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जम्मू कश्मीर: मतदान न होने देने के लिए कहीं पत्थरबाजी तो कहीं फेंका ग्रेनेड

जम्मू कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट में शामिल शोपियाँ और पुलवामा से भारी हिंसा की खबरे आ रही हैं। इन दोनों जगहों के मतदान केंद्रों पर मतदानकर्मियों के पहुँचते ही पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस दौरान कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, साथ ही पंचायत घर और एक स्कूल में आग तक लगा दी गई। परिस्थितियाँ इतनी अधिक तनावपूर्ण हो गईं कि मतदानकर्मियों को जेनापोरा इलाके से विमान द्वारा दूर ले जाना पड़ा।

शोपियाँ और पुलवामा में हिंसा की घटनाएँ रात से ही खबरों की सुर्खियाँ बनी हुई थीं लेकिन सुबह होते-होते हालात और भी बिगड़ गए। पथराव रोकने के लिए सेना ने आँसू गैस के गोले भी छोड़े, लेकिन बिगड़ी स्थितियों पर काबू पाना बहुत मुश्किल था।

जी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक कल जैसे ही पोलिंग स्टाफ़ को पोलिंग का सामान देने की प्रक्रिया शुरू हुई वैसे ही कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन होने लगे जिसमें कई लोग घायल हुए। तनावपूर्ण स्थितियों के कारण शोपियाँ से जेनापुरा इलाके के लिए 38 पोलिंग स्टॉफ को एयरलिफ्ट करना पड़ा।

इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए चल रहे मतदान के बीच आतंकवादियों ने पुलवामा जिले में रोहमू मतदान केन्द्र को निशाना बनाकर वहाँ ग्रेनेड भी फेंका। ये पहला मौक़ा था जब चुनाव के चलते आतंकवादियों ने ऐसा कोई हमला किया हो। हालाँकि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई है। ग्रेनेड हमले के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर ली है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले दक्षिण कश्मीर के नौगाम में आतंकवादियों ने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गुल मोहम्मद मीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। शनिवार (4 मई) को हुए इस हत्याकांड को उन्हीं के घर में अंजाम दिया गया। सीने और पेट में गोलियाँ लगने के बाद मीर को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित किया गया। यह हत्याकांड ठीक उसी समय हुआ था, जब कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने दहशतगर्दों से रमजान के महीने में दहशतगर्दी और हिंसा न करने की अपील की थी। 

रूस: आपातकाल लैंडिंग के दौरान विमान में लगी आग, 41 की मृत्यु, 11 घायल

रविवार (मई 6, 2019) को रूस की राजधानी मास्को में एयरपोर्ट पर आपातकाल लैंडिंग के दौरान सुखोई सुपरजेट 100 विमान में आग लगने के कारण 41 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 2 बच्चे भी शामिल हैं। विमान ने मॉस्को एयरपोर्ट से उत्तरी रूस के मरसांस्क शहर के लिए उड़ान भरी थी। हादसे के दौरान इसमें 73 यात्री और 5 क्रू मेंबर सवार थे।

दुर्घटना की जाँच में जुटी टीम की प्रवक्ता स्वेतलाना पेट्रेन्को द्वारा दी जानकारी के मुताबिक विमान में मौजूद 78 लोगों में 37 लोग जिंदा हैं यानि 41 लोगों की मौत हुई हैं। एक बयान में एयरोफ्लोट कंपनी ने कहा है कि विमान उड़ान भर चुका था लेकिन कुछ देर बार तकनीकी कारणों से उसे एयरपोर्ट पर लौटना पड़ा। रनवे पर लैंड करते वक्त विमान के इंजन में आग लग गई। इस घटना के बाद कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर जीवित व्यक्तियों के नाम प्रकाशित किए हैं। साथ ही आश्वासन दिया है कि घायलों के परिजनों को नि:शुल्क मॉस्को पहुँचाया जाएगा।

खबरों के अनुसार एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही विमान में धुआँ उठने लगा था। जानकारी मिलते ही चालक दल ने एटीसी को सूचना दी और विमान की आपातकालीन लैंडिंग हुई, लेकिन इस बीच आग ने विमान को अपनी लपटों में घेर लिया था। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो शेयर हो रहा है जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भयानक था। 41 लोगों की मौत के अलावा इसमें 11 लोगों के घायल होने की भी खबरे हैं।

एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि विमान दो साल पुराना था। रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव ने पूरे हादसे की जाँच के आदेश दे दिए हैं। इस दुर्घटना के बाद विमानों को मॉस्को के अन्य एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस घटना पर दुःख प्रकट किया है।

क्रिस्चियान कोस्तोव नाम के एक चश्मदीद ने सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में लिखते हुए बताया कि प्लेन को आग की लपटों में देख यात्री डर से काँपने लगे थे।

अमेठी में ज़बरदस्ती हाथ पकड़कर पीठासीन अधिकारी ने कॉन्ग्रेस को डलवाया वोट

देश में आज लोकसभा चुनाव के पाँचवें चरण के लिए 7 राज्यों की 51 सीटों पर मतदान हो रहा है। इस बीच एक ख़बर सामने आई है कि एक वृद्ध मतदाता का हाथ ज़बरदस्ती पकड़कर उससे कॉन्ग्रेस को वोट दिलवाया गया। मामला अमेठी के गौरगंज के गूजरटोला बूथ नंबर 316 का है जहाँ पीठासीन अधिकारी ने एक बूढ़ी महिला का हाथ पकड़कर उससे ज़बरदस्ती कॉन्ग्रेस का बटन दबवाया और वोट कॉन्ग्रेस को डलवाया, जबकि उस महिला ने स्पष्ट किया कि वो अपना वोट बीजेपी को देना चाहती थी जिसके लिए वो कमल का बटन दबाना चाहती थी, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने उसकी मंशा भाँपते हुए उसका हाथ पकड़ा और पंजे (हाथ) के निशान वाला बटन दबवा दिया।

ये मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर लोगों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। ट्विटर पर अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर करते हुए एक यूज़र ने लिखा, “ये क्या हो रहा देश में। कुछ कानून नाम के कोई चीज है या नही। पूरी गुंडा गर्दी हो रही है।।।”

एक यूज़र ने ट्वीट कर पीठासीन अधिकारी के ऊपर कठोर कार्रवाई करने की माँग की, इसके अलावा पीठासीन अधिकारी को निष्पक्ष चुनाव कराने की बात भी लिखी गई।

ट्विटर पर एक अन्य यूज़र ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए लिखा कि अभी सिस्टम मे बहुत कॉन्ग्रेसी और जातिवादी दीमक लोकतंत्र को कुतरने और चमचई करने में लगे हैं। साथ ही EVM पर हमेशा सवाल उठाने वाली कॉन्ग्रेस को भी आड़े हाथों लेते हुए राहुल गाँधी को शहज़ादा तक कह डाला।

इस घटना से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कॉन्ग्रेस वोट पाने की चाहत में कुछ भी कर गुज़रने पर उतारू है। ये मामला भले ही किसी एक जगह से आया हो लेकिन ऐसा अन्य जगहों पर नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

इस सब के बीच अमेठी सीट से भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और अमेठी सीट से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार राहुल गाँंधी पर बूथ कैंपचरिंग करने का आरोप लगाया है। स्मृति ईरानी का आरोप है कि यहाँ पर पीठासीन अधिकारी कॉन्ग्रेस के इशारे पर भाजपा का वोट कॉन्ग्रेस को डलवा रहे हैं। स्मृति ईरानी ने अमेठी ने वीडियो ट्वीट शेयर करते हुए इसकी शिकायत चुनाव आयोग और प्रशासन की है और साथ ही कार्रवाई की माँग की। वीडियो के वायल होने के बाद आला अधिकारी हरकत में आ गए और मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन विभाग ने फौरन पीठासीन अधिकारी को हटा दिया और उनकी जगह पर नए पीठासीन अधिकारी को तैनात किया गया है। गौरीगंज के उप जिला निर्वाचन अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जाँच करवाई जाएगी।

जानिए थप्पड़ खाने के बाद अब कैसी सिक्योरिटी लेकर चलेंगे CM केजरीवाल

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कल चाँदनी चौक सीट से आम आदमी पार्टी उम्मीदवार पंकज गुप्ता के लिए चुनाव प्रचार करने गए थे। इस दौरान उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। शनिवार (मई 4, 2019) को मोतीनगर में हुए थप्पड़ कांड के मारे जाने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर अहम कदम उठाया गया है।

बता दें कि, आम आदमी पार्टी के समर्थकों या प्रशंसकों के लिए अब केजरीवाल के नजदीक जाना काफी मुश्किल होगा। अब वो पहले की तरह करीब जाकर न तो हाथ मिला सकते हैं और न ही माला पहना सकते हैं। केजरीवाल के आसपास सुरक्षाबलों का मजबूत घेरा होगा और अगर कोई समर्थक केजरीवाल से मिलना चाहता है या फिर माला पहनाकर स्वागत करना चाहता है तो तो उसे सुरक्षाकर्मियों के द्वारा जाँच किए जाने के बाद ही ये मौका मिल पाएगा।

अब केजरीवाल के रोड शो दे दौरान उनकी गाड़ी में पार्टी के लोग कम और सुरक्षाकर्मी ज्यादा होंगे। केजरीवाल की सहमति के बिना कोई भी गाड़ी में सवार नहीं हो सकेगा। सीएम की गाड़ी में केजरीवाल के अलावा तीन लोग ही मौजूद होंगे। एक तो वो वो कैंडिडेट, जिसके लिए केजरीवाल प्रचार कर रहे होंगे और दूसरा उस क्षेत्र का विधायक। इसके अलावा एक और व्यक्ति केजरीवाल की सहमति से गाड़ी में सवार हो सकता है। इसके साथ ही पब्लिक मीटिंग के दौरान आसपास की ऊँची बिल्डिंगों की छतों पर एके-47 के साथ जवान तैनात किए जाने की व्यवस्था की गई है।

इसके साथ ही अगर वो किसी रोड शो के दौरान खुली जीप में होंगे तो उनकी गाड़ी में दिल्ली पुलिस सिक्यॉरिटी यूनिट के 2 जवान पीछे और 2 जवान आगे गाड़ी में रहेंगे। इतना ही नहीं, 4 जवान गाड़ी के पीछे, 6 जवान गाड़ी के दोनों साइड और 4 जवान गाड़ी के आगे घेरा बनाकर चलेंगे और 1 या 2 कमांडो को भी वर्दी में तैनात किया जाएगा। अब केजरीवाल जिस भी जिले में प्रचार करने जाएँगे, वहाँ उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी वहाँ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर, जिला डीसीपी, सब-डिविजन के एसीपी और संबंधित थानों के सभी एसएचओ की होगी।

सीएम के गाड़ी में चढ़ने से पहले भी गाड़ी की जाँच की जाएगी कि कहीं किसी ने गाड़ी में बम वगैरह तो नहीं ना प्लांट किया है। वहीं अगर वो गाड़ी से उतरकर लोगों के बीच जाएँगे तो उस समय तकरीबन 20 जवान उनके चारों ओर घेरा बनाकर मौजूद रहेंगे, ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो। हालाँकि, सीएम से पहले भी कई बार कहा गया है कि उनको खतरा है, वो अपने साथ सिक्याॅरिटी कवर रखें, मगर वो हर बार मना कर देते थे। मोतीनगर में हुए थप्पड़ कांड के बाद उन्होंने खुद इसके लिए सहमति दे दी है।

‘श्री लंका के हमलावरों का हमारे पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं’: J&K पुलिस

जम्मू और कश्मीर पुलिस के प्रमुख दिलबाग सिंह ने रविवार को कहा कि उनके विभाग के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि श्री लंका में ईस्टर रविवार को आतंकी हमले में शामिल संदिग्ध व्यक्तियों ने कश्मीर की यात्रा की थी। बता दें कि श्री लंका सेना प्रमुख ने दावा किया था कि हमले के संदिग्धों ने कश्मीर की यात्रा की थी।

ख़बर के अनुसार, सिंह ने कहा कि उन्हें राजनयिक चैनल के माध्यम से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, दस्तावेजों में उनकी कश्मीर यात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सिंह ने कहा, “हमने जाँच की है और उनके यहाँ आने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों के बाद आव्रजन (Immigration) रिकॉर्ड फिर से देखे गए थे और किसी भी हमलावर ने कश्मीर का दौरा नहीं किया था।

कुछ दिनों पूर्व श्री लंकाई सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल महेश सेनानायके की टिप्पणी आई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ईस्टर हमले के संदिग्ध भारत में कश्मीर गए थे और उन्होंने केरल राज्य की यात्रा भी की थी। दिलबाग सिंह ने कहा कि श्री लंका के सेना प्रमुख को राजनयिक चैनलों के माध्यम से सबूत भेजने चाहिए, और वह इस पर ग़ौर करेंगे।

ज्ञात हो कि 21 अप्रैल को श्री लंका के तीन चर्चों और लग्जरी होटलों में आतंकी हमले में लगभग 300 लोग मारे गए थे और 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। एक महिला समेत नौ आत्मघाती हमलावरों ने इस घटना को अंजाम दिया था।

TMC कार्यकर्ता ने किया BJP उम्मीदवार अर्जुन सिंह पर हमला: #VotingRound5

पश्चिम बंगाल में बैरकपुर से भाजपा उम्मीदवार अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों ने उनपर हमला किया। उनका कहना है कि हमला करने के लिए टीएमसी ने बाहर से गुंडों को बुलवाया था। इस हमले में उन्हें चोट आई है।

खबरों के अनुसार टीएमसी के गुंडे मतदाताओं को डरा धमका रहे थे और उन्हें वोट डालने से रोक रहे थे, तभी एक महिला अर्जुन सिंह के पास अपनी शिकायत लेकर पहुँची कि उनका बेटा जो कि पोलिंग एजेंट था, वह मिल नहीं रहा है। महिला की शिकायत पर अर्जुन सिंह ने तुरंत पोलिंग एजेंट का पता लगवाने में मदद की और उन्हें ढूँढकर बूथ के भीतर बैठाया। इस घटना के तुरंट बाद टीएमसी के कथित गुंडों ने उनके साथ हाथापाई शुरू कर दी जिसमें अर्जुन सिंह को खासी चोटे आईं।

ऐसा पहली बार नहीं है कि टीएमसी के गुंडों ने खुलेआम अपनी गुंडागर्दी दिखाई हो, इससे पहले भी उनके हिंसा में शामिल होने की खबरें आती रही हैं। पिछले चरण के मतदान में टीएमसी के उत्पात के कारण ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का फैसला कर लिया था। उनकी जिद थी कि यदि पोलिंग बूथ पर सीआरपीएफ को तैनात नहीं किया गया तो वह मतदान करने नहीं जाएँगे।

इसके अलावा पिछले महीने टीएमसी के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता की बुरी तरह पिटाई करके उन्हें लहूलुहान कर दिया। ट्विटर पर अंकुर सिंह ने लहूलुहान भाजपा कार्यकर्ता का फोटो शेयर कर दावा किया था कि तृणमूल के गुंडों ने उन्हें बुरी तरह पीटा है। पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता के बेटे ने भी अपने पिता का फोटो शेयर कर अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रतीक ने ट्विटर के माध्यम से पूरे देश का सहयोग माँगा था और कहा था कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो उनके पूरे परिवार को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

रमज़ान के कारण मतदान के समय में नहीं होगा बदलाव: निर्वाचन आयोग का फैसला

रमजान के महीने में पड़ने वाले अंतिम तीन चरणों के मतदान के समय में बदलाव करने की माँग को चुनाव आयोग ने रविवार (मई 6, 2019) को खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग का कहना है कि लोकसभा 2019 के आम चुनाव के 5वें, 6ठे और 7वें चरण के मतदान के तय समय में फेरबदल करना संभव नहीं है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दर्ज हुई थी। इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने रमजान के दौरान मतदान के समय को सुबह 7 बजे की बजाय 5 बजे से कर देने की अपील की थी। कोर्ट में यह याचिका मोहम्मद निजामुद्दीन पाशा और असद हयात द्वारा दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि मतदान के अंतिम तीन चरण में देश के कई हिस्सों में भीषण गरमी रहेगी और ‘लू’ चल सकती है, उस दौरान रमजान का महीना भी रहेगा, इसलिए मतदान का समय सुबह 7 बजे की बजाय तड़के 4:30 या 5 बजे से कर देना चाहिए। माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस विषय पर चुनाव आयोग को विचार करने को कहा था। कोर्ट ने इस मामले पर चुनाव आयोग से कोई जवाब नहीं माँगा था। खबरों की मुताबिक कोर्ट ने आयोग से सिर्फ़ यह जानने की कोशिश की थी कि वे इस प्रकार की माँग पर गौर कर सकते हैं या नहीं?

उल्लेखनीय है कि चुनाव शुरू हो जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय तब तक चुनाव आयोग के काम में दखल नहीं दे सकता है, जब तक कोई बड़ी चूक या किसी नियम का उल्लंघन न हुआ हो। इसलिए, पूरा मामला चुनाव आयोग पर निर्भर करता था कि वह इस पर क्या फैसला करेगा।

‘यह राहुल गाँधी का अस्पताल है, यहाँ मोदी-योगी का आयुष्मान कार्ड नहीं चलेगा’, मरीज की मौत

अमेठी में राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद सियासी बवाल मच गया है। केंद्रीय टेक्सटाइल्स मंत्री स्मृति ईरानी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, सबने अस्पताल और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे मरीज की मौत का ज़िम्मेदार कहा। परिवारजनों द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित एक वीडियो ट्वीट कर अमेठी से भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी पर हमला बोला। आयुष्मान भारत के कार्यकारी अधिकारी ने अमेठी के डीएम से इस बाबत रिपोर्ट भी तलब की है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि भर्ती होते समय मरीज के पास आयुष्मान भारत कार्ड नहीं था। स्मृति ईरानी ने इस बारे में ट्वीट कर राहुल गाँधी को घेरा ।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक जनसभा के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उस ग़रीब की मौत के ज़िम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। पीएम ने कहा कि ये दुःख की बात है कि इलाज से इनकार करने के कारण आज वो ग़रीब इस दुनिया में नहीं है। स्मृति ईरानी ने कहा कि अस्पताल के ट्रस्टी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी व कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी को जवाब देना चाहिए। ट्वीट किए गए वीडियो में मृतक के भतीजे ने बताया:

“जब मैंने अपने चाचा को अस्पताल में भर्ती कराया और कार्ड दिखाया तो अस्पताल के लोगों ने कहा कि यह राहुल गाँधी का अस्पताल है और यहाँ मोदी और योगी का कार्ड नहीं चलता है। हमने कार्ड पर दिए हेल्पलाइन नंबर से भी शिकायत की लेकिन, मदद नहीं मिली और इलाज न हो पाने के कारण मेरे चाचा की मौत हो गई।“

अस्पताल के प्रबंधक भोलानाथ तिवारी ने सफाई देते हुए कहा, “25 अप्रैल को मुसाफिरखाना क्षेत्र के सरई गाँव निवासी नन्हें लाल मिश्र को देर रात अस्पताल में लाया गया था। भर्ती करते समय उनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। मरीज के परिवार ने किसी आयुष्मान कार्ड का जिक्र नहीं किया। 26 अप्रैल को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र भी अस्पताल द्वारा जारी किया गया है। हमारा अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड है। पीड़ित परिवार द्वारा अस्पताल व प्रबंधन व प्रशासन से कोई शिकायत नहीं की गई है।“

वहीं अस्पताल के निदेशक ने कहा कि उनके हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के तहत 200 मरीजों का इलाज हो चुका है, अतः ये बातें निराधार है। सीएमओ ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और चुनाव बाद टीम भेजकर इसकी जाँच कराई जाएगी।

यूनिस ने भागवत कथा सुनने जा रही युवतियों से की छेड़छाड़, ज़मानत पर छूटते ही की फायरिंग

उत्तर प्रदेश के आगरा से एक व्यक्ति द्वारा भागवत कथा सुनने जा रही युवतियों के साथ छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। गुरुवार (मई 2, 2019) को आगरा के मलपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत भागवत कथा चल रही थी। उसमे भाग लेने आईं युवतियों के साथ यूनिस नमक युवक ने छेड़छाड़ की। एक युवक ने जब यूनिस की इस हरकत का विरोध किया तो यूनिस ने उसकी पिटाई भी कर दी। सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने यूनिस को गिरफ़्तार कर लिया। गिरफ़्तार कर उसे थाने ले जाया गया और शुक्रवार को जेल भेज दिया गया। हालाँकि, उसी दिन उसे ज़मानत भी मिल गई।

आरोप है कि ज़मानत मिलने के बाद उक्त युवक और उग्र हो गया और उसने रिटायर्ड स्टेशन मास्टर के घर पहुँच कर उनसे मारपीट की। विरोध करने पर उसने फायरिंग भी की। सूचना पर पुलिस फिर पहुँची लेकिन आरोपित तब तक फरार हो गया था। उसके घर पर दबिश देने के बाद पुलिस ने उसके छोटे भाई को गिरफ़्तार किया। पीड़ित स्टेशन मास्टर ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। यूनिस के पिता का नाम रमजानी है। ज़मानत मिलने के बाद उसने अपने साथियों सहित लाठी-डंडे लेकर गाँव में हमला बोल दिया था।

‘हिंदुस्तान’ के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

एसओ मलपुरा विजय कुमार ने पत्रकारों को बताया कि मामले में FIR दर्ज हुई है। आरोपी के भाई को पुलिस पूछताछ करने के लिए पकड़ कर लाई है। उससे पूछताछ की जा रही है। जाँच के बाद कार्रवाई की जाएगी। पहली बार यूनिस ने जब युवतियों से छेड़छाड़ की थी तब तो ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया था लेकिन दूसरी बार जब वह मारपीट करने पहुँचा तो इस बार वह हथियारों से लैस था। ग्रामीणों की भीड़ फायरिंग की आवाज़ सुन कर इकट्ठी हुई लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका। ग्रामीणों ने तब पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।

Pak में भारतीय राजनयिकों से दुर्व्यवहार, उन्हें गुरुद्वारे में किया बंद, भारत ने जताई आपत्ति

लाहौर के पास स्थित गुरुद्वारे में हिंदुस्तानी राजनयिकों को बंद किए जाने और दुर्व्यवहार को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष हिंदुस्तान ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। यह आपत्ति पाकिस्तान के विदेश कार्यालय में आपत्तिपत्र के जरिए दर्ज कराई गई है। एक कूटनीतिक नोट के माध्यम से 25 अप्रैल को पाकिस्तानी अधिकारियों को अलग से भी इस घटना से अवगत कराया गया है।

17 अप्रैल की घटना, सच्चा सौदा साहिब गए थे राजनयिक

आपत्तिपत्र में राजनयिकों के साथ हुई इस घटना का जिक्र करते हुए हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थित अपने उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों राजनयिक पाकिस्तानी पंजाब के लाहौर के पास फर्रुखाबाद स्थित गुरुद्वारे सच्चा सौदा साहिब में गए हुए थे। वह वहाँ सिख श्रद्धालुओं की यात्रा की प्रणाली आसान करने से जुड़े कार्यवश वहाँ पहुँचे थे। रिपोर्ट के मुताबिक वहाँ मौजूद पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के 15 लोगों ने राजनयिकों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया और उनके बैगों की तलाशी ली गई। उनसे पूछताछ भी की गई।

पहले भी सिख श्रद्धालुओं की यात्रा के प्रबंध की देखरेख कर रहे राजनयिकों के साथ पाकिस्तान में दुर्व्यवहार होता रहा है। खालिस्तानियों द्वारा भी भारतीय श्रद्धालुओं से बदतमीजी का भी इतिहास रहा है। मार्च में भी हिंदुस्तान ने बालाकोट की एयर स्ट्राइक के बाद अपने राजनयिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी।