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रायबरेली में भाजपा कार्यकर्ता की लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या

रायबरेली में मंगलवार को दो सगे भाइयों पर जानलेवा हमला किया गया। दलित गुटों द्वारा मारपीट में गंभीर रूप से घायल युवक की मौत हो गई जबकि उसके घायल भाई का इलाज चल रहा है। हमलावरों ने उस समय घटना को अंजाम दिया, जब दोनों भाई कार में बैठकर घर जा रहे थे। पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है।

भाजपा कार्यकर्ता था शिव सिंह

हरचंदपुर थाना क्षेत्र के मझिगवां हरदोई गाँव निवासी एवं पूर्व प्रधान के छोटे बेटे शिव प्रताप सिंह उर्फ शिव सिंह (32 वर्ष) ठेकेदारी करते थे। साथ ही वो भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे। मंगलवार (मई 14, 2019) लगभग चार बजे शिव सिंह अपने भाई गोपाल सिंह के साथ गाड़ी से घर लौट रहे थे। सलेमपुर तिराहे के पास गाँव के ही 15-20 लोगों ने उन्हें रोक लिया और कार में तोड़ फोड़ की। दोनों भाइयों को कार से घसीटकर लाठी-डंडों से जमकर पीटा। इसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

शोरगुल मचाने पर आसपास के लोग पहुँचे, तो हमलावर फरार हो गए। इस मामले पर एसपी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि लाठी-डंडों से पीटकर हत्या की गई है। इस हमले में मृतक शिव सिंह भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह के करीबी माने जाते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शिव सिंह पर यह हमला मंगलवार सुबह कॉन्ग्रेस MLA अदिति सिंह के काफिले पर हरचन्दपुर एरिया, लखनऊ-रायबरेली हाइवे पर हुए हमले के कुछ देर बाद हुआ। हालाँकि, पुलिस विभाग का कहना है कि शिव सिंह पर हुए इस हमले का कॉन्ग्रेस MLA पर हुए हमले से कोई सम्बन्ध नहीं है।

जब भीड़ ने दोनों भाइयों की कार पर हमला किया तो मृतक शिव का भाई गोपाल तो वहाँ से बचकर भागने में सफल रहा मगर शिव वहीं फँस गए। जब वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े और आसपास के लोग जुटने लगे तो हमलावर वहाँ से भाग निकले। शिव सिंह के जानने वाले उन्हें लेकर आनन-फानन में नजदीकी सीएचसी पहुँचे। फिर उन्हें शहर के निजी अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहाँ चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घायल गोपाल का इलाज अभी भी चल रहा है।

प्रधानी की रंजिश हो सकती है वजह

ग्रामीणों ने बताया कि शिव के पिता रंजीत सिंह पूर्व प्रधान हैं। प्रधानी की रंजिश को लेकर ही शिव सिंह का विवाद हमलावर पक्ष से चल रहा था, इसी को लेकर हमला हुआ। उनकी मौत की खबर सुनकर बड़ी संख्या में उसके जानने वाले अस्पताल पहुँचे।

शिव सिंह की हत्या की सूचना पर एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह भी निजी अस्पताल पहुँचे। वहाँ वह शिव के पिता रंजीत सिंह से मिले और सांत्वना दी। एमएलसी ने कहा कि जिला पंचायत से इस वारदात का कोई वास्ता नहीं है और गाँव में आपसी विवाद के चलते यह वारदात हुई है।

नजदीकी पुलिस स्टेशन हरचन्दपुर में इस मामले पर FIR दायर कर दी गई है और अपराधियों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है।

ममता बन रहीं सद्दाम हुसैन, यह दीदीगीरी नहीं चलेगी: विवेक ओबेरॉय

बंगाल की अराजक बदहाली पर ममता बनर्जी के खिलाफ स्वर मुखर होते जा रहे हैं। अब उनके आलोचकों में फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने ट्विटर पर ममता बनर्जी को पहले सम्मानित महिला बताते हुए उनके व्यवहार को दिवंगत इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन जैसा बताया। उन्होंने ट्वीट के साथ ममता बनर्जी के ही डेढ़ साल पहले के बयान का स्क्रीशॉट लगाया, जिसमें ममता ने लोकतंत्र को खतरे में बताते हुए विपक्षी एकता की अपील की थी।

प्रियंका शर्मा और तजिंदर बग्गा की गिरफ़्तारी पर जताया क्षोभ

प्रधानमंत्री मोदी की बायोपिक में उनकी भूमिका निभा रहे विवेक गुजरात भाजपा के स्टार प्रचारक भी हैं। उन्होंने भाजयुमो की हावड़ा संयोजिका प्रियंका शर्मा और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा की गिरफ़्तारी पर क्षोभ जताया।

मालूम हो कि कल कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान जमकर हिंसा हुई थी। कड़ी सुरक्षा के बावजूद हमलावर अमित शाह के वाहन पर लाठी-डंडे फेंकने में कामयाब हो गए। इसके बाद भाजपा और तृणमूल कॉन्ग्रेस के समर्थक सीधे-सीधे टकरा गए थे। यहाँ तक कि महान बंगाली लेखक और दार्शनिक ईश्वर चंद्र ‘विद्यासागर’ की प्रतिमा भी खंडित कर दी गई, जो विद्यासागर कॉलेज में लगी थी। इसके बाद कल रात को कई भाजपा नेताओं को बंगाल में गिरफ्तार कर लिया गया, जिनमें से एक बग्गा भी थे।

पूरे मामले को लेकर भाजपा और तृणमूल एक दूसरे पर हमलावर हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वह सुरक्षित बचे हैं तो केवल केंद्रीय सुरक्षा बल सीआरपीएफ के कारण। तृणमूल नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने एक दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तजिंदर बग्गा के बंगाल में ‘बाहरी’ होने का हवाला देते हुए उनकी गिरफ़्तारी को जायज ठहराने की कोशिश की है।

कौन बनेगा प्रधानमंत्री? नतीजे जानने के लिए आपको 24 मई तक करना पड़ सकता है इंतजार

जैसा कि हम जानते हैं, 19 मई को सातवें और अंतिम 59 सीटों के लिए मतदान संपन्न होने के साथ ही लोकसभा चुनाव का समापन हो जाएगा और 23 मई को नतीजे आने की बात कही गई है। लेकिन परिस्थितियाँ कुछ अलग बनीं तो चुनाव परिणाम 24 मई को भी आ सकते हैं। अर्थात, नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं, यह जानने के 24 मई तक इन्तजार करना पड़ सकता है। कुल मिलकर बात यह है कि अगर चुनाव परिणाम के आँकड़े निर्णायक रहे तो 23 मई को सब कुछ साफ़ पता चल जाएगा लेकिन क़रीबी लड़ाई की स्थिति में आपको एक दिन और इन्तजार करना पड़ सकता है। ख़बरों के अनुसार, 23 मई की जगह अंतिम नतीजे 24 मई को प्राप्त हो सकते हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के अधिकारी संजय बासु ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया, “सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा निर्णय के अनुसार, चुनाव नतीजे 1 दिन लेट आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने प्रति विधानसभा क्षेत्र में पाँच रैंडम पोलिंग बूथ पर ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान करने का निर्देश दिया है। इसके कारण मतगणना में 8 से 10 घंटे की संभावित देरी से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रक्रिया और लम्बी होने के पीछे ये तीन कारण हैं- वीवीपैट पर्चियों का मिलान, पोस्टल बैलेट्स की गणना और ‘Electronically Transmitted Postal Ballots System (ETPBS)’ की स्कैनिंग।“

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य मतगणना को सटीक तरीके और निर्बाध रूप से पूरा करना है। प्रत्येक मतगणना क्षेत्र के पाँच पोलिंग बूथों की गणना एक टेबल पर की जाएगी। इसीलिए परिणाम आने में 1 दिन की देरी भी लग सकती है। बता दें कि 21 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट जाकर 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान करने की माँग की थी, जिसे कोर्ट द्वारा नकार दिया गया। लेकिन, अदालत ने प्रति विधानसभा एक से बढ़ाकर पाँच रैंडम पोलिंग बूथ की ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की बात कही।

अदालत का यह आदेश मतगणन में सटीकता और संतुष्टि हासिल करने के लिए था। हालाँकि, विपक्षी दलों ने अपनी माँगें कम करते हुए 25% पर्चियों के मिलान की बात कही, जिसे तवज़्ज़ोह नहीं दिया गया। इधर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने मतगणना को लेकर अपनी सक्रियता तेज़ कर दी है। सोनिया ने सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं को फोन कर 23 और 24 मई को दिल्ली में उपस्थित रहने का आग्रह किया है। उधर केसीआर ने भी तमिलनाडु में स्टालिन से मुलाक़ात कर तीसरे मोर्चे के लिए जुगत भिड़ानी तेज़ कर दी है।

आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव ख़त्म होने के बाद 21 मई को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की पेशकश की है। इस सम्बन्ध में उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाक़ात भी की। सोनिया ने विपक्षी दलों को यह सन्देश देने की कोशिश की है कि भले ही वे सभी चुनाव पूर्व गठबंधन का हिस्सा न रहे हों लेकिन परिणाम आने के बाद मिली-जुली सरकार के लिए सभी को तैयार रहना चाहिए। कर्नाटक के सीएम कुमारस्वामी और हरियाणा के नेता अभय चौटाला पूर्व में मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में ऊँट किस करवट बैठेगा, ये मई की 23 या 24 तारीख़ को ही पता चलेगा।

Sp Ops डिवीजन के प्रमुख बने एके ढींगरा: आतंकवाद के खिलाफ भारत में पहली बार आर्मी-IAF-नेवी एक साथ

मेजर जनरल एके ढींगरा को आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल आपरेशंस डिवीजन का पहला मुखिया नियुक्त किया गया है। इस त्री-सेना के गठन में सेना की पैराशूट रेजिमेंट, नौसेना की मार्कोस और वायु सेना के गरुड़ कमांडो बल के विशेष कमांडो शामिल होंगे।

पहली बार तीनों सेनाएँ एक कमांड और नियंत्रण बोर्ड के अंतर्गत करेंगी काम

इन तीनों सेनाओं अपना कार्य करना शुरू कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने इसकी जिम्मेदारी मेजर जनरल ढींगरा को सौंपी है। इसमें सेना की स्पेशल फोर्स शामिल होंगी। हालाँकि, तीनों सेनाओं ने इससे पहले भी कई ऑपरेशन एक साथ किए है लेकिन, यह पहली बार है जब तीनों सेनाएं एक कमांड और नियंत्रण बोर्ड के अंतर्गत काम करेंगी। इसका लाभ ये होगा कि ऐसा करने से ट्रेनिंग के खर्चे में कमी आएगी। आर्मी सूत्रों के अनुसार, मेजर जनरल ढींगरा एक स्पेशल फोर्सेज के दिग्गज हैं और कुलीन 1 पैरा स्पेशल फोर्सेज रेजिमेंट से हैं। उन्होंने अमेरिका में स्पेशल ऑपरेशंस कोर्स भी किए हैं। मेजर ढींगरा श्रीलंका में इंडियन पीसकीपिंग फोर्स ऑपरेशन का भी हिस्सा थे।

नया डिवीजन त्री-सेवा एकीकृत रक्षा कर्मचारियों के तहत काम करेगा। रक्षा मंत्रालय में चल रही चर्चा के अनुसार, इसका मुख्यालय आगरा या बैंगलोर में बनाया जाएगा। इस डिवीजन को देश के भीतर और बाहर दोनों तरफ से किसी भी बड़े आतंकवाद-विरोधी अभियान को शुरू करने के लिए सरकार की पहली पसंद होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। ये फैसला लेने में सबसे अहम भूमिका रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा सचिव संजय मित्रा और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने प्रमुख की रही है। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोधपुर में संयुक्त कमांडरों सम्मेलन में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल आपरेशंस डिवीजन को स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।

आतंकवाद-विरोधी अभियान के लिए की जाएगी तैयारी

सरकार ने इस डिवीजन और डिफेंस सायबर एजेंसी (डीसीए) को पिछले साल मंजूरी दी थी। डीसीए की जिम्मेदारी नौसेना के अधिकारी रीयर एडमिरल मोहित गुप्ता को सौंपी गई है। इसके अलावा एक स्पेस एजेंसी भी बनाई जाएगी, जो स्पेस मिशन को अंजाम देगा। इसकी कमान वायुसेना के किसी अधिकारी को दी जाएगी। यह सभी त्री-सेना का हिस्सा होंगे।

आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन कमाडोंज की एक छोटी सी टीम के जरिए काम करना शुरू करेगा। इसमें 3,000 प्रशिक्षित कमांडोज हैं, जो जंगलों, समुद्र में युद्ध करेंगे और हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशंस का काम करेंगे। टीम ऐसे मिशनों के संचालन के लिए जिम्मेदार होगी, जिसमें रणनीतिक प्रतिष्ठानों, आतंकियों को लक्षित करना और दुश्मन की युद्ध लड़ने की शक्ति को कतरना शामिल होगा।

मजहबी सहिष्णुता और सहअस्तित्व के लिए गोडसे को कहा था हिन्दू आतंकवादी: कमल हासन की पार्टी

कमल हासन द्वारा भारत का पहला आतंकवादी एक हिन्दू को बताने पर छिड़े विवाद के बाद उनकी पार्टी उनके बचाव में उतर आई है। न्यूज़ एजेंसी ANI ने कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मय्यम के हवाले से यह खबर दी है। इसके अनुसार पार्टी उपाध्यक्ष आर महेन्द्रन ने बयान जारी कर कहा, “कमल हासन (उक्त भाषण दे कर, जिसमें भारत का पहला आतंकवादी एक हिन्दू, नाथूराम गोडसे, को बताया गया था) सभी गुटों में मजहबी सहिष्णुता और सहअस्तित्व के लिए अपील करना चाहते थे और हर मजहब तथा हर रूप के चरमपंथ की निंदा करना चाहते थे।”

‘भाषण को एंटी-हिन्दू बताना साजिश, इससे कन्फ्यूजन हो रहा है’

पार्टी ने आगे कहा, “भाषण को संदर्भ से परे समझ लिया गया है और दुर्भावना से एंटी-हिन्दू बताया जा रहा है। इससे आम आदमी में कन्फ्यूजन और चिंता पैदा हो रहा है। आम आदमी इस साजिश को नहीं जानता।” इससे पहले मंगलवार को भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर निर्वाचन आयोग को कमल हासन के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिए जाने की माँग की थी। कमल हासन ने गाँधी जी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को आजाद भारत का पहला आतंकी, जो कि एक हिन्दू (था), बताया था।

हासन उस समय तमिलनाडु की अरवाकुरीचि विधानसभा में प्रचार कर रहे थे, जब रविवार (12 मई) को उन्होंने यह विवादित बयान दिया था। उन्होंने वहाँ कहा था, “मैं ऐसा इसलिए नहीं कह रहा क्योंकि यहाँ बहुत सारे मुस्लिम मौजूद हैं। मैं यह महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने कह रहा हूँ। आजाद भारत में पहला आतंकवादी एक हिन्दू है। उसका नाम नाथूराम गोडसे है।”

काले झंडे देख भगवंत मान ने किया ताबड़तोड़ भाँगड़ा, गीत के बोल थे-‘तेरे यार नूं दबन नूं फिरदे सी…’

पंजाब में रोड शो के दौरान आम आदमी पार्टी सांसद भगवंत मान के डांस करने का वीडियो सामने आया है। हालाँकि, रोड शो में दी गई पुलिस सुरक्षा से AAP प्रदेश प्रधान भगवंत मान काफी नाराज दिखे। भगवंत मान रोड शो के दौरान अचानक कार की छत पर चढ़े और डांस करने लगे।

दरअसल, लोकसभा चुनाव प्रचार के चलते मान सोमवार (13 मई, 2019) को अपने संसदीय क्षेत्र संगरूर में गोद लिए गाँव बेनड़ा पहुँचे, जहाँ उन्हें जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने रोड शो का विरोध करते हुए AAP सांसद को काले झंडे दिखाए। खुद के खिलाफ प्रदर्शन देख मान कार की छत पर चढ़े और पंजाबी डांस करने लगे। वह करीब तीस सेकंड तक जमकर डांस करते रहे और पास में मौजूद प्रदर्शनकारी काले झंडे लहराते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

‘विरोध करने वालों को कॉन्ग्रेस ₹150 दिहाड़ी पर लाई है’

खुद के गोद लिए गाँव बेनड़ा में सोमवार को विरोध होने पर मान का अलग ही अंदाज दिखा। लोगों ने काली झंडियां दिखाईं तो मान ने उन पर फूल फेंके और गाड़ी में चढ़कर ”तेरे यार नूं दबन नूं फिरदे सी पर दबदा किथे आ” गाने पर जमकर भाँगड़ा नृत्य किया। इसके बाद AAP सांसद मान ने कहा, “ये कॉन्ग्रेस के भाड़ेदार हैं, किराएदार हैं। इनको कॉन्ग्रेस ₹150 दिहाड़ी पर लाई है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम लोग भाँगड़ा कर रहे हैं… पंजाब के दीदार में।”

गीत के बोल थे, “तेरे यार नूं दबन नूं फिरदे सी पर दबदा किथे आ”

‘सुरक्षा की जरूरत नहीं’

बरनाला में रात गुजारने के बाद केजरीवाल रोड शो के लिए दोबारा संगरूर की ओर निकले। धूरी के पास रोड शो के मान भड़क गए। गाड़ी से उतरे और सुरक्षा गाड़ी के कर्मियों को काफिले के आगे से हटाने को कहा। मान ने कहा कि पुलिस के कारण रोड शो प्रभावित हो रहा है। ऐसी सुरक्षा की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, एसएसपी डॉ. संदीप गर्ग ने कहा कि केजरीवाल सीएम हैं। उन्हें जेड सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। पंजाब में भी जेड सुरक्षा दी जा रही है। फिर AAP ने पुलिस को सुरक्षा के लिए लिखकर दिया है।

‘केजरीवाल ने इंक़लाब के नाम पर किया है गुमराह’

दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने पंजाब को यह कहकर बदनाम किया कि यह मादक पदार्थों का स्वर्ग है और राज्य के युवा नशे के आदी हैं। केजरीवाल से नाराज प्रदर्शनकारियों ने कहा कि AAP ने इंकलाब के नाम पर गुमराह किया। केजरीवाल की नीतियों से कई विधायक छोड़ गए। भगवंत मान ने भी कोई वादा पूरा नहीं किया।

कॉन्ग्रेस-JDS नेताओं के ठिकानों पर चुनाव आयोग, IT विभाग और ED का छापा, मिले सोने के बर्तन

कर्नाटक में चुनाव आयोग, इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने कॉन्ग्रेस-जेडीएस नेताओं के ठिकानों पर छापा मारा है। चुनाव आयोग के सर्च स्क्वाड ने आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों की मदद से इस छापेमारी को अंजाम दिया। मंगलवार (मई 14, 2019) को हुबली के 2 होटलों में छापेमारी की गई। इन होटलों में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और सिंचाई मंत्री डीके शिवकुमार सहित कई बड़े नेता ठहरे हुए थे। इनमें से अधिकतर राज्य की गठबंधन के विधायक थे। छापेमारी के दौरान सोने के महंगे बर्तनों सहित कई अन्य सामग्रियाँ भी ज़ब्त की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये सामग्रियाँ कुंदगोल सीट पर होने वाले उपचुनाव में मतदाताओं को रिश्वत देने के लिए जुटाई गई थी।

यह सीट कुछ ही दिनों पहले तत्कालीन विधायक सीएस शिवली के निधन के बाद खाली हुई। कॉन्ग्रेस ने दिवंगत विधायक की पत्नी कुसुमवती को टिकट दिया है। कुंदगोल और एक अन्य विधानसभा सीट चिंचोली पर उपचुनाव में 19 मई को लोकसभा चुनाव के सातवें और आख़िरी चरण के साथ ही मतदान संपन्न कराया जाएगा। कहा जा रहा है कि इसी चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए रिश्वत का इंतजाम किया गया था। सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने छापेमारी की। अमर उजाला और मनीकण्ट्रोल की ख़बरों के मुताबिक़, कॉन्ग्रेस नेताओं के कमरों से सोने के बर्तनों के अलावा पार्टी की टोपियाँ व दिवंगत विधायक के फोटोग्राफ्स बरामद किए गए।

कॉन्ग्रेस नेता चंद्रशेखर गोकावी के ख़िलाफ़ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया गया है। मंत्री डीके शिवकुमार ने इस छापेमारी की पुष्टि करते हुए बताया कि अधिकारियों द्वारा उनके कमरे की तलाशी ली गई है। 2 होटलों में हुई छापेमारी के दौरान एक होटल में इसे ज़ल्दी समाप्त कर दिया गया जबकि दूसरे होटल में यह प्रक्रिया काफ़ी लम्बी चली। डीके शिवकुमार ने बताया कि उनके अलावा कॉन्ग्रेस के अन्य कैडरों के कमरों की भी तलाशी ली गई है। चुनाव में कदाचार की सूचना मिलने के बाद यह छापेमारी की गई।

उधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। कुमारस्वामी ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को उनकी योग्यता और कार्यों के हिसाब से उनकी पार्टी में उचित सम्मान नहीं दिया गया। कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी नज़र में खड़गे के साथ अन्याय हुआ, वरना उन्हें बहुत समय पहले ही मुख्यमंत्री बन जाना चाहिए था। कुमारस्वामी अक़्सर किसी न किसी बहाने से अपने गठबंधन साथी कॉन्ग्रेस पार्टी को घेरते रहते हैं। उन्होंने चिंचोली में सभा के दौरान ये बातें कही।

‘द हिन्दू’ की ख़बर के अनुसार, भाजपा और कॉन्ग्रेस की तरफ़ से लगातार बढ़ रहे दबाव के बीच कुमारस्वामी 23 मई को मतगणना के बाद या तो विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं या भाजपा से हाथ मिला सकते हैं क्योंकि कॉन्ग्रेस अब मुख्यमंत्री का पद ख़ुद रख कर जेडीएस को उप-मुख्यमंत्री का पद देना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता येदिदुरप्पा यह साफ़ कर चुके हैं कि कॉन्ग्रेस के कई नाराज़ विधायक उनके संपर्क में हैं और वे सरकार बनाने का एक और प्रयास कर सकते हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्दारमैया गुट के विधायकों ने भी अपने नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की बात कही है।

5% हिन्दुओं को पीट कर वोट नहीं देने दिया गया: ‘मजहबी भीड़’ द्वारा हत्या से बाल-बाल बचे सांसद का लेख

ऑपइंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बिहार स्थित पश्चिम चम्पारण के सांसद संजय जायसवाल के हवाले से बताया था कि कैसे एक बूथ पर एक भीड़ ने उन्हें घेर कर उनकी हत्या का प्रयास किया और सांसद की तरफ़ से बताया गया कि उस भीड़ में 90% मुस्लिम थे। उनके अनुसार मुस्लिम बहुल इलाक़े में हिन्दुओं को वोट नहीं देने दिया जा रहा था। सांसद पर हुए हमले, पत्थरबाज़ी पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। इस संबंध में हिन्दुओं के मताधिकार पर हुए आक्रमण को लेकर पढ़िए पिछले 10 वर्षों से सांसद रहे संजय जायसवाल का लेख, ठीक हूबहू उन्हीं के शब्दों में:

मैं तन, मन और वचन से हिंदू हूँ। यही कारण है जिसके चलते 10 वर्ष के मेरे संसदीय जीवन में एक भी मुस्लिम या ईसाई यह नहीं कह सकता कि वह मेरे घर किसी प्रकार की मदद के लिए आया हो और मैंने उसकी मदद नहीं की। चाहे पारसी हो या यहूदी, वह अपने घर से उजड़ने के बावजूद हज़ारों वर्ष तक अपने धर्म और परंपरा का निर्वहन भारत में कर सके क्योंकि यहाँ के सारे राजा तब हिंदू थे। मैंने अपने जीवन में कभी इफ़्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया क्योंकि वह मेरा धर्म नहीं है। लेकिन, मैं अपने मुस्लिम मित्रों की खुशी में शरीक होने हर साल इमामबाड़ा या कहीं भी इफ़्तार के आयोजन मे ज़रूर जाता हूँ, चाहे उसके लिए मेरा कितना भी मज़ाक क्यों नहीं उड़ाया जाए।

मैं सभी हिंदू बहुल गाँव सहित अन्य गाँवों के अपने सभी नागरिकों का भी आभारी हूँ क्योंकि जिन्हें जहाँ इच्छा थी, उन्होंने वहाँ वोट डाला। लेकिन, नरकटिया से खौना के बूथ संख्या 162 की बात ही कुछ और है। साल 2000 में तत्कालीन विधायक एवं मंत्री के सामने उस बूथ को लूटा गया था और उनकी काफी बेइज्जती की गई थी। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि फिर वहाँ पर हिंदू वोटर कभी वोट डालने नहीं गए। इस बार जबलपुर से एक बायोमेडिकल इंजीनियर ब्राह्मण बच्चा सिर्फ इसलिए गाँव आया क्योंकि उसे नरेंद्र मोदी को वोट देना था। कुशवाहा और बीन लोग भी यहाँ बहुत हैं, लेकिन इस टोले के लोग संत सिंह कुशवाहा के लिए भी वोट डालने 2015 में नहीं गए थे। लेकिन, इस बार उस बच्चे के साथ नरेंद्र मोदी जी को वोट डालने सभी लोग बाहर निकले।

घटना के दिन 12:15 बजे उन सबों की पिटाई बूथ पर ही कर गई। इस पिटाई के पीछे आरोपितों की यह सोच थी कि आख़िर इन ग्रामीणों की वोट डालने की हिम्मत कैसे हुई? पीठासीन पदाधिकारी और होमगार्ड के जवान केवल मुँह देखते रह गए। दोपहर 3:30 बजे तक ये पीड़ित लोग प्रशासन से गुहार लगाते रहे कि उनकी मदद की जाए। लेकिन, कोई प्रशासन या अधिकारी इनके मताधिकार में मदद के लिए आगे नहीं आया। उलटा जिला प्रशासन को फोटो भेज दिया गया कि बूथ पर सब कुछ शांतिपूर्ण है। ज़ाहिर सी बात है, जब सारे हिंदू पिट कर भगा दिए गए थे तो माहौल तो शांतिपूर्ण हो ही जाना था।

3.30 बजे मैं बीन टोला गाँव में पहुँचा और मैंने सभी घायलों को देखा। मुझे इस बात पर बहुत आक्रोश है कि पीठासीन पदाधिकारी अथवा जिला के उच्च अधिकारियों ने इन सबो की मदद क्यों नहीं की? मैं 2 बार इस क्षेत्र का सांसद रहा हूँ। 40-50 मतों से मुझे कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है लेकिन मैं वहाँ सभी हिंदुओं के साथ बूथ पर आया क्योंकि ये उनके मताधिकारों की बात थी। मैंने रास्ते में भी कहा कि अगर यहाँ पर 5% हिंदू हैं और उन्हें वोट नहीं देने दिया जाता है तो यह भयावह स्थिति है। सोचिए, अगर यही हालात सभी बूथों पर हो जाए तो भारत का लोकतंत्र कैसे चलेगा?

जब तक मैं सरकारी अफसरों से बहस कर रहा था, तब तक स्थिति बिल्कुल दूसरी हो गई। मुझे इस बात का भी अफसोस नहीं है कि मैं वहाँ 3:30 घंटे फँसा रहा और प्रशासन मेरी मदद के लिए नहीं पहुँचा। एक तरह से मुझे बंधक बना कर रखा गया था। अफसोस तो मुझे इस बात का है कि भारत के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है और उक्त घटना के दौरान पीड़ित लोग वोट देने के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन डीएम तथा एसपी ने उनकी कोई मदद नहीं की। इस बात की लड़ाई मुझे 20 वर्षों तक लड़नी पड़े तो भी मैं लड़ूँगा और इन सबों को इंसाफ दिला कर ही रहूँगा। मैं जल्दी नाराज़ नहीं होता हूँ पर चाहे वह बैरिया में छठ घाट उजाड़ने की घटना हो या फिर किसी स्थान पर किसी वोटर को वोट नहीं देने की घटना, मेरा ख़ून अपने आप उबल ही जाता है।

क्या थी घटना?

रविवार (मई 12, 2019) को बिहार के चम्पारण में लोकसभा चुनाव के छठे चरण के तहत मतदान चल रहा था। इस दौरान सांसद भी सभी बूथ पर घूम-घूम कर (प्रत्याशी को मिलने वाले अनुमति के तहत) चुनाव प्रक्रिया को देख रहे थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि नरकटिया के बूथ संख्या 162 पर भाजपा समर्थकों को पिटाई की जा रही है। सांसद जब वहाँ पर पहुँचे और उन्होंने पूछताछ शुरू की तो भीड़ उग्र हो गई। फिर क्या था, कश्मीर में पत्थरबाज़ी के तर्ज पर सांसद पर हमला किया गया। आजतक ने अपने वीडियो में भी इस बात की पुष्टि की है कि लोग दीवार के पास खड़े होकर बड़े-बड़े पत्थर फेंक रहे हैं। सांसद ने कहा कि ऐसी स्थिति आ गई थी, जिसमें उनकी व उनके साथ जो हिन्दू समाज के लोग थे, उनकी हत्या की जा सकती थी।

इस हमले में सांसद बाल-बाल बचे और कई समर्थकों को चोटें आईं। कई भाजपा समर्थक घायल भी हुए। संजय जायसवाल के आरोप गंभीर हैं। उनके अनुसार, माहौल ऐसा हो गया था कि अगर उनके गार्ड ने गोली नहीं चलाई होती तो शायद उनकी हत्या भी हो सकती थी। सांसद को वहाँ काफ़ी देर तक बंधक बना कर भी रखा गया। पुलिस के पहुँचने के बाद भी जायसवाल को पीटने के लिए भीड़ उतारू थी, लेकिन उन्हें किसी तरह सुरक्षित जगह पर पहुँचाया जा सका।

‘…वरना मैं एक सेकंड में दिल्ली BJP ऑफिस और तुम्हारे घरों पर कब्ज़ा कर सकती हूँ’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा को लेकर एक बार फिर से आग उगला है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा के बाद बंगाल में सियासी पारा काफ़ी गर्म हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की बैठक भी बुलाई। ममता बनर्जी ने भाजपा पर सख्त तेवर अपनाते हुए पार्टी को कड़ी चेतावनी दी है। ममता ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा, “तुम लोगों का नसीब अच्छा है कि मैं यहाँ शांत बैठी हूँ वरना तो मैं एक सेकंड में दिल्ली में भाजपा दफ्तर और तुम्हारे घरों पर कब्ज़ा कर सकती हूँ। अमित शाह क्या भगवान हैं, जो उनके ख़िलाफ़ कोई प्रदर्शन नहीं कर सकता है?“

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब आधी रात को दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा समेत कई भाजपा नेताओं को कोलकाता से गिरफ़्तार कर लिया गया है। रात के ढाई-तीन बजे हुई इस कार्रवाई में अमित शाह के रोड शो में भाग लेने व चुनाव प्रचार करने गए भाजपा नेताओं को उठा लिया गया। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने बताया कि ममता सरकार की इस बड़ी कार्रवाई में बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया का अनुसरण किए और बिना किसी चार्ज के कई भाजपा नेताओं को उठा लिया गया। बंगाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली के लिए देश के कई क्षेत्रों से भाजपा नेता कोलकाता में जाकर ठहरे हुए थे। मालवीय ने आरोप लगाया कि कई भाजपा नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस की ग़ैर-क़ानूनी हिरासत में हैं।

अमित शाह की रैली में जम कर हंगामा हुआ। तृणमूल समर्थकों द्वारा वाहनों को आग लगा दी गई और रैली को बाधित किया गया। भाजपा का कहना है कि तृणमूल के कार्यकर्ता कलकत्ता विश्वविद्यालय के गेट पर काले झंडे लेकर पहले से ही जमा थे। अमित शाह का रोड शो जैसे ही वहाँ से गुजरा, उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और काले झंडे दिखाए। तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सीधा अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, “अमित शाह इतने असभ्य हैं कि उन्होंने विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ दी। वो सभी बाहरी लोग हैं। भाजपा मतदान वाले दिन के लिए उन्हें लाई है।“

इधर ममता बनर्जी पर मीम बनाने वाली भाजपा नेता प्रियंका शर्मा के वकीलों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें काफ़ी समय तक रिहा नहीं किया गया। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में बात रखी तो अदालत ने कहा कि उन्हें समय पर रिहा न किए जाने को लेकर वे अवमानना नोटिस जारी करेंगे। इसके बाद प्रियंका शर्मा को रिहा किया गया। रिहा होने के बाद उन्होंने तृणमूल सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मंगलवार (मई 14, 2019) को ज़मानत मिलने के बावजूद उन्हें 18 घंटे अतिरिक्त जेल में रखा गया। उन्हें उनके परिवार और वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। प्रियंका ने कहा कि इन सबके अलावा उनसे एक माफ़ीनामा भी हस्ताक्षरित कराया गया।

अमित शाह ने ममता पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी पूरे देश में चुनाव लड़ रही है जबकि ममता सिर्फ़ बंगाल की 42 सीटों पर। अमित शाह ने पूछा कि 6 चरणों में कहीं और हिंसा क्यों नहीं हुई, बंगाल में ही क्यों हुई, जबकि भाजपा तो सभी राज्यों में चुनाव लड़ रही है।

ध्रुव त्यागी मर्डर: सिर्फ आलम व जहाँगीर नहीं, 11 लोगों ने घेर कर मारा – छिपने को भागा था मस्जिद

मोती नगर में बेटी से छेड़खानी का विरोध करने वाले ध्रुव त्यागी की शम्सेर आलम और जहाँगीर ख़ान ने अपने कई साथियों व परिवार वालों के साथ मिलकर हत्या की थी। अब इस मामले में नया ख़ुलासा हुआ है। पहले ख़बर आई थी कि आरोपितों में इन दोनों के अलावा 2 अन्य नाबालिग शामिल हैं। अब ताज़ा सूचना के अनुसार, त्यागी को 11 लोगों ने घेर कर मारा था। इस हत्याकांड में आरोपितों के परिवार की महिलाएँ भी शामिल थीं। असल में जिस चाकू से हत्या की गई, उसे आरोपितों की माँ ने घर में से निकाल कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने जिन आरोपितों को गिरफ़्तार किया है, उसमें एक व्यक्ति और उसके तीन बेटे हैं। 2 आरोपित नाबालिग हैं। बाकी घर से भाग गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

ज्ञात हो कि ध्रुव राज त्यागी अपने परिवार समेत बसई दारापुर में रहा करते थे। रविवार की रात वह बेटी और बेटे के साथ अस्पताल से लौट रहे थे। घर पहुँचने से कुछ दूर पहले ही पाँच-छह लोगों से उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। जहाँगीर और आलम समेत उसके कुछ अन्य गुर्गे साथियों ने रास्ता देने से मना कर दिया। ऐसे में मृतक त्यागी ने पहले अपनी बेटी को घर पहुँचाया और फिर लौट कर छेड़खानी कर रहे लड़कों के पिता से शिकायत करने पहुँचे। इसी बीच में उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। बाप को बचाने आए पीड़िता का भाई भी बुरी तरह जख्मी हुआ, उस पर भी चाकुओं से वार किया गया।

दैनिक जागरण के दिल्ली संस्करण में छपी ख़बर

शमशेर आलम मुख्य आरोपित है। उसने त्यागी के पेट, कंधे व सीने में चाकुओं से ताबड़तोड़ 10 वार किया था। त्यागी को बचाने के लिए जब उनका बेटा आया, तब उस पर भी चाकुओं से वार किया गया। मृतक का बेटा अनमोल अभी आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक के परिवार के अनुसार, शनिवार (मई 11, 2019) देर रात क़रीब 1 बजे बिजनेसमैन ध्रुव त्यागी की 26 साल की बेटी को माइग्रेन का दर्द हो गया था। वह बेटी को दिखाने आचार्य भिक्षु हॉस्पिटल गए थे। वहीं से लौटते वक़्त ये घटना हुई। त्यागी का परिवार वर्षों से यहीं रहता है।

इस हत्याकांड में आरोपित के परिवार की 4 महिलाओं सहित कई लोग शामिल हैं। उन सभी ने त्यागी को पकड़ रखा था और आलम उन्हें चाकू मारे जा रहा था। वारदात में शमसेर का अब्बा, अम्मी, दोनों भाई, तीन-चार बहनें, एक दामाद और अन्य लोग शामिल हैं। अनमोल ने जब देखा कि उसके पिता को चाकू मारा जा रहा है तो वह अपने पिता के ऊपर लेट गया लेकिन आरोपित चाकू से लगातार वार करते रहे। दरिंदगी का आलम यह रहा कि त्यागी के हाथ-पैर पर पत्थरों से वार किया गया, उनका चेहरा कुचल दिया गया, उनके दाँत तोड़ दिए गए। उनके नाखून भी उखड़ गए थे।

इस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित ने मस्जिद में शरण लेनी चाही। लेकिन मस्जिद में उन लोगों से थाने में सरेंडर करने को कहा गया। गाँव में पंचायत बुलाई गई है। चर्चा है कि किसी भी मुस्लिम को घर किराए पर न देने का निर्णय लिया जा सकता है। शमशेर आलम की अम्मी व बहन को हिरासत में ले लिया गया है। मृतक की बेटी से बात कर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।