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‘पिता ने मवेशियों का चारा खाया ताकि मैं खाना खा सकूँ’: गोल्ड मेडलिस्ट गोमती मारीमुथु

हाल ही में संपन्न हुए एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में भारतीय धावक गोमती मारीमुथु ने 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। ESPN की ख़बर के अनुसार, चेन्नई लौटने पर, 30 वर्षीय ने मारीमुथु ने अपने पिता को याद करते हुए उन्हें भावनात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की।

30 वर्षीय मारीमुथु ने स्वर्ण पदक जीतने के लिए दौड़ में 2.02.70 का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “जब मैं खेल रही थी, उस समय मेरे पिता को पैर की बीमारी थी, और वह चलने में असमर्थ थे। उनके पास एक दोपहिया वाहन (एक TVS XL moped) था, और यह हमारे लिए एक बड़ी बात थी। हमारे पास शहर जाने के लिए बस की अच्छी सुविधा नहीं थी, मेरे शहर में बिजली नहीं थी, और सड़कें भी अच्छी नहीं थीं।”

गोल्ड मेडलिस्ट गोमती मारीमुथु ने ज़िंदगी में विषम परिस्थितियों से जूझकर सफलता की ये सीढ़ियाँ चढ़ी हैं। उनके इस जज़्बे को दुनिया सलाम करती है।


गोल्ड मेडलिस्ट गोमती मारीमुथु

मारीमुथु ने अपने दिवंगत पिता के बलिदानों को याद करते हुए उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में भी बताया, जिसमें हर सुबह चार बजे जागने से लेकर बीमारी के दौरान उनकी माँ की देखभाल करना तक शामिल है। उन्होंने कहा, “मुझे अपने पिता की याद आती है। चूँकि मैं खेलों में थी और हमारे पास ज़्यादा भोजन नहीं था, उन्होंने उस भोजन में से मेरे लिए पहले ही रख दिया था और ख़ुद उन्होंने मवेशियों का चारा खाया था।” उन्होंने बताया कि वो अपने पिता को भगवान की तरह मानती हैं।

प्रियंका गाँधी के रोड शो में घंटों जाम में फँसने के कारण एंबुलेंस में महिला की मौत

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने रविवार (अप्रैल 28, 2019) को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रोड शो किया। रोड शो के दौरान सड़क पर लगे जाम की वजह से एक ऐम्बुलेंस घंटों फँसी रही, जिसकी वजह से एक महिला की मौत हो गई। महिला को ऐम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था मगर रोड शो के चलते ऐम्बुलेंस आगे नहीं बढ़ पाई और जब तक जाम हटा, तब तक महिला की जान जा चुकी थी। मृतक महिला के परिजनों का कहना है कि अगर ऐम्बुलेंस समय पर अस्पताल पहुँच जाती, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। प्रियंका गाँधी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के धौरहरा लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार जितिन प्रसाद के समर्थन में रोड शो कर रही थीं।

जानकारी के मुताबिक, लखीमपुर जिले के अजीतपुर की रहने वाली 62 वर्षीया रामकली ने रविवार को सीने में तेज दर्द था। रामकली के परिजन ऐम्बुलेंस से उनको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे थे, मगर प्रियंका के रोड शो की वजह से ऐम्बुलेंस तकरीबन 1 घंटे तक जाम में फँसी रही और जब घंटे भर बाद जाम खुलने पर ऐम्बुलेंस अस्पताल पहुँची, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गुस्साए परिजनों ने रोड शो के कारण लगे जाम को महिला की मौत का जिम्मेदार ठहराया।

प्रियंका गाँधी कॉन्ग्रेस को जिताने के लिए काफी जोरों-शोरों से चुनावी प्रचार में जुटी हुई है। इसी कड़ी में उन्होंने उत्तर प्रदेश में रोड शो किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्‍होंने कहा कि विकास सिर्फ भाजपा के प्रचार में ही दिख रहा है वास्तविकता इससे बहुत दूर है। उन्होंने पीएम मोदी को प्रचार मंत्री बताते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में पिछले 5 सालों में केवल 15 किलोमीटर की एक सड़क लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से वाराणसी शहर के लिए बनी, इसके अलावा कोई सड़क ही नहीं बनी है। मगर उनका ये दावा बिल्कुल झूठा निकला। आउटलुक की एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण सड़कों के लोकार्पण की खबर है, जिनकी कुल लंबाई 34 किलोमीटर है।

आसनसोल में ग्रामीणों ने किया मतदान का बहिष्कार, TMC के गुंडों ने तोड़ी बाबुल की कार

मतदान के चौथे चरण में 9 राज्यों की 72 लोकसभा सीटों पर आज (अप्रैल 29,2019) मतदान हो रहा है। इसमें बंगाल की 8 सीटें भी हैं, जिसमें आसनसोल की सीट भी शामिल है। टाइम्स नाउ की खबर के मुताबिक वहाँ के ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार करने का फैसला कर लिया है।

खबरों के मुताबिक आसनसोल के 5 मतदान केंद्रो पर सीआरपीएफ की तैनाती नहीं हुई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कह दिया है कि यदि वहाँ सीआरपीएफ की तैनाती नहीं होती है तो वह मतदान करने नहीं जाएँगे। ये खबर दुर्गापुर के जेमुआ गाँव की है, जो आसनसोल संसदीय क्षेत्र में आता है। बंगाल में बीते मतदान चरणों में हुई हिंसा की खबरों को सुनने के बाद गाँव वालों ने यह फैसला लिया है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के आसनसोल और बीरभूम में वोटिंग के दौरान सीआरपीएफ की तैनाती की माँग विपक्षी पार्टियों द्वारा भी की गई थी, जिसके मद्देनज़र चुनाव आयोग ने तय किया था कि 100 सीआरपीएफ जवानों को सभी मतदान केंद्रों पर तैनात किया जाएगा। लेकिन बावजूद इसके कुछ मतदान केंद्रो पर सीआरपीएफ नहीं मौजूद थी। इसलिए जनता ने तय किया कि जब तक वहाँ सीआरपीएफ जवान नहीं मौजूद होंगे, वे लोग वोट नहीं डालेंगे।

बता दें कि जनता की नाराज़गी के चलते आसनसोल से सांसद और बीजेपी उम्मीदवार बाबुल सुप्रीयो को पोलिंग बूथ पर विरोध का सामना भी करना पड़ा। टीएमसी के समर्थकों ने बाबुल का जमकर विरोध किया। उनकी कार को तोड़ा गया है जिसका आरोप वह टीएमसी के गुंडो पर लगा रहे हैं।

जब तुर्की में कमाल पाशा ने बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनाया था नायाब तरीका

हाल ही में जिस वायनाड का नाम खूब चर्चा में रहा वो मोपला नरसंहार का भी क्षेत्र था। दुनिया से आखरी इस्लामिक खलीफा (ऑट्टोमन सल्तनत) के ख़त्म होने के दौर में हुए इन नरसंहारों में काफिरों और धिम्मियों पर अनगिनत पैशाचिक ज़ुल्म ढाए गए थे। जेहादियों को बूटों तले कुचलने के बाद जब फिरंगी हुक्मरानों ने मुक़दमे चलाए, तो अमानवीय अत्याचारों की कई कहानियाँ बाहर आईं। ये नरसंहार अरब के ऑट्टोमन खलीफाओं की हुकूमत फिर से लागू करने के लिए वहाँ से मीलों दूर, भारत के सुदूर दक्षिण में क्यों हुआ? किसी अरबी मुल्क की सल्तनत से भारत के दक्षिण के इस इलाके को क्या फायदा होता या फर्क पड़ता? ये सभी वो अजीब सवाल हैं, जिनके पूछे जाने पर ‘शेखुलर’ जज़्बात आपा के आहत हो जाने का खतरा रहता है।

ऑट्टोमन सल्तनत आखिरी इस्लामिक खलीफा की सल्तनत थी जो पहले विश्व युद्ध में जर्मनी की ओर से लड़कर हारी थी। हो सकता है आपने कभी ‘तीन मूर्ती’ भवन का नाम सुना हो। इस मकान में कभी जवाहरलाल नेहरु का आवास भी रहा था। इसके ठीक सामने जो तीन मूर्तियाँ बनी हैं, उन्हीं के नाम पर इस भवन का नाम पड़ा है। हीरो ऑफ़ हाइफा कहलाने वाले मेजर दलपत सिंह शेखावत हाइफा के मोर्चे पर थे। उनकी कमान में जोधपुर स्टेट की टुकड़ी थी और उनका साथ देने के लिए वहां हैदराबाद स्टेट और मैसूर स्टेट के सिपाही भी थे। जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर स्टेट को दर्शाने के लिए ही हाइफा के विजेताओं की ये तीन मूर्तियाँ इस भवन के सामने हैं। हाइफा क्या है, या कहाँ है, जैसा कुछ सूझ रहा हो तो बता दें कि ये इजराइल के सबसे बड़े शहरों में से एक है। इसकी आजादी में भारतीय सैनिकों के योगदान की वजह से ही इजरायल के प्रधानमंत्री भारत आने पर तीन मूर्ती देखने जाते हैं।

अब वापस ऑट्टोमन सल्तनत पर चलें तो ये बूढ़े बीमार हुक्मरान अपनी सल्तनत बचाने की कोशिशों में जुटे थे। इनके पास आर्थिक स्रोत ख़त्म हो चले थे और छोटे मोटे कबीले यहाँ विद्रोह करना शुरू कर चुके थे। जब भारत में इनके समर्थन में खून-खराबा करने की तैयारी हो रही थी तब ये लोग जर्मनी से जा मिले। इनके दो जहाज जो जर्मन नियंत्रण में थे, जिन्होंने रूस के एक बंदरगाह पर हमला कर दिया और भारी तबाही मचाई। अगस्त 1921 में जब भारत के जेहादी, अरब के खलीफा के समर्थन में कत्लेआम कर रहे थे, तभी कमाल पाशा ‘गाज़ी’ की उपाधि के साथ, ऑट्टोमन की सत्ता के खिलाफ लड़ रहे थे। सं 1922 के नवम्बर से लेकर 1923 की जुलाई तक चली वार्ताओं में तुर्की एक अलग देश बन गया। तभी से 29 अक्टूबर को तुर्की का गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

खलीफा के खिलाफ लड़ने की वजह से 1924 में ही कमाल पाशा को शेख सईद का जिहाद झेलना पड़ा था। सन 1926 आते आते कमाल पाशा ने तुर्की से इस्लामिक शरियत को हटाकर कानून का शासन लागू कर दिया था। ऐसे कानूनों की वजह से उत्तराधिकार और तलाक जैसे मामलों में औरतों को भी मर्दों के बराबर अधिकार मिल गए। मूर्तियों पर पाबन्दी वाले इस इलाके में 1927 में उन्होंने ‘म्यूजियम ऑफ़ स्कल्पचर’ बनवा दिया। अरबी अक्षर इस्तेमाल करने के बदले 1 नवम्बर 1928 को उन्होंने तुर्की वर्णमाला भी लागू कर दी और इसके साथ ही तुर्की ज़ुबान को अरबी में लिखना बंद करवा दिया। सन 1935 के चुनावों में तुर्की की संसद में 18 महिलाएँ चुनकर आईं। उस दौर में ब्रिटिश हाउस ऑफ़ कॉमन्स में 9 और यूएस हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में 6 महिलाऐं थीं।

उनका बुर्के पर प्रतिबन्ध का तरीका बड़ा रोचक था। जब कबीलाई मानसिकता के लोग बुर्के को छोड़ने को तैयार नहीं हो रहे थे तो उन्होंने वेश्याओं के लिए बुर्का अनिवार्य कर दिया। एक नियम से महिलाओं का बुर्का पहनना अपने आप बंद हो गया! बाकी बुर्के से याद आया कि पड़ोसी देश श्रीलंका ने भी बुर्के को प्रतिबंधित किया है। हमें उम्मीद है कमाल पाशा जैसा कोई कमाल का तरीका तो इस्तेमाल नहीं ही किया होगा?

श्री लंका में बुर्क़ा समेत हर तरह का नक़ाब पहनने पर लगा प्रतिबंध, राष्ट्रपति ने लिया फैसला

21 अप्रैल को श्री लंका में हुए हमले के बाद वहाँ की सरकार ने हर तरह के नकाब पहनने पर बैन लगा दिया है, जिससे चेहरा ढका जाता है। श्री लंका सरकार का यह आदेश आज (अप्रैल 29, 2019) से लागू होगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्री लंका के राष्ट्रपति ने संविधान द्वारा दिए गए आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए ये फैसला लिया है। श्री लंका के राष्ट्रपति ने लिखा, “ऐसे कपड़े पहनना जो चेहरे को पूरी तरह से ढकते हों, सोमवार से उनपर प्रतिबंध लगा दिया गया है।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले श्रीलंका की संसद में सुरक्षा के लिहाज से बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया था। इस दौरान सांसद आशु मरसिंघे ने कहा था कि ‘बुर्का’ मुस्लिमों का पारंपरिक परिधान नहीं है। साथ ही वहाँ के एसीजेयू (ऑल सिलॉन जमियाथुल अलामा) के मौलवी संगठनों ने भी एक आदेश जारी करते हुए बुर्का या चेहरा ढकने वाले किसी भी परिधान का इस्तेमाल न करने की बात की थी।

राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखने हुए श्री लंका सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि वहाँ के राष्ट्रपति ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राष्ट्रपति के फैसले के साथ ही श्री लंका उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने आतंकी हमले को रोकने के लिए ऐसे कदम उठाए। श्री लंका के अलावा कैमरून, मोरक्को, चाड, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, गाबोन, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है।

ईस्टर के मौक़े पर हुए हमले के बाद कल रविवार (अप्रैल 28, 2019) को श्री लंका के किसी भी चर्च में कोई भीड़ इकट्ठा नहीं हुई। लोगों ने अपने घरों में रहकर ईसा मसीह से प्रार्थना की क्योंकि पूरे देश में कर्फ्यू लगा हुआ है। पुलिस टीम और सेना का जाँच अभियान के तहत हमले में शामिल सभी आरोपितों की धरपकड़ जारी है।

गूँगे-बहरे दलित को राष्ट्रपति बनाती है BJP: ‘सबसे बड़े’ दलित नेता उदित राज ने किया राष्ट्रपति पद का अपमान

अपने आप को देश का सबसे बड़ा दलित नेता बताने वाले उदित राज ने भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद का अपमान किया है। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से 2014 में बीजेपी के टिकट पर जीते उदित राज ने ट्वीट कर ख़ुद को ‘बोलने वाला’ दलित नेता बताया और कहा कि भाजपा को दलितों से नफ़रत है और वो ‘बोलने वाले’ दलित की जगह सीट हारना पसंद करेंगे। बता दें कि हाल ही में उदित राज का टिकट काटकर नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से प्रसिद्ध पंजाबी सूफी गायक हंस राज हंस को टिकट दे दिया गया था। हंस राज हंस दलित वाल्मीकि समुदाय से आते हैं। इससे बिफरे उदित राज ने भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस ज्वाइन कर लिया था। उदित राज टिकट की घोषणा में हुई देरी के बाद से ही पार्टी को धमकाने लगे थे। लगातार विवादित बयानों के कारण पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया।

उदित राज के इस ट्वीट पर पलटवार करते हुए दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा ने उनसे पूछा कि क्या उनका दर्द अभी तक गया नहीं है? बता दें कि तेजिंदर बग्गा और उदित राज कई दिनों ने ट्विटर पर उलझे हुए हैं और हाल ही में तेजिंदर बग्गा ने कहा था कि उदित राज उन्हें मैसेज भेजकर उनके ट्वीट को रीट्वीट करने का निवेदन करते थे। कॉन्ग्रेस में शामिल होने के बाद लगातार भाजपा पर हमले कर रहे उदित राज को लेकर पार्टी पहले ही असहज थी और टिकट की घोषणा में हुई देरी ने भाजपा का काम आसान कर दिया। बाद में शत्रुघ्न सिन्हा की तरह टिकट कटने के बाद उन्होंने स्वतः पार्टी छोड़ दी और राहुल गाँधी से जा मिले।

हालाँकि, जब तक नॉर्थ वेस्ट दिल्ली का भाजपा द्वारा टिकट का ऐलान नहीं हुआ था, तब तक वो चुप भी रह सकते थे और इन्तजार कर सकते थे लेकिन बड़बोले उदित राज ने सीधा अमित शाह और नरेंद्र मोदी को घेरना शुरू कर दिया। उनका टिकट काटकर पार्टी ने साफ़ सन्देश दे दिया है कि भाजपा में रहकर पार्टी की विचारधारा के ख़िलाफ़ बार-बार बोलने वालों के लिए, यहाँ कोई जगह नहीं है। पिछले 5 वर्षों में कई मौकों पर उदित राज ने या तो अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा या फिर कुछ ऐसा बयान दिया, जिससे पार्टी की फजीहत हुई और कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा हुआ। यहाँ तक कि उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक के बयानों पर सार्वजनिक रूप से पलटवार किया।

नॉर्थ वेस्ट दिल्ली में आम आदमी पार्टी की तरफ से गुगन सिंह प्रत्याशी हैं। कॉन्ग्रेस ने राजेश लिलोठिया पर भरोसा जताया है। आम आदमी पार्टी से गठबंधन के विरोधी रहे लिलोठिया दिल्ली कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। गुगन सिंह 2017 में भाजपा छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। जालंधर से ताल्लुक रखने वाले हंस राज हंस ने 2016 के अंत में भाजपा जॉइन की थी।

कुमारस्वामी ने पत्रकारों से कहा: मैं आपका बहिष्कार कर रहा हूँ, बेटे को मीडिया द्वारा भाव नहीं देने से हैं नाराज़

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने रविवार (अप्रैल 28, 2019) को मीडिया पर भड़क गए। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने मीडिया का ‘बहिष्कार’ करने की धमकी भी दे डाली। दरअसल मामला यह है कि वह मांड्या लोकसभा चुनाव के कवरेज को लेकर मीडिया से कुछ ज़्यादा ही नाराज हैं जहाँ से उनके बेटे निखिल गौड़ा उम्मीदवार हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुमारस्वामी ने कॉन्ग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल से मुकालात करने के बाद संवाददाताओं से कहा, “मैं आपका बहिष्कार कर रहा हूँ।” मीडिया से भड़के स्वामी ने कहा, “आप अपनी स्टोरी के लिए जो चाहते हैं वह करिए, जाइए करिए, जाइए आनंद लीजिए।”

बता दें कि नाराजगी की बड़ी वजह उनके बेटे को मीडिया का उतना अटेंशन नहीं मिलना है। मांड्या लोकसभा सीट से उनके बेटे निखिल गौड़ा को जद(एस) की टिकट पर निर्दलीय उम्मीदवार एवं बहुभाषी अभिनेत्री सुमालता अंबरीश के खिलाफ उतारा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस सीट पर मुकाबले को बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।

इस सीट की चुनावी दौड़ में कुमारस्वामी ने कई बार मीडिया पर हमला बोल उस पर सुमालता का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

खैर, यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री ने मीडिया के बहिष्कार की बात कही है। इससे पहले पिछले साल नवंबर में भी कुमारस्वामी ने कहा था कि वह प्रेस से “किसी भी कारण” से बात नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा था कि वह मीडिया को जो वह मंच से बोलते हैं बस वही दिखाने तक सीमित कर देंगे। लेकिन थोड़ी ही देर में उनकी प्रतिज्ञा हवा हो गई थी।

अमेठी: जब चुनाव प्रचार छोड़ ग्रामीणों के साथ फसल में लगी आग बुझाने पहुँची स्मृति ईरानी

अमेठी में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया हुआ है। 2014 में राहुल गाँधी से मिली हार के बावजूद स्मृति ईरानी क्षेत्र में सक्रिय रहीं और कई विकास कार्यों को पूरा कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे कई मौक़े आए जब स्मृति ईरानी ने अपने सहज व्यवहार से क्षेत्रवासियों का दिल जीत लिया। भाजपा और पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि यह स्मृति का प्रभाव ही था कि राहुल गाँधी 2 सीटों से चुनाव लड़ने को मज़बूर हो गए। राहुल गाँधी केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिसे कॉन्ग्रेस के लिए सुरक्षित सीट माना जा रहा है। कई कॉन्ग्रेस नेताओं का बयान भी आया है कि वहाँ अल्पसंख्यकों की अच्छी-ख़ासी संख्या होने के कारण राहुल जीतने में सफ़ल रहेंगे। राहुल गाँधी के नामांकन रैली में भी हरे झंडे देखे गए। कॉन्ग्रेस से इस सीट को जीतने के लिए मुस्लिम लीग से गठबंधन किया है।

इधर स्मृति ईरानी जब अमेठी में चुनाव प्रचार कर रही थीं तो उन्हें कुछ गाँवों में आग लगने की सूचना मिली। मुंशीगंज के पश्चिम दुआरा गाँव स्थित खेतों में आज रविवार (अप्रैल 28, 2019) को आग लग गई। इस आग से सैंकड़ों बीघा गेहूँ की फसल को जबरदस्त नुकसान पहुँचा। इसकी सूचना मिलते ही स्मृति ईरानी तुरंत गाँव में पहुँची और ग्रामीणों के साथ आग बुझाने में मदद की। सूचना देने के बावजूद एसडीएम मौके पर नहीं पहुँचे तो स्मृति ईरानी ने डीएम को फोन लगाया। एसडीएम के वीआईपी ड्यूटी में होने की सूचना मिलने पर नाराज़ स्मृति ने कहा कि वीआईपी जनता की मदद के लिए होते हैं और जनहित सर्वोपरि होनी चाहिए।

स्मृति के गाँव में पहुँचने के बाद प्रशासनिक महकमों में हड़कंप मच गया और फायर ब्रिगेड की टीम भी थोड़ी देर बाद मौके पर पहुँची। स्मृति ईरानी ने स्वयं हैंडपंप चलाकर आग बुझाने के लिए बाल्टियों में पानी भरा और रो रही महिलाओं को पानी भी पिलाया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी उनका पूरा साथ दिया और आग बुझाने में मदद की। गाँव की महिलाएँ दुःख की इस घड़ी में स्मृति ईरानी को अपने बीच पाकर भावुक हो गईं और उनसे लिपटकर रोने लगी। स्मृति ईरानी ने महिलाओं को सांत्वना दी और उनकी समस्या को सरकार तक पहुँचाने की बात कही।

अमेठी में इस बार भी राहुल गाँधी और स्मृति ईरानी आमने-सामने हैं। गाँधी परिवार की परंपरागत सीट रही अमेठी को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस ने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाया हुआ है। स्मृति ईरानी ने आग से पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की और अमेठी की बदतर स्थिति के लिए वहाँ के सांसद राहुल गाँधी पर निशाना साधा।

Easter Blasts: ISIS मॉड्यूल का पर्दाफाश करने के बाद भारत ने श्री लंका को किया था आगाह

हाल के दिनों में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं जिनसे पता चलता है कि भारत ने श्री लंका में हुए बम धमाकों से पहले कई बार द्वीपीय देश को इस बारे में आगाह किया था। श्री लंका में ईस्टर के मौक़े पर हुए हमलों में 360 से भी अधिक लोगों के मारे जाने की सूचना है और हज़ारों लोग अभी भी घायल हैं। भारतीय अधिकारियों ने श्री लंका को इस बारे में पहले से ही चेता रखा था। एनआईए ने श्री लंका हमलों में 9 मुख्य आरोपितों में से एक ज़हरान हाशिम से जुड़े कई वीडियो प्राप्त किए थे। ये वीडियो कोयम्बटूर में गिरफ़्तार किए गए खूँखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के गुर्गों के पास से ज़ब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से प्राप्त किए गए थे। एनआईए ने देश के कई हिस्सों में छापा मारकर आतंकियों द्वारा हिन्दू संगठन के नेताओं को मारे जाने की साज़िश का ख़ुलासा किया था।

आईएसआईएस के इन आतंकियों को हाशिम ने भारत की यात्रा पर इस्लामिक कट्टरपंथी बना दिया था। इन आतंकियों ने कई हिंदू नेताओं को मारने की साज़िश रची थी, जिनमें हिंदू मक्कल काची प्रमुख अर्जुन संपत और हिंदू मुन्नानी नेता मुक्कंबिकई मणि शामिल थे। इन वीडियो के आधार पर भारतीय प्राधिकारियों ने हाशिम की पहचान राष्ट्रीय तोहिथ जमात (NTJ) के सरगना के रूप में की और जाँचकर्ताओं को यह विश्वास हो गया कि हाशिम श्रीलंका में “कुछ बड़ा” करने की योजना बना रहा है। एनआईए की इस जानकारी के आधार पर भारतीय अधिकारियों ने संभावित हमलों के बारे में 4 अप्रैल को अपने श्रीलंकाई समकक्षों को सतर्क भी किया था। श्री लंका ने शायद इन चेतावनियों के आधार पर मुस्तैदी से काम नहीं किया।

भारतीय जाँचकर्ताओं ने यह भी पाया है कि हाशिम ने केरल में मलप्पुरम और तमिलनाडु में कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, वेल्लोर और नागपट्टिनम का दौरा किया। उसके भारत के पूर्वी तट पर रामनाथपुरम और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर कल्पितिया के बीच एक स्मगलिंग रैकेट में शामिल होने का भी संदेह था। वास्तव में, हाशिम ने राष्ट्रीय तोहिथ जमात का नेतृत्व किया था, जो एक आतंकी समूह है। बता दें कि इसी आतंकी संगठन ने श्री लंकाई हमले की जिम्मेदारी ली है। सुरक्षा बलों ने श्री लंका में हुए हमलों के बाद एक वीडियो में हाशिम की पहचान की। हाशिम व सात अन्य को आईएस प्रमुख के प्रति शपथ लेते हुए देखा गया था।

40 वर्षीय मुख्य साजिशकर्ता की खोज में श्री लंकाई पुलिस लगातार लगी हुई थी। बाद में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने मीडिया को पुष्टि की कि श्रीलंका में ईस्टर बम विस्फोटों के लिए मोस्ट वॉन्टेड आतंकी और इस्लामी चरमपंथी ज़हरान हाशिम होटल शांगरी-ला में हमले के दौरान मारा गया। हालाँकि, स्थानीय मुस्लिम नेताओं ने पुष्टि की थी कि उन्होंने हाशिम के ख़िलाफ़ उसके उग्र विचारों और व्यवहार के लिए पहले भी कई बार रिपोर्ट की थी, फिर भी उसके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाशिम के साथ, ख़ुफ़िया रिपोर्टों से यह भी पता चला है कि श्रीलंका के एक अन्य जिहादी मोहम्मद मुबारक अज़ान ने 2017 में दो बार भारत का दौरा किया था।

इस्लामिक आतंकवादी समूह नेशनल तोहिथ जमात द्वारा विस्फोटों की ज़िम्मेदारी लेने का दावा करने के बाद श्री लंकाई पुलिस ने आतंकवाद-रोधी अभियानों को तेज़ कर दिया है। एक राष्ट्रव्यापी संबोधन में राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने ख़ुलासा किया कि पुलिस ने ईस्टर संडे बम विस्फोटों के बाद से जिहादी गतिविधि के सिलसिले में लगभग 70 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

UPA काल में विदेश में बैठ ₹5 लाख प्रति महीना पाने वाले अमर्त्य सेन और मनमोहन का काला रिश्ता

यह खबर नई सूचनाओं के आने के बाद अपडेट (02-05-2019, 20:57) की जा रही है। हमने भारती जैन की जिन ट्वीट्स के ऊपर यह आर्टिकल बनाया था, उन्होंने उन ट्वीट्स को डिलीट कर दिया है (हालाँकि आप उन ट्वीट्स को अभी भी नीचे पढ़ सकते हैं) और नीचे लिखे ट्वीट के माध्यम से यह कह कर माफ़ी माँगी है कि उनके पास जो भी सूचनाएँ आई थीं वो पूर्णतः गलत थीं:

अमर्त्य सेन ने नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार के दौरान रोज़गार की कथित रूप से बद्तर हालात को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। अमर्त्य सेन ने मोदी मैजिक को बाकी मामलों से ध्यान भटकाने के लिए लाए जाने की बात कही। अमर्त्य सेन की इस टिप्पणी और मोदी सरकार के ख़िलाफ़ उनके द्वारा लगातार दिए जा रहे बयानों को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया की सम्पादक (आतंरिक सुरक्षा) भारती जैन ने उनकी पोल खोलते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया। भारती जैन ने अमर्त्य सेन और यूपीए काल में उन्हें मिले पद का जिक्र कर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ दिए जा रहे उनके बयानों के कारण गिनाए। भारती ने बताया कि अमर्त्य सेन को 2007 में नालंदा मेंटर ग्रुप का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

2012 में अमर्त्य सेन को तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति नियुक्त किया गया। उन्हें पाँच लाख रुपए प्रति महीने का वेतन दिया जाता था। बेहिसाब विदेशी दौरे, सीधी नियुक्तियाँ करने का अधिकार सहित उन्हें कई अन्य सुविधाओ से नवाजा गया था। सबसे बड़ी बात कि इतना सब कुछ पाने के बाद भी अमर्त्य सेन कोई काम नहीं कर रहे थे। अपने 9 वर्षों के कार्यकाल में उन्होने अधिकतर नालंदा यूनिवर्सिटी को विदेश में बैठ कर ही चलाया। उन्होंने 7 फैकल्टीज की नियुक्तियाँ की थी। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को 5 सितारा होटल बनाकर रख दिया था। भारती ने आगे अमर्त्य सेन की पोल खोलते हुए लिखा कि इस दौरान कुल ख़र्च 2729 करोड़ रुपए से भी पार चला गया।

सबसे बड़ी बात कि इस दौरान अमर्त्य सेन ने 4 महिला फैकल्टीज की नियुक्तियाँ की। इनके नाम हैं- डॉक्टर गोपा सभरवाल, डॉक्टर अंजना शर्मा, नयनजोत लाहिरी और उपिंदर सिंह। उपिंदर सिंह पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की बेटी हैं और बाकी तीनों फैकल्टीज उनकी क़रीबी मित्र थीं। डॉक्टर दमन सिंह और डॉक्टर अमृत सिंह के रूप में दो अन्य फैकल्टीज की नियुक्तियाँ की गई। ये दोनों ही डॉक्टर मनमोहन सिंह की बेटियाँ हैं। ये लोग विदेशों में बैठ कर ही सैलरी उठाते रहे। लेकिन, नरेंद्र मोदी के आने के बाद बदलाव आया।

नरेंद्र मोदी द्वारा सत्ता संभालने के साथ ही इन सभी को बाहर निकाला गया और अमर्त्य सेन को भी यूनिवर्सिटी प्रशासन से निकाल बाहर किया गया। और इसके बाद से अमर्त्य सेन ने मोदी के ख़िलाफ़ ज़हर उगलना शुरू कर दिया। अमर्त्य सेन को अब विदेश में बैठ पर पद, वेतन और सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं, इसीलिए उन्हें मोदी सरकार से दिक्कत है। भारती जैन ने अमर्त्य सेन की बख़िया उधेड़ते हुए इन ट्वीट्स में उनकी पोल खोल दी है।