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पानी में दिखी ‘लाश’… पुलिस ने किनारे खींचा तो जिंदा हो गई: वायरल वीडियो देख लोगों का सिर घूमा, नहीं रुक रही हँसी

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में इन दिनों प्रचंड गर्मी से लोग परेशान हैं। ऐसे में हर कोई अपने तरीके से राहत पाने के लिए इंतजाम कर रहा है। इस बीच एक ऐसी अजीबोगरीब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुई है कि अगर आप उसे देखेंगे तो आपको अपने आप हँसी आ जाएगी।

दरअसल, वीडियो में दिखाई दे रहा है कि एक पुलिसकर्मी नदी में बेसुध लेटे एक व्यक्ति को अपनी ओर खींचने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि शायद वो कोई लाश है जो बहते हुए किनारे पर आ गई है, आसपास खड़े लोगों को भी यही लगता है, लेकिन जैसे ही पुलिस की वर्दी पहना शख्स उस बॉडी को हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचता है वो व्यक्ति अचानक उठ खड़ा होता है और अपने ऊपर पानी डालकर बताता है कि वो तो पानी में सिर्फ लेटा है। इसके बाद सब उसे देख हँसने लगते हैं।

गर्मी से छुटकारा पाने का इस व्यक्ति का ये अंदाज अब हर सोशल मीडिया पर लोग शेयर कर रहे हैं। वीडियो कब की और कहाँ की है ये तो नहीं स्पष्ट हो पा या है, लेकिन जो भी इस वीडियो को देख रहा है वो यही कह रहा है कि ये गर्मी से निजात पाने का सबसे मजेदार तरीका है। लोगों की इस वीडियो देखने के बाद हँसी भी नहीं रुक रही है। ये कहकर मजा लिया जा रहा है कि इतना भी गर्मी से बचने के लिए ऐसे खतरनाक तरीकों भी नहीं अपनाना चाहिए कि लोग लाश समझ लें।

एलन मस्क का Apple से ऐलान-ए-जंग: OpenAI के इस्तेमाल पर दी प्रोडक्ट के बहिष्कार की धमकी, गिर गए iPhone बनाने वाली कंपनी के शेयर

दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैनों में से एक एलन मस्क ने दिग्गज कंपनी एप्पल के खिलाफ कई बड़े हमले किए हैं। एप्पल कंपनी का मजाक उड़ाने से लेकर एलन मस्क ने iPhone और iMac के भी बहिष्कार की धमकी दे दी है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर एप्पल कंपनी अपने प्रोडक्ट में ओपनएआई का इस्तेमाल करेगी, तो वो अपनी कंपनी में एप्पल के प्रोडक्ट को ही बैन कर देंगे और एप्पल के सारे मशीन-फोन कंपनी के गेट पर रखवा देंगे।

एलन मस्क ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि अगर एप्पल अपने प्रोडक्ट और डिवाइस में ओपनएआई को ऑपरेटिंग सिस्टम लेवल पर इंटिग्रेट करता है, तो मेरी कंपनी में बैन कर दिया जाएगा। यह सिक्योरिटी वायलेशन हमें बिलकुल बर्दाश्त नहीं है। एलन मस्क ने एक साथ कई पोस्ट करते हुए कहा कि वो अपनी कंपनी में आने वाले सभी विजिटर्स के एप्पल डिवाइस को दरवाजे पर रखवा लेंगे।

यही नहीं, एलन मस्क ने एप्पल की खिंचाई करते हुए कहा कि एप्पल इतना भी स्मार्ट नहीं है कि वो अपना आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट क्रिएट कर सके। एप्पल को इस बात का अभी अंदाजा भी नहीं है कि वो अपने यूजर्स का डाटा कितनी आसानी से ओपन एआई के हाथों में सौंप रहा है।

दरअसल, एलन मस्क ओपनएआई के फाउंडर्स में से एक रहे हैं, लेकिन सालों पहले उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को खतरा बताते हुए कंपनी से अपना नाता तोड़ दिया था। इस बीच उनके ट्वीट्स की वजह से एप्पल को बाजार में बड़ी चपत भी लगी है। एप्पल कंपनी के शेयर 1.91% गिरावट के साथ बंद हुए। इसके साथ ही एप्पल मार्केट कैप के मामले में माइक्रोसॉफ्ट के बाद एनवीडिया से भी पिछड़ गई और तीसरे नंबर पर खिसक गई। एनवीडिया का मार्केट कैप 2.995 ट्रिलियन डॉलर है, तो एप्पल का 2.961 ट्रिलियन डॉलर। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट 3.180 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया का सबसे वैल्यूएबल कंपनी है।

गौरतलब है कि एप्पल ने अपने जेनरेटिव एआई टूल एप्पल इंटेलीजेंस की घोषणा की है। एप्पल ने अपने डिवाइस में एआई फीचर को इंटिग्रेट करने के लिए ओपन एआई से मदद ली है, जिसमें चैट-जीपीटी को शामिल किया जाना है। साथ ही एप्पल ने कहा है कि वो यूजर की प्राइवेसी और सुरक्षा का ध्यान रखेगी, लेकिन एलन मस्क इतने भर से सहमत नहीं हैं। उन्होंने इसका सीधा विरोध किया है।

2 साल के हिंदू बच्चे टीटू की हत्या पर चुप्पी, लेकिन विदेशी मुस्लिम लड़कों की मौत पर मातम: आरफा को हिंदुस्तान में फिर भी चाहिए इस्लामी सांसद-मंत्री

  • 2 सितंबर 2015
  • 5 दिसंबर 2016
  • 9 जून 2024

3204 दिन। लगभग 9 साल। सीरिया, म्यांमार और भारत। यह कोई कविता नहीं है। ‘लिबरल’ मीडिया का घिनौना सच है। इस सच से जुड़ी है भारतीय राजनीति। घेरते हैं मोदी को, फँस जाते हैं खुद। मुस्लिम और मोदी करते-करते इंसानियत बेच देते हैं।

2 सितंबर 2015 को क्या हुआ था? 2 साल का एलन कुर्दी मर गया था। लेकिन मरते तो हर दिन सैकड़ों-हजारों बच्चे हैं। फिर एलन कुर्दी में ऐसा क्या था? क्यों उसका नाम-फोटो गूगल से लेकर सोशल मीडिया और मीडिया में छा गया? छा गया क्योंकि उसे छपवाया गया। छपवाने के पीछे सोची-समझी साजिश थी। इस्लामी-लिबरल साजिश।

सवाल यह है कि 2 साल के बच्चे की लाश से साजिश क्यों? करने वाले कौन लोग? फायदा किसे? एलन कुर्दी इस्लामी मुल्क सीरिया में पैदा हुआ। मुस्लिम परिवार का बच्चा था। उसके माँ-बाप को सीरिया छोड़ कर तुर्की भागना पड़ा। कारण – इस्लामी आतंकी। तुर्की क्या है? इस्लामी मुल्क है। लेकिन क्या मुस्लिम एलन कुर्दी और उसके परिवार को इस्लामी मुल्क तुर्की में जीने-खाने-फलने-फूलने की जगह मिली? नहीं। फिर क्या? तुर्की से भाग कर यूरोप में घुसने का प्लान। और इसी घुसने के प्रयास में मर गया 2 साल का एलन कुर्दी।

देश, समय, काल, पीड़ित, विलेन – सब कुछ इस्लाम से जुड़ा हुआ तो दोष किस पर मढ़ा जाए? साजिश इसी के लिए रची गई। एलन कुर्दी की लाश को ‘हीरो’ बनाया गया। गोरे यूरोपियन पर ‘शरणार्थी’ जैसे शब्दों से वार किया गया। तथाकथित लिबरल मीडिया ने 2 साल के बच्चे की लाश पर राजनीति की। यूरोप के नेता, लोग, इंस्टिट्यूशन सबको आत्मग्लानि वाले भाव से जोड़ा गया… वो जुड़ भी गए। साजिश सफल हुई। इस्लामी आतंक शब्द पीछे छूट गया। मुस्लिम शरणार्थियों से यूरोप की डेमोग्राफी बदलने लगी। महीने, 2-4 महीने पर लगभग हर यूरोपियन देश में इसके नतीजे समाचारों के रूप में देखने को हमें मिल ही जाती हैं।

सीरिया से भारत की हवाई दूरी लगभग 4200 किलोमीटर है। भाई-भतीजे वाला कोई संबंध भी नहीं है। फिर क्या वजह है कि 2 सितंबर 2015 की घटना को भारतीय राजनीति और ‘लिबरल’ मीडिया के घिनौने सच से मैंने जोड़ दिया? वजह है आरफा खानम शेरवानी नाम की एक औरत, जो खुद को पत्रकार कहती है, कुछ लोग मानते भी हैं।

सीरियन एलन कुर्दी के लिए आरफा के आँसू

3 सितंबर 2015 (मतलब 2 सितंबर के ठीक एक दिन बाद ही) को आरफा खानम शेरवानी का दिल रोता है 2 साल के एलन कुर्दी के लिए। वो एलन कुर्दी जो आरफा से 4200 किलोमीटर दूर पैदा हुआ। मरा और भी दूर। किसी तरह का सगा-संबंधी भी नहीं। Muslim Brotherhood वाली थ्योरी के अलावे कोई कनेक्शन नहीं। लेकिन सोशल मीडिया पर रोया ऐसा कि दुनिया खत्म होने वाली है, इंसानियत मर गई है।

अब 5 दिसंबर 2016 की बात। आरफा खानम शेरवानी एक ट्वीट करती है। फोटो एक मरे हुए बच्चे की होती है। फिर से वही लॉजिक। हर दिन इतने सारे मरते बच्चों के बीच में यही बच्चा क्यों? क्योंकि यह बच्चा होता है रोहिंग्या। रोहिंग्या मतलब म्यांमार के लोग। रोहिंग्या मतलब मुस्लिम।

रोहिंग्या ‘एलन कुर्दी’ के लिए भी रोती आरफा

मुस्लिम रोहिंग्या लोगों को उसके पड़ोसी मुस्लिम देश बांग्लादेश रखने को तैयार नहीं। गोली मारता है म्यांमार का सिपाही। दिल रोता है लेकिन आरफा का। शब्द गढ़े जाते हैं एलन कुर्दी के नाम पर। इसके पीछे की साजिश भी वही – रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए हर देश अपने दरवाजे खोल दे, शरणार्थी के नाम पर अपने-अपने जगह की डेमोग्राफी को छिन्न-भिन्न होने दे।

Muslim Brotherhood वाली थ्योरी के लिए 2 उदाहरण ऊपर हैं। लेकिन क्या यही Muslim Brotherhood की थ्योरी एक कदम आगे चल कर ‘इंसानी ब्रदरहुड’ तक पहुँच पाती है? देखते हैं एक और उदाहरण से।

टीटू मार दिया जाता है। 9 जून 2024 को। रियासी आतंकी हमले में। मारने वाले इस्लामी आतंकी। टीटू भी सिर्फ 2 साल का था, एलन कुर्दी की तरह। आरफा खानम शेरवानी क्या करती है? वो एक ट्वीट करती है। भारतीय राजनीति पर। वो पूछती है कि 293 सांसदों और 72 मंत्रियों में एक भी मुस्लिम क्यों नहीं? पढ़ने के बाद क्या यह ट्वीट 2 साल के बच्चे टीटू के लिए लिखा गया प्रतीत होता है? अगर नहीं, तो क्यों? क्योंकि टीटू के माता-पिता का नाम ममता और राजेंद्र था… इसलिए आरफा के की-बोर्ड से शब्द नहीं गढ़े गए।

2 साल का टीटू भारत में पैदा हुआ, भारतीय बच्चा था। वही देश, जो आरफा का भी है। वही देश, जिसमें पा रही सैलरी-कमाई से आरफा का घर चलता है। लेकिन आरफा की इंसानियत जागी किसके लिए – सीरियन एलन कुर्दी और रोहिंग्या मुस्लिम बच्चे के लिए। टीटू का हिंदू होना और उसका इस्लामी आतंकियों की गोली से मारा जाना, आरफा की इंसानियत को झकझोर नहीं पाया।

Muslim Brotherhood वाली थ्योरी पर धब्बा लग जाता, अगर आरफा टीटू के लिए रोती तो। क्योंकि हत्या इस्लामी आतंकियों ने की है। इसलिए लोकतंत्र, संसद, सांसदों/मंत्रियों की संख्या पर ट्वीट किया गया। टीटू की हत्या हुए 2 दिन हो चुके हैं। आरफा के सोशल मीडिया अकाउंट पर इसको लेकर चुप्पी है। और यह चुप्पी ही साजिश है।

आरफा अगर पत्रकार है, इसका मतलब 10वीं-12वीं और कम से कम स्नातक तो किया ही होगा। मतलब कम से कम 15 साल की पढ़ाई-लिखाई। उसके बाद भारत के संदर्भ में यह सवाल बेतुका है कि कितने सांसद/मंत्री मुस्लिम? इस सवाल में जरूर दम होता; अगर यह सवाल सीरिया, तुर्की, म्यांमार या बांग्लादेश से किया जाता। जिस भारत देश के 2 साल के बच्चे टीटू की हत्या पर इस्लामी मानसिकता की शिकार, Muslim Brotherhood के आइने से हर चीज को देखने वाली आरफा की इंसानियत नहीं जागी, उसे कोई हक नहीं कि वो भारत के संदर्भ में कोई भी सवाल पूछे… फिर भले ही आप पत्रकार हों या पागलखाने में चाँद-सितारे गिन इस्लाम का झंडा बुलंद करने का ख्वाब देखने वाली बुढ़िया!

PS: जहाँ-जहाँ इस्लामी देश लिखा है, उसकी डेमोग्राफी को लेकर लिखा गया है। मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं कि उस देश के संविधान ने देश को इस्लामी करार दिया है या लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष या ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ टाइप कुछ शब्द गढ़ा है। जेनरल नॉलेज और करेंट अफेयर्स की किताबों/अखबारों से यह ज्ञान मेरे लिए काफी है कि 80-90% मुस्लिम आबादी वाले इस्लामी देशों में आम जनता (खास कर अल्पसंख्यकों) की क्या स्थिति है।

जेल में बंद चायनीज ने चश्मे का शीशा तोड़ काटी अपनी नस, प्राइवेट पार्ट भी: अस्पताल में मौत, अवैध रूप से भारत में घुसने पर हुई थी गिरफ्तारी

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की जेल में बंद एक चीनी नागरिक ने आत्महत्या कर ली है। मृतक का नाम ली जियाकी है जिसकी उम्र 63 वर्ष है। ली जियाकी ने काँच से अपने हाथ की नस को काट दिया था। इसी दौरान उसने अपने प्राइवेट पार्ट पर भी घाव कर लिया था। गंभीर हालत में ली को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहाँ मंगलवार (11 जून 2024) को उसने दम तोड़ दिया। उस पर भारत की सीमा को अवैध तौर पर पार करने का आरोप था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 जून 2024 को मुज़फ्फरनगर के थानाक्षेत्र ब्रह्मपुरा की पुलिस को लक्ष्मी चौक पर एक संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी की सूचना मिली थी। पुलिस ने दबिश दी तो वहाँ चीन का नागरिक ली जियाकी मिला। वह चीन के शेडोंग प्रांत के कैंगशांग काउंटी का मूल निवासी निकला। माँगे जाने पर वह भारत में घुसने का वैध कागजात नहीं दिखा पाया। ली को गिरफ्तार कर लिया गया। तब पुलिस के साथ केंद्रीय एजेंसियों ने भी ली से लम्बी पूछताछ की थी।

ली को मुजफ्फरपुर जिले के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारागार में दाखिल करवाया गया। उसके केस में आगे की वैधानिक कार्रवाई चल रही थी। ली की गिरफ्तारी के 2 दिन बाद 7 जून की शाम को जेल में कैदियों की गिनती की जा रही थी। इसी दौरान वह शौचालय में गया। यहाँ उसने अपना चश्मा तोड़ लिया और उसके शीशे को धारदार हथियार के तौर प्रयोग में लाया। ली ने अपने हाथ की नस काट डाली और सीने के अन्य हिस्सों में वार किए। उसने अपने प्राइवेट पार्ट पर भी कई घाव कर डाले। इस हरकत से ली का काफी खून शौचालय में ही बहने लगा। वह टॉयलेट में ही बेहोश हो गया।

अधिकारियों को घटना का पता चला तो उन्होंने ली को फ़ौरन स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया। हालत गंभीर होता देख कर ली को एसकेएमसीएच (श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) में रेफर कर दिया गया। यहाँ ली का ऑपरेशन भी किया गया। हालाँकि डॉक्टरों के तमाम प्रयास काम नहीं आए। अंत में मंगलवार को ली ने अंतिम सांस ले ली। प्रशसनिक अधिकारी अब आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गए हैं।

67 परीक्षार्थियों को शत-प्रतिशत अंक, एक ही सेंटर से बने कई टॉपर: NEET परीक्षा आयोजित करने वाली NTA पर गंभीर सवाल, पेपरलीक के भी हैं आरोप

चार जून 2024 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट (NEET-UG 2024) परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। हालाँकि, यह परीक्षा परिणाम शिक्षा जगत में हड़कंप मचा देने वाला साबित हुआ।NEET भारत के सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है, जिसमें क़रीब 25 लाख अभ्यर्थी इस साल भाग लिए थे।

इस बार की परीक्षा में 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक प्राप्त किए, जो इस प्रतिष्ठित परीक्षा के इतिहास में पहली बार हुआ है। इस असामान्य परिणाम ने शिक्षा विशेषज्ञों, छात्रों और आम जनता के बीच गहरी चिंता और संदेह पैदा कर दिया है। इस लेख में हम परीक्षा आयोजित करने वाली NTA की कार्यप्रणाली, विवादों और वर्तमान स्थिति पर समीक्षा करेंगे।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना नवंबर 2017 में भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) के अंतर्गत गठित इस स्वायत्त संस्था का मुख्यालय नई दिल्ली में है। NTA राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन करता है।

इन परीक्षाओं में JEE (मेन), NEET, UGC-NET, सीमैट और जीपैट आदि बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) और ऑनलाइन पंजीकरण जैसी प्रक्रियाओं को अपनाकर NTA ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।

अभूतपूर्व परिणाम और उठते सवाल

नीट 2024 के परिणाम ने उस समय सबको चौंका दिया, जब 67 छात्रों ने परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त कर लिए। इनमें से 8 छात्र हरियाणा के एक ही परीक्षा केंद्र से हैं। इसके अलावा तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात के विभिन्न केंद्रों से दो-दो छात्रों ने भी पूर्ण अंक प्राप्त किए। यह असामान्य परिणाम कई सवाल खड़े करता है:

  • क्या परीक्षा का पेपर अत्यंत सरल था? : विशेषज्ञों का मानना है कि नीट जैसी कठिन परीक्षा में इतने सारे छात्रों का पूर्ण अंक प्राप्त करना सामान्य नहीं है। बोर्ड परीक्षाओं में भी ऐसे परिणाम दुर्लभ होते हैं।
  • क्या परीक्षा के संचालन में कोई खामी थी? : परीक्षा केंद्रों की निगरानी और सुरक्षा में संभावित खामियों की जाँच की आवश्यकता है, क्योंकि कई छात्र एक ही केंद्र से टॉप कर गए हैं।

मार्किंग स्कीम और ग्रेस मार्क्स का विवाद

नीट की मार्किंग स्कीम के अनुसार, प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 अंक और गलत उत्तर के लिए 1 अंक काटे जाते हैं। इस प्रकार 718 या 719 अंक आना संभव नहीं है, फिर भी इस बार ऐसे अंक देखे गए हैं। एनटीए ने इस पर सफाई दी कि कुछ अभ्यर्थियों को समय की कमी के कारण ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं।

एनटीए के इस ग्रेस मार्क्स तर्क ने छात्रों और शिक्षाविदों के बीच और अधिक संदेह पैदा किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ग्रेस मार्क्स का प्रावधान सामान्य नहीं है और इसके पीछे की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

पेपर लीक का मामला

नीट परीक्षा के दौरान बिहार की राजधानी पटना से पेपर लीक होने की खबरें सामने आई थी। इस मामले में 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। खबर ये थी कि प्रश्न पत्र और उसके उत्तर परीक्षा से पहले ही कई छात्रों को उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद, NTA ने पूरे देश में सभी परीक्षा केंद्रों का परिणाम जारी कर दिया, जिससे छात्रों में असंतोष बढ़ गया है।

एनटीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस

NTA ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर परीक्षा संचालन और परिणामों पर उठे सवालों का जवाब दिया था। NTA ने स्पष्ट किया था कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था और पेपर लीक की घटनाओं का परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रेस मार्क्स केवल उन छात्रों को दिए गए, जिन्होंने परीक्षा के दौरान तकनीकी कठिनाइयों का सामना किया।

जनहित याचिकाएँ और छात्र विरोध

नीट 2024 के परिणामों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में जनहित याचिकाएँ (PIL) दाखिल की गई हैं और देश भर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय, मद्रास उच्च न्यायालय और कलकाता उच्च न्यायालय में नीट 2024 की शुचिता और परिणामों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए याचिकाएँ दाखिल की गई हैं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एनटीए ने परीक्षा संचालन में गंभीर चूक की है और परिणामों में पारदर्शिता की कमी है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। छात्रों का आरोप है कि एनटीए ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिससे उनका भविष्य खतरे में पड़ गया है।

मीडिया की भूमिका

मीडिया का ध्यान अधिकतर राजनीतिक खबरों पर केंद्रित रहता है, जबकि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया जाता है। नीट 2024 के इस विवाद पर भी मुख्यधारा के मीडिया ने उतनी गंभीरता से रिपोर्टिंग नहीं की, जितनी अपेक्षित थी।

मीडिया का ध्यान शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से हटकर राजनीतिक विवादों पर अधिक रहता है। शिक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर करने और सुधार की दिशा में काम करने की बजाय, मीडिया अक्सर विवादास्पद राजनीतिक घटनाओं को प्राथमिकता देता है।

निष्कर्ष और आगे की राह

नीट 2024 के परिणाम और एनटीए की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाए हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि एनटीए अपनी प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा करे और परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करे। सरकार और शैक्षिक संस्थाओं को मिलकर परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

शिक्षा का स्तर और परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि प्रत्येक छात्र को न्यायपूर्ण और समान अवसर मिल सके। शिक्षा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली विश्वसनीय और पारदर्शी हो, जिससे हर छात्र को समान अवसर और न्याय मिले।

नीट 2024 की विवादास्पद स्थिति ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में सुधार की कितनी आवश्यकता है। यह समय की माँग है कि हम इन खामियों को सुधारें और एक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय शिक्षा प्रणाली का निर्माण करें। यह हमारे युवाओं और देश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

रजत शर्मा को लेकर फैलाया झूठ, अब कार्रवाई होगी: इंडिया TV ने कॉन्ग्रेस नेताओं को दिया करारा जवाब, कहा- इस बार सीमा लाँघ दी

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक, जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने मशहूर पत्रकार रजत शर्मा पर ऑन एयर गाली देने का आरोप लगाते हुए फर्जी खबरें फैलाने की कोशिश की, जिसके बाद इंडिया टीवी ने मंगलवार (11 जून 2024) को इन नेताओं को चेतावनी देते हुए कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है।

कॉन्ग्रेस के तीनों नेताओं को चेताते हुए इंडिया टीवी की लीगल हेड रितिका तलवार ने बयान जारी किया, “मैं आपको भारत के सबसे सम्मानित पत्रकार और टीवी एंकर रजत शर्मा की ओर से लिख रही हूँ, जो चार दशकों से इस पेशे में हैं और उनकी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा बहुत अधिक है। रजत शर्मा ऑन एयर और ऑफ एयर दोनों जगह अपने सुसंस्कृत और सभ्य व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। दुनिया भर के टेलीविजन दर्शक उनकी विनम्र और सौम्य एंकरिंग शैली की तारीफ करते हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “हमने सोशल मीडिया पर आपके पोस्ट देखे हैं, जिसमें आपने रजत शर्मा पर ऑन एयर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आपके द्वारा अपने पोस्ट में लगाए गए आरोप बिल्कुल झूठे हैं और उनका कोई आधार नहीं है। वे दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक हैं और स्पष्ट रूप से फर्जी खबरें हैं। आपने ऊँची प्रतिष्ठा वाले व्यक्तित्व पर झूठा आरोप लगाकर सार्वजनिक शालीनता की सभी सीमाओं को लाँघ दिया है। हम इस पर आगे की कार्रवाई करने के लिए कानूनी सलाह ले रहे हैं।”

इस वार्निंग वाले पोस्ट में आगे लिखा है, “इस बीच हमें पता चला है कि आप प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बार फिर से वही बेबुनियाद, झूठी और अपमानजनक खबरें फैलाकर इस अकल्पनीय स्थिति को और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हम आपको चेतावनी देते हैं कि आपको ऐसा करने से बचना चाहिए। हम दोहराते हैं कि रजत शर्मा ने निजी या सार्वजनिक जीवन में कभी भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है। आपके द्वारा गैर-मौजूद और काल्पनिक बातों से निकाले गए निष्कर्ष अपने आप में अपमानजनक हैं। हम आगे कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।” रितिका तलवार ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता इस मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और रजत शर्मा के बारे में झूठा दावा करने की कोशिश करते रहेंगे।

इंडिया टीवी के ऑफिसियल एक्स हैंडल के इस पोस्ट को कोट करते हुए रजत शर्मा ने भी अपने एक्स हैंडल से उसे रीट्वीट किया और सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली सामग्रियों को खुद पर हमला करार दिया।

बता दें कि सोमवार (10 जून 2024) को कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आरोप लगाया कि रजत शर्मा ने लाइव डिबेट के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की। उन्होंने ट्वीट किया, “पत्रकारिता में इससे ज़्यादा घटिया और क्या हो सकता है? रजत शर्मा, क्या आपके पास कोई जवाब है?”

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने इस निराधार दावे को और आगे बढ़ाया। पवन खेड़ा ने ट्वीट किया, “यह अत्यंत निंदनीय है कि एक महिला नेत्री से एक वरिष्ठ संपादक इस तरह के अपशब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। रजत शर्मा, आप इस बारे में क्या कहेंगे?”

जयराम रमेश ने भी इस झूठ को आगे बढ़ाया। जयराम रमेश ने इस पर लिखा, “रजत शर्मा एक प्रसिद्ध मीडिया व्यक्तित्व हैं। उनके अपने राजनीतिक झुकाव हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस की एक प्रमुख प्रवक्ता, जो एक महिला हैं, के लिए इस तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। इस मामले में बिना शर्त सार्वजनिक माफी की तत्काल आवश्यकता है।”

हालाँकि अब इंडिया टीवी और रजत शर्मा ने इस मामले को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है कि वो जल्द ही कॉन्ग्रेस के इन तीनों नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

NEET परीक्षा पास अभ्यर्थियों की काउंसलिंग पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, परीक्षा कराने वाले NTA से माँगा जवाब: अनियमितता और पेपर लीक को लेकर दायर हैं याचिकाएँ

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 जून 2024) को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) अंडरग्रेजुएट (UG) परीक्षा 2024 में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों के दाखिले के लिए काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालाँकि, न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने एवं पेपर लीक जाँच की माँग वाली याचिकाओं में से एक पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अवकाश पीठ ने मई 2024 में आयोजित NEET की परीक्षा को रद्द करने और पेपर लीक की जाँच की माँग करने वाली याचिकाओं में से एक पर नोटिस जारी किया है और NTA से जवाब माँगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 8 जुलाई 2024 को होगी।

मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अवकाश पीठ ने कहा, “हम काउंसलिंग नहीं रोकेंगे। अगर आप आगे बहस करेंगे तो हम इसे खारिज कर देंगे।” दरअसल, न्यायालय इस वर्ष पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के कारण NEET-UG 2024 को रद्द करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

इसी तरह की याचिकाएँ दिल्ली और कलकत्ता उच्च न्यायालय सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों में भी लंबित हैं। इस संबंध में आंध्र प्रदेश में भी एक याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में से एक में यह उल्लेख किया गया है कि पटना में पेपर लीक हुआ था और राजस्थान में उम्मीदवारों को गलत प्रश्नपत्र दिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि 4 जून 2024 को प्रकाशित NEET के परिणामों में असाधारण रूप से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को शत-प्रतिशत अंक मिले हैं। अभ्यर्थियों ने समय की हानि के लिए छात्रों को प्रतिपूरक अंक देने में अनियमितता का आरोप लगाया है। दरअसल, 67 टॉपर्स, ग्रेस मॉर्क्स, एक ही सेंटर से कई टॉपर्स होने की वजह से NTA शक के घेरे में आ गया है।

इससे पहले 17 मई 2024 को भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ अध्यक्षता में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा तीन सदस्यीय पीठ ने NEET-UG 2024 के परिणामों के प्रकाशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

बताते चलें कि इस साल नीट परीक्षा के लिए 9 फरवरी से 10 अप्रैल 2024 तक पंजीकरण हुए थे। इसमें कुल 24 लाख 6 हजार 79 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। 5 मई 2024 को हुई इसकी परीक्षा में कुल 23 लाख 33 हजार 297 परीक्षार्थी सम्‍मलित हुए थे। नीट परीक्षा के 4 जून को घोषित किए गए नतीजों में कुल 13 लाख 16 हजार 268 अभ्‍यर्थी पास हुए हैं।

नहीं कही यौन उत्पीड़न की बात, सबने गलत समझा: BJP नेता अमित मालवीय पर आरोप लगाने वाले शांतनु सिन्हा ने दी सफाई, बोले- कॉन्ग्रेस है सबसे गंदी पार्टी

भाजपा नेता अमित मालवीय पर कथिततौर पर आरोप लगाए जाने के बाद चर्चा में आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यकर्ता शांतनु सिन्हा ने मानहानि नोटिस मिलने के बाद अपने बयान पर सफाई दी है। मंगलवार (11 जून 2024) को पेश की गई अपनी सफाई में उन्होंने अपने बयान पर दुःख प्रकट किया, लेकिन इसे वापस नहीं लिया। इसी के साथ उन्होंने खुद को अमित मालवीय का शुभचिंतक साबित करने की कोशिश की है। शांतनु ने अपनी लिखी पोस्ट में कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस उनके पोस्ट को भाजपा के खिलाफ हथियार बनाने की कोशिश कर रही है।

अपना परिचय कोलकाता हाईकोर्ट के वकील के तौर पर देते हुए शांतनु सिंहा ने कॉन्ग्रेस को देश की सबसे घटिया और भ्रष्ट राजनैतिक पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि बंगाली भाषा में लिखे गए उनके पोस्ट को कॉन्ग्रेस पार्टी अमित मालवीय और भाजपा के खिलाफ नफरत फैलाने का हथियार बना रही है।

शांतनु ने दावा किया कि उन्होंने कहीं भी अमित मालवीय द्वारा महिलाओं के यौन शोषण जैसी बात नहीं कही है। उनका कहना कि उन्होंने अपने पोस्ट में सिर्फ आशंका जताई थी कि कहीं कैलाश विजयवर्गीय, प्रदीप जोशी, सिद्धार्थ नाथ सिंह और शिव प्रसाद की तरह अमित मालवीय को भी हनी ट्रैप के किसी केस में न फँसा दिए जाएँ।

इसी पोस्ट के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने मीडिया के आगे भाजपा नेता अमित मालवीय पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्हें महिला का यौन उत्पीड़न करने वाला तक कहा था। बाद में अमित मालवीय ने इस संबंध में शांतनु को नोटिस भेजा और नोटिस के बाद शांतनु ने बताया कि उन्होंने जो पोस्ट में आशंका जताई थी कि अमित मालवीय को फँसाया जा सकता वो इसलिए थी क्योंकि CM ममता बनर्जी हनी ट्रैप वाली क्लिप जारी करने की धमकी दे रहीं थीं। उन्होंने कहा कि वो सिर्फ ये बोलना चाहते थे कि मालवीय को फँसाया जा सकता है।

उन्होंने आगे लिखा कि भाजपा में किसी ने उनकी बातों का सही अर्थ खोजने का प्रयास किए बिना ही उनको गलत मान लिया। खुद को मिली मानहानि की नोटिस के पीछे शांतनु सिन्हा ने प्रेस वालों के हवाले से भाजपा नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय का हाथ बताया। इस नोटिस को सिन्हा ने खुद पर दबाव बनाने की साजिश बताया है।

शांतनु ने अपने पास हर सवाल का जवाब होने के साथ कई ऑडियो क्लिप भी होने का दावा किया है। उन्होंने खुद को कानूनी लड़ाई के लिए भी तैयार बताया है। हालाँकि उन्होंने फिर से दोहराया कि उनका मकसद अमित मालवीय को बदनाम करना कतई नहीं था। सिन्हा ने अपनी पोस्ट की गलत व्याख्या करने वालों को भी बाज आ जाने की नसीहत दी। अंत में उन्होंने कहा कि अगर उनकी पोस्ट से अमित मालवीय की भावना को ठेस पहुँची है या भाजपा को नुकसान हुआ है तो वो दिल से दुःख प्रकट करते हैं। लेकिन वो बयान वापस नहीं लेंगे क्योंकि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा।

गौरतलब है कि इस से पूर्व खुद को सम्बोधित कर के 7 जून को लिखे गए शांतनु सिन्हा के लेख से आहत हो कर भाजपा के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने उन्हें 10 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा था। इस नोटिस में पोस्ट को तत्काल हटाने और बिना शर्त माफ़ी माँगने के लिए भी कहा गया था।

मंदिर से लूटी गई थी 500 साल पुरानी हिंदू संत की मूर्ति… ब्रिटेन में मिली: भारत के सबूत दिखाने पर ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी देने को हुई तैयार

ब्रिटेन की ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी भारत की एक 500 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर को वापस लौटाने पर राजी हो गई है। यह धरोहर दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संत तिरुमंकई अलवर की प्रतिमा है। कांस्य की बनी यह मूर्ति ऑक्सफॉर्ड के एशमोलियन म्यूजियम (Ashmolean Museum) में रखी गई है। लगभग 50 साल पहले यह मूर्ति तमिलनाडु के एक मंदिर से गायब हो गई थी। भारत सरकार ने 4 साल पहले ही इस वापस पाने के लिए जरूरी कागजातों सहित ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी को आवेदन भेज दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मूर्ति को भारत में लाने से पहले अभी चैरिटी आयोग का एप्रूवल बाकी है। कांस्य की जिस मूर्ति को वापस लौटाने पर एशमोलियन म्यूजियम (Ashmolean Museum) ने सहमति जताई है वह 60 सेंटीमीटर लम्बी है। यह मूर्ति 16वीं सदी के प्रख्यात तमिल कवि और संत तिरुमंकई अलवर की है। यह मूर्ति यहाँ ये डॉ. जे.आर. बेलमोंट नाम के कलेक्टर के माध्यम से पहुँची थी। साल 1967 में इस मूर्ति को सोथबी के नीलामी घर से ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय में ले लिया गया था।

नंवबर 2019 में रिसर्च कर रहे छात्र ने इस ऐतिहासिक मूर्ति के ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी के म्यूजियम में होने का दावा किया था। उसने अपने दावों के समर्थन में सबूत भी दिए थे। इन्हीं सबूतों के आधार पर फरवरी 2020 में मूर्ति शाखा की CID ने ब्रिटेन स्थित भारतीय दूतावास को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रेषित की। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि ऑक्सफॉर्ड के एशमोलियन म्यूजियम में मौजूद संत तिरुमंकाई अलवर की प्रतिमा लगभग 50 साल पहले तमिलनाडु के कुम्भाकोणम नाम की जगह पर बने एक मंदिर से गायब हुई थी।

माना जा रहा है कि इस मूर्ति को मंदिर से लूटा गया था। भारतीय दूतावास के आवेदन पर विचार करते हुए 11 मार्च 2024 को एशमोलियन म्यूजियम ने एक बयान जारी किया। इस बयान में म्यूजियम ने भारत की तरफ से पेश किए सबूतों को सही माना था। तब म्यूजियम ने बताया था कि मामले को अंतिम निर्णय के लिए चैरिटी आयोग के आगे भेजा जा रहा है। माना जा रहा है कि चैरिटी आयोग जल्द ही इस मामले पर फैसला लेगा। बताते चलें कि पिछले एक दशक में भारत विदेशों से अपनी कई प्रचीन धरोहरें वापस लाने में सफल रहा है।

नहीं हो रहा विश्वास… सब बर्बाद हो गया: रियासी आतंकी हमले में मारे गए एक परिवार के 4 लोग, 2 साल के टीटू ने भी दम तोड़ा; परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

जम्मू-कश्मीर में शिवखोड़ी दर्शन करके कटरा लौट रहे श्रद्धालुओं पर रियासी में हुए हमले ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। हमले में कुछ लोगों ने अपने घर के सदस्यों को खोया तो कुछ पूरे परिवार सहित उजड़ गए। सामने आई जानकारी के अनुसार, हमले में एक परिवार के चार सदस्य मारे गए हैं। ये परिवार जयपुर से था।

डिप्टी कमीश्नर ऑफ पुलिस अमित कुमार ने बताया कि आतंकी हमले में जयपुर निवासी 42 साल के राजेंद्र सैनी, उनकी पत्नी ममता सैनी, उनकी रिश्तेदार 30 साल की पूजा सैनी और उनका 2 साल का बेटा टीटू (कुछ रिपोर्ट में नाम लेवांश) मारा गया है। वहीं पूजा के पति पवन को गंभीर चोटे आई थीं, जिन्हें इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

पूजा सैनी के पिता ओम प्रकाश सैनी ने मीडिया से बात करते हुए परिवार की स्थिति को बताया। उन्होंने कहा राजेंद्र और ममता के तीन बच्चे हैं- वर्षा (22), राहुल (19) और लकी (17) का है। उन्हें अभी नहीं पता है कि उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्हें कहा गया है कि उनके माता-पिता का इलाज अस्पताल में चल रहा है। उन्हें आस है कि शायद उनके माता-पिता ठीक होकर लौट आएँगे।

इसी तरह बलरामपुर के बंशी वर्मा हैं। मजदूरी करके घर खर्च चलाने वाले बंशी का परिवार अयोध्या घूमने के बाद जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गया था। बंशी बताते हैं कि उनकी अपनी बहन रूबी वर्मा से बात 6 जून को हुई थी। इसके बाद 9 को खबर आई कि वो जिस बस में थे उसपर हमला हो गया है। उनके साथ बलरामपुर का एक अन्य परिवार भी था। वो भी आतंकी हमले का शिकार हुए हैं।

अब बलरामपुर के डीएम अरविंद सिंह ने बताया कि जिले के दोनों परिवारों के 10 लोग हमले में घायल हुए हैं। सबका इलाज जम्मू के अस्पताल में हो रहा है। उतरौला और बलरामपुर के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को पीड़ित परिवारों को हर सहायता देने को बोला गया है।

इसी प्रकार यूपी के गोंडा जिले के भिखारीपुर गाँव से 8 सदस्य वैष्णो देवी गए थे। वहीं गोरखपुर के 17 लोग जम्मू में माता के दर्शन करने गए थे। बताया जा रहा है कि इन 17 लोगों में कुछ कटरा ही रुक गए थे। वहीं कुछ शिवखोड़ी निकले थे। जाते समय किसी के मन में भी नहीं आया था कि ऐसा हो सकता है।

खबर सुनने के बाद उनके अपने सन्न हैं। कोई अपनी आपबीती सुना रहा है तो कोई बताने को ही नहीं है कि 9 जून को क्या हुआ। कुछ चश्मदीद हैं जिन्होंने बताया है कि कैसे उस दिन आतंकियों ने नकाब पहनकर पूरी बस पर ताबड़तोड़ गोलियाँ दागीं और उसके बाद बस खाई में गिराकर गोलियाँ दागते रहे ताकि कोई श्रद्धालु जिंदा न बचे। चश्मदीदों के अनुसार, उन्होंने खुद को लाश जैसे रखा ताकि आतंकी को विश्वास हो जाए सब मर गए हैं।