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बकरीद पर दी गाय की कुर्बानी, हिंदुओं ने विरोध किया तो प्रदर्शनकारियों पर मुस्लिम भीड़ टूटी: मतीन, रहीम समेत 19 पर केस दर्ज

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। बताया जा रहा है कि यहाँ बकरीद पर गाय की कुर्बानी दी गई, जिसकी जानकारी होने पर कुछ हिन्दू संगठनों ने विरोध किया तो मुस्लिम भीड़ ने उनके सदस्यों पर हमला कर दिया। हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। इसके अलावा इस दौरान महिला से छेड़खानी और लूटपाट जैसी घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने मतीन, रहीम और शहजाद सहित कुल 19 लोगों पर नामजद FIR दर्ज कर ली है। प्रशासन ने मांस के सैम्पल जाँच के लिए भेजे हैं। घटना सोमवार (17 जून 2024) की है।

यह मामला छत्रपति संभाजीनगर जिले के दौलताबाद इलाके का है। बकरीद के दिन सोमवार (17 जून 2024) को हिन्दू संगठनों सूचना मिली कि कुछ गोवंशों को कुर्बानी के लिए लाया गया है। मामले की सूचना फ़ौरन ही पुलिस को दी गई। पुलिस ने दबिश दी। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान गोमांस बरामद भी हुआ। इसे देख हिन्दू संगठनों ने इस करतूत के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान मुस्लिम भीड़ ने इन प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया। हमले के दौरान कुछ वाहनों में आगजनी भी की गई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

हमलावर इस बात से नाराज थे कि हिन्दू संगठनों ने उसकी हरकत पुलिस को क्यों बता दी। बताया जा रहा है कि इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर हमलावरों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है।

इसके अलावा इस मामले में एक हिन्दू महिला ने भी अलग से शिकायत दर्ज करवाई है। महिला ने बताया है कि मुस्लिम भीड़ उसके घर में ये कहकर घुसी कि उन्होंने पुलिस को कुर्बानी की सूचना दी। इसके बाद महिला के साथ बदसलूकी की गई। साथ ही उसके घर से पैसे और मंगलसूत्र भी लूटा गया। फ़िलहाल पीड़िता की शिकायत पर कुल 19 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। नामजद आरोपितों के नाम अहमद सैय्यद, लाला शेख, नासर शेख, इमरान पठान, इस्माइल पठान, अरबाज पटेल, बाबा शेख अंडियावाला, बाबा अद्दू वखरवाला, अज्जू टिक्कियापाववाला, रहीम शेख, सैय्यद मतीन, सैय्यद बाबा, रहीम शेख, शहजाद सैय्यद, अरबाज कुरैशी, जुनैद शेख, सैय्यद शेरू, सैय्यद हारुन और मुन्नी बाजी हैं।

इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 395 (डकैती), 354ए (छेड़खानी), 452 (घर में जबरन घुसना), 323 (चोट पहुँचाना), 504 (अपमान करना), 506 (धमकी देना), 143 (अवैध रूप से जमा होना), 147 (दंगा करना) और 149 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। अपनी शिकायत में महिला ने बताया है कि 17 जून को कुछ लोग उनके घर में घुस गए। वो महिला के पति के बारे में पूछताछ करने लगे। उनका कहना था कि महिला के पति ने पुलिस को बकरीद पर मुस्लिमों द्वारा गाय की कुर्बानी की सूचना दी है।

उस समय महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था। इन सभी ने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ और जान से मार डालने की धमकी दी। साथ ही महिला के साथ छेड़खानी भी की गई। घर में रखे 14 हजार रुपए का मंगलसूत्र भी भी लूट लिए गए। अब तक कुल 15 हमलावरों के हिरासत में लिए जाने की खबर है।

इस घटना के बाद मुस्लिम पक्ष ने भी हिन्दुओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने आदित्य बोडखे, अक्षय बोडखे, तुषार म्हास्के और मयूर म्हास्के को नामजद किया है। इन सभी पर आरोप लगाया गया है कि ये तलाशी के नाम पर एक मुस्लिम परिवार में जबरन घुसे और अभद्रता की। इन चारों नामजदों पर महिला के घर में तोड़फोड़ करने की भी शिकायत दी गई है।

लाइसेंस राज में कुछ घरानों का ही चलता था सिक्का, 2014 के बाद देश ने भरी उड़ान: गौतम अडानी ने PM मोदी को दिया बदलाव का श्रेय, कहा- निवेश के मौके बढ़े

देश के बड़े कारोबारी गौतम अडानी ने बीते 10 वर्ष के मोदी सरकार के कार्यकाल की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था ने 10 वर्षों में टेकऑफ किया है और इसका सबसे बड़ा कारण सही तरीके से सरकार का चलना रहा है। उन्होंने बीते 10 वर्षों में सरकार द्वारा कारोबारी माहौल की भी तारीफ़ की है।

CRISIL समिट 2024 में बोलते समय अडानी समूह के मुखिया ने कहा, “1991 के आर्थिक सुधारों से 2014 के बीच का समय देश के विकास के लिए आधार बनाने और रनवे बनाने जैसा था तो वहीं 2014 से 2024 के बीच का समय हमारी उड़ान का है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उत्प्रेरक पिछले 10 सालों का अच्छा शासन रहा है। भारत का राजकोषीय निवेश जीडीपी का 1.6% से 3.3% हो गया है। कॉर्पोरेट टैक्स 30% से 22% पर आ गया है, इससे निवेश करने के लिए मौके बढ़े हैं।”

उन्होंने बताया कि देश का चालू खाता घाटा जीडीपी के 3.5% से 0.8% पर आ गया है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में स्पष्ट रूप से दिखने वाले बदलाव भी आए हैं। अडानी ने कहा, “विदेश से आने वाला प्रत्येक व्यक्ति देश में धुआँधार तरीके से बन रहे इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात करता है। भारत सरकार के आधार-UPI डिजिटल इन्फ्रा ने देश का आर्थिक इकोसिस्टम बदल दिया है। इसने अर्थजगत में क्रान्ति लाकर उन लोगों को व्यवस्था में लाया है जो पहले इससे बाहर थे।”

गौतम अडानी ने कहा, “भारत की औसत आयु आज 29 वर्ष है जबकि चीन पहले ही 39 वर्ष को पार कर चुका है। इससे भी अच्छी बात यह है कि भारत की 2050 में भी औसत आयु 39 वर्ष ही होगी। ऐसे में भारत अगले तीन से चार दशक तक खपत के शीर्ष स्तर पर होगा, अन्य कोई भी देश इस प्रकार की बढ़त नहीं पा सका है।”

अडानी ने यहाँ ग्रीन एनर्जी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी के कारण भारत में आगामी वर्षों में लाखों नौकरियाँ पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि डाटा नए कच्चे ईंधन की तरह है, ऐसे में डाटा सेंटर की माँग अब बढ़ेगी। उन्होंने इस क्षेत्र के आने वाले समय में महत्व बताए।

गौतम अडानी ने बताया कि अडानी समूह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सोलर पॉवर कम्पनी हैं और देश के भीतर सबसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर हैं। उन्होंने बताया कि अडानी समूह देश का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट निर्माता है और वह देश के पोर्ट व्यापार में भी 30% की हिस्सेदारी रखता है।

गौतम अडानी ने इस दौरान 1991 से पहले लाइसेंस राज की आलोचना की और कहा कि तब कुछ घरानों को ही कारोबार करते थे और उनकी सरकार से सांठगांठ थी। उन्होंने कहा कि इन यह कारोबारी घराने संरक्षित माहौल में फले फूले।

गौतम अडानी ने कहा कि हम एक 76 वर्ष पुराने लोकतंत्र हैं और हमें 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 58 वर्ष लगे जबकि अगला 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में मात्र 12 वर्ष लगे। इसके बाद 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ने में मात्र पाँच वर्ष लगे और जिस तरह की बढ़त अब हो रही है और जो विकास सरकार कर रही है उससे मुझे लगता है कि अगले दशक में प्रत्येक 12 से 18 महीने में 1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था जोड़ा लेगा।

राबिया की अम्मी ने ज़हीर-सोनाक्षी की शादी के बहाने ‘लव जिहाद’ को किया व्हाइटवॉश: खुद देती रहती हैं दुनिया भर के ओपिनियन, दूसरों की आलोचना बर्दाश्त नहीं

शत्रुघ्न सिन्हा एक ज़माने में बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेताओं में गिने जाते थे, अब भी उनकी दमदार आवाज़ में ‘खामोश’ शब्द को सुनना फैंस को खासा पसंद है। मुम्बई के जुहू में स्थित अपने बँगले का नाम उन्होंने ‘रामायण’ रखा। खुद शत्रुघ्न सिन्हा के तीनों भाइयों के नाम राम, लक्ष्मण और भरत हैं। उन्होंने अपने बेटे का नाम लव और कुश रखा। ये अलग बात है कि सोनाक्षी सिन्हा KBC में इस सवाल का जवाब नहीं दे पाई थीं कि हनुमान संजीवनी बूटी हिमालय से किसके लिए लेकर आए थे।

खैर, अब यही सोनाक्षी सिन्हा अपने प्रेमी ज़हीर इक़बाल से शादी करने जा रही हैं। बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से पढ़े ज़हीर इक़बाल को सलमान खान का करीबी माना जाता है। उनकी बहन सनम रतंसी बॉलीवुड की बड़ी स्टाइलिस्ट हैं, वहीं उनके पिता इक़बाल रतंसी कंस्ट्रक्शन व ज्वेलरी के कारोबार में हैं। ज़हीर इक़बाल ने सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ (2014) में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था, फिर उन्होंने सलमान खान की प्रोडक्शन वाली ‘नोटबुक’ (2019) से डेब्यू किया।

2022 में आई फिल्म ‘डबल XL’ में ज़हीर इक़बाल और सोनाक्षी सिन्हा साथ दिखे थे, लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई थी। अब रविवार (23 जून, 2024) को ज़हीर इक़बाल और सोनाक्षी सिन्हा ने 7 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद मुंबई में शादी करने का फैसला लिया गया है। ये अलग बात है कि जब शत्रुघ्न सिन्हा से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं पता। जबकि बॉलीवुड की कई हस्तियों को इस शादी के बारे में पूरी जानकारी है।

सोनाक्षी सिन्हा के मामा पहलाज निहलानी कह चुके हैं कि शादी वाली बात सुन शत्रुघ्न सिन्हा नाराज़ हो गए थे। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि शत्रुघ्न सिन्हा अपनी बेटी से नाराज़ थे। खैर, हो सकता है परिवार में फिर सब ठीक हो जाए। शत्रुघ्न सिन्हा बड़े अभिनेता हैं, 200 फ़िल्में कर चुके हैं और 6 बार सांसद रहे हैं। ‘रामायण’ में भले सब ठीक हो जाए, लेकिन अब इसी बहाने ‘लव जिहाद’ को फर्जी बताने वाले लोग भी सामने आ रहे हैं। इनका नेतृत्व अभिनेत्री स्वरा भास्कर कर रही हैं।

स्वरा भास्कर ने ‘Connect Cine’ से बात करते हुए बॉलीवुड को केंद्र सरकार का प्रोपेगंडा टूल बता दिया। वहीं सोनाक्षी सिन्हा और ज़हीर इक़बाल की शादी के संबंध में उनसे पूछा गया तो उन्होंने अपने मन में भरा हुआ पूरा का पूरा ज़हर उड़ेल डाला। स्वरा भास्कर को इसके बाद अपनी शादी की याद आ गई और कहा कि उनकी शादी में भी बहुत सारे विशेषज्ञ प्रकट होकर टिप्पणियाँ दे रहे थे। बता दें कि स्वरा भास्कर ने महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष फहद अहमद से शादी की है, जिन्हें वो ‘भाई’ भी कह चुकी थीं।

AMU और TISS से पढ़े फहद अहमद छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। 2017-18 में वो TISS में स्टूडेंट्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी रहे। वो स्वरा भास्कर से 4 साल छोटे हैं। CAA के खिलाफ देश भर में जो उपद्रव हुए, उसमें फहद अहमद का भी हाथ था। प्रदर्शनों के दौरान ही उनकी मुलाकात स्वरा भास्कर के साथ हुई थी। अब लोगों ने याद दिला दिया सगाई के समय कि स्वरा ने फहद को ‘भाई’ कहा था, तो उसका गुस्सा वो आज ज़हीर-सोनाक्षी के बहाने निकाल रही हैं।

स्वरा भास्कर का कहना है कि 2 वयस्क लोग अपने जीवन में क्या निर्णय ले रहे हैं, निकाह कर रहे या लाइव-इन में रह रहे – इससे किसी का कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए, केवल दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार का होना चाहिए। स्वरा भास्कर का कहना है कि इस पर कोई ओपिनियन किसी का नहीं होना चाहिए। फिर वो कहती हैं कि दक्षिण एशिया में दूसरों के जीवन में घुसने में लोगों को मजा आता है, ज़हीर-सोनाक्षी का बच्चा होगा तो उसके नाम पर भी काफी बहस होगी।

उन्होंने सैफ-करीना और अपना उदाहरण बता दिया। बता दें कि सैफ अली खान और करीना कपूर ने अपने पहले बेटे का नाम तैमूर रखा। इसी तरह स्वरा भास्कर और फहद अहमद ने अपनी बेटी का नाम राबिया रखा। जो स्वरा भास्कर CAA से लेकर इजरायल-फिलिस्तीन तक पर ओपिनियन देती हैं, वो अब कहती हैं कि भारत में हर चीज में ओपिनियन देने की बीमारी है। फिर स्वरा भास्कर सोशल मीडिया पर हर मुद्दे में क्यों टाँग अड़ाती घूमती रहती हैं?

स्वरा भास्कर से ये भी पूछा जाना चाहिए कि जब शादी के बाद पति-पत्नी बराबर होते हैं तो फिर सैफ अली खान और करीना कपूर के दोनों बेटों के नाम उर्दू में क्यों हैं? इसी तरह स्वरा भास्कर की बेटी का नाम वही क्यों है, जो फहद अहमद के परिवार द्वारा चुना गया लगता है। क्योंकि, स्वरा की बेटी राबिया तो तो स्पष्ट है कि वो फहद अहमद की बेटी है। सैफ अली खान और करीना कपूर का बेटा ‘मोहन’ क्यों नहीं, या फहद अहमद और स्वरा भास्कर की बेटी का नाम ‘मोहिनी’ क्यों नहीं?

खैर, दुनिया भर के मुद्दों पर ओपिनियन देने वाली स्वरा भास्कर का कहना है कि वो क्या करती हैं इस पर किसी का कोई ओपिनियन नहीं होना चाहिए। हर साल ‘लव जिहाद’ के सैकड़ों मामले सामने आते हैं, ऑपइंडिया पर भी ऐसे मामलों की सूची आपको पढ़ने को मिल जाएगी। जिस देश में हिन्दू लड़कियों को फँसाने के लिए विदेश तक से फंडिंग होती है, वहाँ ‘लव जिहाद’ को कोई झूठा कैसे बता सकता है? ज़हीर इक़बाल और सोनाक्षी सिन्हा की शादी के बहाने वो एक समस्या को प्रोपेगंडा बता रही हैं।

आपको श्रद्धा वॉकर याद होगी, जिन्हें दिल्ली में आफ़ताब अमीन ने 36 टुकड़ों में काटा। इसी तरह आपको निकिता तोमर याद होगी, जिन्हें फरीदाबाद में तौसीफ ने गोली मार दी। और हाँ, ‘लव जिहाद’ शब्द केरल के ईसाइयों ने दिया था, क्योंकि वहाँ ईसाई लड़कियों को मुस्लिम निशाना बना रहे थे। अब दूसरे सबसे बड़े बहुसंख्यक मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं या ईसाई जो भारत की जनसंख्या का मात्र 2.3% हैं? स्वरा भास्कर इस्लामी कट्टरपंथियों का बचाव कर रही हैं।

अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में ओपिनियन न दें, तो आपको सोशल मीडिया में अपने निजी जीवन की चीजें डालिए ही मत। आप अपनी शादी या बच्चा होने की सूचना सोशल मीडिया पर देंगे, कमेंट्स पब्लिक रखेंगे, फिर हर तरह के कमेंट्स आएँगे ही। स्वरा भास्कर जैसों को पब्लिसिटी भी चाहिए और लोग उनकी आलोचना भी न करें – ये कैसे चलेगा? तभी वो शाकाहारियों से भी भड़क जाती हैं, बकरीद पर हिन्दुओं को भला-बुरा कहती हैं।

कारोबारियों से रंगदारी लेकर रिश्तेदारों को डॉक्टर बना रहे नक्सली, NIA ने किया खुलासा: जब्त किए ₹1.13 करोड़, बताया- बिहार में हो रहा माओवादियों को सक्रिय करने का प्रयास

भारत में प्रतिबंधित नक्सली संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया(माओवादी) को फिर से सक्रिय करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ये खुलासा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा मंगलवार को की गई बड़ी कार्रवाई के बाद हुआ। एजेंसी ने प्रेस रिलीज जारी करके बताया कि मगध जोन में नक्सल को बढ़ावा देने के मामले में एक्शन लेते हुए 1.13 करोड़ रुपए जब्त किए।

रिलीज में बताया गया कि इतनी बड़ी राशि को बिहार और झारखंड के व्यापारियों से वसूला गया था ताकि आरोपितों के एक रिश्तेदार की मेडिकल पढ़ाई हो सके। एनआईए ने बताया कि उन्होंने 1.13 करोड़ रुपए राशि जब्त की कार्रवाई 30 दिसंबर 2021 को दर्ज केस में की। एनआई की जाँच में सामने आया कि ये सारा अमाउंट चेन्नई के मेडिकल कॉलेज में डायरेक्ट ट्रांसफर हुआ था ताकि माओवादी आतंकी के एक रिश्तेदार का एडमिशन हो। इन पैसों की ट्रांजैक्शन भी आरोपित के करीबी के बैंक अकॉउंट से किया गया था।

जाँच एजेंसी द्वारा आगे बताया गया कि व्यापारियों से ये पैसा सीपीआई माओवादियों ने वसूला था और जिसे फायदा पहुँचाने के लिए ये सब किया गया था वो एफआईआर में नामजद सीपीआई (माओवादी) आतंकी प्रद्युमन की भतीजी है। इसके अलावा वह तरुण कुमार की बहन और अभिनव उर्फ गौरव उर्फ बिट्टू की चचेरी बहन भी है। ये दोनों आरोपित हैं और दोनों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है।

बता दें कि एनआईए ने पिछले साल 20 जनवरी को रांची में अपनी विशेष अदालत के समक्ष आईपीसी और यूएपी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दो आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। पिछले साल जून में, इसने एक और आरोपित के खिलाफ मामले में अपनी पहली पूरक चार्जशीट दायर की थी, इसके बाद दिसंबर में दो अन्य के खिलाफ दूसरी पूरक चार्जशीट दायर की थी।

दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल ने माँगी थी ₹100 करोड़ की घूस: कोर्ट से ED ने कहा- हमारे पास है सबूत, शराब घोटाले में 3 जुलाई तक बढ़ी हिरासत

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार (19 जून 2024) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं उनके सहयोगी की न्यायिक हिरासत 3 जुलाई 2024 तक बढ़ा दी। अदालत केजरीवाल की नियमित जमानत की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट को बताया कि उसके पास शराब नीति में 100 करोड़ रुपए की रिश्वत माँगने को लेकर केजरीवाल के खिलाफ सबूत हैं।

ED की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कहा कि अदालत ने इस मामले में धन शोधन के मामले में दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि धन शोधन मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सह-आरोपियों की जमानत याचिका खारिज होना दर्शाता है कि अदालत धन शोधन के आरोप को स्वीकार कर रही है।

ASG राजू ने कहा, “अदालत द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का संज्ञान लेने से प्रथम दृष्टया अदालत को विश्वास हो गया है कि यहाँ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है। सीबीआई जाँच में पता चला है कि केजरीवाल ने 100 करोड़ रुपए की रिश्वत माँगी थी। हमने गिरफ्तारी से पहले ही सबूत एकत्र कर लिए थे।” बता दें कि केजरीवाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय के वकील एसवी राजू ने कहा कि विनोद चौहान ने गोवा चुनाव के लिए अभिषेक बोइनपल्ली के माध्यम से बीआरएस नेता के. कविता के पीए से 25 करोड़ रुपए प्राप्त किए। उन्होंने यह भी कहा कि इस महीने के अंत तक विनोद चौहान के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की जाएगी। विनोद चौहान को मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था।

केजरीवाल के वकील विक्रम चौधरी ने कोर्ट में दलील दी कि पीएमएलए के तहत दायर किसी भी आरोपपत्र में AAP सुप्रीमो का नाम नहीं है। विक्रम चौधरी ने कहा, “सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में भी केजरीवाल का नाम आरोपित के तौर पर नहीं है। ED जो भी आरोप लगा रही है, उससे ऐसा लगता है कि वह मुझ पर पीएमएलए के तहत नहीं, बल्कि सीबीआई के मामले में मुकदमा चला रही है।’’

उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई 2024 को अपने आदेश में कहा था कि अरविंद केजरीवाल निचली अदालत में जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। केजरीवाल के वकील ने कहा कि पूरा मामला केवल उन गवाहों के बयानों पर आधारित है, जिन्हें पहले गिरफ्तार किया गया था और जिन्हें जमानत देने का वादा किया गया था।

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें क्षमा करने का वादा किया गया था… वे संत नहीं हैं। इन लोगों को लालच दिया गया था। इन लोगों की विश्वसनीयता पर भी सवाल है। पूरा मामला अगस्त 2022 में शुरू हुआ और केजरीवाल की गिरफ्तारी चुनाव से ठीक पहले मार्च 2024 में हुई। केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय के पीछे भी एक दुर्भावना है।”

बता दें कि इससे पहले अदालत ने आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, अदालत ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत भी 19 जून तक बढ़ा दी थी। 

कॉन्ग्रेस छोड़ किरण और श्रुति ने थामा कमल: कभी तीन लाल में बँटी थी हरियाणा की राजनीति, अब BJP सबका परिवार

हरियाणा की राजनीति के केंद्र में तीन लाल- बंसीलाल, भजन लाल और देवी लाल ही रहे। साल 2014 से हरियाणा की राजनीति पर छाया चौथा लाल यानी मनोहर लाल… और अब मनोहर लाल की अगुवाई में तीनों ही दिग्गज लाल के परिवार बीजेपी में आ चुके हैं। भजन लाल और देवी लाल के परिवार को कॉन्ग्रेस से बीजेपी में लाने के बाद मनोहर लाल अब बंसी लाल के परिवार को बीजेपी में लाए हैं। 5 बार की विधायक और कॉन्ग्रेस में कई अहम पदों को संभाल चुकी किरण चौधरी और उनकी पूर्व सांसद बेटी श्रुति चौधरी ने कॉन्ग्रेस छोड़ कर मनोहर लाल की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ले ली।

दिल्ली में कॉन्ग्रेस की नेता और मौजूदा विधायक किरण चौधरी बेटी श्रुति के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, बीजेपी के राष्ट्र महासचिव तरुण चुघ की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुईं।

बीजेपी में शामिल होने के बाद किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति चौधरी दिल्ली पहुँचे और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। किरण चौधरी ने एक्स पर जेपी नड्डा से मुलाकात की जानकारी देते हुए लिखा, “भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के उपरांत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्र व हरियाणा के हित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की।”

कौन हैं किरण चौधरी?

किरण चौधरी कॉन्ग्रेस की कद्दावर नेता रही हैं। वो दिल्ली में भी विधायक और डिप्टी स्पीकर पद पर रह चुकी हैं। चौधरी बंसीलाल की बहू किरण चौधरी 5 बार विधायक रही हैं। मौजूदा समय में वो तोशाम सीट से विधायक हैं। वहीं, उनकी बेटी श्रुति चौधरी साल 2009 में भिवानी लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं, हालाँकि 2014 और 2029 में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था। इसके बाद 2024 में उन्हें कॉन्ग्रेस ने टिकट नहीं दिया था। माना जाता है कि वो हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा कैंप की विरोधी हैं।

हरियाणा के 3 लाल, तीनों परिवारों का रहा है जलवा

हरियाणा की राजनीति में कभी बंसीलाल, भजनलाल या देवीलाल के बिना एक भी पत्ता नहीं हिलता था। फिर साल 2014 में हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनी और चौथे लाल यानी मनोहर लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। तब से लेकर मनोहर लाल ने बीजेपी को हरियाणा में मजबूत ही किया है। पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल के पुत्र रणजीत सिंह को भाजपा ने 2024 में हिसार से लोकसभा का चुनाव लड़वाया। चुनाव से पहले ही रणजीत ने बीजेपी ज्वाइन की थी। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई, पुत्रवधू रेणुका बिश्नोई व पौत्र भव्य बिश्नोई और अब पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी व पौत्री श्रुति चौधरी भी बीजेपी में शामिल हो गई हैं।

अब से महज कुछ ही माह के अंदर हरियाणा में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में देखना ये है कि बीजेपी और हरियाणा के तीनों लाल और एक पूर्व मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह के बेटे राव इंद्रजीत सिंह का परिवार मनोहर लाल और नायाब सैनी के नेतृत्व में कैसा प्रदर्शन कर पाता है।

आतंकियों के खिलाफ अभियान से जिस IPS की बनी पहचान, वे कैंसर से पत्नी की मौत से टूटे: ICU में खुद को मारी गोली, मिला था गैलेंट्री अवॉर्ड

असम के गृह सचिव सेक्रेट्री शिलादित्य चेतिया को अपनी पत्नी की मौत का ऐसा सदमा लगा कि उन्होंने पत्नी के शव के सामने ही खुद को गोली मार ली। शिलादित्य की उम्र मात्र 44 साल थी। मंगलवार (18 जून 2024) शाम जैसे ही उन्हें खबर मिली कि कैंसर से जूझ रही उनकी पत्नी अब इस दुनिया में नहीं रहीं, वह वैसे ही मेडिकल स्टाफ से मिन्नतें करके आईसीयू कैबिन में गए कि उन्हें अपनी पत्नी के लिए प्रार्थना करनी है। इसके बाद उन्होंने वहीं अपनी सरकारी बंदूक से खुद को गोली मार ली। आवाज सुनते ही वहाँ हड़कंप मच गया।

नेमकेयर अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर हितेश बरुआ ने बताया, “गोली की आवाज सुनते ही हम लोग दौड़े और उन्हें अपनी पत्नी के शव के पास लेटे हुए पाया। हमने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन बचा नहीं सके। उन्होंने खुद को गोली मार ली थी। उनकी पत्नी का करीब दो महीने से अस्पताल में इलाज चल रहा था। तीन दिन पहले उनकी हालत बिगड़ गई। हमने चेतिया को उनकी हालत के बारे में बताया और उन्होंने हमारी बात समझ ली थी।”

बता दें कि शिलादित्य चेतिया 2009 बैच के IPS अधिकारी थे। वे असम के तिनसुकिया और सोनितपुर जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP) भी रह चुके थे। होम सेक्रेटरी के पद पर तैनात होने से पहले उन्होंने असम पुलिस की चौथी बटालियन के कमांडेंट के रूप में भी काम किया था। उन्हें 2015 में स्वतंत्रता दिवस पर वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला था।

उल्लेखनीय है कि शिलादित्य चेतिया को जो अवार्ड मिला वो कोई सामान्य पुरस्कार नहीं था। ये अवार्ड शास्त्रीय रूप से सैन्य कर्मियों, कानून प्रवर्तन अधिकारियों और नागरिकों को दिए जाते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्यों या दूसरों की रक्षा में असाधारण वीरता और निस्वार्थता स्थापित की है। शिलादित्य चेतिया को भी ये अवार्ड उनकी बहादुरी देख ही दिया गया था। उन्होंने ड्यूटी में रहते हुए तमाम अपराधियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने के लिए दिया गया था।

ऐसे में लोग इस खबर को सुनने के बाद हैरान हैं। कहा जा रहा है कि इतना बहादुर इंसान जिसने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाते वक्त अपनी जान की परवाह नहीं की, वो पत्नी की मौत का गम नहीं झेल पाए… ये देखना बहुत पीड़ादायक है। जानकारी के मुताबिक, शिलादित्य चेतिया की पत्नी अगमोनी बोरबरुआ की की शादी 12 मई, 2013 को उनकी शादी हुई थी और इस जोड़े का कोई बच्चा नहीं था। पिछले कुछ समय से उनपर एक के बाद एक दुख आ रहे थे। पहले उनकी माँ का निधन हुआ, फिर उनकी सास और अब उनकी पत्नी का।

जावेद ने स्टेटस पर लगाया कुर्बानी का फोटो, हिन्दू संगठनों का आरोप- गाय काटी: सहारनपुर से जाकर नाहन में करता था दुकान, शुरुआती जाँच के बाद पुलिस बोली- यह गोवंश नहीं

नोट: पुलिस की शुरुआती जाँच आने के बाद इस खबर को अपडेट किया गया है।

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बकरीद पर कुर्बानी का आरोप लगाकर बड़ा हंगामा हुआ है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि सिरमौर के नाहन में दुकान करने वाले एक बाहरी मुस्लिम युवक ने गोकशी की। इसको लेकर हिन्दू संगठनों में आक्रोश है, उन्होंने जावेद की दुकान पर प्रदर्शन किया है। जावेद अभी फरार है। हालाँकि, पुलिस ने शुरुआती जाँच में पाया है कि जिसे कुर्बानी दी गई, वह गोवंश नहीं है।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला एक युवक जावेद हिमाचल प्रदेश के नाहन में पिछले लगभग डेढ़ दो वर्षों से रेडीमेड कपड़ों की दुकान करता है। उसने बकरीद (17 जून, 2024) के दौरान अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर एक पशु की कुर्बानी के फोटो लगाए थे। जावेद ने जो स्टेटस अपने व्हाट्सएप पर लगाए थे, उनमें वह एक कटे गए पशु के पास चाकू लेकर खड़ा है और हँस रहा है। उसके आसपास में और भी लोग मौजूद हैं।

हिन्दू संगठनों का आरोप है कि जावेद ने गोवंश की हत्या की है और इसी का फोटो अपने व्हाट्सएप पर लगाया है। इसको लेकर उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई की माँग की है। हिन्दू संगठनों ने नाहन में जावेद की दुकान पर पहुँच कर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की माँग की। उन्होंने जावेद को नाहन में आगे काम ना करने देने की बात भी कही। बताया गया है कि कुछ लोग इस प्रदर्शन के दौरान उग्र भी हो गए। हिन्दू संगठनों ने नाहन में एक रैली का भी आयोजन किया है।

घटना के बाद से जावेद नाहन से फरार है। उसकी तलाश की जा रही है। हिन्दू संगठनों ने पुलिस को भी इस मामले में शिकायत दी है। दूसरी तरफ पुलिस अभी मामले की जाँच कर रही है। नाहन थाने के SHO ने इस मामले में ऑपइंडिया को बताया है कि संभवतः जावेद ने यह कुर्बानी नाहन में नहीं दी है।

उन्होंने बताया कि जावेद के संबंध में अभी जाँच की जा रही है और उसकी लोकेशन पता की जा रही है। उन्होंने बताया कि किस पशु की कुर्बानी दी गई है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया है कि जावेद के इस कृत्य के चलते नाहन में आक्रोश है।

हालाँकि, शामली (UP) पुलिस की जाँच में वह गोमांस नहीं निकला। SP ने शुक्रवार (22 जून) को कहा, “वैध पशु की कुर्बानी दी गई। सोशल मीडिया पर तस्वीर थोड़ी वीभत्स थी, इसलिए साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने के संबंध में FIR दर्ज की गई है।”

हिन्दू संगठनों के प्रदर्शन का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। इसमें बड़ी भीड़ जावेद की दुकान के बाहर मौजूद है। हिन्दू संगठनों ने माँग की है कि नाहन में बाहर से आकर दुकान करने वाले अन्य समुदाय के लोगों का दुबारा सत्यापन किया जाए और उन्हें ऐसे ही दुकान ना दी जाए।

विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि नाहन समेत पूरे हिमाचल प्रदेश में बाहर से आकर मुस्लिम व्यापारी ऊँचे किराए पर दुकानें ले रहे हैं। यह लोग यहाँ सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, यह ऐसे किराए पर दुकानें ले रहे हैं, जो सामान्य आदमी नहीं दे सकता। उन्होंने जावेद के विरुद्ध सहारनपुर में भी कार्रवाई करने की भी बात कही है।

डीपफेक वीडियो और ऑनलाइन फेक न्यूज़ पर लगेगी लगाम, ‘मोदी 3.0’ लेकर आ रहा ‘डिजिटल इंडिया बिल’: डेटा प्रोटेक्शन के बाद अब YouTube और AI पर नज़र

आजकल हैकिंग जैसी समस्याएँ बढ़ गई हैं, AI का इस्तेमाल कर के डिफेक वीडियो बना दिए जाते हैं, ऑनलाइन फ्रॉड की कई घटनाएँ होती हैं और YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए फर्जी खबरें फ़ैलाने वालों की बाढ़ आ गई है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार डिजिटल सुरक्षा के लिए बिल लाने जा रही है, ताकि इन नई समस्याओं से नए तौर-तरीके से निपटा जाए। ये ‘मोदी 3.0’ के बड़े निर्णयों में से एक होगा। इसका नाम ‘डिजिटल इंडिया बिल’ हो सकता है।

AI का कैसे हम बेहतर तरीके से सकारात्मक इस्तेमाल कर सकें, इसमें इस पर भी चर्चा की जाएगी। इसे संसद में पेश किए जाने से पहले सभी दलों से विचार-विमर्श कर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। आगामी संसद सत्र में ही इसे पेश किया जा सकता है। 18वीं लोकसभा का पहला सत्र सोमवार (24 जून, 2024) से शुरू होगा और 3 जुलाई तक चलेगा। हालाँकि, इसके बाद 22 जुलाई को मॉनसून सेशन भी शुरू होने वाला है जो 9 अगस्त तक चलेगा।

पिछली सरकार में केंद्रीय इलेक्टॉनिक्स एवं IT राज्यमंत्री रहे राजीव चंद्रशेखर ने भी इस ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि सभी चीजें लगभग तैयार हैं, लेकिन चुनाव तक इस पर बहस नहीं हो पाएगी इसीलिए अगली सरकार में इसे लाया जाएगा। बता दें कि डीपफेक वीडियो के जरिए कई हस्तियों को निशाना बनाया गया है। अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, रश्मिका मंदाना, आलिया भट्ट और आमिर खान तक इसका शिकार बन चुके हैं। किसी को भी बदनाम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

AI का इस्तेमाल कर के डिफेक वीडियो बना कर किसी से कुछ भी कहलवा देना, किसी भ्रामक सामग्री का विज्ञापन करा देना, किसी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करा देना या फिर अश्लील रूप में दिखा देना संभव है। इसी तरह लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का वीडियो वायरल कर दिया गया और दावा किया गया कि वो आरक्षण खत्म करने की बात कर रहे हैं। असम से लेकर महाराष्ट्र और तेलंगाना तक, कॉन्ग्रेस से संबंधित कई हैंडलों ने ये कुचक्र चलाया, जिसका भाजपा को नुकसान भी हुआ।

नए डिजिटल बिल के जरिए AI ने जेनेरेट किए जाने वाले फर्जी कंटेंट्स पर लगाम लगेगी। YouTube के माध्यम से ध्रुव राठी, पुण्य प्रसून वाजपेयी और अजित अंजुम जैसे कई लोग फर्जी खबरें फैलाते हैं, जिस पर अलग-अलग लोग कई भ्रामक और फेक दावों के साथ वीडियो बनाते हैं। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर मोहम्मद ज़ुबैर जैसे लोग यही काम करते हैं। विपक्षी नेता कई बार फर्जी खबरें फैला चुके हैं। नए बिल में सोशल मीडिया पर को भी रेगुलेट किए जाने की व्यवस्था होगी।

हालाँकि, इससे पहले भी सरकार इस दिशा में कदम उठाते हुए ‘डेटा प्रोटेक्शन बिल’ पेश कर चुकी है। कई कंपनियाँ यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल उनसे अनुमति के बिना करती रही हैं, डेटा बेच तक देती हैं। अब इसके लिए कंपनियों पर 500 करोड़ रुपए तक के प्रावधान किए गए हैं। पीएम मोदी खुद भी डीपफेक वीडियो और AI संबंधित समस्याओं पर बात कर चुके हैं। डीपफेक और फर्जी खबरों पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा लाए जा रहे इस बिल में अब क्या होता है, ये कुछ ही दिनों में पता चल जाएगा।

कश्मीर को अलग बताने वाली अरुंधति रॉय ने गुजरात दंगों को लेकर भी बोले थे झूठ: एहसान जाफरी की बेटियों से रेप और जिंदा जलाने का गढ़ा था किस्सा

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा कश्मीर को भारत से अलग बताने वाली अरुंधति रॉय पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। हालाँकि, दुख की बात है ये कि इसमें 14 साल लग गए। अरुंधति और उनके साथी न केवल भारत को एक राष्ट्र के रूप में नकारते हैं, बल्कि झूठे नैरेटिव गढ़कर कलह और असंतोष को भी बढ़ावा देते हैं।

हमें साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान वामपंथी-फासीवादी गिरोह की शरारती भूमिका को याद रखना चाहिए। भारतीय पत्रिका ‘आउटलुक’ में 6 मई 2002 को गुजरात में हुई हिंसा पर ‘Democracy: Who’s she when she’s at home?’ शीर्षक से अरुंधति रॉय ने 7 पेज (लगभग 6,000 शब्द) का एक लेख लिखा था।

इस लेख में अरुंधति रॉय ने लिखा था, “कल रात बड़ौदा से एक दोस्त ने रोते हुए फोन किया। उसे यह बताने में पंद्रह मिनट लग गए कि मामला क्या था। यह बहुत जटिल नहीं था। केवल इतना था कि उसकी दोस्त सईदा को भीड़ ने पकड़ लिया था। उसके पेट को चीरकर उसे जलते हुए अंगारों से भर दिया गया था। उसके मरने के बाद किसी ने उसके माथे पर ‘ऊँ’ बना दिया था।”

इस घृणित ‘घटना’ से स्तब्ध होकर भाजपा के तत्कालीन राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज ने गुजरात सरकार से संपर्क किया। पुलिस जाँच में पता चला कि सईदा नामक किसी व्यक्ति से जुड़ा ऐसा कोई मामला शहरी या ग्रामीण बड़ौदा में दर्ज नहीं किया गया था। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता की पहचान करने और उन गवाहों तक पहुँचने के लिए अरुंधति रॉय की मदद माँगी।

अरुंधति रॉय का सहयोग इस अपराध के दोषियों तक पुलिस कोे पहुँचा सकती थी, लेकिन पुलिस को कोई सहयोग नहीं मिला। इसके बजाय, रॉय ने अपने वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से जवाब दिया कि पुलिस के पास समन जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। बलबीर पुंज ने 8 जुलाई 2002 को आउटलुक में ‘डिसिमुलेशन इन वर्ड एंड इमेजेस’ के रूप में प्रकाशित अपने जवाब में इस घटना को उठाया।

इतना ही नहीं, अरुंधति रॉय अपनी उसी लेख में आगे लिखा, “…कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद इकबाल एहसान जाफ़री के घर को भीड़ ने घेर लिया। पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को किए गए उनके फ़ोन कॉल को अनदेखा कर दिया गया। उनके घर के आसपास मौजूद मोबाइल पुलिस वैन ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। भीड़ घर में घुस गई।”

अरुंधति रॉय ने लिखा, “उन्होंने (हिंदू भीड़ ने) उनकी (जाफरी की) बेटियों को नंगा कर दिया और उन्हें ज़िंदा जला दिया। फिर उन्होंने एहसान जाफ़री का सिर काट दिया और उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। बेशक, यह महज़ एक संयोग है कि जाफ़री फ़रवरी में राजकोट विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने अभियान के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कटु आलोचक थे।”

यहाँ बताना जरूरी है कि दंगों में एहसान जाफ़री की हत्या की गई थी, लेकिन उनकी बेटियों को न तो ‘नंगा किया गया’ और न ही ‘ज़िंदा जलाया गया’। उनके बेटे टीए जाफ़री ने एशियन एज को एक इंटरव्यू दिया था। इस इंटरव्यू को न्यूजपेपर ने 2 मई 2002 को ‘Nobody Knew My Father’s House was the Target’ शीर्षक से दिल्ली संस्करण के मुख्य पृष्ठ पर छापा था।

इस में टीए जाफरी ने कहा था, “अपने भाइयों और बहनों में मैं भारत में रहने वाला अकेला व्यक्ति हूँ और मैं परिवार में सबसे बड़ा हूँ। मेरी बहन और भाई अमेरिका में रहते हैं। मैं 40 साल का हूँ और मेरा जन्म और पालन-पोषण अहमदाबाद में हुआ है।” बलबीर पुंज ने 27 मई 2002 को अपने लेख ‘Fiddling With Facts As Gujarat Burns’ में अरुंधति के मनगढ़ंत दावों को खारिज़ किया था, जिसमें पुष्टि की गई थी कि जाफ़री की बेटी अमेरिका में सुरक्षित थी।

अपने लेख में बलबीर पुंज द्वारा तथ्यों का खुलासा करने के बाद अरुंधति रॉय को आउटलुक में माफीनामा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। ‘जाफरी परिवार से माफी’ शीर्षक से लिखे गए उनके फर्जी माफीनामे में कहा गया, “…मेरे लेख ‘Democracy: Who’s she when she’s at home?’ (6 मई) में एक तथ्यात्मक त्रुटि है। एहसान जाफरी की क्रूर हत्या का वर्णन करते हुए मैंने कहा कि उनकी बेटियों को उनके पिता के साथ मार दिया गया था।”

रॉय ने आगे कहा, “बाद में मुझे बताया गया कि यह सही नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एहसान जाफरी को उनके तीन भाइयों और दो भतीजों के साथ मार दिया गया था। उनकी बेटियाँ उन 10 महिलाओं में शामिल नहीं थीं, जिनका उस दिन चमनपुरा में बलात्कार किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। मैं जाफरी परिवार से उनकी पीड़ा को और बढ़ाने के लिए माफी माँगता हूँ। मुझे सच में खेद है।”

अरुंधति ने आगे लिखा, मेरी जानकारी (जो कि बाद में गलत निकली) की दो स्रोतों से जाँच की गई। टाइम पत्रिका (11 मार्च) में मीनाक्षी गांगुली और एंथनी स्पैथ द्वारा लिखे गए लेख में और एक स्वतंत्र तथ्य-खोज मिशन द्वारा ‘Gujarat Carnage 2002: A Report to the Nation‘ में, जिसमें पूर्व आईजीपी त्रिपुरा केएस सुब्रह्मण्यम और पूर्व वित्त सचिव एसपी शुक्ला शामिल थे।”

तर्क देते हुए अरुंधति रॉय ने आगे कहा, “मैंने श्री सुब्रह्मण्यम से इस त्रुटि के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी जानकारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मिली थी। (उस अधिकारी का नाम क्या था? न तो सुब्रह्मण्यम और न ही अरुंधति रॉय ने यह बताया!)…।”

यह माफ़ीनामा भी झूठा है, क्योंकि अरुंधति रॉय ने अपने झूठे माफ़ीनामे में भी दावा किया कि उस दिन 10 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और उन्हें मार दिया गया। असल में मार्च 2002 के पहले हफ़्ते में तत्कालीन अंग्रेज़ी अख़बारों को पढ़ने पर बलात्कार का कोई ज़िक्र ही नहीं मिलता। बलात्कार की ये कहानियाँ मार्च 2002 के मध्य में ही सामने आनी शुरू गईं, जब टाइम मैगज़ीन ने 11 मार्च 2002 के अपने अंक में झूठ गढ़ा।

इसी टाइम मैगजीन के झूठ को अरुंधति रॉय ने कॉपी की थी। न तो अरुंधति और न ही टाइम मैगजीन के संवाददाता ने इस मामले में किसी बलात्कार को साबित किया। अरुंधति ने सिर्फ़ जाफ़री परिवार से माफ़ी माँगी, न कि भाजपा या नरेंद्र मोदी से, क्योंकि उन्होंने अपने ग़लत दावे से उन्हें बदनाम किया। अरुंधति को देश से भी माफ़ी माँगनी चाहिए थी। उस लेख में अरुंधति रॉय ने और भी कई झूठ बोले थे।

उस झूठ के लिए उन पर धारा 153A, 499-500 (मानहानि), फर्जी खबरे फैलाने से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए था। अरुंधति ने लिखा था, “पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त (यानी पीसी पांडे), मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ने जाफरी के फोन कॉल को नजरअंदाज कर दिया। जाफरी के घर के आसपास मौजूद मोबाइल पुलिस वैन ने भी हस्तक्षेप नहीं किया।”

पुलिस आयुक्त और मुख्य सचिव को कॉल किए जाने के सभी दावे झूठे हैं। एसआईटी ने पुलिस आयुक्त पांडे के कॉल रिकॉर्ड की जाँच की और पाया कि जाफरी द्वारा कोई कॉल नहीं किया गया था। इसका जिक्र इसकी अंतिम रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 203-04 पर है। हालाँकि, पांडे ने उस दिन यानी 28 फरवरी 2002 को 302 कॉल किए और प्राप्त किए। उस दिन मुख्य सचिव जी सुब्बाराव विदेश में थे।

एसआईटी की रिपोर्ट में पृष्ठ संख्या 312 पर किया गया था। अब जब सुब्बाराव भारत से बाहर छुट्टी पर थे तो जाफरी ने उन्हें कैसे कॉल किया होगा? एसआईटी के अनुसार, पूरे आवासीय परिसर में जाफरी का लैंडलाइन एकमात्र चालू फोन था। अरुंधति रॉय ने दावा किया था कि पुलिस ने एहसान जाफरी के घर में भीड़ को रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

वास्तव में कॉन्ग्रेस सांसद एहसान जाफरी के घर के बाहर पुलिस ने हस्तक्षेप किया था। इसका जिक्र भी एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट की पृष्ठ संख्या 1 पर किया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने जाफरी के घर के बाहर चार हिंदुओं को गोली मार दी थी, 11 को घायल कर दिया। भीड़ पर लाठीचार्ज किया, 124 राउंड फायर किए और घटनास्थल पर 134 आँसू गैस के गोले दागे गए थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी 28 फरवरी 2002 को ऑनलाइन रिपोर्ट की थी कि पुलिस और फायर ब्रिगेड ने दंगाइयों को तितर-बितर करने की पूरी कोशिश की और कहीं भी पुलिस की ओर से किसी तरह की निष्क्रियता नहीं दिखाई गई। पुलिस के लिए करीब 20,000 से ज़्यादा लोगों की भीड़ को नियंत्रित करना असंभव था।

दरअसल, जाफ़री द्वारा भीड़ पर रिवॉल्वर से गोली चलाने के बाद भीड़ पागल हो गई थी। इसमें 15 हिंदू घायल हो गए थे और 1 की मौत हो गई थी। एसआईटी की पेज नंबर 1 पर इसका भी जिक्र है। इन सबके बावजूद, पुलिस ने इस घटना में 180 मुस्लिमों को अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने पुलिस पर कुछ न करने का कहीं आरोप नहीं लगाया।

इंडिया टुडे के 18 मार्च 2002 के अंक में साफ तौर पर कहा गया कि जाफरी के घर के बाहर पुलिस ने कम-से-कम 5 दंगाइयों को गोली मार दी थी। पुलिस ने करीब 180 मुस्लिमों की जान भी बचाई, जबकि घर के अंदर मौजूद 250 लोगों में से 68 की मौत हो गई, क्योंकि सभी लापता लोगों को मृत घोषित कर दिया गया था।

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के पेज 16 पर कहा गया है, “स्थानीय पुलिस के सामने अपने बयान में (6 मार्च 2002 को धारा 161 सीआरपीसी के तहत) उसने (एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी) कहा था कि जब उन्हें जेल वैन में गुलबर्ग सोसाइटी से शिफ्ट किया जा रहा था तो वहाँ जमा भीड़ ने उन सभी को मौत के घाट उतार दिया होता, अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती।”

भाजपा और अरुंधति रॉय के अन्य विरोधियों की गलती थी कि उन्होंने ऐसे झूठ के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया। आउटलुक पर भी इस तरह की बकवास प्रकाशित करने के लिए मुकदमा दर्ज होना चाहिए था। उन्हें दिवंगत अरुण जेटली से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने दिसंबर 2015 में उन पर झूठे आरोप लगाने वाले AAP नेताओं पर मुकदमा दायर किया था और उन्हें बिना शर्त माफ़ी मांगने के लिए मजबूर किया था।

(लेखक एमडी देशपांडे ने ‘Gujarat Riots: The True Story’ नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें 2002 के दंगों – गोधरा और उसके बाद के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। वे www.gujaratriots.com के और ट्विटर हैंडल @gujaratriotscom के एडमिन में से एक हैं। उन्होंने ‘Why the Vajpayee Government lost the 2004 Lok Sabha polls- An analysis’ नामक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें मीडिया के बहुत अधिक दुष्प्रचार को उजागर किया गया है, खासकर 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले और 2002 के गुजरात राज्य विधानसभा चुनावों से पहले।)