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जब तक शेर अपनी कहानी खुद नहीं कहता शिकारी महान बना रहेगा

कोलंबिया का एक अखबार था “एल एस्पक्टाडोर”, जिसमें 1955 में चौदह दिनों की एक सीरीज छपनी शुरू हुई। ये सीरीज एक सत्य घटना पर लिखी जा रही थी। सीरीज का हीरो करीब बीस साल का एक नौजवान लुइस अलेक्सान्द्रो वेल्साको, होता है। ये कहानी इसलिए महत्वपूर्ण हो गई थी क्योंकि ये सरकारी बयानों से बहुत अलग थी। सरकारी बयानों में एक ऐसा तूफ़ान गढ़ा गया था, जो कि कभी आया ही नहीं था। सच्चाई ये थी कि जहाज पर तस्करी का इतना माल लाद दिया गया था कि वो डूब गया।

असली कहानी ये थी कि वेल्साको अमेरिका से अपने जहाज पर लौट रहे थे। कई दिनों बाद अपने देश लौटने की सब नाविकों को जल्दी भी थी। जहाज पर औकात से ऊपर तस्करी का माल लादकर जहाज को रवाना किया गया था। कैरिबियन में लहरें ऊँची होती हैं, और जहाज पर वजन ज्यादा था। संभालने की कोशिश में वेल्साको के आठ साथी बह गए और आखिर जहाज डूब गया। कोलंबिया की नौसेना ने चार दिन तलाश की और सभी लापता नाविकों को मृत मानकर खोज बंद कर दी। मगर लुइस वेल्सांको के हाथ कुछ टूटी-फूटी सी एक लाइफबोट आ गई थी और वो बच गया था।

चार दिन तक जो तलाश करने का बहाना हुआ, उसमें भी कुछ किया नहीं गया था! ऐसे में वेल्साको भूखा-प्यासा अपनी टूटी नाव पर बहता रहा। किसी तरह दस दिन बाद वो जिस किनारे पर पहुंचा, किस्मत से वो कोलंबिया था। समंदर से जिन्दा बच निकले इसी नाविक की असली कहानी लिखकर लेखक ने छाप दी थी। जाहिर है सरकार की पोल खोल देने वाली इस कहानी के छपते ही उन्हें स्थानीय पत्रकार से विदेशी संवाददाता हो जाना पड़ा। तथाकथित समाजवादी-साम्यवादी सरकारों को भी अपनी पोल खोलने वाले पसंद नहीं आते।

खैर ये कहानी पहले तो स्पैनिश में ही छपी थी, मगर कई साल बाद (1970 में) इसे एक किताब की शक्ल दी गई। कुछ साल और बीतने पर रैन्डोल्फ होगन ने (1986 में) इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया। नोबल पुरस्कार से सम्मानित गैब्रिअल ग्रेसिया मार्क्वेज़ की ये किताब थी “द स्टोरी ऑफ़ अ शिपरेक्ड सेलर (The Story of a Shipwrecked Sailor)” जो पहले कभी अखबार के लेखों का सीरीज थी। मार्क्वेज़ ने किताब के अधिकार भी उस नाविक लुइस वेल्साको को दे दिए थे। खुद किताब की रॉयल्टी नहीं ली।

बाद में किताब का अंग्रेजी अनुवाद जब खूब चला तो इस नाविक ने मार्क्वेज़ पर उसके अधिकार के लिए भी मुकदमा ठोक दिया। मतलब जिसे उसने ना लिखा, ना अनुवाद किया, ना कुछ योगदान दिया, उसे उसके भी पैसे चाहिए थे। वैसे तो जहाज डूबने की कहानी डेनियल डेफो के रोबिनसन क्रुसो के दौर से ही प्रसिद्ध हैं। वोल्टायर ने कैंडिड, उम्बरटो एको की द आइलैंड ऑफ़ द डे बिफोर, जेएम कोट्जी की फो भी इसी विषय पर हैं। लेकिन मार्क्वेज़ ने एक सत्य घटना को एक किस्से की तरह सुनाया और वो उनकी किताब को ख़ास बनाता है।

भारत की बहुसंख्यक आबादी को देखेंगे तो ये “द स्टोरी ऑफ़ अ शिपरेक्ड सेलर” की कहानी काम की कहानी लगेगी। अच्छा किस्सा गढ़ने वाला – जैसे रविश कुमार, जैसे देवदत्त पटनायक – कितने हैं, जो भारत की “बहुसंख्यक”, बोले तो हिन्दुओं की ओर से कहानी सुना सकें? कोई नाम याद आता है क्या? अब ये तो जाहिर बात है कि हमलावर मजहब और रिलिजन जहाँ-जहाँ गए, वहां से उन्होंने स्थानीय धर्मों को समूल ख़त्म कर दिया। अगर भारत के एक छोटे से हिस्से में हिन्दू बहुसंख्यक हैं (सात राज्यों में नहीं हैं) तो जाहिर है, हमने लड़ाइयाँ जीती भी होंगी।

सभी हारे होते तो निपटा दिए गए होते। गोवा इनक्वीजिशन के फ्रांसिस ज़ेवियर जैसे सरगना पानी पी-पी कर ब्राह्मणों को कोसते पाए जाते हैं, क्योंकि उनके होते वो लोगों को इसाई नहीं बना पा रहे थे। रानी पद्मावती पर चित्तौड़ वाला हमला आखिरी तो नहीं था। भंसाली ‘द मुग़ल’ ने तो हाल में ही किला घेरने की कोशिश की है। चमचों के लिए हम-आप सब बरसों “चारण-भाट” जुमले का इस्तेमाल करते रहे हैं। एक बार इतिहास पलटते ही पता चल जाता है कि चारण-भाट तो गला कटने की स्थिति में भी बिलकुल झूठ ना बोलने वाले लोग थे! उनके कॉन्ग्रेसी टाइप होने की तो संभावना ही नहीं है?

सवाल ये है कि हम अपने पक्ष के किस्से सुनाने वाले कब ढूँढेंगे? हज़ार वर्षों से हमलों के सामने प्रतिरोध की क्षमता ना छोड़ने वाले हिन्दुओं की कहानी लिखने वालों को पब्लिक कब ढूँढेगी? शिकार की कहानियों में शिकारी का महिमामंडन तो खूब पढ़ लिया। हे महामूर्ख, हिन्दुओं! आप अपने पक्ष की कहनी सुनाने वालों को कब ढूँढेंगे?

चिदंबरम इंटरव्यू ‘कांड’: बेइज्जती सहेंगे लेकिन पैरवी उन्हीं की करेंगे

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम से जब एक इंटरव्यू के दौरान एयरसेल-मैक्सिस घोटाले के बारे में पूछा गया तो वह बिदक गए। एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘द प्रिंट’ को दिए एक इंटरव्यू में पी चिदंबरम से जब उनके और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम पर चल रहे घोटालों की जाँच के सम्बन्ध में सवाल किया गया, तो उन्होंने धमकी भरे अंदाज़ में कहा:

“यह साक्षात्कार के लिए पूरी तरह अप्रासंगिक है। आप मेरे और अपने विश्वास का उल्लंघन कर रहीं हैं, भरोसे को तोड़ रहीं हैं। इसलिए मेरा सुझाव है कि साक्षात्कार को ख़त्म कर दें। अगर आपको लगता है कि आप मुझे इस सवाल से डराएँगी तो आप गलत हैं। मैं मीडिया ट्रायल चलाने की अनुमति नहीं देता। यह आपकी नियम पुस्तिका में हो सकता है कि मीडिया में ट्रायल किया जाना चाहिए।”

मीडिया की चुप्पी पर सवाल

पी चिदंबरम की इस धमकी पर मीडिया में कोई आउटरेज नहीं हुआ। बात-बात में बयान जारी कर पत्रकारों के ख़िलाफ़ किसी भी कार्रवाई की निंदा करने वाले एडिटर्स गिल्ड ने भी कोई बयान जारी नहीं की। ज्योति मल्होत्रा को धमकी भरे अंदाज़ में घुड़की देते हुए जिस तरह का व्यवहार पी चिदंबरम ने किया, ऐसा अगर किसी भाजपा के मंत्री ने किया होता तो शायद स्थिति कुछ और होती! शायद नहीं, ‘लोकतंत्र खतरे में’ और ‘मीडिया पर अंकुश’ या ‘सुपर-इमर्जेंसी’ जैसा कुछ भयंकर ट्रेंड कर गया होता ट्विटर पर।

अगर ऐसा भाजपा के किसी बड़े नेता ने किया होता, तो अब तक एडिटर्स गिल्ड ट्विटर पर बयान जारी कर चुका होता। देश में ‘मीडिया को दबाने’ की कोशिशों के ख़िलाफ़ नेतागण एकजुट हो कर बयान दे रहे होते, मीडिया की स्वतन्त्रता पर मंडरा रहे ख़तरे को लेकर अदालत में याचिका दाख़िल हो गई होती, और पत्रकारों का एक गिरोह मार्च निकाल रहा होता। ऐसा ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ कई बार हो चुका है।

आपको याद होगा कि नरेंद्र मोदी के एक इंटरव्यू की काफ़ी चर्चा हुई थी। करण थापर को दिए इस इंटरव्यू में मोदी से बार-बार ऐसे सवाल पूछे जा रहे थे, जैसे इंटरव्यूअर उनके मुँह में उंगली डाल कर कुछ निकलवाना चाह रहा हो। बार-बार जवाब देने के बावजूद जब मोदी से इसी तरह का व्यवहार होता रहा, तो उन्होंने इंटरव्यू को विराम दे दिया। उन्हें पत्रकार की नीयत का पता चल गया, जिसका एकमात्र लक्ष्य था- मोदी से विवादित सवाल करते रहना ताकि उनके मुँह से कुछ ऐसा निकले, जिस से टीआरपी के खेल में वो अव्वल आ सकें। इतना के बाद भी मोदी ने सिर्फ इंटरव्यू ख़त्म किया था, धमकी नहीं दी थी।

नहीं जागेगा एडिटर्स गिल्ड

पी चिदंबरम वाला मामला अलग है। ‘द प्रिंट’ की राष्ट्रीय एवं सामरिक मामलों की सम्पादक ज्योति मल्होत्रा को दिए साक्षात्कार में उन्होंने घोटालों को लेकर सवाल आते ही इंटरव्यू ख़त्म करने की धमकी दी। इतना ही नहीं, उन्होंने पत्रकार पर विश्वास के उल्लंघन का आरोप भी मढ़ा। यह ऐसे नेताओं के चरित्र को दिखाता है, जिनका पूरा परिवार घोटालों में आरोपित है। चिदंबरम, उनकी पत्नी और उनके पुत्र- सभी किसी न किसी घोटाले या स्कैम में आरोपित हैं। ऐसे में, उनसे इस तरह के सवाल पूछना अप्रासंगिक कैसे हो सकता है?

एडिटर्स गिल्ड का दोहरा रवैया हम तभी देख चुके हैं जब ‘मी टू’ के दौरान उसने सिर्फ़ उन्ही पत्रकारों के ख़िलाफ़ बयान जारी किया, जो उनके गिरोह के नहीं थे। एमजे अकबर को लेकर तो बहुत कुछ कहा गया, लेकिन विनोद दुआ पर ‘पिन ड्रॉप साइलेंस’ का दामन थाम लिया गया। आपको वो समय भी याद होगा जब राजदीप सरदेसाई सहित कई पत्रकारों ने दिल्ली में मार्च निकाल कर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था। यह कैसा चौथा स्तम्भ है? यह कैसी पत्रकारिता है? यह कैसी निष्पक्षता है जहाँ आप खुले तौर पर किसी व्यक्ति या पार्टी विशेष के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आते हैं?

बेइज्जती? ‘वो’ करें तो चलता है

हमें उम्मीद थी कि पी चिदंबरम का इंटरव्यू ले रहीं ज्योति मल्होत्रा तो ज़रूर आवाज उठाएँगी क्योंकि चिदंबरम ने विश्वास के उल्लंघन का आरोप भी उन्हीं पर लगाया। लेकिन अफ़सोस, ज्योति मल्होत्रा अपने ट्विटर प्रोफाइल पर चिदंबरम वाले इंटरव्यू का ही प्रचार-प्रसार करती दिखीं लेकिन इंटरव्यू के दौरान चिदंबरम के धमकी भरे लहजे में दिए गए बयानों की उनके प्रोफाइल पर कोई चर्चा तक नहीं थी। क्या पत्रकारों के उस गिरोह ने मान लिया है कि वो जिनकी पैरवी करते हैं, उनकी बेइज्जती भी बर्दाश्त करेंगे?

‘द प्रिंट’ जैसे कई न्यूज़ पोर्टल लगातार सरकारी योजनाओं से लेकर मोदी सरकार के हर एक क़दम में त्रुटियाँ निकालने में लगे रहते हैं। भाजपा के एक वार्ड पार्षद का कोई बयान भी बड़ी बहस का मुद्दा बनता है, जबकि कॉन्ग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री के विवादित बयान भी छिपा दिए जाते हैं। इसके पीछे क्या नीयत है? इसके पीछे लक्ष्य क्या है? जनता अब इनके रवैये को समझ चुकी है। इनके जीवन का एकमात्र सार यही है- ‘उनकी पैरवी करते रहो, वो बेइज्जती भी करें तो चलता है।’

₹11.2 करोड़: चंद्रबाबू नायडू के 1 दिन के धरने का ख़र्च, पार्टी फंड से नहीं बल्कि सरकारी ख़जाने से

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सिर्फ़ 1 दिन के धरने के लिए सरकारी ख़जाने से ₹11.2 करोड़ की भारी रक़म लुटाई। हज़ारों लोगों को दिल्ली पहुँचाने से लेकर महंगे होटलों में उनके रहने की व्यवस्था करने तक- नायडू ने सरकारी रुपयों को पानी की तरह बहाया। अतिथियों को आंध्र से दिल्ली ले जाने के लिए श्रीकाकुलम और अनंतपुर से दो ट्रेनें बुक की गईं थीं। इन ट्रेनों पर सरकार ने कुल ₹1.12 करोड़ ख़र्च किए। इसके अलावा अन्य ख़र्चों के लिए राज्य सरकार ने 10 करोड़ रुपए जारी किए, जिसका विवरण नीचे है।

विपक्षी पार्टियों ने चंद्रबाबू नायडू के इस महंगे धरने पर निशाना साधा है। आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी YSR कॉन्ग्रेस ने नायडू पर जनता के पैसों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा:

“यह संविधान का उल्लंघन है क्योंकि यह लोगों का पैसा है। ‘दीक्षा’ के लिए धन राजकोष से आ रहा है, वह ऐसा कैसे कर सकता है?”

सरकारी ख़र्च का ब्यौरा (फोटो साभार: न्यूज़ 18)

बता दें कि आंध्र प्रदेश के गठन के समय किए गए वादों को पूरा करने की माँग करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने दिल्ली में एक दिवसीय धरना दिया। इस धरने का नाम ‘धर्म पोरत दीक्षा’ रखा गया था। सोमवार (फरवरी 11, 2019) को आयोजित इस धरने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपाध्यक्ष अमित शाह के ख़िलाफ़ विपक्षी पार्टियों ने एकता का प्रदर्शन किया। पीएम मोदी पहले ही नायडू की आलोचना करते हुए कह चुके हैं कि चंद्रबाबू आंध्र की तिजोरी से जनता का पैसा निकाल कर अपनी पार्टी के लिए ख़र्च कर रहे हैं। गुंटूर रैली के दौरान उन्होंने ऐसा कहा था।

ख़बरों के मुताबिक़ अतिथियों के रुकने के लिए महंगे होटलों में 1100 से भी अधिक कमरे बुक किए गए थे। आंध्र प्रदेश सरकार ने दो अलग-अलग आदेश जारी कर धरने में हुए ख़र्च का बिल पास किया। इस धरने के दौरान पीएम मोदी के लिए अपशब्दों का प्रयोग भी किया गया था। धरने के दौरान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, शरद यादव, तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन, पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह, मुलायम सिंह यादव, फ़ारुख़ अब्दुल्ला सहित कई विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा।

प्रियंका के रोड शो ने ठप किया लखनऊ, जाम में तड़पते रहे मरीज

जमानत पर चल रहे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी और कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के रोड शो ने सोमवार को लखनऊ की रफ्तार रोककर रख दी। रैली में उमड़े अपार जनसैलाब (एक बार ज़रूर देखें) के कारण पूरा शहर दिनभर भीषण जाम से जूझता रहा। ट्रैफिक का हाल इतना ज्यादा खराब था कि कई लोगों की फ्लाइट छूट गई तो काफी लोग अपनी ट्रेन नहीं पकड़ पाए। वहीं, कई एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहीं, जिसके चलते मरीज तड़पते रहे।

ट्रैफिक व्यवस्था के आए बुरे दिन

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सोमवार को अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा के लिए रोड शो का आयोजन किया था। ‘मिशन यूपी’ के नाम से यह काफिला अमौसी एयरपोर्ट से कॉन्ग्रेस मुख्यालय तक गया, जिसमें कॉन्ग्रेस के कई बड़े दिग्गज भी शामिल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार रोड शो शहर के जिस-जिस इलाके से गुजरा, वहाँ का ट्रैफिक थम गया। लखनऊ के चारबाग, हजरतगंज, कानपुर रोड, लोहिया पथ और लोकबंधु, सिविल और लोकबाई हॉस्पिटल घंटों जाम से घिरे रहे। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस का इमरजेंसी डायवर्जन प्लान पूरी तरह फेल रहा।

मरीजों नहीं पहुँच पाए अस्पताल

इंदिरा गाँधी की तरह दिखने वाली प्रियंका गाँधी को देखने के लिए रैली में भीषण भीड़ उमड़ पड़ी, जाम के कारण हॉस्पिटल के सामने गाड़ियाँ भी फंस गई। मरीज हॉस्पिटल के सामने थे, लेकिन उन्हें अंदर जाने के लिए जगह नहीं मिल पाई। मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस को भी भारी भीड़ के कारण रास्ता नहीं मिला।

कॉन्ग्रेस की इस रैली से पूरे लखनऊ में जाम के कारण यात्रियों की फ्लाइट तक छूट गई। समय पर बस न मिलने के कारण कई लोग अपने गंतव्य तक नहीं जा सके। रोड शो खत्म होने के बाद कॉन्ग्रेस समर्थक अपने घर लौटने लगे, जिससे हालात काफी ज्यादा बिगड़ गए। इसका अंदाजा ट्रैफिक पुलिस नहीं लगा पाई और शहर के मुख्य मार्गों में भयंकर जाम लगा रहा। लालबत्ती, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब में डायवर्जन न होने के कारण लोहिया पथ पर भी करीब दो घंटे तक जाम लगा रहा।

नेवी के हेलिकॉप्टर्स निर्माण के लिए बिडर्स के नाम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत जल्द होंगे तय

रॉयटर्स की एक ख़बर के अनुसार, भारत सरकार ने 111 अत्याधुनिक नेवल हेलिकॉप्टर्स के निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह डील लगभग 3 बिलियन डॉलर की है।

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लॉकहीड मार्टिन, एयरबस हेलिकॉप्टर्स और बेल हेलिकॉप्टर्स भी संभावित बोली में भाग लेने वालों में से हैं। भारत चीन की बढ़ती ताकत के साथ संतुलन बनाने के लिए निरंतर अपनी सेना का आधुनिकीकरण करने के लिए प्रयासरत है। इस कड़ी में नेवी के सोवियत रूस के समय के पुराने हेलिकॉप्टर्स को बदलने के लिए यह बिडिंग की जाएगी।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बिड में शामिल भारतीय कंपनियों में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (Tata Advanced Systems), महिंद्रा डिफेंस (Mahindra Defence), अदानी डिफेंस (Adani Defence), एल एंड टी (L&T), भारत फोर्ज (Bharat Forge) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) शामिल हैं।

ये फर्म भारत को डोमेस्टिक इंडस्ट्रीयल सैन्य कॉम्प्लेक्स बनाने और आयात को कम करने के लिए बनाए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी परियोजना मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में हेलीकॉप्टर बनाने के लिए विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर काम करेंगे।

बता दें कि नेवी के इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग खोज और बचाव कार्यों, आकस्मिक निकासी और ज़रूरत पड़ने पर परिवहन के लिए किया जाएगा।  

राफेल डील में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल कर रहे हैं एयरक्राफ्ट कंपनी एयरबस की लॉबिंग: जावड़ेकर

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राफेल डील मामले में एक बड़ा बयान दिया है। जावड़ेकर ने कहा कि राहुल गाँधी एयरक्राफ्ट कंपनी एयरबस के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। राफेल डील में राहुल द्वारा सरकार पर खड़े किए गए सवाल के जवाब में जावड़ेकर ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को एयरक्राफ्ट कंपनी एयरबस का ईमेल कैसे मिला, किसी और के पास तो रक्षा सौदे से जुड़ा यह ईमेल नहीं है।

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि राहुल एयक्राफ्ट बनाने वाली इस कंपनी में एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। जावड़ेकर ने अपने बयान में कहा कि एयरबस का एक ही एजेंडा है कि किसी तरह इस रक्षा सौदे को रद्द कर दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि एयरबस एकमात्र राफेल की प्रतिस्पर्धी कंपनी है।

8 साल की बच्ची ने राफेल पर राहुल को दिया था जवाब

विपक्ष द्वारा राफेल डील पर मचा कोहराम आए दिन कुछ नया ही करतब दिखाता रहता है या यूँ कह लीजिए कि इन करतबों में कॉन्ग्रेस का हमलावर और आक्रामक रुख़ कभी थमने का नाम ही नहीं लेता है।

ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या सच में राफेल डील करतबों का मैदान बन चुका है या इसे अब तक बेवजह ही हवा दी जाती रही है। आम जनता और कॉन्ग्रेस समर्थकों के लिए भले ही यह समझ पाना मुश्किल हो कि इस डील के तहत राफेल की क़ीमत में इतना उतार-चढ़ाव क्यों है। लेकिन पिछले दिनों एक 8 साल की बच्ची ने राफेल के गुणा-गणित को क़ाबिल-ए-तारीफ़ अंदाज में समझाकर राहुल के आरोपों के जवाब दिया था।

आपको बता दें कि, 9 जनवरी को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के ट्विटर हैंडल से एक ऐसा वीडियो शेयर हुआ था , जिसमें 8 साल की बच्ची अपनी दो ज्यॉमेट्री बॉक्स के माध्यम से यह समझाने का प्रयास कर रही है कि क्या फ़र्क है मोदी जी के राफ़ेल में और राहुल गाँधी के राफेल में। इस बच्ची ने एक बेहतर ढंग से राफेल जैसे विवादित मुद्दे को जितनी सरलता से परिभाषित किया था, वो एक मिसाल है।

RSS कार्यकर्ता हत्या के आरोपित वसीम अहमद को जेल में चाहिए ‘इंग्लिश टॉयलेट’, इसलिए माँग रहा है जमानत

आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या के आरोपित ने अपनी जमानत की ऐसी वजह बताई कि उच्च अदालत को भी सोचना पड़ गया। 35 वर्षीय राष्ट्रीय स्यवं सेवक संघ (आरएसएस) नेता रुद्रेश की हत्या के आरोपित वसीम अहमद ने बेंगलुरू के परप्पन जेल और विक्टोरिया अस्पताल में वेस्टर्न टॉयलट नहीं होने का आधार बनाकर जमानत के लिए अनुरोध किया था। वसीम अहमद ने NIA की स्पेशल कोर्ट में अपने बाएँ घुटने में परेशानी की बात कही थी और कहा था कि उसे ‘इंडियन टॉयलट’ में बैठने पर परेशानी होती है इस कारण उसके इलाज के लिए जमानत दी जाए। लेकिन, स्पेशल कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसने फरवरी 06, 2019 को हाईकोर्ट से गुहार लगाई।

वसीम ने कहा कि उसे घुटने की सर्जरी की सख्त जरूरत है और विक्टोरिया अस्पताल में भी वेस्टर्न कमोड नहीं है। लिहाजा, उसे जमानत दी जाए, ताकि वह निजी खर्च पर प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा सके। हाईकोर्ट ने विक्टोरिया अस्पताल के साथ-साथ जेल में वेस्टर्न कमोड होने की तफ्तीश कराई और अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। बाद में इस बात की पुष्टि हुई कि दोनों जगहों पर वेस्टर्न कमोड से लैस टॉयलट मौजूद थे। जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने वसीम की जमानत याचिका खारिज कर दी।

यदि परप्पन अग्रहारा केंद्रीय कारागार और विक्टोरिया अस्पताल में वेस्टर्न टॉयलट नहीं होते तो शायद वसीम को जमानत मिल जाती। मीडिया के अनुसार, जिस जेल में वसीम अहमद बंद है, उसकी बैरकों और ब्लॉक में 10 के करीब टॉयलट हैं। वहीं, अस्पताल के वार्ड में भी चार वेस्टर्न टॉयलट हैं। जस्टिस केएन फनींद्र और जस्टिस नटराजन ने एनआईए की विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अधिकारियों को आरोपित वसीम को इलाज संबंधी सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी वकील के मुताबिक यह कोई साधारण मामला नहीं है, वसीम अहमद पर आतंक जैसे गंभीर आरोप भी हैं। गौरतलब है कि अक्टूबर 16, 2016 को ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ के सदस्य वसीम अहमद ने मामले में सह-अभियुक्त मोहम्मद सादिक के साथ मिलकर RSS कार्यकर्ता रुद्रेश की बीच सड़क पर धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। रुद्रेश उस वक्त आरएसएस की वर्दी में थे और अपने दोस्त के साथ शिवाजीनगर के एक मेडिकल स्टोर पर खड़े थे। अदालत में एनआईए ने कहा था कि वसीम ने रुद्रेश की बेरहमी से हत्या करने के बाद भड़काऊ नारेबाजी भी की थी, उसने आरएसएस नेता की हत्या इसलिए की ताकि हिन्दुओं में डर पैदा हो सके।

बिहार बजट: 11 मेडिकल कॉलेज के साथ किसानों को 1420 करोड़ रुपए का अनुदान

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विधानसभा में बजट 2019-20 पेश किया। सुशील कुमार मोदी इससे पहले भी नौ बार सरकार की तरफ़ से विधानसभा में बजट पेश कर चुके हैं।

इस बार लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बिहार सरकार ने अपने बजट में कई बड़ी व महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकार की तरफ़ से उपमुख्यमंत्री ने कुल 2 लाख 501 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है।

इस बार सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में प्रदेश के 11 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा बजट में ये महत्वपूर्ण घोषणाएँ सरकार द्वारा की गई हैं-

  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 1074 करोड़ रुपए।
  • हर घर बिजली पहुँचाने वाला आठवाँ राज्य बना बिहार।
  • इस साल दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत हर किसान को मिलेगी बिजली, 5827 करोड़ स्वीकृत।
  • 24 जिलों के 280 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया।
  • 13.40 लाख किसानों को 1430 करोड़ रुपए का अनुदान।
  • 15 लाख किसानों को 195 करोड़ रुपए डीजल अनुदान।
  • सड़कों की मरम्मत के लिए 6654 करोड़ रुपए का प्रावधान।
  • उग्रवाद प्रभावित इलाके के लिए 1228 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
  • जर्जर बिजली तारों को बदलने के लइए 2827 करोड़ रुपए स्वीकृत।
  • 2019-20 बालिका साइकिल योजना के लिए 207 करोड़, बालिका प्रोत्साहन योजना के लिए 274 करोड़ रुपए स्वीकृत।
  • सर्व शिक्षा अभियान के लिए 14352 करोड़ और मध्याह्न भोजन के लिए 2374 करोड़ रुपए का प्रावधान।
  • साइकिल के लिए राशि 2500 रुपए से बढ़ाकर 3 हजार रुपए की गई।
  • सैनिटरी नैपकीन के लिए 56.20 करोड़ रुपए आवंटित।
  • बिहार के सभी जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का लक्ष्य।
  • आयुष्मान भारत योजना के लिए 335 करोड़ रुपए का प्रावधान।
  • पीएमसीएच को विश्वस्तरीय अस्पताल बनाने के लिए 5540 करोड़ रुपए स्वीकृत।
  • 11 जिलों में खुलेगा मेडिकल कॉलेज, नालंदा में डेंटल कॉलेज खोलने की मंजूरी।
  • आईजीआईएमएस में 100 बेड के स्टेट कैंसर संस्थान का होगा निर्माण।
  • सब्जी प्रसंस्करण के लिए 1750 करोड़ रुपए की स्वीकृति।

आज शाम से अगले पाँच दिनों तक मासिक पूजा के लिए खुला रहेगा सबरीमाला मंदिर

देश के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर को एक बार फिर से पूजा के लिए खोल दिया गया है। मलयालम महीना कुंबम के दौरान मासिक पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर 12 फ़रवरी से 17 फ़रवरी तक खुला रहेगा।

सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वासुदेवन नंपूतिरि मंगलवार शाम को मंदिर का पट खोलेंगे। पूजा के दौरान मंदिर के पुजारी कंडारारू राजीवरु भी मौजूद रहेंगे। मंदिर खुलने पर हिंदूवादी संगठनों के संभावित विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है।

परंपरा तोड़ने के आरोप में कनकदुर्गा को ससुराल वालों ने निकाला

बता दें कि पिछले दिनों 800 वर्षों की परंपरा को तोड़ कर सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली कनकदुर्गा को ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था। इतना ही नहीं, उसके मायके वालों ने भी उसे घर में घुसने की इजाज़त नहीं दी थी। पुलिस जब कनकदुर्गा को लेकर उसके ससुराल पहुँची तो पाया कि कनकदुर्गा के पति घर में ताला लगा कर बच्चों संग कहीं और चले गए थे।

कनकदुर्गा के परिवार ने कहा था कि उसके ‘कृत्य’ से पूरे समुदाय को शर्मसार होना पड़ा है और लाखों श्रद्धालुओं की भावना को ठेस पहुँची है। उसके सरकारी कर्मी पति ने कहा था कि वे उसे तब तक नहीं स्वीकार करेंगे, जब तक कि वह अपने पाप का प्रायश्चित नहीं कर लेती है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सितम्बर 2018 में महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की इजाज़त दे दी थी जिसके बाद श्रद्धालुओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। उच्चतम न्यायालय के उस निर्णय के बाद कनकदुर्गा सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली पहली महिला थी। 39 वर्षीय कनकदुर्गा ने एक अन्य महिला के साथ सबरीमाला की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को धता बताते हुए मंदिर में प्रवेश किया था।

वन्दे भारत एक्सप्रेस का किराया रेलवे ने कम किया

नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने के लिए तैयार देश की सबसे तेज गति वाली सेमी स्पीड ट्रेन ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ का किराया घटा दिया गया है। बता दें कि 15 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी इस ट्रेन का उद्घाटन करने वाले हैं।

सोमवार (फ़रवरी 11, 2019) को वन्दे भारत एक्सप्रेस के किराए को लेकर ख़बर आई थी कि इसके चेयर कार का किराया शताब्दी एक्सप्रेस के मुकाबले 1.5 गुना और एग्जीक्यूटिव क्लास का 1.4 गुना ज़्यादा था। अब इस ट्रेन का किराया और घटा दिया गया है।

दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली इस ट्रेन का प्रस्तावित किराया चेयर कार के लिए 1850 रुपए से घटाकर 1760 रुपए और एक्जीक्यूटिव क्लास के लिए 3520 से घटाकर 3310 रुपए कर दिया गया है। यह आदेश भारतीय रेलवे ने दिया है।

वापसी में वाराणसी से दिल्ली आते वक़्त चेयर कार की दर 1795 से घटाकर 1700 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास का टिकेट 3470 से कम कर 3260 रुपए तय की गई है। सेमी हाई स्पीड ट्रेन का किराया शताब्दी से थोड़ा ही ज़्यादा है।

चेयरकार और एग्जीक्यूटिव क्लास में सुबह का चाय, नाश्ता और लंच की दर दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग है। दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए यह 399 रुपए है जबकि चेयर कार के लिए यह 344 रुपए। वाराणसी से नई दिल्ली की यात्रा में यह दर घट कर 349 रुपए और 288 रुपए ही है। कम दूरी की यात्रा जैसे नई दिल्ली से कानपुर और प्रयागराज तक के लिए यह दर क्रमशः 155 रुपए और 122 रुपए है। उपरोक्त सभी दरें किराए में शामिल हैं।