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मोदी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करता है, ये दलालों के लिए चिन्ता करते हैं: PM मोदी

सिलवासा में एक सभा को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने महागठबंधन पर तीखा हमला करते हुए कहा, “पहले जो लोग कॉन्ग्रेस को पानी पी पी कर कोसते थे, अब सब कुछ भूलकर एक मंच पर आ गए हैं।” उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर चल रही है। हम विकास की पंचधारा के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। बच्चों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, किसान को सिंचाई और जन-जन की सुनवाई, ये हमारे लिए विकास का राजमार्ग है।

बता दें कि, एक तरफ़ जहाँ आज कोलकाता में महागठबंधन की रैली थी। वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी सिलवासा में थे। उन्होंने सिलवासा में एक रैली में महागठबंधन के दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब लोकतंत्र का गला घोंटने वाले लोकतंत्र को बचाने की बात करते हैं तो देश के मुँह से निकलता है, ‘वाह क्या बात है!’

पीएम मोदी ने कहा कि इन्हें गुस्सा आ रहा है कि मोदी ग़रीबों का अधिकार छीनने वाले, उनके राशन, उनकी पेंशन हड़पने वाले दलालों को बाहर क्यों कर रहा है। अपने इसी गुस्से की वज़ह से अब ये लोग एक महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

ये महागठबंधन अकेले मेरे खिलाफ ही नहीं, देश की जनता के भी खिलाफ है। अभी तो ये पूरी तरह साथ आए भी नहीं है, लेकिन हिस्सेदारी पर कैसे मोलभाव चल रहा है, ये भी देश का नौजवान, देश का किसान, देश की महिलाएँ, पहली बार वोट डालने जा रहे युवा साफ़  देख रहे हैं। अपने परिवार, अपनी सल्तनत को बचाने के लिए ये कितने भी गठबंधन बना लें, लेकिन अपने कर्मों से ये नहीं भाग सकते।

पीएम ने कहा, “आज देश के वो गरीब, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने के योग्य हैं, उन्हें घरों की मंजूरी दी जा चुकी है। आज जिन्हें आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलना है, गोल्ड कार्ड जारी किए जा चुके हैं। आज वो गरीब, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने के योग्य हैं, उनके घरों को मंजूरी दी जा चुकी है।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि दवाई और पढ़ाई के साथ-साथ सरकार ये भी सुनिश्चत कर रही है कि कोई भी ग़रीब बेघर ना रहे। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गाँव और शहरों के ग़रीबों को अपना पक्का घर देने का एक व्यापक अभियान चल रहा है। बीते साढ़े 4 वर्षों से जिस कमिटमेंट के साथ, जिस स्पीड और स्केल पर गरीबों के घर बनाने का का काम चल रहा है, वो अभूतपूर्व है। पहले की सरकार जहाँ अपने 5 साल में सिर्फ 25 लाख घर बनवा सकी थी, वहीं हमारी सरकार अब तक 1 करोड़ 25 लाख से अधिक घरों का निर्माण पूरा करा चुकी है।

पीएम ने कहा, “ज़मीन हो, जंगल की पैदावार हो, पढ़ाई लिखाई हो, खेल से जुड़ी प्रतिभा हो, हर स्तर पर आदिवासियों के कल्याण के लिए व्यापक प्रयास हो रहे हैं। वनधन योजना के तहत जो जंगल की उपज है, उसमें वैल्यु एडिशन और उसके उचित प्रचार-प्रसार के लिए देशभर में सेंटर बनाए जा रहे हैं। दादरा और नगर हवेली में पर्यटन के लिए बहुत सम्भावनाएँ हैं। इस क्षेत्र को टूरिस्ट मैप पर लाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। सिलवासा में बने दमनगंगा रिवरफ्रंट के पीछे की भावना भी यही है।”

अपने भाषण में पीएम ने यह भी कहा कि अब यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए एक और आकर्षण का केंद्र बनकर तैयार है। गरीबों के लिए, आदिवासियों के लिए, मध्यम वर्ग के लिए जितनी भी योजनाएँ चल रही हैं, उनके मूल में सबका साथ-सबका विकास है। जबकि वो दल जिसने दशकों तक देश में सरकारें चलाईं, वो हर काम में अपनी या अपने परिवार की सम्भावनाएँ देखता था।  

पीएम ने तंज करते हुए कहा कि यही कारण है कि वहाँ काम से ज़्यादा नाम पर ज़ोर दिया गया। इन्हें दिक्कत है कि मोदी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इतनी कड़ी कार्रवाई क्यों कर रहा है? इन्हें परेशानी है कि सत्ता के गलियारों में घूमने वाले बिचौलियों को मोदी ने बाहर क्यों निकाल दिया। इन्हें गुस्सा आ रहा है कि मोदी ग़रीबों का अधिकार छीनने वाले, उनके राशन, उनकी पेंशन हड़पने वाले दलालों को बाहर क्यों कर रहा है।

दूसरी तरफ़ महागठबंधन में अभी से फूट और मनमुटाव दिखना शुरू हो गया है। आज जहाँ अखिलेश कोलकाता में ममता की रैली का हिस्सा बने वहीं दूसरी तरफ मायावती इस रैली में शामिल नहीं हुईं। इस रैली में विपक्षी पार्टियों के करीब 20 बड़े चेहरों ने शिरकत की। इनमें  शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू, एचडी कुमारस्वामी, फ़ारूख अब्दुल्लाह और उमर अब्दुल्लाह भी दिखे।

कॉन्ग्रेस के 70 सालों का ‘क्रेडिट’ BJP को! केजरीवाल का मेमरी लॉस!

दिन था शनिवार। कोलकाता में ‘ममता’मयी महफ़िल सजी हुई थी। बड़े-बड़े धुरंधरों से रौनक बिछी हुई थी। जमावड़ा था एक गिरोह का, जिनके लिए ‘चौकीदार’ को हटाना ही जीवन का परम लक्ष्य बन चुका है। अब मौका था, दस्तूर था। सभी एक के बाद एक प्रवचन ‘चौकीदार’ के लिए दे रहे थे। तभी अरविंद केजरीवाल को जोश आया और उठ खड़े हुए महफ़िल को लूटने की जल्दी में। जल्दी इतनी कि दूसरे के गुनाहों की फ़ेहरिस्त तीसरे पर थोप दिया।

केजरीवाल ने अपने आकर्षित करने वाले भाषण में कहा कि देश में बीजेपी हिंदू-मुस्लिम को लड़ा रही है। अब केजरी ‘सड़जी’ को कौन समझाए! जिस गिरोह के साथ वे खड़े थे, उनका इतिहास ही भूल गए या फिर अवसर की रबड़ी चापने के जोश में होश खो दिए। केजरी ‘सड़जी’ आप भूल गए कि देश में सबसे ज्यादा सत्ता में रहने वाले पार्टी का नाम कॉन्ग्रेस है।

1984, 1987, 90… 1993 की घटनाओं को भूले

आप ये भी भूल गए कि हाशिमपुरा और उसके नज़दीक के एक गांव मलियाना में 22 और 23 मई 1987 को करीब 100 मुस्लिमों को मौत के घाट उतार दिया गया था। बस बता रहे हैं कि उस वक्त सरकार कॉन्ग्रेस की थी। खैर आप तो भूल गए होंगे 1984 का सिख दंगा भी, जिसमें करीब 3000 लोग मारे गए थे। ‘सड़जी’ उस वक्त भी सरकार कॉन्ग्रेस की थी। और हाँ, आपको याद दिला दें कि 1990 में कश्मीरी पंडितों को बेघर करने का श्रेय भी कॉन्ग्रेस की पॉलिसी को ही जाता है।

मुझे यकीन है कि आपको श्रीकृष्ण कमीशन की रिपोर्ट बिल्कुल याद नहीं होगी। इसमें कहा गया था कि 1992, 1993 के दौरान मुंबई में हुए दंगों के दौरान 900 लोग मारे गए थे। इसमें 575 मुस्लिम, 275 हिंदू, 45 अज्ञात थे। लेकिन क्या कीजिएगा ‘सड़जी’ यह जानकर कि तब भी कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। क्योंकि जानने के बाद भी आप तो यही कहेंगे कि देश में बीजेपी हिंदू-मुस्लिम को लड़ा रही है! है न? अब केजरी ‘सड़जी’ ये बताइए कि 2014 में जब से बीजेपी की सरकार बनी, देश में कितने दंगे हुए हैं?

जिस कॉन्ग्रेस के सामने आप सीना चौड़ा करके प्रवचन दे रहे थे, दरअसल भारत में सांप्रदायिक दंगों की जननी वही है। लेकिन नहीं। आप तो हैं युगपुरुष। अंग्रेजो ने “बांटों व राज करो” की नीति देकर जिस सांप्रदायिकता का बीज बोया था, उसे आजाद भारत के कॉन्ग्रेसी व वामपंथी नेताओं के बजाय आप तो BJP को ही इसका असली खेवनहार बताएंगे। ‘चौकीदार’ से लड़ने के लिए क्या-क्या भूलोगे ‘सड़जी’

अपने गिरेबान में भी झांकिए ‘युगपुरुष जी’

आरोप-प्रत्यारोप तो राजनीति का हिस्सा है। खूब करिए लेकिन कभी अपने गिरेबान में मौका निकालकर झाँक लीजिएगा। आप वही हैं न, जिन्होंने अपनी नौकरी देश की सेवा के लिए छोड़ी थी? और अपने गुरु अन्ना हजारे की पीठ में राजनीति की रबड़ी खाने के लिए छुरा घोंपा था। एक बात कभी आपने सोची की आपके अपने साथ क्यों छोड़ रहे हैं?

कभी सोचिए कि आपके चहेते आशुतोष, आशीष खेतान, कुमार विश्वास ने क्यों आपसे किनारा कर लिया? दरअसल, केजरीवाल जी जब आपने अपनी नौकरी छोड़ी थी तो देश को उम्मीद थी कि कुछ बदलाव होगा लेकिन आपके सुर तो बदल गए हैं। अब आपके लिए सत्ता ही सबकुछ है। तभी तो आप जो मन में आ रहा है, बोल रहे हैं।

कांग्रेस भगा रही, फिर भी पकड़ रहे हैं पल्लू

कॉन्ग्रेस आपसे और आपकी पार्टी ‘आप’ से कोई गठबंधन नहीं करना चाहती है। फिर भी आप उसका पीछा कर रहे हैं। ठीक वैसे जैसे छोटा बच्चा अपनी माँ का आँचल नहीं छोड़ता। कांग्रेस तो आपकी विरोधी पार्टी रही है। माँ तो है नहीं जो आप चिपक गए हैं – आखिर क्यों!

युग पुरुष जी कॉन्ग्रेस की शीला दीक्षित कह चुकी हैं कि वो किसी भी तरह से आप और आपकी पार्टी से कोई गठबंधन नहीं करेंगी फिर भी आपको उनके पीछे जाने में शर्म नहीं आती है? और चले भी गए तो पश्चिम बंगाल तक! जाकर पीएम मोदी और अमित शाह पर कॉन्ग्रेस के 70 सालों के कारनामों को बीजेपी के सिर पर मढ़ दिया। ‘सड़जी’ आखिर कब तक ‘ऊल-जुलूल’ बोलकर देश को गुमराह करेंगे?

कभी खाली बैठकर सोचिएगा तो पता चलेगा कि जिस केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जंग छेड़ी थी, वही केजरीवाल आज भ्रष्टाचार में लिप्त कॉन्ग्रेस का दामन थामने के लिए तैयार है!

याद रखिए ‘सड़जी’, जिस जनता ने आपको फर्श से उठाकर अर्स पर बिठाया था, वही जनता 2019 के राजनीतिक समर को भी डिसाइड करेगी। जनता सब जानती है ‘सड़जी’!

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा: ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार किया। पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर मामले में पाकिस्तान को मध्यस्थता करना बंद कर देना चाहिए।

ओवैसी ने कहा कि कश्मीर हमेशा से ही भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। ओवैसी ने अपने तल्ख़ अंदाज़ में यह भी कहा कि कश्मीर के युवा भी भारत का ही अभिन्न अंग हैं। ओवैसी ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।

कश्मीर को लेकर पाकिस्तान से भारत का विवाद कोई नया नहीं है। पाकिस्तान के नापाक़ इरादे हमेशा से ही कश्मीर विवाद के नाम पर सरहद पर घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते आए हैं।

भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों का मुँहतोड़ जवाब दिया जाता रहा है, लेकिन फिर भी पाकिस्तान अपनी आतंकी हरक़तों से बाज नहीं आता। सरहद पर हालात चाहे जो हों लेकिन भारतीय सेना दुश्मन का मुक़ाबला करने के लिए हमेशा ही तत्पर रहती है।

हाल ही में, टाइम्स नाउ के ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया गया था। इस वीडियो के माध्यम से उत्तरी सैन्य कमांडर रनबीर सिंह ने एक समारोह के आयोजन के दौरान पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए जानकारी दी थी कि साल 2018 भारतीय सेना के लिए उपलब्धियों भरा रहा। पिछले साल हमारी सेना ने 250 आतंकवादियों को मार गिराया, 54 आतंकियों को ज़िंदा पकड़ा और 4 आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया। आतंकवाद पर विराम लगाती यह सभी भारतीय गतिविधियाँ हमारी सेना के अदम्य साहस और क्षमता का परिचय है।

कुम्भ 2019: ख़ास आकर्षण, जो जीवन भर नहीं भूलेंगे आप!

गंगा, यमुना व सरस्वती नदियों के संगम और स्वर्गिक अमृत से पवित्र भू-भाग प्रयागराज लोकप्रिय कुम्भ मेला के चार स्थानों में से एक है। उत्तर प्रदेश का यह शहर तीर्थयात्रियों और इतिहास के उत्साही अध्येताओं के लिए एक ख़जाना है। जहाँ आप प्राचीन मंदिरों, स्मारकों तथा अनेक पर्यटन स्थलों के भ्रमण का आनंद उठा सकते हैं। त्रिवेणी संगम के अतिरिक्त प्रयागराज के आकर्षण के अन्य मुख्य केंद्र हनुमान मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अशोक स्तम्भ और उपनिवेशिक काल के स्वराज भवन जैसे अनेक भवन और स्मारक, कुम्भ मेला के साथ ही आकर्षण के प्रमुख केंद्र हैं। इसके साथ ही अन्य आकर्षण हैं-

संस्कृति ग्राम
संस्कृति ग्राम में स्थापित बुद्ध और उनके प्रथम प्रवचन की झाँकी  (तस्वीर-अनूप गुप्ता)

संस्कृति ग्राम

कुम्भ 2019 के दौरान बड़े आकर्षणों में से एक प्रयागराज के अरैल में कुम्भ मेला क्षेत्र के सेक्टर-19 में स्थित सृजनात्मक हब ‘संस्कृति ग्राम’ है। यहाँ दर्शकों को भारतीय कला एवं संस्कृति की एक झलक देखने को मिलेगी। अद्वितीय डिजाइन एवं दर्शन के साथ इस ग्राम में 13 पवेलियन्स का निर्माण किया गया है। इसके आलावा विभिन्न राज्यों के विशिष्ट शिल्प को प्रदर्शित एवं विक्रय के लिए 7 संस्कृति संकुलों में विभिन्न स्टॉल लगाए गए हैं। 8 अन्य पॅवेलियन जैसे इंदिरा गाँधी नेशनल कल्चरल एकेडेमी (आइ.जी.एन.सी.ए) के द्वारा वैदिक एक्जिबिशन गैलरी, इलाहाबाद म्यूजियम के द्वारा महाकुम्भ पर एक्जिबिशन, ट्राइफेट के द्वारा प्रदर्शनी भारत सरकार ललित कला अकादमी (एल.क. ए.) के द्वारा लाइव चित्र संगोष्ठी, संस्कृति एकेडेमी (एस.ए) के द्वारा अकादमी की किताबों का प्रदर्शन और विक्रय, एवं गाँधी स्मृति एवं दर्शन स्मृति के द्वारा मोहनदास से महात्मा पर एक्जिबिशन।

10 जनवरी 2019 से खुल चुके कलाग्राम ‘संस्कृति ग्राम’ का लोग 4 मार्च 2019 तक अवलोकन कर सकते हैं।

नोटः कलाग्राम निम्नलिखित तिथियों को बंद रहेंगीः 14-16 जनवरी, 2-11 फरवरी, 17- 19 फरवरी, 2019

पेशवाई

पेशवाई
अखाड़ों की पेशवाई का पारम्परिक जुलुस

कुम्भ के आयोजनों में अखाड़ों के पेशवाई का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘पेशवाई’ प्रवेशाई का देशज़ शब्द है, जिसका अर्थ है शोभायात्रा, जो विश्व भर से आने वाले लोगों का स्वागत कर कुम्भ मेले के आयोजन को विश्व पटल पर सूचित करने के उद्देश्य से निकाली जाती है। पेशवाई में साधु-सन्त अपने-अपने अखाड़ों के साथ बड़े धूम-धाम और पूरी भव्यता का प्रदर्शन करते हुए कुम्भ में पहुँचते हैं। हाथी, घोड़ों, बग्घी, बैण्ड आदि के साथ निकलने वाली पेशवाई के स्वागत एवं दर्शन हेतु पेशवाई मार्ग के दोनों ओर भारी संख्या में श्रद्धालु एवं सेवादार खडे़ रहते हैं। जो शोभायात्रा के ऊपर पुष्प वर्षा एवं नियत स्थलों पर माल्यापर्ण कर अखाड़ों का स्वागत करते हैं। अखाड़ों की पेशवाई एवं उनके स्वागत व दर्शन को खड़ी अपार भीड़ पूरे माहौल को रोमांच से भर देती है।

सांस्कृतिक आयोजन

सांस्कृतिक प्रस्तुति- ब्रज की फूलों की होली

उत्तर प्रदेश राज्य सरकार एवं भारत सरकार ने भारत की समृद्ध व विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत का दर्शन कराने हेतु सभी राज्यों के संस्कृति विभागों को गतिशील किया है। इसके लिए कुम्भ मेला क्षेत्र में पाँच विशाल सांस्कृतिक पंडाल स्थापित किए गए हैं। जहाँ रोज़ विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। प्रवचन पण्डाल और 4 सम्मेलन केन्द्र जो उच्चतम गुणवत्ता की सुविधाएँ यथा मंच, प्रकाश और ध्वनि प्रसारण तंत्र के साथ आयोजन हेतु स्थापित किए गए हैं। इसमें अखाड़ों की सहायता से विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है।

मंच – 1 लोक एवं आदिवासी कलाकार अपनी विशेष लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लेने के लिए तैयार हैं। 10 जनवरी, 2019 से आरंभ होकर दिनांक 23 फरवरी 2019 तक लोग लगभग 600 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनन्द उठाने में समर्थ होंगे। यहाँ लगभग 2000 कलाकार अपनी विशिष्ट शैली में अपनी कला का प्रर्दशन करेंगे।

पारम्परिक मृदभांड निर्माण को प्रदर्शित करती कलाकृति (तस्वीर-अनूप गुप्ता)

मंच – 2 बेहद ख़ूबसूरत और बड़ा मंच सेक्टर 19, अरैल में कला एवं शिल्प प्रेमियों के लिए कुम्भ मेला में एक अन्य ऐसा स्थान है। जहाँ संगीत नाटक अकादमी (एस.एन.ए) एवं एसपीआइसी एमएसीएवाई 10 जनवरी, 2019 से 5 मार्च, 2019 तक 40 से अधिक ऊर्जावान नाट्य एवं कला प्रदर्शनों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन करेंगी।

मंच – 3 शिल्प एवं कलाप्रेमियों के लिए अद्वितीय मंच प्रयागराज के अशोकनगर में निर्मित किया गया है। जो 100 से अधिक स्टालों से सुसज्जित है। जहाँ दर्शक सुंदर हस्तशिल्प की वस्तुएँ विशेष रूप से, सम्पूर्ण देश के शिल्पकारों के हस्तशिल्प खरीद सकते हैं। यहाँ होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आपके कलात्मक बोध में वृद्धि करेंगे।

नए और आकर्षक टूरिस्ट वॉक

टूरिस्ट वॉक
पर्यटन पथ पर टूरिस्ट वॉक (तस्वीर-Kumbh.gov.in )

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने वर्तमान सुनियोजित पर्यटक भ्रमण पथों में सुधार करते हुए, एक वृहद भ्रमण कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई है।

यात्रा का आरंभ बिन्दु: शंकर विमान मण्डपम।
पहला पड़ाव: बड़े हनुमान जी का मंदिर।
दूसरा पड़ाव: पातालपुरी मंदिर।
तीसरा पड़ाव: अक्षयवट।
चौथा पड़ाव: इलाहाबाद फोर्ट।
भ्रमण का अंतिम बिन्दु: रामघाट

लेजर लाइट शो

कुम्भ मेला-2019 में भारी संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों, धार्मिक गुरूओं तथा राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों के अनुभवों को बेहतर बनाने की चेष्टा में उत्तर प्रदेश सरकार ने लेजर लाइट शो का भी इंतज़ाम किया है। यह प्रदर्शन किले की दीवार पर दिसम्बर 2018 से ही संचालित किया जा रहा है।

जलमार्ग

पारम्परिक जलमार्ग के साथ ही घाटों का भ्रमण

प्रयागराज शताब्दियों से अपनी नदियों एवं जलमार्ग के कारण महत्वपूर्ण रहा है। भूतकाल में प्रयागराज जल परिवहन मार्ग में महत्वपूर्ण पड़ाव था किन्तु बाद में जलमार्ग से यात्रा एवं परिवहन कम होती गई। उस प्रक्रिया में अंतर्देशीय जल मार्ग प्राधिकरण ने सुजावन घाट पर शानदार आई.डबलू.टी टर्मिनल स्थापित किया है।


सेमी क्रूज सी.एल कस्तूरबा

यह टर्मिनल यात्रियों एवं पर्यटको को भारत के प्राचीनतम जलमार्गो में से एक में यात्रा करने के लिए और सी.एल कस्तूरबा (आई.डबलू.ए.आई का सेमी क्रूज) हेतु उपयोग में लाया जा रहा है। यह टर्मिनल और कुछ अतिरिक्त घाट जैसे बोटक्लब, गऊघाट, अरैल घाट का उपयोग पारंपरिक मोटर बोट चलाने के लिए भी किया जाता है। पारंपरिक मोटर बोट की सवारी यात्रियों को प्राचीन नगरी का अनुभव कराएगी। इस बोट और क्रूज को सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं से लैस किया गया है। सभी उल्लिखित टर्मिनल और घाट पर निश्चित दरों पर बोट टिकट काउन्टर उपलब्घ हैं। इस सेवा का लाभ यात्री इलेक्ट्रॉनिक ऑनलाइन टिकट वेबसाइट www.pryagrajboatticketing.com से खरीद सकते हैं।

साभार- kumbh.gov.in से कुछ सूचनाएँ ली गई हैं।

PM उम्मीदवार के नाम पर हड़बड़ा गए अखिलेश, दिया लच्छेदार जवाब

लोकसभा चुनावों के आते-आते सबके जहन में एक सवाल जो आम तौर पर उठ रहा होता है वो यह कि पीएम पद के उम्मीदवार पर किसका नाम सामने आएगा। यह सवाल यदि आम जनता से पूछा जाए तो शायद उनकी जुबान का हड़बड़ाना बनता है, लेकिन यदि राजनीति से जुड़ा दिग्गज भी इस सवाल को टाल जाए, तो उसे क्या समझा जाएगा!

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से जब शनिवार (जनवरी 19, 2019) को प्रधानमंत्री के पद के लिए उम्मीदवार का नाम पूछा गया तो वो इस सवाल को टालते हुए नज़र आए।

उन्होंने कोलकाता में “यूनाइटेड रैली” के मौके पर में इंडिया टुडे टीवी को बताया कि प्रधानमंत्री के पद पर उम्मीदवार से कोई मतलब नहीं है। अगर किसी चीज़ से मतलब है तो वो यह कि देश को नए प्रधानमंत्री की जरूरत है। जो देश को जरूर मिलेगा।

बता दें कि अखिलेश का यह लच्छेदार जवाब उस समय आया, जब उनसे पूछा गया कि मायावती और ममता बनर्जी में से प्रधानमंत्री के पद के लिए कौन बेहतर उम्मीदवार है?

ममता बनर्जी और मायावती महागठबंधन के दो ऐसे प्रसिद्ध चेहरे हैं, जो आगामी लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के लिए चुने जा सकते हैं। ये दोनों ही महिलाएँ अपने-अपने राज्यों में सबसे सशक्त महिला राजनेताओं में से एक हैं।

दिलचस्प यह है कि एक तरफ जहाँ अखिलेश कोलकाता में ममता की रैली का हिस्सा बने वहीं दूसरी तरफ मायावती इस रैली में शामिल नहीं हुईं।

इस रैली में विपक्षी पार्टियों के करीब 20 बड़े चेहरों ने शिरकत की। इनमें  शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू, एचडी कुमारस्वामी, फ़ारूख अब्दुल्लाह और उमर अब्दुल्लाह भी दिखे।

हैरान करने वाली बात यह रही कि शत्रुघन सिन्हा, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी भी इस रैली में ‘दीदी’ को सपोर्ट करते दिखाई दिए।

विश्व बाज़ार में भारतीय रेलः ट्रेन-18 के आयात में विदेशों की रुचि

भारत में बनी आधुनिक ट्रेन-18 को विश्व स्तर पर तवज्जो मिल रही है। अब भारत रेल व्यापार के ग्लोबल मार्केट में उतरने जा रहा है। मिडिल ईस्ट से लेकर अमेरिका तक ट्रेन-18 में अपनी रुचि दिखा रहे हैं। दरअसल, इस ट्रेन को बनाने में भारत सरकार का 100 करोड़ रुपए का खर्च आया है। बता दें कि ट्रेन सेट्स बनाने की यह तकनीक दुनिया में सबसे किफ़ायती है। यही कारण है कि कई देश इसे खरीदने में दिलचस्पी ले रहे हैं।

रेलवे बोर्ड के सदस्य राजेश अग्रवाल ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, “कई देशों ने इस ट्रेन सेट्स में अपनी रुचि दिखाई है। इस बात से मुझे खुशी और गर्व है कि हमारे यहाँ तैयार एक उत्पाद में  इतनी रुचि दिखाई जा रही है।” उन्होंने कहा कि दुनिया भर में रोलिंग स्टॉक बाजार लगभग 200 अरब डॉलर का है और हम इसमें एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी चाहते हैं। हमारा उद्देश्य इस ट्रेन को सफलतापूर्वक चलाना है।

दुनिया में 250 करोड़ है ऐसे ट्रेनों की कीमत

अगर दुनिया में इस तरह के ट्रेनों के कीमत की बात करें तो यह करीब 250 करोड़ रुपए का पड़ता है। इसके अलावा इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई द्वारा तैयार इस भारतीय संस्करण की लागत करीब 100 करोड़ रुपए आती है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यूरोप और अमेरिका में ट्रेन-18 जैसी ट्रेन को तैयार करने में 250-300 करोड़ रुपए का खर्च आता है।

ट्रेन-18 का अब तक जो परीक्षण हुआ है, उसमें इसकी अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटे रही है। बता दें कि दिल्ली और वाराणसी के बीच ट्रेन-18 का वाणिज्यिक परिचालन जल्द ही शुरू होने वाला है।

‘250km की स्पीड में तक चलने में सक्षम’

रेलवे बोर्ड के सदस्य राजेश अग्रवाल के अनुसार उन्हें इस ट्रेन पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, “हमें सेमी हाई स्पीड इस ट्रेन की विशाल संभावनाओं पर पूरा विश्वास है, जिसकी गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा से लेकर 250 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच है।” उन्होंने कहा कि इसकी लागत अन्य देशों की तुलना में घरेलू स्तर पर बनाए जाने के कारण करीब 25 फीसदी तक कम होगी।

गणित की ‘हेराफेरी’ है राफ़ेल सौदे में दाम बढ़ने की रिपोर्ट: जेटली

अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिन्दू’ में फाइटर प्लेन राफ़ेल से संबंधित छपे एक लेख को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बकवास बताया। जेटली ने कहा कि राफ़ेल पर ‘द हिन्दू‘ का लेख अंकगणित की हेराफेरी पर आधारित है। उन्होंने कहा कि जो सौदा 2007 में हुआ ही नहीं, उसकी कीमत को दरकिनार कीजिए। उन्होंने राफ़ेल सौदे में घोटाला खोजने वालों को एक तरह का चैलेंज देते हुए कहा कि 2016 के दामों से इसकी तुलना कीजिए और तब घोटाला खोजकर दिखाइए।

‘द हिन्दू’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वायुसेना द्वारा 126 विमानों की माँग की जगह सिर्फ 36 विमान खरीदने के फैसले के कारण हर एक फाइटर जेट की कीमत में 41.42 प्रतिशत की वृद्धि हो गई। वित्त मंत्री जेटली ने इस रिपोर्ट को खारिज़ करते हुए कई ट्वीट किया। जेटली ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने कीमतों का आकलन किया है और सीएजी भी उसकी जांच कर रहा है।

उपचार के लिए अमेरिका गए वित्त मंत्री जेटली ने वहीं से ट्वीट कर कॉन्ग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “2007 में नहीं हुए सौदे के दाम को दरकिनार करके 2016 की दामों से तुलना करते हुए, फ़िर एक घोटाले का पता कीजिए।” उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि अंकगणित के आधार पर लगाए जाने वाला यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद व बकवास है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि 2016 की तुलना में 2007 में यूपीए सरकार के समय राफ़ेल की ऑफर कीमत अधिक थी। रक्षा मंत्रालय ने ‘द हिंदू’ के रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा है कि न्यूज पेपर ने अपनी रिपोर्ट में आधारहीन फ़ैक्ट व तर्क दिए हैं।

यही नहीं रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी कि ससंद में बहस के दौरान रक्षा मंत्री ने इन सभी आरोपों का बेहद गहराई से जवाब दिया है।

पिछले दिनों वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ‘द हिंदू’ में छपे रिपोर्ट के हवाले सरकार पर यह आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार ने अपने फ़ायदे के लिए एक फ़्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट को अप्रत्याशित लाभ पहुँचाया।

चिंदबरम ने भाजपा सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस सरकार की तुलना में भाजपा सरकार ने प्रति राफ़ेल विमान की कीमत ₹186 करोड़ ज्यादा दी है। इस तरह से वर्तमान सरकार पर हमला बोलते हुए पी चिदंबरम ने मुख्य तौर पर दो आरोप लगाया है।

चिदंबरम का पहला आरोप यह है कि सरकार ने एयर फोर्स के लिए खरीदी जाने वाली विमान की संख्या 90 से घटाकर 45 कर दी। एक तरह से यह देश की रक्षा व्यवस्था के साथ मजाक है। वहीं कॉन्ग्रेस की तरफ़ से चिदंबरम ने दूसरा आरोप यह लगाया कि 2016 की तुलना में सरकार ने प्रति लड़ाकू विमान के लिए फ्रांसीसी कंपनी को ₹186 करोड़ अधिक दिए हैं।

पी चिदंबरम के इन सभी सवालों का जवाब सरकार की मंत्री स्मृति ईरानी ने देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सरकार के पक्ष में फ़ैसला दे चुकी है, रक्षा मंत्री ने ससंद में घंटे भर विपक्ष के सभी सवालों का जवाब दिया है, कैग के पास मामले से जुड़ी सभी फ़ाईल है। ऐसे में कॉन्ग्रेस को राफ़ेल मामले में अफ़वाह फ़ैलाने का कोई हक नहीं है। इस मामले पर कॉन्ग्रेस का असली चेहरा लोगों के बीच आ गया है।

PM मोदी ने की जिस K-9 वज्र की सवारी, जानिए उसकी खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज K-9 वज्र की सवारी की। इस सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्ज़र को लार्सेन एंड टर्बो नाम की कंपनी ने तैयार किया है। नवंबर 2018 को देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय सेना के तोपखाने में K-9 वज्र को शामिल करने की घोषणा की थी।

रक्षामंत्री ने इस कार्यक्रम में कहा था कि 2020 तक कुल 100 K-9 वज्र को सेना अपने उपयोग में ले सकेगी। ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि K-9 वज्र भारतीय सेना के लिए किस तरह से मददगार साबित होगा। हमारे आर्मी के पास पहले से मौजूद हथियारों से K-9 वज्र किस तरह से अलग और खास है।

K-9 वज्र इन वजहों से खास है

K-9 वज्र 155 एमएम की गन्स हैं। इस गन के बैरल बोर की साइज 155 एमएम होने की वजह से सेना इसके ज़रिए अपने लक्ष्य पर दमदार तरह से हमला कर सकती है। K-9 वज्र की खासियत है कि यह जमीन व रेगिस्तान दोनों ही जगह से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए बनाया गया है।

पाकिस्तान से सटे बाड़मेर व अन्य रेगिस्तानी बार्डर वाले इलाके के लिहाज से यह बेहद उपयोगी है। K-9 वज्र के ज़रिए 28 से 38 किलोमीटर के रेंज में वार किया जा सकता है। K-9 वज्र को सेना के जवान तीन तरह से यूज कर सकेंगे। बर्स्ट मोड में 30 सेकेंड के अंदर तीन राउंड फ़ायर होता है, जबकि इन्टेंस मोड में लगातार फायरिंग की जा सकती है। जबकि सस्टेन्ड में एक घंटे के अंदर 60 राउंड फ़ायरिंग की जा सकती है।

इस कंपनी को मिला जिम्मा

K-9 वज्र को साउथ कोरिया की हथियार बनाने वाली कंपनी ‘हानवा टेकविन’ की मदद से अपने ही देश में बनाया जा रहा है। भारत में K-9 वज्र को बनाने में साउथ कोरियाई कंपनी की पार्टनर ‘लार्सेन एंड टर्बो’ कंपनी होगी। K-9 वज्र को बनाने के लिए सरकार ने इन कंपनियों के साथ ₹4300 करोड़ की डील की है।

EVM है चोर मशीन, शुरू हो ‘पेपर बैलट’ की प्रक्रिया: फ़ारुख़ अब्दुल्लाह

ईवीएम एक ऐसा मुद्दा है, जिसे पिछले कुछ चुनावों के नतीजों के बाद से जमकर उछाला जा रहा है। चुनाव आयोग से विपक्ष लगातार इस बात की गुहार लगा रहा है कि इसके प्रयोग पर आगामी चुनाव में रोक लगा दी जाए, क्योंकि इसमें छेड़छाड़ की आशंका जताई जाती रही है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने इस बात को एक सिरे से नकारते हुए कहा है कि राजनैतिक पार्टियाँ चुनाव में हारने पर ईवीएम के मुद्दे को फुटबॉल की तरह उछालती हैं, ताकि खुद की हार को छिपा सकें।

मायावती से लेकर अखिलेश और राहुल से लेकर केजरीवाल तक की शिकायत बीते चुनावों के नतीजे आने के बाद यही रही है कि उनकी पार्टी ईवीएम मशीन में गड़बडी के कारण चुनाव हार गई। इनका कहना है कि ईवीएम मशीन पर किसी भी बटन को दबाने से सिर्फ बीजेपी को ही वोट जाता है।

सोचने वाली बात यह है कि विपक्ष ईवीएम में गड़बड़ी सिर्फ उसी समय बताता है जब बीजेपी चुनाव जीतती है, फिर चाहे वो 2014 में हुए लोकसभा चुनाव की बात हो या 2017 में यूपी चुनाव की। बहुमत के साथ बीजेपी सरकार जब भी चुनाव जीतती है तब ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा गर्माने लगता है, लेकिन जब चुनावों में कोई अन्य सरकार जीतती है तो ईवीएम पर बात तक नहीं की जाती।

ईवीएम में गड़बड़ी होने का रोना 2019 के आते-आते अब भी शांत नहीं हुआ है। चुनावों के आते ही जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुख़ अब्दुल्ला ने ईवीएम को हटाकर दुबारा से पेपर बैलट द्वारा चुनाव किए जाने पर बात की है। उनका मानना है कि इस तरह से चुनाव की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष ढंग से की जा सकेगी।

फारुख अबदुल्ला ने ईलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को एक ‘चोर’ कहा है, उनका कहना है कि विश्व में कोई भी देश इस मशीन का इस्तेमाल नहीं करता है।

कोलकाता ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा आयोजित “यूनाईटिड इंडिया रैली” में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री कहा कि ईवीएम एक ‘चोर’ मशीन है, हमें चुनाव आयोग और राष्ट्रपति से मिलकर चुनावों में इसके इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए।

अबदुल्लाह ने अपनी बातचीत में जम्मू कश्मीर की हालिया स्थिति पर बीजेपी पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि पिछले साढ़े चार साल में बीजेपी ने हमें सिर्फ दर्द दिया है। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार को जाना ही चाहिए और सबको मिलकर एक ऐसी सरकार की कामना देश के लिए करनी चाहिए, जो एक नए हिन्दुस्तान का निर्माण कर सके। अब्दुल्लाह ने इस दौरान यह भी कहा कि बीजेपी को आने वाले चुनावों में हराने के लिए सभी विपक्षी पार्टियों को एक हो जाना चाहिए। उनका मानना है कि बीजेपी देश के लोगों को धर्म के आधार पर बाँट रही है।

2019 के लोकसभा चुनावों के लिए अधिकतर विपक्षी पार्टियों ने इस बात का समर्थन किया कि आगामी चुनावों में पेपर बैलट द्वारा मतदान होना चाहिए क्योंकि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।

हालांँकि बता दें कि चुनाव आयोग के प्रमुख सुनील अरोड़ा ने इस बाता का दावा किया है कि राजनैतिक पार्टियाँ चुनाव हारने की वजह से ईवीएम के मुद्दे को फुटबॉल की तरह इधर से उधर उछालते रहते हैं। सुनिल अरोड़ा से पहले उनके पूर्वाधिकारी ओपी रावत का भी यही कहना था कि राजनैतिक पार्टियाँ ईवीएम पर सवाल तभी उठाती हैं, जब वो चुनाव हारती हैं।

ओपी रावत के कहे अनुसार आज के समय में जैसे इसका प्रचलन हो चुका है कि जब वो लोग जीतते हैं, तो ईवीएम को साभार नहीं देते लेकिन जब हारते हैं तो सबसे पहले ऊँगली ईवीएम पर ही उठाते हैं।

चुनाव आयोग ने पेपर बैलट वाली प्रक्रिया से किए जाने वाले मतदान को एक सिरे से यह कहकर नकार दिया है कि पेपर बैलट की प्रक्रिया मतदान के लिए वापस लाने का कोई मतलब नहीं है।

बीजेपी का इस पूरे मामले पर कहना है कि सिर्फ विपक्षी दल अपनी भीतर की असुरक्षा को छुपाने के लिए ईवीएम मशीनों पर आरोप लगा रहे हैं।

सबरीमाला पर केरल सरकार का फ़र्ज़ीवाड़ा: 51 की सूची में नाम, लिंग, उम्र हर चीज से खिलवाड़

केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह दावा किया था प्रतिबंधित आयु वर्ग की 51 महिलाएँ अब तक सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर चुकी हैं। हालाँकि राज्य सरकार के इस दावे के एक दिन बाद ही एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा दी गई सूची तमाम विसंगतियों से भरा और फ़र्ज़ी आँकड़ों का पुलिंदा है।

विहिप नेता और वकील प्रथमेश विश्वनाथ, जो ‘अयप्पा भक्तों’ के विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रहे हैं, ने इस मामले पर एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि केरल सरकार का 50 से कम उम्र की 51 महिलाओं का मंदिर में प्रवेश संबंधित दावा एकदम झूठा है। विश्वनाथ ने आरोप लगाया कि राज्य की कम्युनिस्ट सरकार सबरीमाला मामले में दायर समीक्षा याचिकाओं में बदलाव करने के लिए दबाव डाल रही है।

विश्वनाथ ने आरोप लगाया कि सूची में कई महिलाएँ वास्तव में 50 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। यहाँ तक ​​कि केरल सरकार ने 51 महिलाओं की सूची को बनाने के लिए कई अन्य लोगों के उम्र और अन्य विवरण भी फ़र्ज़ी इस्तेमाल किए।

कई रिपोर्ट अब सामने आई है, जहाँ रजिस्टर्ड महिलाओं के नाम और विवरण में जालसाज़ी पाई गई है।

सूची में ‘कलावती’ के नाम से दर्ज़ मोबाइल नंबर एक ड्राइवर का पाया गया। जब टाइम्स नाउ ने उससे संपर्क किया, तो उस व्यक्ति ने पुष्टि की कि कलावती नाम की कोई महिला यहाँ नहीं है और उसके मोबाइल नंबर को फ़र्ज़ी तरीक़े से वहाँ से रजिस्टर्ड किया गया है।

इसी तरह, एक अन्य नाम ‘देवीगासीमणि’, 42 वर्षीय महिला के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था। वह पुरुष निकला और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर उसके दोस्त की थी। टाइम्स नाउ के पत्रकार ने बताया कि उसने 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के रूप में रजिस्टर्ड 5 रैंडम मोबाइल नम्बरों को डायल किया, जो मंदिर में प्रवेश कर चुकी थीं। हैरत की बात है कि सभी पाँच नंबर फ़र्ज़ी निकले।

रिपोर्ट के अनुसार, सूची में कई नामों के सामने गलत उम्र लिखा गया है। 60 वर्ष उम्र की महिलाओं को 50 से कम उम्र की महिलाओं के रूप में दिखाया गया है।

केरल सरकार ने कल दायर अपने हलफ़नामे में दावा किया था कि सूची केरल पुलिस द्वारा बनाए गए डिजिटल क्यू मैनेजमेंट प्रणाली से प्राप्त की गई है। उन्होंने दावा किया था कि इस वर्ष 16 लाख से अधिक लोगों ने मंदिर में दर्शन करने के लिए आवेदन किया है और उनमें से 7500 से अधिक महिलाएँ हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अब तक 8.2 लाख से अधिक तीर्थयात्री यात्रा कर चुके हैं और उनमें से 51 महिलाएँ 50 वर्ष से कम उम्र की थीं।

केरल पुलिस को उच्च न्यायालय के निगरानी पैनल ने भी फटकार लगाई थी, जिसने मंदिर के भीतर CPIM के दो कार्यकर्ताओं बिंदू और कनकदुर्गा को श्राइन के अन्दर ले जाने के लिए किए गए विशेष उपायों पर भी सवाल उठाया था। केरल पुलिस मंदिर के कर्मचारियों और वीआईपी के लिए आरक्षित एक गेट के माध्यम से दोनों महिलाओं को छिपा कर अंदर ले गई थी। बता दें कि तीर्थयात्रियों को उस गेट से जाने की अनुमति नहीं है।

केरल में विपक्षी दलों और सबरीमाला कर्म समिति ने केरल सरकार के ‘फ़र्ज़ी सूची पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि केरल सरकार केवल हिंदुओं का अपमान करने और समीक्षा याचिकाओं में रोड़ा अटकाने के लिए ऐसा कर रही है। राज्य भाजपा अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई ने कहा है कि यह सूची “सदी का सबसे बड़ा झूठ” है। कॉन्ग्रेस ने भी कहा कि कम्युनिस्ट सरकार ख़ुद ही “हँसी का पात्र” बन गई है।

केरल की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा की गई ज़्यादतियों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध करने वाले शांतिपूर्ण श्रद्धालुओं पर किए गए अत्याचार ने राज्य में व्यापक अशांति और असंतोष फ़ैलाया है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर हजारों फ़र्ज़ी मामले दर्ज़ कर दिए हैं। इसके अलावा राज्य में श्रद्धालुओं पर हिंसा के कई उदाहरण सामने आए हैं। पीएम मोदी ने हाल ही में कोल्लम में अपने संबोधन में कहा था कि सबरीमाला में कम्युनिस्ट सरकार की कार्रवाई केरल सरकार के सबसे पापपूर्ण व्यवहारों के रूप में इतिहास में दर्ज़ की जाएगी।