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‘लग रहा था कयामत का दिन आ गया’: 577 हज यात्री भीषण गर्मी से मरे, कई लापता, मक्का की ग्रैंड मस्जिद में 51.8 डिग्री तक पहुँचा पारा

दुनिया के सबसे बड़े मजहबी यात्रा यानी हज यात्रा पर सऊदी अरब पहुँचे 577 जायरीनों की अब तक मौत हो चुकी है। इस साल मरने वालों की संख्या सबसे बड़ी है। सबसे ज्यादा मौतें मिस्र से पहुँचे जायरीनों की हुई, जिनकी संख्या 323 तक पहुँच गई है। यही नहीं, अब तक कई जायरीनों के लापता होने की भी खबरें आ रही हैं, जिन्हें ढूँढने के लिए विदेशी सरकारें सऊदी प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हज के लिए मक्का पहुँचे 550 से अधिक तीर्थयात्रियों की मौत की खबर सामने आ रही है। मरने वालों में कम से कम 323 मिस्र के थे। इनमें से अधिकांश की मौत गर्मी से होने वाली बीमारियों के कारण हुई है। सऊदी अरब के दो राजनयिकों ने न्यूज एजेंसी एएफपी को इसकी जानकारी दी है। इनमें से एक ने कहा कि मिस्र के जितने भी तीर्थयात्रियों की मौत हुई है, उनमें से अधिकांश ने भीषण गर्मी के कारण दम तोड़ा। हालाँकि, एक की मौत भगदड़ के दौरान घायल होने के कारण हुई है। राजनयिकों ने कहा कि मरने वालों में कम से कम 60 जॉर्डन के नागरिक भी शामिल हैं। इसके साथ ही मरने वालों की कुल संख्या 577 हो गई है। बता दें, पिछले साल मक्का में 240 लोगों की मौत हुई थी।

सऊदी रायनयिक ने बताया कि मिस्र के अलावा अन्य देशों के मरने वाले लोगों की मौत का कारण गर्मी है, जबकि कुछ अन्य लोग भगदड़ के कारण मरे हैं। उन्होंने बताया कि मक्का के सबसे बड़े शवगृह में से एक अल-मुआइसिम शवगृह पूरी तरह भर गया है। यहाँ 550 शव रखे हैं। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हज के दौरान कुछ मिस्रवासी लापता हो गए हैं, जिनकी खोज के लिए काहिरा सऊदी अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहा है।

सऊदी अरब में इस साल पहुँचे 1.8 मिलियन लोग, हर तरफ बदइंतजामी

इस साल, हज यात्रा पर 1.8 मिलियन लोग यानी 18 लाख लोग पहुँचे हैं। इसमें से 16 लाख लोग विदेशी हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो सऊदी अरब का बताया जा रहा है। इस वीडियो को शेयर किया है पत्रकार मोहम्मद ताहा ने। इस वीडियो को बनाने वाला व्यक्ति सड़क पर पड़े हुए शवों को दिखाता है और दावा करता है कि घंटों तक कोई एंबुलेंस नहीं आई। इस वीडियो में कई शव सड़कों के किनारे डिवाइडर और फुटपाथ पर रखे देखे जा सकते हैं। यही नहीं, व्यक्ति वीडियो बनाते समय कई शवों को पास से भी दिखाता है और बताता है कि बस, ट्रेन, टैक्सी जैसी कोई भी सुविधा नहीं है और लोग मर रहे हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

मोहम्मद ताहा ने वीडियो को पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा, “इस वीडियो में कई हज यात्रियों के कई शव देखे जा सकते हैं। क्या सऊदी शासन को जवाब देह ठहराया जाएगा? वे इस इस्लामी पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और इससे अरबों कमाते हैं। लेकिन अभी तक, मैंने इस पर मीडिया में ज़्यादा कवरेज नहीं देखी है!”

मिस्र की 61 वर्षीय तीर्थयात्री अजा हामिद ब्राहिम ने समचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्होंने सड़क के किनारे पड़ी हुई लाशें देखीं। ऐसा लग रहा था कि जैसे कयामत का दिन आ गया है। बड़ी संख्या में मौतों और उसके बाद शवों को लेकर हो रही बदइंतजामी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग सऊदी अरब की आलोचना कर रहे हैं।

काबा में 51 डिग्री सेल्सियस तपामान

सऊदी मौसम सेवा के अनुसार, सोमवार (17 जून 2024) को मक्का की ग्रैंड मस्जिद में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस पहुँच गया। इस जगह पर तीर्थयात्री काबा की परिक्रमा करते हैं। ग्रैंड मस्जिद के पास स्थित मीना में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस था। इस जगह पर हज यात्रियों ने तीन कंक्रीट की दीवारों पर शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा की। यहाँ गर्मी और भीड़ ने स्थिति को विकट बना दिया था।

25 एकड़ अतिक्रमण मुक्त, मंदिर-मस्जिद समेत 1800 अवैध निर्माण ध्वस्त… जो हल्द्वानी-जहाँगीरपुरी में न हो पाया, CM योगी ने अकबरनगर में कर दिखाया: बनेगा रिवरफ्रंट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अकबर नगर में मंगलवार (18 जून, 2024) की देर रात अवैध रूप से बनी मस्जिद, मदरसे और मंदिर के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। रात 12.30 से 3.30 बजे तक 8 बुलडोजर को कार्रवाई के लिए लगाया गया था। बता दें कि अदालत के आदेश के बाद ये सब किया जा रहा है, क्योंकि यहाँ रिवर फ्रंट का निर्माण होना है। लखनऊ में कई जगह पोस्टर लगा कर इसकी सूचना दे दी गई थी, और उधर का आवागमन भी रोक दिया था।

कुकरैल नदी की जमीन के एक बड़े हिस्से को कब्ज़ा कर उस पर अवैध निर्माण बना दिए गए थे। अब तक 1169 आवास और 101 कमर्शियल निर्माणों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई की जा चुकी है। ध्वस्तीकरण का कार्य पूरा हो गया है, अब सिर्फ मलबा हटाने का काम बचा हुआ है। 24.5 एकड़ में बने 1800 से अधिक अवैध निर्माण नेस्तनाबूत किए जा चुके हैं। दिसंबर 2023 से ही अतिक्रमण हटाने का काम चल रहा है। अब ये इलाका पर्यटन का हब बनेगा।

लखनऊ के चिड़ियाघर को भी इसी जगह पर पुनर्स्थापित किए जाने की योजन है। कुकरैल नदी को पुनर्जीवन देने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में सुनवाई हुई। अदालत ने भी कार्रवाई की अनुमति दी। बादशाह नगर से लेकर लेकर अकबरनगर तक के रास्ते को इस दौरान बंद रखा गया था, PAC मुख्यालय से शुरू होने वाले फ्लाईओवर पर भी पुलिस तैनात रही, अकबरनगर से पॉलिटेक्निक कॉलेज जाने वाले रास्ते पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी, कुल 7 जगह बैरिकेडिंग लगा कर पुलिस ने पहरा दिया।

ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही थी, मीडिया को भी तस्वीरें लेने की अनुमति नहीं थी क्योंकि मामला संवेदनशील था। कुकरैल नदी का सौंदर्यीकरण और रिवर फ्रंट का निर्माण CM योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। अकबरनगर के विस्थापितों को 10 किलोमीटर दूर बसंतकुंज में योगी सरकार ने घर दिया है। जल स्तर बनाए रखने के लिए शारदा नहर का पानी भी इसमें छोड़ा जाएगा। नदी की 6 किलोमीटर लंबाई के साथ एक झील को भी विकसित किया जाएगा। बारिश की पानी को इकट्ठा कर के भी कुकरैल नदी में भरे जाने की योजना है।

ये उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। आपको याद होगा कि जब जहाँगीरपुरी में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई हो रही थी तब वामपंथियों ने उसे कुछ ही मिनटों में रुकवा दिया था। CPI(M) की नेता वृंदा करात सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति लेकर जहाँगीरपुरी पहुँचीं और तुरंत स्पेशल कमिश्नर दीपेंद्र पाठक को दिखाया। फिर कार्रवाई रोकनी पड़ी। 20 अप्रैल, 2022 को सुबह 10 बजे बुलडोजर पहुँचा था, 11 बजे सुप्रीम कोर्ट ने स्टे ऑर्डर दे दिया

इसी तरह हल्द्वानी का भी उदाहरण हमारे सामने है, जहाँ रेलवे की जमीन पर एक पूरी की पूरी बस्ती ही बसा दी गई। हल्द्वानी में ‘मलिक का बगीचा’ से अतिक्रमण हटाने के क्रम में वहाँ दंगे ही भड़क गए। कॉन्ग्रेस नेता व अधिवक्ता सलमान खुर्शीद अतिक्रमणकारियों की तरफ से न्यायालय में पैरवी करने पहुँच गए। बनभूलपुरा में 8 फरवरी, 2024 को हिंसा भड़क उठी। पुलिस-प्रशासन पर जम कर पत्थरबाजी हुई, आगजनी की गई और कार्रवाई रोकनी पड़ी

इसी तरह दिल्ली में तो पुलिस की मौजूदगी में पृथ्वीराज चौहान के किले के परिसर में मजार उगा दी गई। आरोप लगा था कि दिल्ली स्थित किला राय पिथौरा के पास मजार का निर्माण हुआ, वो भी पुलिस के संरक्षण में। इसका वीडियो भी सामने आया। कुछ पत्थरों को हरे रंग से रंग दिया गया, वक्फ बोर्ड की भी इस पर नज़र थी। मेहरौली स्थित संजय वन के बीचोंबीच इस तरह की हरकत से स्थानीय लोग भी उग्र हो गए थे और पूछने लगे थे कि वहाँ उन्हें क्यों नहीं जाने दिया जा रहा है?

ऐसे समय में जब पुलिस खुद ही कई प्रदेशों में इस तरह के अवैध मजारों की निगरानी कर के ये सुनिश्चित करती है कि वहाँ नमाज अदा की जाए, उत्तर प्रदेश की राजधानी में इको-टूरिज्म हब विकसित करने के लिए एक पूरी की पूरी अवैध बस्ती को ध्वस्त कर सरकारी जमीन को खाली कराना और विस्थापितों को कहीं और बसाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। बिना किसी हो-हल्ले के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए योगी सरकार बधाई की पात्र है।

ज्ञान से इतना खौफ खाता है इस्लाम कि 3 महीने तक जलती रहीं किताबें, नालंदा विश्व​विद्यालय से बची थी बख्तियार खिलजी की जान फिर भी मजहब के लिए मचाया कत्लेआम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज (19 जून 2024) नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस का उद्घाटन किए जाने के बाद विश्व की सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय की चर्चा चारों ओर है। हर कोई इस यूनिवर्सिटी के इतिहास और इससे जुड़ी कहानियाँ जानना चाहता है। तो चलिए एक संक्षिप्त विवरण इस विश्वविद्यालय का दें जिसे सदियों पहले मुगल आक्रांता बख्तियार खिलजी ने आग लगाकर मिटाने का प्रयास किया था, लेकिन ज्ञान का मंदिर कहे जाने वाले इस विश्वविद्यालय की नींव इतनी मजबूत थी कि लोग आज भी इसकी महत्वता को जानते-समझते हैं। साल 2016 में यूनेस्को ने नालंदा के प्राचीन अवशेषों को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया था। आज प्रधानमंत्री मोदी ने भी नालंदा को एक विश्वविद्यालय नहीं बल्कि एक गौरव गाथा कहा है।

कब हुई थी नालंदा की स्थापना

नालंदा विश्वविद्यालय की शुरुआत सन् 450 ईस्वी में गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की थी। इसे शुरू करने का मकसद यही था कि ध्यान और अध्यात्म के लिए बनाए गए स्थान पर लोगों को ज्ञान भी मिले। स्वयं गौतम बुद्ध ने कई बार इस विश्वविद्यालय की यात्रा की थी और यहाँ पर ध्यान भी लगाया था। धीरे-धीरे ये विश्वविद्यालय भारत में उच्च शिक्षा का सबसे महत्तवपूर्ण केंद्र तो बना ही, साथ में पूरी दुनिया में भी इसे प्रसिद्ध होने में समय नहीं लगा।

नालंदा विश्वविद्यालय का विशाल पुस्तकालय

सबसे खास बात इस विश्वविद्यालय की यह थी कि इसमें 9 मंजिला पुस्तकालय था। इस पुस्तकालय का नाम धर्म गूंज था जिसे तीन हिस्सों में बाँटा गया था- रत्नरंजक, रत्नोदधि, रत्नासागर। इस पुस्तकालय में एक समय में 90 लाख से ज्यादा किताबें थीं। ये इतना विशाल था कि जब मुगल आक्रांता बख्तियार खिलजी ने इसमें आग लगवाई तो किताबें करीबन 3 महीने तक जलती रहीं थीं।

नालंदा यूनिवर्सिटी

चिढ़ में लगाई खिलजी ने नालंदा में आग

बख्तियार खिलजी को बिहार का पहला मुस्लिम शासक माना जाता है जिसके हाथ अनेक धर्माचार्य और बौद्ध भिक्षुओं के खून के सने थे। उसने ही नालंदा में भी तबाही मचाई थी वो भी तब जब इस विश्वविद्यालय के एक वैद्य ने उसे मरते-मरते बचाया था।

बताया जाता है कि एक ख्तियार खिलजी बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया था। उस समय उसके हकीमों ने उसका काफी उपचार किया लेकिन कहीं से कोई फायदा नहीं हुआ। तब उसे नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्रजी से उपचार कराने की सलाह दी गई। कट्टर इस्लामी बख्तियार खिलजी किसी कीमत पर हिंदुस्तानी दवा नहीं खाना चाहता था इसलिए उसने जान बचाने के लिए आचार्य राहुल को बुलवाया तो मगर उनकी कोई भी दवा खाने से मना कर दी। इसके साथ उसने ये धमकी भी दी कि अगर वह ठीक नहीं हुआ तो आचार्य की हत्या करवा देगा।

वैद्य ने खिलजी की बात सुनी और अगले दिन सके पास कुरान लेकर गए। उन्होंने खिलजी से कहा- “कुरान की पृष्ठ संख्या इतने से इतने तक पढिए ठीक हो जाएँगे।” बताया जाता है कि वैद्य ने कुरान के कुछ पन्नों पर एक अदृश्य दवा लगा दी थी जिससे जब खिलजी ने उन पन्नों को पढ़ना शुरू किया तो वो दवा उसके शरीर में जाती गई और पृष्ठ खत्म होते होते वो ठीक हो गया।

वैद्य राहुल ने बख्तियार खिलजी की जान तो बचा दी, पर इसके बाद खिलजी एहसान मानने की जगह भीतर ही भीतर भारतीय वैद्यों से चिढ़ने लगा। उसे अपनी जान बचने की खुशी नहीं हुई बल्कि गुस्सा आया कि उसके हकीमों से ज्यादा ज्ञान भारतीय वैद्यों के पास क्यों है। इसी चिढ़ में कहा जाता है कि खिलजी ने 1193 में नालंदा विश्वविद्यालय में आग लगवा दी। वहाँ इतनी पुस्तकेंं थीं कि आग लगी भी तो तीन माह तक पुस्तकें जलती रहीं। इसी दौरान उसने हजारों धर्माचार्य और बौद्ध भिक्षु मार डाले।

नालंदा यूनिवर्सिटी लगा इस्लाम के लिए खतरा

कुछ इतिहासकार कहते हैं कि खिलजी के नालंदा विश्वविद्यालय तबाह करने के पीछे कारण ये था कि वो इसे इस्लाम के प्रसार के बीच चुनौती मानता था। उसे लगता ता नालंदा विश्वविद्यालय में जिस तरीके से बौद्ध और हिंदू धर्म फल-फूल रहा है, उससे इस्लाम को खतरा हो सकता है। इसके बारे में फारसी इतिहासकार मिनहाजुद्दीन सिराज अपनी किताब ‘तबाकत-ए-नासिरी’ में भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा था कि खिलजी किसी कीमत पर बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार नहीं चाहता था, पहले उसने नालंदा विश्वविद्यालय में इस्लाम की शिक्षा का दबाव डाला, फिर हमला कर दिया। उस बर्बर कार्रवाई में पूरा विश्वविद्यालय तबाह हो गयाष

तक्षिला के बाद दूसरी प्राचीन यूनिवर्सिटी

आज लोगों को लगता है कि लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूरोप की बोलोग्ना यूनिवर्सिटियाँ देश की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटियाँ हैं, लेकिन हकीकत यह है कि नालंदा का इतिहास इन यूनिवर्सिटियों से भी 500 साल पहले का है। तक्षिला के बाद इसी विश्वविद्यालय को दुनिया के सबसे पुराना विश्वविद्यालय कहा जाता है इस संबंध में सातवीं शताब्दी में चीन के यात्री ह्नेनसांग और इत्सिंग अपनी किताबों में लिख चुके हैं। वो दोनों भारत के दौरे पर आए थे जब उन्होंने इस यूनिवर्सिटी को देखा और बिन इसके बारे में लिखे रह नहीं पाए। विश्वविद्यालय की खासियत थी कि यहाँ शिक्षक और छात्रों के साथ सन्यासियों के विचारों को भी महत्व दिया जाता था। खास बात ये भी थी इस यूनिवर्सिटी में सामान्य विषयों के अलावा धर्म, दर्शन, तर्कशास्त्र, चित्रकला, वास्तु, अंतरिक्ष विज्ञान, धातु विज्ञान, अर्थशास्त्र की जानकारियाँ दी जाती थीं। इसमें न केवल भारत के छात्र पढ़ते थे बल्कि कोरिया, जापान, तिब्बत, चीन, ईरान, इंडोनेशिया, ग्रीस, मंगोलिया समेत कई अन्य जगहों पर भी लोग यहाँ आते थे। इसके अलावा आवासीय परिसर के तौर पर यह पहला विश्वविद्यालय है, जो 800 साल तक अस्तित्व में रहा। खिलजी द्वारा इसे तबाह किए जाने के बाद जब इसकी खुदाई हुई तो वहीं, आवासीय परिसर के तौर पर यह पहला विश्वविद्यालय है, यह 800 साल तक अस्तित्व में रहा।

पेट्रोल-डीजल के बाद पानी-बस किराए की बारी, कर्नाटक में जनता पर बोझ खटाखट: कॉन्ग्रेस की ‘रेवड़ी’ से खजाना खाली, अब कमाई के लिए विदेशी कंपनी को काम पर लगाया

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार राज्य के आम आदमी पर और भी बोझ डालने की तैयारी कर रही है। कई रेवड़ी का वादा करके सत्ता में आई कॉन्ग्रेस के लिए राज्य का खजाना चिंता का सबब बन रहा है। खजाने की भरपाई के लिए कॉन्ग्रेस सरकार ने डीजल पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने के बाद अब पानी के दाम और बस के किराए पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। इन्हें भी बढ़ाए जाने की बात हो रही है। इसके अलावा, कॉन्ग्रेस सरकार ने एक अमेरिकी कम्पनी को कमाई बढ़ाने पर सुझाव देने को लेकर काम पर लगाया है।

राज्य में जीत को कॉन्ग्रेस ने किए थे ‘रेवड़ी’ वादे

2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस ने पाँच गारंटी दी थी। इन्हें ‘रेवड़ी’ कहा गया था। कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देगी। इसे गृह ज्योति योजना का नाम दिया गया था। इसके अलावा गृह लक्ष्मी नाम की योजना का भी एक वादा किया गया था। इसके अंतर्गत कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि वह राज्य की महिलाओं को ₹2000 प्रतिमाह देगी।

कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति और मुफ्त सुविधाओं के वादों से अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले बोझ को दरकिनार करते हुए हर परिवार को 10 किलो अनाज देने का भी वादा किया था, इसे अन्न भाग्य योजना का नाम दिया गया था। कॉन्ग्रेस ने राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का भी वादा किया था। इसके अलावा राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी ₹1500 देने की बात कही गई थी। इनमें से कुछ योजनाएँ पूरी तरह से लागू कर दी गई हैं तो कुछ को आंशिक रूप से लागू किया गया है।

कॉन्ग्रेस के इन ‘रेवड़ी’ वादों का असर अब राज्य के खजाने पर दिख रहा है और वह राजस्व बढ़ाने के लिए नई-नई जुगत भिड़ा रही है। वह राज्य की आम जनता को अब नए कर और बढ़े करों से लादना चाह रही है। साथ ही वह कमाई के नए जुगाड़ भी लगा रही है।

मुफ्त वाली गारंटी ले गईं बजट का बड़ा हिस्सा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की यह गारंटियाँ बजट का एक बड़ा हिस्सा ले जा रही हैं। इससे बाकी के विकास कामों के लिए पैसा नहीं बच रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹39,825 करोड़ का खर्चा किया गया था। यह कर्नाटक के 2023-24 के बजट का लगभग 17% था। वित्त वर्ष 2024-25 में गारंटियों का यह खर्चा और बढ़ गया है। 2023-24 के मुकाबले इसमें लगभग एक तिहाई की वृद्धि हुई है।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश किए गए बजट में कर्नाटक ने इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹52,000 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। राज्य की कई अन्य योजनाओं का असर इस खर्च के कारण पड़ रहा है। कॉन्ग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में राज्य के SC-ST समुदाय के कल्याण के लिए खर्च किए जाने वाले ₹11,000 करोड़ को भी इन गारंटियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया था, जिसके कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी।

जुलाई 2023 में ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अपने विधायकों से स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें कोई भी फंड नहीं दिए जाएँगे और पूरा फोकस गारंटियों को पूरा करने पर लगाया जाएगा। भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य के विकास का सारा पैसा अपने चुनावी वादे पूरे करने में फूँक रही है जिससे राज्य पिछड़ रहा है।

डीजल-पेट्रोल के बाद पानी और बसों के किराए बढ़ाने की तैयारी

कॉन्ग्रेस सरकार अब अपना खजाना भरने के लिए लगातार जनता पर नए बोझ लाद रही है। राज्य सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य में पेट्रोल और डीजल पर सेल्स टैक्स बढ़ाया था। इसके अंतर्गत पेट्रोल और डीजल के दाम राज्य क्रमशः ₹3 और ₹3.50 बढ़ गए थे। इसको लेकर कॉन्ग्रेस सरकार की खूब आलोचना हुई थी। यह निर्णय लोकसभा चुनाव के आने के तुरंत बाद लिया गया था।

पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने से भी कॉन्ग्रेस सरकार का खजाना पूरा नहीं पड़ रहा है। अब कॉन्ग्रेस सरकार में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि बेंगलुरु में पानी आपूर्ति के दाम बढ़ाए जाएँगे। उन्होंने कहा है कि पानी की कीमतें बढ़ाना जरूरी है। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार का दावा है कि बेंगलुरु का जल आपूर्ति विभाग अपना बिजली का बिल और कर्मचारियों की तन्ख्वाह तक नहीं दे पा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कावेरी नदी से पानी लेने वाले बाशिंदों के लिए पानी की कीमतें 40% बढ़ाए जाने की तैयारी है।

पानी के अलावा कर्नाटक में बसों का किराया बढ़ाए जाने पर विचार कॉन्ग्रेस सरकार विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सोमवार (17 जून, 2024) को हुई एक बैठक में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने राज्य में बसों का किराया बढ़ाने पर चर्चा की। बसों का किराया बढ़ाने के समर्थन में तर्क दिया गया कि यह लम्बे समय से अटका हुआ है और इसे 2015 में बढ़ाया गया था। सिद्दारमैया ने इसके अलावा पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाए जाने के निर्णय का भी बचाव किया।

अमेरिकी कम्पनी बताएगी, कैसे कमाए कॉन्ग्रेस सरकार

अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए नई जुगत भिड़ाई है। कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने और राजस्व बढ़ाने पर सुझाव देने के लिए एक अमेरिकी कम्पनी बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) को काम पर लगाया है। यह कंसल्टिंग कम्पनी अब राज्य सरकार को बताएगी कि वह अपना खजाना कैसे बढ़ा सकती है। यह निर्णय चुनावी गारंटियों के बढ़ते खर्चे के बीच लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि BCG ने सरकार को कुछ सुझाव भी इस संबंध में दिए हैं।

गौरलतब है कि भाजपा सरकारी खजाने पर विपरीत असर डालने वाली ऐसी योजनाओं का विरोध करती आई है। हालाँकि, आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस ने इन योजनाओं को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। हालिया लोकसभा चुनावों में भी कॉन्ग्रेस ने हर महिला को प्रतिमाह ₹8500 देने की बात कही थी।

पूरी हुई 832 साल की प्रतीक्षा, राष्ट्र को PM मोदी ने समर्पित की नालंदा की विरासत: कहा- आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्धघाटन किया। नया परिसर नालंदा विश्वविद्यालय के प्राचीन खंडहरों के पास है, जिसे नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 के माध्यम से स्थापित किया गया था। यह अधिनियम 2007 में फिलीपींस में दूसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय का पालन करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन करने के बाद कहा, “नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।”

नालंदा विश्वविद्यालय में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मुझे तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण करने के बाद पहले 10 दिनों में ही नालंदा आने का अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्य तो है ही, मैं इसे भारत की विकास यात्रा के एक शुभ संकेत के रूप में देखता हूँ। नालंदा केवल एक नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा एक मूल्य है, मंत्र है, गौरव है, गाथा है। नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएँ, लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं बिहार के लोगों को भी बधाई देता हूँ। बिहार अपने गौरव को वापस लाने के लिए जिस तरह विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, नालंदा का ये परिसर उसी की एक प्रेरणा है।

पीएम मोदी ने कहा, “नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा केवल भारत के ही अतीत का पुनर्जागरण नहीं है। इसमें विश्व के, एशिया के कितने ही देशों की विरासत जुड़ी हुई है। नालंदा यूनिवर्सिटी के पुनर्निर्माण में हमारे साथी देशों की भागीदारी भी रही है। मैं इस अवसर पर भारत के सभी मित्र देशों का अभिनंदन करता हूँ। अपने प्राचीन अवशेषों के समीप नालंदा का नवजागरण। ये नया कैंपस, विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय देगा। जो राष्ट्र, मजबूत मानवीय मूल्यों पर खड़े होते हैं… वो राष्ट्र इतिहास को पुनर्जीवित करके बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था… शिक्षा को लेकर यही भारत की सोच रही है… शिक्षा ही हमें गढ़ती है, विचार देती है और उसे आकार देती है। प्राचीन नालंदा में बच्चों का प्रवेश उनकी पहचान, उनकी राष्ट्रीयता को देख कर नहीं होता था। हर देश हर वर्ग के युवा हैं यहाँ पर। नालंदा विश्वविद्यालय के इस नए परिसर में हमें उसी प्राचीन व्यवस्था को फिर से आधुनिक रूप में मजबूती देनी है और मुझे ये देख कर खुशी है कि दुनिया के कई देशों से आज यहाँ कई विद्यार्थी आने लगे हैं।

डॉ कलाम ने नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने की जताई थी इच्छा: नीतीश कुमार

सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि खुशी की बात है कि नालंदा विश्वविद्यालय के परिसर का उद्घाटन आज प्रधानमंत्री मोदी के करकमलों से किया जा रहा है। पुराने नालंदा विश्वविद्यालय में देश के ही नहीं दुनिया की अनेक जगह के लोग आकर पढ़ते थे लेकिन दुर्भाग्य से ये विश्वविद्यालय 1200 ईस्वी में नष्ट हो गया था। 2005 से हम लोगों को काम करने का मौका मिला तब से हमने बिहार के विकास का काम शुरू किया। 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम बिहार आए थे और उन्होंने अपने संबोधन में नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने की बात की थी।

साल 2014 से अस्थाई कैंपस में संचालित हो रहा था नालंदा विश्वविद्यालय

मूल रूप से पाँचवीं शताब्दी में स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय, दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित करने वाला एक प्रसिद्ध संस्थान था। यह 12वीं शताब्दी में नष्ट होने तक 800 वर्षों तक फलता-फूलता रहा। आधुनिक विश्वविद्यालय ने 2014 में 14 छात्रों के साथ एक अस्थायी स्थान से परिचालन शुरू किया। नए परिसर का निर्माण 2017 में शुरू हुआ। नालंदा विश्वविद्यालय को ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, चीन, इंडोनेशिया और थाईलैंड सहित 17 अन्य देशों का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को 137 छात्रवृत्तियाँ प्रदान करता है। 2022-24 और 2023-25 ​​के लिए स्नातकोत्तर कार्यक्रमों और 2023-27 के पीएचडी कार्यक्रम में नामांकित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, घाना, केन्या, नेपाल, नाइजीरिया, श्रीलंका, अमेरिका और जिम्बाब्वे के छात्र शामिल हैं।

नालंदा विश्‍वविद्यालय कैम्पस में 40 कक्षाओं वाले दो शैक्षणिक ब्लॉक हैं, जिनकी कुल बैठने की क्षमता लगभग 1900 है। इसमें 300 सीटों की क्षमता वाले दो सभागार हैं। इसमें लगभग 550 छात्रों की क्षमता वाला एक छात्र छात्रावास है। इसमें अंतरराष्ट्रीय केंद्र, 2000 व्यक्तियों तक की क्षमता वाला एम्फीथिएटर, फैकल्टी क्लब और खेल परिसर सहित कई अन्य सुविधाएँ भी हैं। यह परिसर एक ‘नेट जीरो’ ग्रीन कैंपस है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल

साल 1193 में दिल्ली सल्तनत के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के सेनापति मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने आग लगाकर इस विश्‍वविद्यालय को जला दिया था। इस यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में इतनी किताबें थीं कि 3 दिनों तक आग धधकती रही। आज ये नालंदा खंडहर के रूप में जाना जाता है और यूनेस्‍को की विश्‍व धरोहर सूची में शामिल है।

इसकी नींव गुप्त राजवंश के कुमार गुप्त प्रथम ने रखी थी। पाँचवीं सदी में बने प्राचीन विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे. छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों चीन, कोरिया और जापान से आने वाले बौद्ध भिक्षु होते थे। इतिहासकारों के मुताबिक, चीनी भिक्षु ह्वेनसांग ने भी सातवीं सदी में नालंदा में शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने अपनी किताबों में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है। यह ज्ञान और बुद्धिमत्ता के प्रसार की दिशा में प्राचीन भारत के योगदान का गवाह है।

नालंदा विश्‍वविद्यालय के नए परिसर के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री के साथ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अरविंद पनगढ़िया भी मौजूद रहे। इसके साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय के स्थापना में अहम योगदान देने वाले कुल 17 देशों के राजदूत भी शामिल हुए, तो नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे कई देशों के छात्र-छात्राएं भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

गाँव की 150+ औरतों की नग्न तस्वीर इंस्टाग्राम पर डाली, जैकब-जोसेफ-लुकोस गिरफ्तार: साथ पढ़ने वाली लड़कियों से लेकर चर्च आने वाली महिलाएँ तक शिकार

केरल के कासरगोड जिले के एक गाँव में तीन युवकों ने मिलकर अपने ही गाँव की 150 से अधिक महिलाओं की फर्जी नग्न तस्वीरें बनाईं। इन तीनों ने यह तस्वीरें बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया। तीनों युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कासरगोड के चित्तरीक्क्ल थाने की पुलिस ने जस्टिन जैकब, एबिन जोसेफ और शिबिन लुकोस को गिरफ्तार किया है। यह तीनों पिछले डेढ़ साल से अपने गाँव की महिलाओं की नग्न तस्वीरें बना रहे थे। इन्होंने इन तस्वीरों को एक निजी इन्स्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किया था, जिसे गिने चुने लोग ही देख सकते थे।

यह अपने गाँव और आसपास की महिलाओं की फोटो सोशल मीडिया से लेते थे और AI सॉफ्टवेयर के माध्यम से एडिट करते थे और उनकी नग्न तस्वीरें बनाते थे। जिन महिलाओं की तस्वीरें सोशल मीडिया के माध्यम से नहीं मिलती थी, उनकी यह फोटो अपने कैमरे से खीँच लेते थे।

इन तीनों ने अपने साथ पढ़ने वाली कम से कम 40 छात्राओं की फोटो भी एडिट करके नग्न तस्वीरें बनाई थी। यह रविवार को प्रार्थना के लिए चर्च आने वाली महिलाओं को भी निशाना बनाते थे। इनके इस कृत्य से अब गाँव की महिलाओं में दहशत फ़ैल गई है।

इस पूरे मामले का खुलासा इनके एक दोस्त के माध्यम से हुआ। दरअसल, तीनों आरोपितों में से एक सिबिन का एक दोस्त एक बार उससे मिलने आया। यहाँ उसने सिबिन के फोन में अपनी एक रिश्तेदार की अश्लील फोटो देखी, इसके बाद उसने जब पड़ताल की तो सैकड़ों ऐसे फोटो पाए।

उसने इस बात की सूचना अपनी रिश्तेदार और पुलिस को दी। इसके बाद जब पुलिस ने तीनों पर कार्रवाई की तो सिबिन और एबिन ने अपने फ़ोन से फोटो हटा दिए जबकि जस्टिन के फोन में यह फोटो पड़ी थीं। इसी आधार पर तीनों को पकड़ लिया गया।

बताया गया कि तीनों आरोपितों में से एबिन इस वर्ष कक्षा 12 की परीक्षा में फेल हो गया था। जबकि शिबिन और जस्टिन बसों को धोने का काम करते हैं। पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार करके आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। अभी तक चार शिकायतकर्ता सामने आए हैं जबकि कई और के सामने आने की बात कही जा रही है।

फिर सामने आई कनाडा की दोगलई: जी-7 में शांति पाठ, संसद में आतंकी निज्जर को श्रद्धांजलि; खालिस्तानियों ने कंगारू कोर्ट में PM मोदी को दी फाँसी

कनाडा सरकार का दोहरा चेहरा एक बार फिर से बेनकाब हुआ है। एक तरफ कनाडा का प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जी-7 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करता है और दोनों देशों के बीच सहयोग की बात करता है, तो दूसरी तरफ वो खालिस्तानी आतंकियों के प्रति अपना रवैया बदलता नहीं दिख रहा है। कनाडा में एक साल पहले मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को कनाडा की संसद में न सिर्फ श्रद्धांजलि दी गई, बल्कि उसके सम्मान में 2 मिनट का मौन रखकर उसे इज्जत भी दी।

ये वही हरदीप सिंह निज्जर है, जिसकी कनाडा में हत्या के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खुलेआम बिना किसी ठोस सबूत के भारत का नाम घसीटा था। जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव हो गया था। इस बीच, वैंकूवर में भारतीय दूतावास के बाहर खालिस्तान समर्थकों ने रैली निकाली और प्रदर्शन भी किया। खालिस्तान समर्थकों ने पीएम मोदी के पुतले के खिलाफ फर्जी केस चलाकर सुनवाई भी की और पुतले को फाँसी पर भी लटकाया। इस मामले में भारत सरकार ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा की संसद ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के लिए दो मिनट का मौन रखकर उसे श्रद्धांजलि दी, कनाडाई संसद ने यह शर्मनाक हरकत तब की है जब 23 जून को कनिष्क विमान हादसे के 39 साल पूरे हो रहे हैं। कनिष्क विमान में धमाका हुआ था, जिस पर आरोप खालिस्तानी आतंकियों पर लगा था। इस धमाके में कनाडाई नागरिकों की भी मौत हुई थी, जिसे कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। इन सबके बावजूद कनाडा न सिर्फ खालिस्तानी तत्वों को आश्रय दे रहा है, बल्कि बढ़ावा भी दे रहा है। आज खालिस्तानी तत्व कनाडा की राजनीति पर अहम पकड़ रखने लगे हैं। यही नहीं, कनाडा की संसद नाजी सैनिक को भी संसद में सम्मान दे चुकी है।

बता दें कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की पिछले साल 18 जून को एक गुरुद्वारे की पार्किंग में हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हरदीप सिंह कनाडा के वैंकूवर शहर स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा का अध्यक्ष भी था। हरदीप सिंह निज्जर खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा भारतीय मूल का एक कनाडाई सिख अलगाववादी नेता था। भारत सरकार की ओर से उसे आतंकवादी घोषित किया गया था। वह आतंकवादी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स से जुड़ा हुआ था।

पीएम मोदी पर चर्चा हत्या का मुकदमा

इस बीच, मंगलवार (18 जून 2024) को वैंकूवर में भारतीय दूतावास के सामने खालिस्तान समर्थकों ने रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने सड़कों पर पीएम मोदी पर मुकदमा चलाने जैसी झाँकी निकाली और प्रतीकात्मक रूप से उन्हें मुजरिम के तौर पर पेश किया। यही नहीं, मॉक ट्रायल शुरू होने से पहले जेल की वर्दी पहने मोदी के पुतले को एक अस्थायी पिंजरे में रखकर सड़क पर घुमाया गया। इसके बाद उनके पुतले को सजा सुनाई गई और फाँसी दे दी गई। इस मामले पर भारत सरकार ने तीखा विरोध दर्ज कराया और कनाडा को सबूतों के साथ डाँट लगाई। भारतीय दूतावास ने कनाडा की सरकार से एक बार फिर से कहा है कि वो खालिस्तानी तत्वों और भारत सरकार के विरोधियों को बढ़ावा न दे।

लाश, कुत्ते, डिलीवरी ब्वॉय… ऐसे खुला रेणुका स्वामी की हत्या का राज, छिपाने के लिए एक्टर दर्शन ने दिए थे ₹30 लाख: ऑटोप्सी रिपोर्ट से नए खुलासे

कर्नाटक के फैन हत्याकांड मामले में कुछ नए खुलासे हुए हैं। सबसे पहले तो रेणुका स्वामी की ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि रेणुका को अपहरण के बाद मार-मारकर इतना टॉर्चर किया गया था कि उसके शरीर से अत्यधिक खून बहने के कारण वो शॉक में चला गया था और उसका हैमरेज हो गया था। इसके अलावा इस मामले में पुलिस की जाँच से ये भी सामने आया है कि आरोपितों ने हत्या के बाद खून से सने कपड़े बदलने के लिए रिलायंस स्टोर से जाकर कपड़े खरीदे थे। पुलिस ने एक्टर के कपड़े और अन्य सबूत उसके आरआर नगर स्थित आवास से किए हैं।

गिरफ्तारी के बाद दर्शन ने बताया था कि उसने हत्या की रात पहने कपड़े उसके घर पर छोड़े थे। ऐसे में पुलिस दर्शन को घर लेकर गई, जहाँ छानबीन में पहले कुछ नहीं मिला। बाद में टेरेस पर देखा तो वहाँ कपड़ों को धोकर सूखने के लिए डाल दिया गया था। पुलिस ने सारे कपड़े, जूते भी घर से बरामद किए हैं। दर्शन की रिमांड कॉपी से ये भी जानकारी सामने आ रही है कि अभिनेता ने इस मामले में अपने नाम को रफा-दफा कराने के लिए आरोपित प्रदोष को कुल 30 लाख रुपए दिए थे। इस रकम में बाकी आरोपितों को दी गई 5-5 लाख रुपए की राशि भी सम्मिलित थी। पुलिस को पड़ताल में आरोपितों के घर से इन रुपयों में से कुछ रुपए बरामद भी हुए हैं।

वहीं आरोपितों ने पूछताछ में बताया है कि उन्होंने रेणुका स्वामी को पीटने के लिए लाठी, पेड़ की टूटी छड़ और बोतल का इस्तेमाल किया था। छानबीन में घटनास्थल से पुलिस को रेणुकास्वामी के कपड़े बरामद हुए हैं। पुलिस ने घटना को अंजाम देने के लिए प्रयोग में लाई गई स्कॉर्पियो भी जब्त कर ली है। कार की बैक सीट पर खून के धब्बे मिले हैं। पुलिस ने अब तक कुल 10 फोन को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा है।

ये भी मालूम चला है कि आरोपित प्रदोश और राघवेंद्र ने मृतक के मोबाइल फोन को नाले में फेंक सबूत मिटाने की कोशिश की। इसके बाद राघवेंद्र ने मृतक के कपड़ों को आरआर नगर की खाली जगह पर ठीकाने पर लगाया। इसके बाद शव को भी नाले के पास फेंक दिया गया, जिसे कुत्तों को नोचते एक फूड डिलीवरी ब्वॉय ने देखा और फिर उसने इस संबंध में जानकारी दी, तब जाकर मामला खुला।

बकरीद पर भी पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों की प्रताड़ना नहीं हुई बंद, पुलिस ने घर-घर जाकर मारा छापा: कुर्बानी देने पर 36 गिरफ्तार

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का दमन लगातार जारी है। पाकिस्तान के पुलिस-प्रशासन को अहमदिया समुदाय का बकरीद के मौके पर कुर्बानी देना भी रास नहीं आ रहा है। ऐसा करने वालों पर पाकिस्तान की पुलिस अत्याचार कर रही है। कुर्बानी देने वालों के घरों में छापे मारे जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बकरीद के बाद पाकिस्तान में पुलिस ने कम से कम 36 अहमदिया को गिरफ्तार किया है। इनका अपराध यह है कि इन्होने बकरीद के दिन कुर्बानी दी थी। पाकिस्तान में अहमदियों का कुर्बानी देना अपराध है। अहमदियों को पाकिस्तान में गैर-मुस्लिम माना गया है।

अहमदिया समुदाय के लिए पाकिस्तान में काम करने वाली संस्था जमात-ए-अहमदिया के सदस्य आमिर महमूद ने मीडिया को बताया, “पाकिस्तान भर में ईद-उल-अजहा के मौके पर पशुओं की कुर्बानी करने के आरोप में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के कम से कम 36 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से अधिकतर लोग पंजाब प्रांत के हैं।”

जमात ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में पुलिस भी इस प्रताड़ना में हिस्सा ले रही है। वह अहमदियों के घरों पर जाकर छापे मार रही है। जहाँ भी कोई अहमदिया परिवार कुर्बानी करते मिलता है, तो उस परिवार सदस्यों को गिरफ्तार किया जा रहा है साथ में कुर्बानी वाले पशु को भी जब्त किया जा रहा है।

अहमदियों का पाकिस्तान में उत्पीड़न यहाँ तक बढ़ गया है कि उन्हें ईद की नमाज तक पढ़ने से रोका गया। पाकिस्तान की कट्टर इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक इस आग में घी डालने का काम कर रही है और अहमदियों को धमका रही है। पाकिस्तानी पुलिस के अहमदियों को गिरफ्तार करने के वीडियो भी सामने आए हैं।

अहमदियों को प्रताड़ित करने का ऐसा ही एक मामला पंजाब के टोबा टेक सिंह जिले से सामने आया है। यहाँ गोजरा गाँव में बकरीद के मौके पर एक अहमदिया मुस्लिम पर बकरा कुर्बान करने का आरोप लगाकर उसके खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में कहा गया है कि अहमदिया व्यक्ति ने खुद को मुसलमान बताकर एक अपराध किया है।

यह शिकायत तहरीक-ए-लब्बैक ने दर्ज करवाई है। शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया है। अहमदियों की प्रताड़ना का यह कोई अकेला मौका नहीं है। जून महीने में ही पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन इलाके में दो अहमदियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

अहमदियों को पाकिस्तान में कानून बनाकर प्रताड़ित किया जाता रहा है। उन्हें मुस्लिम का दर्जा नहीं दिया जाता और वह ऊँचे सरकारी पदों पर भी नहीं बैठ सकते। पाकिस्तान में अहमदियों को कोई भी सरकारी कागज लेने के लिए एक शपथ पत्र दाखिल करना होता है जिसमें वह खुद को गैर मुस्लिम घोषित करते हैं।

पिता YSRCP का सांसद, बेटी ने BMW से फुटपाथ पर सोए युवक को रौंदा: मौके से भागी ‘नवाबजादी’, अगले दिन गिरफ्तार हुई तो थाने से ही मिल गई बेल

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में राज्यसभा सांसद बीड़ा मस्ताव राव की बेटी ने अपनी बीएमडब्ल्यू कार से एक व्यक्ति को रौंद दिया, जिसकी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। हादसे के बाद सांसद की बेटी माधुरी मौके से फरार हो गई, हालाँकि तब तक उसकी सहेली मौके पर रुकी थी और उसके एंबुलेंस बुलाया, लेकिन उसके बाद वो भी फरार हो गई। मृतक के परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस ने आरोपित माधुरी को गिरफ्तार कर लिया, हालाँकि उसे थाने से ही जमानत दे दी गई।

बता दें कि पुणे में एक रईसजादे के बेटे ने पोर्श कार से 2 युवा इंजीनियरों की जान ले ली थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 300 शब्दों का निबंध लिखने के बाद उसे जमानत मिल गई थी। इस मामले ने बाद में कई मोड़ लिए और अब तीन पीढ़ियों के लोग जेल के भीतर हैं। वहीं, ऐसा ही एक मामला नागपुर से सामने आया है, जहाँ इंजीनियरिंग के छात्रों ने पार्टी के बाद घर जाते समय फुटपाथ पर सो रहे लोगों पर कार चढ़ा दी, जिसमें 17 लोग घायल हो गए। उनमें से दो महिलाओं की मौत हो गई।

सांसद की बेटी से जुड़ा क्या है मामला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (17 जून 2024) की रात वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद बीड़ा मस्तान राव की बेटी माधुरी अपनी सहेली के साथ बीएमडब्ल्यू कार चला रही थी, तभी उसने चेन्नई के बेसेंट नगर में नशे की हालत में फुटपाथ पर सो रहे 24 वर्षीय पेंटर सूर्या को कार से कुचल दिया। हादसे के तुरंत बाद माधुरी मौके से फरार हो गई, जबकि उसकी दोस्त कार से उतरी और एंबुलेंस को कॉल किया। इस दौरान वो एक्सीडेंट के बाद इकट्ठा हुए लोगों से बहस भी करती दिखी। हालाँकि बाद में वो भी फरार हो गई। वहाँ मौजूद लोगों ने पीड़ित पेंटर को अस्पताल पहुँचाया, लेकिन उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि अभी 8 माह पहले ही उसकी शादी हुई थी।

इस हादसे के बाद उसके रिश्तेदार और कॉलोनी के लोग जे-5 शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन पहुँच गए और कार्रवाई की माँग करने लगे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जाँच कर कार का पता लगाया और एंबुलेंस को बुलाने के लिए किए गए कॉल के आधार पर माधुरी तक पहुँची और उसे गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि माधुरी को पुलिस स्टेशन से ही जमानत भी मिल गई। माधुरी के पिता बीड़ा मस्तान राव साल 2022 से YSRCP के राज्यसभा सांसद हैं। वो विधायक भी रह चुके हैं और सी-फूड बिजनेस में उनका बड़ा नाम है।

महाराष्ट्र में पुणे-पोर्श जैसा काँड, इंजीनियरिंग के छात्रों ने 17 को रौंदा-2 की मौत

इस बीच, रविवार (16 जून 2024) की रात महाराष्ट्र के नागपुर में पुणे-पोर्श कांड जैसा मामला सामने आया। यहाँ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे 6 युवकों ने देर रात तक एक ढाबे पर पार्टी की और बाद में फुटपाथ पर कार चढ़ा दी। इस हादसे में 2 महिलाओं की मौत हो गई, तो 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, इसमें कई छोटे बच्चे हैं। यही नहीं, इस हादसे में 8 अन्य लोगों के भी घायल होने की जानकारी मिली है।

बताया जा रहा है कि शराब पीकर गाड़ी चला रहे युवकों को 2 पुलिसवालों ने रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने पुलिस वालों पर भी गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की थी। इसी क्रम में टोल नाके के पास उनकी गाड़ी पंक्चर हो गई और एक कार से टकरा गई और फिर तेज रफ्तार गाड़ी फुटपाथ पर चढ़ गई। जहाँ सो रहे लोगों को कुचल दिया। यही नहीं, नशे में होने की वजह से उन्होंने कार को फुटपाथ पर भी आगे पीछे किया और गाड़ी पलट गई। इसके बाद कार में बैठे सभी 6 लोग फरार हो गए थे। बाद में पुलिस ने गाड़ी चला रहे भूषण लांजेवार और उसके दोस्तों – वंश जादे, सन्मय पत्रिकर, अथर्व वनायत, अथर्व मोगरे और ऋषिकेश चौबे को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने सोमवार (17 जून 2024) को बताया कि लांजेवार और उसके दोस्त, सभी इंजीनियरिंग के छात्र हैं या इंजिनियरिंग खत्म कर चुके हैं। उन पर आईपीसी की धारा 304 (II) (गैर इरादतन हत्या) और अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। मृतकों की पहचान 42 वर्षीय कांतिबाई बागड़िया और 30 वर्षीय सीताराम बागड़िया के रूप में हुई है। घायलों में से सात की हालत गंभीर है, जबकि आठ अन्य को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।