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रोज़गार कहाँ है? पूछने वाले यह ख़बर ज़रूर पढ़ें…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बन जाने के बाद से देश में बेरोज़गारी को लेकर आए दिन माहौल गरमाया रहता है। ऐसे में सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में 3.79 लाख से अधिक नौकरियाँ दी गईं।

सरकार ने कहा कि साल 2017 से 2018 के बीच में केंद्रीय सरकार ने 2,51,279 नौकरियाँ निकाली थी। 1 फरवरी को कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तुत किए गए अंतरिम बजट के दस्तावेजों के विश्लेषण से अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च 01, 2019 तक यह 3,79,544 अंक बढ़कर 36,15,770 के आँकड़े तक पहुँच जाएगा।

सरकार द्वारा पेश किया गया ये रिकॉर्ड जानना इसलिए भी बेहद ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि कॉन्ग्रेस लगातार बीजेपी को बेरोज़गारी के मुद्दे पर घेरती रही है।

बृहस्पतिवार (7 फ़रवरी 2019) को संसद में बोलते हुए पीएम मोदी ने बताया कि प्रोविडेंट फंड, नेश्नल पेंशन योजना, आय कर भरने वालों में और वाहनों की ख़रीद से निकले आँकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि संगठित और गैर-संगठित संस्थानों को मिलाकर करोड़ों नौकरियों का सृजन किया गया है।

बता दें कि अधिकतर भर्तियाँ रेल मंत्रालय, पुलिस बलों, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर विभागों द्वारा की गई थी। केंद्र सरकार के प्रस्तावित बजट में इस बात का उल्लेख है कि विभागीय स्तर पर किस-किस क्षेत्र में कितनी नौकरियों का इज़ाफ़ा किया गया।

इसमें बताया गया है कि भारतीय रेलवे में 1 मार्च 2019 कर 98,999 नौकरियाँ देने के लिए तैयार है। इसके अलावा पुलिस विभाग में 1 मार्च 2019 तक 79,353 अतिरिक्त नौकरियाँ निकाली जाएँगी। इसी तरह से प्रत्यक्ष कर विभाग में नौकरियों का आँकड़ा 1 मार्च 2019 तक 80,143 तक पहुँचेगा। सरकार ने बताया कि अप्रत्यक्ष कर विभाग में मार्च 2017 में 53,394 लोग कार्यरत थे जबकि मार्च 2018 तक ये आँकड़ा 92, 842 तक पहुँचा।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय में 1 मार्च तक 2,363 कर्मचारी होंगे, जबकि मार्च 2017 तक में 1,174 कर्मचारी थे। इसी तरह से डाक विभाग में 1 मार्च 2019 तक 4,21,068 कर्मचारी होंगे। इसके साथ ही ऐसा अनुमान है कि अगले माह तक विदेश मंत्रालय में भी 11,877 कर्मचारी काम कर रहे होंगे। जबकि साल 2017 तक इसमें सिर्फ़ 10,044 कर्मचारी ही कार्य कर रहे थे।

फ़ैक्ट चैक: प्रियंका गाँधी की रैली का भीड़ कनेक्शन फ़र्ज़ी, कॉन्ग्रेस को डिलीट करना पड़ा ट्वीट

अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत करते हुए कॉंग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा सोमवार को अपने भाई राहुल गाँधी के साथ लखनऊ पहुँची। मीडिया और कॉन्ग्रेस में जमानत पर चल रहे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गाँधी की इस रैली को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।

इसी बीच कॉन्ग्रेस की उत्साहित पार्टी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्विटर पर लखनऊ के आज के रोड शो की तस्वीरों को ट्वीट किया, जिसके कैप्शन में लिखा था, “इसे कहते हैं स्वागत, लखनऊ!” लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया।

इंदिरा गाँधी की तरह दिखने वाली प्रियंका गाँधी वाड्रा की रैली में ‘जनसैलाब’ दिखाने का भरपूर प्रयास करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

‘अपार जनसैलाब’ दिखाने के लिए जिस तस्वीर का सहारा प्रियंका चतुर्वेदी ने लिया था, वो असल में लखनऊ की आज की रैली की नहीं बल्कि गजवेल, तेलंगाना राज्य की थी।

शेयर करने के बाद डिलीट कर दी गई यह तस्वीर असल में प्रियंका गाँधी की रैली की नहीं, बल्कि तेलंगाना की थी

यह तस्वीर दिसंबर 2018 की थी, जिसे @Kkdtalkies नाम से चल रहे ट्वीटर हैंडल ने सोशल मीडिया पर डाला था।

सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता के प्रियंका गाँधी वाड्रा की इस रैली में ‘अपार जनसैलाब’ जुटाने की इस नादान कोशिश की सच्चाई को लोगों ने पहचान लिया था।

जब से कॉन्ग्रेस पार्टी में जमानत पर चल रहे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गाँधी वाड्रा का पदार्पण हुआ है, मीडिया और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता लगातार उन्हें इंदिरा गाँधी से लेकर दुर्गा-अवतार साबित करने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। इसके लिए आज उन्होंने साबित भी कर दिया कि वो प्रियंका गाँधी की भक्ति की किसी भी सीमा को लाँघने के लिए तैयार हैं।

‘दिल्ली सच में विश्व की रेप कैपिटल है, भगवान हमारी मदद करें’

राजधानी दिल्ली में बढ़ते अपराध पर लगाम लगा पाने में केजरीवाल की आप सरकार फेल होती नज़र आ रही है। पश्चिमी दिल्ली के नारायणा क्षेत्र में 35 वर्षीय एक व्यक्ति द्वारा 5 साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपित व्यक्ति ने एक सर्वजनिक शौचालय में कथित तौर पर बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंज़ाम दिया है।

ख़बर की मानें तो घटना 6 फरवरी की है, लेकिन इसकी सूचना पुलिस को सोमवार को हुई। पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज के अनुसार पीड़िता को मेडिकल चेक-अप के लिए भेज दिया गया है और फ़िलहाल उसकी हालत स्थिर है। उन्होंने कहा कि आरोपी (सुलभ शौचायल का सफाईकर्मी) को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

‘रेप कैपिटल में भगवान करे हमारी मदद’

मामले के प्रकाश में आने के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने ट्विटर पर इस घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, ‘‘अब नारायणा में पाँच साल की बच्ची के साथ 40 साल के व्यक्ति ने दुष्कर्म किया। बच्ची ने काफ़ी तकलीफ़ झेली और उसके शरीर से काफी रक्तस्राव हुआ है। मैं बच्ची को देखने अस्पताल जा रही हूँ। दिल्ली सच में विश्व की ‘रेप कैपिटल’ है। भगवान हमारी मदद करें।”

28,594 घर… बस! देश के बाकी सभी घरों में पहुँच गई है बिज़ली

PM मोदी ने देश की तस्वीर को बदलने के लिए पिछले साढ़े चार सालों में सतत प्रयास किए हैं। इन्हीं प्रयासों में एक नाम ‘सौभाग्य योजना’ का भी है। इस योजना के अंतर्गत हर अंधेरे घर को बिजली पहुँचाकर रौशन करने का लक्ष्य साधा गया था। इसमें ग़रीबों को 5 एलईडी बल्ब, 1 पंखा और एक बैटरी देने की योजना भी थी।

साल 2017 में 25 सितंबर से इस योजना को शुरू किया गया था, इसकी अवधि 31 मार्च 2019 तक की तय की गई थी। इस योजना की अंतिम तिथि अब क़रीब है। ऐसे में जानना ज़रूरी है कि ये कार्य अपने लक्ष्य के कितने निकट पहुँचा है।

सौभाग्य योजना की वेबसाइट के अनुसार, अब सिर्फ़ 28,594 घर यानी 0.01 प्रतिशत ही ऐसे बाक़ी हैं जिनका विद्युतिकरण अभी तक नहीं हुआ है। अनुमान लगाया है कि महीने के आख़िर तक इन बचे हुए घरों में भी रौशनी पहुँचा दी जाएगी।

सरकार की वेबसाइट पर मौजूद आँकड़ों में यह दर्शाया गया है कि राजस्थान के उदयपुर ज़िले में केवल 8,460 ही ऐसे घर बचे हैं जिनका विद्युतीकरण किया जाना है। इसी तरह छत्तीसगढ़ में बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में क़रीब 20,134 लोगों के घरों तक बिजली पहुँचाना बाक़ी है।

इस योजना का लक्ष्य था कि देश के 2.5 करोड़ घरों तक बिजली को पहुँचाया जाए। जिसमें से अब सिर्फ़ 28,594 घर बाक़ी बचे हैं। ये एक बड़ी कामयाबी है, जिसे आलोचकों द्वारा नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। इस योजना पर आधिकारिक बयान भी हैं कि अभी तक 2.48 करोड़ से अधिक घरों में काम किया गया है और अगले 10-12 दिनों में लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है।

SC का CBI पर भरोसा क़ायमः ‘शारदा चिट-फंड घोटाले’ की जाँच पर निगरानी की याचिका ख़ारिज

सुप्रीम कोर्ट ने शारदा चिट-फंड घोटाले की सीबीआई जाँच की निगरानी करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने मामले पर सुनावाई करते हुए यह फै़सला दिया। अपनी रकम गवाँ चुके कुछ निजी निवेशकों ने यह याचिका दायर करते हुए सुप्रीम कोर्ट से जाँच के निगरानी की माँग की थी।

पीठ ने कहा, “हम चिटफंड घोटाले की जाँच पर नज़र रखने के लिए निगरानी समिति गठित करने के इच्छुक नहीं हैं।” इससे पहले न्यायालय ने घोटाले की जाँच वर्ष 2013 में सीबीआई को हस्तांतरित कर दी थी। कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि घोटाले में निगरानी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

क्या जाँच में ख़लल डालने की हुई कोशिश

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार इस घोटाले की जाँच को लेकर अब तक बेचैन नज़र आई है। बीते दिनों शारदा चिट-फंड घोटाले की जाँच के लिए सीबीआई की टीम पश्चिम बंगाल के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने गई थी, लेकिन तब ममता बनर्जी पुलिस कमिश्नर की सुरक्षा के लिए धरने पर बैठ गई थीं।

बता दें कि ममता जिनके लिए धरने पर बैठी थीं, उन पर शारदा चिट-फंड घोटाले के अपराधियों के ख़िलाफ़ अहम सबूत मिटाने का आरोप है। उनके धरने के दौरान विपक्ष के कई सारे नेता भी ममता के समर्थन में आ गए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस कमिश्नर को शिलांग में सीबीआई दफ़्तर में पूछताछ के लिए हाज़िर होने का आदेश दिया था।

क्या है शारदा चिट फंड घोटाला?

शारदा चिटफंड घोटाला एक बड़ा आर्थिक घोटाला है। NDTV के अनुसार यह घोटाला ₹4000 करोड़, फ़र्स्ट पोस्ट के अनुसार ₹10,000 करोड़ और अमर उजाला के अनुसार ₹40,000 करोड़ का है। मतबल कोई निश्चित आँकड़ा नहीं। निश्चित आँकड़ा इसलिए नहीं क्योंकि इस घोटाले के तार न सिर्फ़ पश्चिम बंगाल बल्कि निकटवर्ती राज्य ओडिशा, असम, झारखंड और त्रिपुरा तक से जुड़े हैं।

इस घोटाले में TMC सहित कई बड़े नेताओं, उनकी बीवियों और ऑफिसरों के नाम भी जुड़े हैं। तृणमूल सांसद कुणाल घोष और श्रीजॉय बोस, पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक रजत मजूमदार, पूर्व खेल और परिवहन मंत्री मदन मित्रा और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी – ये कुछ हाई प्रोफ़ाइल नाम हैं। और यह कोरी-कल्पना नहीं है। शारदा समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुदीप्त सेन ने 23 अप्रैल, 2013 को अपनी गिरफ़्तारी के बाद इन लोगों की संलिप्तता क़बूल की थी।

Hello… चंद्रबाबू नायडू, मोदी की बजाय स्वयं से पूछें- Who Are You?

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री दिल्ली आए हुए हैं। वह दिल्ली प्रधानमंत्री से मिल कर अपने राज्य की समस्याएँ बताने नहीं आए हैं। न ही वे दिल्ली में आंध्र प्रदेश पर्यटन को बढ़ावा देने आए हैं। चंद्रबाबू नायडू सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए दिल्ली आए हैं। ममता बनर्जी द्वारा शुरू की गई मुद्दाविहीन धरने की परंपरा को नया रुख देने दिल्ली आए हैं। वह दिल्ली आए हैं, ताकि यह दिखा सकें कि विपक्षी नेताओं के जमावड़े का खेल वह भी खेल सकते हैं। उन्हें दिखाना है कि जो काम कोलकाता में ममता बनर्जी और हैदराबाद में कुमारस्वामी कर सकते हैं, वही काम वह दिल्ली में कर के दिखा सकते हैं।

ऐसा करने में वो सफल भी हुए। डॉक्टर मनमोहन सिंह, राहुल गाँधी, फ़ारुक़ अब्दुल्ला सहित कई नेता धरनास्थल पर पहुँचे और नायडू के धरने को समर्थन दिया। अरविन्द केजरीवाल और ममता बनर्जी सहित अन्य नेताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से नायडू के प्रति अपने समर्थन को प्रदर्शित किया। इस खेल में जो सबसे ज़्यादा चर्चा का विषय बनेगा- बिना भाजपा सरकार बनने की स्थिति में उसकी पीएम पद की दावेदारी उतनी ही पक्की होगी।

नायडू का पीएम से सवाल- ‘हू आर यू?’

दिल्ली के आंध्र भवन में उपवास और धरने पर बैठे नायडू ने इस दौरान समाचार चैनल एनडीटीवी (NDTV) को दिए साक्षात्कार में कहा:

“मुझे लोकेश के पिता, देवांश के दादा और भुवनेश्वरी के पति होने पर गर्व है, मैं आपसे (नरेंद्र मोदी से)पूछ रहा हूँ- आप कौन हैं?”

चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत जीवन पर कटाक्ष करते हुए सिर्फ़ राजनीतिक नैतिकता को ही ताक़ पर नहीं रखा है, बल्कि एक व्यक्ति के तौर पर अपनी हीन भावना का भी परिचय दे रहे हैं। वह अपने परिवार, राज्य और समाज को बदनाम कर रहे हैं। नायडू के दिल्ली आगमन के कारण भले ही पूरी तरह राजनीतिक हों, लेकिन उन्होंने यह बयान देते समय याद भी नहीं रखा कि वह आंध्र के मुख्यमंत्री हैं। जब वह दिल्ली आते हैं तो अपने समाज के साथ ही राज्य का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, सिर्फ़ अपनी पार्टी का ही नहीं।

नायडू की टिप्पणी लाखों लोगों का अपमान

एक आँकड़े के मुताबिक़ भारत में 60-64 उम्र समूह के बीच आने वाली 70 लाख महिलाएँ सिंगल हैं, क्या नायडू उन से भी पूछ्ना चाहते हैं- ‘हू आर यू?’ ऐसे लाखों पुरुष भी हैं जो विधुर हैं, ऐसी लाखों महिलाएँ हैं जो अपने पति को खो चुकी हैं, ऐसे लाखों जोड़े हैं जिन्होंने स्वेच्छा से तलाक़ ले रखा है, ऐसे लाखों व्यक्ति हैं जिन्होंने जीवन में शादी ही नहीं की- क्या नायडू उन उन सभी का चरित्र प्रमाण पत्र देखना चाहते हैं? क्या स्वेच्छा से अलग रहने वाले जोड़े किसी के नहीं होते? क्या समाज उनका और वो समाज के नहीं होते? क्या अब इन्हे अपने व्यक्तिगत च्वॉइस सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए भी नायडू की अनुमति लेनी होगी?

नायडू अगर पीएम मोदी से यह पूछते कि आप प्रधानमंत्री आवास में क्यों रहते हैं, तो चल जाता। अगर नायडू यह भी पूछते कि आपने फलां रैली में फलां बयान क्यों दिया, यह भी चल जाता। लेकिन, चंद्रबाबू ने अंध-विरोध की पराकाष्ठा को पार करते हुए उन लाखों लोगों का अपमान किया है जो स्वेच्छा से अपना जीवन जीते हैं। नायडू ने ऐसे लोगों की व्यक्तिगत च्वॉइस को निशाना बना कर एक ख़ुद को झूठी नैतिकता का झंडाबरदार बताने की कोशिश की है।

पत्नी, बेटा और पोते का नाम लेकर कोई महान नहीं बनता

चंद्रबाबू नायडू ने अपनी पत्नी, बेटे और पोते का नाम लेकर मोदी पर निशाना साधा। नायडू के अनुसार, जिनकी पत्नी, बेटे और पोते नहीं हैं- उनकी कोई पहचान नहीं है। अगर परिवार से ही किसी की पहचान होती है तो भी मोदी अकेले नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पत्नी भले ही स्वेच्छा से अलग-अलग रहते हों, लेकिन मोदी के पास माँ है, उनके चार भाई हैं, एक बहन है। मोदी अपने भाषणों में हमेशा से कहते आए हैं कि सवा सौ करोड़ देशवासी ही उनका परिवार है।

चंद्रबाबू नायडू को शायद यह याद नहीं कि दुनिया में हर एक व्यक्ति जो आज अस्तित्व में है, भले ही उनकी पत्नी और बच्चे न हों- लेकिन हर कोई अपनी माँ के कोख से ही जन्म लेता है, वो किसी न किसी का पुत्र हो सकता है, किसी की पुत्री हो सकती है। पत्नी और बच्चे होना किसी की पहचान का प्रमाण नहीं है। किसी की पहचान उसके आचरण, व्यवहार और लोकप्रियता से बनती है, सिर्फ़ बीवी-बच्चों होना ही पहचान का प्रमाण नहीं होता।

चंद्रबाबू नायडू जी, सहवास तो कुत्ते-बिल्ली भी करते हैं, कीड़े-मकोड़े भी करते हैं। बच्चे तो इंसान छोड़िए, पशु-पक्षी के भी होते हैं। नायडू को समझना चाहिए कि अपने बीवी-बच्चों के नाम का बखान कर और किसी के व्यक्तिगत जीवन पर भद्दी टिप्पणी कर वह अपनी पहचान साबित नहीं कर सकते। अगर ऐसा है तो 10 बच्चे और 5 बीवियों वाले पकिस्तान के मौलवी साहब भी नायडू से पूछ सकते हैं- ‘हू आर यू?

₹1850 में दिल्ली से वाराणसी: 15 फरवरी से ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ आपकी सेवा में

भारत की पहली नई दिल्ली से वाराणसी के बीच सेमी हाई स्पीड ट्रेन “वन्दे भारत एक्सप्रेस” लॉन्चिंग के लिए तैयार है। इस ट्रेन की आने जाने की दरों में मामूली अंतर है। दिल्ली से वाराणसी तक की सेमी हाई स्पीड ट्रेन “वन्दे भारत एक्सप्रेस” के एयर कंडीशन चेयरकार की टिकेट 1850 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास की टिकेट 3520 रुपए रिर्धारित की गई है, जिसमें कैटरिंग चार्ज भी शामिल है।

वापसी में वाराणसी से दिल्ली आते वक़्त चेयर कार की दर 1795 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास का टिकेट 3470 रुपए तय की गई है। सेमी हाई स्पीड ट्रेन का किराया शताब्दी से थोड़ा ही ज़्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 फ़रवरी को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएँगे।

चेयरकार और एग्जीक्यूटिव क्लास में सुबह का चाय, नाश्ता और लंच की दर दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग है। दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए यह 399 रुपए है जबकि चेयर कार के लिए यह 344 रुपए। वाराणसी से नई दिल्ली की यात्रा में यह दर घट कर 349 रुपए और 288 रुपए ही है। कम दूरी की यात्रा जैसे नई दिल्ली से कानपुर और प्रयागराज तक के लिए यह दर क्रमशः 155 रुपए और 122 रुपए है। उपरोक्त सभी दरें किराए में शामिल हैं।

ज्ञात हो कि वन्दे भारत एक्सप्रेस के निर्माण में करीब सौ करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और इसे महज डेढ़ साल में ही तैयार कर लिया गया है। पिछले दिनों दिल्ली-प्रयागराज रूट पर इसका ट्रायल रन सफल रहा। याद हो कि इसी महीने इसका दिल्ली-आगरा रूट पर भी ट्रायल रन किया गया था जिस दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थर फेंक कर इसे नुकसान पहुँचाया था और खिड़कियाँ तोड़ दी थी।

ट्रेन 18 अर्थात वन्दे भारत एक्सप्रेस एक लक्ज़री ट्रेन है जिसमे यात्रा के दौरान वाई-फाई, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली, स्पर्श मुक्त जैव शौचालय, एलईडी लाइट, मोबाइल चार्जिंग प्‍वाइंट और उपस्थित यात्रियों तथा मौसम के अनुसार तापमान को कम ज्यादा करने में सक्षम मौसम नियंत्रण प्रणाली जैसी सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी। इस ट्रेन के बीच में दो एक्जिक्यूटिव कंपार्टमेंट भी होंगे, प्रत्येक में 52 सीट होंगी, वहीं सामान्य कोच में 78 सीटें होंगी। पहले इस ट्रेन का नाम ट्रेन 18 रखा गया था क्योंकि इसे रेलवे ने 2018 में लॉन्च किया था। अब इसे वन्दे भारत एक्सप्रेस नाम दिया गया है।

जज़्बे को सलाम: जवानों ने -7 डिग्री तापमान में गर्भवती महिला को कराया भर्ती, जुड़वाँ बच्चियों को दिया जन्म

जम्मू-कश्मीर में सेना के जवानों की मानवता और उनके द्वारा पेश की गई बहादुरी की मिसाल ने सबका दिल जीत लिया है। दरअसल प्रदेश में भारी बर्फ़बारी के कारण जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे गाड़ियों का आवागमन भी प्रभावित है।

इसी बीच बीते 8 फ़रवरी को बांदीपुर में थलसेना की पनार शिविर के कंपनी कमांडर को एक ग्रामीण ने फोन करते हुए सेना से अपनी गर्भवती पत्नी गुलशाना बेग़म को अस्पताल पहुँचाने की मदद माँगी थी। जिसके बाद सेना के जवानों ने सही समय पर महिला की मदद करते हुए उसे उत्तर कश्मीर के बांदीपुर ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया।

-7 डिग्री तापमान में जवानों ने की महिला की मदद

ख़बर की मानें तो भारी बर्फ़बारी होने के कारण मौसम काफ़ी ख़राब था और तापमान शून्य से सात डिग्री सेल्सियस कम। बर्फ़बारी के कारण सड़कें बर्फ़ से पूरी तरह ढक गई थी। इससे गाड़ियों की आवाजाही नहीं हो पा रही थी।

ऐसे में राष्ट्रीय राइफ़ल्स के जवानों ने भारी बर्फ़बारी और सड़कों पर मुश्किल हालात का सामना करते हुए गर्भवती महिला को ढाई किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया। हालात गंभीर होते हुए भी कमर तक पहुँची बर्फ़ को पार करते हुए वे आगे बढ़ते रहे।

अस्पताल में भर्ती कराने के बाद पता चला कि महिला को ऑपरेशन की सख़्त ज़रूरत थी। ऐसे में उन्हें समय पर अस्पताल लाना आवश्यकता था। जवानों का अथक प्रयास सफल हुआ और महिला ने जुड़वाँ बच्चियों को जन्म दिया।

जमानत पर चल रहे रॉबर्ट वाड्रा का पत्नी प्रियंका के नाम ‘अश्रुपूरित’ पोस्ट

कॉन्ग्रेस के पूर्वी उत्तर प्रदेश मामलों की प्रभारी महासचिव नियुक्त की गई रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गाँधी वाड्रा ने आज लखनऊ में पहला रोड शो किया। इसी बीच जमानत पर चल रहे उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने उनके नाम एक बेहद भावुक फेसबुक पोस्ट लिख कर उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं।

रॉबर्ट द्वारा फेसबुक पर किए गए इस पोस्ट में उन्होंने अपनी पत्नी प्रियंका गाँधी वाड्रा को अपनी सबसे अच्छी दोस्त और परफेक्ट पत्नी बताया है। फेसबुक पोस्ट पर उन्होंने लिखा, “भारत के लोगों की सेवा और यूपी में कार्य करने की नई यात्रा के लिए ‘P’ तुम्हें मेरी शुभकामनाएँ। तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त, परफेक्ट पत्नी और हमारे बच्चों के लिए सबसे बेहतरीन माँ हो। देश के राजनैतिक माहौल की स्थिति अच्छी नहीं है। लेकिन, मैं जानता हूँ देश की सेवा करना उनका (प्रियंका) कर्तव्य है। अब हमने उन्हें देश के लोगों को सौंप दिया है, प्लीज़ उन्हें सुरक्षित रखना।”

रॉबर्ट वाड्रा ने अपने इस पोस्ट में प्रियंका गाँधी वाड्रा को ‘P’ कहकर संबोधित किया है। इससे पहले भी जब प्रियंका गाँधी वाड्रा ने राजनीति में कदम रखा था, तब रॉबर्ट वाड्रा ने उन्हें ‘P’ कहकर ही शुभकामनाएँ दी थी।

बता दें कि प्रियंका गाँधी वाड्रा को लोकसभा चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई है। प्रियंका के जिम्मे राज्य की 80 में से 42 सीटें हैं। कॉन्ग्रेस की महासचिव होने के नाते उनके पास काफ़ी बड़ी चुनौती है क्योंकि पूर्वी यूपी में भाजपा के कई बड़े नेताओं के निर्वाचन क्षेत्र भी आते हैं। इसमें यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी का क्षेत्र भी शामिल है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रॉबर्ट वाड्रा द्वारा मिली शुभकामनाओं के साथ प्रियंका गाँधी वाड्रा अपने लक्ष्य के कितने निकट पहुँच पाती हैं। पिछले चुनावों में कॉन्ग्रेस पूरे देश में केवल 44 सीटों पर ही सिमट गई थी। उत्तर प्रदेश की बात करें तो मोदी लहर के कहर में कॉन्ग्रेस वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ़ अपनी परंपरागत सीटें यानी अमेठी और रायबरेली ही बचा सकी थी।

ट्विटर के भूत बातों से नहीं मानते, संसदीय समिति ने कहा ‘जाओ अपने मालिक को लेकर आओ’

ट्विटर इंडिया के प्रतिनिधियों सहित ट्विटर टीम आज इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी के मुद्दे पर संसदीय समिति के समक्ष पेश होने के लिए संसद पहुंची। इससे पहले शॉर्ट नोटिस का हवाला देते हुए ट्विटर ने संसदीय समिति के समक्ष पेश होने से मना कर दिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी के मुद्दे पर संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है कि वे ट्विटर के किसी भी अधिकारी से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक कि समिति के समक्ष कोई वरिष्ठ सदस्य या ट्विटर ग्लोबल टीम के सीईओ पेश न हों। इसके लिए ट्विटर को 15 दिन की डेडलाइन दी गई है। 

ट्विटर के सीईओ जैक दोरजी ने संसद की समिति के सामने पेश होने से इनकार कर दिया था। खबरों के मुताबिक, बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली सूचना-प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय समिति ने 1 फरवरी को ट्विटर सीईओ के लिए समन जारी किया था। समन में उनसे अगली बैठक में पेश होने को कहा गया था। बता दें कि सोशल मीडिया पर भारतीय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के मसले पर जवाब-तलब के लिए उन्हें बुलाया गया था।