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सोशल मीडिया पोस्ट पर 2 कोर्ट के 2 फैसले: पत्रकार करे तो ठीक, नेता पर सख्ती

आज माननीय उच्चतम न्यायालय ने प्रशांत कनौजिया को तुरंत जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, “हम उसके (कनौजिया की) ट्वीट की सराहना नहीं करते हैं लेकिन उसे (कनौजिया को) सलाखों के पीछे नहीं डाला जा सकता।”

बता दें कि पत्रकार प्रशांत कनौजिया को उनके एक ट्वीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था जिसमें एक वीडियो है। वीडियो में एक महिला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में आपत्तिजनक बातें कह रही थी। इसी ट्वीट को पुलिस ने मुख्यमंत्री की छवि खराब करने वाला माना और प्रशांत कनौजिया को गिरफ्तार कर लिया।

हालाँकि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कोर्ट में प्रस्तुत हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने यह दलील दी कि कनौजिया को इसलिए गिरफ्तार किया गया ताकि यह एक उदाहरण बन सके और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को ख़ारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 19 और 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों से समझौता नहीं हो सकता।

जहाँ एक ओर उच्चतम न्यायालय ने पत्रकार प्रशांत कनौजिया को आपत्तिजनक ट्वीट करने के मामले में तुरंत जमानत दे दी वहीं दूसरी तरफ एक दूसरे लेकिन मिलते-जुलते मामले में एक वर्ष पहले मद्रास उच्च न्यायालय ने भाजपा नेता एस वी शेखर को अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था।

दरअसल शेखर ने अपने फेसबुक अकॉउंट पर एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें महिला पत्रकारों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। हालाँकि शेखर ने अदालत में यह दलील दी थी कि वह पोस्ट उन्होंने बिना पढ़े ही शेयर की थी। लेकिन उनकी इस दलील को कोर्ट ने नहीं माना था और कहा कि पोस्ट को शेयर करना उसका समर्थन करने जैसा है।

यहाँ दो अदालतों के दो जजमेंट सामने हैं जिनमें एक ही जैसा मामला है लेकिन इसे न्याय व्यवस्था की विडंबना ही कहा जाएगा कि एक मामले में एक पत्रकार सब कुछ जानते हुए एक नेता और मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट ट्वीट करता है जिसपर उसे उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल जाती है। लेकिन उच्च न्यायालय एक नेता को पत्रकारों के खिलाफ अनजाने में शेयर किए गए एक पोस्ट के लिए जमानत देने से मना कर देता है।

मजेदार बात यह भी है कि एक साल पहले आए मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले में न्यायालय ने कहा था कि सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड किया गया कोई मेसेज या पोस्ट उसका समर्थन करने जैसा है। लेकिन एक साल बाद माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में इस पक्ष को नजरअंदाज कर दिया।

नेताओं पर आपत्तिजनक ट्वीट करने की बात की जाए तो कुछ दिन पहले ऐसे ही मामले में प्रियंका शर्मा को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था जब शर्मा ने ममता बनर्जी का मीम (meme) शेयर किया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता लेकिन यह किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों से नहीं टकराना चाहिए।

World Cup 2019: अंगूठे में चोट के कारण धवन 3 हफ़्तों के लिए बाहर, ऋषभ को मिलेगा मौका?

क्रिकेट विश्व कप 2019 में विजयी रथ पर सवार भारत को बड़ा झटका लगा है। शक्तिशाली ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ शतक जड़ने वाले शिखर धवन तीन हफ़्तों के लिए टीम से बाहर हो गए हैं। अर्थात, सलामी बल्लेबाज़ ‘गब्बर’ अब इस विश्व कप में नहीं खेल पाएँगे। फॉर्म में चल रहे धवन का बाहर जाना टीम के लिए बड़ा झटका है। अंगूठे में चोट के कारण धवन टीम से बाहर हुए हैं। उन्हें यह चोट रविवार (जून 9, 2019) को ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध मैच में लगी थी। इसके बावजूद उन्होंने 117 रन बना कर एक विजयी पारी खेली।

वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मैच 9 जुलाई और 11 जुलाई को होने वाला है, ऐसे में यह देखना होगा कि धवन उन मैचों में खेल पाते हैं या नहीं। रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ओपनर शिखर धवन को तेज गेंदबाज नाथन कुल्टर नाइल की उछाल लेती गेंद लगी थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने ऋषभ पन्त को उनकी जगह टीम में बुलाने की माँग तेज़ कर दी है।

BJP सांसद वीरेंद्र कुमार होंगे लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर, 17 जून से शुरू होगा नया सत्र

17वीं लोकसभा के गठन के लिए तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। मंगलवार (जून 11, 2019) को सरकार ने भाजपा सांसद डॉ वीरेंद्र कुमार को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है, जो नए सांसदों को शपथ दिलवाएँगे। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार सभी सांसदों को शपथ दिलाएँगे। मध्य प्रदेश के दलित नेता वीरेंद्र कुमार 7वीं बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने हैं और 1996 से लगातार जीत रहे हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वीरेंद्र कुमार को महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री बनाया गया था।

दरअसल, प्रोटेम स्पीकर उन्हें कहा जाता है, जो चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष का चुनाव होने तक लोकसभा का संचालन करते हैं। सामान्यतः सदन के वरिष्ठतम सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है। प्रोटेम स्पीकर तब तक अपने पद पर बने रहते हैं, जब तक सदन द्वारा स्थायी अध्यक्ष का चुनाव न हो जाए।

जानकारी के मुताबिक, 17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। सत्र के पहले दो दिनों तक नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी। पहले दो दिनों में नए सांसदों के शपथ लेने के बाद 19 जून को अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। जिसके बाद 20 जून को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे। संसद का यह सत्र 40 दिनों तक चलेगा और और इसमें 30 बैठकें होंगी।

तैयार करें $5 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनने का रोडमैप: सचिवों के साथ बैठक में PM ने दिया मन्त्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर सभी मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक बड़ी बैठक की। अपने दूसरे कार्यकाल में सचिवों के साथ पहली बार बैठक कर रहे पीएम ने अगले पाँच वर्षों के लिए विचार-विमर्श किया और ज़रूरी निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों का जीवन कैसे बेहतर बनाना है, इस पर ध्यान केन्द्रित करें। इस बैठक में प्रधानमंत्री के साथ अमित शाह, राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण और जीतेन्द्र सिंह जैसे केंद्रीय मंत्रीगण भी उपस्थित रहे। इस बैठक में पीएम मोदी ने अधिकारियों के अच्छे कार्यों की तारीफ भी की।

बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अबकी ग़रीबी उन्मूलन और पानी से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने वाली है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार की बात करते हुए इसके 5 लाख डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने इसके लिए रोडमैप तैयार करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोगों ने एक बार फिर से भाजपा को पूर्ण बहुमत दिया है, यह दिखाता है कि लोग हमारी सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों से ख़ुश हैं। इसका श्रेय उन्होंने उन अधिकारियों को दिया, जिन्होंने बीते पाँच वर्ष में सरकार के विभिन्न लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा:

“हमें लोगों की आकांक्षाओं को एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए, जिसके लिए हमें और कठोर मेहनत करनी है। उम्मीदों से पता चलता है कि लोग उत्सुक हैं और उनमें देश को बदलने की चाहत भी है। हमारा उद्देश्य भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए हम में से हर व्यक्ति को अपने विभाग के लिए एक रोडमैप तैयार करना चाहिए और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए। आप लोग समाज के हर तबके का परामर्श लें और नीतिगत मुद्दों पर ताज़ा विचार लें।”

सरकारी कामकाज में तकनीक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने अधिकारियों से कहा कि इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी और कार्यक्षमता में भी इजाफा होगा। नरेन्द्र मोदी ख़ुद सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं और डिजिटल इंडिया के सपने के साथ सभी सुविधाओं को इन्टरनेट के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रयास भी करते रहे हैं। भीम यूपीआई और वन विंडो रजिस्ट्रेशन इसके उदाहरण हैं। इस बैठक के दौरान अधिकारियों ने भी सरकारी कामकाज को लेकर अपने विचार सामने रखे और पीएम ने उन सभी को ध्यान से सुना।

‘मेक इन इंडिया’ की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस दिशा में अभी ठोस प्रगति की ज़रूरत है। उन्होंने छोटे कारोबारियों व उद्यमियों के लिए सहूलियत वाला माहौल तैयार करने पर जोर देते हुए इस दिशा में कार्य करने की बात कही। कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा ने कहा कि सभी मंत्रालयों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने चाहिए और इन निर्णयों को 100 दिन के भीतर मंज़ूरी भी मिलनी चाहिए। पीएम ने कहा कि उन्हें अपनी टीम पर गर्व है। उन्होंने आह्वान किया कि जनता की उम्मीदों को मौके के तौर पर लेना चाहिए।

राजस्थान कॉन्ग्रेस में उठापटक: CM गहलोत ने दिल्ली में डाला डेरा, पायलट ने खेत में बिताई रात

लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद से ही राजस्थान की राजनीति करवट बदल रही है। इन दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच अनबन की खबरें जगजाहिर हैं। अशोक गहलोत जहाँ अपने बेटे वैभव गहलोत की हार के लिए सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं सचिन पायलट के समर्थक मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारी प्रदेश की सभी 25 सीटों पर हार के लिए गहलोत को जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफे की माँग कर चुके हैं। इसके साथ ही पायलट के समर्थक अशोक गहलोत की जगह सचिन पायलट को सीएम बनाने के स्वर बुलंद कर रहे हैं।

मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए गहलोत को अपनी कुर्सी जाने का भय सता रहा है। इसलिए वो इस सियासी तूफान के थमने का इंतजार कर रहे हैं और दिल्ली में लगातार कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। गहलोत पिछले तीन दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और पार्टी नेतृत्व को प्रदेश में हुई हार के कारण गिनाने में जुटे हैं। इसके साथ ही वो अहमद पटेल, मुकुल वासनिक व अविनाश पांडे से मुलाकात कर उनकी मदद से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं, सचिन पायलट इन दिनों राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में घूम रहे हैं। इसी सिलसिले में वो रविवार (जून 9, 2019) देर शाम जालोर जिले के कासेला गाँव में जनता के बीच पहुँचे। पायलट ने कासेला गाँव के ही एक किसान जय किशन के खेत में रात गुजारी। इस दौरान वो उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद एक आम नागरिक की तरह नजर आए। सचिन पायलट ने किसानों के बीच न केवल वक्त गुजारा बल्कि उन्होंने खुले आसमान में खाट पर बैठकर खाना भी खाया। सचिन पायलट ने अपने इस दौरे पर स्थानीय जनता से बातचीत भी की। पायलट गहलोत के राजनीतिक कार्यक्षेत्र के विधायकों व कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करके पार्टी काडर के बीच अपनी जमीन और मजबूत करने में लगे हुए हैं।

सचिन पायलट ने ट्वीट में लिखा, “सांचोर के ग्राम कासेला में रात्रि विश्राम के दौरान ग्रामीणों से मुलाकात करके बहुत खुशी हुई। किसान जयकिशन जी एवं उनके परिवार और यहाँ की जनता से मेरा मन पूरी तरह से जुड़ा हुआ है, दो साल पहले भी मैं इसी गाँव में रूका था। आपके द्वारा किए गए आदर-सत्कार एवं स्नेह के लिए मैं आभारी हूँ।”

SC ने गिरफ्तार पत्रकार प्रशांत कनौजिया को फौरन रिहा करने का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने को लेकर यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पत्रकार प्रकाश कनौजिया को फौरन रिहा करने का आदेश दिया है। यही नहीं, मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यूपी पुलिस को फटकार भी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर प्रशांत को किन धाराओं के तहत अरेस्ट किया गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उसे अरेस्ट किस आधार पर किया गया था?

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की भी याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि एक नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है, उसे बचाए रखना जरूरी है। गौरतलब है कि प्रशांत कनौजिया पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक टिप्पणी करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने एक विडियो को शेयर करते हुए एक विवादित कैप्शन लिखा था।

प्रशांत की पत्नी जिगीशा अरोड़ा ने सोमवार (जून 10, 2019) को शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए इस गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। उनकी अर्जी में कहा गया है कि पत्रकार पर लगाई गई धाराएँ जमानती अपराध में आती हैं। ऐसे मामले में कस्टडी में नहीं भेजा जा सकता। याचिका पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है, क्योंकि यह गिरफ्तारी अवैध और असंवैधानिक है। जिगिशा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (जून 11, 2019) को सुनवाई करते हुए प्रशांत की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया और तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के जज ने सोशल मीडिया पर टीका-टिप्पणी को लेकर एडिशनल सॉलिशिटर जनरल को कहा कि हम जज लोगों को भी यहाँ काफी कुछ सुनने को मिलता है, इसका मतलब यह नहीं कि हम किसी को भी उठा कर जेल में डाल दें।

इस्लामिक बैंकिंग और हलाल निवेश के नाम पर ₹2000 करोड़ ऐंठने के बाद मंसूर खान करना चाहता है ख़ुदकुशी

बेंगलुरु में एक निवेशक फर्म का मालिक निवेशकों का सैकड़ों करोड़ रुपया लेकर चंपत हो गया है। कंपनी के मालिक के खिलाफ पुलिस विभाग में महज 5 घंटों में 3300 शिकायत दर्ज हुई। शिकायतकर्ताओं में अधिकतर बेंगलुरु के मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।

दरअसल, सन 2006 में खाड़ी से लौटे मोहम्मद मंसूर खान ने इस्लामिक बैंकिंग और हलाल निवेश के नाम पर एक फर्म बनाई जिसका नाम रखा ‘आई मॉनेटरी एडवाइजरी’ (I Monetary Advisory). इस्लामिक बैंकिंग के नाम पर मंसूर खान ने अपने समुदाय के लोगों से इस फर्म में निवेश करने को कहा। उसने उन मुस्लिमों को निशाना बनाया जो इस्लामिक कानून के डर से किसी वित्तीय फर्म में निवेश करने से कतराते हैं। निवेश आने पर मंसूर खान ने उस पैसे से ज्वेलरी, रियल एस्टेट, बुलियन ट्रेडिंग, फार्मेसी, प्रकाशन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में जमकर व्यवसाय किया और धन कमाया। आई मॉनेटरी एडवाइजरी में निवेशकों का 2000 करोड़ रुपया लग चुका है।

मुस्लिम समाज से पैसे निवेश करवा कर और उन्हें 14% से 18% के लाभ का सपना दिखाकर अब मंसूर खान चंपत हो गया है। निवेशक जब बेंगलुरु के शिवाजीनगर स्थित IMA के दफ्तर में अपना पैसा माँगने पहुँचे तो वहाँ कोई नहीं मिला। अब मंसूर खान कहाँ है यह किसी को नहीं पता।

मजेदार बात यह भी है कि व्हाट्सप्प पर मंसूर खान की आवाज वाली एक ऑडियो क्लिप घूम रही है जिसमें मंसूर खान यह कह रहा है कि वह नेताओं और बाबुओं को रिश्वत देते तक गया है इसलिए आत्महत्या करना चाहता है। ऑडियो क्लिप में मंसूर खान ने यह भी कहा कि बेंगलुरु के एक कॉन्ग्रेसी विधायक रोशन बेग ने उसके 400 करोड़ रुपए हड़प लिए हैं। हालाँकि रोशन बेग ने ऑडियो क्लिप के वास्तविक होने पर संदेह प्रकट किया है। पुलिस भी जाँच में जुटी है कि कहीं मंसूर खान ने सचमुच में आत्महत्या तो नहीं कर ली।

खबर के अनुसार पुलिस अधिकारी डीसीपी राहुल कुमार शाहापुरवाड़ ने बताया कि पुलिस मंसूर खान की खोज कर रही है और यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ऑडियो क्लिप वास्तव में मंसूर खान की है या नहीं। मंसूर खान की आवाज के दावे वाली ऑडियो क्लिप मोहम्मद खालिद अहमद नामक मंसूर के एक पार्टनर की शिकायत के एक दिन बाद सामने आई थी। मोहम्मद खालिद अहमद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि मंसूर ने उसे 1.3 करोड़ रुपए की चपत लगाई है।

वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस विधायक रोशन बेग भी साइबर पुलिस में केस दर्ज करवाने वाले हैं। इससे पहले एक अन्य ऑडियो क्लिप में भी IMA फर्म के साथ उनका नामा जोड़ा जा चुका है।     

1 दिन में Encephalitis ने ली 25 बच्चों की जान, 1 हफ्ते में 56 मौत: CM ने कहा ‘जागरूकता की कमी’

बिहार के मुजफ्फरपुर व आसपास के क्षेत्र में ‘एक्यूट इन्सेफ़लाईटिस सी सिंड्रोम (AIS)’ नामक बीमारी बच्चों पर कहर बन कर टूट रहा है। पिछले एक सप्ताह में 56 बच्चों की मौत के बाद राज्य के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मुजफ्फरपुर व वैशाली के विभिन्न अस्पतालों में इस बीमारी से एक दिन के भीतर 25 बच्चों के मरने की ख़बर के बाद क्षेत्र में हाहाकार मच गया है। अस्पतालों में कई बच्चे अब भी इस बीमारी से पीड़ित हैं, जिन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। सोमवार (जून 10, 2019) को आलम यह रहा कि हर कुछ मिनटों के अंतराल पर बच्चों की जान जाती रही।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इतनी मौतों की वजह जागरूकता की कमी है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि इस बीमारी से इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले ज्यादा मौतें हुई हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय स्तर पर इस बीमारी की रोकथाम को लेकर बनी गाइडलाइन्स के अनुपालन में कमी है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि लोगों को पहले से अलर्ट रखा जाए। कुल मिला कर देखा जाए तो सूबे के 25 जिले अब तक इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। मुजफ्फरपुर के सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच की स्थिति यह है कि पीआईसीयू भर जाने के कारण एक ही बेड पर दो-तीन बच्चों का इलाज़ होता रहा।

लगातार पीड़ित बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हॉस्पिटल प्रशासन तीसरी यूनिट खोलने की तैयारी कर रहा है। गंभीर मरीजों को भी लाइन में लगाकर पीआईसीयू में भर्ती होना पड़ रहा है। एसकेएमसीएच में सोमवार को 44 में से 20 बच्चाें की माैत हाे गई। डॉक्टरों ने बताया कि चमकी बुखार (Encephalitis के लिए स्थानीय बोलचाल का शब्द) से पीड़ित बच्चों की उम्र 5-15 साल के बीच है। इस बीमारी के लक्षण तेज़ बुखार और शरीर में ऐंठन के रूप में दिखते हैं। 2012 में इस बीमारी से 120 बच्चों की मौत हो गई थी। पिछले वर्ष यह आँकड़ा 7 था, जो इस साल बढ़ कर 56 पहुँच चुका है।

प्रमंडलीय आयुक्त नर्मदेश्वर लाल ने अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान तैयारियों को आधा-अधूरा बताया। उन्होंने साफ़-साफ़ कहा कि इस बीमारी को लेकर प्रचार-प्रसार में कोताही बरती गई है। नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा ने अस्पतालों में जाकर पीड़ितों का हालचाल जाना। स्थिति यह थी कि मुजफ्फरपुर और वैशाली के अस्पताल एक सप्ताह से परिजनों के चीत्कार से गूँज रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, चमकी बुखार से ग्रस्त बच्चों के शरीर में चीनी की कमी पाई गई। अस्पतालों में मरीजों के मुकाबले चिकित्सकों की भी भारी कमी है।

इस बीमारी से बचाव की बात करते हुए वरिष्ठ चिकित्सक ने सलाह देते हुए कहा:

“बच्चों को धूप में नही जाने दें। दिन में दो से तीन बार बच्चों को स्नान जरूर कराएँ। रात को भूखे पेट नहीं सोने दें। पानी व नींबू की शर्बत पर्याप्त मात्र में पीने के लिए दें। तेज बुखार होने पर पानी से स्नान कराते हुए सर पर पानी की पट्टी दें। इसके साथ जल्द से जल्द निकट के अस्पताल में बच्चों को लेकर पहुँचना चाहिए। किसी ओझा-गुणी के चक्कर में समय नही गँवाना चाहिए। जितना जल्द अस्पताल पहुँचेंगे, बच्चा उतना ही जल्द स्वस्थ होगा।”

मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी ने किया 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची का बलात्कार, गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश में बलात्कार की घटनाएँ थमती नहीं नज़र आ रही हैं और कानून व्यवस्था की हालत भी काफ़ी बेहाल है। अब मेरठ के एक मरदसे में पढ़ाने वाले मौलवी द्वारा 12 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। शोर मचाने पर छात्रों ने उक्त मौलवी को दबोच भी लिया लेकिन अँधेरे का फायदा उठा कर वह वहाँ से भागने में कामयाब रहा। बाद में पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ़्तार कर लिया।

सुरूरपुर क्षेत्र के एक ग्रामीण के अनुसार, कस्बे के बाहरी छोर पर एक मदरसा है, जिसमें न सिर्फ़ उस इलाके के बल्कि आसपास के गाँवों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। आरोपित मौलवी शहीद हर्रा का रहने वाला है और वह उसी मदरसे में तालीम देता था। उसके पिता का नाम इकबाल है। शनिवार (जून 8, 2019) देर शाम मौलवी बच्ची के घर पहुँचा और पढ़ाने का बहाना कर उस 12 वर्षीय बच्ची को अपने साथ मदरसे में ले गया।

वहाँ उस मौलवी ने एक कमरे में ले जाकर उक्त बच्ची का बलात्कार किया। जब पीड़िता ने शोर मचाया तो आसपास के कमरों से छात्र दौड़े आए। बच्ची को बदहवास अवस्था में देख कर छात्रों का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उन्होंने आरोपित मौलवी की वहीं पर पिटाई भी कर दी। मदरसे में दिन भर पंचायत चली, जिसमें इस घटना को लेकर चर्चा की गई। पीड़िता के परिजनों ने पुलिस को इस घटना की जानकारी दी। मौलवी पर पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर हावड़ा में BJP कार्यकर्ता की हत्या, 2 अन्य को रॉड से पीटा

पश्चिम बंगाल में फिर से भाजपा के एक कार्यकर्ता के मारे जाने की ख़बर आई है। राजनीतिक हिंसा से ग्रस्त राज्य में ताज़ा घटना हावड़ा जिले की है। बंगाल भाजपा ने कहा है कि उसके एक कार्यकर्ता को सिर्फ़ ‘जय श्री राम’ बोलने पर मार डाला गया। पुलिस ने 43 साल के समतुल डोलोई की मौत की पुष्टि की है, जिसका शव अमता थाना क्षेत्र के सरपोता गाँव से एक खेत में मिला। हालांकि, मौत के कारणों पर अधिकारियों ने अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर हत्या के आरोप लगाए हैं। डोलोई रविवार (जून 9, 2019) की रात एक समारोह में गए हुए थे लेकिन उनके देर रात न लौटने के कारण लोगों को शक हुआ। इसके बाद सोमवार को उनका शव मिला।

भाजपा हावड़ा ग्रामीण इकाई के अध्यक्ष अनुपम मालिक के अनुसार, डोलोई भाजपा समर्थक थे और उन्हें तृणमूल के कार्यकर्ताओं द्वारा सिर्फ़ इसीलिए मार डाला गया क्योंकि उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए थे। तृणमूल विधायक समीर पांजा ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि जाँच के बाद ही मौत के पीछे की असली वजह सामने आएगी। डोलोई अमता क्षेत्र में स्थित चलुनिया गाँव के निवासी थे।

भाजपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं ने शोक संतप्त परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहने की बात करते हुए कहा कि डोलोई की हत्या काफ़ी बेरहमी से की गई है। इस सम्बन्ध में प्रदेश भाजपा ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। कहा जा रहा है कि हालिया लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने बूथ पर भाजपा उम्मीदवार को बढ़त दिलाई थी। डोलोई के एक रिश्तेदार ने कहा कि मृतक ने एक कार्यक्रम के दौरान कई बार ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया था। इससे कार्यक्रम में शामिल तृणमूल के कुछ सक्रिय कार्यकर्ता काफ़ी नाराज़ हो गए।

इसके थोड़ी देर बाद वह लापता हो गए और उनकी लाश मिली। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले मृत्यु के समय और कारणों को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। तृणमूल ने आरोप लगाया कि हर मरने वाला अब एक भाजपा कार्यकर्ता है और भाजपा ने ऐसी मौतों को राजनीतिक रंग देना जारी रखा है। तृणमूल ने इस घटना को आपसी दुश्मनी का परिणाम बताया। बता दें कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की लगातार बढ़ रही वारदातों को लेकर केंद्र सरकार भी गंभीर है और राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने गृह मंत्री अमित शाह से मिल कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया है।

इसके अलावा सोदपुर की एक अन्य घटना में दो सिक्यूरिटी गार्ड को तृणमूल के कार्यकर्ताओं द्वारा लोहे के रॉड से पीटे जाने की ख़बर भी आई है। दोनों ने भाजपा समर्थित यूनियन बनाने की कोशिश की थी, जिससे तृणमूल ट्रेड यूनियन के लोग भड़क उठे। दोनों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खरदाह पुलिस स्टेशन में इस मामले में तृणमूल ट्रेड यूनियन विंग के 6 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। सोमवार को भाजपा ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपने कार्यकर्ताओं की हत्या के ख़िलाफ़ ‘काला दिवस’ मनाया।