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जगन्नाथ मंदिर के खुले चारों द्वार… ओडिशा में सरकार बनने के पहले दिन BJP ने पूरा किया 1 वादा: CM माझी बोले- विकास के लिए आवंटित करेंगे ₹500 करोड़

ओडिशा में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद पहली बार सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पहले दिन से ही जनता से किए वादे पूरे करने शुरू कर दिए हैं। कल (12 जून 2024) प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के बाद मोहन शरण माझी ने आज जगन्नाथ पुरी के चारों द्वार खोले जाने का ऐलान किया है।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले पर फैसला भाजपा सरकार ने पहली कैबिनेट मीटिंग के बाद ले लिया था। ये बैठक मोहन माझी के बतौर ओडिशा के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लिए जाने के बाद 12 जून की शाम हुई थी।

इसी बैठक में मंदिर के चारों गेट खोलने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे कैबिनेट ने पास कर दिया और अब पुरी के चारों द्वार खोले जा चुके हैं। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने जगन्नाथ मंदिर के सभी गेट खोलने जाने के फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी है। माझी ने लिखा है कि पुरी मंदिर के 4 दरवाजे पर जूता और मोबाइल स्टैंड बनाया जाएगा।

सीएम ने कहा है कि प्रबंधन समिति की आपात बैठक में मंदिर को लेकर यह निर्णय हुआ। पुलिस विभाग को नियमित निगरानी की व्यवस्था करने का निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री मोहन माझी ने बताया कि सुबह साढ़े छह बजे फैसले मंदिर में लागू किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट में मंदिर के विकास और अन्य कामों के लिए फंड देने का प्रस्ताव रखा गया है। अगले बजट में मंदिर के विकास के लिए 500 करोड़ रुपए का फंड आवंटित करेंगे।

बता दें कि चुनाव के दौरान भाजपा ने जनता से जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वारा खोलने का वादा किया था, जो सरकार बनते ही पूरा हो गया है। बीजद सरकार ने कोरोना के बाद से इस द्वार को बंद करवा रखा था। बाद में अलग-अलग बहाने देकर वह इसे टालते रहे। हालाँकि भाजपा सरकार ने पहली बैठक में इस पर सुनवाई की और हिंदू श्रद्धालुओं को खुशखबरी दी।

‘सेक्स डॉक्टर’ अब्दुल्ला पठान ने नौकरी देने के बहाने किया युवती से गैंगरेप, विरोध करने पर तमंचे से डराया: केस दर्ज, यूट्यूब पर हैं 1M+ फॉलोवर

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद जिले के यूट्यूबर और झोलाछाप डॉक्टर अब्दुल्ला पठान पर अब एक महिला ने गैंगरेप का आरोप लगाया है। पीड़िता मूल रूप से गोरखपुर जिले की रहने वाली है। उसने अब्दुल्ला पठान पर नौकरी का झाँसा देकर बुलाने और नशीली दवा खिलाकर बलात्कार करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करते हुए इस दौरान उसका गर्भपात भी करवाया गया है। अब्दुल्ला के साथ उसका भाई अब्दुल मलिक भी इस केस में नामजद है। पुलिस ने सोमवार (10 जून 2024) को अब्दुल्ला पठान पर FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मामला मुरादाबाद के कुंदरकी थानाक्षेत्र का है। यहाँ एक महिला ने अब्दुल्ला पठान और उसके भाई सहित एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ तहरीर दी है। तहरीर में पीड़िता ने बताया कि साल 2021 में सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी जान-पहचान अब्दुल्ला पठान से हुई थी। कुछ समय बाद अब्दुल्ला ने गोरखपुर निवासिनी महिला को मुरादाबाद में अपने दवाखाने पर 15 से 20 हजार रुपए की नौकरी देने का लालच दिया। उसने पीड़िता को विश्वास दिलाया कि उसकी क्लिनिक में पहले से कई महिलाएँ काम करती हैं।

अब्दुल्ला ने अपने द्वारा दिए गए जॉब ऑफर में रहना-खाना फ्री बताया था। पीड़िता अब्दुल्ला की बातों में आकर जुलाई 2021 में गोरखपुर से मुरादाबाद पहुँच गई। यहाँ आरोपित ने पीड़िता को किराए के एक कमरे में रखा। क्लिनिक में 4 महीने तक काम करवाने के बाद अब्दुल्ला ने महिला को फिर से जल्द बुलाने की बात कहते हुए वापस उसके घर भेज दिया। जनवरी 2023 में अब्दुल्ला पठान खुद गोरखपुर गया और लड़की को अपने साथ लेकर मुरादाबाद आ गया। इस बार उसने लड़की को कुंदरकी इलाके के अपने ही एक मकान में रखा।

आरोप है कि इस घर में अब्दुल्ला पठान ने पीड़िता को जनवरी 2023 में ही नशीली दवा खिला कर रेप किया। इसी दौरान उसने लड़की के अश्लील वीडियो बना डाले। इसे लड़की के गाँव तक वायरल करने की धमकी देते हुए अब्दुल्ला आए दिन पीड़िता का बलात्कार करने लगा। रेप से पीड़िता गर्भवती हुई तो दिसंबर 2023 में उसने लड़की का एबॉर्शन करवा दिया। गुरुवार (6 जून) को अब्दुल्ला का भाई अब्दुल मलिक अपने साथ एक अनजान व्यक्ति को लेकर पीड़िता के कमरे में आया। उसने लड़की पर साथ आए व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया।

महिला ने शिकायत में बताया कि जब उसने इंकार किया तो अब्दुल मालिक और उसके साथ आए व्यक्ति ने बारी-बारी से रेप किया। इस दौरान अब्दुल मलिक ने महिला के सिर पर तमंचा लगा दिया था और शोर मचाने पर जान से मार डालने की धमकी दी थी। बाद में पीड़िता ने अब्दुल्ला पठान से उसके भाई की करतूत बताई तो उस पर कोई असर नहीं पड़ा। उसने पीड़िता को अपनी ऊँची पहुँच बताते हुए सब कुछ भूल जाने की नसीहत दे डाली। इसी के साथ कहीं मुँह खोलने पर अश्लील वीडियो वायरल करने की भी धमकी दी।

आखिरकार पीड़िता के सब्र का बाँध टूट गया। उसने किसी भी हाल में आरोपितों को सबक सिखाने की ठान ली। महिला की शिकायत पर पुलिस ने अब्दुल्ला पठान, उसके भाई अब्दुल मलिक सहित एक अन्य अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। यह FIR IPC की धारा 376- डी, 313 और 506 के तहत दर्ज हुई है। शिकायत में पीड़िता ने अब्दुल्ला पठान के एक भाई को पुलिस में बताते हुए उसके द्वारा थाना कुंदरकी पर दबाव डाले जाने का आरोप लगाया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। मुरादाबाद पुलिस ने बताया कि मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

बताते चलें कि अब्दुल्ला पठान ग्रेट खली से मिलने और सनी लियोन के साथ डेट पर भी जाने का दावा करता है। वह WWE में लड़ने की भी इच्छा जता चुका है। यूट्यूब पर अब्दुल्ला फिटनेस संबंधी ब्लॉग भी बनाता है। यूट्यूब और फेसबुक पर उसके अच्छे-खासे फॉलोवर हैं। अब्दुल्ला पर मर्दाना ताकत की दवा बेचने के नाम पर कई लोगों से ठगी के भी आरोप है। 16 अक्टूबर 2023 को मुरादाबाद जिले में राज्य स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब्दुल्ला पठान के कथित अस्पताल पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी के बाद खुद को ‘सेक्स डॉक्टर’ बताने वाले अब्दुल्ला का अस्पताल सील कर दिया गया था।

रात को पीटते हैं दरवाजा, घर आकर देते हैं इलाका छोड़ने की धमकी: जयपुर के शास्त्री नगर में हिन्दू महिलाओं ने बयां किया दर्द, दीवारों पर लगे दिखे ‘पलायन रोको’ के पोस्टर

राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बार फिर से पलायन के पोस्टरों के कारण चर्चा में है। हालाँकि इस बार ‘सर्व हिन्दू समाज’ के नाम से यह पोस्टर लगाते हुए हिंदुओं से अपील की गई है कि वो अपने घरों को छोड़कर न जाएँ। ऐसे पोस्टर दीवारों पर बुधवार (12 जून 2024) को इसलिए सामने आए क्योंकि कई रिपोर्ट्स के अनुसार जयपुर के शास्त्री नगर इलाके के हिन्दू, इलाके में रहने वाले मुस्लिमों से तंग आकर अपना घर छोड़ने का मन बना रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन भी उनकी सुनवाई नहीं कर रहा है। इलाके में चोरी और लड़कियों से छेड़खानी आम बात हो गई है इसलिए यहाँ उनका रहना मुश्किल है।

मामला जयपुर के शास्त्री नगर इलाके का है। यहाँ के कई मकानों पर बुधवार (12 जून) को एक पोस्टर लगा दिखा। पोस्टर में जारीकर्ता के तौर पर सर्व हिन्दू समाज लिखा हुआ है। शुरुआत में सनातनियों से अपील की गई है। इसके बाद पोस्टर में ‘पलायन को रोको’ लिखा गया है। इसे जारी करने वाले ने आगे लिखा, “सभी सनातन भाइयों बहनों से निवेदन है कि अपना मकान गैर हिन्दुओं को न बेचें।” इस पोस्टर को शास्त्री के कई मकानों पर चिपका देखा गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पोस्टर शास्त्री नगर के शिवाजी नगर में लगाए गए हैं। यहाँ के कई निवासियों ने खुद को इलाके के मुस्लिम समुदाय के लोगों की प्रताड़ना से तंग बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शिवाजी नगर इलाके में उनकी बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं। स्थानीय निवासियों का यह भी दावा है कि मुस्लिम तबके के कई लोग उनकी जमीनों पर अवैध तरीके से कब्ज़ा कर रहे हैं। इन सभी ने यह भी कहा कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन उनकी तकलीफ सुनने को तैयार नहीं है।

स्थानीय हिन्दू निवासियों ने बताया कि रात को उनके घरों के दरवाजे पीटे जाते हैं। उन पर घर को बेचकर कहीं और चले जाने का दबाव बनाया जाता है। कभी-कभार घरों पर पत्थर भी चलते हैं। टाइम्स नाऊ नवभारत की वायरल होती एक वीडियो में एक महिला ने मीडिया को बताया, “यहाँ आ कर इतना ज्यादा उधम मचाते हैं कि आपको क्या बताऊँ। बच्चियाँ बाहर नहीं खड़ी होतीं। सीटियाँ बजाते हैं यहीं पर। हर रात को चोरियाँ हो रहीं हैं। सरकारी स्कूल में जब बच्चियों की छुट्टियाँ होती हैं तो वहाँ कई गाड़ियाँ खड़ी कर दी जाती हैं।” इसी दौरान पीछे से बोल रहे एक व्यक्ति ने मुस्लिम तबके के युवाओं पर रात में 2-2 बजे तक नशा कर के घूमने का आरोप लगाया।

स्थानीय निवासियों ने यह भी बताया कि उनके मोहल्ले में बकरों की मंडी खोलने की तैयारी चल रही है। वीडियो में कुछ लोग बकरों को लेकर खड़े भी दिखे। एक अन्य महिला ने कहा, “हमारे मंदिर के पास मीट की दुकानें खोली जा रहीं हैं।” वहीं टाइम्स नाउ के पत्रकार ने जब इलाके में घूम रही पुलिस की गाड़ी में मौजूद जवानों से बात करनी चाही तो उन्होंने ‘मुझे जानकारी नहीं है’ कह कर पल्ला झाड़ लिया। हालाँकि जयपुर पुलिस ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि मामले को संज्ञान में ले कर स्थानीय थाना प्रभारी को कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

बता दें कि मामले से संबंधित खबर की वीडियो तेजी से वायरल हो रही है। टाइम्स नाऊ नवभारत की ग्राउंड रिपोर्ट में ताजा पोस्टरों के बारे में खुलासा हुआ है।

कोई कर रहा था ड्राइवरी, कोई इंजीनियर बनकर कमाने गया था… कुवैत के अग्रिकांड में 40+ भारतीयों की गई जान, PM मोदी ने विदेश राज्य मंत्री को फौरन हालात जानने भेजा

कुवैत के मंगाफ शहर में एक बहुमंजिला इमारत में बुधवार (12 जून 2024) की सुबह आग लगने से 40 से ज्यादा भारतीयों समेत 49 लोगों की मौत हो गई। अब तक आई जानकारी के अनुसार घटना के दौरान घायल होने वालों की संख्या 50 से ज्यादा है।

कुवैत के आंतरिक मंत्री शेख फहद अल-यूसुफ ने इस घटना के लिए भवन के मालिक को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने भवन के मकान मालिक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। साथ ही जिस कंपनी के श्रमिकों को एक साथ इसमें रखा गया था, उसके मालिक को भी गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है।

शेख फहद ने बताया कि यह पूरा हादसा बिल्डिंग के मालिक की लालच की वजह से हुआ। कंपनी ने अपने फायदे के लिए बड़ी संख्या में एक ही भवन में बहुत ज्यादा श्रमिकों को भर दिया था। आंतरिक मंत्री ने कहा कि वह यह तय करेंगे कि इस तरह का घटनाक्रम आगे फिर ना हो।

इस घटना में हताहत होने वालों में भारतीय ज्यादा हैं। फोरेंसिक विभाग के महानिदेशक ने भी कहा है कि मरने वाले में अधिकांश केरल, तमिलनाडु और उत्तर भारतीय राज्य के लोग हैं। इनकी उम्र 20 से 50 साल थी। इनमें केरल के उमारुद्दीन शमीर (ड्राइवर), साजन जॉर्ज (मैकेनिकल इंजीनियर), स्टेफिन अब्राहिन साबू (29, इंजीनियर) समेत 5 लोगों का नाम है। वहीं घायलों को लेकर खबर है कि उन्हें 5 सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया है। जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने विदेश राज्यमंत्री कीर्ति व‌र्द्धन सिंह को कुवैत के लिए रवाना किया है। कीर्तिवर्धन वहाँ के स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर घायलों को राहत दिलाने और मृतकों के शवों को स्वदेश लाने में मदद करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

बता दें कि कुवैत में तकरीबन 10 लाख भारतीय रहते हैं। ये संख्या कुवैत की कुल संख्या की 21 प्रतिशत है। इनमें से 9 लाख भारतीय तो बतौर श्रमिक कुवैत के विकास में अपना योगदान देते हैं। इस घटना से पहले भी दूसरे खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की दुर्गति के ऊपर रिपोर्टें आती रही हैं। इस मामले में तो ये सामने आया है कि जैसी इमारत में आग लगी है वैसे भवन मंगाफ इलाके में और भी हैं। वहाँ भी सैकड़ों मजदूरों को बहुत ही खराब हालात में रहने के लिए मजबूर किया जाता है। कुवैत नगरपालिका ने इस घटना के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। घायलों को उचित इलाज दिलाने पर फोकस किया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर में 4 दिनों के अंदर चौथा आतंकी हमला… डोडा में सुरक्षा बलों पर फिर चली गोलियाँ: 1 जवान घायल, पूरे इलाके की घेराबंदी

जम्मू-कश्मीर में पिछले 100 घंटों के अंदर चौथा आतंकी हमला हुआ है। यह हमला एक बार फिर से डोडा जिले में हुआ है। इस दौरान आतंकियों की सुरक्षा बलों से मुठभेड़ हुई है। हमले में जम्मू कश्मीर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का एक जवान घायल हो गया है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया है। बुधवार (12 जून 2024) की रात 8:20 से शुरू हुई मुठभेड़ अभी तक जारी है। इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगातार हो रहे आतंकी हमलों के मद्देनजर जम्मू के अधिकतर हिस्सों में सेना, पैरामिलिट्री और जम्मू कश्मीर पुलिस ने सामूहिक रूप से सघन तलाशी अभियान छेड़ रखा है। इसी अभियान के तहत सुरक्षा बलों की एक टुकड़ी डोडा जिले के कोटा टॉप गंडोह इलाके में तलाशी ले रही थी। इसी दौरान घात लगा कर छिपे आतंकियों ने अचानक ही गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। गोलीबारी में जम्मू कश्मीर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का एक जवान घायल हो गया है।

घायल कांस्टेबल का नाम फरीद अहमद बताया जा रहा है। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। फरीद की हालात फ़िलहाल स्थिर बताई जा रही है। हमला होते ही बाकी जवानों ने पोजीशन ले ली। उन्होंने भी जवाबी फायरिंग की। इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया है। दोनों तरफ से गोलीबारी अभी तक जारी है। छिपे हुए आतंकियों की सटीक संख्या का अभी तक सही अनुमान नहीं लगाया जा सका है। इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए हैं। विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है।

बताते चलें कि जम्मू क्षेत्र में यह 100 घंटों के अंदर ही चौथा आतंकी हमला है। इस से पहले 9 जून को रियासी इलाके में मंदिर दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं की बस पर बरसाई गई गोलियों की वजह से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 11 जून को कठुआ में आतंकी हमला हुआ था। तब हीरानगर के सैदा सुखल गाँव में पानी माँगने के बहाने आतंकियों ने गोलीबारी की थी। इस दौरान 1 नागरिक घायल हो गया था। बाद में हुई मुठभेड़ में 2 आतंकियों को ढेर कर दिया गया था। मुठभेड़ के दौरान CRPF का एक जवान वीरगति को प्राप्त हुआ था।

आतंकी हमलों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। 11 जून को ही आतंकियों ने जम्मू के पठानकोट-भद्रवाह मार्ग पर सुरक्षा बलों की एक चेकपोस्ट पर हमला किया था। इस दौरान राष्ट्रीय रायफल्स के 5 सैनिक व एक स्पेशल पुलिस अफसर घायल हो गया था। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी जैश ए मोहम्मद की शाखा कश्मीर टाइगर्स ने ली थी।

लड़की हिंदू, सहेली मुस्लिम… कॉलेज में कहा, ‘इस्लाम सबसे अच्छा, छोड़ दो सनातन, अमीर कश्मीरी से कराऊँगी निकाह’: देहरादून के लॉ कॉलेज में The Kerala Story

बॉलीवुड फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ जैसी ही एक कहानी देहरादून में सामने आई है। जहाँ थर्ड ईयर की हिंदू लड़की पर ‘इस्लाम’ का बखान कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया और न मानने पर उसकी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी गई। ये आरोप लगे हैं लॉ स्टूडेट मुबीना यूसुफ पर, जो कश्मीरी मुस्लिम है। मुबीना ने हिंदू लड़की पर दबाव डाला कि वो धर्म परिवर्तन इस्लाम कबूल कर ले, क्योंकि वही सच्चा और सर्वश्रेष्ठ धर्म है और उसके परिचित कश्मीरी मुस्लिम लड़के से निकाह कर ले। वो युवक अमीर है और हिंदू लड़की को कोई परेशानी नहीं होने देगा। मुबीना इसके लिए ब्लैकमेलिंग भी कर रही थी और अपने द्वारा हिंदू लड़की की खींची गई आपत्तिजनक तस्वीरों को इसका हथियार बना रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित लड़की का नाम सरिता चौधरी (नाम परिवर्तित) है, जो साल 2021 से देहरादून के सिद्धार्थ लॉ कॉलेज में पढ़ती है। उसके साथ ही कश्मीर के अनंतनाग की रहने वाली मुबीना यूसुफ भी पढ़ती है। मुबीना यूसुफ और सरिता में अच्छी बनने लगी, तो मुबीना ने उसे बहकाने की कोशिश शुरू कर दी। वो उससे सनातन धर्म के बारे में उल्टी-सीधी बातें बोलती और कहती कि इस्लाम ही सच्चा धर्म है। वो सबसे अच्छा है। तुम इस्लाम अपना लो, तुम्हें जिंदगी भर कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं तुम्हारी शादी अपने अमीर परिचित कश्मीरी लड़के से करा दूँगी, वो तुम्हारा ख्याल रखेगा।

लेकिन जब सरिता ने उसकी बातों को मानने से इनकार कर दिया, तो वो धमकाने पर उतर आई। यही नहीं, मुबीना ने कथित पर गुरुग्राम की जेल में बंद बदमाशों से भी सरिता को धमकी दिलवाई कि उसकी बात न मानने पर उसके साथ कुछ भी हो सकता है। मुबीना उससे बोलती थी कि अगर वो उसकी पसंद के लड़के से निकाह कर लेगी, तो वो फोटो डिलीट कर देगी। यही नहीं, वो पैसों की भी माँग करती थी।

माता-पिता को बदलते व्यवहार पर हुआ शक, तो हुआ मामले का खुलासा

बताया जा रहा है कि मुबीना सरिता के माता-पिता से बाकायदा परमिशन लेकर उसे अपने घर अनंतनाग लेकर गई थी, जहाँ दोनों दस दिन तक रहे। वहाँ मुबीना ने अपने मुस्लिम दोस्त के साथ मीटिंग करके उस पर निकाह करने का दबाव बनाने लगी। वापस आने के बाद लॉ की छात्रा डिप्रेशन में चली गई और घर से बाहर निकलने से डरने लगी। यहाँ तक ​​कि मुबीना की धमकियों के कारण उसने कॉलेज जाना भी बंद कर दिया। बाद में पीड़िता की माँ, जो पेशे से वकील हैं, को लड़की की आपबीती पता चली और उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने को कहा।

इस बारे में सरिता के माता-पिता ने भी मीडिया से बात की और बताया कि हमनें अपनी बच्ची के व्यवहार में बदलाव पाया। लेकिन जब बच्ची ब्लैकमेलिंग नहीं झेल पाई, तब जाकर हमसे पूरी बात बताई। इस मामले में परिवार ने देहरादून के रायपुर थाने में पुलिस से संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में 10 जून 2024 को जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और उत्तराखंड स्वतंत्रता अधिनियम-2018 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी, पीड़िता ने बताई आपबीती

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है, ‘मुबीना यूसुफ मेरे साथ ही सिद्धार्थ लॉ कॉलेज में पढ़ती है। उसने मुझे भरोसे में लेने के बाद कब मेरी फोटो खींची मुझे पता नहीं चला। उसके बाद वो मुझे अपने मुस्लिम धर्म के बारे में बताने लगी कि मुस्लिम धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है। तुम अपना सनातन/हिन्दू परिवर्तित करके मुस्लिम बन जाओ, मैं अपने रसूखदार मुस्लिम दोस्त से निकाह करा दूँगी। ये सिलसिला काफी समय तक चलता रहा। एक दिन मैंने तंग आकर मना कर दिया, तो मुबीना आग-बबूला हो गई और कहा, ‘मैंने तेरी प्राइवेट फोटो ले रखी है, नहीं मानी तो वायरल कर दूँगी। और कहती कि मुस्लिम लड़के से निकाह के बाद ही फोटो डिलीट करूँगी। मुबीना ने मुझसे कहा कि मेरे संबंध गैंगस्टरों से है, मैं तुम्हें मरवा दूँगी। यही नहीं, मुबीना मुझसे नए-नए लड़कों से दोस्ती करने और पैसे लाकर देने की डिमाँड करने लगी।’

इस मामले में एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि छात्रा की शिकायत के आधार पर आरोपी मुबीना यूसुफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और उत्तराखंड स्वतंत्रता अधिनियम-2018 की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जाँच के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जोशीमठ को मिली पौराणिक ‘ज्योतिर्मठ’ पहचान, कोश्याकुटोली बना श्री कैंची धाम : केंद्र की मंजूरी के बाद उत्तराखंड सरकार ने बदले 2 जगहों के नाम

उत्तराखंड में जोशीमठ और कोश्याकुटोली को नई पहचान मिली है। उत्तराखंड सरकार द्वारा भेजे गए नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद चमोली जिले के जोशीमठ को ज्योतिर्मठ और नैनीताल जिले की कोश्याकुटोली तहसील का नाम बदलकर श्री कैंची धाम तहसील कर दिया गया है। बता दें कि पिछले साल ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात का ऐलान जनसभा में किया था कि उत्तराखंड सरकार इन दोनों जगहों के नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेज रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते वर्ष कैंची धाम मंदिर की स्थापना दिवस (15 जून) समारोह के मौके पर कोश्याकुटोली तहसील को कैंची धाम के नाम पर करने की घोषणा की थी। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने ये प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था, जो मंजूर हो गया। भारत सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद सभी औपचारिकताएँ पूरी गई और अब उत्तराखंड सरकार ने नाम बदलने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

बीते कई सालों से स्थानीय लोग चमोली जिले में स्थित जोशीमठ का नाम बदलने की माँग कर रहे थे। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जोशीमठ तहसील को ज्योतिर्मठ नाम देने का फैसला लिया था। बता दें कि ज्योतिर्मठ हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक महत्व रखता है। ज्तोतिर्मठ आदि गुरु शंकराचार्य की तपोस्‍थली रही है। माना जाता है कि वो यहाँ आठवीं शताब्दी में आए थे और अमर कल्‍पवृक्ष के नीचे तपस्‍या के बाद उन्‍हें दिव्‍य ज्ञान ज्‍योति की प्राप्ति हुई थी। ज्‍योतेश्‍वर महादेव और दिव्‍य ज्ञान ज्‍योति की वजह से ही इस जगह को ज्‍योर्तिमठ का नाम दिया गया था। ये जगह बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब और केदारनाथ जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों का प्रवेश द्वार भी है।

वहीं, कोश्याकुटोली तहसील का नाम श्री कैंची धाम हो जाने से बाबा नीम करौली के भक्तों में भारी उत्साह है। श्रद्धालुओं का कहना है कि देश दुनिया के लाखों भक्तों की बाबा नीब करौली महाराज के प्रति भारी आस्था है। कैंची धाम के विकास के लिए इसे मानसखण्ड मन्दिरमाला मिशन में भी शामिल किया गया है।

बाहुबली के ‘कटप्पा’ ने यूपी-बिहार के मजदूरों का उड़ाया मजाक, कहा- ‘इन्हें द्रविड़ियन बनाओ, आत्म सम्मान समझाओ’: ‘सनातन मिटाने’ का भी किया था समर्थन

बाहुबली फिल्म में ‘कटप्पा’ का किरदार निभाने वाले तमिल एक्टर सत्यराज ने यूपी-बिहार जैसे उत्तरी राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों का मजाक उड़ाकर विवाद खड़ा कर दिया है। तमिलनाडु के त्रिची में आयोजित एक कार्यक्रम में सत्यराज ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को “आत्म-सम्मान क्या होता है, यह सिखाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि चूँकि वे पीढ़ियों तक नहीं जाएँगे, इसलिए उत्तरी राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों को “द्रविड़ मॉडल और विचारधारा के सिद्धांत” सिखाना ज़रूरी है। इससे पहले, सत्यराज ने उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन को मिटाओ’ बयान का भी समर्थन किया था और इसके लिए उदयनिधि की तारीफ भी की थी।

डीएमके के समर्थक माने जाने वाले सत्यराज ने तमिलनाडु से विदेशों में पलायन और देश के उत्तरी राज्यों से तमिलनाडु में बस रहे प्रवासियों और उनकी वजह से सामने आ रही समस्याओं के बारे में समझाते हुए ये बयान दिया। उन्होंने तमिलनाडु आने वाले उत्तर भारतीय मजदूरों की तुलना भारत जैसे देशों से अमेरिका और ब्रिटेन जाकर बसने वाले लोगों से की। सत्यराज ने कहा कि अपने जीवन में परेशानियों का सामने करने वाला मजदूर वर्ग तमिलनाडु में आकर अमेरिका की तरह ही तमिलनाडु को अपनी पसंदीदा जगह के तौर पर देखता है।

सत्यराज ने कहा, “उत्तरी राज्यों के श्रमिक यहाँ क्यों आते हैं? वे यहाँ इसलिए आते हैं क्योंकि यहाँ सब ठीक नहीं है, है न? सभी अप्रवासियों को हमारे द्रविड़ मॉडल, द्रविड़ दर्शन को वास्तव में जानने का कोई मौका नहीं मिलता। जबकि ये लोग पीढ़ियों-पीढ़ियों के लिए यहाँ बस जाते हैं। जैसे अमेरिका पहुँचने वाले लोग वहीं बस जाते हैं और अमेरिका को छोड़कर नहीं जाना चाहते, वैसे ही बिहार जैसे उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों से आए लोग भी करते हैं। वो अमेरिका की तरह ही तमिलनाडु को भी नहीं छोड़कर जाना चाहते, उनके लिए तमिलनाडु अमेरिका जैसा ही होगा।”

सत्यनाज ने प्रवासी मजदूरों में ‘द्रविड़ियन विचार धारा को जगाने के लिए’ ट्रेनिंग सेंटर तक खोलने का सुझाव दिया, ताकि लोगों को तमिल और द्रविड़ कल्चर के बारे में बताया जा सके। उन्होंने सुझाव किया कि यूपी जैसे राज्यों में भी ऐसे सेंटर खोले जाने चाहिए, तभी राजनीतिक बदलाव और जागरण होगा। प्रवासी मजदूरों का मजाक उड़ाते हुए सत्यराज ने कहा कि उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि आत्म-सम्मान क्या है? महिलाओं की आजादी क्या है? उन्होंने तर्क दिया कि चूँकि वे पीढ़ियों तक तमिलनाडु नहीं छोड़ेंगे, इसलिए उन्हें द्रविड़ मॉडल और विचारधारा की जानकारी दी जानी चाहिए।

सत्यराज ने कहा , “वे निश्चित रूप से यहाँ से नहीं जाएंगे, उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि आत्म-सम्मान क्या है? तर्कसंगत सोच क्या है? द्रविड़ मॉडल क्या है? भले ही वे तमिल नहीं जानते हों, वे इसे एक पीढ़ी में सीख लेंगे, बस उन्हें उनकी भाषा में कुछ चीजें सिखाएँ, जैसे कि आत्म-सम्मान क्या है, तर्कसंगत सोच क्या है, महिलाओं की मुक्ति क्या है, कोई भी जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता। ऐसा करना क्रूरता है। उत्तरी भारत के राज्यों में जन्म के आधार पर भेदभाव होता है, जिसकी कोई सीमा नहीं है। उन्हें ये सब समझाया जाना चाहिए।”

बता दें कि सत्यराज द्रविड़ विचारधारा की वकालत करते रहे हैं और अक्सर अपने भाषणों और अपनी फिल्मों के माध्यम से इन विचारों को बढ़ावा देते हैं। वह अक्सर ऐसी फिल्मों में दिखाई देते हैं, जिनमें ब्राह्मणों को गलत तरीके से दिखाया जाता है। उनकी फिल्मों में द्रविड़ किरदारों को सकात्मक दिखाया जाता है और ब्राह्मणों को अक्सर अत्याचारी भूमिका में दिखाया जाता है। यहाँ ये भी बता दें कि सत्यराज ईवी रामास्वामी की बायोपिक में उनकी भूमिका भी निभा चुके हैं। ईवी रामास्वामी को पेरियार नाम से भी जाना जाता है, जो ब्राह्मण विरोधी रहा है और उसे द्रविड़ियन राजनीतिक पार्टियाँ सम्मान की नजर से देखती हैं। असल में, पेरियार उत्तर और दक्षिण भारत बीच विभाजन की रेखा बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है।

इससे पहले सत्यराज उदयनिधि स्टालिन का भी समर्थन कर चुके हैं, जब स्टालिन ने सनातन परंपरा को लेकर विवादास्पद बयान दिए थे और सनातन को मिटाने की बात कही थी। स्टालिन ने सनातन की तुलना डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी। उस समय सत्यराज ने उदयनिधि स्टालिन को अपना समर्थन देते हुए कहा था , “मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म के बारे में स्पष्ट रूप से बात की है। मैं मंत्री उदयनिधि के साहस की सराहना करता हूँ। वो जिस तरह से हर मामले को संभालते हैं, वो शानदार है।”

बकरीद से पहले एक ट्रक में ठूँसे थे 19 ऊँट, गोपालगंज में बरामद: मेवात के जुनैद, साहिल सहित 4 तस्कर गिरफ्तार

बिहार के गोपालगंज जिले में ऊँटों की तस्करी के रैकेट का खुलासा हुआ है। मंगलवार (11 जून 2024) को पुलिस ने एक ट्रक में भर कर ले जा रहे 19 ऊँटों को जीवित बरामद किया है। इन ऊँटों की कीमत लगभग 30 लाख रुपए आँकी जा रही है। ऊँटों के साथ 4 तस्कर भी गिरफ्तार किए गए हैं। तस्करों में 2 के नाम जुनैद खान हैं। बाकि 2 अन्य के नाम शाहनवाज और साहिल हैं। इनमें से जुनैद खान और साहिल हरियाणा के मेवात से हैं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना गोपालगंज के नगर थानाक्षेत्र की है। मंगलवार को यहाँ के अरार मोड़ पर DSP स्वर्ण प्रभात अपनी पुलिस टीम के साथ चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान एक ट्रक को रोक कर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रक से 19 ऊँट बरामद हुए हैं।

बरामद किए गए ये ऊँट दुर्लभ प्रजाति के हैं। इन्हें राजस्थान सरकार द्वारा संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया गया है। इनके संरक्षण के भी प्रयास जारी हैं। पुलिस ने ट्रक को कब्ज़े में ले लिया। ट्रक के साथ मथुरा के रहने वाले जुनैद और शाहनवाज के साथ नूहं मेवात के निवासी जुनैद खान और साहिल को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की पूछताछ में इन आरोपितों ने ऊँटों की तस्करी की बात कबूली है। इन्होंने बतया कि वो ऊँटों को राजस्थान से बिहार के मुजफ्फरपुर ले जा रहे थे। मुजफ्फरपुर से इन्हें किसी और शहर में भेजा जाना था। ऊँटों को बड़ी बेरहमी से एक के ऊपर एक ठूँस कर रखा गया था।

छुड़ाने के बाद पुलिसकर्मियों ने ऊँटों के लिए चारे और पानी की भी व्यवस्था करवाई। अब पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि ऊँटों के ये तस्कर पिछले तमाम बैरियर पार करके बेरोकटोक गोपालगंज तक कैसे पहुँच गए?

गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन ऊँटों की कीमत लगभग 30 से 40 लाख रूपयों के बीच है। इन सभी को सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया है। पकड़े गए तस्करों से पूछताछ करके उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी खँगाले जा रहे।

बकरीद में होती है ऊँटों की कुर्बानी

बताते चलें कि आने वाले 16-17 जून को मुस्लिमों के बकरीद (ईद उल अजहा) का त्यौहार है। इस त्यौहार में बड़े पैमाने पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। कई मौकों पर ऊँटों की कुर्बानी के केस भी सामने आए हैं। ऊँट की कीमत उनके वजन के हिसाब से तय होती है।

9 साल पहले वाराणसी के मदनपुरा इलाके में ऊँट की कुर्बानी की खबर काफी प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। मुस्लिम तबका इसे ब्रिटिश काल की परम्परा बताता है। बाद में प्रशासन ने ऊँट की कुर्बानी पर रोक लगाई तो मुस्लिमों ने इस आदेश का विरोध किया था। तब हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि फ़ोर्स लगानी पड़ी थी।

नाबालिग औलाद ने ही अपने इमाम अब्बा का किया सिर तन से जुदा: कट्टर इस्लामी-वामी मचा रहे ‘मुस्लिम टारगेट किलिंग’ का शोर, पुलिस जाँच में सब क्लियर

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में मस्जिद के एक इमाम की हत्या कर दी गई है। इस हत्या को सोशल मीडिया के कई वामपंथी और कट्टर मुस्लिम हैंडल सांप्रदायिक रंग दे रहे। इसे उत्तर प्रदेश में इस्लामी स्कॉलर्स की टारगेट किलिंग के तौर पर बता कर सनसनी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस की जाँच में हालाँकि अब तक किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक एंगल अथवा टारगेट किलिंग जैसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। शामली की घटना में तो मौलाना की हत्या के केस में उनके बेटे को ही जेल भेजा गया है।

यह मामला शामली जिले के थानाक्षेत्र झिंझाना का है। यहाँ के गाँव बल्ला माजरा में 11 जून (मंगलवार) को मस्जिद के इमाम फजलुर्रहमान की सिर काट कर हत्या कर दी गई थी। धड़ से अलग शव लगभग आधे किलोमीटर दूर बरामद हुआ था। इस घटना के सामने आते ही आए दिन भ्रामक खबर उड़ाने वाले तमाम कट्टर मुस्लिम हैंडल फ़ौरन एक्टिव हो गए। उन्होंने इस घटना को फ़ौरन ही टारगेट किलिंग का रूप और रंग देना शुरू कर दिया। निगार परवीन के ट्वीट पर हक की आवाज ने लिखा, “जानबूझकर मुस्लिम धर्मगुरुओं को निशाना बनाया जा रहा है पर अभी तक कुछ नहीं हुआ, आखिर इसके पीछे क्या कारण है?”

इसके अलावा कविश अजीज ने भी इस घटना को अपने शब्दों से हवा दी। उन्होंने इसे प्रतापगढ़ की कड़ी से जोड़ा और उत्तर प्रदेश में सब ठीक होने का व्यंग्य किया।

भ्रामक खबरों में अक्सर अपनी हाजिरी दर्ज करवाने वाले कथित पत्रकार मीर फैज़ल भी इस मामले में पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी शामली की इस घटना को प्रतापगढ़ के मौलाना की हत्या की अगली कड़ी के तौर पर दिखाने का प्रयास किया।
इन सभी के हैंडलों पर हालाँकि शामली पुलिस जाँच जारी होने की बात कह रही थी। इन सभी को पुलिस यह भी बता रही थी कि शक के आधार पर मृतक के बेटे को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बावजूद इसके भ्रामक खबरें फैलाने का सिलसिला जारी रहा।

बेटे ने ही की थी अपने अब्बा की हत्या

आखिरकार पुलिस ने महज 6 घंटों में ही इमाम फजलुर्रहमान की हत्या का खुलासा कर दिया। 11 जून (मंगलवार) को पुलिस ने मृतक के नाबालिग बेटे को ही अपने अब्बा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है।

पुलिस की जाँच में निकल कर सामने आया कि 50 वर्षीय इमाम फजलुर्रहमान मंगलवार को अपने बेटे के साथ काम करने पास की बाग में गए थे। यहाँ सुबह 10 बजे बाप-बेटे में किसी बात को लेकर बहस हो गई थी। इसके बाद तैश में आए बेटे ने पास रखे फावड़े से अपने अब्बा पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए।

कुछ ही देर में फजलुर्रहमान की मौत हो गई। हत्या के बाद भी मृतक के बेटे का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने अपने अब्बा का सिर फावड़े से काट लिया और उसे लेकर मौके से फरार हो गया। गाँव वालों ने इमाम की लाश देख कर पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने मृतक के बेटे को खोज निकला और हिरासत में ले लिया। कुछ ही देर की पूछताछ में आरोपित ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। हत्या में प्रयोग हुआ फावड़ा भी बरामद कर लिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में नाबालिग आरोपित को मानसिक रूप से बीमार भी बताया जा रहा है। पुलिस इन सभी पहलुओं पर जाँच कर रही है।