Home Blog Page 877

चंद्रबाबू नायडू 12 जून को आंध्र प्रदेश के CM पद की लेंगे शपथ: राज्यपाल ने किया सरकार बनाने के लिए आमंत्रित: विधानसभा चुनाव में NDA को मिला है प्रचंड बहुमत

आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में एनडीए की सरकार प्रचंड बहुमत के साथ बनने जा रही है। चंद्रबाबू नायडू बुधवार (12 जून 2024) को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। इससे पहले, उन्होंने राज्यपाल से राजभवन जाकर मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

राज्यपाल ने चंद्रबाबू नायडू को सरकार बनाने और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया है। चंद्रबाबू नायडू एनडीए की ओर से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ गन्नावरम में लेंगे।

अमरावती ही रहेगी राजधानी

इससे पहले, तेलुगु देशम पार्टी के सुप्रीमो एन चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार (11 जून, 2024) को घोषणा की कि अमरावती ही आंध्र प्रदेश की राजधानी होगी। राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में अपने शपथ ग्रहण से एक दिन पहले उन्होंने यह घोषणा की कि अमरावती राज्य की एकमात्र राजधानी होगी। चंद्रबाबू नायडू ने टीडीपी, भारतीय जनता पार्टी और जनसेना पार्टी के विधायकों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह यह ऐलान किया। इसी बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से आंध्र प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेता चुना गया।

मंत्रालयों का बँटवारा हुआ

इस दौरान विजयवाड़ा के कन्वेंशन सेंटर में चंद्र बाबू नायडू की अगुवाई में एनडीए की जो बैठक हुई, उसमें मंत्रियों की संख्या भी तय हो गई है। आंध्र प्रदेश सरकार में कुल 25 मंत्री बनेंगे, जिसमें से तेलुगू देशम पार्टी के 19 सदस्य होंगे, तो जनसेना पार्टी से भी 4 विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। वहीं, बीजेपी के पास भले ही महज 11 विधायक हैं, लेकिन उनमें से 2 को मंत्री पद दिया जाएगा। इस तरह से आंध्र प्रदेश की नई सरकार में कुल 25 मंत्री होंगे। माना जा रहा है कि कुछ मंत्रियों को मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ ही शपथ दिलाई जा सकती है।

नाराजगी की खबरें निकली हवा-हवाई

बता दें कि केंद्र में पर्याप्त मंत्रीपद न मिलने को लेकर चंद्रबाबू नायडू की नाराजगी की खबरें मीडिया में आ रही थी, जो पूरी तरह से बकवास और फर्जी निकली हैं। चंद्रबाबू नायडू ने साफ कर दिया है कि वो ही आंध्र प्रदेश में एनडीए के नेता हैं और अब उनके नेतृत्व में सरकार बन रही है। इस दौरान, मीडिया के एक तबके ने खबरें चलाई कि चंद्रबाबू नायडू सक्रिय राजनीति से संन्यास लेकर अपने बेटे को राज्य की सत्ता सौंप सकते हैं, ये भी महज अटकलों का ही हिस्सा निकला।

मुंबई में चोरों ने दिन-दहाड़े खोद डाला फुटपाथ, चुरा लिए लाखों रुपए के ताँबे के तार: पुलिस ने 5 को दबोचा, अन्य इलाकों में भी चोरी की आशंका

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई जैसे महानगर में निर्माण कार्य कहीं ना कहीं चलते रहता है। सड़कों का काम भी कभी नहीं रूकता। भारत की वित्तीय राजधानी में खोदी हुई सड़कें आम बात हैं। जब कोई सड़क या फुटपाथ खोदा जाता है तो उसकी तरफ शायद ही किसी का ध्यान जाता होगा, लेकिन लुटेरों का इन पर पैनी नजर होती है।

कुछ इसी तरह का मुंबई के दादर इलाके से चोरी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ लुटेरों ने फुटपाथ खोदकर उसके नीचे दबे केबल से 6 से 7 लाख रुपए की कीमत के ताँबा के तार (कॉपर वायर) चुरा लिए। यह घटना डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर रोड के दादर-माटुंगा खंड का है।

यहाँ फुटपाथ पर उखड़े हुए पेवर ब्लॉकों की नियमित जाँच के दौरान फुटपाथ के नीचे बिछाई गई यूटिलिटी केबल से ताँबे के तार चोरी होने का पता चला। लोगों ने सोचा कि यह मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा किया जा रहा नियमित काम है, लेकिन यह चोरी का मामला निकला।

चोरों ने सड़क के किनारे फुटपाथ खोदकर उसके नीचे दबी एमटीएनएल की केबल से कई लाख रुपए का कॉपर चुरा लिया। दिलचस्प बात यह है कि मुंबई के बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने लगभग एक पखवाड़े तक उसी फुटपाथ पर काम किया था और फिर से उसे समतल कर दिया था। इस चोरी का पता तब चला जब एक स्थानीय व्यक्ति ने कुछ गड़बड़ देखी।

स्थानीय निवासियों ने इसके बारे में नगर निगम को जानकारी दी। इसकी सूचना मिलने के बाद नागरिक निकाय ने अपने कर्मचारियों को यह जाँच करने के लिए भेजा कि क्या हो रहा है। तभी उन्हें पता चला कि चोर फुटपाथ के नीचे यूटिलिटी केबल से ताँबे के तार चुरा रहे थे।

बाद में एमटीएनएल ने भी शिकायत की कि दादर-माटुंगा क्षेत्र में 400 से अधिक फ़ोन लाइनें ट्रिप हो गईं। जाहिर तौर पर तारों की चोरी के कारण ऐसा हुआ। माटुंगा पुलिस ने ताँबे की इस चोरी के लिए पाँच लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। तारों की कीमत बाज़ार में ₹845 प्रति किलोग्राम है। अब संदेह है कि मुंबई के दूसरे इलाकों में भी ऐसी ही चोरियाँ हो सकती हैं, जहाँ सड़कें खोदी गई हैं।

ओडिशा के नए सीएम होंगे मोहन चरण माझी, राजनाथ सिंह ने किया नाम का ऐलान : राज्यपाल रघुबर दास ने सरकार बनाने के लिए किया आमंत्रित

ओडिशा के नए मुख्यमंत्री के तौर पर मोहन चरण माझी के नाम पर सहमति बनी है। बीजेपी की नई सरकार के मुखिया मोहन चरण माझी के नाम का ऐलान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भुवनेश्वर में किया। ओडिशा की बीजेपी सरकार में 2 उप-मुख्यमंत्री भी होंगे। उप-मुख्यमंत्री के तौर पर पहली बार विधायक बनीं प्रवती परिदा और 6 बार के विधायक केवी सिंह देव के नाम पर मुहर लगाई गई है।

ये निर्णय भाजपा विधायक दल की बैठक में लिया गया, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए। माझी के चयन के लिए बैठक विधानसभा चुनाव परिणाम की घोषणा के एक सप्ताह बाद आयोजित की गई।

ओडिशा के नए मुख्यमंत्री बने चार बार के विधायक मोहन माझी आदिवासी समुदाय से आते हैं और हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में क्योंझर सीट से चुने गए हैं। उन्होंने बीजेडी की मीना माझी को 11,577 वोटों के अंतर से हराया है। एक मजबूत आदिवासी चेहरा माझी अपनी सार्वजनिक सेवा और संगठनात्मक कौशल के लिए जाने जाते हैं।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर घोषणा की, ‘यह घोषणा करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मोहन चरण माझी को सर्वसम्मति से ओडिशा बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है। वे एक युवा और गतिशील पार्टी कार्यकर्ता हैं जो ओडिशा के नए मुख्यमंत्री के रूप में राज्य को प्रगति और समृद्धि के मार्ग पर आगे ले जाएँगे। उन्हें बहुत-बहुत बधाई। साथ ही, यह भी निर्णय लिया गया है कि नई राज्य सरकार का नेतृत्व करने के लिए दो उप-मुख्यमंत्री नामित किए जाएँगे। केवी सिंह देव और श्रीमती प्रवती परिदा उप-मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा करेंगे। उन्हें बधाई!’

राज्यपाल से की मुलाकात, सरकार बनाने के लिए आमंत्रित

इस बीच, ओडिशा के मुख्यमंत्री पद के लिए चुने जाने के बाद मोहन चरण माझी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ओडिशा के राजभवन गए और राज्यपाल रघुबर दास से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद राज्यपाल ने मोहन चरण माझी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।

गौरतलब है कि ओडिशा में हुए विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल (बीजेडी) की हार हुई है, जिसके बाद नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। नवीन पटनायक 24 साल से मुख्यमंत्री थे। बीजेपी ने 147 सदस्यीय विधानसभा में 78 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि बीजेडी को 51 और कॉन्ग्रेस को महज 14 सीटों पर जीत मिली।

ABC की ‘पत्रकार’ अवनी डायस ने फिर बोला झूठ: पहले मोदी सरकार द्वारा वीजा रद्द करने का लगाया आरोप, अब भारतीय संविधान के बारे में फैला रही अफवाह

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन एनडीए ने लोकसभा चुनाव 2024 में शानदार जीत दर्ज की। एक तरफ पीएम मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे थे, तो दूसरी तरफ भारत विरोधी शक्तियाँ भारत सरकार और खासकर मोदी सरकार को बदनाम करने के प्रयास में लगातार जुटे हुए थे। इन्हीं प्रयासों में एक है ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) की कथित ‘पत्रकार’ अवनि डायस द्वारा झूठ फैलाने का प्रयास, जिसमें अवनि ने 5 जून 2024 को भारत के संविधान के बारे में फर्जी बातें प्रसारित की।

अवनि डायस ने कुछ समय पहले ही ये फर्जी खबर फैलाई थी कि ‘निगेटिव रिपोर्टिंग’ की वजह से भारत सरकार ने उनका वीजा रद्द कर दिया है, जबकि वो दावा फर्जी निकला था। इस बार अवनि ने दावा किया है कि ‘धर्मनिरपेक्षता’ भारतीय संविधान का अहम हिस्सा है, वो भी अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद यानी 1947 से। अवनि ने ‘नरेंद्र मोदी से पहले के भारत की कहानी’ हेडलाइन के साथ एक वीडियो बनाकर ये बताने की कोशिश की कि भारत में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की धर्मनिरपेक्षता किस तरह के खतरे में है।

अपने वीडियो के 9.19 मिनट पर अवनि डायस ने कहा, “आपको बता दें कि जब 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद भारत की स्थापना हुई थी, तो इसके संविधान में लिखा गया था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका मतलब है कि धर्म के आधार पर देश में सभी को आजादी होनी चाहिए।” अवनि ने दावा किया कि भारत के संविधान में सेक्युलर शब्द पेज नंबर 33 पर बड़े अक्षरों में लिखा है।

हालाँकि अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही ‘पत्रकार’ अवनि ये भूल गई कि भारत का संविधान 1947 में लागू नहीं हुआ और जब भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, तब सेक्युलर शब्द उस संविधान का हिस्सा ही नहीं था। बता दें कि भारत का संविधान 1947 में नहीं, बल्कि तीन साल बाद 1950 में लागू हुआ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा 1976 में (आपातकाल के काले दिनों के दौरान) बनाया गया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संसद को दरकिनार कर संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द शामिल करने के लिए 42वाँ संविधान संशोधन पारित किया था। अवनि डायस के दावों के विपरीत, संविधान यह बताने के लिए नहीं लिखा गया था कि भारत एक ‘धर्मनिरपेक्ष देश’ है। पूरे वीडियो में एबीसी न्यूज के ‘पत्रकार’ ने वैश्विक स्तर पर देश की छवि को धूमिल करने के लिए अटकलों, अनुमानों और मान्यताओं पर भरोसा किया।

पहले भी विवादों में रही हैं अवनि डायस

बता दें कि इसी साल अप्रैल में अवनि डायस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दावा किया था कि मोदी सरकार ने उनका वीजा नहीं बढ़ाया, जिसकी वजह से उन्हें भारत छोड़ना पड़ा। अवनि ने दावा किया कि ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उनकी रिपोर्टिंग सरकार को पसंद नहीं आ रही थी। हालाँकि ये पूरी तरह से झूठ था, क्योंकि उन्होंने जैसे ही वीजा के लिए अप्लाई किया, उनका वीजा 2 माह के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बावजूद एबीसी न्यूज ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया और दावा किया कि भारत के विदेश मंत्रालय ने फोन करके अवनि को सूचित किया था कि उनका वीजा नहीं बढ़ाया जा रहा।

खैर, इस प्रोपेगेंडा से इतर अवनि डायस से जुड़ा एक और मामला भी है। उसने कनाडा में हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिस पर भारत सरकार रोक लगा चुकी है और यू-ट्यूब पर पर भी उसके मामले में नोटिस दिख रहा है। दरअसल, यो डॉक्यूमेंट्री न सिर्फ तथ्यात्मक रूप से गलत थी, बल्कि भारत के संवेदनशील सीमाई इलाकों में गलत तरीके से फिल्माई गई थी। उन लोकेशन पर शूट करने के लिए गलत तरीके से अनुमति हासिल की गई थी, जिसका बीएसएफ ने भी विरोध किया था।

पहले भी भारत को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाती रही हैं अवनि डायस

अवनि डायस भारत विरोधी, सनातन विरोधी लेखों के लिए जानी जाती है। उसने कई बार प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार एक्सपोज होती रही। इसी साल मार्च में अवनि डायस ने ब्रिसबेस में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी कट्टरपंथियों के हमले को नकारते हुए कट्टरपंथियों को क्लीनचिट देने की कोशिश की थी। उन्हें इसे हिंदू समूहों का ही हमला करार दे दिया था। उनके दावों को खुद ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने एक्सपोज कर दिया था। एक फेसबुक पोस्ट में ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने अवनि डायस और उनकी साथी नाओमी सेल्वारत्नम को ‘ब्राउन सिपाही’ की संज्ञा दी थी।

सरकारी जमीन पर जबरन नमाज, फिर बनवा दी दिवार: रोकने पर मुस्लिम भीड़ का हमला, एक हिंदू की निजी जमीन पर भी ठोका दावा, वामपंथी पार्टी के दबाव में पुलिस बेबस

नेपाल के जनकपुर में मुस्लिम समुदाय द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा करने की साजिश के बाद दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। मुस्लिम पक्ष द्वारा पुलिस की मौजूदगी में पत्थरबाजी की गई, जिसमें हिन्दू पक्ष के कई लोग घायल हो गए। घायलों में स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं।

मुस्लिम पक्ष के दबाव में एक योग शिविर का भी काम रोक दिया गया है। हालात को देखते हुए इलाके में फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। घटना सोमवार (10 जून 2024) की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए हिन्दू संगठन के सदस्यों ने इसे लैंड जिहाद बताया और वामपंथी पार्टियों द्वारा मुस्लिम पक्ष को समर्थन देने का आरोप लगाया है।

माँगी थी नमाज़ पढ़ने के लिए थोड़ी सी जगह

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, शिवपुर में एक सरकारी स्कूल है। भवन के आसपास काफी जमीन है, जो कि स्कूल की ही है। इस जमीन पर लगभग 16 साल पहले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने नमाज पढ़नी शुरू कर दी थी। तब इस इलाके में मुस्लिम आबादी न के बराबर थी। 2-4 परिवार ही इस इलाके में हुआ करते थे। उन्होंने इबादत के लिए पहले स्कूल की बिल्डिंग चुनी।

लगभग 10 साल पहले स्कूल कम्पाउंड में किसी बात को लेकर हिन्दू और मुस्लिम पक्ष में विवाद हो गया था। तब से कुछ समय के लिए स्कूल के अंदर नमाज़ पढ़नी बंद हो गई थी। इस बीच जनकपुर में मुस्लिमों की तादाद लगातार बढ़ती रही। 10 साल पहले का विवाद शांत होने के बाद मुस्लिम पक्ष ने स्कूल के भवन के बजाय उसकी खाली पड़ी जमीन पर नमाज़ पढ़नी शुरू कर दी।

इसमें नमाज़ियों की तादाद बढ़ती चली गई। अब जनकपुर के शिवपुर इलाके में लगभग 70 से 80 घर मुस्लिमों के हो चुके हैं। इन्होंने अपनी खुद की मस्जिद भी बनवा डाली है। इसके बावजूद मुस्लिम पक्ष ने स्कूल की सरकारी जमीन पर नमाज़ पढ़ना बंद नहीं किया। कुछ साल पहले से मुस्लिमों ने इस सरकारी जगह को अपनी इबादतगाह वाली जगह बताना शुरू कर दिया है।

स्कूल के नाम पर है जमीन

हाईकोर्ट के आदेश को भी रख दिया ठेंगे पर

साल 2013 में स्कूल की जमीन को अपना बताते हुए मुस्लिम पक्ष के लोग जनकपुर हाईकोर्ट गए थे। यहाँ चली सुनवाई में हाईकोर्ट ने जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा ख़ारिज कर दिया। न्यायाधीश ने यह जमीन सरकार की बताई और वहाँ किसी भी प्रकार के निजी निर्माण पर रोक लगा दी।

ऑपइंडिया के पास हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी मौजूद है। जमीन सरकार की घोषित होने के बावजूद मुस्लिम पक्ष ने वहाँ नमाज़ पढ़नी बंद नहीं की। नमाज़ियों की पूरी टोली को मोहम्मद कैश और इब्राहिम राईन लीड करते रहे। रमज़ान आदि के महीनों में तो यहाँ इतनी भीड़ हो जाती थी कि बच्चों की पढ़ाई में बाधा आने लगी थी।

जो दिखा उसी पर बोला हमला

इस बीच सोमवार (10 जून 2024) को स्कूल वाली खाली जगह पर मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ में 70 से 80 लोग शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें बच्चे, बूढ़े और जवान के अलावा औरतें भी शामिल थीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि वहाँ 2-3 दिन से चुपके-चुपके ट्रैक्टर-ट्रॉली से ईंटें और सीमेंट आदि गिरवा दिए गए थे और कारीगर बुलाकर सरकारी जमीन पर दीवार उठाया जा रहा था।

निर्माण अवैध बता कर स्कूल द्वारा रोकने की गुहार

स्कूल की जमीन पर मुस्लिम पक्ष द्वारा दीवार बनाते देखकर वहाँ के टीचर, छात्र-छात्राओं और आसपास के ग्रामीणों ने इसे अवैध निर्माण बताकर विरोध शुरू कर दिया। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस के 2 जवान भी पहुँच गए। इस रुकावट की वजह से मुस्लिम पक्ष नाराज हो गया। उन्होंने स्कूल के पास जुटे ग्रामीणों और छात्रों पर हमला कर दिया।

हमले के दौरान लाठी-डंडे भांजे गए। हिन्दुओं के अलावा पुलिस पर भी पत्थरबाजी की गई। इस हमले में आधे दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में स्कूल के अंदर पढ़ रहे कुछ नाबालिग छात्र भी बताए जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल पहुँचा। आरोप है कि पुलिस ने पत्थरबाजी कर रहे मुस्लिमों पर कोई कार्रवाई नहीं की और उनको समझाती-बुझती रही।

स्कूल की जमीन पर खड़ा हुआ अवैध निर्माण

रुकवा दिया योग शिविर का भी निर्माण

घायल हिन्दुओं का अस्पताल में इलाज करवाया गया है। अभी तक किसी भी पत्थरबाज अथवा हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ऑपइंडिया ने इस मामले में हिन्दू सम्राट सेना के कुछ पदाधिकारियों से बात की। नाम नहीं छपने की शर्त पर उन्होंने बताया कि मुस्लिम पक्ष के लोगों को वामपंथी पार्टी (एमाले) का समर्थन हासिल है।

उन्होंने बताया कि मुस्लिम पक्ष से जब काम रोकने के लिए कहा गया तो उन्होंने स्कूल से थोड़ी दूर पर बन रहे योग शिविर पर आपत्ति दर्ज करवा दी। यह योग शिविर डॉक्टर प्रमोद यादव अपनी निजी जमीन पर बनवा रहे थे। प्रमोद ने अपनी तरफ से तमाम सफाई और जमीन निजी होने के कागजात भी दिखाए। इसके बावजूद प्रशासन ने प्रमोद के योग शिविर पर अस्थाई तौर पर पाबंदी लगा दी है।

हिन्दू सम्राट सेना के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मुस्लिमों को खुश करने के लिए रोके गए योग शिविर का काम फिर से शुरू नहीं हुआ तो वो आंदोलन करेंगे। फ़िलहाल प्रशासन ने योग शिविर के कागजात मँगवाए हैं। मुस्लिम पक्ष द्वारा जो छोटी सी दीवार स्कूल की जमीन पर खड़ी की है, वो अभी भी बरकरार है। हिन्दू संगठनों ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए तत्काल ध्वस्त करने की माँग की है।

महाराष्ट्र ATS ने मुंबई से 4 बांग्लादेशी नागरिकों को दबोचा: फर्जी कागजात से बनवाया वोटर कार्ड और लोकसभा चुनावों में डाला था वोट, 5 अन्य की तलाश

मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (Mumbai ATS) ने राजधानी में अवैध रूप से रह रहे चार और बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने फर्जी कागजात के आधार पर वोटर कार्ड भी बनवा रखे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि इन लोगों ने इस बार के लोकसभा चुनावों में वोट भी डाला था। इसके अलावा, एटीएस ने 5 बांग्लादेशियों की पहचान की है, जिनकी तलाश की जा रही है।

गिरफ्तार किए सभी चारों आरोपितों को ATS मुंबई के मझगाँव कोर्ट पहुँची है। इस मामले में फारुख शेख को 14 जून तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। बाकी आरोपितों को जेल कस्टडी में भेज दिया गया है। जाँच में सामने आया है कि ये सभी बांग्लादेशी नागरिक गुजरात में रहकर फर्जी पासपोर्ट बनाया करते थे, जिसका इस्तेमाल करके कुछ लोग विदेश में जाकर नौकरी भी कर रहे हैं।

जिन चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, वे हैं- रियाज हुसैन शेख, सुल्तान सिद्दीकी शेख, इब्राहिम शफीउल्लाह शेख और फारूक उस्मान गनी शेख। रियाज हुसैन शेख 33 साल का है और यह इलेक्ट्रिशियन का काम करता है। यह यमुनानगर, मिल्लतनगर, लोखंडवाला, अंधेरी (पश्चिम) में रहता था। यह हृदयनगर, जिला नोवाखाली, बांग्लादेश का रहने वाला है।

दूसरा आरोपित सुल्तान सिद्दीकी शेख 54 साल का है। यह अंबुजवाडी, आझाद नगर, मालवणी, मालाड, मुंबई में रहता था और यहाँ वह रिक्शा चलाने का काम करता था। सुल्तान सिद्दीकी सिनोदी, पो. चंदेहाट, तहसिल बाटोया, जिला सदर नोवाखाली, बांग्लादेश का रहने वाला है।

तीसरे आरोपित इब्राहिम शफीउल्लाह शेख 46 साल का है। यह म्हाडा कॉलनी और माहुल गाँव में रहता था और सब्जी बेचने का काम करता था। जाँच में ATS को पता चला कि इसका असली पता साहेबर हाट, कादीरपुर, थाना बेगमगंज, जिला नोवाखाली, बांग्लादेश का रहने वाला है।

चौथे आरोपित का नाम फारूक उस्मान गनी शेख है और यह 39 साल का है। फारूक ओशिवरा, जोगेश्वरी (पश्चिम) में रहता था। जाँच में एजेंसी को पता चला कि यह कबीर हाट, मोनीनगर, जिला नोवाखाली, बांग्लादेशी का रहने वाला है। इस मामले में 5 अन्य बांग्लादेशियों की पहचान हुई है, जो फरार हैं। इनकी तलाश चल रही है।

ये गुजरात के सूरत से फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाकर नागरिक के तौर पर मुंबई में अवैध रूप से रह रहे थे। बाकी के फरार 5 में से एक बांग्लादेशी नागरिक भारत का फर्जी कागजात बनाकर सऊदी अरब में नौकरी के लिए गया था। इसका भी खुलासा एजेंसी ने किया है। ये सभी वर्षों पहले भारत में अवैध रूप से घुसे थे।

भारत-पाकिस्तान मैच में पहले टूटती थी TV, इस बार मार दी गोली: यूट्यूबर ने मैच के बारे में पूछा, गार्ड ने जान से ही मार दिया

भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के बाद पाकिस्तान से अक्सर खबरें आती थी टीवी टूटने की, या सोशल मीडिया पर रोते हुए फैन्स की, या फिर कप्तान कोच के बदलने का, लेकिन इस बार तो हद ही हो गई है। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले कराची में एक सिक्योरिटी गार्ड ने यूट्यूबर को ही मार दिया। यूट्यूबर लोगों से क्रिकेट विश्वकप में भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले को लेकर सवाल पूछ रहा था, लेकिन गुस्साए गार्ड ने उसे गोली मार दी।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूट्यूबर का नाम साद अहमद था। उसकी उम्र 24 साल थी और 2 बच्चों का पिता था। साद यूट्यूबर चैनल के लिए वीडियो व्लॉग बनाता था। वो कराची के मोबाइल मार्केट में लोगों की वीडियो बाइट ले रहा था। इसी दौरान उसने सिक्योरिटी गार्ड से भी कुछ पूछने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए सिक्योरिटी गार्ड ने उसे एकदम पास से गोली मार दी। वो तुरंत वहीं गिर गया। कुछ सेकंड तक लोगों ने उसे उठाने और समझाने की कोशिश की, और अस्पताल के लिए लेकर भागे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने आरोपित सिक्योरिटी गार्ड को उसी दिन 5 जून को गिरफ्तार कर लिया। सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि उसे पता ही नहीं कि इस बंदूक से गोली कैसे चली। उसे बंदूक चलाना नहीं आता। उसने बताया कि वो 5 बच्चों का पिता है, अब उसका क्या होगा, ये उसे नहीं मालूम। कराची की ये खबर सामने आने के बाद हर कोई हैरान है।

बता दें कि ये समाचार भारत के लोगों तक तब पहुँचा है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच आईसीसी टी-20 क्रिकेट विश्वकप का मुकाबला हो चुका है। ये मुकाबला काफी करीबी रहा था। भारत ने पाकिस्तान को 6 रनों से हरा दिया था। भारतीय टीम महज 119 रन ही बना पाई थी, लेकिन पाकिस्तानी टीम महज 113 रन ही बना पाई, जिसके बाद से पाकिस्तानी क्रिकेट फैन पाकिस्तान की टीम पर गुस्सा उतार रहे हैं।

झूठा, धोखेबाज, चोर… : CM केजरीवाल के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाएँ, बोलीं- वोट के बदले किया ₹1000 देने का वादा, अब तक नहीं दिए

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ महिलाएँ सड़कों पर उतरीं हुई हैं। उनका कहना है कि सीएम केजरीवाल ने उन लोगों से हर महीने 1000 रुपए देने को कहा था, लेकिन वो पैसे अब तक उनके खातों में नहीं आए हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाएँ केजरीवाल से 1000-1000 रुपए माँगते दिखीं और सीएम पर दिल्ली की जनता को बेवकूफ बनाने का इल्जाम भी लगाया। महिलाओं का आरोप है चुनाव से पहले उन्होंने वोट पाने के लिए ये वादा किया था।

जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन को ‘दिल्ली महिला मंच’ द्वारा किया जा रहा है। इसकी वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में प्रदर्शनकारी महिलाओं में से एक बुर्काधारी महिला कहती है- “हम लोग महिला मंच से आए हैं और मैं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से यह सवाल करना चाहती हूँ कि जो फॉर्म अरविंद केजरीवाल ने हमसे भरवाए थे, उसे पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है? आखिर क्यों केजरीवाल अपने वादों से मुकर रहे हैं? दूसरों को यह लोग शराब की बोतलें बाँट रहे हैं, लेकिन हमें एक हजार रुपए तक नहीं दे पा रहे हैं।”

महिलाएँ कहती सुनाई पड़ रही हैं- केजरीवाल ने हमसे वादा किया तो हमने ईमानदारी से उन्हें वोट दिया। उन्होंने फॉर्म भरवाने के बाद भी पैसे नहीं भेजे। ये झूठे हैं, धोखेबाज हैं और चोर हैं।

एक अन्य महिला भी बताती है कि उन लोगों ने फॉर्म भरे थे ताकि उन्हें बाद में 1000 रुपए मिलें। महिला बोली- केजरीवाल ने हमसे वादा किया था कि 18 साल की आयु को पार कर चुकी प्रत्येक बहन-बेटियों को 1 हजार रुपए दिए जाएँगे। ये हमेशा झूठ बोलते हैं। कि दिल्ली में 200 यूनिट बिजली मुफ्त है, कहीं बिजली मुफ्त नहीं है और कहते हैं कि बस में यात्रा फ्री है, लेकिन बस वाले महिलाओं को देखकर बस रोकते ही नहीं हैं। यह सरकार हम लोगों को पागल बना रही है। इस सरकार का हमसे कोई लेना-देना नहीं है। यह सरकार सिर्फ झूठे वादे करती है। किसी से भी पूछ लो। मुख्यमंत्री ने सबसे झूठे वादे किए हैं।

बांग्लादेशी सांसद की लाश वाली फोटो उसी की पार्टी के नेता के मोबाइल पर: कोर्ट में हत्यारे का कबूलनामा, सेप्टिक टैंक से मिले शव के कुछ टुकड़े

बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम अनार के हत्यारे ने कबूल किया है कि उसने अनवरुल के शव की फोटो खींची थी और बांग्लादेश में उन्हीं की पार्टी के नेता के पास फोटो भेजा था। कोर्ट में उसने बताया कि हत्या के बाद शव की तस्वीर उनके संसदीय क्षेत्र झेनाइदह में अवामी लीग के नेता काजी कमाल अहमद उर्फ बाबू के फोन पर भेजी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में मुख्य आरोपितों में से एक शिमुल भुइयाँ ने बांग्लादेशी राजनेता की हत्या के बाद शव की तस्वीर उनके संसदीय क्षेत्र झेनाइदह में अवामी लीग के नेता काजी कमाल अहमद उर्फ बाबू के फोन पर भेजी थी। इसकी वजह ये थी कि लोगों को पता चले कि अनवारुल अजीम की हत्या हो चुकी है, साथ ही प्रभावशाली लोगों में डर बैठाने के लिए भी ये तस्वीर भेजी गई।

कोलकाता के न्यूटाउन स्थित फ्लैट के सेप्टिक टैंक से बरामद माँस के टुकड़े इंसान के बताए जा रहे हैं, लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है कि वे सांसद अनार के हैं या नहीं, डीएनए जाँच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी। जिस फ्लैट के सेप्टिक टैंक से इंसानी माँस के टुकड़े मिले, उसी फ्लैट में सांसद की हत्या की थी और शव को 80 टुकड़ों में बाँट दिया था। उन्होंने उन टुकड़ों को दक्षिण 24 परगना जिले के बड़े नाले में फेंक दिया था, तो छोटे हिस्सों को कमोड के जरिए बहा दिया था। यही नहीं, इस फ्लैट के पास के नाले से भी इंसानी हड्डियाँ बराबद होने की बात सामने आ रही है।

गौरतलब है कि सांसद अनवारुल इलाज कराने के बहाने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुँचे थे। वो 12 मई को कोलकाता पहुँचे, लेकिन उनकी तलाश कुछ दिनों बाद शुरू हुई, जब उनके परिचित गोपाल बिश्वास ने 18 मई 2024 को पुलिस में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया जा रहा है कि इस हत्याकाँड को अंजाम देने के लिए अनवारुल के ही करीबी दोस्त अख्तरुज्जमाँ ने 5 करोड़ की सुपारी दी थी। अख्तरुज्जमाँ अमेरिकी नागरिक है और अनवारुल का बिजनेस पार्टनर भी।

सांसद अनवारुल अजीम अनार और संदिग्ध अख्तरुज्जमाँ मिलकर सोने की तस्करी का काम करते थे, मगर पैसों को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुआ और अख्तरुज्जमाँ ने पूरी हत्या की साजिश रची। बताया जा रहा है कि अजीम ने 100 करोड़ टका से अधिक अपने पास रख लिया था।

यूरोपीय संसद के चुनाव में जीती दक्षिणपंथी पार्टी तो भड़के वामपंथी: फ्रांस के कई शहरों में दंगे एवं प्रदर्शन, फिलिस्तीन के समर्थन में नारे

यूरोपीय संसद के चुनावों में दक्षिणपंथी नेशनल रैली (रैसेम्बलमेंट नेशनल, आरएन) ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की रेनेसां पार्टी को 31.5% वोटों से पराजित कर दिया है। इसके बाद सोमवार (10 जून 2024) को राजधानी पेरिस की सड़कों पर सैकड़ों वामपंथी समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया।

वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने फ्रांसीसी संसद के बाहर एकत्र होकर विजयी दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली के खिलाफ नारे लगाए। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में नारे भी लगाए।

इस महीने के अंत में होने वाले संसदीय चुनावों में नेशनल रैली के खिलाफ लड़ने के लिए घनघोर वामपंथी ‘पॉपुलर फ्रंट’ पर दबाव बनाने के लिए हज़ारों वामपंथी रेनेस, नैनटेस और रूएन में एकत्र हुए। रेनेस में 2,500 से अधिक लोगों ने दक्षिणपंथ के उदय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणपंथ के खिलाफ़ वामपंथियों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए पॉपुलर फ्रंट (Front Populaire) के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से वामपंथी दल, इकोलजिस्ट और ट्रेड यूनियन शामिल थे।

रेनेस में वामपंथियों का विरोध प्रदर्शन किया (फोटो स्रोत: फ्रांस24)

नैनटेस में सोमवार को 1,000 से ज़्यादा लोगों ने रैली निकाली और ‘ला ज्यूनेसे एम्मर्डे ले आरएन’ (Youth f*cks with the RN) और ‘वोत्रे हैन, नोट्रे रेवोल्टे’ (“आपकी नफ़रत, हमारा विद्रोह”) जैसे नारे लगाए। वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने शाम को शहर में ‘क्रांति या बर्बरता’ लिखे बैनर के साथ मार्च शुरू किया।

इस बीच रूएन में 800 से ज़्यादा लोगों ने दक्षिणपंथी पार्टी के ख़िलाफ़ रैली निकाली। इस दौरान नारे लगाए गए, ‘Young people f*ck the Front National’ और ‘हर कोई फ्रंट नेशनल से नफ़रत करता है’ जैसे नारे लगाए। बोर्डो और कुछ दूसरी जगहों पर विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा।

सोमवार को फ्रांसीसी छात्र पेरिस के हेनरी IV हाई स्कूल में यूरोपीय संसद में दक्षिणपंथी पार्टी की जीत का विरोध करने के लिए एकत्र हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने इमारत के प्रवेश द्वार को अवरुद्ध कर दिया, बैनर लहराए और रूढ़िवादी पार्टी एवं राष्ट्रपति मैक्रोन के खिलाफ नारे लगाए।

फ्रांसीसी हाई स्कूल के छात्रों ने पेरिस में आर.एन. के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया (स्रोत: अनादोलु)

फ्रांस में दक्षिणपंथ के उदय के खिलाफ वामपंथियों का विरोध यह दर्शाता है कि दुनिया भर में वामपंथियों में आम विशेषता है। लोकतंत्र तभी है, जब वामपंथी जीतते हैं और लोकतंत्र तब खत्म हो जाता है, जब उनके विरोधी विजयी होते हैं।

मैक्रों ने संसद भंग की, शीघ्र चुनाव की घोषणा की

यह घोषणा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा फ्रांस की संसद के निचले सदन को भंग करने के बाद की गई है। मतदाताओं को 9 जून को यूरोपीय संसद के चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टी द्वारा अपनी पार्टी की अपमानजनक हार के बाद सांसदों को चुनने के लिए आने वाले दिनों में चुनावों में वापस जाना पड़ा।

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब फ्रांस के प्रोविजिनल परिणामों से पता चला है कि यूरोपीय संघ के संसदीय चुनावों में दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी बहुत आगे है, जिससे मैक्रों के यूरोप समर्थक मध्यमार्गियों को शर्मनाक निराशा हुई है।

इसमें रैसम्बलमेंट नेशनल (नेशल रैली) को 31.37% वोट मिले, मार्कोन की रेनेसां पार्टी और उसके गठबंधन बेसोइन डी यूरोप को सिर्फ 14.60% वोट मिले हैं।