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जब एक पादरी के इशारे पर 900 लोगों ने मौत को लगाया गले… कहानी जोंसटाउन वाले जिम जोंस की: सांसद तक की गोली मार हत्या, कहता था – दुनिया की हर लड़की लेस्बियन

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ (WTC) पर 11 सितंबर, 2001 को घातक हवाई हमला किया गया, जिसमें वहाँ मौजूद 2977 लोगों की मौत हो गई। अलकायदा के 17 हमलावर आतंकी भी इस हमले में मारे गए थे। ये अमेरिका में अब तक की सबसे बड़ी अप्राकृतिक त्रासदी है मौतों के हिसाब से। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि इससे पहले 23 वर्षों तक अमेरिका में सबसे अधिक हताहतों वाली जो अप्राकृतिक घटना थी, उसे किसी आतंकी ने अंजाम नहीं दिया था, बल्कि एक पादरी के कारण हुआ था, एक ईसाई कल्ट के कारण।

ये सारा मामला साइन फ्रांसिस्को स्थित एक समूह ‘Peoples Temple’ से जुड़ा हुआ है। तब 900 लोगों ने अपने मजहबी नेता के कहने पर ज़हर पी लिया था और मौत को गले लगा लिया था। उस ईसाई पादरी का नाम था जिम जोन्स। दक्षिण अमेरिका के एक जंगल में स्थित एक जगह पर ये घटना हुई थी। इस घटना की विचलित करने वाली तस्वीरें भी ली गई थीं, जिसमें बच्चों तक को घास में मृत पड़े हुए देखा गया। इस घटना पर कई किताब लिखी जा चुकी हैं, दस्तावेज बने हैं, लेख लिखे गए हैं।

जोंसटाउन की ये कहानी जोंस से शुरू होती है, जो कि एक श्वेत मंत्री था। उसने अमेरिकी-अफ़्रीकी बहुलता वाली सभा में रूढ़ि-विरुद्ध और प्रगतिशील विचारों को फैलाया। 1970 के दशक में जब ‘पीपल्स टेम्पल’ अपनी लोकप्रियता के शिखर पर था तब इसके अनुयायियों की संख्या हजारों में थी। अमेरिका में किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठने वाले पहले समलैंगिक शख्स हार्वे मिल्क सहित कई नेताओं का इसे संरक्षण प्राप्त था। हार्वे मिल्क ‘सैन फ्रांसिस्को बोर्ड ऑफ सुपरवाइजर्स’ के सदस्य थे।

1977 आते-आते जोंस और उसके ‘पीपल्स टेम्पल’ की संदिग्ध गतिविधियों की मीडिया में जम कर चर्चा शुरू हो गई थी, इसीलिए उन्होंने गुयाना में एक खेती-बाड़ी वाली जगह पर अपनी पूरी व्यवस्था को स्थानांतरित कर दिया, वहीं निर्माण कार्य कराए गए। मीडिया स्क्रूटनी से बचने के लिए ये सब किया गया। घने जंगलों के लिए जाना जाने वाला गुयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तरी अटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है जो वेनेजुएला के पूर्व में है।

जंगल में ही छावनी बना दी गई। इसके बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया से ‘हाउस ऑफ रिप्रजेनटेटिव्स’ के तत्कालीन सदस्य लियो रेयान जंगल की उस छावनी में रह रहे लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को चिंतित होने के बाद वहाँ जाँच के लिए पहुँचे। नवंबर 1978 में उन्हें वहीं ‘पेओप्लेस टेम्पल’ के सुरक्षाकर्मियों ने एयरस्ट्रिप पर गोली मार दी। उनके साथ-साथ 4 अन्य लोगों की भी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के कुछ दिन बाद उक्त पादरी ने अपने अनुयायियों को सायनाइड पीने के लिए कहा।

इसमें सबसे पहले बच्चों को ज़हर पिलाया गया। जोंसटाउन में इसके बाद 900 लाशें बिछ गईं। खुद जिम जोंस भी मारा गया। बताया गया कि उसने या तो खुद अपना जीवन ले लिया होगा या फिर उसकी नर्स एन्नी मूरे ने आत्महत्या से पहले गोली मार कर उसकी हत्या कर दी। दशकों बाद भी उस समय के लोग इस घटना को याद करते हैं। ये ऐसे लोग थे जिन्होंने उस चर्च/संस्था को अपना पूरा जीवन दे दिया था। ‘पीपल्स टेम्पल’ का अपना एक अख़बार भी था।

कुछ लोगों ने कहा कि वो सब सही चीजें कर रहे थे, लेकिन गलत जगह पर और गलत नेता के साथ। जिम जोंस सामाजिक और नस्लीय एकता की बातें करता था, ऐसे में लोगों को आश्चर्य हुआ कि वो अचानक से इतना दुष्ट कैसे हो गया। जोंस के बारे में बताया गया कि वो लोगों को नियंत्रण में रखना चाहता था, धोखाधड़ी करता था, जो लोग उसे धोखा देते थे उनसे आक्रोशित रहता था। वो बचपन में इंडियाना में अकेला रहा था। सामान्यतः वो उस समय अपने दोस्तों को अपना दर्शक बना कर रखता था, एक बार उसने सबको बंद कर दिया था।

वो जानवरों के साथ भी एक्सपेरिमेंट्स करता था और उनका अंतिम संस्कार आयोजित करता था। उसके बचपन के दोस्त बताते हैं कि वो मजहब और मौत को लेकर आसक्त था। उसने एक बार एक बिल्ली को चाकू से मार डाला था। अप्रैल 1945 में जब जर्मनी के नाज़ी तानाशाह अडोल्फ हिटलर ने विरोधी सेना से बचने के लिए आत्महत्या की, तो इस घटना से जिम जोंस कभी प्रभावित हुआ था। 1955 में उसने इंडियानापॉलिस में ‘पीपल्स टेम्पल’ की स्थापना की।

उस समय अमेरिका में नस्लवाद का प्रभाव था, ऐसे में ‘Peoples Temple’ नामक चर्च ने बिना नस्ल देखे सदस्यता देनी शुरू की और यही इसकी लोकप्रियता का कारण बना। 1960 के दशक की शुरुआत में जिम जोंस के संज्ञान में एक लेख आया जिसमें दुनिया की 9 ऐसी सुरक्षित जगहों के बारे में बताया गया था जो परमाणु हमले की स्थिति में भी सुरक्षित रहेंगे। ‘Esquire’ नाम पत्रिका के इस लेख में ऐसी एक जगह कैलिफोर्निया के यूरेका का भी जिक्र था।

जिम जोंस ने अपने अनुयायियों को कैलिफोर्निया में शिफ्ट होने के लिए कहा और 15 जुलाई, 1967 को परमाणु हमला होने की आशंका जताई। क़यामत को लेकर जिम जोंस के जो विचार थे, वो चाहता था कि सब इसे मानें। वो सपने देखता था कि प्रलय की स्थिति में वो सभी नस्ल के लोगों को एक साथ बचाएगा। फिर वो अपने परिवार और 70 अनुयायियों के साथ उत्तरी कैलिफोर्निया के रेडवुड वैली चला गया। इसके बाद उसका साम्राज्य 1970 का मध्य आते-आते सैन फ्रांसिस्को और लॉस एंजेल्स में फैल गया।

‘पीपल्स टेम्पल’ के लोग सिर्फ एक आदमी की बात मानते थे और वो था जिम जोंस। इसमें सभी नस्ल के लोग थे जो चर्च की विविधता और एक्टिविज्म वाली विचारधारा से प्रभावित थे। कुछ लोगों को ड्रग्स और अपराध की दुनिया से वापस मुख्यधारा में लाया गया था। कइयों को परोपकारी कार्य से जोड़ा गया। चर्च से जुड़े सभी लोग एक परिवार की तरह महसूस करते थे। जिम जोंस अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए विवादित अश्वेत इंजीलवादी पादरी फादर डिवाइन से भी मिलता-जुलता था, जो ‘पीस मिशन मूवमेंट’ का संस्थापक था।

1880 के दशक में जन्मे फादर डिवाइन ने 1910 के दशक में अपना मजहबी अभियान शुरू किया था और लोग उसे गॉड के रूप में देखने लगे थे। उसे सार्वजनिक उपद्रव के लिए जेल की सज़ा भी सुनाई गई थी, लेकिन ऐसा करने वाला जज ही अचानक से मर गया। वो पेंसिलवानिया के एक एस्टेट में अपनी बीवी मदर डिवाइन के साथ रहता था। वो भी नस्लीय भेदभाव में यकीन नहीं रखता था। 1965 में उसकी मौत के बाद जिम जोंस ने उसकी संस्था पर कब्ज़ा करने की असफल कोशिश भी की।

हालाँकि, थोड़े-बहुत अनुयायियों को वहाँ से अपने साथ ले गया था। दिसंबर 1973 में जिम जोंस को लॉस एंजेल्स के एक फिल्म थिएटर में अशिष्ट आचरण के लिए गिरफ्तार किया गया था। जोंसटाउन में अपने अंतिम दिनों में वो फार्मास्युटिकल ड्रग्स के प्रति भी आसक्त हो गया था। वो शादीशुदा था, उसने अलग-अलग नस्लों के बच्चों को गोद लिया था। इसके बावजूद उसके कुछ महिला और पुरुष अनुयायियों के साथ उसके यौन संबंध थे।

जिम जोंस दुनिया की सभी महिलाओं को लेस्बियन (पुरुष के साथ-साथ महिलाओं के प्रति भी यौन आकर्षण रखने वाली) बताता था और कहता था कि वो दुनिया का एकमात्र Heterosexual (विपरीत लोग के प्रति आकर्षण) शख्स है। साथ ही वो सभी पुरुषों को समलैंगिक बताता था। वो ‘पीपल्स टेम्पल’ में रोमांटिक रिश्तों को पसंद नहीं करता था क्योंकि उसे लगता था कि ये उद्देश्य में बाधक है। जिम जोंस ने एक पालतू चिम्पांजी भी रखा था जिसका नाम ‘मिस्टर मग्स’ था, वो दावा करता था कि उसे वैज्ञानिक परीक्षण से बचा कर लाया गया है।

हालाँकि, अटकलें ये थीं कि उसने इसे किसी दुकान से खरीदा है। इंडियाना के अपने दिनों में जिम जोंस घर-घर जाकर बन्दर बेचा करता था। ‘मिस्टर मग्स’ एक तरह से ‘पीपल्स टेम्पल’ का मैस्कॉट बन गया था। ‘पीपल्स टेम्पल’ के अख़बार में बताया गया था कि 18 महीने की उम्र में ही उस चिम्पांजी की बच्ची 4 साल के बच्चे वाली थी, वो जिम जोंस की हर बात मानता था। जो 900 लोगों की मौत की त्रासदी जो हुई, उसकी शुरुआत 6 साल के एक बच्चे से हुई थी।

असल में ‘पील्स टेम्पल’ के अनुयायियों में पति-पत्नी टिम और ग्रेस भी शामिल थे। टीम चर्च का अटॉर्नी था, वहीं ग्रेस जिम के करीबी लोगों में शामिल थी। 1972 में उनके बेटे जॉन विक्टर स्टोएन का जन्म हुआ। जिम जोंस ने उसके पिता होने का दावा किया, इसकी सहमति जताते हुए टिम को एक एफिडेविट पर भी हस्ताक्षर करना पड़ा। ग्रेस ने 1976 में चर्च छोड़ दिया और बेटे को जिम जोंस के पास ही रहने दिया, क्योंकि उसे अपनी और टिम की जान का खतरा था।

इसके 1 साल बाद टिम ने भी चर्च को अलविदा कह दिया। दोनों ने फिर अमेरिकी कोर्ट का रुख किया, और अपने बेटे को वापस करने की माँग की। कोर्ट के आदेश के बावजूद जिम जोंस ने जॉन को सौंपने से इनकार कर दिया। असल में जोंस को डर था कि जॉन विक्टर स्टोएन को वापस किए जाने के बाद जोंसटाउन के जो अन्य लोग हैं, वो भी अपने परिजनों को वापस माँगने लगेंगे। साथ ही ‘पीपल्स टेम्पल’ के विरोधी भी इसे मुद्दा बना रहे थे, ऐसे में ये उसकी शक्तियों और पहुँच के कम होने का संकेत होगा।

‘Peoples Temple’ में 900 मृतकों में 304 ऐसे थे जिनकी उम्र 17 वर्ष से कम थी, उनमें एक जॉन विक्टर स्टोएन भी शामिल था। लियो रेयान नामक जिस नेता की हत्या हुई थी, उन्हें लेकर लोगों में सकारात्मक विचार थे। एक बार जेल के भीतर स्थितियों की जाँच के लिए वो फॉल्सम स्टेट परिजन में पहुँच गए थे। बेबी सील्स का शिकार रोकने के लिए वो कनाडा गए। शुरू में ‘पीपल्स टेम्पल’ का दौरा करने की उसकी माँग को नकार दिया गया था, लेकिन अंत में मान लिया गया।

इसके बाद वो कुछ संबंधियों और पत्रकारों के साथ जोंसटाउन का दौरा करने पहुँचे। वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि वो वापस अपने घर लौटना चाहते हैं, जिम जोंस इसे ‘धोखा’ मानता था। वापस जाने के लिए जब ये लोग पोर्ट कैटूमा एयरस्ट्रिप पर प्लेन का इंतजार कर रहे थे, उसी दौरान चर्च के सुरक्षाकर्मी एक ट्रक में भर कर आए और उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। रेयान व 4 अन्य लोगों की मौत हो गई। 1983 में रेयान को कॉन्ग्रेसनल गोल्ड मेडल मिला, वहीं 2009 में कैलिफोर्निया के सैन मातेओ में एक डाकघर का उनके नाम पर नामकरण किया गया।

इसके बाद जिम जोंस ने अपने सभी अनुयायियों को आदेश दिया कि वो आत्महत्या करें, वरना गुयाना की सेना आएगी और उनके बच्चों को ले जाएगी। कुछ लोग किसी तरह वहाँ से किसी न किसी बहाने बाहर निकलने में भी कामयाब रहे थे। एक बुजुर्ग महिला सोई थी, जब वो उठी तो उसे चारों तरफ लाशें ही दिखीं। कुछ लोग इसे मास मर्डर भी बताते हैं, वो कहते हैं धोखे से ड्रिंक लोगों को पिलाया गया। ईसाई कल्ट से जुड़ी ये घटना आज तक लोगों को दहलाती है।

मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख और पीड़ितों को ₹1 लाख: CM योगी ने कहा- हाथरस हादसे में साजिश से इनकार नहीं, हाई कोर्ट के रिटायर जज की अगुवाई में जाँच

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को हाथरस जिले का दौरा किया। उन्होंने मंगलवार (2 जुलाई) को भोले बाबा के सत्संग के दौरान मची भगदड़ के पीड़ितों एवं मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ मृतकों के परिजनों के परिजनों 4 लाख और घायलों को 1 हजार रुपए आर्थिक मदद देने की बात कही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हादसे की जाँच के लिए SIT (विशेष जाँच दल) का गठन किया गया है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में घटना की न्यायिक जाँच करवाने का भी फैसला किया है। मीडिया से बात करते हुए CM योगी ने कहा कि ADG आगरा के नेतृत्व में गठित टीम ने अपनी प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट सौंप दी है।

सीएम ने कहा कि इस रिपोर्ट में कई ऐसी बातें सामने आईं है, जिनकी गहराई से जाँच बेहद जरूरी बताई गई हैं। राहत और बचाव कार्यों को पहली प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इसके आयोजकों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। बकौल योगी आदित्यनाथ, इस घटना में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी गई है।

CM योगी ने आशंका जताई है कि इस प्रकार की घटना सिर्फ एक हादसा नहीं हैं। इस घटना के पीछे कोई न कोई जरूर है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर ये हादसा भी है तो उसके पीछे जिम्मेदार कौन है, इसका पता लगाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना के पीछे जो भी होगा उसको खोज कर सजा दी जाएगी। न्यायिक जाँच में शामिल रिटायर्ड जज और पूर्व पुलिस अधिकारी शासन को रिपोर्ट देंगे कि किन कदमों को उठाकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

भोले बाबा को छूने के लिए मची भगदड़

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मृतकों में UP के अलावा मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के लोग भी शामिल हैं। 31 घायलों का एटा, अलीगढ़ और हाथरस के अस्पतालों में इलाज करवाया जा रहा है। इन घायलों में अधिकतर की हालत खतरे से बाहर है।

यह हादसा तब हुआ, जब कथावाचक भोले बाबा अपनी कथा के बाद वापस जा रहे थे। इस दौरान कई महिलाएँ उन्हें छूने के आगे बढ़ीं। इस दौरान सेवादार भी लोगों को धक्का देते रहे। इसी के चलते भीड़ का दबाव बढ़ता चला गया।

मुख्यमंत्री योगी ने आगे बताया कि इस तरह के कार्यक्रम में सेवादार आयोजन के अंदर प्रशासन को अंदर घुसने नहीं देते हैं। घटना के बाद आयोजकों ने इस मामले को दबाने की बहुत कोशिश की थी। जब प्रशासनिक अधिकारी घायलों को अस्पताल ले जाने लगे तो अधिकतर सेवादार वहाँ से भाग निकले।

हादसे पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के कुछ नेताओं की इस हादसे पर राजनीति करने के लिए आलोचना की। उन्होंने कहा कि हर कोई देख रहा है कि सज्जन (भोले बाबा) के साथ फोटो किसके हैं। उनके राजनीतिक संबंध किसके साथ है, ये हर कोई देख रहा है।

बताते चलें कि भोले बाबा उर्फ नारायण के कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीरें और उनके साथ जयकारे लगाते हुए वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि निर्दोषों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों को कठोर सजा मिलेगी।

स्वार्थियों की साजिश के शिकार हुए बेगुनाह

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि धार्मिक आयोजन को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर ज्यादा पुलिस फ़ोर्स तैनात नहीं थी। आयोजकों का मानना था कि अंदर के हालात सेवादार हालात सँभाल लेंगे। उन्होंने बताया कि पुलिस फ़ोर्स बाहर तैनात थी। हादसे के बाद सेवादारों द्वारा घायलों को छोड़कर भागने की घटना को सीएम योगी ने साजिश करार दिया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कुछ स्वार्थी लोगों की साजिश के शिकार कई बेगुनाह बन गए। इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल जाकर इलाज करवा रहे पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर कहा कि हाथरस की दुर्घटना में घायल हुए लोगों से आज अस्पताल में भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना और चिकित्सकों से उनके उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने लिखा, “कुशल चिकित्सकों के नेतृत्व में सभी का समुचित उपचार शीर्ष प्राथमिकता पर किया जा रहा है। इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों और उनके परिवार के साथ खड़ी है। सभी घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति हो, प्रभु श्रीराम से यही प्रार्थना है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। सीएम योगी ने घटनास्थल पर जाकर उसका भी निरीक्षण किया। इस दौरान भारी बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से मैदान में पानी भर गया था। मुख्यमंत्री के साथ पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद था। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को कई निर्देश दिए।

पैरोल पर बाहर निकलेगा खालिस्तानी अमृतपाल सिंह, सांसद बनने के बाद लेगा संविधान की शपथ: असम की जेल से लड़ कर पंजाब में जीता चुनाव

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को लोकसभा सांसद पद की शपथ लेने के लिए के लिए पैरोल मिल गई है। वह 5 जुलाई, 2024 को लोकसभा सांसद पद की शपथ लेगा। अमृतपाल को पंजाब के खडूर साहिब से सांसद चुना गया है। उसके पैरोल की जानकारी दूसरे खालिस्तान समर्थक सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने दी है।

सरबजीत सिंह खालसा ने बताया है कि वह अमृतपाल की शपथ के मुद्दे को लेकर स्पीकर ओम बिरला से मिले थे। स्पीकर ओम बिरला ने खालसा को यह जानकारी दी कि अमृतपाल को दिल्ली में 5 जुलाई, 2024 को शपथ दिलाई जाएगी।

बताया गया है कि अमृतपाल सिंह को 4 दिन के लिए पैरोल दी गई है। उसकी पैरोल के साथ कई शर्तें जोड़ी गई हैं। अभी अमृतपाल सिंह को असम की डिब्रूगढ़ जेल में रखा गया है। इस बात की संभावना है कि उसे डिब्रूगढ़ से सीधे हेलीकॉप्टर के माध्यम से दिल्ली लाया जाएगा, जहाँ उसे सांसद के तौर पर शपथ दिलाई जाएगी। अमृतपाल सिंह की पैरोल को लेकर पंजाब सरकार ने स्पीकर ओम बिरला को आवेदन भेजा था।

अमृतपाल सिंह को दी गई पैरोल को अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने डिब्रूगढ़ के जेल अधीक्षक को बता दिया है। अमृतपाल सिंह, पंजाब के खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद चुना गया था। उसने जेल से ही पर्चा भरा था और यहीं से चुनाव जीत लिया था।

अमृतपाल सिंह को UAPA मामले में डिब्रूगढ़ जेल में बंद किया गया है, वह बीते वर्ष से ही यहाँ बंद है। उसके नेतृत्व में मोहाली में एक थाने पर हमला हुआ था, इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उस पर कार्रवाई की थी। उसके कई साथी भी गिरफ्तार किए गए थे।

अमृतपाल सिंह से पहले जम्मू कश्मीर के बारामुला से सांसद चुने गए निर्दलीय अलगाववादी नेता राशिद को भी शपथ लेने की अनुमति मिली थी। इंजीनियर राशिद को भी 5 जुलाई, 2024 को शपथ दिलाई जानी है। उसे के कोर्ट ने 2 घंटे की पैरोल दी है।

राहुल गाँधी ने हिंदुओं को बताया ‘हिंसक’, प्रदर्शनकारियों संग कॉन्ग्रेसियों ने की ‘हिंसा’: पथराव-तेजाब की बोतलों से हमला, ऑपइंडिया से बोले BJP नेता- पूर्व नियोजित थी हिंसा

लोकसभा में हिन्दुओं को हिंसक कहने वाले बयान के विरोध पर अहमदाबाद कॉन्ग्रेस दफ्तर से भाजपा कार्यकर्ताओं पर पत्थर बरसाए गए। कॉन्ग्रेस दफ्तर से लगातार बजरंग दल और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ। इस हमले में कई कार्यकर्ता घायल हो गए। हमला करने वाली भीड़ में कॉन्ग्रेस MLA शैलेश परमार और पार्षद शहजाद पठान भी शामिल थे। इस मामले में FIR दर्ज करवाई गई है और घायलों का इलाज चल रहा है।

यह वाकया मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को हुआ। राहुल गाँधी के लोकसभा में हिन्दुओं को हिंसक कहने के बाद बजरंग दल और भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अहमदाबाद कॉन्ग्रेस दफ्तर पर विरोध करने का ऐलान किया था। यह सभी कार्यकर्ता जब प्रदर्शन करते हुए कॉन्ग्रेस दफ्तर के पास पहुँचे तो उन पर हमला चालू हो गया।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुआ हमला: भाजपा नेता

भाजपा नेता विनय देसाई ने ऑपइंडिया को इस हमले के विषय में बताया, “राहुल गांधी के हिंदू विरोधी बयान के विरोध में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस कार्यालय के सामने कुछ दूरी पर सिर्फ बैनर पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। जब हमारे कार्यकर्ता खड़े थे तभी कॉन्ग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं और उनके द्वारा बुलाए गए गुंडों ने पत्थरों, काँच की बोतलों, लाठियों और धारदार हथियारों से हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया।”

उन्होंने बताया, “वह सब भीड़ में आए और पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए और उन पर हमला कर दिया। इस हमले में हमारे कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं। घायलों में 5 लोगों को ज्यादा चोटें आईं हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। सिर्फ भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। युवा मोर्चा के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हमने शैलेशभाई परमार, शहजाद पठान और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।”

अहमदाबाद शहर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी इस संबंध में बताया, “भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता राहुल गाँधी के हिंदू विरोधी बयान के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के लिए कॉन्ग्रेस कार्यालय गए थे। वे केवल हाथ में तख्तियाँ लेकर गए थे। लेकिन कॉन्ग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर पत्थर, शराब की बोतलें और तेजाब की बोतलें फेंकी गईं। इस हमले में हमारे 5 कार्यकर्ता घायल हो गए। घायलों को तुरंत इलाज के लिए एसवीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।”

हमलावर भीड़ में शामिल थे MLA शैलेश परमार

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथों में लाठी-डंडे लेकर पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं की ओर दौड़ रहे हैं। इस वीडियो में कुछ कार्यकर्ता पथराव भी करते नजर आ रहे हैं। इस पूरे वीडियो में सबसे खास बात ये है कि इस भीड़ के साथ कॉन्ग्रेस विधायक भी मार्च कर रहे हैं। उनके आसपास के लोग विरोधी पक्ष पर हमला कर रहे हैं। वीडियो में शैलेश परमार जोर-जोर से कुछ कहते नजर आ रहे हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक शैलेश परमार भी भीड़ में दिखे

यह भी सामने आया है कि इस पूरी घटना में अहमदाबाद पुलिस के जवान और होम गार्ड के जवान भी घायल हुए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पथराव की घटना में अहमदाबाद पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मी और एक होम गार्ड जवान समेत कुल 7 लोग घायल हुए हैं।

ईसाई बनाने के लिए लोगों को गाँव से दिल्ली की ‘कल्याण सभा’ में ले गया था कैलाश, यूँ ही नहीं हाई कोर्ट को कहना पड़ा बंद करो हिंदुओं का धर्मांतरण

एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर अहम टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने सोमवार (1 जुलाई 2024) को कहा कि यदि धर्मांतरण वाले धार्मिक आयोजनों को नहीं रोका गया तो देश की बहुसंख्यक आबादी एक दिन अल्पसंख्यक बन जाएगी। इस दौरान उच्च न्यायालय धर्मांतरण से संबंधित धारा के आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत एक आरोपित कैलाश की जमानत याचिका खारिज कर दी। कैलाश हमीरपुर जिले के मौदाहा थाने का रहने वाला है। उस पर IPC की धारा 365 के तहत भी मामला दर्ज है।

सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, “यदि इस प्रक्रिया को जारी रहने दिया गया तो इस देश की बहुसंख्यक आबादी एक दिन अल्पसंख्यक हो जाएगी। ऐसे धार्मिक आयोजनों को तुरंत रोका जाना चाहिए, जहाँ धर्मांतरण हो रहा हो और भारत के नागरिकों का धर्म परिवर्तन हो रहा हो।”

दरअसल, आरोपित कैलाश ने हमीरपुर की रहने वाली रामकली प्रजापति के भाई रामफल को अपने साथ लेकर दिल्ली गया। यहाँ उसे ईसाई मजहब द्वारा आयोजित ‘कल्याण सभा’ में भाग लेने के लिए ले जाया गया था। इतना ही नहीं, रामफल के अलावा उस गाँव के सैकड़ों लोगों को ईसाई में धर्मांतरण के लिए ले जाया गया था।

इस दौरान आरोपित कैलाश ने महिला से कहा था कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे उसके भाई का इलाज करके एक सप्ताह बाद उसे उसके गाँव भेज दिया जाएगा। जब एक सप्ताह बाद भी जब महिला का भाई वापस नहीं लौटा तो महिला ने आरोपित कैलाश से इस बारे में पूछा। हालाँकि, कैलाश ने जो जवाब दिया उससे महिला संतुष्ट नहीं हुई।

याचिकाकर्ता कैलाश के वकील साकेत जायसवाल ने कोर्ट को बताया कि रामफल ईसाई नहीं बना था, न ही वह ईसाई है। वह कई अन्य व्यक्तियों के साथ ईसाई धर्म और कल्याण के लिए आयोजित सभा में शामिल हुआ था। इसमें कैलाश कोई भूमिका नहीं है। सोनू पास्टर ही ऐसी सभा आयोजित कर रहा था और उसे जमानत मिल चुकी है।

राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल पीके गिरि ने दलील दी कि इस तरह की सभा आयोजित करके बड़ी संख्या में लोगों को ईसाई बनाया जा रहा है। इसके लिए उन्हें मोटी रकम दी जा रही है। इसके अलावा, कैलाश गाँव से लोगों को ईसाई बनाने के लिए ले जा रहा था। और इस काम के लिए उसे मोटी रकम दी जा रही थी।

इसके बाद कोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रक्रिया को जारी रहने दिया गया तो एक दिन इस देश की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी। ऐसे धार्मिक समागमों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए, जहाँ धर्मांतरण करने का काम होता है। कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 के संवैधानिक आदेश के विरुद्ध है। यह धर्मांतरण की नहीं, बल्कि धर्म के अभ्यास और प्रचार-प्रसार की अनुमति देता है।

न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से गरीब व्यक्तियों सहित अन्य जातियों के लोगों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण करने की अवैध गतिविधि बड़े पैमाने पर की जा रही है। इस न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया है कि आवेदक जमानत का हकदार नहीं है। इसलिए, उपरोक्त मामले में शामिल आवेदक की जमानत याचिका खारिज की जाती है।

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर नहीं लगी है कुलविंदर कौर की ड्यूटी, जारी है विभागीय जाँच: सस्पेंशन खत्म होने के दावों का CISF ने किया खंडन, कंगना रनौत को मारी थी थप्पड़

खबरें चल रही ऐन कि अभिनेत्री कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारने वाली CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) की कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर को नौकरी में पुनः बहाल कर दिया गया है। ये भी बताया जा रहा था कि उनका ट्रांसफर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कर दिया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। पंजाब के सुल्तानपुर लोधी की रहने वाली है। उनके पति भी CISF में ही हैं। इनके 2 बच्चे भी हैं। उन्हें पुनः बहाल किए जाने का विरोध भी हो रहा है।

हालाँकि, CISF ने अब सफाई देते हुए इन खबरों का खंडन किया है। सुरक्षा एजेंसी ने मीडिया के दावों को नकारते हुए कहा था कि कुलविंदर कौर अभी भी निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय जाँच भी चल रही है।

बता दें कि कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद बन गई हैं। उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस के मंत्री विक्रमादित्य सिंह को 74,000 से भी अधिक मतों से हराया है। अब सामने आ रहा है कि CISF कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर को तुरंत बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुँच कर सेवा ज्वाइन करने का आदेश देने वाली खबर गलत है। इस मामले में उन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। उन पर पूर्ववर्ती IPC की धारा-323 (मारपीट) और 341 (रास्ता रोकने) की धाराएँ लगाई गई थीं।

कुलविंदर कौर का परिवार ब्यास नदी के किनारे स्थित मंड महिवाल गाँव का रहने वाला है। उनका भाई शेर सिंह ‘किसान मजदूर संघर्ष कमिटी’ का ऑर्गेनाइजेशन सेक्रेटरी है। ये संगठन मोदी सरकार के खिलाफ हुए ‘किसान आंदोलन’ में भी खासा सक्रिय था। ये घटना 7 जून, 2024 की है। कुलविंदर कौर का कहना था कि कंगना रनौत ने ‘किसान आंदोलन’ के दौरान पंजाबी महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, इसी गुस्से में उन्होंने उन्हें थप्पड़ मारा।

कुलविंदर कौर का परिवार कई बार कह चुका है कि उन्हें कंगना रनौत को थप्पड़ मारने का कोई पछतावा नहीं है, माफ़ी माँगना तो दूर की बात नहीं है। कुलविंदर कौर की माँ वीर कौर ‘किसान आंदोलन’ में बैठी थी। वीर कौर ने कहा था कि कहा था, “मेरी बेटी ने जो किया वो ठीक किया।” कंगना रनौत ने इसके बाद पंजाब में बढ़ते आतंकवाद पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया था कि कुलविंदर कौर ने उन्हें गाली भी दी थी। CISF ने अब कुलविंदर कौर को फिर से सेवा में बहाल नहीं किया है।

फैजान और तंजीम ने की दुकान में घुस मारपीट, दुकानदारों ने पकड़ा तो ‘मॉब लिंचिंग’ का झूठ फैलाने लगे इस्लामी-वामपंथी: यूपी पुलिस ने बताई सच्चाई

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कुछ मुस्लिम युवकों ने एक दुकान में घुस कर दुकानदार और नौकरों के साथ मारपीट की। उन्होंने दुकान पर काफी हंगामा किया। इसके बाद जब आसपास के दुकानदारों ने उन्हें पकड़ लिया और दोंनो के बीच हाथापाई हुई तो इसे इस्लामी हैंडल और वामपंथी मॉब लिंचिंग का एजेंडा चलाने लगे।

लगातार कई सामान्य घटनाओं की जानकारी को तोड़मोड़ कर पेश करने वाले सचिन गुप्ता आने एक वीडियो डालते हुए लिखा, “UP के जिला बुलंदशहर में भीड़ हिंसा, तंजीम और फैजान कार्बोनेट को बदलने संतलाल की दुकान पर गए थे। वहाँ दुकानदार ने मना कर दिया। विरोध पर भीड़ ने दोनों भाइयों को खूब पीटा। भीड़ पर कोई एक्शन नहीं, बल्कि पिटने वाले दोनों भाई CRPC-151 (शांतिभंग) में अरेस्ट हुए।”

अंसार इमरान ने इस घटना को मॉब लिंचिंग बताने की कोशिश की। उसने लिखा, “ताजा मामला यूपी के बुलंदशहर का है जहाँ मुस्लिम लड़के तंजीम और फैजान को वहाँ की हिंसक भीड़ ने बहुत बुरी तरीके से मारा पीटा है। मोब लिंचिंग का पूर्ण प्रयास किया गया है। सबसे हैरानीजनक बात यह है कि उस हिंसक भीड़ पर एक्शन की जगह पुलिस ने उल्टा शांति भंग के आरोप में उन दोनों को ही गिरफ्तार कर लिया है।”

खुद को पत्रकार बताने वाले रिजवान हैदर ने भी यही झूठ फ़ैलाने की कोशिश की।

घटना मॉब लिंचिंग नहीं, हमले की- पुलिस

यह घटना बुलंदशहर के गुलावटी में 30 जून, 2024 को हुई। गुलावटी के मुख्य बाजार के भीतर एक दुकान पर फैजान और तंजीम पहुँचे थे। यह दोनों आम बेचने का काम करते हैं और इनको पकाने के लिए कार्बाइड केमिकल लेने राजीव नारंग की दुकान पर पहुँचे थे।

फैजान और तंजीम ने इसके बाद दुकानदार से बहस करने लगे। उन्होंने दुकानदार के साथ बदतमीजी की। इसके बाद वह हिंसक हो गए और अपने दो और साथियों को बुला लिया। यह सभी दुकानदार समेत उसके नौकरों को मारने पीटने लगे। दुकानदार के साथ मारपीट के बाद फैजान और तंजीम के दोनों साथी भाग गए।

दुकानदार पर हमला होता देख यहाँ आसपास के व्यापारी इकट्ठा हो गए। उन्होंने फैजान और तंजीम को घटनास्थल से पकड़ लिया। व्यापारियों ने गुस्से में उनके साथ हाथापाई भी की। दोनों के खिलाफ व्यापारियों ने गुलावठी थाने पहुँच कर इस मामले में कार्रवाई की माँग की।

इसके बाद पुलिस ने तंजीम और फैजान को पकड़ कर उनका शांतिभंग में चालान कर दिया। हालाँकि, दोनों को थाने से ही जमानत मिल गई। इन दोंनो ने भी दुकानदार के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया है। इसमें इन्होने आरोप लगाया है कि इनके साथ बिना बात के मारपीट की गई।

ऑपइंडिया से बात करते हुए सिकंदराबाद की CO पूर्णिमा सिंह ने बताया कि मामले को जिस तरह से प्रचारित कियाजा रहा है, यह ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि मामला पहले दुकानदार पर हमले और बाद में उनके द्वारा जवाबा दिए जाने का है। दोनों पक्ष का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है।

CO पूर्णिमा सिंह ने बताया कि तंजीम और फैजान के दो साथी भाग गए थे। तंजीम और फैजान के विरुद्ध शांतिभंग का मामला दर्ज कर लिया गया था और उन्हें थाने जमानत मिली थी। उन्होंने कहा है कि अभी दोनों पक्ष शांत हैं और कोई विवाद की बात नहीं है।

पुलिस के बयान से साफ़ हो जाता है कि मामला मॉब लिंचिंग का ना होकर हमलावरों को पकड़ने और उनके साथ हाथापाई का है। ऐसे में इस्लामी हैंडल और पत्रकार लगातार झूठ फ़ैलाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा ही प्रयास इन्होंने झारखंड के कोडरमा में एक दुर्घटना में मारे गए मौलाना के विषय में किया था।

‘जाँच एजेंसियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली छूट, पेपर लीक करने वालों को भी नहीं छोड़ेंगे’: राज्यसभा में PM मोदी का ऐलान, कहा – मणिपुर में कम हो रहीं हिंसा की घटनाएँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण का जवाब देते हुए संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि UPA काल में देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा को चकनाचूर कर दिया गया था और रिमोट कंट्रोल से व्यवस्था चलाई गई, कौन सा संविधान इसकी अनुमति देता है? PM मोदी ने कहा कि हमारे देश में संविधान को तार-तार कर के एक परिवार को प्राथमिकता दी जाती थी। उन्होंने पूछा कि कौन से संविधान की मर्यादा रखी आपने, और आज संविधान लहराते हैं, ‘जय संविधान’ कहते हैं।

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आपलोग तो ‘इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया’ का नारा लगा कर जिए हो। उन्होंने कॉन्ग्रेस को संविधान का सबसे बड़ा विरोधी बताते हुए कहा कि वो 200-500 वर्ष पहले की बातें तो करते हैं, लेकिन आपातकाल की चर्चा होने पर कहते हैं कि ये बहुत पुरानी बात है। PM मोदी ने कहा कि विपक्ष के कई नेता आपातकाल के भुक्तभोगी रहे हैं, लेकिन कुछ मजबूरियाँ रही होंगी कि वो आज कॉन्ग्रेस के साथ हैं। उन्होंने इसे अवसरवादिता बताते हुए कहा कि अगर संविधान के प्रति समर्पण होता तो वो ऐसा नहीं करते।

उन्होंने आपातकाल को एक मानवीय संकट भी करार देते हुए कहा कि अनेक लोगों को प्रताड़ित किया गया, जयप्रकाश नारायण की स्थिति ऐसी ख़राब हुई कि वो बाहर निकलने के बाद भी ठीक नहीं हो पाए। पीएम मोदी ने अल्पसंख्यकों के हितैषी होने का दावा करने वालों से पूछा कि क्या आप मुजफ्फरनगर के तुर्कमान गेट पर मुस्लिमों के साथ क्या हुआ था इस पर बोलने की हिम्मत रखते हैं? उन्होंने याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस विरोधी दल ही आज उसका सहयोग कर रहे हैं।

उन्होंने 1 दिन पहले लोकसभा में अपने संबोधन को याद करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अब ‘परजीवी’ हो गई है, जहाँ बिना किसी सहारे के जहाँ-जहाँ वो लड़ी है वहाँ वो परास्त हुई है, वो सहयोगी दलों के वोट खाकर फली-फूली है। पीएम मोदी ने कहा कि फेक नैरेटव और फेक वीडियो के द्वारा देश को गुमराह कर के इन्होंने अपना कारनामा किया। PM मोदी ने कहा कि बेशर्मी से ‘भ्रष्टाचार बताओ अभियान’ चलाया जा रहा है, पहले पूछते थे कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है लेकिन अब भ्रष्टाचारियों को जेल हो रही है तो पूछ रहे हैं कि ऐसा क्यों हो रहा।

पीएम मोदी ने कहा कि शराब घोटाला करें आप, बच्चों के क्लासरूम बनाने में घोटाला करें आप, पानी तक में घोटाला करें आप, आपकी शिकायत करे कॉन्ग्रेस, कोर्ट में घसीट कर ले जाए कॉन्ग्रेस, और जब कार्रवाई हो तो गाली देते हैं मोदी को। PM मोदी ने AAP से कहा कि हिम्मत है तो सदन में जवाब माँगो कि कॉन्ग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के AAP के घोटालों के सबूत देश के सामने रखे थे, वो सच्चे थे या झूठे। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों का जवाब देते की हिम्मत नहीं है।

राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में ED-CBI को भला-बुरा कहते हैं, वहीं केरल में ‘शहजादे’ वहाँ के CM को जेल भेजने के लिए इन्हीं जाँच एजेंसियों को कहते हैं। उन्होंने इसे ‘दोगलापन’ करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि AAP वालों ने छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला सामने आया तो इसी ED-CBI से कहते थे कि वहाँ के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री को जेल में डालो। पीएम मोदी ने इस दौरान 2013 के मुलायम सिंह यादव के बयान का जिक्र किया, “कॉन्ग्रेस से लड़ना आसान नहीं है। वो जेल में डाल देगी, वो CBI और IT विभाग का भय दिखा कर समर्थन लेती है।”

उन्होंने सपा के रामगोपाल यादव से पूछा कि क्या नेताजी भी झूठ बोलते थे? उन्होंने वामपंथी नेता प्रकाश करात का भी 2013 के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जाँच एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगाया था। ‘CBI पिंजरे में बंद तोता है, जो मालिक की आवाज़ में बोलता है’ – PM नरेंद्र मोदी ने संसद में सुप्रीम कोर्ट के इस बयान का भी जिक्र किया। राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने जाँच एजेंसियों को ईमानदारी से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ काम करने की खुली छूट दे रखी है।

उन्होंने स्पष्ट ऐलान किया कि कोई भी भ्रष्टाचारी कानून से बच कर के नहीं निकलेगा, ये ‘मोदी की गारंटी’ है। पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक को राष्ट्रपति ने एक बड़ी समस्या बताया है, उन्हें अपेक्षा थी कि दलिया राजनीति से ऊपर उठ कर इस पर बात रखी जाती, लेकिन नौजवानों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दे को भी राजनीति की भेंट चढ़ा दिया। PM मोदी ने देश के नौजवानों को भरोसा दिलाया कि आपको धोखा देने वालों को हमारी सरकार छोड़ने वाली नहीं है, आपके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को सख्त से सख्त सज़ा मिले इसके लिए एक के बाद एक एक्शन लिए जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि संसद में इन गड़बड़ियों के खिलाफ कानून बनाया गया है, पूरी व्यवस्था को मजबूती दी जा रही है ताकि भविष्य में देश के नौजवानों को आशंका में न रहना पड़े, वो अपने सामर्थ्य का प्रदर्शन कर के अपना हक़ प्राप्त करें। पीएम मोदी ने UPA काल को याद करते हुए कहा कि पहले आतंकी घटनाएँ देश पर ग्रहण बनी हुई थीं, लेकिन जम्मू कश्मीर में आतंक के खिलाफ लड़ाई अंतिम दौर में हुई, बचे हुए नेटवर्क को भी नेस्तनाबूत करने के लिए हम पूरी व्यूह रचना कर के आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब शायद ही जम्मू कश्मीर से पत्थरबाजी की खबरें आती हैं, अब वहाँ से आतंक और अलगाव खत्म हो रहा है। उन्होंने सबसे अधिक विश्वास पैदा करने वाली बात इसे बताया कि इन सब में जम्मू कश्मीर के नागरिक नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने राज्य में पर्यटन और कारोबार के बढ़ने पर ख़ुशी जताई। पीएम मोदी ने उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी विकास की बह रही धारा की बात करते हुए कहा कि सबको विश्वास में लेते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, “राज्यों के बीच सीमा-विवाद संघर्षों को जन्म देता रहा है। हम सबको साथ बिठा कर सहमति के साथ एक के बाद एक सीमा विवाद को खत्म करते जा रहे हैं। जो हथियारबंद गिरोह अंडरग्राउंड होकर व्यवस्था को चुनौती देते थे और खून-खराबा होता था, आज उनको साथ लेकर स्थायी समझौते हो रहे हैं। शस्त्र सरेंडर हो रहे हैं। अब ‘चलती है, होता है’ का ज़माना चला गया है। 21वीं सदी को भारत का बनाने के लिए हमारी शासन-डिलीवरी की व्यवस्था में Efficiency बढ़ानी होगी, इससे पारदर्शिता भी आती है, जीवन आसान बनता है।”

“मैं फिर से एक बार दोहराना चाहता हूँ। मणिपुर की स्थिति सामान्य करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। वहाँ जो कुछ भी घटनाएँ घटी हैं, 11,000 से अधिक FIR की गई है, 500 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए हैं। वो छोटा सा राज्य है। हमने स्वीकार करना होगा कि मणिपुर में लगातार हिंसा की घटनाएँ कम होती जा रही हैं, शांति पर भरोसा रखना संभव हो रहा है। आज मणिपुर के अधिकांश हिस्सों में आम दिनों की तरह स्कूल-कॉलेज-दफ्तर व दूसरे संस्थान खुले हुए हैं। मणिपुर में भी देश के अन्य भागों की तरह परीक्षाएँ हुई हैं, बच्चों की विकास-यात्रा जारी है। केंद्र और राज्य सरकार सभी से बातचीत कर के शांति-सौहार्द के लिए रास्ता खोलने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। छोटी-छोटी इकाइयों को जोड़ कर के सब किया जा रहा है। पहले की सरकारों में ऐसा नहीं हुआ। गृह मंत्री और गृह राज्य मंत्री कई दिनों तक वहाँ रहे। बार-बार वहाँ जाकर संबंधित लोगों को जोड़ने के प्रयास हुए। राजनीतिक नेतृत्व तो है ही, लेकिन सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी वहाँ जाते हैं और समस्या के समाधान के लिए हर प्रयास के प्रयास कर रहे हैं, संपर्क में रहते हैं। इस समय मणिपुर में बाढ़ का भी संकट चल रहा है। केंद्र सरकार, राज्य के साथ मिल कर पूरा सहयोग कर रही है। NDRF की 2 टीमें वहाँ पहुँची है। प्राकृतिक मुसीबत में भी केंद्र और राज्य मिल कर मणिपुर की चिंता कर रहे हैं। हम सबको राजनीति ऊपर उठ कर वहाँ की स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश करनी चाहिए। मणिपुर की आग में घी डालने वालों को मैं आगाह करता हूँ – ये हरकतें बंद करें। मणिपुर ही ऐसे लोगों को रिजेक्ट करने वाला है।”

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि मणिपुर में पहले 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था, 1990 के दशक में भी वहाँ हिंसक घटनाएँ हुई थीं। उन्होंने याद दिलाया कि G20 के कार्यक्रम उन्होंने सिर्फ दिल्ली में नहीं करवाया क्योंकि उन्हें केवल खुद की वाहवाही नहीं करनी थी, कई राज्यों की ब्रांडिंग इन बैठकों के जरिए की गई। उन्होंने कोरोना के दौरान भी मुख्यमंत्रियों से लगातार संवाद और बैठकों को याद करते हुए कहा कि वो परस्पर सहयोग में यकीन रखते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब दुनिया भारत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है तो वो राज्यों से जुड़े इस सदन में आग्रह करेंगे कि सभी राज्य आगे आएँ और इसका फायदा उठाएँ। उन्होंने इस दौरान राज्यों के बीच रोजगार के लिए स्वस्थ स्पर्धा को देश के नौजवानों के लिए अच्छा बताया। उन्होंने जानकारी दी कि असम में सेमीकंडक्टर पर तेज़ी से काम चल रहा है, वहाँ के नौजवानों को, नॉर्थ-ईस्ट को, देश को इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने जानकारी दी कि UN ने 2023 को ‘सुपर फ़ूड’ मिल्लेट्स ईयर घोषित किया, जो भारत के छोटे किसानों की ताकत है और जहाँ पानी कम है वहाँ भी ये उपजता है।

उन्होंने राज्यों से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि हर राज्य अपने-अपने मोटे अनाज को लेकर आगे आएँ। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार का दखल आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन में कम से कम हो, हम इस ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो अपने बलबूते आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें सरकार रोके नहीं। कलाइमेट चेंज पर भी पीएम मोदी ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बढ़ती जा रही है, हमें मिल कर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल और आरोग्य को भी उतना ही महत्व देना होगा, राज्य इस मूलभूत कार्य की तरफ जुड़ें।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत निवेशकों की पहली पसंद है, राज्य आगे आकर इस अवसर का फायदा उठाएँगे तो उन राज्यों का भी विकास होगा।

‘PM मोदी ने विमान गिराने की रची साजिश, उनको चुनाव लड़ने से रोकें’: दिल्ली हाई कोर्ट ने पायलट की याचिका खारिज की, कहा- इसे इलाज की जरूरत, इस पर नजर रखें

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लोकसभा चुनाव से अयोग्य ठहराने को लेकर दायर की गई एक याचिका को ठुकरा दिया है। हाई कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले को लताड़ा भी है। हाई कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता को इलाज की जरूरत है।

दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गडेला ने इस मामले की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “क्या आप ठीक हैं? आपकी याचिका आधी अधूरी है। आप एक छोर से दूसरे छोर पर जा रहे हैं। आप कह रहे हैं कि पीएम मोदी ने झूठी शपथ ली है और आपके प्लेन पर हमला हुआ था, आपकी बेटी गायब है, या कोई पूर्व चीफ जस्टिस आपको मारने की कोशिश कर रहा है।”

हाई कोर्ट ने कहा, “कोई भी इंसान आपकी याचिका समझ नहीं सकता। इसका कोई मतलब ही नहीं है। सिंगल बेंच ने बिल्कुल सही कहा कि याचिका में हवा-हवाई आरोप हैं।” कोर्ट ने कहा कि पीएम मोदी पर लगाए गए आरोप कल्पना का परिणाम हैं और इसके पीछे कोई सबूत नहीं है।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लताड़ा भी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को दिन में तारे नहीं दिखाई दे रहे तो भी उसे इलाज की जरूरत है। कोर्ट ने याचिककर्ता के घर वाले इलाके के SHO, SDM और जिला जज से नजर रखने को कहा है। कोर्ट ने इसी के साथ उसकी याचिका खारिज कर दी।

यह याचिका डालने वाले का नाम कैप्टन दीपक कुमार है और वह पूर्व में एयर इंडिया का पायलट था। उसने दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका लगाई थी कि पीएम मोदी और उनके मंत्रियों ने 8, जुलाई, 2018 को कथित तौर पर एयर इंडिया का एक विमान गिराने की साजिश रची थी और राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने का प्रयास किया था।

दीपक कुमार ने दावा किया था कि यह कथित कृत्य पीएम मोदी की संविधान के प्रति ली गई शपथ का उल्लंघन था। दीपक कुमार ने इसी कारण पीएम मोदी को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराने की माँग की थी। इससे पहले इस याचिका की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की एकल बेंच ने की थी।

इस एकल बेंच ने भी 30 मई, 2024 को इस याचिका को रद्द कर दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए एकल बेंच ने कहा था कि याचिकाकर्ता बिना किसी सबूत के फर्जी दावे कर रहा है। उसके द्वारा लगाए गए सभी आरोप फर्जी हैं। हाई कोर्ट की एकल बेंच के निर्णय के खिलाफ उसने चुनौती दाखिल की थी जो 3 जुलाई, 2024 को रद्द कर दी गई।

मौलाना का हुआ एक्सीडेंट, पुलिस अपनी गाड़ी में ले गई अस्पताल… फैलाया मुस्लिम की मॉब लिंचिंग का झूठ: कहा- भीड़ ने पीटकर मार डाला, हिंदू सही में हिंसक

झारखंड के कोडरमा जिले में हुई एक मौलाना की मौत पर पूरा इस्लामी-वामपंथी गैंग एक्टिव हो गया। मौलाना की मौत को लेकर कई इस्लामी हैंडल्स और ‘मुस्लिम पत्रकारों’ ने फर्जी दावे किए और झूठ फैलाया। इन लोगों ने झूठ फैलाते हुए दावा कि मुस्लिम को एक हिन्दू महिला को टक्कर मारने के कारण भीड़ ने मार दिया। मृतक मौलाना कोडरमा के बरकट्ठा इलाके में बसरामो तुर्काबाद में इमाम था।

मीर फैसल की लिखी ऑब्जर्वर पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि घुटारी करिया के पास अपनी बाइक से लौटते समय मौलाना की भीड़ ने पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि उसकी बाइक एक ऑटो से टकरा गई, इसमें पास के एक गाँव की महिला अनीता देवी अपने पति और देवर के साथ बैठी थी। महिला को बाइक टकराने के बाद गंभीर चोटें आईं। रिपोर्ट में आगे दावा किया गया कि मृतक के बेटे और AIMIM नेताओं ने इस मामले में मॉब लिंचिंग का आरोप लगाया है।

इस्लामवादियों के फर्जी दावे – मुस्लिम पहचान के कारण हुआ हमला

घटना के बाद, इस्लामवादियों ने सोशल मीडिया पर एक झूठी कहानी फैलानी शुरू कर दी कि एक हिंदू भीड़ ने मौलाना को पीट-पीटकर मार डाला। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में मौलाना के चेहरे पर खून बहता हुआ दिखाई दे रहा है। एक ‘कथित पत्रकार’ नसीर गियास ने शहाबुद्दीन की मौत को एक महीने में मुस्लिमों की ‘मॉब लिंचिंग’ सातवीं घटना करार दे दिया।

गियास ने पोस्ट किया, “यह भारत में एक महीने के भीतर मुस्लिम की सातवीं मॉब लिंचिंग है। झारखंड के कोडरमा जिले के रघुनियाडीह के इमाम मौलाना शहाबुद्दीन को बाइक से घर लौटते वक्त भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।”

एक अन्य ‘कथित पत्रकार’ वारिस मसीह ने मौलाना की मौत का जिम्मेदार मोदी सरकार और ‘गोदी मीडिया’ को बताया और कहा कि मुसलमानों के प्रति मोदी सरकार की ‘नफरत के कारणअसहिष्णुता और हिंसा को बढ़ावा मिला है।

मसीह ने लिखा, ”मौलाना शहाबुद्दीन की दुखद मौत के लिए मोदी सरकार और गोदी मीडिया जिम्मेदार हैं, जिनकी मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के प्रति निरंतर नफरत ने हिंसा और असहिष्णुता को बढ़ावा दिया है। अगर नफरत की इस लहर को रोका नहीं गया, तो एक दिन ऐसा आएगा जब कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। मौन बहुसंख्यकों बोलों।”

महमूद अहमद ने एक कदम आगे बढ़कर इस मामले में हिंदुत्व को घसीट लिया और आरोप लगाया कि मौलाना की हत्या हिंसक ‘हिंदुत्ववादी भीड़’ ने की। अहमद ने लिखा, “झारखंड: कोडरमा में मौलाना की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। मौलाना शहाबुद्दीन की बाइक एक ऑटो से टकरा गई और महिला चोटिल हो गई। उसके पति महेन्द्र यादव ने पास के क्रिकेट मैदान से युवकों को बुलाया और कथित तौर पर उनकी पिटाई की। हिंदुत्व सही में हिंसक है।”

हेट डिटेक्टर नाम के अकाउंट ने भी यही झूठ चलाया। स्क्रॉल के लिए लिखने वाले एक शाहनवाज राणा ने भी यही झूठ प्रसारित करने का प्रयास किया।

भारत विरोधी पत्रकार राणा अय्यूब ने भी इस झूठ को हवा दी और लिखा, “पहलू, अखलाक और जुनैद की लिंचिंग ने लोगों में आक्रोश और आक्रोश पैदा किया और राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। सड़कों पर मुसलमानों की लिंचिंग को इस हद तक सामान्य बना दिया गया है कि वह अब अखबारों में भी नहीं आते।”

झारखंड पुलिस ने नकारे दावे

जहाँ सोशल मीडिया पर इस्लामी हैंडल्स इस मामले को मॉब लिंचिंग बता रहे हैं, वहीं झारखंड पुलिस ने इन दावों का खंडन किया है। झारखंड पुलिस ने बताया है कि इसमें कोई सांप्रदायिक पहलू नहीं है। पुलिस ने यह भी पुष्टि की है कि दुर्घटना के बाद अस्पताल ले जाए गए मौलाना ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

पुलिस ने कहा, “इमाम को दुर्घटना के कारण चोटें आईं। इसमें कोई धार्मिक एंगल नहीं है। उन्हें पुलिस की गाड़ी में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।”

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में भी मुस्लिमों को लेकर झूठा नैरेटिव प्रचारित किया गया था। हत्या की अलग-अलग घटनाओं को झूठी कहानी गढ़ी गई थी, इनमें पीड़ित मौलाना या इमाम थे। इन सब अलग-अलग कारणों से हुई घटनाओं को आधार बनाकर यह प्रचार करने की कोशिश की गई थी कि मुस्लिम खतरे में हैं।