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Pak लड़कियों का चीन में देह व्यापार: मसूद अज़हर मामले के बाद 8 चाइनीज नागरिक गिरफ़्तार

पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने पर इस बार चीन ने अड़ंगा नहीं लगाया। कहा जा रहा है कि इसके बाद पाकिस्तान और चीन के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने सोमवार (मई 6, 2019) को चीन के 8 नागरिकों को गिरफ़्तार किया, जिनमें एक महिला भी शामिल है। इन सब पर मानव तस्करी का आरोप है। ये लोग पाकिस्तान से लड़कियों की तस्करी कर उन्हें चीन ले जाते थे। इन लड़कियों से पहले तो फ़र्ज़ी शादी का कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है, फिर इन्हें चीन ले जाकर देह व्यापार की काली इंडस्ट्री में धकेल दिया जाता है। पाकिस्तान की इस कार्रवाई को चीन द्वारा मसूद अज़हर मामले में भारत के सामने झुकने से जोड़ कर देखा जा रहा है।

पिछले सप्ताह भी एफआईए ने 2 चीनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया था। इन्हें फैसलाबाद में एक शादी समारोह से उठाया गया था। फैसलाबाद पाकिस्तान के प्रसिद्ध शहर लाहौर से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।पाकिस्तानी एजेंसी एफआईए के पंजाब निदेशक तारिक रुस्तम ने एजेंसी की इस कार्रवाई के बारे में न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया:

“गिरफ़्तार किए गए ये लोग मानव तस्करी में शामिल हैं और पाकिस्तानी लड़कियों को चीन ले जाकर उनसे देह व्यापार कराते हैं। हमें सूचना मिली थी कि चाइनीज नागरिक पाकिस्तान से अंग तस्करी और मानव तस्करी कर रहे हैं। ये लोग ज्यादातर पाकिस्तान में रह रही अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय की लड़कियों से शादी करते हैं। इसके बाद उन्हें चीन ले जाकर उनसे जबरन देह व्यापार कराते हैं।”

गिरफ़्तार आरोपितों में इस गिरोह का कैनेडिश सरगना भी शामिल है। पिछले एक साल से लाहौर एयरपोर्ट के पास रह रहा कैनेडिश सरगना पाकिस्तानी लड़कियों को पहले लाहौर के किसी किराए के घर में रखता था। वहाँ उन्हें चाइनीज भाषा सिखाई जाती थी। फिर उन लड़कियों के शादी सम्बन्धी फ़र्ज़ी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बाद उन्हें चीन ले जाया जाता था और फिर देह व्यापार में ढकेल दिया जाता था। बता दें कि चीन और पाकिस्तान की सीमावर्ती इलाकों में लम्बे अरसे से आपस में शादियाँ होती आई हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के प्रति दुराचार, अत्याचार और दुष्कर्म की घटनाएँ आम हैं। कहा जा रहा है कि ये चाइनीज गिरोह काफ़ी दिनों से पाक में सक्रिय है लेकिन चीन को नाराज़ न करने के लिए इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही थी।

पाकिस्तानी अधिकारी पिछले कुछ वर्षों में अवैध तरीके से चीन भेजी गई लड़कियों की सूची तैयार कर रहे हैं और आँकड़ें का पता लगा रहे हैं। शक है कि इनकी संख्या सैंकड़ों में हो सकती है। पाकिस्तानी सरकार ने एजेंसियों को ऐसे चाइनीज गिरोहों के ख़िलाफ़ सख्ती से काम लेने को कहा है। ग़रीब ईसाई लड़कियाँ पैसे और बेहतर जीवन की लालसा में इनके बहकावे में आ जाती हैं। फ़र्ज़ी मैच मेकिंग सेंटर के जरिए इन्हें झाँसे में लाया जाता है। फ़र्ज़ी दस्तावेजों में चाइनीज लड़कियों को ईसाई या मुस्लिम धर्म का दिखाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीन में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का मुद्दा कई बार उठ चुका है।

Fact Check: क्या BSF से निलंबित तेज बहादुर यादव इस वायरल वीडियो में दारू पी रहे हैं?

तेज बहादुर यादव ने जब बीएसएफ में रहते हुए खाने में कथित ख़राबी का वीडियो बनाकर वायरल किया था, तभी से वह लगातार विवादित कारणों से न्यूज़ में बने हुए हैं। उसके बाद उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और उन्हें बीएसएफ से निकाल दिया गया। इसके बाद ख़बर आई कि उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर बहुत सारे पाकिस्तानी दोस्त जोड़ रखे हैं। इसके बाद वो राजनीति में उतरे और सीधा वाराणसी पहुँच कर पीएम मोदी से निर्दलीय लड़ने का ऐलान कर दिया। ऐन वक्त पर सपा-बसपा महागठबंधन ने भी उन्हें टिकट देकर बहती गंगा में हाथ धोने की सोची लेकिन चुनाव आयोग का डंडा चला और तेज बहादुर यादव का नामांकन रद्द हो गया।

अब तेज बहादुर यादव का नया वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह दारू पीते हुए दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि तेज बहादुर इसमें अपने परिचितों संग दारू पी रहे हैं। इस वीडियो के बारे में पूछने पर हाँ-ना, हाँ-ना करने के बजाय तेज बहादुर ने पत्रकारों को बताया कि यह वीडियो 2 वर्ष पुराना है। इसका अर्थ यह कि इस वीडियो में तेज बहादुर यादव उपस्थित हैं। 1 मिनट 40 सेकण्ड्स के इस वीडियो को सोशल मीडिया, ख़ासकर फेसबुक पर काफ़ी सर्कुलेट किया जा रहा है।

इस वीडियो को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि इसे किसी ने चोरी-छिपे शूट कर लिया है। वीडियो में 2 लोग दारू पीते हुए दिख रहे हैं और उनके सामने खाने-पीने का सामान रखा हुआ है। कमरे में अन्य लोग भी हैं, जिनकी आवाज़ें सुनीं जा सकती हैं। इसमें एक व्यक्ति तेज बहादुर यादव से परिचय कराते हुए कह रहा है कि ये बीएसएफ के जवान रहे तेज बहादुर यादव हैं। वीडियो देखने पर यह भी पता चलता है कि जो व्यक्ति तेज बहादुर यादव के बारे में बात कर रहा है, वह पूरी तरह नशे में धुत है। वे लोग दिल्ली पुलिस व पंजाब पुलिस के बारे में मज़ाकियाँ बातें करते दिख रहे हैं।

इसमें एक व्यक्ति शांत बैठा हुआ है, जिसके तेज बहादुर यादव होने की बात कही जा रही है। यादव बड़बोले व्यक्ति को चेताते हुए भी दिख रहे हैं ताकि वो धीमा बोले। यादव उसे ‘आराम से, आराम से’ कहते दिख रहे हैं। तेजबहादुर को वीडियो में दारू पीते व स्मोकिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो वाले पोस्ट पर फेसबुक पर सैंकड़ों लोगों ने कमेंट किया, जिनमें से कुछ ने जानना चाहा कि क्या इसमें सच में तेज बहादुर यादव उपस्थित हैं? ख़बर लिखे जाने तक इस वीडियो को लाखों लोगों ने शेयर किया है।

चूँकि तेज बहादुर ने खुद इस वीडियो के बारे में स्वीकार लिया है, इसलिए यह वीडियो सच है। हाँ यह जरूर है कि जो लोग सिर्फ दारू पीने के लिए तेज बहादुर को निशाना बना रहे हैं, वो गलत हैं। जिस स्टेट में शराब बैन नहीं है और आप शांति के साथ दोस्तों संग पीते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। विरोध की राजनीति में किसी व्यक्ति का चरित्र-हनन करना अनुचित है।

सड़क पर गैर-कानूनी मस्जिद निर्माण: विरोध करने गए BJP विधायक हिरासत में, पुलिस का दोहरा रवैया

हैदराबाद में भाजपा विधायक टी राजा सिंह को रविवार (मई 5, 2019) को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया। दरअसल, हैदराबाद के अंबरपेट इलाके में जमीन के एक हिस्से पर शेड की स्थापना को लेकर दो समुदायों में झड़प हो गई।

मौके पर पहुँची पुलिस ने वहाँ पर इकट्ठा हुई भीड़ को हटाया। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि भाजपा के विधायक के साथ पुलिस बुरी तरीके से पेश आ रही है। इस वीडियो में पुलिस आयुक्त अंजनी कुमार अपनी टीम से भाजपा विधायक को वहाँ से ले जाने के लिए कहते हैं। अंजनी कुमार कहते हैं, “ले जा इसको, उठा कर ले जाओ।”

राजा सिंह इसका विरोध कर रहे होते हैं, मगर पुलिस बलपूर्वक राजा सिंह को पकड़कर ले जाती है और हिरासत में ले लेती है। हालाँकि राजा सिंह को इसके बाद जल्द ही रिहा कर दिया गया। विधायक राजा सिंह ने इसके बाद ट्वीट कर बताया कि वो और उनके समर्थक लोग सड़क पर गैर-कानूनी मस्जिद निर्माण का विरोध करने गए थे लेकिन पुलिस ने उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया जबकि गैर-कानूनी काम करने वाले लोग अभी भी खुला घूम रहे हैं।

भाजपा की तेलंगाना इकाई के नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने पक्षपातपूर्ण ढंग से काम किया और केवल हिंदू संगठनों के सदस्यों पर लाठीचार्ज किया। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय सरकारी जमीन पर अवैध रूप से अतिक्रमण करना चाहती थी, जिसे वो रोकने का प्रयास कर रहे थे। मगर पुलिस ने उनके साथ भेद-भाव वाला रवैया अपनाया।

उन्होंने कहा कि वो शहर के गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सिंह की स्थिति के बारे में जानने के लिए मौके पर पहुँचे थे, लेकिन उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया जो निंदनीय है। भाजपा नेताओं ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लक्ष्मण की अगुवाई में पुलिस महानिदेशक एम महेंदर रेड्डी से सोमवार (मई 6, 2019) शाम मुलाकात की और इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा।

14 साल की लड़की, 52 साल का वकील: दोनों की शादी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठहराया वैध

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 52 वर्षीय एक वकील से 14 वर्ष की नाबालिग से हुई शादी को वैध ठहराया है। ये शादी 4 वर्ष पूर्व हुई थी और नाबालिग लड़की अब 18 वर्ष की हो चुकी है। लड़की ने 18 वर्ष की हो जाने के बाद उक्त वकील के साथ रहने की इच्छा जताई, जिसके बाद यह निर्णय दिया गया। जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस भारती डांगरे की खंडपीठ ने उक्त वकील की याचिका पर सुनवाई के बाद पिछले सप्ताह यह निर्णय लिया। शिकायतकर्ता (जो अब 18 वर्ष की है) ने आरोप लगाया था कि उसके दादा-दादी ने उसे शादी करने के लिए मज़बूर किया था। वकील 10 महीने तक न्यायिक हिरासत में भी रहा था। उस पर बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था।

17 सितम्बर 2018 को लड़की 18 वर्ष की हो गई थी, अर्थात क़ानूनी तौर पर बालिग हो गई। इसके बाद वकील ने हाईकोर्ट का रुख कर मामले को रद्द करने की माँग की। गत सप्ताह महिला ने भी एक हलफनामा दायर कर कोर्ट से मामले को रद्द करने को कहा और बताया कि वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है। उसने कहा कि मामले को रद्द किए जाने से उसे कोई आपत्ति नहीं है और विवाद सुलझा लिया गया है। अतिरिक्त सरकारी अभियोजक अरुण कुमार पाई ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह से मामले को रद्द करने से ग़लत उदाहरण पेश होगा और व्यापक पैमाने पर जनता के बीच एक ग़लत प्रकार का संदेश जाएगा।

2 मई को दिए गए आदेश में पीठ ने कहा कि उसे महिला के भले-बुरे की चिंता है। अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा, “इसमें कोई विवाद नहीं है कि आरोपित के साथ शादी के समय वह नाबालिग थी लेकिन अब वह बालिग हो गई है और उसने आरोपी व्यक्ति के साथ रहने की इच्छा जताई है।” इसके बाद दोनों की शादी को भी अदालत ने वैध करार दिया।

2017 में उक्त वकील को पॉक्सो ऐक्ट के तहत 14 साल की लड़की से शादी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। तब वकील की नाबालिग (17 वर्षीय) पत्नी ने उस पर शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पुलिस के अनुसार, सांगली में रहने वाले लड़की के बुजुर्ग माता-पिता अपनी मौत से पहले बेटी की शादी होते देखना चाहते थे और उसी वक्त आरोपी वकील की पहली पत्नी की भी मौत हुई थी। इसके बाद सहमति से दोनों शादी के लिए राजी हो गए थे। आरोपित पर बाल विवाह से जुड़े ऐक्ट, पॉक्सो और रेप संबंधी आईपीसी की धारा लगाकर मामला दर्ज किया गया था। 

TMC सांसद प्रसून बनर्जी और सुरक्षा बलों के बीच हाथापाई, मतदान केंद्र से किए गए बाहर

लोकसभा चुनाव 2019 के पाँचवे चरण का मतदान 6 मई की सुबह से शुरू हुआ। ज्ञात हो कि सात राज्यों की 51 सीटों पर होने वाले मतदान में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल रहे। एक तरफ मतदान की प्रक्रिया जारी रही, तो वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में हिंसक हमलों का सिलसिला भी चला।

पश्चिम बंगाल में हावड़ा क्षेत्र से सांसद प्रसून बनर्जी और सुरक्षा बलों के बीच मतदान केंद्र संख्या 40 और 50 पर हाथापाई तक की नौबत आ गई, इसके बाद बनर्जी को मतदान केंद्र से बाहर निकाल दिया गया।

ऊपर के वीडियो में साफ़ तौर पर देख सकते हैं कि TMC सांसद बनर्जी किस तरह से सुरक्षा बलों से बहस कर रहे हैं। इसके अलावा वो मतदान केंद्र पर भी अधिकारियों से बहस कर रहे थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रंतिदेव सेन गुप्ता के ख़िलाफ़ भी हमला बोला। बनर्जी 2014 के लोकसभा चुनाव में माकपा (मार्कसवादी कम्यूनिस्ट पार्टी) के उम्मीदवार श्रीदीप भट्टाचार्य को हराकर विजयी हुए थे। TMC सांसद बनर्जी को हराने के लिए इस बार माकपा ने सुमित्रा अधिकारी को मैदान में उतारा है, वहीं कॉन्ग्रेस ने सुव्रा घोष को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल अपनी हिंसक गतिविधियों को लेकर शुरुआती दौर से ही चर्चा में रहा है। बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लेकर तो वहाँ आए दिन विवादों की ख़बरें सामने आती रहती हैं। कभी चुनाव अधिकारी के ग़ायब होने की ख़बर आती है, तो कभी बीजेपी कार्यकर्ताओं पर बम बरसाने की ख़बर का ख़ुलासा होता है। कभी मौलवियों का फ़रमान जारी होता है तो कभी TMC कार्यकर्ताओं की ख़ूनी झड़प का शिकार होकर कोई मतदाता अपनी जान से हाथ धो बैठता है। इसके अलावा बेतुकी हरक़तों भी सामने आती हैें, जिसमें मतदाताओं की इत्र लगी ऊँगली तक सूँघी जाती है।

UPA सरकार ने हमें ₹1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स दिए, राहुल हैं ग़ैर-ज़िम्मेदार: रिलायंस

रिलायंस ग्रुप ने कॉन्ग्रेस पर पलटवार करते हुए करारा जवाब दिया है। अभी हाल ही में राहुल गाँधी ने अनिल अम्बानी को क्रोनी कैपिटलिस्ट करार दिया था। रिलायंस ग्रुप ने जवाब देते हुए कहा कि यूपीए सरकार के दौरान भी उन्हें 1 लाख करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट्स मिले थे। रिलायंस समूह ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए एक मिथ्या आरोपों का अभियान चला रहे हैं। रिलायंस ग्रुप ने राहुल गाँधी के दावों पर जवाब देते हुए आगे कहा:

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जो दावे किए हैं, उनका न तो उन्होंने कोई आधार बताया है और न ही इन बयानों को जायज ठकराने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत पेश किया है। कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल में 2004 से 2014 के दौरान अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप को बिजली, दूरसंचार, सड़क, मेट्रो सहित ढाँचागत क्षेत्र की एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का ठेका मिला था।

रिलायंस ग्रुप ने राहुल गाँधी को गैर-ज़िम्मेदार करार दिया। राहुल गाँधी द्वारा अनिल अम्बानी को बेईमान कहे जाने को भी रिलायंस ग्रुप ने असत्य करार दिया। समूह ने पूछा की अगर अनिल अम्बानी के लिए राहुल ने जो बातें कहीं हैं वो सच हैं, तो फिर उनकी सरकार ने 10 वर्षों तक एक क्रोनी कैपिटलिस्ट और एक बेइमान व्यवसायी की मदद क्यों की? राहुल ने अम्बानी को राजनीतिक साँठ-गाँठ से काम करने वाला पूंजीपति बताया था। समूह ने कहा कि हमारे चेयरमैन पर उनके द्वारा लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं।

रिलायंस ने राहुल गाँधी से स्पष्ट करने को कहा कि आख़िर उनकी सरकार ने एक दशक तक रिलायंस और अम्बानी को इतने कॉन्ट्रैक्ट्स दिए ही क्यों? बता दें कि पीएम मोदी पर हमला करते वक्त राहुल गाँधी अक्सर अनिल अम्बानी का नाम लेते हैं और कहते हैं कि मोदी ने अम्बानी की जेब में हजारों करोड़ डाल दिया। हालाँकि, उनका आँकड़ा बदलता रहता है। इसी तरह कपिल सिब्बल अम्बानी की आलोचना भी करते हैं और फिर उनके लिए अदालत में ज़िरह भी करते हैं।

11 लड़कियों की ‘हत्या’ का मामला: SC ने CBI को दिया आदेश, 3 जून तक सौंपा जाए स्टेटस रिपोर्ट

बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया है कि वे 11 लड़कियों की कथित रूप से हत्या मामले की जाँच पर 3 जून तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की तरफ से बताया गया कि 11 लड़कियाँ गायब हैं, जिनकी हत्या का संदेह है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 जून को होगी। शुक्रवार (मई 3, 2019) को सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि 11 हत्याओं के मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत अन्य लोगों की भूमिका की जाँच हो रही है। जाँच एजेंसी को शक है कि जो 11 लड़कियाँ गायब हैं, उनकी हत्या कर दी गई है। फिलहाल उन लोगों के खिलाफ चार्जशीट की गई है जो शेल्टर होम में आते जाते थे।

सीबीआई ने सनसनीखेज का खुलासा करते हुए कहा था कि एक आरोपित के कहने पर श्मशान के एक खास स्थान की खुदाई करने पर वहाँ से हड्डियों की पोटली बरामद हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सभी आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में आरोप तय करते हुए मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया था।

गौरतलब है कि, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस बात का खुलासा हुआ था कि बिहार के मुजफ्फरपुर में गैर सरकारी संस्थान (NGO) द्वारा संचालित एक आश्रय गृह में कई लड़कियों के साथ कथित रुप से बलात्कार और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया। इस शेल्टर होम में रहने वाली 42 लड़कियों में से 34 लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई थी। मामला सामने आने पर शुरू में इसकी जाँच राज्य पुलिस कर रही थी, लेकिन फिर बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर समेत 21 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया था।

नवरात्रि उपवास के गुण-दोष बताने वाले ‘The Quint’ ने रमज़ान में गिनाए रोज़ा के वैज्ञानिक फ़ायदे

मीडिया पोर्टल ‘द क्विंट’ ने नवरात्र के दौरान एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उपवास के गुण-दोष की व्याख्या की गई थी। हालाँकि, इस वीडियो में चीजों को बायोलॉजिकल ढंग से समझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन इसके हेडिंग में कहा गया था कि जानिए उपवास आपके शरीर के लिए आरोग्यवर्धक है या नहीं? ठीक इसी तरह रमज़ान के लिए भी क्विंट ने एक ट्वीट डाला – शब्दों के साथ थोड़ा ‘सेकुलर’ होकर! इसमें साफ़-साफ़ हेडिंग में ही उपवास (यहाँ रोज़ा) के फायदे गिना दिए गए। इतना ही नहीं, इसमें कुछ सस्पेंस की बात नहीं रखी गई और कह दिया गया कि रोज़ा रखने से फलाना-फलाना वैज्ञानिक फ़ायदे होते हैं। सबसे पहले नवरात्रि के दौरान क्विंट द्वारा शेयर की गई वीडियो को देखिए।

इस वीडियो में शुरुआत में तो सभी धर्मों और अन्ना हजारे तक को दिखाया गया है लेकिन क्लिप में उदाहरण के तौर पर सिर्फ और सिर्फ नवरात्रि को ही लिया गया है। अभी रमजान वाले पोस्ट के बाद जब किसी ने इस पर आवाज़ उठाई तो इस वीडियो में दिख रही पत्रकार ने शुरुआत में दिखाए गए चित्र को लेकर डिफेंड करते हुए लिखा कि ये सभी धर्मों के लिए था और उन्होंने नवरात्रि सिर्फ़ उदाहरण के तौर पर लिया। अब ज़रा रमजान के समय डाली गई पोस्ट को देखिए और समझिए कि कैसे नवरात्रि और रमजान के समय डाली गई चीजों से अलग-अलग नैरेटिव बन कर आते हैं। ये सब ‘Headline Framing’ का कमाल है, जो त्यौहार बदलते ही बदल जाता है। और ‘मीडिया समूह’ ऐसा करके ‘मीडिया गिरोह’ में तब्दील हो जाता है।

रमज़ान के दौरान रोज़ा के फ़ायदे बताता ‘The Quint’

कुल मिलाकर बात यह कि नवरात्री के दौरान उपवास के फ़ायदे और नुकसान दोनों दिखाए जाते हैं। हेडलाइन ऐसे बनाए जाते हैं, जिसको पढ़-सुन कर ऐसा लगे कि उपवास करने से न जाने क्या-क्या नुकसान होते हैं। लेकिन जब रमजान के दौरान रोज़ा की बात आती है, तो वही मीडिया गिरोह उसके गुणगान पर उतर आता है। उपवास और रोज़ा भले ही दो धर्मों द्वारा पालन की जाने वाली एक ही पद्धति हो, लेकिन ‘The Quint’ जैसे मीडिया गिरोह इसे दो अलग-अलग चश्मे से देखते हैं।

यौन शोषण मामला: CJI द्वारा गठित कमिटी ने CJI को किया आरोप मुक्त, कमिटी में 2 महिला जज भी

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा गठित तीन सदस्यीय जाँच पैनल ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। जाँच पैनल को सीजेआई रंजन गोगोई के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला। इस पैनल का नेतृत्व जस्टिस एसए बोडबे कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पैनल की रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश एवं दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को सबमिट कर दी गई है। चूँकि यह एक अनौपचारिक जाँच थी, इसीलिए इस जाँच की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

बता दें कि 20 अप्रैल को कई मीडिया पोर्टल्स द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट्स में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाने की बात कही गई थी। उक्त महिला कर्मचारी जस्टिस गोगोई के आवास स्थित दफ्तर में कार्यरत थीं। उस महिला द्वारा 22 जजों को दी गई एफिडेविट के आधार पर ये आरोप लगाए गए थे। उस एफिडेविट में महिला ने यौन शोषण की दो घटनाओं का जिक्र किया था। महिला का आरोप था कि जब उन्होंने यह सब करने से इनकार किया, तब उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।

तीन जजों वाली इन-हाउस कमिटी ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इस कमिटी में जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इंदु मल्होत्रा भी शामिल थीं।

केजरीवाल के रोड शो में लगे मोदी-मोदी के नारे, वीडियो वायरल

पिछले दिनों थप्पड़ कांड के कारण सुर्खियों में रहने वाले दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक और वीडियो सोमवार (मई 6, 2019) को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में केजरीवाल जहाँ रोड शो करते नजर आ रहे हैं वहीं कुछ लोग ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते भी सुनाई पड़ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर आप समर्थकों ने इस घटना के पीछे भाजपा के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताया है। खबरों के मुताबिक वीडियो दिल्ली के करावल नगर का है। यहाँ सोमवार को केजरीवाल प्रचार के लिए पहुँचे थे।

शनिवार (मई 4, 2019) को मोतीनगर में थप्पड़ वाली घटना के बाद वीडियो में अरविंद केजरीवाल के चारों ओर कड़ी सुरक्षा देखने को मिल रही है।

बता दें कि जनता के बीच प्रचार के दौरान ‘मोदी-मोदी’ नारे सुनने वाले केजरीवाल पहले नेता नहीं हैं इससे पहले राहुल गाँधी, कन्हैया कुमार और उर्मिला मातोंडकर की भी रैली के दौरान या उनके भाषण के बीच में मोदी समर्थकों ने नारेबाजी की थी।