैसला ले लिया है और यह नाम है- मोतीलाल वोरा। हालाँकि वोरा जी का इस बात पर यह कहना है कि उन्हें तो इस बारे में कोई जानकारी तक नहीं है। अब कॉन्ग्रेस की जिम्मेदारी तो यही बनती है कि वो किसी भी तरह से वोरा साहब को कम से कम 2024 चुनाव की दहलीज तक अध्यक्ष पद पर बने रहने को मजबूर कर सकें। एक झलक कॉन्ग्रेस के संभावित अध्यक्ष जी पर –

मीडिया के सूत्रों ने मोतीलाल वोरा को बना दिया है कॉन्ग्रेस अध्यक्ष, हालाँकि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है

फिलहाल तो मीडिया के सूत्रों की बात को वोरा जी ने दबा दिया है लेकिन यदि वाकई में मोती लाल वोरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष इस अवस्था में बनते हैं, तो ये देखकर भाजपा की मार्गदर्शक मंडली में बैठे लाल कृष्ण आडवाणी जी को अभी भी अपनी पार्टी बदलने पर विचार करना चाहिए।

चमकी से मर रहे बच्चे और विधानसभा में आम बाँट रही नीतीश सरकार

बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर कठघरे में घिरी नीतीश कुमार की सरकार ने एक नए विवाद को न्योता दे दिया है। बिहार विधानसभा में आम और उसके पौधे बाँटने को लेकर सरकार की तीखी आलोचना हो रही है। विपक्षी दल राजद के सदस्यों ने आम और उसके पौधे लेने से मना कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि एक तरफ राज्य में कुपोषण से बच्चे मर रहे हैं, दूसरी ओर सरकार आम और उसके पौधे बाँट रही है। उनके नेतृत्व में विधानसभा के बाहर विपक्षी दल के विधायकों ने प्रदर्शन भी किया।

हालाँकि, राज्य सरकार ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा है कि पर्यावरण के प्रति जागरुकता फैलाने के मकसद से ऐसा किया गया।

बिहार सरकार में मंत्री श्याम रजक ने बताया कि लोगों को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से आम के पौधे बाँटे गए। उन्होंने कहा, “पर्यावरण खतरे में है। आम के पौधे इसलिए बाँटे गए कि लोग और पेड़ लगाए और हम इस समस्या से निजात पा सकें।”

बिहार में फिलहाल विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है। बुधवार को कृषि मंत्रालय का बजट सदन में रखा गया। ऐसा कहा जा रहा है कि सदन में जब भी किसी विभाग का बजट पेश किया जाता है तो संबंधित विभाग की तरफ से सदन के सदस्यों के बीच कुछ उपहार वितरित किए जाने की परंपरा रही है।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों बिहार एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जूझ रहा है। आम बोलचाल की भाषा में इसे चमकी बुखार भी कहते हैं। इसके कारण राज्य में अब तक करीब दो सौ बच्चों की मौत हो चुकी है।

वाह कॉन्ग्रेसी बघेल जी वाह! महिलाओं के दुपट्टे से भी आपको खतरा है क्या?

क्या किसी को महिलाओं के दुपट्टे और बुजुर्गों की पगड़ी से भी खतरा हो सकता है? या सत्ता मिलाने के बाद जनता को उसकी औकात बताने की साजिश? क्योंकि ऐसी ही एक हरकत कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री ने की है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने बुधवार को ‘मुख्यमंत्री जन चौपाल’ कार्यक्रम के तहत जनता से रूबरू होने के लिए मुख्यमंत्री निवास पर आम लोगों को आमत्रित किया था। सीएम आवास के भीतर जाने से पहले लोगों के दुपट्टा और पगड़ी उतरवा लिए गए। इस मसले पर बीजेपी छत्तीसगढ़ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने आवास के बाहर ढेर सारी रखी गई दुपट्टा-पगड़ी की तस्वीर को शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस पर हमला किया। बीजेपी ने सीएम भूपेश बघेल से सवाल किया कि दुपट्टा-पगड़ी से भी आपकी सुरक्षा को खतरा है क्या?

बीजेपी ने कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री को निशाने पर लेते हुए ट्विटर पर लिखा, ”वाह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी! छत्तीसगढ़ के मान-सम्मान का प्रतीक है दुपट्टा-पगड़ी, लेकिन जन चौपाल में आपसे मिलने आए लोगों की शिकायतें सुनने से पहले उनके गमछे-पगड़ी को सीएम हाऊस में उतरवाकर यूँ टाँग दिया! दुपट्टा-पगड़ी से भी आपकी सुरक्षा को खतरा है क्या?”

हालाँकि, बीजेपी द्वारा कॉन्ग्रेस की खिचाई के बाद, इस पर कॉन्ग्रेस के छत्तीसगढ़ ट्विटर अकाउंट ने माफी माँगते हुए ट्वीट पर जवाब दिया और लिखा- ”जैसे ही सूचना मिली, दुपट्टा-पगड़ी उतरवाना बंद कर दिया गया है। हम ग़लतियों को तत्काल सुधारते हैं। सुरक्षाकर्मियों ने एहतियात के नाम पर ग़लती की। जनता और जनप्रतिनिधि के बीच का यह खूबसूरत रिश्ता प्यार और विश्वास पर कायम होता है।”

बता दें कि मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को सीएम भूपेश बघेल और कॉन्ग्रेस छत्तीसगढ़ ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री जन चौपाल की घोषणा की थी। जिसमें सीएम बघेल ने लिखा था, ”मैं जनता का मुख्यमंत्री हूँ। प्रत्येक जगह अपनी जनता से मिलना चाहता हूँ, चाहे वह मेरा निवास ही क्यों न हो! मुख्यमंत्री निवास पर आप सबका स्वागत करता हूँ।”

पता नहीं क्यों कॉन्ग्रेस अक्सर छीछालेदर के बाद ही सबक लेती है। जब सुरक्षा जाँच के बाद औरतों-पुरुषों को अंदर जाने की इजाजत मिली तो महिलाओं के दुपट्टे और पुरुषों के पगड़ी से भी भला क्या खतरा? खैर, कॉन्ग्रेस ने अपनी गलतियों के लिए माफ़ी माँग ली है। लेकिन सोशल मीडिया पर अपनी भद्द पिटवाने के बाद।

मॉब लिंचिंग के विरोध में सड़कों पर उतरे 1 लाख कट्टरपंथी: कहा- ‘कोई और कौम होता तो पलटवार कर चुका होता’

झारखण्ड में भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी की हत्या के विरोध में मालेगाँव में 1 लाख लोग सड़कों पर उतरे। मालेगाँव की सड़कें और पूरा का पूरा क्षेत्र उनके विरोध प्रदर्शन का गवाह बना। ये सभी मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने की माँग लेकर सड़कों पर उतरे थे। रैली के आयोजकों ने कहा कि तबरेज का मारा जाना ‘फाइनल ट्रिगर’ है और अब विरोध का समय आ गया है। नीचे संलग्न की गई वीडियो में आप 1 लाख की मजहबी भीड़ द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुए देख सकते हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन जमियत उलेमा ने किया। उन्होंने कहा कि वे संविधान को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं। संगठन के लोगों ने कहा कि वे बदला नहीं चाहते क्योंकि वे हिंसा में विश्वास नहीं रखते हैं। उन्होंने क़ानून के नियमों पर भरोसा करने का दावा किया।

हालाँकि, जिन लोगों ने वहाँ भाषण दिया, उनमें से कई के भाषण उत्तेजक थे तो कई ने शांति बनाए रखने की अपील की। मौलवियों ने कहा कि अगर समुदाय की तरह किसी और को निशाना बनाया गया होता तो वे अभी तक पलटवार कर चुके होते। एक मौलवी ने कहा कि अब चीजें बर्दाश्त से बाहर हो रही हैं। एक मौलवी ने भाषण देते हुए कहा कि मॉब लिंचिंग आतंकवाद है जो सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से अपील की कि वह सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिख कर उन्हें कर्तव्यों की याद दिलाएँ। साथ ही लोगों ने मॉब लिंचिंग के पीड़ितों के परिवारों को 50 लाख रुपए देने की माँग की। एक मौलवी ने कवि फ़याज़ की पंक्ति पढ़ी- “अगर आज निशाने में हम हैं, तो दूसरों लोगों को ख़ुश नहीं होना चाहिए।“