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जिस मोहम्मद अरमान के लिए छोड़ा था हिन्दू धर्म, उसी ने सब छिनकर घर से किया बेदखल: अब्बू इमरान ने भी की छेड़छाड़, सास और ननदों ने मिलकर पीटा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मोहम्मद अरमान ने एक दिव्यांग हिन्दू लड़की को इस्लाम कबूल करवाकर उससे निकाह किया और फिर दहेज की माँग करते हुए छोड़ दिया। पीड़िता के गहने और रुपए भी हड़प लिए गए। ससुर इरफ़ान ने पीड़िता से छेड़खानी और सास ने अपनी बेटियों के साथ मिलकर उससे मारपीट भी की। पुलिस ने 17 जून 2024 को 5 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।

घटना बरेली के थाना क्षेत्र भोजीपुरा का है। यहाँ 17 जून को पीड़िता ने शिकायत में बताया कि वह एक पैर से दिव्यांग है। एक्सीडेंट के एवज में उसे 7 लाख रुपए मिले थे। इसी के लालच में बरेली के जादोपुर निवासी मोहम्मद अरमान ने पीड़िता से निकाह करने का वादा किया। इसके लिए उसने लड़की से इस्लाम कबूलने को कहा। पीड़िता अरमान की बातों में आ गई।

आरोपित अरमान के झाँसे में आकर पीड़िता ने हिन्दू धर्म का त्याग कर दिया और इस्लाम कबूल करने के बाद अपना नाम जोया रख लिया। 30 मार्च 2024 को वह अरमान से निकाह करके उसके घर चली गई। कुछ ही दिनों के भीतर अरमान ने पीड़िता को बहला-फुसला कर उससे 3 लाख रुपए हड़प लिए। बाद में वह लड़की पर एक्सीडेंट में मिले बाकी 4 लाख रुपए देने का दबाव बनाने लगा।

पीड़िता ने जब बाकी रुपए देने से इनकार किया तो मोहम्मद अरमान उसे तलाक देने की धमकी देने लगा। इस बीच में ससुर इरफ़ान, सास शहाना के साथ फ़राना और सन्नो नाम की ननदों ने भी पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इन सबने 5 लाख रुपए में मोहम्मद अरमान की कहीं और शादी की बात भी चलानी शुरू कर दी। दबाव देखकर पीड़िता ने ससुर इरफ़ान को 75 हजार रुपए और दे दिए।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इसमें आगे बताया गया है कि पैसे लेने के बाद भी आरोपितों के व्यवहार में बदलाव नहीं हुआ। लड़की की शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ना जारी रही। मोहम्मद अरमान ने पीड़िता से कहा, “तू हिन्दू है। हमने तो लालच में आकर तुझ से निकाह कर लिया।” इसके बाद सभी आरोपितों ने लड़की से उसके निकाह के मूल कागजात छीनने का प्रयास किया।

जब पीड़िता ने मना किया तो उसे गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं और बेरहमी से पिटाई की गई। 10 जून 2024 को पीड़िता के ससुर इरफ़ान ने गंदी नीयत से उसका हाथ पकड़ लिया। जैसे-तैसे लड़की खुद को बचाने में सफल रही। लड़की की शोर सुनकर उसकी सास, ननद और शौहर ने मिलकर उसकी बुरी तरह से पिटाई की। अगले दिन आरोपितों ने उसके तमाम कागजात, 23 हजार नकद और गहने छीन लिए।

इसके बाद उन्होंने लड़की को मारपीट कर घर से निकाल दिया। आखिरकार लड़की ने थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपित शौहर अरमान, ससुर इरफ़ान, सास शहाना और ननद फ़राना एवं सन्नो के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। इन पर IPC की धारा 498A, 323, 504, 354 (क़) और 506 के अलावा दहेज़ अधिनियम और धर्मान्तरण निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

‘4 दिनों से सोया नहीं था लोको पायलट’: कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना में PIB ने एसोसिएशन के दावे को नकारा, कहा – 30 घंटे मिला आराम

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मालगाड़ी और कंचनजंगा एक्सप्रेस के बीच हुई टक्कर को लेकर कई बातें कई जा रही हैं। रेलवे बोर्ड ने प्रथम दृष्ट्या इसके लिए मालगाड़ी के लोको पायलट को दोषी बताया है। वहीं, लोको पायलट एसोसिएशन का कहना है कि मालगाड़ी का लोको पायलट लगातार चार दिनों से सोया नहीं था। हालाँकि, PIB ने इसे फर्जी बताया है और कहा कि उसने पर्याप्त आराम किया था।

दरअसल, कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे को लेकर रेलवे बोर्ड का कहना है कि लोको पायलट ने रंगापानी स्टेशन से टीए 912 अथॉरिटी पास ली थी। इसके बाद उसने मालगाड़ी को खराब सिग्नलों के बीच तय लिमिट से ज्यादा गति से निकाला, इसलिए हादसा हुआ। हालाँकि, लोको पायलटों के संगठन ने इसे पूरी तरह नकार दिया।

ऑल इंडिया रनिंग लोको स्टाफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एसएस ठाकुर ने बताया कि सिग्नल फेल होने पर वैकल्पिक फॉर्म टीए 912 के जरिए ट्रेनें चलाई जाती हैं। उससे जुड़ा नियम है कि जब तक आगे वाली ट्रेन अगला स्टेशन पार न कर ले, तब तक दूसरी ट्रेन को पिछले स्टेशन से आगे नहीं बढ़ाते हैं। रंगापानी स्टेशन पर के स्टेशन मास्टर ने कंचनजंगा के आगे बढ़ने के 15 मिनट बाद ही मालगाड़ी को टीए 912 पेपर दे दिया था।

उन्होंने कहा कि उस वक्त कंचनजंगा एक्सप्रेस कुछ किलोमीटर आगे ट्रैक पर खड़ी थी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस लोको पायलट पर हादसे का दोष मढ़ा जा रहा है वो लगातार 4 रातों से सोया नहीं था, जबकि नियम अधिकतम लगातार 2 रात ड्यूटी का है। उन्होंने स्टेशन मास्टर की जाँच करने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि लोको पायलटों को दोषी बताने की परंपरा पुरानी है।  

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष के बयान पर कई मीडिया रिपोर्ट हुईं। इसको लेकर अब PIB FactCheck ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में न्यूज 24 के उस खबर का स्क्रीनशॉट भी लगाया गया है, जिसमें एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एसएस ठाकुर का चार रातों तक नहीं सोने वाली बयान है।

PIB FactCheck ने लिखा, “एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि कंचनजंगा रेल दुर्घटना में मालगाड़ी का लोको पायलट 04 रातों से सोया नहीं था। यह दावा फर्जी है। मालगाड़ी के लोको पायलट को अपनी ड्यूटी से पहले 30 घंटों से अधिक विश्राम मिला, जिसमें रात्रि विश्राम भी शामिल था।” अगले पोस्ट में लिखा है, “लोको पायलट ने इस माल गाड़ी में मॉर्निंग ड्यूटी की थी।”

बता दें कि कंचनजंगा ट्रेन हादसे को लेकर एक महिला पैसेंजर चिन्मय मजूमदार ने मालगाड़ी के दोनों ड्राइवरों (लोको पायलट और को-लोको पायलट) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता कंचनजंगा एक्सप्रेस में बैठी थीं। हादसे में उन्हें भी चोटें आई हैं। वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घटना में जान गँवाने वालों के परिजनों को 10 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 2.50 लाख रुपए और मामूली घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। 

जिस घोटाले में संदेशखाली वाला शेख शाहजहाँ हुआ गिरफ्तार, उसी में अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता से 5 घंटे पूछताछ: चिट फंड स्कैम में भी आ चुका है नाम

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता से राशन घोटाला के मामले में पूछताछ की है। बुधवार (19 जून, 2024) को वो कोलकाता स्थित ED के सिटी साफ्टर में पूछताछ के लिए हाजिर हुईं। ED ने अभिनेत्री से कहा कि वो अपने बैंक के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज पेश करें। अभिनेत्री से कुछ सवाल भी पूछे गए, साथ ही कई अन्य विवरण भी खँगाले गए। उनके बैंक खातों से हुए कुछ लेनदेन के स्रोत और गंतव्य को लेकर जानकारी चाहिए थी।

इससे पहले 5 जून को जाँच एजेंसी ने ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’ (2005) में काम कर चुकीं अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता को पेश होने के लिए कहा था। उस समय वो अमेरिका में थीं और उन्होंने ED से और समय की माँग की थी। इससे पहले 2019 में रोज वैली चिट फंड स्कैम में भी ED उनसे पूछताछ कर चुकी है। राशन घोटाले में ED तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता ज्योतिप्रिया मलिक को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। कई करोड़ रुपए के इस घोटाले में जाँच एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है।

बता दें कि ‘पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS)’ में पश्चिम बंगाल में बड़ा घोटाला हुआ है। PDS के लीजो राशन आया था, उसे लाभार्थियों को देने की बजाए बाजार में बेच दिया गया। बाकिकुर रहमान नामक एक कारोबारी को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ के बाद बाहर निकलीं अभिनेत्री ने कहा कि राशन घोटाले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। 12:55 से लेकर 5:49 तक, लगभग 5 घंटे तक रितुपर्णा सेनगुप्ता से ED ने पूछताछ की।

बाहर निकलीं रितुपर्णा सेनगुप्ता के चेहरे पर थकान दिख रही थी। उन्होंने कहा कि ED ने भी उनके साथ सहयोग किया, उन्होंने भी जाँच में सहयोग किया। उनकी माँ शर्मिष्ठा मुखोपाध्याय और वकील बिप्लब गोस्वामी भी इस दौरान उनके साथ थे। इसी मामले में संदेशखाली में TMC नेता शेख शाहजहाँ को गिरफ्तार करने गए ED की टीम पर हमला हुआ था, उसके फरार होने के बाद कई महिलाओं के यौन शोषण का मामला सामने आया और वो गिरफ्तार हुआ।

अजमेर के बाजार में बाइक सवार ने गिराए मांस, लोगों ने जमकर किया हंगामा: पुलिस बोली- यह गोमांस नहीं, भैंस का मांस और अनजाने में गिरा

राजस्थान के अजमेर स्थित एक बाजार में बुधवार (19 जून 2024) को मांस बिखेरने पर तनाव फैल गया है। CCTV फुटेज में एक व्यक्ति को बाइक से यह हरकत करते देखा गया है। हिन्दू संगठनों ने इसे गोमांस बताया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। नाराज लोगों ने बाजार बंद करवा दिया। हालात तनावपूर्ण होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज करके भीड़ को तितर-बितर किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर के मदनगंज इलाके के ओसवाल मोहल्ले में सब्जी मंडी लगती है, जहाँ भीड़भाड़ बनी रहती है। बुधवार को लगभग 11:45 बजे एक बाइकसवार मंडी से गुजरा। उसने रास्ते में मांस बिखेर दिए और फरार गया। आरोप है कि इन अवशेषों में कटे पैर और कुछ अन्य अंग थे। इसको लेकर बाजार में गुस्सा और तनाव फैल गया।

कुछ ही देर में वहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। आक्रोशित हिन्दू संगठन बाजार बंद करवाने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। इस दौरान हिंदू संगठनों से पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। नाराज लोगों ने डिप्टी एसपी की गाड़ी में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

लोगों द्वारा गुस्से में की गई तोड़फोड़ के कारण डिप्टी एसपी की गाड़ी का शीशा टूट गया और गाड़ी के ड्राइवर को चोटें भी आईं। हालात को गंभीर होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बल प्रयोग के बाद प्रदर्शनकारियों में आफरा-तफरी मच गई। लगभग डेढ़ घंटे तक हुए हंगामे के बाद बाजार फिर से खोल दिए गए।

इस घटना को लेकर DSP सिटी महिपाल सिंह ने बताया कि बिखरे मांस का परीक्षण करवाया गया, जो कि भैंस का निकला। फ़िलहाल आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। SDM अर्चना चौधरी के मुताबिक, मांस जानबूझ कर नहीं बल्कि अनजाने में गिरा था। फ़िलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

किताब से बहती नदी, शरीर से उड़ते फूल और खून बना दूध… नालंदा की तबाही का दोष हिन्दुओं को देने वाले वामपंथी इतिहासकारों का ‘हैरी पॉटर’, 2 ‘धर्मान्धों’ ने जला दिया विश्वविद्यालय?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (19 जून, 2024) को नालंदा विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। नालंदा में प्राचीन काल में भी विश्वविद्यालय रहा है, लेकिन इस्लामी आक्रांता बख्तियार खिलजी ने इसे तबाह कर दिया था। अब इस तबाही के 800 वर्षों के बाद भाजपा की सरकार ने यहाँ नव-निर्माण करवाया है। 1749 करोड़ रुपए की लागत से ज्ञान का नया परिसर स्थापित हुआ है। जहाँ प्राचीन विश्वविद्यालय का खँडहर है, राजगीर में उससे कुछ ही दूरी पर नया परिसर बना है।

नालंदा में कई स्तूप, विहार और मंदिर हुआ करते थे। जहाँ तक नालंदा विश्वविद्यालय की बात है, यहाँ कई देशों के 10,000 छात्र पढ़ते थे और 2000 आचार्य विद्यादान में तल्लीन रहते थे। छात्रों के रहने, खाने-पीने और शिक्षा निःशुल्क होती थी। नए कैम्पस में 40 क्लासरूम हैं, जिनमें 1900 छात्र बैठ सकते हैं। 300 सीटों वाले 2 ऑडिटोरियम भी हैं और 550 छात्रों की क्षमता वाला एक हॉस्टल भी। 2000 की क्षमता वाला एक एम्पीथिएटर भी है। 12वीं सदी में ध्वस्त हुए प्राचीन विश्वविद्यालय को UN ने 2016 में धरोहर घोषित किया था।

नालंदा विश्वविद्यालय को लेकर इतिहासकारों ने किया ‘खेल’

क्या आपको पता है कि नालंदा विश्वविद्यालय के सहारे भी वामपंथी इतिहासकारों ने जम कर ‘खेला’ किया है। चूँकि नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध आचार्य भी थे, इसीलिए वामपंथी इतिहासकारों ने इसे ‘बौद्ध बनाम हिन्दू’ का रंग दिया। बौद्ध और हिन्दू, दोनों ही सनातन धर्म के अंग हैं। बुद्ध ने कभी वेदों को नहीं नकारा, उन्होंने वही सन्देश दिया जो उपनिषदों का है। बौद्ध धर्म में भी रामायण-महाभारत की कथाएँ हैं, भले ही बदले हुए स्वरूप में। ऐसे में मार्क्सिस्ट इतिहासकारों ने खूब प्रोपेगंडा रचा।

इससे उनके 2 हित पूरे होते हैं – पहला, इस्लामी आक्रांता को क्लीनचिट, और दूसरा, सनातन धर्म में विभाजन पैदा करना। इसी में से एक नाम आता है DN झा का। उन्होंने तो नालंदा विश्वविद्यालय की तबाही के लिए ‘धर्मान्ध हिन्दुओं’ को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। हिन्दू राजा वहाँ दान देते थे, हिन्दू छात्र वहाँ पढ़ते थे, हिन्दू शिक्षक उन्हें पढ़ाते थे और वहाँ हिन्दू साहित्य थे – फिर भला हिन्दू क्यों अपने ही विश्वविद्यालय को जलाएँगे? DN झा ने तिब्बती साहित्य का सहारा लेकर अलूल-जलूल निष्कर्ष दिए।

DN झा ने तिब्बती साहित्य के हवाले से दावा किया कि कलचुरि वंश के कर्ण नामक राजा ने कई बौद्ध विहारों को तबाह किया। एक तरफ DN झा का कहना है कि अंग्रेजों के आने से पहले हिन्दू कोई धर्म था ही नहीं, दूसरी तरफ वो ‘धर्मान्ध हिन्दुओं’ को नालंदा विश्वविद्यालय में स्थित 90 लाख पुस्तकों वाले पुस्तकालय को जलाने का ठीकरा फोड़ते हैं। इतना विरोधाभास? इसके लिए उन्होंने जिस Pag Sam Jon Zang नामक पुस्तक का हवाला दिया है, उसे तिब्बती लेखक Sumpa Khan-Po Yece Pal Jor ने लिखा है।

यानी, DN झा ने हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय को जलाए जाने के 500 वर्ष बाद की पुस्तक का हवाला दिया। जबकि, 13वीं शताब्दी में लिखी गई फ़ारसी किताब तबकात-ए-नासिरी में स्पष्ट दर्ज है कि नालंदा को किसने जलाया। जिस तिब्बती किताब का DN झा ने हवाला दिया है, उसमें भी लिखा है कि 2 युवा भिक्षुओं ने 2 भिखारियों पर पानी छींट दिया, जिस कारण गुस्साए भिखारियों ने 9 मंजिले पुस्तकालय ‘रत्नोदधि’ को आग के हवाले कर दिया।

क्या ये विश्वास किया जा सकता है कि जहाँ हजारों लोग रह रहे थे, वहाँ 2 भिखारियों ने तबाही मचा दी? 12000 लोगों की मौजूदगी वाले विशाल परिसर में 2 भिखारी इमारत दर इमारत घूमते रहे, आग लगाते रहे और उन्हें किसी ने रोकने की हिम्मत नहीं की? आज अगर कोई कहानीकार ये लिख दे कि मंगल ग्रह से उतरे एलियनों ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाया था, तो ये वामपंथी इतिहासकार बख्तियार खिलजी को क्लीन-चिट देने के लिए ये भी मान लेंगे, साथ ही कहने लगेंगे कि वो एलियन हिन्दू थे।

नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय 3 इमारतों में फैला हुआ था, जिनमें से एक नौ मंजिला था। विश्वविद्यालय की मुख्य इमारत 1400 * 400 फ़ीट की थी, जो खुदाई में पता चला। ह्वेनसांग ने अपनी याददाश्त के हिसाब से 7 विहार और 8 हॉल होने की बात बताई है। अफगानिस्तान से जब इस्लामी आक्रांता भारत में घुसे, उत्तर-पश्चिमी हिस्से से इधर आए और रास्ते में जितने भी बुद्ध विहार या बुद्ध की प्रतिमाएँ आईं, उन्हें वो तोड़ते गए। आज भी उनकी यही सोच कायम है, उदाहरण के लिए बामियान के बुद्ध की प्रतिमा को देख लीजिए। सदियों साल पुरानी इस मूर्ति को मार्च 2001 में तालिबान ने उड़ा दिया।

आचार्यों का नरसंहार, किताब समझाने वाला भी कोई नहीं बचा: फ़ारसी इतिहास

आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि बख्तियार खिलजी मात्र 200 घुड़सवारों को लेकर नालंदा विश्वविद्यालय पहुँचा था। उस समय के इतिहासकार मिन्हाजुद्दीन ने लिखा है कि ऊँची दीवारों और बड़ी-बड़ी इमारतों के कारण नालंदा विश्वविद्यालय बख्तियार खिलजी को किसी किले की तरह लगा और उसने हमला बोल दिया। उसने लिखा है कि वहाँ रहने वालों में अधिकतर ऐसे ब्राह्मण थे जिन्होंने अपने बाल मुँडा रखे थे, उन सभी का सामूहिक नरसंहार कर दिया गया।

इसमें लिखा है कि वहाँ बड़ी संख्या में पुस्तकें मिलीं, लेकिन चूँकि सारे हिन्दू मारे जा चुके थे इसीलिए उन किताबों में क्या लिखा है ये समझाने वाला एक व्यक्ति भी नहीं था। अंत में अवलोकन के बाद इस्लामी आक्रांताओं को पता चला कि वो किला नहीं बल्कि एक यूनिवर्सिटी था। जीत के बाद बख्तियार खिलजी सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक के पास पहुँचा और उसने इतना लूटा हुआ धन दिया कि उसे सुल्तान ने उपहारों से नवाजा। अन्य दरबारी उससे जलने लगे।

ये सब सन् 1197 के करीब हुआ। 2004 में ‘इंडियन हिस्ट्री कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष रहे DN झा ने अपने उद्बोधन में ये बात कही थी कि तिब्बती स्रोतों के हिसाब से कर्ण ने बौद्ध विहारों को ध्वस्त किया, जलाया। उन्होंने जिस किताब का हवाला दिया उसमें शिक्षक की हत्या के बाद उसके खून के दूध में बदलने, शरीर से फूल निकल कर आकाश में उड़ने, भिखारी द्वारा 12 साल गड्ढे में बैठ कर साधना करने, अग्नि की राख को भिक्षुओं पर फेंकने से उनके जले और शास्त्रों से जल की धारा बह निकलने के कारण कई किताबों के बच जाने की बातें लिखी हैं।

बताइए, कल को ये वामपंथी इतिहासकार हैरी पॉटर की फिल्म देख कर भी इसे इतिहास बताने लगेंगे, अगर उसमें से हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए कुछ मसाला उन्हें मिले। आपने कभी किताबों से पानी की धारा निकलते देखी है? राख फेंके जाने से इमारतों को जलते देखा है? खून को दूध में परिवर्तित होते देखा है? शरीर से फूल निकल कर आकाश में उड़ते देखा है? 12 साल गड्ढे में साधना करने से चमत्कारिक सिद्धि मिलते देखा है? ये सारे चमत्कार उन वामपंथी इतिहासकारों के लिए ‘इतिहास’ हैं, जो रामायण-महाभारत को फिक्शन बताते हैं जबकि इसके कई सबूत मौजूद हैं आज भी।

90 साल का शिक्षक, 70 छात्र… क्या से क्या हो गया नालंदा

कलचुरि वंश के कर्ण के संबंध में भी DN झा ने BNS यादव की किताब ‘द सोसाइटी एन्ड कल्चर इन नॉर्दर्न इंडिया इन द 12th सेंचुरी’ का उदाहरण दिया है। इसमें लिखा है कि तिब्बती साहित्य लिखते हैं कि कर्ण ने मगध के विहारों को तबाह किया। हालाँकि, अगली ही पंक्ति में वो लिखते हैं कि इस पर विश्वास करना कठिन है। इस पंक्ति को DN झा ने छिपा लिया। झा ने 2 भिखारियों को ‘हिन्दू’ कैसे कह दिया, इसका तो कोई स्रोत ही नहीं है। जबकि यादव ने इस प्रकरण पर शक जताया है।

इसी तरह भारत विरोधी विदेशी इतिहासकार ऑड्रे ट्रश्के लिखती हैं कि भारत में बौद्ध धर्म के पतन के पीछे इस्लाम नहीं है। इसके लिए वो कहती हैं कि नालंदा विश्वविद्यालय स्वाभाविक रूप से हिन्दू था, बौद्ध परंपरा भी उसका हिस्सा था। ये थी इवन डेज की बात। ऑड डेज पर यही इतिहासकार कहते हैं कि बौद्ध धर्म का हिन्दू धर्म से कोई वास्ता नहीं और नालंदा यूनिवर्सिटी हिन्दू था ही नहीं। इतना ही नहीं, बख्तियार खिलजी को क्लीन चिट देने के लिए वामपंथियों ने जगह का भी हेरफेर किया।

ऑड्रे ट्रश्के का मानना है कि नालंदा विश्वविद्यालय इस घटना के कई दशक बाद तक संचालित होता रहा। जबकि सच्चाई में भिक्षु धर्मस्वामिन ने लिखा है कि सारे आचार्य तुर्कों के खौफ से भाग गए थे, सारी इमारतें तबाह कर दी गई थीं और वहाँ कुछ बचा ही नहीं था। इसके बाद भी बचे-खुचे ढाँचों में मात्र 70 छात्र पढ़ रहे थे। खँडहरों में 90 वर्षीय राहुल श्रीभद्र उन छात्रों को पढ़ाते थे। बोधगया के राजा बुद्धसेन और ओदंतपुरी (अब बिहारशरीफ) के समृद्ध ब्राह्मण जयदेव वित्तीय रूप से विश्वविद्यालय की मदद करते रहे।

तेलंगाना में महिला पत्रकार पर FIR, बिजली विभाग द्वारा उत्पीड़न की खोली पोल तो हो गया पुलिस केस: राहुल गाँधी को दिलाई लोकतंत्र की याद

तेलंगाना पुलिस ने बुधवार (19 जून) को एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। यह पत्रकार राज्य में बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग द्वारा ग्राहकों के कथित उत्पीड़न से संबंधित जनता की शिकायतों को लगातार उजागर कर रहा था। इसको लेकर पुलिस ने पत्रकार पर जानबूझकर झूठ फैलाने और राज्य सरकार एवं उसके बिजली विभाग TGSPDCL को बदनाम करने का आरोप लगाकर मामला दर्ज किया है।

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हैदराबाद स्थित पत्रकार रेवती ने इसे अपने पत्रकारीय प्रयासों के लिए ‘सम्मान का पदक’ बताया है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के चयनात्मक प्रयोग को लेकर कॉन्ग्रेस के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को टैग किया।

पत्रकार रेवती ने लिखा, “एक विचित्र कदम उठाते हुए मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि तेलंगाना पावर एंड कंपनी के असली अपराधी घूम रहे हैं, जिन्होंने दिनदहाड़े एक महिला उपभोक्ता को परेशान किया!” कॉन्ग्रेस नेताओं से उन्होंने पूछा, “क्या मीडिया की स्वतंत्रता पर आपका यही रुख है? क्या आपकी सरकार सच को उजागर करने वाले पत्रकारों को चुप कराने की कोशिश कर रही है?”

रेवती ने राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और सीएम रेवंत रेड्डी से कहा, “अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते हैं तो न्याय के लिए हमारी लड़ाई में हमारे साथ खड़े हों और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करें! मैंने प्रताड़ित महिला की निजता की रक्षा के लिए उसका वीडियो पोस्ट नहीं करने का फैसला किया। अगर यही अधिकारी मीडिया से गुंडागर्दी करते हैं तो लोगों की रक्षा कौन करेगा?”

रेवती की एक्स (ट्विटर) टाइमलाइन के अनुसार, वह बिजली विभाग से जुड़ी जनता की शिकायतों को उजागर करती रही हैं। इससे पहले की एक पोस्ट में रेवती ने एक महिला की चिंताओं को साझा किया था, जिसे अपने क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती के खिलाफ पोस्ट करने पर बिजली विभाग द्वारा कथित रूप से परेशान किया गया था।

पत्रकार रेवती ने महिला की पहचान को उजागर नहीं करते हुए कहा कि उस महिला ने उन्हें बताया था कि एक लाइनमैन उसके घर आया था और उसे अपनी पोस्ट हटाने के लिए कहा था। आरोप यह भी है कि जब महिला ग्राहक ने बिजली विभाग के अधिकारियों को इस बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ट्वीट करने के बजाय उन्हें फोन करना चाहिए था।

महिला ग्राहक के अनुसार, उन्हें बताया गया, “बिजली विभाग पर ऊपर के लोगों का बहुत ज़्यादा दबाव है।” पत्रकार रेवती ने कहा कि उन्होंने घटना की जाँच की है और उनके पास उस बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग है। हालाँकि, सुरक्षा कारणों से और महिला की निजता का सम्मान करते हुए वे इस रिकॉर्डिंग को साझा नहीं करना चाहती हैं।

पत्रकार रेवती के अनुसार, जिस महिला ग्राहक ने बिजली कटौती के बारे में ट्वीट किया था, वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है, क्योंकि वह किराए के घर में रहती है और बिजली विभाग के कर्मचारी उसका पता जानते हैं। संयोग से हैदराबाद की एक पत्रकार नवीना ने कहा कि जब से उसने बिजली कटौती के बारे में ऑनलाइन शिकायत की है, तब से वह एक चिंतित हो गई हैं।

एक अन्य ट्वीट में रेवती ने तेलंगाना पुलिस की चुनिंदा प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया, क्योंकि उन्होंने अपनी दो शिकायतों पर उनकी प्रतिक्रिया को उजागर किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एक छिपी हुई धमकी जारी करके जवाब दिया। बाद में उसी के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सीएम के भाई के खिलाफ उनकी दूसरी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया।

महिला पत्रकार के अनुसार, 12 जून 2024 को सैयद सलीम नामक व्यक्ति पर राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भाई तिरुपति रेड्डी के गुर्गों ने कथित तौर पर हमला किया था।

FIR में उल्लेखित विवरण

रेवती द्वारा साझा की गई FIR की कॉपी के अनुसार, पुलिस को 19 जून 2024 की तड़के एलबी नगर क्षेत्र में कार्यरत एक सहायक अभियंता एम दिलीप (33) से शिकायत मिली। शिकायतकर्ता ने कहा कि 18 जून की शाम करीब 5 बजे उन्हें अपने उच्च अधिकारियों से एक मैसेज मिला था।

उन्होंने आगे कहा कि उच्च अधिकारियों ने कहा कि एक्स हैंडल @revathitweets ने एक मैसेज पोस्ट किया है कि एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे से बिजली बाधित है। हालाँकि, सबस्टेशन की डाटा शीट की जाँच के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने पाया कि पिछले 6 महीनों में एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे की बिजली कटौती की समस्या नहीं आई थी।

शिकायतकर्ता ने आगे कहा, “यह केवल एक झूठा आरोप है और जानबूझकर राज्य सरकार एवं उसके संगठन टीजीएसपीडीसीएल को बदनाम किया जा रहा है।” इसलिए, उन्होंने ट्विटर (एक्स) अकाउंट धारक @revathitweets के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। इसलिए एफआईआर दर्ज की जाए, एफआईआर कॉपी में जोड़ा गया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने सीआर नंबर 662/2024 में धारा 505 आईपीसी और आईटी एक्ट की धारा 66 (डी) के तहत मामला दर्ज किया और जाँच इंस्पेक्टर एल रामंजनेयुलु को सौंप दी गई। हैदराबाद के कई पत्रकारों-नेताओं और एक्स यूजर्स ने बिजली विभाग से संबंधित सार्वजनिक शिकायतों को फैलाने के लिए एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कॉन्ग्रेस की आलोचना की।

उनमें से कई लोगों ने तर्क दिया कि भले ही उसके दावे सच न हों, लेकिन बिजली विभाग द्वारा बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग के कर्मियों द्वारा ग्राहकों को परेशान करने के मुद्दों को उजागर करने पर आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय जवाबी कार्रवाई के साथ उन्हें स्पष्ट किया जा सकता था।

केसीआर मंत्रिमंडल में पूर्व मंत्री और बीआरएस नेता केटीआर ने पूछा कि क्या पुलिस विभाग ही ऊर्जा विभाग चला रहा है या फिर राज्य में पुलिस राज है।

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी के ‘खटाखट खटाखट’ मुफ्त चुनावी वादों पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायत करने पर महिला को परेशान किया गया।”

कनाडा का आतंकी प्रेम देख भारत ने याद दिलाया कनिष्क ब्लास्ट, 23 जून को पीड़ितों को दी जाएगी श्रद्धांजलि: जानिए कैसे गई थी 329 लोगों की जान

कनाडा की संसद में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर के सम्मान में उसकी बरसी पर मौन रखने की घटना के जवाब में वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने दुनिया को एयर इंडिया की उड़ान 182 (कनिष्क) को बम से उड़ाने की घटना की याद दिलाई जिसमें 86 बच्चों समेत 329 लोग मारे गए थे। इस बम विस्फोट का आरोप सिख आतंकवादियों पर लगते हैं, जिन्होंने 1984 में स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए किए गए ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ के जवाब में प्लेन को हवा में ही उड़ा दिया था।

कनाडा की संसद में आतंकी के महिमामंडन और खालिस्तान चरमपंथियों को खुली छूट पर भारत ने कनाडा को करारा जवाब दिया है। भारत ने एयर इंडिया के विमान कनिष्क को बम से उड़ाने की बरसी याद दिलाते हुए कनाडा में वर्षों से पल रहे आतंकवाद को निशाने पर लिया है। कनाडा के वैंकूवर स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने 23 जून को कनिष्क विमान हादसे की याद में मेमोरियल सर्विस की योजना बनाई है।

एयर इंडिया मेमोरियल में 23 जून को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

वैंकूवर स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत आतंकवाद के खतरे का मुकाबला करने में सबसे आगे है और इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करता है। 23 जून 2024 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (कनिष्क) पर कायरतापूर्ण आतंकवादी बमबारी की 39वीं वर्षगाँठ होगी, जिसमें 86 बच्चों सहित 329 निर्दोष लोगों ने सिविल एविएसन के इतिहास में सबसे जघन्य आतंकवाद-संबंधी हवाई दुर्घटनाओं में से एक में अपनी जान गँवा दी थी। 23 जून, 2024 को 1830 बजे स्टेनली पार्क के सेपरले प्लेग्राउंड क्षेत्र में एयर इंडिया मेमोरियल में एक मेमोरियल सर्विस निर्धारित की गई है। वैंकूवर का दूतावास कनाडा में रहने वाले भारतीय प्रवासियों को आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता है।”

कनिष्क हादसा कैसे हुआ?

बता दें कि 23 जून, 1985 को, कनाडा से लंदन होते हुए भारत जा रहे एयर इंडिया के विमान में विस्फोट हुआ था। एयर इंडिया की फ्लाइट-182 ने 23 जून 1985 को कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर से उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट को मॉन्ट्रियल से ब्रिटेन के लंदन, फिर भारत के दिल्‍ली होते हुए मुंबई पहुँचना था। बोइंग 747-237B का नाम सम्राट कनिष्क के नाम पर रखा गया था। इस विमान को आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में 31,000 फीट की ऊँचाई पर बम से उड़ा दिया गया। हादसे के बाद विमान अटलांटिक महासागर में गिर गया। इस विमान हादसे में 329 लोगों की मौत हुई। मारे गए लोगों में 22 हवाई यात्री भारत में जन्मे थे, जबकि 280 लोग भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे। यह घटना आधुनिक कनाडा के इतिहास में सबसे बड़ी सामूहिक हत्या थी।

कनाडा इस घटना की जाँच कभी पूरी नहीं कर पाया और आज तक हादसे के किसी भी आरोपी को सजा नहीं हो पाई है। जब भारत की ओर से सीबीआई ने हादसे की जाँच करने की कोशिश की तो कनाडा ने कानून का सहारा लेकर रुकावटें खड़ी कीं और जाँच पूरी नहीं होने दी। बता दें कि हादसे के बाद सिर्फ 131 यात्रियों के शव ही बरामद किए जा सके थे। विमान हादसे की जाँच कर रही सीबीआई ने भी पाया था कि धमाके में आतंकी संगठन बब्‍बर खासा इंटरनेशनल का हाथ था, इसका मास्‍टरमाइंड बब्‍बर खालसा इंटरनेशन का नेता तलविंदर सिंह परमार था।

इसी कड़ी में भारत ने खालिस्तानी आतंकी तलविंदर सिंह परमार को प्रत्यर्पित करने को कहा था, जो उस समय कनाडा में रहता था। परमार ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का पहला मुखिया था। वह 1970 में कनाडा भाग गया था और वहीं से खालिस्तानी गतिविधियों को संचालित करता था। तलविंदर पर वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस के 2 जवानों की हत्या का आरोप भी है, जिसके लिए उसे 1983 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। तलविंदर परमार ने पंजाब के बड़े नेता लाला जगत नारायण की भी वर्ष 1981 में हत्या कर दी थी। तलविंदर इसके अतिरिक्त अन्य कई हत्याओं में भी शामिल रहा था। तलविंदर ने 1985 में एयर इंडिया के एक बोईंग 747 विमान जिसका नाम ‘कनिष्क’ था, उसे बम से उड़ा दिया था। यह विमान कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल से लंदन के रास्ते भारत आ रहा था।

इस विमान में तलविंदर ने इन्दरजीत सिंह रैयत तथा अन्य कुछ आरोपितों के साथ मिलकर बम रखा था जो कि विमान की उड़ान के बीच प्रशांत महासागर में फट गया था और इस हादसे में 329 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में मरने वाले 268 व्यक्ति कनाडाई नागरिक ही थे। उसने इसी दिन एक और विमान को बम से उड़ाने के लिए एक बैग में बम रखा था, लेकिन वो इसे विमान के भीतर नहीं डाल पाया और टोक्यो में ही फट गया। तलविंदर ने यह बम एयर इंडिया के टोक्यो से बैंकाक जाने वाले विमान में रखने का प्लान बनाया था।

जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो की एक गलती के कारण 329 निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और लोग हवाई यात्रा करने से भी डरने लगे थे। जस्टिन यही गलती फिर दोहरा रहे हैं। गौरतलब है कि उनकी सरकार पिछले कुछ सालों से ऐसे कृत्यों पर एकदम शांत है जिनमें भारत को सीधे सीधे धमकी दी गई है।

बकरीद पर दी गाय की कुर्बानी, हिंदुओं ने विरोध किया तो प्रदर्शनकारियों पर मुस्लिम भीड़ टूटी: मतीन, रहीम समेत 19 पर केस दर्ज

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। बताया जा रहा है कि यहाँ बकरीद पर गाय की कुर्बानी दी गई, जिसकी जानकारी होने पर कुछ हिन्दू संगठनों ने विरोध किया तो मुस्लिम भीड़ ने उनके सदस्यों पर हमला कर दिया। हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। इसके अलावा इस दौरान महिला से छेड़खानी और लूटपाट जैसी घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने मतीन, रहीम और शहजाद सहित कुल 19 लोगों पर नामजद FIR दर्ज कर ली है। प्रशासन ने मांस के सैम्पल जाँच के लिए भेजे हैं। घटना सोमवार (17 जून 2024) की है।

यह मामला छत्रपति संभाजीनगर जिले के दौलताबाद इलाके का है। बकरीद के दिन सोमवार (17 जून 2024) को हिन्दू संगठनों सूचना मिली कि कुछ गोवंशों को कुर्बानी के लिए लाया गया है। मामले की सूचना फ़ौरन ही पुलिस को दी गई। पुलिस ने दबिश दी। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान गोमांस बरामद भी हुआ। इसे देख हिन्दू संगठनों ने इस करतूत के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान मुस्लिम भीड़ ने इन प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया। हमले के दौरान कुछ वाहनों में आगजनी भी की गई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

हमलावर इस बात से नाराज थे कि हिन्दू संगठनों ने उसकी हरकत पुलिस को क्यों बता दी। बताया जा रहा है कि इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर हमलावरों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है।

इसके अलावा इस मामले में एक हिन्दू महिला ने भी अलग से शिकायत दर्ज करवाई है। महिला ने बताया है कि मुस्लिम भीड़ उसके घर में ये कहकर घुसी कि उन्होंने पुलिस को कुर्बानी की सूचना दी। इसके बाद महिला के साथ बदसलूकी की गई। साथ ही उसके घर से पैसे और मंगलसूत्र भी लूटा गया। फ़िलहाल पीड़िता की शिकायत पर कुल 19 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। नामजद आरोपितों के नाम अहमद सैय्यद, लाला शेख, नासर शेख, इमरान पठान, इस्माइल पठान, अरबाज पटेल, बाबा शेख अंडियावाला, बाबा अद्दू वखरवाला, अज्जू टिक्कियापाववाला, रहीम शेख, सैय्यद मतीन, सैय्यद बाबा, रहीम शेख, शहजाद सैय्यद, अरबाज कुरैशी, जुनैद शेख, सैय्यद शेरू, सैय्यद हारुन और मुन्नी बाजी हैं।

इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 395 (डकैती), 354ए (छेड़खानी), 452 (घर में जबरन घुसना), 323 (चोट पहुँचाना), 504 (अपमान करना), 506 (धमकी देना), 143 (अवैध रूप से जमा होना), 147 (दंगा करना) और 149 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। अपनी शिकायत में महिला ने बताया है कि 17 जून को कुछ लोग उनके घर में घुस गए। वो महिला के पति के बारे में पूछताछ करने लगे। उनका कहना था कि महिला के पति ने पुलिस को बकरीद पर मुस्लिमों द्वारा गाय की कुर्बानी की सूचना दी है।

उस समय महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था। इन सभी ने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ और जान से मार डालने की धमकी दी। साथ ही महिला के साथ छेड़खानी भी की गई। घर में रखे 14 हजार रुपए का मंगलसूत्र भी भी लूट लिए गए। अब तक कुल 15 हमलावरों के हिरासत में लिए जाने की खबर है।

इस घटना के बाद मुस्लिम पक्ष ने भी हिन्दुओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने आदित्य बोडखे, अक्षय बोडखे, तुषार म्हास्के और मयूर म्हास्के को नामजद किया है। इन सभी पर आरोप लगाया गया है कि ये तलाशी के नाम पर एक मुस्लिम परिवार में जबरन घुसे और अभद्रता की। इन चारों नामजदों पर महिला के घर में तोड़फोड़ करने की भी शिकायत दी गई है।

लाइसेंस राज में कुछ घरानों का ही चलता था सिक्का, 2014 के बाद देश ने भरी उड़ान: गौतम अडानी ने PM मोदी को दिया बदलाव का श्रेय, कहा- निवेश के मौके बढ़े

देश के बड़े कारोबारी गौतम अडानी ने बीते 10 वर्ष के मोदी सरकार के कार्यकाल की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था ने 10 वर्षों में टेकऑफ किया है और इसका सबसे बड़ा कारण सही तरीके से सरकार का चलना रहा है। उन्होंने बीते 10 वर्षों में सरकार द्वारा कारोबारी माहौल की भी तारीफ़ की है।

CRISIL समिट 2024 में बोलते समय अडानी समूह के मुखिया ने कहा, “1991 के आर्थिक सुधारों से 2014 के बीच का समय देश के विकास के लिए आधार बनाने और रनवे बनाने जैसा था तो वहीं 2014 से 2024 के बीच का समय हमारी उड़ान का है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उत्प्रेरक पिछले 10 सालों का अच्छा शासन रहा है। भारत का राजकोषीय निवेश जीडीपी का 1.6% से 3.3% हो गया है। कॉर्पोरेट टैक्स 30% से 22% पर आ गया है, इससे निवेश करने के लिए मौके बढ़े हैं।”

उन्होंने बताया कि देश का चालू खाता घाटा जीडीपी के 3.5% से 0.8% पर आ गया है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में स्पष्ट रूप से दिखने वाले बदलाव भी आए हैं। अडानी ने कहा, “विदेश से आने वाला प्रत्येक व्यक्ति देश में धुआँधार तरीके से बन रहे इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात करता है। भारत सरकार के आधार-UPI डिजिटल इन्फ्रा ने देश का आर्थिक इकोसिस्टम बदल दिया है। इसने अर्थजगत में क्रान्ति लाकर उन लोगों को व्यवस्था में लाया है जो पहले इससे बाहर थे।”

गौतम अडानी ने कहा, “भारत की औसत आयु आज 29 वर्ष है जबकि चीन पहले ही 39 वर्ष को पार कर चुका है। इससे भी अच्छी बात यह है कि भारत की 2050 में भी औसत आयु 39 वर्ष ही होगी। ऐसे में भारत अगले तीन से चार दशक तक खपत के शीर्ष स्तर पर होगा, अन्य कोई भी देश इस प्रकार की बढ़त नहीं पा सका है।”

अडानी ने यहाँ ग्रीन एनर्जी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी के कारण भारत में आगामी वर्षों में लाखों नौकरियाँ पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि डाटा नए कच्चे ईंधन की तरह है, ऐसे में डाटा सेंटर की माँग अब बढ़ेगी। उन्होंने इस क्षेत्र के आने वाले समय में महत्व बताए।

गौतम अडानी ने बताया कि अडानी समूह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सोलर पॉवर कम्पनी हैं और देश के भीतर सबसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर हैं। उन्होंने बताया कि अडानी समूह देश का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट निर्माता है और वह देश के पोर्ट व्यापार में भी 30% की हिस्सेदारी रखता है।

गौतम अडानी ने इस दौरान 1991 से पहले लाइसेंस राज की आलोचना की और कहा कि तब कुछ घरानों को ही कारोबार करते थे और उनकी सरकार से सांठगांठ थी। उन्होंने कहा कि इन यह कारोबारी घराने संरक्षित माहौल में फले फूले।

गौतम अडानी ने कहा कि हम एक 76 वर्ष पुराने लोकतंत्र हैं और हमें 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 58 वर्ष लगे जबकि अगला 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में मात्र 12 वर्ष लगे। इसके बाद 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ने में मात्र पाँच वर्ष लगे और जिस तरह की बढ़त अब हो रही है और जो विकास सरकार कर रही है उससे मुझे लगता है कि अगले दशक में प्रत्येक 12 से 18 महीने में 1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था जोड़ा लेगा।

राबिया की अम्मी ने ज़हीर-सोनाक्षी की शादी के बहाने ‘लव जिहाद’ को किया व्हाइटवॉश: खुद देती रहती हैं दुनिया भर के ओपिनियन, दूसरों की आलोचना बर्दाश्त नहीं

शत्रुघ्न सिन्हा एक ज़माने में बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेताओं में गिने जाते थे, अब भी उनकी दमदार आवाज़ में ‘खामोश’ शब्द को सुनना फैंस को खासा पसंद है। मुम्बई के जुहू में स्थित अपने बँगले का नाम उन्होंने ‘रामायण’ रखा। खुद शत्रुघ्न सिन्हा के तीनों भाइयों के नाम राम, लक्ष्मण और भरत हैं। उन्होंने अपने बेटे का नाम लव और कुश रखा। ये अलग बात है कि सोनाक्षी सिन्हा KBC में इस सवाल का जवाब नहीं दे पाई थीं कि हनुमान संजीवनी बूटी हिमालय से किसके लिए लेकर आए थे।

खैर, अब यही सोनाक्षी सिन्हा अपने प्रेमी ज़हीर इक़बाल से शादी करने जा रही हैं। बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से पढ़े ज़हीर इक़बाल को सलमान खान का करीबी माना जाता है। उनकी बहन सनम रतंसी बॉलीवुड की बड़ी स्टाइलिस्ट हैं, वहीं उनके पिता इक़बाल रतंसी कंस्ट्रक्शन व ज्वेलरी के कारोबार में हैं। ज़हीर इक़बाल ने सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ (2014) में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था, फिर उन्होंने सलमान खान की प्रोडक्शन वाली ‘नोटबुक’ (2019) से डेब्यू किया।

2022 में आई फिल्म ‘डबल XL’ में ज़हीर इक़बाल और सोनाक्षी सिन्हा साथ दिखे थे, लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई थी। अब रविवार (23 जून, 2024) को ज़हीर इक़बाल और सोनाक्षी सिन्हा ने 7 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद मुंबई में शादी करने का फैसला लिया गया है। ये अलग बात है कि जब शत्रुघ्न सिन्हा से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं पता। जबकि बॉलीवुड की कई हस्तियों को इस शादी के बारे में पूरी जानकारी है।

सोनाक्षी सिन्हा के मामा पहलाज निहलानी कह चुके हैं कि शादी वाली बात सुन शत्रुघ्न सिन्हा नाराज़ हो गए थे। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि शत्रुघ्न सिन्हा अपनी बेटी से नाराज़ थे। खैर, हो सकता है परिवार में फिर सब ठीक हो जाए। शत्रुघ्न सिन्हा बड़े अभिनेता हैं, 200 फ़िल्में कर चुके हैं और 6 बार सांसद रहे हैं। ‘रामायण’ में भले सब ठीक हो जाए, लेकिन अब इसी बहाने ‘लव जिहाद’ को फर्जी बताने वाले लोग भी सामने आ रहे हैं। इनका नेतृत्व अभिनेत्री स्वरा भास्कर कर रही हैं।

स्वरा भास्कर ने ‘Connect Cine’ से बात करते हुए बॉलीवुड को केंद्र सरकार का प्रोपेगंडा टूल बता दिया। वहीं सोनाक्षी सिन्हा और ज़हीर इक़बाल की शादी के संबंध में उनसे पूछा गया तो उन्होंने अपने मन में भरा हुआ पूरा का पूरा ज़हर उड़ेल डाला। स्वरा भास्कर को इसके बाद अपनी शादी की याद आ गई और कहा कि उनकी शादी में भी बहुत सारे विशेषज्ञ प्रकट होकर टिप्पणियाँ दे रहे थे। बता दें कि स्वरा भास्कर ने महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष फहद अहमद से शादी की है, जिन्हें वो ‘भाई’ भी कह चुकी थीं।

AMU और TISS से पढ़े फहद अहमद छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। 2017-18 में वो TISS में स्टूडेंट्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी रहे। वो स्वरा भास्कर से 4 साल छोटे हैं। CAA के खिलाफ देश भर में जो उपद्रव हुए, उसमें फहद अहमद का भी हाथ था। प्रदर्शनों के दौरान ही उनकी मुलाकात स्वरा भास्कर के साथ हुई थी। अब लोगों ने याद दिला दिया सगाई के समय कि स्वरा ने फहद को ‘भाई’ कहा था, तो उसका गुस्सा वो आज ज़हीर-सोनाक्षी के बहाने निकाल रही हैं।

स्वरा भास्कर का कहना है कि 2 वयस्क लोग अपने जीवन में क्या निर्णय ले रहे हैं, निकाह कर रहे या लाइव-इन में रह रहे – इससे किसी का कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए, केवल दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार का होना चाहिए। स्वरा भास्कर का कहना है कि इस पर कोई ओपिनियन किसी का नहीं होना चाहिए। फिर वो कहती हैं कि दक्षिण एशिया में दूसरों के जीवन में घुसने में लोगों को मजा आता है, ज़हीर-सोनाक्षी का बच्चा होगा तो उसके नाम पर भी काफी बहस होगी।

उन्होंने सैफ-करीना और अपना उदाहरण बता दिया। बता दें कि सैफ अली खान और करीना कपूर ने अपने पहले बेटे का नाम तैमूर रखा। इसी तरह स्वरा भास्कर और फहद अहमद ने अपनी बेटी का नाम राबिया रखा। जो स्वरा भास्कर CAA से लेकर इजरायल-फिलिस्तीन तक पर ओपिनियन देती हैं, वो अब कहती हैं कि भारत में हर चीज में ओपिनियन देने की बीमारी है। फिर स्वरा भास्कर सोशल मीडिया पर हर मुद्दे में क्यों टाँग अड़ाती घूमती रहती हैं?

स्वरा भास्कर से ये भी पूछा जाना चाहिए कि जब शादी के बाद पति-पत्नी बराबर होते हैं तो फिर सैफ अली खान और करीना कपूर के दोनों बेटों के नाम उर्दू में क्यों हैं? इसी तरह स्वरा भास्कर की बेटी का नाम वही क्यों है, जो फहद अहमद के परिवार द्वारा चुना गया लगता है। क्योंकि, स्वरा की बेटी राबिया तो तो स्पष्ट है कि वो फहद अहमद की बेटी है। सैफ अली खान और करीना कपूर का बेटा ‘मोहन’ क्यों नहीं, या फहद अहमद और स्वरा भास्कर की बेटी का नाम ‘मोहिनी’ क्यों नहीं?

खैर, दुनिया भर के मुद्दों पर ओपिनियन देने वाली स्वरा भास्कर का कहना है कि वो क्या करती हैं इस पर किसी का कोई ओपिनियन नहीं होना चाहिए। हर साल ‘लव जिहाद’ के सैकड़ों मामले सामने आते हैं, ऑपइंडिया पर भी ऐसे मामलों की सूची आपको पढ़ने को मिल जाएगी। जिस देश में हिन्दू लड़कियों को फँसाने के लिए विदेश तक से फंडिंग होती है, वहाँ ‘लव जिहाद’ को कोई झूठा कैसे बता सकता है? ज़हीर इक़बाल और सोनाक्षी सिन्हा की शादी के बहाने वो एक समस्या को प्रोपेगंडा बता रही हैं।

आपको श्रद्धा वॉकर याद होगी, जिन्हें दिल्ली में आफ़ताब अमीन ने 36 टुकड़ों में काटा। इसी तरह आपको निकिता तोमर याद होगी, जिन्हें फरीदाबाद में तौसीफ ने गोली मार दी। और हाँ, ‘लव जिहाद’ शब्द केरल के ईसाइयों ने दिया था, क्योंकि वहाँ ईसाई लड़कियों को मुस्लिम निशाना बना रहे थे। अब दूसरे सबसे बड़े बहुसंख्यक मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं या ईसाई जो भारत की जनसंख्या का मात्र 2.3% हैं? स्वरा भास्कर इस्लामी कट्टरपंथियों का बचाव कर रही हैं।

अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में ओपिनियन न दें, तो आपको सोशल मीडिया में अपने निजी जीवन की चीजें डालिए ही मत। आप अपनी शादी या बच्चा होने की सूचना सोशल मीडिया पर देंगे, कमेंट्स पब्लिक रखेंगे, फिर हर तरह के कमेंट्स आएँगे ही। स्वरा भास्कर जैसों को पब्लिसिटी भी चाहिए और लोग उनकी आलोचना भी न करें – ये कैसे चलेगा? तभी वो शाकाहारियों से भी भड़क जाती हैं, बकरीद पर हिन्दुओं को भला-बुरा कहती हैं।