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इस्लामिक स्टेट ने श्री लंका के बाद पश्चिम बंगाल में हमला करने की दी धमकी

ईस्टर के मौके पर रविवार (अप्रैल 21, 2019) को श्रीलंका में सीरियल ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अब भारत में भी धमाका करने की धमकी दी है। इस्लामिक स्टेट ने एक पोस्टर के जरिए भारत में भी धमाके करने की धमकी दी है। आईएस समर्थित एक टेलिग्राम चैनल ने बांग्ला भाषा में एक पोस्टर मैसेज भी जारी किया है। पोस्टर में लिखा है, “शीघ्र आश्छी, इंशाअल्लाह…” जिसका मतलब है, “जल्द आ रहे हैं।” पोस्टर पर अल मुरसालात का लोगो भी लगा हुआ है। इस पोस्टर को देखकर आशंका जताई जा रही है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट भारत में भी आत्मघाती हमले कर सकता है। सुरक्षा एजेंसियाें ने इस संदेश को काफी गंभीरता से लिया है और इसकी वजह से पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

शनिवार (अप्रैल 27, 2019) को कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की पुष्टि की और साथ ही ये भी बताया कि एसटीएफ ने पश्चिम बंगाल की सीमा के आस-पास के सभी क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी शुरू कर दी है। इसके साथ ही आतंकी मंसूबे को नाकाम करने के लिए पुलिस और भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी आपसी समन्वय स्थापित किया गया है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की खुफिया एजेंसियाँ सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक तौर पर जाँच अभियान चला रही हैं।

बता दें कि, पश्चिम बंगाल में पहले से ही इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी है। जमात-उल-मुजाहिदीन (जेएमबी) नामक स्थानीय आतंकवादी संगठन के एक हिस्से के साथ आईएस जुड़ा हुआ है। इसी साल फरवरी में कोलकाता के बाबूघाट इलाके से जेएमबी का एक आतंकी अरिफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया था। वह 2018 में होने वाले बोधगया विस्फोट में शामिल था। इस दौरान पूछताछ में उसने असम में बढ़ रहे आतंकी संगठन के साथ ही चिराग असम में जमात-उल-मुजाहिदीन के ट्रेनिंग कैंप होने का भी खुलासा किया था।

गौरतलब  है कि जमात-उल- मुजाहिदीन ने तीन साल पहले भी पश्चिम बंगाल के कई जिलों में पोस्टर चिपकाया था और इस पोस्टर के जरिए वहाँ के स्थानीय युवाओं से आतंकी संगठन से जुड़ने की अपील की थी। इस्लामिक स्टेट द्वारा भेजे गए इस मैसेज के बाद राज्य की सुरक्षा एजेंसियाँ विशेष तौर पर आतंकी नेटवर्क का पता लगाने और उसे नाकाम करने में जुट गई हैं।

मेरे पति ने नहीं की घरेलू हिंसा, मीडिया ने फैलाई अफवाह: त्रिपुरा CM बिप्लब देब की पत्नी

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देब के बारे में खबर आई थी कि उनकी पत्नी नीति देब ने उन पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है और साथ ही उन्होंने तलाक की अर्जी भी दी है। खबरों के मुताबिक, तलाक की याचिका नई दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में दायर की गई है। मनीकंट्रोल, CNBCTV18, क्विंट, डीएनए, इत्यादि उन मीडिया हाउस में से हैं, जिन्होंने इस खबर को दिखाया।

मगर सीएम बिप्लव देव की पत्नी नीति देब ने इन तमाम दावों को नकारते हुए एक फेसबुक पोस्ट की है। इस पोस्ट में उन्होंने झूठे दावों का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए इस बात का खंडन किया है कि उन्होंने अपने पति के खिलाफ ऐसा कोई आरोप लगाया है। नीति देब ने लिखा है कि सिर्फ गंदे, भद्दे और बीमार किस्म की मानसिकता वाले लोग ही घटिया प्रचार के लिए इस तरह की अफवाहें फैलाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए इस तरह की गंदी अफवाहों को फैलाने के लिए उन्हें मोटी रकम दी जाती है। लेकिन दुख की बात ये है कि लोग ऐसी बेतुकी बातों पर प्रतिक्रिया देते हैं, सुनते हैं और भरोसा भी कर लेते हैं। आगे उन्होंने लिखा कि अफवाह फैलाने वाले न केवल उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि त्रिपुरावासियों से उन्हें मिले प्रेम, लगाव और इज्जत का भी अपमान कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से उन पर भरोसा रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।

नीति देब ने CNBCTV18 के ट्वीट का जवाब देते हुए रिपोर्ट को फर्जी खबर बताया और साथ ही इसके लिए समाचार एजेंसी की आलोचना करते हुए कहा कि झूठी पब्लिसिटी पाने के लिए अफवाहों के आधार पर ऐसी खबरें चलाकर एक सम्मानित महिला की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि एक अपराध है।

नीति देब ने अपने फेसबुक अकाउंट पर इन झूठी अफवाहों को लेकर मजाकिया लहजे में भी एक पोस्ट करते हुए लिखा था कि ये सब कब हुआ, उन्हें तो पता भी नहीं चला। उन्होंने इसमें लिखा था कि उनका प्यार शर्त रहित और सच्चा है और इसके लिए उन्हें किसी को कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है।

नीति देब के द्वारा इस खबर का खंडन करने के बाद CNBCTV18 ने अपनी खबर हटा ली और साथ ही ट्वीट भी डिलीट कर दिया।

मगर कई मीडिया आउटलेट्स ने पहले ही CNBC की खबर के आधार पर ये खबर चला दी थी, जो कि अभी ऑनलाइन साइटों पर मौजूद हैं और सोशल मीडिया साइटों पर शेयर किए जा रहे  हैं।

INS विक्रमादित्य पर आग बुझाने के दौरान 5 साथियों को बचाते हुए Lt Cmdr धर्मेंद्र सिंह चौहान हुए बलिदान

शुक्रवार (26 अप्रैल) को भारतीय नौसेना के विमानवाहक युद्धपोत INS विक्रमादित्य में लगी आग को बुझाने के दौरान रतलाम के निवासी 30 वर्षीय लेफ़्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान वीरगति को प्राप्त हो गए। भारतीय नौसेना ने अपने बयान में कहा कि यह हादसा उस वक़्त हुआ जब INS विक्रमादित्य युद्धपोत कर्नाटक के कारवार स्थित हार्बर में प्रवेश कर रहा था। अब इसे लेफ़्टिनेंट कमांडर धर्मेंद्र सिंह चौहान का जज़्बा ही कहेंगे कि उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर ज़िम्मेदारी निभाते हुए पोत पर लगी आग पर काबू पाने का साहस दिखाया।

इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्यक्त करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दर्ज की है। साथ ही अन्य ट्विटर यूज़र्स ने भी उन्हें अपने ट्वीट के ज़रिए श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

ख़बर के अनुसार, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने अपने शोक संदेश में कहा, “हम उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम करते हैं और यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करेंगे कि उनका बलिदान बेकार नहीं जाए। हम हमेशा और हर समय उनके परिवार के साथ खड़े रहेंगे।” अभी पिछले ही महीने लेफ़्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान की शादी हुई थी। उनके परिवार में केवल अनकी माँ और पत्नी ही बचे हैं।

अपने इकलौते बेटे के बलिदान पर लेफ़्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान की माँ टमाकुंवर का रो-रोकर बुरा हाल है। बेसुध अवस्था में उन्हें हर तरफ़ केवल उनके ‘बहादुर लाल’ का ही चेहरा नज़र आता है। अपने बेटे के अदम्य साहस पर उन्हें गर्व है और इसीलिए वो हर समय एक ही बात कहती हैं कि ‘मेरा रियल हीरो चला गया’। लेफ़्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान की माँ ने बताया कि उनके बेटे ने आग में फँसे अपने पाँच साथियों को भी बचाया।

जानकारी के अनुसार, लेफ़्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान के पिता उनके साथ नहीं रहते थे, अकेली माँ ने ही उन्हें पाला-पोसा था। कड़े संघर्षों के बाद माँ ने उन्हें इंजीनियर बनाया था। इसी ग़म में वो रोती-बिलखती अपने बेटे को याद करती हैं और उनके ना होने के सदमे को वो नहीं झेल पा रही हैं। इस मंज़र को देखने वालों का कलेजा मुँह को आ जाता है।

फ़िलहाल, घटना के कारणों का पता लगाने के लिए ‘बोर्ड ऑफ़ एन्कवायरी’ जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। नौसेना ने इस बात की भी जानकारी दी कि जो अन्य पाँच अधिकारी आग बुझाने के दौरान बच गए थे, वो धुएँ की चपेट में आने से बेहोश हो गए थे। उन्हें तुरंत इलाज के लिए कारवार स्थित नौसैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। INS विक्रमादित्य को नवंबर 2013 में रूस के सवेरोदविंसक में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।

8 राज्यों में आतंकी हमले की खबर निकली झूठी, फर्जी कॉल करने वाला गिरफ्तार

कल (अप्रैल 26,2019) एक व्यक्ति ने बेंगलुरु पुलिस को कॉल करके दावा किया कि कर्नाटक समेत 8 राज्यों में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने की साजिश कर रहे हैं। इस व्यक्ति के दावे के बाद पुलिस हरकत में आ गई। जब मामले की जाँच हुई तो मालूम चला कि यह फर्जी कॉल थी, जिसे 65 साल के एक ड्राइवर ने किया था। फर्जी कॉल करने वाले उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है।

गौरतलब है कि इस कॉल के बाद कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक और आईजी अधिकारियों ने अन्य 7 राज्यों (तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी, गोआ, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र) के डीजीपी को पत्र लिखकर अलर्ट रहने को कहा था।

गौरतलब है, शुक्रवार (अप्रैल 26, 2019) की शाम साढ़े 5 बजे स्वामी सुंदर नाम के आरोपित ने खुद को लॉरी ड्राइवर बताते हुए बेंगलुरु पुलिस को कॉल किया और दावा किया कि कर्नाटक समेत 8 राज्यों में आतंकी ट्रेनों में हमला कर सकते हैं। साथ ही यह भी बताया कि तमिलनाडु के रामनाथपुरम में 19 आतंकी मौजूद हैं। जानकारी मिलते ही कर्नाटक पुलिस ने अन्य संबंधित राज्यों की पुलिस को पत्र लिखकर आवश्यक कदम उठाने को कहा।

इसी बीच बता दें कि एक अन्य व्यक्ति ने चेन्नई पुलिस कार्यालय में कॉल करके रामेश्वरम में मशहूर पंबन सी-ब्रिज को ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी दी है। जिसके बाद पुलिस ने स्निफर डॉग्स और बम डिटेक्शन स्क्वॉड के साथ जाकर इलाके में सर्च ऑपरेशन की शुरुवात कर दी। यहाँ पंबन और रामेश्वरम को जोड़ने वाली सड़क और रेल ब्रिजों की जाँच के साथ ही रोड ब्रिज पर चल रहे वाहनों की भी तलाशी ली जा रही है।

मायावती के कार्यकाल में हुए घोटाले की CBI जाँच शुरू: ₹1,179 करोड़ का हुआ था घाटा

मायावती के कार्यकाल में 7 बंद चीनी मिलों को बेचने में हुए घोटाले के संबंध में सीबीआई लखनऊ की ऐंटी करप्शन ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा 14 अन्य चीनी मिलों की बिक्री को लेकर 6 अलग जगहों पर भी आरंभिक जाँच करने के निर्देश दिए गए हैं।

साल 2010-11 में इन मिलों को बेचने में हुए घोटाले के कारण प्रदेश सरकार को ₹1,179 करोड़ का राजस्व घाटा हुआ था। जिसके मद्देनज़र गत वर्ष 12 अप्रैल को यूपी सरकार ने 21 (14+7) चीनी मिलों की बिक्री में हुई गड़बड़ियों में सीबीआई जाँच की माँग की थी।

सीबीआई ने इस मामले में गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी धर्मेंद्र गुप्ता, दिल्ली के रोहिणी निवासी राकेश शर्मा, सुमन शर्मा, बेहट के निवासी मोहम्मद नसीम अहमद और मोहम्मद वाजिद का नाम दर्ज़ किया है। इन लोगों के ख़िलाफ़ सीबीआई ने धोखाधड़ी, जालसाजी और कंपनी एक्ट 1956 की धारा 629 (ए) के तहत मामला दर्ज किया है।

इससे पूर्व साल 2017 में 9 नवंबर को राज्य चीनी निगम लिमिटेड ने चीनी मिल खरीदने वाली दो फर्जी कंपनियों के ख़िलाफ़ गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसे सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन विंग की जाँच के पश्चात दर्ज किया गया था।

चूँकि लोकसभा चुनावों का दौर जारी है तो इस जाँच के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में अभी 4 चरण के चुनाव होने बाकी हैं ऐसे में जाँच का असर सपा-बसपा के गठबंधन पर पड़ सकता है। बता दें कि इस मामले की लोकायुक्त जाँच रिपोर्ट अखिलेश सरकार को सौंपी गई थी, लेकिन तब इस मामले पर ज्यादा गौर नहीं किया गया था।

6 घंटे तक ठप रहा एअर इंडिया का SITA सर्वर, हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फँसे रहे

एयर इंडिया का सर्वर शनिवार (अप्रैल 27, 2019) को लगभग 6 घंटे तक ठप रहा। इसकी जानकारी खुद एयर इंडिया के सीएमडी अश्विनी लोहानी ने दी है। उन्होंने बताया कि सर्वर 6 घंटे खराब रहने के बाद ठीक हुआ और जल्द ही उड़ानों को शुरु कर दिया जाएगा।

एयर इंडिया फ्लाइट्स का सर्वर सुबह 3:30 से डाउन था। सर्वर डाउन होने की वजह से एयर इंडिया की सभी उड़ानों में देरी के चलते हजारों यात्री इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फँसे हुए थे और इसी तरह मुंबई एयरपोर्ट पर भी हजारों यात्री फँसे हुए थे। यात्रियों के बोर्डिंग पास भी नहीं निकल पा रहे थे। जिसकी वजह से दिल्ली एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल था। सर्वर में दिक्कत की वजह से इसकी घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स पर भी असर पड़ा।

एयरलाइंस के SITA सर्वर में खराबी की बात खुद कंपनी ने स्वीकार की। सर्वर डाउन होने के बाद एयर इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी किया था। जिसमें एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा था कि SITA सर्वर के ब्रेकडाउन होने की वजह से सभी उड़ानें प्रभावित हुई हैं। हमारी तकनीकी टीम इसे ठीक करने की कोशिश कर रही है। जल्द ही सिस्टम सही हो जाएगा। इसके साथ ही एअर इंडिया ने यात्रियों को हो रही असुविधा के लिए खेद भी जताया था।

गौरतलब है कि इसी तरह की एक घटना पिछले साल 23 जून को हुई थी, जब एयरलाइन के चेक-इन सॉफ्टवेयर में एक तकनीकी खराबी की वजह से  पूरे भारत में 25 उड़ानों में देर हो गई थी।

यौन अपराध के पीड़ित ही नहीं ‘आरोपितों’ की भी पहचान छिपाई जानी चाहिए: SC में याचिका

यौन अपराध के आरोपितों की पहचान छुपाने हेतु सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में मामले की जाँच पूरी होने तक आरोपित की पहचान छिपाने के लिए दिशानिर्देश तय करने के संबंध में निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। साथ ही याचिका के जरिए माँग की गई है कि यह निर्देश मीडिया को भी दिए जाएँ।

यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि कभी-कभी झूठे आरोप लगने के कारण एक निर्दोष का पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है, इसके कई उदाहरण है, जिनमें किसी को फंसाया गया। जिसके कारण आरोपित ने आत्महत्या कर ली। बता दें कि यौन अपराध के मामलों में पीड़ित की पहचान नहीं उजागर की जा सकती है।

आज हमारे समाज में महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से बनाए गए कानूनों का कुछ लोगों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। जिसके कारण इस तरह की याचिका दायर करने की जरूरत पड़ी। निसंदेह ही एक बलात्कारी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन ये भी सच है कि कानूनों का दुरुपयोग करके किसी निर्दोष को नहीं फँसाया जाना चाहिए। जिस तरह यह जरूरी नहीं है कि यौन अपराध की पीड़ित कोई महिला ही हो, उसी प्रकार यह जरूरी नहीं है कि यौन अपराध का आरोपित पुरुष ही हो।

साल 2016 में दिल्ली की एक अदालत ने एक निर्दोष व्यक्ति को बरी किया था जिस पर पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में 2013 में पहचान वाली एक महिला के साथ दुष्कर्म करने का आरोप था। इस मामले में न्यायालय ने कहा था कि ऐसे मामलों में न केवल आरोपी की प्रतिष्ठा और गरिमा को बहाल करना मुश्किल हो जाता है बल्कि अपमान, दुख, संकट और आर्थिक नुकसान की भरपाई करना भी काफी मुश्किल हो सकता है, लेकिन बरी किए जाने से उसे कुछ सांत्वना मिल सकती है और वह नुकसान के लिए मामला दर्ज करा सकता है। गौरतलब है इस सुनवाई के दौरान व्यक्ति ने दावा किया था कि वह पिछले पाँच साल से महिला को जानता है तथा महिला उससे पैसे ऐंठने की कोशिश कर रही थी। उसने यह भी कहा कि उन दोनों के शारीरिक संबंध आपसी सहमति के आधार पर बने थे।

इतना ही नहीं साल 2018 में दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में जनवरी से मई के बीच 6 जिलों से जुटाए आँकड़ों के अनुसार कुल 266 दुष्कर्म के केस दर्ज हुए थे। इनमें 50 फर्जी साबित हुए थे। अब ऐसी स्थिति में ये वाकई विचार करने का विषय है कि यौन अपराध के आरोपित पर अपराध सिद्ध होने तक उसकी पहचान उजागर की जाए या नहीं। देखना है कि कोर्ट का इस याचिका पर क्या फैसला आता है।

श्री लंका में फिर से 3 ब्लास्ट, दहशत का माहौल: Russia Today की रिपोर्ट

श्री लंका में शुरू हुआ विस्फोटों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रूसी खबरिया चैनल के ट्वीट के हवाले से मिली सूचना के अनुसार फिर से 3 ब्लास्ट की खबरें आ रही हैं। हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन धमाकों में कितना नुकसान हुआ है।

बताया जा रहा है कि आज का यह ब्लास्ट तब हुआ जब बड़े पैमाने पर हुए पिछले 9 ब्लास्ट के संदिग्धों के खिलाफ धर-पकड़ अभियान चलाया जा रहा था।

इस सर्च अभियान में 10000 से ज़्यादा सैनिक लगाए गए थे। पहले भी कई संदिग्धों की गिरफ़्तारी हो चुकी थी।

बता दें कि इससे पहले ईस्टर संडे की सुबह ने श्रीलंका को हिला कर रख दिया था। 21 अप्रैल 2019 को श्रीलंका में इस्लामी आतंक का कहर बरपा है। नज़ारा बेहद वीभत्स और दिल दहला देने वाला था। अब तक लगातार आठ बम धमाके और बाद में एक बम धमाका हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक इन धमाकों में 300 से ज्यादा मौतें हुई हैं और करीब 500 ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं।

UP में हवन और केरल में गौ-हत्या करने वाले के साथ भ्रमण कॉन्ग्रेस का नया ‘सेकुलरिज्म’ है

केरल के पूर्व यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रिजिल मकुट्टी को 2017 में एक बछड़े को घसीटने और बहुत ही क्रूरता के साथ उसे पब्लिक प्लेस में काटने के कारण कॉन्ग्रेस से निलंबित कर दिया गया था और अब उन्हें लोकसभा चुनावों के लिए केरल में पार्टी के लिए आक्रामक तरीके से प्रचार करते हुए देखा जा रहा है।

वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता प्रियंका गाँधी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की रिजिल मकुट्टी के साथ की कई तस्वीरें रिजिल ने खुद अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट की थीं।

रिजिल ने 20 अप्रैल, 2019 को प्रियंका गाँधी के साथ अपनी तस्वीर अपलोड की थी, जब वह चुनावी रैलियों और जनसभाओं को संबोधित करने के लिए केरल की यात्रा पर थीं। 17 अप्रैल, 2019 को उनके द्वारा अपलोड किए गए एक अन्य पोस्ट में, रिजिल को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का स्वागत और अभिवादन करते देखा जा सकता है।

2017 में, गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के कदम के विरोध में, रिजिल ने अपने सहयोगियों के साथ एक बछड़े को खींच कर और क्रूरता से उसका कत्ल कर दिया था। गाय को हिंदुओं द्वारा एक पवित्र जानवर माना जाता है। फिर भी बछड़े का वध करने का कार्य केंद्र में हिंदुओं और हिंदुत्ववादी सरकार को एक मजबूत संकेत भेजने के लिए किया गया था। वो सन्देश शायद उस आस्था को न मानने का था या कानून के उल्लंघन का, दोनों में से कोई भी क्षमा योग्य नहीं है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने तब अपनी पीड़ा व्यक्त की थी और इस घटना की निंदा की थी।

हालाँकि, हिंदुओं की भावनाओं के लिए वास्तविक चिंता का विषय यह है कि मकुट्टी पार्टी गतिविधियों में लगातार शामिल है। सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी द्वारा व्यक्त किए गए आक्रोश के साथ-साथ मकुट्टी का निलंबन भी एक ढकोसला प्रतीत हो रहा है क्योंकि उसकी पार्टी में सक्रियता देखकर स्पष्ट है कि रिजिल मकुट्टी के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है।

तथ्य यह है कि राहुल ने मकुट्टी को केरल राज्य कॉन्ग्रेस इकाई के लिए काम करना जारी रखने की अनुमति दे दी थी, जिसमें कहा गया था कि उनके पास खुद को किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जोड़ने में कोई दिक्कत नहीं थी, जिसने बछड़े को मारकर हिंदू भावनाओं को आहत किया था। राहुल और प्रियंका के साथ रिजिल की हाल की तस्वीरें भी इसकी पुष्टि करती हैं।

लगभग साफ है कि कॉन्ग्रेस का हिन्दू आस्था और उनके प्रतीकों के अपमान के प्रति आक्रोश महज एक दिखावा है। उनका मंदिर-मंदिर दौड़ लगाना और राहुल-प्रियंका का उत्तर प्रदेश में हवन-पूजा भी केवल वोट बैंक को आकर्षित करने की कोशिश है जबकि बार-बार उनके व्यवहार से उनका हर झूठ बाहर आता रहता है। यह घटना नई नहीं है ऐसा पहले भी हो चुका है। एक गौहत्या करने वाले के साथ की उनकी तस्वीरें उनके चरित्र के दोहरेपन को उजागर करती हैं।

मोदी इंटरव्यू के दौरान कपड़े फाड़कर ‘पछड़ा-पछड़ी’ करना चाहते हैं रवीश, उन्हें पागल होना है

रवीश कुमार का परिचय देते हुए ये नहीं लिखूँगा कि वह ‘ये हैं, वो हैं’ या फिर ‘उनकी फलाँ उपलब्धियाँ हैं’ और उन्हें उनके स्तर की याद भी नहीं दिलाऊँगा क्योंकि ऐसा बहुतों बार हो चुका है। हमारा मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को ख़ुद इस बात की कोई परवाह नहीं है कि वो क्या कर रहा है, कहाँ बैठा है और वह जो भी कर रहा है, वो उसके अनुरूप है या नहीं जहाँ वह बैठा हुआ है, तो फिर याद दिलाने से क्या फ़ायदा?

बार-बार याद दिलाने से क्या फ़ायदा? नॉन-पोलिटिकल प्राइम टाइम हो या टीवी की स्क्रीन काली कर देना, रवीश ने पत्रकारिता में हर वो बाहरी चीजें ठूँसनी चाही, जिसका न पत्रकारिता से कोई लेना-देना है और न ही पत्रकारिता के मानदंडों से। जब वह अपोलोटिकल प्राइम टाइम में बोल रहे थे तो यूँ लग रहा था जैसे डिस्कवरी का कोई जानवरों वाला कॉमेडी शो चल रहा हो। ख़ैर, रवीश कुमार के मन को पढ़ कर जानने की कोशिश करते हैं कि उनकी इच्छा क्या है?

रवीश की कुंठा का कारण क्या है?

रवीश कुमार के मन में ये बात साफ़-साफ़ झलक रही थी कि वो इस बात से ख़ासे दुःखी हैं कि प्रधानमंत्री उन्हें इंटरव्यू नहीं देते। वो इस बात को ‘प्रधानमंत्री रवीश से डरते हैं’ वाला नैरेटिव बनाकर प्रचारित करना चाहते हैं ताकि जनता भी प्रधानमंत्री पर दबाव डालते हुए कहे कि आप रवीश को इंटरव्यू दो। अफ़सोस यह कि वायर, क्विंट और स्क्रॉल के पत्रकारों के अलावा कोई और उनके इस आंदोलन में शामिल नहीं हो रहा।

जिस तरह उन्होंने अपने प्राइम टाइम में कहा कि किसी ने मोदी जी को कुमार को इंटरव्यू देने को कहा तो वो अक्षय कुमार को दे आए, उससे उनका दर्द साफ़-साफ़ झलक रहा था। आख़िर झलके भी क्यों न, रवीश अपने प्राइम टाइम में एक्टिंग कर रहे हैं और एक्टिंग इंडस्ट्री को इस बात से दुःख पहुँचा होगा। शायद अक्षय कुमार ने इसी दुःख से ग्रसित होकर प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लिया और साबित कर दिया कि अगर पत्रकार अच्छी एक्टिंग कर सकते हैं तो उनके जैसे एक्टर भी अच्छी पत्रकारिता करके दिखा सकते हैं।

मैं रवीश कुमार के शहर से हूँ। उसी शहर से जहाँ उनका जन्म हुआ था। उनके और मेरे घर की दूरी 20-30 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होगी। हमारे यहाँ से लड़के अक्सर उनसे मिलने आते रहते हैं। एनडीटीवी स्टूडियो में मोतिहारी से आनेवाले लोगों का स्वागत भी किया जाता है और रवीश उनसे मिलने के लिए समय देते हैं, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन, इससे रवीश का भी फ़ायदा होता है क्योंकि बिहार के किसी कोने में अगर किसी प्राथमिक सरकारी विद्यालय में दूसरी कक्षा की परीक्षा में 3 दिन की देरी हुई है, तो उन्हें पता चल जाता है। फिर क्या, इसपर आधे घंटे का एक प्राइम टाइम तो हो ही सकता है

और हाँ, एनडीटीवी पर आने वाले ऐडवर्टाइज़मेंट को भी ले लें तो एक-डेढ़ घंटे का शो तो यूँ ही बन जाता है। रवीश कुमार के शहर से, उसी मिट्टी से होने के कारण मैनें बहुत हद तक उनके मन को पढ़ लिया है और मैंने जो भी अनुभव किया वो आपसे शेयर करना चाहूँगा। ठहरिए, ये मज़ाक नहीं है, इसे सटायर न समझें।

दरअसल, रवीश कुमार प्रधानमंत्री मोदी से बहस करना चाहते हैं, उनसे इंटरव्यू नहीं लेना चाहते। असल में बहस भी नहीं करना चाहते, वो पीएम मोदी से ‘पछड़ा-पछड़ी’ करना चाहते हैं। इसे लालूकाल की गुंडागर्दी का प्रभाव कहिए या फिर नक्सलियों के ख़िलाफ़ हथियार उठाने वाले एकमात्र समाज का गरम दिमाग, बिहार में मसलों को पछड़ा-पछड़ी कर सुलझाने की बात आम रही है। रवीश कुमार और मैं एक ही इलाके से हैं, इसीलिए इस बात को बख़ूबी समझते हैं।

हालाँकि, मुझे पढ़ाई करने के लिए मुझे 12वीं से पहले शहर से बाहर निकलने का अवसर नहीं मिला, मुझे गर्व है कि रवीश उस ज़माने में भी बाहर निकलने मे सफ़ल रहे। मेरी शिक्षा-दीक्षा उनकी तरह पटना के किसी कैथोलिक प्राइवेट स्कूल में नहीं हुई है। बचपन में बड़े-बड़े कैथोलिक स्कूलों में पढ़ने का अवसर अगर मिला होता तो शायद मैं भी उस ऊँचाई पर पहुँचने का स्वप्न देखता, जहाँ आज यह खड़े हैं। लेकिन माफ़ कीजिए, वो दिल्ली के मुख्यमंत्री कहते हैं न, ‘हम तो छोटे लोग हैं जी!’

रवीश को ‘पछड़ा-पछड़ी’ से वंचित न रखा जाए

वापस मोदी और उनके इंटरव्यू पर आते हैं। नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ़ अक्षय कुमार ही नहीं बल्कि इस चुनाव से पहले कई मीडिया हाउस को इंटरव्यू दिया है। इस साल की शुरुआत ही एएनआई को दिए उनके इंटरव्यू से हुई थी। हाँ, वही एएनआई जिसके कंटेंट की ज़रूरत एनडीटीवी को भी पड़ती है। पीएम ने एबीपी न्यूज़ को भी इंटरव्यू दिया, उसमें उनसे साध्वी प्रज्ञा को लेकर भी सवाल पूछे गए, राफेल को लेकर सवाल दागे गए। शायद ही किसी मीडिया हाउस या पत्रकार ने पीएम से राफेल को लेकर सवाल न पूछे हों। फिर, रवीश की कुंठा का कारण क्या है? फिर वही बात, वो ‘पछड़ा-पछड़ी’ करना चाहते हैं। रवीश चाहते हैं कि वो राफेल पर मोदी से सवाल पूछें, पीएम जवाब दें, रवीश फिर काउंटर सवाल पूछें और फिर अंत में वही- “पछड़ा पछड़ी”। रवीश कुमार इस बात से दुःखी हैं कि मोदी और पत्रकारों की ‘पछड़ा-पछड़ी’ क्यों नहीं हो रही?

आख़िर मोदी का इंटरव्यू लेनेवाले पत्रकार ‘द वायर’ का रिफरेन्स देकर सवाल क्यों नहीं पूछ रहे? आख़िर मोदी जब जवाब देना शुरू करते हैं तो उन्हें बीच में क्यों नहीं टोका जा रहा है? आख़िर ये कैसी पत्रकारिता है जहाँ सामनेवाले को जवाब देने के लिए पूरा समय दिया जाए? आख़िर पत्रकार लाइव इंटरव्यू में स्टूडियो के भीतर ही ‘पछड़ा-पछड़ी’ क्यों नहीं कर रहे? रवीश कुमार चाहते हैं कि कोई पत्रकार लाइव इंटरव्यू के दौरान पीएम के जवाब के बाद टेबल पर एक करारा मुक्का मारे और अपनी कुर्सी को नीचे पटक डाले।

रवीश की इच्छा है कि मोदी का इंटरव्यू लेनेवाला पत्रकार उनके जवाब के दौरान अपने ही मुँह पर माइक दे मारे। कैमरा पटक दिया जाए, माइक फेक दी जाए, टेबल पर मुक्का मारा जाए, कुर्सी को लताड़ दिया जाए और फिर पत्रकार नाचते हुए पागलों जैसी हरकत करने लगे। तब होगा ‘कठिन सवाल’, जिसे हम ‘Tough Questions’ भी कहते हैं। रवीश कुमार पूरे भारत के सामने एक नेशनल टीवी पर पागल होना चाहते हैं, वो भी प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू लेने के दौरान।

रवीश को उनके पागलपन से वंचित किया जा रहा है। उन्हें खुलकर पागल नहीं होने दिया जा रहा। उन्हें पगलई करने दिया जाए, पीएम से अपील की जाए कि सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाकर एक इंटरव्यू रवीश कुमार को दे ही दी जाए। उन्हें भरे स्टूडियो में नाचने-गाने, तांडव करने और अपने कपडे फाड़ डालने की अनुमति दी जाए। उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को यूँ न दबाया जाए। रवीश कुमार पीएम मोदी से इंटरव्यू लेकर दुनिया को अपनी अपनी ‘कठिन सवालों वाली’ पत्रकारिता दिखाना चाहते हैं।

भाजपा और मोदी समझ नहीं रहे, रवीश घंटेभर के लिए पागल होना चाहते हैं, अपना कोट फाड़कर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना चाहते हैं क्योंकि बाकी पत्रकार इंटरव्यू में बस सवाल पूछ रहे हैं। अरे ये पत्रकारिता थोड़े ही है? पत्रकारिता है पागल हो जाना, कपड़ा फाड़ कर नाचना। उनका पड़ोसी होने के कारण मैंने अपना कर्त्तव्य निभाते हुए दुनिया को उनकी कुंठा से अवगत कराया है,अब ज़िम्मेदारी आपकी है कि उनकी व्यथा दूर की जाए।