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बांग्लादेश की जेलों से 700+ कैदी फरार, JMB के आतंकी से लेकर जमात के कट्टरपंथी तक शामिल: भारत में घुसपैठ का खतरा, बंगाल में कदम-कदम पर निगरानी

बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा जारी है। वहीं, आतंकी संगठन जमीयत-उल मुजाहीदीन बांग्लादेश (JMB) के सदस्य भी जेल से बाहर आ गए हैं। इनमें कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के भी कई कार्यकर्ता भाग निकले हैं। पड़ोसी देश में उथल-पुथल के बीच पश्चिम बंगाल में आतंकियों की संभावित घुसपैठ को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है।

पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश के दो जेलों से 709 कैदी भाग निकले हैं। इनमें कई आतंकवादी भी शामिल हैं। इसकी जानकारी मिलते ही पूरे बंगाल में राज्य और केंद्रीय एजेंसियाँ ने निगरानी बढ़ा दी है। सीमा से सटे इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है। दरअसल, 6 अगस्त को लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने शेरपुर जिला जेल पर धावा बोलकर 500 से अधिक कैदियों को छुड़ा लिया।

उसी दिन, गाजीपुर में स्थित काशिमपुर उच्च सुरक्षा वाली जेल से लगभग 209 कैदी भाग गए। इस दौरान जेल प्रहरियों ने कैदियों को रोकने के लिए गोलीबारी की, जिसमें तीन आतंकवादी सहित छह लोग मारे गए। भागने वालों में से एक इकरामुल हक उर्फ ​​अबू तल्हा भी है। हक को 2023 में बांग्लादेश की आतंकवाद निरोधक और अंतरराष्ट्रीय अपराध इकाई ने गिरफ्तार किया था।

हक की गिरफ्तारी भारतीय खुफिया एजेंसियों द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर हुई थी। इसके बाद ढाका में बंगाल पुलिस ने उससे पूछताछ भी की थी। अधिकारियों का मानना ​​है कि भागने वालों में नियामतुल्लाह नाम का एक और आतंकी शामिल है। इसका नाम कोलकाता के हरिदेवपुर में पकड़े गए एक मॉड्यूल ने अपने नेता के रूप में लिया था।

सूत्रों का कहना है कि वे इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या जमातुल मुस्लिमीन का संचालन कमांडर अब्दुल अलीम और जकारिया मंडल भी भाग गए हैं। दोनों उसी जेल में बंद थे। ये चारों आतंकी जमात-उल-मुजाहिदीन और अंसारुल्लाह बांग्ला से जुड़े हैं। माना जा रहा है कि इनके भाग जाने के बाद कानून एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

इसके अलावा, 7 अगस्त को कुश्तिया में जेल अधिकारियों पर हमला कर 30 कैदी फरार हो गए। बीएसएफ के सूत्रों कहना है कि मालदा के पास भारत-बांग्लादेश की सीमा के पार करीब आठ जेएमबी के आतंकी छिपे हुए हैं। गाँव वालों ने आशंका जताई है कि ये नदी पार करके भारत में घुसपैठ कर सकते हैं। इसलिए वे रात भर जाग करके पहरेदारी कर रहे हैं।

कोलकाता पुलिस ने शहर के सभी होटलों से आने वाले मेहमानों का विस्तृत बैकग्राउंड रखने को कहा है। स्थानीय पुलिस को ये विवरण रोजाना इकट्ठा करने को कहा गया है। यहाँ तक ​​कि मध्य कोलकाता और अन्य इलाकों में दिन में दो बार जानकारी जुटाने के कहा गया है। इसके साथ ही इस जानकारी को लालबाजार थाना और स्पेशल ब्रांच को रिपोर्ट करने को कहा गया है।

कोलकाता के कई इलाके ऐसे हैं, जहाँ पहले भी जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के आतंकी छिपे थे। ऐसे इलाके अब जाँच के दायरे में हैं। बिधाननगर पुलिस की टीमें एयरपोर्ट, नारायणपुर, बागुईआटी, राजारहाट, न्यू टाउन और भांगर के आसपास के इलाकों का चक्कर लगा रही है। पुलिस उन दलालों पर भी नजर रख रही है, जो बांग्लादेशियों को बंगाल में बसाने में मदद करते हैं।

वहीं, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के नवनियुक्त महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने जिला अधिकारियों और व्यापार निकायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने बांग्लादेश से आने वाले अपराधियों को लेकर उन्हें आगाह किया। बोंगाँव में एक व्यापारी संगठन के प्रतिनिधि ने कहा, “हमें किसी की आईडी जाँचे बिना उसे अंदर न आने देने को कहा गया है।”

बांग्लादेश से आया रोती-बिलखती हिंदू महिलाओं का Video: इस्लामी कट्टरपंथियों ने किसी के बेटे का किया अपहरण, किसी के घर को लगाई आग, कहीं मचाई लूट

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के जाने के बाद कट्टर इस्लामी चुन-चुनकर हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार इसकी कई तस्वीरें सामने आ रही हैं।

वॉयस ऑफ बांग्लादेशी हिंदुओं के सोशल मीडिया पेज पर इनमें से कई वीडियो शेयर की गई है। जैसे एक वीडियो में देख सकते हैं कि एक महिला कहती है, “वो आए और उन्होंने हमारा घर लूट लिया। उन्होंने पैसे लिए, सोना लिया और सारी कीमती चीज लेकर चले गए। उन्होंने मेरे 14 साल के बेटे का भी अपहरण कर लिया है।”

महिला कहती है, “मुझे उनकी पहचान तो नहीं पता। मगर उन्होंने हमारे घर से सब कुछ ले लिया और हमें बुरी तरह पीटा भी।”

इसी तरह एक अन्य व्यक्ति ने इस मामले पर बताया कि कैसे उन लोगों के ऊपर घात लगातार हमला किया गया। 10-12 लोगों की भीड़ ने पहले उन्हें पीटा, फिर उनसे एक खाली स्टाम्प पर दस्तखत कराए और लड़के को वापस करने के लिए 10 लाख टका की फिरौती भी माँगी।

एक अन्य मामला दक्षिण-पश्चिमी बांग्लादेश के जेस्सोर का है। फेसबुक वी़डियो में एक हिंदू महिला बताती दिख रही है कि कैसे इस्लामी भीड़ ने उसके परिवार को निशाना बनाया और उसके भाई पर चाकू से वार दिया गया। साथ ही उसके घर से 3 लाख टका भी लूट लिया गया।

महिला वीडियो में कहती है, “देखो इन्होंने हमारे घरों में किस तरह से तोड़फोड़ की है, क्या यह किसी इंसान का काम है। वे दावे कर रहे हैं कि ये अब आजाद देख है, लेकिन देखो इन लोगों ने मेरे भाई के साथ क्या किया है।”

हिंदू महिला ने ये भी कहा, “बांग्लादेश में सनातनी होना पाप है, मैं छात्रा के तौर पर पूछ रही हूँ कि मेरे घर को क्यों निशाना बनाया। 3-4 और हिंदुओं के घर पर इसी तरह के हमले हुए हैं।”

गौरतलब है कि बांग्लादेश में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। 7 अगस्त की शाम से शुरू हुई हिंसा में अब तक कुल 232 लोग मारे जा चुके हैं। पिछले तीन हफ्तों में मरने वालों की संख्या 550 पार कर गई है।

राजदीप सरदेसाई पर शाजिया इल्मी ने ठोका केस, हाई कोर्ट ने इंडिया टुडे से माँगा अनएडिटेड वीडियो: सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लगाया था बदसलूकी का आरोप

भाजपा नेता और प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने इंडिया टुडे के एंकर और TMC सांसद सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। शाजिया इल्मी ने राजदीप सरदेसाई द्वारा एक्स (पहले ट्विटर) अपलोड किए गए एक वीडियो पर यह मुकदमा दायर किया है। राजदीप सरदेसाई ने इस वीडियो के साथ दावा किया था कि शाजिया इल्मी ने इंडिया टुडे के एक वीडियो जर्नलिस्ट को गाली दी।

शाजिया इल्मी ने यह मुकदमा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया है। इसकी पहली सुनवाई शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) को जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने की है। हाई कोर्ट ने इंडिया टुडे और सरदेसाई को आदेश दिया है कि वह पूरी वीडियो कोर्ट के सामने रखें। कोर्ट ने कहा है कि यह वीडियो बिना एडिट की हुई होनी चाहिए। कोर्ट ने शाजिया इल्मी के वकील को आदेश दिया है कि मुकदमे की कॉपी सरदेसाई और इंडिया टुडे के वकील को दे दी जाए।

शाजिया इल्मी ने कोर्ट से माँग की है कि सरदेसाई का ट्वीट अंतरिम तौर पर हटा दिया जाए क्योंकि इस वीडियो के आधार पर लोग शाजिया इल्मी का अपमान कर रहे हैं। कोर्ट ने शाजिया इल्मी की इस मांग को नहीं माना। दिल्ली हाई कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 13 अगस्त, 2024 को करेगा।

गौरतलब है कि 26 जुलाई, 2024 को इंडिया टुडे चैनल पर एक बहस के बाद सरदेसाई ने एक वीडियो शेयर करते हुए दिखाया कि उनके वीडियो पत्रकार के साथ इल्मी ने बदसलूकी की है जबकि दूसरी ओर इल्मी ने कहा कि बदसलूकी उन्होंने नहीं की बल्कि शो के दौरान राजदीप सरदेसाई ने और शो के बाद उनके वीडियो पत्रकार ने उनसे की है। इल्मी के अनुसार उनके माइक उतारने के बाद भी उन्हें उनके घर में रिकॉर्ड किया गया।

26 जुलाई, 2024 के इंडिया टुडे के प्राइम टाइम डिबेट में शाजिया इल्मी पैनेलिस्ट थीं। इसी दौरान राजदीप सरदेसाई ने उनका माइक बंद करने को कह दिया। शाजिया इस बर्ताव को देख कुर्सी से उठने लगीं। पहले उन्होंने माइक उतारा और फिर शर्ट से वायर निकालने लगीं। इस बीच कैमरा चलता रहा। शाजिया ने कुछ नहीं कहा। हद्द पार तब हुई जब इल्मी फ्रेम से निकल गईं फिर भी चलता हुआ कैमरा वीडियो पत्रकार ने दूसरी ओर मोड़ दिया। इसी हरकत को देख बाद शाजिया इल्मी भड़क गईं। उन्होंने पत्रकार को उनके घर से जाने को कहा।

जिस वीडियो में शाजिया को रिकॉर्ड करते शूट किया गया उसी वीडियो को आधार बनाते हुए राजदीप सरदेसाई ने शाजिया इल्मी पर निशाना साधा। उन्होंने इल्मी के उस ट्वीट पर जवाब देते हुए ये वीडियो लगाई जिसमें उन्होंने कहा था कि दोबारा शो में फेडर नीचे करने की कोशिश मत करना। सरदेसाई ने इसी ट्वीट के बदले ऐसे दिखाया जैसे उन लोगों की गलती नहीं थी और शाजिया बदसलूकी पर उतर आईं थीं।

सरदेसाई ने ट्वीट में लिखा- “शाजिया इल्मी मैम, मैं अपने हर गेस्ट का आदर करता हूँ। फेडर (आवाज कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला डिवाइस) सिर्फ इसलिए कम किया गया था ताकि बातें न टकराएँ और शो में हल्ला न हो। अगर आपको मुझसे कोई मुझसे या सेना के किसी जनरल से शिकायत थी तो निस्संदेह ये आपका विशेषाधिकार है। मैं उसका भी सम्मान करता हूँ, लेकिन आपके लिए माइक को झटता देना और हमारे वीडियो पत्रकार को गाली देना और उसे अपने घर से बाहर जाने का रास्ता दिखाना ठीक नहीं है। वह सिर्फ अपना काम कर रहे थे।”

इस ट्वीट के बाद शाजिया इल्मी ने भी एक ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “जब आप मुझे अपमानित करते हैं और कहते हैं कि शाजिया का माइक काट दो, तो मैं आपके शो में क्यों रहूँगी? सिर्फ़ इसलिए क्योंकि मैंने आपसे पूछा था कि क्या आपको लगता है कि सभी रक्षा प्रमुख झूठ बोल रहे हैं। आपके बारे में नहीं पता, लेकिन मेरा आत्मसम्मान है।” इसके बाद शाजिया इल्मी ने कैमरामैन के बर्ताव का भी विवरण दिया और बताया कि उन्होंने कैमरामैन को क्यों निकाला।

इसके बाद अपने एक अन्य ट्वीट में शाजिया इल्मी ने घटना का पूरा विवरण दिया। उन्होंने वीडियो में उस जगह को दिखाया जहाँ बैठकर वो शो में शामिल हुईं। उन्होंने दिखाया कि उनके पाँव में दो हफ्ते से प्लास्टर है और जब वो इंडिया टुडे के कार्यक्रम से जुड़ीं तो भी प्लास्टर था। उन्होंने बताया कि शो में राजदीप ने बड़ी बदतजीजी से उनका माइक काटने को कहा था। इसी पर उन्होंने कहा कि वो उठ रही हैं। अब डिस्कशन में शामिल नहीं होंगी।

इसके बाद शाजिया कहती हैं कि कैमरामैन लगातार उन्हें दिखाता रहा। उसने दिखाया कि कैसे वो माइक निकाल रही हैं, फिर वहाँ से उठकर जा रही हैं। शाजिया कहती हैं कि उन्हें शर्म आ रही थी क्योंकि पहले उन्हें लगा कि सिर्फ उनकी अपर बॉडी पर फोकस है, लेकिन बाद में पता चला कि पूरा दिखा रहा है। उन्होंने उसे कई बार कहा कि माइक बंद कर दो, लेकिन उसने नहीं किया। उलटा जहाँ वह जा रही थी वो वहाँ जाने लगा।

इसके बाद शाजिया कहती हैं कि कैमरामैन लगातार उन्हें दिखाता रहा। उसने दिखाया कि कैसे वो माइक निकाल रही हैं, फिर वहाँ से उठकर जा रही हैं। शाजिया कहती हैं कि उन्हें शर्म आ रही थी क्योंकि पहले उन्हें लगा कि सिर्फ उनकी अपर बॉडी पर फोकस है, लेकिन बाद में पता चला कि पूरा दिखा रहा है। उन्होंने उसे कई बार कहा कि माइक बंद कर दो, लेकिन उसने नहीं किया। उलटा जहाँ वह जा रही थी वो वहाँ जाने लगा।

शाजिया इल्मी का आरोप है कि हो खत्म होने के बाद भी उन्हें दिखाया गया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनका शरीर दिखाया गया और कैमरामैन ने उनकी बात नहीं मानी। शाजिया ने शो के बाद कहा था कि वह इस मामले को लेकर कोर्ट जाएँगी। अब उन्होंने राजदीप सरदेसाई के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया है।

₹10 लाख का बॉन्ड, देश छोड़ने पर रोक, पासपोर्ट करना होगा सरेंडर… मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, दिल्ली शराब घोटाले में AAP नेता की हुई थी गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी नेता और विधायक मनीष सिसोदिया को दिल्ली शराब घोटाला मामले में जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केन्द्रीय जाँच एजेंसी (CBI), दोनों के मामले जमानत दे दी है। मनीष सिसोदिया को यह जमानत मुकदमे में देरी के आधार पर दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट की बीआर गवई और केवी विश्वनाथन सदस्यता वाली बेंच ने शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) को मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर निर्णय सुनाया। इससे पहले यह निर्णय अगस्त को सुरक्षित रख लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के जमानत ना देने के फैसले को रद्द कर दिया और मनीष सिसोदिया को जमानत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को ED और CBI दोनों मामलों में जमानत दी है। उन्हें जमानत के लिए ₹10 लाख का बॉन्ड भरना होगा। इसके साथ ही उनके देश छोड़ने पर भी कोर्ट ने रोक लगा दी है। उन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा करना होगा। मनीष सिसोदिया को हर सप्ताह दो बार पुलिस के सामने हाजिरी लगानी पड़ेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया के मामले में मुकदमा तेज नहीं चला और यह उनके अधिकारों का हनन है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर उन्हें जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि इस मुकदमे के जल्द पूरे होने के आसार नहीं है, ऐसे में मनीष सिसोदिया को जमानत मिलनी चाहिए।

मुकदमे के देरी को लेकर ED ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह मनीष सिसोदिया की वजह से हुई है। मनीष सिसोदिया ने इस मामले में कई याचिकाएँ लगाई, जिसके कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया की कोई भी याचिका निचली अदालत द्वारा गलत नहीं ठहराई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में ED ने सुनवाई के दौरान माँग की कि मनीष सिसोदिया को दिल्ली सचिवालय या भी दिल्ली के मुख्यमंत्री दफ्तर में जाने से रोका जाए। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने ED की यह दलील नहीं मानी। कोर्ट ने कहा कि मामले में सबूत जमा हो चुके हैं, इसलिए उनसे छेड़छाड़ होने की संभावना नहीं है। ED ने कहा है कि हम कोर्ट के पास वापस सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में आ सकते हैं। मनीष सिसोदिया की रिहाई शुक्रवार शाम तक हो सकती है।

गौरतलब है कि दिल्ली के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को ED ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया था। वह तब से जेल में बंद हैं। इस बीच उन्हें मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत मिल चुकी है। दिल्ली शराब घोटाला में एजेंसियों का आरोप है कि दिल्ली सरकार ने शराब नीति बदल कर निजी डीलरों को फायदा पहुँचाया। इसके बदले में उनसे पैसे लिए गए और इसका इस्तेमाल गोवा चुनाव में किया।

दिल्ली के दरियागंज से पकड़ा गया ISIS आतंकी रिजवान अली, 15 अगस्त से पहले बड़े हमले की फिराक में था: VIP इलाकों की रेकी कर ली थी पूरी

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 15 अगस्त 2024 से पहले एक आईएस आतंकी को गिरफ्तार किया है। आतंकी का नाम रिजवान अली है। रिजवान दिल्ली के दरियागंज इलाके का रहने वाला है। पुलिस का कहना है कि रिजवान इस स्वतंत्रता दिवस से पहले किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की फिराक में था, लेकिन सही समय पर उसे पकड़ लिया गया।

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस लंबे समय से रिजावन की तलाश कर रही थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इसके और इसके साथियों के ऊपर तीन लाख रुपए का इनाम रखा हुआ था। स्पेशल सेल ने पुरानी दिल्ली दरियागंज के पास से इसे गिरफ्तार किया है और कुछ हथियार भी बरामद किया है, जिसमें पिस्टल शामिल है।

बताया जा रहा है कि रिजवान ने दिल्ली के कुछ वीआईपी इलाकों की रेकी की हुई थी। उसका मकसद किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने का था। अब गिरफ्तारी के बाद उसके ऊपर यूएपीए के तहत केस दर्ज करके रिजवान के नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास हो रहा है।

गौरतलब है कि रिजवान अली, पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल में कुख्यात आतंकियों में शामिल था। दिल्ली पुलिस को उसके दरियागंज में होने की जानकारी मिली थी। अब पुलिस उसे पकड़कर उससे से पूछताछ में लगी है। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से हथियार बरामद हुए हैं।

रिजवान के पकड़ में आने से पहले साल 2023 के सितंबर-अक्टूबर में पुलिस ने उसी के साथी आतंकी शहनवाज को गिरफ्तार किया था। वांटेड लिस्ट में शामिल अब्दुल डायपरवाला अब भी फरार है।

भारत और हिंदू घृणा में सना मौलाना भी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में, तालिबान जैसा शासन चाहता है हिफाजत-ए-इस्लाम: क्या कट्टरपंथ की आग बुझा पाएँगे मोहम्मद युनुस?

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद अब नई अंतरिम सरकार का गठन हो गया है। इसके मुखिया बांग्लादेश की ग्रामीण बैंक के संस्थापक मोहम्मद युनुस को बनाया गया है। इस सरकार में 16 अन्य सदस्यों को शामिल किया गया है। बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार में शामिल किए जाने वाले 16 सदस्यों में पूर्व की जमात-ए-इस्लामी सरकार के करीबियों से लेकर कट्टरपंथी मौलानाओं को जगह दी गई है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के गठन के पहले और वर्तमान में लगातार हिन्दुओं के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथी हिंसा कर रहे हैं। बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों में मंदिरों को तोड़ा और जलाया गया है। हिन्दुओं की हत्याएँ भी हुई हैं। उनके घर तोड़े और लूटे गए हैं। इसके अलावा महिलाओं से बलात्कार भी हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नए मुखिया मोहम्मद युनुस को बधाई दी है। उन्होंने इसी के साथ बांग्लादेश में हिन्दुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा की आशा जताई है। पीएम मोदी ने बांग्लादेश के लोगों की भलाई की लिए मिलकर काम करने का भरोसा दिया है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में प्रोफ़ेसर युनुस के अलावा डॉ सलेहुद्दीन अहमद, AF हसन आरिफ, ब्रिगेडियर सखावत हुसैन, तौहीद हुसैन, फरीदा अख्तर, शर्मीन मुर्शीद, सैयदा रिजवाना हसन, नूरजहाँ बेगम, डॉ आसिफ नजरुल, आदिलुर रहमान खान, बिधान रंजन रॉय, फारुक आजम, सुप्रदीप चकमा, AFM खालिद हुसैन, नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद को शामिल किया गया है। इस सरकार के सदस्यों में सबसे अधिक चिंताएँ AFM खालिद हुसैन के शामिल किए जाने पर बढ़ी हैं।

कौन है AFM खालिद हुसैन?

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में अबुल फैयाज मोहम्मद खालिद हुसैन को भी सलाहकार बनाया गया है। AFM खालिद हुसैन एक इस्लामी कट्टरपंथी देवबंदी मौलाना है। AFM खालिद हुसैन हिफाजत-ए-इस्लाम बंगलादेश नाम के एक संगठन से जुड़ा हुआ है। यह संगठन हिन्दू और भारत विरोधी रवैया अपनाता आया है। हिफाजत-ए-इस्लाम संगठन बांग्लादेश को तालिबान शासित अफगानिस्तान की तरह बनाना चाहता है। यह संगठन हिन्दू विरोधी हिंसा में लिप्त रहा है।

AFM खालिद हुसैन हिफाजत-ए-इस्लाम का उपाध्यक्ष रहा है। वह 2020-2021 के बीच इस संगठन का उप-मुखिया था। AFM खालिद हुसैन का यह संगठन अपने हिन्दू विरोधी रवैये के लिए जाना जाता रहा है। इस संगठन ने लगातार हिन्दू विरोधी हिंसा को अंजाम दिया है। इसके सदस्य हिन्दू मंदिरों पर हमला करते रहे हैं। यह संगठन भारत विरोधी भी है। यह संगठन लगातार बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लाम लाने की वकालत करता रहा है।

हिन्दू विरोधी हिंसा में लिप्त रहा है हिफाजत-ए-इस्लाम

जिस संगठन के पूर्व उपाध्यक्ष AFM खालिद हुसैन को युनुस सरकार में जगह दी गई है, वह 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बांग्लादेश दौरे पर हिन्दू विरोधी हिंसा कर रहा था। इस दौरान इसके सदस्यों ने बांग्लादेश में हिन्दू मंदिरों पर हमले किए थे। इसके अलावा इन्होने सड़कों पर काफी उत्पात मचाया था। हिफाजत-ए-इस्लाम के सदस्यों ने बांग्लादेश की सड़कों पर डायरेक्ट एक्शन डे के लिए नारे लगाए थे। उनका कहना था कि बांग्लादेश में 1946 जैसा डायरेक्ट एक्शन डे होना चाहिए जिसमें हिन्दुओं का नरसंहार हुआ था।

इस हिंसा के बाद हिफाजत-ए-इस्लाम के नेता ममनूल हक़ को शेख हसीना सरकार ने गिरफ्तार किया था। हक़ के ऊपर आरोप था कि उसने पीएम मोदी के दौरे के दौरान हिंसा भड़काई और तोड़फोड़ करवा कर बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास किया। हक़ ने पूछताछ में खुलासा किया था कि उसके संगठन के लोग शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाकर एक तालिबानी सरकार बांग्लादेश में लाना चाहते थे। हक़ और उसके संगठन के लोग ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते थे, जहाँ मुस्लिमों को हथियार उठाने के लिए भड़काया जाता था।

हिफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा एक और मौलाना रफीकुल इस्लाम मदनी भी हिन्दू और भारत विरोधी जहर उगलता रहा है। उसने भी 2021 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान लोगों को भड़काया था। उसका आरोप था कि शेख हसीना की सरकार को हिंदुत्व वाली विचारधारा भारत से चला रही है। उसने एक वीडियो मैसेज जारी करके बांग्लादेशी मुस्लिमों को दिल्ली पर कब्जा करने का सन्देश दिया था। उसने कहा था कि बांग्लादेशी पीएम मोदी को रोकने के लिए शहीद भी हो जाएँगे।

युनुस सरकार को लेकर बढ़ी चिंताएँ

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के विरुद्ध चालू हुई हिंसा उनके इस्तीफे के बाद हिन्दू विरोधी हिंसा में बदल गई है। लगातार हिन्दुओ पर अत्याचार हो रहा है। इस्लामी कट्टरपंथी उनको प्रताड़ित कर रहे हैं। स्थितियाँ इतनी बिगड़ी हैं कि पीएम मोदी को अलग से हिन्दुओ की सुरक्षा की अपील नई बांग्लादेशी सरकार से करनी पड़ी है।

इस बीच अंतरिम सरकार में इस्लामी कट्टरपंथी मौलाना को शामिल किया जाना इस सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। यह मौलाना उसी सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें मुस्लिमों के अलावा बाकी धर्मों के लोगों को काफिर की संज्ञा दी गई है।

₹1 लेकर जिन्होंने पाकिस्तान को दुनिया के सामने किया चित, अब वे CAS में लड़ेंगे ओलंपिक मेडल पाने की लड़ाई: क्या विनेश फोगाट को मिलेगा सिल्वर?

पेरिस ओलंपिक में भारतीय पहलवान विनेश फोगाट के साथ 50 किग्रा वर्ग कुश्ती के फाइनल में पहुँचने के बाद जो कुछ भी हुआ उस मामले को अब भारत के सबसे टॉप वकीलों में से एक वकील हरीश साल्वे देखेंगे। जानकारी आई है कि हरीश CAS (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स) में विनेश फोगाट और भारतीय ओलंपिक संघ का प्रतिनिधित्व करेंगे।

भारतीय समय के अनुसार यह सुनवाई दोपहर 1:30 बजे से होनी है। बताया जा रहा है कि केस का फैसला भी आज ही आ सकता है। किसी खास वजह से अगर मामले में और सुनवाई की ज़रूरत होगी तो आगे की तारीख दी जा सकती है।

हरीश साल्वे ने न्यूज एजेंसी एएनआई से इस बात को कंफर्म किया कि उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ ने विनेश फोगाट के केस के लिए उन्हें नियुक्त किया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले विनेश फोगाट मामले की सुनवाई 8 अगस्त को ही होनी थी मगर भारतीय टीम की ओर से केस के लिए वकील नियुक्त करने के लिए वक्त माँगा गया था। अब आज यह निर्णय लिया गया कि ये केस हरीश साल्वे लड़ेंगे।

बता दें कि विनेश फोगाट के ओवरवेट के कारण उन्हें ओलंपिक फाइनल से डिस्क्वालिफाई करने की बात सामने आई थी। बताया गया था कि फाइनल के वक्त उनका वजन 100 ग्राम से ज्यादा मिला जिसके बाद उन्होंने दूसरी बार वजन के लिए अपील की लेकिन उसे खारिज कर दिया गया, लेकिन अब कहा जा रहा है कि इस मामले में उन्हें सिल्वर मेडल मिल सकता है।

फिलहाल पेरिस में पेरिस के चार वकील वर्तमान में विनेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, मगर हरीश साल्वे की भागीदारी के साथ, भारतीय ओलंपिक संघ को अनुकूल नतीजे मिलने की उम्मीद है। साल्वे भारत के वही वकील हैं जिन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट में भारत की ओर से कुलभूषण जाधव का केस लड़ा था। वो केस साल्वे ने महज एक रुपए में लड़ा था। अपनी दलीलों से उन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट में पाकिस्तान को मात देने में सफलता हासिल की थी।

पेरिस ओलंपिक में बेटे ने जीती चाँदी, माँ ने जीता दिल: कहा- जो सोना ले गया वो भी हमारा लड़का, पिता बोले- 2028 के लिए फिर से तैयारी करके जाना

पेरिस ओलंपिक 2024 में भाला फेंक प्रतियोगिता में नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर देश का नाम रौशन किया है। उन्होंने फाइनल मैच में 89.45 मीटर का थ्रो फेंककर अपने खाते में सिल्वर मेडल हासिल किया। वहीं गोल्ड इस बार पाकिस्तान के अरशद नदीम के हिस्से आया जिन्होंने 92.97 मीटर की थ्रो की थी।

नीरज चोपड़ा ने चाँदी जीतने पर कहा, “जब भी हम देश के लिए पदक जीतते हैं तो हम सभी खुश होते हैं…अब खेल को बेहतर बनाने का समय आ गया है…हम बैठकर चर्चा करेंगे और प्रदर्शन में सुधार करेंगे…भारत ने (पेरिस ओलंपिक में) अच्छा खेला…प्रतियोगिता अच्छी थी (आज)…लेकिन हर एथलीट का अपना दिन होता है, आज अरशद का दिन था…मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया लेकिन कुछ चीजों पर ध्यान देने और काम करने की जरूरत है…हमारा राष्ट्रगान आज भले ही नहीं बजाया गया हो, लेकिन भविष्य में यह कहीं और जरूर बजाया जाएगा…।”

वहीं इस जीत के बाद नीरज चोपड़ा के माता-पिता ने भी इस जीत पर प्रतिक्रिया दी जिसे सुनकर देश का हर शख्स गौरवान्वित है। नीरज की माँ से जब पेरिस ओलंपिक में उनके बेटे के प्रदर्शन पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, ”हम बहुत खुश हैं। हमें तो सिल्वर भी गोल्ड जैसा लग रहा है।”

पत्रकार ने जब अरशद नदीम के बारे में बात की तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा, ”कोई बात नहीं जी, जो गोल्ड ले गया है वो भी हमारा लड़का है। मेहनत करके हासिल किया है। हर खिलाड़ी का दिन होता है। वह चोटिल था, इसलिए हम उसके प्रदर्शन से खुश हैं। जब वो आएगा तो मैं उसका पसंदीदा खाना बनाऊँगी।”

वहीं इस मामले पर नीरज चोपड़ा के पिता ने कहा, “नीरज ने मेहनत की है उसने सिल्वर मेडल जीता है यह पूरे देश के लिए बड़ी खुशी के पल हैं। उसको ग्रोइंग इंजरी थी मुझे लगता है कि उसी की वजह से फाउल होते चले गए। ओलंपिक के बाद अपना इलाज करवा कर 2028 ओलंपिक के लिए तैयार हो जाएगा। हमें ऐसी उम्मीद है कि वह ऐसे ही शानदार परफॉर्म करता रहेगा। विनेश फोगाट ने सिल्वर के लिए अप्लाई डाली हुई है मुझे लगता है कि वह अपील कामयाब हो जाएगी और उन्हें सिल्वर मेडल मिलना चाहिए नीरज को यही कहना चाहूँगा कि अपना 100% देना और 2028 के लिए फिर से तैयारी करके जाना।”

अरशद नदीम पर नीरज के पिता ने कहा “हर खिलाड़ी का दिन होता है उसका लक होता है, उसने जो प्रैक्टिस की अपने देश के लिए उसने अपने देश के लिए जीता है वह उसकी मेहनत का है। अगर किसी खिलाड़ी को इंजरी होती है तो तभी फाउल होता है मुझे लगता है इंजरी की वजह से कोई फर्क है। दो-तीन दिन नीरज से कोई बात नहीं होगी उसके बाद देखते हैं।”

बता दें कि नीरज चोपड़ा ने इससे पहले टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। उस समय भी अरशद नदीम और नीरज चोपड़ा खूब चर्चा में आए थे। हालाँकि उस टाइम नीरज ने मीडिया में सामने आकर सारे सवालों के जवाब दिए थे। वहीं अरशद नदीम ने भी अपनी हार पर पाकिस्तान में मिल रही कम सुविधाओं की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “दी गई सुविधाओं के साथ, हम केवल दिल जीत सकते हैं, पदक नहीं।” उन्होंने ये भी बताया कि कैसे पाकिस्तानी सरकार सिर्फ क्रिकेट की दीवानी है इसलिए वह अन्य खेलों पर ध्यान भी नहीं देते।

भारत में रहने वाले सभी लोग यहाँ के मूलनिवासी: शूद्रों यानी ‘दास-दस्यु’ और ‘सबसे निचले पायदान’ वाले नैरेटिव पर डॉ अम्बेडकर का फैक्ट-चेक

चूँकि विश्व मूलनिवासी दिवस- जो कि प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है- भारत में शुरुआत से ही एक विवादित, परंतु अज्ञात विषय रहा है। इसलिए यह हमें इस बात की जाँच करने के लिए प्रेरित करता है कि ‘मूलनिवासी’ कौन थे और उनकी उत्पत्ति भारतीय समाज में कैसे हुई? इस संदर्भ में, डॉ बीआर अम्बेडकर से बेहतर कोई नाम नहीं हो सकता। इन्होंने अपने लोकप्रिय पुस्तक, ‘शूद्र कौन थे? – वे इंडो-आर्यन समाज में चौथे वर्ण कैसे बने’ में अत्यंत वैज्ञानिक और विस्तृत तरीके से इसका विश्लेषण किया है।

पहली बार 1946 में प्रकाशित यह पुस्तक, मुख्य रूप से हिंदू समाज के चौथे वर्ण के रूप में शूद्रों की उत्पत्ति पर आलोचनात्मक प्रकाश डालती है। पुस्तक इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित करती है कि कैसे ‘जाति की समस्या’ सामाजिक संगठन और संरचना निर्धारण करने में एक प्रभुत्वशाली कारक बन गई।

महार समुदाय में जन्म और बचपन से ही जातिवाद का कड़वा अनुभव होने के कारण, डॉ अंबेडकर ने ऐतिहासिक साक्ष्यों के आलोक में ‘जाति-समस्या’ की जाँच की और प्रमाणित किया कि कैसे जाति सामाजिक कार्रवाई का मूलभूत मापदंड बन गई। अपने गहन अध्ययन के आधार पर वह दावा करते हैं कि मूल रूप से शूद्र इंडो-आर्यन समाज में क्षत्रिय थे, जो ब्राह्मणवादी कानूनों की गंभीरता के कारण समय के साथ इतने अपमानित हो गए कि वो लोग सार्वजनिक जीवन में वास्तव में बहुत निम्न दर्जे पर पहुँच गए।

आर्यन आक्रमण सिद्धांत और डॉ अम्बेडकर

अपने सिद्धांत को सिद्ध करने के लिए, डॉ अम्बेडकर ने विभिन्न ब्राह्मणवादी विद्वानों और लेखकों का अध्ययन  किया, लेकिन उन्हें हिंदू समाज के चौथे वर्ण के रूप में शूद्रों की उत्पत्ति के लिए हिंदू धर्मग्रंथों और साहित्य में कोई उल्लेख नहीं मिला। फलस्वरूप, उन्हें पश्चिमी-यूरोपीय दार्शनिकों द्वारा स्थापित आर्य-आक्रमण सिद्धांत का उल्लेख करना पड़ा।

आर्य आक्रमण सिद्धांत के अनुसार, आर्य वे हैं जिन्होंने वेदों की रचना की, और बाहर से आकर भारत पर आक्रमण किया और स्थानीय लोगों पर अपना वर्चस्व स्थापित किया। स्थानीय लोगों को यूरोपीय लोग मूल निवासी, दास-दस्यु मानते थे। श्वेत रंग की सर्वोच्चता में विश्वास करते हुए उन्होंने दावा किया कि आर्य श्वेत नस्ल के थे, जबकि दास-दस्यु काले रंग के थे।

आर्यों ने श्वेत रंग को प्राथमिकता दी और चतुर्वर्ण व्यवस्था बनाई। इसमें शूद्रों यानी ‘दास-दस्यु’ को अलग कर व्यवस्था में सबसे निचले पायदान पर रखा गया। आर्यन आक्रमण सिद्धांत, पश्चिमी लेखकों द्वारा भारत पर पश्चिम की वरीयता/सर्वोच्चता स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया। उनका कुतर्क था कि भारत के लोग अज्ञानी-अंधविश्वासी रहे हैं और पश्चिम के लोग ज्ञानी हैं, जिन्होंने वेदों की रचना की।

डॉ बीआर अम्बेडकर ने ‘आर्यन आक्रमण सिद्धांत’ का पूरी तरह से खंडन किया और अपने विश्लेषण से इस तथ्य को स्थापित किया कि भारत में रहने वाले सभी लोग आर्य हैं और वे (आर्यन) बाहर से आई कोई जाति नहीं हैं। इस संबंध में, उन्होंने सबसे पहले वेदों, मुख्य रूप से ऋग्वेद का उल्लेख किया। जिससे पता चलता है कि ऋग्वेद में कई स्थानों पर आर्य शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसके अलग-अलग अर्थ हैं जैसे, सम्माननीय व्यक्ति, भारत का नाम, नागरिक या शत्रु आदि। लेकिन कहीं भी इसका प्रयोग जाति या नस्ल के तौर पर नहीं किया गया है।

ऋग्वेद का गहराई से अध्ययन करने के बाद, अम्बेडकर ने देखा कि आर्य आधिपत्य सिद्धांत और गैर-आर्यन प्रजातियों मतलब दास-दस्यु पर आधिपत्य स्थापित करने का कोई सबूत नहीं है, न ही दास-दस्यु कोई अलग जाति-प्रजाति है। दूसरा, उनका दावा है कि यदि त्वचा का रंग इंडो-आर्यन समाज में ‘चतुर्वर्ण-व्यवस्था’ या नस्ल वर्गीकरण का आधार था, तो हिंदू समाज के चार वर्गों (वर्णों) के लिए चार अलग-अलग रंग का उल्लेख होना चाहिए था। यहाँ आर्य-आक्रमण सिद्धांत अपनी वैधता और प्रामाणिकता स्थापित करने में विफल हो जाता है। इसके अलावा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित कर सके कि आर्य, दास-दस्यु इंडो-आर्यन समाज में अलग-अलग नस्लें थीं।

शूद्र क्षत्रिय, ब्राह्मण और उपनयन संस्कार

किंतु यहाँ प्रश्न उठता है कि शूद्र कौन थे? इसका उत्तर देते हुए, डॉ अम्बेडकर कहते हैं कि शूद्र आर्य थे, जो हिंदू समाज के क्षत्रिय वर्ग से संबंधित थे। शूद्र क्षत्रियों का एक इतना महत्वपूर्ण हिस्सा था कि प्राचीन आर्य समुदायों के कुछ सबसे प्रतिष्ठित और शक्तिशाली राजा शूद्र थे। किंतु कालांतर में, ब्राह्मणों द्वारा क्षत्रियों के शूद्र कुल के ‘उपनयन संस्कार’ से इनकार ने उन्हें इंडो-आर्यन समाज में दूसरे से चौथे पायदान पर धकेल दिया।

शूद्र कुल के क्षत्रियों के ‘उपनयन संस्कार’ से इनकार का उद्भव ब्राह्मणों की प्रतिशोध की भावना से हुआ था, जो कुछ शूद्र राजाओं के अत्याचारों, उत्पीड़न और अपमान से कराह रहे थे। ब्राह्मणों द्वारा क्षत्रियों को उपनयन देने से इनकार का कानूनी या धार्मिक आधार नहीं था, बल्कि पूरी तरह से दोनों वर्णों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण था।

डॉ अम्बेडकर द्वारा किया गया यह विश्लेषण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि यद्यपि हिंदू समाज सदियों से जाति या वर्ण के आधार पर विभाजित है, लेकिन तथ्य यह है कि भारत में रहने वाले सभी लोग मूलनिवासी और आर्य हैं।

डेमोग्राफी ही नहीं बदल रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए, झारखंड में अफीम की खेती को भी दे रहे खाद-पानी: बोले बाबूलाल मरांडी- नशे से संथालों को बर्बाद करने की साजिश

झारखंड के संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ का असर जनसांख्यिकी के अलावा कानून-व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। बांग्लादेशी घुसपैठिए इस इलाके में अफीम की खेती करवा रहे हैं। इसके लिए स्थानीय जनजातीय समुदाय को ढाल बनाया जा रहा है। इस अफीम की तस्करी भी हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेशी तस्कर झारखंड के संथाल परगना के उन इलाकों में आते हैं जहाँ गरीब आबादी बसती है। इस इलाके में घुसने और आम ग्रामीणों से सम्पर्क साधने के लिए यह बांग्लादेशी यहाँ सामान बेचने वाला बन कर घुसते हैं। इसके बाद यह ग्रामीणों को अफीम की खेती के बारे में बताते हैं।

बताया गया कि यह बांग्लादेशी तस्कर ग्रामीणों को समझाते हैं कि अफीम की खेती कम इलाके में बहुत अच्छा फायदा देती है। ग्रामीण भी जल्दी पैसा कमाने की चाहत में अपनी जमीन अफीम खेती के लिए देने को तैयार हो जाते हैं। इसके बाद बांग्लादेशी घुसपैठिए इन्हें अफीम के बीज, खाद और कीटनाशक तक लाकर देते हैं।

फसल होने के बाद इस अफीम को भारत से तस्करी कर बांग्लादेश ले जाया जाता है। अफीम की कीमत विदेशी बाजारों में लाखों रूपए में है। अफीम की खेती से निकलने वाला पोस्ता दाना भी उपयोग में आता है। ग्रामीण भी इससे फायदा उठाते हैं।

यह धंधा लम्बे समय से चल रहा है। पुलिस जब सख्ती करती है तो इस इलाके में बांग्लादेशियों की गतिविधियाँ कुछ दिनों के लिए रुक जाती हैं। जैसे ही पुलिस अपनी कार्रवाई कम करती है, यह बांग्लादेशी दोबारा से अपना धंधा चालू कर देते हैं। इन जिलों में अफीम की खेती का दायरा इतना बढ़ चुका है कि 2009 में सैटेलाईट से इनकी ट्रैकिंग करवाई गई थी।

यह तस्कर पश्चिम बंगाल और झारखंड में सीमा पार करते रहते हैं और इस खेती को बढ़ाते हैं। हाल ही में झारखंड के चाईबासा लगभग ₹6 करोड़ की अफीम जब्त की गई थी। झारखंड के ही चतरा में 2023 में केवल जून माह तक ही 125 गाँवों में अफीम की खेती की बात सामने आई थी।

बताया जा रहा है कि अवैध अफीम का यह कारोबार ₹100 करोड़ का है। झारखंड में सैटेलाईट से नजर रखे जाने के बाद इस इलाके में कुछ सफलता मिली है। हालाँकि, सीमाई इलाकों में अब भी कहीं कहीं अफीम उगा कर बेचीं जा रही है।

गौरतलब है कि संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा है। इस मुद्दे को लगातार विपक्ष उठा भी रहा है। हाल ही में झारखंड हाई कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि सरकार जल्द से जल्द सभी बांग्लादेशियों की पहचान करके उनको बाहर निकाले। कोर्ट के इस फैसले के बाद साहिबगंज जिला में एक कमिटी भी प्रशासन ने बनाई थी।

बांग्लादेशी घुसपैठ का असर चुनावों पर भी होने का असर है। भाजपा झारखंड ने हाल ही में एक रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि राज्य के 1467 बूथ पर अप्रत्याशित ढंग से वोटों में बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी कुछ बूथ पर 100% से अधिक है।

झारखंड में अफीम की खेती को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि इससे संथाल परगना के युवाओं को नशे में फंसा बर्बाद करने की साजिश हो रही है। उन्होंने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।