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OBC के लिए रिजर्वेशन… लेकिन भर्ती होगी जनरल कैटेगरी की: खट्टर सरकार का ऐतिहासिक फैसला

हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए सभी रिक्त आरक्षित पदों को सामान्य वर्ग से भरने का निर्णय लिया है। हरियाणा सरकार आजकल भर्तियों के मूड में है और सरकार रिक्त पदों को भरने पर जोर दे रही है। बता दें कि हाईकोर्ट ने जाट व अन्य पिछड़ी जातियों को दिए गए आरक्षण पर फिलहाल रोक लगा रखी है। हरियाणा में बम्पर भर्तियों की तैयारी में लगी राज्य सरकार ने विभागों से रिक्त पदों का ब्यौरा भी माँगा है। अतः सरकार ने निर्णय लिया है कि अब जाट, जट सिख, रोड़, बिश्नोई, त्यागी और मुस्लिम जाटों के लिए आरक्षित पदों को सामान्य जातियों के उम्मीदवारों से भरेगी।

विशेष पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रिक्त सीटों पर भी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की भर्तियाँ की जाएँगी। सरकार ने निर्णय लिया है कि EBPG (सामान्य जातियों में आर्थिक आधार पर पिछड़े लोग) कैटेगरी में शामिल ब्राह्मण, बनिया, राजपूत व पंजाबी के लिए आरक्षित पदों को दूसरी जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों से भरा जाएगा। बहुत सारे पद ऐसे थे, जो कानूनी अड़चनों के कारण कई दिनों से रिक्त थे। हरियाणा में आरक्षण को लेकर तरह-तरह के मामले अदालतों में लंबित हैं। रिक्त पदों में कई सारे विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों व सरकारी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और हाई कोर्ट में हैं।

ये सारे आरक्षित श्रेणी के रिक्त पद हैं। इनकी संख्या हजारों में हैं जो अदालती फैसलों की बाट जोहते खाली पड़े हुए थे। इन पदों को भरने के लिए सम्बद्ध विभागों व अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया गया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, बोर्ड और निगमों से ‘सी’ श्रेणी के तहत पिछड़ा वर्ग के लिए चिह्नित रिक्त पदों की जानकारी माँगी है। आदेश में कहा गया है कि इन सभी रिक्त पदों को सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के जरिए भरा जाएगा।

कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने जाट, जट सिख, रोड़, बिश्नोई, त्यागी और मुल्ला जाट-मुस्लिम जाटों के लिए ग्रुप ए और बी में 6% और ग्रुप सी व डी की नौकरियों में 10% आरक्षण की व्यवस्था की थी। बाद में हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।

अरुण जेटली ने लौटाया सरकारी बंगला और गाड़ी, सुरक्षा में भी की कटौती

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली फिलहाल सार्वजनकि मंचों पर नहीं दिखते। स्वास्थ्य कारणों से दोबारा बनी मोदी सरकार में उन्होंने कोई भी ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। अब ख़बर आई है कि जेटली अपना सरकारी बंगला छोड़ने वाले हैं। नेताओं का मानना है कि 4 दशकों से राजनीति में सक्रिय जेटली अभी बस नेपथ्य में हैं लेकिन वे वापसी ज़रूर करेंगे। ‘रेडिफ’ के अनुसार, अपने प्राइवेट बंगले में शिफ्ट होने जा रहे अरुण जेटली ने अपने कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती की है। उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था कम कर दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपनी सरकारी गाड़ियाँ भी वापस कर दी हैं।

‘रेडिफ’ ने आगे बताया है कि अरुण जेटली ने अपने कर्मचारियों को पहले से लंबित बिजली बिल, पानी बिल और टेलीफोन बिल- सभी समय रहते क्लियर करने को कहा है। अरुण जेटली के यहाँ रोजाना 25 अख़बार आया करते थे, जिन्हें बंद करा दिया गया है। अरुण जेटली अब अपनी साउथ दिल्ली स्थित निवास में रहेंगे। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए उनकी परिवार की भी यही इच्छा थी कि वो सरकारी बंगला छोड़ दें। रिपोर्ट में आगे लिखा है कि जब जेटली ठीक हो जाएँगे तो वह किसी छोटे सरकारी बंगले के लिए सरकार को निवेदन करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जेटली आगे आने वाले समय में स्वस्थ होने के बाद सरकार में कोई अहम ज़िम्मेदारी भी संभाल सकते हैं। टाइम्स नाउ की एक ख़बर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब अरुण जेटली के घर उनसे मिलने गए थे, तब उन्होंने उनसे सरकार में कोई पद ग्रहण करने को कहा था लेकिन जेटली ने इनकार कर दिया। उन्हें तत्काल में बिना किसी विभाग के मंत्रीपद लेने का ऑफर दिया गया लेकिन जेटली ने कहा कि वह सिर्फ़ बंगला और गाड़ी के लिए मंत्रीपद ग्रहण करने वालों में से नहीं है।

ईद की नमाज के लिए विवादित जमीन पर घुसे लोग, आदिवासियों ने तीर-धनुष से हमला कर भगाया

बिहार में ईद के मौके पर विवादित आदिवासी जमीन पर बने ईदगाह में नमाज के लिए गए लोगों को आदिवासियों ने अपनी जमीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश समझकर उन पर हमला कर दिया। समुदाय विशेष और आदिवासियों के बीच हुए संघर्ष में मजहब विशेष के कई लोग घायल हो गए हैं। सीने में तीर लगने से घायल लोगों को आनन-फानन में अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। मामला ईद की नमाज पढ़ने को लेकर हुए विवाद का है।

ठाकुरगंज के चाय-बागान की घटना

बिहार के ठाकुरगंज की सखुआडाली पंचायत के धुलावाड़ी गाँव के चाय बागान में बने ईदगाह पर जब मोहम्मद फजीर, मोहम्मद कलाम, मोहम्मद शरीफ़ आदि ग्रामीण ईद की नमाज पढ़ने पहुँचे तो आदिवासियों ने उन पर अपने पारम्परिक हथियारों तीर-धनुष से हमला कर दिया। हमले में पाँच लोग तीर लगने से घायल हो गए। मो. फजीर और मो. शमशाद को सीने में तीर लगे। पाँचों को पहले तो सदर अस्पताल ले जाया गया लेकिन बाद में उन्हें एमजीएम मेडिकल कॉलेज खुद सिविल सर्जन ले गए।

मेडिकल कॉलेज के मुताबिक घायलों की हालत गंभीर है पर उनकी जान खतरे से बाहर है। सर्जरी विभाग के अलग-अलग चिकित्सकों की टीमों ने सबका इलाज किया। जिला प्रशासन की ओर से पाँच बोतल खून भी निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है। सभी घायल ठीक होने के बाद आराम से चल-फिर सकेंगे

पुराना है क्षेत्र में संघर्ष का इतिहास

सखुआडाली में आदिवासियों का अन्य समुदायों के साथ संघर्ष का इतिहास पुराना है। कभी मवेशी चराने को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है, तो कभी शराब पीकर लौट रहे आदिवासी की गिरफ़्तारी के बाद हिरासत में मौत की फैली अफवाहों से भड़का समुदाय पुलिस थाने को आग के हवाले कर देता है। वहीं दूसरी ओर आदिवासियों का कहना है कि उन्हें भूमिहीन होने के बावजूद सरकारी योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। उनका आरोप यह भी है कि जमीन देने के नाम पर कभी नदी किनारे तो कभी बंजर, तो कभी माँग से कम जमीन थमा दी जाती है। ऐसे में उन्हें यह सब कदम मजबूरी में उठाने पड़ते हैं

गाय काटने वाली आसिया अंद्राबी का खुलासा: ISI से मिले पैसे पत्थरबाजों, हुर्रियत, राष्ट्रविरोधियों में बाँटे

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने इस बात का खुलासा किया है कि अलगाववादी समूह दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी पाकिस्तान फौज के संपर्क में थीं और उन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से पैसे भी मिलते थे। जानकारी के बता दूँ कि आसिया वही हैं जिन्होंने 2015 में गाय काटी थी, वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। एजेंसी ने बताया है कि आसिया, पाक फौज में काम करने वाले एक अधिकारी के जरिए जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज़ सईद के संपर्क में भी थीं।

जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक एनआईए सूत्रों ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि पाकिस्तानी फौज में कैप्टन रैंक का अधिकारी आसिया का भतीजा है। इसके अलावा पता चला है कि आसिया का एक और नजदीकी रिश्तेदार पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की फौज और उनकी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) के साथ संपर्क में है।

एनआईए ने इससे पहले मंगलवार (4 जून) को हाफिज सईद के साथ आतंकी फंडिंग के मसले पर मसरत आलम, आसिया अंद्राबी और शबीर शाह को गिरफ्तार किया था। इन्हें 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जिसके बाद से ये तीनों अब तक तिहाड़ जेल में बंद हैं।

गौरतलब है, अलगाववादी समूह की संस्थापक आसिया भारत से कश्मीर के अलगाव के लिए काम कर रही हैं। आसिया को राष्ट्र के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के मामले में पिछले वर्ष जुलाई में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

इसके अलावा बता दें जाँच और पूछताछ में मालूम चला है कि आसिया के कुछ रिश्तेदार दुबई और सउदी अरब में भी रहते हैं। इन लोगों ने भी आसिया को भारत में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए पैसे पहुँचाए हैं। यह धन पत्थरबाजों और हुर्रियत के समर्थकों में बाँटे गए थे जिन्होंने श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए।

स्वच्छ भारत अभियान के कारण मिट्टी-पानी में प्रदूषण हुआ कम, UNICEF ने की प्रशंसा

बुधवार (5 जून, 2019) को संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ ने प्रधानमंत्री की बहुप्रतीक्षित योजना स्वच्छ भारत अभियान का अध्ययन कर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार कई गाँवों का अध्ययन करने के बाद प्रकाशित हुई रिपोर्ट के अनुसार स्वच्छ भारत अभियान के कारण भूजल (ground water) में प्रदूषण की मात्रा घटी है। यूनिसेफ की रिपोर्ट तीन राज्यों- बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल- में किए गए अध्ययन पर आधारित है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो गाँव खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त नहीं हुए हैं उनका भूजल उन गाँवों से अधिक गंदा है जहाँ अब लोग खुले में शौच करने नहीं जाते। जो गाँव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं उन्हें ‘ओपन डेफिकेशन फ्री’ (ODF) घोषित किया गया है। जो गाँव ODF नहीं हैं उनका भूजल ODF गाँवों की तुलना में 11.25 गुना अधिक गंदा है। इसी प्रकार जो गाँव खुले में शौच से मुक्त नहीं हुए हैं उन गाँवों की मृदा (मिट्टी) भी ODF गाँवों से 1.13 गुना अधिक प्रदूषित है।

जब मिट्टी और भूजल प्रदूषित होता है तो उसमें उगने वाली फसल भी प्रदूषित होती है। ओपन डेफिकेशन फ्री घोषित हो चुके गाँवों में उगने वाला अनाज उन गाँवों में उगने वाले अनाज से 1.48 गुना कम प्रदूषित है जहाँ आज भी लोग बाहर शौच करने जाते हैं। यूनिसेफ रिपोर्ट के अनुसार भूजल और मृदा ही नहीं घरेलू पेयजल भी ओडीएफ गाँवों में 2.68 गुना अधिक स्वच्छ है।

बुधवार को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर यूनिसेफ ही नहीं, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फॉउंडेशन की रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई। इन दोनों रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत अभियान की प्रशंसा की गई। भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि यास्मीन अली हक़ ने कहा कि बच्चे विशेष रूप से इस परिवर्तन के संवाहक बन रहे हैं; अब 96.5% टॉयलेट प्रतिदिन प्रयोग में लाए जा रहे हैं, इसमें विशेष रूप से बच्चों का उत्साह और योगदान देखने लायक है; स्वच्छ भारत मिशन निरंतर प्रगति कर रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तीनों राज्यों में से बिहार के वह गाँव जो ओडीएफ नहीं हैं, उनकी मिट्टी और पानी सर्वाधिक प्रदूषित है। बिहार में नॉन ओडीएफ गाँवों में से 66.7% के खाद्य स्रोत प्रदूषित हैं, यह आँकड़ा ओडिशा और बंगाल से अधिक है।

अधिकारियों का जत्था, पुलिस दल, एम्बुलेंस: CM कमलनाथ के रिश्तेदारों को सरकारी VVIP सुविधाएँ

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के रिश्तेदारों को विशेष सरकारी सुविधाएँ देने का मामला सामने आया है। रिपब्लिक टीवी की एक ख़बर के अनुसार, कमलनाथ के रिश्तेदारों को पुलिस दल की सुविधाएँ दी गईं, उनके साथ सरकारी अधिकारियों को भी रखा गया और सरकारी एम्बुलेंस भी साथ में था। यह घटना तब की है जब मुख्यमंत्री के रिश्तेदार उज्जैन मंदिर में दर्शन करने आए थे। रतुल पुरी सीएम के भतीजे हैं और उद्योगपति भी हैं। जब वह अपनी पत्नी के साथ मंगलवार (जून 4, 2019) को उज्जैन पहुँचे, तब उन्हें सरकारी अधिकारीगण, पुलिस दल, एम्बुलेंस सहित कई ऐसी सरकारी सुविधाएँ दी गईं, जो मुख्यमंत्री द्वारा पद के दुरूपयोग और वीवीआईपी रेसिज्म को सामने लाती हैं, ऐसा ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ की ख़बर में कहा गया है।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि व्यक्तिगत दौरे पर गए कमलनाथ के रिश्तेदारों को सरकारी सुविधाएँ क्यों मुहैया कराई गईं? भाजपा का पूछ्ना है कि जब उनके रिश्तेदार किसी ऐसे सरकारी पद पर नहीं हैं, जिनमें ये सब सुविधाएँ दी जाती हों (यह कोई सरकारी दौरा नहीं बल्कि व्यक्तिगत यात्रा थी), तब ऐसा कैसे किया गया? भाजपा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर पद के दुरूपयोग का सीधा आरोप लगाया है। उज्जैन के सांसद अनिल फिरोज़िया ने इस बारे में टिप्पणी करते हुए कहा:

“उन्हें (कमलनाथ के रिश्तेदार) आकर मंदिर में दर्शन करना चाहिए, यह अच्छी बात है। लेकिन, जिला प्रशासन ने उनके लिए प्रोटोकॉल जारी किया, क्यों? मैं जिलाधिकारी से पूछना चाहता हूँ कि ऐसा क्यों किया गया और किसके कहने पर किया गया? क्या इन रिश्तेदारों को कैबिनेट रैंक दिया गया है या किसी विभागीय पद पर बैठाया गया है? या फिर, केवल मुख्यमंत्री को ख़ुश करने के लिए ऐसा किया गया? यह सार्वजनकि संपत्ति के दुरूपयोग का मामला है।”

‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ के अनुसार, जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने पर बताया गया कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से एक पत्र प्राप्त हुआ था, जिसमें कमलनाथ के रिश्तेदारों को ‘VVIP Escorts’ देने को निर्देशित किया गया था। बता दें कि सत्ता संभालने के बाद से ही कमलनाथ लगातार विवादों में हैं। कभी राज्य में बिजली गायब होने को लेकर वो सुर्ख़ियों में रहते हैं, तो कभी किसानों की कर्ज़माफ़ी में गड़बड़ियों के कारण वे ख़बरों में रहते हैं। मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार होने के बावजूद हालिया लोकसभा चुनावों में पार्टी की बुरी हार हुई है।

‘सरकारी कर्मचारी सम्मान न करें तो जूता निकालो और मारो’

उत्तर प्रदेश के ललितपुर से भाजपा विधायक रामरतन कुशवाहा ने सरकारी कर्मचारियों को लेकर विवादित बयान दिया है। कुशवाहा ने पार्टी के कार्यकर्ताओं के सामने कहा है कि यदि प्रदेश के कर्मचारी 2 महीने में ठीक से काम नहीं करते हैं तो उनको जूता उठाकर मारिए। अब कुशवाहा के इस बयान पर जिला प्रभारी रामकिशोर साहू ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाई है, साथ ही जिलाध्यक्ष जगदीश सिंह लोधी ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त किया है।

दरअसल, मंगलवार (जून 4, 2019) को सांसद अनुराग शर्मा की जीत के बाद आयोजित भाजपा कार्यकर्ताओं के अभिनंनद समारोह में भाजपा विधायक महरौनी पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “अभी भी जो प्रदेश सरकार के कर्मचारी हैं वो महीने, दो महीने में ठीक नहीं होते और हमारे कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं करते तो मैं कहता हूँ कि अपना जूता उतारिए और मारिए, क्योंकि एक सीमा होती है बर्दाश्त करने की। ये सपा-बसपा मानसिकता के अधिकारी हैं, इन्होंने बदतमीजी करने का कार्य चुनाव के समय भी किया। हमारे कार्यकर्ताओं को हड़काया और सदस्यता के लिए मजबूर किया। मेरे पास पुलिस और राजस्व कर्मचारियों की ऐसी सूचना है, वो अभी सतर्क हो जाएँ।”

रामरतन के बयान के बाद अब उनकी ही पार्टी के नेता भी उनसे इस मामले में पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। जिला प्रभारी रामकिशोर साहू ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये सच है कि पहले की सरकारों में अधिकारियों ने भ्रष्टाचार और मनमानी की है, लेकिन फिर भी वे सदर विधायक कुशवाहा के बयान से सहमत नहीं हैं।

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब किसी भाजपा विधायक के सुर इतने बिगड़े हों, इससे पहले भी विधायक सुरेंद्र सिंह ने विवादित बयान देते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की तुलना वेश्याओं की थी। इस दौरान उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी घूस माँगता है तो उनको आप घूसा मारो और अगर उस पर भी नहीं मानता है तो जूता मारो।

‘अपने लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिमों की गुंडागर्दी वाली घटना पर गंभीर चुप क्यों?’ Twitter पर लोग नाराज़

सोशल मीडिया पर कई लोग पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर से नाराज़गी जता रहे हैं। लोगों की नाराज़गी की वजह है अपने ही लोकसभा क्षेत्र में हुई एक बड़ी घटना पर उनकी चुप्पी। लोग सिर्फ़ इसीलिए नहीं नाराज़ हैं क्योंकि गौतम ने इस घटना को लेकर कुछ नहीं बोला, लोग इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि गुरुग्राम की झूठे दावों वाली घटना पर बिना सच जाने त्वरित प्रतिक्रिया देकर असहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाले गौतम गंभीर दिल्ली की इस घटना पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। वह ईस्ट दिल्ली के सांसद हैं। जहाँ यह घटना हुई, वह इलाक़ा भी ईस्ट दिल्ली में ही आता है।

सबसे पहले आपको बताते हैं कि घटना क्या है? दरअसल, दिल्ली में एक मस्जिद के पास से एक कार तेज़ी में गुजर गई। इतनी सी बात पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न सिर्फ़ थाने का घेराव किया, बल्कि डीटीसी की बसों सहित कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त भी कर दिया। काफ़ी देर तक दिल्ली में वही कश्मीर वाला नज़ारा देखने को मिला, जहाँ पत्थरबाज़ी एक आम बात हो गई है। मुस्लिम समुदाय के बच्चों से लेकर बड़ों तक ने पत्थर चला कर परिवहन को बाधित किया, कई घंटे तक ट्रैफिक जाम लगा रहा और पुलिस द्वारा अमन कमिटी के पदाधिकारियों की मदद लेने के बाद स्थिति थोड़ी शांत हुई।

इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हुआ। इसमें साफ़-साफ़ देखा जा सकता है कि बेख़ौफ़ बदमाश कैसे सड़क पर बेवजह, अकारण और बिना कोई बात पत्थरबाज़ी कर रहे हैं। डीटीसी की बस को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। गौतम गंभीर अभी तक अपने लोकसभा क्षेत्र में हुई इस घटना से अनजान हैं, ऐसा ट्विटर पर कई लोगों का मानना है। वहीं कई लोगों का मानना है कि गुरुग्राम की घटना पर पीएम मोदी की ‘छपास और दिखास’ वाली सलाह भूल त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले गंभीर अभी जानबूझ कर अनजान बने हुए हैं।

आइए, संक्षेप में जान लेते हैं कि गुरुग्राम वाली घटना क्या थी और गंभीर उसमें कैसे उलझ गए। एक मुस्लिम युवक ने दावा किया कि “जय श्री राम” न बोलने पर उसकी पिटाई की गई। इसके बाद ‘डर का माहौल’ ब्रिगेड ने हंगामा शुरू कर दिया कि मोदी के दोबारा आने के बाद भारत अब मुस्लिमों के लिए और सुरक्षित नहीं रहा। बाद में पुलिस की छानबीन और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद पता चला कि न तो उक्त मुस्लिम युवक बरकत अली की इस्लामी स्कल कैप उछाली गई और न ही उसकी शर्ट फाड़ी गई। उसने झूठ बोला था। वह कोई ‘हेट क्राइम’ नहीं बल्कि ‘Mistaken Identity’ की घटना थी।

लेकिन, तब तक दो ट्वीट कर गंभीर भारत में निहित टॉलरेंस और सेकुलरिज्म का पाठ पढ़ा चुके थे। एक व्यक्ति ने दिल्ली की पत्थरबाज़ी घटना के बाद कहा कि गुरुग्राम वाली घटना पर बिना सच जाने टिप्पणी करने वाली गंभीर की उनके ख़ुद के लोकसभा क्षेत्र में हुई घटना को लेकर चुप्पी का राज़ क्या है?

धोनी के ग्लव्स पर Indian Army की सर्जिकल स्ट्राइक करने वाली फ़ोर्स का बैज

विश्व कप क्रिकेट 2019 चल रहा है। टूर्नामेंट में भारत का पहला मैच बुधवार को दक्षिण अफ्रीका से हुआ। इस मैच में पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स पर एक अनोखा चिह्न बना हुआ दिखाई दिया। यह चिह्न भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फ़ोर्स का ‘बलिदान’ रेजिमेंटल डैगर चिह्न है। धोनी के ग्लव्स की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो गईं और लोगों ने उनकी तारीफ करनी शुरू कर दी। धोनी बचपन से ही इंडियन आर्मी के फैन रहे हैं। भारतीय सेना ने उन्हें 2011 में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद (Honorary) रैंक प्रदान की थी। धोनी ने कुछ समय के लिए स्पेशल फ़ोर्स के सैनिकों के साथ ट्रेनिंग भी ली थी।

स्पेशल फ़ोर्स का ‘बलिदान’ बैज प्राप्त करना सबके बस की बात नहीं होती। सेना में से बहुत कम सैनिक स्पेशल फ़ोर्स का हिस्सा बनते हैं। स्पेशल फ़ोर्स की ट्रेनिंग इतनी कठिन होती है कि सभी ट्रेनी पूरी नहीं कर पाते। ट्रेनिंग के अंतिम चरण में 100 किमी तक बिना रुके दौड़ भी लगानी होती है। ऐसी ट्रेनिंग पूरी करने पर ही बलिदान बैज मिलता है। इसे प्राप्त करना किसी भी सैनिक या अफसर का सपना होता है।   

पैरा स्पेशल फ़ोर्स भारतीय सेना की एलीट फ़ोर्स है जिसका इस्तेमाल सर्जिकल स्ट्राइक जैसी विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है। किसी देश की सेना के विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक शत्रु के क्षेत्र में भीतर तक घुसकर किसी विशेष लक्ष्य को भेदकर वापस लौट आते हैं। ऐसा मिलिट्री ऑपरेशन ‘स्पेशल ऑपरेशन’ कहलाता है। इसका प्रारंभ द्वितीय विश्व युद्ध के समय हुआ था जब अमेरिका ने हवा से कूद कर शत्रु की भूमि पर उतरने वाली स्पेशल एयरबोर्न डिवीज़न बनाई थी।

पैरा स्पेशल फ़ोर्स के लिए धोनी का प्यार कोई नई बात नहीं है। वर्ल्ड कप से पहले IPL के दौरान भी धोनी ने इनके बलिदान बैज वाली टोपी पहनी थी। धोनी के पास एक मोबाइल केस भी है, जिसके पीछे यह बैज बना हुआ है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही लगभग सभी शक्तिशाली देशों की सेनाओं के पास स्पेशल ऑपरेशन फ़ोर्स है। भारत की थलसेना के पास भी स्पेशल ऑपरेशन के लिए PARA SF यूनिट है। इसके अतिरिक्त नौसेना, वायुसेना और यहाँ तक की केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के पास भी क्रमशः MARCOS, GARUD और COBRA नामक दस्ते हैं जो कठिन परिस्थितियों में शत्रु के क्षेत्र में विशेष लक्ष्य को बर्बाद करने का कार्य करते हैं।

केंद्र सरकार ने हाल ही में संयुक्त स्पेशल ऑपरेशन डिवीजन का गठन किया था मेजर जनरल ए के ढींगरा को आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल आपरेशंस डिवीजन का पहला मुखिया नियुक्त किया गया है। इस ट्राई सर्विसेज डिवीजन के गठन में सेना की पैराशूट रेजिमेंट, नौसेना की मार्कोस और वायु सेना के गरुड़ कमांडो बल के विशेष कमांडो शामिल हैं।

उत्तराखंड में 3 दिन का राजकीय शोक, वित्त मंत्री प्रकाश पंत का अमेरिका में निधन

उत्तराखंड सरकार में वित्त मंत्री प्रकाश पंत का लंबी बीमारी के बाद कल (जून 5, 2019) निधन हो गया। 59 वर्षीय प्रकाश ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस के अस्पताल में अपनी आखिरी साँस ली। 30 मई को उन्हें कैंसर के इलाज के लिए अमेरिका ले जाया गया था। बताया जा रहा है कि शनिवार (जून 8, 2019) शाम तक उनका पार्थिव शरीर अमेरिका से देहरादून लेकर आया जा सकता है।

पंत के निधन पर सभी राजनैतिक दलों के नेताओं ने अपना शोक जताया है। उत्तराखंड सीएम त्रिवेंद्र रावत ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए गुरुवार (जून 6, 2019) से तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। साथ ही इस बात की भी घोषणा की है कि गुरुवार को सभी सरकारी कार्यालय, बैंक और कोषागार बंद रहेंगे।

गौरतलब है कि अमेरिका जाने से कुछ दिन पहले प्रकाश पंत दिल्ली स्थित राजीव गाँधी अस्पताल के आईसीयू में भी भर्ती रहे थे। इस बीच उनकी गंभीर बीमारी के बारे में किसी को भी स्पष्ट जानकारी नहीं थी। ऐसे में उनके आकस्मिक निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।

पंत की बीमारी के कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री उनके सभी विभाग संभाल रहे थे। पंत के विभाग में संसदीय कार्य, विधायी, भाषा, वित्त, आबकारी, पेयजल एवं स्वच्छता, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आते थे।

बता दें कि पंत सबसे पहले पिथौरगढ़ विधानसभा से 2002 से 2007 तक निर्वाचित हुए थे। इस दौरान उन्हें
बीसी खंडूरी की सरकार में पर्यटन, तीर्थाटन, धर्मस्व कार्य, संस्कृति, संसदीय कार्य, विधायी एवं पुर्नगठन मंत्री बनाया गया था। इसके बाद 2012 के चुनावों में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था लेकिन 2017 में उन्होंने एक बार फिर से जीत हासिल की। हाल ही में बजट सत्र के दौरान उनकी तबियत बिगड़ने लगी थी, इस कारण वह बजट भाषण तक पूरा नहीं पढ़ पाए थे। यहाँ भी उनका बजट भाषण त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ही पूरा किया था।