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‘फ्री फायर’ खेलते हुए मोहम्मद आसिफ ने हिंदू नाबालिग को फँसाया, भगाकर अपने घर ले गया जमुई: जानिए कितना खतरनाक है ऑनलाइन गेम, अपराधी कैसे उठाते हैं फायदा

बिहार के जमुई में ऑनलाइन गेम फ्री फायर खेलते हुए मोहम्मद आसिफ अंसारी ने एक नाबालिग हिंदू लड़की को अपने जाल में फँसा लिया। इसके बाद उसने नाबालिग को अपने घर भागने के लिए प्रेरित करते हुए बुला लिया। लड़की की उम्र 14 साल है। शंका होने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद आरोपित के पास हिंदू लड़की को बरामद कर लिया गया है।

यह मामला जमुई के झाझा क्षेत्र का है। यहाँ के ढाबा गाँव का रहने वाला आसिफ फ्री फायर गेम खेलते-खेलते सिवान की नाबालिग हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसा लिया। आसिफ ने लड़की को बहकाकर झाझा बुला लिया और वहाँ से उसे गुरुवार (20 जून 2024) की रात को अपने साथ घर लेकर चला गया। ग्रामीणों को जानकारी मिली कि लड़की हिंदू धर्म की है तो उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आसिफ ने पुलिस को बताया कि वह पिछले तीन साल से फ्री फायर गेम खेल रहा है। इसी दौरान उसका संपर्क नाबालिग हिंदू लड़की से हुआ। धीरे-धीरे उसने लड़की से नजदीकी बढ़ा ली। लड़की के माता-पिता नहीं हैं। उसने बताया कि लड़की उसके साथ रहने को तैयार हो गई और घर छोड़ ट्रेन से झाझा पहुँच गई।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने पुलिस को बताया कि लड़की दूसरी बार झाझा आई है। इसके पहले वह बंगाल भाग गई थी। वहाँ बंगाल पुलिस ने पकड़ लिया था और लड़की के परिजनों को बुलाकर उन्हें लड़की सौंप दी थी। इस दौरान उसे आरोपित से दूर रहने की हिदायत दी गई थी। हालाँकि, वह आरोपित के साथ लगातार संपर्क में बनी रही।

वहीं, नाबालिग हिंदू लड़की ने बताया कि ऑनलाइन फ्री फायर गेम खेलने के दौरान मोहम्मद आसिफ अंसारी से उसका संपर्क हुआ था। इसके बाद आरोपित आसिफ के कहने पर वह झाझा आ गई थी। थानाध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि 14 साल की लड़की को बहला फुसलाकर झाझा लाया गया था। लड़की सिवान जिले के रहने वाली है। लड़की के स्वजन को सूचना दे दी गई है।

ऑनलाइन गेम के दुष्परिणाम

पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन गेम खेलने वालों की संख्या जबरदस्त इजाफा हुआ है। ऑनलाइन गेम से एक तरफ प्रॉब्लम सोल्विंग और टीम वर्क जैसे गुण विकसित होते हैं तो दूसरी ग्रूमिंग का बढ़ता चलन छोटे-छोटे बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है। इसके अलावा, इन खेलों के कारण बच्चों में एडिक्शन बढ़ रहा है, जिससे उनमें कई तरह के मानसिक विकार उत्पन्न हो रहे हैं।

इसका बड़ा खतरा ऑनलाइन ग्रूमिंग है। यह तब होती है, जब कोई व्यक्ति किसी युवा व्यक्ति को धोखा देकर उसके साथ संबंध बनाता है और उसका दुरुपयोग करता है। यह यौन संबंध हो सकता है। ड्रग्स बांटने, आत्महत्या या अन्य अपराध करने के लिए उकसाने या मजबूर करने जैसा हो सकता है। वित्तीय शोषण भी हो सकता है।

ऑनलाइन गेमिंग के जरिए अपराधी किस्म के लोग सरल-सीधे बच्चों एवं युवाओं को अपना शिकार बना सकते हैं। वे उनसे दोस्ती करके उन्हें अपने आपराधिक कामों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑनलाइन खेलों में बच्चों को अजनबियों से चैट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और इन खेलों का दुरुपयोग बच्चों का शोषण करने के लिए किया गया है।

ऐसा ही एक खतरनाक ऑनलाइन गेम ‘ब्लू ह्वेल‘ भी सामने आया था। इसमें दो या दो अधिक खिलाड़ी ऑनलाइन खेलते हुए एक-दूसरे को खतरनाक चैलेंज देते थे। इनमें कई तरह की प्रताड़ना और आत्मघाती कदम शामिल होते थे। इस खेल के कारण भारत सहित दुनिया भर में हजारों युवाओं ने छत से कूद कर या अन्य तरीकों से जान दे दी थी। इसके बाद इसे भारत सहित दुनिया भर में बैन कर दिया गया है।

13 और 15 साल की हिंदू लड़कियाँ गायब, आरोप मुस्लिम लड़के पर: हल्द्वानी में जहाँ हिंदू डर कर जीने को मजबूर, वहाँ बच्चियों के सकुशल बरामदगी की माँग

हल्द्वानी का बनभूलपुरा इलाका। कुछ समय पहले अवैध जमीन कब्जे और दंगों की वजह से काफी चर्चा में रहा था। अब वहाँ से 13 और 15 साल की 2 नाबालिग लड़कियों को बहलाफुसला कर एक मुस्लिम लड़के द्वारा भगा ले जाने का मामला सामने आया है, जिसके बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। इस घटना की सूचना पाकर पुलिस थाने पहुँचे हिंदू संगठनों ने माँग की है कि जल्द से जल्द लड़कियों को बरामद किया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला गुरुवार (20 जून 2024) का है। जब दोनों लड़कियों के लापता होने की सूचना मिली। शुरुआती जानकारी में पता चला है कि उक्त लड़कियों के साथ मोहल्ले का ही एक मुस्लिम लड़का देखा गया है, जो उन्हें साथ लेकर लालकुआँ गया, जहाँ से उसके यूपी के बदायूँ जाने की सूचना मिल रही है। शुक्रवार (21 जून 2024) को इस मामले में लड़कियों के परिजनों और जोगेंद्र राणा के नेतृत्व में हिंदू संगठनों ने पुलिस का घेराव किया और लड़कियों की बरामदगी की माँग की। इस दौरान करीब 1 घंटे तक हंगामा चलता रहा। पुलिस द्वारा लड़कियों की जल्द बरामदगी के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए।

बताया जा रहा है कि एक लड़की 11वीं की छात्रा है और दूसरी 9वीं कक्षा की। दोनों एक ही घर में रहते हैं। 9वीं कक्षा की छात्रा का परिवार किराएदार है। उन्हें एक मुस्लिम लड़के ने अपनी जाल में फँसाया और लेकर फरार हो गया। आरोपित लड़के ने एक छात्रा के भाई को धमकी भी दी थी, जिसकी वजह से छात्रा के परिजन उसकी सुरक्षा की चिंता भी जता रहे हैं।

इस मामले में बनभूलपुरा थानाध्यक्ष नीरज भाकुनी ने आक्रोशित लोगों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही छात्राओं को सकुशल बरामद कर लिया जाएगा। लापता छात्राओं की तलाश में उत्तराखंड पुलिस की टीम को उत्तर प्रदेश भेजा गया है, जल्द ही लापता लड़कियों को बरामद कर लिया जाएगा। पुलिस के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए हैं।

बता दें कि फरवरी 2024 में नगर निगम द्वारा सरकारी जमीन से कब्जा हटाए जाने के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा की थी। हिंसा की इन वारदातों में 6 लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान कट्टरपंथी इस्लामिक भीड़ ने पत्थरबाजी-आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था और दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था।

केंद्र सरकार की नौकरी के मजे? अब 15 मिनट से ज्यादा की देरी पर आधे दिन की छुट्टी: ऑफिस टाइमिंग को लेकर कड़ा फैसला

सरकारी कर्मचारियों के बारे में एक आम राय क्या होती है? वो देर से दफ्तर पहुँचते हैं। एक-दो घंटे चाय पानी में निकाल देते हैं, फिर कुछ मौज-मस्ती वाली बातें होती हैं, लंच होता और फिर लंच बॉक्स लेकर घर चले जाते हैं। पुराने जमाने से चली आ रही ये रवायत मोदी सरकार ने साल 2014 से ही खत्म करने की कोशिश की थी, जिसमें काफी सफलता भी मिली। इस बीच, कोविड आ जाने की वजह से फिर से सरकारी कर्मचारियों की मौज हो गई थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने साफ कह दिया है कि ऑफिस समय से पहुँचना होगा और समय से ही निकलना होगा। इसमें 15 मिनट की भी देरी हुई, तो आधे दिन की छुट्टी कट जाएगी। अगर किसी वजह से लेट ऑफिस पहुँच रहे हैं, तो उसके बारे में अपने अधिकारियों को पहले से सूचित करना होगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने आदेश जारी किया है कि जिन दफ्तरों के खुलने का समय 9 बजे है, वहाँ अधिकतम 15 मिनट का ही ग्रेस पीरियड मिलेगा, इससे ज्यादा की देरी पर कैजुअल लीव अप्लाई करनी पड़ेगी, या फिर आधे दिन की सैलरी कट जाएगी। ये आदेश जूनियर-सीनियर सभी के लिए लागू किया गया है।

विभाग ने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों से कहा है कि वो बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के माध्यम से हाजिरी दर्ज कराएँ, जोकि कोरोना लॉकडाउन के बाद से बहुत सारे अधिकारी नहीं कर रहे थे। केंद्र सरकार के दफ्तर आम तौर पर सुबह 9 बजे से शाम 5.30 बजे तक खुले रहते हैं, लेकिन कर्मचारियों के बारे में शिकायत रहती है कि वो देर से दफ्तर पहुँचते हैं और जल्दी निकल जाते हैं, जिसकी वजह से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सीनियर अधिकारियों की शिकायत है कि वो समय से आते हैं और शाम 7 बजे तक काम करते हैं। वो घर से भी काम करते हैं, यहाँ तक कि साप्ताहिक छुट्टियों के दिन भी उन्हें घर से काम करना पड़ता है। अधिकतर काम ऑनलाइन हो गया है। ऐसे में ज्यादा काम करने के बावजूद उन्हें लाभ तो मिलता नहीं, और 15 मिनट की देरी पर उनकी आधे दिन की छुट्टी भी कट जाएगी। ऐसे में सरकार को इस बारे में भी सोचना चाहिए।

ईदगाह का गेट भी अब ईशनिंदा: कट्टर भीड़ ने जला डाला दुकान-ट्रैक्टर, पुलिस पर पत्थरबाजी: जोधपुर में धारा-144 लागू, 40 हिरासत में

राजस्थान के जोधपुर स्थित सूरसागर थाना क्षेत्र में हिंसा भड़क गई है, जिसके बाद वहाँ धारा-144 लागू करना पड़ा। ये विवाद ईदगाह के गेट को निकालने को लेकर शुरू हुआ था। लेकिन इसके बाद आगजनी और पत्थरबाजी शुरू हो गई। मामला हिंसक होते ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला बोल दिया। दुकान और ट्रैक्टर को फूँक दिया गया। बीच-बचाव करने आए पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। आखिरकार पुलिस को लाठीचार्ज कर के स्थिति को सँभालना पड़ा।

शुक्रवार (21 जून, 2024) को रात 10 बजे हुई इस घटना को लेकर पुलिस ने 40 आरोपितों को हिरासत में लिया है। चौपसानी हाऊसिंग बोर्ड थाने के SHO नितिन दवे भी पत्थरबाजी में घायल हो गए। ऐसे में अगले दिन सुबह से ही यहाँ कई थानों की पुलिस को तैनात कर दिया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। प्रतापनगर सर्किल थाना क्षेत्र में धारा-144 लागू कर दी गई है। असल में राजराम सर्कल क्षेत्र स्थित ईदगाह के मुख्य दरवाजे के पास कुछ दुकानें हैं।

2 दिन पहले ईदगाह के पीछे की दीवार से 2 दरवाजों को निकाले जाने का काम शुरू किया गया था। पुलिस ने बताया कि बस्ती में रहने वाले कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। काम शुरू होने के बाद भी 2 बार हिन्दू-मुस्लिम विवाद हुआ, लेकिन पुलिस की पहल से मामला शांत हो गया था। फिर से बस्ती के लोग गेट निकाले जाने का काम रोकने को लेकर अड़ गए। इसके बाद हिन्दू पक्ष भी वहाँ पहुँचा और कहासुनी शुरू हो गई, जो बाद में हिंसा में परिवर्तित हो गई।

आरोपितों को हिरासत में लेने के दौरान पुलिस को विरोध का भी सामना करना पड़ा। पुलिस ने लोगों को निर्देश दिया है की फ़िलहाल घरों से बाहर न निकलें। एक जीप भी हिंसा में क्षतिग्रस्त हो गई है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल भी करना पड़ा। दोनों तरफ से एक-एक FIR दर्ज की गई है। सूरसागर के विधायक देवेंद्र जोशी और नगर MLA अतुल भंसाली ने मौके का दौरा कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को स्थति से अवगत कराया। बताया जा रहा है कि ईदगाह गेट को लेकर नाबालिग बच्चों का झगड़ा इतना बढ़ गया कि स्थिति यहाँ तक पहुँच गई।

मणिपुर में चरमपंथी कुकियों को पता चला कि ट्रक का मालिक मैतेई है, फिर वाहन को कर दिया आग के हवाले: इससे पहले CRPF के बस में भी लगाई थी आग

देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष के बीच बुधवार (19 जून 2024) को कुकी चरमपंथियों की भीड़ ने एक ट्रक को आग के हवाले कर दिया। इस वारदात को उन्होंने तब अंजाम दिया, जब उन्हें पता चला कि ट्रक का मालिक मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखता है। यह घटना मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हुई।

पंजीकरण नंबर NL01A E7895 वाला यह ट्रक दीमापुर जा रहा था। इसी बीच खाली ट्रक को उन्मादी कुकी समुदाय की एक भीड़ ने रोक लिया। इसके बाद वे ट्रक को राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (कांगपोकपी टाउन और चांगौबंग के बीच) पर एलेक्स फार्म के पास लेकर गए वहाँ रात करीब 11 बजे उस ट्रक में आग लगा दी।

इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस एवं अन्य सुरक्षाबलों के जवान मौके पर पहुँची और स्थिति को सँभालते हुए उसे शांत करने का प्रयास किया। जब कुकी समुदाय के लोगों ने पुलिसकर्मियों को ट्रक को बचाने से रोकने की कोशिश की तो पुलिस को आखिरकार बल प्रयोग करना पड़ा। हिंसक हो चुकी भीड़ पर पुलिस को गोलियाँ चलानी पड़ी।

इसके बाद पुलिस ने अन्य लोगों के सहयोग से आग बुझा दी, लेकिन आरोपितों को गिरफ्तार करने में सफल नहीं हो सकी। आरोपित रात के अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। इस संबंध में कांगपोकपी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही हिंसा को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इससे पहले, सोमवार (17 जून 2024) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को लेकर जा रही एक बस को कुकी समुदाय के लोगों की भीड़ ने आग लगा दी थी। उनका आरोप था कि वाहन में मैतेई समुदाय के लोग सवार थे। इस तरह राज्य में हिंसा की छिटपुट घटनाएँ जारी हैं।

नहीं रहे रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा कराने वाले पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित: सांगवेद महाविद्यालय में थे वरिष्ठ आचार्य, कई रियासतों का करा चुके थे राज्याभिषेक

अयोध्या स्थित राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कराने वाले वाराणसी के पुजारी लक्ष्मीकांत दीक्षित का निधन हो गया है। वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य पुजारी थे और उन्होंने 121 वैदिक ब्राह्मणों का नेतृत्व किया था। उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्य भी इस पूजन का हिस्सा थे। दिसंबर 2021 में जब काशी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ, उसमें भी वो शामिल हुए थे। शनिवार (22 जून, 2024) की सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उनका निधन हो गया।

भारतीय सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार में ही वो आजीवन लगे रहे। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ग्वालियर और राजस्थान समेत कई राजघरानों में राज्याभिषेक की प्रक्रिया को उनके द्वारा पूरा कराया जा चुका है। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक में उनके पूर्वजों का योगदान था। उन्होंने अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा के दौरान ये कामना की थी कि राष्ट्र हमेशा उन्नति करता रहे, उस पर प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद बना रहे। लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक और राम मंदिर उद्घाटन का समय तय करने वाले गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने इसे सनातन के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया है।

लक्ष्मीकांत दीक्षित ने मंगलागौरी स्थित अपने आवास पर सुबह के 7 बजे अंतिम साँस ली। बीते कुछ दिनों से वो अस्वस्थ चल रहे थे। 1942 में मुरादाबाद में जन्मे पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित बाल्यावस्था में ही शुक्लयजुर्वेद शाखा और घनान्त अध्ययन के लिए काशी आए थे। 82 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद मणिकर्णिका घाट पर उनके पुत्र जयराम दीक्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। उन्होंने बाल्यकाल में ही आजीवन काशी में रहने का निश्चय ले लिया था।

लक्ष्मीकांत दीक्षित का परिवार मूल रूप से महाराष्ट्र के शोलापुर के जेऊर का है। वो वाराणसी के मीरघाट स्थित सांगवेद महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य भी थे। काशी नरेश के सहयोग से इसकी स्थापना हुई थी। उनके पूर्वज गागा भट्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कराया था। चाचा गणेश दीक्षित ने उन्होंने पूजा पद्धति की शिक्षा ली थी। वो यजुर्वेद के बड़े विद्वान थे। नागपुर सहित कई रियासतों में भी उनके पूर्वजों ने कई अनुष्ठान संपन्न कराए थे।

‘कट्टरपंथी रच रहे हत्या की साजिश, बताते हैं काफिर’: ज्ञानवापी में सर्वे का आदेश देने वाले जज के लिए NIA ने माँगी सुरक्षा, घर के पास से धराया था PFI एजेंट

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के सर्वे का आदेश देने वाले जज को धमकी मिल रही है, जिसके बाद NIA ने उसके लिए सुरक्षा की माँग की है। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 2022 में ज्ञानवापी के ढाँचे की मूल प्रकृति का पता लगाने के ASI द्वारा इसके वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी। मुस्लिम इसे मस्जिद बताते हैं, जबकि मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने यहाँ मंदिर ध्वस्त कर उसके ऊपर मस्जिद खड़ी कर दी थी। इसके भीतर कलश और त्रिशूल से लेकर कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी मिली हैं।

NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा अपर्याप्त है और इसे बढ़ाने की ज़रूरत है। 3 सप्ताह पहले भी अदनान खान नामक शख्स ने उन्हें धमकी दी है, जिसे लेकर FIR भी दर्ज की जा चुकी है। NIA ने कहा है कि इस्लामी कट्टरपंथी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। इसे एक बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा गया है कि अगर अदनान की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।

रवि कुमार दिवाकर बरेली में एडिशनल सेशन जज हैं। वो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी जून 2022 में पत्र लिख कर निवेदन किया था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए। 13 मई, 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें सुरक्षा देने को कहा था, लेकिन इसे अब अपर्याप्त बताया जा रहा है। दिवाकर ने कहा था कि इस्लामी कट्टरपंथी अल्पसंख्यक समाज का ब्रेनवॉश कराने में लगे हैं और उन्हें ‘काफिर’ बताते हैं। वर्तमान में उन्हें 2 पुलिसकर्मी मिले हुए हैं, लेकिन आतंकी हमलों से निपटने के लिए उनके पास उचित हथियार तक नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश ATS ने 3 जून, 2024 को अदनान खान के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। वो जस्टिस रवि कुमार दिवाकर को धमकाने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करता है। जून 2022 में उन्हें ‘इस्लामिक आगाज़ मूवमेंट’ की तरफ से धमकी भरा पत्र भेजा गया था। इसके उनके परिवार की हत्या की धमकी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाना बनाया गया था। अप्रैल 2024 में दिवाकर ने बरेली के SSP को भी पत्र लिख कर कहा था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल आ रहे हैं। लखनऊ स्थित उनके आवास से PFI के एक एजेंट की गिरफ़्तारी भी हुई थी।

डॉक्टर फारुकी ने लिंग काट मुजाहिद को बना दिया लड़की, कई महीनों से ‘गलत काम’ का आरोप ओमप्रकाश पर: एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ एक शख्स सोया तो वो लड़की था लेकिन नींद खुली तक तक वो लड़की बन चुका था। उस व्यक्ति का आरोप है कि उसे बहला-फुसला कर जबरन उसका गुप्तांग कटवा दिया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर के उसका लिंग-परिवर्तन कर दिया है। पीड़ित का नाम मुजाहिद है, जिसके समर्थन में ‘भारतीय किसान यूनियन’ के कार्यकर्ताओं ने बुधवार (19 जून, 2024) को धरना प्रदर्शन किया और कार्रवाई की माँग की।

वहीं आरोपित का नाम ओमप्रकाश है। मुजाहिद का कहना है कि कई महीनों से वो उसके साथ गलत काम कर रहा था। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि लिंग-परिवर्तन की सर्जरी करने वाले डॉक्टर और ओमप्रकाश के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं मुजाहिद का एक नया वीडियो भी इस प्रकरण में सामने आया है, जिसमें वो लिंग-परिवर्तन कराने के लिए खुद को ही जिम्मेदार बता रहा है। मामला बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज का है। मुजाहिद का कहना है कि ओमप्रकाश ने उसे बहला-फुसला कर अस्पताल में भर्ती करवाया, फिर डॉक्टरों से मिलीभगत कर उसका सेक्स चेंज करवा दिया।

मुजाहिद के इन आरोपों के बाद मेडिकल कॉलेज ने भी वीडियो जारी कर के सफाई दिया। इस वीडियो में मुजाहिद कहता दिख रहा है कि वो अपने जेंडर चेंज करवाना चाहता है और इसके लिए जो भी कॉम्प्लीकेशंस हैं उनके बारे में उसे बता दिया गया है। इसमें वो ये भी कह रहा है कि उसे पता है कि इस ऑपरेशन के बाद वो पहले जैसा नहीं रह जाएगा। वो बता रहा कि न वो मानसिक रूप से बीमार है न उसे कोई तनाव है। उसने ये भी कहा कि वो बिना किसी दबाव के ये ऑपरेशन करवा रहा है।

ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर का नाम रज़ा फारुकी है। वीडियो में मुजाहिद ये भी कहता दिख रहा है कि वो बिना किसी दबाव के अपना ऑपरेशन करा रहा है, इस दौरान कोई भी घटना होती है तो अस्पताल, डॉक्टर, नर्स, या कोई भी जिम्मेदार नहीं होगा। वह कह रहा है कि इसके लिए वो खुद जिम्मेदार होगा। मेडिकल कॉलेज की CMS कीर्ति गोस्वामी ने कहा कि एक-दो महीने से मुजाहिद प्लास्टिक सर्जरी के डॉक्टर को दिखाने आ रहा था। उसने सभी तरह की जाँच कराई, फिर खुद की ही जिम्मेदारी से लिंग-परिवर्तन कराया।

नालंदा विश्वविद्यालय को ब्राह्मणों ने ही जलाया था, 11वीं सदी का शिलालेख है साक्ष्य!!

ब्रह्मचर्य प्रतिष्ठायां, वीर्य लाभो भवत्यपि, सुरत्वं मानवो याति, चान्ते याति परां गतिम्।

यानी ब्रह्मचर्य का पालन करने से वीर्य का लाभ होता है, ब्रह्मचर्य की रक्षा करने वाले को दिव्यता प्राप्त होती है। साधना पूरी होने पर परमगति मिलती है…

पर ​कई उदाहरण हैं कि ब्राह्मण वीर्यवान, ब्रह्मचारी, चरित्रवान ही हो इसकी गारंटी नहीं है! बख्तियारपुर की खुदाई में मिले 11वीं सदी के एक शिलालेख से भी यह प्रमाणित होता है। इससे यह भी प्रमाणित होता है कि नालंदा विश्वविद्यालय को ब्राह्मणों ने ही जलाया था।

इससे यह भी पता चलता है कि ब्राह्मण जो अपना वीर्य इधर-उधर छींटते रहते हैं, उससे जो वर्ण संकर यानी दोगले पैदा होते हैं, उन्होंने सनातन को भीषण क्षति पहुँचाई है।

शिलालेख में जो कुछ उद्धृत है उससे पहले यह जान लीजिए कि वीर्य होता क्या है?

वीर्य यानी सीमेन एक तरल पदार्थ है। यह शरीर की दो मुख्य ग्रंथियों के स्त्राव से बनता है। अंडकोषों में शुक्राणु बनते हैं। ये पुरुष ग्रंथियों के स्त्राव से मिलकर वीर्य की रचना करते हैं। सुश्रुत में लिखा है कि जो भोजन हम करते हैं, उससे रस तैयार होता है। इस रस से खून, खून से मांस, मांस से मेद, मेद से अस्थि, अस्थि से मज्जा और मज्जा से वीर्य का निर्माण होता है। इसमें स्पर्म (शुक्राणु), फ्रुक्टोज और अन्य एंजाइम होते हैं, जो शुक्राणु को सफल निषेचन हेतु जीवित रहने में मदद करते हैं। सीमेन में स्पर्म तैरते हैं। एक बार स्त्री योनि में डिस्चार्ज होने के बाद स्पर्म निषेचन के लिए एग से मिलने को दौड़ लगा देते हैं। स्पर्म के एग से मिलने के बाद भ्रूण का निर्माण होता है और महिला गर्भवती होती है।

फिर सामान्यत: नौ महीने बाद जायज और बहुत सारे केसों में नाजायज पैदा होते हैं।

अब शिलालेख पर लौटते हैं। इसके अनुसार मधुबनी जिले के एक गाँव में राघव चेतन नाम का ब्राह्मण रहता था। उसको बौद्धों ने देश निकाला दे दिया। वह भटकते-भटकते अफगानिस्तान के गार्मसीर चला गया। वहाँ की पहाड़ियों में वह प्यास से बेसुध होकर गिर पड़ा। तभी भेड़-बकरी चराती एक बुर्के वाली उधर से गुजरी। उसने राघव चेतन को पानी पिलाया। फिर पहाड़ियों के बीच ही वीर्य ने जोर मारा, फलस्वरुप वह गर्भवती हो गई। नौ महीने बाद बख्तियार खिलजी नाम का एक वर्ण संकर पैदा हुआ। वर्ण संकर मतलब दोगला। दोगला बहुत खतरनाक प्रजाति होती है।

जब यह दोगला बड़ा हुआ तो अपने ‘बाप’ के अपमान का बदला लेने के लिए नालंदा की तरफ आया और उसके बाद जो कुछ हुआ वह तो कई इतिहासकार आपको बता ही चुके हैं। अपने ‘बाप’ के वीर्य के सम्मान में खिलजी ने बख्तियारपुर नाम के एक नगर की भी स्थापना की।

इस शिलालेख से स्पष्ट है कि यदि एक ब्राह्मण ने अपना वीर्य गर्मासीर की पहाड़ियों में नहीं छींटा होता तो नालंदा नहीं जलता। इसलिए नालंदा विश्वविद्यालय के जलने का कोई दोषी है तो वह ब्राह्मण ही है।

अपना वीर्य इधर-उधर छींटने वाला राघव चेतन इकलौता ब्राह्मण नहीं था। ऐसे ब्राह्मण दुनियाभर में गए। कोई उज्बेकिस्तान गया तो कोई इंग्लैंड। फिर जितने भी दोगले पैदा हुए वो अपने बाप के अपमान का बदला लेने भारत आए। असल में भारत को जो गुलामी का समय देखना पड़ा उसके दोषी भी ब्राह्मण ही हैं।

पर ब्राह्मणों को देखिए। देश ने इतना भोगा। उसके टुकड़े हुई। वह फिर भी नहीं सुधरे। इधर-उधर वीर्य छींटते रहे। अब उनकी वही दोगली औलादें उनको क्रेडिट दिलाने के लिए लड़ रही हैं। वे नहीं चाहतीं कि उनके बाप का क्रेडिट कोई बख्तियार खिलजी ले जाए। इनलोगों के सम्मान में आप भी कहिए कि नालंदा विश्वविद्यालय को ब्राह्मणों ने ही जलाया था।

जिन ब्राह्मणों को इस ट्रेंड से दुख हो रहा है उनके लिए सीख है कि भले ही हस्तमैथुन कर लो पर अपना वीर्य इधर-उधर छींटना बंद करो। वीर्य भी तुम इतना छींट लेते हो कि यह हिसाब नहीं रहता कि किस-किस घर में दोगले पैदा करके रखे हो।

वैसे भी ‘मरणं बिन्दुपातेण जीवन बिंदु धारयेत’, वीर्य का पतन मृत्यु की ओर ले जाता है। तुम्हारी दोगली पैदाइश तुमको रोज मृत्यु की ओर ही तो धकेल रहीं हैं। इसलिए अब भी चेत जाओ।

नोट: यह मधुबनी जिले के नबटोली ग्राम के एक मैथिल ब्राह्मण का पहला रिसर्च पेपर है। इसे उन्होंने अपने वातानुकूलित कमरे में बैठकर लिखा है। शिलालेख का अध्ययन से लेकर गर्मासीर की पहाड़ियों तक में हुए संभोग को उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा है। यह भी सनद रहे कि इतिहासकार अजीत झा का इतिहास के अध्ययन-अध्यापन से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। इस लब्धप्रतिष्ठित इतिहासकार के शोध पर प्रश्न उठाने वाले दोगले माने जाएँगे। माना जाएगा कि किसी ब्राह्मण ने अपना वीर्य इधर-उधर छींटा था।

10 साल जेल, ₹1 करोड़ जुर्माना, संपत्ति भी जब्त… पेपर लीक के खिलाफ आ गया मोदी सरकार का सख्त कानून, NEET-NET परीक्षाओं में गड़बड़ी से उठ रहे थे सवाल

हाल ही में NEET और NET की परीक्षाओं में पेपर लीक का मामला सामने आया। जहाँ मेडिकल वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, वहीं फजीहत के बाद NET की परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लेकर आई है। शुक्रवार (21 जून, 2024) को मोदी सरकार ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) कानून, 2024 को अधिसूचित कर दिया। पूरे देश में होने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी पर इससे नकेल कसी जाएगी।

NEET और UGC NET की परीक्षाओं में गड़बड़ी के बीच ‘Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024’ के अस्तित्व में आने से उन छात्रों को राहत मिलेगी, जो पेपर लीक की समस्या से जूझ रहे थे। फरवरी 2024 में ही इसे संसद में पारित करा लिया गया था। इसमें चीटिंग में संलिप्त आरोपितों के लिए 3 से से 5 साल तक की कारावास की सजा का प्रावधान किया है। वहीं संगठित रूप से चीटिंग गिरोह चलाने वालों को 10 साल तक की सज़ा दी जा सकती है।

वहीं उनके लिए साथ-साथ 1 करोड़ रुपए तक के जुर्माने की सज़ा भी मुक़र्रर की गई है। परीक्षा संपन्न कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारी, कोई गिरोह या फिर कोई भी समूह या संस्था इस अपराध में शामिल होता है तो उन्हें कम से कम 5 साल की सज़ा भुगतनी होगी, जो 10 साल तक बढ़ाई जा सकती है। अगर कोई संस्था इसमें शामिल होती है तो उसकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी। परीक्षा आयोजित करने में जो खर्च आता है, उसकी वसूली भी पेपर लीक गिरोह से ही की जाएगी। केंद्र सरकार किसी केंद्रीय जाँच एजेंसी को भी ऐसी स्थिति में जाँच सौंप सकती है।

हालाँकि, परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को कड़ी सज़ा से छूट दी गई है और उन्हें मौजूदा कानूनों के तहत ही परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के नियमों के हिसाब से सज़ा मिलेगी। ‘Unfair Means’ में पेपर लीक के अलावा परीक्षा के दौरान सवालों के जवाब को लेकर अभ्यर्थियों की मदद करना, कम्प्यूटर नेटवर्क के साथ गड़बड़ी करना, किसी अभ्यर्थी के बदले परीक्षा में पहुँचना, फर्जी दस्तावेज बनाना, फर्जी परीक्षा आयोजित करना और मेरिट लिस्ट के साथ छेड़छाड़ को भी रखा गया है। ये गैर-जमानती होगा। DSP या ACP रैंक के अधिकारी इसकी जाँच करेंगे।