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दिव्यांग महिला को पति ने WhatsApp से दिया तलाक़, ₹10 लाख के लिए घर से निकाला

महाराष्ट्र के ठाणे में एक शारीरिक रूप से विकलांग महिला को उसके पति द्वारा Whatsapp के माध्यम से तीन तलाक़ देने का मामला सामने आया है। आरोपित ने Whatsapp के माध्यम से तीन बार तलाक़ लिख कर भेजा और रिश्ता ख़त्म करने की बात कही। इसके बाद पीड़िता ने कई बार फोन कॉल किया लेकिन उसने उठाने से इनकार कर दिया। पति द्वारा इस तरह की हरकत किए जाने से दुःखी पीड़िता ने भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत की है। भोईवाड़ा थाने के वरिष्ठ निरीक्षक कल्याण कार्पे ने बताया कि उन्हें पीड़ित दिव्यांग महिला की ओर से सोमवार को शिकायत मिली है। पुलिस ने बताया कि वो लोग इस पर क़ानूनी सलाह ले रहे हैं।

शारीरिक रूप से विकलांग 23 वर्षीय महिला के अनुसार, उसका निकाह 18 मई 2014 को हुआ था। उसने अपने सास-ससुर पर भी प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उसके ससुराल पक्ष के लोग उससे 10 लाख रुपए की माँग कर रहे थे। जब वो रुपए देने में असमर्थ साबित हुई तो उसके पति ने उसे घर से निकाल बाहर कर दिया। पुलिस अधिकारी कार्पे ने कहा, “फिलहाल भिवंडी में अपने माता-पिता के साथ रह रही महिला ने आरोप लगाया कि हाल ही में उसके पति ने Whatsapp पर ‘तीन तलाक़’ का संदेश भेजा।” पीड़िता ने महिला संस्थानों से मिल कर भी अपनी बात रखी है।

पीड़िता ने गुहार लगाई है कि उसे तलाक़ नहीं चाहिए और वो अपने पति के साथ रहना चाहती है। अभी तक आधिकारिक रूप से पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया है। इस सम्बन्ध में क़ानूनी सलाह लेने की प्रक्रिया पर कार्य किया जा रहा है। बता दें कि अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने महिला विरोधी तीन तलाक़ प्रक्रिया को ख़त्म कर दिया था और सरकार ने भी तीन तलाक़ पर संसद में बिल पेश किया था। अभी हाल ही में एक मुस्लिम महिला की पति ने पड़ोसी के साथ मिल कर सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की क्योंकि उसने मोदी से प्रभावित होकर भाजपा को वोट दे दिया था।

रविवार (मई 5, 2019) को उत्तर प्रदेश के भदोही में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर की मुस्लिम महिलाओं को सन्देश देते हुए कहा था, “मुस्लिम बहनों से एक बात कहना चाहता हूँ। आज कई मुस्लिम देशों में तीन तलाक़ की परंपरा नहीं है। हम भी भारत की मुस्लिम बहनों को वही अधिकार देना चाहते हैं। हम किसी की धार्मिक भावनाओं का अनादर नहीं करते हैं। महिलाओं को समान अधिकार मिले, इसके लिए हम लगातार काम कर रहे हैं।

स्वरा भास्कर के बाद अरविन्द केजरीवाल के जुमलों की याद दिला रहे हैं The Placard Guy

प्लाकार्ड्स की मदद से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी राय रखने वाले The Placard Guy नाम से मशहूर मधुर सिंह एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं, लेकिन इस बार उनका मुद्दा स्वरा भास्कर की ऊँगली नहीं, बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हैं।

हाल ही में मतदाताओं से अपनी ऊँगली का इस्तेमाल स्वरा भास्कर की तरह नहीं, बल्कि समझदारी से मतदान के लिए करने की अपील करने वाले ‘प्लाकार्ड गाय’ ने नई पहल शुरू की है। इस बार तख्तियों की मदद से मधुर सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल द्वारा उनके राज्य दिल्ली में ही फैलाए गए उनके ‘रायतों’ और धरनों के बीच भुला दिए गए वायदों की याद दिला रहे हैं।

इन प्लाकार्ड्स में अरविन्द केजरीवाल के पर्यावरण के लिए उठाए गए Odd-Even फॉर्मूला से लेकर दिल्ली को सिंगापुर बना देने के उनके वादों को याद दिला कर मतदाताओं से समझदारी से मतदान करने की अपील कर रहे हैं।

अर्बन नक्सल हैं AAP प्रत्याशी
केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली बन गई कचरे के ढेर की ‘सिंगापुर’
ऑड-इवन फॉर्मूला कहाँ गया?
दिल्ली के मतदाताओं की ‘फर्जी गर्लफ्रेंड’
दिल्ली है पूरे भारत की राजधानी
मोहल्ला क्लिनिक में स्वास्थ्य लाभ लेते हुए गाय -बछड़े
‘गन्दी बात’

@ThePlacardGuy ने दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल के उन सभी जुमलों की सच्चाई दिखाने का प्रयास किया है, जिनके दम पर वो पहले भी मतदाताओं की आँखों में धुल झोंककर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और अब दिल्ली की 7 की 7 लोकसभा सीट जीतने का सपना देख रहे हैं। इन तस्वीरों में अरविन्द केजरीवाल के अनुसार मोहल्ला क्लिनिक में मिलने वाली ‘विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं’ में कचरा खा रही गाय भी देखी जा सकती है।

DU में दाखिले की प्रक्रिया को अति विचित्र बताने वाले अरविन्द केजरीवाल ने राजनीतिक लाभ के लिए अन्य राज्यों से आकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ बयान दिया था। इसके साथ ही दिल्ली को लंदन बना देने वाले अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली हर जगह कूड़े और कचरे के ढेर से भरी पड़ी है। आम आदमी पार्टी प्रमुख के हर गली-मोहल्ले को CCTV से पाट देने जैसे वादे मात्र जुमले साबित हुए हैं। इन्हीं में से एक तख्ती में प्लाकार्ड गाय बता रहे हैं कि AAP नेता मार्लेना आतिशी अर्बन नक्सल हैं और उनके पैरेंट्स ने आतंकवादी अफजल गुरु की रिहाई के लिए दया याचना भी दायर की थी।

इन सबके बीच एक तख्ती में अरविन्द केजरीवाल द्वारा दिल्ली के मतदाताओं को फर्जी कॉल कर के AAP को वोट डालने की कोशिशों पर कटाक्ष करते हुए लिखा है, “इतनी बार गर्लफ्रेंड भी मुझे कॉल नहीं करती है, जितनी बार अरविन्द केजरीवाल फर्जी खबर देने के लिए करते हैं।”

एक आखिरी तख्ती में The Placard Guy ने कॉन्ग्रेस के लिए कुछ ‘गन्दी बात’ लिखी है। हालाँकि, जो लिखा है वह अस्पष्ट है, लेकिन विरोध करने के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना शोभा नहीं देता है।

अपना मुँह बंद करो पाकिस्तानियो: झंडा ओढ़कर राखी सावंत ने अकेले पाक ‘प्रशंसकों’ को चखाया मजा

टेलीविज़न की जानी-मानी हस्ती और अदाकारा राखी सावंत ने बुधवार (मई 08, 2019) को इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें वह पाकिस्तानी झंडे में लिपटी हुई दिखाई दे रही हैं।

पाकिस्तानी झंडे में लिपटी राखी सावंत

इस तस्वीर पर राखी सावंत ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें अपने देश ‘भारत’ से प्यार है और वो ऐसा केवल फ़िल्म “धारा 370” के लिए कर रही हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तानी झंडे में लिपटा हुआ दिखाया गया है। इस फ़िल्म में वो एक पाकिस्तानी नर्तकी की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म की कहानी कश्मीरी लोगों के जिहादी बनने पर आधारित है।

इसके अलावा, राखी सावंत ने एक पाकिस्तानी नर्तकी की भूमिका के बारे में बताते हुए एक वीडियो अपलोड किया है। इसमें उन्होंने अपने किरदार के बारे में बताते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चों और कश्मीरियों को जिहाद का लालच देकर उन्हें जिहादी बनाया जाता है, इस फ़िल्म में वो उन्हीं की पोल खोलती हैं। साथ ही, लोगों से यह अपील भी की है कि वो सिर्फ़ एक भूमिका निभा रही हैं और इसके लिए उन्हें परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

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Im jast plying my character in the film ?

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राखी सावंत द्वारा इस वीडियो को अपलोड किए जाने के बाद उन्हें तीखी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा, इनमें अधिकतर पाकिस्तानी लोगों ने भद्दे कमेंट किए हैं।


राखी सावंत की पोस्ट पर पाकिस्तानी द्वारा की गई टिप्पणी

पाकिस्तानियों को राखी सावंत के इन कपड़ों पर आपत्ति है

राखी सावंत को गाली देते पाकिस्तानी

राखी सावंत को गाली देते पाकिस्तानी

इस वीडियो पर कुछ लोगों ने राखी सावंत को निशाना बनाकर भद्दे कमेंट्स किए, जिसके जवाब में उन्होंने कमेंट करने वालों को अपना मुँह बंद रखने की राय दी है।


गालियों का जवाब देते हुए राखी

राखी सावंत अपनी हरक़तों के लिए सुर्ख़ियों में रहना पसंद करती हैं। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना व्यक्तिगत अनुभव शेयर किया था, इसमें उन्होंने लिखा था कि एक चोट लगने के बाद उन्हें फिर से चलने में यीशु मसीह ने मदद की थी। इस पर अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने यीशु मसीह को लेकर किए गए कमेंट के लिए अपनी निराशा जताई थी, और यीशु मसीह व ख़ुद के बीच में किसी एक को चुनने तक के लिए कह दिया था।

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं, गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं: BJP को ट्रोल करने वाले जावेद अख़्तर को समर्पित पंक्तियाँ

अब तो इस तालाब का पानी बदल दो, ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं” जावेद अख़्तर ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए इन पंक्तियों का इस्तेमाल किया। महान कवि दुष्यंत कुमार की यह कविता इंदिरा गाँधी के दौर में लिखी गई थी, उनके तानाशाही रवैये पर इससे चोट की गई थी। उसी दौर में, जब जावेद अख़्तर और सलीम ख़ान मिल कर अमिताभ बच्चन के लिए दीवार और शोले जैसी फ़िल्में लिख रहे थे। उस दौर में हो सकता है कि जावेद अख्तर जैसे ‘चाटुकारों’ की चाँदी रही हो, लेकिन जयप्रकाश नारायण की विचारधारा पर चलने वाले कवि, जैसे दुष्यंत और दिनकर इंदिरा के प्रखर विरोधी के रूप में सामने आए थे। वो अलग बात है कि कॉन्ग्रेस को अपदस्थ करने के लिए दुष्यंत द्वारा लिखी गई कविता का प्रयोग आज जावेद अख़्तर उसी कॉन्ग्रेस को (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से) सत्ता दिलाने के लिए कर रहे हैं। विडम्बना इसे देख कर हज़ार मौतें मरेंगी।

जावेद अख़्तर द्वारा पिछली कुछ फ़िल्मों में लिखे गए गानों कोई सुनने वाला ही नहीं मिला। अब आपसे कोई पूछे कि ‘रॉक ऑन 2’, ‘पलटन’ और ‘नमस्ते इंग्लैंड’ का कोई गाना बताइए, तो आप क्या जवाब देंगे? कुछ नहीं, क्योंकि ये गाने आप तक पहुँचे ही नहीं, फ्लॉप हो गए। कहानियाँ लिखना तो जावेद लम्बे अरसे पहले छोड़ चुके हैं। सलीम ख़ान के साथ उनकी जोड़ी आज से 3 दशक पहले ही टूट चुकी है। कुल मिलकर जनता ने उन्हें बदल दिया है। अर्थात, उनकी प्रासंगिता ख़त्म हो गई है, उनकी जगह दूसरों ने ले ली है, अब उनमें वो बात नहीं रही। जिन कुम्हलाए हुए कँवल के फूलों का वह उदाहरण दे रहे हैं, उसकी जगह वो ही फिट बैठते हैं क्योंकि इंडस्ट्री में अब उनके गाने नहीं चलते।

ऐसा उन्होंने स्वाति चतुर्वेदी की एक ट्वीट के रिप्लाई में लिखा है। स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में दावा किया कि भाजपा का एक पूर्व मंत्री इसलिए नाराज़ है क्योंकि पार्टी ने एक ‘आतंकवादी’ को टिकट दिया है। वो अनाम मंत्री इसीलिए भी नाराज़ हैं क्योंकि पीएम मोदी ने राजीव गाँधी को भ्रष्टाचारी कह दिया है। स्वाति चतुर्वेदी, जो ट्रोल है, बकलोल है, ने उस मंत्री की पहचान नहीं बताई और जताना चाहा कि उनके गुप्त सूत्रों की पहुँच काफ़ी दूर-दूर तक है। स्वाति के बारे में यहाँ चर्चा नहीं की जाएगी क्योंकि उनकी बातों को अब लोगों ने गंभीरता से लेना छोड़ दिया है लेकिन उम्रदराज जावेद अख़्तर की बातों का जवाब देना आवश्यक है।

जावेद अख़्तर ने अगर दुष्यंत कुमार की यह कविता पढ़ी होगी, जिससे उन्होंने ये पंक्तियाँ ली हैं, तो शायद वह ज़रूर ख़ुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस कर रहे होंगे। जावेद अख़्तर ने जो पंक्तियाँ ट्वीट की हैं, उसके पहले की पंक्तियाँ कुछ यूँ हैं:

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,
गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं

गाने लिखते-लिखते जावेद अख़्तर अब चिल्लाने लगे हैं। वह एक ट्विटर ट्रोल हो चुके हैं। वो चिल्लाते हैं, कभी बुर्क़े और घूँघट को समान रूप से दिखाने के लिए तो कभी ओसामा बिन लादेन और साध्वी प्रज्ञा की तुलना करने के लिए। चिल्लाना उनका पेशा हो चुका है, वो भी सोशल मीडिया पर। अब जावेद अख़्तर ने जो पंक्तियाँ भाजपा सरकार के लिए उद्धृत की हैं, उसकी अगली पंक्तियों को देखें, क्योंकि जावेद अख़्तर पर वह भी काफ़ी फिट बैठती हैं:

वो सलीबों के क़रीब आए तो
हम को क़ाएदे क़ानून समझाने लगे है

गानें फ्लॉप होने के कारण अब जावेद अख़्तर नियम-क़ानून बताने पर उतर आए हैं, वरना कॉन्ग्रेस के दौर में शायद ही उन्होंने इस कदर लोगों से लड़ाइयाँ की हों। पंक्तियाँ तो दुष्यंत कुमार की एकदम सटीक हैं, एक महान कवि द्वारा रचित हैं, लेकिन इसे कॉन्ग्रेस सरकार के लिए लिखा गया था। अतः, जावेद अख़्तर ने उसे दोहरा कर अच्छा ही किया है। अगर वो ये पंक्तियाँ आज ट्विटर पर नहीं लिखते तो शायद हम भी आपको दुष्यंत कुमार और उनकी इस कविता के बारे में नहीं बता पाते। धन्यवाद जावेद अख़्तर का, जिनके कारण हमने दुष्यंत कुमार को फिर से विजिट किया। जावेद अख़्तर को दुष्यंत की ही इन पंक्तियों के साथ ‘बुर्का सलाम’:

एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है
आज शायर यह तमाशा देखकर हैरान है

मोदी के चाचा ने PM से अपने संबंध छिपाकर सरकारी अस्पताल में कराया इलाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाचा श्री कांतिलाल मोदी को यूरिन इन्फेक्शन की शिकायत हुई तो वे इलाज के लिए सूरत के सिविल अस्पताल चले गए। अस्पताल में उन्होंने किसी को नहीं बताया कि वे प्रधानमंत्री के चाचा हैं। हालाँकि बाद में यह बात खुल गई तो सभी को आश्चर्य हुआ।

दरअसल प्रधानमंत्री के 81 वर्षीय चाचा जी को यूरिन इंफेक्शन की समस्या हो गई जो आजकल आमतौर पर वृद्ध व्यक्तियों को हो जाती है। गरमी के मौसम में यह समस्या ज्यादा होती है। एक समाचार पत्र के अनुसार कांतिलाल मोदी अपना इलाज कराने सूरत के सिविल अस्पताल चले गए और भरसक प्रयास किया कि प्रधानमंत्री से उनके संबंध की किसी को कानों कान खबर न हो। डॉक्टर ने उन्हें देखा और प्राथमिक जाँच में पाया कि उनका सुगर लेवल 223 और रक्तचाप 150 है।

कांतिलाल मोदी को सर्जरी विभाग में रेफर कर एडमिट कर लिया गया है और उनकी हालत सामान्य है। सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ गणेश गोवेकर को जब यह जानकारी मिली कि नरेंद्र मोदी के चाचा अस्पताल में भर्ती हैं तो उन्होंने फोन कर के हालचाल लिया और डॉक्टरों को अच्छी तरह इलाज करने का निर्देश दिया।

नरेंद्र मोदी के परिवारवाले अत्यंत सामान्य जीवन जीते हैं। कांतिलाल सूरत में 15 वर्षों से बेटे के साथ रह रहे हैं लेकिन उन्होंने किसी को नहीं बताया कि वे प्रधानमंत्री के चाचा हैं। कांतिलाल ने बताया कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब मिलना-जुलना होता था लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद वे उनसे नहीं मिल पाए हैं। कांतिलाल के मुताबिक वे कभी भी किसी को नहीं बताते हैं कि मोदी उनके भतीजे हैं।

तेज बहादुर यादव की याचिका ख़ारिज, चुनाव प्रक्रिया में दखल देने से SC ने किया इनकार

वाराणसी से नामांकन रद्द होने के बाद बीएसएफ से बर्खास्त पूर्व सैनिक तेज बहादुर यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। गुरुवार (मई 9, 2019) को सर्वोच्च न्यायालय ने तेज बहादुर यादव की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग द्वारा उनके नामांकन को खारिज कर दिए जाने को चुनौती दी थी।

दरअसल, तेज बहादुर ने प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ बतौर एसपी प्रत्याशी वाराणसी लोकसभा सीट से पर्चा भरा था, लेकिन नामांकन रद्द होने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने मनमाने ढंग से उनका नामांकन रद्द किया है। जबकि आयोग ने तेजबहादुर के सभी आरोपों को नकारते हुए अपने फैसले को सही ठहराया था।

आज (अप्रैल 9, 2019) इस याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव प्रक्रिया में दखल देने से साफ़ मना किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई कारण नहीं दिखाई दिया जिससे कि तेजबहादुर की याचिका पर गौर किया जाए।

बता दें कि नामांकन पत्रों की जाँच के बाद तेजबहादुर यादव द्वारा दाखिल नामांकन पत्रों में बीएसएफ से बर्खास्तगी से संबंधित दो जानकारी सामने आई थीं। इसके कारण उन्हें 24 घंटों के भीतर बीएसएफ से एनओसी लेकर जवाब देने को कहा गया था। तेज बहादुर को जारी किए गए नोटिस में कहा गया था कि वह बीएसएफ से एनओसी लेकर आएँ, जिसमें साफ़ हो कि उन्हें किस कारण से नौकरी से बर्खास्त किया गया था। 1 मई को एनओसी पेश न कर पाने के कारण रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था।

राहुल गाँधी अब लड़ सकते हैं चुनाव, ब्रिटिश नागरिकता मामले में SC ने ख़ारिज की याचिका

राहुल गाँधी और उनकी ब्रिटिश नागरिकता को लेकर जो विवाद उठा था, उस पर सुप्रीम कोर्ट से उन्हें बड़ी राहत मिली है। नागरिकता के मुद्दे पर फैसला होने तक उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 लड़ने से प्रतिबंधित करने का केन्द्र और निर्वाचन आयोग को निर्देश देने के लिए दायर याचिका बृहस्पतिवार (9 मई) को ख़ारिज कर दी गई। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं के उस तर्क़ को ख़ारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि 2005-06 में ब्रिटेन की एक कंपनी के वार्षिक डेटा के साथ संलग्न फ़ॉर्म में राहुल गाँधी के ब्रिटिश नागरिक होने का कथित रूप से उल्लेख है।

ख़बर के अनुसार, जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को जवाब देते हुए कहा, “यदि कोई कंपनी किसी फॉर्म में उनकी राष्ट्रीयता ब्रिटिश लिख दे तो इससे वो ब्रिटिश नागरिक नहीं बन जाते।”

हिन्दू महासभा की तरफ से जय भगवान गोयल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनकी ब्रिटिश नागरिकता पर आपत्ति जताई थी और उनका नामांकन रद्द करने की माँग की थी। साथ ही इस पर जल्द सुनवाई करने की माँग पर ज़ोर दिया गया था। याचिका में यह सवाल भी उठाया गया था कि यह जानते हुए कि राहुल गाँधी की नागरिकता ब्रिटिश है, निर्वाचन आयोग द्वारा उनका नामांकन क्यों स्वीकार किया गया? याचिका में यह भी कहा गया था कि जनप्रतिनिधित्व क़ानून, 1981 की धारा 29A के अनुसार, केवल भारतीय नागरिक ही राजनीतिक पार्टी के पंजीकरण करने के हक़दार होते हैं।

इससे पहले, राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए ख़ुलासा किया था कि राहुल गाँधी ने एक प्राइवेट कम्पनी के रजिस्ट्रेशन काग़ज़ात में ख़ुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। ये कम्पनी लंदन में स्थित है। स्वामी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर राहुल गाँधी की भारतीय नागरिकता व संसद की सदस्यता समाप्त करने की माँग की थी। इस बाबत गृह मंत्रालय की ओर से राहुल को एक नोटिस भी भेजा गया था।

राहुल गाँधी को गृह मंत्रालय द्वारा भेजा गया नोटिस

ब्रिटिश नागरिकता और उनके नाम (राउल विंची) को लेकर पहले भी विवाद उठ चुका है, जिसके लिए भारतीय गृह मंत्रालय ने बड़ा क़दम उठाते हुए राहुल गाँधी को नोटिस थमाकर उनकी विदेशी नागरिकता पर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण माँगा था।

Fact Check: राजीव गाँधी की हत्या में BJP का हाथ? सोनिया के वफ़ादार अहमद पटेल एक नंबर के झूठे साबित

अभी हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को भ्रष्टाचारी नंबर एक कहा। इसके बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में उन्होंने राजीव गाँधी और उनके ससुराल वालों के निजी पिकनिक के लिए आईएनएस विराट का प्रयोग किए जाने को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। इसके बाद कॉन्ग्रेस खेमे में खलबली मच गई और गाँधी परिवार के सभी वफ़ादार अपने-अपने तरकश से विवादित टिप्पणियों के तीर लेकर सोशल मीडिया पर उतर आए। कइयों ने विवादित बयान दिए। अब इन सब में अहमद पटेल का नाम भी शुमार हो गया है। लम्बे समय से सोनिया गाँधी के वफ़ादार माने जाने वाले अहमद पटेल ने झूठ और भ्रम फैला कर जनता को बरगलाना चाहा है। लेकिन, वो भूल गए कि यह सोशल मीडिया का ज़माना है और पुराने समय के अधिकतर न्यूज़ आर्टिकल व पत्रिकाओं के लेख भी अब डिजिटलाइज हो चुके हैं।

अहमद पटेल ने अपने ट्वीट में लिखा, “शहीद प्रधानमंत्री को गालियाँ देना परम कायरता की निशानी है। लेकिन, क्या आपको पता है कि उनकी हत्या के लिए कौन लोग ज़िम्मेदार हैं? भाजपा समर्थित वीपी सिंह सरकार ने उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराने से मना कर दिया और बस एक PSO (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) के साथ छोड़ दिया। तमाम ख़ुफ़िया जानकारियों और लगातार अनुरोधों के बावजूद ऐसा किया गया।” इसके बाद अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि भाजपा की घृणा के कारण राजीव गाँधी की जान गई और आज वह अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए हमारे बीच मौजूद नहीं हैं।

अहमद पटेल ने राजीव गाँधी की सुरक्षा में चूक के लिए वीपी सिंह सरकार को निशाना बनाया। इस तथ्य को जाँचने के लिए जब भारतीय प्रधानमंत्रियों की सूची खंगाली तो पता चला कि वीपी सिंह 2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 तक देश के प्रधानमंत्री थे। अर्थात, वीपी सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान राजीव गाँधी ज़िंदा थे। 7 बार सांसद रहे अहमद पटेल के अनुसार, वीपी सिंह की सरकार ने राजीव गाँधी को बस एक पीएसओ दिया था। एक मिनट के लिए अगर उनकी बात मान भी लें, तो भी उनका बयान भ्रामक है क्योंकि राजीव गाँधी की हत्या के समय केंद्र में कॉन्ग्रेस समर्थित सरकार चल रही थी।

10 नवंबर 1990 को वीपी सिंह के बाद चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने। चंद्रशेखर की सरकार कॉन्ग्रेस पार्टी के समर्थन से बनी थी। उस समय राजीव गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे। वो 1985 से अपनी मृत्यु तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इंडिया टुडे की उस समय आई स्टोरी के अनुसार, चंद्रशेखर के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के भीतर माहौल ऐसा था, जैसे उन्हीं की पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनने जा रहा हो। राजीव-इंदिरा के पोस्टर्स चारों ओर छाए हुए थे। चंद्रशेखर के पीएम बनने के 6 महीने बाद (मई 21, 1991) राजीव गाँधी की हत्या हुई। अगर उनकी सुरक्षा कभी कम भी कर दी गई थी, तो क्या कॉन्ग्रेस समर्थित सरकार ने भी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को उचित सुरक्षा नहीं दी? उनको मिलने वाले पीएसओ की संख्या नहीं बढ़ाई?

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक और मुद्दे की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। उस समय कॉन्ग्रेस ने द्रमुक (DMK) को राजीव गाँधी की हत्या के लिए दोषी ठहराया था। वही डीएमके, जो आज कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन का हिस्सा है। जेटली ने कहा कि अचानक से 28 सालों बाद अब इस मामले में कॉन्ग्रेस ने भाजपा में दोष खोजने की कोशिश की है। अतः, कॉन्ग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल का बयान भ्रामक है।

‘विदेशी चंदा, सांसदों और मीडिया की लॉबिंग’: SC ने माँगा सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह से जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के एक स्वैच्छिक संगठन ‘लॉयर्स वॉइस’ द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। इस याचिका में संबंधित संस्थाओं द्वारा विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम (FCRA) क़ानून के उल्लंघन पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जाँच की माँग की गई है।

FCRA उल्लंघन की ख़बर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने ग़ैर सरकारी संगठन के FCRA लाइसेंस को रद कर दिया था, लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि इनके द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के ख़िलाफ़ गतिविधियों में उपयोग किया गया।

लॉयर्स वॉइस नामक संगठन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट पुरुषेंद्र कौरव ने गृह मंत्रालय के 31 मई, 2016 और 27 नवंबर, 2016 के आदेश का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया, “जयसिंह और आनंद ग्रोवर ने विदेशी चंदा अधिनियम का उल्लंघन कर धन हासिल किया। इसके अलावा दोनों ने देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते हुए सांसदों और मीडिया के साथ लॉबिंग कर कई महत्वपूर्ण निर्णयों और नीति निर्धारण को प्रभावित करने की कोशिश की।”

इसके अलावा याचिका में यह भी दावा किया गया कि जयसिंह और ग्रोवर ने कुछ क़ानूनों को पारित कराने और नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने के लिए संसद सदस्यों के साथ अनधिकृत तरीके से और मीडिया के ज़रिए देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए विदेशी धन प्राप्त किया है। याचिका में केंद्र के आदेशों का ज़िक्र किया गया है, जिसके ज़रिए लॉयर्स कलेक्टिव का लाइसेंस 2016 में रद कर दिया गया था और FCRA के कथित उल्लंघन को लेकर बाद में स्थायी रूप से रद कर दिया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जयसिंह, ग्रोवर और लॉयर्स कलेक्विटव ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) तथा भ्रष्टाचार रोकथाम क़ानून का उल्लंघन किया।

याचिका में कहा गया है कि यह सब कुछ तब किया गया, जब इंदिरा जयसिंह अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के पद पर थीं। इस पद पर तैनात व्यक्ति अपनी क़ानूनी राय के माध्यम से सरकार की नीतियों को प्रभावित कर सकता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में जाँच कराने में असफल रही है।

पिछले दो दशकों में कई स्वैच्छिक संगठनों की बढ़त देखी गई है, जो विदेशी स्रोतों द्वारा वित्त पोषित हैं। इनके ज़रिए देश के विकास को विफल करने की कोशिश की जाती रही है। इस तरह के स्वैच्छिक संगठन विदेशी फंडिंग पर पोषित होते हैं और विभिन्न गतिविधियों को अंजाम देते हैं जो राष्ट्र के हित में नहीं हैं।

ख़बर के अनुसार, ठेठ अंदाज़ में इंदिरा जयसिंह ने CJI गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को सही ठहराया था। लॉयर्स कलेक्टिव द्वारा जारी एक बयान में, यह दावा किया गया था कि याचिका 10 मई को ली जानी चाहिए थी, लेकिन इसकी जगह 8 मई को सूचीबद्ध किया गया।

इस बयान में आगे दावा किया गया कि CJI गोगोई को इस मामले से ख़ुद को अलग कर लेना चाहिए था। इसमें लिखा गया है, “यह देखते हुए कि सुश्री जयसिंह सार्वजनिक रूप से इन-हाउस पूछताछ के संचालन के संबंध में क़ानून की उचित प्रक्रिया के मुद्दे पर मुखर रही हैं, मुख्य न्यायाधीश को इस मामले की सुनवाई से ख़ुद को दूर रखना चाहिए।”

इस बीच, याचिकाकर्ता (लॉयर्स वॉइस) ने अनुरोध किया कि आईपीसी, पीएमएलए और पीसी अधिनियम के तहत अपराधों के लिए जयसिंह, ग्रोवर और लॉयर्स कलेक्टिव के ख़िलाफ़ एक FIR दर्ज की जाए। आयकर अधिनियम के उल्लंघन के लिए भी कार्रवाई की माँग की गई है।

झारखंड: 5 लड़कियों के गैंगरेप का दोषी फादर अल्फांसो, 15 मई को तय होगी सजा

झारखंड के खूँटी जिले में 5 लड़कियों के गैंगरेप के मामले में न्यायालय ने चर्च के एक पादरी समेत तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया। खूँटी के जिला व सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार ने पूरे मामले को सुनने के बाद 7 मई को फादर अल्फांसो को षडयंत्रकारी मानते हुए उसकी जमानत को रद किया और न्यायिक हिरासत में भेजा। कोर्ट दोषियों को 15 मई को सजा सुनाएगा।

यह मामला पिछले साल का है जब 19 जून 2018 को कोचांग के गाँव स्थित स्कॉट मैन मिडिल स्कूल में नुक्कड़ नाटक करने आई 5 लड़कियाँ का अपहरण कर उनका बलात्कार किया गया था। एफआईआर के मुताबिक 18 जून 2018 को खूँटी के पिस्टाकोली में आशा किरण नाम की संस्था के कुछ लोग नुक्कड़ नाटक करने पहुँचे थे। इनका उद्देश्य लोगों में सरकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता फैलाना था।

नाटक के दौरान टीम की एक सिस्टर को एक व्यक्ति मिला, जिसने खुद को कोचांग का मुखिया बताया। उसने सिस्टर से कहा कि उसे उनका कार्यक्रम पसंद है और वह चाहता है कि कोचांग में भी ऐसे कार्यक्रम किए जाएँ। मीडिया खबरों के मुताबिक पहले तो सिस्टर ने वहाँ नाटक करने से मना कर दिया, लेकिन बाद में व्यक्ति के कहने पर टीम वहाँ जाने को तैयार हो गई। 19 जून को टीम वहाँ पहुँची और बाजार में नुक्कड़ नाटक शुरू हुआ।

इस दौरान टीम की दोनों सिस्टर बगल के स्कूल के फादर से मिलने चली गईं, जहाँ बाद में पूरी टीम को भी बुलाया गया, यहाँ भी टीम ने नुक्कड़ नाटक किया। इसके बाद वहाँ 2 लड़के फादर से बात करने आए। बात खत्म हुई तो फादर ने टीम की लड़कियों को उन लड़कों के साथ जाने के लिए कहा, जब लड़कियों ने विरोध किया तो हथियारों के बल पर लड़कियों को लड़कों के साथ भेजा गया।

इसके बाद सुनसान जगह ले जाकर उनका रेप किया गया। उनके गुप्तांगों पर सुलगती सिगरेट दगाई गई। उन्हें पेशाब पिलाया गया। जब लड़कियों ने इसकी शिकायत फादर से की तो अल्फांसो ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने इस घटना का जिक्र किसी से किया तो उनके माता-पिता को मार दिया जाएगा। 20 जून को जब इस बात की जानकारी पुलिस को मिली तो बड़ी मुश्किल से पुलिस ने एक लड़की को बयान के लिए राजी किया।

इस गैंग रेप मामले में पुलिस ने बलराम समद, बाजी समद उर्फ टकला, जूनास मुंडा, जॉन जुनास तिडू, आशीष लूंगा, फादर अल्फांसो आईंद और नोएल सांडी पूर्ती को आरोपित बताया था, लेकिन एक अभियुक्त नाबालिग घोषित हुआ और नोएल सांडी पूर्ति के ख़िलाफ़ जाँच जारी है। इस मामले में अल्फांसो को हाइकोर्ट ने 2018 में जमानत दे दी थी, लेकिन अपराधी और षड्यंत्रकारी सिद्ध होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।